SBI की धांसू स्कीम! बिना किसी रिस्क के मिलेगी पक्की मंथली इनकम, मैच्योरिटी पर 110% रिफंड भी!

SBI Life Smart Platina Plus: एसबीआई लाइफ का ‘स्मार्ट प्लैटिनम प्लस’ एक नॉन-लिंक्ड सेविंग्स प्लान है, जो बिना किसी मार्केट रिस्क के गारंटीड रिटर्न और लाइफ कवर देता है। सुरक्षित और तयशुदा इनकम के जरिए अपने लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल गोल्स को पूरा करने के लिए यह एक बेहतरीन विकल्प है।

अगर आप बिना किसी मार्केट रिस्क के एक तयशुदा और सुरक्षित इनकम का जरिया तलाश रहे हैं, तो यह प्लान आपके फाइनेंशियल गोल्स को पूरा करने में बेहद मददगार साबित हो सकता है।

SBI Life स्मार्ट प्लैटिनम प्लस की मुख्य विशेषताएं

इस पॉलिसी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसके रिटर्न पूरी तरह फिक्स और कॉन्ट्रैक्टुअल होते हैं, यानी शेयर बाजार की चाल का इस पर कोई असर नहीं पड़ता है। आइए जानते हैं इसके जरूरी नियम और फीचर्स:

प्लान टाइप: यह एक नॉन-लिंक्ड और नॉन-पार लाइफ इंश्योरेंस सेविंग्स प्लान है।

इनकम विकल्प: इसमें दो मुख्य विकल्प मिलते हैं- पहला ‘गारंटीड इनकम ऑप्शन’ (रेगुलर फिक्स इनकम के लिए) और दूसरा ‘लाइफ इनकम ऑप्शन’ (पेआउट पीरियड के दौरान रेगुलर गारंटीड इनकम)।

प्रीमियम भुगतान अवधि (PPT): पॉलिसीधारक अपनी सुविधा के अनुसार 6, 7, 8 या 10 साल के लिए प्रीमियम का भुगतान चुन सकते हैं।

न्यूनतम वार्षिक प्रीमियम: इस योजना का लाभ उठाने के लिए न्यूनतम सालाना प्रीमियम ₹50,000 तय किया गया है।

न्यूनतम सम एश्योर्ड: प्लान के तहत न्यूनतम बीमा राशि ₹5,50,000 है।

पेआउट फ्रीक्वेंसी: निवेशक अपनी जरूरत के हिसाब से इनकम का भुगतान सालाना, छमाही, तिमाही या मासिक आधार पर ले सकते हैं।

मैच्योरिटी और डेथ बेनिफिट्स

मैच्योरिटी बेनिफिट: पॉलिसी की अवधि पूरी होने पर, निवेशक को कुल चुकाए गए प्रीमियम का 110% हिस्सा रिफंड कर दिया जाता है।

डेथ बेनिफिट: पॉलिसी अवधि के दौरान पॉलिसीधारक की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु होने पर नॉमिनी को एकमुश्त डेथ बेनिफिट मिलता है। इसके अलावा, गारंटीड इनकम विकल्प के तहत कमेंसमेंट के बाद भी पेआउट मिलने का प्रावधान जारी रह सकता है।

पॉलिसी लोन सुविधा: वित्तीय आपातकाल के समय पॉलिसीधारक सरेंडर वैल्यू जो कम से कम 2 साल के पूरे प्रीमियम भुगतान के बाद मिलती है उसके 50% तक का लोन ले सकते हैं।

ऑप्शनल राइडर्स: सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए इसमें एसबीआई लाइफ एक्सीडेंटल बेनिफिट राइडर (एक्सीडेंटल डेथ / आंशिक विकलांगता) और एसबीआई लाइफ वेवर ऑफ प्रीमियम राइडर जैसे विकल्प भी उपलब्ध हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Climate impact Alert: जलवायु परिवर्तन की मार से गेहूं में होगा बड़ा बदलाव! रोटी की गुणवत्ता पर मंडराया खतरा; सेहत पर भी पड़ सकता है असर

Climate impact ON wheat: जलवायु परिवर्तन का असर अब हमारी थाली तक पहुंच सकता है। जी हां, जिस गेहूं से हर दिन करोड़ों लोगों की रोटी बनती है, उसकी पोषण संबंधी गुणवत्ता और प्रोटीन संरचना भविष्य में बदल सकती है। एक नई वैज्ञानिक स्टडी में सामने आया है कि वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) का स्तर बढ़ने से गेहूं के प्रोटीन की संरचना में महत्वपूर्ण बदलाव हो सकते हैं। इसका असर न केवल आटे और ब्रेड की क्वालिटी पर पड़ सकता है, बल्कि गेहूं से जुड़ी कुछ स्वास्थ्य समस्याओं के लिहाज से भी यह महत्वपूर्ण हो सकता है।

स्टडी में खुलासा हुआ है कि वातावरण में बढ़ती CO₂ गेहूं की प्रोटीन संरचना को बदल सकती है। इसका असर बेकिंग गुणवत्ता पर पड़ने के संकेत मिले हैं। जर्मनी के लीबनिज इंस्टीट्यूट फॉर फूड सिस्टम्स बायोलॉजी और टेक्निकल यूनिवर्सिटी ऑफ म्यूनिख से जुड़े शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन के निष्कर्ष प्रतिष्ठित जर्नल फूड केमिस्ट्री (Food Chemistry) में प्रकाशित हुए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के दौर में गेहूं की खेती पर विचार करते समय केवल उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं होगा। अनाज की गुणवत्ता और उसमें मौजूद प्रोटीन के प्रकारों को भी समझना जरूरी है।

हवा में बढ़ती CO₂ से गेहूं पर कितना असर?

