Bank FD: ₹10 लाख अकाउंट में है? कैसे करें FD की ज्यादा रिटर्न के साथ सुरक्षित रहें आपका पैसा, जानिए

Bank FD Rules: फिक्स्ड डिपॉजिट को आमतौर पर सबसे कम जोखिम वाला और सुरक्षित निवेश माना जाता है। वैसे आपके पास ₹10 लाख या ₹20 लाख की बचत है और आप इसे एफडी में जमा कर रहे हैं, तो आपको एक बेहद महत्वपूर्ण नियम जानना जरूरी है। नियम ये है कि अगर आपका यह पूरा पैसा किसी एक ही बैंक में जमा है, तो आपका पूरा फंड सुरक्षित नहीं है।

भारतीय रिजर्व बैंक की सहायक कंपनी डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन (DICGC) प्रति जमाकर्ता, प्रति बैंक अधिकतम ₹5 लाख तक का ही बीमा कवर प्रदान करती है। इस ₹5 लाख की सीमा में मूलधन और ब्याज दोनों शामिल होते हैं।

एक ही बैंक में कई FD बनाने से नहीं बढ़ता बीमा कवर

अक्सर लोग सोचते हैं कि अगर वे एक ही बैंक में ₹2-2 लाख की 5 अलग-अलग एफडी बना लेंगे, तो उनका ₹10 लाख का पूरा फंड सुरक्षित हो जाएगा। हालांकि, DICGC के नियम के अनुसार ऐसा बिल्कुल नहीं है:

पैसे की टैगिंग/कैलकुलेशन: अगर आपकी एक ही बैंक में कई FDs हैं, तो DICGC बीमा की गणना करते समय उन सभी को एक साथ जोड़ देता है।

बचत खाता + एफडी: मान लीजिए आपके पास एक ही बैंक में ₹2-2 लाख की 3 एफडी (कुल ₹6 लाख) हैं और ₹1 लाख सेविंग्स अकाउंट में हैं, तो कुल जमा ₹7 लाख माना जाएगा। लेकिन बैंक डूबने या संकट में आने पर आपको अधिकतम ₹5 लाख ही वापस मिलेंगे।

ब्याज भी शामिल: अगर आपका मूलधन ₹4.8 लाख है और उस पर मिला ब्याज कुल रकम को ₹5 लाख से ऊपर ले जाता है, तब भी इंश्योरेंस कवर ₹5 लाख की सीमा से अधिक नहीं बढ़ेगा।

विभिन्न शाखाएं: एक ही बैंक की अलग-अलग शाखाओं में खाता खोलने से भी बीमा सीमा अलग-अलग नहीं होती।

अपने पैसे को 100% सुरक्षित कैसे बनाएं?

अगर आपके पास बड़ी रकम है, तो अपने जोखिम को कम करने के लिए इन तरीकों को अपनाएं:

अलग-अलग बैंकों में बांटें पैसा: DICGC प्रत्येक अलग बीमित बैंक को अलग संस्था मानता है। उदाहरण के लिए, अगर आप ₹15 लाख की रकम को 3 अलग-अलग बैंकों में ₹5-₹5 लाख की एफडी में बांट देते हैं, तो आपकी पूरी रकम (₹15 लाख) अलग-अलग ₹5 लाख के बीमा कवर के तहत सुरक्षित रहेगी।

अलग-अलग कानूनी क्षमता: एक ही बैंक में अगर खाते अलग-अलग ओनरशिप/कैपेसिटी (जैसे- व्यक्तिगत खाता, जॉइंट अकाउंट, या HUF खाता) के तहत खुले हैं, तो नियम के तहत उनके लिए अलग से बीमा कवर मिल सकता है।

जब कोई बैंक संकट में आता है तो क्या होता है?

बैंक के लिक्विडेशन या RBI द्वारा पाबंदी लगाए जाने की स्थिति में DICGC का इंश्योरेंस फ्रेमवर्क लागू होता है। संबंधित बैंक को निर्धारित समय सीमा के भीतर जमाकर्ताओं की जानकारी जमा करनी होती है। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत जमाकर्ता के क्लेम को प्रोसेस करके अधिकतम ₹5 लाख तक का भुगतान किया जाता है।

बड़ी FD कराने से पहले रखें इन बातों का ध्यान

टोटल एक्सपोजर जांचें: एक ही बैंक में रखी अपनी कुल राशि (सेविंग्स + एफडी + आरडी) का हिसाब लगाएं।

एलोकेशन रणनीति: ₹10 या ₹15 लाख जैसी बड़ी रकम को कम से कम 2 से 3 अलग-अलग शेड्यूल बैंकों में बांटकर निवेश करें।

अन्य मापदंड: बैंक चुनते समय केवल इंश्योरेंस ही नहीं, बल्कि ब्याज दरें, लॉक-इन अवधि और प्री-मैच्योर विदड्रॉल के नियमों का भी ध्यान रखें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Tiger Attack Video: टाइगर के बाड़े में घुसा व्यक्ति, फिर बाघ ने किया हमला… वीडियो से सामने आया खौफनाक मामला

इंग्लैंड के यॉर्कशायर वाइल्डलाइफ पार्क में एक खौफनाक हादसा सामने आया है, जहां बाघ के बाड़े में घुसे एक शख्स की हमले में मौत हो गई। घटना के बाद पार्क में अफरा-तफरी मच गई और सुरक्षा के मद्देनजर पूरे परिसर को खाली करा लिया गया। सूचना मिलते ही पुलिस और मेडिकल टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद व्यक्ति की जान नहीं बचाई जा सकी। पुलिस ने बताया कि मृतक की पहचान अभी सार्वजनिक नहीं की गई है और उसके परिवार को सूचना दे दी गई है।

वहीं, घटना के बाद बाघ की स्थिति को लेकर उठ रहे सवालों पर अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जानवर सुरक्षित है और अपने बाड़े के अंदर ही मौजूद है। फिलहाल हादसे की परिस्थितियों का पता लगाया जा रहा है। इस घटना के बाद वाइल्डलाइफ पार्क को रविवार तक बंद रखने का फैसला लिया गया है।

दोपहर में मिली हमले की सूचना, मौके पर पहुंची पुलिस

साउथ यॉर्कशायर पुलिस के मुताबिक, शनिवार दोपहर करीब 1:35 बजे उन्हें सूचना मिली कि डोनकास्टर के पास स्थित वाइल्डलाइफ पार्क में एक व्यक्ति बाघ के बाड़े के अंदर चला गया है। वहां बाघ ने उस पर हमला कर दिया, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं।

