रूस का यूक्रेन पर मिसाइल और ड्रोन से हमला

रूस ने बुधवार रात से लेकर गुरुवार सुबह तक यूक्रेन की राजधानी कीव और अन्य क्षेत्रों पर मिसाइलों तथा घातक ड्रोनों से भीषण हमले किए जिसके कारण दो बच्चों सहित कम से कम 18 लोग घायल हो गए। हमले के कारण कीव के 10 से अधिक स्थानों पर नुकसान दर्ज किया गया है।

कीव के मेयर विटाली क्लिट्स्को के अनुसार, सबसे अधिक नुकसान 16 मंजिला आवासीय इमारत को पहुंचा है। शहर के चार जिलों में गोदामों और एक पेट्रोल पंप को नुकसान पहुंचा, जबकि नीपर नदी के पूर्वी तट पर जल आपूर्ति अस्थायी रूप से बाधित हो गई।

यूक्रेनी वायु सेना ने जानकारी दी कि रातभर के हमले में कुल 131 हवाई लक्ष्यों को निष्प्रभावी या नष्ट कर दिया गया। रूस की ओर से इस हमले में ओनिक्स एंटी-शिप क्रूज मिसाइलें, बैलिस्टिक मिसाइलें, चार क्रूज मिसाइलें और लगभग 160 ड्रोन दागे गए। कीव के अलावा ओडेसा और ज़ापोरिज्जिया क्षेत्रों में भी भारी तबाही हुई है। ओडेसा में एक 19 मंजिला इमारत क्षतिग्रस्त होने से दो बच्चों समेत छह लोग घायल हुए, जबकि ज़ापोरिज्जिया में एक औद्योगिक इकाई पर मिसाइल गिरने से आग लग गई।

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने रूसी हमलों की निंदा करते हुए कहा कि यूक्रेनी सेना रूसी सरजमीं पर भी करारा जवाब दे रही है। 

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सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जेलेंस्की ने बताया कि संयुक्त अभियान में रूस के यारोस्लाव तेल रिफाइनरी पर सफल हमला किया गया। इसके अतिरिक्त, रोस्तोव क्षेत्र में स्थित एक सैन्य हवाई अड्डे पर हमला कर रूस के एक एएन-12 और दो एएन -26 परिवहन विमानों तथा तीन हेलीकॉप्टरों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया है। दूसरी ओर, समारा के गवर्नर व्याचेस्लाव फेडोरिशचेव के अनुसार, 40 से अधिक यूक्रेनी ड्रोन ने रूसी औद्योगिक क्षेत्रों को निशाना बनाया।

यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने रूस के खिलाफ प्रतिबंधों और शुल्कों को कड़ा करने वाले एक बड़े विधेयक को मंजूरी दे दी है। ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सेंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट 2026’ नामक इस विधेयक को अमेरिकी कांग्रेस ने पारित कर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के पास हस्ताक्षर के लिए भेज दिया है। यह कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को रूसी तेल और गैस के शीर्ष खरीदारों पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार देता है।

राष्ट्रपति जेलेंस्की ने अमेरिकी विधेयक का स्वागत करते हुए इसे “अत्यंत शक्तिशाली हथियार” करार दिया जो माॅस्को को युद्ध समाप्त करने और कूटनीतिक वार्ता की मेज पर लाने में मदद करेगा।

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अमेरिकी सदन ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाला बिल पास किया

अमेरिका में प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स ) ने रूस और ईरान के ऊर्जा क्षेत्र , अधिकारियों और टैंकरों के “शैडो फ्लीट” (गुप्त बेड़े) को निशाना बनाने वाला एक बड़ा प्रतिबंध बिल पास किया है। इससे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल गया है जो रूस से तेल और गैस खरीदना जारी रखते हैं, जिसमें भारत भी शामिल है।

‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ़ 2026’ को 16 सितंबर को हाउस में 262-159 वोटों से पास किया गया और अब इसे ट्रंप के हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा। सीनेट पहले ही 86-11 वोटों से इस कानून को मंज़ूरी दे चुकी है।

यह कानून खुद भारतीय सामानों पर 100 प्रतिशत टैरिफ नहीं लगाता है। इसके बजाय, यह राष्ट्रपति को रूसी ऊर्जा के बड़े खरीदारों या मॉस्को को प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले देशों पर ऐसे टैरिफ लगाने का अधिकार देता है।

हाउस में हुए वोट में 203 रिपब्लिकन, 58 डेमोक्रेट और एक निर्दलीय सदस्य ने बिल का समर्थन किया, जबकि सात रिपब्लिकन और 152 डेमोक्रेट ने इसके खिलाफ वोट दिया।

यह उपाय ईरान पर प्रतिबंधों को भी बढ़ाता है और रूस के ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र के साथ-साथ मौजूदा प्रतिबंधों से बचने में शामिल जहाजों को भी निशाना बनाता है। इसका पास होना यूक्रेन युद्ध को लेकर मॉस्को पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की दिशा में कांग्रेस का एक अहम कदम है।

डेमोक्रेटिक विरोध मुख्य रूप से ट्रंप को दिए गए बढ़े हुए टैरिफ अधिकारों पर केंद्रित था, जबकि कई डेमोक्रेट रूस के खिलाफ कड़े उपायों का समर्थन भी करते थे।

सदन के अल्पसंख्यक नेता हकीम जेफ़रीज़ ने अपने ‘ना ‘ वाले वोट के बारे में बताते हुए कहा, “अमेरिका में ज़िंदगी बहुत महंगी है। आखिर यह कांग्रेस या ‘पीपल्स हाउस’ (हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स) इस राष्ट्रपति को दुनिया पर और टैरिफ लगाने की ऐसी बेरोकटोक ताकत क्यों देगा, जिसका अमेरिकी लोगों पर बुरा आर्थिक असर पड़ेगा?” “मैं ऐसा नहीं कर सकता।”

सदन में विदेश मामलों की कमेटी के वरिष्ठ सदस्य ग्रेगरी मीक्स ने भी इस प्रस्ताव का विरोध किया, क्योंकि इसमें ट्रंप को टैरिफ लगाने की ताकत दी गई थी।

श्री मीक्स ने हाउस में कहा, “मैं आपको झूठी उम्मीद नहीं देना चाहता। मैं आपको सच्ची उम्मीद देना चाहता हूँ।”

इस कानून की वकालत दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने की थी, जिन्होंने रूस के खिलाफ़ कड़े कदम उठाने के लिए डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर दोनों पार्टियों का समर्थन जुटाया था। ग्राहम का जुलाई में 71 साल की उम्र में अचानक निधन हो गया था।

टैरिफ़ से जुड़ी ताकतों के दायरे और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत में ज़्यादा लचीलापन रखने की ट्रंप की पसंद को लेकर चिंताओं के कारण यह बिल महीनों तक अटका रहा। ग्राहम ने अपनी मौत से कुछ समय पहले, जुलाई में व्हाइट हाउस के साथ एक अहम कामयाबी की घोषणा की थी।

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने हाउस में मतदान से पहले इस कानून का स्वागत करते हुए कहा कि युद्ध जारी रहने के कारण और कड़े प्रतिबंधों की ज़रूरत है। “यह ज़रूरी है कि युद्ध के जवाब में लगाए जाने वाले प्रतिबंध कड़े हों।”

उन्होंने आगे कहा, “यह दबाव कम करने का समय नहीं है। अब ऐसा सब कुछ करने का समय है जिससे यह पक्का हो सके कि मज़बूती के ज़रिए कूटनीति सफल हो।”

