मार्केट कर रहा नए बुल रन की तैयारी! दिग्गज निवेशक शंकर शर्मा की बड़ी भविष्यवाणी, जानें कब तक आएगी तेजी

Shankar Sharma Stock Market Outlook: भारतीय शेयर बाजार में पिछले दो दशकों में निवेशकों ने जिस तरह छप्परफाड़ कमाई की है, अब उन्हें अपनी उम्मीदों को थोड़ा कम करने की जरूरत है। ऐसा मानना है दिग्गज निवेशक शंकर शर्मा का। उन्होंने ये भी कहा कि, भारत में अगला बड़ा और मजबूत बुल मार्केट आने में अभी कम से कम एक से दो साल का वक्त लग सकता है। लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि अगला बुल रन पिछले रिकॉर्ड्स के मुकाबले काफी धीमी रफ्तार वाला होगा और इससे मिलने वाला रिटर्न भी काफी कम रहेगा।

मनीकंट्रोल की सीनियर कॉरेस्पोंडेंट जोया स्प्रिंगवाला को दिए एक इंटरव्यू में शंकर शर्मा ने बताया कि देश की अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार का आकार अब इतना बड़ा हो चुका है कि पहले जैसी तूफानी रफ्तार को बरकरार रखना नामुमकिन है। आइए जानते हैं शंकर शर्मा ने मार्केट को लेकर और क्या-क्या कहा।

अब केवल 8-10% रिटर्न की ही उम्मीद रखें निवेशक

शंकर शर्मा ने साफ तौर पर कहा कि आने वाले समय में निवेशकों को अपने रिटर्न के नजरिए को बदलना होगा। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि अगले एक-दो सालों में हमें बाजार में एक ठोस बुल रैली देखने को मिलेगी। लेकिन लोगों को यह समझना होगा कि लंबी अवधि के रिटर्न का स्तर अब नीचे खिसक चुका है। भारत अब उस तरह का रिटर्न नहीं देगा जो हमारी पीढ़ी ने कमाया है।’

जहां पिछले दो दशकों में भारतीय निवेशकों को औसतन 14-15% का सालाना रिटर्न मिलने की आदत हो चुकी है, वहीं शंकर शर्मा के मुताबिक अब लंबी अवधि में 8-10% का सालाना रिटर्न ही मिलने की उम्मीद करनी चाहिए।

शंकर शर्मा की ‘1.6 बुल मार्केट्स’ थ्योरी क्या है?

शर्मा ने बाजार के इतिहास का विश्लेषण करते हुए अपनी ‘1.6 बुल मार्केट्स’ थ्योरी समझाई। उनके मुताबिक, 1991 के उदारीकरण के बाद भारत ने केवल एक बार पूरी तरह से टिकाऊ और बड़ा बुल मार्केट देखा है, जो 2003 से 2007 के बीच आया था। उन्होंने हर्षद मेहता वाले दौर को मार्केट की एक स्वाभाविक रैली नहीं माना।

साल 2003-2007 के बुल रन में निफ्टी ने करीब 55% का सालाना रिटर्न दिया था। इसके मुकाबले कोरोना महामारी के बाद आए उछाल में निफ्टी ने लगभग 31% का रिटर्न दिया, जो पिछले बार से 40% कम था। उनके अनुसार, अगला बुल मार्केट इससे भी निचले स्तर पर रहेगा।

क्यों धीमी होगी बाजार की रफ्तार?

शंकर शर्मा का मानना है कि इस मंदी या कम रिटर्न का कारण वैश्विक राजनीति, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) या ब्याज दरें नहीं हैं, बल्कि इसका असली कारण भारत की ‘स्केल’ है। भारत अब 4 से 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन चुका है। इस आकार पर सिर्फ अपनी जगह बने रहने के लिए भी हर साल जीडीपी में सैकड़ों अरब डॉलर जोड़ने पड़ते हैं। जैसे-जैसे अर्थव्यवस्थाएं बड़ी होती हैं, उनकी ग्रोथ स्वाभाविक रूप से धीमी हो जाती है।

उन्होंने एचडीएफसी बैंक और इन्फोसिस जैसी बड़ी कंपनियों का उदाहरण देते हुए कहा, ‘आज कोई भी एचडीएफसी बैंक से 35-40% की रफ्तार से बढ़ने की उम्मीद नहीं करता, क्योंकि यह बहुत बड़ा हो चुका है। देशों की अर्थव्यवस्था भी ठीक इसी तरह काम करती है।’

लार्ज-कैप के मुकाबले स्मॉल-कैप पर बड़ा दांव

शंकर शर्मा का मानना है कि भविष्य में जब भी अगला बुल मार्केट आएगा, उसकी अगुवाई आज के मुख्य सूचकांकों में शामिल दिग्गज लार्ज-कैप (Blue-chip) शेयर नहीं करेंगे। मेन इंडेक्स की मैच्योर हो चुकी कंपनियों के मुकाबले छोटी कंपनियों (Small-caps) में अर्निंग ग्रोथ और वेल्थ क्रिएशन की गुंजाइश कहीं ज्यादा है।

शंकर शर्मा ने कहां लगाया है पैसा?

