स्पिन के सामने ना डगमगाए पैर, इस कारण इन 4 स्पिनरों को बनाया नेट गेंदबाज

कभी भारत की ताकत मानी जाने वाली स्पिन गेंदबाजी टेस्ट क्रिकेट में भारत की कमजोरी बनकर उभरी है। भारत ने अपने घर में पहले न्यूजीलैंड और फिर दक्षिण अफ्रीका से बिना कोई टेस्ट जीते सीरीज गंवानी पड़ी थी। इस सीरीज में 85 प्रतिशत विकेट स्पिन गेंदबाजों के थे।

श्रीलंका में भी भारत को स्पिन के मुफीद पिचें पेश की जाएंगी। हालांकि यह हो सकता है कि पहले ही दिन से पिच टर्न ना ले जैसा भारत में देखते हैं लेकिन भारत इस सीरीज को 2-0 से जीतने के लिए कितना गंभीर है इसका अंदाजा इस ही बात से लगाया जा सकता है कि भारत के सभी नेट गेंदबाज स्पिनर हैं और अलग विविधता के हैं।

इनमें से हाल ही में टीम इंडिया में शामिल हुए हर्ष दुबे बाएं हाथ के गेंदबाज है। वहीं तनुष कोटियान दाएं हाथ के ऑफ स्पिनर है। दिल्ली कैपिटल्स से खेलने वाले विपराज निगम दाएं हाथ की लेग स्पिन करते हैं। सनराइजर्स हैदराबाद के शिवांग कुमार बाएं हाथ के कलाई के गेंदबाज हैं।

यह चारों स्पिन गेंदबाज भारत के बल्लेबाजों को हर तरह की स्पिन गेंदबाजी का अभ्यास कराएंगे जिससे भारतीय बल्लेबाज टेस्ट मैच में श्रीलंकाई स्पिन गेंदबाजों के सामने धराशाही ना हो।टीम में 4 स्पिनरों को जगह दी है और शीर्ष तेज गेंदबाजी क्रम अनुभवी है।

टीम में कुलदीप यादव, रविंद्र जड़ेजा, अफगानिस्तान के खिलाफ ड्रीम डेब्यू करने वाले मानव सुथार और इस सीरीज में डेब्यू करने वाले स्पिन ऑलराउंडर सारांश जैन को मौका मिला है।

भारतीय टीम इस प्रकार है: शुभमन गिल (कप्तान), केएल राहुल (उपकप्तान), यशस्वी जायसवाल, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर),रविंद्र जडेजा , कुलदीप यादव, मानव सुथार, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा, गुरनूर बराड़, देवदत्त पडिक्कल, सारांश जैन।

क्यों मनाया जाता है विश्व आदिवासी दिवस? जानिए इतिहास और इसका महत्व

Why is World Tribal Day celebrated

World Indigenous Day 2026 : जल, जंगल और जमीन के सच्चे संरक्षक और प्रकृति के सबसे करीबी आदिवासी समाज की संस्कृति, उनके अधिकारों और योगदान को सम्मानित करने के लिए हर साल 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस (World Indigenous Day) मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दिसंबर 1994 में इसे मनाने की घोषणा की थी। साल 1982 में जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र की आदिवासी आबादी पर कार्य समूह की पहली बैठक हुई थी, जिसकी याद में यह दिन तय किया गया।

 

इस दिवस को मनाने का उद्देश्य और महत्व

इस दिवस को मनाने का उद्देश्य आदिवासी लोगों के मानवाधिकारों, शिक्षा, स्वास्थ्य और जमीन की रक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना और आदिवासी समाजों की अनूठी भाषा, परंपराओं और कला को बचाए रखना है। यह दिन न केवल उनकी समृद्ध परंपराओं को याद करने का अवसर है। 

 

यह दिवस समाज की मुख्यधारा से दूर रह रहे इन समुदायों की चुनौतियों पर विचार करने का भी एक माध्यम है। आदिवासी समाज दुनिया की कुल आबादी का एक छोटा हिस्सा होने के बावजूद जैव विविधता (Biodiversity) को बचाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाता है।

 

विश्व आदिवासी दिवस का इतिहास

आदिवासी समुदायों के अधिकारों की रक्षा और उनकी समस्याओं की ओर दुनिया का ध्यान खींचने की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र के मंच से हुई। जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के मानव अधिकार आयोग ने 'आदिवासी आबादी पर कार्य समूह' (Working Group on Indigenous Populations) की पहली बैठक आयोजित की।

 

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दिसंबर 1994 में इसे मनाने की घोषणा की थी। संयुक्त राष्ट्र ने 'इंडिजिनस पीपुल्स के अधिकारों पर घोषणा पत्र' (UNDRIP) अपनाया, जो उनके आत्मनिर्णय, भूमि और सांस्कृतिक अधिकारों का आधार बना। 1857 की क्रांति से ठीक एक साल पहले बिहार और झारखंड के 'दामिन-इ-कोह' क्षेत्र में संथाल आदिवासियों ने ब्रिटिश हुकूमत और महाजनों के अत्याचारों के खिलाफ बिगुल फूंका था।

 

संथाल परगना के महान क्रांतिकारी तिलका मांझी (जबा पहाड़िया) को देश के पहले आदिवासी स्वाधीनता सेनानियों में गिना जाता है। विश्व आदिवासी दिवस हमें यह याद दिलाता है कि जब तक हम अपने मूल संरक्षकों के अधिकारों और अस्तित्व की रक्षा नहीं करेंगे, तब तक प्रकृति का संतुलन बनाए रखना असंभव है।

चाबहार पोर्ट पर संकट क्यों? समझिए US प्रतिबंध के खतरे और ईरान युद्ध के बीच भारत कैसे बचाएगा अपना ड्रीम प्रोजेक्ट

