योगी ने बुलंदशहर में दिवंगत विधायक के परिजनों से की मुलाकात

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को शिकारपुर में दिवंगत विधायक एवं पूर्व राज्यमंत्री अनिल शर्मा के निधन पर उनके परिजनों से मुलाकात कर शोक संवेदना व्यक्त की। सूचना अधिकारी चांद मियां ने बतया कि उन्होंने श्री अनिल शर्मा के पुत्र कुश के सर पर हाथ रखते हुए कहा कि वह पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता के रूप में आगे बढ़ कर उनके अद्भुत एक कार्य को पूरा करें

योगी करीब पौने तीन बजे ग्राम रानीऊ स्थित आवंतिका फार्म हाउस पर हेलीकॉप्टर द्वारा पहुंचे और दिवंगत विधायक के चित्र पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने शोकाकुल परिजनों को सांत्वना दी और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए अपनी संवेदना व्यक्त की।

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मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। फार्म हाउस के निकट हेलीकॉप्टर उतारने के लिए हेलीपैड बनाया गया था। कार्यक्रम के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा तथा बिना पास किसी को परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। मुख्य द्वार पर प्रत्येक व्यक्ति की जांच की गई।

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शेयर बाजारों में लगातार दूसरी गिरावट, सेंसेक्स 778 अंक लुढ़का

Stock Market

विदेशों से मिले नकारात्मक संकेतों के बीच घरेलू शेयर बाजारों में मंगलवार को लगातार दूसरे दिन गिरावट रही और बीएसई का सेंसेक्स 778 अंक नीचे बंद हुआ।

सेंसेक्स करीब 588 अंक ऊपर 75,369.63 अंक पर खुला और एक समय 655 अंक चढ़ गया था। हालांकि कुछ ही देर बाद बाजार में बिकवाली शुरू हो गई और सेंसेक्स 73,994 अंक तक टूट गया। इस प्रकार इसमें 1,375 अंकों का उतार-चढ़ाव देखा गया। अंत में सेंसेक्स 777.94 अंक (1.04 प्रतिशत) नीचे 74,003.82 अंक पर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक भी कारोबार की समाप्ति पर 279.50 अंक यानी 1.19 प्रतिशत नीचे 23,118.60 अंक पर रहा।

बाजार में चौतरफा बिकवाली के बीच आईटी सेक्टर में लिवाली रही। निफ्टी आईटी सूचकांक 2.19 प्रतिशत ऊपर रहा। अन्य सभी सेक्टरों में बिकवाली का जोर रहा। रियल्टी समूह का सूचकांक 4.04 प्रतिशत, रसायन समूह का 3.42, धातु का 2.54 टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद का 2.41, मीडिया का 2.17, ऑटो का 2.01, वित्त का 1.83, बैंकिंग का 1.43, फार्मा का 1.30, तेल एवं गैस का 1.29 और स्वास्थ्य समूह का 1.17 प्रतिशत टूट गया। वृहत बाजार में मिडकैप-50 सूचकांक 2.08 फीसदी और स्मॉलकैप-100 सूचकांक 2.43 प्रतिशत नीचे बंद हुआ। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के दाम बढ़ने और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर बढ़ाने की आशंका में लगभग सभी प्रमुख एशियाई शेयर बाजार लाल निशान में रहे। यूरोपीय बाजार भी गिरावट में खुले।

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सेंसेक्स की कंपनियों में बीईएल का शेयर सबसे ज्यादा छह प्रतिशत, इंडिगो का चार प्रतिशत और टाइटन, बजाज फिनसर्व तथा अडानी पोर्ट्स के तीन-तीन प्रतिशत लुढ़क गए। महिंद्रा एंड महिंद्रा, भारतीय स्टेट बैंक, ट्रेंट, एशियन पेंट्स, बजाज फाइनेंस, इटरनल, अल्ट्राटेक सीमेंट, एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और पावरग्रिड के शेयर दो से तीन प्रतिशत नीचे बंद हुए। आईसीआईसीआई बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एलएंडटी और मारुति सुजुकी के शेयर एक से दो प्रतिशत तक गिरे। एनटीपीसी, आईटीसी और सन फार्मा के शेयर भी नुकसान में रहे।

सूचना एवं प्रौद्योगिकी कंपनी एचसीएल टेक्नोलॉजीज का शेयर करीब चार प्रतिशत और इंफोसिस का साढ़े तीन प्रतिशत से ज्यादा चढ़ा। टेक महिंद्रा और टीसीएस के शेयर दो प्रतिशत से ज्यादा मजबूत हुए। एचडीएफसी बैंक का शेयर सवा फीसदी मजबूत हुआ। हिंदुस्तान यूनीलिवर और टाटा स्टील के शेयर भी हरे निशान में रहे।

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डिजिटल भुगतान पर मोदी सरकार का सबसे बड़ा यू टर्न: राहुल

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के संसद में यूपीआई भुगतान पर कोई टैक्स या शुल्क नहीं लगाने के आश्वासन के बावजूद मोदी सरकार ने दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई कारोबारी लेनदेन पर शुल्क लगाने का रास्ता खोल दिया है।

श्री खरगे ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर लिखा ‘नो फीस ऑन यूपीआई’ को बदलकर अब ‘दो हजार रुपये तक के यूपीआई लेनदेन पर नो फीस’ कर दिया गया है। गगनचुंबी महंगाई से आम आदमी की जेब पहले ही खाली है और थोक महंगाई 10 प्रतिशत के करीब है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार जनता पर ‘डिजिटल पेमेंट्स टैक्स’ लगाकर उसकी बची-खुची बचत को भी तबाह करने की योजना बना रही है।

