Vedanta Group कंपनियों के शेयरों को लगे पंख, वेदांता ऑयल एंड गैस सबसे ज्यादा 7% उछला

वेदांता ग्रुप की कंपनियों के लिए बुधवार यानी 26 अगस्त का दिन खास रहा। ग्रुप की करीब सभी कंपनियों के शेयरों में जबर्दस्त तेजी दिखी। शेयर बाजार में गिरावट के बावजूद ये शेयर अच्छी तेजी के साथ बंद हुए। इससे एक दिन में समूह की कंपनियों के मार्केट कैपिटलाइजेशन में 18,120 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ।

मार्केट कैपिटलाइजेशन बढ़कर 3.38 लाख करोड़ रुपये पहुंचा

Vedanta Group की प्रमुख कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन एक दिन में 5.66 फीसदी बढ़कर 3.38 लाख करोड़ रुपये हो गया। सबसे ज्यादा 7.27 फीसदी का उछाल वेदांता ऑयल एंड गैस के शेयरों में दिखा। इससे इसका भाव 41.78 रुपये पर पहुंच गया। बीते एक महीने में यह शेयर करीब 20 फीसदी चढ़ा है।

वेदांता एल्युमीनियम के शेयरों को खरीदने की सलाह

Vedanta Aluminium Metal के शेयरों में 3.33 फीसदी की तेजी आई। इससे इसका भाव 462.75 रुपये पर क्लोज हुआ। इस शेयर में तेजी की वजह ब्रोकरेज फर्म मोतोलाल ओसवाल की रिपोर्ट है। उसने शेयर पर ‘बाय’ की अपनी रेटिंग बनाए रखी है। उसने शेयर के लिए 540 रुपये का टारेगट प्राइस दिया है। उसने कहा है कि आगे कंपनी की ग्रोथ स्ट्रॉन्ग रहने के आसार हैं। यह शेयर बीते एक महीने में करीब 6 फीसदी चढ़ा है।

वेदांता आयरन के शेयरों में करीब 5 फीसदी उछाल

वेदांता ऑयरन एंड स्टील के शेयर में 4.98 फीसदी उछाल आया। इससे इसका भाव 38.78 रुपये पर क्लोज हुआ। बीते एक महीने में यह शेयर करीब 28 फीसदी उछला है। वेदांता का शेयर 4.36 फीसदी चढ़कर 287 रुपये पर बंद हुआ। यह शेयर बीते एक महीने में 8.45 फीसदी चढ़ा है। ग्रुप की मार्केट वैल्यू बढ़ाने में सबसे ज्यादा 10,731 करोड़ रुपये का योगदान वेदांता एल्युमीनियम का रहा। वेदांता लिमिटेड का 4,891 करोड़ रुपये का योगदान रहा।

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हिंदुस्तान जिंक के शेयरों का टारगेट प्राइस 750 करोड़ रुपये

हिंदुस्तान जिंक के शेयरों में भी तेजी दिखी। यह शेयर 6.29 फीसदी चढ़कर 629.85 रुपये पर बंद हुआ। तेजी की वजह सरकार की तरफ से आया एक स्पष्टीकरण है। सरकार ने साफ किया है कि फिलहाल उसका हिंदुस्तान जिंक में हिस्सेदारी बेचने का प्लान नहीं है। इस, कंपनी में सरकार की 27.92 फीसदी हिस्सेदारी है, जबकि वेदांता की 60.71 फीसदी हिस्सेदारी है। इस बीच, जेफरीज ने हिंदुस्तान जिंक के शेयरों का टारगेट प्राइस बढ़ाया है। उसने टारगेट प्राइस बढ़ाकर 750 रुपये कर दिया है।

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जेपी मॉर्गन ने Nifty 50 के लिए 27000 का टारेगट दिया, भारतीय शेयर बाजार के बुरे दिन खत्म

शेयर बाजार में आने वाली तेजी को लेकर क्या आपके मन में संदेह है? अगर हां तो आपको जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट पर गौर करने की जरूरत है। जेपी मॉर्गन ने निफ्टी 50 के लिए 27,000 का टारगेट बताया है। उसका मानना है कि वैल्यूएशन में इम्प्रूवमेंट है। साध ही घरेलू इकोनॉमी से जु़ड़े बेहतर डेटा की वजह से भारतीय शेयर बाजार फिर से अट्रैक्टिव हो गया है।

