Tata Motors CV July Sales: एक्सपोर्ट डबल, घरेलू बिक्री में तेज उछाल, 3 अगस्त को शेयरों पर रहेगा फोकस

Tata Motors CV July Sales: टाटा ग्रुप की कमर्शियल वेईकल्स यूनिट टाटा मोटर्स सीवी के लिए पिछला महीना जुलाई धमाकेदार रहा। न सिर्फ घरेलू मार्केट में इसकी कमर्शियल गाड़ियों की बिक्री में तेज इजाफा हुआ बल्कि निर्यात तो दोगुना से अधिक बढ़ गया। कंपनी ने इसकी जानकारी 1 अगस्त को एक्सचेंज फाइलिंग में दी और अब इसका असर 3 अगस्त को स्टॉक मार्केट खुलने पर शेयरों पर दिख सकता है। अभी इसके शेयरों के सेहत की बात करें तो एक कारोबारी दिन पहले 31 जुलाई को बीएसई पर यह 5.23% की बढ़त के साथ ₹436.95 (Tata Motors CV Share Price) पर बंद हुआ था।

Tata Motors CV के लिए कैसी रही जुलाई?

टाटा मोटर्स कमर्शियल वेईकल्स की पिछले महीने में घरेलू मार्केट में बिक्री सालाना आधार पर 28% बढ़कर 33,876 यूनिट्स पर पहुंच गई तो निर्यात इस दौरान 2,524 यूनिट्स से 128% बढ़कर 5,765 यूनिट्स पर पहुंच गया। ओवरऑल यानी देशी-विदेशी बिक्री को मिलाकर बात करें तो कंपनी की टोटल सेल्स जुलाई 2026 में सालाना आधार पर 37% बढ़कर 39,641 यूनिट्स हो गई।

घरेलू बिक्री में अलग-अलग वेईकल सेगमेंट्स में बात करें तो जुलाई में एचसीवी (हैवी कमर्शियल वेईकल) ट्रक्स की बिक्री 6735 यूनिट्स से 33% बढ़कर 8973 यूनिट्स, ILMCV (इंटरमीडिएट, लाइट एंड मीडियम कमर्शियल वेईकल) ट्रक्स की बिक्री 5,068 यूनिट्स से 20% बढ़कर 6,100 यूनिट्स, पैसेंजर कैरियर की बिक्री 4,749 यूनिट्स से 25% उछलकर 5,938 यूनिट्स पर पहुंच गई तो SCV (स्मॉल कमर्शियल वेईकल) कार्गो और पिकअप्स की बिक्री 30% बढ़कर 9,880 यूनिट्स से 12,865 यूनिट्स पर पहुंच गई। इस दौरान MH&ICV (मीडियम एंड हैवी इंटरमीडिएट कमर्शियल वेईकल्स) की घरेलू बिक्री 12,378 यूनिट्स से 25% बढ़कर 15,435 यूनिट्स और निर्यात को मिलाकर कुल बिक्री 13,669 यूनिट्स से 20% बढ़कर 16,364 यूनिट्स पर पहुंच गया।

अब तक कैसी रही टाटा मोटर्स सीवी के शेयरों की चाल

टाटा मोटर्स सीवी के शेयरों ने कम समय में ही निवेशकों की ताबड़तोड़ कमाई कराई है। टाटा मोटर्स से अलग होकर यानी डिमर्जर के बाद इसके शेयर बीएसई और एनएसई पर 12 नवंबर को लिस्ट हुए थे। बीएसई पर यह ₹330.25 और बीएसई पर ₹335 पर लिस्ट हुआ था। लिस्टिंग के बाद 14 नवंबर 2025 को बीएसई पर यह ₹306.00 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया था। इस निचले स्तर से तीन ही महीने में यह 66.32% उछलकर 27 फरवरी 2026 को ₹508.95 के रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गया था।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

रतन टाटा की ये फेवरेट 5 फेमस किताबें, आपके करियर और कैरेक्टर को बिल्ड करने में कर सकती हैं मदद

लोग रतन टाटा की तारीफ़ उन कंपनियों के लिए करते हैं जिन्हें बनाने में उन्होंने मदद की, लेकिन कहानी बस इतनी ही नहीं है। कई बिज़नेस लीडर्स ने अरबों डॉलर की कंपनियां बनाई हैं। बहुत कम लोगों को ऐसा भरोसा मिला है कि लोग उनके बारे में सच्चे सम्मान के साथ बात करें। ऐसा तिमाही मुनाफ़े की वजह से नहीं होता। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि लोगों को भरोसा होता है कि जब सुर्खियां आपके पक्ष में न हों, तब भी आपके मूल्य अडिग रहते हैं।