Chabahar Port Challenge: ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चाबहार पोर्ट में भारत का बड़ा निवेश अब तक की सबसे कठिन और जटिल परीक्षा के दौर से गुजर रहा है। अमेरिका द्वारा दी गई प्रतिबंध छूट की अवधि समाप्त होने, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और सैन्य संघर्ष, जटिल कूटनीति के बीच भारत अपने इस ड्रीम प्रोजेक्ट को बचाने और अफगानिस्तान व मध्य एशिया तक अपनी पहुंच बनाए रखने के लिए सभी संभव विकल्पों का आकलन कर रहा है।

इस बीच भारत ईरान के शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल को संसाधन उपलब्ध कराने और उसके संचालन के लिए 10 साल के समझौते के तहत अपनी 120 मिलियन डॉलर (लगभग 12 करोड़ डॉलर) की मदद का वादा भी पूरा कर चुका है। हालांकि, अप्रैल में अमेरिकी प्रतिबंध छूट की मियाद खत्म होने के बाद से इस प्रोजेक्ट के संचालन पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

संसद में सरकार का बयान और भारत के सामने धर्मसंकट

भारत सरकार ने 31 जुलाई को लोकसभा में एक लिखित जानकारी में बताया कि चाबहार परियोजना के लिए अमेरिका द्वारा दी गई सशर्त प्रतिबंध छूट 26 अप्रैल को ही खत्म हो चुकी है। केंद्र सरकार ने कहा कि वह इसके प्रभावों और जटिलताओं से निपटने के लिए इससे जुड़े स्टेकहोल्डर्स के साथ लगातार संपर्क में है और बातचीत जारी है।

सरकार का यह बयान भारत के सामने मौजूद बड़े रणनीतिक धर्मसंकट की ओर भी इशारा है। भारत का मुख्य उद्देश्य एक तरफ अपने सबसे महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट की रक्षा करना है, तो दूसरी तरफ भारतीय संस्थाओं और कंपनियों को अमेरिकी प्रतिबंधों के जोखिम से पूरी तरह सुरक्षित रखना भी है। चाबहार भारत के लिए सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर इंवेस्टमेंट नहीं है बल्कि यह पाकिस्तान को दरकिनार कर अफगानिस्तान और मध्य एशिया के बाजारों में सीधे प्रवेश करने की दीर्घकालिक रणनीति का मेन आधार भी है।

120 मिलियन डॉलर का निवेश और भारत की परिचालन भूमिका

भारत सरकार की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल चाबहार फ्री जोन (IPGCFZ) के माध्यम से इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड वर्ष 2018 से इस बंदरगाह का संचालन कर रही है। मई 2024 में ईरान के पोर्ट्स एंड मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन के साथ 10 साल का एक लंबा कॉन्ट्रैक्ट साइन किया गया था। इसके तहत भारत ने टर्मिनल के ऑपरेशन और उपकरण लगाने के लिए 120 मिलियन डॉलर देने की प्रतिबद्धता जताई थी।

सरकार ने अब आधिकारिक तौर पर पुष्टि कर दी है कि अगस्त 2025 तक अंतिम किस्त सहित पूरी 120 मिलियन डॉलर की राशि ईरान को ट्रांसफर की जा चुकी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत अमेरिकी प्रतिबंधों के इस कड़े दौर में भी चाबहार पर अपना ऑपरेशनल कंट्रोल और रणनीतिक प्रभाव बनाए रख पाएगा या नहीं।

भारत के लिए क्यों बेहद खास और रणनीतिक है चाबहार पोर्ट?

ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में ओमान की खाड़ी के तट पर स्थित चाबहार पोर्ट भारत की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजनाओं में एक अनूठा स्थान रखता है। ऐतिहासिक रूप से पाकिस्तान ने भारत को अफगानिस्तान तक जाने के लिए जमीनी रास्ता देने से हमेशा इनकार किया है। चाबहार ने भारत को इस भौगोलिक और राजनीतिक बाधा से बाहर निकलने का सीधा समुद्री और जमीनी विकल्प दिया है।

चाबहार पोर्ट, पाकिस्तान में चीन द्वारा विकसित किए जा रहे ग्वादर पोर्ट से महज 72 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ग्वादर पोर्ट चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) और चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) का प्रमुख हिस्सा है। ऐसे में चाबहार में भारत की मौजूदगी इस पूरे क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए बेहद जरूरी रणनीतिक काउंटर-वेट है।

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक भारतीय संचालन शुरू होने के बाद से चाबहार के रास्ते भारत से अफगानिस्तान को 25 लाख टन से अधिक गेहूं और 2000 टन दालें मानवीय सहायता के रूप में भेजी गई हैं। इसके अलावा इस बंदरगाह ने अब तक 90000 TEU से अधिक कंटेनर ट्रैफिक और 84 लाख मीट्रिक टन से अधिक बल्क और जनरल कार्गो को संभाला है।

चाबहार पोर्ट अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे से भी जुड़ा है, जो भारत को ईरान, कैस्पियन क्षेत्र, रूस और यूरोप से जोड़ने वाला एक बहु-स्तरीय नेटवर्क है। पूर्व भारतीय राजदूत फुंचोक स्टोबदान के मुताबिक INSTC और चाबहार पोर्ट रूस और यूरेशिया के साथ भारतीय कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए एक-दूसरे के पूरक होंगे।

अमेरिकी प्रतिबंधों की समयसीमा और कानूनी अड़चनें

चाबहार परियोजना के सामने सबसे बड़ी और तात्कालिक अड़चन अमेरिका का रुख है। इससे पहले अमेरिका ने अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास में चाबहार की भूमिका को स्वीकार करते हुए भारत को प्रतिबंधों से विशेष छूट दी थी। इस छूट को सितंबर 2025 में रद्द कर दिया गया था और भारत को अपने संचालन को व्यवस्थित करने के लिए एक सशर्त समय दिया गया था, जो अंततः 26 अप्रैल 2026 को समाप्त हो गया।

भारत के लिए समय बहुत जटिल रहा क्योंकि ईरान के साथ 10 साल का मुख्य अनुबंध मई 2024 में हुआ था और 120 मिलियन डॉलर का पूरा भुगतान भी कर दिया गया था। अब भारत अमेरिका के साथ अपने संबंधों को मजबूत रखने और चाबहार में अपने निवेश व प्रभाव को बचाने के बीच का रास्ता खोज रहा है।

क्या हैं भारत के पास आगे के विकल्प?