भारतीय बाजार के लिए ग्लोबल रिस्क बरकरार

जेपी मॉर्गन में इंडिया इक्विटी रिसर्च के हेड संजय मोकिम ने ग्लोबल स्थितियों खासकर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को भारतीय शेयर बाजार के लिए बड़ा रिस्क बताया है। उनका मानना है कि इससे भारतीय शेयर बाजार में तेजी पर असर पड़ सकता है। इसका असर भारत में विदेशी निवेशकों के निवेश पर भी पड़ सकता है।

घरेलू स्थितियां बाजार में तेजी के लिए अनुकूल

मोकिम ने कहा कि इंडिया की इकोनॉमी की स्थितियां शेयर बाजार के लिए अनुकूल हैं। अप्रैल-जून तिमाही के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे हैं। वैल्यूएशंस खासकर लार्जकैप शेयरों की वैल्यूएशन कम हुई है। उन्होंने कहा, “भारतीय शेयरों में वैल्यू ट्रेड पिछले तीन सालों के मुकाबले अब बेहतर हैं।” उन्होंने कहा कि विदेशी निवेशकों के रुख में बदलाव से भी स्थिति अनुकूल हुई है।

निवेशक फिर से भारतीय बाजार को लेकर उत्साहित

उन्होंने कहा कि नॉर्थ एशियन टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में उतार-चढ़ाव और भारत में लार्जकैप शेयरों की सही वैल्यूएशंस से इनवेस्टर्स एक बार फिर भारत में निवेश को लेकर उत्साहित हैं। हालांकि, उनका मानना है कि भारतीय बाजारों में विदेशी निवेश तुरंत बढ़ने नहीं जा रहा है। उनका मानना है कि वैश्विक स्थितियों को लेकर ज्यादा चिंता है।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल से डॉलर का विकल्प मिला

मोकिम ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के बारे में कहा कि इसके बढ़ने से निवेशकों के पास अपेक्षाकृत सुरक्षित डॉलर एसेट्स का एक विकल्प मिल गया है। उन्होंने कहा, “जब 10 साल के बॉन्ड्स की यील्ड इस लेवल पर हैं तो आपको इमर्जिंग मार्केट्स एसेट्स में निवेश करने की क्या जरूरत है।” उन्होंने भारत में आईपीओ, क्वालिफायड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट्स (QIP) और ब्लॉक डील्स का भी जिक्र किया।

आआईपीओ, क्यूआईपी और ब्लॉक डील में काफी पैसा जा रहा

उन्होंने कहा कि आईपीओ, क्यूआईपी और ब्लॉक डील में काफी पैसा जा रहा है। अभी बाजार में नए शेयरों की सप्लाई म्यूचुअल फंड्स में हर महीने होने वाले निवेश के मुकाबले ज्यादा है। उन्होंने कहा कि इसका असर छोटी अवधि में लिक्विडिटी पर पड़ेगा। लेकिन, मीडियम टर्म में यह अच्छा है, क्योंकि इससे बाजार का दायरा बढ़ेगा और निवेश के नए मौके बनेंगे।

Stock Market Holiday: क्या रक्षाबंधन पर 28 अगस्त को बंद रहेगा शेयर बाजार? जानिए NSE और BSE का आधिकारिक अपडेट

Raksha Bandhan Holiday 2026: रक्षाबंधन का त्योहार इस हफ्ते शुक्रवार, 28 अगस्त को मनाया जाएगा। ऐसे में शेयर बाजार के निवेशकों और ट्रेडर्स के मन में यह सवाल है कि क्या 28 अगस्त को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में कारोबार होगा या छुट्टी रहेगी।

अगर आप भी 28 अगस्त को ट्रेडिंग का प्लान बना रहे हैं, तो NSE और BSE की आधिकारिक हॉलीडे लिस्ट का यह अपडेट जरूर जान लें।

क्या 28 अगस्त, रक्षाबंधन को खुला रहेगा शेयर बाजार?

