IT Stocks: चॉइस इंस्टीट्यूशनल ने आईटी कंपनियों की रेटिंग-टारगेट घटाए, कहा- रिकवरी में लग सकता है वक्त

IT Stocks: ब्रोकरेज फर्म Choice Institutional Equities का मानना है कि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (Q1 FY27) भारतीय आईटी सेक्टर के लिए एक और कमजोर तिमाही साबित हो सकती है। ब्रोकरेज के मुताबिक, मांग में सुधार नहीं दिख रहा। उल्टा हालात और बिगड़े हैं। इससे साफ है कि जिस रिकवरी की उम्मीद थी, वह अब और आगे खिसक गई है।

ब्रोकरेज का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता अब भी बनी हुई है। कंपनियां नए फैसले लेने में समय लगा रही हैं। AI की वजह से प्रोडक्टिविटी बढ़ी है, लेकिन इसका असर रेवेन्यू पर दबाव के रूप में दिख रहा है। वहीं, भू-राजनीतिक तनाव भी बना हुआ है। इन सब वजहों से कंपनियां गैरजरूरी (Discretionary) खर्च कम कर रही हैं। इसका असर पूरे आईटी सेक्टर की ग्रोथ पर पड़ रहा है।

लार्जकैप और मिडकैप पर अनुमान

ब्रोकरेज का मानना है कि बड़ी आईटी कंपनियों की कॉन्स्टेंट करेंसी (CC) ग्रोथ तिमाही आधार पर सपाट रह सकती है। कुछ कंपनियों में हल्की गिरावट भी देखने को मिल सकती है।

वहीं, मिडकैप आईटी कंपनियां बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं। इसकी वजह नए डील्स का शुरू होना और बाजार हिस्सेदारी बढ़ना है।

कमाई के अनुमान में कटौती

Choice Institutional Equities का कहना है कि वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही की ग्रोथ पूरे साल के गाइडेंस के हिसाब से कमजोर दिख रही है। ऐसे में आने वाली तिमाहियों में कई कंपनियां अपने गाइडेंस में बदलाव कर सकती हैं। कमाई के अनुमान भी घटाए जा सकते हैं।

इसी वजह से ब्रोकरेज ने वित्त वर्ष 2027 और 2028 के लिए पूरे आईटी सेक्टर की कमाई के अनुमान में 0.1% से 16.7% तक की कटौती की है। साथ ही, कई कंपनियों के टारगेट प्राइस और वैल्यूएशन में भी 0% से 21.6% तक की कमी की गई है। इसकी वजह कमजोर मांग, AI की वजह से रेवेन्यू पर दबाव और बढ़ता एग्जीक्यूशन रिस्क है।

क्या अब आईटी शेयरों में खरीदारी का मौका है?

ब्रोकरेज का मानना है कि आईटी शेयरों में पहले ही अच्छी-खासी गिरावट आ चुकी है। इसलिए अब नीचे जाने की गुंजाइश सीमित दिखती है। हालांकि, सेक्टर में दोबारा तेज तेजी तभी आएगी, जब मांग में सुधार दिखे। कंपनियों की रेवेन्यू ग्रोथ तेज हो। साथ ही, GenAI से सिर्फ लागत घटाने के बजाय कमाई बढ़ने के भी साफ संकेत मिलें।

HCLTech : चॉइस इंस्टीट्यूशनल ने HCLTech की रेटिंग ‘Add’ से बढ़ाकर ‘Buy’ कर दी है। हालांकि, टारगेट प्राइस 1,500 रुपये से घटाकर 1,410 रुपये कर दिया गया है।

Mphasis : इसकी रेटिंग ‘Buy’ से घटाकर ‘Add’ कर दी गई है। कंपनी का नया टारगेट प्राइस 2,520 रुपये रखा गया है।

Persistent Systems : ब्रोकरेज ने Persistent Systems की रेटिंग घटाकर ‘Add’ कर दी है। कंपनी का नया टारगेट प्राइस 5,010 रुपये तय किया गया है।

Tech Mahindra : महिंद्रा ग्रुप की आईटी कंपनी की रेटिंग भी घटाकर ‘Add’ कर दी गई है। ब्रोकरेज ने शेयर का नया टारगेट प्राइस 1,600 रुपये रखा है।