सूत्रों और रिपोर्टों के मुताबिक भारत और ईरान इस बंदरगाह के प्रबंधन के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर विचार कर रहे हैं। एक विकल्प पर चर्चा चल रही है कि जब तक अमेरिकी प्रतिबंधों की स्थितियां बदल नहीं जातीं, तब तक ईरानी पोर्ट अथॉरिटी के साथ मिलकर एक अस्थायी व्यवस्था बनाई जाए ताकि भारत के हितों और निवेश की रक्षा की जा सके। चुनौती यह है कि यह अस्थायी व्यवस्था भारत की दीर्घकालिक परिचालन भूमिका को हमेशा के लिए कमजोर न करे।

भारत का पूरी तरह पीछे हटना रणनीतिक रूप से नुकसानदेह हो सकता है, क्योंकि भारत के कदम पीछे खींचते ही चीन या दूसरी क्षेत्रीय शक्तियां यहां अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर सकती हैं। हालांकि, इसके व्यावसायिक संचालन के लिए सिर्फ भारत की मौजूदगी ही काफी नहीं है बल्कि इसके लिए बेहतर सड़क एवं रेल कनेक्टिविटी, नियमित जहाजों की आवाजाही और कार्गो की भारी मात्रा की आवश्यकता है।

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पश्चिम एशिया में जारी युद्ध, ईरान के इर्द-गिर्द बढ़ता तनाव और अमेरिका-ईरान संबंधों की अनिश्चितता ने इस प्रोजेक्ट के जोखिम को काफी बढ़ा दिया है। इसके बावजूद, भारत सरकार ने संकेत दिया है कि वह इस प्रोजेक्ट से पीछे नहीं हट रही है। भारत की रणनीति धैर्यपूर्ण कूटनीति की है। इसके तहत तेहरान के साथ कूटनीतिक रास्ते खुले रखे जाएंगे और प्रतिबंधों के जोखिम से बचते हुए अपने रणनीतिक हितों को सुरक्षित रखा जाएगा।

वतन वापसी पर कॉमनवेल्थ मेडलिस्ट का हुआ देश में जोरदार स्वागत (Video)

commonwealth games

राष्ट्रमंडल खेल 2026 में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले भारतीय एथलीट्स की वतन वापसी पर भव्य स्वागत हुआ। गौरतलब है कि भारत ने इन खेलों में उम्मीद से बढ़कर प्रदर्शन किया जब कई वैश्विक खेल जिनमें भारत दर्जन भर मेडल लाता था इन खेलों से नदारद थे। इस बार हॉकी, बैडमिंटन, शूटिंग, कुश्ती नहीं शामिल हुए थे।

इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) हवाई अड्डे से बाहर निकलते ही खिलाड़ियों का ढोल-नगाड़ों, देशभक्ति गीतों और फूल-मालाओं से स्वागत किया गया। परिजन और समर्थक खिलाड़ियों के साथ तस्वीरें खिंचवाने के लिए उत्साहित नजर आए।भारतीय पैरा एथलेटिक्स दल ने भी इतिहास रचते हुए रिकॉर्ड सात पदक अपने नाम किए, जिसके दम पर भारत समग्र पदक तालिका में चौथे स्थान पर पहुंचा।

खिलाड़ी मंगलवार तड़के करीब चार बजे जैसे ही हवाई अड्डे के टर्मिनल से बाहर निकले, ढोल-नगाड़ों की गूंज और देशभक्ति गीतों से पूरा माहौल उत्साह से भर उठा। परिजनों ने पदक विजेता खिलाड़ियों का फूल-मालाएं पहनाकर गर्मजोशी से स्वागत किया, जबकि बड़ी संख्या में मौजूद समर्थकों ने उनके साथ तस्वीरें खिंचवाने के लिए मौजूद थे।

राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले जूडो खिलाड़ी हर्ष सिंह और अस्मिता डे मंगलवार तड़के हवाई अड्डे से बाहर निकलने वाले शुरुआती खिलाड़ियों में शामिल रहे। उनका भी यहां गर्मजोशी से स्वागत किया गया। हर्ष ने कहा, ‘‘ मैंने कभी नहीं सोचा था कि इस तरह का स्वागत मिलेगा। सभी से मिलकर बेहद अच्छा लग रहा है।’’ उत्तर प्रदेश पुलिस में उपनिरीक्षक अस्मिता डे ने कहा, ‘‘मुझे जीवन में पहली बार ऐसा स्वागत मिल रहा है और मेरे लिए यह अनुभव बेहद खास है।’’

खेल मंत्रालय ने दिए नकद पुरुस्कार

खेल मंत्री ने कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार उपलब्धियों के लिए गोल्ड मेडल जीतने वालों को 30 लाख रुपये, सिल्वर मेडल जीतने वालों को 20 लाख रुपये और ब्रॉन्ज़ मेडल जीतने वालों को 10 लाख रुपये का नकद इनाम दिया। इन खेलों में भारतीय वेटलिफ्टरों ने देश का अब तक का सबसे मजबूत प्रदर्शन किया।

खिलाड़ियों को बधाई देते हुए डॉ. मांडविया ने कहा कि पूरे देश ने उनकी उपलब्धियों का जश्न मनाया। उन्होंने कहा, “संसद में भी, हर बार जब आपने मेडल जीते, तो घोषणाएं की गईं। उन पलों ने हर भारतीय को गौरवान्वित किया।”

खेल मंत्री ने कोचों, जिनमें द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता विजय शर्मा भी शामिल थे की जमकर तारीफ की और चैंपियन बनाने में उनकी अहम भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “एक खिलाड़ी के सफर में गुरु की सबसे बड़ी भूमिका होती है। चैंपियन बनाने में कोच के योगदान से बड़ी कोई चीज नहीं है।”

मुफ्त योजनाओं से दूरी, विकास पर जोर! चुनाव से पहले योगी सरकार ने खोला 59 हजार करोड़ का खजाना