BSE और NSE के आधिकारिक हॉलीडे कैलेंडर के मुताबिक, 28 अगस्त 2026 शुक्रवार को रक्षाबंधन के अवसर पर शेयर बाजार में कोई छुट्टी नहीं है। बाजार सामान्य रूप से अपने तय समय पर खुला रहेगा और ट्रेडिंग चालू रहेगी।

किन सेगमेंट्स में होगा कारोबार: इक्विटी, इक्विटी डेरिवेटिव्स, करेंसी डेरिवेटिव्स, NDS-RST और ट्राई पार्टी रेपो समेत सभी सेगमेंट्स में सामान्य दिनों की तरह ट्रेडिंग होगी।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) के कैलेंडर के अनुसार, रक्षाबंधन के दिन कमोडिटी मार्केट में भी मॉर्निंग और इवनिंग दोनों सेशंस में कामकाज चालू रहेगा।

साल 2026 के बचे हुए महीनों में कब-कब बंद रहेगा शेयर बाजार?

स्टॉक एक्सचेंज कैलेंडर के अनुसार, साल 2026 के बाकी बचे महीनों में भारतीय शेयर बाजार में कुल 6 ट्रेडिंग हॉलीडे शेड्यूल हैं:

सितंबर: 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के मौके पर अगला ट्रेडिंग हॉलीडे रहेगा।

अक्टूबर: 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी जयंती और 20 अक्टूबर को दशहरा पर बाजार बंद रहेगा।

नवंबर: 10 नवंबर को दिवाली-बलिप्रतिपदा और 24 नवंबर को प्रकाश गुरुपर्व श्री गुरु नानक देव जी के अवसर पर छुट्टी रहेगी।

दिसंबर: 25 दिसंबर को क्रिसमस के उपलक्ष्य में बाजार में कारोबार स्थगित रहेगा।

28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन शेयर बाजार पूरी तरह चालू रहेगा। निवेशकों और ट्रेडर्स के लिए शुक्रवार का दिन सामान्य कारोबारी दिन रहेगा। ट्रेडर अपनी ट्रेडिंग और इनवेस्टमेंट प्लानिंग बिना किसी रुकावट के बना सकते हैं।

FIIs की बिकवाली से इन शेयरों में बड़ा मौका! Nippon MF के शैलेश राज भान ने बताया किन सेक्टर्स में आएगी बंपर तेजी

Nippon India Mutual Fund: शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच दिग्गज म्यूचुअल फंड हाउस निप्पॉन इंडिया ने भारतीय बाजारों को लेकर एक बेहद पॉजिटिव रिपोर्ट दी है। निप्पॉन इंडिया MF के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर शैलेश राज भान का मानना है कि आने वाले कुछ सालों में बेहतर कॉरपोरेट अर्निंग्स और वाजिब वैल्यूएशन बाजार की चाल को रफ्तार देंगे।

शैलेश राज भान के मुताबिक, अगर कोई बड़ा वैश्विक संकट नहीं आता है, तो अगले 3 सालों में भारतीय कंपनियों की कमाई सालाना 12 से 15 फीसदी की दर से बढ़ सकती है। आइए जानते हैं उन्होंने किन सेक्टर्स पर दांव लगाने की सलाह दी है और कहां कमाई का मौका दिख रहा है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बड़े शेयरों में बना मौका

शैलेश राज भान ने बताया कि पिछले कुछ समय में फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स(FIIs) की ओर से हुई भारी बिकवाली ने लार्जकैप शेयरों के वैल्यूएशन को काफी आकर्षक बना दिया है। FIIs की बिकवाली मुख्य रूप से लार्जकैप और फाइनेंशियल स्टॉक्स में केंद्रित थी। इसके चलते कई मजबूत और क्वालिटी कंपनियों के शेयर अब वाजिब और सही दामों पर उपलब्ध हैं।

जब वैल्यूएशन आपके पक्ष में हो और कंपनियों की कमाई बढ़ रही हो, तो अगले 3 से 4 सालों में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

प्राइवेट बैंक बने हुए है सबसे पसंदीदा सेक्टर

शैलेश राज भान ने दिग्गज निजी क्षेत्र के बैंकों को निवेश के लिए सबसे आकर्षक अवसर बताया है। उन्होंने कहा कि कई क्वालिटी प्राइवेट बैंक इस समय ऐसे वैल्यूएशन मल्टीपल्स पर ट्रेड कर रहे हैं, जो बीते कुछ सालों में दुर्लभ ही देखने को मिला है। कुछ बड़े प्राइवेट बैंकों के वैल्यूएशन तो अब पीएसयू बैंकों के आसपास आ पहुंचे हैं, जिससे इनमें री-रेटिंग की बड़ी गुंजाइश है।