इस कानून के समर्थकों का कहना है कि इससे रूस की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा और यूक्रेन के लिए अमेरिका का समर्थन मज़बूत होगा, खासकर ऐसे समय में जब कीव को अपने बुनियादी ढांचे पर लगातार हमलों और हवाई रक्षा प्रणाली की कमी का सामना करना पड़ रहा है। कानून को आगे बढ़ाने का समर्थन करने वाले डेमोक्रेटिक सांसदों में से एक, डैन गोल्डमैन ने कहा कि कांग्रेस को मॉस्को पर दबाव बनाए रखना चाहिए।

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“लोकतांत्रिक यूक्रेन की एक तानाशाही रूस के ख़िलाफ़ युद्ध में जीत पक्का करने के लिए हर संभव कोशिश की जानी चाहिए।”

बिल के लिए अपना समर्थन बताते हुए श्री गोल्डमैन ने रूस के प्रति ट्रंप के रवैये की भी आलोचना की। श्री गोल्डमैन ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप के पहले महाभियोग में मुख्य वकील के तौर पर, मैं व्लादिमीर पुतिन के प्रति उनके बेतुके और समझ से परे लगाव से अच्छी तरह वाकिफ़ हूँ, और मुझे अच्छी तरह पता है कि राष्ट्रपति रहते हुए उन्होंने रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लागू करने के लिए लगभग कुछ नहीं किया।” “फिर भी, यह उस बिल का विरोध करने की वजह नहीं हो सकती जो उनसे ठीक यही काम करने की मांग करता है।”

यूक्रेन रूस के अंदरूनी इलाकों में मौजूद ठिकानों, जिनमें देश की ऊर्जा अर्थव्यवस्था से जुडी बुनियादी सुविधायें भी शामिल हैं, पर हमला करने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल तेज़ी से बढ़ा रहा है। इस लड़ाई की वजह से रूस की तेल से होने वाली कमाई पर भी दबाव बना हुआ है, जिसे कम करने के लिए वॉशिंगटन ने प्रतिबंध लगाए हैं।

यूक्रेन के समर्थन में काम करने वाले लॉबिंग ग्रुप ‘राज़ोम फॉर यूक्रेन’ के एडवोकेसी डायरेक्टर डैनियल बाल्सन ने कहा, “यह बिल एक साफ़ संदेश देता है: जब तक पुतिन यूक्रेन को तकलीफ़ पहुँचाते रहेंगे, कांग्रेस पुतिन पर कार्रवाई करती रहेगी।”

श्री बाल्सन ने कहा कि इस बिल में शामिल उपाय पुतिन पर वहाँ चोट करेंगे जहाँ उन्हें “सबसे ज़्यादा तकलीफ़ होगी।” बाल्सन ने आगे कहा, “ये उपाय उनकी युद्ध मशीन की जड़ पर प्रहार करेंगे, उनकी अर्थव्यवस्था को कमज़ोर करेंगे और उन लोगों को निशाना बनाएँगे जो रूसी ऊर्जा आयात करके क्रेमलिन को फ़ंडिंग देते रहते हैं।

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सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की फिल्म ‘द वन’ का ट्रेलर रिलीज

सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया अभिनीत फिल्म ‘द वन’ का ट्रेलर जारी कर दिया गया है। एकता कपूर निर्मित और दीपक मिश्रा निर्देशित यह फिल्म भारतीय लोककथाओं और अलौकिक शक्तियों पर आधारित रहस्यमयी दुनिया की कहानी पेश करती है।फिल्म की कहानी अरुणाभ कुमार ने लिखी है। ट्रेलर में सिद्धार्थ और तमन्ना के किरदारों के साथ रहस्य, रोमांच और अलौकिक घटनाओं की झलक देखने को मिलती है।

फिल्म का निर्माण शोभा कपूर, एकता आर कपूर, अरुणाभ कुमार और नीरज कोठारी ने किया है। बालाजी मोशन पिक्चर्स और द वायरल फीवर के सहयोग से बनी इस फिल्म को 11:11 प्रोडक्शंस से भी जोड़ा गया है।