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। ऐसे में योगी आदित्यनाथ सरकार ने 59,019.54 करोड़ रुपये का सप्लीमेंट्री बजट पेश किया है। इस बजट में योगी सरकार ने नई योजनाओं की घोषणा करने के बजाय सड़क, उद्योग, बिजली और गांवों के विकास पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया है। मंगलवार को विधानसभा में पेश किए गए इस बजट में अतिरिक्त राशि का बड़ा हिस्सा सड़क निर्माण, ग्रामीण संपर्क मार्ग, औद्योगिक ढांचे और बिजली व्यवस्था को मजबूत करने के लिए रखा गया है। इससे साफ संकेत मिलता है कि सरकार चुनाव से पहले विकास कार्यों को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में जनता के सामने रखना चाहती है।

 महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगों का खास ख्याल 

यूपी सरकार द्वारा पेश किए गए इस बजट में महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगों के लिए पहले से चल रही कई योजनाओं के लिए अतिरिक्त धन का प्रावधान किया गया है। लेकिन इस बजट में बुजुर्गों, विधवाओं और निराश्रित लोगों की पेंशन बढ़ाने का कोई ऐलान नहीं किया गया है। इसके अलावा, किसी नई नकद सहायता योजना या लड़कियों को मुफ्त स्कूटी देने जैसी नई योजना की भी घोषणा नहीं की गई है।

ग्रामीण क्षेत्रों को भी मिलेगा फायदा

इस सप्लीमेंट्री बजट का सबसे बड़ा फायदा ग्रामीण विकास क्षेत्र को मिलेगा। सरकार ने गांवों के विकास से जुड़ी योजनाओं के लिए 16,432.46 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया है। यह पूरे सप्लीमेंट्री बजट का सबसे बड़ा हिस्सा है। इसके अलावा, सड़क और परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए 15,750.01 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इसका उद्देश्य गांवों को बेहतर सड़क संपर्क देना और दूर-दराज के इलाकों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है।

कनेक्टिविटी पर ज्यादा जोर

सरकार का यह बजट साफ दिखाता है कि वह विकास के लिए सड़क, एक्सप्रेसवे, उद्योग और बेहतर कनेक्टिविटी पर लगातार जोर दे रही है। नए एक्सप्रेसवे, औद्योगिक गलियारों (इंडस्ट्रियल कॉरिडोर) और लॉजिस्टिक्स से जुड़े ढांचे के विकास के लिए भी अच्छी-खासी रकम रखी गई है। सरकार को उम्मीद है कि इससे राज्य में निवेश बढ़ेगा, उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

एयरपोर्ट पर भी फोकस 

सरकार ने कई बड़े विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त बजट का प्रावधान किया है। इनमें जेवर एयरपोर्ट को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाला नया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, हरदोई और फर्रुखाबाद के रास्ते आगरा-लखनऊ और गंगा एक्सप्रेसवे को जोड़ने वाली सड़क, गंगा एक्सप्रेसवे का हरिद्वार तक विस्तार और सोनभद्र तक विंध्य एक्सप्रेसवे का निर्माण शामिल है। इसके अलावा, एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक क्षेत्रों के विकास पर भी जोर दिया जाएगा। उद्योग क्षेत्र को भी इस बजट में अच्छी-खासी राशि दी गई है। इसके लिए 2,220.89 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है। विदेशी निवेश (एफडीआई) और बड़ी कंपनियों को उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए प्रोत्साहित करने की नीति के तहत 1,302.61 करोड़ रुपये दिए गए हैं।

वहीं, अटल औद्योगिक आधारभूत ढांचा मिशन के लिए 1,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री औद्योगिक क्षेत्र विस्तार योजना के तहत नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास और विस्तार के लिए 3,000 करोड़ रुपये का ऋण भी उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा, प्रस्तावित आईटी सदन, स्टेट डेटा सेंटर 2.0 और केंद्र सरकार की ‘भव्य’ (BHAVYA) योजना के तहत सात औद्योगिक आधारभूत ढांचा परियोजनाओं के लिए भी अतिरिक्त धन दिया गया है।

इस सप्लीमेंट्री बजट में बिजली क्षेत्र पर भी खास ध्यान दिया गया है। सरकार ने इसके लिए 7,358 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया है। इसमें से 6,958 करोड़ रुपये संशोधित बिजली वितरण योजना के तहत बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के घाटे को पूरा करने के लिए दिए जाएंगे। इसके अलावा, प्रयागराज के मेजा-द्वितीय ताप बिजली परियोजना (मेजा-II थर्मल पावर प्रोजेक्ट) के लिए 400 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार का उद्देश्य बिजली व्यवस्था को और मजबूत बनाना, लोगों को बेहतर बिजली आपूर्ति देना और बिजली कंपनियों की आर्थिक स्थिति में सुधार करना है। हालांकि, चुनावी साल में पेश होने वाले कई बजटों की तरह इस बार कोई बड़ी लोकलुभावन घोषणा नहीं की गई है। इस अनुपूरक बजट में नई मुफ्त योजनाओं या बड़े कल्याणकारी ऐलानों के बजाय विकास कार्यों और आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने पर ज्यादा जोर दिया गया है।

