योगी सरकार ने पेश किया 59019.54 करोड़ का अनुपूरक बजट

Yogi Government Supplementary Budget 2026-27: उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹59,019.54 करोड़ का अनुपूरक बजट सदन में प्रस्तुत किया। अनुपूरक मांगों के अनुरूप प्रस्तावित अनुपूरक बजट प्रस्तुत करते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित अनुपूरक बजट का कुल आकार ₹59,019.54 करोड़ है। प्रस्तावित अनुपूरक बजट का आकार इस वर्ष के मूल बजट का 6.47 प्रतिशत है। इसमें राजस्व लेखे का व्यय ₹17,399.50 करोड़ तथा पूंजी लेखे का व्यय ₹41,620.04 करोड़ रखा गया है।

 

उन्होंने कहा कि पूंजीगत व्यय पर विशेष बल देने का उद्देश्य प्रदेश में सड़क, ऊर्जा, उद्योग, चिकित्सा, ग्रामीण विकास तथा अन्य आधारभूत संरचनाओं का तेजी से विस्तार करना है, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती मिले। इस अनुपूरक बजट के माध्यम से योगी सरकार का उद्देश्य प्रदेश में चल रही विकास परियोजनाओं को गति देना, नई जनकल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करना तथा आधारभूत संरचना को और अधिक मजबूत बनाना है। उन्होंने बताया कि इस प्रस्तावित अनुपूरक बजट में नई मांगों के लिए ₹7,854.25 करोड़ की व्यवस्था की गई है। इससे सरकार नई विकास परियोजनाओं के साथ-साथ पहले से चल रही योजनाओं को भी और अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा सकेगी। 

उद्योग और निवेश को सबसे बड़ी प्राथमिकता

वित्त मंत्री ने बताया कि अनुपूरक बजट में भारी एवं मध्यम उद्योग विभाग के लिए ₹22,107.88 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके माध्यम से औद्योगिक निवेश, रोजगार सृजन और प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को नई गति प्रदान की जा सकेगी। 

गांवों के विकास पर विशेष फोकस

सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को भी बड़ी प्राथमिकता दी है। इसके लिए ग्राम विकास विभाग के लिए ₹17,942.73 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस राशि का उपयोग ग्रामीण अधोसंरचना, पंचायत विकास, ग्रामीण आजीविका, मूलभूत सुविधाओं तथा गांवों में विकास कार्यों को गति देने में किया जाएगा।

ऊर्जा क्षेत्र को मिलेगा बड़ा निवेश

प्रदेश में बिजली व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने तथा ऊर्जा अवसंरचना के विस्तार के लिए ऊर्जा विभाग को ₹7,422.27 करोड़ की अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध कराई गई है। सरकार का उद्देश्य प्रदेश में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ औद्योगिक एवं घरेलू उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना है।

स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी मजबूती

अनुपूरक बजट में चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के लिए ₹2,000.25 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस राशि से अस्पतालों की सुविधाओं का विस्तार, चिकित्सा सेवाओं का सुदृढ़ीकरण तथा स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में सहायता मिलेगी।

समाज कल्याण और महिला सशक्तीकरण पर भी जोर

सरकार ने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को और प्रभावी बनाने के लिए समाज कल्याण विभाग को ₹1,655 करोड़ आवंटित किए हैं। वहीं महिला कल्याण विभाग के लिए ₹1,094.40 करोड़ की व्यवस्था की गई है, जिससे महिलाओं के सशक्तीकरण, सुरक्षा और कल्याण से जुड़ी योजनाओं को मजबूती मिलेगी।

सड़क और आधारभूत ढांचे का होगा विस्तार

अनुपूरक बजट में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के लिए ₹700.01 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस राशि का उपयोग सड़क निर्माण, पुलों तथा अन्य आधारभूत ढांचागत परियोजनाओं को गति देने में किया जाएगा।

वित्तीय अनुशासन पर सरकार का जोर

वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने सदन को भरोसा दिलाया कि प्रदेश की वित्तीय स्थिति पूरी तरह मजबूत है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश का राजकोषीय घाटा (फिसकल डेफिसिट) निर्धारित सीमा के भीतर है, जो सरकार के वित्तीय अनुशासन और बेहतर आर्थिक प्रबंधन का प्रमाण है। सरकार विकास कार्यों को गति देने के साथ-साथ वित्तीय संतुलन बनाए रखने के लिए भी पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

₹9.71 लाख करोड़ से अधिक हुआ राज्य का कुल बजट 

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए उत्तर प्रदेश सरकार का मूल बजट ₹9,12,696.35 करोड़ था, जिसमें राजस्व व्यय ₹6,64,470.55 करोड़ तथा पूंजीगत व्यय ₹2,48,225.80 करोड़ निर्धारित किया गया था। अब ₹59,019.54 करोड़ के अनुपूरक बजट को शामिल किए जाने के बाद राज्य का कुल बजट बढ़कर ₹9,71,715.89 करोड़ हो जाएगा। इसमें राजस्व व्यय बढ़कर ₹6,81,870.05 करोड़ तथा पूंजीगत व्यय ₹2,89,845.84 करोड़ हो जाएगा। इससे स्पष्ट है कि सरकार ने अतिरिक्त संसाधनों का बड़ा हिस्सा विकास परियोजनाओं, आधारभूत संरचना और जनकल्याणकारी योजनाओं के विस्तार के लिए पूंजीगत निवेश पर केंद्रित किया है।

