ग्वालियर में शीतला मंदिर हादसे में सवालों में पुलिसिया सिस्टम, नो-एंट्री में कैसे मौत बनकर दौड़ा ट्रक, कार्रवाई पर भी सवाल

ग्वालियर में शीतला मंदिर हादसे में सवालों में पुलिसिया सिस्टम, नो-एंट्री में कैसे मौत बनकर दौड़ा ट्रक, कार्रवाई पर भी सवाल

ग्वालियर पुलिस जिस तरह दिन भर शहर के हर चौक-चौराहे पर चेकिंग प्वाइंट लगाकर लोगों के चालान काटती है,काश वह ऐसी ही चौकसी शीतला माता मंदिर जाने वाली रोड पर दिखाती है तो आज 15 घरों के चिराग नहीं बुझते और न ही अस्पाल में 40 से अधिक लोग तड़प रहे होते। शीतला मंदिर हादसे के लिए भले ही पुलिस के अफसर ट्रक के ब्रेक फेल होने का वजह बताते हुए अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे है लेकिन सवाल यह है कि जहां पर हादसा हुआ वह नो एंट्री जोन था, फिर धान से भरा ट्रक कैसे वहां पहुंचा और 50 से अधिक लोगों को रौंदा डालाा। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने पैसे लेकर ट्रक को प्रतिबंधित रास्ते पर जाने  दिया। 

 

शीतला माता मंदिर के पास हुए भीषण सड़क हादसे ने जिले के पुलिसिया सिस्टम को लेकर एक नहीं कई सवाल खड़े कर दिए है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए प्रतिबंधित मार्ग पर आखिर लोडेड ट्रक पहुंचा कैसे? क्या पुलिस की बैरिकेडिंग सिर्फ खानापू्र्ति थी? क्या चेकपोस्ट पर तैनात पुलिसकर्मियों ने पैसे लेकर ट्रक को नो एंट्री वाले इलाके में जाना दिया? क्या मंदिर जाने वाले रास्ते पर ट्रैफिक व्यवस्था की निगरानी में बड़ी चूक की गई?

 

अगर मंदिर जाने वाले रास्ते पर रोक थी, बैरिकेडिंग थी और सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी पुलिस की थी, फिर भी धान से भरा ट्रक श्रद्धालुओं को कुचलता हुआ मंदिर के नजदीक पहुंच गया, यह सबसे बड़ा सवाल है।  दरअसल नवरात्रि के दौरान शीतला माता मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे थे। ऐसे समय में भारी वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध होने के बावजूद ट्रक का प्रतिबंधित क्षेत्र तक पहुंच जाना कई सवाल खड़े करता है। सवाल यह भी है कि अगर मंदिर जाने वाली रास्ते पर भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित था, तो उस नियम का पालन कराने की जिम्मेदारी किसकी थी? ट्रक चालक की लापरवाही की जांच जरूरी है, लेकिन इसके साथ यह पता लगाना भी उतना ही जरूरी है कि प्रतिबंधित रास्ते पर वाहन को रोकने में व्यवस्था नाकाम क्यों रही। 

 

कार्रवाई पर भी उठे सवाल?-हादसे के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर झांसी रोड के सीएसपी को पद से हटाया गया और आठ अन्य पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया। इस पूरे मामले में झांसी रोड के सीएसपी रवि भदौरिया को हटाने के साथ झांसी रोड थाना प्रभारी शक्ति सिंह यादव, आंतरी थाना प्रभारी गीतेश शर्मा, झांसी रोड के ट्रैफिक थाना प्रभारी अभिषेक रघुवंशी, निरीक्षक यातायात राघवेंद्र जादौन, प्रधान आरक्षक सुशील द्विवेदी, आरक्षक किशन खन्ना, आरक्षक अनिल जैतपुरिया और आरक्षक पवन सेंगर को निलंबित किया गया है।

सरकार ने भले ही हादसे के बाद फौर तौर पर कार्रवाई कर दी हो लेकिन लेकिन सवाल यह है कि क्या निलंबन और गिरफ्तारी से उन खामियों का पता चल जाएगा, जिनकी वजह से प्रतिबंधित मार्ग पर भारी वाहन पहुंचा? हादसे के बाद जिला कलेक्टर ने पूरे मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए है लेकिन उन परिवारों का क्या जिनके सहारे को इस हादसे ने छीन लिया।