सूचना मिलने के बाद आपातकालीन सेवाएं घटनास्थल पर पहुंचीं। मेडिकल टीम ने व्यक्ति को बचाने की कोशिश की, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी और मौके पर ही उसे मृत घोषित कर दिया गया। फिलहाल मृतक की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। पुलिस ने बताया कि उसके परिवार को घटना की जानकारी दे दी गई है और विशेषज्ञ अधिकारी इस मुश्किल समय में परिवार की मदद कर रहे हैं।

बाघ सुरक्षित, लोगों को खतरे की आशंका नहीं

घटना के बाद सोशल मीडिया पर बाघ की स्थिति को लेकर कई तरह की चर्चाएं होने लगीं। इस पर पुलिस ने स्पष्ट किया कि हमले में बाघ को कोई चोट नहीं आई है। घटना के बाद भी वह अपने बाड़े के अंदर ही रहा।

पुलिस के अनुसार, आम लोगों के लिए किसी बड़े खतरे की आशंका नहीं है। हालांकि, व्यक्ति बाघ के बाड़े में किन परिस्थितियों में पहुंचा और उसके बाद वास्तव में क्या हुआ, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

 

Wildlife Park खाली कराया गया, जांच जारी

घटना के बाद यॉर्कशायर वाइल्डलाइफ पार्क को खाली करा लिया गया। पार्क प्रबंधन ने बताया कि आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रक्रिया तुरंत शुरू कर दी गई थी और संबंधित एजेंसियों को मौके पर बुलाया गया था। अधिकारियों के साथ मिलकर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आखिर यह घटना कैसे हुई।

पार्क प्रबंधन ने कहा कि वहां आने वाले लोगों, कर्मचारियों और जानवरों की सुरक्षा उसकी प्राथमिकता है। घटना के बाद पार्क को रविवार तक बंद रखने की घोषणा की गई।

फिलहाल पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। व्यक्ति बाड़े में कैसे पहुंचा और घटना से पहले क्या परिस्थितियां थीं, इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेंगे।

20% से ज्यादा ब्याज पर लिए तीन लोन, फिर भी Mutual Funds में कर रहा था निवेश, Barber की कहानी सुन CEO ने दी बड़ी सीख

Avenue Supermarts Share Price: Q2 नतीजों के बाद 4% टूटा शेयर, 52 हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंचा, एक्सपर्ट्स से जानें खरीदें, बेचें या रहे बनें

Avenue Supermarts Share Price: हाइपरमार्केट चेन DMart की पैरेंट कंपनी Avenue Supermarts Ltd. के शेयरों में सोमवार 12 अक्टूबर को 4% तक की गिरावट आई। यह गिरावट वीकेंड पर आए सितंबर तिमाही के नतीजों के प्रतिक्रिया में आई। शेयर आज ₹3,520 के पिछले क्लोजिंग भाव के मुकाबले ₹3,405 पर खुला और 4.4% गिरकर ₹3,366 के 52-हफ़्ते के निचले स्तर पर पहुंच गई।

Avenue Supermarts ने तिमाही के दौरान 7.3% का EBITDA मार्जिन दर्ज किया, जो पिछले साल के 7.6% के आंकड़े से कम था और CNBC-TV18 के पोल में अनुमानित 7.7% से भी कम था।कंपनी ने मार्जिन पर दबाव की वजह एंट्री लेवल पर वेतन में बढ़ोतरी के कारण ऑपरेटिंग खर्चों में वृद्धि को बताया।

हालांकि कंपनी के मार्जिन पर दबाव था, लेकिन इसकी ‘लाइक-फॉर-लाइक’ ग्रोथ 9.5% रही, जो CNBC-TV18 के पोल के 7.5% के आंकड़े से काफी बेहतर थी। ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन से पहले की कमाई (EBITDA) ₹1,403.2 करोड़ रही, जो पोल के ₹1,492 करोड़ के अनुमान से कम थी। ₹19,206 करोड़ का रेवेन्यू उम्मीद के मुताबिक था, जबकि ₹803.6 करोड़ का मुनाफा ₹857.6 करोड़ के अनुमान से थोड़ा कम था।

Avenue Supermarts ने चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में 18 स्टोर भी खोले, जिनमें से 15 स्टोर दूसरी तिमाही में ही खोले गए, जिससे कुल स्टोरों की संख्या 518 हो गई।

खरीदें, बेचे या रहे बने

ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंकिंग फर्म सिटी ने Avenue Supermarts पर “Sell” रेटिंग बनाए रखी है और इसका प्राइस टारगेट ₹3,250 तय किया है। फर्म का कहना है कि कंपनी का मुनाफा रेवेन्यू ग्रोथ के मुकाबले पीछे चल रहा है। क्विक कॉमर्स से कॉम्पिटिशन, कम ‘अन्य आय’ (other income) और ज़्यादा ब्याज खर्चों के कारण पिछले 14 में से 11 तिमाहियों में ऐसा हुआ है।

हालांकि, Bernstein ने Avenue Supermarts पर अपनी “आउटपरफॉर्म” रेटिंग बनाए रखी है और इसका प्राइस टारगेट ₹5,000 तय किया है। इसमें कहा गया है कि 9.5% की ‘लाइक-फॉर-लाइक’ (LFL) ग्रोथ, किफायती ग्रॉसरी (value-grocer) बिनेस मॉडल की लगातार अहमियत और मजबूती को दिखाती है।

कंपनी ने यह भी लिखा कि LFL ग्रोथ का यह आंकड़ा इस बहस को खत्म कर देगा कि क्या ‘क्विक कॉमर्स’ मॉडर्न ट्रेड वैल्यू-ग्रॉसर मॉडल को खत्म कर सकता है।

बर्नस्टीन के नोट के अनुसार, DMart के लिए चुनौती लगातार मार्जिन बनाए रखने की है, जिसके लिए दो बातों पर ध्यान देना होगा। नए स्टोर के तेज़ी से बढ़ने की रफ़्तार और बढ़ती लागत को मैनेज करना।

