शुरुआती तेजी के बाद 330 अंक लुढ़का सेंसेक्स

घरेलू शेयर बाजारों में शुरुआती तेजी खोते हुए प्रमुख सूचकांक गिरावट में बंद हुए और बीएसई का सेंसेक्स 330 अंक रहा।

सेंसेक्स 42 अंक ऊपर 74,901.50 अंक पर खुला और ऊपर 75,038.93 अंक तक गया। हालांकि पहले घंटे के कारोबार के बाद बिकवाली शुरू हो गयी। अंत में यह 329.91 अंक (0.44 प्रतिशत) गिरकर 74,529.08 अंक पर रहा।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक भी 85.30 अंक यानी 0.36 प्रतिशत फिसलकर 23,329 अंक पर बंद हुआ। पिछले कारोबारी दिवस पर दोनों प्रमुख सूचकांक ऊपर रहे थे।

वृहत बाजार में भी बिकवाली हावी रही। निफ्टी मिडकैप-50 सूचकांक 0.01 प्रतिशत और स्मॉलकैप-100 सूचकांक 0.23 प्रतिशत फिसल गया।

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सेक्टर आधारित सूचकांकों में मीडिया, रियल्टी, धातु और रसायन समूहों में तेजी रही। वहीं, आईटी, एफएमसीजी, बैंकिंग, वित्त, ऑटो, फार्मा, स्वास्थ्य, टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद और तेल एवं गैस समूहों के सूचकांकों में गिरावट रही।

सेंसेक्स की कंपनियों में बजाज फिनसर्व का शेयर डेढ़ फीसदी से अधिक टूट गया। ट्रेंट, बजाज फाइनेंस, सन फार्मा, टीसीएस और अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयर एक से डेढ़ फीसदी टूट गए।

भारतीय स्टेट बैंक, इंफोसिस, एलएंडटी, आईटीसी, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, हिंदुस्तान यूनीलिवर, भारती एयरटेल, एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, टेक महिंद्रा, रिलायंस इंडस्ट्रीज, महिंद्रा एंड महिंद्रा, पावर ग्रिड और आईसीआईसीआई बैंक के शेयर भी लाल निशान में रहे।

इटरनल का शेयर करीब दो प्रतिशत और इंडिगो का डेढ़ फीसदी से ज्यादा चढ़ा। टाइटन और टाटा स्टील में भी तेजी देखी गई।

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‘प्रेम कीटाणु’ के ट्रेलर में वीर पहाड़िया का कॉमिक अंदाज और रोमांटिक चार्म

अभिनेता वीर पहाड़िया आगामी कमिंग-ऑफ-एज रोमांटिक कॉमेडी-ड्रामा फिल्म ‘प्रेम कीटाणु’ के ट्रेलर में कॉमिक अंदाज और रोमांटिक चार्म से दर्शकों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। अपूर्व सिंह कार्की के निर्देशन में बनी फिल्म में वीर एक मासूम आशिक और सच्चे दोस्त की भूमिका में नजर आएंगे।

ट्रेलर में वीर का बेफिक्र कॉलेज बैकबेंचर वाला किरदार और निखिल विजय के साथ उनकी दोस्ती तथा मजेदार नोकझोंक मनोरंजन का प्रमुख हिस्सा है। वहीं आफिया सैयद के साथ उनकी रोमांटिक केमिस्ट्री कहानी में प्रेम का रंग भरती है। 

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अपारशक्ति खुराना की एंट्री के साथ कहानी में लव ट्रायंगल की झलक भी देखने को मिलती है। फिल्म में राकेश बेदी भी अहम भूमिका में हैं। ‘प्रेम कीटाणु’ 02 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

इसके अलावा वीर पहाड़िया एक्शन थ्रिलर फिल्म ‘नाम-टू लिव इज़ वॉर’ में भी नजर आएंगे। सिद्धांत सचदेव के निर्देशन में बनी इस फिल्म में उनके साथ वरुण शर्मा दिखाई देंगे और महेश भट्ट इसके प्रस्तुतकर्ता हैं।

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‘राका’ के नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड

आइकॉन स्टार अल्लू अर्जुन अभिनीत और एटली निर्देशित फिल्म ‘राका’ ने सिनेमाई तकनीक के क्षेत्र में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। फिल्म ने एक साथ सर्वाधिक लोगों के रियल-टाइम मोशन कैप्चर का रिकॉर्ड अपने नाम किया है।

फिल्म के लिए फरवरी 2026 में एक साथ 37 कलाकारों का रियल-टाइम मोशन कैप्चर किया गया था, जिसे 15 सितंबर 2026 को आधिकारिक रूप से प्रमाणित किया गया। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के वरिष्ठ निर्णायक स्वप्निल डांगरिकर ने विशेष समारोह में अल्लू अर्जुन और निर्देशक एटली को प्रमाणपत्र प्रदान किया।