कंज्यूमर और आईटी सेक्टर में वापसी के संकेत

लंबे समय तक सुस्ती झेलने के बाद अब कंज्यूमर और आईटी सेक्टर में भी वैल्यूएशन के लिहाज से खरीदारी के मौके दिख रहे हैं। ग्रामीण मांग में सुधार, टैक्स में राहत और कंपनियों की पहलों के चलते कंज्यूमबल्स, ड्यूरेबल्स, होटल्स और सर्विस सेक्टर में वॉल्यूम ग्रोथ लौट रही है।

बाजार आईटी सेक्टर के ग्रोथ आउटलुक को लेकर जरूरत से ज्यादा निगेटिव हो गया है। जो आईटी कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अपनाकर नए बिजनेस मॉडल में ढलेंगी, उन्हें आने वाले समय में बड़ा फायदा होगा।

कैपिटल गुड्स पर सतर्क रहें, पावर यूटिलिटीज पसंद

औद्योगिक और पावर सेक्टर पर लंबी अवधि के लिए सकारात्मक रहने के बावजूद, फंड मैनेजर ने कैपिटल गुड्स और ट्रांसमिशन कंपनियों को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है। इन कंपनियों के शेयरों की कीमतें पहले ही बहुत बढ़ चुकी हैं। इसके बजाय, बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए उन्होंने वाजिब वैल्यूएशन वाली पावर यूटिलिटी कंपनियों पर दांव लगाने की सलाह दी है।

पोर्टफोलियो में गोल्ड और सिल्वर का रोल अहम

सोना और चांदी कीमती धातुओं पर बात करते हुए शैलेश राज भान ने कहा कि भले ही हाल के दिनों में इनकी तेजी थोड़ी सुस्त पड़ी हो, लेकिन ग्लोबल अनिश्चितता और बाजार की उठापटक से बचने के लिए पोर्टफोलियो में सोना और चांदी होना बेहद जरूरी है।

अगर आप अगले 3 से 5 साल के नजरिए से भारतीय शेयर बाजार में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो केवल तेजी में भागने के बजाय उन सेक्टर्स पर ध्यान दें जहां वैल्यूएशन वाजिब हैं और कंपनियों की कमाई में टिकाऊ सुधार दिख रहा है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Market Outlook: इस हफ्ते कैसी रहेगी शेयर बाजार की चाल; कच्चे तेल की कीमत, पश्चिम एशिया के हालात समेत इन फैक्टर्स से होगा तय

नए शुरू हो रहे सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार की दिशा कच्चे तेल की कीमत और अमेरिका-ईरान संघर्ष से जुड़े घटनाक्रमों जैसे प्रमुख फैक्टर्स से तय होगी। पिछले सप्ताह सेंसेक्स में 468.42 अंकों की गिरावट रही। निफ्टी 114 अंक फिसला। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंड (रिसर्च) अजीत मिश्रा का कहना है कि निवेशक जैक्सन होल आर्थिक संगोष्ठी (Jackson Hole Symposium) पर करीबी नजर रखेंगे, खासकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के प्रमुख की टिप्पणियों पर। इससे बेंचमार्क ब्याज दरों की आगे की दिशा के संकेत मिलने की उम्मीद है।

आगे कहा कि अमेरिका के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के अनुमान, ड्यूरेबल गुड्स के ऑर्डर और कंज्यूमर कॉन्फिडेंस से भी अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती और फेडरल रिजर्व की नीतिगत दिशा के बारे में महत्वपूर्ण संकेत मिलेंगे। भारत को लेकर बात करें तो निवेशकों की नजर रुपये की चाल, विदेशी संस्थागत निवेशकों के रुख और घरेलू बाजार में नकदी की स्थिति पर रहेगी।

छाए रहेंगे 3 प्रमुख मुद्दे

ऑनलाइन ट्रेडिंग एंड वेल्थ टेक फर्म एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का कहना है कि वैश्विक बाजारों में इस सप्ताह 3 प्रमुख मुद्दे छाए रहेंगे। इनमें अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति की दिशा, एनवीडिया के तिमाही नतीजे और अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव शामिल हैं। लंबी अवधि के अमेरिकी बॉन्ड पर यील्ड में उतार-चढ़ाव के बीच जैक्सन होल संगोष्ठी में फेड के प्रमुख केविन वॉर्श के संबोधन पर करीबी नजर रहेगी। सितंबर में होने वाली पॉलिसी मीटिंग से पहले निवेशक संकेत तलाशेंगे कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक लगातार बनी हुई महंगाई के जोखिमों और श्रम बाजार के नरम पड़ने के संकेतों को कैसे तौल रहा है।