स्टडी के अनुसार, वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा लगातार बढ़ रही है। वर्ष 1980 में इसका स्तर लगभग 340 पार्ट्स पर मिलियन (ppm) था, जो 2024 में बढ़कर करीब 425 ppm तक पहुंच गया। अनुमान है कि वर्ष 2050 तक यह स्तर 600 ppm तक जा सकता है। गेहूं दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण खाद्य फसलों में से एक है। ऐसे में वातावरण में CO₂ की बढ़ती मात्रा के बीच इसकी खेती और अनाज की क्वालिटी में होने वाले बदलावों को समझना बेहद जरूरी है। वैज्ञानिकों ने इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए गेहूं की अलग-अलग किस्मों पर प्रयोग किया।

10 किस्मों पर हुआ प्रयोग, सामने आए चौंकाने वाले बदलाव

शोधकर्ताओं ने सर्दियों में उगाई जाने वाली गेहूं की 10 खेती की किस्मों को वास्तविक कृषि और पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुरूप उगाया। इनमें से कुछ पौधों को सामान्य परिस्थितियों में मौजूद CO₂ के स्तर पर रखा गया। जबकि अन्य पौधों को 546 ppm की बढ़ी हुई CO₂ में उगाया गया। फसल तैयार होने के बाद वैज्ञानिकों ने गेहूं के दानों में मौजूद प्रोटीन का बारीकी से विश्लेषण किया। इसके लिए हाई-रिजॉल्यूशन मास स्पेक्ट्रोमेट्री तकनीक का इस्तेमाल किया गया।

स्टडी में विशेष रूप से ग्लूटेन प्रोटीन, एमाइलेज/ट्रिप्सिन इनहिबिटर्स (ATIs), प्यूरोइंडोलिन और सीलिएक रोग से संबंधित कुछ पेप्टाइड्स पर ध्यान दिया गया। नतीजों से पता चला कि CO₂ कॉन्सेंट्रेशन का स्तर बढ़ने पर गेहूं के अलग-अलग प्रोटीन समूहों में एक जैसा बदलाव नहीं हुआ। कुछ प्रोटीन बढ़े। जबकि कुछ की मात्रा घट गई। इसका मतलब है कि जलवायु परिवर्तन गेहूं की प्रोटीन संरचना को प्रभावित कर सकता है।

बढ़ेगा एक तरह का प्रोटीन, घट सकता है ग्लूटेन

इस स्टडी में पाया गया कि बढ़ी हुई CO₂ कॉन्सेंट्रेशन में गेहूं के दानों में एमाइलेज/ट्रिप्सिन इनहिबिटर्स (ATIs) की मात्रा बढ़ गई। दूसरी ओर, प्यूरोइंडोलिन, ग्लूटेन प्रोटीन और सीलिएक रोग से एक्टिव हो सकने वाले कुछ पेप्टाइड्स की मात्रा में कमी देखी गई। ATIs ऐसे प्रोटीन हैं जिनकी संभावित हेल्थ संबंधी भूमिका पर वैज्ञानिक अध्यन करते रहे हैं। इनकी मात्रा बढ़ने का असर मानव स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है।

लेकिन इस स्टडी के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि बढ़ी हुई CO₂ में उगा गेहूं सीधे तौर पर लोगों को बीमार कर देगा। वैज्ञानिकों ने यह भी स्पष्ट किया कि ग्लूटेन प्रोटीन की मात्रा घटने के साथ गेहूं की बेकिंग गुणवत्ता में गिरावट देखी गई। यानी प्रोटीन की संरचना में बदलाव का असर रोटी, ब्रेड और गेहूं से बनने वाले दूसरे खाद्य पदार्थों की निर्माण संबंधी विशेषताओं पर पड़ सकता है।

क्या गेहूं से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी बदल सकता है?

अध्ययन का एक महत्वपूर्ण पहलू गेहूं से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा है। शोधकर्ताओं ने पाया कि CO₂ बढ़ने के कारण ATIs और सीलिएक रोग से सक्रिय होने वाले कुछ पेप्टाइड्स की मात्रा में बदलाव हुआ। सीलिएक रोग एक प्रतिरक्षा सिस्टम से जुड़ी बीमारी है, जिसमें ग्लूटेन के सेवन से छोटी आंत को नुकसान पहुंच सकता है।

हालांकि, स्टडी में कुछ संबंधित पेप्टाइड्स की मात्रा घटने का संकेत मिला। जबकि ATIs की मात्रा बढ़ी। इसलिए इन बदलावों का कुल स्वास्थ्य प्रभाव क्या होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह समझने के लिए आगे अध्ययन करना जरूरी है कि गेहूं में प्रोटीन संरचना के ये बदलाव वास्तव में मानव शरीर की जैविक और प्रतिरक्षा संबंधी प्रतिक्रियाओं को किस तरह प्रभावित करते हैं। फिलहाल इस शोध को गेहूं से जुड़ी बीमारियों में निश्चित वृद्धि या कमी का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

हर गेहूं की किस्म पर एक जैसा असर नहीं

पीटीआई के मुताबिक, इस अध्ययन में एक और अहम बात सामने आई कि सभी गेहूं की किस्मों में बदलाव समान नहीं थे। प्रमुख शोधकर्ता सबरीना गाइस्लिट्ज के अनुसार, प्रोटीन संरचना में परिवर्तन की सीमा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि गेहूं की कौन-सी किस्म उगाई गई है। यह निष्कर्ष भविष्य की खेती के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि कुछ किस्में बढ़ी हुई CO₂ परिस्थितियों में अपनी गुणवत्ता बेहतर बनाए रखती हैं, तो उन किस्मों की पहचान और विकास पर ध्यान दिया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए अलग-अलग जलवायु परिस्थितियों और कृषि क्षेत्रों में और परीक्षण करने होंगे।

भविष्य की खेती के लिए क्या है सबक?