यूपी के 59,020 करोड़ रुपये के सप्लीमेंट्री बजट की बड़ी बातें

  • 59,019.54 करोड़ रुपये का सप्लीमेंट्री बजट: योगी आदित्यनाथ सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए 59,019.54 करोड़ रुपये का सप्लीमेंट्री बजट पेश किया है। इसमें सड़क, बिजली और अन्य विकास कार्यों पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया है।
  • गांवों के विकास के लिए सबसे ज्यादा राशि: ग्रामीण विकास की योजनाओं के लिए 16,432.46 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है। इससे गांवों में सड़क, बुनियादी सुविधाओं और विकास कार्यों को गति मिलेगी।
  • सड़क और परिवहन पर बड़ा निवेश: सड़क, पुल और परिवहन व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए 15,750.01 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इस राशि से नए एक्सप्रेसवे और औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ने वाले मार्ग विकसित किए जाएंगे।
  • कई नए एक्सप्रेसवे परियोजनाओं को मंजूरी: बजट में विंध्य एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे का हरिद्वार तक विस्तार, जेवर एयरपोर्ट को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाली सड़क, आगरा-लखनऊ और गंगा एक्सप्रेसवे को जोड़ने वाली परियोजना तथा एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के लिए धन रखा गया है।
  • उद्योग क्षेत्र को 2,220.89 करोड़ रुपये: उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए 2,220.89 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है। इससे विदेशी निवेश, बड़े उद्योगों, औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार, आईटी सदन, स्टेट डेटा सेंटर 2.0 और अन्य औद्योगिक परियोजनाओं को मदद मिलेगी।
  • बिजली क्षेत्र के लिए 7,358 करोड़ रुपये: बिजली व्यवस्था मजबूत करने के लिए 7,358 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इसमें बिजली वितरण कंपनियों के घाटे को पूरा करने के लिए 6,958 करोड़ रुपये और प्रयागराज की मेजा-द्वितीय ताप बिजली परियोजना के लिए 400 करोड़ रुपये शामिल हैं।
  • पुरानी योजनाओं के लिए अतिरिक्त धन: सरकार ने महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगों से जुड़ी पहले से चल रही योजनाओं के लिए अतिरिक्त राशि दी है। हालांकि, पेंशन या अन्य लाभ की राशि बढ़ाने का कोई ऐलान नहीं किया गया है।
  • किसानों और बुनकरों को भी राहत: कृषि क्षेत्र के लिए 254.15 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे आलू भंडारण पर सब्सिडी, मूल्य स्थिरीकरण कोष और बागवानी को बढ़ावा मिलेगा। वहीं, हथकरघा और बुनकरों के लिए 140.03 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जिनका उपयोग बुनकर कल्याण योजनाओं और संत कबीर टेक्सटाइल एवं परिधान पार्क के विकास में किया जाएगा।

Audi A2 e-tron to be the brand’s most efficient production car yet

audi a2 prototype on road

Audi has revealed fresh details and camouflaged prototype shots of the upcoming A2 e-tron, confirming that the electric hatchback will be the most efficient production car the brand has ever built. The A2 e-tron is expected to debut in full this fall, with European sales scheduled to begin in the end 2026 to early 2027 timeframe.

Reborn Audi A2 adopts the original’s efficiency-first ethos

Achieved 7.81km/kWh WLTP energy efficiency in preliminary testing

Equipped with the optional Efficiency Package, the A2 e-tron recorded a preliminary WLTP energy consumption figure of just 12.8kWh/100km (7.81km/kWh), making it the German carmaker’s most energy-efficient model to date. Notably, the original A2 (sold from 1999 to 2005) was built to deliver superb fuel economy, and its EV successor clearly adheres to the same efficiency-first principles.

Audi says the A2 e-tron achieves its impressive claimed efficiency via a combination of advanced aerodynamics, a highly optimised drivetrain, and a battery designed specifically for everyday use. The Efficiency Package lowers the A2 e-tron’s energy consumption by up to 0.9kWh/100km over the standard model.

The A2 e-tron also boasts a drag coefficient of 0.24, the lowest of any compact Audi to date. To achieve this, Audi has equipped the A2 e-tron with a rounded fascia, a flowing roofline, a fully enclosed underbody, air curtains, wheel arch gap reducers, an upright rear end, and an active front cooling intake that remains closed during normal driving to minimise drag. The intake automatically opens during rapid charging, heavy acceleration, or high ambient temperatures to provide additional cooling for the battery and power electronics.

Other observable design highlights on the A2 e-tron prototype include a split-headlamp setup, L-shaped intakes up front, aero-optimised alloy wheels, wide rectangular tail-lamps, subtly flared fenders, and a silhouette that pays homage to the original A2 – the A2 e-tron actually looks quite similar to the Hyundai Ioniq 3 in profile.

Audi A2 e-tron to offer 61kWh battery in base spec

Estimated WLTP range of around 453km

Entry-level versions of the A2 e-tron are confirmed to offer a 61kWh (58kWh usable) LFP battery that powers a rear-mounted 190hp electric motor dubbed APP350. Multiplying the usable battery capacity with the aforementioned 7.81km/kWh efficiency figure yields an indicative WLTP range of 453km.

The A2 e-tron’s battery uses a cell-to-pack design that improves packaging efficiency while eliminating conventional battery modules. It can even be routinely charged to 100 percent without the degradation concerns associated with other battery chemistries. A revised thermal management system also improves home wallbox charging efficiency to 89.6 percent.

According to Audi, the A2 e-tron’s electric drive system is around 10 percent more efficient than previous designs. Improvements include silicon carbide (SiC) power electronics, thinner motor laminations to reduce energy losses, revised stator windings, and a new low-friction transmission oil paired with a tall 10.2:1 gear ratio for improved highway efficiency.

The A2 e-tron will also support vehicle-to-load (V2L) functionality, allowing owners to power external appliances with up to 2.3kW of output, as well as a vehicle-to-home (V2H) feature that enables the vehicle to act as a home energy storage system when paired with compatible charging equipment.

While Audi has confirmed only the 140kW version of the A2 e-tron for now, more variants are expected to be part of the line-up. Since the A2 e-tron shares its underpinnings with the Volkswagen ID 3 Neo, which gets a 79kWh NMC battery option, the Audi hatchback could offer a similarly sized unit.

