इस हफ्ते बीते चार महीनों में सबसे ज्यादा चढ़ा बाजार, जानिए अगले हफ्ते कैसी रहेगी चाल

भारतीय शेयर बाजारों के लिए यह हफ्ता बीते करीब चार महीनों में सबसे अच्छा रहा। बाजार के प्रमुख सूचकांकों में 2.5 फीसदी से ज्यादा तेजी आई। इसमें उम्मीद से बेहतर जून तिमाही के कंपनियों के नतीजों, रुपये में मजबूती और विदेशी निवेशकों की खरीदारी का हाथ रहा।

सेंसेक्स-निफ्टी में 2.5 फीसदी से ज्यादा तेजी

इस हफ्ते सेंसेक्स 2.67 फीसदी यानी 2,034 अंक चढ़कर 78,094 पर बंद हुआ। Nifty 50 भी 2.59 फीसदी यानी 616 अंक की मजबूती के साथ 24,383 पर बंद हुआ। निफ्टी आईटी इस हफ्ते सबसे ज्यादा चढ़ने वाला सूचकांक रहा। इसमें 6.75 फीसदी उछाल आया। निफ्टी ऑटो में भी 5.61 फीसदी मजबूती आई।

निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में भी अच्छी तेजी

खास बात यह है कि इस हफ्ते छोटी-बड़ी हर तरह की कंपनियों के शेयरों में तेजी दिखी। Nifty Smallcap 100 Index 2.6 फीसदी चढ़ा। Redington, Kaynes Technology India, Firstsource Solutions, Brigade Enterprises, Affle 3I, IIFL Finance, KFin Technologies और IFCI के शेयरों में 24 फीसदी तक तेजी दिखी।

इन मिडकैप शेयरों में 10 फीसदी तक की तेजी

Nifty Midcap Index में भी इस हफ्ते 2 फीसदी तेजी आई। Coforge, Lauras Labs, Swiggy, Container Corporation of India और Ashok Leyland के शेयरों में 10 फीसदी तक की तेजी आई। गिरने वाले शेयरों में Suzlon Energy, Phoenix Mills, Billionbrains Garage Ventures, Bank of India और LICHF प्रमुख रहे।

विदेशी निवेशकों की अच्छी खरीदारी 

विदेशी संस्थागत निवेशकों ने दो हफ्ते के बाद भारतीय बाजार में इस हफ्ते निवेश किया। उन्होंने 5,946 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने भी 5,387 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को अच्छा सपोर्ट दिया। रुपये में बीते पांच हफ्तों से जारी गिरावट पर भी ब्रेक लग गया। यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 118 पैसे की मजबूती के साथ 95.39 के लेवल पर बंद हुआ।

निफ्टी अगले हफ्ते 24,500-24,60 लेवल टेस्ट कर सकता है

सेबी रजिस्टर्ड एनालिस्ट अनुज गुप्ता ने कहा कि अगले हफ्ते निफ्टी के लिए 24,100-23,800 पर स्ट्रॉन्ग सपोर्ट है। रेसिस्टेंस 24,500-24,700 के लेवल पर है। बैंक निफ्टी के लिए 56,000-54,500 पर स्ट्रॉन्ग सपोर्ट है। इसे 58,500-6000 के लेवल पर रेसिस्टेंस का सामना करना पड़ेगा। अगले हफ्ते निफ्टी के 24,500-24,600 का लेवल टेस्ट करने की उम्मीद है।

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इस हफ्ते आए इन दिग्गज कंपनियों के जून तिमाही के नतीजे

इस हफ्ते मारुति सुजुकी, ह्युंडई, एशियन पेंट्स, स्विगी, आईटीसी और सन फार्मा सहित कई दिग्गज कंपनियों के जून तिमाही के नतीजे आए। मारुति का प्रॉफिट 11 फीसदी गिरा। आईटीसी का प्रॉफिट 27 फीसदी गिरा। लेकिन, सन फॉर्मा का प्रॉफिट 27 फीसदी बढ़ा। एशियन पेंट्स का प्रॉफिट तो 40 फीसदी तक बढ़ गया।

ट्राइडेंट कैपिटल की साची त्रिवेदी ने भारतीय बाजार को बताया अट्रैक्टिव, कहा-कोरिया में तेजी सुस्त पड़ने से भारत में निवेश के मौके

भारतीय शेयर बाजार विदेशी निवेशकों के लिए फिर से अट्रैक्टिव बन रहा है। ट्राइडेंट कैपिटल इनवेस्टमेंट्स की फाउंडर और डायरेक्टर साची त्रिवेदी ने यह कहा है। मनीकंट्रोल के मैनेजिंग एडिटर नलिन मेहता को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में उन्होंने शेयर बाजार को लेकर कई अहम बातें बताईं। उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया और ताइवान के बाजारों में एआई शेयरों की बदौलत आई तेजी अब ठंडी पड़ रही है। इधर, भारतीय बाजारों की वैल्यूएशन अट्रैक्टिव हो गई है।

सिर्फ कुछ एआई स्टॉक्स की बदौलत चढ़ा कोरिया का बाजार

त्रिवेदी ने कहा कि दक्षिण कोरिया के बाजार में आई जबर्दस्त तेजी की वजह सिर्फ कुछ AI कंपनियों के शेयरों में आया उछाल है। सभी शेयरों में ऐसी तेजी नहीं दिखी है। दक्षिण कोरिया का शेयर बाजार बीते एक साल में दुनिया में सबसे ज्यादा चढ़ने वाला शेयर बाजार बन गया है।