सेक्टरवार अनुपूरक बजट का बंटवारा

वित्तीय वर्ष 2026-27 के अनुपूरक बजट में सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए धनराशि का प्रावधान किया है। कुल ₹59,019.14 करोड़ की अनुपूरक मांग में सबसे अधिक ₹45,568.63 करोड़ (लगभग 77%) आर्थिक सेवाओं के लिए प्रस्तावित किए गए हैं, जिससे स्पष्ट है कि सरकार का प्रमुख फोकस आधारभूत संरचना, उद्योग, ऊर्जा, कृषि और विकास कार्यों पर है। इसके अलावा सामाजिक सेवाओं के लिए ₹9,707.74 करोड़ (लगभग 16%), सामान्य सेवाओं के लिए ₹633.19 करोड़ (लगभग 1%) तथा कर्ज एवं उधार संबंधी दायित्वों के लिए ₹3,110.02 करोड़ (लगभग 6%) की व्यवस्था की गई है। (फाइल फोटो)

मुनाफा डबल और ₹14.40 का डिविडेंड, दोहरे सपोर्ट पर 14% चढ़ा शिपिंग शेयर

GE Shipping Share Price: शिपिंग और ऑयलफील्ड सर्विसेज प्रोवाइडर ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग कंपनी (जीई शिपिंग कंपनी) के शेयरों में आज खरीदारी का जोरदार रुझान दिखा। जून तिमाही में मुनाफे में ढाई गुना से अधिक उछाल और शानदार डिविडेंड के ऐलान ने इसके शेयरों को ऐसा सपोर्ट किया कि यह 14% से अधिक उछल पड़ा। ऊपरी स्तर पर मुनाफावसूली के चलते भाव थोड़े नरम पड़े लेकिन निचले स्तर पर खरीदारी के चलते भाव अब भी मजबूत बने हुए हैं। फिलहाल BSE पर यह 3.27% की बढ़त के साथ ₹1,441.90 पर है। इंट्रा-डे में यह 14.57% चढ़कर ₹1,599.75 तक पहुंच गया था।

Great Eastern Shipping Company की कैसी रही जून तिमाही

चालू वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही अप्रैल-जून 2026 में ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग कंपनी का शुद्ध मुनाफा कंसालिडेटेड लेवल पर 159.43% उछलकर ₹1308.84 करोड़ पर पहुंच गया। इस दौरान ऑपरेशंस से कंपनी का रेवेन्यू 66.91% चढ़कर ₹2005.36 हो गया। ऑपरेटिंग लेवल पर भी कंपनी की सेहत तेजी से मजबूत हुई। सालाना आधार पर जून तिमाही में इसका ईबीआईटीडीए ₹642.8 करोड़ से ₹1,337.7 करोड़ पर पहुंच गया तो ईबीआईटीडीए मार्जिन 53.5% से बढ़कर 66.7% पर पहुंच गया। सेगमेंटवाइज बात करें तो कंपनी का शिपिंग रेवेन्यू सालाना आधार पर 90.20% बढ़कर ₹1890.97 करोड़ और ऑफशोर सर्विसेज से रेवेन्यू 18.87% बढ़कर ₹406.02 करोड़ पर पहुंच गया।

नतीजे के साथ-साथ कंपनी ने डिविडेंड का भी ऐलान किया है। ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग कंपनी हर शेयर पर ₹14.40 का अंतरिम डिविडेंड बांटने वाली है, जिसका रिकॉर्ड डेट 7 अगस्त फिक्स किया गया है जिसे 27 अगस्त या इसके बाद शेयरहोल्डर्स के खाते में क्रेडिट किया जाएगा।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल

ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग कंपनी के शेयरों ने निवेशकों की कम समय में ही ताबड़तोड़ कमाई कराई है। पिछले साल 6 अगस्त 2025 को बीएसई पर यह ₹914.65 के भाव पर था, जो इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचले स्तर है। इस निचले स्तर से यह 9 महीने में यह 96.58% उछलकर 19 मई 2026 को ₹1,798.00 पर पहुंच गया जो इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है।

देश में सुस्त पड़ी गोल्ड की डिमांड लेकिन, खर्च पहुंचा ₹1.98 लाख करोड़ के रिकॉर्ड हाई पर

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Daily vs Weekly vs Monthly SIP: डेली, वीकली या मंथली? कौन सी फ्रिक्वेंसी बनाती है सबसे ज्यादा पैसा, 30 साल के डेटा एनालिसिस ये पता चला

SIP Daily vs Monthly Comparison: क्या आपको भी ऐसा लगता है कि महीने में एक बार निवेश करने के बजाय हर दिन SIP करने से ज्यादा मुनाफा मिलता है? अगर आपका जवाब हां है, तो आप ऐसा सोचने वाले अकेले व्यक्ति नहीं हैं। बहुत से निवेशकों का मानना है कि रोजाना निवेश करने से बाजार की गिरावट का फायदा बेहतर तरीके से मिलता है और औसत लागत सुधरती है।

लेकिन व्हाइटओक कैपिटल म्यूचुअल फंड की एक हालिया और चौंकाने वाली स्टडी ने इस धारणा को बदल दिया है। आइए जानते हैं कि लंबी अवधि में कौन सी SIP फ्रिक्वेंसी वास्तव में सबसे ज्यादा वेल्थ क्रिएशन करती है।

30 साल का डेटा एनालिसिस, क्या कहते हैं आंकड़े?