इस मोशन-कैप्चर अभ्यास में चार वर्ष के बच्चे से लेकर 70 वर्ष की उम्र तक के कुल 37 कलाकारों को एक साथ कैप्चर किया गया। इसके लिए एक ही कैप्चर वॉल्यूम में सभी कलाकारों के प्रदर्शन को सटीकता और गुणवत्ता के साथ रिकॉर्ड करने की चुनौती थी।

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रिकॉर्ड बनाने के दौरान 92 ऑप्टिकल मोशन-कैप्चर कैमरों का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा कैप्चर, कैलिब्रेशन, नेटवर्किंग, सिंक्रोनाइजेशन, रियल-टाइम अनरियल विजुअलाइजेशन और फेसियल कैप्चर समेत कई तकनीकी प्रणालियों का इस्तेमाल किया गया।

अल्लू अर्जुन ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह सिनेमा की सीमाओं को आगे बढ़ाने और वैश्विक स्तर पर नया मानदंड स्थापित करने वाला क्षण है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय निर्देशक एटली के विजन, पूरी टीम की मेहनत और सन पिक्चर्स के सहयोग को दिया।

एटली ने कहा कि बचपन से गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के बारे में सुनते आए हैं और कभी नहीं सोचा था कि एक दिन उनकी टीम खुद ऐसा रिकॉर्ड बनाएगी। उन्होंने 37 मोशन-कैप्चर एसेट्स को एक साथ कैप्चर करने के लिए मिले सम्मान को पूरी टीम की मेहनत का परिणाम बताया।

फिल्म की तकनीकी टीम ने इसकी जरूरतों और बड़े पैमाने को ध्यान में रखते हुए विशेष मोशन-कैप्चर पाइपलाइन और वर्कफ्लो विकसित किया। निर्माताओं के अनुसार, यह उपलब्धि फिल्म की तकनीकी टीम, वीएफएक्स वर्कफ्लो और कलाकारों एवं क्रू के सामूहिक प्रयास का परिणाम है।

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महिला क्रिकेट टीम ने भारत को एशियाई खेलों में दिलाया पहला स्वर्ण पदक

महिला क्रिकेट टीम ने मंगलवार को आइची के निशिन में कारोजी एथलेटिक पार्क में खेले गए फाइनल में श्रीलंका को हराकर भारत को एशियन गेम्स 2026 में पहला स्वर्ण पदक दिलाया। हांगझोउ 2023 के गोल्ड मेडल मैच की तरह ही इस मुकाबले में भी भारतीय महिलाओं ने 147 रनों से जीत हासिल की और एशियन गेम्स क्रिकेट चैंपियन के तौर पर अपना दबदबा बनाए रखा।

स्मृति मंधाना ने 45 गेंदों में 79 रन बनाए, जिससे भारत ने 216/3 का स्कोर खड़ा किया। यह एशियन गेम्स में महिला टी 20 क्रिकेट का सबसे बड़ा स्कोर है। दीप्ति शर्मा ने छह रन देकर तीन विकेट लिए। एशियन गेम्स 2026 में यह भारत का पहला गोल्ड मेडल है। श्रीलंका की टीम को लगातार दूसरे संस्करण में सिल्वर मेडल से ही संतोष करना पड़ा, जबकि पाकिस्तान ने बंगलादेश को तीसरे स्थान के लिए हुए प्लेऑफ़ में हराकर ब्रॉन्ज़ मेडल जीता। भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करने का फैसला किया।

स्मृति मंधाना की 45 गेंदों में 79 रनों की तूफानी पारी की बदौलत भारत ने 216/3 का स्कोर बनाया, जो इस महाद्वीपीय टूर्नामेंट का एक रिकॉर्ड है। शेफाली वर्मा और ऋचा घोष दोनों ही दुर्भाग्यशाली रहीं और अर्धशतक बनाने से चूक गईं। इसके बाद भारतीय गेंदबाज़ों ने श्रीलंका को 69 रनों पर समेट दिया और आसानी से जीत हासिल की। भारतीय ओपनर स्मृति मंधाना और शेफाली वर्मा ने शुरुआत से ही श्रीलंकाई गेंदबाज़ों का डटकर सामना किया और पावरप्ले में 66 रन जोड़े। शेफाली, जिन्होंने बंगलादेश के खिलाफ़ सेमीफ़ाइनल में शतक लगाया था, ने श्रीलंका की कप्तान और स्टार ऑलराउंडर चामरी अथापथु के पांचवें ओवर में तीन छक्के जड़े।

