बिना चेतावनी एक ईमेल में गई नौकरी! वायरल पोस्ट ने छेड़ी जॉब सिक्योरिटी पर बहस

सोशल मीडिया पर एक वायरल पोस्ट ने एक बार फिर कॉर्पोरेट सेक्टर में नौकरी की सुरक्षा (Job Security) को लेकर बहस तेज कर दी है। पोस्ट में दावा किया गया कि एक कर्मचारी को अचानक ईमेल भेजकर नौकरी से हटा दिया गया, जिसके बाद इंटरनेट पर लोगों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। इस घटना ने न केवल कंपनियों के कर्मचारियों के प्रति रवैये पर सवाल खड़े किए, बल्कि यह भी चर्चा शुरू कर दी कि क्या मौजूदा समय में बिना पूर्व सूचना या स्पष्ट संवाद के कर्मचारियों को नौकरी से निकालना एक सामान्य कॉर्पोरेट प्रथा बनती जा रही है। कई यूजर्स ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी जॉब मार्केट में ऐसी घटनाएं पहले की तुलना में अधिक देखने को मिल रही हैं।

वहीं कुछ लोगों का मानना है कि कंपनियों और कर्मचारियों के बीच बेहतर संवाद और पारदर्शिता की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। इस वायरल पोस्ट ने रोजगार की स्थिरता और कॉर्पोरेट संस्कृति पर नई बहस को जन्म दे दिया है।

वायरल पोस्ट में क्या था?

X यूजर @coolcoder ने कथित तौर पर कर्मचारी हर्ष राणा को भेजे गए ईमेल का स्क्रीनशॉट साझा किया। पोस्ट के साथ उन्होंने लिखा, “बिना किसी चेतावनी या फीडबैक के नौकरी से निकाल दिया गया। क्या अब यह सामान्य बात हो गई है?” देखते ही देखते यह पोस्ट वायरल हो गई और हजारों यूजर्स ने अपनी राय रखनी शुरू कर दी।

ITR

ईमेल में क्या लिखा था?

स्क्रीनशॉट के अनुसार, कंपनी ने ईमेल में बताया कि प्रोसेस रैंप-डाउन होने के कारण कर्मचारी को मौजूदा भूमिका से हटाया जा रहा है। ईमेल में 7 अगस्त 2026 को अंतिम कार्य दिवस (Last Working Day) बताया गया और कंपनी की सभी एसेट्स जमा कराने के साथ फुल एंड फाइनल (F&F) प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया।

फीडबैक या चेतावनी का नहीं था जिक्र

ईमेल में कहीं भी कर्मचारी के प्रदर्शन, किसी गलती या पहले दी गई चेतावनी का उल्लेख नहीं था। यही वजह रही कि सोशल मीडिया पर कई लोगों ने सवाल उठाया कि क्या कर्मचारी को निर्णय से पहले अपनी बात रखने या सुधार का कोई अवसर दिया गया था।

सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कई यूजर्स ने कॉर्पोरेट कंपनियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए। कुछ लोगों का कहना था कि कंपनियां मुनाफे को कर्मचारियों से ज्यादा महत्व देती हैं। वहीं कुछ ने पूछा कि क्या कर्मचारी को अचानक नौकरी जाने के बदले तीन महीने का वेतन या कोई मुआवजा मिलेगा।

‘आज के जॉब मार्केट में यह आम बात है’

कई यूजर्स ने अनुमान लगाया कि मामला कर्मचारी के प्रदर्शन का नहीं, बल्कि प्रोजेक्ट या काम खत्म होने से जुड़ा हो सकता है। वहीं कुछ लोगों ने कहा कि मौजूदा रोजगार बाजार में बिना पूर्व सूचना के छंटनी अब असामान्य नहीं रही और ऐसे मामले लगातार देखने को मिल रहे हैं।

Renault Group India CEO Stephane Deblaise on response to Duster and future plans

Renault Group India CEO Stephane Deblaise

Renault Group India CEO Stephane Deblaise took charge of the company in September last year, and since then, the carmaker has been busy expanding and refreshing its India line-up. In this interview, Deblaise talks about the response to the new Renault Duster and the possibility of a more affordable automatic variant, the company’s upcoming product plans, progress on the Bridger compact SUV concept, and how Renault plans to strengthen its position in the Indian market.

On the response to the 1.0-litre Duster

It’s still early, so we don’t know the exact response, but it’s a key part of our phased strategy, which was to first focus on the 160hp DCT that is the high-end version in the ICE car. And then we want to introduce the 100hp, the more ‘regular’ car, which is less expensive. That Rs 10.5 lakh price is very, very good for people who want to enter the B+ SUV segment, and it has very good fuel efficiency. Moreover, the Duster is a very good car, and people are loyal to good cars, so we are expecting the Duster to do well on the whole.

