Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : भारतीय बाजारों के लिए आज नरम संकेत हैं। गिफ्ट निफ्टी में हल्की नरमी है। FIIs की कैश और वायदा मिलाकर करीब 4000 करोड़ रुपये की बिकवाली देखने को मिली है। FIIs ने इंडेक्स फ्यूचर्स में एक ही दिन में 10000 से ज्यादा नेट शॉर्ट कॉन्ट्रैक्ट जोड़े हैं। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

27 अगस्त को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स में लगातार दूसरे दिन गिरावट देखने को मिली। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और फार्मा शेयरों में खरीदारी के बावजूद मीडिया, मेटल,ऑयल एंड गैस और PSU बैंकों के शेयरों में बिकवाली हावी रही। बाजार शुरुआती बढ़त को बनाए नहीं रख सका और पूरे सेशन के दौरान ज्यादातर समय गिरावट के साथ कारोबार करता रहा। कारोबार के अंत में निफ्टी 116.90 अंक या 0.48% गिरकर 24,090.85 पर बंद हुआ,जबकि सेंसेक्स 539.35 अंक या 0.70% की गिरावट के साथ 76,933.59 पर आ गया।

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो

27 अगस्त को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने ₹298 करोड़ के शेयर बेचे और वे नेट सेलर बन गए। वहीं,घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने खरीदारी का सिलसिला जारी रखते हुए ₹4,977 करोड़ के भारतीय शेयर खरीदे।

एशियाई करेंसी

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ज्यादातर एशियाई करेंसी में बढ़त के साथ कारोबार हो रहा है। अच्छी बात यह रही कि दक्षिण कोरियाई वॉन में 0.249% की बढ़त हुई है, जबकि ताइवान डॉलर में 0.19% और मलेशियन रिंगित में 0.124% की बढ़ोतरी हुई है। सिंगापुर डॉलर और चीनी रेनमिनबी में 0.055% और 0.036% की मामूली बढ़त हुई है। जबकि जापानी येन में 0.019% की बढ़त के साथ लगभग कोई बदलाव नहीं हुआ है।

उधर फिलीपीन पेसो में सबसे ज्यादा गिरावट आई है। यह 0.507% गिरा है। इसके बाद इंडोनेशियाई रुपिया 0.107% और थाई बाहत 0.03% नीचे आया है।

अमेरिकी बाजारों में जोरदार तेजी, एशिया में मिला-जुला कारोबार

अच्छे नतीजों के बाद Nvidia में 9% के उछाल ने अमेरिकी बाजारों का सेंटिमेंट सुधारा है। कल नैस्डैक करीब 1.5 फीसदी दौड़ा, S&P में भी रौनक रही। बाजार की अब आज शाम को आने वाले जैक्सन होल में फेड चेयरमैन के बयानों पर नजर रखेगा। वहीं एशियाई बाजार मिलेजुले हैं। जापान के निक्केई में 0.50 फीसदी की बढ़त है। लेकिन कॉस्पी करीब एक फीसदी नीचे कारोबार कर रहा है।

SEBI चेयरमैन का CAS पर बयान, CAS में कोई बदलाव नहीं

मार्केट रेगुलेटर सेबी ने साफ कर दिया है कि क्लोजिंग ऑक्शन सेसन यानी CAS में फिलहाल बदलाव नहीं किया जाएगा। सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने इस मुद्दे पर कहा कि इमें अभी कोई बदलाव नहीं होगा। सिस्टम वैसे ही चल रहा है। पार्टिसिपेशन बढ़ेगा और ब्रोकर्स इसे अपने ऐप्स में इनेबल करेंगे और लोग सीखेंगे और इस मार्केट में आएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि NSE IPO DRHP मंजूरी के बहुत करीब है।

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हॉर्मुज पर सस्पेंस जारी

हॉर्मुज पर सस्पेंस जारी है। ईरान हॉर्मुज खोलने के लिए शर्तें तैयार कर रहा है। उधर अमेरिका ने कहा कि ईरान से फिलहाल कोई बातचीत नहीं हो रही है। पुराने MoU पर लौटने का सवाल नहीं है। इसबीच क्रूड उछलकर 90 डॉलर के पास आ गया है।

आज लेंसकार्ट में 1,313 करोड़ रुपए की ब्लॉक डील संभव

आज लेंसकार्ट में 1,313 करोड़ रुपए की ब्लॉक डील संभव है। Alphawave 1.2% हिस्सा बेच सकती है। इस डील की फ्लोर प्राइस 630 रुपए प्रति शेयर तय की गई है।

Snakebite in India: सांप के काटने में भारत नंबर-1, हर साल 13 लाख तक मामले; जानें क्यों बढ़ रहा खतरा

भारत में सांप के काटने का खतरा कितना बड़ा है, इसका अंदाजा एक नए वैश्विक अध्ययन से लगाया जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, हर साल देश में बड़ी संख्या में लोग सांप के जहर का शिकार होते हैं, जिससे यह समस्या गंभीर स्वास्थ्य संकट बनती जा रही है। खासकर गांवों और खेतों में रहने वाले लोगों के लिए इसका खतरा ज्यादा रहता है। बारिश के मौसम में सांपों के इंसानी इलाकों के करीब आने से घटनाएं बढ़ने की आशंका रहती है। सबसे चिंता की बात यह है कि कई मामलों में पीड़ित समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते। इलाज में देरी और ग्रामीण क्षेत्रों में मेडिकल सुविधाओं की कमी स्थिति को और गंभीर बना देती है।