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कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि कई खबरों के मुताबिक पांच हजार रुपये के लेनदेन पर 25 रुपये और 10 हजार रुपये पर 50 रुपये तक की संभावित वसूली की जाएगी। उन्होंने सरकार से सवाल किया है कि ये खबरें क्या सही हैं।

श्री गांधी ने कहा कि अब दो हजार रुपये से ऊपर के मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर लगाया जा सकता है। इन लेनदेन की संख्या भले ही केवल पांच प्रतिशत हो लेकिन यूपीआई के कुल लेनदेन मूल्य का करीब 65 प्रतिशत इन्हीं में है।

उन्होंने कहा “सरकार कहती है कि ग्राहक से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा लेकिन दुकानदार पर लगने वाली फीस आखिर आएगी कहां से-कीमतों में जुड़कर ग्राहक की जेब से। अमेरिकी भुगतान कंपनियां लंबे समय से भारत की शून्य-एमडीआर नीति का विरोध करती रही हैं और अब मोदी सरकार ने ठीक उसी दिशा में नीति बदलने का रास्ता खोल दिया है।

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‘प्रेम कीटाणु’ का संगीत आज के दौर की प्लेलिस्ट जैसा: गौरव वर्मा

वीर पहाड़िया, आफिया सैयद और निखिल विजय अभिनीत फिल्म ‘प्रेम कीटाणु’ के संगीत को लेकर निर्माता गौरव वर्मा का कहना है कि फिल्म का पूरा एल्बम आज के दौर की प्लेलिस्ट जैसा है। फिल्म के अब तक तीन गाने ‘अंडी बंडी’, ‘कहो तोह’ और ‘तू मेरा रैय्यो’ रिलीज हो चुके हैं। ‘अंडी बंडी’ में दोस्तों की मस्ती और हॉस्टल लाइफ, ‘कहो तोह’ में रोमांस, जबकि ‘तू मेरा रैय्यो’ में प्यार के सुकून भरे एहसास को पेश किया गया है।

‘अंडी बंडी’ को शशि सुमन और बृजेश शांडिल्य ने गाया है। शशि सुमन के संगीत से सजे इस गीत में लिटिल भाटिया और मेज़म्यूजिक का रैप भी है। ‘कहो तोह’ को अरमान मलिक ने आवाज दी है और इसे अंकुर आर. पाठक ने संगीतबद्ध किया है। इसमें अल्तमश फरीदी की कव्वाली शैली की आवाज सुनाई देती है। ‘तू मेरा रैय्यो’ को सचेत-परंपरा ने गाया और संगीतबद्ध किया है, जबकि इसके बोल कुणाल वर्मा ने लिखे हैं।

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गौरव वर्मा ने कहा, “प्रेम कीटाणु के साथ हमारा मकसद था कि संगीत फिल्म के किरदारों की अलग-अलग भावनाओं को सामने लाए। हम चाहते थे कि यह आज के दौर की ऐसी प्लेलिस्ट लगे, जिसमें दोस्तों की मस्ती, किसी पर क्रश होने की मासूमियत, प्यार में पड़ने का उत्साह और उसके बाद आने वाली हर तरह की भावनाएं शामिल हों।”

उन्होंने कहा कि हर कंपोजर और गायक ने संगीत में अपना अलग रंग जोड़ा है। दर्शकों का अलग-अलग गानों से जुड़ना उनके लिए खुशी की बात है। उन्होंने उम्मीद जतायी कि फिल्म का संगीत पर्दे से बाहर निकलकर लोगों की जिंदगी का हिस्सा बनेगा।

फिल्म के एल्बम में कुल सात गाने हैं। ‘प्रेम कीटाणु’ दो अक्टूबर को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

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मुंबई से दूर लेकिन गणपति बप्पा के करीब कार्तिक आर्यन

बॉलीवुड अभिनेता कार्तिक आर्यन इस वर्ष गणेश चतुर्थी के मौके पर मुंबई से दूर हैं, लेकिन गणपति बप्पा के प्रति उनकी आस्था उनके साथ है। कार्तिक इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘कैप्टन इंडिया’ की शूटिंग के सिलसिले में यूके में हैं।

काम की व्यस्तता के कारण कार्तिक इस बार मुंबई में गणपति उत्सव में शामिल नहीं हो सके। उन्होंने गणपति की मूर्ति के साथ अपनी तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा करते हुए लिखा, “घर से मीलों दूर हूं, लेकिन बप्पा से कभी दूर नहीं। गणपति बप्पा मोरया।

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कार्तिक ने यूके में गणेश चतुर्थी मनाते हुए कुछ तस्वीरें भी साझा की हैं। इन तस्वीरों में पारंपरिक मोदक के साथ छोले-भटूरे भी नजर आ रहे हैं। विदेश में रहकर भी देसी पकवानों के साथ त्योहार मनाते कार्तिक की तस्वीरें प्रशंसकों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं।

कार्तिक के इस संदेश से साफ है कि काम के सिलसिले में भले ही वह मुंबई और अपने घर से दूर हैं, लेकिन गणपति बप्पा के प्रति उनकी श्रद्धा और जुड़ाव कायम है।

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मुझे नहीं पता कि मैं एशेज़ 2027 में खेलूंगा या नहीं: स्टीव स्मिथ

