SIM Card Rules: 9 से ज्यादा SIM रखने वालों पर कसेगा शिकंजा, 23 अगस्त से लागू होगा नया नियम; जानें क्या बदलेगा

SIM Card Rules: 9 से ज्यादा SIM रखने वालों पर कसेगा शिकंजा, 23 अगस्त से लागू होगा नया नियम; जानें क्या बदलेगा

भारत में मोबाइल SIM कार्ड को लेकर नियम और सख्त होने जा रहे हैं। दूरसंचार विभाग (DoT) अब ऐसे लोगों की पहचान करने के लिए Digital Intelligence Platform (DIP) का इस्तेमाल करेगा, जो अपने नाम पर निर्धारित अधिकतम संख्या में SIM कार्ड पहले ही ले चुके हैं। ऐसे यूजर्स को अतिरिक्त मोबाइल कनेक्शन लेने से रोका जाएगा।

 

देश के अधिकांश हिस्सों में एक व्यक्ति अपने नाम पर अधिकतम 9 मोबाइल कनेक्शन रख सकता है। वहीं जम्मू-कश्मीर, असम और पूर्वोत्तर राज्यों में यह सीमा 6 SIM कार्ड की है। सरकार का मुख्य उद्देश्य SIM कार्ड के जरिए होने वाले धोखाधड़ी, फर्जी पहचान और साइबर अपराध पर लगाम लगाना है।

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10वां SIM लेने की कोशिश की तो क्या होगा?

 

एक बार निर्धारित सीमा पूरी होने के बाद टेलीकॉम कंपनियां उसी व्यक्ति के नाम पर नया मोबाइल कनेक्शन जारी नहीं कर सकेंगी। नए सिस्टम के तहत यदि किसी व्यक्ति के नाम पर 9 SIM कार्ड हैं, तो उसकी जानकारी और उपलब्ध होने पर फोटो भी Digital Intelligence Platform (DIP) पर दिखाई देगी। टेलीकॉम कंपनियां नया कनेक्शन देने से पहले यह जांच सकेंगी कि ग्राहक पहले ही तय सीमा तक SIM ले चुका है या नहीं।

 

यह व्यवस्था 23 अगस्त 2026 से लागू होने की योजना है। शुरुआत में टेलीकॉम कंपनियां नए कनेक्शन जारी करने से पहले DIP में उपलब्ध जानकारी के आधार पर क्रॉस-चेक करेंगी। इसके बाद सिस्टम को धीरे-धीरे अधिक ऑटोमेटेड बनाया जाएगा।

 

पहले से लिमिट से ज्यादा SIM हैं तो क्या होगा?

 

नए नियम उन लोगों पर भी लागू होंगे, जिनके नाम पर पहले से तय सीमा से ज्यादा मोबाइल कनेक्शन मौजूद हैं। ऐसे अतिरिक्त SIM कार्ड की पहचान कर उन्हें डिस्कनेक्ट किया जा सकता है। DoT की तकनीक पहले से ही फर्जी दस्तावेजों के जरिए हासिल किए गए SIM कार्ड या निर्धारित सीमा से ज्यादा कनेक्शन की पहचान करने में सक्षम है।

 

SIM कार्ड के जरिए होने वाले साइबर फ्रॉड पर लगाम

 

सरकार के इस कदम का बड़ा मकसद उन SIM कार्ड के इस्तेमाल को रोकना है, जिनका इस्तेमाल अपराधी दूसरे लोगों की पहचान बनाकर, वित्तीय धोखाधड़ी और साइबर अपराध करने के लिए करते हैं। DIP के जरिए DoT पहले से ही टेलीकॉम कंपनियों, बैंकों, पुलिस और अन्य संबंधित संस्थाओं के साथ SIM और टेलीकॉम दुरुपयोग से जुड़ी जानकारी साझा करता है।

 

नवंबर 2026 तक टेलीकॉम कंपनियों को करना होगा सिस्टम तैयार

 

DoT ने टेलीकॉम कंपनियों को 30 नवंबर 2026 तक रियल-टाइम SIM जांच व्यवस्था लागू करने और अपने सिस्टम को Digital Intelligence Platform के साथ पूरी तरह इंटीग्रेट करने की समयसीमा दी है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तय सीमा से ज्यादा SIM रखने वाले ग्राहकों की पहचान जल्द हो सके और अतिरिक्त कनेक्शन पर समय रहते कार्रवाई की जा सके।

 

ASTR भी करेगा फर्जी SIM की पहचान

 

सरकार ने फर्जी दस्तावेजों या निर्धारित सीमा से अधिक संख्या में जारी किए गए SIM कार्ड की पहचान के लिए ASTR नाम का AI आधारित सिस्टम भी तैयार किया है। यह तकनीक संदिग्ध या फर्जी दस्तावेजों से जुड़े मोबाइल कनेक्शन का पता लगाने में मदद करती है।

 

CNAP से कॉल आने पर दिखेगा नाम

 

