Kisan Credit Card: बिना गारंटी के लाखों का मिलता है लोन! जानिए कैसे बनवाएं किसान क्रेडिट कार्ड, क्या है पूरा प्रोसेस?

Kisan Credit Card Scheme: देश के किसानों को महंगे ब्याज वाले कर्ज के जाल से बचाने के लिए सरकार की किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना सबसे बड़ा वरदान है। इस योजना के तहत किसानों को खेती-बाड़ी, डेयरी और पशुपालन के लिए बेहद कम ब्याज दर पर लोन दिया जाता है।

अगर समय पर कर्ज चुकाया जाए, तो किसानों को यह लोन सिर्फ 4 फीसदी सालाना ब्याज दर पर मिल जाता है। इतना ही नहीं, बिना किसी गारंटी के 2 लाख रुपये तक का लोन सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिया जाता है।

आइए आपको बताते हैं कि किसान क्रेडिट कार्ड पर कितना ब्याज लगता है, इसके लिए कौन-कौन से किसान पात्र हैं और इसे बनवाने की पूरी प्रक्रिया क्या है:

कितना लगता है ब्याज?

किसान क्रेडिट कार्ड पर लोन की आधिकारिक और प्रभावी ब्याज दर इस प्रकार काम करती है:

सामान्य ब्याज दर: KCC पर बैंकों की शुरुआती ब्याज दर 7% सालाना होती है।

3% की छूट: अगर किसान समय पर अपने लोन का रिपेमेंट कर देते हैं, तो केंद्र सरकार उन्हें 3% की सब्सिडी देती है।

प्रभावी ब्याज दर: यानी समय पर पैसा लौटाने वाले किसानों को यह लोन सिर्फ 4% सालाना ब्याज पर ही पड़ता है।

KCC के मुख्य फायदे

बिना गारंटी लोन: 2 लाख रुपये तक के कर्ज के लिए जमीन या कोई भी चीज गिरवी रखने की जरूरत नहीं होती। विशेष परिस्थितियों में यह सीमा 5 लाख रुपये तक हो सकती है।

लचीला भुगतान: फसल कटने और बिकने के बाद किसान अपनी सहूलियत से लोन चुकता कर सकते हैं।

बीमा कवर: KCC धारकों को दुर्घटना बीमा और फसल बीमा का भी फायदा मिलता है।

पशुपालन और मछली पालन शामिल: खेती के अलावा डेयरी, मुर्गीपालन और मत्स्य पालन करने वाले किसान भी KCC का लाभ ले सकते हैं।

KCC के लिए कौन-कौन पात्र हैं?

स्वयं की जमीन वाले किसान: ऐसे किसान जिनके नाम पर कृषि योग्य भूमि है।

बटाईदार व किराएदार किसान: जो दूसरों की जमीन पर खेती करते हैं।

पशुपालक और मछुआरे: डेयरी या मछली पालन से जुड़े किसान।

उम्र सीमा: आवेदक की उम्र 18 से 75 वर्ष के बीच होनी चाहिए। (60 साल से अधिक उम्र के आवेदकों के लिए एक सह-आवेदक यानी Co-applicant होना अनिवार्य है)।

KCC बनवाने के लिए जरूरी दस्तावेज

पहचान पत्र: आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी या ड्राइविंग लाइसेंस।

निवास प्रमाण पत्र: आधार कार्ड, बिजली बिल या राशन कार्ड।

जमीन के कागज: खतौनी/खसरा की नकल और जमाबंदी की प्रति।

पासपोर्ट साइज फोटो (कम से कम 2-3 फोटो)।

शपथ पत्र: इस बात का प्रमाण कि आवेदक का किसी अन्य बैंक में KCC लोन बकाया नहीं है।

कैसे बनवाएं Kisan Credit Card?

