Amagi Media Labs Share Price: ब्लॉक डील में बिके ₹600 करोड़ के शेयर, कीमत 9% तक चढ़ी

अमागी मीडिया लैब्स के शेयरों में 21 अगस्त को दिन में 8.69 प्रतिशत तक की बढ़त दिखी। BSE पर शेयर 627 रुपये के हाई तक गया। ऐसी खबर है कि एक ब्लॉक डील में Trudy Holdings, AVP I Fund और Accel ने कंपनी में 600 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। शेयरों की यह संख्या कंपनी की लगभग 5 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर है। इस ब्लॉक डील के तहत फ्लोर प्राइस 550 रुपये प्रति शेयर रहा।

अमागी मीडिया लैब्स एक क्लाउड-बेस्ड सॉफ्टवेयर-एज-ए-सर्विस (SaaS) कंपनी है। यह भारत को लॉन्ग-टर्म ग्रोथ के लिए एक अहम मार्केट मानती है। कंपनी को उम्मीद है कि आर्टीफीशियल इंटेलिजेंस (AI) उसके अगले ग्रोथ फेज का अहम हिस्सा बनेगा। Amagi ने AI-बेस्ड पहलों में निवेश बढ़ाना शुरू कर दिया है और हाल ही में अपने पहले AI कस्टमर की घोषणा की है। यह जेनरेटिव AI इंफ्रास्ट्रक्चर में शुरुआती कदम का संकेत है।

कंपनी को उम्मीद है कि समय के साथ भारत का योगदान काफी बढ़ेगा, क्योंकि क्लाउड का इस्तेमाल और स्ट्रीमिंग की खपत बढ़ रही है, हालांकि US अभी भी उसका सबसे बड़ा मार्केट बना हुआ है। US से अभी Amagi को लगभग 73 प्रतिशत रेवेन्यू मिलता है।

शेयर 3 महीनों में 50 प्रतिशत मजबूत

अमागी मीडिया लैब्स जनवरी 2026 में शेयर बाजारों में लिस्ट हुई थी। इसका IPO 1,788.62 करोड़ रुपये का था। कंपनी का मार्केट कैप 13100 करोड़ रुपये से ज्यादा है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 14.92 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। शेयर 6 महीनों में 45 प्रतिशत और 3 महीनों में 50 प्रतिशत चढ़ा है। शेयर का BSE पर 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 726 रुपये और एडजस्टेड लो 310.75 रुपये है।

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कंपनी की वित्तीय सेहत

अमागी मीडिया लैब्स का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 275.64 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 22.97 करोड़ रुपये रहा। वित्त वर्ष 2026 के दौरान कंपनी का स्टैंडअलोन रेवेन्यू 949.23 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। शुद्ध मुनाफा 26.45 करोड़ रुपये रहा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Weather Update: एमपी में भारी बारिश का दौर जारी, दिल्ली-UP में भी बरसेंगे बादल, इन राज्यों में 27 अगस्त तक होगी मूसलाधार बारिश

India Weather Update: उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश और उसके आसपास बने निम्न दबाव के क्षेत्र के असर से देश के कई हिस्सों में मानसून सुपर एक्टिव मोड में है और जबर्दस्त बारिश का दौर देखने को मिल रहा है। इस बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन के मुताबिक मध्य प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड समेत कई राज्यों में अगले कुछ दिनों तक झमाझम बारिश का दौर जारी रहेगा। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि पूर्वी मध्य प्रदेश और उड़ीसा जैसे राज्यों में बहुत भारी बारिश हो सकती है जबकि देश के अलग-अलग हिस्सों में 27 अगस्त तक मूसलाधार बारिश का सिलसिला बना रहेगा। बीते 24 घंटों के दौरान भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश, मिजोरम और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल में 12 से 20 सेमी तक भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की गई है।