SIM कार्ड की संख्या सीमित करने के साथ टेलीकॉम सेक्टर में एक और बड़ा बदलाव Calling Name Presentation (CNAP) के रूप में हो रहा है। CNAP के जरिए जब किसी व्यक्ति के पास कॉल आएगी तो मोबाइल स्क्रीन पर उस नंबर से जुड़ा नाम दिखाई देगा, भले ही वह नंबर कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव न हो। CNAP में टेलीकॉम कंपनियों के पास मौजूद KYC जानकारी का इस्तेमाल किया जाएगा, न कि किसी क्राउडसोर्स्ड डेटाबेस का।

 

कुल मिलाकर, SIM की सीमा सख्त करना, DIP के जरिए जानकारी साझा करना और CNAP लागू करना सरकार की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य फर्जी मोबाइल कनेक्शन के जरिए पहचान छिपाकर धोखाधड़ी करने वालों पर शिकंजा कसना है।

SBI ने करोड़ों की Bulk FD पर घटाई ब्याज दरें, 15 अगस्त से लागू हुए नए रेट; वरिष्ठ नागरिकों को भी झटका

SBI ने करोड़ों की Bulk FD पर घटाई ब्याज दरें, 15 अगस्त से लागू हुए नए रेट; वरिष्ठ नागरिकों को भी झटका

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की घरेलू बल्क टर्म डिपॉजिट (Bulk Term Deposit) पर ब्याज दरों में कटौती की है। बैंक ने चुनिंदा अवधि की एफडी पर ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट (bps) तक की कमी की है। SBI की वेबसाइट के मुताबिक, नई ब्याज दरें 15 अगस्त 2026 से प्रभावी हो गई हैं।

 

सामान्य ग्राहकों के लिए SBI Bulk FD की नई ब्याज दरें

 

SBI ने 7 दिन से लेकर 179 दिन तक की सभी बल्क फिक्स्ड डिपॉजिट अवधि पर ब्याज दर में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की है। वहीं, 180 से 210 दिन की अवधि पर ब्याज दर 10 बेसिस पॉइंट घटाई गई है। 211 दिन से लेकर 10 साल तक की अन्य अवधि पर ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

 

एफडी की अवधि पुरानी दर (%) नई दर (%)

  • 7 दिन से 14 दिन 4.50 4.25
  • 15 दिन से 45 दिन 5.00 4.75
  • 46 दिन से 179 दिन 5.10 4.85
  • 180 दिन से 210 दिन 5.60 5.50
  • 211 दिन से 1 साल से कम 5.60 5.60
  • 1 साल से 2 साल से कम 6.25 6.25
  • 2 साल से 3 साल से कम 6.15 6.15
  • 3 साल से 5 साल से कम 6.00 6.00
  • 5 साल से 10 साल तक 6.00 6.00
  • वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी कम हुई SBI Bulk FD की ब्याज दर

 

वरिष्ठ नागरिकों के लिए SBI ने 7 दिन से 179 दिन की अवधि वाली बल्क एफडी पर ब्याज दर में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की है। 180 से 210 दिन की अवधि पर ब्याज दर 10 बेसिस पॉइंट कम हुई है। वहीं, 211 दिन से लेकर 10 साल तक की अवधि के लिए ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

 

एफडी की अवधि पुरानी दर (%) नई दर (%)

7 दिन से 14 दिन 5.00 4.75

15 दिन से 45 दिन 5.50 5.25

46 दिन से 179 दिन 5.60 5.35

180 दिन से 210 दिन 6.10 6.00

211 दिन से 1 साल से कम 6.10 6.10

1 साल से 2 साल से कम 6.75 6.75

2 साल से 3 साल से कम 6.65 6.65

3 साल से 5 साल से कम 6.50 6.50

5 साल से 10 साल तक 6.50 6.50

समय से पहले FD तोड़ने पर 1% पेनल्टी

 

SBI की बल्क डिपॉजिट के ग्राहकों के लिए सभी अवधि पर समय से पहले एफडी निकालने की स्थिति में 1 प्रतिशत की प्रीमैच्योर विदड्रॉल पेनल्टी लागू होगी। यह नियम नई जमा राशि पर लागू होगा।

 

3 करोड़ रुपये से कम की FD पर कोई बदलाव नहीं

 

SBI ने 3 करोड़ रुपये से कम की सामान्य फिक्स्ड डिपॉजिट की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। सामान्य ग्राहकों के लिए SBI की नियमित एफडी पर ब्याज दरें 3.05% से 6.40% तक हैं। वरिष्ठ नागरिकों के लिए ये दरें सामान्य ग्राहकों की तुलना में अधिक हैं।

टैक्स बचाते-बचाते कहीं आप तो नहीं कर रहे ये 3 बड़ी गलतियां? समझें स्मार्ट सेविंग का गणित

Smart Financial Planning: अक्सर लोग टैक्स बचाने के लिए ऐसे फाइनेंशियल फैसले ले लेते हैं, जिनका नुकसान उन्हें सालों-साल उठाना पड़ता है। इनकम टैक्स के सेक्शन 80C के तहत ₹1.5 लाख की छूट पाने के चक्कर में ज्यादातर लोग बिना सोचे-समझे ट्रेडिशनल इंश्योरेंस प्लान या गलत जगह पैसा फंसा देते हैं।