स्टीव स्मिथ ने अगले एशेज़ कैंपेन के लिए कोई पक्का वादा नहीं किया है; यह अनुभवी बल्लेबाज़ एक बार में एक सीरीज़ के हिसाब से अपने टेस्ट भविष्य के बारे में सोच रहा है। 37 साल के स्मिथ ने अभी यह तय नहीं किया है कि वह अगले समर में ऑस्ट्रेलिया के इंग्लैंड दौरे का हिस्सा होंगे या नहीं, जबकि इंग्लैंड में पहली बार एशेज़ सीरीज़ जीतने का मौका भी है।

स्मिथ ने ‘द टेलीग्राफ’ को दिए एक इंटरव्यू में कहा, “मुझे अभी नहीं पता कि मैं वहां रहूंगा या नहीं। मैं एक बार में एक सीरीज़ के हिसाब से सोच रहा हूं, जैसा कि मैं कुछ समय से कर रहा हूं, और वह अभी मेरे लिए काफी दूर की बात है। मैं वहां जीतना चाहूंगा या वहां जीत हासिल करना पसंद करूंगा, लेकिन देखते हैं कि क्या ऐसा हो पाता है।

ऑस्ट्रेलिया कई मुश्किल टेस्ट सीरीज़ की तैयारी कर रहा है, जिसमें दक्षिण अफ़्रीका, भारत और इंग्लैंड में होने वाली अवे सीरीज़ शामिल हैं। फ़िलहाल स्मिथ का ध्यान वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के मौजूदा चैंपियन के ख़िलाफ़ ऑस्ट्रेलिया की आने वाली सीरीज़ पर है। तीन टेस्ट मैचों की यह सीरीज़ उन्हें 2018 के बॉल-टैम्परिंग स्कैंडल के बाद पहली बार टेस्ट क्रिकेट के लिए उस देश में वापस ले जाएगी, हालांकि स्मिथ उस घटना को पीछे छोड़ना चाहते हैं।

स्मिथ ने कहा, “मेरे लिए, यह बस एक और सीरीज़ है। वह सब बहुत पहले हुआ था, और हमने तब से काफ़ी क्रिकेट खेला है और वनडे मैचों के लिए दक्षिण अफ़्रीका वापस भी गए हैं। वे इस समय एक अच्छी टीम हैं, ज़ाहिर है कि उन्होंने हमें वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फ़ाइनल में हराया था। उनके पास बहुत अच्छा पेस अटैक भी है, इसलिए यह एक ज़बरदस्त सीरीज़ होनी चाहिए।

हालांकि उनका टेस्ट भविष्य अभी तय नहीं है, लेकिन स्मिथ का खेल से पूरी तरह दूर होने का कोई इरादा नहीं है। वह टी 20 में मौके तलाश रहे हैं, और 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक में ऑस्ट्रेलिया का प्रतिनिधित्व करना उनकी अक्सर बताई जाने वाली महत्वाकांक्षाओं में से एक है। स्मिथ ने कहा, “अभी तो शायद ओलंपिक ही है जिसका मैं हिस्सा बनना चाहता हूँ।”

“एम्स्टर्डम (यूरोपियन टी 20 प्रीमियर लीग में) के साथ खेलने की एक वजह यह भी थी कि मैं ज़्यादा से ज़्यादा टी 20 क्रिकेट खेलना जारी रख सकूँ।

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स्मिथ ने अपने खेलने के करियर के लिए कोई समय-सीमा तय नहीं की है और कहा है कि खेल का मज़ा लेना उनके लिए सबसे ज़रूरी है। “मुझे लगता है कि मैं अभी कुछ समय और T20 क्रिकेट खेल सकता हूँ। जब मैं खेलना छोड़ूँगा तो आगे क्या करूँगा? मुझे पक्का नहीं पता, लेकिन हाँ, उम्मीद है कि अभी खेलने के लिए थोड़ा समय और बचा है। मैंने इस खेल में बहुत कुछ हासिल किया है। पिछले 15 साल या उसके आस-पास का सफ़र बहुत शानदार रहा है। मैंने बहुत मज़ा किया है। मैं अभी भी इसका मज़ा ले रहा हूँ, इसलिए मैंने कोई आखिरी तारीख तय नहीं की है, देखते हैं आगे क्या होता है। लेकिन यह सफ़र अच्छा रहा है।

मॉडर्न टेस्ट कंडीशंस, खासकर सीमर्स को मिलने वाली मूवमेंट जैसी चुनौतियों के बावजूद स्मिथ को अपनी बैटिंग पर भरोसा है। पिछले दो सालों में उनका औसत 49.4 रहा है और उन्होंने अपने टेस्ट शतकों की संख्या 37 तक पहुँचाई है। स्मिथ ने कहा, “मुझे लगता है कि मैं बहुत अच्छी बैटिंग कर रहा हूँ। मैंने मुश्किल पिचों पर खेलने और रन बनाने के अलग-अलग तरीके ढूँढ लिए हैं। इसलिए मैं टीम के लिए जितना हो सके योगदान देने, रन बनाने, कैच लेने और ज़रूरत पड़ने पर लीडरशिप में मदद करने की कोशिश कर रहा हूँ। पिछले कुछ साल अच्छे और मज़ेदार रहे हैं।

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सुषमा वर्मा टीकेआर के साथ जुड़ीं, यास्तिका भाटिया की लेंगी जगह

भारत की विकेटकीपर-बल्लेबाज़ सुषमा वर्मा ने 2026 विमेंस कैरेबियन प्रीमियर लीग के नॉकआउट से पहले ट्रिनबागो नाइट राइडर्स (टीकेआर) में यास्तिका भाटिया की जगह ली है।