इनवेस्टर्स की खरीदारी से कोस्पी में आई जरूरत से ज्यादा तेजी 

क्या दक्षिण कोरिया का बाजार जरूरत से ज्यादा चढ़ गया है? इस सवाल का जवाब त्रिवेदी ने हां में दिया। उन्होंने कहा, “रिटेल इनवेस्टर्स की ज्यादा खरीदारी और उधार के पैसे से बनाए गए डेरिवेटिव्स पोजीशन से बाजार काफी चढ़ गया। जब आप FOMO ट्रेड की कोशिश करते हैं…तो बाजार में ऐसा रिएक्शन दिखता है। “

हालिया गिरावट के बाद भारतीय बाजार की वैल्यूएशन घटी

उन्होंने कहा कि हालिया गिरावट के बाद भारतीय बाजार का अट्रैक्शन बढ़ा है। पहले वैल्यूएशन काफी बढ़ गई थी। उन्होंने कहा, “सितंबर 2024 में भारतीय बाजार की वैल्यूएशन काफी ज्यादा थी। मुझे लगता है कि यह 24 गुना या इससे ज्यादा पहुंच गई थी। दूसरे मार्केट्स की वैल्यूएशन सिंगल डिजिट में थी। ऐसे में विदेशी निवेशकों के लिए दूसरे बाजार ज्यादा अट्रैक्टिव हो गए थे। अब मुझे लगता है कि अब स्थिति उलट गई है।”

निवेश के लिए भारतीय बाजार की वैल्यूएशन अब अट्रैक्टिव

त्रिवेदी ने बताया कि अब भारतीय बाजार की वैल्यूएशन ज्यादा अट्रैक्टिव हो गई है, क्योंकि दक्षिण कोरिया और ताइवान के बाजारों में बड़ी तेजी आई है। उन्होंने कहा, “भारतीय बाजार की वैल्यूएशन काफी अट्रैक्विट यानी 20 गुना पर आ गई है। इसलिए मुझे लगता है कि अब भारतीय बाजार अट्रैक्टिव दिख रहा।”

कोविड के बाद से बाजार में आ रहा सिप से बड़ा निवेश 

उन्होंने कहा कि भारतीय बाजार की वैल्यूएशन को कोविड पीरियड के बाद अलग नजरिए से देखने की जरूरत है, क्योंकि सिस्टमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए लगातार घरेलू निवेशकों का पैसा आ रहा है। उन्होंने कहा, “कोविड के बाद भारतीय बाजार में नए निवेशक आए हैं और म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में सिप के जरिए पैसा आया है।”

इनवेस्टर्स के लिए यह भारतीय बाजार में निवेश का अच्छा मौका

उन्होंने कहा कि लगातार घरेलू खरीदारी से भारतीय बाजार की वैल्यूएशन एक दशक पहले के मुकाबले बढ़ गई। मौजूदा वैल्यूएशन पर निवेशकों को भारतीय बाजार में निवेश के लिए अच्छा मौका है। भारतीय बाजार में निवेश करने वाले किसी इनवेस्टर के लिए यह अच्छा मौका है।

(नलिन मेहता मनीकंट्रोल के मैनेजिंग एडिटर और नेटवर्क18 में चीफ एआई ऑफिसर-एडिटोरियल ऑपरेशंस हैं। नलिन ‘द न्यू बीजेपी: मोदी एंड द मेकिंग ऑफ द वर्ल्ड्स लार्जेस्ट पॉलिटिकल पार्टी’ किताब के लेखक हैं।)

क्रिस वुड ने लॉर्जकैप स्टॉक्स में तेजी की जताई उम्मीद, कहा- यह सोने में फिर से निवेश शुरू करने का सही वक्त

जेफरीज में इक्विटी स्ट्रेटेजी के ग्लोबल हेड क्रिस वुड का मानना है कि लंबी अवधि में भारतीय शेयर बाजारों का प्रदर्शन अच्छा रहेगा। उनका यह भी कहना है कि लंबे समय तक मिडकैप शेयरों के बेहतर प्रदर्शन के बाद अब लार्जकैप स्टॉक्स की बारी है। मनीकंट्रोल के मैनेजिंग एडिटर नलिन मेहता को दिए इंटरव्यू में उन्होंने भारतीय शेयर बाजार के बारे में कई अहम बातें बताईं।

गोल्ड में निवेश शुरू करने की सलाह

वुड ने कहा कि मिडकैप स्टॉक्स की अर्निंग्स ग्रोथ और रिटर्न स्ट्रॉन्ग रहे हैं। अब ब्लूचिप स्टॉक्स का रफ्तार पकड़ना स्वाभाविक है। उन्होंने इनवेस्टर्स को हालिया कंसॉलिडेशन (सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव) के बाद सोने में निवेश शुरू करने की भी सलाह दी। गोल्ड की कीमतें इस साल जनवरी की आखिर में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थीं। उसके बाद कीमतों में तेज गिरावट आई।

मिडकैप की अर्निंग्स ग्रोथ लार्जकैप से ज्यादा

उन्होंने कहा, “रुपये में निवेश करने वाले इनवेस्टर्स के लिए पिछले साल भारतीय शेयर बाजारों का कुल रिटर्न बहुत खराब नहीं रहा। इंडियन मार्केट में मिडकैप स्टॉक्स को लेकर मेरी राय सबसे ज्यादा पॉजिटिव रही है। उनकी अर्निंग्स ग्रोथ ब्लूचिप शेयरों के मुकाबले ज्यादा रही है।”

अब लार्जकैप स्टॉक्स में दिख सकती है तेजी

लंबी अवधि में भारतीय बाजारों के बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जताते हुए वुड ने कहा कि मिडकैप शेयरों के शानदार प्रदर्शन से यह संकेत मिलता है कि अब लार्जकैप स्टॉक्स में तेजी दिख सकती है। उनका मानना है कि पिछले 18 महीनों में इंडियन मार्केट्स में लार्जकैप शेयरों में स्ट्रॉन्ग थीम का अभाव रहा है। इंडिया में रिवर्स AI ट्रेड देखने को मिला है। इंडिया में एक सेक्टर है, जिसे एआई से बड़ा खतरा है। वह सेक्टर आईटी है।