आप KCC के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से आवेदन कर सकते हैं:

A. ऑनलाइन आवेदन का तरीका:

  • जिस बैंक (SBI, PNB, HDFC, BOI आदि) में आपका खाता है, उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
  • होमपेज पर ‘Kisan Credit Card’ या ‘KCC Application’ का विकल्प चुनें।
  • ऑनलाइन आवेदन फॉर्म में अपनी व्यक्तिगत, कृषि भूमि और बैंक खाते की जानकारी भरें।
  • मांगे गए जरूरी दस्तावेज अपलोड करें और ‘Submit’ पर क्लिक करें।
  • आवेदन जमा होने के बाद बैंक अधिकारी आपसे संपर्क करेंगे और वेरिफिकेशन के बाद कार्ड जारी कर दिया जाएगा।

(नोट: पीएम-किसान (PM-Kisan) लाभार्थी सीधे PM-Kisan पोर्टल से भी KCC के लिए एक-पेज का आसान फॉर्म डाउनलोड करके जमा कर सकते हैं।)

B. ऑफलाइन आवेदन का तरीका:

  • अपनी नजदीकी बैंक शाखा (निकटतम ग्रामीण या व्यावसायिक बैंक) में जाएं।
  • वहां से ‘किसान क्रेडिट कार्ड फॉर्म’ प्राप्त करें।
  • फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारियां सही-सही भरें।
  • फॉर्म के साथ जमीन के कागजात और आधार कार्ड की फोटोकॉपी अटैच करें।
  • बैंक में फॉर्म जमा करने के 14 दिनों के भीतर बैंक अधिकारी लोन मंजूर कर KCC जारी कर देते हैं।

अगर आप किसान हैं और खेती या पशुपालन के लिए पैसों की तंगी से जूझ रहे हैं, तो महंगे साहूकारों के पास जाने के बजाय अपने नजदीकी बैंक में जाकर आज ही किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) बनवाएं और सिर्फ 4% की सस्ती दर पर लोन का लाभ उठाएं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

रंगारंग लेकिन सादगी भरे समारोह के साथ एशियाई खेलों का आगाज

जापान ने शनिवार को एशियाई खेलों के सादगीपूर्ण लेकिन रंगारंग उद्घाटन समारोह में अपनी तकनीकी और औद्योगिक ताकत के साथ-साथ समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक पेश की जिसने प्रतियोगिता से पहले की अव्यवस्थाओं और लॉजिस्टिक्स समस्याओं के बीच एक उम्मीद की किरण दिखाई।

अगले 15 दिनों तक 45 देशों के करीब 11,000 खिलाड़ी 43 खेलों और 71 स्पर्धाओं में हिस्सा लेंगे। इस दौरान कुल 469 स्वर्ण पदकों के लिए मुकाबला होगा और खेलों का समापन चार अक्टूबर को होगा। बास्केटबॉल, फुटबॉल, क्रिकेट समेत कुछ अन्य खेलों की स्पर्धाएं पहले ही शुरू हो चुकी हैं।

‘हार्मोनिक हार्ट बीट’ थीम के साथ जापान ने अपने इतिहास में तीसरी बार एशियाई खिलाड़ियों का स्वागत किया। इससे पहले 1958 में तोक्यो और 1994 में हिरोशिमा में एशियाई खेलों का आयोजन हुआ था।

उद्घाटन समारोह का मुख्य आकर्षण दिल के आकार का मुख्य मंच रहा जिसे ‘वन एशिया’ की थीम को दर्शाने के लिए तैयार किया गया था। यह पूरे महाद्वीप के खिलाड़ियों और लोगों के एक-दूसरे से दिल से जुड़ने का प्रतीक था।

30,000 दर्शकों की क्षमता वाले खचाखच भरे मिजुहो पार्क एथलेटिक स्टेडियम में आयोजित इस शानदार समारोह में आइची की औद्योगिक तकनीक और पारंपरिक कला का अनूठा मेल देखने को मिला। पारंपरिक जापानी काबुकी मंच के साथ एक विशाल रोबोटिक भुजा को झंडा लहराते हुए दिखाया गया।

दो घंटे के उद्घाटन समारोह के बीच में जापान के सम्राट नारुहितो ने 20वें एशियाई खेलों के शुरू होने की घोषणा की। इस मौके पर महारानी मासाको, एशिया की ओलंपिक परिषद के अध्यक्ष शेख जोआन बिन हमद अल थानी और अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति की अध्यक्ष कर्स्टी कोवेंट्री भी मौजूद रहीं।