इस स्टडी से साफ संकेत मिलता है कि जलवायु परिवर्तन का आकलन केवल इस आधार पर नहीं किया जाना चाहिए कि खेतों में कितना अनाज पैदा हो रहा है। यह भी देखना होगा कि उस अनाज में किस तरह के प्रोटीन मौजूद हैं। उसकी बेकिंग गुणवत्ता कैसी है। उसके सेवन से जुड़े संभावित स्वास्थ्य पहलुओं पर क्या प्रभाव पड़ सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, भविष्य में गेहूं की ऐसी किस्में विकसित करने की जरूरत होगी, जो बदलती पर्यावरणीय परिस्थितियों में भी अच्छी पैदावार के साथ बेहतर गुणवत्ता बनाए रख सकें।

ये भी पढ़ें- IMD Rain Alert: इन राज्यों में अगले 7 दिन होगी आफत वाली बारिश! 25 अक्टूबर तक आंधी-बिजली का भी खतरा, आपके इलामें ऐसा रहेगा मौसम

Honda CB500 vs Rivals: Price and specifications compared

Honda CB500 vs Rivals: Price and specifications compared
An render showing the spec comparison between the, Honda CB350, Harley-Davidson X440 T, Triumph Bonneville T40, Royal Enfield Scram 440 and Classic 350

Honda has revealed the specifications for the CB500, so it’s only natural that we see how it stacks up against its main rivals such as the Harley-Davidson X440 T and Triumph Bonneville T40. For good measure, we’ve even thrown in other lower-priced and lower-spec but far more popular alternatives like the Royal Enfield Scram 440 and the king of this class, the Classic 350. Here is how these stack up against each other on paper.

Honda CB500 vs Rivals: Engine and output  

The Honda CB500 shines with plenty of low-to-mid range torque

 

Honda CB500

Harley-Davidson X440 T

Triumph Bonneville T40

 

Royal Enfield Scram 440

Royal Enfield

Classic 350

Engine

501.7cc, single-cylinder, oil-cooled

440cc, single-cylinder, oil-cooled

350cc, single-cylinder, liquid-cooled

443cc, single-cylinder, oil-cooled

349cc, single-cylinder, liquid-cooled

Power

28.14hp at 5,250rpm

27hp at 6,000rpm

29hp at 9,000rpm

25.42hp at 6,250rpm

20.2hp at 6,100rpm

Torque

43.3Nm at 3,750rpm

38Nm at 4,000rpm

31.2Nm at 5,500rpm

34Nm at 4,000rpm

27Nm at 4,000rpm

Gearbox

5-speed

6-speed

6-speed

6-speed

5-speed

Power-to-weight ratio

148.88hp/tonne

140hp/tonne

148.71hp/tonne

129.69hp/tonne

103.59hp/tonne

With its large 501.7cc mill, the Honda offers more low-to-mid-range torque than the others, and it arrives the earliest too, at 3,750rpm. The torque outputs in this comparison are largely dictated by the engine’s displacement. In the modern retro segment where riders want an effortless riding experience, a healthy torque output delivered without too much effort is almost a necessity. The only anomaly here is the Bonneville T40, with its short stroke and liquid-cooled engine, making the most peak horsepower, although its torque output can’t match the larger bikes’ figures.  

Honda CB500 vs Rivals: Dimension and weight  

The CB 500 is the lightest in its segment

 

Honda CB500

Harley-Davidson X440 T

Triumph Bonneville T40

Royal Enfield Scram 440

 

Royal Enfield

Classic 350

Fuel tank capacity

15.2 litres

13.5 litres

14.5 litres

15 litres

13 litres

Ground Clearance

168mm

170mm

165mm

200mm

170mm

Kerb weight

189kg

192kg

195kg

196kg

195kg

Seat Height

NA

805mm

790mm

795

805mm

Wheelbase

1439mm

1418mm

1418mm

1460

1390mm

The Honda CB500 immediately stands out because of its kerb weight. It is the lightest motorcycle in this comparison, despite having the largest motor. Of all the bikes here, the T40 offers the most accessible saddle height, and you can further drop it down to 770mm with the accessory low seat.  No bike here is a corner carver and all of them prioritize a laidback and stable demeanour on the side of their tyres. Given that we are yet to ride 2 of the most recent entrants yet, any comment on a comparison of their ride and handling will have to wait until a later date.

If you want your neo retro machine to be able to tackle bad roads, all of them should be up for the job but it’s the Scram that is the most apt for it with its Himalayan-derived suspension and chassis.

Honda CB500 vs Rivals: Tyres, brakes and suspension  

The X440 T is the only motorcycle that features a USD fork

 

Honda CB500

Harley-Davidson X440 T

Triumph Bonneville T40

Royal Enfield Scram 440

Royal Enfield

Classic 350

Tyre (F, R)

100/90-19, 150/70-17

100/90-18, 140/70-17

100/90-18, 150/70 R17

100/90-19, 120/90-17

100/90-19, 120/80-18

Brakes (F/R)

Disc/ Disc; dual channel ABS

320mm disc/ 240mm disc; dual channel ABS

310mm disc/ 255mm disc; dual channel ABS

300mm disc/ 240mm disc; switchable dual channel ABS

300mm disc/ 270mm; dual channel ABS

Suspension (F/R)

Telescopic fork/ twin-shock

USD fork/ twin-shock

Telescopic fork/ twin-shock

Telescopic fork/ monoshock

Telescopic fork/ town-shock

While the Harley-Davidson features a USD front fork, the other motorcycles rely on right way up telescopic forks and twin rear shocks with the exception of the Scram, which uses a link-type monoshock. Again, in keeping with their more relaxed nature, the simple spec on offer here is more than sufficient for these bikes’ intended roles. Of them all, the H-D X440 T is likely to be the most agile owing to its more sophisticated front suspension and smaller wheel sizes, which are almost akin to a traditional roadster.

More pertinent here is that the Classic 350 (except for the alloy wheel ‘Dark’ variant) and Bonneville T40 come only with tubed tyres. The Honda comes with tubeless tyres on all variants and save for the base one, the other two come with neat-looking side-laced rims permitting the aforementioned feature.    