Zensar Technologies : ब्रोकरेज ने Zensar Technologies की रेटिंग भी ‘Add’ कर दी है। कंपनी का नया टारगेट प्राइस 560 रुपये तय किया गया है।

TCS : चॉइस इंस्टीट्यूशनल ने टाटा ग्रुप की आईटी TCS पर ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। हालांकि, टारगेट प्राइस घटाकर 2,625 रुपये कर दिया गया है।

Infosys : इस आईटी कंपनी पर भी ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी गई है। ब्रोकरेज ने टारगेट प्राइस घटाकर 1,360 रुपये कर दिया है।

Happiest Minds : इस पर ब्रोकिंग फर्म ने ‘Buy’ रेटिंग कायम रखी है। कंपनी का नया टारगेट प्राइस 440 रुपये कर दिया गया है।

Coforge : चॉइस इंस्टीट्यूशनल ने Coforge पर ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। कंपनी का टारगेट प्राइस 1,900 रुपये पर कायम रखा गया है।

Wipro : ब्रोकरेज ने Wipro पर ‘Add’ रेटिंग बरकरार रखी है। हालांकि, टारगेट प्राइस घटाकर 185 रुपये कर दिया गया है।

Stocks to Buy: ये 10 स्टॉक्स दे सकते हैं 43% तक रिटर्न, एक्सपर्ट्स ने दी खरीदने की सलाह

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Semiconductor Stocks: सरकार का ₹1.64 लाख करोड़ का सेमीकंडक्टर दांव! इन 6 कंपनियों के शेयरों पर रखें नजर

Semiconductor Stocks: भारत अब सिर्फ मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबल करने वाला देश नहीं रहना चाहता। सरकार अब देश में सेमीकंडक्टर यानी चिप मैन्युफैक्चरिंग का पूरा इकोसिस्टम तैयार करने पर जोर दे रही है। इसी दिशा में सरकार ने हाल ही में करीब 1.64 लाख करोड़ रुपये की लागत वाले 12 सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। India Semiconductor Mission 2.0 और AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी बड़ा निवेश किया जा रहा है।

इसका असर सिर्फ चिप बनाने वाली कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, PCB, EMS और चिप डिजाइन से जुड़ी कई कंपनियों को भी इसका फायदा मिल सकता है। आइए जानते हैं ऐसी 6 कंपनियों के बारे में।

Dixon Technologies

Dixon Technologies देश की सबसे बड़ी इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विस (EMS) कंपनियों में शामिल है। कंपनी मोबाइल, लैपटॉप, टीवी और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट बनाती है।

अगर भारत में चिप और PCB का प्रोडक्शन बढ़ता है, तो Dixon की आयात पर निर्भरता कम हो सकती है। इससे सप्लाई चेन मजबूत होगी। साथ ही, लागत घटाने में भी मदद मिलेगी।

Amber Enterprises

Amber Enterprises इस सरकारी पहल का सीधा फायदा उठाने वाली कंपनियों में मानी जा रही है। कंपनी उत्तर प्रदेश के जेवर में करीब 3,500 करोड़ रुपये का प्लांट लगा रही है। यहां HVAC कंपोनेंट्स और PCB Assemblies की मैन्युफैक्चरिंग होगी। देश में PCB का उत्पादन बढ़ने से कंपनी के कारोबार को नई रफ्तार मिल सकती है।

Kaynes Technology

Kaynes Technology की इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और PCB Assembly कारोबार में दमदार मौजूदगी है। कंपनी ऑटोमोबाइल, एयरोस्पेस, डिफेंस और इंडस्ट्रियल सेक्टर के लिए इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट बनाती है। सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम मजबूत होने से कंपनी को नए ऑर्डर मिलने और कारोबार बढ़ने की संभावना है।

CG Power

CG Power अब सिर्फ इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट बनाने वाली कंपनी नहीं रह गई है। कंपनी सेमीकंडक्टर कारोबार में भी कदम रख चुकी है। ये गुजरात में रेनेसास और Stars Microelectronics के साथ मिलकर सेमीकंडक्टर प्लांट बना रही है। सरकार के बढ़ते फोकस से इस प्रोजेक्ट को भी रफ्तार मिल सकती है।