व्हाइटओक कैपिटल ने अगस्त 1996 से जून 2026 के बीच BSE सेंसेक्स टोटल रिटर्न इंडेक्स (TRI) का विश्लेषण किया। इस स्टडी में यह सुनिश्चित किया गया कि तीनों ही विकल्पों (डेली, वीकली और मंथली) में निवेश की कुल राशि बिल्कुल समान रखी जाए।

डेली और वीकली SIP रिटर्न: स्टडी के मुताबिक, डेली और वीकली SIP के जरिए कुल कॉर्पस बढ़कर ₹12.33 करोड़ तक पहुंचा।

मंथली SIP रिटर्न: वहीं, मंथली SIP के जरिए कुल फंड बढ़कर ₹12.45 करोड़ हो गया।

XIRR रिटर्न: हैरान करने वाली बात यह है कि तीनों ही तरीकों से लॉन्ग-टर्म एनुअलाइज्ड रिटर्न (XIRR) 13.47% ही रहा।

Daily vs Weekly vs Monthly SIP: डेली, वीकली या मंथली? कौन सी फ्रिक्वेंसी बनाती है सबसे ज्यादा पैसा, 30 साल के डेटा एनालिसिस ये पता चला

इसका साफ मतलब है कि हर दिन पैसे लगाने से आपको कोई जादुई या बहुत बड़ा एक्स्ट्रा फायदा लॉन्ग-टर्म में नहीं मिलता।

डेली SIP मंथली से ज्यादा बेहतर क्यों नहीं साबित होती?

पहली बार में यह बात थोड़ी अजीब लग सकती है, क्योंकि डेली SIP महीने के अलग-अलग दिनों और अलग-अलग कीमतों पर यूनिट्स खरीदती है।मंथली SIP महीने की किसी एक तारीख पर पूरा पैसा एक साथ लगाती है।

शॉर्ट टर्म में तो डेली इन्वेस्टिंग से थोड़ा फर्क पड़ सकता है, लेकिन दशकों के लंबे समय में बाजार समय के साथ ऊपर ही जाता है। ऐसे में महीने के किस दिन पैसा निवेश हुआ, इसका असर लंबे समय के चक्र में नगण्य हो जाता है। सबसे बड़ा असर इस बात का पड़ता है कि आपने बाजार में कुल कितने साल बिताए।

आपके लिए कौन सी SIP फ्रिक्वेंसी सबसे सही है?

डेटा साफ है कि कैलेंडर को ऑप्टिमाइज करने या बार-बार तारीख बदलने से रिटर्न पर कोई खास असर नहीं पड़ता। इसलिए आपको अपनी सुविधा के हिसाब से चुनाव करना चाहिए:

सैलरीड प्रोफेशनल्स के लिए: मंथली SIP सबसे बेहतरीन है, जिसे आप अपनी सैलरी आने के अगले दिन सेट कर सकते हैं। इससे ऑटोमैटिक सेविंग की आदत बनती है।

फ्रीलांसर या बिजनेस ओनर्स के लिए: जिनकी इनकम फिक्स नहीं होती, वे अपनी सहूलियत के हिसाब से वीकली या डेली SIP का विकल्प चुन सकते हैं, ताकि वे रेगुलर निवेश कर सकें।

वेल्थ क्रिएशन के असली मंत्र: इन 4 बातों पर दें ध्यान

दैनिक या मासिक बहस में अपना समय बर्बाद करने के बजाय, आपको उन फैक्टर्स पर फोकस करना चाहिए जो सचमुच आपका बड़ा फंड तैयार करते हैं:

  1. जल्द से जल्द शुरुआत करें: जितनी कम उम्र में निवेश शुरू करेंगे, कम्पाउंडिंग का उतना ही बड़ा फायदा मिलेगा।
  2. बाजार के उतार-चढ़ाव में टिके रहें: मार्केट करेक्शन या गिरावट के दौरान अपनी SIP बंद करने की गलती बिल्कुल न करें।
  3. टॉप-अप का नियम अपनाएं: जैसे-जैसे आपकी सैलरी या इनकम बढ़े, अपनी SIP की राशि में भी सालाना इजाफा करें।
  4. धैर्य रखें: शेयर बाजार में पैसा रातों-रात नहीं, बल्कि अनुशासन और लंबे समय के धैर्य से बनता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

संन्यास की अटकलों के बीच महेंद्र सिंह धोनी ने चेन्नई में दौड़ाई तेज गति से बाइक (Video)

IPL 2027 से संन्यास की अटकलों के बीच महेंद्र सिंह धोनी ने चेन्नई में तेज बाइक दौड़ाई। गौरतलब है कि महेंद्र सिंह धोनी को तेज बाइक दौड़ाने का शौक है। वह हाल ही में चेन्नई के एक रेसिंग ट्रैक पर हाई स्पीड बाइक चलाते नजर आए। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें वह पेशेवर राइडिंग सूट  और हेलमेट पहनकर शानदार अंदाज में तेज गति से बाइक की सवारी कर रहे हैं।

बाइक के शौकीन है माही

माही के Cars और Bikes के प्रति दीवानगी और प्यार से हम सभी वाकिफ हैं। उसके पास कई प्रकार की कार और बाइक है जो किसी को भी हैरान कर सकती हैं जैसे  Hummer H2, Audi Q7, Mitsubishi Pajero SFX, Land Rover Freelander, Mahindra Scorpio, Ferrari 599 GTO, Jeep Grand Cherokee Trackhawk, Nissan Jonga, Pontiac Firebird Trans am, Mercedes Benz GLE, Rolls Royce Silver Shadow.