On the slow rate of Duster bookings and deliveries

So, at Renault, we don’t overstate or overpromise. We won’t say we have 60,000 people waiting and, after that, you would discover that we did not do 60,000 deliveries. Some people do that; we don’t. We are very serious and would prefer to focus on one (variant), and then another, and a third, so in this way people keep speaking about it. For the hybrid, we were not ready; that’s why it is coming later, but with the 160hp and 100hp Duster, we wanted to focus first on the high-end and then the lower version. You know, we were in a little bit of a hibernation, and you can’t go from that to summer in one day. I think it’s good to build up step by step. 

On the possibility of a 1.0-litre automatic

I am not saying what gearbox or even the engine, but what I can say is that very soon we will introduce a new, less expensive version with an automatic. It was not planned at the beginning, but since we launched the new Duster, we have been having a lot of queries about this from customers. Plus, if you look at the pricing of all the models and variants we currently have, there is a gap between the manual variants and the first automatic version. 

On the rest of the Renault portfolio

I arrived in India on the 1st of September, and on the 16th of October I went to Paris to validate our India plan, and all the programmes that we decided to pursue were validated. Then, as you know, we communicated this in April this year. The programmes are completely running as per our expectations and on time. On the Renault Group Entry Platform (RGEP), we have made many modifications and carried out re-engineering to bring in new engines, new equipment and other things that you have requested. They are now finally coming. Next year will be a blowout of new products. 

On the brand’s new design centre in India

The India R&D centre is playing a very big role in our local as well as global plans. When I arrived, I was requested to bring together the three entities we had, which were all separate: one dedicated to sales, one to engineering, and one dedicated to manufacturing, which was along with Nissan. Now we have all three together under one leadership – mine – and this helps a lot because communication is easier and quicker, and this is improving our agility and our ability to see and respond to the market much better. This is why we will now deliver exactly what the market needs and is asking for.

On the development of the Bridger concept

This is a very important topic. It’s my project, and I am working very hard on this with our whole team. We have three meetings per week about the project, and in the coming weeks, there is a very important milestone. But I am happy to say that everything is going nicely and is on track, so I am satisfied with our progress. 

कॉर्पोरेट जॉब में क्या है सबसे बड़ा खतरा? पुणे के प्रोफेशनल का पोस्ट हो रहा वायरल

सोशल मीडिया पर इन दिनों कॉर्पोरेट जॉब को लेकर किया गया पोस्ट काफी वायरल हो रहा है। इस पोर्ट में पुणे के एक प्रोफेशनल ने बताया कि कॉर्पोरेट जॉब सबसे बड़ी चुनौती क्या होती हैं। प्रोफेशनल ने बताया कि, कॉर्पोरेट नौकरी में सबसे बड़ी चिंता तब होनी चाहिए, जब आपके पास धीरे-धीरे काम कम होने लगे और टीम के लोग आपको काम देना बंद कर दें। उनके मुताबिक, अगर आपको नई जिम्मेदारियां और कुछ नया सीखने का मौका नहीं मिल रहा है, तो यह आपके करियर के लिए अच्छा संकेत नहीं है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस पोस्ट पर कई लोगों ने अपना रिएक्शन दिया है।

काम ना होना चिंता की बात

इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए इस वीडियो निहार पाटिल ने शेयर किया है। निहार पिछले पांच साल से अधिक समय से कॉर्पोरेट सेक्टर में काम कर रहे हैं। वीडियो की शुरुआत में उन्होंने कहा, “कॉर्पोरेट नौकरी में सबसे डराने वाली चीज काम का दबाव नहीं होता। असली चिंता तब होती है, जब कोई आप पर निर्भर नहीं रहता और आपके पास करने के लिए कोई काम नहीं बचता।”

 

उन्होंने कहा, “काम न होने से बेहतर है कि आपके पास काम हो। क्योंकि काम के दौरान ही आप नई चीजें सीखते हैं, समस्याओं का समाधान करना सीखते हैं, गलतियों से अनुभव हासिल करते हैं और लोगों का भरोसा जीतते हैं। यही चीजें आपके करियर को आगे बढ़ाती हैं।”

समय के साथ खिखना जरुरी

उन्होंने आगे कहा, “अगर आप बिना नई जिम्मेदारियां संभाले या नई स्किल्स सीखे सिर्फ हर महीने सैलरी मिलने से संतुष्ट हैं, तो यह भविष्य में परेशानी बन सकता है। हर बीतते महीने के साथ आपकी सीखने की कमी बढ़ती जाती है, जबकि कोई दूसरा व्यक्ति लगातार आगे निकल रहा होता है। कॉर्पोरेट दुनिया तेजी से बदल रही है और टेक्नोलॉजी उससे भी ज्यादा तेजी से आगे बढ़ रही है।” निहार ने कहा कि अगर ऑफिस में खाली समय मिले, तो उसका इस्तेमाल नई स्किल्स सीखने, सर्टिफिकेशन करने और नई जिम्मेदारियां लेने में करना चाहिए। उनके मुताबिक, लगातार सीखने वाले लोग ही अपने करियर में आगे बढ़ते हैं।

