Tata Sons Chairman N Chandrasekaran: आखिर कार्यकाल खत्म होने के 6 महीने पहले एन चंद्रशेखरन ने क्यों दे दिया इस्तीफा?

टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के अचानक इस्तीफे ने चौंका दिया। 12 अगस्त की सुबह उन्होंने अपने इ्स्तीफे का ऐलान किया। इसका असर टाटा समूह की कंपनियों के शेयरों पर पड़ा। टाटा समूह देश का सबसे बड़ा कारोबारी समूह है। इसकी तीन दर्जन से ज्यादा कंपनियां शेयर बाजार में सूचीबद्ध हैं। इनमें टीसीएस, टाइटन, टाटा कंज्यूमर, टाटा मोटर्स जैसी दिग्गज कंपनियां हैं, जिनकी पहचान देश के घर-घर में है। चंद्रशेखरन का कार्यकाल 20 फरवरी, 2027 को खत्म हो रहा है। सवाल है कि चंद्रशेखरन ने अचानक क्यों इस्तीफा दे दिया?

टाटा समूह से 40 साल पुराना रिश्ता खत्म हो जाएगा

पहले एन चंद्रशेखरन के बारे में थोड़ा जान लेना जरूरी है। वह 1987 में टाटा समूह का हिस्सा बने थे। 2009 में उन्हें टाटा समूह की सबसे बड़ी कंपनी TCS का सीईओ नियुक्त किया गया। यह देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी भी है। फिर, 2017 में उन्हें टाटा संस का चेयरमैन नियुक्त किया गया। यह टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी है। टाटा संस का चेयरमैन एक तरह से पूरे ग्रुप का बॉस होता है। इसलिए टाटा संस के चेयरमैन के पद को समूह में सबसे अहम माना जाता है।

फरवरी में तीसरी बार नियुक्ति के प्रस्ताव पर टल गया था फैसला

इस साल फरवरी में चंद्रशेखरन को तीसरी बार टाटा संस का चेयरमैन नियुक्त करने के प्रस्ताव पर फैसला होना था। लेकिन, इस फैसले को तब टाल दिया गया। इसकी वजह नोएल टाटा का विरोध था। वह इस प्रस्ताव के खिलाफ थे। नोएल टाटा समूह की चैरिटी का काम देखने वाले टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन हैं। नोएल रतन टाटा के सौतेले भाई हैं। रतन टाटा के निधन के बाद वह टाटा समूह में सबसे पावरफुल हैं। रतन टाटा के निधन के बाद उन्हें टाटा ट्रस्ट्स का चेयरमैन नियुक्त किया गया था। टाटा ट्रस्ट्स की टाटा संस में नियंत्रण योग्य यानी आधा से ज्यादा हिस्सेदारी है। इसलिए टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन को सबसे ज्यादा पावरफुल माना जाता है।

टाटा समूह की नई लीडरशिप को लेकर अनिश्चितता थी

तीसरी बार नियुक्ति के प्रस्ताव पर फैसला टलने के छह महीने बाद भी यह मसला लंबित था। इसका मतलब है कि टाटा संस के नए लीडर को लेकर अनिश्चितता की स्थिति थी। चंद्रशेखरन का मानना है कि टाटा ग्रुप के भविष्य के लिए ऐसी अनिश्चितता ठीक नहीं है। इस समूह में करीब तीन दर्जन ऐसी कंपनियां हैं, जो शेयर बाजार में लिस्टेड है। इन कंपनियों के शेयरों में लाखों निवेशकों का पैसा लगा है। टाटा का ब्रांड न सिर्फ भारत में बल्कि विदेश में भी काफी प्रतिष्ठित है। देश के करोड़ों लोग इस ब्रांड पर भरोसा करते हैं।

18 अगस्त को होने वाली है टाटा संस के बोर्ड की मीटिंग

चंद्रशेखरन ने काफी विचार करने के बाद अपने पद से इस्तीफा देने का फैसला लिया। इकोनॉमिक टाइम्स की 12 अगस्त की एक खबर में बताया गया कि चंद्रशेखरन 18 अगस्त से पहले इस्तीफा देना चाहते थे। इस बारे में उन्होंने अपने करीब लोगों से चर्चा की थी। दरअसल, 18 अगस्त को टाटा संस की एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) होनी है। इस मीटिंग में शेयरहोल्डर को चंद्रशेखरन की तीसरी बार चेयरमैन पद पर नियुक्ति के प्रस्ताव पर वोटिंग करनी थी।

बोर्ड का एक सदस्य तीसरी बार नियुक्ति के प्रस्ताव के खिलाफ

चंद्रशेखरन ने इस्तीफे के बाद जो बयान दिया है, उससे यह संकेत मिलता है कि उन्हें तीसरी बार कार्यकाल बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने का भरोसा नहीं था। उन्होंने बयान में कहा है, “तीसरी बार मेरी नियुक्ति के प्रस्ताव पर फैसला नहीं हो सका, क्योंकि बोर्ड का एक सदस्य का समर्थन प्रस्ताव को हासिल नहीं था।”

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टाटा समूह के हित में पद से इस्तीफा देने का लिया फैसला

उन्होंने कहा कि प्रस्ताव पर फैसला टलने के 6 महीने बाद भी इस मसले का समाधान नहीं हो सका है। उन्हें टाटा समूह जैसे कारोबारी समूह की लीडरशिप को लेकर ऐसी अनिश्चितता पसंद नहीं थी। उनका मानना था कि यह टाटा समूह के भविष्य के लिए ठीक नहीं है। इसलिए उन्होंने एजीएम से पहले इस्तीफा देने का फैसला किया।