अक्सर लोग लीडरशिप को आत्मविश्वास, करिश्मा या मुश्किल फ़ैसले तेज़ी से लेने की क्षमता समझ लेते हैं। ये बातें मायने तो रखती हैं, लेकिन ये पूरी नहीं हैं। जो लीडर अपनी गहरी छाप छोड़ते हैं, वे आमतौर पर काम करने से ज़्यादा समय सीखने में बिताते हैं। वे खूब पढ़ते हैं, अपनी मान्यताओं पर सवाल उठाते हैं और सफल होने के बाद भी नई चीज़ें जानने के लिए उत्सुक रहते हैं। यह बात बहुत अच्छी लगती है क्योंकि इससे पता चलता है कि लीडरशिप कोई जन्मजात गुण नहीं है, बल्कि एक आदत है।

The Tata Story by Harish Bhat

अगर आप यह समझना चाहते हैं कि रतन टाटा की लीडरशिप आज भी लोगों के दिलों में क्यों बसी हुई है, तो आपको यहीं से शुरुआत करनी चाहिए। हरीश भट सिर्फ़ टाटा ग्रुप की अहम उपलब्धियों के बारे में ही नहीं बताते, बल्कि उन सिद्धांतों का भी ज़िक्र करते हैं जिन्होंने उन्हें आकार दिया। इस किताब से मिलने वाली सबसे बड़ी सीख कोई बिज़नेस एम्पायर खड़ा करने के बारे में नहीं है, बल्कि ऐसी साख बनाने के बारे में है जो तिमाही नतीजों से कहीं ज़्यादा समय तक कायम रहती है। किताब का कहना है कि मूल्य सफलता के साथ जुड़ी कोई अतिरिक्त चीज़ नहीं हैं; बल्कि अक्सर यही वे कारण होते हैं जिनकी वजह से सफलता लंबे समय तक बनी रहती है।

Good to Great by Jim Collins

जिम कॉलिन्स एक ऐसा सवाल पूछते हैं जो सुनने में तो बहुत आसान लगता है, लेकिन असल में गहरा है: कुछ कंपनियां ‘अच्छी’ से ‘बेहतरीन’ कैसे बन जाती हैं, जबकि दूसरी कंपनियां एक ही स्तर पर अटकी रह जाती हैं? इसका जवाब करिश्मा या बड़े जोखिम उठाना नहीं है। इसका जवाब है – अनुशासित सोच, धैर्यपूर्ण नेतृत्व और लंबी अवधि की सोच के साथ काम करने की इच्छा। हालाँकि कुछ उदाहरण अब पुराने हो चुके हैं, लेकिन उनका मुख्य विचार – कि दिखावे या शोर-शराबे से कहीं ज़्यादा असरदार निरंतरता होती है – आज भी उतना ही प्रासंगिक लगता है।

The Psychology of Money by Morgan Housel

लीडरशिप और पैसा, दोनों ही समझदारी की परीक्षा लेते हैं और मॉर्गन हाउसेल ने इस बात को बहुत शानदार ढंग से समझाया है। इन्वेस्टमेंट की रणनीतियाँ सिखाने के बजाय, वे इस बात पर चर्चा करते हैं कि समझदार लोग भी अक्सर पैसे के मामले में गलत फ़ैसले क्यों लेते हैं और सब्र को अक्सर कम अहमियत क्यों दी जाती है। यह किताब आपको एक आसान लेकिन ज़बरदस्त बात सिखाती है: जब दांव बड़ा हो, तो समझदारी से ज़्यादा आपके व्यवहार का महत्व होता है।

Start With Why by Simon Sinek

साइमन सिनेक की मुख्य बात का इतना ज़्यादा ज़िक्र किया जाता है कि यह भूलना आसान है कि असल में यह कितनी असरदार है। उनका मानना ​​सीधा-सा है: लोग सबसे पहले प्रोडक्ट नहीं खरीदते, वे मकसद से जुड़ते हैं। चाहे आप किसी कंपनी को चला रहे हों, कोई ब्रांड बना रहे हों या किसी छोटी टीम को मैनेज कर रहे हों, यह किताब आपको इस बात से आगे सोचने के लिए प्रेरित करती है कि आप क्या करते हैं, और इस बात पर ध्यान देने को कहती है कि वह काम क्यों ज़रूरी है।