अपने इसी भरोसे के चलते शंकर शर्मा ने खुद ₹100-200 करोड़ का निवेश स्मॉल-कैप कंपनियों में किया है। उन्होंने विशेष रूप से भारत के टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा-सेंटर इकोसिस्टम से जुड़े सेक्टर्स को चुना है, क्योंकि ये सेक्टर्स अभी अपने ग्रोथ साइकिल के शुरुआती चरण में हैं।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल पर विशेषज्ञों द्वारा व्यक्त किए गए विचार और निवेश टिप्स उनके अपने हैं, वेबसाइट या उसके प्रबंधन के नहीं। मनीकंट्रोल यूजर्स को सलाह देता है कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट्स से जांच कर लें।

Market Correction vs SIP: मार्केट क्रैश का इंतजार पड़ सकता है भारी! जानें क्यों एक्सपर्ट्स दे रहे हैं हर महीने SIP की सलाह

Market Crash Timing vs SIP Strategy: हर निवेशक के मन में कभी न कभी यह विचार जरूर आता है कि ‘जब मार्केट गिरेगा, तब पैसा लगाऊंगा’। सुनने में यह रणनीति बहुत समझदारी भरी लगती है कम कीमत पर खरीदो और बंपर मुनाफा कमाओ। लेकिन शेयर बाजार की सबसे बड़ी हकीकत यह है कि बाजार कभी ढिंढोरा पीटकर नहीं गिरता और न ही बढ़ता है।

भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। ऐसे में निवेशकों के बीच एक पुरानी बहस फिर से छिड़ गई है क्या हर महीने SIP के जरिए निवेश करनी चाहिए, या फिर कैश बचाकर रखना चाहिए और बाजार में बड़ी गिरावट आने पर ही एकमुश्त पैसा लगाना चाहिए? आइए इसे समझते हैं।

बीते वक्त को देखना आसान है, बॉटम पकड़ना नामुमकिन

हर कोई चाहता है कि वह बाजार के बिल्कुल निचले स्तर यानी बॉटम पर शेयर या म्यूचुअल फंड खरीदे। लेकिन दिक्कत यह है कि जब बाजार गिर रहा होता है, तब कोई नहीं बता सकता कि बॉटम कहां है। बाजार कभी सीधी लकीर में नहीं चलता। अगर मार्केट 10% गिर चुका है, तो वहां से वह 10% और गिर सकता है या वहीं से रिकवरी शुरू कर सकता है।

‘परफेक्ट एंट्री पॉइंट’ के चक्कर में निवेशक अक्सर इस उम्मीद में बैठे रह जाते हैं कि कीमतें थोड़ी और गिरेंगी। नतीजा यह होता है कि जब तक बाजार में भरोसा लौटता है, तब तक मार्केट बहुत ऊपर निकल चुका होता है और निवेश का सही मौका हाथ से निकल जाता है।

एसआईपी क्यों है सबसे बेस्ट?

सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) की लोकप्रियता की सबसे बड़ी वजह यह है कि यह बाजार को टाइम करने की टेंशन को पूरी तरह खत्म कर देता है। बाजार का सेंटिमेंट कैसा भी हो चाहे वह तेजी पर हो या मंदी पर आपकी तय रकम हर महीने खुद-ब-खुद निवेश हो जाती है।

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जब बाजार गिरता है, तो आपकी SIP को ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं। जब बाजार चढ़ता है, तो कम यूनिट्स मिलती हैं। इससे आपकी खरीद की लागत खुद ही एवरेज हो जाती है। निवेशकों को रोज-रोज यह नहीं सोचना पड़ता कि आज निवेश करने का सही दिन है या नहीं।

कैश होल्ड करना गलत नहीं, पर यह रणनीति का हिस्सा हो

इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि हाथ में नकदी रखना हमेशा एक गलत फैसला होता है। अनुभवी और मझे हुए निवेशक हमेशा अपने पोर्टफोलियो में कुछ कैश रिजर्व रखते हैं। यह कैश किसी आगामी जरूरी खर्च या बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए होता है। कैश रखना आपकी वित्तीय रणनीति का एक हिस्सा होना चाहिए, न कि बाजार की हर छोटी-बड़ी भविष्यवाणी करने का कोई जुआ।

रिकवरी मिस करना पड़ सकता है बहुत महंगा

बाजार में सुधार आने या क्रैश होने का इंतजार करने का सबसे बड़ा रिस्क यह है कि बाजार हमेशा उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से रिकवर करता है। इतिहास गवाह है कि शेयर बाजार में सबसे बड़ी और सबसे तेज बढ़त अक्सर एक बहुत तेज गिरावट के तुरंत बाद आती है।

जो निवेशक पूरी स्पष्टता के इंतजार में बैठे रहते हैं, वे इस शुरुआती और सबसे कमाऊ उछाल को मिस कर देते हैं। इसलिए वित्तीय सलाहकार हमेशा सलाह देते हैं कि जब तक आपके पास कोई बहुत ठोस योजना न हो, केवल सुधार के भरोसे कैश लेकर न बैठें।

बैलेंस्ड अप्रोच ही दिलाएगी सफलता

लॉन्ग टर्म वेल्थ क्रिएशन के लिए आपको SIP या कैश में से किसी एक को चुनने की जरूरत नहीं है, बल्कि दोनों का तालमेल बिठाना चाहिए:

लॉन्ग टर्म वेल्थ क्रिएशन के लिए आपको SIP या कैश में से किसी एक को चुनने की जरूरत नहीं है, बल्कि दोनों का तालमेल बिठाना चाहिए:

कुल मिलाकर आपको बता दें कि बाजार को प्रेडिक्ट करना जितना आसान दिखता है, असल में उतना होता नहीं है। एक आम और लंबी अवधि के निवेशक के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह नहीं है कि वह बाजार में कब एंट्री लेता है बल्कि असली चुनौती यह है कि वह हर परिस्थिति में बाजार में टिका रहता है और अपनी इन्वेस्टमेंट जर्नी को बिना रुके जारी रखता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Market cues : बुलिश मोमेंटम मजबूत होने के संकेत, 24400 के ऊपर टिकने पर निफ्टी में 24800-25000 का लेवल भी मुमकिन

Trade setup for today : Nifty ने पिछले पांच-छह सेशन की कंसोलिडेशन रेंज से बाहर निकलकर जबरदस्त वापसी की। 17 जुलाई को निफ्टी में औसत से ज्यादा वॉल्यूम के साथ 1 परसेंट से ज्यादा की बढ़त हुई और यह अपने शॉर्ट-टू-मीडियम टर्म मूविंग एवरेज और 100-दिन के EMA के ऊपर चला गया। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बावजूद मोमेंटम इंडिकेटर्स में भी सुधार दिखा। हालांकि,शॉर्ट टर्म में इस बढ़त के बने रहने पर नजन रखना जरूरी होगा। उम्मीद है कि 24,400–24,500 का दायरा इंडेक्स के लिए रेजिस्टेंस जोन का काम करेगा। अगर इंडेक्स इस दायरे से ऊपर बना रहता है तो 24,800–25,000 की ओर रैली का रास्ता खुल सकता है। वहीं,24,100–24,000 का दायरा मजबूत सपोर्ट दे सकता है।

यहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी।

Nifty के लिए की सपोर्ट और रजिस्टेंस लेवल

पिवट प्वांइट पर आधारित सपोर्ट : 24,164, 24,101 और 23,999

पिवट प्वांइट पर आधारित रजिस्टेंस : 24,369, 24,433 और 24,535

निफ्टी ने डेली चार्ट पर एक लंबी बुलिश कैंडल बनाई और लंबी बेयरिश मदर कैंडल (23,800–24,300) की रेंज से काफी ऊपर बंद हुआ,जो पॉजिटिव संकेत है। इंडेक्स 10, 20, 50 और 100-दिन के EMA से काफी ऊपर ट्रेड कर रहा था और साथ ही बोलिंगर बैंड्स के मिडिल बैंड पर सपोर्ट ले रहा था। इसके अलावा, यह 61.8 प्रतिशत फिबोनाची रिट्रेसमेंट लेवल के ऊपर वापस आ गया और 24,530 से 23,800 तक की हालिया गिरावट के बाद 78.6 प्रतिशत फिबोनाची रिट्रेसमेंट लेवल के करीब पहुंच गया। मोमेंटम इंडिकेटर्स में भी सुधार हुआ,जिसमें RSI 58.48 पर पॉजिटिव क्रॉसओवर दिखा रहा है। इस बीच, MACD बुलिश क्रॉसओवर के करीब आ गय और रेड हिस्टोग्राम बार लगातार छोटे हो रहे थे। ये सभी संकेत बुलिश मोमेंटम के मज़बूत होने का इशारा करते हैं।

बैंक निफ्टी

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 58,623, 58,872 और 59,275

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 57,817, 57,568 और 57,165

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर रेजिस्टेंस: 59,195, 61,717

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर सपोर्ट: 57,305, 56,441

शुक्रवार को डेली टाइमफ्रेम पर बैंक निफ्टी 1.6 प्रतिशत बढ़ा और एक लंबी बुलिश कैंडल बनाई। साथ ही,इसने पिछले कई सेशन की कंसोलिडेशन रेंज को भी तोड़ा,जो बुलिश संकेत है। इंडेक्स सभी अहम मूविंग एवरेज के ऊपर बना रहा और वे सभी ऊपर की ओर बढ़ते रहे। RSI 60.15 पर था और इसने बुलिश क्रॉसओवर दिखाया। MACD ऊपर गया लेकिन सिग्नल लाइन के नीचे ही रहा,जबकि लाल हिस्टोग्राम बार छोटे होते गए। ये सभी फैक्टर तेजी के रुझान (bullish momentum) में बढ़त का संकेत देते हैं,हालांकि बुलिश MACD क्रॉसओवर से इसकी पुष्टि का अभी भी इंतजार है।

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो

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इंडिया VIX

पिछले दो सेशन में गिरावट के बाद वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया VIX 2.08 प्रतिशत बढ़कर 13.15 पर आ गया। रिकवरी के बावजूद,यह एक अच्छे जोन में बना रहा और सभी अहम मूविंग एवरेज से नीचे रहा। हालांकि,अगर यह 15 के लेवल से ऊपर जाता है तो बुल्स के लिए बड़ा रिस्क हो सकता है। कुल मिलाकर,जब तक VIX 15 के निशान से नीचे रहता है,तब तक वोलैटिलिटी का माहौल बुल्स के पक्ष में बना रहेगा।

इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में भारतीय शेयर बाजारों का प्रदर्शन रह सकता है दमदार

