अपोलो माइक्रो सिस्टम्स ने नई डिफेंस कंपनी में 34% हिस्सेदारी खरीदी, वैज्ञानिक वीके सारस्वत करेंगे अगुवाई

Apollo Micro Systems: डिफेंस और एयरोस्पेस सेक्टर की कंपनी Apollo Micro Systems ने नई रक्षा तकनीक कंपनी ShauryAstra Defence Systems में 34% हिस्सेदारी खरीदी है। कंपनी ने इसके लिए ₹34,000 का निवेश किया है। ShauryAstra का फोकस ऐसी रक्षा तकनीकों पर रहेगा, जिनकी जरूरत भारतीय सेना को है, लेकिन अभी उनके स्वदेशी समाधान उपलब्ध नहीं हैं।

ShauryAstra में 34% हिस्सेदारी

Apollo Micro Systems ने ShauryAstra के 3,400 इक्विटी शेयर खरीदे हैं। इनकी फेस वैल्यू ₹10 प्रति शेयर है। इस निवेश के बाद ShauryAstra में Apollo Micro Systems की हिस्सेदारी 34% हो गई है।

ShauryAstra को 21 अगस्त 2026 को शामिल किया गया था। अब यह Apollo Micro Systems की एसोसिएट कंपनी बन गई है।

डॉ. वी.के. सारस्वत का मिलेगा अनुभव

नई कंपनी का वैज्ञानिक नेतृत्व डॉ. वी.के. सारस्वत करेंगे। वह DRDO के पूर्व महानिदेशक और रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के पूर्व सचिव रह चुके हैं। वह रक्षा मंत्री के पूर्व वैज्ञानिक सलाहकार भी रहे हैं।

डॉ. सारस्वत भारत के कई बड़े रक्षा कार्यक्रमों से जुड़े रहे हैं। इनमें पृथ्वी, धनुष, प्रहार और अग्नि-5 मिसाइल कार्यक्रम शामिल हैं। वह भारत के बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस कार्यक्रम, तेजस और INS अरिहंत से भी जुड़े रहे हैं।

फोकस होगा अगली पीढ़ी की रक्षा तकनीक पर

ShauryAstra संपूर्ण हथियार प्रणालियों, लंबी दूरी की प्रणालियों और मानव रहित प्लेटफॉर्म्स पर काम करेगी। कंपनी का फोकस एडवांस्ड डिफेंस टेक्नोलॉजी विकसित करने पर रहेगा।

खास बात यह है कि कंपनी सिर्फ मौजूदा जरूरतों पर काम नहीं करेगी। वह भविष्य के युद्धक्षेत्र में आने वाली तकनीकी जरूरतों और संभावित कमियों की भी पहचान करेगी।

Apollo की मौजूदा क्षमता का मिलेगा फायदा

Apollo Micro Systems पिछले चार दशक से डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबार में है। कंपनी मिशन-क्रिटिकल इलेक्ट्रॉनिक्स, एवियोनिक्स, रग्ड कंप्यूटिंग, फ्यूज, एक्ट्यूएटर्स और वेपन इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में काम करती है।

ShauryAstra रिसर्च और सिस्टम डिजाइन पर ज्यादा फोकस करेगी। वहीं Apollo Group की इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग और सिस्टम इंटीग्रेशन क्षमता का इस्तेमाल उत्पादन के लिए किया जा सकेगा।

कंपनी का लक्ष्य क्या है?

Apollo Micro Systems अब सिर्फ कंपोनेंट और सबसिस्टम बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहती। कंपनी संपूर्ण स्वदेशी हथियार प्रणालियों और प्लेटफॉर्म्स के विकास में बड़ी भूमिका बनाना चाहती है।

कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर बी. करुणाकर रेड्डी के मुताबिक ShauryAstra इसी दिशा में अगला कदम है। यह पहल भारत के स्वदेशी रक्षा उत्पादन और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के मुताबिक भी है।

Apollo Micro Systems के शेयर NSE पर 0.14% गिरकर ₹384 प्रति शेयर पर बंद हुए।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Sugar Price: अगले 7 दिनों में चीनी की बढ़ती कीमतें क्या करवट लेंगी? ISMA ने पैनिक बाइंग को लेकर ये जानकारी दी

Sugar Price in India: देश में चीनी की बढ़ती कीमतें लोगों की जेब पर भारी पड़ रही हैं। त्योहारों का मौसम होने की वजह से लोग पहले ही खर्चों से घिरे हैं और ऊपर से ये कीमतें उन्हें और परेशान कर रही हैं। इस बीच चीनी उद्योग की सर्वोच्च संस्था इंडियन शुगर एंड बायो एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) का बड़ा बयान सामने आया है। इसमा ने स्पष्ट किया है कि भारत में चीनी की कोई कमी नहीं है और घरेलू बाजार में इसकी उपलब्धता सामान्य है। संस्था का अनुमान है कि सरकार द्वारा बिना शुल्क आयात की अनुमति देने और व्यापारियों व थोक उपभोक्ताओं पर स्टॉक होल्डिंग लिमिट लागू करने के फैसलों के बाद अगले कुछ दिनों में चीनी के खुदरा दामों में गिरावट देखने को मिलेगी।

खुदरा कीमतों का मौजूदा गणित और बाजार का हाल

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश भर में चीनी की औसत खुदरा कीमत 63.05 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई। ये एक महीने पहले 48.73 रुपये किलोग्राम थी। यानी एक महीने में चीनी की कीमतों में करीब 29 फीसदी इजाफा देखा गया है। सोमवार को चीनी का अधिकतम खुदरा मूल्य 75 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया जबकि इसका मॉडल प्राइस 65 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बना हुआ है।

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक इसमा अध्यक्ष नीरज शिरगावकर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि कीमतों में आई यह तेजी किसी एक वजह से नहीं, बल्कि कई कारणों के एक साथ आने से हुई है। इसमें व्यापारियों और थोक खरीदारों द्वारा की गई सट्टा खरीदारी (पैनिक बाइंग) और अनुमान से कम उत्पादन मुख्य वजहें हैं। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि भारत के पास चीनी की कोई कमी नहीं है और देश में उत्पादन और स्टॉक की स्थिति बुनियादी रूप से बेहद मजबूत है।