अगर आप भी सिर्फ टैक्स की बचत को अपना एकमात्र मकसद मानकर निवेश कर रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। जानिए वे 3 बड़ी गलतियां जो आपकी वेल्थ को बढ़ाने के बजाय घटा रही हैं।

इंश्योरेंस और इन्वेस्टमेंट को एक साथ मिलाना

टैक्स बचाने के लिए लोग सबसे पहली गलती यह करते हैं कि वे एंडोमेंट या मनी-बैक पॉलिसी ले लेते हैं। इन पॉलिसियों में मिलने वाला रिटर्न महज 4% से 6% के आसपास होता है, जो महंगाई दर को भी मात नहीं दे पाता।

इसका दूसरा स्मार्ट ऑप्शन ये है कि इंश्योरेंस और इन्वेस्टमेंट को हमेशा अलग रखें। लाइफ कवर के लिए सिर्फ टर्म इंश्योरेंस लें, जो कम प्रीमियम में भारी-भरकम कवर देता है।

लॉक-इन और रिटर्न का गणित समझे बिना निवेश करना

केवल 80C की लिमिट भरने के लिए टैक्स-सेविंग एफडी (5 साल का लॉक-इन) या ऐसे प्रोडक्ट्स में पैसा लगा देना, जहाँ रिटर्न टैक्स-एडजस्टेड होने के बाद बेहद कम बचता है। इसका कड़वा सच ये है कि बैंक एफडी पर मिलने वाले ब्याज पर आपकी टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है, जिससे आपका असल रिटर्न और कम हो जाता है।

अगर आपकी रिस्क क्षमता इजाजत देती है, तो इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम(ELSS) में निवेश करें। इसमें केवल 3 साल का लॉक-इन होता है और लंबे समय में 12% से 15% तक का संभावित रिटर्न मिल सकता है।

इंश्योरेंस कवर को ही वेल्थ क्रिएटर्स समझ लेना

कई लोग गारंटीड रिटर्न वाली पॉलिसियों में यह सोचकर सालों तक प्रीमियम भरते हैं कि उनका पैसा सुरक्षित है और टैक्स भी बच रहा है। 20-25 साल बाद मिलने वाला ₹20 लाख का फंड महंगाई के कारण आज के ₹5-6 लाख के बराबर भी नहीं होगा। यानी आप सुरक्षित रहकर भी अपनी खरीदारी की ताकत खो रहे हैं।

स्मार्ट सेविंग का आसान गणित

टैक्स बचाने और वेल्थ क्रिएट करने के लिए सही एसेट एलोकेशन बेहद जरूरी है। जहां ट्रेडिशनल इंश्योरेंस प्लान 10 से 20 साल के लंबे लॉक-इन के साथ महज 4% से 6% का औसत रिटर्न देते हैं, वहीं ELSS (टैक्स सेविंग म्यूचुअल फंड) सिर्फ 3 साल के सबसे कम लॉक-इन पीरियड में 12% से 15% तक का शानदार अनुमानित रिटर्न और 80C के तहत छूट देता है। इसके अलावा 15 साल की अवधि वाला PPF 7.1% का पूरी तरह टैक्स-फ्री रिटर्न देता है, जबकि सबसे स्मार्ट रणनीति यानी ‘टर्म प्लान + इंडेक्स फंड’ का कॉम्बिनेशन टर्म प्लान पर 80C की छूट के साथ-साथ लॉन्ग टर्म में 12%+ का तगड़ा रिटर्न हासिल करने में मदद करता है।

कैसे करें स्मार्ट शुरुआत?

टैक्स बचाना निवेश की प्रक्रिया का एक छोटा सा हिस्सा होना चाहिए, मुख्य लक्ष्य नहीं। सबसे पहले अपनी उम्र और जरूरतों के हिसाब से पर्याप्त टर्म इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस लें। इसके बाद बचे हुए पैसों को ELSS, PPF या NPS जैसे बेहतर रिटर्न देने वाले साधनों में अपनी रिस्क प्रोफाइल के अनुसार बांटें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

PM Surya Ghar: अब 60 सेकंड में पता चलेगा सोलर लगाने का पूरा खर्च और सब्सिडी! सरकार ने लॉन्च किया नया डिजिटल टूल

PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ को बढ़ावा देने सरकार एक बड़ा प्लान लेकर आई है। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने इसके लिए एक खास डिजिटल टूल ‘Get Solar in 60 Secs’ लॉन्च किया है। इस इंटरेक्टिव प्लेटफॉर्म की मदद से देश के नागरिक अब सिर्फ 1 मिनट के भीतर अपने घर की छत पर सोलर प्लांट लगाने का पूरा गणित समझ सकते हैं।

इस योजना की शुरुआत से लेकर अब तक 50 लाख से ज्यादा घर अपनी बिजली खुद बनाने में सक्षम हो चुके हैं। इस नए डिजिटल टूल से सोलर सिस्टम लगवाने की प्रक्रिया और भी आसान हो जाएगी।

कैसे काम करता है ‘Get Solar in 60 Secs’ टूल?