पोनमुडी ने आगे कहा कि कच्चे तेल की कीमतें भी एक बड़ा बाहरी जोखिम बनी हुई हैं। उनके मुताबिक, ‘‘अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिन का समझौता किसी स्थायी समाधान के बिना समाप्त हो गया है। इससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बार फिर जारी तनाव का केंद्र बन गया है और क्षेत्र में ऊर्जा की सामान्य आपूर्ति प्रभावित हुई है।’’

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FPI की गतिविधियां

नए सप्ताह में निवेशक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के रुख पर भी नजर रखेंगे। इन निवेशकों ने अगस्त में भारतीय शेयर बाजार में अपनी खरीद तेज की है। कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों, रुपये की स्थिरता और बाजार की बेहतर संभावनाओं से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। FPI ने अगस्त में अब तक भारतीय शेयर बाजार में 23,544 करोड़ रुपये डाले हैं। इससे पहले जुलाई में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में 20,200 करोड़ रुपये का निवेश किया था। जुलाई से पहले लगातार 4 महीने सेलिंग की थी।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के रिसर्च हेड (वेल्थ मैनेजमेंट) सिद्धार्थ खेमका का मानना है कि निफ्टी में बीते लगातार दो सप्ताह गिरावट रही। अब भारतीय शेयर बाजार में इस सप्ताह कुछ स्थिरता आ सकती है और निकट अवधि में मामूली रिकवरी की उम्मीद है। बाजार की निगाह ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों पर भी रहेगी, जो 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं। इसके अलावा वैश्विक घटनाक्रम भी महत्वपूर्ण रहेंगे।

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

FPI ने भारतीय शेयरों में बढ़ाई खरीद, अगस्त में अब तक लगाए ₹23544 करोड़

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने अगस्त में भारतीय शेयर बाजार में अपनी खरीद तेज कर दी है। कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों, रुपये की स्थिरता और बाजार की बेहतर संभावनाओं से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। FPI ने अगस्त में अब तक भारतीय शेयर बाजार में 23,544 करोड़ रुपये डाले हैं। इससे पहले जुलाई में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में 20,200 करोड़ रुपये का निवेश किया था। जुलाई से पहले लगातार 4 महीने सेलिंग की थी।

सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड (CDSL) के आंकड़ों के मुताबिक, FPI ने जून में 49,340 करोड़ रुपये, मई में 32,963 करोड़ रुपये, अप्रैल में 60,847 करोड़ रुपये और मार्च में रिकॉर्ड 1.17 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली की थी। फरवरी में उन्होंने भारतीय शेयरों में 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया था।

हाल की खरीदारी के बावजूद विदेशी निवेशकों की ओर से साल 2026 में अब तक भारतीय शेयर बाजारों में सेलिंग का आंकड़ा करीब 2,30,000 करोड़ रुपये रहा है। साल 2025 में उन्होंने 1.66 लाख करोड़ रुपये की सेलिंग की थी।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी. के. विजयकुमार का कहना है कि FPI की भारतीय बाजार में वापसी के पीछे कई कारण हैं। इनमें कंपनी के जून तिमाही के बेहतर नतीजे, रुपये की स्थिरता और व्यापक बाजार में कंपनियों की ग्रोथ की अच्छी संभावनाएं प्रमुख हैं। विदेशी निवेशक आकर्षक वैल्यूएशंस वाले बड़े बैंकिंग और आईटी शेयरों में तगड़ी खरीद नहीं कर रहे हैं। इसके बजाय वे हाई वैल्यूएशंस के बावजूद चुनिंदा मझोली कंपनियों के शेयरों में पैसे लगा रहे हैं।

Genus Power Stock Outlook: 33% तक उछलेगा शेयर! एमके ग्लोबल को उम्मीद, खरीद की सलाह