Tata Group

Tata Group भी भारत के सेमीकंडक्टर मिशन का बड़ा हिस्सा है। Tata Electronics असम में चिप पैकेजिंग (OSAT) प्लांट और गुजरात में सेमीकंडक्टर फैब प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। सरकार की नई योजनाओं और निवेश का फायदा टाटा ग्रुप को भी मिल सकता है। हालांकि, Tata Electronics अभी शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं है।

MosChip Technologies

MosChip Technologies चिप डिजाइन और एम्बेडेड इंजीनियरिंग सेवाएं देने वाली कंपनी है। अगर भारत में सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री तेजी से बढ़ती है, तो डिजाइन और रिसर्च से जुड़ी कंपनियों की मांग भी बढ़ सकती है। इसका फायदा MosChip को मिल सकता है।

क्यों अहम है सरकार का यह कदम?

सरकार का लक्ष्य सिर्फ चिप बनाना नहीं है। कोशिश यह है कि भारत पूरी सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन विकसित करे। इसमें फैब्रिकेशन, पैकेजिंग, टेस्टिंग, PCB और डिजाइन जैसे सभी हिस्से शामिल हैं।

अगर यह योजना सफल रहती है, तो भारत की आयात पर निर्भरता घटेगी। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को मजबूती मिलेगी। साथ ही हजारों नई नौकरियां भी पैदा होंगी। यही वजह है कि निवेशकों की नजर अब इस सेक्टर और इससे जुड़ी कंपनियों पर बनी हुई है।

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सोना तो सोना है! टैक्स बढ़ने के बाद भी नहीं कम हो रही गोल्ड की चमक! सर्राफा बाजारों में उमड़ रही भारी भीड़

Gold Price Alert: आदित्य बिड़ला ग्रुप के ज्वैलरी ब्रांड ‘इंद्रिया’ (Indriya) के सीईओ संदीप कोहली ने सोने को लेकर एक बड़ी बात कही है। मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि गोल्ड पर कस्टम ड्यूटी बढ़ने के बाद मई महीने में बाजार थोड़ा सुस्त जरूर हुआ था, लेकिन अब ग्राहकों की डिमांड बहुत मजबूती से वापस लौट आई है।

संदीप कोहली ने कहा, ‘कस्टम ड्यूटी में 9 फीसदी की बढ़ोतरी के बाद लोग नए भाव को समझने के लिए थोड़ा रुक गए थे। पूरे ज्वैलरी उद्योग में ग्राहकों की चहल-पहल थोड़ी धीमी हो गई थी, लेकिन पिछले दो हफ्तों में मांग बहुत तेजी से बढ़ी है।’

क्यों आई थी सुस्ती और अब क्यों लौट रही है रौनक?

सरकार ने मई महीने में सोने के इंपोर्ट पर कस्टम ड्यूटी को 6 फीसदी से सीधे बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया था। सरकार का मकसद विदेशों से सोने की खरीद को कम करना और देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटाना था। इस 9% की सीधी बढ़ोतरी से अचानक सोना महंगा हो गया था।

वैसे कस्टम ड्यूटी बढ़ने के बाद अब सोने की कीमतों में आ रही हालिया गिरावट भी ग्राहकों को दोबारा शोरूम तक खींच रही है। दिल्ली में 22 कैरेट सोने का भाव ₹13244 प्रति ग्राम और मुंबई में ₹13229 प्रति ग्राम पर आ गया है, जिससे खरीदारों को राहत मिली है।

‘भारतीयों के लिए सोना सिर्फ निवेश नहीं, संस्कृति है’

जब उनसे पूछा गया कि क्या कीमतें बढ़ने से सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की साख कम हुई है? तो कोहली ने साफ मना कर दिया। उन्होंने कहा, ‘भारत में ज्वैलरी की मांग कभी खत्म नहीं हो सकती क्योंकि यह हमारी संस्कृति का हिस्सा है। कमोडिटी की कीमतें कैसी भी हों, ग्राहक दूसरे निवेशों के मुकाबले इसके रिटर्न का आकलन जरूर करते हैं, लेकिन मांग हमेशा बनी रहती है।’ उन्होंने यह भी जोड़ा कि अब ग्राहक खास डिजाइन वाले गहने ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