इस टूल का इस्तेमाल करना बेहद आसान है। यूजर को बस कुछ बेसिक जानकारियां दर्ज करनी होंगी:

स्टेप 1: अपना नाम, फोन नंबर, राज्य और जिले का नाम चुनें।

स्टेप 2: स्लाइडर की मदद से अपने पिछले महीने का बिजली बिल और स्वीकृत लोड डालें।

स्टेप 3: इसके बाद यह टूल तुरंत आपके घर के हिसाब से सही सोलर प्लांट क्षमता (kW), लगने वाली कुल लागत, सरकार से मिलने वाली सब्सिडी और मिलने वाले बैंक लोन व उसकी ब्याज दर का पूरा हिसाब दे देगा।

यह टूल आपको जीवनभर में होने वाली अनुमानित बचत का आंकड़ा भी दिखाएगा।

व्हाट्सएप पर वेंडर्स से सीधा संपर्क और AI चैटबॉट ‘SUNtosh’

यह प्लेटफॉर्म पीएम सूर्य घर योजना के तहत रजिस्टर्ड सर्टिफाइड वेंडर्स की लिस्ट भी दिखाता है। यूजर सीधे व्हाट्सएप या कॉल के जरिए वेंडर से संपर्क करके सोलर पैनल लगवाने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।

इसके अलावा, सरकार ने हाल ही में 4 जून 2026 को ‘SUNtosh’ नाम का एक व्हाट्सएप-बेस्ड AI चैटबॉट भी लॉन्च किया है। यह चैटबॉट यूजर्स को सब्सिडी, एप्लीकेशन प्रोसेस और आम समस्याओं के हल की रियल-टाइम जानकारी सीधे व्हाट्सएप पर उपलब्ध कराता है।

पैसों की बचत के साथ पर्यावरण के लिए भी बेहद खास है यह स्कीम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 फरवरी 2024 को इस योजना की शुरुआत की थी। इसका लक्ष्य 1 करोड़ घरों की छतों पर सोलर सिस्टम लगाना और उन्हें हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देना। वित्त वर्ष 2026-27 तक 30 GW रूफटॉप सोलर क्षमता हासिल करना। अपने लाइफटाइम में यह योजना 1,000 अरब यूनिट क्लीन पावर पैदा करेगी और 72 करोड़ टन CO2 उत्सर्जन को कम करेगी।

Asian Market Today: एशिया बाजार में रौनक, बॉन्ड यील्ड में नरमी से निक्केई 1% और कोस्पी 5% चढ़ा

Asian Market Today: 20 अगस्त को एशियाई शेयर बाजार में तेज़ी देखी गई। अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा लंबे समय वाले कर्ज़ को वापस खरीदने की योजना की घोषणा के बाद बॉन्ड मार्केट का दबाव कम हुआ, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा। MSCI का एशिया-पैसिफिक इक्विटी इंडेक्स 0.8% ऊपर चढ़ा, जिसमें दक्षिण कोरियाई बाज़ार सबसे आगे रहे। इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान कोस्पी (Kospi) में 3.86% की उछाल आई, जबकि जापान के निक्केई 225 में 0.95% और टोपिक्स (Topix) में 0.80% की बढ़त हुई। वहीं, हैंग सेंग फ्यूचर्स में 0.9% की बढ़ोतरी के संकेत मिले।

वॉल स्ट्रीट

बुधवार रात वॉल स्ट्रीट पर मज़बूत सेशन के बाद S&P 500 फ्यूचर्स में ज़्यादा बदलाव नहीं हुआ। इस तेज़ी को ट्रेजरी यील्ड में गिरावट से समर्थन मिला था। S&P 500 फ्यूचर्स में लगभग 0.1% की मामूली बढ़त हुई, जबकि नैस्डैक-100 फ्यूचर्स में 0.3% की बढ़ोतरी हुई। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज फ्यूचर्स भी 19 अंक या 0.04% ऊपर चढ़ा।

इससे पहले दिन में, S&P 500 ने लगातार तीन सेशन की गिरावट का सिलसिला खत्म किया, क्योंकि लंबे समय वाले अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड कई सालों के उच्चतम स्तर से नीचे आ गए। बॉन्ड मार्केट में हालिया बिकवाली के बाद दबाव कम करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बाद यील्ड में यह गिरावट आई।

कच्चे तेल की कीमतें

गुरुवार को शुरुआती एशियाई कारोबार में तेल की कीमतें ज़्यादातर स्थिर रहीं। निवेशक अमेरिका-ईरान युद्ध की संभावित दिशा और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से शिपिंग की सुरक्षा को लेकर चिंताओं पर विचार कर रहे थे।