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मंधाना ने 30 गेंदों में अपनी 37वीं टी 20 फिफ्टी पूरी की, जबकि शेफाली (48) हाफ-सेंचुरी से दो रन दूर रह गईं; 10वें ओवर में 17 साल की स्पिनर चमुडी प्रबोदा ने उन्हें आउट किया, तब भारत का स्कोर 98 रन था। इसके बाद हरमनप्रीत ने स्मृति के साथ 42 रनों की शानदार साझेदारी की, लेकिन 15वें ओवर में कविशा दिलहारी ने भारतीय कप्तान को कैच आउट करा दिया। स्मृति भी पूरी पारी नहीं खेल पाईं; स्कोरिंग रेट बढ़ाने की कोशिश में सुगंदिका कुमारी के 17वें ओवर में वह आउट हो गईं। हालांकि, ऋचा घोष की तूफानी पारी (22 गेंदों में नाबाद 49 रन) और श्रीलंकाई गेंदबाजों की खराब गेंदबाजी की बदौलत भारत ने 216/3 का स्कोर बनाया – जो एशियाई खेलों में महिला क्रिकेट का अब तक का सबसे बड़ा टीम स्कोर है। इससे पहले यह रिकॉर्ड हांगकांग चीन के नाम था, जिसने हांगझोऊ 2023 में क्वार्टर-फाइनल क्वालीफायर में मंगोलिया के खिलाफ 202/4 रन बनाए थे।

श्रीलंका की ओर से चामरी अथापथु ने रन बनाने की कोशिश में टीम की कमान संभाली, लेकिन भारत को शेफाली ने शुरुआती सफलताएं दिलाईं; उन्होंने तीसरे और पांचवें ओवर में क्रमशः इमेशा दुलानी और हसिनी परेरा को आउट किया। दीप्ति शर्मा ने सबसे अहम विकेट लिया और पावरप्ले के ठीक बाद अथापथु (21 गेंदों में 29 रन) को आउट किया। इस विकेट ने श्रीलंकाई टीम की उम्मीदों को बड़ा झटका दिया। लगातार अंतराल पर विकेट गिरते रहे और श्रीलंकाई पारी 15.4 ओवर में सिमट गई।

दीप्ति भारतीय गेंदबाजों में सबसे सफल रहीं और उन्होंने 3/6 के आंकड़े दर्ज किए। शेफाली वर्मा, श्री चरानी और श्रेयंका पाटिल ने भी दो-दो विकेट लिए। संक्षिप्त स्कोर: भारत महिला टीम ने 20 ओवर में 216/3 (स्मृति मंधाना 79, ऋचा घोष 49 नाबाद; चमुडी प्रबोदा 1/34) बनाए और श्रीलंका को 15.4 ओवर में 69/10 (चमारी अथापथु 29; दीप्ति शर्मा 3/6) पर समेटकर 147 रनों से जीत हासिल की।

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मार्क वुड ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से लिया संन्यास

इंग्लैंड के मार्क वुड ने लंबे समय तक चोटों से जूझने के बाद 36 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया है। अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के 146 मैचों में उन्होंने कुल 253 विकेट झटके, जिसमें 38 टेस्ट में 30.79 की औसत से लिए 119 विकेट शामिल हैं। वुड की पहचान इंग्लैंड के सबसे तेज़ गेंदबाज़ों में होती है। वह 2015 की ऐशेज़, 2019 के वनडे विश्व कप और 2022 के टी 20 विश्व कप का ख़िताब जीतने वाली इंग्लैंड टीम के अहम सदस्य रहे हैं।

2025 चैंपियंस ट्रॉफ़ी में घुटने की चोट के बाद से वुड ने केवल एक ही मुक़ाबला खेला था, जो पिछले ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर ऐशेज़ सीरीज़ का पहला टेस्ट था। मैदान से दूर रहने के दौरान उन्होंने कॉमेंट्री और ब्रॉडकास्टिंग में भी अपनी अलग पहचान बनाई। वुड ने मंगलवार सुबह संन्यास का ऐलान किया और इसके तुरंत बाद वह अपने घरेलू मैदान डरहम (रिवरसाइड) में इंग्लैंड-श्रीलंका वनडे के प्रसारण से जुड़ गए।

वुड डरहम के लिए टी 20 ब्लास्ट और दुनिया भर की टी 20 लीग में खेलना जारी रखेंगे। इसके साथ ही वह मीडिया में काम करेंगे। साथ ही उन्होंने लेवल-3 कोचिंग का कोर्स भी पूरा कर लिया है। इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) ने साफ़ कर दिया था कि 2023 में मिला उनका तीन साल का केंद्रीय अनुबंध आगे नहीं बढ़ाया जाएगा, जिसके बाद उन्होंने संन्यास का यह फ़ैसला लिया।

स्काई स्पोर्ट्स से बात करते हुए वुड ने बताया कि लगातार चोटों से जूझते हुए वह मानसिक और शारीरिक रूप से थक चुके थे। वुड ने कहा, “पर्थ में नवंबर में खेले गए अपने आख़िरी मैच के बाद लंबा वक़्त बीत गया है। तक़रीबन डेढ़ साल से चोटों से लड़ते हुए मुझे एहसास हुआ कि अब मैं दोबारा उस रफ़्तार और स्तर पर गेंदबाज़ी नहीं कर पाऊंगा। मेरा अनुबंध सितंबर में ख़त्म हो रहा है और मुझे लगा कि हटने का यही सही समय है। मैं कभी इंग्लैंड छोड़ना नहीं चाहता था, लेकिन नए युवा गेंदबाज़ बेहतरीन काम कर रहे हैं। अब चर्चा उन खिलाड़ियों की होनी चाहिए जिन्हें नया कॉन्ट्रैक्ट मिलना है। अब मैं अपनी ज़िंदगी के अगले पड़ाव पर ध्यान लगा सकता हूं।