आइची प्रांत में टोयोटा मोटर कॉरपोरेशन का मुख्यालय होने के कारण समारोह में कंपनी से जुड़ी तकनीकी उपलब्धि की झलक भी दिखाई गई। टोयोटा द्वारा तोक्यो 2020 ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों के लिए विकसित कम गति वाले विशेष परिवहन वाहन ‘एपीएम’ (एक्सेसिबल पीपल मूवर) ने समारोह में प्रमुख भूमिका निभाई।

हालांकि इस बड़े बहु-खेल प्रतियोगिता की तैयारियां कई प्रशासनिक चूकों, लॉजिस्टिक समस्याओं और तंग आवास व्यवस्था से प्रभावित रहीं। इसके चलते आयोजन समिति और एशियाई ओलंपिक परिषद को लगातार सफाई देनी पड़ी।

इन अव्यवस्थाओं से जापान की छवि को भी नुकसान पहुंचा जबकि वह पहले 2002 में फीफा विश्व कप के अलावा 1964 और 2021 में ओलंपिक जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की सफल मेजबानी कर चुका है।

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स्टार निशानेबाज मनु भाकर और कबड्डी खिलाड़ी पवन सहरावत की अगुवाई में भारत ने तालियों की गड़गड़ाहट के बीच खिलाड़ियों की परेड में प्रवेश किया। गहरे नीली (नेवी ब्लू) साड़ी और बंदगले की औपचारिक जैकेट पहने मनु दर्शकों का अभिवादन करती नजर आईं। उन्होंने सहरावत के साथ 150 सदस्यीय भारतीय दल की अगुवाई की।

भारतीय पुरुष खिलाड़ियों ने भी गहरे नीले रंग की बंदगले की औपचारिक जैकेट और उससे मेल खाती पतलून पहनी थी।

खिलाड़ियों की परेड में एशियाई ओलंपिक परिषद की शरणार्थी टीम के दो खिलाड़ी मेजबान जापान से ठीक पहले शामिल हुए। परंपरा के अनुसार 46 दलों की परेड में जापान सबसे अंत में आया।

जापान के प्रवेश के दौरान सबसे ज्यादा उत्साह देखने को मिला। मेजबान देश इस बार 900 से अधिक खिलाड़ियों के साथ सबसे बड़ा दल उतार रहा है।

‘अवेकनिंग ऑफ द स्पेस एंड द रेजोनेंट हार्ट बीट’ नामक स्वागत कार्यक्रम के साथ समारोह की शुरुआत हुई। जापान के लोकप्रिय वायलिन वादक और संगीतकार तारो हाकासे ने खेल महोत्सव के अनुरूप जोशीली धुनें प्रस्तुत कीं। रोशनी और लेजर से पूरा स्टेडियम जगमगा उठा।

चमचमाता हुआ 10 मीटर ऊंचा झंडा प्रतियोगिता की शुरुआत का संकेत देते हुए ऊपर उठा। दिल के आकार के पंखों वाले ड्रोन स्टेडियम के चारों ओर चमकते हुए उड़ते नजर आए और पूरा परिसर उद्घाटन समारोह की थीम ‘दिल की दुनिया’ में बदल गया। इसके साथ कलाकारों ने स्वागत नृत्य भी प्रस्तुत किया।

हाकासे के वायलिन वादन के साथ नागोया और आइची के अन्य हिस्सों से आए 240 स्थानीय कलाकार मंच के नीचे से बाहर निकले। चार अलग-अलग रंगों में बंटे कलाकारों ने बार-बार एक साथ आकर और अलग होकर विभिन्न आकृतियां बनाईं जो जीवन के आपसी जुड़ाव और धड़कन को दर्शाती थीं। अंत में कलाकारों ने मिलकर ‘वेलकम’ (डब्ल्यूएईएलसीओएमई) शब्द की आकृति बनाई जो मेहमाननवाजी का संदेश था।

इसके बाद जापान का राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया और राष्ट्रगान बजाया गया। इसके साथ ही खिलाड़ियों की परेड शुरू हो गई।

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आईआईटी मुंबई: परीक्षा में चैटजीपीट के इस्तेमाल के बाद छात्र ने जान दी

मुंबई के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) में 22 वर्षीय एक छात्र ने परीक्षा के दौरान कथित तौर पर मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुये पकड़े जाने के बाद छात्रावास के कमरे में आत्महत्या कर ली। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी।