तेजी से पैर पसार रहा है ‘इंद्रिया’ ब्रांड

साल 2024 में लॉन्च हुआ यह ब्रांड देश का सबसे तेजी से बढ़ता रिटेल ब्रांड बन गया है। फिलहाल 40 से ज्यादा शहरों में इसके 81 स्टोर्स हैं और फाइनेंशियल ईयर 2027 में कंपनी 40 नए स्टोर्स और खोलने की योजना बना रही है। कंपनी ने अपने स्टोर्स में ‘स्पार्कलस्कोप’ नाम की एक नई तकनीक लॉन्च की है। इसके जरिए ग्राहक खुद देख सकेंगे कि उनके हीरे में कितनी चमक है।

नेचुरल डायमंड पर है फोकस

भारत के ₹8,000 करोड़ के ज्वैलरी मार्केट में डायमंड-स्टडेड गहनों की हिस्सेदारी 11 फीसदी है, लेकिन ‘इंद्रिया’ के लिए यह हिस्सेदारी दोगुनी यानी 22 फीसदी है। आजकल बाजार में लैब में तैयार होने वाले हीरे का चलन बढ़ रहा है। जैसे कि टाटा ग्रुप के ‘टाइटैन’ ने पिछले साल दिसंबर में लैब-ग्रोन डायमंड कैटेगरी में कदम रखा है। लेकिन इसके उलट, ‘इंद्रिया’ पूरी तरह से नेचुरल हीरों पर ही फोकस कर रहा है।

संदीप कोहली का मानना है कि ग्राहकों के लिए हीरे की क्वालिटी (4Cs) के साथ-साथ उसकी चमक सबसे पहले मायने रखती है, और उनकी नई तकनीक इसी पर फोकस करती है।

Trent Share Price : ट्रेंट का 10 गुना ग्रोथ का लक्ष्य बरकरार, AGM में पॉजिटिव ग्रोथ कमेंट्री के दम पर जोर से दौड़ा शेयर

Trent Share Price : ट्रेंट के शेयर में आज 4 फीसदी की तेजी है। दरअसल ट्रेंट के AGM में नोएल टाटा की पॉजिटिव कमेंट्री से शेयर में रौनक है। नोएल टाटा ने ट्रेंट की ग्रोथ के लिए खास रोडमैप रखा है। यह नोएल टाटा की आखिरी ट्रेंट AGM थी। आज पेश कंपनी के आगे के रोडमैप में कारोबार में 10 गुना ग्रोथ का लक्ष्य बरकरार रखा गया है। इसमें ये भी कहा गया है कि सिर्फ वेस्टसाइड ( Westside) और जूडियो (Zudio) के भरोसे लक्ष्य हासिल नहीं होगा। हर साल 50 वेस्टसाइड और 200-250 जूडियो और 25-40 स्टार स्टोर बढ़ाने का लक्ष्य भी रखा गया है।

लॉन्ग टर्म लक्ष्य के तहत जूडियो के 5000 स्टोर और स्टॉर को भी इसी स्केल तक पहुंचने का इरादा है। इस रोडमैप में ये भी कहा गया है कि बर्न्ट टोस्ट (Burnt Toast) और Samoh में 2-3 साल और इनक्यूबेशन की जरूरत है। फैशन LFL ग्रोथ में नरमी है लेकिन लो-डबल डिजिट ग्रोथ का लक्ष्य रखा गया है। Trent का मार्केट शेयर सिर्फ 2% है। लेकिन इसके लिए ग्रोथ के बड़े मौके मौजूद हैं। कंपनी ने 2500 करोड़ रुपए जुटाए हैं। इसे वेयरहाउस,IT, AI और स्टोर विस्तार पर खर्च किया जाएगा। स्टार बिजनेस पर कंपनी का भरोसा कायम है। ग्रोसरी रिटेल में मजबूत संभावनाएं दिख रही हैं। वेस्टसाइड ई-कॉमर्स रेवेन्यू 300 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।