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वुड ने 2015 में अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया और अपनी तेज़ रफ़्तार व मैदान पर मज़ाकिया अंदाज़ के चलते जल्द ही फ़ैंस के चहेते बन गए। उसी साल ट्रेंट ब्रिज टेस्ट में नाथन लियोन को आउट कर उन्होंने इंग्लैंड की ऐशेज़ जीत पक्की की थी। इसके बाद वह इयोन मॉर्गन की सीमित ओवरों की टीम का मुख्य हथियार बन गए।

लगातार चोटों ने उनके करियर की रफ़्तार रोकी, लेकिन 2019 में रन-अप लंबा करने के बाद उन्होंने दमदार वापसी की। सेंट लूसिया में वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ उन्होंने इंग्लैंड के टेस्ट इतिहास के सबसे तेज़ स्पेल में से एक फेंककर पारी में पहली बार पांच विकेट झटके। उसी साल घरेलू मैदान पर इंग्लैंड को वनडे विश्व कप जिताने में उनका बड़ा रोल रहा, जहां उन्होंने फ़ाइनल में रॉस टेलर के बड़े विकेट समेत कुल 18 शिकार किए।

वुड ने 2019-20 के साउथ अफ़्रीका दौरे पर कमाल की गेंदबाज़ी की और 2021-22 की ऐशेज़ में 17 विकेट लेकर इंग्लैंड के सबसे कामयाब गेंदबाज़ रहे। 2022 टी 20 विश्व कप में उन्होंने चार मैचों में नौ विकेट लिए, जबकि 2023 ऐशेज़ के हेडिंग्ले टेस्ट में मैच जिताऊ प्रदर्शन कर इंग्लैंड की सीरीज़ में वापसी कराई थी।

इंग्लैंड के क्रिकेट निदेशक रॉब की ने 2023 के अंत में वुड को फ़्रेंचाइज़ी लीगों में जाने से रोकने के लिए तीन साल का केंद्रीय अनुबंध दिया था, जो उस समय एक बड़ा फ़ैसला था। हालांकि चोटों के चलते वह इस दौरान सिर्फ़ सात टेस्ट खेल पाए और उनके खाते में 15 विकेट ही आए।

2025 चैंपियंस ट्रॉफ़ी में अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ दर्द में गेंदबाज़ी करने के बाद उन्हें घुटने की सर्जरी करानी पड़ी थी। इंग्लैंड की मेडिकल टीम ने ऐशेज़ के लिए उन्हें संभालने की पूरी कोशिश की, लेकिन वुड ने बाद में माना कि वह पहले टेस्ट के लिए पूरी तरह फ़िट नहीं थे। पर्थ में बिना विकेट लिए 11 ओवर फेंकने के बाद उनका घुटना फिर जवाब दे गया और वहीं उनका अंतरराष्ट्रीय करियर भी थम गया।

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करम पर्व: प्रकृति, भाई-बहन के स्नेह और सामुदायिक एकता का पर्व

रांची: झारखंड की लोक-संस्कृति और आदिवासी परंपराओं में करम पर्व का विशेष स्थान है। प्रकृति के प्रति आस्था, भाई-बहन के स्नेह, कृषि समृद्धि और सामुदायिक एकता का संदेश देने वाला यह पर्व हर वर्ष उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जाता है। करम पर्व में प्रकृति पूजा के साथ लोकगीत, नृत्य और पारंपरिक रीति-रिवाजों की जीवंत झलक देखने को मिलती है।

करम पर्व की सबसे खास पहचान करम डाल है। पर्व के अवसर पर युवक-युवतियां और महिलाएं करम वृक्ष की डाल लाकर उसे विधि-विधान के साथ स्थापित करते हैं। इसके बाद करम देवता की पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि करम देवता सुख, समृद्धि, अच्छी फसल और परिवार की खुशहाली प्रदान करते हैं। कई समुदायों में बहनें अपने भाइयों की सुख-समृद्धि और लंबी आयु की कामना करते हुए व्रत भी रखती हैं।

पर्व से पहले गांवों और बस्तियों में तैयारियां शुरू हो जाती हैं। घर-आंगन की साफ-सफाई, पारंपरिक पकवानों की तैयारी और पूजा की सामग्री जुटाने के साथ ही युवाओं की टोली करम गीतों और नृत्य की तैयारी करती है। करम पर्व की रात मांदर, नगाड़े और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर लोग सामूहिक नृत्य करते हैं। गीतों में प्रकृति, खेती, प्रेम, रिश्तों और सामाजिक जीवन की भावनाएं अभिव्यक्त होती हैं।