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फिल्म की कहानी की दुनिया को विस्तार देने के लिए ‘द लीजेंड ऑफ द वन’ नामक कॉमिक भी पेश की गई है। कॉमिक के जरिए फिल्म के रहस्यमयी संसार और उसके किरदारों से जुड़ी कहानी को आगे बढ़ाया गया है।

‘द वन’ 25 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

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विजय देवरकोंडा-रश्मिका मंदाना की ‘राणाबाली’ की शूटिंग पूरी

विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना अभिनीत फिल्म ‘राणाबाली’ की शूटिंग पूरी हो गई है। फिल्म 16 अक्टूबर 2026 को दशहरा के अवसर पर दुनिया भर के सिनेमाघरों में प्रदर्शित होगी।राहुल संकृत्यायन के निर्देशन में बनी फिल्म अब निर्माणोत्तर चरण में पहुंच गई है। फिल्म की रिलीज में 29 दिन शेष रहने के अवसर पर निर्माताओं ने विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना का नया श्वेत-श्याम पोस्टर जारी किया है। इसमें दोनों कलाकार पारंपरिक ऐतिहासिक वेशभूषा में नजर आ रहे हैं।

फिल्म में विजय देवरकोंडा ‘राणाबाली’ और रश्मिका मंदाना ‘जयम्मा’ की भूमिका निभा रही हैं। 

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निर्माताओं के अनुसार, फिल्म अच्छाई और बुराई के बीच संघर्ष की कहानी है और इसमें दोनों कलाकार अलग और नए रूप में नजर आएंगे।

मैत्री मूवी मेकर्स निर्मित इस फिल्म का संगीत अजय-अतुल ने दिया है। फिल्म को बड़े स्तर पर बनाया गया है और इसे दशहरा से पहले के सप्ताहांत में प्रदर्शित किया जाएगा।

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मैथ्यू वेड ने बीबीएल को कहा अलविदा

मैथ्यू वेड ने अपने कोचिंग करियर पर ध्यान देने के लिए बिग बैश लीग (बीबीएल) क्रिकेट से संन्यास ले लिया है। वह पहले से ही ऑस्ट्रेलिया की सफेद गेंद टीम के बल्लेबाजी कोच की भूमिका निभा रहे हैं।

वेड पिछले साल होबार्ट हरिकेन्स के लिए बीबीएल खेलते हुए ऑस्ट्रेलिया की पुरुष टीम के साथ भी काम कर रहे थे, लेकिन उन्होंने 2026-27 सीजन से पहले पूरी तरह से खेलना छोड़ने का फैसला किया है।

वेड ने 2024 टी-20 विश्व कप के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया था और अब वे बीबीएल के इतिहास में एक अहम खिलाड़ी के तौर पर इस टूर्नामेंट से विदा ले रहे हैं। उन्होंने 2011-12 के पहले सीज़न में मेलबर्न स्टार्स के साथ शेन वॉर्न के साथ खेलते हुए अपने करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने स्टार्स के साथ 16 और मेलबर्न रेनेगेड्स के साथ 13 मैच खेले, जिसके बाद वे तस्मानिया लौट आए और हरिकेन्स के लिए 90 मैच खेले।

बीबीएल में सबसे अधिक रन बनाने वालों की सूची में वह नौवें और विकेट लेने या कैच पकड़ने (डिसमिसल) के मामले में पांचवें नंबर पर हैं। हरिकेंस के लिए केवल बेन मैकडरमॉट और डार्सी शॉर्ट ने ही उनसे ज़्यादा रन बनाए हैं, लेकिन उनके करियर के बेस्ट स्कोर 130 नॉट आउट से ज़्यादा किसी ने नहीं बनाया है। साथ ही, 2024-25 में टीम के पहले BBL खिताब को जीतने में उनकी अहम भूमिका रही।