मध्य भारत में बारिश का तांडव, मध्य प्रदेश में मूसलाधार का अलर्ट

मौसम प्रणालियों के सक्रिय होने से मध्य भारत में मानसूनी बारिश का असर सबसे अधिक देखने को मिल रहा है। उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश पर बना कम दबाव का क्षेत्र अब भी सक्रिय है। इसकी वजह से 21 और 22 अगस्त को पूर्वी मध्य प्रदेश में कुछ जगहों पर बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इसके अलावा पश्चिमी मध्य प्रदेश में 21 से 25 अगस्त के बीच, पूर्वी मध्य प्रदेश में 23 से 26 अगस्त तक और छत्तीसगढ़ में 21 से 27 अगस्त तक कई स्थानों पर भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। इस दौरान इन राज्यों में गरज-चमक और बिजली गिरने की भी आशंका बनी हुई है।

उत्तर-पश्चिम भारत में बदलेगा मौसम, दिल्ली-यूपी में बरसेंगे बादल

उत्तर-पश्चिम भारत में मानसून ट्रफ के सामान्य स्थिति के आसपास रहने और उत्तरी हरियाणा में एक चक्रवाती हवाओं के क्षेत्र के चलते दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश में मौसम में बड़ा बदलाव देखा जाएगा। दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ में 22 अगस्त को भारी बारिश के आसार हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 22 से 24 अगस्त के बीच व्यापक स्तर पर बारिश होगी। पहाड़ी राज्यों की बात करें तो उत्तराखंड में 21 से 27 अगस्त तक लगातार मूसलाधार बारिश, गरज-चमक और बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है। जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में भी 21 और 22 अगस्त को भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया गया है।

पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत का हाल, उड़ीसा और बंगाल में अलर्ट

उत्तरी बंगाल की खाड़ी, बांग्लादेश और दक्षिण गांगेय पश्चिम बंगाल के ऊपर बने ऊपरी हवा के चक्रवाती परिसंचरण की वजह से पूर्वी और उत्तर-पूर्वी राज्यों में बारिश की गतिविधियां तेज रहेंगी। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 21 से 26 अगस्त तक भारी बारिश की संभावना है। उड़ीसा में 24 से 27 अगस्त के बीच बेहद भारी बारिश हो सकती है। बिहार और झारखंड में भी 22 से 25 अगस्त के दौरान तेज बारिश का दौर जारी रहेगा। उत्तर-पूर्वी भारत के राज्यों जैसे असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 27 अगस्त तक रुक-रुक कर भारी बारिश होने का अनुमान है।

दक्षिण भारत में कम होगी बारिश की रफ्तार, तटीय इलाकों में तेज हवाएं

एक तरफ जहां उत्तर और मध्य भारत में झमाझम बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग ने दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में अगले एक सप्ताह के दौरान मानसूनी बारिश की गतिविधियां स्लो रहने का पूर्वानुमान दिया है। केरल, माहे और तटीय कर्नाटक में 21 से 27 अगस्त तक हल्की से मध्यम बारिश जारी रहेगी। केरल और तमिलनाडु में 23 से 25 अगस्त के दौरान कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा और कर्नाटक के इलाकों में 30 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज सतही हवाएं चलने की संभावना जताई गई है।

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वंदे मातरम् पर फिर घमासान: 150 साल पुराने गीत में आज का भारत क्या खोज रहा है?

वंदे मातरम् पर फिर घमासान: 150 साल पुराने गीत में आज का भारत क्या खोज रहा है?


बंकिमचंद्र की कविता से स्वतंत्रता संग्राम के उद्घोष तक और 2026 की सियासी बहस तक—‘वंदे मातरम्’ की पूरी कहानी, जिसमें इतिहास भी है, विवाद भी और भारत को समझने का एक बड़ा सवाल भी।

वंदे मातरम्। दो शब्द। डेढ़ सौ साल का इतिहास। और आज फिर एक राजनीतिक विवाद। सवाल सिर्फ गीत का नहीं है। सवाल उस भारत का है, जिसे हम इन दो शब्दों में देखते हैं।

गुलामी का दर्द, आजादी का सपना, स्वदेशी आंदोलन, क्रांतिकारियों का साहस, संविधान सभा की गरिमा और आज की राजनीति की गर्मी—सब कुछ ‘वंदे मातरम्’ के साथ चलता आया है।