करम पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रकृति और मनुष्य के रिश्ते का उत्सव भी है। करम वृक्ष की पूजा के माध्यम से प्रकृति के संरक्षण और उसके प्रति सम्मान का संदेश दिया जाता है। कृषि आधारित समाज में यह पर्व अच्छी बारिश, बेहतर फसल और समृद्धि की कामना से भी जुड़ा हुआ है।

शहरी क्षेत्रों में भी करम पर्व की रौनक लगातार बढ़ रही है। विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक संस्थाओं की ओर से करम महोत्सव आयोजित किए जाते हैं, जहां पारंपरिक वेशभूषा में लोग शामिल होते हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में करम गीत और नृत्य नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ने का काम करते हैं।

आधुनिकता के दौर में जहां जीवनशैली तेजी से बदल रही है, वहीं करम पर्व झारखंड की सांस्कृतिक पहचान को जीवंत बनाए रखने का माध्यम बना हुआ है। यह पर्व आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देता है कि प्रकृति का सम्मान, रिश्तों की मजबूती और सामुदायिक एकता ही समृद्ध समाज की आधारशिला है।

करम पर्व क्यों मनाया जाता है, क्या है इसकी कहानी?

भाई-बहन के प्रेम, प्रकृति पूजा और सुख-समृद्धि की कामना से जुड़ा है करम पर्व

 मांदर की थाप, करम गीतों की गूंज, पारंपरिक वेशभूषा और करम डाली के आसपास थिरकते कदम… झारखंड में करम पर्व आते ही गांव से लेकर शहर तक प्रकृति और लोक संस्कृति का रंग दिखाई देने लगता है। यह पर्व सिर्फ पूजा-पाठ का अवसर नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति सम्मान, भाई-बहन के प्रेम, कृषि जीवन और सामुदायिक एकता का उत्सव है।

भाद्रपद महीने में मनाया जाने वाला करम पर्व झारखंड की प्रमुख लोक एवं आदिवासी परंपराओं में शामिल है। अलग-अलग समुदायों में इसके रीति-रिवाजों में कुछ अंतर जरूर दिखाई देता है, लेकिन करम देवता की पूजा और करम वृक्ष की डाल का विशेष महत्व लगभग हर जगह देखने को मिलता है।

करम डाली में आस्था

करम पर्व की सबसे महत्वपूर्ण परंपरा करम वृक्ष की डाली को पूजा स्थल पर स्थापित करना है। इसे प्रकृति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। पूजा के दौरान करम देवता से परिवार की खुशहाली, अच्छी फसल और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।

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कई स्थानों पर पर्व से पहले युवतियां और महिलाएं विशेष तैयारी करती हैं। पूजा के लिए अनाज, फल और पारंपरिक सामग्री जुटाई जाती है। करम डाली को स्थापित करने के बाद गीत-संगीत और नृत्य का दौर शुरू होता है, जो देर रात तक चलता है।

क्या है करम पर्व की लोककथा?

करम पर्व से जुड़ी कई लोककथाएं अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों में प्रचलित हैं। इनमें सबसे प्रसिद्ध कथाओं में सात भाइयों और उनकी बहन की कहानी सुनाई जाती है।

लोककथा के अनुसार, सात भाई अपनी बहन से बहुत प्रेम करते थे। एक बार वे किसी महत्वपूर्ण कार्य में इतने व्यस्त हो गए कि करम पूजा और अपनी बहन की भावनाओं पर ध्यान नहीं दे पाए। बहन करम पर्व के अवसर पर करम देवता की पूजा करना चाहती थी, लेकिन भाइयों ने उसकी बात को महत्व नहीं दिया।

कहा जाता है कि इससे करम देवता नाराज हो गए और परिवार पर संकट आने लगा। घर की समृद्धि समाप्त होने लगी और भाइयों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। बाद में उन्हें अपनी भूल का एहसास हुआ। उन्होंने करम देवता की पूजा की और अपनी गलती के लिए क्षमा मांगी। इसके बाद परिवार में फिर से सुख-समृद्धि लौट आई।

इसी लोकविश्वास के आधार पर करम पर्व को भाई-बहन के रिश्ते, परिवार की खुशहाली और कर्म के महत्व से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, इस कथा के अलग-अलग स्थानीय रूप भी मिलते हैं।

सिर्फ पूजा नहीं, प्रकृति से रिश्ता

करम पर्व की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें प्रकृति को केंद्र में रखा गया है। करम वृक्ष की पूजा इस बात का प्रतीक है कि मानव जीवन प्रकृति से अलग नहीं है।

झारखंड का पारंपरिक जीवन जंगल, जमीन, जल और कृषि से गहराई से जुड़ा रहा है। ऐसे में करम पर्व केवल धार्मिक आस्था को अभिव्यक्त नहीं करता, बल्कि प्रकृति के संरक्षण और उसके प्रति कृतज्ञता की भावना को भी मजबूत करता है।