श्रीलंका जाने से पहले यह बल्लेबाज भी हुआ चोटिल, बढ़ा टेस्ट टीम का सिरदर्द

भारतीय टीम ने आज श्रीलंका के लिए उड़ान भरी क्योंकि टीम को 15 अगस्त से शुरु हो रही 2 टेस्ट मैचों की सीरीज खेलनी है। लेकिन टीम के दल में जो बल्लेबाज चयनित हुआ था वह टीम के साथ नहीं था। यह बल्लेबाज टेस्ट टीम का शीर्ष क्रम का बल्लेबाज है।

श्रीलंका दौरे पर जाने से पहले सांइ सुदर्शन चोटिल हो गए और टीम बस में नहीं दिखे। मीडिया सूत्रों के हवाले से खबर है कि सांई सुदर्शन भी श्रीलंका के खिलाफ होने वाली दो टेस्ट मैचों की सीरीज के लिए फिट नहीं है। हालांकि उनकी चोट पर स्पष्टता अभी नहीं आई है। लेकिन अगर यह खबर सच है तो भारतीय टीम के लिए अच्छी खबर नहीं है क्योंकि वह बाएं हाथ के बल्लेबाज है और स्पिन गेंदबाजी अच्छा खेलते हैं।

इससे पहले रविवार को जब खबर आई कि जसप्रीत बुमराह चोट के कारण पूरे श्रीलंका दौरे से ही बाहर हो गए हैं तो बैंगलूरू स्थित सैंटर ऑफ एक्सिलेंस पर भारतीय क्रिकेट फैंस सवाल उठाने लग गए।

तेज गेंदबाज हर्षित राणा और ऑलराउंडर नीतीश रेड्डी चोटिल होने के कारण श्रीलंका के खिलाफ श्रृंखला में नहीं खेल पाएंगे। ऑलराउंडर वाशिंगटन सुंदर भी मांसपेशियों में खिंचाव के कारण पहले टेस्ट मैच से बाहर हो गए हैं जबकि तेज गेंदबाज आकाशदीप अभी तक पीठ की दर्द से नहीं उबर पाए हैं।

श्रीलंका में स्पिन की मुफीद पिचें भारत का इंतजार करेंगी ऐसे में जसप्रीत बुमराह को ऐसी पिच पर आराम देने की सलाह रविचंद्रन अश्विन ने दी थी। लेकिन विश्व टेस्ट चैंपियनशित चक्र 2025-27 को देखते हुए अब भारत की टीम ज्यादा जोखिम नहीं ले सकती। टीम इंडिया के लिए बचे हुए 9 मैचों में से 7 जीतने आवश्यक है।

भारतीय टीम इस प्रकार है: शुभमन गिल (कप्तान), केएल राहुल (उपकप्तान), यशस्वी जायसवाल, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर),रविंद्र जडेजा , कुलदीप यादव, मानव सुथार, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा, गुरनूर बराड़, देवदत्त पडिक्कल, सारांश जैन

अगले 48 घंटे प्रचंड बारिश का अलर्ट: पूर्वोत्तर से उत्तर भारत तक बरसेंगे बादल! यूपी-दिल्ली समेत इन राज्यों में होगी मूसलाधार बारिश

IMD Weekly Weather Update: देश भर में मानसून एक बार फिर अत्यंत आक्रामक रूप में लौट आया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आगामी 48 घंटों के दौरान पूर्वोत्तर भारत, पूर्वी राज्यों और उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में प्रचंड बारिश का हाई अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले दो दिनों तक पूर्वोत्तर और उससे सटे पूर्वी भारत में भारी से बहुत भारी बारिश होगी जबकि इसके बाद के 5 दिनों तक भी कुछ स्थानों पर तेज बारिश का सिलसिला बना रहेगा।

विशेष रूप से 4 और 5 अगस्त 2026 को असम, मेघालय, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 21 सेमी या उससे अधिक अत्यधिक मूसलाधार बारिश की चेतावनी दी गई है। इसके अलावा दक्षिण भारत के तटीय इलाकों में भी आज भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान जताया गया है।

देश में सक्रिय प्रमुख मौसम प्रणालियां

मौसम में आए इस बड़े बदलाव और भारी बारिश के पीछे देश भर में बने कई मौसमी सिस्टम जिम्मेदार हैं। मानसून ट्रफ का पश्चिमी सिरा अपनी सामान्य स्थिति से दक्षिण की ओर है, जबकि इसका पूर्वी सिरा उत्तर की तरफ स्थित है। मध्य और ऊपरी ट्रोपोस्फेरिक पश्चिमी हवाओं में एक पश्चिमी विक्षोभ बना हुआ है। उत्तरी हरियाणा और आसपास, उत्तर-पूर्वी राजस्थान, उत्तर-पश्चिम बिहार, उत्तर-पूर्वी असम और पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी व उससे सटे तटीय आंध्र प्रदेश के ऊपर अलग-अलग निचले और मध्य ट्रोपोस्फेरिक स्तरों पर चक्रवाती परिसंचरण बने हुए हैं।

उत्तर भारत: दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और UP में कैसा रहेगा मौसम?

उत्तर-पश्चिम भारत के पहाड़ी और मैदानी राज्यों में अगले कई दिनों तक मानसूनी बारिश का दौर जारी रहने वाला है। दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब में 4 से 6 अगस्त के बीच व्यापक बारिश देखने को मिलेगी। इस दौरान 4 से 6 अगस्त तक अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 4 से 6 अगस्त और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 4 से 7 अगस्त तक व्यापक बारिश का अनुमान है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 4 और 7 अगस्त को भारी बारिश हो सकती है, जबकि 5 और 6 अगस्त को बहुत भारी बारिश का अलर्ट है। वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश में 4 और 5 अगस्त को बहुत भारी बारिश दर्ज हो सकती है।

हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में 4 से 10 अगस्त तक गरज-चमक के साथ रुक-रुक कर बारिश होगी। हिमाचल में 4 अगस्त को बहुत भारी बारिश और 5 से 10 अगस्त तक भारी बारिश की संभावना है। उत्तराखंड में 4 और 5 अगस्त को बहुत भारी बारिश तथा 6 से 10 अगस्त के दौरान भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख में 4-5 अगस्त और 9-10 अगस्त को भारी बारिश हो सकती है। पूर्वी राजस्थान में 4, 6 और 9-10 अगस्त को भारी तथा 7 और 8 अगस्त को बहुत भारी बारिश का अनुमान है।