150 साल बाद भी अगर ये दो शब्द बहस के केंद्र में हैं, तो यह उनकी कमजोरी नहीं, उनकी ताकत का प्रमाण है। लेकिन कहानी 1875 से थोड़ी पहले शुरू होती है।

जब धरती सिर्फ जमीन नहीं, मां थी

अथर्ववेद के पृथ्वी सूक्त की एक पंक्ति है—
माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः।”
पृथ्वी मेरी माता है और मैं पृथ्वी का पुत्र हूं।

इसे आधुनिक राष्ट्रवाद का प्राचीन प्रमाण मान लेना इतिहास के साथ ज्यादती होगी। उस समय आधुनिक अर्थों वाला राष्ट्र-राज्य था ही नहीं। लेकिन इतना जरूर है कि भारतीय सभ्यता में धरती को केवल जमीन नहीं, जीवन और मातृत्व से जोड़कर देखने का भाव बहुत पुराना है।

19वीं सदी में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने इसी सांस्कृतिक भावभूमि को औपनिवेशिक भारत की बेचैनी से जोड़ा और मातृभूमि को ‘मां’ की आवाज दी।

यहीं से ‘वंदे मातरम्’ की आधुनिक यात्रा शुरू होती है।

1875: कविता से राष्ट्रभावना तक

सरकारी अभिलेखों के अनुसार बंकिमचंद्र ने 7 नवंबर 1875 को ‘वंदे मातरम्’ की रचना की। बाद में इसे उनके उपन्यास आनंदमठ’ में शामिल किया गया।

‘वंदे मातरम्’ का अर्थ है—मां को नमन।

पहले दो अंतरों में यह मां कोई युद्धरत देवी नहीं, बल्कि जल, हरियाली, फसल और शीतल हवा से भरी मातृभूमि है। लेकिन गुलाम भारत में अपनी मातृभूमि को नमन करना सिर्फ कविता कैसे रह सकता था? उसमें राजनीति अपने आप आ गई।

1896 में रवींद्रनाथ ठाकुर ने इसे कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गाया। इसके बाद यह साहित्य के पन्नों से निकलकर राष्ट्रीय आंदोलन के मंच पर पहुंच गया।

फिर आया 1905।

1905: जब गीत नारा बन गया

बंगाल विभाजन के खिलाफ स्वदेशी आंदोलन शुरू हुआ। विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार, स्वदेशी का समर्थन, जुलूस, सभाएं और विरोध प्रदर्शन।
और हर जगह— वंदे मातरम्।
अब यह कविता नहीं थी।
यह सत्ता को चुनौती थी।

ब्रिटिश सरकार ने इसकी ताकत पहचानी और सार्वजनिक उपयोग को रोकने के प्रयास किए।
1906 में इसी नाम से Bande Mataram नाम का राष्ट्रवादी अंग्रेजी अखबार भी निकला, जिससे श्री अरविंद और बिपिन चंद्र पाल जैसे राष्ट्रवादी जुड़े।
एक गीत का नाम आंदोलन की पहचान बन चुका था।

लेकिन यहीं कहानी में एक जरूरी पेच आता है

‘वंदे मातरम्’ के पहले दो अंतरे मातृभूमि और प्रकृति का वर्णन करते हैं। लेकिन आगे के अंतरों में मातृभूमि को दुर्गा और अन्य हिंदू धार्मिक प्रतीकों से जोड़ा गया है।

यहीं सवाल उठा— क्या एक बहुधार्मिक देश का साझा राष्ट्रीय गीत धार्मिक प्रतीकों से जुड़ा हो सकता है?
यह आज की राजनीति का पैदा किया हुआ सवाल नहीं है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ही इस पर बहस हुई थी।
1937 में कांग्रेस के भीतर विचार के बाद राष्ट्रीय अवसरों के लिए पहले दो अंतरों को अपनाने की परंपरा बनी। कारण था—इनमें मातृभूमि और प्रकृति का वर्णन था, जबकि बाद के धार्मिक बिंबों को लेकर कुछ समुदायों की आपत्तियां थीं।