सट्टा खरीदारी और पैनिक बाइंग ने बनाई आर्टिफिशियल कमी

इसमा अध्यक्ष ने बताया कि कीमत बढ़ने की सबसे बड़ी वजह सट्टा खरीदारी रही। कारोबारियों के एक वर्ग ने बाजार में चीनी की सप्लाई की किल्लत का भ्रामक माहौल पैदा किया। इसके जवाब में बड़े थोक खरीदारों ने डेढ़ दो महीने का अडवांस स्टॉक जमा करना शुरू कर दिया।

नीरज शिरगावकर ने कहा कि इस सट्टा खरीदारी की वजह से चीनी बाजार में सर्कुलेशन से बाहर होकर गोदामों में बंद हो गई। इसी वजह से बाजार में एक आर्टिफिशियल तंगी की स्थिति पैदा हो गई। उन्होंने यह भी कहा कि उद्योग पर ex-mill कीमतें बढ़ाने या कृत्रिम किल्लत पैदा करने का आरोप लगाना गलत है। हालांकि कुछ मिलों द्वारा स्टॉक रोके जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसकी जांच सरकार कर रही है।

देश में उत्पादन, खपत और ओपनिंग स्टॉक का आंकड़ा भी जानिए

मार्केटिंग वर्ष 2025-26 (अक्टूबर-सितंबर) में एथेनॉल के लिए इस्तेमाल की गई चीनी को घटाने के बाद देश का शुद्ध चीनी उत्पादन करीब 279 लाख टन रहने का अनुमान है। इस सीजन की शुरुआत में 50 लाख टन का ओपनिंग स्टॉक मौजूद था। देश में चीनी की वार्षिक घरेलू मांग लगभग 280 से 285 लाख टन है। ये भी जानना जरूरी है कि सरकार द्वारा निर्यात पर प्रतिबंध लगाने से पहले देश से 8 लाख टन चीनी का निर्यात किया जा चुका था।

इसमा का अनुमान है कि सितंबर के अंत में देश के पास लगभग 35 लाख टन का क्लोजिंग स्टॉक बचेगा। एथेनॉल में डाइवर्ट की गई चीनी का हिसाब लगाने के बाद भी यह क्लोजिंग स्टॉक सामान्य घरेलू मांग को पूरा करने के लिए एक काफी सेफ बफर है। मौसम के असर, कम पैदावार और महाराष्ट्र में पेराई दर और उत्तर प्रदेश में रेड-रॉट की समस्या की वजह से इस सीजन में ग्रॉस चीनी उत्पादन (एथेनॉल डाइवर्जन से पहले) प्रारंभिक अनुमान 345 लाख टन से घटकर 309 लाख टन रह गया।

कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने 10 लाख टन कच्चे चीनी (रॉ शुगर) के बिना शुल्क आयात की अनुमति दी है और डीलरों तथा थोक उपभोक्ताओं पर स्टॉक सीमा तय की है। इसमा अध्यक्ष ने कहा कि सरकार का यह कदम बाजार में घबराहट को रोकने और सेंटिमेंट को स्टेबल करने के लिए उठाया गया एक एहतियाती कदम है। इससे ये नहीं समझा जाना चाहिए कि चीनी की किल्लत है। संस्था ने मांग की है कि व्यापारियों के लिए मौजूदा 400 टन की स्टॉक सीमा को घटाकर 200 टन किया जाना चाहिए।

रिपोर्ट के मुताबिक ये फैसले लेने के बाद पिछले कुछ दिनों में चीनी की एक्स मिल कीमतों में गिरावट आई है। दो प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में एक्स मिल कीमतें फिलहाल 55 से 56 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास आ गई हैं। आने वाले दिनों में खुदरा दामों में भी और नरमी आने की पूरी उम्मीद है।

एथेनॉल डाइवर्जन और नए पेराई सीजन की तैयारी

इसमा अध्यक्ष ने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया कि एथेनॉल बनाने के लिए चीनी का उपयोग किए जाने की वजह से कीमतें बढ़ी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम खाने योग्य चीनी के साथ कंपीटिशन नहीं कर रहा है और न ही यह कीमत बढ़ने के लिए जिम्मेदार है। इस वर्ष तीसरी तिमाही तक लगभग 29 लाख टन चीनी एथेनॉल के लिए डाइवर्ट की गई है और पूरे सीजन में यह आंकड़ा 30 लाख टन रहने की उम्मीद है। ये ऐतिहासिक रूप से 20 से 40 लाख टन के दायरे में ही है। इसके अलावा 2025-26 में एथेनॉल आपूर्ति में चीनी क्षेत्र की हिस्सेदारी घटकर 25 प्रतिशत रह गई है। इसका बड़ा हिस्सा अनाज क्षेत्र से आ रहा है।

अक्टूबर से शुरू होने वाले अगले मार्केटिंग वर्ष 2026-27 के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि ISMA और NFCSF पेराई सत्र की शुरुआत को 10 से 15 दिन पहले करने पर काम कर रहे हैं। तमिलनाडु और कर्नाटक में विशेष पेराई पहले से ही जारी है। नए सीजन की जल्दी शुरुआत और आयातित चीनी के आने से अक्टूबर में चीनी का उत्पादन बढ़कर लगभग 10 लाख टन होने की उम्मीद है (जो सामान्यतः 4 लाख टन रहता है)। इससे त्योहारों के सीजन में मांग के पीक पर रहने के दौरान बाजार में नई आपूर्ति उपलब्ध हो जाएगी। आयातित रॉ शुगर अक्टूबर तक भारत पहुंचने की संभावना है।

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Gold Price Today: 5 महीने के हाई पर सोना, दिल्ली में ₹1.64 लाख के पार; चांदी ₹3500 उछली

Gold Price Today: दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोमवार, 24 अगस्त को सोने की कीमत 5 महीने से ज्यादा के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। 24 कैरेट वाला सोना ₹900 बढ़कर ₹1,64,400 प्रति 10 ग्राम हो गया। शुक्रवार को इसका भाव ₹1,63,500 प्रति 10 ग्राम था।