पुट कॉल रेशियो

बाजार के मूड को दर्शाने वाला निफ्टी पुट-कॉल रेशियो 17 जुलाई को पिछले सेशन के 0.97 से बढ़कर 1.42 हो गया। गौरतलब है कि 0.7 से ऊपर या 1 को पार पीसीआर का जाना आम तौर पर तेजी की भावना का संकेत माना जाता है। जबकि 0.7 से नीचे या 0.5 की ओर गिरने वाला अनुपात मंदी की भावना का संकेत होता है।

F&O बैन के अंतर्गत आने वाले स्टॉक

F&O सेगमेंट के अंतर्गत प्रतिबंधित प्रतिभूतियों में वे कंपनियां शामिल होती हैं, जिनके डेरिवेटिव अनुबंध मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाती हैं।

एफएंडओ प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक: कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक: सम्मान कैपिटल

एफएंडओ प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक: कोई नहीं

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में भारतीय शेयर बाजारों का प्रदर्शन रह सकता है दमदार

भारतीय शेयर बाजारों का प्रदर्शन इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में शानदार रह सकता है। स्ट्रॉन्ग ग्रोथ, लगातार अच्छा कैपिटल एक्सपेंडिचर और क्रेडिट एक्सपैंशन इसकी वजह होगी। हालांकि, इनफ्लेशन बढ़ने से इंटरेस्ट रेट में इजाफा हो सकता है। एललामा की रिपोर्ट में यह कहा गया है।

चुनौतियों की बीच इकोनॉमिक ग्रोथ 7.8 फीसदी

इस रिपोर्ट में इनफ्लेशन बढ़ने की आशंका जताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने ऑयल की दोगुनी कीमतों को बर्दाश्त किया है। महंगे ऑयल के बावजूद 7.8 फीसदी ग्रोथ बनाए रखी है। भारतीय इकोनॉमी ज्यादातर दूसरी बड़ी इकोनॉमीज के मुकाबले मजबूत है। 7.8 फीसदी जीडीपी ग्रोथ के साथ ही मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 59.3 है।

निफ्टी की वैल्यूएशन 10 साल के एवरेज के मुकाबले कम

इनफ्लेशन को चिंता की वजह बताते हुए इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इनफ्लेशन बढ़ने के 9-15 महीनों के दौरान मार्केट में तेजी दिखी है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि निफ्टी अपने 10 साल के एवरेज 18.6 के पी/ई के मुकाबले 17.7 पी/ई पर आ गया है। इस हिसाब से महंगे बाजारों के मुकाबले भारतीय बाजार सस्ता है।

घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी से बाजार को मिला सहारा

विदेशी संस्थागत निवेशकों ने इस साल भारतीय शेयर बाजारों में अब तक 29 अरब डॉलर की बिकवाली की है। इसके मुकाबले घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 45.5 अरब डॉलर का निवेश किया है। इस रिपोर्ट में एनर्जी, मेटल्स, इंफ्रास्ट्रक्चर, पावर, डिफेंस, फार्मास्युटिकल्स, ऑटोमोबाइल्स के बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जताई गई है।

बाजार के लिए ये हैं कुछ बड़े रिस्क

रिपोर्ट में कहा गया है कि तेल की कीमतों में तेज उछाल, आरबीआई के उम्मीद से पहले इंटरेस्ट रेट में वृद्धि और जल्द डिसइनफ्लेशन जैसे रिस्क बने हुए हैं। ऐसे में रियल एस्टेट और साइक्लिकल्स में ओवरवेट बने रहना ठीक होगा। जुलाई में विदेशी संस्थागत निवेशकों का रुख भारत को लेकर बदला है। उन्होंने भारत में बिकवाली से ज्यादा खरीदारी की है।

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17 जुलाई को प्रमुख सूचकाकों में जोरदार तेजी

अमेरिका-ईरान के बीच फिर से लड़ाई शुरू होने और क्रूड में उछाल के बावजूद भारतीय बाजार में बड़ी गिरावट नहीं दिखी है। 17 जुलाई को सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार तेजी दिखी। निफ्टी 1.09 फीसदी यानी 261.55 फीसदी चढ़कर 24,334 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 1.25 फीसदी यानी 964 अंक के उछाल के साथ 78,151 पर क्लोज हुआ।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

FY27 की दूसरी छमाही में विदेशी निवेशकों की होगी वापसी, एक्सपर्ट ने बताया कहां दांव लगाने से होगी कमाई

लंबे समय बाद विदेशी निवेशकों के रुख में बदलाव दिखा है। जुलाई में उन्होंने भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली से ज्यादा खरीदारी की है। इससे अमेरिका-ईरान में फिर से लड़ाई शुरू होने के बावजूद बाजार में ज्यादा गिरावट नहीं आई है। शेयर बाजार के ट्रेंड को समझने के लिए मनीकंट्रोल ने AlfAccurate Advisors के चीफ इनवेस्टमेंट अफसर राजेश कोठारी से बातचीत की।

कोठारी ने कहा कि इंटरेस्ट रेट उम्मीद के मुताबिक रहने पर विदेशी निवेशकों की इस वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में धीरे-धीरे भारतीय बाजार में वापसी होगी। उनका मानना है कि बाजार में हालिया गिरावट के बाद भारतीय बाजार की वैल्यूएशंस वाजिब हो गई है।