मध्यपूर्व में लड़ाई से सोने में उछाल नहीं आया

सोने के बारे में वुड ने कहा कि हाल में ऊंचे लेवल से गिरने के बाद सोने की कीमतें अब ऐसे लेवल पर आ गई है, जिस पर इसमें निवेश बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा, “ईरान वॉर शुरू होने पर गोल्ड की कीमत ने नया हाई नहीं बनाया। यह मेरे लिए एक संकेत था कि गोल्ड की कीमतें फिलहाल अपने पीक पर पहुंच गई हैं और हम कंसॉलिडेशन के दौर में प्रवेश कर चुके हैं।”

डॉलर डिबेसमेंट ट्रेड की वजह से सोना अट्रैक्टिव

वुड ने कहा, “हम इस ट्रेडिंग रेंज के निचले स्तर पर हैं। मेरा मानना है कि लोगों को फिर से सोने में निवेश शुरू करना चाहिए। लंबी अवधि में सोने को पसंद करने की वजह यह है कि मैं अब भी डॉलर डिबेसमेंट ट्रेड पर भरोसा करता हूं। “

(नलिन मेहता मनीकंट्रोल के मैनेजिंग एडिटर और नेटवर्क18 में चीफ एआई ऑफिसर-एडिटोरियल ऑपरेशंस हैं। नलिन ‘द न्यू बीजेपी: मोदी एंड द मेकिंग ऑफ द वर्ल्ड्स लार्जेस्ट पॉलिटिकल पार्टी’ किताब के लेखक हैं।)

Infosys Share Price: तीन दिन में 11% उछला इंफोसिस, शेयर खरीदें, होल्ड करें या बेच दें?

इंफोसिस के शेयरों में 29 जुलाई को लगातार तीसरे दिन जबर्दस्त तेजी रही। शेयर 4.32 फीसदी चढ़कर 1,153.50 रुपये पर बंद हुआ। सिर्फ तीन दिन में यह शेयर करीब 11 फीसदी चढ़ा है। एनालिस्ट्स का कहना है कि आईटी शेयरों को लेकर सेंटिमेंट बेहतर हो रहा है। सवाल है कि इंफोसिस के शेयरों को खरीदना चाहिए, बेचना चाहिए या होल्ड करना चाहिए?

एआई स्टॉक्स में घटी ग्लोबल इनवेस्टर्स की दिलचस्पी

ग्लोबल इनवेस्टर्स की दिलचस्पी एआई स्टॉक्स में घटी है। दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार के क्रैश में चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में गिरावट का बड़ा हाथ है। अमेरिकी चिप कंपनियों में भी कमजोरी दिखी है। इधर, सस्ते वैल्यूएशन पर आईटी शेयरों में इनवेस्टर्स की दिलचस्पी बढ़ी है। 29 जुलाई को भारतीय शेयर बाजारों में सबसे ज्यादा उछाल आईटी इंडेक्स में देखने को मिला।

एआई के इस्तेमाल से आईटी कंपनियों को होगा फायदा

Enrich Money के फाउंडर और सीईओ पोनमुदी आर ने कहा, “इनवेस्टर्स ज्यादा वैल्यूएशन वाली एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और सेमीकंडक्टर शेयरों से पैसे निकाल आईटी स्टॉक्स में लगा रहे हैं। आईटी कंपनियों को बगैर बड़े निवेश के एआई से बड़ा फायदा होने की उम्मीद है। भारतीय आईटी कंपनियों को एआई इंफ्रास्ट्रक्चर बिल्डर की जगह एआई इंप्लीमेंटेशन पार्टनर्स के रूप में देखा जा रहा है।”

35-40 फीसदी गिरावट के बाद आईटी स्टॉक्स बना चुके हैं बॉटम

उन्होंने कहा, “ऐसा लगता है कि आईटी स्टॉक्स ने 35-40 फीसदी करेक्शन के बाद मीडियम टर्म बॉटम बना चुके हैं। मौजूदा तेजी की वजह सस्ती कीमतों पर खरीदारी, इंस्टीट्यूनल इनवेस्टमेंट और शॉर्ट कवरिंग है। व्यापक ट्रेंड पॉजिटिलव दिखता है। लेकिन, अगले चरण की तेजी से पहले कंसॉलिडेशन फेज अच्छा और जरूरी है। “

आईटी स्टॉक्स के लिए हाई वैल्यूएशन का रिस्क नहीं के बराबर 

Share.Market by PhonePe में मार्केट एनालिस्ट मयंक जैन ने कहा कि भारतीय आईटी कंपनियों में प्योर-प्ले एआई मॉडल का अभाव रहा है। इससे ये कंपनियां हाई वैल्यूएएशन रिस्क से बची रही हैं। साथ ही शॉर्ट टर्म में कैपिटल राइट-डाउन का रिस्क भी कम रहा है। उन्होंने कहा कि शॉर्ट टर्म में आईटी स्टॉक्स की चाल पश्चिम खासकर अमेरिका में मैक्रोइकोनॉमिक स्थितियों में बेहतरी पर निर्भर करेगा।

इस साल 29 फीसदी फिसला है निफ्टी का स्टॉक

इंफोसिस देश की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी है। पहले नंबर पर टाटा समूह की टीसीएस है। इस साल इंफोसिस का शेयर 29 फीसदी से ज्यादा गिरा है। बीते एक साल में यह करीब 24 फीसदी टूटा है। लेकिन, बीते एक महीने में आईटी शेयरों में अच्छी रिकवरी दिखी है। निफ्टी आईटी इंडेक्स इस दौरान 14.29 फीसदी चढ़ा है।