गीत और नृत्य हैं पर्व की जान

करम पर्व की पहचान इसके लोकगीत और सामूहिक नृत्य से भी है। मांदर और नगाड़े की थाप पर युवक-युवतियां पारंपरिक गीत गाते हुए सामूहिक नृत्य करते हैं।

करम गीतों में प्रेम, प्रकृति, कृषि, परिवार और सामाजिक जीवन की झलक मिलती है। गीतों और नृत्य के माध्यम से एक पीढ़ी अपनी संस्कृति दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाती है। यही वजह है कि करम पर्व आज भी युवाओं के बीच उतना ही लोकप्रिय है।

बदलते समय में भी कायम है परंपरा

शहरों के विस्तार और बदलती जीवनशैली के बावजूद करम पर्व की सांस्कृतिक चमक कम नहीं हुई है। रांची समेत झारखंड के विभिन्न हिस्सों में सामुदायिक स्तर पर करम पूजा और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

युवा पीढ़ी भी पारंपरिक वेशभूषा पहनकर करम गीत और नृत्य में हिस्सा लेती है। सोशल मीडिया और आधुनिक मंचों ने करम की लोक संस्कृति को व्यापक पहचान देने में भी भूमिका निभाई है।

करम पर्व इसलिए खास है क्योंकि यह अतीत की परंपराओं को वर्तमान की पीढ़ी से जोड़ता है। करम डाली के नीचे होने वाली पूजा से लेकर मांदर की थाप पर होने वाला सामूहिक नृत्य तक, हर रंग झारखंड की मिट्टी, प्रकृति और लोकजीवन की कहानी कहता है।

करम पर्व का संदेश भी उतना ही सरल और गहरा है—प्रकृति का सम्मान करें, रिश्तों को मजबूत बनाएं और समाज में मिल-जुलकर खुशियां बांटें।

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जमुई में लड़की से बदसलूकी: राज्य महिला आयोग ने रिपोर्ट मांगी

बिहार के जमुई जिले में सड़क किनारे एक लड़के और लड़की के साथ ‘बदसलूकी’ के मामले में पुलिस ने सोमवार को कहा कि उसने कथित घटना से जुड़े वीडियो के आधार पर सात आरोपियों की पहचान कर ली है और उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है।

वहीं, बिहार राज्य महिला आयोग ने वीडियो का संज्ञान लेते हुए कथित घटना पर जिलाधिकारी से रिपोर्ट मांगी है।

जमुई के पुलिस अधीक्षक (एसपी) विश्वजीत दयाल ने संवाददाताओं से कहा कि कथित घटना 19 सितंबर की शाम की है और वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे वाहन के नंबर के आधार पर पीड़ित लड़के और लड़की का पता लगा लिया गया है।

उन्होंने कहा, “कथित घटना दो दिन पुरानी है, लेकिन कल तक न तो पीड़ित लड़के और न ही लड़की ने पुलिस से कोई शिकायत की थी। आज जब वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तब हमने दोनों पीड़ितों का पता लगाया।”

दयाल ने बताया कि जमुई थाने में दर्ज प्राथमिकी में पीड़ितों ने किसी आरोपी का नाम नहीं लिया है, लेकिन वीडियो फुटेज की मदद से करीब सात लोगों की पहचान कर ली गई है और उन्हें जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

पुलिस के मुताबिक, मामले में गिरफ्तार तीन आरोपियों से पूछताछ जारी है और सोशल मीडिया से वायरल वीडियो हटाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

दयाल ने बताया कि पीड़ित लड़का और लड़की एक ही कोचिंग संस्थान में पढ़ते हैं। हालांकि, उन्होंने यह कहते हुए कोई अन्य जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया कि “कुछ सूचनाओं को व्यक्तिगत कारणों से गुप्त रखा जाना जरूरी है।”

इस बीच, कथित ‘मॉरल पुलिसिंग’ का यह वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक आक्रोश का कारण बना है।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में इस घटना को “बेहद विचलित करने वाली” बताया। उन्होंने लिखा, “यह संस्कृति नहीं, पितृसत्तात्मकता है।”

राहुल ने आरोप लगाया कि ऐसी मानसिकता को “अंधभक्तों” ने सामान्य बना दिया है। उन्होंने वीडियो के आधार पर पहचाने गए आरोपियों के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग की।

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राहुल ने राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार से सवाल किया कि “सार्वजनिक सड़क पर भी एक लड़की सुरक्षित क्यों नहीं है?”