उन्होंने कहा कि मौजूदा वैल्यूएशंस पर रियल एस्टेट सेक्टर को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत है। हालांकि, हाउसिंग ईकोसिस्टम के बारे में उनकी सोच पॉजिटिव है। उनका मानना है कि इस सेक्टर में बिल्डिंग मैटेरियल्स और रियल एस्टेट की एंसिलियरीज कंपनियों के शेयरों में रिस्क-रिवॉर्ड अट्रैक्टिव दिख रहा है।

आईटी सेक्टर के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि इस सेक्टर में सेलेक्टिव रहने की जरूरत है। डिमांड में सुस्ती का दौर बीत चुका है। वैश्विक अनिश्चितता घटने पर डिस्क्रेशनरी खर्च में धीरे-धीरे इम्प्रूवमेंट दिखेगा। हालांकि, रिकवरी के एकसमान रहने की उम्मीद नहीं है। आईटी सर्विसेज ऑफर करने वाली ट्रेडिशनल कंपनियों के मुकाबले डिजिटल कपैबिलिटीज, एआई सर्विसेज ऑफर करने वाली कंपनियों का प्रदर्शन बेहतर रहेगा।

क्या एआई थीम में अब दिलचस्पी घट रही है? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि एआई थीम अभी शुरुआती अवस्था में है। कुछ खास ग्लोबल एआई कंपनियों के शेयरों की वैल्यूएशंस काफी बढ़ गई है। उनमें बीच-बीच में करेक्शंस दिख सकता है। लेकिन, एआई थीम से जुड़ी इनवेस्टमेंट साइकिल मजबूत बनी हुई है।

कोठारी ने कहा कि घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़ी कंपनियों को इंडिया की तेज ग्रोथ का फायदा मिलेगा। भारत में लोगों की खर्च करने योग्य इनकम बढ़ रही है। सरकार की पॉलिसी भी सपोर्टिव है। ऐसे में ऑटो एंसिलियरीज, कैपिटल गुड्स, कंजम्प्शन, बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर में अच्छी संभावना दिख रही है। खासकर इन सेक्टर की वे कंपनियां अच्छी दिख रही हैं, जिनकी अर्निंग्स को लेकर तस्वीर साफ है।

Market Outlook : सपाट बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए 17 जुलाई को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

Market Outlook : 16 जुलाई को उतार-चढ़ाव भरे सेशन में भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स बिना किसी बड़े बदलाव के सपाट बंद हुए हैं। IT और कंज्यूमर सेंट्रिक शेयरों में बढ़त का असर बैंकिंग और रियल्टी शेयरों में कमजोरी से खत्म हो गया। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 1.44 अंक बढ़कर 77,186.87 पर और निफ्टी 5.75 अंक या 0.02 प्रतिशत गिरकर 24,072.75 पर बंद हुआ। लगभग 1947 शेयरों में बढ़त हुई, 2119 शेयरों में गिरावट आई और 194 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

अलग-अलग शेयरों में मिला-जुला असर दिखा। इंटरग्लोब एविएशन सबसे ज्यादा बढ़त वाले शेयरों में शामिल रहा, जिसमें 1.8% की तेजी आई। इसके बाद विप्रो (+1.7%), बजाज फाइनेंस (+1.6%), HCL टेक्नोलॉजीज (+1.6%) और मारुति सुजुकी (+1.4%) रहे। गिरावट वाले शेयरों में, एटरनल 2.8% गिरा, जबकि SBI लाइफ इंश्योरेंस में 2.3% की गिरावट आई। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स 0.9% गिरा, HDFC बैंक 0.8% टूटा और श्रीराम फाइनेंस में 0.8% की गिरावट आई।

सेक्टर इंडेक्स में, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा, जिसमें 1.5% की बढ़त हुई। इसके बाद निफ्टी मीडिया (+1%), निफ्टी IT (+0.7%) और निफ्टी ऑटो (+0.4%) रहे। निफ्टी FMCG (+0.25%) भी बढ़त के साथ बंद हुआ।

गिरावट वाले सेक्टरों में, निफ्टी रियल्टी का प्रदर्शन सबसे खराब रहा, जिसमें 1% की गिरावट आई। निफ्टी PSU बैंक 0.5% गिरा, इसके बाद निफ्टी मेटल (-0.3%), निफ्टी प्राइवेट बैंक (-0.3%) और निफ्टी बैंक (-0.3%) रहे।

ब्रॉडर मार्केट का प्रदर्शन बेंचमार्क के मुकाबले कमजोर रहा। इसके चलते निफ्टी मिडकैप 100 में 0.4% की गिरावट आई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 लगभग बिना किसी बदलाव के बंद हुआ।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ़ रिसर्च, विनोद नायर का कहना है कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और एशियाई बाजार के कमजोर रुझानों के बीच निवेशकों के सतर्क रुख अपनाने से भारतीय शेयर बाजार में सुस्ती रही। महंगाई की चिंताओं ने फाइनेंशियल और रियल्टी सेक्टर पर दबाव डाला, वहीं कुछ पेट्रोकेमिकल्स पर इंपोर्ट ड्यूटी फिर से लागू होने और मज़बूत कमाई के दम पर केमिकल सेक्टर एक उम्मीद की किरण बनकर उभरा। उधर उम्मीद से कम अमेरिकी महंगाई दर ने ब्याज दरों से जुड़ी चिंताओं को कम किया और बाजार को कुछ सहारा दिया। आगे बाजार की नजर कंपनियों के नतीजों और मैनेजमेंट की टिप्पणियों के साथ-साथ मॉनसून की प्रगति पर रहेगी। इसके अलावा ग्लोबल स्थिति और महंगाई से जुड़ी घटनाएं बाजार की चाल पर असर डालती रहेंगी।