A-1 लिमिटेड को से ₹38 करोड़ का ऑर्डर मिला, एसिड और इंडस्ट्रियल केमिकल की सप्लाई करेगी

A-1 Ltd Order: लॉजिस्टिक्स और इंडस्ट्रियल एसिड-केमिकल सप्लाई करने वाली कंपनी A-1 Ltd को Solar Industries Group से 38.70 करोड़ रुपये का नया ऑर्डर मिला है। यह ऑर्डर एसिड और इंडस्ट्रियल केमिकल की सप्लाई के लिए है। इसमें GST शामिल नहीं है।

तीन महीने में पूरी होगी सप्लाई

A-1  लिमिटेड ने बताया कि यह ऑर्डर Solar Industries और उसकी ग्रुप कंपनियों के लिए है। इसकी सप्लाई मौजूदा वित्त वर्ष में 31 अक्टूबर 2026 तक पूरी की जाएगी। इससे FY27 की दूसरी और तीसरी तिमाही के कारोबार को मजबूती मिलने की उम्मीद है। इससे पहले जून 2026 में भी कंपनी को Solar Group से 12 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला था।

ऑर्डर बुक होगी मजबूत

कंपनी का कहना है कि इस ऑर्डर से उसकी ऑर्डर बुक और मजबूत होगी। साथ ही आने वाले समय में रेवेन्यू बढ़ने की संभावना भी बेहतर होगी। यह ऑर्डर Solar Industries के साथ कंपनी के लंबे कारोबारी रिश्ते और उसकी सप्लाई क्षमता पर भरोसे को भी दिखाता है।

पहली तिमाही में शानदार नतीजे

A-1 Ltd ने FY27 की पहली तिमाही में भी अच्छा प्रदर्शन किया। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 170.5% बढ़कर 175.01 करोड़ रुपये पहुंच गया।

वहीं, टैक्स के बाद शुद्ध मुनाफा (PAT) 429.3% बढ़कर 16.73 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले इसी तिमाही में कंपनी का मुनाफा 3.16 करोड़ रुपये था।

कंपनी को आगे भी उम्मीद

A-1 Ltd का कहना है कि समय पर ऑर्डर पूरा करने से ग्राहकों के साथ रिश्ते और मजबूत होंगे। आगे भी कंपनी का फोकस बेहतर ऑपरेशनल प्रदर्शन, समय पर डिलीवरी और शेयरधारकों के लिए लंबी अवधि में वैल्यू बनाने पर रहेगा।

टाटा ग्रुप की TCS ने डेटा लीक की खबरों को खारिज किया, कहा- सिस्टम में सेंध के कोई सबूत नहीं

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

निफ्टी में हेरफेर से आखिरी समय में जोरदार तेजी आई? 3 और 4 अगस्त के ट्रेड्स की जांच कर रहा SEBI

मार्केट रेगुलेटर SEBI 3 और 4 अगस्त को क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के दौरान हुए ट्रेड्स की जांच कर रहा है। रेगुलेटर यह पता लगाना चाहता है कि कहीं क्लोजिंग प्राइस या इंडेक्स में हेरफेर तो नहीं किया गया। मामले से जुड़े सूत्रों ने यह जानकारी दी है।

सूत्रों के मुताबिक, SEBI ने दोनों दिनों का ट्रेडिंग डेटा स्टॉक एक्सचेंजों से मांगा था। एक्सचेंज डेटा दे चुके हैं। अब नियामक उसकी जांच कर रहा है।

क्या देख रहा है SEBI?

SEBI यह समझना चाहता है कि CAS शुरू होने से पहले और उसके बाद इंडेक्स में जो बड़ा अंतर दिखा, वह सामान्य था या किसी ने जानबूझकर क्लोजिंग प्राइस को प्रभावित किया।

3 अगस्त को CAS के पहले दिन निफ्टी 3:28 बजे करीब 24,573 पर था। सिर्फ दो मिनट में यह 201 अंक उछलकर 24,774 पर पहुंच गया।

इसी तरह 4 अगस्त को 3 बजे निफ्टी 24,463 के आसपास था। 3:15 बजे तक यह 152 अंक चढ़कर 24,615 पर पहुंच गया। इन तेज बदलावों के बाद बाजार में सवाल उठने लगे।

हेरफेर की आशंका क्यों?

बाजार के जानकारों का कहना है कि CAS के दौरान ट्रेडिंग कम होती है। ऐसे में कम कारोबार वाले शेयरों या इंडेक्स में बड़ी खरीद-बिक्री करके क्लोजिंग प्राइस को प्रभावित करना आसान हो सकता है।

उदाहरण के लिए, कोई बड़ा निवेशक पहले इंडेक्स में पोजिशन बना सकता है। फिर CAS के दौरान बड़ी खरीदारी करके इंडेक्स को ऊपर धकेलने की कोशिश कर सकता है। एक्सपायरी वाले दिन ऐसा जोखिम और बढ़ सकता है।

लेकिन साबित करना आसान नहीं

एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ किसी ट्रेड से इंडेक्स ऊपर-नीचे हुआ, इससे हेरफेर साबित नहीं होता। SEBI को यह भी दिखाना होगा कि क्लोजिंग प्राइस को प्रभावित करने की मंशा थी और इसमें एक से ज्यादा पक्ष शामिल थे।

SEBI ने क्या कदम उठाए?

SEBI ने ब्रोकरों से कहा है कि वे रिटेल निवेशकों की भागीदारी बढ़ाएं। साथ ही अपने ट्रेडिंग ऐप पर Indicative Price को साफ तौर पर दिखाएं।

सूत्रों का कहना है कि यह निगरानी पहले से तय योजना का हिस्सा है। इसका मकसद सामान्य निवेशकों को रोकना नहीं, बल्कि बाजार में निष्पक्ष और व्यवस्थित कारोबार सुनिश्चित करना है।

Closing Auction Session (CAS) क्या है?