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हरिकेंस के कोच जेफ वॉन ने कहा, “वेड उन क्रिकेटरों में से एक हैं जिन्हें आप हमेशा अपनी टीम में रखना चाहेंगे। जब भी वे मैदान पर उतरे, उन्होंने जबरदस्त मुकाबला किया और उनमें बहुत तेजी से गेम बदलने की काबिलियत थी, लेकिन उतनी ही अहम बात यह भी है कि उन्होंने अपने आस-पास के खिलाड़ियों को क्या सिखाया है। उनके पास क्रिकेट की शानदार समझ है और वे हमेशा अपनी जानकारी शेयर करने और अपने आस-पास के खिलाड़ियों को बेहतर बनने के लिए प्रेरित करने को तैयार रहते हैं। हमारे सिस्टम में कई ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्हें मैट के साथ खेलने से फ़ायदा हुआ है और मुझे लगता है कि यहाँ उनकी विरासत का यह एक अहम हिस्सा होगा।

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तवेंगवा मुकुहलानी को आईसीसी का उपाध्यक्ष किया गया नियुक्त

जिम्बाब्वे क्रिकेट के प्रमुख तवेंगवा मुकुहलानी को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) का नया उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वह इस पद पर नवंबर 2027 तक बने रहेंगे।

बोर्ड से इमरान ख्वाजा के हटने के बाद मुकुहलानी ने उनकी जगह यह भूमिका संभाली है। वह इस पद पर नियुक्त हुए जिम्बाब्वे के पहले व्यक्ति है। मुकुहलानी अभी आईसीसी की फाइनेंस और कमर्शियल अफेयर्स कमेटी (एफ एंड सीए) और नॉमिनेशन कमेटी में काम कर रहे हैं, और एचआर और रेमुनरेशन कमेटी के चेयरमैन हैं।

आईसीसी की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा, “जिम्बाब्वे क्रिकेट में अपने लीडरशिप अनुभव और इस क्षेत्र की अपनी समझ के साथ, मुकुहलानी बहुमूल्य जानकारी और समझ लेकर आएंगे। आईसीसी और उसके सदस्य एक यादगार वर्ल्ड कप आयोजित करने की दिशा में काम कर रहे हैं, जिससे यह टूर्नामेंट 24 साल बाद अफ्रीका लौटेगा और पूरे महाद्वीप में क्रिकेट के विकास और तरक्की को और मजबूत करेगा।

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अपनी नियुक्ति पर मुकुहलानी ने कहा, “मेरे साथी आईसीसी बोर्ड डायरेक्टर्स ने मुझ पर जो भरोसा जताया है, उससे मैं बहुत सम्मानित महसूस कर रहा हूं और आईसीसी के डिप्टी चेयरमैन के तौर पर सेवा करने का मौका मिलने के लिए आभारी हूं। मैं हमारे चेयरमैन जय शाह के साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हूं, जिनकी लीडरशिप, ऊर्जा और महत्वाकांक्षा ने आईसीसी को एक स्पष्ट मकसद दिया है, जिसमें क्रिकेट को बढ़ाने, हमारे सदस्यों के लिए मौके बनाने और नए दर्शकों और बाज़ारों तक पहुंचने पर जोर दिया गया है।

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गृह मंत्रालय ने शहजाद भट्टी नेटवर्क को आतंकवादी संगठन घोषित किया

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हथियारों और मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले शहजाद भट्टी नेटवर्क को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आतंकवादी संगठन घोषित किया है।

गृह मंत्रालय ने बुधवार को एक अधिसूचना जारी कर कहा कि शहजाद भट्टी नेटवर्क को आतंकवादी संगठन घोषित किया गया है। अधिसूचना में कहा गया है कि यह नेटवर्क सीमा पार हथियार, विस्फोटक और मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल है। 