एक अधिकारी ने बताया कि शुक्रवार को पवई परिसर के छात्रावास संख्या-4 में इस छात्र का शव छत के पंखे से लटका हुआ मिला।

अधिकारी के अनुसार उसकी पहचान महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के निवासी साहिल रवींद्र वाकोडे (22) के रूप में हुई है। वाकोडे की मां ने आरोप लगाया मेरे बेटे का उत्पीड़न किया गया, उसकी हत्या कर दी गयी। मैं न्याय चाहती हूं।

अधिकारी ने बताया कि वाकोडे ऊर्जा विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग में बीटेक पाठ्यक्रम के द्वितीय वर्ष का छात्र था।

आईआईटी मुंबई के एक बयान के अनुसार वाकोडे ने परीक्षा के दौरान उत्तर के लिए कथित तौर पर परीक्षा का प्रश्न-पत्र ‘चैटजीपीटी’ पर अपलोड किया था।

अधिकारी ने बताया कि मौत का पता तब चला जब छात्रावास में रहने वाले उसके साथियों ने देखा कि उसके कमरे से कोई जवाब नहीं मिल रहा है। साथियों ने अधिकारियों को सूचित किया, जिन्होंने पुलिस को खबर दी।

अधिकारी ने बताया कि घटनास्थल से कोई ‘सुसाइड नोट’ नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि पवई पुलिस ने आकस्मिक मौत का मामला दर्ज किया है और शव को पोस्टमार्टम के लिए ले गयी है। इस घटना के बाद परिसर में विरोध-प्रदर्शन भी हुए और विद्यार्थियों ने मौत से जुड़ी परिस्थितियों की जांच की मांग की।

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आईआईटी मुंबई ने शुक्रवार देर रात जारी एक बयान में कहा कि वाकोडे दिन में परीक्षा केंद्र में मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए पाया गया था, लेकिन उसके खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी।

बयान के मुताबिक ‘इंस्ट्रक्टर’ और विभागाध्यक्ष ने वाकोडे से इस मामले पर बात की एवं उसे समझाया। विभागाध्यक्ष ने उसे आश्वासन दिया कि इस घटना का उसके शैक्षणिक करियर पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।

संस्थान ने कहा कि इसके बाद वह छात्रावास के अपने कमरे में लौट आया और शाम को मृत पाया गया। बयान में कहा गया है, ‘‘संस्थान इस छात्र के दोस्तों, सहपाठियों, शिक्षकों और इस दुखद घटना से प्रभावित अन्य लोगों को सहायता प्रदान कर रहा है।

बयान के मुताबिक कि मौत की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। मुंबई के पवई स्थित आईआईटी परिसर में गत सात महीने में छात्र आत्महत्या का यह तीसरा मामला है।

फरवरी में, छात्रावास में बीटेक द्वितीय वर्ष के एक छात्र ने आत्महत्या कर ली थी। जुलाई 2026 में भी नए सेमेस्टर की शुरुआत में बीटेक द्वितीय वर्ष के 20 वर्षीय छात्र ने अपनी जान दे दी थी।

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गांधीनगर निकाय चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी ने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की

आम आदमी पार्टी (आप) ने 11 अक्टूबर को होने वाले गांधीनगर निकाय चुनाव के लिए 23 उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची शनिवार को जारी की।

‘आप’ की गुजरात इकाई के महासचिव मनोज सोरठिया ने कहा कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी ने पिछले निकाय चुनाव में एक सीट जीती थी और उसे 21 प्रतिशत वोट मिले थे।

आगामी चुनाव में कुल 44 सीटों के लिए सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस और आप के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होगा।

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सोरठिया ने कहा सत्ता में बैठे लोगों ने गांधीनगर की सुंदरता को बेच दिया है। पिछले चुनाव में गांधीनगर के लोगों ने 21 प्रतिशत वोट दिए और आप के एक उम्मीदवार को निर्वाचित किया। किसी लालच या प्रलोभन में आए बिना आप पार्षद ने पांच साल तक मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाई।

उन्होंने कहा कि आप आम लोगों और शिक्षित वर्ग की पार्टी के रूप में उभरी है और उसने गांधीनगर में युवाओं, डॉक्टरों, वकीलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को टिकट दिया है।