इस टूर्नामेंट की दूसरी सबसे ज़्यादा रन बनाने वाली बल्लेबाज़ यास्तिका, ऑस्ट्रेलिया ए के ख़िलाफ़ अपनी इंडिया ए की ज़िम्मेदारी के लिए समय से पहले रवाना हो रही हैं। वह 20 सितंबर से शुरू होने वाली तीन मैचों की वनडे सीरीज़ में कप्तान हैं। इसके बाद चार दिवसीय मैच भी खेला जाएगा।

सुषमा के लिए यह शीर्ष स्तर के क्रिकेट में वापसी का मौक़ा है। वह आख़िरी बार 2023 में दक्षिण अफ़्रीका में हुई टी 20 ट्राई-सीरीज़ के दौरान राष्ट्रीय टीम का हिस्सा थीं, हालांकि उन्हें खेलने का मौक़ा नहीं मिला था। अब तक उनका एकमात्र फ़्रैंचाइज़ी अनुभव 2023 डब्ल्यूपीएल का रहा है, जब वह गुजरात जायंट्स के लिए खेली थीं। उन्होंने पांच पारियों में 79.24 के स्ट्राइक रेट से 42 रन बनाए थे।

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हाल के दिनों में सुषमा ने अपनी हिटिंग पर काफ़ी काम किया है। 2025-26 के घरेलू वनडे टूर्नामेंट में उन्होंने छह पारियों में नौ छक्के लगाए, जो टूर्नामेंट में किसी बल्लेबाज़ द्वारा लगाए गए तीसरे सबसे ज़्यादा छक्के थे।

सुषमा ने क्रिकइंफो से कहा, “डब्ल्यूसीपीएल का हिस्सा बनना मेरे लिए ख़ास है और इस मौक़े के लिए मैं नाइट राइडर्स के सेट-अप की शुक्रगुज़ार हूं। मुझे लगता है कि यह मेरे टी20 खेल पर की गई मेहनत का फल है।

सुषमा डब्ल्यूसीपीएल 2026 में खेलने वाली छठी भारतीय होंगी। उनके और यास्तिका के अलावा शिखा पांडे भी टीकेआर के साथ हैं, जबकि किरण नवगिरे, पूजा वस्त्रकर और हरलीन देओल बारबाडोस ट्राइडेंट्स के लिए खेल रही हैं।

टीकेआर ने चार टीमों वाले लीग चरण में शीर्ष पर रहने के बाद सीधे फ़ाइनल में जगह पक्की कर ली है। दूसरी फ़ाइनलिस्ट टीम का फ़ैसला ट्राइडेंट्स और गुयाना ऐमेजॉन वॉरियर्स के बीच होने वाले प्लेऑफ़ से होगा। ख़िताबी मुक़ाबला 17 सितंबर को ब्रिज़टाउन में खेला जाएगा।

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BRICS Summit 2026: ‘कमजोर कड़ी’ से ग्रोथ इंजन तक: 14 साल में कैसे बदली भारत की BRICS कहानी

BRICS Summit 2026: जब भारत ने 2012 में नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी, तब देश की अर्थव्यवस्था आज के मुकाबले काफी अलग स्थिति में थी। उस समय BRICS समूह भी काफी नया था। इसकी शुरुआत BRIC के रूप में हुई थी, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत और चीन शामिल थे। साल 2010 में दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने के बाद इसका नाम BRICS हो गया।

गौरतलब है कि भारत पहले से ही इस ऐसे समूह का हिस्सा था, जिसे 21वीं सदी की उभरती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का प्रतिनिधि माना जाता था। लेकिन उस समय यह सवाल भी उठ रहे थे कि क्या भारत वास्तव में इस उम्मीद पर खरा उतर पाएगा?

14 साल बाद, जब भारत 2026 में एक बार फिर BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, तो स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है।

अब भारत ऐसा देश नहीं है, जो BRICS में अपनी जगह साबित करने की कोशिश कर रहा हो। बल्कि अब भारत को इस समूह की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक और BRICS की आर्थिक और रणनीतिक ताकत का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है।

2012 और 2026 के इन दोनों मौकों के बीच का अंतर यह समझने का अच्छा तरीका है कि इन 14 सालों में भारत कितना बदल गया है।

जब भारत BRICS की ‘कमजोर कड़ी’ था

2012 में सवाल यह नहीं था कि क्या भारत BRICS को आकार दे सकता है, बल्कि यह था कि क्या वह इस समूह का सबसे कमजोर सदस्य बनता जा रहा है।

क्या भारत सच में BRICS में अपनी जगह का हकदार था? क्या BRIC में “I” (इंडिया) की जगह इंडोनेशिया को ले लेना चाहिए था? क्या भारत इस समूह की सबसे कमजोर कड़ी था? ये सवाल उस समय के आर्थिक माहौल को दिखाते थे।

भारत की विकास दर तेजी से धीमी हो गई थी, महंगाई ज्यादा थी, रुपया दबाव में था और आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने की सरकार की क्षमता को लेकर चिंताएं बढ़ रही थीं।

जून 2012 में, Standard & Poor’s (S&P) ने चेतावनी दी थी कि भारत अपनी इन्वेस्टमेंट-ग्रेड सॉवरेन रेटिंग खोने वाला पहला BRIC देश बन सकता है। इसके पीछे धीमी विकास दर और पॉलिसी बनाने में आ रही राजनीतिक रुकावटों का हवाला दिया गया था। उस समय भारत की रेटिंग BBB- थी, जो स्पेक्युलेटिव ग्रेड से बस एक पायदान ऊपर थी।