हर महीने सैलरी से खुश है

उन्होंने कहा, “अगर काम का दबाव सही तरीके से संभाला जाए, तो यह एक अच्छी बात है। इसका मतलब है कि आप अभी भी सीख रहे हैं और अपने काम में अहम भूमिका निभा रहे हैं। लेकिन जिस दिन आपका करियर जरूरत से ज्यादा आरामदायक लगने लगे, उस दिन खुद से यह सवाल जरूर पूछिए कि क्या मैं वास्तव में आगे बढ़ रहा हूं या सिर्फ हर महीने सैलरी ले रहा हूं?” कैप्शन में उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य अनहेल्दी वर्क कल्चर या बर्नआउट को बढ़ावा देना नहीं है।

उन्होंने लिखा, “मेरा सिर्फ इतना कहना है कि आराम को करियर ग्रोथ समझने की गलती न करें। अगर काम का दबाव सही तरीके से संभाला जाए, तो यह इस बात का संकेत होता है कि आप लगातार सीख रहे हैं, टीम में योगदान दे रहे हैं और अपनी वैल्यू बढ़ा रहे हैं।”

लोगों ने किया ये कमेंट

वीडियो पर कई लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी और निहार पाटिल की बात से सहमति जताई। एक यूजर ने लिखा, “अगर आपके पास कोई काम नहीं है, तो यह एक बड़ा वॉर्निंग साइन हो सकता है। ऐसी स्थिति में कभी भी नौकरी जाने का खतरा रहता है।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “काम न मिलना अपने आप में एक बड़ा रेड फ्लैग है।” एक और यूजर ने कहा, “अगर ऑफिस में आपके पास कोई जिम्मेदारी नहीं है, तो यह संकेत है कि कभी भी नौकरी जा सकती है।”

IPOs This Week: 3 अगस्त से शुरू हफ्ते में Ardee Industries समेत 6 नए इश्यू, 11 कंपनियां होंगी लिस्ट

3 अगस्त से शुरू हफ्ते में देश में 6 नए IPO खुलने जा रहे हैं। इनमें से 2 मेनबोर्ड सेगमेंट से हैं। इसके अलावा नए सप्ताह में पहले से खुले 6 IPO में भी पैसे लगाने का मौका रहेगा। इनमें से 2 मेनबोर्ड हैं। जहां तक नई लिस्ट होने जा रही कंपनियों की बात है तो नए शुरू हो रहे सप्ताह में 11 कंपनियों के शेयर अपनी शुरुआत करने वाले हैं। इनमें से 3 कंपनियां मेनबोर्ड सेगमेंट की हैं। आइए जानते हैं डिटेल…

नए खुल रहे IPO

Anawil Wire & Engineering IPO: ₹177.81 करोड़ का इश्यू 3 अगस्त को खुलेगा और 5 अगस्त को बंद होगा। प्राइस बैंड ₹257-₹270 प्रति शेयर और लॉट साइज 400 शेयर है। IPO बंद होने के बाद कंपनी की लिस्टिंग NSE SME पर 10 अगस्त को होगी।

Aegeus Technologies IPO: ₹23.71 करोड़ का इश्यू 4 अगस्त को खुलेगा। इसमें ₹100-₹105 प्रति शेयर के प्राइस बैंड में और 1,200 शेयरों के लॉट में पैसे लगा सकते हैं। इश्यू की क्लोजिंग 6 अगस्त को होगी। कंपनी के शेयर BSE SME पर 11 अगस्त को लिस्ट हो सकते हैं।

Ardee Industries IPO: यह 5 अगस्त को खुलेगा और 7 अगस्त को बंद होगा। कंपनी ₹425.87 करोड़ जुटाना चाहती है। बोली ₹50-₹53 प्रति शेयर के भाव पर और 281 शेयरों के लॉट में लगा सकते हैं। IPO बंद होने के बाद कंपनी NSE और BSE पर 12 अगस्त को लिस्ट हो सकती है।

LAPL Automotive IPO: यह ₹32.40 करोड़ का है। इसकी ओपनिंग 6 अगस्त को होगी। निवेशकों के ​पास 10 अगस्त तक ₹88-₹94 प्रति शेयर के भाव पर और 1,200 शेयरों के लॉट में पैसे लगाने का मौका रहेगा। कंपनी के शेयर BSE SME पर 13 अगस्त को शुरुआत कर सकते हैं।

Optimystix Entertainment IPO: यह 7 अगस्त को खुलेगा और 11 अगस्त को बंद होगा। इसका साइज, प्राइस बैंड, लॉट साइज अभी तक तय नहीं हुआ है। IPO बंद होने के बाद कंपनी की लिस्टिंग NSE SME पर 14 अगस्त को होने की उम्मीद है।