Gift Nifty Indicator: ग्लोबल बाजार में मचा कोहराम क्या दिखाएगा भारतीय बाजार पर अपना असर, जानें गिफ्ट निफ्टी से क्या मिल रहे है आज संकेत

Gift Nifty Indicator: ग्लोबल मार्केट के कमजोर संकेतों को देखते हुए, मंगलवार, 28 जुलाई को भारतीय शेयर बाजार के बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी 50 के लाल निशान में खुलने की संभावना है। सुबह 8.35 बजे गिफ्ट निफ्टी 23,970.50 के स्तर के आसपास ट्रेड कर रहा है जो निफ्टी फ्यूचर्स की पिछली क्लोजिंग से 71.50 अंक नीचे है।

सोमवार को भारतीय शेयर बाजार ने लगातार पांच दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ा और बेंचमार्क निफ्टी 50 इंडेक्स 23,900 के स्तर के ऊपर बंद हुआ। सेंसेक्स 776.01 अंक या 1.02% की बढ़त के साथ 76,835.78 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 इंडेक्स 228.50 अंक या 0.96% की बढ़त के साथ 23,995.95 पर बंद हुआ।

क्रूड में नरमी

मंगलवार, 28 जुलाई को कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट जारी रही। यह गिरावट तब आई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वाशिंगटन और तेहरान मध्य पूर्व के संघर्ष को सुलझाने के लिए बातचीत कर रहे हैं।

पिछले सत्र में 7% से ज़्यादा गिरने के बाद वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड $82 प्रति बैरल से नीचे आ गया, जबकि ब्रेंट क्रूड में तीन महीने से ज़्यादा समय में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई और यह $88 प्रति बैरल के करीब बंद हुआ।

एशियाई बाजारों में गिरावट

एशियाई बाजारों में गिरावट देखने को मिली। US में चिप कंपनियों में बिकवाली के चलते कोरिया का बाजार 8 फीसदी के लोअर सर्किट पर फिसल गया। निक्केई 4.40 फीसदी टूटा है। अमेरिकी बाजार भी ऊपरी स्तरों से फिसले है। बेंचमार्क कोस्पी (Kospi) 8.70 फीसदी गिरा। जबकि स्मॉल-कैप कोस्डैक (Kosdaq) में 3.63% की गिरावट आई। जापान का निक्केई 225 (Nikkei 225) 4.21% गिरा और व्यापक टॉपिक्स (Topix) इंडेक्स में 0.63% की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 शुरुआती कारोबार में 0.38% नीचे आ गया।

निफ्टी- बैंक निफ्टी के लिए कौन से लेवल हैं अहम

HDFC सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट नागराज शेट्टी ने कहा कि शुक्रवार को कमजोर ग्लोबल संकेतों की वजह से आई भारी गिरावट के बाद सोमवार को निफ्टी 50 में जोरदार रिकवरी हुई और यह 228 अंक ऊपर बंद हुआ। उन्होंने बताया कि इंडेक्स ने डेली चार्ट पर गैप-अप ओपनिंग के साथ एक लंबी बुलिश कैंडल बनाई, और ओपनिंग गैप भरा नहीं गया—जो एक अच्छा टेक्निकल संकेत है।

शेट्टी के अनुसार, 23,600 के सपोर्ट ज़ोन से वापसी (जो 15 जून के अपसाइड गैप और एक ऊपर की ओर बढ़ती ट्रेंडलाइन से मेल खाता है)ने इंडेक्स को तुरंत 24,000–24,100 के रेजिस्टेंस लेवल को तोड़ने की स्थिति में ला दिया है। अगले कुछ सेशन में 24,100 के ऊपर लगातार बने रहने से 24,500 की ओर बढ़ने का रास्ता खुल सकता है, जबकि 23,800 तुरंत सपोर्ट लेवल बना हुआ है।

SBI सिक्योरिटीज के टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च हेड सुदीप शाह ने कहा कि बैंक निफ्टी एक तय दायरे में ट्रेड कर रहा है, जिससे पता चलता है कि इसमें कोई मजबूत दिशात्मक मोमेंटम नहीं है। उन्होंने बताया कि एक अहम रेजिस्टेंस ज़ोन के पास ‘डोजी’ (Doji) कैंडलस्टिक का बनना बुल्स और बेयर्स के बीच चल रही खींचतान को दिखाता है।

शाह के अनुसार, 57,500–57,600 का ज़ोन तुरंत रेजिस्टेंस का काम कर सकता है। 57,600 के ऊपर निर्णायक ब्रेकआउट से नई खरीदारी शुरू हो सकती है और इंडेक्स के जल्द ही 58,200 के लेवल तक पहुंचने का रास्ता बन सकता है।

नीचे की तरफ, शाह को उम्मीद है कि 56,700–56,600 का 100-दिन का एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) ज़ोन मजबूत सपोर्ट देगा। इस दायरे के ऊपर बने रहने से व्यापक टेक्निकल स्ट्रक्चर बरकरार रहेगा, जबकि इसके टूटने से फिर से बिकवाली का दबाव बन सकता है।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stock Market : शेयर बाजार में लौटी रौनक, 5 दिन की गिरावट थमी, सेंसेक्स 776 अंक उछला, निवेशकों को बड़ी राहत

share market 19 march

भारतीय शेयर बाजार में पिछले पांच कारोबारी सत्रों से जारी गिरावट का सिलसिला सोमवार को आखिरकार थम गया। वैश्विक स्तर पर तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट के बाद घरेलू बाजार में जबरदस्त खरीदारी देखने को मिली। इस तेजी के चलते BSE सेंसेक्स 776 अंक चढ़कर बंद हुआ, जबकि NSE निफ्टी 228 अंक की मजबूत बढ़त के साथ समाप्त हुआ।

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बाजार क्यों चढ़ा?

विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में तनाव कम होना और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट रही। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य कार्रवाई पर रोक लगने से वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ा, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया।

 

सेंसेक्स और निफ्टी का प्रदर्शन

BSE सेंसेक्स : 76,835.78 पर बंद

तेजी : 776.01 अंक (1.02%)

दिन का उच्च स्तर : 76,901.51

 

वहीं, NSE निफ्टी 228 अंक की बढ़त के साथ बंद हुआ। कारोबार के दौरान बैंकिंग, आईटी, ऑटो और एनर्जी सेक्टर के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली।

 

निवेशकों को क्या राहत मिली?

पिछले पांच दिनों की लगातार गिरावट से निवेशकों की चिंता बढ़ गई थी। सोमवार की तेजी ने बाजार में सकारात्मक माहौल बनाया और यह संकेत दिया कि यदि वैश्विक परिस्थितियां स्थिर रहती हैं तो आने वाले सत्रों में भी बाजार में मजबूती बनी रह सकती है।

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आगे किन बातों पर रहेगी नजर?

अब निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों (FII) के निवेश रुझान पर रहेगी। ये तीनों कारक अगले कुछ दिनों में बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

Stock Market Fall: सेंसेक्स 332 अंक गिरकर बंद; लगातार 5वें दिन लाल, निवेशकों के ₹91511 करोड़ स्वाहा

भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार, 24 जुलाई को लगातार 5वें कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए। दिन में सेंसेक्स ने 917 अंकों की तगड़ी मार झेली और 75,474.43 के लो तक चला गया। निफ्टी भी 263 अंक तक टूटकर 23,606.30 के लो तक गया। हालांकि बाद में रिकवरी हुई। सेंसेक्स 331.62 अंकों की गिरावट के साथ 76,059.77 पर और निफ्टी 102.15 अंकों की गिरावट के साथ 23,767.45 पर बंद हुआ।

इस बीच BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 91,510.68 करोड़ रुपये घट गया। गुरुवार, 23 जुलाई को शेयर मार्केट बंद होने पर BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 4,76,60,985.926 करोड़ रुपये रहा था। शुक्रवार को मार्केट बंद होने पर यह घटकर 4,75,69,475.24 करोड़ रुपये हो गया।

NSE पर एचसीएल टेक्नोलोजिज, सिप्ला, विप्रो, आईटीसी, HDFC लाइफ इंश्योरेंस कंपनी टॉप गेनर्स रहे। वहीं इटर्नल, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, श्रीराम फाइनेंस, बजाज ऑटो टॉप लूजर्स रहे।

एक दिन पहले कैसी रही थी चाल

पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण कच्चे तेल के दाम में उछाल से गुरुवार को सेंसेक्स 363.66 अंक या 0.47 प्रतिशत टूटकर 76,391.39 पर बंद हुआ था। निफ्टी 126.65 अंक या 0.53 प्रतिशत टूटकर 23,869.60 अंक पर बंद हुआ था।

Hindustan Zinc Q1 Results: मुनाफा 145% बढ़ा, रेवेन्यू 77% की बढ़ोतरी के साथ अब तक के सबसे हाई लेवल पर

रुपये की चाल

शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में रुपया, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 22 पैसे मजबूत होकर 96.51 पर पहुंच गया। बाद में यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 18 पैसे मजबूत होकर 96.55 (अस्थायी) पर बंद हुआ। खबरों के मुताबिक, इसमें रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की संभावित दखलंदाजी का भी हाथ रहा, जिसके जरिए कच्चे तेल की कीमत में उछाल के बीच रुपये में और गिरावट को रोकने की कोशिश की गई। इसके अलावा कमजोर अमेरिकी डॉलर ने भी घरेलू करेंसी को कुछ सहारा दिया। रुपया गुरुवार को 20 पैसे की गिरावट के साथ 96.73 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी 6 प्रतिशत लुढ़क गया। जापान का निक्केई 225, चीन का एसएसई कंपोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग भी गिरावट में हैं। अमेरिकी शेयर बाजार गुरुवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Market Outlook : गिरावट के साथ बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए 23 जुलाई को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

Market Outlook : 22 जुलाई को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए और निफ्टी 24,000 के नीचे बंद हुआ। ट्रेडिंग सेशन के अंत में सेंसेक्स 715.06 अंक या 0.92 प्रतिशत गिरकर 76,755.05 पर और निफ्टी 191.45 अंक या 0.79 प्रतिशत गिरकर 23,996.25 पर बंद हुआ। लगभग 1443 शेयरों में बढ़त हुई, 2616 शेयरों में गिरावट आई और 170 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। निफ्टी में सबसे ज़्यादा गिरने वाले शेयरों में इंटरग्लोब एविएशन, जियो फाइनेंशियल, इंफोसिस, एसबीआई और डॉ. रेड्डीज़ लैब्स शामिल रहे। जबकि बढ़ने वाले शेयरों में बजाज ऑटो, नेस्ले, टाटा कंज्यूमर, पावर ग्रिड कॉर्प और ओएनजीसी शामिल रहे। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 1 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स में 1.5 प्रतिशत की गिरावट आई।