गांधीनगर नगर निगम और ओखा तथा थरा नगर पालिकाओं के चुनाव 11 अक्टूबर को होंगे। मतगणना 13 अक्टूबर को होगी।

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एबीवीपी ने डूसू के तीन पदों पर जीत दर्ज की: निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन बने उपाध्यक्ष

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) के चुनाव में केंद्रीय पैनल के चार पद में से तीन पर जीत दर्ज की, जबकि एनएसयूआई का टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरे दीपांशु शौकीन ने उपाध्यक्ष पद पर जीत हासिल की।

कांग्रेस से संबद्ध भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) केंद्रीय पैनल के चार पद में से किसी पर भी जीत हासिल नहीं कर सका। एबीवीपी ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पदों पर जीत दर्ज की।

अध्यक्ष पद के चुनाव में 24,576 वोट हासिल करने वाले एबीवीपी के यश डबास ने एनएसयूआई के विजय शंकर मीणा को 2,053 मतों के अंतर से हराया।

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निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने 30,615 वोट हासिल कर उपाध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की। शौकीन को एनएसयूआई ने टिकट नहीं दिया था, जिसके बाद उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा।

सचिव पद के लिये चुनाव में एबीवीपी उम्मीदवार रिया छाबड़ी ने 21,650 वोट हासिल किए, जबकि एनएसयूआई उम्मीदवार नम्रता चौधरी को 14,869 वोट मिले।

संयुक्त सचिव पद पर एबीवीपी के उम्मीदवार लक्ष्य राज सिंह ने 16,615 वोट हासिल किए, जबकि समाजवादी छात्र सभा के उम्मीदवार विशेष यादव को 15,778 वोट मिले।

पिछले साल एबीवीपी ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पदों पर जीत दर्ज की थी, जबकि एनएसयूआई ने उपाध्यक्ष पद हासिल किया था।

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डूसू चुनाव: 15वें दौर की मतगणना के बाद अध्यक्ष पद पर अभाविप के यश डबास आगे

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव के लिए जारी मतगणना के 15वें दौर के बाद अध्यक्ष पद पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के उम्मीदवार यश डबास भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) के विजय मीणा से 294 मत से आगे हैं।

उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन 22,682 मतों के साथ सबसे आगे हैं। अध्यक्ष पद के लिए डबास को अब तक 17,315 मत मिले हैं जबकि मीणा को 17,021 मत प्राप्त हुए हैं।

संयुक्त सचिव पद पर एनएसयूआई के गोपाल चौधरी 11,912 मतों के साथ आगे हैं। सचिव पद की दौड़ में अभाविप उम्मीदवार रिया छावड़ी को 14,731 मत मिले हैं जबकि एनएसयूआई उम्मीदवार को 11,310 मत प्राप्त हुए हैं।

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संयुक्त सचिव पद के लिए अभाविप उम्मीदवार को 11,415 मत मिले हैं जबकि समाजवादी छात्र सभा के उम्मीदवार को 11,182 मत प्राप्त हुए हैं।

इस चुनाव के नतीजों से शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए डूसू के केंद्रीय पैनल की तस्वीर साफ होगी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध अभाविप, कांग्रेस से संबद्ध एनएसयूआई और अखिल भारतीय छात्र संगठन (आइसा)-स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) का वाम गठबंधन देश के सबसे चर्चित छात्र संघ चुनावों में से एक में अपना वर्चस्व कायम करने की कोशिश कर रहे हैं।

पिछले साल अभाविप ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पद पर जीत हासिल की थी जबकि एनएसयूआई ने उपाध्यक्ष पद जीता था।

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डूसू चुनाव: 10वें दौर की मतगणना के बाद अध्यक्ष पद पर एनएसयूआई के विजय मीणा आगे

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव के लिए शुक्रवार को जारी मतगणना के 10वें दौर के बाद अध्यक्ष पद पर भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) के उम्मीदवार विजय मीणा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के यश डबास से 494 मतों से आगे हैं।

उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन 15,591 मतों के साथ सबसे आगे हैं।अध्यक्ष पद के लिए मीणा को अब तक 11,966 मत मिले हैं जबकि डबास को 11,472 मत प्राप्त हुए हैं।