Technocraft Ventures IPO: इसका भी साइज, लॉट साइज, प्राइस बैंड अभी फाइनल नहीं है। लेकिन इश्यू की ओपनिंग 7 अगस्त को और क्लोजिंग 11 अगस्त को होगी। शेयरों की लिस्टिंग NSE और BSE पर 14 अगस्त को होने वाली है।

पहले से खुले IPO

Juniper Green Energy IPO: ₹1,800 करोड़ का इश्यू 30 जुलाई को ओपन हुआ था और 3 अगस्त को बंद होगा। इसे अभी तक 49 प्रतिशत सब्सक्रिप्शन मिला है। प्राइस बैंड ₹214-₹225 प्रति शेयर और लॉट साइज 66 शेयर है। कंपनी के NSE और BSE पर 6 अगस्त को लिस्ट होने की उम्मीद है।

MV Electrosystems IPO: कंपनी ₹290 करोड़ जुटाना चाहती है। इश्यू 30 जुलाई को खुला था। अभी तक 12.79 गुना भर चुका है। इस IPO में 3 अगस्त को भी ₹400-₹425 प्रति शेयर के भाव पर और 34 शेयरों के लॉट में पैसे लगा सकते हैं। कंपनी की लिस्टिंग NSE और BSE पर 6 अगस्त को होने वाली है।

Dhaval Packaging IPO: ₹36.36 करोड़ का इश्यू 30 जुलाई को खुला था और 3 अगस्त को बंद होगा। इसे अभी तक 1.40 गुना सब्सक्रिप्शन मिला है। प्राइस बैंड ₹92-₹97 प्रति शेयर और लॉट साइज 1,200 शेयर है। IPO की क्लोजिंग के बाद कंपनी के शेयर BSE SME पर 6 अगस्त को लिस्ट हो सकते हैं।

Oneindig Technologies IPO: यह भी 30 जुलाई को खुला था और 3 अगस्त को बंद होगा। अभी तक 79 प्रतिशत भरा है। साइज ₹27.65 करोड़ है। प्राइस बैंड ₹91-₹96 प्रति शेयर और लॉट साइज 1,200 शेयर है। कंपनी के शेयर BSE SME पर 6 अगस्त को शुरुआत कर सकते हैं।

G.V. Electricals IPO: यह ₹42.25 करोड़ का है। इश्यू 31 जुलाई को खुला था और 4 अगस्त को बंद होगा। यह अभी तक 2.30 गुना भरा है। प्राइस बैंड ₹123-₹130 प्रति शेयर और लॉट साइज 1,000 शेयर है। कंपनी की लिस्टिंग BSE SME पर 7 अगस्त को होगी।

Fusion Klassroom Edutech IPO: कंपनी का इरादा ₹39.04 करोड़ जुटाने का है। इश्यू 31 जुलाई से अभी तक 79 प्रतिशत भरा है। 3 और 4 अगस्त को भी पैसे लगाने का मौका रहेगा। उसके बाद शेयरों की लिस्टिंग BSE SME पर 7 अगस्त को होने वाली है। प्राइस बैंड ₹151-₹159 प्रति शेयर और लॉट साइज 800 शेयर है।

Zepto ने फिलहाल आईपीओ का प्लान रोका, प्री-आईपीओ प्लेसमेंट के जरिए मौजूदा इनवेस्टर्स से जुटा सकती है 1000 करोड़

इन कंपनियों की होगी लिस्टिंग

नए सप्ताह में 3 अगस्त को NSE SME पर Propshop Events & Exhibitions की लिस्टिंग होने जा रही है। इसी दिन BSE SME पर Advance Technoforge के शेयर लिस्ट होने वाले हैं। 4 अगस्त को BSE SME पर Poojaa Precision Engg. की लिस्टिंग होने की उम्मीद है। 5 अगस्त को NSE और BSE पर Manipal Health Enterprises के शेयर अपनी शुरुआत करेंगे। इसी दिन BSE SME पर H.R. Hygiene Products लिस्ट हो सकती है।

इसके बाद 6 अगस्त को NSE और BSE पर Juniper Green Energy, MV Electrosystems की लिस्टिंग होने वाली है। वहीं BSE SME पर Dhaval Packaging, Oneindig Technologies की लिस्टिंग की उम्मीद है। 7 अगस्त को BSE SME पर G.V. Electricals और Fusion Klassroom Edutech के शेयर शुरुआत करेंगे।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

कौन सा है भारत का सबसे महंगा बोर्डिंग स्कूल? जहां पढ़ाई के साथ दुनिया की भी होती है सैर