इसलिए आज इसे केवल गीत काट दिया गया” कहना इतिहास को बहुत सरल बना देना है।

लेकिन इसके उलट यह कहना भी सही नहीं कि मूल गीत में धार्मिक प्रतीक थे ही नहीं।

थे। बिल्कुल थे।

और शायद ‘वंदे मातरम्’ की सबसे बड़ी ऐतिहासिक सच्चाई यही जटिलता है।

आजादी की रात भी ‘वंदे मातरम्’ था

14 अगस्त 1947। देश आजादी की दहलीज पर था।
संविधान सभा की ऐतिहासिक बैठक शुरू हुई और सुचेता कृपलानी ने ‘वंदे मातरम्’ गाया।
जिस गीत ने अंग्रेजी सत्ता को चुनौती दी थी, वही आजाद भारत के जन्म का साक्षी बना।
15 अगस्त की सुबह पंडित ओंकारनाथ ठाकुर की आवाज में इसके प्रसारण ने इसे स्वतंत्र भारत की शुरुआती सांस्कृतिक स्मृतियों में दर्ज कर दिया।
इतिहास में इससे खूबसूरत दृश्य कम होंगे—
जिस गीत पर कभी रोक लगाई गई, वही आजाद भारत की पहली सुबह में गूंज रहा था।

1950: राष्ट्रीय गीत, लेकिन राष्ट्रीय गान नहीं

24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने घोषणा की कि ‘वंदे मातरम्’, जिसने स्वतंत्रता संघर्ष में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है, उसे जन गण मन’ के समान सम्मान और दर्जा दिया जाएगा।
इसलिए तथ्य बिल्कुल स्पष्ट है—

जन गण मन — राष्ट्रीय गान।
वंदे मातरम् — राष्ट्रीय गीत।

दोनों प्रतिद्वंद्वी नहीं हैं और एक दूसरे का विकल्प भी नहीं हैं। दोनों की ऐतिहासिक यात्राएं अलग हैं।
एक स्वतंत्र भारत की संवैधानिक पहचान का गान बना; दूसरा स्वतंत्रता संघर्ष की स्मृति और मातृभूमि के प्रति भावनात्मक समर्पण की आवाज रहा।

फिर 150 साल बाद विवाद क्यों?

2025-26 में देश ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ मना रहा है। इसी दौरान केंद्र ने सरकारी कार्यक्रमों के लिए राष्ट्रीय गीत के छह अंतरों वाले पूर्ण आधिकारिक संस्करण और उसके प्रस्तुतीकरण को लेकर नया प्रोटोकॉल जारी किया।

इसके बाद बहस तेज हुई—

पूरा गीत या पहले दो अंतरे?

भाजपा का तर्क है कि मूल रचना का पूरा सम्मान होना चाहिए।
कांग्रेस ने 1937 की परंपरा का हवाला देते हुए अपने कार्यक्रमों में पहले दो अंतरे जारी रखने का फैसला किया।
अब बहस सिर्फ गीत की नहीं रही।

राष्ट्रवाद, धर्म, तुष्टीकरण, इतिहास, कांग्रेस, भाजपा—सब एक साथ मैदान में हैं।
गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस के फैसले पर तीखा हमला किया और इसे तुष्टीकरण की राजनीति से जोड़ा। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी कांग्रेस पर इसी तरह के आरोप लगाए।

कांग्रेस का जवाब है—वह स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान स्वीकार की गई ऐतिहासिक परंपरा का पालन कर रही है।
लेकिन इस पूरी बहस में एक दिलचस्प विडंबना भी सामने आई।

20 अगस्त को भाजपा-शासित नागपुर नगर निगम की बैठक में भी केवल दो अंतरे गाए गए।
अब सवाल और दिलचस्प हो गया—

क्या यह विवाद इतिहास का है, प्रोटोकॉल का है या राजनीति का?

असल विवाद दो अंतरों का नहीं है

मेरी नजर में ‘वंदे मातरम्’ पर मौजूदा विवाद का असली सवाल यह नहीं है कि दो अंतरे गाए जाएं या छह।
बड़ा सवाल यह है—

राष्ट्रवाद की परिभाषा कौन तय करेगा?