5 महीने के हाई पर सोना

ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के मुताबिक, सोना आखिरी बार इस स्तर के आसपास 9 मार्च को था। उस समय इसका भाव ₹1,64,300 प्रति 10 ग्राम था।

सोने में तेजी के पीछे वैश्विक बाजार में मजबूत संकेत और सुरक्षित निवेश की मांग को अहम वजह माना जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है।

चांदी भी लगातार तीसरे दिन चढ़ी

चांदी की कीमत में भी सोमवार को तेजी रही। यह लगातार तीसरा कारोबारी सत्र था, जब चांदी महंगी हुई। इसकी कीमत ₹3,500 बढ़कर ₹2,53,500 प्रति किलो हो गई।

पिछले सत्र में चांदी ₹2,50,000 प्रति किलो पर बंद हुई थी। यह स्तर आखिरी बार 17 अप्रैल को देखा गया था, जब चांदी ₹2,53,000 प्रति किलो पर थी।

कमजोर डॉलर से मिला सोने को सहारा

Lemonn Markets Desk के रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने कहा कि घरेलू बाजार में सोने की तेजी के पीछे कमजोर अमेरिकी डॉलर और सुरक्षित निवेश की मांग बड़ी वजह रही। अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने से निवेशकों का रुझान सुरक्षित एसेट्स की तरफ बढ़ा है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमत बढ़ी। स्पॉट गोल्ड 42.45 डॉलर यानी करीब 1% बढ़कर 4,646.54 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। वहीं चांदी करीब 69 डॉलर प्रति औंस पर स्थिर रही।

अब महंगाई पर होगी नजर

विश्लेषकों के मुताबिक सोने की अगली चाल सिर्फ भू-राजनीतिक तनाव से तय नहीं होगी। अब महंगाई और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख पर भी बाजार की नजर रहेगी।

Kotak Securities की AVP Commodity Research कायनात चेनवाला के मुताबिक, ईरान तनाव के कारण अगर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो फेडरल रिजर्व के सामने महंगाई को लेकर चुनौती बढ़ सकती है। बाजार यह देखेगा कि फेड इस बढ़ोतरी को अस्थायी मानता है या इससे महंगाई का बड़ा जोखिम पैदा होता है।

FD vs Lump Sum: ₹10 लाख की FD या ₹10 लाख का लंप सम, 10 साल बाद किसमें ज्यादा पैसा बनेगा?

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Lumino Industries IPO: 27 अगस्त से खुलेगा ₹700 करोड़ का आईपीओ, GMP दे रहा 58% मुनाफे का संकेत

Lumino Industries IPO: कोलकाता की कंडक्टर, पावर केबल और इलेक्ट्रिकल वायर बनाने वाली कंपनी Lumino Industries का IPO 27 अगस्त को खुलेगा। कंपनी इस इश्यू से करीब ₹700 करोड़ जुटाने की तैयारी में है। IPO का प्राइस बैंड ₹78 से ₹82 प्रति शेयर तय किया गया है।

इसमें ₹500 करोड़ का फ्रेश इश्यू होगा। वहीं करीब 2.44 करोड़ शेयरों का OFS होगा। IPO 31 अगस्त को बंद होगा।

Lumino Industries IPO की पूरी डिटेल

पैमानाडिटेल
IPO खुलने की तारीख27 अगस्त 2026
IPO बंद होने की तारीख31 अगस्त 2026
फेस वैल्यू
₹5 प्रति इक्विटी शेयर

IPO प्राइस बैंड₹78 से ₹82 प्रति शेयर
इश्यू साइजकरीब ₹700 करोड़
फ्रेश इश्यूकरीब ₹500 करोड़
ऑफर फॉर सेल (OFS)करीब 2,43,90,242 इक्विटी शेयर

Lumino Industries IPO का GMP

ग्रे मार्केट में Lumino Industries के IPO को शानदार रिस्पॉन्स मिल रहा है। इनवेस्टरगेन के मुताबिक, Lumino Industries का लेटेस्ट GMP ₹48 है।

यह अपर प्राइस बैंड से 58.54% के लिस्टिंग गेन का संकेत देता है। हालांकि, GMP लिस्टिंग गेन की गारंटी नहीं होता और लगातार बदलता भी रहता है।

प्रमोटर बेचेंगे ₹200 करोड़ के शेयर

IPO में ₹500 करोड़ का फ्रेश इश्यू होगा। इसके अलावा प्रमोटर देवेंद्र गोयल और उनके बेटे जय गोयल ₹200 करोड़ तक के शेयर OFS के जरिए बेचेंगे।

कंपनी ने पहले ₹1,000 करोड़ का IPO लाने की योजना बनाई थी। तब ₹600 करोड़ का फ्रेश इश्यू और ₹400 करोड़ का OFS प्रस्तावित था। बाद में इश्यू का आकार घटाकर करीब ₹700 करोड़ कर दिया गया।

IPO से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल

Lumino Industries फ्रेश इश्यू से मिलने वाली रकम का बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने में लगाएगी। कंपनी करीब ₹337 करोड़ का इस्तेमाल कर्ज के भुगतान के लिए करेगी।

जुलाई 2026 तक कंपनी पर कुल ₹1,856.7 करोड़ का कर्ज था। इसके अलावा ₹15 करोड़ मशीनरी और उपकरण खरीदने, सिविल वर्क और मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के विकास पर खर्च किए जाएंगे।

कंपनी का कारोबार क्या है?

Lumino Industries कंडक्टर, पावर केबल और दूसरे स्पेशलाइज्ड इलेक्ट्रिकल प्रोडक्ट बनाती है। कंपनी के ग्राहक बड़े EPC प्लेयर हैं।

इनमें Kalpataru Projects International, Jackson और R S Infraprojects जैसे नाम शामिल हैं। कंपनी अमेरिका, माली, बुर्किना फासो, नेपाल, बांग्लादेश, केन्या, घाना, रवांडा और इथियोपिया जैसे देशों में भी अपने प्रोडक्ट बेचती है।

कारोबार का हाल कैसा है?