स्कूल का नाम सुनते ही क्लासरूम और किताबें याद आ जाती है, लेकिन भारत में एक ऐसा बोर्डिंग स्कूल भी है, जहां पढ़ाई के साथ हर दिन हिमालय के खूबसूरत नजारे देखने को मिलते है। उत्तराखंड के मसूरी में वुडस्टॉक स्कूल अपनी शानदार लोकेशन और पहचान के कारण दुनियाभर में पॉपुलर है।

 

हिमालय की गोद में कैंपस (Himalayan Location)

यह स्कूल मसूरी में हिमालय की वादियों के बीच है। चारों ओर हरियाली, पहाड़ और शांत माहौल स्टूडेंट को प्रकृति के करीब रहकर सीखने का मौका देता है।

 

इतिहास और प्रकृति का संगम (Heritage & Nature)

वुडस्टॉक स्कूल की पहचान सिर्फ उसकी पढ़ाई से नहीं, बल्कि उसकी बिल्डिंग, हरियाली और शांत माहौल से भी है। यही वजह है कि यह भारत के सबसे खास बोर्डिंग स्कूलों में गिना जाता है।

दुनियाभर में पहचान (Global Recognition)

वुडस्टॉक स्कूल को दुनिया के सबसे खूबसूरत बोर्डिंग स्कूलों में शामिल किया गया है। इसकी शानदार लोकेशन और हिस्टोरिक कैंपस ने इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है।

 

 

170 साल से ज्यादा पुराना इतिहास (Rich History)

करीब 172 साल पुराने इस स्कूल की शुरुआत एक छोटे इंस्टिट्यूट से हुई थी। समय के साथ यह भारत के इंटरनेशनल बोर्डिंग स्कूलों में शामिल हो गया।

वर्ल्ड-क्लास पढ़ाई (International Education)

यहां इंटरनेशनल बैकलॉरिएट (IB) पढ़ाया जाता है, जो दुनिया की कई बड़ी यूनिवर्सिटी में मान्य है। पढ़ाई के साथ स्टूडेंट के डेवलपमेंट पर भी ध्यान दिया जाता है।

दुनियाभर के छात्र (Diverse Community)

स्कूल में कई देशों के छात्र पढ़ते हैं। अलग-अलग कल्चर के बीच पढ़ाई करने से बच्चों को नई सोच बनाने का मौका मिलता है।

किताबों से आगे की सीख (Beyond Classroom)

यहां सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि स्पोर्ट्स, म्यूजिक, थिएटर, आउटडोर एक्टिविटी, पर्यावरण संरक्षण और भी कई एक्टिविटीज पर भी ध्यान दिया जाता है।

Market Outlook : बेंचमार्क इंडेक्स लगातार तीसरे सेशन में बढ़त के साथ हुए बंद, जानिए 3 अगस्त को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

Market Outlook : 31 जुलाई को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स लगातार तीसरे सेशन में बढ़त के साथ बंद हुए है। फाइनेंशियल,ऑटो और कुछ दिग्गज शेयरों में तेजी की वजह से निफ्टी 24,350 के स्तर के ऊपर बंद हुआ। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 166.49 अंक या 0.21 प्रतिशत बढ़कर 78,094.64 पर और निफ्टी 66.45 अंक या 0.27 प्रतिशत बढ़कर 24,383.60 पर बंद हुआ। आज लगभग 2444 शेयरों में बढ़त हुई,1607 शेयरों में गिरावट आई और 185 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

निफ्टी पर बजाज फाइनेंस,बजाज फिनसर्व,जियो फाइनेंशियल,M&M और अदाणी पोर्ट्स सबसे ज्यादा बढ़त वाले शेयर रहे। जबकि TCS,एटरनल,मैक्स हेल्थकेयर, इंफोसिस और विप्रो सबसे ज्यादा गिरावट वाले शेयरों में शामिल रहे।

सेक्टोरल परफॉर्मेंस काफी हद तक पॉजिटिव रही। निफ्टी मीडिया सबसे अधिक बढ़त वाला सेक्टर रहा। इसमें 2% की तेजी आई। इसके बाद निफ्टी ऑटो (1.6%),निफ्टी ऑयल एंड गैस (1%),निफ्टी एनर्जी (1%),निफ्टी फार्मा (0.7%),निफ्टी इंफ्रा (0.7%)और निफ्टी PSU बैंक (0.5%) रहे। दूसरी ओर,निफ्टी IT में 1.5% की गिरावट आई,जिससे यह सबसे खराब परफॉर्मेंस वाला सेक्टर बन गया,जबकि निफ्टी FMCG में 1% की गिरावट आई। ब्रॉडर मार्केट ने बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन किया। इसके चलते निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 में 0.4% की बढ़त हुई।

आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल?