CLSA ने भी Avenue Supermarts पर अपनी “हाई-कनविक्शन आउटपरफॉर्म” रेटिंग बनाए रखी है और इसका प्राइस टारगेट ₹5,723 तय किया है, जो इस स्टॉक के लिए मार्केट में सबसे ज़्यादा प्राइस टारगेट है।

दूसरी ओर, जेफरीज (Jefferies) की इस स्टॉक पर “hold” रेटिंग है, लेकिन उसने अपना प्राइस टारगेट ₹4,500 से घटाकर ₹4,000 कर दिया है। हालांकि कंपनी ने हाल की तिमाहियों में मजबूत कस्टमर ट्रैफिक और बेहतरीन LFL आंकड़ों को माना – जिससे तिमाही के दौरान अच्छी मांग का पता चलता है – लेकिन फर्म के अनुसार, कंपनी का मुनाफा निराशाजनक रहा।

जेफरीज ने लिखा कि स्टोर का विस्तार तो ठीक-ठाक रहा, लेकिन प्रोडक्टिविटी कम हुई। यह बात तिमाही के लिए कंपनी के कई तिमाहियों के सबसे निचले यूनिट EBITDA से साफ पता चलती है।

नतीजतन, जेफरीज ने Avenue Supermarts के लिए ‘अर्निंग्स पर शेयर’ (EPS) के अनुमान को 2% से 3% तक घटा दिया है।

32 एनालिस्ट Avenue Supermarts पर नजर रखते हैं, जिनमें से 11 की “buy” (खरीदने की) रेटिंग है, 12 की “hold” रेटिंग है और 9 की “Sell” (बेचने की) रेटिंग है। प्राइस टारगेट के आम अनुमानों से पता चलता है कि मौजूदा लेवल से इसमें 12.8% की बढ़ोतरी की संभावना है।

फंडामेंटल या मैक्रो क्या है बाजार की बड़ी दिक्कत? जानें गिफ्ट निफ्टी क्या दे रहा संकेत

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

20% से ज्यादा ब्याज पर लिए तीन लोन, फिर भी Mutual Funds में कर रहा था निवेश, Barber की कहानी सुन CEO ने दी बड़ी सीख

आजकल ज्यादा रिटर्न पाने के लिए कई लोग म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं। लेकिन कभी-कभी निवेश के चक्कर में वे अपने कर्ज को नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसा ही एक मामला स्टार्टअप CEO आबिद हसन ने सोशल मीडिया पर साझा किया है। वह अपने नाई के साथ बातचीत कर रहे थे, तभी उन्हें पता चला कि वह एक तरफ म्यूचुअल फंड में पैसा लगा रहा है, जबकि दूसरी तरफ उस पर भारी ब्याज वाले कई लोन भी हैं। इस घटना के बाद हसन ने लोगों को निवेश और कर्ज से जुड़ी एक जरूरी सलाह दी।

बाल कटवाते समय सामने आई हैरान करने वाली बात

आबिद हसन ने X पर बताया कि एक दिन उनके नाई ने उनसे अपने म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो के बारे में राय मांगी। इसके बाद हसन ने उसकी आर्थिक स्थिति को समझने की कोशिश की। बातचीत में पता चला कि नाई ने तीन लोन ले रखे थे, जिन पर 20 फीसदी से ज्यादा ब्याज देना पड़ रहा था।

इसके बावजूद वह म्यूचुअल फंड में निवेश कर रहा था। जब हसन ने उससे इसकी वजह पूछी, तो उसने बताया कि उसे अपने निवेश से 30 फीसदी से ज्यादा रिटर्न मिलने की उम्मीद है।

20% ब्याज वाले कर्ज के बीच निवेश करना कितना सही?

हसन ने इस सोच पर सवाल उठाया। उनका कहना था कि शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड से हर बार ज्यादा रिटर्न मिलने की गारंटी नहीं होती। बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण निवेश की वैल्यू घट भी सकती है। दूसरी तरफ, लोन पर ब्याज चुकाना एक जरूरी जिम्मेदारी है।

उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति को अपने कर्ज पर 20 फीसदी ब्याज देना पड़ रहा है, तो उसके लिए निवेश से लगातार इससे ज्यादा रिटर्न कमाना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में बाजार से मुनाफे की उम्मीद करने के बजाय महंगे कर्ज को कम करना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।

10% से ज्यादा ब्याज वाला लोन पहले चुकाने की सलाह

आबिद हसन ने सलाह दी कि अगर किसी व्यक्ति पर 10 फीसदी से ज्यादा ब्याज वाला कर्ज है, तो उसे अतिरिक्त निवेश करने से पहले कर्ज चुकाने पर ध्यान देना चाहिए। इससे ब्याज का बोझ कम हो सकता है और आर्थिक स्थिति मजबूत बनाने में मदद मिल सकती है।

उन्होंने यह भी कहा कि लोन की किस्त समय पर नहीं चुकाने पर पेनल्टी और अतिरिक्त खर्च बढ़ सकते हैं। नौकरी छूटने जैसी स्थिति में कर्ज चुकाना और भी मुश्किल हो सकता है।

कम आमदनी वाले लोगों के लिए भी जरूरी संदेश

हसन ने लोगों से अपील की कि वे यह सलाह घरेलू कामगारों, ब्लू-कॉलर कर्मचारियों और कम अनुभव वाले नौकरीपेशा लोगों तक भी पहुंचाएं। कई बार लोग लोन की असली लागत और ब्याज दर को ठीक से समझ नहीं पाते।

सोशल मीडिया पर यूजर्स ने क्या कहा?