आम आदमी पार्टी (आप) ने अपने ‘एक्स’ हैंडल पर कथित घटना से जुड़ा वीडियो साझा करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘बेटी बचाओ’ नारे का जिक्र किया और आरोप लगाया कि “भाजपा शासित बिहार में एक बेटी की गरिमा तार-तार की जा रही है।”

राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष अप्सरा ने सोमवार को कहा कि लड़कियों और महिलाओं के साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने बताया कि आयोग ने जमुई के जिलाधिकारी से पूरे मामले की विस्तृत जानकारी मांगी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

उधर, जनता दल-यूनाइटेड (जदयू) के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने कहा कि राज्य सरकार ऐसी घटनाओं को लेकर पूरी तरह संवेदनशील है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी भी आपराधिक घटना के बाद प्रशासन त्वरित कार्रवाई करता है और प्रभावशाली व्यक्ति भी कानून से ऊपर नहीं हैं।

कुशवाहा ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) पर निशाना साधते हुए दावा किया कि बिहार में 2005 से पहले कानून-व्यवस्था की स्थिति अलग थी, जबकि वर्तमान में दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाती है।

राजद नेता शक्ति सिंह यादव ने घटना को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए। वहीं, भाजपा प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि सरकार मामले की गंभीरता से जांच करा रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

बिहार सरकार में मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि उन्हें घटना की जानकारी मिली है और वह जमुई के पुलिस अधीक्षक से बात कर पूरे मामले की समीक्षा करेंगे। उन्होंने कहा कि घटना में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

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दिल्ली उच्च न्यायालय को सात नए न्यायाधीश मिले, न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 50 हुई

दिल्ली उच्च न्यायालय में सात न्यायिक अधिकारियों ने सोमवार को न्यायाधीश के तौर पर शपथ ली, जिससे अदालत में न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 50 हो गई है। दिल्ली उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 60 है जिसमें 45 स्थायी और 15 अतिरिक्त न्यायाधीश हैं।

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने न्यायमूर्ति निवेदिता अनिल शर्मा, न्यायमूर्ति निशा सहाय सक्सेना, न्यायमूर्ति संजय शर्मा, न्यायमूर्ति भरत पाराशर, न्यायमूर्ति अदिति चौधरी, न्यायमूर्ति दिनेश भट्ट और न्यायमूर्ति अरुण भारद्वाज को शपथ दिलाई। ये सभी यहां की जिला अदालतों में न्यायिक अधिकारी के तौर पर काम कर रहे थे।

शपथ ग्रहण समारोह उच्च न्यायालय परिसर में आयोजित किया गया और शपथ दिलाने के बाद मुख्य न्यायाधीश ने नए न्यायाधीशों को बधाई दी। न्यायमूर्ति निवेदिता अनिल शर्मा और न्यायमूर्ति सक्सेना को स्थायी न्यायाधीश के तौर पर नियुक्त किया गया जिन्होंने अंग्रेजी में शपथ ली।

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अन्य पांच न्यायाधीशों को उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के तौर पर नियुक्त किया गया है और उन्होंने हिंदी में शपथ ली। दिल्ली उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के तौर पर नियुक्ति से पहले न्यायमूर्ति पराशर उच्चतम न्यायालय में सेक्रेटरी जनरल के पद पर थे जबकि न्यायमूर्ति भारद्वाज को दिल्ली उच्च न्यायालय का रजिस्ट्रार जनरल नियुक्त किया गया था।

न्यायमूर्ति सक्सेना, न्यायमूर्ति संजय शर्मा और न्यायमूर्ति भट्ट क्रमशः रोहिणी, कड़कड़डूमा और राउज एवेन्यू कोर्ट में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के तौर पर कार्यरत थे।

न्यायमूर्ति निवेदिता अनिल शर्मा और न्यायमूर्ति चौधरी जिला न्यायपालिका से सेवानिवृत्त हो चुके थे और उच्च न्यायालय में पदोन्नति के लिए उनके नामों की सिफारिश पहले ही की जा चुकी थी।

उच्चतम न्यायालय के कॉलेजियम की सिफारिश के बाद केंद्र सरकार ने 19 सितंबर को इन सात न्यायिक अधिकारियों की नियुक्तियों के संबंध में अधिसूचना जारी की थी।

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नींद में क्यों बोलते हैं लोग?

उज़्बेकिस्तान की मुबीना (15) ने सवाल किया कि हम सोते समय बोलते क्यों हैं? हर कोई सोता है, लेकिन नींद को लेकर बहुत कम लोग इसकी बारीकियों को समझते हैं। नींद मनोवैज्ञानिक के तौर पर काम करने वाले विशेषज्ञ माइकल आर. नाडोर्फ के मुताबिक, लोग जब उनके पेशे के बारे में सुनते हैं तो उनके मन में कई सवाल आते हैं। इनमें यह शामिल होता है कि ‘हमें सोने की जरूरत क्यों होती है, सपने क्यों आते हैं और क्या कुत्ते भी सपने देखते हैं?’ उनका जवाब है-हां, कुत्ते भी सपने देखते हैं।