Closing Auction Session यानी CAS शेयर बाजार में 3:15 बजे से 3:30 बजे तक चलने वाली 15 मिनट की प्रक्रिया है। इस दौरान खरीद और बिक्री के ऑर्डर मिलाए जाते हैं। फिर ऐसा क्लोजिंग प्राइस तय होता है, जिस पर सबसे ज्यादा ट्रेड हो सकें।

SEBI ने यह व्यवस्था इसलिए लागू की है ताकि क्लोजिंग प्राइस ज्यादा सटीक और पारदर्शी हो। साथ ही क्लोजिंग के समय हेरफेर की गुंजाइश कम हो और भारतीय शेयर बाजार वैश्विक मानकों के और करीब पहुंचे।

टाटा ग्रुप की TCS ने डेटा लीक की खबरों को खारिज किया, कहा- सिस्टम में सेंध के कोई सबूत नहीं

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Air India टर्बुलेंस मामले में बड़ी खबर, विमान का एक पायलट डोप टेस्ट में पॉजिटिव, क्या हुआ था फुकेत-दिल्ली एयर इंडिया फ्लाइट में?

Air India Pilot News: एयर इंडिया की फुकेत से दिल्ली आ रही एक फ्लाइट में 4 अगस्त को हुई गंभीर टर्बुलेंस की घटना अब एक नए और बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गई है। The Times of India ने कई सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि इस एयर इंडिया विमान को उड़ाने वाले कैप्टन का पोस्ट-फ्लाइट डोप टेस्ट कथित तौर पर साइकोएक्टिव पदार्थों के लिए पॉजिटिव आया है। हालांकि, इस दावे की अभी Air India ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की है।

रिपोर्ट के मुताबिक, विमान के दिल्ली पहुंचने के बाद पायलटों का डोप टेस्ट किया गया था। लेकिन Air India का कहना है कि इस टेस्ट के नतीजे अभी उसे उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। इसलिए एयरलाइन फिलहाल यह बताने की स्थिति में नहीं है कि टेस्ट का परिणाम वास्तव में क्या रहा। रिपोर्ट में बताया गया है कि 4 अगस्त को टर्बुलेंस का सामना करने और अचानक लगभग 300 फीट नीचे गिरने के बाद फ्लाइट के कैप्टन का डोप टेस्ट (नशीले पदार्थों की जांच) पॉजिटिव आया है।

Air India ने क्या कहा?

एयर इंडिया के प्रवक्ता ने कहा कि एयरलाइन को जानकारी है कि लागू नियमों और प्रोटोकॉल के तहत फ्लाइट के बाद पायलटों की स्क्रीनिंग की गई थी। हालांकि, टेस्ट के परिणाम एयरलाइन के साथ साझा नहीं किए गए हैं। एयरलाइन ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके क्रू सदस्यों का नियमित रूप से ड्रग टेस्ट किया जाता है। यह प्रक्रिया किसी एक स्पेशल फ्लाइट या दुर्घटना जैसी घटना से जरूरी तौर पर जुड़ी नहीं होती। Air India के मुताबिक, वह नागरिक उड्डयन नियमों के तहत अपने क्रू की नियमित ड्रग टेस्टिंग कराती है। टाटा ग्रुप की एयरलाइन ने कहा कि संबंधित अधिकारियों के साथ जांच में पूरा सहयोग जारी रखेगी।

एयरलाइन ने कहा, “एयर इंडिया किसी खास फ़्लाइट या ऑपरेशनल घटना से अलग, सिविल एविएशन नियमों का पालन करते हुए क्रू सदस्यों का नियमित ड्रग टेस्ट करती है। हम ज़रूरत पड़ने पर संबंधित अधिकारियों के साथ सहयोग करना जारी रखेंगे।” डोप टेस्ट का यह नतीजा ऐसे समय में आया है जब एविएशन अधिकारी 4 अगस्त की टर्बुलेंस की घटना की जांच कर रहे हैं। इस घटना के दौरान फ्लाइट अचानक लगभग 300 फीट नीचे गिर गया था, जिससे यात्री और क्रू सदस्य घायल हो गए थे।

आखिर 4 अगस्त को Phuket-Delhi फ्लाइट में हुआ क्या था?

नागर विमानन मंत्री के राममोहन नायडू ने बताया कि फुकेत से दिल्ली आ रहे एयर इंडिया के विमान में मंगलवार 4 अगस्त को चार से पांच मिनट तक हवा में तेज टर्बुलेंस हुई, जिसमें चालक दल के कुछ सदस्यों को रीढ़ और गर्दन में चोटें आईं। उन्होंने बताया कि हवा में अचानक आई टर्बुलेंस के कारण विमान करीब 300 फुट नीचे चला गया। इस घटना में चालक दल के चार सदस्यों समेत कम से कम 17 लोग घायल हो गए। उन्होंने बताया कि नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) इस पूरे मामले की जांच कर रहा है।

नायडू ने राष्ट्रीय राजधानी में कहा कि विमान को करीब पांच मिनट तक हवा में टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा, “विमान को इसके बाद भी करीब एक घंटे तक उड़ान भरनी थी। इस दौरान चालक दल के सदस्यों ने यात्रियों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई। यह बहुत बहादुरी का काम था… मैं उनके साहस के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं।” चोटों की गंभीरता के बारे में पूछे जाने पर मंत्री ने कहा कि चालक दल के दो सदस्यों को रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से और गर्दन के पास चोटें आई हैं। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी है।