वहीं, दुनिया के दूसरे देशों की तुलना में भारत में सांप के काटने के मामलों का आंकड़ा काफी ज्यादा बताया गया है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि किन इलाकों में खतरा ज्यादा है और कौन से जहरीले सांप सबसे ज्यादा जानलेवा साबित होते हैं।

भारत के बाद इन देशों में सबसे ज्यादा मामले

अध्ययन में दुनिया के उन देशों की पहचान की गई है जहां सांप के काटने का खतरा सबसे ज्यादा है। अनुमानित सालाना मामलों के हिसाब से भारत सबसे ऊपर है। इसके बाद नाइजीरिया, इंडोनेशिया और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो का नंबर आता है।

भारत: 13 लाख तक मामले

नाइजीरिया: करीब 6.66 लाख मामले

इंडोनेशिया: करीब 4.90 लाख मामले

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो: करीब 4.67 लाख मामले

रिसर्च के अनुसार, दुनिया के लगभग तीन-चौथाई सांप काटने के मामले सिर्फ 20 देशों में केंद्रित हैं।

किसानों और ग्रामीणों पर सबसे ज्यादा खतरा

भारत में सांप काटने की घटनाओं का बड़ा हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ा है। खेतों में काम करने वाले किसान और मजदूर खास तौर पर जोखिम में रहते हैं। मानसून के दौरान यह खतरा और बढ़ जाता है, क्योंकि बारिश के समय सांप अक्सर सुरक्षित जगह की तलाश में इंसानी बस्तियों और खेतों की ओर आ जाते हैं। बिना जूते खेतों में काम करना, जमीन पर सोना और कच्चे या खुले घरों में रहना भी जोखिम बढ़ा सकता है।

इलाज में देरी बनती है जानलेवा

सांप के काटने के बाद समय पर सही इलाज मिलना बेहद जरूरी है। लेकिन ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में अस्पताल दूर होने के कारण मरीज को इलाज मिलने में काफी समय लग सकता है। कई मामलों में लोग अस्पताल जाने से पहले पारंपरिक इलाज या झाड़-फूंक का सहारा लेते हैं। कुछ स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों में एंटीवेनम और गंभीर मरीजों के लिए जरूरी चिकित्सा सुविधाओं की कमी भी समस्या को बढ़ा सकती है।

भारत के ‘बिग फोर’ जहरीले सांप

भारत में गंभीर सांप काटने के मामलों के लिए चार प्रमुख जहरीली प्रजातियों को आमतौर पर ‘बिग फोर’ कहा जाता है।

  1. Spectacled Cobra

यह कोबरा खेतों के अलावा कई बार इंसानी बस्तियों के आसपास भी दिखाई देता है। इसके जहर से शरीर के तंत्रिका तंत्र पर गंभीर असर पड़ सकता है।

  1. Common Krait

कॉमन क्रेट रात में ज्यादा सक्रिय रहता है। इसके काटने की कई घटनाएं सोते समय होती हैं और पीड़ित को शुरुआत में काटने का पता भी नहीं चल पाता।

  1. Russell’s Viper

रसेल वाइपर को भारत में गंभीर सांप काटने के प्रमुख कारणों में गिना जाता है। इसके जहर से रक्तस्राव, ऊतकों को नुकसान और किडनी से जुड़ी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

  1. Saw-scaled Viper

आकार में छोटा होने के बावजूद यह बेहद जहरीला सांप है। इसके जहर से खून बहने और शरीर में रक्त के जमने की प्रक्रिया प्रभावित होने जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

सांप का काटना बना ‘छिपा हुआ’ स्वास्थ्य संकट

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने snakebite envenoming को Neglected Tropical Disease यानी उपेक्षित उष्णकटिबंधीय बीमारी की प्राथमिकता वाली श्रेणी में रखा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सांप काटने के वास्तविक आंकड़े इससे भी ज्यादा हो सकते हैं, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में कई घटनाएं आधिकारिक रिकॉर्ड तक नहीं पहुंचतीं।

बचाव के लिए क्या कदम जरूरी?

विशेषज्ञों के अनुसार, ज्यादा प्रभावित इलाकों में पर्याप्त मात्रा में एंटीवेनम उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है। साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के कर्मचारियों को सांप काटने के मामलों के इलाज की बेहतर ट्रेनिंग देने की जरूरत है। ग्रामीण मजदूरों को सुरक्षित जूते उपलब्ध कराना, लोगों को सांप काटने के बाद सही प्राथमिक कदमों की जानकारी देना और समय पर अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत करना भी इस संकट से निपटने में अहम भूमिका निभा सकता है।

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सहवाग और द्रविड़ के बेटे को साथ में मिला टीम में मौका, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हुआ चयन