सचिव पद की दौड़ में अभाविप उम्मीदवार को 9,953 मत मिले हैं जबकि एनएसयूआई उम्मीदवार को 7,712 मत प्राप्त हुए हैं।

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संयुक्त सचिव पद पर समाजवादी छात्र सभा के उम्मीदवार विशेष यादव 8,007 मतों के साथ आगे हैं। संयुक्त सचिव पद के लिए अभाविप को 5,386 और एनएसयूआई को 5,339 मत मिले हैं।

इस चुनाव के नतीजों से शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए डूसू के केंद्रीय पैनल की तस्वीर साफ होगी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध अभाविप, कांग्रेस से संबद्ध एनएसयूआई और अखिल भारतीय छात्र संगठन (आइसा)-स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) का वाम गठबंधन देश के सबसे चर्चित छात्र संघ चुनावों में से एक में अपना वर्चस्व कायम करने की कोशिश कर रहे हैं।

पिछले साल अभाविप ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पद पर जीत हासिल की थी जबकि एनएसयूआई ने उपाध्यक्ष पद जीता था।

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वित्त रहित स्कूल-कॉलेजों के लिए 461 करोड़ रुपये जारी : सम्राट

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को कहा है कि राज्य के अनुदानित स्कूलों और कॉलेजों के शिक्षकों एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिए 461 करोड़ रुपये का सहायक अनुदान जारी किया गया है।

श्री चौधरी ने आज सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी संदेश में कहा कि शिक्षकों, कर्मचारियों और शिक्षण संस्थानों के कल्याण के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और उच्च शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए सरकार आवश्यक कदम उठा रही है।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षकों एवं शिक्षकेतर कर्मियों के हितों को ध्यान में रखते हुए वेतन भुगतान के लिए जारी यह राशि शिक्षण संस्थानों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि उन्नत शिक्षा ही उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है।

उल्लेखनीय है कि शिक्षकों एवं शिक्षकेतर कर्मियों के भुगतान के लिए सरकार की ओर से लगातार राशि स्वीकृत एवं विमुक्त की जा रही है। इसके तहत विभिन्न अनुदानित शिक्षण संस्थानों के कर्मियों के वेतन एवं अन्य मदों में भुगतान के लिए राशि जारी की जा रही है।

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बिहार की चार हस्तियों को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार

बिहार की चार फिल्मी हस्तियों को वर्ष 2024 के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। बिहार के लिए 72वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह खास होने जा रहा है। बिहार से जुड़ी चार फिल्मी हस्तियों अभिनेता संजय मिश्रा, निर्देशक कमलेश के. मिश्र, निर्माता मिंटी मिश्रा और फिल्म समीक्षक संजीव श्रीवास्तव को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 22 सितंबर को गुजरात के एकता नगर (केवाड़िया) में आयोजित समारोह में पुरस्कार प्रदान करेंगी। दरभंगा निवासी अभिनेता संजय मिश्रा को फिल्म ‘भक्षक’ में बेहतरीन अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का रजत कमल प्रदान किया जाएगा। ‘भक्षक’ की कहानी चर्चित मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड से प्रेरित है। गोपालगंज निवासी निर्देशक कमलेश के. मिश्र और निर्माता मिंटी मिश्रा को फिल्म ‘काकोरी’ के लिए सर्वश्रेष्ठ जीवनीपरक/ऐतिहासिक पुनर्निर्माण/संकलन फिल्म का रजत कमल प्रदान किया जाएगा। देशभक्ति पर आधारित यह फिल्म 1925 के ऐतिहासिक ‘काकोरी ट्रेन एक्शन’ के शताब्दी वर्ष पर काकोरी के अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि स्वरूप समर्पित है। फिल्म में काकोरी की ऐतिहासिक घटना और उससे जुड़े स्वतंत्रता सेनानियों के शौर्य, संकल्प और उनके अमिट योगदान को रेखांकित किया गया है।