MS Dhoni के पास 50 से अधिक बाइक हैं, जिनमें  Harley-Davidson Fat Boy, Kawasaki Ninja H2, Ducati 1098, Yamaha RD350 and Suzuki Hayabusa भी शामिल हैं।

संन्यास के बाद बाईक राइड की योजना है धोनी की

सीएसके के फैन्स की फैन फॉलोइंग इतनी ज़्यादा है कि वे कभी नहीं चाहेंगे कि उनके पसंदीदा क्रिकेटर एम.एस. धोनी, जिन्हें वे प्यार से “थाला” कहते हैं (जिसका मतलब होता है लीडर), संन्यास लें। इतनी उम्र के बाद भी धोनी आज भी बेहद फिट हैं, लेकिन बीते कुछ सालों में उनका प्रदर्शन खास नहीं रहा। IPL 2026 में तो वह एक भी बार मैदान पर नहीं उतरे।

चेन्नई सुपर किंग्स के स्टार क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी ने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में अपने भविष्य के बारे में दुनिया को अटकलें लगाने पर मजबूर कर दिया और कहा कि अगले सेशन में वह वापसी करेंगे या नहीं, इस पर फैसला लेने के लिए पूरा समय लेंगे।उन्होंने कहा कि अब वह रांची में अपनी बाइक की सवारी (Bike Ride) का आनंद लेंगे।


Restaurant Brands का शेयर बना रॉकेट, 18% दौड़ा, क्या यह है खरीदारी का सही समय?

Restaurant Brands Asia Share Price: बर्गर किंग इंडिया की पैरेंट कंपनी रेस्टोरेंट ब्रांड्स एशिया (Restaurant Brands Asia) के शेयरों में मंगलवार 4 अगस्त को तेज छलांग लगाते नजर आए। शेयर इंट्राडे में 19 फीसदी से ज्यादा चढ़ा। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर, रेस्टोरेंट ब्रांड्स एशिया के शेयर की कीमत ₹84 के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, जो पिछले क्लोजिंग प्राइस ₹70.76 से 18.56% ज़्यादा है। इस क्विक-सर्विस रेस्टोरेंट (QSR) स्टॉक में इस साल अब तक 28% की बढ़त हुई है।

शेयर में आज की तेज़ी इस स्मॉल-कैप स्टॉक को उसके 52-हफ़्ते के उच्चतम स्तर ₹87.65 के करीब ले आई है, जो पिछले साल सितंबर में बना था। वहीं, इसका 52-हफ़्ते का निचला स्तर ₹57.15 है।

कैसे रहे Q1 नतीजे

जून 2026 को समाप्त तिमाही के लिए, कंपनी ने ₹28.3 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट लॉस दर्ज किया, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह नुकसान ₹48 करोड़ था। मैनेजमेंट ने कहा कि वे प्राइसिंग ऑप्टिमाइज़ेशन, मेन्यू में नए बदलाव और फिक्स्ड कॉस्ट (जिसमें यूटिलिटीज़ भी शामिल हैं) पर बेहतर नियंत्रण के ज़रिए मुनाफा बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

इस बीच, समीक्षाधीन तिमाही के दौरान कंपनी के रेवेन्यू में साल-दर-साल (Y-o-Y) 18% की बढ़त हुई और यह ₹822.6 करोड़ हो गया। इसकी मुख्य वजह भारत के कारोबार में मज़बूत प्रदर्शन था, जबकि इंडोनेशिया का कारोबार कुल ग्रोथ पर दबाव डालता रहा।

कंपनी ने 13% की इंडस्ट्री-लीडिंग सेम-स्टोर सेल्स ग्रोथ (SSSG) बनाए रखी। इसे डाइन-इन और डिलीवरी दोनों चैनलों पर अच्छी मांग और वैल्यू ऑफरिंग से मदद मिली।

इसने Q1 में नौ स्टोर जोड़े और FY27 में 80 स्टोर खोलने की अपनी योजना को दोहराया। इंडोनेशिया में, इसकी टर्नअराउंड स्ट्रैटेजी पर काम चल रहा है और RBA लागत पर बेहतर नियंत्रण और ऑपरेशनल सुधारों के ज़रिए नुकसान कम करने पर ध्यान दे रही है।

क्या यह है खरीदारी की सही समय

घरेलू ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (MOFSL) इस शेयर को लेकर पॉजिटिव बनी हुई है। कंपनी ने बेहतर मार्जिन को देखते हुए FY27 के लिए EBITDA (ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन से पहले की कमाई) के अनुमान को 5% और FY28 के लिए 8% बढ़ा दिया है।

MOFSL का कहना है कि जैसे-जैसे और स्टोर मैच्योर होंगे और नेटवर्क में नए आउटलेट्स का योगदान बेहतर होगा, उनसे मार्जिन रिकवरी में मदद मिलने की उम्मीद है। कंपनी को उम्मीद है कि इंडोनेशियाई बिजनेस में धीरे-धीरे सुधार होगा क्योंकि कंपनी ने खराब प्रदर्शन करने वाले स्टोर बंद करके अपने पोर्टफोलियो को बेहतर बनाया है। हालांकि, उसे उम्मीद है कि इंडोनेशिया में निकट भविष्य में चुनौतियां बनी रहेंगी।

ब्रोकरेज ने 125 रुपये के टारगेट प्राइस के साथ अपनी ‘BUY’ रेटिंग को दोहराया है, जो पिछले क्लोजिंग प्राइस से 75% की बढ़त का संकेत है।

Stock Market Live Update: सेंसेक्स 160 अंक टूटा, निफ्टी 24500 के नीचे, स्मॉलकैप शेयरों में तेजी

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

पाकिस्तान से आजाद हुआ बलूचिस्तान! 11 अगस्त को मनाएगा स्वतंत्रता दिवस, क्या भारत देगा मान्यता?