सेक्टर के हिसाब से परफॉर्मेंस ज्यादातर नेगेटिव रहा। निफ्टी FMCG सबसे ज्यादा बढ़ने वाला सेक्टर रहा, जिसमें 0.65% की बढ़त हुई, इसके बाद निफ्टी ऑटो में 0.18% की बढ़त हुई। गिरावट वाले सेक्टर में, निफ्टी मीडिया सबसे खराब परफॉर्मेंस वाला सेक्टर रहा, जिसमें 2.68% की गिरावट आई। इसके बाद निफ्टी रियल्टी (-2.6%), निफ्टी PSU बैंक (-1.8%), निफ्टी प्राइवेट बैंक (-1.4%), निफ्टी IT (-1.5%), निफ्टी बैंक (-1.2%), निफ्टी फार्मा (-1.3%), निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (-0.86%), निफ्टी इंफ्रा (-0.85%), निफ्टी ऑयल एंड गैस (-0.6%), निफ्टी मेटल (-0.48%) और निफ्टी एनर्जी (-0.3%) रहे।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में हेड ऑफ़ रिसर्च विनोद नायर का कहना है कि आज भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। US-ईरान के बीच जारी तनाव और अहम ग्लोबल शिपिंग रूट पर हूथी गुट की वजह से आई दिक्कतो ने तेल की सप्लाई से जुड़ी चिंता बढ़ा दी, जिससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं और रुपया कमजोर हुआ। घरेलू महंगाई को लेकर फिर से बढ़ती चिंताओं के कारण बाजार में जोखिम लेने से बचने का माहौल हावी रहा। इसने उम्मीद से बेहतर बिजनेस अपडेट और Q1 के अच्छे नतीजों के असर को कम कर दिया।

रियल एस्टेट, बैंकिंग और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे ब्याज दरों पर निर्भर सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावट आई। फार्मास्युटिकल एक्सपोर्ट पर US के प्रस्तावित टैरिफ को लेकर फिर से बनी अनिश्चितता के बीच फार्मा शेयरों पर भी दबाव रहा।

सावधानी भरे माहौल के बावजूद, FMCG और ऑटो शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। सेक्टर की बड़ी कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजों से इन्हें सहारा मिला, जो यह दिखाता है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच भी निवेशक उन कंपनियों को पसंद कर रहे हैं जिनकी कमाई में मज़बूत ग्रोथ दिख रही है।

निफ्टी व्यू

Hedged.in में एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट-HNI ​​एंड डेरिवेटिव्स रियांक अरोड़ा का कहना है कि आज के सेशन में भारतीय इक्विटी मार्केट में हर तरफ गिरावट नजर आई। लगातार बिकवाली के दबाव और निवेशकों के सतर्क रवैये के बीच बेंचमार्क इंडेक्स काफी नीचे बंद हुए। अहम सेक्टरों में कमजोरी और प्रॉफिट बुकिंग ने इंडेक्स को नीचे धकेल दिया, जिससे बाजार में रिस्क-ऑफ (जोखिम से बचने का) मूड दिखा।

निफ्टी 191.45 अंक यानी 0.79% गिरकर 23,996.25 पर बंद हुआ। यह 24,000 के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया, जो शॉर्ट-टर्म कमजोरी का संकेत है। अब इसके लिए 23,950–23,900 के आसपास तत्काल सपोर्ट है। उसके बाद 23,800 के पास अगला मजबूत सपोर्ट जोन है। ऊपर की तरफ, 24,100–24,200 के आसपास रेजिस्टेंस दिख रहा है। पॉजिटिव मोमेंटम वापस पाने के लिए लगातार इन स्तरों से ऊपर बने रहना जरूरी होगा।

BSE सेंसेक्स 715.06 अंक यानी 0.92% गिरकर 76,755.05 पर बंद हुआ। इंडेक्स में हर तरफ बिकवाली हुई और यह दिन के निचले स्तर के पास बंद हुआ। इसके लिए तत्काल सपोर्ट 76,600–76,400 के आसपास है, जबकि रेजिस्टेंस 77,000–77,300 के पास दिख रहा है। रेजिस्टेंस जोन से ऊपर एक मजबूत चाल बुलिश सेंटीमेंट को बहाल करने में मदद कर सकती है।

आज की गिरावट की वजह हर तरफ से हुई प्रॉफिट बुकिंग और बाजार का सतर्क रवैया रहा। हालांकि शॉर्ट-टर्म मोमेंटम कमजोर हुआ है, लेकिन जब तक अहम सपोर्ट लेवल बचे हुए हैं, मीडियम-टर्म ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है। ट्रेडर्स को सलाह दी जाती है कि वे चुनिंदा शेयरों पर ध्यान दें, आक्रामक लॉन्ग पोजीशन लेने से बचें और सख्त रिस्क मैनेजमेंट के साथ मजबूत सपोर्ट जोन के पास गिरावट पर खरीदारी का तरीका अपनाएं।

LKP सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें फिर से भारतीय इक्विटी मार्ट के लिए परेशानी का कारण बन गई हैं। जहां कच्चा तेल 50EMA के ऊपर बना हुआ है, वहीं निफ्टी 50EMA के नीचे जाने की कगार पर है। ऐसा लगता है कि निफ्टी और कच्चा तेल फिर से एक-दूसरे के विपरीत दिशा में चल रहे हैं।

निफ्टी के डेली चार्ट पर कंसोलिडेशन का दौर नीचे की ओर टूटता हुआ दिख रहा है। RSI में बेयरिश क्रॉसओवर है, जो निकट भविष्य में कमजोर मोमेंटम का संकेत दे रहा है। अगर निफ्टी 23900 के नीचे गिरता है तो गिरावट 23700/23600 तक बढ़ सकती है। शॉर्ट टर्म में ऊपरी स्तर 24100 पर रेजिस्टेंस दिख रहा है।