हसन की पोस्ट पर कुछ यूजर्स ने कहा कि कई लोग म्यूचुअल फंड को बचत का जरिया मानते हैं और कर्ज को अलग जिम्मेदारी समझते हैं। एक यूजर ने बताया कि उसके दोस्त ने लोन लिया था, जिसकी प्रभावी सालाना ब्याज दर 24 फीसदी से ज्यादा निकली।

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

Video: 61 साल की उम्र में गजब की फिटनेस, एक घंटे में 1,575 पुश-अप्स के बाद 5 घंटे प्लैंक कर रचा इतिहास

हूती हमलों और बॉन्ड की चिंताओं से कोस्पी में गिरावट, एशिया बाजारों में मिला-जुला कारोबार

Global Market: दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स सोमवार, 12 अक्टूबर को 1.08% गिर गया। दरअसल, निवेशकों ने देश के बॉन्ड मार्केट के लिए मंदी वाले नजरिए पर विचार किया। जानकारों का मानना ​​था कि यील्ड (रिटर्न) फिर से बढ़ सकती है, क्योंकि अस्थिरता को रोकने के सरकारी उपायों का असर कम हो रहा है और ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की उम्मीदें बढ़ रही हैं।

वहीं निक्केई करीब 0.02 फीसदी की गिरावट के साथ 69,030.92 के आसपास दिख रहा है। वहीं, स्ट्रेट टाइम्स में 0.49 फीसदी की बढ़त दिखा रहा है। ताइवान का बाजार 0.79 फीसदी गिरकर 49,016.77 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। जबकि हैंगसेंग 0.78 फीसदी की बढ़त के साथ 24,398.00 के स्तर पर नजर आ रहा है

जापान के बाज़ार ‘स्पोर्ट्स डे’ के कारण बंद रहे, जबकि सऊदी अरब पर हूती हमलों ने पूरे क्षेत्र के निवेशकों को परेशान कर दिया। ‘स्पोर्ट्स डे’ एक राष्ट्रीय त्योहार है, जिसे पहली बार 1966 में 1964 के टोक्यो ओलंपिक की शुरुआत की याद में मनाया गया था।

बाजार इस बात का अनुमान लगा रहे थे कि अगले 6 महीनों में बैंक ऑफ कोरिया ब्याज दरों में कुल मिलाकर 50 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी कर सकता है।

ट्रेडर्स ने सऊदी अरब पर हूती हमलों पर गौर किया, जिससे पूरे एशिया में सेंटीमेंट पर असर पड़ा। इस ग्रुप ने रविवार को सऊदी अरब के मुख्य हवाई अड्डे पर फिर से हमला किया; इससे एक दिन पहले हुए हमले में 12 लोगों की मौत हो गई थी।

ब्लूमबर्ग के अनुसार, विश्लेषकों का कहना है कि तनाव बढ़ने से बड़े संघर्ष का खतरा पैदा हो गया है, जिसमें अमेरिका भी शामिल हो सकता है और इससे ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार में बाधा आ सकती है। सऊदी अरब एशिया और यूरोप के बीच शिपिंग के लिए अहम ‘बाब अल-मंडेब’ के पास जवाबी कार्रवाई का भी समर्थन कर रहा था।

जापानी येन में डॉलर के मुकाबले 158.28 के स्तर पर बहुत कम बदलाव हुआ, और ऑफ़शोर युआन भी 6.6938 के स्तर पर लगभग स्थिर रहा।

वॉल स्ट्रीट के उतार-चढ़ाव भरे हफ़्ते के बाद अमेरिकी स्टॉक इंडेक्स फ्यूचर्स में थोड़ी बढ़त देखी गई। S&P 500 मंगलवार को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा, लेकिन फिर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मांग को लेकर चिंताओं के कारण अगले दो सेशन में गिर गया। शुक्रवार को इसमें फिर से तेजी आई क्योंकि निवेशकों ने एक और मज़बूत अर्निंग्स सीज़न (कंपनियों के नतीजों का दौर) पर ध्यान दिया और यह अपने पीक (उच्चतम स्तर) के करीब बना रहा। इस हफ़्ते अमेरिका और यूरोप में महंगाई के आंकड़े आने वाले हैं और कई सेंट्रल बैंक अधिकारी भी बोलने वाले हैं। ट्रेडर अमेरिका के कंज्यूमर प्राइस डेटा और US फ़ेडरल रिज़र्व के चेयरमैन केविन वॉर्श के बयान पर बारीकी से नज़र रखेंगे, ताकि उन्हें आगे ब्याज दरें बढ़ने की रफ़्तार के बारे में संकेत मिल सकें।

अगर सितंबर के आंकड़े उम्मीद से ज़्यादा मज़बूत रहते हैं, तो इससे हाल ही में बॉन्ड की बिकवाली फिर से शुरू हो सकती है क्योंकि फ़ेड को और ज़्यादा सख्ती बरतनी पड़ सकती है। पिछले हफ़्ते 10-साल के US बॉन्ड का यील्ड 5.4% के करीब पहुँच गया था, जो 2002 के बाद सबसे ज़्यादा है। निवेशकों का कहना है कि ज़्यादा यील्ड अब खुद ही उधार लेने की लागत बढ़ाकर सेंट्रल बैंकों का कुछ काम कर रहे हैं।

लगातार चौथे हफ़्ते बढ़त के बाद US डॉलर अपनी मुख्य प्रतिद्वंद्वी मुद्राओं के मुकाबले एक सीमित दायरे में बना रहा; यह 2025 की शुरुआत के बाद से इसकी सबसे लंबी बढ़त का सिलसिला है।

तेल की कीमतों और ईरान के साथ युद्ध ने मुद्रा को सहारा दिया क्योंकि निवेशक सुरक्षा की तलाश में थे। सट्टेबाज़ ट्रेडर तेज़ी की उम्मीद बनाए हुए थे और दांव लगा रहे थे कि US अर्थव्यवस्था अपने प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में ब्याज दरों में और बढ़ोतरी को बेहतर ढंग से संभाल सकती है।

सप्लाई की चिंताओं के कारण तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। एयरपोर्ट पर हमलों और होर्मुज़ जलडमरूमध्य के पास टैंकर पर एक नए हमले के बाद ब्रेंट क्रूड में शुरुआती बढ़त हुई और यह 0.7% बढ़कर $105.45 प्रति बैरल हो गया।

इसके बाद बेंचमार्क में उतार-चढ़ाव आया और शुरुआती एशियाई कारोबार में यह $104 से नीचे गिरकर लगभग $103.51 पर आ गया। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 0.5% बढ़कर $92.27 प्रति बैरल हो गया।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

FD vs Bonds: शेयर बाजार में गिरावट के बीच पैसा कहां लगाएं? समझिए FD और बॉन्ड में कौन है बेहतर

FD vs Bonds: शेयर बाजार में गिरावट के बाद निवेशक दूसरे विकल्पों पर भी ध्यान दे रहे हैं। इनमें फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और बॉन्ड शामिल हैं। दोनों में पैसा लगाकर रिटर्न कमाया जा सकता है। हालांकि, दोनों के फायदे और जोखिम अलग-अलग हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि FD और बॉन्ड में से किसी एक को चुनने से पहले अपनी जरूरत समझनी चाहिए। आपको पैसा कब चाहिए, कितना जोखिम उठा सकते हैं और निवेश का लक्ष्य क्या है, इन बातों से फैसला करना आसान होगा।

सितंबर में Nifty 50 में 6.06% की गिरावट रही। दूसरी ओर, बाजार में गिरावट के बीच RBI ने भी रेपो रेट 5.25% से बढ़ाकर 5.50% कर दिया। इसके बाद FD और बॉन्ड जैसे फिक्स्ड इनकम विकल्पों पर निवेशकों का फोकस और भी ज्यादा बढ़ा है।

FD और बॉन्ड में कहां लगाएं पैसा?