Leaders Eat Last by Simon Sinek

साइमन सिनेक की किताबों में से यह किताब सबसे ज़्यादा ज़मीनी हकीकत से जुड़ी हुई लगती है। यह किताब अधिकार या पद का गुणगान करने के बजाय, लीडरशिप को एक ज़िम्मेदारी के तौर पर पेश करती है। सिनेक का कहना है कि बेहतरीन लीडर ऐसा माहौल बनाकर लोगों का भरोसा जीतते हैं जहाँ वे सुरक्षित और अहम महसूस करें, और अपना सबसे अच्छा काम करने के लिए प्रेरित हों। यह किताब हमें सही समय पर याद दिलाती है कि सबसे मज़बूत टीमें डर या ऊँच-नीच से नहीं, बल्कि देखभाल और जवाबदेही से बनती हैं।

Trident Q1 Results: टेक्सटाइल कंपनी का मुनाफा 13% बढ़ा, शेयरधारकों को मिला डिविडेंड

Trident Q1 Results: टेक्सटाइल और पेपर सेक्टर की कंपनी Trident Ltd ने जून तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का मुनाफा दोहरे अंक में बढ़ा है। रेवेन्यू और ऑपरेटिंग प्रॉफिट में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, EBITDA मार्जिन पिछले साल के स्तर पर ही स्थिर रहा।

मुनाफा और रेवेन्यू दोनों बढ़े

अप्रैल-जून तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा 12.9% बढ़कर ₹158 करोड़ हो गया। पिछले साल की समान तिमाही में यह ₹140 करोड़ था। कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू 4.7% बढ़कर ₹1,786.8 करोड़ पहुंच गया। एक साल पहले यह ₹1,706.8 करोड़ था।

इस दौरान EBITDA 2.7% बढ़कर ₹299.6 करोड़ रहा। पिछले साल यह ₹291.7 करोड़ था। हालांकि, EBITDA मार्जिन 17% पर स्थिर रहा।

किस कारोबार का कैसा प्रदर्शन रहा?

जून तिमाही में यार्न बिजनेस कंपनी का सबसे बड़ा रेवेन्यू देने वाला कारोबार रहा। इस सेगमेंट का रेवेन्यू ₹902 करोड़ से बढ़कर ₹954.2 करोड़ हो गया। पेपर और केमिकल्स कारोबार का रेवेन्यू ₹259.8 करोड़ से बढ़कर ₹297.4 करोड़ पहुंच गया, जो सबसे तेज ग्रोथ वाला सेगमेंट रहा।

वहीं, टॉवल बिजनेस का रेवेन्यू लगभग स्थिर रहा। यह ₹638.9 करोड़ से मामूली घटकर ₹638.5 करोड़ रह गया। दूसरी ओर, बेडशीट कारोबार का रेवेन्यू ₹309.4 करोड़ से घटकर ₹302.8 करोड़ हो गया।

मुनाफे में किसका सबसे ज्यादा योगदान?

यार्न कारोबार का प्री-टैक्स प्रॉफिट ₹70.1 करोड़ से बढ़कर ₹145.8 करोड़ हो गया। यानी इस सेगमेंट का मुनाफा दोगुने से भी ज्यादा बढ़ा। बेडशीट बिजनेस का प्री-टैक्स प्रॉफिट ₹44.8 करोड़ से बढ़कर ₹49.3 करोड़ रहा।

हालांकि, पेपर और केमिकल्स सेगमेंट का प्री-टैक्स प्रॉफिट ₹73.3 करोड़ से घटकर ₹52.4 करोड़ रह गया। वहीं, टॉवल कारोबार का प्री-टैक्स प्रॉफिट ₹47.6 करोड़ से घटकर ₹33.7 करोड़ हो गया।

अंतरिम डिविडेंड और नई सब्सिडियरी

कंपनी ने अप्रैल-जून तिमाही के दौरान ₹1 फेस वैल्यू वाले प्रत्येक शेयर पर ₹0.50 प्रति शेयर का अंतरिम डिविडेंड दिया।