Honda CB500 vs Rivals: Features 

Triumph takes the lead in the features department

The Bonneville T40 offers more features than any bike in the neo-retro segment (even more than its much more expensive twin-cylinder brethren!).  Its electronic throttle body permits  five ride modes (Eco, Road, Rain and customizable Rider A and B) as well as cruise control. A handsome full colour, 4-in TFT dash further brings in turn-by-turn navigation and cornering ABS as well as traction control complete its electronic arsenal.  

The X440 T also has a TFT display, but it’s neither as sophisticated nor as pleasing to look at as the one on the ‘Bonnie’. It brings in 2 riding modes (Road and Rain) and has the safety net of switchable dual channel ABS and traction control. While the Honda has the same riding aids as the Harley, it displays information to the rider via a simple and easy-on-the-eyes digi-analogue display which has basic Bluetooth connectivity. 
The Scram and  Classic -in true RE fashion – are simple, but not spartan machines. The Classic offers you a slip-and-assist clutch, type-C charger and dual-channel ABS, whereas the Scram misses out the slip-and-assist clutch and further offers you the ability to disable ABS at the rear.

Honda CB500 vs Rivals: Price  

The CB500 is priced competitively 

 

Honda CB500

Harley-Davidson X440 T

Triumph Bonneville T40

Royal Enfield Scram 440

Royal Enfield

Classic 350

Price (ex-showroom)

Rs 2.75-3.02 lakh

Rs 2.86 lakh

Rs 2.80 lakh

Rs 2.25-2.32 lakh

Rs 1.89-2.26 lakh

Honda has priced the CB500 rather well considering its capacity, what it brings to the table and despite the higher 40 percent GST working against it. In fact, its starting price undercuts both the smaller Harley and Triumph, and not by an unsubstantial amount.

However, in comparison to the slower and smaller REs, the Honda’s price is a segment higher and rightly so, because the CB500 is, for all intents and purposes, a machine from a segment above.  Deliveries for the Alloy variants are expected later this year, and for the spoke and tubeless spoked variants in the first quarter of 2027.

Given what the latest offerings bring to the segment and their differing price strategies, the neo retro segment is now larger and more diverse than ever before with an option to suit just about every need. Choosing between these bikes is more than a simple comparison on paper and will need a more nuanced understanding of what they offer the rider.

Dion Gowda stepping up to F3 with Lando Norris’ team

Dion Gowda stepping up to F3 with Lando Norris’ team
Dion-Gowda-F3

Dion Gowda will make his Formula 3 debut next season, joining Lando Norris’ LN4 Fusion team. This will make him the third Indian racer to compete in the junior racing series, following Jehan Daruvala and Kush Maini.
“I’m really excited to be joining LN4 Fusion for the FIA Formula 3 Championship next year,” said Gowda. “Racing in FIA F3 is a dream come true and I’m really grateful for the opportunity. There are amazing people in this team, and I can’t wait to get started!”

  1. Gowda will be the third Indian to compete in F3
  2. He’s currently racing in the Formula Regional European Championship

Dion Gowda to make F3 debut in 2027

Dion Gowda Formula Regional European Championship

After making his way through the karting ranks in Asia and Europe, Gowda made his single seater debut in the 2023 F4 UAE winter series. He then enjoyed an impressive rookie campaign in the British F4 championship, claiming four race wins, three pole positions and six podiums enroute to finishing P4 in the championship.

Since then, he’s also participated in F4 UAE, Italian F4, Euro 4 and most recently in the Formula Regional European Championship (FREC) where he’s been competing for two seasons. In 2025 he also took home the 2025 FREC rookie title.

The 18-year old is now set to race alongside James Egozi and Gabriel Gomez in Lando Norris’ new LN4 Fusion F3 team next year. This will also be the newly-founded team’s inaugural F3 campaign.

“We are delighted to welcome Dion to LN4 Fusion, and we are very happy to be working with him,” said LN4 Fusion Chief Executive Officer Dan Richards.

“He showed promising speed in Formula Regional this season, regularly running in the top 10. We believe there is plenty of room for him to keep growing as a competitor, and on top of that he is a great person to work with. Everyone in the team is looking forward to starting this new journey together.”
 

ग्वालियर में शीतला मंदिर हादसे में सवालों में पुलिसिया सिस्टम, नो-एंट्री में कैसे मौत बनकर दौड़ा ट्रक, कार्रवाई पर भी सवाल

ग्वालियर में शीतला मंदिर हादसे में सवालों में पुलिसिया सिस्टम, नो-एंट्री में कैसे मौत बनकर दौड़ा ट्रक, कार्रवाई पर भी सवाल

ग्वालियर पुलिस जिस तरह दिन भर शहर के हर चौक-चौराहे पर चेकिंग प्वाइंट लगाकर लोगों के चालान काटती है,काश वह ऐसी ही चौकसी शीतला माता मंदिर जाने वाली रोड पर दिखाती है तो आज 15 घरों के चिराग नहीं बुझते और न ही अस्पाल में 40 से अधिक लोग तड़प रहे होते। शीतला मंदिर हादसे के लिए भले ही पुलिस के अफसर ट्रक के ब्रेक फेल होने का वजह बताते हुए अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे है लेकिन सवाल यह है कि जहां पर हादसा हुआ वह नो एंट्री जोन था, फिर धान से भरा ट्रक कैसे वहां पहुंचा और 50 से अधिक लोगों को रौंदा डालाा। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने पैसे लेकर ट्रक को प्रतिबंधित रास्ते पर जाने  दिया। 

 

शीतला माता मंदिर के पास हुए भीषण सड़क हादसे ने जिले के पुलिसिया सिस्टम को लेकर एक नहीं कई सवाल खड़े कर दिए है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए प्रतिबंधित मार्ग पर आखिर लोडेड ट्रक पहुंचा कैसे? क्या पुलिस की बैरिकेडिंग सिर्फ खानापू्र्ति थी? क्या चेकपोस्ट पर तैनात पुलिसकर्मियों ने पैसे लेकर ट्रक को नो एंट्री वाले इलाके में जाना दिया? क्या मंदिर जाने वाले रास्ते पर ट्रैफिक व्यवस्था की निगरानी में बड़ी चूक की गई?