Stable Money के को-फाउंडर और CEO सौरभ जैन के मुताबिक, FD लंबे समय से निवेशकों के लिए पसंदीदा विकल्प रही है। इसमें एक तय अवधि के लिए पैसा जमा किया जाता है। बदले में तय शर्तों के मुताबिक ब्याज मिलता है। दूसरी ओर, बॉन्ड के जरिए निवेशक फिक्स्ड इनकम में निवेश के नए मौके तलाश सकते हैं। इनमें बेहतर रिटर्न की संभावना हो सकती है, लेकिन जोखिम भी समझना जरूरी है।

सौरभ जैन का कहना है कि FD और बॉन्ड एक जैसे नहीं हैं। इनमें से कौन-सा विकल्प बेहतर है, यह निवेशक के लक्ष्य, निवेश की अवधि और पैसे की जरूरत पर निर्भर करता है। फिलहाल, कॉरपोरेट बॉन्ड में जोखिम के आधार पर करीब 11-15% तक रिटर्न मिल रहा है। वहीं, FD पर ब्याज दरें करीब 6-8% के दायरे में हैं।

अगर आपको इमरजेंसी के लिए पैसा अलग रखना है, तो FD काम आ सकती है। इसमें निवेश की अवधि और ब्याज पहले से पता रहता है। वहीं, बॉन्ड उन लोगों के लिए विकल्प हो सकते हैं, जो अपने फिक्स्ड इनकम निवेश में विविधता चाहते हैं।

सरकारी सिक्योरिटीज में क्या देखें?

Jiraaf के को-फाउंडर सौरव घोष का कहना है कि बॉन्ड में निवेश करते समय सिर्फ रिटर्न देखना काफी नहीं है। यह भी समझना जरूरी है कि पैसा डूबने या कीमत घटने का कितना जोखिम है। सरकारी सिक्योरिटीज को सरकार की गारंटी मिलती है। इसलिए इनमें क्रेडिट रिस्क कम होता है। दूसरी ओर, कॉरपोरेट बॉन्ड में ज्यादा रिटर्न मिल सकता है। लेकिन इनमें कंपनी की वित्तीय स्थिति से जुड़ा जोखिम भी रहता है।

सौरव घोष के मुताबिक, सरकारी सिक्योरिटीज में भी ब्याज दरें बदलने पर कीमत घट-बढ़ सकती है। लंबी अवधि वाले बॉन्ड पर इसका असर ज्यादा हो सकता है। अगर निवेशक मैच्योरिटी से पहले बॉन्ड बेचता है, तो उसे नुकसान भी हो सकता है।

क्या कॉरपोरेट बॉन्ड बेहतर रहेगा?

सौरव घोष के मुताबिक, कॉरपोरेट बॉन्ड खरीदने से पहले कंपनी की कमाई, कैश फ्लो और कर्ज की स्थिति देखनी चाहिए। यह भी समझना जरूरी है कि कंपनी समय पर ब्याज और मूल रकम चुका पाएगी या नहीं। इसके अलावा, बॉन्ड के बदले मिलने वाली सुरक्षा की जानकारी भी जांचनी चाहिए। क्रेडिट रेटिंग से कंपनी की स्थिति समझने में मदद मिलती है। लेकिन सिर्फ रेटिंग देखकर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए।

सौरभ जैन भी निवेशकों को बॉन्ड जारी करने वाली कंपनी की वित्तीय स्थिति, क्रेडिट रेटिंग और लिक्विडिटी जांचने की सलाह देते हैं। साथ ही, यह देखना चाहिए कि जरूरत पड़ने पर बॉन्ड को कितनी आसानी से बेचा जा सकता है। ब्याज दरों में बदलाव से उसकी कीमत पर क्या असर पड़ेगा, यह समझना भी जरूरी है।

FD और बॉन्ड में से किसे चुनें?

इसका जवाब आपकी जरूरत पर निर्भर करता है। अगर आपको इमरजेंसी के लिए पैसा चाहिए, तो समय से पहले निकासी की सुविधा वाली FD उपयोगी हो सकती है। हालांकि, FD समय से पहले बंद करने पर जुर्माना लग सकता है या ब्याज कम मिल सकता है। इसलिए बैंक की शर्तें पहले पढ़ लें।

सौरव घोष के मुताबिक, जिस पैसे की तुरंत जरूरत नहीं है, उसे तय अवधि वाले बॉन्ड में लगाया जा सकता है। बॉन्ड से मिलने वाले ब्याज का समय अपने नियमित खर्चों के हिसाब से चुना जा सकता है।

उनका कहना है कि निवेश करने से पहले टैक्स के बाद मिलने वाला रिटर्न जरूर देखना चागिए। इसके अलावा, बॉन्ड की क्रेडिट क्वालिटी, मैच्योरिटी और जरूरत पड़ने पर पैसा निकालने की सुविधा की तुलना करें। सिर्फ ज्यादा रिटर्न देखकर फैसला न लेने से परेशानी हो सकती है।

Retiring at 45: जल्द रिटायरमेंट की तैयारी! नौकरी छोड़ने से पहले कर लें ये कैलकुलेशन

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Stocks to Buy: 73% तक रिटर्न दे सकते हैं ये 5 शेयर, ब्रोकरेज ने खरीदने की सलाह दी

Stocks to Buy: लगातार आठ हफ्तों तक बिकवाली के दबाव में रहने के बाद भारतीय शेयर बाजार में पिछले कारोबारी हफ्ते तेजी लौटी। Nifty 50 में 0.44% और Sensex में 0.78% की बढ़त दर्ज की गई। हालांकि, ग्लोबल अनिश्चितता, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, कच्चे तेल की कीमतों और RBI के ब्याज दर बढ़ाने से बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा।

इस बीच, ब्रोकरेज फर्मों ने कई शेयरों पर खरीदने की सलाह दी है। इनमें मेटल, ऑटोमोबाइल, लॉजिस्टिक्स, बैंकिंग और एंटरटेनमेंट सेक्टर की कंपनियां शामिल हैं। ब्रोकरेज के टारगेट प्राइस और दिए गए मौजूदा भाव के आधार पर इन पांच शेयरों में करीब 46% से 73% तक तेजी की संभावना है।

इन 5 शेयरों में कितनी तेजी की संभावना?