पूर्वोत्तर भारत: असम, मेघालय और बंगाल में ‘अत्यंत भारी बारिश’ की चेतावनी

पूर्वोत्तर भारत में अगले 48 घंटे बेहद संवेदनशील रहने वाले हैं, जहां अत्यधिक मूसलाधार बारिश से जीवन अस्त-व्यस्त हो सकता है। असम और मेघालय में 4 और 5 अगस्त को अलग-अलग जगहों पर अत्यंत भारी बारिश (21 सेमी या उससे अधिक) होने की पूरी संभावना है। इसके बाद 6 से 10 अगस्त तक भी लगातार भारी बारिश जारी रहेगी।

अरुणाचल प्रदेश में 4 और 5 अगस्त को अलग-अलग स्थानों पर बहुत भारी बारिश का अलर्ट है, जबकि 6, 9 और 10 अगस्त को भी भारी बारिश की आशंका जताई गई है। नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 4 से 10 अगस्त तक व्यापक बारिश का सिलसिला रहेगा, जहां 4 अगस्त को बहुत भारी बारिश और 5 से 10 अगस्त तक भारी बारिश का अनुमान है।

पूर्वी भारत: बिहार, झारखंड और बंगाल का हाल

पूर्वी भारत के राज्यों में भी मानसूनी हवाओं का असर साफ दिखेगा। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 4 अगस्त को अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट है। 5 अगस्त को यहां बहुत भारी बारिश होगी। वहीं गांगेय पश्चिम बंगाल में 6 अगस्त को बहुत भारी बारिश की संभावना है। बिहार में 4 और 6 अगस्त को भारी बारिश जबकि 5 अगस्त को बहुत भारी बारिश हो सकती है। झारखंड में 4 से 8 अगस्त के दौरान अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

ओडिशा में 5 और 6 अगस्त को बहुत भारी बारिश तथा 4 और 7 से 10 अगस्त तक भारी बारिश का अनुमान है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 4 से 10 अगस्त के दौरान 50 से 60 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज आंधी-तूफान चल सकता है।

मध्य और पश्चिम भारत: एमपी, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में अलर्ट

मध्य प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में 4 से 8 अगस्त तक भारी बारिश होगी, जिसमें 6 और 7 अगस्त को बहुत भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। छत्तीसगढ़ में 4 से 10 अगस्त तक बारिश जारी रहेगी और 4 से 8 अगस्त तक भारी बारिश का अलर्ट रहेगा। कोंकण और गोवा में 5 अगस्त को तथा मध्य महाराष्ट्र में 5 और 6 अगस्त को बहुत भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा 4 और 6 अगस्त को इन क्षेत्रों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

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दक्षिण भारत: कर्नाटक और केरल में भारी बारिश

तटीय कर्नाटक और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में आज (4 अगस्त) अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। केरल और माहे में 4 से 8 अगस्त तक तथा तटीय और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 5 से 7 अगस्त तक भारी बारिश की संभावना है। तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल, तटीय आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने और बिजली कड़कने की चेतावनी दी गई है।

RITES Q1 Results: सरकारी रेल कंपनी को ₹98 करोड़ का मुनाफा, डिविडेंड का ऐलान

RITES Q1 Results: सरकारी रेलवे कंसल्टेंसी और इंजीनियरिंग कंपनी RITES ने जून तिमाही में स्थिर प्रदर्शन किया है। कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 7.7% बढ़कर ₹98 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹91 करोड़ था।

रेवेन्यू बढ़ा, मार्जिन में गिरावट

RITES का जून तिमाही में रेवेन्यू 8.6% बढ़कर ₹532 करोड़ हो गया। हालांकि, EBITDA लगभग स्थिर रहकर ₹114 करोड़ रहा। वहीं, EBITDA मार्जिन 23.4% से घटकर 21.5% पर आ गया, जिससे ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव दिखा।

₹1.40 प्रति शेयर अंतरिम डिविडेंड

RITES के बोर्ड ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹1.40 प्रति शेयर के पहले अंतरिम डिविडेंड का ऐलान किया है। 10 अगस्त 2026 को रिकॉर्ड डेट तय की गई है। पात्र शेयरधारकों को 2 सितंबर 2026 तक डिविडेंड का भुगतान कर दिया जाएगा।

दक्षिण अफ्रीका से मिला बड़ा ऑर्डर

जुलाई में RITES को दक्षिण अफ्रीका की Volantis Asset Finance से 3,000 HP Cape Gauge डीजल-इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव की सप्लाई और कमीशनिंग का 3.582 करोड़ डॉलर (35.82 मिलियन डॉलर) का निर्यात ऑर्डर मिला। यह प्रोजेक्ट 20 महीनों में पूरा किया जाएगा। कंपनी का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय कारोबार आने वाले समय में ग्रोथ का बड़ा आधार बनेगा।

RITES के शेयर

नतीजों के बाद मंगलवार दोपहर RITES का शेयर NSE पर करीब 1.42% की गिरावट के साथ ₹216.19 पर कारोबार कर रहा था।

RITES सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है। यह रेलवे, मेट्रो, हाईवे और बंदरगाह परियोजनाओं पर काम करती है। कंपनी कंसल्टेंसी, इंजीनियरिंग, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और रोलिंग स्टॉक सेवाएं देती है। इसका कारोबार भारत के साथ-साथ कई विदेशी देशों में भी फैला हुआ है।

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LPG e-KYC Alert: 16 अगस्त से पहले कर लें ये काम, वरना सिलेंडर बुकिंग और सब्सिडी में आ सकती है परेशानी

LPG e-KYC Alert: घरेलू LPG ग्राहकों के लिए जरूरी खबर सामने आई है। सरकारी तेल कंपनियों ने अब e-KYC प्रक्रिया को पूरा कराने की मुहिम तेज कर दी है। कंपनियां चाहती हैं कि सभी घरेलू LPG उपभोक्ता 16 अगस्त 2026 तक आधार आधारित e-KYC वेरिफिकेशन पूरा कर लें।

इसे लेकर देशभर में ग्राहकों के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर SMS भेजे जा रहे हैं। मैसेज में ग्राहकों को बताया जा रहा है कि अगर उन्होंने समय पर यह जरूरी वेरिफिकेशन पूरा नहीं किया, तो उन्हें सरकारी तय घरेलू दरों पर LPG सिलेंडर बुक करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

बता दें कि इस कदम का मकसद नकली और डुप्लिकेट LPG कनेक्शन को खत्म करना है, साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी सब्सिडी सिर्फ असली घरेलू उपभोक्ताओं तक ही पहुंचे।

अगर आप तय समय-सीमा तक काम पूरा नहीं करते हैं तो क्या होगा?