एक पक्ष कहता है—मूल रचना का पूरा सम्मान होना चाहिए।
दूसरा कहता है—राष्ट्रीय प्रतीक ऐसा होना चाहिए जिसमें हर भारतीय अपने लिए जगह महसूस करे।
और इतिहास?

इतिहास दोनों से थोड़ा बड़ा है।
क्योंकि सच यह है—
वंदे मातरम् स्वतंत्रता आंदोलन का महान राष्ट्रवादी उद्घोष था।
उसके मूल पाठ में धार्मिक प्रतीक भी हैं।
1937 में पहले दो अंतरों को राष्ट्रीय उपयोग के लिए चुनने का ऐतिहासिक निर्णय भी हुआ था।
1950 में उसे राष्ट्रीय गीत का सम्मान भी मिला।
इनमें से किसी एक तथ्य को मिटाकर हम इतिहास नहीं लिख सकते।

भारत की खूबसूरती शायद इसी जटिलता में है

भारत ने 1950 में जन गण मन और वंदे मातरम्—दोनों को जगह दी।
क्योंकि राष्ट्र केवल भावनाओं से नहीं चलता।
और सिर्फ संविधान से भी नहीं।
राष्ट्र चलता है—
भावना और विवेक के बीच संतुलन से।
‘वंदे मातरम्’ हमें मातृभूमि से प्रेम करना सिखाता है। लेकिन लोकतांत्रिक भारत हमें यह भी सिखाता है कि मातृभूमि में सिर्फ हम नहीं रहते।
हमसे अलग सोचने वाला भी।
हमसे अलग पूजा करने वाला भी।
हमसे असहमत नागरिक भी।
वह भी उतना ही भारत है जितने हम हैं।

150 साल बाद ‘वंदे मातरम्’ का अर्थ क्या है?

1875 में यह मातृभूमि की कविता थी।
1905 में प्रतिरोध का नारा बनी।
1947 में आजादी की आवाज।
1950 में राष्ट्रीय गीत।
और 2026 में?
शायद यह हमसे एक और कठिन सवाल पूछ रही है।
क्या राष्ट्रप्रेम सिर्फ नारा है?
या जिम्मेदारी भी?
क्या मातृभूमि को प्रणाम करना केवल मंच पर ‘वंदे मातरम्’ कहना है?
या उसकी नदियों, जंगलों, हवा, लोकतंत्र और संस्थाओं की रक्षा करना भी?
क्या देशभक्ति का अर्थ केवल अपने जैसे लोगों से प्रेम करना है?
या अपने से अलग नागरिक के अधिकार और सम्मान की रक्षा करना भी?
यहीं ‘वंदे मातरम्’ एक पुराने गीत से निकलकर आज के भारत का सवाल बन जाता है।

मां को नमन करना आसान है

डेढ़ सौ साल पहले ‘वंदे मातरम्’ गुलाम भारत के लिए स्वाधीनता का सपना था।
आज स्वतंत्र भारत में वही दो शब्द शायद हमें स्वतंत्रता की जिम्मेदारी याद दिला सकते हैं।
क्योंकि मातृभूमि को नमन केवल उसके नाम का उद्घोष करना नहीं है।
मातृभूमि को नमन उसके लोकतंत्र, उसकी विविधता, उसकी गरिमा और उसके हर नागरिक के सम्मान की रक्षा करना भी है।

आखिर—
मां को नमन करना आसान है।

मां के हर बच्चे को अपना मानना—शायद कहीं अधिक कठिन।

और अगर ‘वंदे मातरम्’ हमें यह कठिन काम सिखा दे, तो 150 साल बाद भी इसकी प्रासंगिकता बनी रहेगी।
क्योंकि 150 साल बाद भी ‘वंदे मातरम्’ हमसे यही पूछता है—जिस भारत को हम मां कहते हैं, उसके लिए हम कर क्या रहे हैं?
वंदे मातरम्।

RBI के अनुमान को भी पीछे छोड़ सकती है भारत की GDP ग्रोथ, डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने दिए ये बड़े संकेत