13 यात्रियों को कराया गया भर्ती

विमान में 137 यात्री और चालक दल के आठ सदस्य सवार थे। मंगलवार को घटना के बाद 13 यात्रियों और चालक दल के चार सदस्यों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। Air India ने एक बयान में कहा, “चार अगस्त को फुकेत से दिल्ली आ रहे एअर इंडिया के विमान AI2379 से जुड़ी घटना के बाद अस्पताल में भर्ती कराए गए सभी 13 यात्रियों को पांच अगस्त को दोपहर 3:30 बजे तक अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।”

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बयान में आगे कहा गया, “चालक दल के चार सदस्य अब भी डॉक्टरों की निगरानी में हैं। उनका इलाज जारी है।’’ एयर इंडिया ने कहा कि उसकी टीम अस्पतालों में मौजूद हैं और प्रभावित लोगों के संपर्क में हैं।

Tata Sons IPO: टाटा संस को IPO लाना ही होगा? RBI से राहत नहीं मिली, अपर लेयर NBFC लिस्ट में बरकरार

Tata Sons IPO: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 6 अगस्त को अपर लेयर NBFC (NBFC-UL) की नई लिस्ट जारी की। इसमें टाटा संस का नाम बरकरार रखा गया है। इसका मतलब है कि RBI ने अभी तक टाटा संस को NBFC-UL फ्रेमवर्क से बाहर निकलने की मंजूरी नहीं दी है।

RBI ने कहा कि कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) के तौर पर अपना रजिस्ट्रेशन रद्द कराने के लिए टाटा संस ने जो आवेदन दिया है, वह अभी जांच के दौर में है। केंद्रीय बैंक ने साफ किया कि अपर लेयर लिस्ट में टाटा संस को शामिल करने का मतलब यह नहीं है कि उसकी डीरजिस्ट्रेशन अर्जी खारिज हो गई है। उस पर अलग से फैसला लिया जाएगा।

अपर लेयर NBFC क्या है?

RBI ने कहा कि अपर लेयर में उन NBFC को रखा जाता है, जिन पर ज्यादा नियामकीय निगरानी की जरूरत होती है। फिलहाल इसके लिए 1 लाख करोड़ रुपये की एसेट सीमा तय है। हालांकि, RBI समय-समय पर इस सीमा की समीक्षा करता है और हर तीन साल में इसे दोबारा देखा जाएगा।

केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा कि अगर कोई NBFC एक बार अपर लेयर में आ जाती है, तो उसे कम से कम 5 साल तक इसी श्रेणी के कड़े नियमों का पालन करना होगा। भले ही बाद के वर्षों में वह तय मानदंडों पर खरी न उतरे।

किन कंपनियों के नाम हैं लिस्ट में?

नई लिस्ट में REC, PFC, IRFC, PNB Housing Finance, Sammaan Capital समेत कुल 17 NBFC शामिल हैं। RBI ने पहले नियमों में बदलाव करते हुए सरकारी मालिकाना हक वाली योग्य NBFC को भी अपर लेयर में शामिल करने की अनुमति दी थी।

हालांकि, सरकारी NBFC के लिए एक राहत है। उन्हें शेयर बाजार में लिस्ट होना जरूरी नहीं होगा। लेकिन निजी कंपनियों को अपर लेयर NBFC बनने के तीन साल के भीतर शेयर बाजार में लिस्ट होना पड़ता है।

टाटा संस के लिए यह मामला क्यों अहम?

टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस एक Core Investment Company (CIC) के रूप में रजिस्टर्ड है। 31 मार्च 2026 तक कंपनी के पास करीब 1.75 लाख करोड़ रुपये की एसेट थीं। यानी यह RBI की तय सीमा से काफी ऊपर है।

टाटा संस ने अपना CIC लाइसेंस रद्द कराने के लिए आवेदन किया था। ऐसा इसलिए, क्योंकि अगर कंपनी NBFC नहीं रहती, तो उसे शेयर बाजार में लिस्ट होने की अनिवार्यता से राहत मिल सकती है।

टाटा संस लिस्टिंग से क्यों बचना चाहती है?

टाटा संस को 2022 में पहली बार अपर लेयर NBFC में शामिल किया गया था। नियमों के मुताबिक, उसे 2025 तक शेयर बाजार में लिस्ट होना था। इसी वजह से कंपनी ने CIC लाइसेंस रद्द करने का आवेदन दिया था।

जून में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने RBI को पत्र लिखकर संभावित लिस्टिंग का विरोध किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने कहा कि अगर टाटा संस की लिस्टिंग होती है, तो इससे टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी का लंबी अवधि स्वरूप बदल सकता है। साथ ही टाटा ट्रस्ट्स के परोपकारी उद्देश्यों पर भी असर पड़ सकता है।

HCC Q1 Results: इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को ₹51 करोड़ का मुनाफा, ऑर्डर बुक मजबूत हुई

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Trent Q1 Results: टाटा ग्रुप की कंपनी का मुनाफा 21% बढ़ा, रेवेन्यू में 18% का इजाफा

टाटा ग्रुप की कंपनी ट्रेंट लिमिटेड का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर करीब 21 प्रतिशत बढ़कर 519 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले मुनाफा 429.69 करोड़ रुपये था। ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू लगभग 17.8 प्रतिशत बढ़कर 5754.71 करोड़ रुपये हो गया। जून 2025 तिमाही में रेवेन्यू 4883.48 करोड़ रुपये था। ट्रेंट, टाटा ग्रुप का फैशन और लाइफस्टाइल बिजनेस है। कंपनी के Westside, Zudio और Star जैसे ब्रांड्स के तहत रिटेल स्टोर हैं।