यह चेतावनी उस समय भारत की आर्थिक स्थिति को लेकर फैली निराशा का एक अहम संकेत बन गई थी।

Goldman Sachs के अर्थशास्त्री Jim O’Neill, जिन्होंने BRIC (ब्रिक) शब्द गढ़ा था, भारत के वैल्यूएशन को लेकर भी बहुत उत्साहित नहीं थे। अगस्त 2012 के एक इंटरव्यू में, उन्होंने वैल्यूएशन के मामले में भारत को चार BRIC अर्थव्यवस्थाओं में सबसे कम आकर्षक बताया था; उन्होंने चीन को पहले स्थान पर रखा, जिसके बाद ब्राज़ील, रूस और फिर भारत का नंबर था।

उस समय भारत की व्यापक आर्थिक स्थिति भी उतनी ही मुश्किल थी। 2012-13 में विकास दर 5 प्रतिशत से नीचे गिर गई थी, जबकि महंगाई का स्तर ऊंचा बना रहा। भारत के बारे में धारणा बदलने लगी थी; अब उसे एक उभरती हुई आर्थिक महाशक्ति के बजाय ऐसी अर्थव्यवस्था के तौर पर देखा जाने लगा था जो पॉलिसी पैरालिसिस (नीतिगत गतिरोध), महंगाई और धीमी होती विकास दर से जूझ रही थी।

दूसरे शब्दों में कहें तो, भारत BRICS का हिस्सा तो था, लेकिन इस बात पर संदेह था कि क्या वह दूसरी उभरती हुई ताकतों के साथ कदम मिलाकर चल पाएगा।

2026 की ओर आगे बढ़ते हुए

आज स्थिति काफी अलग है।

भारत 2026 के ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में एक ऐसी अर्थव्यवस्था के साथ शामिल हो रहा है जिसने प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज विकास दर बनाए रखी है।

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में वास्तविक जीडीपी (GDP) में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई। सरकार ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद अर्थव्यवस्था ने अपनी विकास की गति बनाए रखी है।

यह 2010 के दशक की शुरुआत में मंदी के दौरान भारत की 5 प्रतिशत से कम विकास दर के मुकाबले एक बड़ा अंतर है।

बता दें कि यह बदलाव सिर्फ एक तिमाही के जीडीपी आंकड़ों तक सीमित नहीं है। भारत के आर्थिक आधार और वैश्विक संस्थानों द्वारा उनके मूल्यांकन के तरीके में भी बदलाव आया है।

‘फॉलन एंजेल’ (Fallen Angel) के डर से ‘A-‘ रेटिंग तक का सफर

शायद इस बदलाव को समझने का एक सबसे साफ उदाहरण भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग है।

2012 में S&P की चेतावनी ने चिंता बढ़ा दी थी कि भारत इन्वेस्टमेंट ग्रेड रेटिंग खोने वाला पहला BRIC देश बन सकता है। इससे भारत की अर्थव्यवस्था की कमजोरियों को लेकर सवाल उठने लगे थे।

लेकिन सितंबर 2026 में Japan Credit Rating Agency (JCR) ने भारत की सॉवरेन रेटिंग को एक पायदान बढ़ाकर BBB+ से A- कर दिया। रेटिंग के साथ Stable Outlook भी दिया गया। JCR ने इसकी वजह भारत की मजबूत और मुश्किल परिस्थितियों में भी टिके रहने वाली आर्थिक विकास दर, वित्तीय स्थिति में सुधार, मजबूत बैंकिंग सिस्टम और बेहतर बाहरी आर्थिक स्थिति को बताया।

JCR ने भारत की लगातार तेज आर्थिक विकास दर, मजबूत निजी खपत और सरकारी निवेश को भी अहम कारण माना। इसके अलावा GST और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे नीतिगत कदमों का भी उल्लेख किया गया।

एजेंसी ने सरकारी खर्च की गुणवत्ता में सुधार की भी तारीफ की। खास तौर पर पूंजीगत खर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते निवेश को भारत की आर्थिक मजबूती का अहम हिस्सा बताया गया।

इस रेटिंग में बढ़ोतरी की अहमियत सिर्फ रेटिंग बढ़ने तक सीमित नहीं है। असली बदलाव यह है कि 2012 के मुकाबले आज भारत की अर्थव्यवस्था और उसके जोखिम को लेकर चर्चा पूरी तरह बदल गई है।

2012 में चिंता इस बात की थी कि क्या भारत अपनी इन्वेस्टमेंट ग्रेड रेटिंग बचा पाएगा? वहीं आज चर्चा इस बात पर हो रही है कि क्या भारत की तेज आर्थिक विकास दर उसे आने वाले समय में दुनिया की एक बहुत बड़ी आर्थिक ताकत बनने में मदद कर सकती है।

BRICS में बदलाव आया है और इसमें भारत की जगह भी बदली है

जिस ग्रुप में भारत BRIC के तौर पर शामिल हुआ था, उसमें भी जबरदस्त बदलाव आया है।

BRICS का दायरा इसके शुरुआती चार सदस्यों से कहीं ज्यादा बढ़ गया है। 2010 में दक्षिण अफ्रीका इसमें शामिल हुआ और बाद में हुए विस्तार में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, UAE और इंडोनेशिया जैसे देश भी इसमें जुड़ गए।

अब यह ग्रुप दुनिया की आबादी और अर्थव्यवस्था के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। साथ ही, यह सिर्फ एक आर्थिक नाम से बदलकर उभरते और विकासशील देशों के लिए एक व्यापक राजनीतिक और कूटनीतिक मंच बन गया है।