बताते चलें कि 69 साल के नोएल टाटा ने यह भी कहा की है कि वे ट्रेंट लिमिटेड के चेयरमैन का पद छोड़ने जा रहे। इसके साथ ही,टाटा ग्रुप की मुख्य रिटेल कंपनी के हेड के तौर पर उनका लगभग 30 साल का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा। टाटा ग्रुप की गवर्नेंस पॉलिसी के मुताबिक एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर की रिटायरमेंट की उम्र 65 साल होती है,जबकि नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर 70 साल की उम्र में रिटायर होते हैं। नोएल टाटा की चेयरमैनशिप में FY26 में ट्रेंट का रेवेन्यू बढ़कर 19,701 करोड़ रुपये हो गया।

कंपनी की 2023 की शेयरहोल्डर्स मीटिंग में ट्रेंट को दस गुना बड़ा बनाने का रखा गया था। तब से कंपनी की रेवेन्यू और मुनाफे की ग्रोथ रेट 2.5 गुना से ज्यादा बढ़ गई है। इस पर नोएल टाटा ने कहा “मुझे पूरा भरोसा है कि हम जल्द ही उस मुकाम तक पहुंच जाएंगे जिसका मैंने ज़िक्र किया था।”

ट्रेंट पर ब्रोकरेज की राय

ट्रेंट पर ब्रोकरेज का नजरिया भी बुलिश है। HSBC ने इस स्टॉक को Buy रेटिंग देते हुए 3460 रुपए प्रति शेयर का टारगेट दिया है। वहीं, मोतीलाल ओसवाल ने इसे Buy रेटिंग देते हुए 3500 रुपए प्रति शेयर का टारगेट दिया है। मोतीलाल ओसवाल का कहना है कि कुछ स्टोर्स में सेल्स घटी है। LFL में रिकवरी दिख रही है। आगे डबल डिजिट LFL ग्रोथ संभव है। आगे जाकर मार्जिन में उछाल LFL ग्रोथ पर निर्भर करेगी।

ट्रेंट की चाल पर एक नजर

एनएसई पर आज यह शेयर 104.10 रुपए यानी 3.31 फीसदी की तेजी लेकर 3247 रुपए पर बंद हुआ है। आज का इसका दिन का हाई 3,309.20 रुपए और दिन का लो 3,140.00 रुपए है। स्टॉक का 52 वीक हाई 4,174.00 रुपए और 52 वीक लो 2,183.67 रुपए है। स्टॉक का ट्रेडिंग वॉल्यूम 3,950,989 शेयर और मार्केट कैप 173,140 करोड़ रुपए है।

1 हफ्ते में यह शेयर 4.65 रुपए और 1 महीने में 13.36 फीसदी भागा है। इस साल अब तक इसमें 13.82 फीसदी की तेजी आई है। वहीं, 1 साल में इसमें 19.60 फीसदी की कमजोरी आई है। जबकि, 3 साल में यह शेयर 182.36 फीसदी भागा है।

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डिस्क्लेमर:मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

नोएल टाटा छोड़ेंगे Trent के चेयरमैन का पद, AGM में कहा- कंपनी के सबसे अच्छे साल आना अभी बाकी

नोएल टाटा ने ट्रेंट लिमिटेड के चेयरमैन का पद छोड़ने की घोषणा की है। इसके साथ ही ट्रेंट के साथ उनका लगभग 30 साल का कार्यकाल खत्म हो जाएगा। वह 70 साल के होने वाले हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नोएल टाटा ने 23 जून को ट्रेंट की 47वीं सालाना आम बैठक में शेयरहोल्डर्स से कहा कि चेयरमैन के तौर पर यह उनकी आखिरी सालाना आम बैठक है।

टाटा ग्रुप की गवर्नेंस पॉलिसी के मुताबिक, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स के रिटायरमेंट की उम्र 65 साल होती है, जबकि नॉन-इंडिपेंडेंट नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स 70 साल में रिटायर होते हैं। इंडिपेंडेंट डायरेक्टर 75 की उम्र में रिटायर होते हैं। ट्रेंट, टाटा ग्रुप का फैशन और लाइफस्टाइल बिजनेस है। कंपनी के Westside, Zudio और Star जैसे ब्रांड्स के तहत रिटेल स्टोर हैं।