वीरेंद्र सहवाग और राहुल द्रविड़ को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेलना खासा पसंद था। अब इन दोंनों क्रिकेटरों के बेटें को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ही डेब्यू करने का मौका दिया जा रहा है। आर्यवीर सहवाग और अन्वय द्रविड़ को मार्च में होने वाली ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 3 अंडर 19  एकदिवसीय सीरीज में भारतीय टीम के लिए चुना गया है। यह  मैच राजकोट और अहमदाबाद में खेले जाएंगे। तीनों एकदिवसीय और पहला बहुदिवसीय मैच राजकोट में खेला जाएगा, जबकि दूसरा बहुदिवसीय मुकाबला अहमदाबाद में होगा।

अन्वय द्रविड़ एक विकेटकीपर की हैसियत से इस टूर्नामेंट में खेलेंगे जिसमें कप्तान लक्ष्य रायचंदानी होंगे। यशवर्धन सिंह चौहान को लंबे प्रारूप के मुकाबलों के लिए कप्तान बनाया गया है। आर्यवीर सहवाग एक बल्लेबाज के तौर पर टीम में चुने गए हैं। इससे पहले यह दोनों खिलाड़ी 3 साल पहले रणजी ट्रॉफी में आमने सामने हुए थे और अब दोनों साथ में खेलेंगे।

द्रविड़ के बड़े बेटे, समित द्रविड़, जो 20 वर्ष के हैं उन्हें भी 2024 में ऑस्ट्रेलिया अंडर-19 के ख़िलाफ़ खेलने के लिए इंडिया अंडर-19 टीम में चुना गया था, लेकिन घुटने की चोट के कारण वह बाहर हो गए थे। समित ने कर्नाटक की टी20 लीग, महाराजा टी20 ट्रॉफ़ी में शानदार प्रदर्शन करने के बाद अंडर-19 टीम में जगह बनाई थी।

भारत अंडर-19 एकदिवसीय टीम: लक्ष्य रायचंदानी (कप्तान), यशवर्धन चौहान, रजत बघेल, आर्यवीर सहवाग, वीके विनीत, कुशाग्र ओझा, अर्जुन राजपूत, मनाल चौहान, अन्वय द्रविड़, वी यशवीर, रोहित यादव, शाविन विनोद, मोहित उलवा, चिगुरुपति वेंकट और काव्या पटेल।

भारत अंडर-19 बहुदिवसीय टीम:यशवर्धन चौहान (कप्तान), लक्ष्य रायचंदानी, सागर विर्क, कुशाग्र ओझा, मनाल चौहान, कुश पटेल, मानव कृष्णा, अभिप्राय बिस्वास, रोहित यादव, ईशान ओम, अयान अकरम, प्रणव राघवेंद्र, प्रियांशु सिंह, मोहित उलवा और आर्यन यादव।

योगी सरकार का बड़ा एक्शन प्लान, IIT कानपुर, BHU और रुड़की को सौंपी कमान! यूपी में ₹100 करोड़ से बड़े प्रोजेक्ट्स का यूं होगा ऑडिट

UP News: उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की क्वालिटी सुधारने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब 100 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली सड़क, पुल, सीवरेज और जलापूर्ति परियोजनाओं की क्वालिटीकी जांच देश के प्रतिष्ठित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) संस्थानों के एक्सपर्ट्स करेंगे। सरकार ने इसके लिए थर्ड पार्टी क्वालिटी ऑडिट (TPQA) की व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। इस नई व्यवस्था में IIT कानपुर, IIT-BHU वाराणसी और IIT रुड़की जैसे प्रमुख संस्थान बड़ी परियोजनाओं की टेक्निकल क्वालिटी की निगरानी करेंगे।

इसका मकसद यह है कि निर्माण में किसी भी तरह की तकनीकी कमी, घटिया सामग्री या सुरक्षा से जुड़ी समस्या का पता परियोजना पूरी होने के बाद नहीं। बल्कि निर्माण के दौरान ही चल जाए। थर्ड-पार्टी क्वालिटी ऑडिट (TPQA) में सड़कें, पुल, सीवरेज सिस्टम और पानी की सप्लाई वाले प्रोजेक्ट्स शामिल होंगे।

प्रोजेक्ट की शुरुआत से लेकर आखिर तक होगी जांच 

एक्सपर्ट्स हर प्रोजेक्ट की शुरुआत से लेकर आखिर तक जांच करेंगे। इसमें उसका डिजाइन, बनाने का तरीका, इस्तेमाल होने वाली सामग्री और जरूरी मानकों का पालन हो रहा है या नहीं, जैसे सभी कारण शामिल होगा। IIT की टीमें निर्माण के अलग-अलग चरणों की भी निगरानी करेंगी ताकि काम पूरा होने के बाद के बजाय शुरुआती दौर में ही किसी भी समस्या का पता लगाया जा सके।

शुरुआत से अंत तक होगी जांच

IIT के विशेषज्ञ केवल तैयार सड़क या पुल की जांच नहीं करेंगे, बल्कि परियोजना के अलग-अलग चरणों की निगरानी करेंगे। इसका उद्देश्य निर्माण पूरा होने के बाद खामियां मिलने के बजाय उन्हें समय रहते पहचानकर ठीक करना है। इसमें मुख्य रूप से-

  • प्रोजेक्ट के डिजाइन की जांच
  • निर्माण में अपनाई जा रही तकनीक
  • इस्तेमाल होने वाली निर्माण सामग्री की गुणवत्ता
  • निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन
  • निर्माण की सुरक्षा
  • काम की अलग-अलग स्टेज पर गुणवत्ता की जांच शामिल होगी।