 

अगर मंदिर जाने वाले रास्ते पर रोक थी, बैरिकेडिंग थी और सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी पुलिस की थी, फिर भी धान से भरा ट्रक श्रद्धालुओं को कुचलता हुआ मंदिर के नजदीक पहुंच गया, यह सबसे बड़ा सवाल है।  दरअसल नवरात्रि के दौरान शीतला माता मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे थे। ऐसे समय में भारी वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध होने के बावजूद ट्रक का प्रतिबंधित क्षेत्र तक पहुंच जाना कई सवाल खड़े करता है। सवाल यह भी है कि अगर मंदिर जाने वाली रास्ते पर भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित था, तो उस नियम का पालन कराने की जिम्मेदारी किसकी थी? ट्रक चालक की लापरवाही की जांच जरूरी है, लेकिन इसके साथ यह पता लगाना भी उतना ही जरूरी है कि प्रतिबंधित रास्ते पर वाहन को रोकने में व्यवस्था नाकाम क्यों रही। 

 

कार्रवाई पर भी उठे सवाल?-हादसे के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर झांसी रोड के सीएसपी को पद से हटाया गया और आठ अन्य पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया। इस पूरे मामले में झांसी रोड के सीएसपी रवि भदौरिया को हटाने के साथ झांसी रोड थाना प्रभारी शक्ति सिंह यादव, आंतरी थाना प्रभारी गीतेश शर्मा, झांसी रोड के ट्रैफिक थाना प्रभारी अभिषेक रघुवंशी, निरीक्षक यातायात राघवेंद्र जादौन, प्रधान आरक्षक सुशील द्विवेदी, आरक्षक किशन खन्ना, आरक्षक अनिल जैतपुरिया और आरक्षक पवन सेंगर को निलंबित किया गया है।

सरकार ने भले ही हादसे के बाद फौर तौर पर कार्रवाई कर दी हो लेकिन लेकिन सवाल यह है कि क्या निलंबन और गिरफ्तारी से उन खामियों का पता चल जाएगा, जिनकी वजह से प्रतिबंधित मार्ग पर भारी वाहन पहुंचा? हादसे के बाद जिला कलेक्टर ने पूरे मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए है लेकिन उन परिवारों का क्या जिनके सहारे को इस हादसे ने छीन लिया। 

 

यमन के सैन्य शिविर पर मिसाइल हमले में 25 सैनिकों की मौत, 30 घायल

यमन के दक्षिण-पूर्वी प्रांत शबवा में सोमवार को एक सरकारी सैन्य प्रशिक्षण ठिकाने पर मिसाइलें हमलों में कम से कम 25 सैनिकों की जान चली गई और 30 से अधिक घायल हो गए।

प्रांतीय राजधानी अताक के पास जरदान जिले में स्थित अल-आलम सैन्य अड्डे पर गिरी तीनों मिसाइलों ने परिसर के भीतर बने एक प्रशिक्षण शिविर को निशाना बनाया। एक सैन्य अधिकारी ने इस हमले के पीछे हुती विद्रोहियों का हाथ बताया है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे फुटेज में घटनास्थल पर भारी तबाही और हताहत लोग दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय चिकित्सा सूत्र ने बताया कि हताहतों का यह आंकड़ा शुरुआती है और इसमें बढ़ोतरी हो सकती है।

Also Read : इजरायल चुनाव : ट्रंप ने किया नेतान्याहू का समर्थन

चिकित्सा सूत्र के अनुसार, आपातकालीन और मेडिकल टीमें घायलों को शबवा के अस्पतालों में पहुंचाने में जुटी हैं। शिविर से बरामद कुछ शव बुरी तरह झुलस चुके हैं, जिससे मृतकों की अंतिम संख्या तय करने में मुश्किलें आ रही हैं। जरदान जिले में स्थित अल-आलम एक बड़ा सैन्य ठिकाना है। इसका इस्तेमाल यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार और सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन का समर्थन करने वाले बल करते हैं।

हुती विद्रोहियों ने फिलहाल इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। यह वारदात ऐसे समय में हुई है, जब यमन के कई मोर्चों पर हुती विद्रोहियों और सऊदी गठबंधन समर्थित सरकारी बलों के बीच लड़ाई और हमले तेज हो गए हैं।

यमन 2014 के उत्तरार्ध से ही भयानक संघर्ष में फंसा हुआ है, जब हूतियों ने राजधानी सना और देश के अधिकतर उत्तरी हिस्से पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 2015 में सैन्य हस्तक्षेप किया था।

Pic Credit : UNI

बांग्लादेश बोला-सऊदी ने बिना बताए हमारे नागरिकों को फांसी दी:मस्जिद में अश्लील हरकत करने पर पति-पत्नी को मौत की सजा मिली थी