कोटक सिक्योरिटीज में हेड ऑफ इक्विटी रिसर्च श्रीकांत चौहान ने कहा कि आज बेंचमार्क इंडेक्स में बड़ी गिरावट आई। निफ्टी 191 अंक गिरकर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स में 715 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। सेक्टर के हिसाब से देखें तो रियल्टी और मीडिया इंडेक्स में 2.5 प्रतिशत से ज़्यादा की गिरावट आई, जबकि बाजार का मूड खराब होने के बावजूद कुछ चुनिंदा FMCG और ऑटो शेयरों में तेजी दिखी। तकनीकी तौर पर निफ्टी 20-डे SMA (सिंपल मूविंग एवरेज) या 24,100 के सपोर्ट जोन से नीचे आ गया है और इस गिरावट के बाद बिकवाली का दबाव बढ़ गया है। डेली चार्ट पर एक लॉन्ग ‘बेयरिश कैंडल’ बनी है, जो मौजूदा स्तरों से और गिरावट का संकेत देती है।

श्रीकांत चौहान मानना ​​है कि जब तक निफ्टी 24,100 के नीचे ट्रेड कर रहा है, तब तक गिरावट का दौर जारी रहने की संभावना है। यह गिरावट 50-डे SMA या 23,850 के स्तर तक जारी रह सकती है। इसके बाद और गिरावट हो सकती है, जिससे इंडेक्स 23,750-23,700 के स्तर तक जा सकता है। दूसरी ओर, 24,100 के स्तर के ऊपर जाने पर बाजार का मूड बदल सकता है। इस स्तर के ऊपर, बाजार में 24,200-24,250 तक की रिकवरी हो सकती है। इंट्राडे मार्केट की स्थिति अनिश्चित और उतार-चढ़ाव वाली है। इसलिए, डे ट्रेडर्स के लिए लेवल-बेस्ड ट्रेडिंग सबसे अच्छी रणनीति होगी।

बैंक निफ्टी व्यू

SBI सिक्योरिटीज में हेड-टेक्निकल एंड डेरिवेटिव्स रिसर्च, सुदीप शाह का कहना है कि बैंक निफ्टी जो पिछले आठ ट्रेडिंग सेशन से 58,597–57,287 की रेंज में बना हुआ था, उसमें भी आज एक बड़ा ब्रेकडाउन देखने को मिला। इंडेक्स ने एक बड़ी बेयरिश कैंडल बनाई और 8 जुलाई के बाद पहली बार अपने 20-डे EMA के नीचे बंद हुआ। गिरती हुई MACD लाइन और बढ़ते हुए रेड हिस्टोग्राम बार नीचे की ओर बढ़ते मोमेंटम का संकेत दे रहे हैं।

आगे बैंक निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 56700-56600 जोन में है। अगर यह लगातार इस जोन के नीचे बना रहता है, तो बैंक निफ्टी में और कमजोरी आ सकती है और यह शॉर्ट टर्म में 56300 और फिर 56000 तक गिर सकता है। ऊपर की तरफ, बैंक निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 57500-57600 जोन में है।

 

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क्रूड ऑयल की कीमतों में फिर से लगी आग, आपकी जेब पर भी पड़ेगा महंगे क्रूड का असर

क्रूड ऑयल की कीमतों में 22 जुलाई को बड़ी तेजी दिखी। ब्रेंट क्रूड 2.76 फीसदी चढ़कर 93.54 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 2.83 फीसदी की तेजी के साथ 86.74 डॉलर प्रति बैरल पर चल रहा था। क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल का असर भारतीय शेयर बाजार और भारत की करेंसी रुपये पर भी पड़ा। निफ्टी में 0.76 फीसदी यानी 186 अंक की गिरावट दिखी, जबकि सेंसेक्स करीब 700 अंक क्रैश कर गया।

क्रूड में उछाल का असर रुपये पर भी पड़ा। डॉलर के मुकाबले यह 11 पैसे गिरकर 96.36 के लेवल पर आ गया। क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल की वजह अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ती लड़ाई है। अमेरिकी ने लगातार 11वें दिन ईरान पर हमला जारी रखा। ईरान भी जवाबी कार्रवाई में खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशान बना रहा है। टेंशन बढ़ने से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते ऑयल टैंकर्स की आवाजाही बाधित है। इससे क्रूड की कीमतें चढ़ रही हैं।

इस साल फरवरी के आखिर में अमेरिका-ईरान की लड़ाई शुरू हुई थी। उसके बाद क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल आया था। एक समय ब्रेट क्रूड का प्राइस 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। हालांकि, अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर के ऐलान से क्रूड की कीमतों में बड़ी गिरावट आई थी। लेकिन, मध्यपूर्व में टेंशन फिर बढ़ने से क्रूड की कीमतें चढ़ने लगी हैं। क्रूड की कीमतों में उछाल भारत के लिए अच्छी खबर नहीं है।

पेट्रोलियम मिनिस्ट्री के डेटा के मुताबिक, क्रूड की कीमतों में उछाल की वजह से जून तिमाही में भारत का क्रूड इंपोर्ट बिल एक साल पहले की समान अवधि के मुकाबले 60 फीसदी ज्यादा रहा। भारत अपनी जरूरत के 88 फीसदी क्रूड ऑयल का इंपोर्ट करता है। इस वजह से क्रूड की कीमतों में उछाल से सरकार पर वित्तीय बोझ बढ़ जाता है।

पहले ही क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ने पर भारत में ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें बढ़ा चुकी हैं। इससे दिल्ली में पेट्रोल का प्राइस प्रति लीटर 102.12 रुपये और मुंबई में 111.21 रुपये पहुंच गया है। दिल्ली में डीजल की कीमतें भी 95.20 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है। अगर क्रूड में तेजी जारी रहती है तो ऑयल मार्केटिंग कंपनियां फिर से पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें बढ़ाने को मजबूर हो सकती है। इसका सीधा असर आपकी जेब पर पड़ेगा।