Republic of Balochistan

बलूचिस्तान ने पाकिस्तान से आजादी का ऐलान करने के बाद 11 अगस्त को अपना 'स्वतंत्रता दिवस' घोषित किया है। बलूचिस्तान के नेताओं ने दुनिया के देशों से मान्यता देने की अपील की है। इस दावे को पाकिस्तान ने स्वीकार नहीं किया है। बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र देश के रूप में किसी भी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्था या संयुक्त राष्ट्र ने मान्यता नहीं दी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या भारत बलूचिस्तान को अलग देश के रूप में मान्यता देगा। ALSO READ: ड्रैगन का 'परमाणु सीक्रेट' बेनकाब! सच निकला अमेरिका का दावा, भारत के लिए भी खतरे की घं

 

'रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान' की तरफ से जारी एक बयान में बलूच लोगों से राष्ट्रीय एकता के साथ 'स्वतंत्रता दिवस' मनाने का आग्रह किया गया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे इसे एक स्वतंत्र और संप्रभु बलूचिस्तान के तौर पर मान्यता दें। संगठन का दावा किया कि लगभग 6 करोड़ बलूच खुद को एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र का नागरिक मानते हैं।

रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान का दावा है कि 11 अगस्त 1947 को ब्रिटिश शासन समाप्त होने से ठीक पहले, बलूचिस्तान ने खुद को स्वतंत्र घोषित किया था। कहा जाता है कि उस वक्त पाकिस्तान ने भी कलात नाम की इस रियासत की स्वतंत्रता को माना था लेकिन बाद में छल से उसने इसे पाकिस्तान में मिलने के लिए मजबूर किया।

मीर यार बलोच ने बलोच राष्ट्र के लोगों से अपने घरों, मोहल्लों, बाजारों, दुकानों, शिक्षण संस्थानों और अन्य सार्वजनिक जगहों पर आजाद बलोचिस्तान का राष्ट्रीय ध्वज फहराने की अपील की। ALSO READ: बांग्लादेश में जो हुआ वो भारत के लिए वॉर्निंग, लेखिका तस्लीमा नसरीन क्‍या मैसेज देना चाहती हैं सरकार को?

 

बलूचिस्तान ने 8 फरवरी 2026 के दिन अपना संविधान भी छापा था। बलूचिस्तान की आजादी का खाका आधिकारिक तौर पर दुनिया के सामने पेश किया जा चुका है। इसे बलूच नेता मीर यार बलूच ने तैयार किया है।

टी दिलीप: बेस्ट फील्डर मेडल की संस्कृति लाने वाले कोच ने लिखा भावुक पोस्ट

भारतीय फील्डिंग में सबसे ज्यादा क्रांतिकारी बदलाव लाने वाले फील्डिंग कोच टी-दिलीप का कार्यकाल समाप्त हो गया है और वह टीम के साथ श्रीलंका नहीं जा रहे हैं। फील्डिंग कोच टी-दिलीप ने भारतीय खिलाड़ियों का फील्डिंग स्तर खासा बढ़ाया। खासकर एकदिवसीय विश्वकप के दौरान जब हर मैच के बाद टीम को फील्डिंग मेडल दिया जाता था। यह एक ऐसी प्रथा थी जिससे हर खिलाड़ी प्रोत्साहित हुआ।अपने कार्यकाल की समाप्ति के बाद उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर भावुक पोस्ट लिखा।

टी दिलीप ने लिखा” एक ऐसे सफ़र के लिए सही शब्द ढूँढना मुश्किल है जो मेरे लिए बहुत मायने रखता है।जब मैं पहली बार इस टीम से जुड़ा, तो मेरा मकसद बस एक ही था – हर दिन अपना सब कुछ झोंक देना।

उस खेल में योगदान देने का मेरा तरीका हमेशा से फील्डिंग ही रहा है जिसे मैं बहुत प्यार करता हूँ, और मैं शुक्रगुज़ार हूँ कि मुझे इस टीम के सफ़र का हिस्सा बनने का मौका मिला।फील्डिंग मेडल हमेशा मेरे दिल के बहुत करीब रहेगा। ड्रेसिंग रूम में इसने जो उत्साह पैदा किया, जो मुस्कान बिखेरी और खिलाड़ियों ने इसे जो अहमियत दी – ये सब ऐसी यादें हैं जो हमेशा मेरे साथ रहेंगी।

इन उपलब्धियों का हिस्सा बनने पर मुझे हमेशा गर्व रहेगा:

  • दो ICC मेन्स T20 वर्ल्ड कप जीत (2024 और 2026)
  • ICC चैंपियंस ट्रॉफ़ी जीत (2025)
  • दो एशिया कप जीत (2023 और 2025)
  • ICC वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप और ICC मेन्स क्रिकेट ODI वर्ल्ड कप (2023) में रनर-अप
  • वर्ल्ड स्टेज पर कई यादगार सफ़र