इस विस्तार ने BRICS में भारत की स्थिति को और भी अहम बना दिया है।

ध्यान दें कि भारत BRICS की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था नहीं है। चीन की अर्थव्यवस्था भारत से काफी बड़ी है, लेकिन आर्थिक विकास, बड़ी आबादी, विशाल बाजार, तकनीकी क्षमता और दूसरे देशों के साथ मजबूत कूटनीतिक संबंधों का मेल भारत को BRICS में काफी महत्वपूर्ण बनाता है।

वहीं, 2012 के BRICS की तुलना में आज स्थिति अलग है। तब भारत को मुख्य रूप से BRICS के दूसरे देशों से तुलना करके देखा जाता था। लेकिन अब भारत सिर्फ समूह के दूसरे सदस्यों के साथ अपनी स्थिति की तुलना नहीं कर रहा है, बल्कि यह भी कोशिश कर रहा है कि बदला हुआ BRICS आगे किस दिशा में जाए और उसका स्वरूप कैसा हो।

आर्थिक कहानी से रणनीतिक अहमियत तक

BRICS में भारत का उभार सिर्फ GDP तक सीमित नहीं है। यह भू-राजनीतिक मतभेदों के बावजूद दूसरे देशों से संबंध बनाए रखने की भारत की क्षमता के बारे में भी है।

जानकारी के मुताबिक, 2026 का यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका-चीन की प्रतिद्वंद्विता, रूस-यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया का संकट और व्यापक भू-राजनीतिक बंटवारा अंतरराष्ट्रीय संबंधों को नए सिरे से आकार दे रहे हैं।

रणनीतिक स्वायत्तता (strategic autonomy) के प्रति भारत की लंबे समय से चली आ रही प्राथमिकता और उन देशों के साथ एक ही समय में जुड़ने की उसकी क्षमता—जिनके हित हमेशा एक जैसे नहीं होते—इस माहौल में और भी अहम हो गई है।

चैथम हाउस ने रणनीतिक स्वायत्तता को भारत की विदेश नीति की एक पुरानी विशेषता बताया है। साथ ही, यह भी कहा है कि भारत का यह नजरिया नई दिल्ली को उन देशों के साथ संबंध बनाए रखने में मदद करता है जिनके साथ पश्चिम के संबंध मुश्किल भरे रहे हैं। संस्थान ने अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा से तेजी से बदलती दुनिया में ‘मध्यम शक्तियों’ (middle powers) के लिए ‘रणनीतिक हेजिंग’ (strategic hedging) के बढ़ते महत्व पर भी जोर दिया है।

बता दें कि भारत के लिए, इसका मतलब है कि ब्रिक्स सिर्फ एक आर्थिक ग्रुप नहीं है। यह उन कई मंचों में से एक है जिनके जरिए नई दिल्ली किसी एक बड़े पावर ब्लॉक के साथ औपचारिक रूप से जुड़े बिना अपने हितों को आगे बढ़ा सकती है।

2026 के समिट का महत्व भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और अन्य बड़े नेता नई दिल्ली में इकट्ठा हो रहे हैं क्योंकि भारत इस ग्रुप की मेजबानी कर रहा है। भू-राजनीतिक बंटवारे के दौर में इन नेताओं का भारत आना ही नई दिल्ली की बढ़ती ‘इकट्ठा करने की क्षमता’ (convening power) को दिखाता है।

इन देशों के साथ भारत के रिश्ते जटिल हैं और अक्सर उनमें काफी मतभेद भी रहे हैं। चीन भारत का रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी बना हुआ है; रूस भारत के रक्षा और ऊर्जा हितों से गहराई से जुड़ा है; ईरान भारत की कनेक्टिविटी और पश्चिम एशिया से जुड़ी रणनीतियों के लिए अहम है। फिर भी, भारत इन सभी के साथ एक ही कूटनीतिक ढांचे के भीतर काम करने में सक्षम है।

भारत की आर्थिक कहानी में गुणात्मक बदलाव भी आया है।

पहले भारत की BRIC वाली छवि मुख्य रूप से उसके सर्विस सेक्टर, IT इंडस्ट्री, बढ़ते कंज्यूमर मार्केट और डेमोग्राफिक क्षमता से जुड़ी थी। आज, मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और उभरती हुई टेक्नोलॉजी देश की आर्थिक कहानी का बहुत बड़ा हिस्सा बन गई हैं।

UPI और आधार जैसे प्लेटफॉर्म के विकास ने भारत को डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का एक खास मॉडल दिया है, जबकि घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने वाली पहलों का मकसद आयात पर निर्भरता कम करना और भारत को मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक वैकल्पिक जगह के तौर पर स्थापित करना रहा है।

JCR ने खास तौर पर भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और GST का जिक्र उन नीतियों के तौर पर किया है जिन्होंने देश की आर्थिक नींव को मजबूत किया है।

आसान शब्दों में कहें तो, 2012 में जब भारत BRICS समिट में शामिल हुआ, तो सवाल यह था कि क्या वह दूसरी उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के साथ कदम से कदम मिलाकर चल पाएगा। 2026 में, भारत एक बड़े हो चुके BRICS की मेजबानी कर रहा है। ऐसे समय में जब वह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, उसे JCR से ‘A-‘ सॉवरेन रेटिंग मिली है, और वह उस ग्रुप के एजेंडे को आकार देने की कोशिश कर रहा है जिसका आर्थिक और भू-राजनीतिक महत्व काफी बढ़ गया है।

इस अंतर ने सवाल को ही बदल दिया है। 2012 में बहस यह थी कि—क्या भारत BRICS में शामिल होने के लायक है? 2026 में, ज्यादा अहम सवाल यह है कि: भारत BRICS के भविष्य को किस हद तक आकार दे सकता है?