बाजार की आगे की दिशा के लिए निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिका-ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव पर रहेगी। विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी ऋण या बॉन्ड बाजार में भी दिखाई दी है। अगस्त में अब तक उन्होंने फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) के तहत ऋण बाजार में 852 करोड़ रुपये का निवेश किया है। वहीं जनरल रूट के जरिए 995 करोड़ रुपये निकाले हैं।

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Gold Vs Share Market: 1 साल में सोना चमका, पर लंबे समय में कौन बनाएगा ज्यादा अमीर? समझें 20 साल का पूरा गणित

Gold Vs Equity Investment Comparison: बीते एक साल में सोने ने निवेशकों को मालामाल कर दिया है। एक तरफ जहां पिछले 1 साल में सोने ने करीब 35.3 फीसदी का बंपर रिटर्न दिया है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय शेयर बाजार का बेंचमार्क इंडेक्स Nifty 50 TRI लगभग 5.4 फीसदी टूटा है।

हालिया रिटर्न को देखकर पहली नजर में गोल्ड ही असली विजेता नजर आता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या 10, 15 या 20 साल के लंबे समय में भी सोना शेयर बाजार को पछाड़ सकता है? फाइनेंशियल रिसर्च फर्म FundsIndia की अगस्त 2026 की ‘वेल्थ कन्वर्सेशंस’ रिपोर्ट के आंकड़े कुछ अलग ही कहानी बयां करते हैं।

लंबे समय में कौन आगे? 10, 15 और 20 साल का आंकड़ा

फंड्सइंडिया ने जनवरी 2000 से लेकर अब तक के आंकड़ों का विश्लेषण किया है। शॉर्ट टर्म में सोने का प्रदर्शन शेयर बाजार से बेहतर दिख सकता है, लेकिन जैसे-जैसे निवेश का समय बढ़ता है, बाजी शेयर बाजार के हाथ में चली जाती है।

निवेश की अवधि Nifty 50 TRI के मुकाबले सोने का औसत प्रदर्शन
1 साल की अवधि -65% (न्यूनतम) से +79% (अधिकतम) तक उतार-चढ़ाव
10 साल की अवधि10 साल की अवधि सोना औसतन 2% प्रति वर्ष पीछे रहा
15 साल की अवधिसोना औसतन 2% प्रति वर्ष पीछे रहा
20 साल की अवधि सोना औसतन 2% प्रति वर्ष पीछे रहा

वर्षों के आंकड़ों से साफ है कि 10, 15 और 20 साल के क्षितिज पर शेयर बाजार ने औसतन सोने के मुकाबले 2 फीसदी सालाना ज्यादा रिटर्न दिया है। भले ही 2% का अंतर छोटा लगे, लेकिन जब 15-20 सालों में कंपाउंडिंग का असर पड़ता है, तो बड़ा वेल्थ गैप बन जाता है।

क्या शेयर बाजार, सोने से बेहतर विकल्प है?

जरूरी नहीं, क्योंकि दोनों ही एसेट क्लास का पोर्टफोलियो में अलग-अलग रोल होता है:

इक्विटी (शेयर बाजार): इसका मुख्य काम लंबी अवधि में वेल्थ क्रिएशन है।

सोना: यह पोर्टफोलियो को सुरक्षा और डाइवर्सिफिकेशन देता है। जब शेयर बाजार संकट या मंदी के दौर से गुजरता है, तब सोना तेजी से चमकता है।

फंड्सइंडिया की सीनियर मैनेजर जिराल मेहता का कहना है, ‘अलग-अलग एसेट क्लास का लीडरशिप रोल बदलता रहता है। कोई भी एक एसेट क्लास हर साल टॉप पर नहीं रह सकता।’

निवेशकों के लिए क्या है सबक?