कंपनी ने शेयर बाजारों को बताया है कि जून 2026 तिमाही में उसके कुल खर्च 5,082.96 करोड़ रुपये के रहे, जो एक साल पहले 4,368.59 करोड़ रुपये के थे। ट्रेंट में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 37.01 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। कंपनी के शेयर की फेस वैल्यू 1 रुपये है।

ट्रेंट ने जून 2026 तिमाही में 19 जूडियो स्टोर खोले। वहीं वेस्टसाइड स्टोर्स में 1 का इजाफा किया। इसके बाद जूडियो स्टोर्स की कुल संख्या 982 और वेस्टसाइड स्टोर्स की कुल संख्या 301 हो गई है।

ट्रेंट के शेयरों में तेजी

6 अगस्त को ट्रेंट के शेयरों में तेजी है। दिन में कीमत BSE पर पिछले बंद भाव से 4.5 प्रतिशत तक चढ़कर 3246.65 रुपये के हाई तक गई। कंपनी का मार्केट कैप 1.7 लाख करोड़ रुपये के करीब है। शेयर 2 सप्ताह में 11 प्रतिशत चढ़ा है। 3 साल में कीमत 180 प्रतिशत से ज्यादा उछली है। 5 साल का रिटर्न लगभग 420 प्रतिशत है।

Swiggy Share Price: FY31 तक ₹10000 करोड़ का एडजस्टेड EBITDA हासिल करने का लक्ष्य, शेयर 5% तक चढ़ा

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stocks to Watch: 6 अगस्त को इन 18 स्टॉक्स पर रखें नजर, दिख सकती है बड़ी हलचल

Stocks to Watch: गुरुवार, 6 अगस्त के कारोबार में कई शेयरों पर निवेशकों की खास नजर रहेगी। इनमें तिमाही नतीजे, बड़े ऑर्डर, शेयर बायबैक, USFDA अपडेट और मैनेजमेंट की अहम घोषणाओं से जुड़े स्टॉक्स शामिल हैं। ऐसे में इन 18 कंपनियों के शेयरों में बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है।

HDFC Bank

प्राइवेट सेक्टर के HDFC Bank ने कहा कि HDFC लिमिटेड के मर्जर का असर कम होने के साथ अगले 2-3 वर्षों में बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) और CASA रेशियो बेहतर होगा। बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन राजीव कुमार ने AGM में कहा कि मर्जर के बाद बैलेंस शीट की संरचना बदली है, जिसका असर खत्म होने में कुछ समय लगेगा।

Aurobindo Pharma

फार्मा कंपनी Aurobindo Pharma का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट जून तिमाही में 25.2% बढ़कर 1,032 करोड़ रुपये रहा। रेवेन्यू 16.3% बढ़कर 9,150.3 करोड़ रुपये और EBITDA 1,881 करोड़ रुपये रहा। कंपनी के नतीजे बाजार के अनुमान से बेहतर रहे, जबकि EBITDA मार्जिन बढ़कर 21% हो गया।

Neuland Laboratories

फार्मा कंपनी Neuland Laboratories का शुद्ध मुनाफा जून तिमाही में 14 करोड़ रुपये से बढ़कर 148 करोड़ रुपये हो गया। रेवेन्यू 292.7 करोड़ रुपये से बढ़कर 641.5 करोड़ रुपये रही। EBITDA 34.4 करोड़ रुपये से बढ़कर 222.7 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA मार्जिन भी 11.8% से बढ़कर 34.7% पर पहुंच गया।

Bikaji Foods International

पैकेज्ड फूड कंपनी Bikaji Foods International का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा जून तिमाही में मामूली 0.4% बढ़कर 60.1 करोड़ रुपये रहा। हालांकि, रेवेन्यू 12.5% बढ़कर 734.3 करोड़ रुपये हो गई। बढ़ती ऑपरेटिंग लागत की वजह से कंपनी के मुनाफे की रफ्तार सीमित रही।

Biocon

फार्मा कंपनी Biocon का शुद्ध मुनाफा 31.4 करोड़ रुपये से बढ़कर 141 करोड़ रुपये हो गया। रेवेन्यू 10% बढ़कर 4,336 करोड़ रुपये रही। EBITDA 10.6% बढ़कर 847.2 करोड़ रुपये रहा। EBITDA मार्जिन 19.43% से बढ़कर 19.54% हो गया।

JK Lakshmi Cement

सीमेंट कंपनी JK Lakshmi Cement का शुद्ध मुनाफा 150 करोड़ रुपये से घटकर 108 करोड़ रुपये रह गया। रेवेन्यू 9.4% बढ़कर 1,905 करोड़ रुपये रही। EBITDA 311.2 करोड़ रुपये से घटकर 258.7 करोड़ रुपये रहा। EBITDA मार्जिन 17.9% से घटकर 13.6% पर आ गया।

PB Fintech

फिनटेक कंपनी PB Fintech का शुद्ध मुनाफा 85 करोड़ रुपये से बढ़कर 163 करोड़ रुपये हो गया। रेवेन्यू 40.1% बढ़कर 1,888.2 करोड़ रुपये रही। EBITDA 34.22 करोड़ रुपये से बढ़कर 139.1 करोड़ रुपये पहुंच गया। EBITDA मार्जिन 2.54% से बढ़कर 7.37% हो गया।

Navin Fluorine

स्पेशलिटी केमिकल कंपनी Navin Fluorine का शुद्ध मुनाफा 117.2 करोड़ रुपये से बढ़कर 243.3 करोड़ रुपये हो गया। रेवेन्यू 44.1% बढ़कर 1,045.1 करोड़ रुपये रही। EBITDA 206 करोड़ रुपये से बढ़कर 357 करोड़ रुपये रहा। EBITDA मार्जिन 28.5% से बढ़कर 34.2% हो गया।