वित्त वर्ष 2025-26 में Lumino Industries का मुनाफा ₹160 करोड़ रहा। एक साल पहले यह ₹124.6 करोड़ था। यानी मुनाफे में 28.4% की बढ़ोतरी हुई। इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू भी बढ़ा।

FY26 में रेवेन्यू ₹2,041 करोड़ रहा, जो FY25 में ₹1,918 करोड़ था। यानी इसमें 6.4% की बढ़ोतरी हुई। FY26 में कंपनी की कुल बिक्री में घरेलू कारोबार की हिस्सेदारी 98% रही। वहीं वित्त वर्ष के अंत में कंपनी की ऑर्डर बुक ₹3,149.8 करोड़ थी।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Market Technicals : टेक्निकल एक्सपर्ट्स से जाने कल के लिए क्या हो ट्रेडिंग रणनीति, निफ्टी-बैंक निफ्टी में किन लेवल्स पर रहे नजर

Market Technicals : आज बाजार एक सीमित दायरे में कारोबार करता दिखा। बाजार की चाल सुस्त रही। निफ्टी 0.13% की गिरावट के साथ 24,219.05 पर और सेंसेक्स 0.22% की गिरावट के साथ 77,369.11 पर बंद हुआ। सेक्टर नजरिए से देखें तो मेटल और रियल्टी सेक्टर में बढ़त रही,जबकि डिफेंस,बैंक,सीमेंट और ऑटो सेक्टर में गिरावट देखी गई। निफ्टी 50 में सबसे ज़्यादा बढ़त जेएसडब्ल्यूस्टील, हिंडाल्को और टाटास्टील में रही। वहीं,एसबीआईलाइफ,बजाज फाइनेंस और अदानीपोर्ट्स में गिरावट रही।

पिछले कुछ ट्रेडिंग सेशन से मेटल शेयरों में तेजा देखने को मिल रही है। सप्लाई में दिक्कत,घटते स्टॉक और मज़बूत मांग के कारण स्टील,कॉपर,एल्युमीनियम और जिंक की ग्लोबल कीमतों में उछाल आया है। इसके अलावा डॉलर इंडेक्स में गिरावट से भी इस सेक्टर को सहारा मिला है। आज निफ्टी मेटल्स में 1.59% की तेजी आई।

आज हिंदुस्तान जिंक सुर्खियों में रहा क्योंकि सरकार अगले दो हफ्तो में इसमें ऑफर फ़ॉर सेल लाने की योजना पर काम कर रही है। केंद्र सरकार 1.5-2% हिस्सेदारी बेचकर लगभग 4,000-5,000 करोड़ रुपये जुटाने की सोच रही है,जो ऑफर के फ़ाइनल साइज़ और कीमत पर निर्भर करेगा। आज हिंदुस्तान जिंक 2.2% बढ़त के साथ बंद हुआ। वहीं, पिछले 3 ट्रेडिंग सेशन में इसमें लगभग 7% की तेजी आई है।

सोने की कीमतों में तेजी से मुथूट फाइनेंस और मन्नापुरम जैसी गोल्ड फ़ाइनेंस कंपनियों को भी फायदा हुआ है। इनके शेयरों में 5.72% और 2.21% से ज्यादा की तेजी आई है। सोने की कीमतों में बढ़ोतरी से गोल्ड फ़ाइनेंस कंपनियों को फायदा हो सकता है। इससे गिरवी रखी गई संपत्ति (कोलेटरल) की वैल्यू बढ़ती है,लेंडर की सिक्योरिटी मजबूत होती है और लोन ग्रोथ को भी बढ़ावा मिल सकता है।

एंजेल वन के चीफ मैनेजर-टेक्निकल एंड डेरिवेटिव रिसर्च,ओशो कृष्ण का कहना है कि ग्लोबल मार्केट से मिले अच्छे संकेतों की वजह से भारतीय इक्विटी मार्केट में बढ़त के साथ शुरुआत हुई और बेंचमार्क इंडेक्स ने एक्सपायरी वाले हफ्ते की शुरुआत जोश के साथ की। हालांकि,बाद में फॉलोअप खरीदारी न होने से शुरुआती तेजी कमज़ोर पड़ गई और इंडेक्स नीचे आ गया,जिससे बुलिश गैप का दोबारा टेस्ट हुआ। इसके बाद, CAS सेशन के बाद निफ्टी ने नुकसान की कुछ भरपाई की और 24200 के ऊपर बंद होने में कामयाब रहा,जिससे सेशन का अंत 0.14% की मामूली गिरावट के साथ हुआ।

टेक्निकल नजरिए से देखें तो पोजीशन अभी भी अनिश्चित बनी हुई है। 20-DEMA एक बड़ी रुकावट के तौर पर सामने आ रहा है और लगातार रिजेक्शन का कारण बन रहा है। हालांकि,हाल ही में मंदी के कमजोर पड़ने के संकेतों ने रिवर्सल की उम्मीद जगाई है, लेकिन तेजी या गिरावट की रफ्तार (मोमेंटम)अभी भी धीमी है। बाजार की नजर किसी ऐसे अहम संकेत पर है जिससे खरीदारी में तेजी आए। अगर गिरावट आती है तो 24150-24100 का दायरा तत्काल सपोर्ट का काम करेगा, जबकि 24050-24000 का जोन एक मजबूत सपोर्ट जोन बना रहेगा।

ऊपर की तरफ,24300 के आसपास स्थित 20-DEMA का जोन रेजिस्टेंस का काम कर सकता है। अगर इस स्तर के ऊपर बढ़त कायम रहती है तो टेक्निकल सेटअप मजबूत होगा और आने वाले समय में 24500 के स्तर तक की रिकवरी का रास्ता खुल सकता है।

फिलहाल,सतर्कता बरतना ही समझदारी होगी। ट्रेडरों को सलाह है कि जब तक बाजार रुझान साफ न हो जाए,तब तक आक्रामक रुख न अपनाएं। अगस्त माह की एक्सपायरी के दौरान वोलैटुलिटी बढ़ने की भी आशंका है। इसलिए,ट्रेडरों के अनुशासित तरीके से रिस्क मैनेज करते हुए सीमित निवेश करना चाहिए और बाजार के अहम संकेतों पर नजर रखनी चाहिए।