अक्टूबर डिलीवरी के लिए ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 25 सेंट या 0.3% बढ़कर $91.87 प्रति बैरल हो गया। वहीं, सितंबर के लिए अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 2 सेंट गिरकर $85.81 प्रति बैरल पर आ गया। ज़्यादा सक्रिय रूप से ट्रेड होने वाला अक्टूबर WTI कॉन्ट्रैक्ट 14 सेंट या 0.2% बढ़कर $84.53 प्रति बैरल हो गया। बुधवार को ब्रेंट और WTI, दोनों में लगातार चौथे सेशन में बढ़त देखी गई और ये 24 जुलाई के बाद अपने सबसे ऊंचे स्तर पर बंद हुए। सितंबर WTI कॉन्ट्रैक्ट गुरुवार को बाद में एक्सपायर होने वाला है।

US-ईरान युद्ध

ट्रंप ने कहा कि इन कदमों का मतलब “अभूतपूर्व स्तर पर आर्थिक युद्ध और अलग-थलग करना” होगा। उन्होंने इसे “ECONOMIC D-DAY” बताया और सभी US सहयोगियों से वॉशिंगटन का समर्थन करने को कहा।

उन्होंने चेतावनी दी कि जो देश वित्तीय संस्थानों, कंपनियों, एयरपोर्ट या सरकारी निकायों को ईरान की मदद करने की इजाज़त देंगे, उन्हें गंभीर आर्थिक नतीजों का सामना करना पड़ेगा, हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि ये सज़ाएं क्या होंगी। ट्रंप ने ईरान का समर्थन करने वाली गतिविधियों, जैसे तस्करी, कैश ट्रांसफर, एक्सचेंज हाउस के ऑपरेशन और शिप रजिस्ट्री के इस्तेमाल को खत्म करने की भी मांग की।

आज सोने का भाव

गुरुवार को सोने की कीमतें दो महीने से ज़्यादा के उच्चतम स्तर के करीब बनी रहीं। US ट्रेज़री की ओर से लिक्विडिटी सपोर्ट की अचानक घोषणा के बाद बॉन्ड यील्ड और डॉलर में गिरावट आई।

0031 GMT पर स्पॉट गोल्ड की कीमत $4,512.19 प्रति औंस पर लगभग स्थिर रही, जबकि सेशन की शुरुआत में यह $4,525.79 तक पहुंच गई थी, जो 2 जून के बाद इसका उच्चतम स्तर था। बुधवार को इस कीमती धातु की कीमत में 4% से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई थी। आम तौर पर जियोपॉलिटिकल और आर्थिक अनिश्चितता के समय सोने को फायदा होता है क्योंकि निवेशक सुरक्षित निवेश की तलाश करते हैं, जबकि ऊंची ब्याज दरों से इसकी मांग पर असर पड़ सकता है क्योंकि सोने से कोई ब्याज आय नहीं होती है।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, मजबूत हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

RBI Minutes: अब लोन महंगा होने का खतरा, महंगाई बढ़ी तो बढ़ सकता है रेपो रेट

RBI Minutes: RBI की अगस्त बैठक के मिनट्स से साफ संकेत मिले हैं कि फिलहाल ब्याज दरों में और राहत की उम्मीद कम है। केंद्रीय बैंक का पूरा फोकस अब महंगाई पर है। अगर कीमतों का दबाव और बढ़ा, तो इस साल रेपो रेट बढ़ाने की नौबत भी आ सकती है।

5 अगस्त को हुई MPC बैठक में RBI ने लगातार चौथी बार रेपो रेट को 5.25% पर ही रखा था। वहीं SDF 5% और MSF 5.5% पर बरकरार रहे। नीति का रुख भी ‘Neutral’ ही रखा गया।

गवर्नर ने क्या कहा?

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अभी मजबूत बनी हुई है। उनका अनुमान है कि इस वित्त वर्ष में महंगाई औसतन करीब 5% रह सकती है।

उन्होंने कहा कि अभी महंगाई का बड़ा कारण सप्लाई से जुड़ी दिक्कतें हैं। अच्छी बात यह है कि यह पूरे बाजार में नहीं फैली है। कोर महंगाई भी अभी ज्यादा नहीं है।

उनका मानना है कि तीसरी तिमाही के बाद महंगाई कुछ कम हो सकती है। इसलिए अभी ब्याज दरों में बदलाव की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर महंगाई हर सेक्टर में फैलने लगी, तो RBI सख्ती कर सकता है।

डिप्टी गवर्नर का रुख ज्यादा सख्त

RBI की डिप्टी गवर्नर पूणम गुप्ता ने साफ कहा कि अभी ब्याज दरों में और कटौती की गुंजाइश नहीं दिखती।

उन्होंने यह भी कहा कि साल के दौरान रेपो रेट बढ़ाने की जरूरत भी पड़ सकती है। हालांकि फिलहाल उनका सुझाव यही है कि कुछ समय और इंतजार किया जाए।

दूसरे सदस्यों की क्या राय रही?