महंगे पेट्रोल और डीजल से महंगाई बढ़ने का डर है। मई और जून में रिटेल इनफ्लेशन बढ़ा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईंधन खासकर डीजल महंगा होने से कई चीजों की कीमतें बढ़ती हैं। इसकी वजह यह है कि डीजल का इस्तेमाल ट्रांसपोर्टेशन के लिए होता है। ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ने से फल-सब्जी सहित रोजमर्रा की चीजों की कीमतें भी बढ़ जाती है। पहले से ही प्याज सहित कई चीजों की कीमतों में उछाल दिख रहा है। इससे परिवारों के बजट पर बोझ बढ़ गया है।

जब इंफोसिस के ड्राइवर, इलेक्ट्रीशियन बने करोड़पति! जानें नारायण मूर्ति का वो फैसला जो बनी कॉरपोरेट इंडस्ट्री की सबसे अनोखी कहानी

Infosys Drivers-Electricians Became Crorepatis: भारतीय कॉरपोरेट जगत के इतिहास में जब भी संपत्ति बनाने की बात आती है, तो इंफोसिस का नाम सबसे ऊपर आता है। यह कहानी सिर्फ एक आईटी कंपनी के सफल होने की नहीं है, बल्कि एक दूरदर्शी संस्थापक के उस फैसले की है जिसने आम मध्यमवर्गीय कर्मचारियों ही नहीं, बल्कि ऑफिस के ड्राइवर्स और इलेक्ट्रिशियन तक की किस्मत हमेशा के लिए बदल दी।

साल 1999 में जब इंफोसिस के कर्मचारी करोड़पति बने, तो पूरा भारतीय कॉरपोरेट जगत हैरान रह गया था। आइए जानते हैं कि नारायण मूर्ति के उस एक फैसले ने कैसे इतिहास रच दिया।

1993 में आया था IPO, जब मॉर्गन स्टेनली बनी ‘मददगार’

बहुत कम लोग जानते हैं कि 1993 में जब इंफोसिस का IPO ₹95 प्रति शेयर के भाव पर आया था, तो शुरुआत में इसे पर्याप्त सब्सक्रिप्शन नहीं मिला था। उस समय ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टेनली आगे आई और इश्यू प्राइस पर कंपनी की 13% हिस्सेदारी खरीदकर इसे बचाया। किसी को अंदाजा नहीं था कि भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में यह अब तक का सबसे सफल दांव साबित होने वाला है।

ESOP पर 1994 का वो ऐतिहासिक फैसला जिससे पलटी किस्मत 

साल 1994 में इंफोसिस ने ‘एंप्लॉय स्टॉक ऑप्शन प्लान’ (ESOP) शुरू किया। इंफोसिस ऐसा करने वाली पहली भारतीय कंपनी बनी। पूर्व सीएफओ टी.वी. मोहनदास पाई के अनुसार, इस योजना का दायरा इतना बड़ा था कि यह केवल सीनियर इंजीनियर्स और मैनेजरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि कंपनी के निचले स्तर के कर्मचारियों को भी दी गई।

नारायण मूर्ति का स्पष्ट मानना था कि, ‘कंपनी का विकास तभी सार्थक है, जब उसे बनाने वाले हर एक स्टेकहोल्डर और कर्मचारी का विकास उसके साथ हो।’

1999 में Nasdaq पर लिस्टिंग और शेयर में छप्परफाड़ तेजी

मार्च 1999 में इंफोसिस अमेरिका के नेस्डैक एक्सचेंज पर लिस्ट होने वाली पहली भारतीय कंपनी बनी। इस ग्लोबल लिस्टिंग के बाद कंपनी के शेयरों की मांग पूरी दुनिया में रातों-रात बढ़ गई।

इश्यू प्राइस (1993): ₹95 प्रति शेयर

शेयर प्राइस (1999): ₹8,100 के करीब

मात्र 6 साल के भीतर शेयर की कीमत में आई इस ऐतिहासिक तेजी ने कागजी संपत्ति को असली पैसों में बदल दिया।

जब ड्राइवर और बिजली मिस्त्री भी बन गए ‘करोड़पति’

1999 के समय में जहां एक औसत इंजीनियर की सैलरी लगभग ₹8,000 प्रति महीना होती थी, वहीं इंफोसिस के लगभग 1,800 कर्मचारी ESOP की बदौलत डॉलर मिलियनेयर बन चुके थे। इसमें सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह थी कि कंपनी में काम करने वाले ड्राइवर्स, इलेक्ट्रिशियन और सपोर्ट स्टाफ, जिन्हें स्टॉक ऑप्शंस मिले थे, वे भी रातों-रात करोड़पति बन गए थे।

भारत के मध्यमवर्ग के लिए केवल सैलरी से नहीं, बल्कि कंपनी के शेयर लंबे समय तक होल्ड करके इतनी बड़ी संपत्ति बनाने का यह बिल्कुल नया और आंखें खोल देने वाला विचार था।

₹10,000 से ₹4 लाख करोड़ तक का सफर

मात्र ₹10,000 की उधारी पूंजी से शुरू हुई इंफोसिस ने आगे चलकर ₹4 लाख करोड़ रुपये से अधिक के मार्केट कैप के आंकड़े को पार किया। 1999 का दौर वह मोड़ था जिसने यह साबित किया कि यदि कंपनी अपनी सफलता में हर योगदान देने वाले को हिस्सेदार बनाती है, तो साधारण लोग भी असाधारण रूप से समृद्ध हो सकते हैं।