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इसके अलावा, यह युवाओं और छोटे अपराधियों को आतंकवादी गतिविधियों के लिए उकसाने, भारत की लोकतांत्रिक संरचना और सामुदायिक सौहार्द को निशाना बनाने के साथ-साथ घृणास्पद डिजिटल सामग्री प्रकाशित करने में भी शामिल है।

अधिसूचना के अनुसार यह कार्रवाई यूएपीए की धारा 35 की उपधारा (1) के खंड (क) द्वारा प्रदत शक्तियों का प्रयोग करते हुए की गयी है। यह नेटवर्क कथित रूप से पाकिस्तान की खुफिया एजेन्सी आईएसआई से जुड़ा है। स्वतंत्रता दिवस से पहले भारतीय सुरक्षा एजेंसियों और राज्य पुलिस बलों ने 14 राज्यों में एक संयुक्त अभियान चलाकर इस नेटवर्क के 200 से अधिक गुर्गों को गिरफ्तार किया था।

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नकली दवाओं पर लगाम के लिए उच्चतम न्यायालय में जनहित याचिका

देश में नकली और मिलावटी दवाओं के निर्माण तथा बिक्री पर पूरी तरह से अंकुश लगाने के लिए उच्चतम न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर करके एक एकीकृत राष्ट्रीय ढांचे को बनाने, मामलों की समयबद्ध जांच व तेजी से सुनवाई, जब्त दवाओं की अनिवार्य फॉरेंसिक जांच और नकली दवा सिंडिकेट के खिलाफ प्रवर्तन एजेंसियों की समन्वित कार्रवाई की मांग की गई है।

अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की इस याचिका में मांग की गई है कि नकली दवाओं से जुड़े मामलों में जांच तीन महीने के भीतर और अदालती सुनवाई एक साल के भीतर पूरी की जाए। इसके अलावा छापेमारी और जब्ती को अनिवार्य वीडियोग्राफी कराने और देश भर में जांच व अभियोजन को संचालित करने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया बनाने का अनुरोध किया गया है।

इस याचिका में एक राष्ट्रीय डिजिटल निगरानी प्रणाली स्थापित करने की भी सिफारिश की गई है, जिससे मामलों की एफआईआर से लेकर अंतिम निपटारे तक निगरानी की जा सके और राज्य पुलिस, सीबीआई, ईडी, सीमा शुल्क विभाग और फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके।

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याचिकाकर्ता ने मांग की है कि नकली दवाओं के उत्पादन, वितरण और वित्तपोषण में शामिल नेटवर्क के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग, बेनामी संपत्ति और काले धन से संबंधित कड़े कानूनों के तहत कार्रवाई करते हुए उनकी संपत्तियों को जब्त किया जाए। याचिका में तर्क दिया गया है कि औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 वर्तमान में संगठित सिंडिकेट से निपटने के लिए अपर्याप्त है, क्योंकि इसमें वित्तीय जांच, गवाह संरक्षण और समयबद्ध फॉरेंसिक विश्लेषण के स्पष्ट प्रावधान नहीं हैं।

बेंगलुरु के 90 से अधिक अस्पतालों में कथित तौर पर कैंसर की नकली दवाओं की आपूर्ति के हालिया मामलों, जहरीले कफ सिरप से हुई मौतों और विभिन्न राज्यों में जब्त की गई नकली दवाओं का हवाला देते हुए याचिका में कहा गया है कि इस समस्या को अलग-अलग घटनाओं के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह एक संगठित अपराध है जो संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और स्वास्थ्य का अधिकार), अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 47 (लोक स्वास्थ्य में सुधार का राज्य का कर्तव्य) का सीधा उल्लंघन है।

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ओडिशा में 3,406 करोड़ रुपये की सेमीकंडक्टर परियोजना को मंजूरी

ओडिशा में उभरते सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देते हुए यूनिट अप्रूवल कमेटी (यूएसी) ने खोरधा जिले के आईडीसीओ इन्फोवैली-2 में सिलिकॉन कार्बाइड (एसआईसी) सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाई स्थापित करने के लिए सिक्सेम प्राइवेट लिमिटेड के 3,406.25 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