मुझ पर भरोसा करने और भारतीय क्रिकेट की सेवा करने का मौका देने के लिए BCCI और भारतीय क्रिकेट टीम का दिल से शुक्रिया। राहुल द्रविड़ और गौतम गंभीर, आपके भरोसे के लिए धन्यवाद। आप दोनों के साथ काम करना बहुत अच्छा अनुभव रहा।

रोहित शर्मा, सूर्या कुमार, विराट कोहली, हार्दिक पांड्या, शुभमन गिल और श्रेयस अय्यर, आप सभी के साथ काम करना और आपके कप्तानी के समय में योगदान देना मेरे लिए सम्मान की बात थी। हर खिलाड़ी, कोच और सपोर्ट स्टाफ़ के सदस्य को… धन्यवाद। हमने साथ में जो यादें बनाई हैं, वे ज़िंदगी भर मेरे साथ रहेंगी।

जैसे ही यह अध्याय समाप्त हो रहा है, मैं हमेशा शुक्रगुज़ार रहूँगा कि मुझे पाँच यादगार वर्षों तक भारत का बैज पहनने का सम्मान मिला।हमेशा आभारी रहूँगा। सफ़र जारी है।”

T Dilip

भारत के क्षेत्ररक्षण कोच टी दिलीप ने खुलासा किया कि वह ट्रेनिंग सत्र की शुरुआत में खिलाड़ियों के समूहों के बीच क्षेत्ररक्षण प्रतियोगिताओं का आयोजन करना पसंद करते हैं क्योंकि इससे सही माहौल बनाने में मदद मिलती है।हाल ही में हुए एक प्रशिक्षण सत्र की बारीकियों को समझाते हुए दिलीप ने कहा कि उन्होंने गेंद को सीमा रेखा से वापस फेंकने पर काम किया। इस सत्र में भारतीय खिलाड़ियों को दो समूहों में विभाजित किया गया था।उन्होंने कहा, ‘‘हम चाहते हैं कि सभी लोग एक साथ मिलकर टीम ड्रिल करें लेकिन साथ ही चाहते हैं कि वे मैच के लिए भी तैयार हों।’’

TVS electric scooter sales cross 3 lakh units in January-July 2026

TVS electric scooter sales cross 3 lakh units in January-July 2026

TVS Motor Company has crossed the 3 lakh-unit electric scooter sales milestone in the first seven months of CY2026, with retail volumes of over 3.07 lakh units between January and July. The company has already achieved around 97 percent of its CY2025 electric two-wheeler sales of 3.15 lakh units.

  1. TVS sells over 3.07 lakh electric scooters in January-July 2026
  2. July sales hit a record 55,465 units
  3. CY2026 sales could cross the 5 lakh-unit mark

July delivers record monthly volumes for TVS

TVS’ January-July performance makes the Hosur-based brand the fastest electric two-wheeler manufacturer in India to cross 3 lakh retail sales in a calendar year.

For comparison, Ola Electric, then the market leader, took a little over eight months to cross the 3 lakh-unit mark in CY2024. Ola finished that year with over 4.29 lakh units, currently the highest calendar-year retail volume recorded by an Indian electric two-wheeler manufacturer.

TVS recorded its highest monthly electric scooter sales in July 2026 at 55,465 units. March was the other month in which the company crossed the 50,000-unit mark, with sales of 51,632 units.

The company has averaged 43,898 units per month during the January-July period. Maintaining a similar run rate over the remaining five months would take TVS beyond the 5 lakh-unit mark in CY2026.

The upcoming festive season, which begins around mid-September, could provide a further boost to volumes. At its current pace, TVS could add around 2.20 lakh – 2.40 lakh units between August and December, potentially taking its full-year tally to an estimated 5.27 lakh – 5.47 lakh units.

TVS leads Bajaj and Ather

TVS continues to lead India’s electric two-wheeler market after the first seven months of CY2026, ahead of Bajaj Auto and Ather Energy.

Bajaj retailed just under 2.64 lakh electric two-wheelers between January and July, around 43,400 units fewer than TVS. The company’s seven-month volume is equivalent to around 94 percent of the over 2.79 lakh units it sold in CY2025.

Ather Energy ranks third with just over 2 lakh units during the same period, around 93 percent of its CY2025 volume of 2.15 lakh units. TVS currently leads Ather by over 1.07 lakh units.

Hero Vida gains; Ola ranks fifth

Vida – Hero MotoCorp’s electric subsidiary – ranks fourth with just under 1.29 lakh units sold during January-July 2026. This is already around 14 percent higher than its full-year CY2025 volume of 1.13 lakh units.

Ola Electric, meanwhile, has retailed 80,282 units in the first seven months of CY2026, equivalent to around 39 percent of the over 2.04 lakh units it sold last year.

Greaves Electric Mobility ranks sixth with 53,938 units, representing around 93 percent of its CY2025 volume of 57,699 units.

With TVS approaching its entire CY2025 volume after only seven months and both Bajaj Auto and Ather Energy also nearing their respective previous full-year totals, CY2026 is shaping up to be another year of strong volume growth for India’s leading electric two-wheeler manufacturers.