IIT कानपुर को 8 डिवीजन की जिम्मेदारी

‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी व्यवस्था के तहत IIT कानपुर को उत्तर प्रदेश के 8 डिवीजन में प्रोजेक्ट की क्वालिटी जांच की जिम्मेदारी दी गई है। इनमें कानपुर, लखनऊ, बांदा, प्रयागराज, अयोध्या, आगरा, झांसी और देवीपाटन शामिल हैं। इन क्षेत्रों में ₹100 करोड़ से अधिक लागत वाले संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की तकनीकी जांच IIT कानपुर की टीम करेगी।

IIT-BHU के जिम्मे ये इलाके

IIT-BHU वाराणसी को भी कई महत्वपूर्ण डिवीजन की जिम्मेदारी दी गई है। इसके तहत बस्ती, गोरखपुर, आजमगढ़, वाराणसी और मिर्जापुर में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता की निगरानी की जाएगी। वहीं IIT रुड़की को सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, मेरठ और अलीगढ़ समेत पांच डिवीजन की जिम्मेदारी दी गई है।

₹100 करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट पर खास नजर

नई व्यवस्था के तहत ₹100 करोड़ से अधिक लागत वाले प्रमुख प्रोजेक्ट जांच के दायरे में आएंगे। टेक्निकल एक्सपर्ट निर्माण की क्वालिटी के साथ-साथ इस्तेमाल की जा रही सामग्री और परियोजना की सुरक्षा का भी परीक्षण करेंगे। सरकार का मानना है कि बाहरी और एक्सपर्ट्स संस्थानों से ऑडिट कराने से निर्माण एजेंसियों पर गुणवत्ता बनाए रखने का दबाव बढ़ेगा। साथ ही सरकारी पैसे से तैयार होने वाली बड़ी परियोजनाओं की विश्वसनीयता बेहतर होगी।

‘उन्नाव एक्सप्रेसवे’ हादसे के बाद बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब उन्नाव में ग्रीनफील्ड नेशनल एलिवेटेड एक्सप्रेसवे के एक हिस्से के उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद ढहने की खबर सामने आई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब ₹4,200 करोड़ की लागत से तैयार इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई को हुआ था।

इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी मौजूद थे। इसके करीब 12 दिन बाद एक्सप्रेसवे के एक हिस्से के ढहने की खबर ने निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

अब निर्माण के दौरान ही पकड़ में आएंगी खामियां

नई TPQA व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि किसी परियोजना के पूरा होने के बाद सामने आने वाली तकनीकी खामियों को निर्माण के दौरान ही पकड़ा जा सकेगा। सरकार की कोशिश है कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट केवल समय और बजट के भीतर पूरे न हों। बल्कि उनकी गुणवत्ता, मजबूती और सुरक्षा भी सुनिश्चित हो। यानी अब यूपी में ₹100 करोड़ से बड़े प्रोजेक्ट पर सिर्फ सरकारी विभागों की नजर नहीं होगी। बल्कि IIT के टेक्निकल एक्सपर्ट भी निर्माण की क्वालिटी का हिसाब रखेंगे।

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4% टूटा Federal Bank का शेयर, इस स्मॉल फाइनेंस बैंक में हिस्सेदारी की खरीदारी पर निगेटिव रिस्पांस

Federal Bank Share Price: फेडरल बैंक और जन स्मॉल फाइनेंस बैंक (Jana Small Finance Bank) के बीच एक सौदे को लेकर बातचीत चल रही है और यह एडवांस स्टेज में पहुंच चुका है। इसका आज शेयरों पर निगेटिव असर दिखा और शेयर 4% से अधिक टूट गए। सीएनबीसी-टीवी18 की रिपोर्ट के मुताबिक फेडरल बैंक इसमें कंट्रोलिंग स्टेक लेना चाहता है और जन स्मॉल फाइनेंस बैंक अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचना चाहता है। रिपोर्ट के मुताबिक प्रमोटर्स की हिस्सेदारी हासिल करने के बाद फेडरल बैंक बाकी शेयरहोल्डर्स से शेयरों की खरीदारी के लिए ओपन ऑफर ला सकता है।

अभी फेडरल बैंक के शेयरों की बात करें तो बीएसई पर फिलहाल यह 2.77% की गिरावट के साथ ₹348 पर है जबकि इंट्रा-डे में यह 4.50% फिसलकर ₹341.80 तक आ गया था। वहीं जन स्मॉल फाइनेंस बैंक के शेयर फिलहाल 2.09% की गिरावट के साथ ₹569.70 पर हैं तो इंट्रा-डे में यह 3.59% गिरकर ₹560.95 तक आ गया था।

कैसी है Federal Bank की सेहत

फेडरल बैंक के लिए इस वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत धमाकेदार रही। ब्याज से शुद्ध कमाई यानी NII की हेल्दी ग्रोथ और प्रोविजनिंग में गिरावट के दम पर इसकी कमाई जून 2026 तिमाही के दमदार रही। इसकी एसेट क्वालिटी में अच्छा सुधार दिखा लेकिन मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक इसका शुद्ध तिमाही में उम्मीद से थोड़ी हल्की रही।