LKP सिक्योरिटीज के टेक्निकल एनालिस्ट वत्सल भुवा का कहना है कि निफ्टी एक सीमित दायरे में ट्रेड कर रहा है, जो न्यूट्रल रुख के साथ कंसोलिडेशन का संकेत है। टेक्निकल तौर पर इंडेक्स को 23,950–24,000 के जोन में मज़बूत सपोर्ट मिलने की उम्मीद है, जबकि 24,250–24,300 का जोन तत्काल रेजिस्टेंस का काम कर सकता है। इसके बाद 24,500 के आसपास एक बड़ी रुकावट हो सकती है।

ऑप्शन चेन डेटा भी 24,000 स्ट्राइक पर सबसे ज्यादा ‘पुट राइटिंग’ का संकेत दे रहा है, जो इसे एक अहम सपोर्ट लेवल के तौर पर मजबूत करता है। मौजूदा टेक्निकल सेटअप को देखते हुए, सपोर्ट के पास गिरावट पर खरीदारी और रेजिस्टेंस के पास उछाल पर बिकवाली की रणनीति सही रहेगी।

उन्होंने आगे कहा कि बैंक निफ्टी इंडेक्स ने डेली चार्ट पर एक छोटी कैंडलस्टिक बनाई है, जो अनिश्चितता का संकेत है क्योंकि इंडेक्स कंसोलिडेशन रेंज में ट्रेड कर रहा है। RSI न्यूट्रल जोन के पास स्थिर है, जो मज़बूत डायरेक्शनल मोमेंटम की कमी का संकेत है। टेक्निकल तौर पर 56,800–57,000 का जोन तत्काल सपोर्ट का काम कर सकता है। जबकि 58,200 का लेवल अहम रेजिस्टेंस का काम कर सकता है।

जब तक कोई निर्णायक ब्रेकआउट या ब्रेकडाउन नहीं होता, तब तक रुख न्यूट्रल रहने की उम्मीद है। इस स्थिति में सपोर्ट के पास ‘बाय-ऑन-डिप्स’ और रेजिस्टेंस के पास ‘सेल-ऑन-राइज़’ की रणनीति फायदेमंद रहेगी।

SBI सिक्योरिटीज में हेड-टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च सुदीप शाह का कहना है कि आगे निफ्टी के लिए 23960-23930 के पास स्थित 50-डे का EMA जोन तत्काल सपोर्ट का काम करेगा । अगर यह 23930 के लेवल से नीचे जाता है और वहां बना रहता है तो और ज्यादा प्रॉफिट बुकिंग हो सकती है और इंडेक्स 23780 के लेवल तक गिर सकता है, जो अगला अहम सपोर्ट जोन बन सकता है।

ऊपर की तरफ, 24160-24200 की रेंज एक अहम रेजिस्टेंस एरिया बनी हुई है। अगर इंडेक्स इस दीवार को पार कर जाता है, तो मार्केट का सेंटीमेंट बेहतर हो सकता है और और ऊपर जाने का रास्ता खुल सकता है। तब तक, इंडेक्स में एक तय रेंज के अंदर ही ट्रेडिंग होने की संभावना है।

 

 

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

शेयरों में निवेश करने जा रहे हैं? पहले जान लीजिए एचएसबीसी ने Sensex के लिए क्या टारेगट दिया है

शेयर बाजार में सेंटिमेंट बेहतर हुआ है। अमेरिका-ईरान के बीच लड़ाई फिर से शुरू होने के बावजूद भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट नहीं आई है। निफ्टी 24000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के करीब बना हुआ है। इस बीच, विदेशी ब्रोकरेज फर्म एचएसबीसी ने 16 जुलाई को भारतीय कंपनियों के शेयरों की रेटिंग बढ़ा दी। उसने रेटिंग ‘अंडरवेट’ से ‘न्यूट्रल’ कर दी ।

विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में वापसी

HSBC ने कहा है कि क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी से कंपनियों की अर्निंग्स को लेकर रिस्क घटा है। रुपये को गिरने से रोकने के उपायों से विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में वापसी हुई है। एचएसबीसी ने 2026 के अंत में BSE Sensex का टारगेट बढ़ाकर 84,000 प्वाइंट्स कर दिया है। पहले उसने 80,500 का टारगेट प्राइस दिया था। इसका मतलब है कि सेंसेक्स मौजूदा लेवल से 8.6 फीसदी चढ़ सकता है।

2026 में सेंसेक्स और निफ्टी का रिटर्न निगेटिव

इस साल भारतीय शेयर बाजार का रिटर्न निगेटिव है। निफ्टी और सेंसेक्स 2026 में अब तक 7 फीसदी से ज्यादा नीचे हैं। एचएसबीसी की रिपोर्ट की मानें तो अगले छह महीनों में बाजार में हालात बदलने वाले हैं। एचएसबीसी ने पहले इस साल दिसंबर तक सेंसेक्स के लिए 80,500 अंक का टारेगट दिया था। इस बीच, India VIX 12.91 पर आ गया है। 16 जुलाई को इसमें 2.71 फीसदी गिरावट दिखी। इंडिया वीआईएक्स का 15 से नीचे होना बाजार के लिए पॉजिटिव है।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स रिकॉर्ड ऊंचाई से 33% गिरा