10 अगस्त को आ रहा है एक और धमाकेदार IPO! टेमासेक-मोतीलाल ओसवाल का सपोर्ट, जानें पूरी डिटेल्स

Molbio Diagnostics IPO: मेडिकल डायग्नोस्टिक क्षेत्र की दिग्गज कंपनी मोल्बियो आईपीओ बाजार में दांव लगाने का बड़ा मौका लेकर आ रही है। दिग्गज ग्लोबल निवेशक टेमासेक और मोतीलाल ओसवाल ग्रुप के समर्थन वाली इस कंपनी ने रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के पास अपना रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) दाखिल कर दिया है।

कंपनी का आईपीओ आम जनता के लिए 10 अगस्त 2026 को खुलेगा। इसी दिन धूत ट्रांसमिशन का ₹3,067 करोड़ का आईपीओ भी दस्तक दे रहा है, जिससे 10 अगस्त को प्राइमरी मार्केट में दो बड़े मेनबोर्ड इश्यू के बीच दिलचस्प मुकाबला देखने को मिलेगा।

Molbio Diagnostics IPO: टाइमलाइन और महत्वपूर्ण तारीखें

एंकर बुक ओपनिंग: 7 अगस्त 2026

पब्लिक इश्यू ओपनिंग-क्लोजिंग डेट: 10- 12 अगस्त 2026

शेयर अलॉटमेंट की तारीख: 13 अगस्त 2026

लिस्टिंग की तारीख: 17 अगस्त 2026

इश्यू का साइज और OFS की डिटेल्स

फ्रेश इश्यू: ₹200 करोड़ मूल्य के नए शेयर जारी किए जाएंगे।

ऑफर फॉर सेल (OFS): मौजूदा शेयरधारक और प्रमोटर्स 91.66 लाख शेयरों की बिक्री करेंगे।

OFS साइज में कटौती: इससे पहले अगस्त 2025 में दाखिल DRHP में 1.25 करोड़ शेयरों की बिक्री की योजना थी, जिसे अब घटाया गया है। सेबी ने दिसंबर 2025 में इसके आईपीओ पेपर्स को मंजूरी दी थी।

शेयरहोल्डिंग पैटर्न: प्रमोटर्स एक्सोरा ट्रेडिंग और डॉ. चंद्रशेखर भास्करन नायर के पास 46.65% हिस्सेदारी है। बाकी 53.35% हिस्सेदारी टेमासेक की सहायक कंपनी ‘V Sciences Investments’ और मोतीलाल ओसवाल के ‘India Business Excellence Fund’ जैसे निवेशकों के पास है।

जुटाए गए फंड का कहां होगा इस्तेमाल?

कंपनी फ्रेश इश्यू से प्राप्त नेट प्रोसीड्स का इस्तेमाल इस प्रकार करेगी:

  • R&D और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (₹105.5 करोड़): पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी ‘Bigtec’ द्वारा संचालित रिसर्च एंड डेवलपमेंट फैसिलिटी और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने में।
  • प्लांट व मशीनरी (₹72.2 करोड़): गोवा यूनिट I, गोवा यूनिट II और विशाखापत्तनम यूनिट के लिए नए प्लांट, उपकरण और मशीनरी की खरीद में।
  • कॉर्पोरेट उद्देश्य: शेष राशि का उपयोग सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों के लिए किया जाएगा।

बिजनेस मॉडल और पेटेंट टेक्नोलॉजी

अक्टूबर 2000 में शुरू हुई मोल्बियो डायग्नोस्टिक्स एक पॉइंट-ऑफ-केयर (POC) डायग्नोस्टिक्स कंपनी है। कंपनी ने ‘Truenat’ नामक पीसीआर (PCR) प्लेटफॉर्म विकसित किया है, जो 100 से अधिक देशों में पेटेंटेड है। यह तकनीक टीबी (TB), कोविड-19, हेपेटाइटिस B & C, एचआईवी (HIV) और एचपीवी (HPV) जैसी संक्रामक और गैर-संक्रामक बीमारियों की जांच 1 घंटे के भीतर कर सकती है। प्रोग्नोसिस और ऑप्ट्रास्कैन जैसी सहायक कंपनियों के माध्यम से यह डिजिटल पैथोलॉजी, रेडियोलॉजी और ब्रेस्ट हेल्थ स्क्रीनिंग डिवाइस भी मुहैया कराती है।

कंपनी का फाइनेंशियल प्रदर्शन

मोल्बियो डायग्नोस्टिक्स का वित्तीय प्रदर्शन पिछले कुछ वर्षों में मजबूत रहा है। मार्च 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर में कंपनी का शुद्ध लाभ (PAT) 14.8% बढ़कर ₹166.6 करोड़ पर पहुंच गया। राजस्व पिछले वित्त वर्ष की तुलना में कुल राजस्व 41.7% की जोरदार बढ़त के साथ ₹1,445.7 करोड़ रहा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

देशभर में मिले 1.19 करोड़ पांडुलिपियों के रिकॉर्ड! जानिए क्या है ज्ञान भारतम मिशन, क्यों इसपर हो रहा करोड़ों रुपये का खर्च?

Gyan Bharatam Mission: भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को सहेजने की दिशा में केंद्र सरकार के ज्ञान भारतम मिशन को एक ऐतिहासिक सफलता मिली है। देशभर में चलाए गए राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण के दौरान 1.19 करोड़ से भी अधिक पांडुलिपियों (Manuscripts) के रिकॉर्ड दर्ज किए गए हैं। संस्कृति और पर्यटन केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने लोकसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए इस स्कीम से जुड़ी अहम जानकारियां शेयर की हैं। आपको बता दें कि संस्कृति मंत्रालय की यह पहल भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, पांडुलिपियों के संरक्षण, इनके डिजिटलाइजेशन और ग्लोबल रिसर्च कम्युनिटी के लिए इसे उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई है।

क्या है ज्ञान भारतम मिशन और बजट 2025-26 में क्यों हुई थी घोषणा?