कंपनीमौजूदा शेयर भावटारगेट प्राइससंभावित तेजी
Shyam Metalics₹1,062.80₹1,55045.84%
Mahindra & Mahindra₹2,792₹4,26052.58%
PVR Inox₹1,331₹2,13560.41%
TCI Express₹467₹77064.88%
HDFC Bank₹708.20₹1,22572.97%

Shyam Metalics

मेटल कंपनी Shyam Metalics पर UBS ने ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज ने शेयर का टारगेट प्राइस 24% बढ़ाकर 1,550 रुपये कर दिया है। शेयर का मौजूदा भाव 1,062.80 रुपये है। इस हिसाब से इसमें करीब 45.84% तेजी की संभावना है।

UBS को कंपनी की विस्तार योजनाओं और ज्यादा वैल्यू वाले प्रोडक्ट्स पर बढ़ते फोकस से ग्रोथ की उम्मीद है। ब्रोकरेज के मुताबिक, कंपनी अपनी परियोजनाओं को इंडस्ट्री के औसत से कम लागत और कम समय में पूरा कर सकती है। इससे क्षमता बढ़ाने और निवेश पर बेहतर रिटर्न हासिल करने में मदद मिल सकती है।

Mahindra & Mahindra

ऑटोमोबाइल कंपनी Mahindra & Mahindra के शेयर पर Citi ने खरीदने की सलाह दी है। ब्रोकरेज ने 4,260 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। शेयर का मौजूदा भाव 2,792 रुपये है। इस आधार पर इसमें करीब 52.58% तेजी की संभावना है।

Citi को कंपनी के पैसेंजर व्हीकल, कमर्शियल व्हीकल और थ्री-व्हीलर कारोबार में अच्छी ग्रोथ की उम्मीद है। ब्रोकरेज के अनुमान के मुताबिक, सितंबर तिमाही में कंपनी की कुल गाड़ियों की बिक्री सालाना आधार पर 15.7% बढ़ सकती है। पैसेंजर व्हीकल की बिक्री में 26%, कमर्शियल व्हीकल में 17.8% और थ्री-व्हीलर में 38.7% बढ़ोतरी का अनुमान है।

हालांकि, ट्रैक्टर की बिक्री में 5.6% गिरावट की आशंका है। बढ़ती कमोडिटी लागत और प्रोडक्ट मिक्स से मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है। Citi को रेवेन्यू में 26.7% बढ़ोतरी की उम्मीद है, जबकि EBITDA में 1.8% गिरावट का अनुमान है।

PVR Inox

एंटरटेनमेंट कंपनी PVR Inox पर CLSA ने ‘Outperform’ रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज ने 2,135 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। शेयर का मौजूदा भाव 1,331 रुपये है। इस हिसाब से इसमें करीब 60.41% तेजी की संभावना है।

CLSA को हिंदी, क्षेत्रीय भाषाओं और हॉलीवुड फिल्मों की बेहतर रिलीज से सिनेमाघरों में दर्शकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। ब्रोकरेज का मानना है कि स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर लगातार कंटेंट देखने से दर्शकों में थकान बढ़ रही है। ऐसे में लोग फिर से सिनेमाघरों में फिल्म देखने का रुख कर सकते हैं।

PVR Inox के पास करीब 1,800 स्क्रीन हैं। कंपनी ने छोटे शहरों में स्मार्ट स्क्रीन के विस्तार के लिए 300 जगहों की पहचान की है। CLSA को उम्मीद है कि इस विस्तार से कंपनी को ग्रोथ मिलेगी। बेहतर कैश जनरेशन और हाल में किए गए शेयर बायबैक को भी ब्रोकरेज ने अपने आकलन में शामिल किया है।

TCI Express

लॉजिस्टिक्स कंपनी TCI Express पर Jefferies ने ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज ने शेयर का टारगेट प्राइस 770 रुपये रखा है। शेयर का मौजूदा भाव 467 रुपये है। इसके आधार पर इसमें करीब 64.88% तेजी की संभावना है।

Jefferies को कंपनी के शिपमेंट वॉल्यूम में सुधार की उम्मीद है। इससे ट्रकों का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा और कमाई बढ़ सकती है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि सितंबर 2026 तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू सालाना आधार पर 10% और EBITDA 8% बढ़ सकता है।

हालांकि, मिडिल ईस्ट में तनाव से कारोबारी गतिविधियों पर असर पड़ने का जोखिम है। Jefferies के मुताबिक, शिपमेंट वॉल्यूम में रिकवरी जारी रहने पर कंपनी की ऑपरेशनल एफिशिएंसी और कमाई को फायदा मिल सकता है।

HDFC Bank

प्राइवेट सेक्टर के HDFC Bank पर Emkay ने ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज ने शेयर के लिए 1,225 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। शेयर का मौजूदा भाव 708.20 रुपये है। इस आधार पर इसमें करीब 72.97% तेजी की संभावना है।

Emkay का मानना है कि लंबे समय से कमजोर प्रदर्शन के कारण बैंक का वैल्यूएशन आकर्षक स्तर पर आ गया है। शेयर में रिकवरी के लिए बैंक को अपने मुख्य कारोबार में सुधार दिखाना होगा। डिपॉजिट जुटाने और लोन ग्रोथ में प्रगति से निवेशकों का भरोसा लौट सकता है।

ब्रोकरेज के मुताबिक, विदेशी निवेशकों की बिकवाली कम होने या उनका रुख बदलने से भी शेयर को सपोर्ट मिल सकता है। हालांकि, वैल्यूएशन में दोबारा बढ़ोतरी बैंक के कारोबारी प्रदर्शन पर निर्भर करेगी।

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Amazon Great Indian Festival Sale 2026: ₹25,000 से कम में मिल रहे ये 6 धांसू स्मार्टफोन, फीचर्स में हैं बेस्ट