केवल पिछले 1 साल के 35% रिटर्न को देखकर शेयर बाजार छोड़कर सारा पैसा सोने में लगाना गलत रणनीति हो सकती है। इतिहास गवाह है कि लंबी अवधि (10 से 20 साल) में शेयर बाजार ने सोने से ज्यादा संपत्ति बनाकर दी है। इसीलिए पोर्टफोलियो बैलेंस रखें। किसी एक में दांव लगाने के बजाय, लंबी अवधि के वित्तीय लक्ष्यों के लिए इक्विटी और पोर्टफोलियो की स्थिरता के लिए गोल्ड का सही मिश्रण बनाएं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

शेयर बाजार के आने वाले हैं अच्छे दिन, एक्सपर्ट ने बताई इसकी तीन बड़ी वजहें

शेयर बाजारों का बुरा दौर खत्म हो चुका है। अब बाजार के अच्छे दिन शुरू होने जा रहे है। अल्फएक्युरेट एडवाइजर्स राजेश कोठारी का ऐसा मानना है। उनका कहना है कि भारतीय शेयर बाजार के लिए स्थितियां अनुकूल दिख रही हैं। क्रेडिट ग्रोथ, कंजम्प्शन और कैपिटल एक्सपेंडिचर्स से अगले 6 से 12 महीनों में बाजार को बड़ा सपोर्ट मिलेगा।

बाजार में तेजी के लिए ये तीन चीजें जरूरी

कोठारी की इस उम्मीद की वजह यह है कि जब ये तीनों चीजें एक साथ होती हैं तो कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ अच्छी रहती है। बीते एक-दो साल में शेयर बाजारों की कमजोरी में कंपनियों की खराब अर्निंग्स ग्रोथ का बड़ा हाथ है। हालांकि, अब स्थिति बदलती दिख रही है। जून तिमाही में अर्निंग्स ग्रोथ में काफी इम्प्रूवमेंट दिखा है।

बाजार में तेजी के लिए दूसरी स्थितियां भी अनुकूल 

सीएनबीसी-टीवी18 को दिए इंटरव्यू में कोठारी ने कहा, “जब कभी क्रेडिट, कंजम्प्शन और कैपेक्स की ग्रोथ एक साथ दिखती है तो कंपनियों की अर्निंग्स में इम्प्रूवमेंट आता है।” हालांकि, शेयर बाजार का प्रदर्शन आगे बेहतर रहने की उनकी उम्मीद के पीछे सिर्फ एक यही वजह नहीं है।

क्रेडिट ग्रोथ बढ़ने से बाजार को मिलेगा सपोर्ट 

उन्होंने कहा कि बीते एक साल में बाजार पर दबाव बढ़ाने वाली स्थितियों में अब बदलाव आ रहा है। इधर, वैल्यूएशन सही लेवल पर दिख रहा है। क्रेडिट ग्रोथ पिछले साल 9-10 फीसदी थी, जो अब करीब 18 फीसदी पर आ गई है। इससे यह संकेत मिलता है कि क्रेडिट साइकिल रफ्तार पकड़ रही है।

कंजम्प्शन पर बीते 4 सालों से दबाव दिख रहा था

कोठारी ने कहा कि कोविड के बाद से कंजम्प्शन बीते करीब 4 साल से दबाव में रहा है। अब स्थिति बदल रही है। कई कंज्यूमर कंपनियों के जून तिमाही के नतीजे काफी बेहतर रहे हैं। कंजम्प्शन बढ़ने का सीधा संबंध कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ से है। इससे कंपनियों का अर्निंग्स साइकिल को लेकर भरोसा बढ़ता है।

कई बिल्डिंग मैटेरियल्स की मांग स्ट्रॉन्ग रहने की उम्मीद

उन्होंने कहा कि कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ रहा है। उनका संकेत खासकर बिल्डिंग मैटेरियल्स पर था। हालांकि, वह अभी भी रियल एस्टेट को लेकर सावधानी बरतने के पक्ष में है। उनका मानना है कि अगले दो से तीन साल में टाइल्स, सैनटरीवेयर, वायर्स और केबल्स की डिमांड स्ट्रॉन्ग रह सकती है। पिछले कुछ सालों में शुरू हुए रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स अब पूरे होने के करीब हैं।

बीते एक साल में निफ्टी और सेंसेक्स का रिटर्न निगेटिव 

बीते एक साल में भारतीय शेयर बाजारों का प्रदर्शन खराब रहा है। इस दौरान निफ्टी और सेंसेक्स दोनों का रिटर्न निगेटिव रहा है। निफ्टी में इस दौरान 2.49 फीसदी की गिरावट आई है। सेंसेक्स इस दौरान 4.63 फीसदी गिरा है। बाजार को इस दौरान कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ ने माहौल खराब किया। फिर, इस साल फरवरी के आखिर में अमरिका और ईरान में लड़ाई शुरू होने से क्रूड की कीमतें आसमान में पहुंच गईं।

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