इसके अलावा, बोर्ड ने ब्रांड की मौजूदगी मजबूत करने और सेल्स, मार्केटिंग, बिजनेस डेवलपमेंट एक्टिविटीज को बढ़ाने के लिए नई सब्सिडियरी बनाने को मंजूरी दी है। यह सब्सिडियरी विदेशी बाजारों में भी Trident के प्रोडक्ट्स की मार्केटिंग का काम करेगी।

Trident के शेयरों का हाल

Trident का शेयर 21 जुलाई को NSE पर 0.28% गिरकर ₹25.24 पर बंद हुआ। पिछले 1 साल में स्टॉक 19.97% नीचे आया है। कंपनी का मार्केट कैप 12.67 हजार करोड़ रुपये है।

Indian Hotels Q1 Results: टाटा ग्रुप की होटल कंपनी का मुनाफा 21% बढ़ा, शेयरों पर रहेगी नजर

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Indian Hotels Q1 Results: टाटा ग्रुप की होटल कंपनी का मुनाफा 21% बढ़ा, शेयरों पर रहेगी नजर

Indian Hotels Q1 Results: टाटा ग्रुप की होटल कंपनी Indian Hotels Company (IHCL) ने जून तिमाही में मजबूत नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का मुनाफा और रेवेन्यू, दोनों में दोहरे अंकों की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। ऑपरेटिंग मार्जिन में भी सुधार देखने को मिला।

मुनाफा 21% बढ़ा

अप्रैल-जून तिमाही में इंडियन होटल्स का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा 20.8% बढ़कर ₹358 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹296 करोड़ था।

कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू 14.6% बढ़कर ₹2,339 करोड़ पहुंच गया। एक साल पहले यह ₹2,041 करोड़ था।

EBITDA और मार्जिन में सुधार

जून तिमाही में EBITDA 16.8% बढ़कर ₹672 करोड़ रहा। पिछले साल यह ₹576 करोड़ था। वहीं, EBITDA मार्जिन 28.2% से बढ़कर 28.8% हो गया।

होटल इंडस्ट्री के अहम पैमाने RevPAR (Revenue Per Available Room) में भी 14% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

क्या बोले CEO?

इंडियन होटल्स के एमडी और सीईओ पुनीत छतवाल ने कहा कि कंपनी वित्त वर्ष 2027 में भी डबल डिजिट रेवेन्यू ग्रोथ का लक्ष्य बरकरार रखे हुए है। उनका कहना है कि होटल कारोबार में मांग मजबूत बनी हुई है।

शेयर का हाल

Indian Hotels Company का शेयर नतीजों से पहले मंगलवार को 0.98% बढ़कर ₹731.75 पर बंद हुआ। हालांकि, साल 2026 में अब तक शेयर में करीब 1% की गिरावट रही है। वहीं, पिछले 6 महीने में इसने करीब 12% का रिटर्न दिया है।

क्या करती है कंपनी?

Indian Hotels Company (IHCL) टाटा ग्रुप की हॉस्पिटैलिटी कंपनी है। यह Taj, Vivanta, SeleQtions, Ginger और ama Stays & Trails जैसे होटल और हॉस्पिटैलिटी ब्रांड चलाती है। भारत के साथ-साथ कई विदेशी बाजारों में भी कंपनी की मौजूदगी है।

Q1 Results: घाटे से मुनाफे में लौटी स्टेनलेस स्टील कंपनी, शेयरों पर रहेगी नजर

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Q1 Results: टाटा ग्रुप की कंपनी का मुनाफा 32% बढ़ा, शेयरों पर रहेगी नजर

Q1 Results: टाटा ग्रुप की एग्री-इनपुट कंपनी Rallis India ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का प्रदर्शन इस बार उम्मीद से बेहतर रहा। मुनाफा और रेवेन्यू, दोनों में बढ़ोतरी हुई है।

कंपनी का शुद्ध मुनाफा 31.6% बढ़कर ₹125 करोड़ हो गया। पिछले साल की समान तिमाही में यह ₹95 करोड़ था।

रेवेन्यू और EBITDA दोनों बढ़े

जून तिमाही में Rallis India का रेवेन्यू 6.8% बढ़कर ₹1,022 करोड़ रहा। पिछले साल की समान तिमाही में यह कम था। वहीं, EBITDA 23.3% बढ़कर ₹185 करोड़ पहुंच गया।