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च, विनोद नायर का कहना है कि आज भी बाजार में तेजी का रुख बना रहा,हालांकि ऊपरी स्तरों पर कुछ मुनाफावसूली भी देखने को मिली। हाई बॉन्ड यील्ड और ब्याज दरें बढ़ने की आशंकाओं के बीच निवेशक सतर्क नजर आए रहे। बाजार की यह रिकवरी कितनी टिकाऊ होगी यह मुख्य रूप से इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियों के नतीजों के दौर कैसा रहता है। हालांकि,अभी तक अनुमान से बेहतक नतीजे आ रहे हैं। इसके साथ साथ ही ग्लोबल रिस्क फैक्टर भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।

बोनान्ज़ा में रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी का कहना है कि विदेशी निवेशकों की वापसी,कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और मज़बूत ग्लोबल सेंटीमेंट के कारण बाजार का आउटलुक पॉजिटिव बना हुआ है। आगे बाजार की दिशा तय करने में पहली तिमाही के नतीजे और पश्चिम एशिया एशिया की स्थितियां अहम भूमिका निभाएंगी।

SBI सिक्योरिटीज में हेड, टेक्निकल एंड डेरिवेटिव्स रिसर्च सुदीप शाह का कहना है कि आगे निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 24450-24500 जोन में है। अगर निफ्टी इस जोन के ऊपर टिकता है तो यह शॉर्ट टर्म में 24650 और उसके बाद 24800 तक बढ़ सकता है। दूसरी ओर,निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 24150-24100 जोन में है।

LKP सिक्योरिटीज में सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे की राय है कि आज निफ्टी दिन भर ज्यादातर हरे निशान में ही रहा। इसने ऑवरली टाइमफ़्रेम पर अहम मूविंग एवरेज से ऊपर अपनी मजबूती बनाए रखी,जिससे शॉर्ट टर्म के लिए पॉज़िटिव ट्रेंड की पुष्टि होती है। हालांकि,मोमेंटम की कमी दिख रही है क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और मिडिल ईस्ट में अनिश्चित हालात के कारण ट्रेडर्स सतर्क हैं।

इसके बावजूद,कुल मिलाकर ट्रेंड पॉज़िटिव बना हुआ है,क्योंकि इंडेक्स डेली चार्ट पर 50 EMA से ऊपर बना हुआ है। नीचे की तरफ़,शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स के लिए तत्काल सपोर्ट 24,200 पर है। ऊपर की तरफ, रेजिस्टेंस 24,500 पर दिख रहा है।

HDFC सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट नागराज शेट्टी का कहना है कि शुक्रवार को निफ्टी में लगातार तीसरे सेशन में भी तेजी कायम रही और यह 66 अंक ऊपर बंद हुआ। डेली चार्ट पर अपर और लोअर शैडो (shadow)वाली एक स्मॉल पॉजिटिव कैंडल बनी। टेक्निकल नज़रिए से मार्केट की यह चाल ऊपरी स्तरों पर ‘हाई वेव’ या ‘डोजि’जैसे कैंडल पैटर्न के बनने का संकेत देती है,जो रेजिस्टेंस वाले स्तरों पर मार्केट में थोड़ी अस्थिरता (volatility) का संकेत है।

निफ्टी अभी 24350-24400 के अहम रेजिस्टेंस जोन (8 जुलाई का पिछला ओपनिंग डाउन गैप,17 जुलाई का पिछला स्विंग हाई और 200-डे EMA) के आसपास है। इसलिए,किसी बड़े ब्रेकआउट से पहले रेजिस्टेंस के आसपास कंसोलिडेशन या थोड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।

निफ्टी का मेन ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है। अगर यह 24400 के ऊपर टिकता है,तो जल्द ही इसमें 24600-24700 के स्तर देखने को मिल सकते है। वहीं, नीचे की तरफ सपोर्ट 24200 पर है।

बैंक निफ्टी व्यू

सुदीप शाह का कहना है कि बैंक निफ्टी गैप-डाउन के साथ खुला और सेशन के पहले हिस्से में इसमें गिरावट जारी रही,जिससे यह 56,769 के इंट्राडे निचले स्तर तक पहुंच गया। हालांकि,निचले स्तरों से अच्छी-खासी खरीदारी देखने को मिली। इसके चलते इंडेक्स अपने ज्यादातर नुकसान की भरपाई करने में कामयाब रहा। आखिर में यह 0.10% की गिरावट के साथ 57,148 पर बंद हुआ।

पिछले चार ट्रेडिंग सेशन के दौरान बैंक निफ्टी 57,330–56,672 की रेंज में ही घूम रहा है,जिससे पता चलता है कि इंडेक्स सीमित दायरे में बना हुआ है। बैंक निफ्टी अपने 20-डे और 50-डे EMA के बीच ऊपर-नीचे हो रहा है,जो किसी साफ दिशा वाले ट्रेंड का अभाव दिखाता है। RSI भी सपाट हो गया है,जिससे पता चलता है कि तेजी या मंदी का कोई मजबूत मोमेंटम नहीं है। वहीं,ADX भी सपाट बना हुआ है,जो कमजोर ट्रेंड और कम उतार-चढ़ाव (volatility) का संकेत है।