Amazon Great Indian Festival Sale 2026 इस हफ्ते की शुरुआत में शुरू हुई है। इस सेल में कई लोकप्रिय स्मार्टफोन की कीमतों में बड़ी कटौती की गई है। अगर आप कम बजट में नया फोन खरीदने की सोच रहे हैं, तो ₹25,000 से कम कीमत में एक अच्छा स्मार्टफोन खरीदने का यह बढ़िया मौका है।

सेल में कई ऐसे स्मार्टफोन मिल रहे हैं, जिनमें तेज रिफ्रेश रेट वाली स्क्रीन, बड़ी बैटरी, शानदार कैमरा, दमदार प्रोसेसर और 5G कनेक्टिविटी जैसे फीचर्स दिए गए हैं। इन फोन पर मिल रहे डिस्काउंट के अलावा, चुनिंदा बैंक कार्ड से पेमेंट करने पर तुरंत छूट भी मिल सकती है। साथ ही, ग्राहक नो-कॉस्ट EMI का विकल्प चुनकर आसान किस्तों में भी फोन खरीद सकते हैं।

Amazon Great Indian Festival 2026: ₹25,000 से कम कीमत वाले स्मार्टफोन पर डील्स

इस साल की Amazon Great Indian Festival Sale, दशहरा और दिवाली से पहले iQOO, Samsung, OnePlus, Realme और दूसरे ब्रांड्स के स्मार्टफोन पर डिस्काउंट पाने का एक शानदार मौका है। आप SBI क्रेडिट और डेबिट कार्ड और SBI क्रेडिट कार्ड EMI ट्रांजैक्शन पर 10% का डिस्काउंट पा सकते हैं। Amazon Pay ICICI Bank क्रेडिट कार्ड से खरीदारी करने पर 5% कैशबैक भी मिल सकता है।

वहीं, खरीद की असल कीमत को और कम करने के लिए अतिरिक्त एक्सचेंज बोनस और कैशबैक ऑप्शन का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, Realme Narzo 100x 5G अभी ₹22,499 में मिल रहा है, जबकि इसकी ओरिजिनल MRP ₹35,999 है। एक्सचेंज ऑफर के जरिए ₹23,050 तक की अतिरिक्त बचत की जा सकती है। खरीदार चुनिंदा SBI क्रेडिट और डेबिट कार्ड पर ₹1,250 तक के डिस्काउंट वाले बैंक ऑफर का भी फायदा उठा सकते हैं।

ग्राहक नो-कॉस्ट EMI के आसान विकल्पों का भी फायदा उठा सकते हैं। इसके तहत चुनिंदा क्रेडिट कार्ड, बजाज फिनसर्व कार्ड और Amazon Pay Later के जरिए बिना ब्याज दिए किस्तों में फोन खरीदने का मौका मिल सकता है।

नीचे Amazon Great Indian Festival Sale 2026 के दौरान ₹25,000 से कम कीमत में मिलने वाले बेहतरीन स्मार्टफोन डील्स की लिस्ट दी गई है। खरीदारी करने से पहले आप Flipkart और दूसरी ई-कॉमर्स वेबसाइटों पर भी इन फोन की कीमतों की तुलना कर सकते हैं, ताकि आपको सबसे अच्छी डील मिल सके।

स्मार्टफोन का नामअसली कीमतसेल में कीमतखरीदें
Redmi 17 5G₹39,999₹23,998अभी खरीदें
OnePlus N6₹30,999₹23,499अभी खरीदें
iQOO Z11xa 5G₹40,999₹24,999अभी खरीदें
Realme Narzo 100x 5G₹35,999₹22,499अभी खरीदें
Samsung Galaxy M47₹46,999₹24,999अभी खरीदें
iQOO Z11 Lite₹30,999₹15,499अभी खरीदें

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Agniveer Retirement Benefits: अग्निवीरों का पहला बैच इस दिन होगा रिटायर, 10 लाख रुपये और सरकारी नौकरी में आरक्षण के साथ जानिए मिलेंगी क्या सुविधाएं

Agniveer Retirement Benefits: देश की तीनों सेनाओं में अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीरों की भर्ती 4 साल पहले हुई थी। इस योजना के तहत भर्ती अग्निवीरों का पहला बैच भारतीय नौसेना में चार साल की सेवा पूरी करके 21 नवंबर 2026 को रिटायर होने जा रहा है। यह ऐतिहासिक पल होने के साथ ही बेहद अहम भी होगा, क्योंकि अब सभी का ध्यान सेना से सेवा निवृत्त होने वाले इन युवाओं के भविष्य पर होगा। सरकार ने इनके पुनर्वास और भविष्य को सुरक्षित करने के लिए क्या पुख्ता इंतजाम किए हैं।

अग्निपथ योजना के तहत देश की सेनाओं में 4 साल पहले अग्निवीरों की भर्ती के समय देशभर में इसको लेकर भारी चर्चा और बहस छिड़ी थी। भारतीय नौसेना से अग्निवीरों का पहला बैच 21 नवंबर 2026 को 4 साल की सेवा पूरी करके रिटायर होगा। अग्निपथ योजना के तहत लगभग 75% अग्निवीर सेवा मुक्त हो जाएंगे। बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले 25% युवाओं को सेना में स्थायी (Permanent) कर लिया जाएगा। खबर है कि तीनों सेनाएं रिटेंशन रेट को बढ़ाने पर विचार कर रही हैं। इस संबंध में सरकार को नया प्रस्ताव भेजने की तैयारी है।

सेवा पूरी होने पर अग्निवीरों को मिलेंगी ये सुविधाएं

सेवा निधि पैकेज : रिटायर हो रहे हर अग्निवीर को एकमुश्त लगभग 10.04 लाख रुपये का सेवा निधि पैकेज मिलेगा. यह रकम टैक्स-फ्री होगी। इसमें युवा का अपना योगदान, सरकार का बराबर का हिस्सा और उस पर मिलने वाला ब्याज शामिल होता है।

जीवन बीमा कवर : सेवा काल के दौरान अग्निवीरों को 48 लाख रुपये का बीमा कवर मिलता है। यह उनके और उनके परिवार के लिए बड़ा सुरक्षा कवच साबित होगा।