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Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : GIFT Nifty के संकेतों को देखते हुए लगता है कि 11 सितंबर को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स में गैप-डाउन शुरुआत हो सकती है। GIFT Nifty शुरुआती कारोबार में 23,356.50 के आसपास कमजोर के साथ ट्रेड कर रहा था। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

10 सितंबर को भारतीय इक्विटी इंडेक्स में तीन दिन से जारी गिरावट थमती दिखी और सीमित दायरे में कारोबार के बीच सेंसेक्स-निफ्टी बढ़त के साथ बंद हुए। मीडिया और फाइनेंशियल शेयरों में खरीदारी के चलते निफ्टी 23,400 के स्तर के ऊपर बंद होने में कामयाब रहा। धीमी शुरुआत के बाद,मिडिल ईस्ट में जारी जियोपॉलिटिकल तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के चलते निवेशकों के सतर्क रहने से बाज़ार पूरे सेशन के दौरान सीमित दायरे में ही रहा। अमेरिका के महंगाई के आंकड़ों से पहले बाज़ार का मूड भी सुस्त रहा, हालांकि आखिरी घंटे में हुई खरीदारी से दिन भर के सारे नुकसान भरपाई हो गई और बाज़ार बढ़त के साथ बंद हुआ। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 138.36 अंक या 0.19 प्रतिशत बढ़कर 74,902.59 पर और निफ्टी 46.30 अंक या 0.20 प्रतिशत बढ़कर 23,477.80 पर बंद हुआ।

GIFT निफ्टी

शुरुआती कारोबार में GIFT निफ्टी लगभग 23,356.50 के निचले स्तर पर ट्रेड कर रहा था,जो घरेलू इक्विटी मार्केट में कमजोर शुरुआत का संकेत है।

एशियाई इक्विटी

तेल की कीमतों में उछाल के कारण अमेरिकी बाजारों में बिकवाली आई है। अधिकांस एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट आई है। वहीं,महंगाई के ताजा आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व द्वारा जल्द ही ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदों को और मजबूत कर दिया है।

अमेरिकी बाजार

गुरुवार को US के शेयर बाज़ार गिरावट के साथ बंद हुए। S&P 500 में 0.58% की गिरावट आई और यह 7,591.75 पर बंद हुआ। नैस्डैक (Nasdaq) 0.65% गिरकर 26,081.73 पर आ गया,जबकि डाओ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.60% गिरकर 52,064.10 पॉइंट्स पर बंद हुआ।

डॉलर इंडेक्स सपाट

शुक्रवार को एशियाई ट्रेडिंग की शुरुआत में डॉलर पिछले हफ़्ते के अपने सबसे ऊंचे स्तर के आस-पास बना रहा और येन लगातार दूसरे दिन नीचे आया। मिडिल ईस्ट में एनर्जी सप्लाई में रुकावट की नई आशंकाओं के कारण बॉन्ड यील्ड और तेल की कीमतें बढ़ गईं। फिलहाल US डॉलर इंडेक्स 99.04 पर दिख रहा है।

US बॉन्ड यील्ड

शुक्रवार को ग्लोबल बॉन्ड यील्ड नए हाई पर पहुंच गए है और शेयर बाजार गिर गए हैं। तेल की बढ़ती कीमतों ने महंगाई का खतरा बढ़ा दिया है। इससे दुनिया भर के सेंट्रल बैंकों की ओर से पॉलिसी को और सख्त किए जाने की आशंका के चलते निवेशक घबराए दिख रहे हैं।

अमेरिका में 10 ईयर ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5% के लेवल के करीब पहुच गई है। 30-साल के यील्ड 2007 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर हैं और 2-साल के यील्ड 4.5% से ऊपर चले गए हैं। बाज़ार में इस बात की उम्मीदें बढ़ गई हैं कि महंगाई को काबू में करने के लिए US फ़ेडरल रिज़र्व को इस महीने ब्याज दरें बढ़ानी पड़ेंगी। अभी इसकी संभावना 72% मानी जा रही है। इसी के चलते ट्रेजरी यील्ड में बढ़त हुई है।

एशियन करेंसी

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एशियाई करेंसीज में मिला-जुला कारोबार दिख रहा है। दक्षिण कोरियाई वॉन में सबसे ज़्यादा 0.32% की बढ़त हुई है। इसके बाद सिंगापुर डॉलर और जापानी येन में 0.06% की मज़बूती आई है। दूसरी ओर फिलीपीन पेसो में 0.34% की गिरावट आई है। जबकि ताइवान डॉलर, मलेशियाई रिंगित और इंडोनेशियाई रुपिया में 0.24%, 0.22% और 0.21% की गिरावट दर्ज की गई है। चीनी रेनमिनबी और थाई बहत में भी मामूली गिरावट आई है।

क्रूड में उबाल, ब्रेंट $108/bbl के पार

कच्चे तेल और बॉन्ड यील्ड का आज भी रेड अलर्ट है। वेस्ट एशिया टेंशन से क्रूड में जुलाई के बाद सबसे बड़ा उछाल आया है। यह 6 फीसदी चढ़कर 108 डॉलर के पार निकल गया है। गिफ्ट निफ्टी करीब 125 प्वाइंट फिसला है। एशिया में भी गिरावट है। अमेरिकी बाजारों में भी लगातार चौथे दिन गिरावट रही। 4 दिनों में डाओ 1600 अंक लुढ़का है।