SBI सिक्योरिटीज में हेड -टेक्निकल एंड डेरिवेटिव्स रिसर्च, सुदीप शाह का कहना है कि निफ्टी की गैप-अप ओपनिंग टिक नहीं पाई क्योंकि इंडेक्स पर जबरदस्त बिकवाली का दबाव बना और दिन चढ़ने के साथ यह नीचे गिरकर 0.14% की गिरावट के साथ 24219 पर बंद हुआ। डेली चार्ट पर निफ्टी ने लोअर विक के साथ एक बेयरिश कैंडल बनाई। चार्ट पर यह लोअर विक मुख्य रूप से इसलिए बना क्योंकि इंडेक्स ने दूसरे हाफ के आखिर में अपने शुरुआती नुकसान का कुछ हिस्सा रिकवर कर लिया था। इंडेक्स को अपने 20-डे EMA के आसपास रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ा और यह नीचे बंद हुआ। ADX इंडिकेटर पर DI-लगातार DI+ से ऊपर बना हुआ है,जो बुल्स पर बेयर्स के लगातार बने दबदबे को दिखाता है।

मिडकैप इंडेक्स ने एक पतली बॉडी वाली बेयरिश कैंडल बनाई,जिसके दोनों तरफ छोटी विक्स थीं। इससे पता चलता है कि इंट्राडे में कोई साफ दिशा नहीं थी। स्मॉलकैप इंडेक्स ने एक बेयरिश कैंडल बनाई जिसमें ऊपर की तरफ एक छोटी विक थी,जो ऊपरी लेवल पर प्रॉफ़िट बुकिंग को दिखाती है। प्रॉफिट बुकिंग के बावजूद, स्मॉलकैप इंडेक्स मिडकैप और लार्जकैप के मुकाबले बेहतर स्थिति में है,जैसा कि इसके संबंधित रेश्यो चार्ट में बढ़ती रेश्यो लाइन से पता चलता है।

आगे निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 24070-24050 के जोन में है। अगर निफ्टी इस जोन के नीचे टिकता है तो इसमें और कमजोरी आ सकती है और यह शॉर्ट टर्म में 23900 और फिर 23750 तक गिर सकता है। ऊपर की तरफ निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 24350-24370 के जोन में है।

Market Outlook : गिरावट के साथ बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए 25 अगस्त को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

बैंक निफ्टी आउटलुक

 सुदीप शाह का कहना है कि  बैंक निफ्टी भी गैप-अप के साथ खुला,लेकिन ऊंचे स्तरों पर टिक नहीं पाया। दिन के दौरान इसमें तेज गिरावट आई,लेकिन बाद में,खासकर दूसरे हाफ के आखिर में इसमें कुछ रिकवरी हुई और इंडेक्स ने नुकसान की कुछ भरपाई की। आखिरकार,यह 0.41% गिरकर 57526 पर बंद हुआ। डेली चार्ट पर इंडेक्स ने एक बेयरिश कैंडल बनाई है,जिसमें नीचे की तरफ एक साफ लोअर विक दिख रही है। अगस्त की शुरुआत से ही बैंक निफ्टी 1246 अंकों की रेंज में ही घूम रहा है जो बाजार में अनिश्चितता और साइडवेज रहने के संकेत है। गिरता हुआ ADX भी इस बात की पुष्टि करता है कि बाजार में कोई मजबूत दिशा वाला ट्रेंड नहीं है।

आगे बैंक निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 57100-57000 जोन में है। अगर यह इस जोन के नीचे बना रहता है,तो बैंक निफ्टी में और कमजोरी आ सकती है और यह शॉर्ट टर्म में 56600 और फिर 56200 तक टूट सकता है। ऊपर की तरफ,बैंक निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 57900-58000 जोन में है।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Tata Group Stock: टाटा ग्रुप के स्टॉक में 42% कमाई का मौका! मोतीलाल ओसवाल ने ₹1500 का टारगेट दिया

Tata Group Stock: टाटा ग्रुप की FMCG कंपनी Tata Consumer Products के शेयर को लेकर ब्रोकरेज हाउस Motilal Oswal काफी पॉजिटिव है। ब्रोकरेज ने शेयर पर Buy रेटिंग दी है। साथ ही इसका टारगेट प्राइस ₹1,500 रखा है। अभी शेयर करीब ₹1,057.90 पर है। यानी मौजूदा भाव से शेयर में करीब 42% की तेजी की गुंजाइश है।

₹1,500 तक क्यों जा सकता है शेयर?

टाटा कंज्यूमर अब सिर्फ चाय और नमक की कंपनी नहीं रही। कंपनी लगातार नए कारोबार में उतर रही है। Tata Sampann, Tata Soulfull, Organic India और Capital Foods जैसे ब्रांड तेजी से बढ़ रहे हैं। इससे कंपनी का ग्रोथ पोर्टफोलियो मजबूत हो रहा है।

कंपनी नए प्रोडक्ट भी तेजी से लॉन्च कर रही है। FY25 में 41 नए प्रोडक्ट आए थे। FY26 में यह संख्या बढ़कर 80 हो गई। इनमें 55% प्रोडक्ट हेल्थ और वेलनेस से जुड़े थे। यानी कंपनी अब इस सेगमेंट पर खास जोर दे रही है।

ऑनलाइन बिक्री बनी बड़ा सहारा

Tata Consumer के लिए ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स भी तेजी से बढ़ रहे हैं। FY22 में भारत के कारोबार में इन चैनलों की हिस्सेदारी 19% थी। FY26 में यह बढ़कर 41% हो गई। ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स से मिलकर कंपनी को 19% रेवेन्यू मिल रहा है।

कंपनी की पहुंच भी बढ़ी है। FY26 में कंपनी 45 लाख आउटलेट तक पहुंच चुकी थी। इसका फायदा नए प्रोडक्ट को तेजी से बाजार में उतारने में मिल सकता है।

कमाई बढ़ने का अनुमान

Motilal Oswal को उम्मीद है कि FY26 से FY28 के बीच कंपनी का रेवेन्यू करीब 10% CAGR से बढ़ेगा। EBITDA में 16% और मुनाफे में 21% CAGR का अनुमान है। इसी उम्मीद के आधार पर ब्रोकरेज ने ₹1,500 का टारगेट दिया है।