जून 2026 तिमाही के फेडरल बैंक का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 36.6% बढ़कर ₹1177 करोड़ पर पहुंच गया जोकि ब्लूमबर्ग के पोल में ₹1186 करोड़ के लगाए गए अनुमान से थोड़ा कम रहा। इस दौरान बैंक की ब्याज से शुद्ध कमाई 26.1 बढ़कर ₹2,946 करोड़ पर पहुंच गई जोकि ₹2851 करोड़ के अनुमान से काफी अधिक रही।

बैंक का प्रोविजन सालाना आधार पर ₹400 करोड़ से गिरकर ₹316 करोड़ पर आ गया तो टैक्स पर खर्च ₹294.4 करोड़ से बढ़कर ₹402.7 करोड़ पर पहुंच गया। बैंक के एसेट क्वालिटी की बात करें तो इसमें सुधार दिखा और तिमाही आधार पर ग्रॉस एनपीए 1.62% से 1.52% तो नेट एनपीए 0.20% से 0.18% पर आ गया।

एक साल में कैसी रही सेहत

फेडरल बैंक के शेयरों ने निवेशकों की ताबड़तोड़ कमाई कराई है। पिछले साल बीएसई पर 4 सितंबर 2025 को यह ₹188.45 के भाव पर था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है। इस निचले स्तर से शेयरों ने शानदार रिकवरी की और 11 महीने में यह 93.66% उछलकर इस महीने की शुरुआत में 4 अगस्त 2026 को ₹364.95 पर पहुंच गया जोकि इसके शेयरों के लिए रिकॉर्ड हाई लेवल है।

Federal Bank Q1 Results: जून तिमाही में मुनाफा 37% बढ़ा, NII में 26% का इजाफा

Stock in News: 13% का उछाल, अलीबाग वाली जमीन को लेकर एग्रीमेंट पर शेयर रॉकेट

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

LIVE: दिल्ली में झमाझम, भारी बारिश का रेड अलर्ट

LIVE: दिल्ली में झमाझम, भारी बारिश का रेड अलर्ट

delhi rain

Latest News Today Live Updates in Hindi : दिल्ली में भारी बारिश से राजधानी के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति बन गई। मौसम विभाग ने आज यहां भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया। पल पल की जानकारी। 

-भारी बारिश से राजधानी दिल्ली के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति बन गई। मौसम विभाग ने भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया।
-मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी से गैंगटिक वेस्ट बंगाल से मॉनसून का एक सिस्टम बना है। वहीं, उत्तर भारत में कम दबाव का क्षेत्र बनने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर समेत अन्य स्थानें में आंधी के साथ तेज बारिश हुई।

Tukaram Mundhe: मुंबई में ‘एक रेड रोज’ से बदल रहे हैं खाने के नियम! महाराष्ट्र के FDA चीफ तुकाराम मुंढे का एक्शन वायरल

Tukaram Mundhe News मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र में इन दिनों खाने-पीने की दुकानों और रेस्टोरेंट संचालकों के बीच एक नाम चर्चा में है तुकाराम मुंढे…। महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) कमिश्नर के तौर पर 51 वर्षीय मुंढे ने देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में खाद्य सुरक्षा और साफ-सफाई को लेकर ऐसा अभियान शुरू किया है, जिसकी तस्वीरें और कार्रवाई सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं।

कमिश्नर का पद संभालने के बाद से FDA खाद्य सुरक्षा और अन्य नियमों का उल्लंघन करने वाले कई चर्चित प्रतिष्ठानों के खिलाफ अभियान चला रहा है। हाल ही में चलाए गए एक विशेष अभियान के तहत FDA ने राज्य भर में सैकड़ों होटलों, रेस्तरां और ढाबों एक्शन लिया था।

मुंढे के नेतृत्व में खाद्य सुरक्षा विभाग ने पिछले कुछ हफ्तों में Domino’s के चार और Pizza Hut के एक आउटलेट के फूड परमिट निलंबित किए हैं। मई में महाराष्ट्र के खाद्य सुरक्षा प्रमुख का पद संभालने के बाद से उनकी टीम 3,000 से ज्यादा छापे और निरीक्षण कर चुकी है।

इन कार्रवाइयों में बड़े ब्रांडों के साथ-साथ क्रिकेट क्लब, होटल, मशहूर रेस्टोरेंट, छोटे ढाबों और सड़क किनारे खाने की दुकानों को भी जांच के दायरे में रखा गया है। मुंढे का साफ संदेश है कि जो भी खाद्य कारोबारी नियमों का पालन नहीं करेगा, उसके खिलाफ नियामक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि यहां मामला सिर्फ नियमों का नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी से जुड़ा हुआ है।

जज ने पूछा- कोर्ट की कैंटीन की जांच हुई?