कमलेश के. मिश्र की फ़िल्म को पहले भी राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्राप्त हो चुका हैं। उनकी फ़िल्म ‘मधुबनी: द स्टेशन ऑफ कलर्स’ के लिए गैर-फीचर फिल्म श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ कथन का राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार मिला था। फिल्मकार कमलेश मिश्र की पहली निर्देशित फीचर फिल्म ‘आज़मगढ़’ है, जिसमें पंकज त्रिपाठी ने मुख्य नेगेटिव भूमिका निभाई है। यह फिल्म आतंकवाद के विषय पर आधारित है। अपनी फिल्मों में विशेष दृष्टिकोण से इतिहास और रिसर्च को प्रमुख स्थान देते हैं। हाल ही में उन्होंने 2020 के दिल्ली दंगों पर ‘दिल्ली दंगे…जलने और दोषारोपण की कहानी’ ( दिल्ली राइट्स- अ टेल ऑफ बर्न एंड ब्लेम) डॉक्यूमेंट्री बनाई थी, जो तब काफ़ी चर्चित हुई थी। उनकी पहली शोर्ट फ़िल्म “किताब” ने वैश्विक ख्याति अर्जित की। काकोरी के निर्माता जसविंदर सिंह दिल्ली से और मिंटी मिश्रा बिहार के गोपालगंज की हैं। यह फ़िल्म उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के सहयोग से बनी है। बिहार के दरभंगा के रहने वाले संजय मिश्रा देश के प्रसिद्ध अभिनेता हैं।

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तीन दशक से भी ज्यादा समय से अभिनय के क्षेत्र में सक्रिय हैं। प्रभावशाली अभिनय उनकी पहचान है। 1995 में फिल्म ओह डार्लिंग! ये है इंडिया! से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी। ‘आंखों देखी ‘ (2015) और ‘वध’ (2022) में उन्हें उम्दा अभिनय के लिए दो बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर क्रिटिक्स अवार्ड मिल चुका है। सीतामढ़ी निवासी पत्रकार, लेखक और फिल्म समीक्षक संजीव श्रीवास्तव को हिंदी में सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक के लिए स्वर्ण कमल प्रदान किया जाएगा। वह करीब ढाई दशक से दिल्ली में पत्रकारिता और फिल्मों पर लेखन कर रहे हैं। वह मुंबई में भी फिल्मों की रिपोर्टिंग कर चुके हैं। श्री श्रीवास्तव की सिनेमा पर कई पुस्तकें प्रकाशित हैं, जिनमें ‘समय सिनेमा और इतिहास’, ‘सिनेमा की समानांतर दुनिया’ और ‘आपातकाल का सिनेमा’ प्रमुख हैं।

उन्होंने ‘माधुरी’ पत्रिका के संस्थापक संपादक अरविंद कुमार से स्वर्णिम दौर के सिनेमा पर लंबी बातचीत भी की है, जिसे वह सिनेमाई अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं। फिल्मकार कमलेश के मिश्र ने ‘काकोरी’ को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान उनके लिए अत्यंत गौरव और खुशी की बात है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार केवल किसी फिल्म या फिल्मकार का सम्मान नहीं, बल्कि इतिहास, समाज और संवेदनाओं को ईमानदारी से सामने रखने वाले रचनात्मक प्रयास की राष्ट्रीय स्वीकृति है। श्री मिश्र ने कहा कि वह इस सम्मान को व्यक्तिगत उपलब्धि से अधिक काकोरी के अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि के रूप में देखते हैं। काकोरी रेल एक्शन भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का महत्वपूर्ण पड़ाव था और फिल्म के माध्यम से इस ऐतिहासिक घटना को उचित महत्व के साथ आज की पीढ़ी तक पहुंचाना उनका उद्देश्य था।

उन्होंने कहा कि फिल्म का निर्माण पूरी निष्ठा के साथ किया गया है। उन्होंने निर्माता जसविंदर सिंह, मिंटी मिश्रा, उत्तर प्रदेश सरकार तथा फिल्म से जुड़े सभी कलाकारों और तकनीशियनों का आभार व्यक्त किया और कहा कि यह पुरस्कार सामूहिक प्रयास और समर्पण की सफलता है। कमलेश के मिश्र ने कहा कि उन्हें सबसे अधिक खुशी इस बात की है कि राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के माध्यम से काकोरी के वीर क्रांतिकारियों की स्मृति और उनके बलिदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान के साथ याद किया जा रहा है। उन्होंने यह सम्मान सभी अमर शहीदों को समर्पित किया। मिंटी मिश्रा ने कहा कि काकोरी जैसी ऐतिहासिक घटना पर फिल्म का हिस्सा बनना मेरे लिए बेहद महत्वपूर्ण और सुखद अनुभव रहा। अब इस फिल्म को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलना इस पूरी यात्रा को और विशेष बना देता है।