टाटा कंज्यूमर के इंटरनेशनल कारोबार पर कॉफी की महंगी कीमतों का असर पड़ा था। अब इसमें राहत मिल रही है। FY27 की पहली तिमाही में Arabica की कीमत 6% और Robusta की कीमत 9% तिमाही आधार पर घटी। इससे खासकर अमेरिकी कारोबार के मार्जिन में सुधार की उम्मीद है।

टाटा कंज्यूमर के शेयर

टाटा कंज्यूमर का शेयर सोमवार को 0.85% की बढ़त के साथ 1,057.90 रुपये पर बंद हुए। पिछले 6 महीने में यह 10.20% टूटा है। वहीं, 1 साल में 2.19% गिरा है। कंपनी का मार्केट कैप 1.05 लाख करोड़ रुपये है।

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Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market Outlook : गिरावट के साथ बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए 25 अगस्त को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

Market Outlook : 24 अगस्त को भारतीय इक्विटी इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए और निफ्टी 24,200 के आसपास रहा। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 171.72 अंक या 0.22 प्रतिशत गिरकर 77,369.11 पर और निफ्टी 32.95 अंक या 0.14 प्रतिशत गिरकर 24,219.05 पर बंद हुआ। आज लगभग 1970 शेयरों में बढ़त हुई, 2278 शेयरों में गिरावट आई और 199 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

निफ्टी में सबसे ज़्यादा गिरावट वाले शेयरों में SBI लाइफ इंश्योरेंस,बजाज फाइनेंस,बजाज फिनसर्व,भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और अडानी पोर्ट्स शामिल रहे। जबकि बढ़त वाले शेयरों में हिंडाल्को,JSW स्टील,डॉ. रेड्डीज़ लैब्स,टाटा स्टील और HCL टेक्नोलॉजीज शामिल रहे।

IT,एनर्जी,मेटल और रियल्टी को छोड़कर बाकी सभी सेक्टर इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। PSU बैंक में 1% की गिरावट आई,जबकि प्राइवेट बैंक,मीडिया और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 0.3-0.5% की गिरावट देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.13% की बढ़त हुई,जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.26% की गिरावट आई।

निफ्टी व्यू

कोटक सिक्योरिटीज के हेड इक्विटी रिसर्च श्रीकांत चौहान का कहना है कि आज बेंचमार्क इंडेक्स में ऊपरी लेवल पर प्रॉफिट बुकिंग दिखी। निफ्टी 33 अंक गिरकर बंद हुआ,जबकि सेंसेक्स में 171 अंकों की गिरावट आई। सेक्टर की बात करें तो मेटल इंडेक्स में 1.50 फीसदी से ज्यादा की तेजी रही,जबकि PSU बैंक और डिफेंस इंडेक्स में लगभग 1 फीसदी की गिरावट आई।

टेक्निकल तौर पर,पॉज़िटिव शुरुआत के बाद मार्केट को ऊपरी लेवल पर लगातार बिकवाली का दबाव झेलना पड़ रहा है। डेली चार्ट पर बेयरिश कैंडल और इंट्राडे चार्ट पर रिवर्सल पैटर्न मौजूदा लेवल से और कमजोरी आने के संकेत दे रहे हैं।

श्रीकांत चौहान का मानना ​​है कि 24,250 का लेवल निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस जोन का काम करेगा। जब तक इंडेक्स इस लेवल के नीचे ट्रेड करेगा,तब तक कमजोरी का ट्रेंड जारी रहने की संभावना है। नीचे की तरफ,निफ्टी 24,000-23,950 तक गिर सकता है। दूसरी ओर 24,250 के ऊपर जाने पर मार्केट में रिकवरी आ सकती है और यह 24,350-24,400 तक जा सकता है।

LKP सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट, रूपक डे का कहना है कि अच्छी शुरुआत के बाद इंडेक्स नीचे गिर गया क्योंकि ईरान पर नए अमेरिकी प्रतिबंधों से पहले ट्रेडर्स ने अपनी पोजीशन घटाते दिखे। इंट्राडे में निफ्टी 24,200 के सपोर्ट लेवल से नीचे चला गया था,लेकिन क्लोजिंग के समय उसने इसे फिर से हासिल कर लिया।

मंगलवार को बाजार में काफी उतार-चढ़ाव रहने की संभावना है क्योंकि ट्रेडर्स ईरान पर नए अमेरिकी प्रतिबंधों और ईरान की संभावित प्रतिक्रिया के आधार पर अपनी पोजीशन में बदलाव करेंगे। यह अहम घटना NSE की मंथली F&O एक्सपायरी के साथ ही होगी जो एक अहम इवेंट है। इसलिए,मंगलवार को बाजार में उतार-चढ़ाव की उम्मीद है।

निचले स्तर पर नफ्टी के लिए 24,200/24,000 पर सपोर्ट है। ऊपरी स्तर पर,24,350 एक अहम रेजिस्टेंस लेवल का काम कर सकता है,जिसके ऊपर जाने पर निफ्टी में अच्छी-खासी तेजी देखने को मिल सकती है।

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बैंक निफ्टी व्यू

LKP सिक्योरिटीज के टेक्निकल एनालिस्ट,वत्सल भुवा का कहना है कि बैंक निफ्टी आज डेली चार्ट पर बेयरिश कैंडलस्टिक के साथ बंद हुआ है। यह ऊपरी लेवल पर लगातार बिकवाली के दबाव को दिखाता है। इंडेक्स अभी भी कंसोलिडेशन फेज में है,जो मार्केट में दुविधा और किसी साफ दिशा के बारे में पक्के भरोसे की कमी को दिखाता है। बैंक निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 57,300 पर है (जो सोमवार के निचले स्तर के आसपास है),जबकि रेजिस्टेंस 58,000 के आसपास दिख रहा है,जो गिरती हुई ट्रेंडलाइन के साथ मेल खाता है।

जब तक कोई साफ ब्रेकआउट या ‘ब्रेकडाउन नहीं होता,तब तक इंडेक्स के एक दायरे में ही रहने की संभावना है। इसलिए,57,300–58,000 की रेंज में सख्त स्टॉप-लॉस के साथ ही ट्रेड करने की सलाह होगी।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