क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी भारत के लिए अच्छी खबर है। भारत क्रूड की अपनी जरूरत का करीब 90 फीसदी हिस्सा इंपोर्ट से पूरा करता है। 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद क्रूड की कीमतें आसमान में पहुंच गई थीं। अप्रैल में Brent curde Futures 126.41 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। इस लेवल से क्रूड 33 फीसदी गिर चुका है।

क्रूड ऑयल में नरमी से मार्जिन पर दबाव घटा

एचएसबीसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, “ऑयल में नरमी आई है। इससे मार्जिन पर दबाव थोड़ा कम हुआ है। अर्निंग्स डाउनग्रेड का रिस्क भी घटा है।” इस महीने की शुरुआत में गोल्डमैन सैक्स ने इंडिया के आउटलुक को बेहतर बताया था। उसने कमोडिटी की कीमतों में नरमी और रुपये में स्थिरता को इसकी वजह बताई थी।

जुलाई में विदेशी निवेशकों ने की 1.6 अरब डॉलर की खरीदारी

विदेशी निवेशकों का रुख भारतीय बाजार को लेकर बदलता दिख रहा है। जुलाई में उन्होंने अब तक 1.6 अरब डॉलर के शेयर खरीदे हैं। चार महीनों तक भारतीय बाजार में बड़ी बिकवाली के बाद विदेशी निवेशक शुद्ध खरीदार बन गए हैं। 2026 में उन्होंने भारतीय बाजार में 27.7 अरब डॉलर की बिकवाली की है। यह पिछले साल उनकी 18.9 अरब डॉलर की बिकवाली से ज्यादा है। इसकी बड़ी वजह AI से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी है।

फॉरेन इनवेस्टर्स ने की इस वजह से बिकवाली 

भारतीय बाजार में एआई से जुड़ी कंपनियों के शेयरों की कमी है। इस वजह से विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजारों से पैसे निकाल अमेरिका, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में लगाए हैं। इससे इन बाजारों में अच्छी तेजी आई है। दक्षिण कोरिया का बाजार तो इस साल दुनिया में सबसे ज्यादा चढ़ने वाला बाजार बन गया है। वहां एआई कंपनियों के शेयरों की कीमतें कई गुनी हो गई हैं।

Market Trend : निफ्टी के 24000 के ऊपर टिके रहने तक हर गिरावट में करें खरीदारी, आईटी और ऑटो सेक्टर के ये दो शेयर कर सकते हैं कमाल

Market Trend : मिले-जुले ग्लोबल संकेतों के बीच,14 जुलाई को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ खुले और निफ्टी 24,100 के नीचे कारोबार कर रहा है। 9.50 बजे के आसपास सेंसेक्स 462.88 अंक या 0.60 प्रतिशत गिरकर 77,153.52 पर और निफ्टी 118.00 अंक या 0.49 प्रतिशत गिरकर 24,093.00 पर कारोबार कर रहा है। लगभग 908 शेयरों में बढ़त देखने को मिल रही है। वहीं, 1363 शेयरों में गिरावट आई है और 165 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। निफ्टी पर बढ़त बनाने वाले प्रमुख शेयरों में हिंडाल्को,ONGC,TCS,इंफोसिस और विप्रो शामिल हैं। जबकि गिरावट वाले शेयरों में HCL टेक,श्रीराम फाइनेंस,इंटरग्लोब एविएशन,बजाज फाइनेंस और L&T शामिल हैं।

निफ्टी व्यू

बाजार की चाल पर बात करते हुए manasjaiswal.com के Technical Analyst मानस जायसवाल ने कहा कि कल गिरावट के साथ हुई ओपनिंग के बाद निफ्टी बैंक निफ्टी दोनों ने ही 20 डे मूविंग एवरेज पे सपोर्ट लिया और वहां पर बाइंग इंटरेस्ट देखने को मिला है। ऐसे में बाजार की ओवरऑल ट्रेंड अभी भी पॉजिटिव लग रहा है। निफ्टी जब तक 24,000 के ऊपर ट्रेड करता रहेगा तब तक हर गिरावट में खरीदारी करेंगे और 24,500 के आपको टारगेट सेट करके चलना चाहिए।

बैंक निफ्टी व्यू

बैंक निफ्टी की जहां तक बात है,ये जब तक 57,400 के ऊपर ट्रेड करता रहेगा,यहां पर भी पॉजिटिव ट्रेंड बना रहेगा। उम्मीद कि यहां पर आउट परफॉर्मेंस देखने को मिलेगा और बहुत ही जल्द ही यह इंडेक्स 58,900 को ब्रेक करके 59,000 की तरफ जाने की कोशिश करेगा। दोनों ही इंडाइससेस के ट्रेंड पॉजिटिव है और डिप पर खरीदारी करने की राय रहेगी।

मानस जायसवाल के पसंदीदा शेयर

मानस जायसवाल की पहली रिकमेंडेशन बजाज ऑटो है, जहां पर इंट्राडे चार्ट पर इनवर्स पैटर्न का ब्रेकआउट देखने को मिला है। बजाज ऑटो में 10,240 रुपए के स्टॉप लॉस से खरीदारी करने की राय रहेगी। इसमें 10,700 तक के टारगेट्स पॉसिबल है।