कंपनी का EBITDA मार्जिन 15.7% से बढ़कर 18.1% हो गया। इसका मतलब है कि कंपनी पहले के मुकाबले ज्यादा मुनाफे के साथ कारोबार कर रही है। बेहतर प्राइसिंग, लागत पर नियंत्रण और प्रोडक्ट मिक्स में सुधार से मार्जिन मजबूत हुआ।

Crop Care बिजनेस ने दिखाई मजबूती

Rallis India के Crop Care कारोबार का रेवेन्यू 7% बढ़कर ₹697 करोड़ पहुंच गया। इस कारोबार में रिटेल यानी B2C बिजनेस 19% बढ़ा। हालांकि, B2B कारोबार में 19% की गिरावट दर्ज की गई। इसके बावजूद कुल कारोबार बढ़त में रहा।

तिमाही के दौरान कंपनी ने फसल सुरक्षा से जुड़े Balwan, Prodim Ultra और Kengen नाम के तीन नए प्रोडक्ट लॉन्च किए। कंपनी ने फील्ड प्रोग्राम्स पर भी जोर दिया। साथ ही इन्वेंट्री मैनेजमेंट में सुधार किया। इसका फायदा कारोबार पर साफ दिखाई दिया।

Seeds कारोबार में भी अच्छी ग्रोथ

Rallis India का Seeds कारोबार भी मजबूत रहा। इस सेगमेंट का रेवेन्यू 6% बढ़कर ₹325 करोड़ पहुंच गया। प्री-सीजन डिमांड और सही समय पर प्रोडक्ट प्लेसमेंट का फायदा कंपनी को मिला।

तिमाही के दौरान कंपनी ने कपास, धान और बाजरा कैटेगरी में 9 नए प्रोडक्ट लॉन्च किए। इनमें उत्तर भारत के लिए दो नए कॉटन हाइब्रिड भी शामिल हैं। इसके अलावा Dhaanya ब्रांड के तहत हर्बीसाइड-टॉलरेंट डायरेक्ट-सीडेड राइस भी बाजार में उतारा गया।

कंपनी ने क्या कहा?

Rallis India के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ डॉ. ज्ञानेंद्र शुक्ला ने कहा कि कंपनी ने मजबूत रणनीति और बेहतर परिचालन की बदौलत अच्छा प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि मुनाफे में सुधार के साथ-साथ नए प्रोडक्ट्स पर भी लगातार निवेश किया जा रहा है।

उनके मुताबिक, कंपनी आगे भी भारतीय किसानों के लिए नए और बेहतर कृषि समाधान विकसित करने पर फोकस बनाए रखेगी। साथ ही सभी कारोबारों में अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को और मजबूत करेगी।

नतीजों से पहले सोमवार को Rallis India का शेयर 2.6% की बढ़त के साथ ₹240 पर बंद हुआ।

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Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Semiconductor Mission 2.0: ₹1.27 लाख करोड़ के मिशन को मंजूरी, भारत को चिप हब बनाने की तैयारी

India Semiconductor Mission (ISM 2.0): केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को India Semiconductor Mission (ISM 2.0) को मंजूरी दे दी। इस मिशन के लिए ₹1.27 लाख करोड़ का बजट तय किया गया है। यह पहले चरण के ₹76,000 करोड़ से करीब 68% ज्यादा है। सरकार का लक्ष्य सिर्फ चिप बनाना नहीं है। अब पूरी सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन भारत में तैयार करने पर जोर रहेगा, ताकि देश आयात पर कम निर्भर हो और दुनिया का बड़ा चिप हब बन सके।

आखिर ISM 2.0 में नया क्या है?

पहले चरण यानी ISM 1.0 का फोकस चिप मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लाने पर था। अब ISM 2.0 का दायरा और बड़ा कर दिया गया है। सरकार अब चिप डिजाइन से लेकर मशीनें, केमिकल, गैस, कच्चा माल, एडवांस पैकेजिंग और रिसर्च तक पूरा इकोसिस्टम देश में तैयार करना चाहती है।