कई बार लोग अपने उस भाई-बहन के बारे में बताते हैं, जिसके साथ वे कमरा साझा करते हैं और जो पूरी रात नींद में बड़बड़ाता रहता है। कुछ लोग खुद भी दोस्तों के साथ रात बिताने के दौरान सोते-सोते पूरी, लेकिन एकतरफा बातचीत करने के बाद मजाक का पात्र बन चुके होते हैं।

नाडोर्फ ने बताया कि उन्होंने करीब दो दशक तक नींद का अध्ययन किया है। उन्हें खास तौर पर ‘पैरासोमनिया’ में दिलचस्पी है। यह ऐसी घटनाएं होती हैं जिनमें नींद के दौरान शरीर कुछ गतिविधियां करता है या दिमाग कुछ अनुभवों से गुजरता है। इनमें बुरे सपने, नींद में चलना और नींद में बोलना शामिल हैं। इनमें से ज्यादातर आम और पूरी तरह हानिरहित होते हैं। इन्हें तभी विकार माना जाता है, जब ये इतनी बार हों कि व्यक्ति के लिए वास्तविक समस्या पैदा करने लगें।

नींद एक ही अवस्था नहीं है। हर रात व्यक्ति नींद के कई चरणों से गुजरता है। करीब एक चौथाई नींद ‘आरईएम’ यानी ‘रैपिड आई मूवमेंट’ (आंखों की तेज गति) चरण में होती है। इसी दौरान ज्यादातर सपने, खासकर जीवंत सपने, आते हैं।

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‘नॉन-आरईएम’ नींद, जिसमें गहरी नींद की अवस्थाएं भी शामिल हैं, रात की कुल नींद का करीब 75 से 80 प्रतिशत हिस्सा होती है। इस दौरान शरीर की गतिविधियां काफी धीमी हो जाती हैं, जिससे उसे आराम करने और खुद की मरम्मत करने का अवसर मिलता है।

डॉक्टर इन सभी चरणों को मिलाकर ‘स्लीप आर्किटेक्चर’ कहते हैं। ये चरण रात में लगभग हर 90 मिनट में चक्र के रूप में दोहराते हैं। सोने के तुरंत बाद नॉन-आरईएम नींद अधिक होती है, जबकि सुबह के शुरुआती घंटों में आरईएम नींद का हिस्सा बढ़ जाता है।

चूहों से लेकर बिल्लियों और हाथियों तक सभी स्तनधारी किसी न किसी रूप में सोते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, नींद याददाश्त को मजबूत करने, बच्चों के विकास और प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। किशोरों को हर रात आठ से 10 घंटे सोने की सलाह दी जाती है। तीन से पांच साल के बच्चों के लिए 10 से 13 घंटे और छह से 12 साल के बच्चों के लिए नौ से 12 घंटे की नींद जरूरी मानी जाती है।

सोते हुए व्यक्ति का मस्तिष्क पूरी तरह बंद नहीं होता। रात के अलग-अलग चरणों में मस्तिष्क के अलग-अलग हिस्से सक्रिय रहते हैं।

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छात्र आत्महत्या मामला: आईआईटी मुंबई के डीन सूर्यनारायण डूला पद से हटाए गए

मुंबई स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) ने छात्र की आत्महत्या के मामले में सोमवार को डीन सूर्यनारायण डूला को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया।

संस्थान के अधिकारियों के अनुसार, निदेशक प्रोफेसर शिरीष केदारे ने एक आधिकारिक ईमेल जारी कर बताया कि वर्तमान में डीन (प्रशासनिक मामले) के तौर पर कार्यरत प्रोफेसर डूला को पद से हटा दिया गया है। निदेशक ने कहा आगे की कार्रवाई जांच के बाद की जाएगी। इससे पहले प्रोफेसर डूला डीन (छात्र मामलों) के पद पर तैनात थे।

अधिकारियों के अनुसार, ऊर्जा विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग में बीटेक द्वितीय वर्ष के छात्र साहिल रवींद्र वाकोडे (22) का शव शुक्रवार शाम आईआईटी मुंबई के पवई परिसर स्थित छात्रावास के कमरे में पंखे से बनाए गए फंदे पर लटका मिला था।

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आरोप है कि परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए पकड़े जाने के कुछ ही घंटे बाद वाकोडे ने आत्महत्या कर ली।

महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के निवासी छात्र के परिवार ने आरोप लगाया है कि वाकोडे को संस्थान में प्रताड़ित किया गया और उसे जातिगत भेदभाव तक झेलना पड़ा जिसके बाद उसने यह कदम उठाया। छात्र की आत्महत्या के बाद परिसर में छात्रों ने विरोध-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि वाकोडे को निलंबित करने की धमकियां दी गईं।

छात्र के माता-पिता की शिकायत के बाद पुलिस ने शनिवार को भारतीय न्याय संहिता और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की। पुलिस के मुताबिक, मामले में एक प्रोफेसर को आरोपी बनाया गया है और अपराध शाखा मामले की जांच कर रही है।

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