इनकी दूसरा रेमेंडेशन टाटा एलेक्सी है। अब ऐसा लग रहा है कि इस स्टॉक ने 3600 रुपए के आसपास एक बॉटम बना लिया है। इसमें हायर टॉप फायर बॉटम्स का कंफर्मेशन है। स्टॉक 10 डे मूविंग एवरेज के ऊपर निकला है। टाटा एलेक्सी में 3765 रुपए के स्टॉप लॉस के साथ खरीदारी करेंगे। इसमें 3975 रुपए तक के टारगेट्स पॉसिबल है।

 

Market view : बाजार में गिरावट पर खरीदारी की रणनीति करेगी काम, आज इन दो शेयरों में हो सकती है अच्छी कमाई

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Nifty Outlook: 13 जुलाई को कैसी रहेगी निफ्टी की चाल, किन लेवल्स पर रहेगी नजर? जानिए एक्सपर्ट्स से

Nifty Outlook: पिछला कारोबारी हफ्ता उतार-चढ़ाव भरा रहा, लेकिन आखिर में निफ्टी 50 ने शानदार वापसी की। बुधवार की तेज गिरावट के बाद शुक्रवार को खरीदार फिर लौटे और बाजार मजबूती के साथ बंद हुआ।

शुक्रवार को निफ्टी 244 अंक चढ़कर 24,206 पर बंद हुआ। इंडेक्स 162 अंकों की बढ़त के साथ खुला और पूरे सत्र में बढ़त बनाए रखी। दिन के ऊपरी स्तर के करीब बंद होने से बाजार में फिर से खरीदारी लौटने के संकेत मिले।

किन शेयरों में हलचल दिखी

निफ्टी 50 में Jio Financial Services, HDFC Life Insurance और Adani Enterprises सबसे ज्यादा चढ़ने वाले शेयर रहे। वहीं Dr. Reddy’s Laboratories, Eternal और Bharti Airtel सबसे ज्यादा गिरने वालों में शामिल रहे।

रियल्टी, PSU बैंक और आईटी सेक्टर ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया। वहीं FMCG इकलौता प्रमुख सेक्टर रहा, जो मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ।

मिडकैप और स्मॉलकैप में रही तेजी

ब्रॉडर मार्केट का प्रदर्शन बड़े शेयरों से बेहतर रहा। Nifty Midcap 100 1.4% चढ़कर रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया। वहीं Nifty Smallcap 100 1.55% की बढ़त के साथ नए 52 हफ्ते के उच्च स्तर पर बंद हुआ। इससे साफ है कि निवेशकों की दिलचस्पी सिर्फ लार्जकैप तक सीमित नहीं है।

इस हफ्ते किन बातों पर रहेगी नजर?

अमेरिका ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई की है। ईरान ने फिर से होर्मुज स्ट्रेट बंद करने का दावा किया है। इससे वैश्विक बाजारों में तनाव बढ़ सकता है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आता है, तो उसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिल सकता है।

निफ्टी पर एक्सपर्ट्स की राय

नागराज शेट्टी (HDFC Securities) : शेट्टी का मानना है कि उतार-चढ़ाव के बावजूद निफ्टी का शॉर्ट टर्म ट्रेंड अब भी सकारात्मक है। उनके मुताबिक आने वाले दिनों में निफ्टी 24,500 से 24,600 के स्तर तक जा सकता है। वहीं 24,000 का स्तर मजबूत सपोर्ट बना हुआ है।

रूपक डे (LKP Securities) : रूपक डे के अनुसार बाजार में तेजी का रुख अभी कायम है। उनके मुताबिक 24,500 पर पहला बड़ा रेजिस्टेंस है, जबकि 24,000 का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट रहेगा।

हितेश राठी (Angel One) : हितेश राठी के मुताबिक 24,000 से 23,930 का दायरा पहला सपोर्ट जोन है। इसके नीचे 23,850 से 23,800 का स्तर मजबूत सहारा देगा। वहीं ऊपर की ओर 24,280 से 24,320 पहला रेजिस्टेंस है। इसके बाद 24,480 से 24,540 का स्तर अहम रहेगा।

नंदीश शाह (HDFC Securities) : शाह का कहना है कि पूरे हफ्ते निफ्टी अपने 50-डे सिंपल मूविंग एवरेज यानी 23,829 के ऊपर बना रहा। यह निचले स्तरों पर लगातार खरीदारी का संकेत है। उनके मुताबिक 23,805 का स्तर अहम सपोर्ट और 24,530 का स्तर बड़ा रेजिस्टेंस रहेगा।

Bank Nifty Outlook

बैंक निफ्टी ने भी हफ्ते का अंत मजबूती के साथ किया। इंडेक्स गैप-अप खुला और दिन के दूसरे हिस्से में खरीदारी बढ़ने से 1.39% की तेजी के साथ 58,046 पर बंद हुआ।

SBI Securities के सुदीप शाह के मुताबिक बैंक निफ्टी के लिए 58,500 से 58,600 का दायरा पहला बड़ा रेजिस्टेंस है। अगर इंडेक्स इसके ऊपर टिकता है तो 59,000 और फिर 59,500 तक जाने की संभावना बन सकती है। वहीं नीचे की ओर 57,600 से 57,500 का दायरा अहम सपोर्ट रहेगा।

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