मुंढे की कार्रवाई तब और चर्चा में आ गई जब मुंबई की एक अदालत के जज ने सवाल उठाया कि क्या खाद्य विभाग निजी दुकानों के खिलाफ ही सख्ती कर रहा है। क्या अदालत की कैंटीनों की भी जांच की गई है? मुंढे की टीम ने इस सवाल का जवाब घंटों के भीतर कार्रवाई से दिया।

अधिकारियों ने अदालत परिसर की कैंटीनों का निरीक्षण किया। इस दौरान कुछ ऐसी कैंटीनों को बंद कराया जो कथित तौर पर बिना लाइसेंस चल रही थीं। इस घटना ने यह संदेश दिया कि विभाग बड़े ब्रांड और छोटे कारोबारियों के साथ-साथ सरकारी या संस्थागत परिसरों में चलने वाले खाद्य प्रतिष्ठानों को भी जांच के दायरे में रख रहा है।

हर दिन वायरल हो रही छापेमारी की तस्वीरें

मुंढे की कार्रवाई की सबसे खास बात उसका सार्वजनिक असर है। छापों के बाद खाद्य विभाग की ओर से जारी तस्वीरों में कई जगहों पर गंदी दीवारें, कॉकरोच, चूहे और एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री दिखाई दी। इन तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर लोगों को हैरान कर दिया। कई लोगों का कहना है कि वर्षों से खराब साफ-सफाई और खाद्य गुणवत्ता को यह कहकर सामान्य मान लिया गया था कि भारत में ऐसा होता है।

अब मुंढे की कार्रवाई से लोगों को उम्मीद दिखाई दे रही है कि खाद्य सुरक्षा के नियम वास्तव में लागू किए जा सकते हैं। कंज्यूमर कंसल्टिंग फर्म ‘The Knowledge Company’ के पार्टनर अंकुर बिसेन के मुताबिक, लोगों में लंबे समय से दबा हुआ गुस्सा है। ऐसे में मुंढे की कार्रवाई ने उसे आवाज दी है।

खाने में रंग से लेकर तेल बदलने तक, दुकानदारों में डर

मुंबई में न्यूज एजेंसी Reuters ने 25 स्ट्रीट वेंडर्स और रेस्टोरेंट का दौरा किया। रिपोर्ट के मुताबिक, मुंढे की कार्रवाई का असर छोटे कारोबारियों के काम करने के तरीके पर भी दिखाई दे रहा है। एक दुकानदार ने चीनी व्यंजनों में इस्तेमाल होने वाले खतरनाक लाल रंग की जगह प्राकृतिक लाल मिर्च का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। एक अन्य दुकानदार ने अपना तलने वाला तेल दिन में तीन बार बदलना शुरू कर दिया है। कर्मचारियों के लिए दस्ताने और सिर ढकने वाली कैप पहनना भी अनिवार्य किया गया है।

मुंबई के फेमस वड़ा पाव पर भी कार्रवाई

मुंबई का मशहूर वड़ा पाव भी मुंढे की खाद्य सुरक्षा मुहिम से बच नहीं पाया है। जून में खाद्य विभाग ने वड़ा पाव समेत खाने की चीजों को पैक करने के लिए अखबार के इस्तेमाल पर रोक लगा दी। मुंबई में लंबे समय से सड़क किनारे खाने की चीजों को अखबार में लपेटकर देने का चलन रहा है। अब कई जगहों पर साफ बटर पेपर का इस्तेमाल किया जा रहा है। 14 वर्षीय सुप्रिया वागले को अपने पसंदीदा वड़ा पाव की साफ बटर पेपर में पैकिंग पसंद आई। उसका कहना है कि इससे उसे राहत महसूस होती है और वह स्ट्रीट फूड को लेकर ज्यादा भरोसा कर पा रही है।

Domino’s और Pizza Hut के बाद McDonald’s पर भी एक्शन

मुंढे की टीम ने कई बड़े ब्रांडों के आउटलेट पर भी कार्रवाई की है। Domino’s के चार और Pizza Hut के एक आउटलेट के परमिट निलंबित किए गए हैं। इसके बाद एक McDonald’s आउटलेट पर भी कार्रवाई हुई। विभाग के मुताबिक, निरीक्षण के दौरान वहां जिंदा कीट यानी कॉकरोच और सड़ा हुआ खाना मिला।

हालांकि, Reuters के सवालों पर संबंधित तीनों कंपनियों की ओर से तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी गई। मुंढे की कार्रवाई केवल बड़े अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों तक सीमित नहीं रही। विभाग ने मुंबई के एक ब्रिटिश दौर के क्रिकेट क्लब, करीब 70 साल पुराने आइसक्रीम पार्लर और 110 साल पुराने पारसी डेयरी के खिलाफ भी कार्रवाई की है।

कारोबारी बोले- सुधार का समय तो दिया जाए

मुंढे की लोकप्रियता बढ़ने के साथ उनकी कार्यशैली पर सवाल भी उठ रहे हैं। कुछ कारोबारियों का कहना है कि उन्हें नियमों का पालन करने और कमियों को सुधारने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। कुछ प्रतिष्ठानों ने हाई कोर्ट का रुख करते हुए खाद्य विभाग पर कथित तौर पर जरूरत से ज्यादा सख्ती करने का आरोप लगाया है।

एक मामले में अदालत ने विभाग पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। अदालत के अनुसार, संबंधित खाने के प्रतिष्ठान ने अपनी कमियों में सुधार कर लिया था, इसके बावजूद उसका परमिट निलंबित रखा गया था। मुंढे ने कहा कि अदालत की टिप्पणियों को गंभीरता से लिया जाता है। जहां सुधार की गुंजाइश होती है, वहां विभाग सुधार करता है।