तेल कंपनियों ने चेतावनी दी है कि जो ग्राहक तय समय-सीमा तक अपना e-KYC पूरा नहीं कर पाते हैं, उन्हें सब्सिडी वाले घरेलू रेट पर LPG सिलेंडर बुक करने में परेशानी हो सकती है।

तेल कंपनियों ने चेतावनी दी है कि जो ग्राहक तय समय सीमा तक e-KYC पूरा नहीं करेंगे, उन्हें सब्सिडी वाली घरेलू दरों पर LPG सिलेंडर बुक करने में परेशानी हो सकती है। ऐसे ग्राहकों को वेरिफिकेशन पूरा होने तक सिलेंडर कमर्शियल कीमतों पर खरीदना पड़ सकता है।

इसके अलावा, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों को भी LPG सब्सिडी मिलने में रुकावट आ सकती है अगर वे समय पर आधार वेरिफिकेशन पूरा नहीं कराते हैं तो।

लाखों लोगों का वेरिफिकेशन अभी बाकी

देश के कई हिस्सों में e-KYC मुहिम को धीमी प्रतिक्रिया मिली है।

‘पुणे मिरर’ की रिपोर्ट के मुताबिक, अकेले पुणे जिले में करीब 6 लाख घरेलू LPG ग्राहकों में से लगभग 4.80 लाख (यानी करीब 80%) ने अभी तक जरूरी वेरिफिकेशन प्रोसेस पूरा नहीं किया है।

अधिकारियों ने बताया कि हाल ही में गैस सप्लाई में कुछ समय के लिए रुकावट आने से चिंता पैदा हुई थी, जिसके बाद करीब 1.25 लाख ग्राहकों ने अपना रजिस्ट्रेशन पूरा किया। हालांकि, सिलेंडर की रेगुलर सप्लाई फिर से शुरू होने के बाद वेरिफिकेशन की रफ्तार धीमी पड़ गई है।

गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट अरुण मिश्रा ने कहा कि डिस्ट्रीब्यूटर्स ने फोन कॉल, SMS अलर्ट और घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करने की मुहिम शुरू की है, जिसमें ग्राहकों से अपील की जा रही है कि वे आखिरी समय का इंतजार न करें।

LPG e-KYC कैसे पूरा करें?

ग्राहक कई तरीकों से आधार-आधारित वेरिफिकेशन पूरा कर सकते हैं:

  • Indian Oil One App के जरिए (इंडियन ऑयल ग्राहकों के लिए)
  • अपनी LPG कंपनी के आधिकारिक मोबाइल ऐप या पोर्टल के माध्यम से
  • अपने नजदीकी LPG डिस्ट्रीब्यूटर या गैस एजेंसी पर जाकर
  • सिलेंडर डिलीवरी के समय LPG डिलीवरी कर्मचारी के जरिए

वहीं, वेरिफिकेशन पूरा करने के लिए ग्राहकों को अपने आधार कार्ड, रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और पहचान से जुड़ी अन्य जानकारी की जरूरत होगी।

ग्राहकों को भेजा गया SMS अलर्ट

तेल कंपनियां उन ग्राहकों को बार-बार रिमाइंडर भेज रही हैं जिन्होंने अभी तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं की है।

ऐसे ही एक मैसेज में लिखा है: “प्रिय ग्राहक, घरेलू दरों पर LPG सिलेंडर पाने के लिए आपको e-KYC पूरा करना होगा। बार-बार रिमाइंडर मिलने के बावजूद, आपने अभी तक e-KYC पूरा नहीं किया है।”

इंडियन ऑयल ने ग्राहकों को यह भी बताया है कि जो लोग 16 अगस्त, 2026 तक e-KYC पूरा नहीं करेंगे, वे वेरिफिकेशन पूरा होने तक घरेलू दरों पर LPG सिलेंडर पाने के हकदार नहीं होंगे।

PM उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए भी जरूरी

यह जरूरी वेरिफिकेशन प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों पर भी लागू होता है।

2016 में शुरू की गई इस योजना के तहत पूरे भारत में 10 करोड़ से ज्यादा लाभार्थी हैं। अभी इस योजना के तहत सब्सिडी के तौर पर हर सिलेंडर पर 300 रुपये का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) मिलता है, जो साल में ज्यादा से ज्यादा चार LPG रिफिल के लिए है।

अधिकारियों ने PMUY लाभार्थियों को सलाह दी है कि वे सब्सिडी पेमेंट में किसी भी रुकावट से बचने के लिए समय सीमा खत्म होने से पहले अपना e-KYC पूरा कर लें।

e-KYC को अनिवार्य क्यों किया जा रहा है?

अधिकारियों के अनुसार, इस वेरिफिकेशन अभियान का मकसद हर एक्टिव कनेक्शन को एक असली ग्राहक से जोड़कर LPG डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम को मजबूत करना है। उम्मीद है कि इससे डुप्लीकेट या फर्जी कनेक्शन पर रोक लगेगी और यह पक्का हो सकेगा कि सरकारी सब्सिडी सिर्फ सही हकदार लोगों को ही मिले।

अधिकारियों ने ग्राहकों से अपील की है कि वे 16 अगस्त से काफी पहले ही वेरिफिकेशन पूरा कर लें, ताकि आखिरी समय की भीड़-भाड़ से बचा जा सके और LPG बुकिंग या सब्सिडी के फायदों में कोई रुकावट न आए।

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