Godrej Agrovet

एग्री-इनपुट कंपनी Godrej Agrovet का शुद्ध मुनाफा 149 करोड़ रुपये से घटकर 128.3 करोड़ रुपये रह गया। रेवेन्यू 9.2% बढ़कर 2,855.2 करोड़ रुपये रही। EBITDA 269.6 करोड़ रुपये से घटकर 240.1 करोड़ रुपये रहा। EBITDA मार्जिन 10.32% से घटकर 8.41% पर आ गया।

Bayer CropScience

एग्रोकेमिकल कंपनी Bayer CropScience का शुद्ध मुनाफा 278.7 करोड़ रुपये से बढ़कर 321.6 करोड़ रुपये हो गया। रेवेन्यू 4.2% घटकर 1,835 करोड़ रुपये रही। EBITDA 5.5% बढ़कर 367.6 करोड़ रुपये रहा। EBITDA मार्जिन 18.2% से बढ़कर 20% हो गया।

Aster DM

हेल्थकेयर कंपनी Aster DM का शुद्ध मुनाफा 85.5 करोड़ रुपये से घटकर 16.1 करोड़ रुपये रह गया। रेवेन्यू 21.6% बढ़कर 1,311 करोड़ रुपये रही। EBITDA 27.5% बढ़कर 264.3 करोड़ रुपये रहा। EBITDA मार्जिन 19.2% से बढ़कर 20.2% हो गया।

GMM Pfaudler

इंजीनियरिंग कंपनी GMM Pfaudler का शुद्ध मुनाफा 55.1 करोड़ रुपये से घटकर 4.8 करोड़ रुपये रह गया। रेवेन्यू 16.4% बढ़कर 924.8 करोड़ रुपये रही। EBITDA 7.1% घटकर 94 करोड़ रुपये रहा। EBITDA मार्जिन 12.7% से घटकर 10.1% पर आ गया।

NBCC

सरकारी कंपनी NBCC को 801.20 करोड़ रुपये के दो नए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंसी (PMC) ऑर्डर मिले हैं। इनमें RBI से 780.38 करोड़ रुपये का सबसे बड़ा ऑर्डर मिला है, जिसके तहत अमरावती में ऑफिस और आवासीय परिसर बनाए जाएंगे। वहीं, ओडिशा में छात्रावास निर्माण के लिए कंपनी को 20.82 करोड़ रुपये का एक और ऑर्डर मिला है।

SIS Ltd

सिक्योरिटी और फैसिलिटी मैनेजमेंट कंपनी SIS Ltd का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट जून तिमाही में 9.4% बढ़कर 101.7 करोड़ रुपये रहा। रेवेन्यू 29.7% बढ़कर 4,603.6 करोड़ रुपये और EBITDA 36.2% बढ़कर 207.1 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी ने 106 करोड़ रुपये के शेयर बायबैक का भी ऐलान किया।

Cummins India

इंजन निर्माता Cummins India का स्टैंडअलोन शुद्ध मुनाफा 589 करोड़ रुपये से घटकर 543 करोड़ रुपये रह गया। रेवेन्यू 17.9% बढ़कर 3,426 करोड़ रुपये रही। EBITDA 616.2 करोड़ रुपये से घटकर 609.2 करोड़ रुपये रहा। EBITDA मार्जिन 21.5% से घटकर 18% पर आ गया।

RMC Switchgears

इलेक्ट्रिकल इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी RMC Switchgears को अंडरग्राउंड केबलिंग प्रोजेक्ट्स के लिए 333.8 करोड़ रुपये के नए ऑर्डर मिले हैं। नए ऑर्डर से कंपनी की ऑर्डर बुक मजबूत होगी। इससे आने वाले समय में कारोबार को सहारा मिलने की उम्मीद है।

Cohance Lifesciences

फार्मा कंपनी Cohance Lifesciences को हैदराबाद स्थित मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के निरीक्षण के बाद अमेरिकी दवा नियामक USFDA से Form 483 मिला है। निरीक्षण के दौरान एजेंसी ने पांच ऑब्जर्वेशन जारी किए हैं। अब कंपनी इन टिप्पणियों का जवाब देगी।

तिमाही नतीजे 5 अगस्त

आज कई कंपनियां जून तिमाही के नतीजे जारी करेंगी। इनमें Advent Hotels International, The Anup Engineering, Aegis Logistics, Apollo Tyres, Bajaj Electricals, BirlaNu, BLS E-Services और Blue Star शामिल हैं। इन कंपनियों के नतीजों पर निवेशकों और बाजार की नजर रहेगी।

Air India new CEO: टाटा ग्रुप की एयर इंडिया को नया CEO मिला, अब टेवोल्डे गेबरमरियम संभालेंगे कमान

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

HDFC Bank AGM: आने वाली तिमाहियों में HDFC बैंक के CASA और NIM सुधरेंगे : चेयरमैन राजीव कुमार

HDFC Bank AGM: देश के सबसे बड़े प्राइवेट लेंडर HDFC बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन राजीव कुमार ने कहा कि बैंक की कॉरपोरेट गवर्नेंस मजबूत है। इसे आगे और सशक्त किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाली कुछ तिमाहियों में CASA (करंट अकाउंट-सेविंग अकाउंट) रेशियो और नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में सुधार होगा।

मर्जर से बैलेंस शीट का स्ट्रक्चर बदला

राजीव कुमार ने कहा कि HDFC लिमिटेड के मर्जर के बाद बैंक की बैलेंस शीट के स्ट्रक्चर में बदलाव आया है। इसका सबसे ज्यादा असर CASA रेशियो और NIM पर पड़ा।