MPC सदस्य इंद्रनील भट्टाचार्य ने भी जल्दबाजी से बचने की बात कही। उनका कहना है कि आने वाले महीनों में मानसून और महंगाई की तस्वीर ज्यादा साफ होगी।

उन्होंने कहा कि अभी दरों को स्थिर रखना RBI के लिए आगे फैसला लेने की लचीलापन बनाए रखता है। इसका मतलब यह नहीं कि दरें लंबे समय तक नहीं बदलेंगी।

RBI किन बातों से चिंतित है?

बैठक के मिनट्स में कई ऐसे जोखिम गिनाए गए हैं, जो महंगाई बढ़ा सकते हैं।

  • मानसून का असमान रहना
  • एल नीनो का असर
  • पश्चिम एशिया में तनाव
  • होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े जोखिम

MPC सदस्यों का मानना है कि इन वजहों से आने वाले महीनों में महंगाई पर नजर रखना पहले से ज्यादा जरूरी होगा।

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Mutual Funds: सोने ने दिया 9% रिटर्न, फिर भी निवेशकों ने इन फंड्स में लगाए ₹1.40 लाख करोड़

Mutual Funds: जुलाई 2026 में सोने ने करीब 9% का रिटर्न दिया। इसके बावजूद भारतीय निवेशकों ने सबसे ज्यादा भरोसा मनी मार्केट फंड्स पर जताया। Vallum Capital की अगस्त 2026 की Monthly Macro Grid Chartbook के मुताबिक, जुलाई में इन फंड्स में 1.40 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया। दिलचस्प बात यह है कि जून में इसी कैटेगरी से 65,530 करोड़ रुपये निकल गए थे।

सिर्फ मनी मार्केट फंड ही नहीं, फिक्स्ड इनकम फंड्स में भी वापसी देखने को मिली। जुलाई में इनमें 5,947 करोड़ रुपये का निवेश आया, जबकि जून में 53,006 करोड़ रुपये की निकासी हुई थी। दूसरी तरफ, सोने की कीमत बढ़ने के बावजूद प्रेशियस मेटल फंड्स में निवेश घटकर 4,084 करोड़ रुपये रह गया, जो जून में 8,680 करोड़ रुपये था।

SIP में लगातार बढ़ रहा निवेश

सुरक्षित निवेश की तरफ झुकाव का मतलब यह नहीं था कि निवेशकों ने शेयर बाजार से दूरी बना ली। Franklin Templeton India की रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई में SIP योगदान 12% बढ़कर 31,961 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं SIP खातों की संख्या भी 12.5% बढ़कर 10.63 करोड़ हो गई।

हालांकि, औसत मासिक SIP योगदान में मामूली गिरावट आई। यह 3,012 रुपये से घटकर 3,007 रुपये रह गया।

म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने बनाया नया रिकॉर्ड

जुलाई में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर रिकॉर्ड 85.8 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। इस दौरान इक्विटी फंड्स का AUM 15.3% बढ़कर 38.40 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं पैसिव फंड्स का AUM सालाना आधार पर 24% से ज्यादा बढ़ा।

सबसे ज्यादा पैसा कहां गया?

इक्विटी फंड्स के भीतर भी निवेशकों की पसंद साफ नजर आई। स्मॉलकैप फंड्स में जुलाई के दौरान 7,768 करोड़ रुपये आए, जबकि मिडकैप फंड्स में 6,192 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। Vallum Capital के मुताबिक, जुलाई में माइक्रोकैप शेयर 4.6% और स्मॉलकैप शेयर 2.8% चढ़े।

निवेशकों ने क्यों सुरक्षित विकल्प चुने?

डेटा बताता है कि जुलाई में निवेशकों ने सिर्फ सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाली एसेट क्लास का पीछा नहीं किया। एक तरफ SIP और इक्विटी में निवेश जारी रहा, तो दूसरी तरफ बड़ी रकम मनी मार्केट और फिक्स्ड इनकम फंड्स में गई। इससे साफ है कि निवेशक बेहतर रिटर्न के साथ-साथ लिक्विडिटी और कम जोखिम वाले विकल्पों को भी प्राथमिकता दे रहे थे।

Vallum Capital का कहना है कि जुलाई में सोने की तेजी की बड़ी वजह अमेरिका की उम्मीद से कमजोर जॉब्स रिपोर्ट रही। इससे फेडरल रिजर्व की अगली ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीद कुछ कमजोर पड़ी। साथ ही अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी ने भी सोने की कीमतों को सहारा दिया।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Gold Silver price: भारत में सोना ₹1.53 लाख पर, चांदी 1.5% से ज्यादा लुढ़की, क्या आगे भी जारी रहेगा दबाव