यूएसी की 217वीं बैठक में स्वीकृत यह परियोजना जटनी तहसील के अरिसोल मौजा में 21.889 एकड़ भूमि पर स्थापित की जाएगी और फाल्टा विशेष आर्थिक क्षेत्र (एफएसईजेड) के अंतर्गत संचालित होगी।

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प्रस्तावित इकाई में सिलिकॉन कार्बाइड आधारित सेमीकंडक्टर उपकरणों, विशेष रूप से डायोड और एमओएसएफईटी का निर्माण किया जाएगा। इसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता 48 लाख एसआईसी डायोड और 9.12 करोड़ एसआईसी एमओएसएफईटी होगी। परियोजना से लगभग 1,270 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है तथा यह रणनीतिक सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की घरेलू विनिर्माण क्षमता को मजबूत करेगी।

अधिकारियों के अनुसार, अगले पांच वर्षों में इस परियोजना से लगभग 7,043 करोड़ रुपये का निर्यात कारोबार और करीब 4,523 करोड़ रुपये की शुद्ध विदेशी मुद्रा आय होने का अनुमान है। यह मंजूरी उच्च प्रौद्योगिकी और पूंजी-गहन विनिर्माण क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के ओडिशा सरकार के प्रयासों के बीच मिली है। अधिकारियों का कहना है कि यह परियोजना राज्य के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को गति देने के साथ-साथ निर्यातोन्मुख औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देगी।

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तमिलनाडु उपचुनाव में दोनों सीटों पर नामांकन प्रक्रिया पूरी

तमिलनाडु विधानसभा की मदुरंतकम और धारापुरम (असुरक्षित) सीटों पर आगामी 06 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने का कार्य बुधवार दोपहर 3 बजे संपन्न हो गया।

अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के बागी विधायकों के इस्तीफे के बाद खाली हुई इन दोनों सीटों पर नामांकन के अंतिम दिन राज्य में सत्तारुढ़ तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके), विपक्षी अन्नाद्रमुक और वामपंथी दलों (माकपा और भाकपा) के उम्मीदवारों ने अपने-अपने पर्चे दाखिल किये।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, नामांकनों की जांच गुरुवार (17 सितंबर) को होगी, जबकि नाम वापसी की अंतिम तिथि 19 सितंबर तय की गयी है। इसके बाद ही चुनावी मैदान में किस्मत आजमा रहे कुल उम्मीदवारों की अंतिम तस्वीर साफ हो सकेगी।

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मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली टीवीके पार्टी ने मदुरंतकम सीट से के. मरगथम कुमारवेल और धारापुरम सीट से पी. सत्यभामा को मैदान में उतारा है। ये दोनों नेता अन्नाद्रमुक छोड़कर टीवीके में शामिल हुई थीं, जिसके चलते इन सीटों पर उप-चुनाव आवश्यक हुआ था। द्रमुक और एनटीके भी चुनावी मैदान में ताल ठोंक चुके हैं।

निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, दोनों सीटों के लिए अब तक कुल 46 उम्मीदवारों (19 महिलाओं सहित) ने नामांकन पत्र दाखिल किये हैं, जिनमें से अधिकांश निर्दलीय हैं। मदुरंतकम सीट से 29 और धारापुरम सीट से 17 उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतरे हैं।

श्री विजय की चार महीने पुरानी सरकार के लिए यह उपचुनाव एक ‘जनमत संग्रह’ के रूप में देखा जा रहा है। वामदलों के पृथक रूप से चुनाव लड़ने के फैसले ने इस मुकाबले को पंचकोणीय बना दिया है। वामदलों के इस रुख से सत्ताधारी टीवीके और उसके सहयोगी दल हैरान हैं, जबकि कांग्रेस ने उनसे अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने की अपील की है।

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