उन्होंने कहा, ‘हम डिपॉजिट मार्केट में अपनी हिस्सेदारी लगातार बढ़ा रहे हैं। साथ ही कंजम्प्शन आधारित कारोबार पर फोकस बढ़ा रहे हैं। हमें भरोसा है कि अगले 2-3 वर्षों में CASA और NIM दोनों में सुधार होगा।’

पहली बार AGM में किया संबोधन

राजीव कुमार ने 5 अगस्त को बैंक की 32वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) को संबोधित किया। यह उनका चेयरमैन के तौर पर पहला संबोधन था।

उन्होंने कहा कि बैंक की कार्यसंस्कृति मजबूत है। आंतरिक नियंत्रण प्रणाली भी मजबूत बनी हुई है। उन्होंने कहा, ‘हम अपने शेयरधारकों, ग्राहकों और सभी हितधारकों के भरोसे की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। बैंक के कामकाज का तरीका और आंतरिक नियंत्रण प्रणाली मजबूत है। इसे आगे और सशक्त बनाया जाएगा।’

पूर्व चेयरमैन के इस्तीफे के बाद आया बयान

राजीव कुमार का यह बयान अहम माना जा रहा है। मार्च में तत्कालीन पार्ट-टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने नैतिक मूल्यों में मतभेद की बात कही थी। इसके बाद स्वतंत्र कानूनी जांच कराई गई। जून में आई रिपोर्ट में किसी तरह की गवर्नेंस या नैतिक चूक के सबूत नहीं मिले।

CEO के तीसरे कार्यकाल पर चुप्पी

राजीव कुमार ने कहा कि बोर्ड में नई नियुक्तियां सिर्फ मेरिट के आधार पर होंगी। उन्होंने कहा कि योग्यता, ईमानदारी और पेशेवर उत्कृष्टता को ही प्राथमिकता दी जाएगी।

हाल के महीनों में MD और CEO शशिधर जगदीशन के तीसरे कार्यकाल को लेकर चर्चा रही है। हालांकि, राजीव कुमार ने अपने संबोधन में इस मुद्दे का जिक्र नहीं किया।

 

डिपॉजिट ग्रोथ रही मजबूत

राजीव कुमार ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में HDFC बैंक के डिपॉजिट में 14.4% की बढ़ोतरी हुई। यह पूरे बैंकिंग सिस्टम की 11.5% वृद्धि से बेहतर रही। वहीं, इसी अवधि में बैंक के एडवांस (लोन) 12.1% बढ़े।

राजीव कुमार ने कहा कि HDFC बैंक से पहली बार होम लोन लेने वाले 95% से ज्यादा ग्राहक बैंक में सेविंग अकाउंट भी खोल रहे हैं। इससे मर्जर के बाद क्रॉस-सेलिंग के अवसर बढ़े हैं।

HDFC बैंक के शेयरों का हाल

HDFC बैंक के शेयर बुधवार को 0.99% की गिरावट के साथ 734.65 रुपये पर बंद हुए। पिछले 1 महीने में स्टॉक 11.47% गिरा है। वही, 1 साल के दौरान 25.70% टूटा है। पिछले 5 साल का रिटर्न भी 1.56% नेगेटिव हो गया है। बैंक का मार्केट कैप 5.65 लाख करोड़ रुपये है।

Air India new CEO: टाटा ग्रुप की एयर इंडिया को नया CEO मिला, अब टेवोल्डे गेबरमरियम संभालेंगे कमान

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Air India new CEO: टाटा ग्रुप की एयर इंडिया को नया CEO मिला, अब टेवोल्डे गेबरमरियम संभालेंगे कमान

Air India new CEO: टाटा ग्रुप की एयरलाइन एयर इंडिया ने टेवोल्डे गेबरमरियम (Tewolde Gebremariam) को नया चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) और मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) नियुक्त किया है। वह कैंपबेल विल्सन की जगह लेंगे। कंपनी ने 5 अगस्त को इसकी आधिकारिक घोषणा की।

एयर इंडिया ने बयान में कहा कि यह बदलाव कंपनी के ट्रांसफॉर्मेशन प्रोग्राम का अहम हिस्सा है। इसका मकसद एयर इंडिया को वर्ल्ड क्लास दिग्गज एयरलाइन बनाना है।

बोर्ड ने किया व्यापक चयन

एयर इंडिया के बोर्ड ने बताया कि नए CEO के चयन के लिए व्यापक प्रक्रिया अपनाई गई। दुनिया भर के आंतरिक और बाहरी उम्मीदवारों का मूल्यांकन किया गया। सभी विकल्पों पर विचार करने के बाद बोर्ड ने सर्वसम्मति से टेवोल्डे गेबरमरियम के नाम पर मुहर लगाई।

कंपनी के अनुसार, उनके पास मजबूत नेतृत्व क्षमता है। साथ ही ऑपरेशनल मैनेजमेंट और स्ट्रैटजी को लागू करने का लंबा तजुर्बा भी है। यही वजह है कि उन्हें एयर इंडिया के अगले ग्रोथ स्टेज के लिए सबसे काबिल उम्मीदवार माना गया।

कौन हैं एयर इंडिया के नए CEO टेवोल्डे गेबरमरियम?