Gold Silver price: घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट आई। कमज़ोर स्पॉट डिमांड और मार्केट में शामिल लोगों की बिकवाली का असर घरेलू कीमतों पर पड़ा। यह गिरावट तब आई जब ग्लोबल स्तर पर कीमती धातुओं की कीमतों में मिला-जुला ट्रेंड देखा गया।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर, अक्टूबर डिलीवरी के लिए सोने के फ्यूचर्स में ₹636 या 0.41% की गिरावट आई और यह ₹1.53 लाख प्रति 10 ग्राम हो गया। इस कॉन्ट्रैक्ट में 837 लॉट का बिज़नेस टर्नओवर दर्ज किया गया।सितंबर डिलीवरी के लिए चांदी के फ्यूचर्स में ₹4,023 या 1.73% की गिरावट आई और यह ₹2.28 लाख प्रति किलोग्राम हो गया, जिसमें 2,577 लॉट का बिज़नेस टर्नओवर हुआ।

दरअसल, घरेलू सोने की कीमतों में गिरावट की वजह कमज़ोर स्पॉट डिमांड थी, जबकि चांदी की कीमतें तब दबाव में आईं जब मार्केट में शामिल लोगों ने अपनी पोजीशन कम कर दीं।

घरेलू फ्यूचर्स मार्केट को इंटरनेशनल स्पॉट कीमतों से अलग भी देखा जाना चाहिए, क्योंकि डॉलर, US बॉन्ड यील्ड, ब्याज दरों की उम्मीदों और लोकल करेंसी में बदलाव के कारण दिन के दौरान इनमें अलग-अलग उतार-चढ़ाव हो सकते हैं।ग्लोबल स्तर पर, न्यूयॉर्क में सोने के फ्यूचर्स 0.10% बढ़कर लगभग $4,338.74 प्रति औंस हो गए, जबकि चांदी 0.99% बढ़कर $62.74 प्रति औंस हो गई।

आगे क्या होनी चाहिए निवेश रणनीति

लेमन (Lemonn) में रिसर्च हेड गौरव गर्ग के अनुसार, US ट्रेजरी यील्ड में कमी के कारण पिछले सेशन की गिरावट के बाद सोने में कुछ रिकवरी देखी गई। हालांकि, US फेडरल रिजर्व की मीटिंग के मिनट्स जारी होने से पहले निवेशक सतर्क रहे, क्योंकि इससे ब्याज दरों की भविष्य की दिशा के बारे में संकेत मिल सकते हैं।

कीमतों में गिरावट का मतलब यह नहीं है कि सोने में ग्राहकों की दिलचस्पी में भारी कमी आई है। जब कीमतें ज़्यादा होती हैं, तो मांग छोटी खरीदारी की ओर भी बढ़ सकती है।

इंडियन एसोसिएशन फॉर गोल्ड एक्सीलेंस एंड स्टैंडर्ड्स (IAGES) के CEO कौशलेंद्र सिन्हा ने कहा कि ग्राहकों में सोने के प्रति अब भी काफी लगाव है, हालांकि कीमतें ज़्यादा होने के कारण खरीदार तेज़ी से हल्के वज़न और ट्रेंडी ज्वेलरी चुन रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि कुछ परिवार नया सोना खरीदने के बजाय अपनी मौजूदा ज्वेलरी को एक्सचेंज करने या उसे नया डिज़ाइन करवाने का विकल्प चुन रहे हैं। इससे ग्राहकों को अपनी मौजूदा होल्डिंग्स की वैल्यू का फ़ायदा उठाने में मदद मिलती है और उन्हें नया सोना कम खरीदना पड़ता है। त्योहारों और शादी-ब्याह का मौसम आने वाला है, ऐसे में घरेलू सोने के बाज़ार के लिए मांग एक अहम कारक हो सकती है। हालांकि, सोने और चांदी की कीमतों की दिशा ग्लोबल ब्याज दरों के अनुमान, US ट्रेजरी यील्ड, डॉलर और रुपये की चाल पर भी निर्भर करेगी।

ग्राहकों के लिए, MCX फ्यूचर्स की कीमतें और रिटेल में गहनों की आखिरी कीमत एक जैसी नहीं होती हैं। सोने की रिटेल कीमतों में टैक्स, मेकिंग चार्ज और ज्वेलर का मार्जिन जैसी चीजें भी शामिल होती हैं। इसी तरह, चांदी के दाम अलग-अलग शहरों में और फिजिकल व फ्यूचर्स मार्केट के बीच अलग-अलग हो सकते हैं।

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46 पैसे का बिल चुकाना भूला शख्स, बैंक ने ठोक दिया ₹1200 का जुर्माना! भड़के यूजर ने X पर सुनाई खरी-खोटी

Credit Card Bill Viral News: क्रेडिट कार्ड बिल का पेमेंट करते समय अगर आप एक रुपये से भी कम की चूक करते हैं, तो यह आपको कितना भारी पड़ सकता है? इसका एक ताजा और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। एक शख्स ने अपने क्रेडिट कार्ड बिल में से महज 46 पैसे कम चुकाए, जिसके बदले बैंक ने उस पर ₹1200 से अधिक का जुर्माना और अन्य फीस लगा दी।

पीड़ित ग्राहक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपना गुस्सा जाहिर करते हुए एचडीएफसी बैंक के कस्टमर केयर अधिकारियों को ‘अज्ञानी और घमंडी’ तक कह दिया। यह पोस्ट देखते ही देखते इंटरनेट पर वायरल हो गई और लोग बैंक के इस रवैये पर अपनी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देने लगे।

क्या है पूरा मामला?