आगे बैंक निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 57500-57600 जोन में है। अगर यह इस जोन के ऊपर टिकता है,तो इसमें में 58000 और उसके बाद शॉर्ट टर्म में 58400 तक की बढ़त देखने को मिल सकती है। वहीं,नीचे की तरफ बैंक निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 56700-56600 के जोन में है।

 

Trading Strategy : निचले स्तरों से तेजड़ियों ने की जोरदार वापसी, जानिए अब सोमवार के लिए क्या हो ट्रेंडिंग रणनीति

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

US ETFs: बच्चे की विदेश में पढ़ाई के लिए अमेरिकी ETFs क्यों हैं बेस्ट? जानिए सही करेंसी में बचत का फॉर्मूला

US ETFs for Overseas Education: बच्चों को विदेश की टॉप यूनिवर्सिटीज (US, UK या यूरोप) में पढ़ाना आज कई भारतीय माता-पिता का सपना है। इसके लिए अधिकांश पेरेंट्स सालों पहले से भारतीय म्यूचुअल फंड्स में SIP शुरू कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रुपए में की गई आपकी बचत डॉलर में बढ़ते कॉलेज फीस के खर्च के सामने कम पड़ सकती है?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब आपका वित्तीय लक्ष्य डॉलर या विदेशी मुद्रा में है, तो निवेश भी उसी करेंसी में होना चाहिए। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि विदेश में पढ़ाई के लिए US ETFs में सीधा निवेश क्यों सबसे समझदारी भरा विकल्प है।

रुपए में बचत क्यों पड़ सकती है कम?

अगर आपका लक्ष्य डॉलर में है, तो सिर्फ रुपए में कंपाउंडिंग करना मुश्किल हो सकता है। इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं:

1- ट्यूशन फीस में बढ़ोतरी: विदेशी यूनिवर्सिटीज की फीस हर साल 5% से 8% की दर से बढ़ती है।

2- रुपए की कमजोरी: ऐतिहासिक रूप से भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले हर साल औसतन 4% से 5% टूटता है।

एक उदाहरण से समझे तो जैसे आज किसी अमेरिकी यूनिवर्सिटी की 4 साल की फीस $2,00,000 है, तो अगले 10 साल बाद रुपए के अवमूल्यन और महंगाई को मिलाकर यह बिल ₹3.5 करोड़ से भी अधिक का हो सकता है।

भारतीय इंटरनेशनल म्यूचुअल फंड्स के बजाय Direct US ETFs क्यों बेहतर?

पहले पेरेंट्स भारतीय फंड हाउसेज के ‘फंड ऑफ फंड्स’ के जरिए विदेश में निवेश करते थे। लेकिन अब Direct US-listed ETFs एक बेहतर विकल्प बन गए हैं:

SEBI ओवरसीज कैप की सीमा नहीं: भारतीय म्यूचुअल फंड्स पर SEBI द्वारा लगाई गई विदेशी निवेश की लिमिट (करीब $7 बिलियन) बार-बार पूरी हो जाती है, जिससे फंड्स को अपनी SIP बार-बार रोकनी पड़ती है।

LRS के जरिए सीधा निवेश: RBI की लिब्रलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत हर भारतीय नागरिक (नाबालिग सहित) को हर साल $2,50,000 तक विदेश भेजने और सीधे US ETFs में निवेश करने की पूरी छूट मिलती है।

कम एक्सपेंस रेशियो: डायरेक्ट US ETFs (जैसे- Vanguard या iShares) का एक्सपेंस रेशियो बेहद कम (0.03% से 0.09%) होता है, जबकि घरेलू इंटरनेशनल फंड्स में यह 1.25% से 1.75% तक हो सकता है।

ऐतिहासिक रिटर्न का गणित

अगर पिछले 10 वर्षों का ट्रैक रिकॉर्ड देखें, तो S&P 500, Nasdaq 100 और ग्लोबल इक्विटीज के 60/20/20 पोर्टफोलियो ने डॉलर (USD) टर्म में 13% से 14% वार्षिक रिटर्न दिया है। जब इसमें रुपए की 4-5% सालाना गिरावट को जोड़ दिया जाता है, तो भारतीय निवेशकों के लिए यह सालाना रिटर्न रुपए के टर्म में 17% से 19% के करीब बैठता है। यानी डॉलर में निवेश करना फायदे वाला सौदा रहा है।

निवेश शुरू करने से पहले इन 3 बातों का रखें ध्यान

अमेरिकी ETFs में ऐप या ब्रोकरेज के जरिए निवेश करते समय इन व्यावहारिक पहलुओं को न भूलें:

Micro-SIP से बचें: हर महीने ₹1,000 या ₹2,000 जैसी छोटी SIP पर बैंक वायर चार्ज और फॉरेक्स स्प्रेड का खर्च भारी पड़ सकता है। इसलिए पैसे को रुपए में इकट्ठा करें और हर 3 या 6 महीने में एक बार में रेमिटेंस करें।

TCS के नियम: एक वित्त वर्ष में ₹10 लाख तक के रेमिटेंस पर अतिरिक्त टीसीएस नहीं लगता। ₹10 लाख से ऊपर 20% TCS कटता है, जिसे आप अपने वार्षिक इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में एडजस्ट या रिफंड क्लेम कर सकते हैं।

Schedule FA रिपोर्टिंग: विदेश में शेयर या ETF खरीदते ही ITR-2 या ITR-3 भरते समय Schedule FA में उसका ब्योरा देना अनिवार्य है। ऐसा न करने पर ‘ब्लैक मनी एक्ट’ के तहत भारी जुर्माना लग सकता है।

टारगेट तक पहुंचने की सही रणनीति

जैसे-जैसे आपके बच्चे के कॉलेज एडमिशन का समय करीब आए, आपको अपने पोर्टफोलियो को सुरक्षित मोड में शिफ्ट करना चाहिए:

Build Phase (शुरुआती 5-10 साल): इक्विटी ETFs (जैसे S&P 500 / Nasdaq) में आक्रामक तरीके से निवेश करें।

Protect Phase (3-4 साल पहले): जब एडमिशन में 3-4 साल बचें, तो धीरे-धीरे इक्विटी से पैसा निकालकर US डेट/बॉन्ड फंड्स में शिफ्ट करें।

Deploy Phase (आखिरी 1-2 साल): फीस भुगतान से 1-2 साल पहले फंड को USD कैश या लिक्विड बकेट में रखें, ताकि शेयर बाजार में किसी तात्कालिक गिरावट से आपकी फीस का बजट प्रभावित न हो।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Silverstorm Parks And Resorts IPO Listing: पार्क और रिजॉर्ट कंपनी की फ्लैट शुरुआत, शेयर लगभग IPO प्राइस पर ही लिस्ट

SME सेगमेंट की कंपनी सिल्वरस्टॉर्म पार्क्स एंड रिजॉर्ट्स की 31 जुलाई को शेयर बाजार में लिस्टिंग न अच्छी रही, न बुरी। कंपनी के शेयर BSE SME पर फ्लैट नोट के साथ 132.90 रुपये पर लिस्ट हुए। IPO का फाइनल इश्यू प्राइस 133 रुपये प्रति शेयर था। कंपनी का 82.43 करोड़ रुपये का पब्लिक इश्यू 1.91 गुना भरा था। IPO में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 1.81 गुना, नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 3.19 गुना और रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 1.41 गुना सब्सक्राइब हुआ।

Silverstorm Parks & Resorts IPO में 62 लाख नए शेयर जारी हुए। कंपनी का पब्लिक इश्यू 24 जुलाई को खुला था और 28 जुलाई को बंद हुआ। सिल्वरस्टॉर्म पार्क्स एंड रिसॉर्ट्स लिमिटेड एक इंटीग्रेटेड एम्यूजमेंट और टूरिज्म कंपनी है। यह भारत में एम्यूजमेंट पार्क, वॉटर पार्क, स्नो पार्क और हॉस्पिटैलिटी सर्विसेज चलाती है। कंपनी की फ्लैगशिप डेस्टिनेशन, केरल के अतिरापिल्ली में स्थित ‘सिल्वर स्टॉर्म थीम पार्क’ है। यह लगभग 17.38 एकड़ में फैला है। इसमें एक एम्यूजमेंट और वॉटर पार्क, केरल का पहला इनडोर स्नो पार्क, कई रेस्टोरेंट और सिल्वर स्टॉर्म रिसॉर्ट शामिल हैं। कंपनी झारखंड के जमशेदपुर में भी एक स्नो पार्क चलाती है और उत्तर प्रदेश के लखनऊ में एक नया स्नो पार्क और फैमिली एंटरटेनमेंट सेंटर बना रही है।

कंपनी एम्यूजमेंट और स्नो पार्क के टिकट बेचकर, खाने-पीने की सर्विसेज से, मर्चेंडाइज, रिजॉर्ट बुकिंग और प्राइवेट व कॉर्पोरेट इवेंट्स से कमाई करती है। यह अतिरापिल्ली में 1.2 किलोमीटर लंबे एरियल केबल कार प्रोजेक्ट के साथ अपनी सर्विस का विस्तार भी कर रही है। इसके साथ ही, नए एम्यूजमेंट राइड्स और वॉटर अट्रैक्शन भी जोड़े जा रहे हैं।

NSE Q1 Results: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का मुनाफा 7% बढ़ा, इनकम रही 9% ज्यादा

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।