सऊदी अरब ने मक्का में पिछले बुधवार एक बांग्लादेशी पति-पत्नी को फांसी दे दी। दोनों को एक मस्जिद के अंदर अश्लील हरकत करने के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई थी। बांग्लादेश सरकार ने रविवार को कहा है कि उसे सजा होने से पहले इसकी जानकारी नहीं दी गई। उन्हें इस मामले का पता फांसी दिए जाने के बाद चला। कैदियों की सूची में नाम थे, लेकिन सजा का जिक्र नहीं था द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब में बांग्लादेश के दूतावास ने जेलों में बंद बांग्लादेशी नागरिकों की सूची मांगी थी। सऊदी सरकार ने जो सूची भेजी, उसमें इस पति-पत्नी के नाम भी शामिल थे। हालांकि, सूची में यह जानकारी नहीं थी कि दोनों को मौत की सजा सुनाई गई है। बांग्लादेश की विदेश मामलों की राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम ने कहा कि उनकी सरकार ने मामले की ज्यादा जानकारी लेने के लिए सऊदी अरब से संपर्क किया है। सऊदी सरकार का जवाब मिलने के बाद ही बांग्लादेश तय करेगा कि आगे क्या कदम उठाए जाएं। सऊदी सरकार ने कहा- मस्जिद की पवित्रता का उल्लंघन किया सऊदी अरब के गृह मंत्रालय के मुताबिक, दोनों को इस्लामी कानून के तहत ‘ताजीर’ के नियमों के आधार पर मौत की सजा दी गई। ताजीर ऐसी सजा होती है, जिसकी गंभीरता तय करने का अधिकार न्यायाधीश के पास होता है। मंत्रालय ने कहा कि दोनों का अपराध गंभीर था और उन्होंने मस्जिद की पवित्रता का उल्लंघन किया था। इसी वजह से उन्हें मौत की सजा दी गई। सऊदी अरब में 30 लाख से ज्यादा बांग्लादेशी रहते हैं सऊदी अरब में 30 लाख से ज्यादा बांग्लादेशी रहते और काम करते हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जो कम वेतन वाली नौकरियां करते हैं। दोनों देशों के बीच धार्मिक और आर्थिक संबंध भी काफी मजबूत हैं। ऐसे में बांग्लादेशी नागरिकों को सजा दिए जाने के मामले में दोनों देशों के बीच जानकारी साझा किए जाने का सवाल अहम हो गया है। बांग्लादेश सरकार अब सऊदी अरब के जवाब का इंतजार कर रही है। सऊदी अरब में इस साल करीब 100 लोगों को फांसी एमनेस्टी इंटरनेशनल के मुताबिक, सऊदी अरब में इस साल अब तक करीब 100 लोगों को फांसी दी जा चुकी है। इनमें विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। कई विदेशी नागरिकों को नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में दोषी ठहराया गया था। इससे पहले 2011 में सऊदी अरब की राजधानी रियाद में आठ बांग्लादेशी पुरुषों को सार्वजनिक रूप से फांसी दी गई थी। उन्हें मिस्र के एक नागरिक की हत्या का दोषी ठहराया गया था। फेसबुक पर टिप्पणी के मामले में श्रीलंकाई नागरिक की सजा रद्द इसी महीने सऊदी अरब ने श्रीलंका के एक नागरिक की मौत की सजा रद्द कर दी थी। उसे फेसबुक पर एक टिप्पणी करने के लिए धर्म का अपमान करने का दोषी ठहराया गया था। इस मामले को लेकर श्रीलंका में विरोध हुआ था। इसके बाद उस व्यक्ति को राहत दिलाने के लिए कूटनीतिक स्तर पर कोशिशें की गईं। आखिरकार, सऊदी अरब ने उसकी मौत की सजा रद्द कर दी। ———————– यह खबर भी पढ़ें… ऑस्ट्रेलिया की महिला सांसद हेलेन को कार से कुचला:ऑफिस के बाहर मारी टक्कर, हालत गंभीर; 43 साल का आरोपी ड्राइवर गिरफ्तार ऑस्ट्रेलिया में निर्दलीय महिला सांसद हेलेन हेन्स को सोमवार को उनकी ऑफिस के बाहर कार से कुचल दिया गया। 65 साल की हेन्स की हालत गंभीर है। उन्हें एयरलिफ्ट कर अस्पताल पहुंचाया गया। पूरी खबर पढ़ें…

इंदौर कांग्रेस ने महापौर को बताया ‘मित्रासुर’, रीगल चौराहे पर फूंका पुतला, कहा, बताएं 6 महीने में क्‍या काम किया

इंदौर कांग्रेस ने महापौर को बताया 'मित्रासुर', रीगल चौराहे पर फूंका पुतला, कहा, बताएं 6 महीने में क्‍या काम किया

pushymitra bhargav

इंदौर कांग्रेस ने महापौर को मित्रासुर बताया और शहर की समस्याओं को लेकर सोमवार को रीगल चौराहे पर उनका पुतला फूंका। यहां नगर निगम नेता प्रतिपक्ष सोनिला मिमरोट के नेतृत्व में प्रदर्शन किया गया। इस दौरान महापौर पुष्यमित्र भार्गव व नगर निगम के खिलाफ नारेबाजी की गई। प्रदर्शनकारियों ने गड्ढे, जलसंकट, ट्रैफिक, ड्रेनेज और कथित घोटालों जैसे मुद्दों को उठाया। मिमरोट ने महापौर को छह महीने में काम साबित करने या इस्तीफा देने की चुनौती दी।

सोनिला मिमरोट महिलाओं के साथ रीगल चौराहे पर पहुंचीं। प्रदर्शन के दौरान महापौर मुर्दाबाद, धोखेबाज और भाजपा मुर्दाबाद के नारे लगाए गए। प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम के खिलाफ भी नारेबाजी की। इस दौरान राहुल गांधी जिंदाबाद के नारे भी सुनाई दिए।

प्रदर्शन के दौरान मित्रासुर का पुतला लाया गया। उसके अलग-अलग चेहरों पर शहर की समस्याओं और कथित अनियमितताओं से जुड़े नाम लिखे गए थे। इनमें गड्ढा मित्र, फर्जी नामांतरण घोटाला मित्र, भागीरथपुरा कांड मित्र, सफाईकर्मियों का झूठा मित्र, जलसंकट मित्र, अवैध होर्डिंग मित्र, घटिया ट्रैफिक नवाचार मित्र, भेदभाव मित्र और फर्जी बिल घोटाला मित्र शामिल थे। प्रदर्शनकारियों ने मित्रासुर मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए पुतला दहन किया।