1998 से Trent के साथ

नोएल टाटा साल 1998 में ट्रेंट के बोर्ड में डायरेक्टर के तौर पर शामिल हुए थे। उस वक्त, जब उनकी मां सिमोन टाटा ने लैक्मे के डाइवेस्टमेंट के बाद कंपनी शुरू की थी। उन्होंने जून 1999 में ट्रेंट के पहले मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर चार्ज संभाला था। वित्त वर्ष 2026 में ट्रेंट का रेवेन्यू बढ़कर 19,701 करोड़ रुपये हो गया। नोएल टाटा ने सालाना आम बैठक में कहा, “एक वेस्टसाइड स्टोर से 1,200 से ज्यादा स्टोर के नेटवर्क तक, हमारा सफर लगातार आगे बढ़ा है। पिछले कुछ सालों में हमने अपने पोर्टफोलियो में पावरफुल ग्रोथ इंजन जोड़े हैं- खासकर जूडियो और स्टार, जो अब हमारे पोर्टफोलियो का एक अहम हिस्सा हैं।”

नोएल टाटा का मानना है कि ट्रेंट के सबसे अच्छे साल अभी बाकी हैं। कंपनी अपनी विकास यात्रा के शुरुआती चरण में है। कंपनी के सामने मौके बहुत हैं और केवल भारत तक सीमित नहीं हैं। आने वाले सालों में ट्रेंट अलग-अलग कैटेगरी में बढ़ेगी और नई जगहों पर भी पहुंचेगी।

नोएल टाटा ने कंपनी की 2023 की शेयरहोल्डर्स मीटिंग का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने ट्रेंट को दस गुना बड़ा बनाने का सोचा था। तब से रेवेन्यू और प्रॉफिटेबिलिटी रन रेट 2.5 गुना से ज्यादा बढ़ गया है। टाटा ने आगे कहा, “मुझे यकीन है कि हम जल्द ही उस माइलस्टोन तक पहुंच जाएंगे, जिसका मैंने जिक्र किया था।”

ट्रेंट का शेयर 3 प्रतिशत से ज्यादा उछला

24 जून को ट्रेंट के शेयर में 3.6 प्रतिशत की तेजी है। शेयर BSE पर 3255 रुपये पर बंद हुआ है। कंपनी का मार्केट कैप बढ़कर 1.73 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। जून की शुरुआत में शेयर ने एक्स-बोनस ट्रेड किया था। ट्रेंट ने अपने शेयरहोल्डर्स को उनके पास मौजूद हर 2 शेयरों पर 1 नया शेयर बोनस के तौर पर देने का ऐलान किया था। वहीं कंपनी वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 6 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड दे रही है। रिकॉर्ड डेट 12 जून थी। ट्रेंट के शेयर के लिए मॉर्गन स्टेनली ने ‘ओवरवेट’ रेटिंग बरकरार रखी है। टारगेट प्राइस 3,151 रुपये प्रति शेयर दिया है।

LIC का फाइनल डिविडेंड पाना चाहते हैं तो आज, 24 जून को आखिरी मौका, 25 जून को शेयर करेगा एक्स-ट्रेड

HSBC ग्लोबल इनवेस्टमेंट रिसर्च ने ‘बाय’ रेटिंग दी है और टारगेट प्राइस बढ़ाकर 3,460 रुपये प्रति शेयर कर दिया है। मोतीलाल ओसवाल ने 3,500 रुपये का टारगेट प्राइस बरकरार रखा है। दूसरी तरफ कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने ​’रिड्यूस’ रेटिंग दी है। लेकिन टारगेट बढ़ाकर 3,025 रुपये कर दिया है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stocks to Watch: 23 जून को इन 10 स्टॉक्स पर रखें नजर, मिल सकता है तगड़ी कमाई का मौका

Stocks to Watch: 23 जून के कारोबार में कई शेयर खबरों के दम पर चर्चा में रह सकते हैं। कुछ कंपनियों ने बड़े ऑर्डर हासिल किए हैं, जबकि कुछ ने फंड जुटाने, हिस्सेदारी बिक्री और रणनीतिक साझेदारी से जुड़े अहम ऐलान किए हैं। ऐसे में इन 10 शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है।

TCS

देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी TCS ने बताया है कि उसके बोर्ड की बैठक 9 जुलाई 2026 को होगी। इस बैठक में 30 जून 2026 को खत्म तिमाही के नतीजों पर चर्चा होगी और उन्हें मंजूरी दी जाएगी। टाटा ग्रुप की यह कंपनी निवेशकों के लिए डिविडेंड का ऐलान भी कर सकती है।