इथियोपिया के टेवोल्डे गेबरमरियम (Tewolde Gebremariam) एविएशन इंडस्ट्री के सबसे काबिल वरिष्ठ अधिकारियों में गिने जाते हैं। टेवोल्डे ने अदीस अबाबा यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में स्नातक और ब्रिटेन की ओपन यूनिवर्सिटी से MBA किया है। वह इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स समेत कई वैश्विक एविएशन संस्थाओं से भी जुड़े रहे हैं। उन्होंने 1985 में इथियोपियन एयरलाइंस से अपने विमानन करियर की शुरुआत की थी।

टेवोल्डे ने इथियोपियन एयरलाइंस में ट्रैफिक ऑफिसर के रूप में काम शुरू किया। इसके बाद कार्गो, मार्केटिंग, सेल्स और ऑपरेशंस समेत कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं। 2006 में उन्हें चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) बनाया गया। 2011 में वह इथियोपियन एयरलाइंस ग्रुप के CEO बने।

उनके कार्यकाल में चार गुना बढ़ी रेवेन्यू

CEO के रूप में टेवोल्डे गेबरमरियम के नेतृत्व में इथियोपियन एयरलाइंस ने रिकॉर्ड विस्तार किया। कंपनी की रेवेन्यू 1 अरब डॉलर से बढ़कर 4.5 अरब डॉलर से अधिक पहुंच गई। एयरलाइन का फ्लीट 33 विमानों से बढ़कर करीब 130 विमान हो गया। वहीं, यात्रियों की संख्या 30 लाख से बढ़कर 1.2 करोड़ तक पहुंच गई। इसी दौरान इथियोपियन एयरलाइंस अफ्रीका की सबसे बड़ी और सबसे अधिक मुनाफा कमाने वाली एयरलाइन बन गई।

एयर इंडिया मैनेजमेंट ने क्या कहा

टाटा संस और एयर इंडिया के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने कहा, “कैंपबेल विल्सन के नेतृत्व में एयर इंडिया ने बदलाव के शुरुआती दौर का बड़ा काम पूरा कर लिया है। अब कंपनी तेजी से विस्तार और योजनाओं को जमीन पर उतारने के अगले चरण में प्रवेश कर रही है।”

उन्होंने कहा कि टेवोल्डे गेबरमरियम ने दुनिया की सबसे सफल और सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाली एयरलाइन कंपनियों में से एक को आगे बढ़ाया है। उनके अनुभव और नेतृत्व पर हमें पूरा भरोसा है कि वह एयर इंडिया को विकास की अगली ऊंचाई तक ले जाएंगे।

शेयर मार्केट में आनी वाली है बहुत बड़ी गिरावट, दिग्गज फंड मैनेजर माइकल बरी ने किया आगाह

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Air India Flight: थाइलैंड से दिल्ली आ रही एयर इंडिया के विमान में लगा तेज झटका! अचानक नीचे आने लगी फ्लाइट, भयानक टर्बुलेंस से 12 यात्री घायल

Air India Flight turbulence: एयर इंडिया की फुकेत (थाईलैंड) से दिल्ली आ रही एक फ्लाइट में मंगलवार (4 अगस्त) को उड़ान के दौरान तेज टर्बुलेंस (हवा के तेज झटके) की वजह से अचानक हड़कंप मच गया। इस दौरान फ्लाइट करीब 300 फीट नीचे आ गया, जिससे विमान में सवार यात्रियों और क्रू मेंबर के बीच अफरा-तफरी मच गई। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, इस घटना में 12 यात्री हो गए हैं। न्यूज 18 के मुताबिक, 4 केबिन क्रू मेंबर भी घायल हो गए हैं।

बताया जा रहा है कि टर्बुलेंस इतना भयानक था कि किसी कान में तो किसी को गर्दन में चोटें आई हैं। घायलों का इलाज कराया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक इस घटना में कम से कम 12 यात्री घायल हुए हैं। यह घटना एयर इंडिया की फ्लाइट AI2379 में हुई, जो फुकेत से दिल्ली के लिए रवाना हुई थी।

शुरुआती जानकारी के मुताबिक, उड़ान के दौरान विमान अचानक टर्बुलेंस यानी तेज हवा के दबाव (अपड्राफ्ट/डाउनड्राफ्ट) की चपेट में आ गया। इससे उसकी ऊंचाई कुछ समय के लिए करीब 300 फीट कम हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGI) पर मेडिकल टीम को पहले से ही अलर्ट कर दिया गया।

विमान के सुरक्षित उतरने के बाद सभी यात्रियों और क्रू मेंबर को सुरक्षित बाहर निकाला गया। घायल लोगों को तुरंत एयरपोर्ट के मेडिकल सेंटर ले जाया गया, जहां उनका इलाज और मेडिकल टेस्ट किया गया। एयर इंडिया ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि उड़ान के दौरान कुछ समय के लिए टर्बुलेंस की वजह से विमान की ऊंचाई में बदलाव आया था।

हालांकि, विमान ने सुरक्षित तरीके से दिल्ली में लैंडिंग की और सभी यात्री व क्रू सुरक्षित बाहर निकल गए। टाटा ग्रुप की एयरलाइन के अनुसार, फिलहाल किसी के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी नहीं है। जिन यात्रियों और क्रू मेंबर को मामूली चोटें आई हैं, उन्हें एहतियात के तौर पर मेडिकल जांच के लिए भेजा गया है।

एयर इंडिया ने कहा कि यात्रियों और क्रू की सुरक्षा उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। कंपनी प्रभावित लोगों को हर संभव मदद दे रही है और मामले की जांच में संबंधित अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है। एयरपोर्ट अधिकारियों के मुताबिक, सभी घायल लोगों का इलाज किया जा रहा है।

हालांकि कुछ लोगों को जरूरत पड़ने पर आगे की जांच और इलाज के लिए अस्पताल भी भेजा जा सकता है। फिलहाल घायलों की चोटों की गंभीरता के बारे में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। विमान में सवाल यात्रियों ने बताया कि दिल्ली एयरपोर्ट पर लैंडिंग से कुछ देर पहले फ्लाइट नीचे अचानक नीचे आने लगा। इस दौरान हिचकोले खाने लगा। इससे यात्रियों में चीख पुकार मच गई। फिलहाल, मामले की जांच शुरू कर दी गई है।