नेता प्रतिपक्ष सोनिला मिमरोट ने कहा कि महापौर पुष्यमित्र भार्गव खुद को इंदौर का मित्र बताते हैं, लेकिन उनके अनुसार वे जनता के मित्र नहीं, बल्कि शत्रु हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि महापौर ने अपनी जिम्मेदारियां नहीं निभाईं और शहर के गड्ढों, पानी, ट्रैफिक व ड्रेनेज की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने महापौर पर घोटालों में शामिल लोगों का साथ देने का आरोप भी लगाया।

Muhurat Trading: क्या इस दिवाली भी दोपहर में होगी मुहूर्त ट्रेडिंग? ब्रोकर्स और अन्य मार्केट पार्टिसिपेंट्स ने स्टॉक एक्सचेंजों से की अपील

पिछले साल की तरह इस बार भी दिवाली पर ‘मुहूर्त ट्रेडिंग’ का आयोजन दिन के समय किया जाए। ऐसा अनुरोध स्टॉक ब्रोकरों और अन्य मार्केट पार्टिसिपेंट्स ने एक बार फिर स्टॉक एक्सचेंजों से किया है। ब्रोकरों ने ‘ब्रोकर्स इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स फोरम’ (BISF) के माध्यम से एक्सचेंजों को एक प्रस्ताव सौंपा है। पिछले साल दिवाली पर मुहूर्त ट्रेडिंग को शाम के पारंपरिक समय के बजाय दोपहर 1:45 बजे से 2:45 बजे के बीच आयोजित किया गया था। इससे पहले भी साल 2012 में एक बार मुहूर्त ट्रेडिंग सेशन दोपहर 3:45 बजे से शाम 5:00 बजे के बीच रखा गया था। ऐसा शुभ समय को देखते हुए किया गया था।

मनीकंट्रोल को ब्रोकरों से पता चला है कि इस साल 8 नवंबर को दिवाली पर शुभ मुहूर्त का समय दोपहर 1:47 बजे से 3:12 बजे के बीच है। उन्होंने दोपहर 2 बजे से 3 बजे के बीच ट्रेडिंग सत्र आयोजित करने का प्रस्ताव दिया है। भारतीय शेयर बाजारों में दिवाली पर मुहूर्त ट्रेडिंग की परंपरा कई सालों से चली आ रही है।

निवेशक इस विशेष सत्र में एक प्रतीकात्मक शुरुआत के तौर पर हिस्सा लेते हैं, जिसे हिंदू परंपरा में देवी लक्ष्मी की पूजा से जोड़कर देखा जाता है और यह धन-समृद्धि लाने का प्रतीक माना जाता है। यह सत्र विक्रम संवत कैलेंडर के अनुसार नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत का भी प्रतीक है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) ने 1957 में ‘मुहूर्त ट्रेडिंग’ की परंपरा शुरू की थी।

दोपहर 2:20 बजे से 3:20 बजे के बीच हो सकती है मुहूर्त ट्रेडिंग

आमतौर पर, ट्रेडिंग शेड्यूल और छुट्टियों को अंतिम रूप देने से पहले एक्सचेंज आपस में परामर्श करते हैं। इन चर्चाओं के पूरा होने के बाद ही मुहूर्त ट्रेडिंग के फाइनल शेड्यूल की घोषणा होने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार, एक्सचेंज इस अनुरोध पर विचार कर रहे हैं। शुरुआती योजना के तहत, मुहूर्त ट्रेडिंग दोपहर 2:20 बजे से 3:20 बजे के बीच हो सकती है। इससे पहले दोपहर 1:50 बजे से 2:05 बजे तक ‘ब्लॉक डील विंडो’ और उसके बाद 2:05 बजे से 2:20 बजे तक ‘प्री-ओपनिंग सेशन’ हो सकता है। हालांकि, अभी तक कोई आधिकारिक सर्कुलर जारी नहीं किया गया है।

ब्रोकरों का तर्क है कि दोपहर में मुहूर्त ट्रेडिंग सत्र होने से ब्रोकरेज फर्मों, स्टॉक एक्सचेंजों, क्लियरिंग कॉरपोरेशंस, डिपॉजिटरीज, कस्टोडियंस, बैंकों और बाजार से जुड़े अन्य संस्थानों में काम करने वाले हजारों कर्मचारी अपना काम समय पर पूरा कर सकेंगे। इससे वे शाम के शुभ समय में अपने परिवारों के साथ दिवाली मना सकेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य नियमों में कोई ढील मांगना नहीं है, बल्कि मार्केट प्रोफेशनल्स को अपने परिवारों के साथ त्योहार मनाने में मदद करना है। साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि बाजार का कामकाज सुचारू रूप से चलता रहे।

UltraTech Cement Q2 Results: सितंबर तिमाही में मुनाफा 21% बढ़ा, रेवेन्यू रहा 19% ज्यादा

ANMI ने भी किया अनुरोध

‘एसोसिएशन ऑफ NSE मेंबर्स ऑफ इंडिया’ (ANMI) ने भी अलग से एक्सचेंजों से दोपहर में मुहूर्त ट्रेडिंग कराने के प्रस्ताव पर विचार करने का आग्रह किया है। उन्होंने इसके पीछे ‘परंपरा, समावेशिता और वर्क-लाइफ बैलेंस’ का तर्क दिया है। ANMI के नेशनल प्रेसिडेंट कमलेश श्रॉफ का कहना है, “इससे हमारी बाजार की पुरानी परंपरा भी बनी रहेगी और ब्रोकरों, कर्मचारियों व उनके परिवारों को देर शाम तक चलने वाले ट्रेडिंग सत्र के दबाव के बिना, साथ में दिवाली मनाने का मौका मिलेगा।”