Hindustan Zinc

वेदांता ग्रुप की कंपनी Hindustan Zinc ने Advantek Associates LLP और Aero Eagle Automobiles Pvt Ltd के साथ एक समझौता किया है। इस साझेदारी का मकसद कंपनी के अलग-अलग ऑपरेशंस में ग्रीन हाइड्रोजन और दूसरी स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाशना है।

JSW Infrastructure

सज्जन जिंदल की JSW Infrastructure ने 22 जून से अपना QIP खोलने को मंजूरी दे दी है। कंपनी ने ₹290.35 प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया है। इश्यू में अधिकतम 230 करोड़ नए शेयर जारी किए जाएंगे। वहीं, Sajjan Jindal Family Trust अधिकतम 33.25 करोड़ शेयरों की OFS लाएगी।

Craftsman Automation

Craftsman Automation के प्रमोटर शेयरहोल्डर श्रीनिवासन रवि ने ब्लॉक डील के जरिए कंपनी में 2.01% तक हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया शुरू की है। टर्म शीट के मुताबिक इस सौदे का आकार करीब ₹484 करोड़ है। शेयरों के लिए ₹925 प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया गया है।

Info Edge

Naukri.com की पैरेंट कंपनी Info Edge ने कहा है कि उसके AI स्टार्टअप पोर्टफोलियो की वैल्यू बढ़कर ₹1,268 करोड़ पहुंच गई है। कंपनी ने अब तक 28 AI स्टार्टअप्स में कुल ₹614 करोड़ का निवेश किया है। इस निवेश पर उसे 2.1 गुना रिटर्न मिला है, जबकि अनुमानित ग्रॉस IRR करीब 31% रही है।

Bharat Electronics

सरकारी डिफेंस कंपनी Bharat Electronics (BEL) को 25 मई 2026 के बाद ₹1,081 करोड़ के नए ऑर्डर मिले हैं। कंपनी के मुताबिक इन ऑर्डर्स में कम्युनिकेशन इक्विपमेंट, रडार, CBRN सुरक्षा सिस्टम, सीकर्स, एवियोनिक्स, अपग्रेडेशन, स्पेयर्स और सर्विसेज शामिल हैं। नए ऑर्डर्स से कंपनी की ऑर्डर बुक और मजबूत होगी और आने वाले समय में रेवेन्यू को सहारा मिल सकता है।

GHV Infra Projects

GHV Infra Projects को GHV (India) Private Ltd से करीब ₹213 करोड़ का वर्क ऑर्डर मिला है। इस ऑर्डर में GST भी शामिल है। कंपनी को सिविल, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल और सिग्नल एवं टेलीकॉम से जुड़े कई काम करने होंगे। यह ऑर्डर कंपनी की ऑर्डर बुक को और मजबूत करेगा।

APAR Industries

APAR Industries ने बताया कि उसकी सहायक कंपनी APAR Industries Middle East Ltd, KSA ने Saudi Aramco Base Oil Company के साथ एक समझौता किया है। यह करार कंपनी के अंतरराष्ट्रीय कारोबार को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। हालांकि दोनों कंपनियों ने समझौते की वित्तीय शर्तों का खुलासा नहीं किया है।

Birla Corporation

Birla Corporation ने कहा है कि मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में स्थित उसकी बिक्रम कोयला खदान में 22 जून 2026 से व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो गया है। कंपनी के लिए यह महत्वपूर्ण उपलब्धि है क्योंकि अब उसे अपने सीमेंट कारोबार के लिए कोयले की उपलब्धता बढ़ाने और लागत को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

MSP Steel & Power

MSP Steel & Power के प्रमोटर ग्रुप ने 16 से 18 जून 2026 के बीच खुले बाजार से कुल 64.50 लाख शेयर खरीदे हैं। कंपनी के मुताबिक, प्रमोटर ग्रुप की पांच संस्थाओं ने यह खरीदारी की है। आमतौर पर प्रमोटरों की बड़ी खरीदारी को कंपनी के भविष्य और कारोबार को लेकर उनके भरोसे के संकेत के रूप में देखा जाता है।

Railway Stocks: बंगाल में ₹1 लाख करोड़ से बनेगा रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर, इन 4 स्टॉक्स पर रखें नजर