6 बड़े पिलर पर तैयार हुआ मिशन

सरकार ने ISM 2.0 को छह बड़े हिस्सों में बांटा है।

  • सबसे पहले भारत को चिप डिजाइन के क्षेत्र में मजबूत बनाया जाएगा। सरकार स्टार्टअप और डिजाइन कंपनियों को मदद देगी, ताकि वे दुनिया के लिए चिप डिजाइन कर सकें।
  • दूसरा फोकस सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन पर रहेगा। चिप बनाने वाली मशीनें, स्पेशलिटी केमिकल, गैस और जरूरी कच्चा माल देश में ही तैयार करने की कोशिश होगी।
  • तीसरे चरण में नई सिलिकॉन फैब, कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब, डिस्प्ले फैब और दूसरी निर्माण इकाइयों में निवेश बढ़ाया जाएगा।
  • चौथा लक्ष्य ATMP और OSAT यानी चिप की एडवांस पैकेजिंग और टेस्टिंग क्षमता को मजबूत करना है।
  • पांचवें हिस्से में रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) पर जोर रहेगा। सरकार चाहती है कि भारत सिर्फ मौजूदा तकनीक तक सीमित न रहे, बल्कि अगली पीढ़ी की चिप टेक्नोलॉजी भी विकसित करे।
  • छठा फोकस स्किल डेवलपमेंट पर होगा। इस सेक्टर के लिए बड़ी संख्या में इंजीनियर और एक्सपर्ट तैयार किए जाएंगे।

105 स्टार्टअप पहले से कर रहे हैं काम

सरकार के मुताबिक, देश में 105 स्टार्टअप पहले से सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन पर काम कर रहे हैं। नई योजना के तहत इन्हें तकनीकी और वित्तीय मदद दी जाएगी। सरकार चाहती है कि भारत चिप डिजाइन के क्षेत्र में भी दुनिया के बड़े देशों में शामिल हो।

2028 तक शुरू हो सकती है पहली चिप फैक्ट्री

सरकार ने कहा है कि भारत की पहली सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन (Fab) यूनिट 2028 तक शुरू होने की उम्मीद है। इससे देश में चिप निर्माण को नई रफ्तार मिलेगी।

पहले चरण में क्या हासिल हुआ?

सरकार के मुताबिक, India Semiconductor Mission (ISM) 1.0 के तहत अब तक 12 मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को मंजूरी दी जा चुकी है। इनमें एक सिलिकॉन फैब, एक सिलिकॉन कार्बाइड फैब, एक गैलियम नाइट्राइड माइक्रो LED डिस्प्ले फैब और 9 पैकेजिंग यूनिट शामिल हैं। इन परियोजनाओं में ₹1.64 लाख करोड़ से ज्यादा के निवेश को मंजूरी मिली है।

Micron, Kaynes और CG Semi में कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू हो चुका है। एक और यूनिट इस साल के अंत तक प्रोडक्शन शुरू कर सकती है।

68 हजार छात्रों को मिली ट्रेनिंग

सरकार सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए कुशल ह्यूमन रिसोर्स भी तैयार कर रही है। अभी 315 विश्वविद्यालयों में आधुनिक Electronic Design Automation (EDA) टूल्स के जरिए पढ़ाई हो रही है। अब तक 68,000 से ज्यादा छात्रों को ट्रेनिंग दी जा चुकी है।

बड़ी कंपनियों की भी दिलचस्पी

भारत के सेमीकंडक्टर सेक्टर में विदेशी कंपनियों का भरोसा भी बढ़ रहा है। AMD और Applied Materials ने 40-40 करोड़ डॉलर, Microchip Technology ने 30 करोड़ डॉलर, Lam Research ने 110 करोड़ डॉलर और KLA ने 40 करोड़ डॉलर के निवेश का ऐलान किया है।

वहीं ASML, Merck और IBL Electron ने टाटा ग्रुप के साथ समझौते किए हैं। इनका मकसद भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करना है।

सरकार का बड़ा लक्ष्य

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही कह चुके हैं कि भारत सिर्फ चिप आयात करने वाला देश नहीं बनना चाहता। सरकार का लक्ष्य पूरी वैल्यू चेन भारत में तैयार करना है। आने वाले वर्षों में भारत की सेमीकंडक्टर मांग 50 अरब डॉलर से बढ़कर 100 अरब डॉलर से ज्यादा होने का अनुमान है। सरकार चाहती है कि इस बढ़ती मांग का बड़ा हिस्सा देश में ही पूरा हो।मजबूत बनाना है।

Market Outlook : हल्की बढ़त के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 16 जुलाई को कैसी रह सकती है इसकी चाल

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।