हर साल एक लाख से ज्यादा सैंपल की जांच

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2020 से हर साल भारत में खाद्य निरीक्षकों ने एक लाख से ज्यादा सैंपल की जांच की है। इनमें करीब 20 प्रतिशत नमूने असुरक्षित, घटिया या सही लेबलिंग के बिना पाए गए। पिछले तीन वर्षों में करीब 8,000 खाद्य कारोबार लाइसेंस रद्द किए गए हैं। ऐसे आंकड़ों के बीच मुंबई में मुंढे की कार्रवाई को लोग सिर्फ एक अधिकारी की सख्ती के रूप में नहीं। बल्कि खाद्य सुरक्षा को लेकर लंबे समय से चली आ रही समस्या पर बड़े अभियान के रूप में देख रहे हैं।

21 साल की नौकरी में कई बार हुआ तबादला

तुकाराम मुंढे का सख्त प्रशासनिक रवैया नया नहीं है। भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी के तौर पर करीब 21 साल के करियर में उनका कई बार तबादला हो चुका है। 2018 के एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि उनका लगभग हर साल तबादला हो जाता है।

उन्होंने रिश्वत लेने से इनकार करने और प्रशासनिक कार्रवाई से नहीं डरने की बात भी सार्वजनिक रूप से कही है। अब खाद्य सुरक्षा विभाग में उनकी शैली एक बार फिर सुर्खियों में है। लेकिन इस बार सोशल मीडिया पर वायरल होती छापेमारी की तस्वीरों के कारण।

सेलिब्रिटी जैसी लोकप्रियता, लेकिन मुंढे बोले- मैं सेलिब्रिटी नहीं

मुंढे की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले सप्ताह नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान लोग उनके साथ सेल्फी लेने के लिए पहुंच गए। लोग उनसे हाथ मिलाने की कोशिश करते नजर आए। एक फैंस ने तो यहां तक कह दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मुंढे को राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी देनी चाहिए। हालांकि, मुंढे खुद इस लोकप्रियता को सेलिब्रिटी का दर्जा देने से इनकार करते हैं।

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उन्होंने Reuters से बातचीत में कहा, “मुझे नहीं लगता कि मैं कोई सेलिब्रिटी हूं। मैं सिर्फ फूड सेफ्टी कमिश्नर हूं।” मुंढे का अभियान अब मुंबई से आगे भी चर्चा का विषय बन चुका है। उनके सामने चुनौती सिर्फ छापे मारना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि कार्रवाई के बाद खाद्य कारोबारियों में साफ-सफाई और सुरक्षा के नियमों का पालन लंबे समय तक बना रहे।

उत्तराखंड में 50 रोपवे परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार, सीएम धामी ने दिए प्राथमिकता के आधार पर प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश

उत्तराखंड में 50 रोपवे परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार, सीएम धामी ने दिए प्राथमिकता के आधार पर प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश

CM Pushkar Singh Dhami News: उत्तराखंड के मुख्‍यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में रोपवे परियोजनाओं को गति देने के उद्देश्य से अपने शासकीय आवास पर बैठक के दौरान अधिकारियों को पर्वतमाला परियोजना के अंतर्गत प्रस्तावित 50 रोपवे परियोजनाओं के संबंध में लंबित प्रक्रियाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण करने एवं सैद्धांतिक स्वीकृति प्राप्त परियोजनाओं में हो रही देरी के कारणों की समीक्षा कर नई समयसीमा निर्धारित करने के निर्देश दिए।

 

मुख्‍यमंत्री धामी ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि सोनप्रयाग-केदारनाथ, टनकपुर-पूर्णागिरि, काठगोदाम-नैनीताल, गोविंदघाट-हेमकुंड साहिब, कनकचौरी-कार्तिक स्वामी, देहरादून-मसूरी एवं जानकीचट्टी सहित प्रमुख रोपवे परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी प्राप्त की। बैठक में हरिद्वार-ऋषिकेश क्षेत्र की प्रस्तावित रोपवे परियोजनाओं, उत्तराखंड रोपवे डेवलपमेंट लिमिटेड की कार्यप्रगति एवं भावी परियोजनाओं की ग्राउंडिंग के संबंध में भी अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

 

अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक रोपवे परियोजना के साथ पर्याप्त पार्किंग सुविधा को समेकित योजना का हिस्सा बनाने तथा निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए लाइसेंसिंग एवं अनुमोदन प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी बनाया जाए। PPP मॉडल के माध्यम से अधिक से अधिक रोपवे परियोजनाओं को शीघ्र धरातल पर उतारने के लिए निवेशकों के साथ प्रभावी समन्वय एवं ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए।

Delhi Weather: दिल्ली-एनसीआर में मूसलाधार बारिश, कई जिलों के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट! यहां जानिए मौसम पर क्या है अपडेट

Delhi-NCR Heavy Rain: दिल्ली एनसीआर में सावन के आखिरी सोमवार को अचानक मौसम का मिजाज एकदम बदल गया और कई हिस्सों में मूसलाधार बारिश देखने को मिली। सुबह करीब 10:30 बजे ही काले बादलों की वजह से अंधेरा छा गया। इस भारी बारिश की वजह से पूरे एनसीआर में जगह जगह में जलभराव और ट्रैफिक को लेकर दिक्कतें दिखने लगी हैं। इस बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अलग-अलग इलाकों के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