ब्रोकरों ने ‘मुहूर्त ट्रेडिंग’ के बाद पूरी की जाने वाली अनुपालन (Compliance) जरूरतों का भी जिक्र किया है। उन्होंने सुझाव दिया है कि कुछ प्रक्रियाओं, जैसे कि सिक्योरिटीज के ‘अर्ली पे-इन’ और फंड एलोकेशन को अगले कारोबारी दिन पूरा करने की इजाजत दी जाए। अन्य सुझावों में इस स्थिति के कारण होने वाली ‘पीक मार्जिन’ की कमी पर लगने वाले जुर्माने को माफ करना, और ‘एंड-ऑफ-डे’ (EOD) एलोकेशन को अगले कारोबारी दिन सुबह 9 बजे से पहले पूरा करने की छूट देना शामिल है। मौजूदा शेड्यूल के कारण स्टॉक एक्सचेंज और क्लियरिंग कॉर्पोरेशन जैसी संस्थाओं के कर्मचारियों को अपने परिवारों के साथ त्योहार मनाने के लिए बहुत कम समय मिल पाता है।

अनुपालन की बढ़ती जरूरतों और रिपोर्टिंग की सख्त समय-सीमाओं के कारण, कर्मचारियों को अक्सर फंड एलोकेशन और सिक्योरिटीज के ‘अर्ली पे-इन’ जैसी पोस्ट-ट्रेड प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिए देर तक रुकना पड़ता है। जब तक वे अपना काम खत्म करके घर पहुंचते हैं, तब तक दिवाली मनाने का आनंद खत्म हो चुका होता है।

Ixigo Share Price: गिरते बाजार में शेयर 15% तक भागा, कंपनी के मुनाफे में लौटने से निवेशक गदगद

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

यूपी में एक मार्कशीट पर 10 नियुक्तियां, हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी, एसटीएफ का शिकंजा

यूपी में एक मार्कशीट पर 10 नियुक्तियां, हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी, एसटीएफ का शिकंजा

UP fake teacher scam

UP fake teacher scam: बेसिक शिक्षा विभाग में एक ही शैक्षिक प्रमाणपत्र (मार्कशीट) का इस्तेमाल कर 10-10 शिक्षकों की फर्जी नियुक्तियों के खुलासे ने पूरी प्रणाली को हिलाकर रख दिया है। इस बड़े फर्जीवाड़े और कूटरचित दस्तावेजों के खेल पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है।

 

​न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने कक्षा 1 से 8 तक के स्कूलों में तैनात सभी परिषदीय शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की गहन जांच कराने का सख्त आदेश दिया है। इस जांच की निगरानी शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ एसटीएफ (STF) करेगी।

​क्या हैं हाईकोर्ट के निर्देश?

  • ​एक सप्ताह का अल्टीमेटम : सभी शिक्षकों को एक सप्ताह के भीतर अपने नियुक्ति पत्र और शैक्षणिक दस्तावेज संबंधित जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) के समक्ष जमा करने होंगे।
  • ​रिश्तेदारों का ब्योरा देना अनिवार्य : शिक्षकों को एक नोटरी शपथ पत्र भी प्रस्तुत करना होगा, जिसमें यह स्पष्ट करना होगा कि उनके कौन-कौन से रिश्तेदार शिक्षा विभाग में BSA या उससे उच्च पदों पर कार्यरत हैं या सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
  • ​4 नवंबर को अगली सुनवाई : कोर्ट ने अधिकारियों को 4 नवंबर तक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। फर्जी नियुक्तियों को रद्द करने, अवैध रूप से उठाए गए वेतन की वसूली और इसमें संलिप्त अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई पर कोर्ट अगली सुनवाई पर विचार करेगा।

​ऐसे खुला फर्जीवाड़े का खेल

​संतकबीरनगर निवासी कुसुमलता ने अपनी नियुक्ति की मंजूरी और बकाया वेतन जारी कराने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन जांच के दौरान एसटीएफ लखनऊ ने बड़ा खुलासा किया। याची ने गोरखपुर के बरईपार कंपोजिट प्राथमिक विद्यालय में तैनात वास्तविक शिक्षिका ‘कुसुमलता श्रीवास्तव’ के असली दस्तावेजों का इस्तेमाल कर धोखाधड़ी से नौकरी हासिल की थी।

 

​एसटीएफ द्वारा 12 और 13 अक्तूबर को सत्यापन के लिए बुलाए जाने पर भी याची उपस्थित नहीं हुई। सुनवाई के दौरान सामने आया कि यह कोई अकेला मामला नहीं है, बल्कि पिछले दो दशकों से एक ही डिग्री पर 10 या उससे अधिक लोगों को नौकरी दिलाने का संगठित नेटवर्क चल रहा है।

​हाईकोर्ट की तल्क टिप्पणी

​सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार भले ही मुफ्त किताबें, यूनिफॉर्म और मिड-डे मील पर करोड़ों खर्च कर दे, लेकिन फर्जी डिग्री से शिक्षक बने लोग बच्चों का भविष्य कभी नहीं संवार सकते। सरकारी स्कूलों में घटती छात्र संख्या और शिक्षा के गिरते स्तर का मुख्य कारण शिक्षकों की अयोग्यता और फर्जीवाड़ा है।

​गोपनीय पत्र लीक होने से बढ़ा संकट

​एसटीएफ के इनपुट के अनुसार राज्य में 10,000 से अधिक शिक्षकों के दस्तावेज संदिग्ध हैं। वर्ष 2020 में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में अनामिका शुक्ला के नाम पर एक साथ कई जिलों में नौकरियां हथियाने का मामला सामने आया था। जून 2022 में एसटीएफ ने 35 से अधिक जिलों के 228 संदिग्ध शिक्षकों की सूची सौंपी थी, लेकिन गोपनीय पत्र लीक होने, एफआईआर में देरी और बिहार, मध्य प्रदेश तथा आगरा विश्वविद्यालयों से सत्यापन में लगने वाले वर्षों के समय के कारण कार्रवाई प्रभावित हुई।

 

इस बीच, इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब बेसिक शिक्षा विभाग में हलचल मच गई है और पिछले दो दशकों से चल रहे फर्जीवाड़ा रैकेट का पर्दाफाश होना तय माना जा रहा है।