पीड़ित ग्राहक को बैंक की तरफ से ₹10,649.46 का क्रेडिट कार्ड बिल मिला था। भुगतान करते समय गलती से ग्राहक ने दशमलव के बाद के पैसे छोड़ दिए और सिर्फ ₹10,649 का ही पेमेंट किया। यानी कुल बिल में से महज 46 पैसे बकाया रह गए। इस 46 पैसे के मामूली शॉर्टफॉल की वजह से बैंक ने ग्राहक पर ₹1200 से ज्यादा का लेट पेमेंट चार्ज और पेनल्टी ठोक दी।

इस पर ग्राहक ने X पर HDFC Bank को टैग करते हुए लिखा, ‘प्रिय HDFC बैंक, आपने मुझे ₹10,649.46 का क्रेडिट कार्ड बिल भेजा था। गलती से मैंने ₹10,649.00 का भुगतान किया, 46 पैसे छूट गए और आपने 46 पैसे की इस चूक के लिए मुझ पर ₹1200 से ज्यादा का लेट पेमेंट चार्ज लगा दिया? क्या आप इसे जल्द से जल्द रिवर्स करेंगे?

यूजर बैंक के कस्टमर सपोर्ट पर भी भड़ास निकाली और लिखा कि वहां के प्रतिनिधि जितने अज्ञानी हैं, उतने ही घमंडी भी हैं।

सोशल मीडिया पर भड़के लोग, मिली तरह-तरह की सलाह

यह पोस्ट सामने आते ही यूजर्स बैंक के इस एक्शन की आलोचना करने लगे और अपने पुराने अनुभव शेयर करने लगे। एक यूजर ने लिखा, ‘क्रेडिट कार्ड कैंसल करो, उसके 4 टुकड़े करके कचरे के डिब्बे में फेंक दो। उन्हें कोर्ट में साबित करने दो कि 0.46 रुपये का ब्याज ₹1200 कैसे बन गया।’

एक अन्य यूजर ने सुझाव दिया कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के दिशानिर्देशों के अनुसार, ₹10,649.46 जैसे आंकड़े को राउंड ऑफ करके ₹10,649 किया जाना चाहिए, क्योंकि 50 पैसे से कम की किसी भी भिन्न को नजरअंदाज कर दिया जाता है।

कुछ यूजर्स ने HDFC बैंक के साथ अपने बुरे अनुभवों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने भी बैंक के खराब व्यवहार के कारण अपने अकाउंट्स और एफडी बंद करवा दिए थे।

हालांकि, एक वर्ग ऐसा भी था जिसने ग्राहक को ही जिम्मेदार ठहराया। एक यूजर ने लिखा, ‘यह आपकी गलती है, भाई। इसे बैंक पर मत डालो। यह उन लोगों के लिए एक बहुत अच्छा सबक है जो हर चीज को हल्के में लेते हैं।’

क्रेडिट कार्ड पेनल्टी और भारी-भरकम चार्ज से कैसे बचें?

क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते समय थोड़ी सी लापरवाही बड़ा नुकसान करा सकती है। ऐसी स्थितियों से बचने के लिए इन बातों का खास ध्यान रखें:

Auto-Debit ऑन रखें: अपने बैंक अकाउंट से क्रेडिट कार्ड बिल का ‘Total Amount Due’ ऑटो-डेबिट मोड पर सेट करें, ताकि दशमलव के पैसे भी अपने आप सही समय पर कट जाएं।

राउंड ऑफ न करें: जब भी खुद से मैनुअल पेमेंट करें, बिल में लिखी दशमलव वाली सटीक रकम ही ट्रांसफर करें, खुद से कोई आंकड़ा न घटाएं।

गलती होने पर तुरंत नोडल अधिकारी से संपर्क करें: अगर गलती से ऐसा लेट चार्ज लग भी जाए, तो कस्टमर केयर के अलावा बैंक के Grievance Redressal Officer / Nodal Officer को ईमेल करें और चार्जेस रिवर्स करने की रिक्वेस्ट करें।

RBI Ombudsman में शिकायत करें: अगर बैंक आपकी जायज बात नहीं सुनता है और पैसे वापस नहीं करता है, तो आप आरबीआई के बैंकिंग लोकपाल के पास ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

डिजिटल दौर में ऑटोमेटेड बैंकिंग सिस्टम बिल का पूरा भुगतान न होने पर अपने आप लेट फीस और पेनल्टी जनरेट कर देते हैं, फिर चाहे बकाया राशि 1 रुपये से भी कम क्यों न हो। ऐसे में समझदारी इसी में है कि बिल की पाई-पाई का भुगतान करें ताकि बैंकों के इन कड़े पेनल्टी रूल्स से बचा जा सके।

Disclaimer: यह खबर सोशल मीडिया (X) पर वायरल यूजर पोस्ट पर आधारित है। यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। मनीकंट्रोल इसकी पुष्टि नहीं करता है।