ज्ञान भारतम मिशन (GBM) भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय का एक विशेष कार्यक्रम है। इसका ऐलान केंद्रीय बजट 2025-26 के दौरान पांडुलिपियों से जुड़ी गतिविधियों को गति देने के लिए की गई थी। इस पैन-इंडिया पहल का मुख्य उद्देश्य किसी भी लिपि, भाषा, ज्ञान परंपरा, क्षेत्र या समुदाय की संरक्षक परंपराओं से परे हटकर संपूर्ण भारत की पांडुलिपि विरासत का संरक्षण करना है। पांडुलिपियों के सर्वेक्षण, कैटलॉगिंग, डिजिटलाइजेशन और प्रिजर्वेशन को फाइनेंशियल और एडमिनिस्ट्रेटिव मजबूती देने के लिए स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी ने साल 2025 से 2031 के लिए 491।66 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट मंजूर किया है। इसी फंड का इस्तेमाल देश की बहुमूल्य प्राचीन धरोहरों को नष्ट होने से बचाने और आधुनिक तकनीक से जोड़ने में किया जा रहा है।

क्या हैं ज्ञान भारतम मिशन के मुख्य उद्देश्य?

ज्ञान भारतम मिशन के तहत कई लक्ष्य तय किए गए हैं। इसमें मॉडर्न टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके पांडुलिपियों के डिजिटलाइजेशन और उनके डॉक्युमेंटशन की स्पीड को बढ़ाना है। देशभर में मौजूद पांडुलिपियों का सर्वे करने के साथ इसमें उनका ऑफिशियल रजिस्ट्रेशन भी कराया जा रहा है। भारतीय पांडुलिपियों की सटीक कैटलॉगिंग करने से लेकर उन्हें अप टू डेट बनाने का टास्क भी है। पांडुलिपियों सभी तक पहुंचें और ये किताब के साथ-साथ मशीन रीडेबल यानी डिजिटल फॉर्मेट में भी उपलब्ध हैं, ये भी इस मिशन का एक बड़ा लक्ष्य है।

पांडुलिपियों को बचाने के लिए ट्रेनिंग, जागरूकता अभियानों और फाइनेंशियल मदद देने की तैयारी है। इसके अलावा भारतीय भाषाओं और पांडुलिपिविज्ञान की स्डडी, स्कॉलपशिप और रिसर्च को बढ़ावा देने की भी तैयारी की गई है। सरकार का लक्ष्य है कि पांडुलिपियों की एक विशाल नेशनल डिजिटल रिपॉजिटरी भी तैयार की जाए।

मार्च 2026 में शुरू हुआ राष्ट्रीय सर्वेक्षण: 1.19 करोड़ से ज्यादा पांडुलिपियां रिपोर्ट की गईं

पांडुलिपियों के धारकों, संग्रहकर्ताओं और अलग अलग भाषाओं व लिपियों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्थाओं की पहचान करने के लिए मार्च 2026 में देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण शुरू किया गया था। इस सर्वे के दौरान देशभर से 1.19 करोड़ से अधिक पांडुलिपियों की मौजूदगी की रिपोर्ट दर्ज की गई है। अभी देशभर में 8 लाख से अधिक डिजिटल पांडुलिपियां उपलब्ध हैं। इनमें से 4.40 लाख से अधिक पांडुलिपियों को ज्ञान भारतम पोर्टल पर आम जनता के देखने के लिए उपलब्ध करा दिया गया है, जिन्हें राज्यवार आसानी से एक्सेस किया जा सकता है।

क्लस्टर सेंटर्स और राज्यों के साथ संस्थागत ढांचा

मिशन को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक मजबूत संस्थागत तंत्र स्थापित किया गया है। इसके तहत क्लस्टर सेंटर्स और इंडिपेंडेंट सेंटर्स बनाए गए हैं। इनमें यूनिवर्सिटी, रिसर्च इंस्टिट्यूट, पुस्तकालय, अभिलेखागार, निजी संरक्षक, धार्मिक संस्थान और दूसरे स्टेकहोल्डर्स शामिल हैं। इसके अलावा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपने-अपने क्षेत्रों में ज्ञान भारतम के कार्यान्वयन के लिए नोडल कोआर्डिनेटिंग अथॉरिटी के रूप में जोड़ा गया है। उदाहरण के तौर पर, बिहार की कई प्रमुख संस्थाएं इस मिशन से जुड़ चुकी हैं, जिनमें नवा नालंदा महाविहार (नालंदा), खुदा बख्श ओरिएंटल पब्लिक लाइब्रेरी (पटना) और श्री बोधगया मठ (बोधगया) शामिल हैं।

कॉपीराइट और सुरक्षा का रखा जा रहा पूरा ध्यान

डिजिटल पांडुलिपियों तक एक्सेस देते समय इनके कस्टोडियनों और अधिकार धारकों के अधिकारों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। जिन पांडुलिपियों पर कोई कानूनी या तकनीकी रोक नहीं है उन्हें राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी के माध्यम से सार्वजनिक और विद्वानों के शोध के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं संवेदनशील, प्रतिबंधित या अधिकार-संरक्षित पांडुलिपियों तक पहुंच के लिए उचित शर्तें और नियम लागू किए जाएंगे।

यह भी पढ़ें: प्रशांत किशोर ने BJP के 30 साल पुराने किले में लगाई सेंध, जीत को PM मोदी के लिए बताया “वेक-अप कॉल”