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

TCS Results Update: 9 जुलाई को जून तिमाही के नतीजे जारी करेगी TCS, डिविडेंड देने पर होगा भी विचार

TCS Results Update: देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी TCS (टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज) ने बताया है कि उसके बोर्ड की बैठक 9 जुलाई 2026 को होगी। इस बैठक में जून 2026 तिमाही (Q1FY27) के नतीजों को मंजूरी दी जाएगी। इसके साथ ही कंपनी अंतरिम डिविडेंड पर भी फैसला कर सकती है।

टाटा ग्रुप की इस कंपनी ने कहा है कि बोर्ड 30 जून 2026 को खत्म तिमाही के ऑडिटेड स्टैंडअलोन वित्तीय नतीजों पर विचार करेगा और उन्हें मंजूरी देगा।

डिविडेंड का भी हो सकता है ऐलान

तिमाही नतीजों के साथ निवेशकों की नजर डिविडेंड पर भी रहेगी। TCS का बोर्ड अंतरिम डिविडेंड पर विचार करेगा। अगर डिविडेंड का ऐलान होता है तो उसका फायदा उन शेयरधारकों को मिलेगा जिनका नाम 15 जुलाई 2026 तक कंपनी के रिकॉर्ड में दर्ज होगा। कंपनी ने इसके लिए 15 जुलाई को रिकॉर्ड डेट तय किया है।

पिछली तिमाही में कैसा था प्रदर्शन?

मार्च 2026 तिमाही में TCS ने बाजार की उम्मीदों से बेहतर नतीजे दिए थे। कॉन्स्टेंट करेंसी के आधार पर कंपनी का रेवेन्यू पिछली तिमाही के मुकाबले 1.2% बढ़ा था। खास बात यह रही कि पिछले सात क्वार्टर में यह कंपनी की सबसे तेज ग्रोथ थी।

एनालिस्टों को औसतन 1% ग्रोथ की उम्मीद थी। कुछ ब्रोकरेज हाउस ने 0.6% से 1.4% तक का अनुमान लगाया था, लेकिन कंपनी इन अनुमानों के ऊपरी स्तर के करीब पहुंचने में सफल रही।

29% उछला था TCS का मुनाफा

मार्च तिमाही में TCS का शुद्ध लाभ बढ़कर ₹13,718 करोड़ पहुंच गया था। दिसंबर तिमाही में यह ₹10,657 करोड़ था। यानी कंपनी के मुनाफे में करीब 29% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

वहीं कंपनी का रेवेन्यू भी बढ़कर ₹70,698 करोड़ हो गया, जो पिछली तिमाही में ₹67,087 करोड़ था। यह आंकड़ा भी बाजार के अनुमान से बेहतर रहा।

मार्जिन में सुधार, बड़े ऑर्डर भी मिले

TCS की कमाई की ताकत दिखाने वाला EBIT बढ़कर ₹17,870 करोड़ रहा, जो पिछली तिमाही से 6% ज्यादा है। वहीं EBIT मार्जिन 25.3% रहा, जो दिसंबर तिमाही के 25.2% से थोड़ा बेहतर है।

मार्च तिमाही में TCS ने 12 अरब डॉलर के नए कॉन्ट्रैक्ट हासिल किए थे। यह कंपनी के इतिहास के सबसे बड़े ऑर्डर बुकिंग स्तरों में से एक है। इसमें तीन बड़े मेगा डील भी शामिल थीं।

पहले भी दे चुकी है ₹31 का डिविडेंड

TCS ने हाल ही में अपने शेयरधारकों के लिए ₹31 प्रति शेयर के अंतिम डिविडेंड को मंजूरी दी थी। हालांकि उसकी रिकॉर्ड डेट का ऐलान अभी बाकी है।

अब निवेशकों की नजर 9 जुलाई पर रहेगी। बाजार यह देखना चाहेगा कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच TCS की ग्रोथ कितनी मजबूत बनी हुई है और कंपनी डिविडेंड को लेकर क्या फैसला करती है।

TCS का शेयर सोमवार को 0.21% की बढ़त के साथ 2,129.50 रुपये पर बंद हुआ। हालांकि, बीते 6 महीने में शेयर 35% से ज्यादा टूट चुका है।

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