20 साल बाद ‘जॉनी गद्दार’ की यादें होंगी ताजा, श्रीराम राघवन बना रहे हैं उसी अंदाज की नई थ्रिलर

मैचबॉक्स शॉट्स ने अपनी नए प्रोजेक्ट्स का ऐलान कर दिया है। कंपनी के अनुसार, मशहूर फिल्ममेकर श्रीराम राघवन उनके लिए कई नई कहानियों पर काम कर रहे हैं। इनमें एक अनटाइटल्ड थ्रिलर भी शामिल है, जिसका अंदाज उनकी कल्ट क्लासिक फिल्म ‘जॉनी गद्दार’ जैसा होगा। साल 2027 में ‘जॉनी गद्दार’ की रिलीज को 20 साल पूरे होने वाले हैं।

फाउंडर संजय राउत्रे ने कहा, “श्रीराम ने मैचबॉक्स को उसकी पहली फिल्म और पहला सबक दिया था कि अगर किसी कहानी को पूरी ईमानदारी और विश्वास के साथ बताया जाए, तो उसे हमेशा अपना दर्शक मिल जाता है। ‘जॉनी गद्दार’ की 20वीं सालगिरह के साल उसी अंदाज की थ्रिलर विकसित करना हम दोनों के लिए एक तरह से घर वापसी जैसा है।”

यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब नेटफ्लिक्स के लिए मैचबॉक्स शॉट्स की बनाई वॉर सीरीज ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ दुनियाभर में लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही है। नॉन-इंग्लिश कंटेंट की ग्लोबल रैंकिंग में यह सीरीज दूसरे नंबर पर है, जबकि भारत में नंबर एक पर बनी हुई है। यह लगातार दूसरी नेटफ्लिक्स सीरीज है, जिसे मैचबॉक्स ने बनाया और जिसने ग्लोबल चार्ट पर बड़ी सफलता हासिल की है। इससे पहले ‘IC 814: द कंधार हाईजैक’ भी ग्लोबल स्तर पर नंबर दो पर डेब्यू कर चुकी है।

200 करोड़ रुपये से ज्यादा के बजट में बनी ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ मैचबॉक्स शॉट्स की अब तक की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक है। सीरीज के लिए काम कर रहे एयरबेस पर फाइटर एयरक्राफ्ट के साथ शूटिंग की गई और करीब 450 लोगों की टीम ने बेहद कठिन हाई-एल्टीट्यूड परिस्थितियों में सेट पर काम किया।

हालांकि, कंपनी का सफर इतने बड़े स्तर से शुरू नहीं हुआ था। श्रीराम राघवन की ‘अंधाधुन’ मैचबॉक्स शॉट्स की पहली प्रोडक्शन थी। करीब 16 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने दुनियाभर में 450 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार किया और 2018 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्मों में शामिल रही। मैचबॉक्स के सफर में एक चीज लगातार बनी रही है—कहानी और कहानीकार पर भरोसा, साथ ही लागत पर नियंत्रण।

इसी सोच के बीच कंपनी ने अलग-अलग जॉनर और स्केल की कई परियोजनाएं की हैं, जिनमें ‘मोनिका ओ माय डार्लिंग’, ‘थ्री ऑफ अस’, ‘स्कूप’, ‘मेरी क्रिसमस’ और ‘खौफ’ जैसी फिल्में और सीरीज शामिल हैं। कंपनी के मुताबिक, अलग-अलग तरह की कहानियों में निवेश करना शुरुआत में एक क्रिएटिव फैसला था, जो धीरे-धीरे बिजनेस स्ट्रैटेजी में बदल गया। इससे कंपनी किसी एक तरह के दर्शक या किसी एक फॉर्मेट पर निर्भर नहीं रहती।

संजय राउत्रे के साथ पार्टनर्स सरिता पाटिल और दीक्षा राउत्रे भी कंपनी का नेतृत्व कर रहे हैं। मैचबॉक्स का मानना है कि किसी प्रोजेक्ट की सफलता सिर्फ उसकी ओपनिंग से तय नहीं होती। सरिता पाटिल के मुताबिक, असली सवाल यह है कि क्या लोग सालों बाद भी किसी फिल्म को देख रहे हैं और दूसरों को उसकी सिफारिश कर रहे हैं। उनके अनुसार, दर्शकों का ऐसा प्यार खरीदा या किसी रणनीति से हासिल नहीं किया जा सकता।

‘ऑपरेशन सफेद सागर’ की ग्लोबल सफलता के बाद जहां कंपनी अपनी स्ट्रीमिंग स्लेट का विस्तार कर रही है, वहीं थिएट्रिकल फिल्मों को लेकर भी उसकी प्रतिबद्धता कायम है। कंपनी का कहना है कि हर फॉर्मेट की अपनी अर्थव्यवस्था और अपनी ऑडियंस होती है और हर कहानी को उसी हिसाब से विकसित किया जाता है। कुछ कहानियां सिनेमाघर में अजनबियों से भरे अंधेरे हॉल में देखने के लिए होती हैं, जबकि कुछ घर के आराम में ज्यादा बेहतर अनुभव देती हैं। दोनों अनुभव कंपनी के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।

मैचबॉक्स शॉट्स की नई स्लेट में श्रीराम राघवन के अलावा हंसल मेहता, वासन बाला और जस्मीत रीन जैसे फिल्ममेकर्स के साथ भी प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। कंपनी का विस्तार सिर्फ फिल्मों और सीरीज तक सीमित नहीं है। मैचबॉक्स ने ‘द गुरुग्राम स्कूल मर्डर’ और ‘द जॉनसन एंड जॉनसन फाइल्स’ समेत कई किताबों के अधिकार भी हासिल किए हैं। इसका उद्देश्य अपनी कहानियों पर ज्यादा नियंत्रण रखना और तैयार स्क्रिप्ट्स के लिए बाजार में प्रतिस्पर्धा करने के बजाय खुद मजबूत आईपी तैयार करना है।

संजय राउत्रे ने कहा कि बाहर से देखने पर मैचबॉक्स की स्लेट भले ही अलग-अलग तरह की नजर आती हो, लेकिन अंदर से हर प्रोजेक्ट के पीछे एक ही सवाल होता है—क्या यह कहानी अस्तित्व में आने लायक है और क्या इसे ऐसी लागत में बनाया जा सकता है, जिसे दर्शक सही ठहरा सकें?