मिंटी मिश्रा ने कहा कि काकोरी रेल एक्शन स्वतंत्रता आंदोलन का महत्वपूर्ण अध्याय है और काकोरी के अमर क्रांतिकारियों के साहस, त्याग और बलिदान को आज की पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी थी। उन्होंने कहा कि काकोरी के माध्यम से इतिहास की महत्वपूर्ण लेकिन कम चर्चित घटना को प्रमुखता से सामने लाने का छोटा-सा प्रयास किया गया। उन्होंने उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के सहयोग से निर्मित फिल्म के मुख्य निर्माता जसविंदर सिंह के प्रति आभार जताते हुए कहा कि लेखक-निर्देशक कमलेश के मिश्र और पूरी टीम के समर्पण ने इस प्रयास को सार्थक बनाया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान पूरी टीम के लिए गर्व का क्षण है। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलने पर श्री श्रीवास्तव ने कहा कि सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक का राष्ट्रीय पुरस्कार मिलना उनके लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष बिहार की चार हस्तियों को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलना भी बड़ी बात है।

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गूगल जेमिनी एआई ने सुरक्षा परीक्षण के दौरान तीन कंपनियों के सिस्टम में लगाई सेंध

गूगल के कृत्रिम मेधा (एआई) मॉडल जेमिनी ने साइबर सुरक्षा क्षमताओं के परीक्षण के दौरान तीन कंपनियों के सिस्टम में स्वायत्त रूप से सेंध लगाई। कंपनी ने यह जानकारी दी है। इसे इस तरह की कार्रवाई को अंजाम देने वाला जेमिनी का पहला ज्ञात मामला माना जा रहा है।

यह घटना इजरायली साइबर सुरक्षा फर्म ‘इर्रेगुलर’ के एक ऑनलाइन परीक्षण के दौरान हुई। परीक्षण के तहत एआई मॉडल को एक काल्पनिक वातावरण में एक नकली कंपनी के डेटा पर लक्ष्य साधने का काम दिया गया था।

परीक्षण प्रणाली के इंटरनेट से जुड़े होने और नकली कंपनी का नाम एक वास्तविक कंपनी से मेल खाने के कारण जेमिनी ने इंटरनेट पर मौजूद सार्वजनिक जानकारियों का उपयोग किया तथा पासवर्ड एवं क्रेडेंशियल्स का अनुमान लगाकर असली कंपनियों के सर्वर तक पहुंच बना ली।

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बीबीसी ने गूगल अधिकारी के हवाले से बताया कि जैसे ही मॉडल को इसका अहसास हुआ, ‘मॉडल स्वतः ही रुक गया’।

गूगल की सुरक्षा इंजीनियरिंग उपाध्यक्ष हीदर एडकिन्स ने एक बयान में कहा, “हमने तीनों प्रभावित कंपनियों को इसकी जानकारी दे दी है और अपने ट्रेनिंग पार्टनर के साथ मिलकर परीक्षण प्रक्रियाओं में आवश्यक सुधार किये हैं।”

उन्होंने कहा कि यह घटना शक्तिशाली एआई मॉडलों को जिम्मेदारी से कार्य करने के लिए प्रशिक्षित करने का महत्व बताती है।

गौरतलब है कि हाल ही में अन्य एआई सिस्टमों में भी इस तरह के उल्लंघन देखे गये हैं। इससे पहले जुलाई में एंथ्रोपिक के क्लॉड और ओपनएआई के मॉडलों के भी सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने और साइबर हमलों को अंजाम देने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

एआई के विकास की गति और इससे पैदा होने वाले संभावित खतरों को लेकर तकनीकी जगत और वैश्विक नेताओं के बीच अच्छी खासी बहस तेज हो गयी है। जहां एक ओर एनवीडिया के सीईओ जेन्सन हुआंग ने एआई विकास को तेज गति से आगे बढ़ाने की वकालत की है, वहीं ओपनएआई के मुख्य कार्यकारी सैम आल्टमैन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में इस तकनीक की सुरक्षा पर अपनी बात रखने वाले हैं।

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