दिल्ली-एनसीआर में बादलों का डेरा और अलर्ट

हमारी सहयोगी News 18 की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली, नई दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम में आज दिन भर रुक-रुक कर बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना जताई गई है। दिल्ली में आंशिक रूप से बादल छाए रहने के साथ-साथ अलग-अलग इलाकों में गरज-चमक के साथ अचानक बारिश के स्पेल देखने को मिल सकते हैं।

नोएडा और गुरुग्राम में भी पूरे एनसीआर में फैले मानसूनी पैटर्न की वजह से इसी तरह का मौसम बना रहेगा। बारिश के चलते विजिबिलिटी में कमी आ सकती है और सड़कों पर ट्रैफिक की स्पीड स्लो रह सकती है।

तेज हवाओं के साथ दिल्ली के तापमान का हाल

मौसम विभाग के अनुसार इस दौरान 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की उम्मीद है। अगर बीते 24 घंटों की बात करें तो सोमवार सुबह 8:30 बजे तक दिल्ली के विभिन्न सेंटरों पर हल्की बारिश दर्ज की गई थी। सफदरजंग में 3.4 मिमी, पालम में 10.6 मिमी और लोधी रोड पर 2.7 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।

उत्तराखंड, ओडिशा और तेलंगाना समेत कई राज्यों में भारी बारिश का अनुमान

मौसम विभाग ने सोमवार को सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड, ओडिशा और तेलंगाना के कुछ हिस्सों में भी भारी बारिश का पूर्वानुमान दिया है। खासकर ओडिशा में अत्यधिक तेज बारिश होने की संभावना जताई गई है, जबकि कई दूसरे क्षेत्रों में गरज के साथ आकाशीय बिजली चमकने और तेज हवाएं चलने का अलर्ट है। दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम के निवासियों को सलाह दी गई है कि वे मौसम में होने वाले अचानक बदलावों के लिए तैयार रहें और बारिश के दौरान यात्रा करते समय खास सावधानी बरतें।

Weather Update : 20 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, पहाड़ों में लैंडस्लाइड का खतरा; मछुआरों को समुद्र से दूर रहने की सलाह

Weather Update 24 August : उत्तर भारत में भले ही मानसून कुछ कमजोर पड़ गया है, लेकिन जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड मूसलाधार बारिश कहर बरपा रही है। मध्य, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में ज्यादातर नदियां उफान पर हैं और बाढ़ से हाल बेहाल है। मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में नया सिस्टम एक्टिव होने से देश के लगभग 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अगले 4-5 दिन भारी बारिश हो सकती है। ALSO READ: त्योहारों से पहले प्याज ने रुलाया! नासिक में 76% बढ़े दाम, कई राज्यों में कीमतें दोगुनी

 

जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों में बारिश और आंधी-तूफान के बीच लैंडस्लाइड का खतरा है। तेज हवाओं को देखते हुए ही पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे समुद्री इलाकों में मछुआरों को तूफान के दौरान समंदर से दूर रहने की सलाह दी गई है। 

 

क्या है यूपी का हाल?

मथुरा, वाराणसी समेत उत्तर प्रदेश के 19 जिलों में भारी बारिश से बाढ़ से हालात बने हुए हैं। कई स्थानों पर सड़कें जलमग्न हो गई और घरों में पानी घुस गया। मौसम विभाग ने नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, अयोध्या, वाराणसी, प्रयागराज, बिजनौर, महोबा, ललितपुर, आजमगढ़, गोरखपुर, झांसी, अलीगढ़, कानपुर, सोनभद्र, मथुरा, मोरादाबाद, बदायूं, इटावा और मेरठ में भारी बारिश का अलर्ट है। ALSO READ: Top News 24 August : 20 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, H1N1 पर ICMR का बड़ा अपडेट और मिस यूनिवर्स इंडिया बनीं केरल की केजिया लिज

 

MP के 22 राज्यों में रेड अलर्ट

मध्य प्रदेश के जबलपुर, चंबल और नर्मदापुरम संभाग में रविवार को भारी बारिश हुई। राजधानी भोपाल में भी रातभर बरसा पानी। राज्य के 22 जिलों में बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है। छत्तीसगढ़ में बिजली गिरने से एक महिला की मौत हो गई।

 

इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

आईएमडी के मुताबिक, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, गुजरात, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भारी बारिश हो सकती है।

 

हवा की चेतावनी

24 अगस्त तक उत्तर और उससे लगे पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी तथा पश्चिम बंगाल और उससे लगे ओडिशा व उत्तरी आंध्र प्रदेश के तटों के पास और दूर 40-50 किमी प्रति घंटे की गति से लेकर 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार तक तेज हवाएं चलने की बहुत संभावना है।

 

 

मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह

उत्तर और उससे लगे पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी तथा पश्चिम बंगाल, और उससे लगे ओडिशा व उत्तरी आंध्र प्रदेश के तटों के पास और दूर समुद्र की स्थिति के 'अशांत से बहुत अशांत' रहने की पूरी संभावना है। मुछआरों को सलाह दी जाती है कि वे 24 अगस्त तक उत्तर और उससे लगे पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी, तथा पश्चिम बंगाल-ओडिशा और उत्तरी आंध्र प्रदेश के तटों के पास और समुद्र में न जाएं।