स्किल सर्टिफिकेट : रिटायर होने वाले अग्निवीरों को स्किल सर्टिफिकेट (कौशल प्रमाण पत्र) दिया जाता है। इससे उन्हें आगे प्राइवेट या सरकारी नौकरी में इंटरव्यू के दौरान प्राथमिकता मिल सकेगी। हालांकि, इन्हें ग्रेच्युटी, पेंशन या मेडिकल और कैंटीन की आजीवन सुविधाएं नहीं मिलेंगी।

रिटायर अग्निवीरों के भविष्य के लिए सरकार का प्लान

सरकार के साथ कई मंत्रालय सेवानिवृत्त होने वाले अग्निवीरों का सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने के लिए कई विकल्प तैयार किए हैं। आइए जानें :

अर्धसैनिक बलों (CAPF) में 50% आरक्षण : बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी और असम राइफल्स जैसी सुरक्षा बलों में कॉन्स्टेबल (जनरल ड्यूटी) और राइफलमैन के पदों पर पूर्व अग्निवीरों के लिए 50 फीसदी सीटें आरक्षित कर दी गई हैं। इनके लिए ‘पूर्व-अग्निवीर’ नाम से नई कैटेगरी भी बनाई गई है।

गृह मंत्रालय का नया पोर्टल : पूर्व अग्निवीरों को कॉरपोरेट और सरकारी सेक्टर में आसानी से एडजस्ट करने के लिए गृह मंत्रालय विशेष पोर्टल तैयार कर रहा है। इसके जरिए इन्हें नौकरी के ढेरों विकल्प मिलेंगे।

राज्य सरकारों का कोटा और आयु में छूट : उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों की सरकारों ने पुलिस और अन्य विभागों में पूर्व अग्निवीरों के लिए 10 से 20 प्रतिशत तक पद रिजर्व किए हैं। साथ ही, आयु सीमा में 3 से 5 साल तक की छूट का ऐलान भी किया गया है, जिससे ये युवा आसानी से सरकारी नौकरी पा सकें।

फिजिकल और लिखित परीक्षा से छूट : इन सुरक्षा बलों में भर्ती के दौरान पूर्व अग्निवीरों को फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट (PST), फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट (PET) और लिखित परीक्षा से छूट दी जाएगी।

Shardiya Navratri 2026 Muhurat: कल गज वाहन पर वैधृति योग और चित्रा नक्षत्र में होगा मां दुर्गा का आगमन, जानें कलश स्थापना का मुहूर्त

रेलवे को भारी पड़ी रिजर्व कोच से यात्री के सामान की चोरी, दिल्ली के कंज्यूमर कमिशन ने सुनाया 1.45 लाख रुपये हर्जाना देने का आदेश

दिल्ली राज्य उपभोक्ता आयोग ने उत्तर रेलवे को एक पैसेंजर को 1.45 लाख रुपये देने का आदेश दिया है, जिसका बैग ट्रेन के एक आरक्षित कोच से चोरी हो गया था। आयोग ने कहा कि रेलवे यह कहकर जिम्मेदारी से बच नहीं सकता कि यात्री का सामान टिकट के तहत कवर नहीं होता। कमीशन ने यह भी कहा कि रेलवे स्टाफ घुसपैठ को रोकने में नाकाम रहा और यात्री को FIR दर्ज कराने में ठीक से मदद नहीं की। उपभोक्ता आयोग ने 6 अक्टूबर, 2026 को उत्तर रेलवे की अपील खारिज कर दी और जिला आयोग के आदेश को बरकरार रखा।

7 जून 2014 का है मामला

दिल्ली राज्य उपभोक्ता आयोग के आदेश के मुताबिक, अजय कुमार 7 जून, 2014 को महानंदा एक्सप्रेस से दिल्ली से पटना जा रहे थे। इस दौरान दो बिना इजाजत वाले लोग उनके आरक्षित कोच में घुसे और उनका ट्रॉली बैग चुरा लिया। बैग में कथित तौर पर 1.2 लाख रुपये की ज्वेलरी, कपड़े और दूसरा सामान था। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, कुमार ने आरोप लगाया कि वह तुरंत कोच में TTE के पास गए और FIR दर्ज कराने के लिए कहा। लेकिन, FIR 23 अप्रैल, 2015 को ही दर्ज हुई। शिकायत करने वाले ने रेलवे अधिकारियों से संपर्क करना जारी रखा और बाद में पता चला कि मई 2017 में केस को अनट्रेस्ड मार्क कर दिया गया था। फिर उसने नुकसान के लिए हर्जाने की मांग करते हुए उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।

उत्तर रेलवे ने कहा कि सामान उसके पास बुक नहीं किया गया था और वह पैसेंजर की पर्सनल कस्टडी में था। उसने रेलवे एक्ट के सेक्शन 100 का भी हवाला दिया, जो रेलवे स्टाफ की लापरवाही साबित होने तक सामान के लिए रेलवे की जिम्मेदारी को सीमित करता है। उसने आगे कहा कि मामला चोरी से जुड़ा है और इसे क्रिमिनल लॉ के तहत निपटाया जाना चाहिए।

जिला उपभोक्ता आयोग ने 16 अप्रैल, 2024 को कुमार के पक्ष में फैसला सुनाया, जिसमें उत्तर रेलवे को 7 सितंबर, 2017 से 9% सालाना ब्याज के साथ 1.2 लाख रुपये और हर्जाने के तौर पर 25,000 रुपये देने का निर्देश दिया। रेलवे ने उस आदेश को राज्य आयोग के सामने चुनौती दी।

आयोग ने रेलवे को जिम्मेदार क्यों ठहराया?

अध्यक्ष जस्टिस संगीता ढींगरा सहगल और मेंबर बिमला कुमारी की बेंच ने कहा कि जिला आयोग का रेलवे को लापरवाही और सेवा में कमी के लिए जिम्मेदार ठहराना सही था। बेंच ने कहा कि मुद्दा सिर्फ यह नहीं था कि यात्री ने अपना सामान अपनी कस्टडी में रखा था या नहीं। बल्कि यह था कि रेलवे ने बिना इजाजत वाले लोगों को रिजर्व्ड कोच में घुसने से रोकने के लिए सही कदम उठाए थे या नहीं। कमीशन ने कहा, “जो यात्री रिजर्व्ड टिकट खरीदता है, वह अपनी निजी सुरक्षा और सामान की सुरक्षा और सिक्योरिटी का सही भरोसा पाने का हकदार है।”

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