उनके मुताबिक, कम बजट में बनाई गई ‘थ्री ऑफ अस’ जैसी शांत फिल्म कंपनी के लिए उतनी ही संतोषजनक हो सकती है, जितनी 200 करोड़ रुपये की ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ जैसी बड़ी फिल्म। उनके शब्दों में, “फिल्म का बड़ा होना जरूरी नहीं है। जरूरी यह है कि उसका गणित सही हो।”

मैचबॉक्स शॉट्स खुद को एक बुटीक प्रोडक्शन हाउस के रूप में देखता है, लेकिन उसकी महत्वाकांक्षा इससे कहीं बड़ी है। कंपनी का लक्ष्य लंबे समय तक चलने वाले आईपी तैयार करना, क्रिएटर्स के साथ मजबूत और स्थायी साझेदारी बनाना और थिएट्रिकल, स्ट्रीमिंग के साथ-साथ इंटरनेशनल मार्केट में भी काम करना है।

आखिरकार, कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ एक और हिट फिल्म या सीरीज बनाना नहीं है। असली लक्ष्य यह साबित करना है कि अनुशासन और सही बिजनेस मॉडल के साथ क्वालिटी कंटेंट को लंबे समय तक सफल कारोबार में बदला जा सकता है।

FIIs की बिकवाली से इन शेयरों में बड़ा मौका! Nippon MF के शैलेश राज भान ने बताया किन सेक्टर्स में आएगी बंपर तेजी

Nippon India Mutual Fund: शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच दिग्गज म्यूचुअल फंड हाउस निप्पॉन इंडिया ने भारतीय बाजारों को लेकर एक बेहद पॉजिटिव रिपोर्ट दी है। निप्पॉन इंडिया MF के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर शैलेश राज भान का मानना है कि आने वाले कुछ सालों में बेहतर कॉरपोरेट अर्निंग्स और वाजिब वैल्यूएशन बाजार की चाल को रफ्तार देंगे।

शैलेश राज भान के मुताबिक, अगर कोई बड़ा वैश्विक संकट नहीं आता है, तो अगले 3 सालों में भारतीय कंपनियों की कमाई सालाना 12 से 15 फीसदी की दर से बढ़ सकती है। आइए जानते हैं उन्होंने किन सेक्टर्स पर दांव लगाने की सलाह दी है और कहां कमाई का मौका दिख रहा है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बड़े शेयरों में बना मौका

शैलेश राज भान ने बताया कि पिछले कुछ समय में फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स(FIIs) की ओर से हुई भारी बिकवाली ने लार्जकैप शेयरों के वैल्यूएशन को काफी आकर्षक बना दिया है। FIIs की बिकवाली मुख्य रूप से लार्जकैप और फाइनेंशियल स्टॉक्स में केंद्रित थी। इसके चलते कई मजबूत और क्वालिटी कंपनियों के शेयर अब वाजिब और सही दामों पर उपलब्ध हैं।

जब वैल्यूएशन आपके पक्ष में हो और कंपनियों की कमाई बढ़ रही हो, तो अगले 3 से 4 सालों में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

प्राइवेट बैंक बने हुए है सबसे पसंदीदा सेक्टर

शैलेश राज भान ने दिग्गज निजी क्षेत्र के बैंकों को निवेश के लिए सबसे आकर्षक अवसर बताया है। उन्होंने कहा कि कई क्वालिटी प्राइवेट बैंक इस समय ऐसे वैल्यूएशन मल्टीपल्स पर ट्रेड कर रहे हैं, जो बीते कुछ सालों में दुर्लभ ही देखने को मिला है। कुछ बड़े प्राइवेट बैंकों के वैल्यूएशन तो अब पीएसयू बैंकों के आसपास आ पहुंचे हैं, जिससे इनमें री-रेटिंग की बड़ी गुंजाइश है।

कंज्यूमर और आईटी सेक्टर में वापसी के संकेत

लंबे समय तक सुस्ती झेलने के बाद अब कंज्यूमर और आईटी सेक्टर में भी वैल्यूएशन के लिहाज से खरीदारी के मौके दिख रहे हैं। ग्रामीण मांग में सुधार, टैक्स में राहत और कंपनियों की पहलों के चलते कंज्यूमबल्स, ड्यूरेबल्स, होटल्स और सर्विस सेक्टर में वॉल्यूम ग्रोथ लौट रही है।

बाजार आईटी सेक्टर के ग्रोथ आउटलुक को लेकर जरूरत से ज्यादा निगेटिव हो गया है। जो आईटी कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अपनाकर नए बिजनेस मॉडल में ढलेंगी, उन्हें आने वाले समय में बड़ा फायदा होगा।

कैपिटल गुड्स पर सतर्क रहें, पावर यूटिलिटीज पसंद

औद्योगिक और पावर सेक्टर पर लंबी अवधि के लिए सकारात्मक रहने के बावजूद, फंड मैनेजर ने कैपिटल गुड्स और ट्रांसमिशन कंपनियों को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है। इन कंपनियों के शेयरों की कीमतें पहले ही बहुत बढ़ चुकी हैं। इसके बजाय, बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए उन्होंने वाजिब वैल्यूएशन वाली पावर यूटिलिटी कंपनियों पर दांव लगाने की सलाह दी है।

पोर्टफोलियो में गोल्ड और सिल्वर का रोल अहम

सोना और चांदी कीमती धातुओं पर बात करते हुए शैलेश राज भान ने कहा कि भले ही हाल के दिनों में इनकी तेजी थोड़ी सुस्त पड़ी हो, लेकिन ग्लोबल अनिश्चितता और बाजार की उठापटक से बचने के लिए पोर्टफोलियो में सोना और चांदी होना बेहद जरूरी है।

अगर आप अगले 3 से 5 साल के नजरिए से भारतीय शेयर बाजार में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो केवल तेजी में भागने के बजाय उन सेक्टर्स पर ध्यान दें जहां वैल्यूएशन वाजिब हैं और कंपनियों की कमाई में टिकाऊ सुधार दिख रहा है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।