सोना-चांदी में तेज गिरावट

अमेरिका में इंफ्लेशन की भी टेंशन है। अगस्त होलसोल महंगाई अनुमान से ज्यादा निकली है। इससे 0.25% ब्याज दरें बढ़ने की आशंका 72% पर पहुंच गई है। सोने-चांदी में बड़ी गिरावट आई है। गोल्ड 2 फीसदी तो चांदी 6 फीसदी लुढ़की। अब बाजार की नजरें आज आने वाले अमेरिकी रिटेल महंगाई आंकड़ों पर है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी

10 सितंबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय बाज़ार में 438 करोड़ रुपये के शेयर बेचे,जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने इस दौरान 1,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा के शेयर खरीदे।

NSE IPO का प्राइस बैंड 1700-1785/Sh तय

NSE IPO का प्राइस बैंड 1700-1785 रुपए प्रति शेयर तय किया गया है। यह आईपीओ 17 सितंबर से 21 सितंबर तक खुलेगा। यह 4.42 लाख करोड़ के वैल्युएशन में आएगा। आज ढ़ाई बजे कंपनी की प्रेस कॉन्फ्रेंस है।

HDFC बैंक को बहरीन कोर्ट से बड़ी राहत मिली

HDFC बैंक की बड़ी कानूनी जीत हुई है। इसे Credit Suisse AT1 बॉन्ड मामले में बहरीन कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने निवेशकों के सभी 7 दावे खारिज कर दिए हैं।

ग्रेन्यूल्स इंडिया में 1,500 करोड़ रुपए की ब्लॉक डील संभव

ग्रेन्यूल्स इंडिया में आज 1,500 करोड़ रुपए की ब्लॉक डील संभव है। प्रोमोटर कृष्ण प्रसाद 6.9% हिस्सेदारी बेच सकते हैं। 2.5 फीसदी डिस्काउंट पर करीब 872 रुपए प्रति शेयर फ्लोर प्राइस तय की गई है।

BRICS समिट के लिए दिल्ली पहुंचे रूसी राष्ट्रपति पुतिन

BRICS समिट के लिए रूसी राष्ट्रपति पुतिन दिल्ली पहुंच गए हैं। आज PM मोदी से उनकी मुलाकात होगी। भारत-रुस के बीच बड़े रक्षा समझौते हो सकते हैं। उधर चीन के राष्ट्रपति शी चिनपिंग ने भी भारत आने की पुष्टि की है। कल से दिल्ली में BRICS समिट शुरू होगा।

 

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HDFC Bank को बड़ी राहत, बहरीन कोर्ट ने बैंक के खिलाफ सात निवेशकों के दावों को खारिज किया

प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े लेंडर HDFC Bank को Credit Suisse AT1 बॉन्ड मामले में बड़ी राहत मिली है। बहरीन की अदालत ने बैंक के खिलाफ सात निवेशकों के दावों को खारिज कर दिया है।

बैंक ने बताया कि 9 सितंबर 2026 को बहरीन की हाई सिविल कोर्ट ने दो मामलों में उसके पक्ष में फैसला दिया। ये मामले Credit Suisse Additional Tier 1 (CS AT1) बॉन्ड में निवेश करने वाले ग्राहकों ने दायर किए थे।

निवेशकों ने क्या आरोप लगाए थे

निवेशकों ने बैंक पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया था। उन्होंने जानबूझकर गलत जानकारी देने की बात भी कही थी। इसके अलावा ग्राहक की गलत कैटेगरी तय करने और प्रोडक्ट की सही जानकारी नहीं देने का आरोप लगाया गया।

निवेशकों ने वित्तीय लेवरेज के गलत इस्तेमाल और प्रोडक्ट की जरूरत से जुड़े नियमों के उल्लंघन का भी आरोप लगाया था।

HDFC Bank के मुताबिक, अदालत ने इन सभी आरोपों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि निवेशक अपने आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं दे पाए।

पांच और मामलों में मिली राहत

बैंक ने बताया कि जुलाई और अगस्त 2026 में बहरीन की अदालत पांच ऐसे ही दूसरे मामलों को भी खारिज कर चुकी है।

इस तरह CS AT1 बॉन्ड से जुड़े सातों मामलों में बैंक को राहत मिली है। इन सभी मामलों में निवेशकों को कोर्ट की कार्यवाही का खर्च उठाने का आदेश भी दिया गया है।

NCDRC से भी मिली थी राहत

बहरीन कोर्ट के फैसले से पहले मार्च 2026 में National Consumer Disputes Redressal Commission (NCDRC) ने भी निवेशकों की शिकायतें खारिज कर दी थीं।

NCDRC ने कहा था कि HDFC Bank की भूमिका सिर्फ एक फैसिलिटेटर की थी। निवेशकों के पास अपनी पसंद के हिसाब से निवेश करने की पूरी आजादी थी।

बैंक के मुताबिक, आयोग ने यह भी कहा था कि निवेशकों ने अपनी मर्जी से CS AT1 बॉन्ड में निवेश किया था। निवेश के समय वे इसकी बारीकियों से अच्छी तरह वाकिफ थे।

बैंक ने क्या कहा?

HDFC Bank ने कहा कि जहां जरूरत होगी, वह अपने ग्राहकों के साथ खड़ा रहेगा। हालांकि, बैंक ग्राहकों के अपने फैसले से किए गए निवेश की गारंटी नहीं देता।

बैंक ने साफ कहा कि वह बिना ठोस आधार वाले दावों का मजबूती से बचाव करेगा।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।