आरबीआई की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने गुरुवार को कहा कि मार्च में खत्म होने वाले फाइनेंशियल ईयर में भारत की ग्रोथ रेट 7% के करीब रह सकती है,जो सेंट्रल बैंक के 6.7% के अनुमान से बेहतर है। इस रफ्तार के साथ भारत दुनिया की सबसे तेजी से ग्रोथ करने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहेगा। फाइनेंशियल एक्सप्रेस में आई अखबार के आधार पर ब्लूमबर्ग ने बताया कि चेन्नई में मद्रास स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में एक कार्यक्रम में बोलते हुए पूनम गुप्ता ने कहा कि उनका यह अनुमान अप्रैल-जून तिमाही के मजबूत रहने की उम्मीदों पर आधारित है। इस अवधि के आधिकारिक आंकड़े इस महीने के आखिर में आने वाले हैं। अर्थशास्त्रियों का अनुमान आम तौर पर 6.9% से 8% के बीच है। इसका मतलब है कि पूरे साल की ग्रोथ रेट काफी ज़्यादा,यानी 7% के करीब रह सकती है।

तमाम चुनौतियों के बावजूद कायम रही रफ्तार

इकोनॉमी की तेज रफ्तार से पता चलता है कि कमजोर मॉनसून और एनर्जी की बढ़ी लागत जैसे झटकों के बावजूद अर्थव्यवस्था में मजबूती बनी हुई है। इससे यह भी पता चलता है कि गुप्ता का रुख हाल ही में काफी सख्त क्यों हो गया है। इस हफ्ते जारी RBI की अगस्त पॉलिसी मीटिंग के मिनट्स से पता चला कि गुप्ता ने इस साल के आखिर में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना जताई थी।

पूनम गुप्ता ने कहा “इन झटकों के बावजूद,आगे के लिए मैं कहूंगी कि 7.5% ग्रोथ तो तय है और हमें इससे बेहतर करने की कोशिश करनी चाहिए।”

बाहरी खातों को लेकर भी जताया भरोसा 

पूनम गुप्ता ने भारत के बाहरी खातों (external accounts) को लेकर भी भरोसा जताया और कहा कि आगे स्थिति काफी बेहतर होगी। अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि पहले घाटे के अनुमान के बावजूद,इस फाइनेंशियल ईयर में देश का बैलेंस ऑफ पेमेंट पॉजिटिव हो जाएगा। इसकी मुख्य वजह विदेशी मुद्रा में गिरावट को रोकने के उपायों के बाद 80 अरब डॉलर तक विदेशी फंड आने की उम्मीद है। इन उपायों में विदेशी मुद्रा डिपॉजिट को आकर्षित करने के लिए खास इंसेंटिव भी शामिल हैं।

भारत को एक विकसित देश बनाने के लिए 8% से ज्यादा की ग्रोथ रेट की जरूरत 

पूनम गुप्ता का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारतीय अधिकारी देश की अर्थव्यवस्था को लेकर ज्यादा उम्मीदें जता रहे हैं,क्योंकि ईरान युद्ध के चलते जितने बुरे हालात का डर था,वे सच साबित नहीं हुए। मजबूत ग्रोथ को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले हफ्ते 2047 तक भारत को एक विकसित देश बनाने के अपने लक्ष्य को फिर से दोहराया। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हमें कम से कम दो दशकों तक लगातार 8% से ज्यादा की ग्रोथ रेट की जरूरत हो सकती है।

 

 

Monetary Policy : अगर महंगाई ऊंचे स्तर पर रही तो RBI ब्याज दरों में कर सकता है बढ़ोतरी – MPC मेंबर

चाइनामैन स्पिनर कुलदीप यादव हो सकते हैं कोलंबो टेस्ट से बाहर

पिछले साल कुलदीप यादव इंग्लैंड के दौरे पर पांचो मैच में बैंच पर बैठे थे इसके बाद उनको वेस्टइंडीज के खिलाफ मौका मिना जो उन्होंने भुनाया। घरेलू जमीन पर दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भी उनका प्रदर्शन औसत से ऊपर ही था। लेकिन करीब एक साल बाद लाल गेंद की क्रिकेट में उनकी वापसी वैसी नहीं हुई है जैसे कि होनी चाहिए थी। इस कारण उनका 23 अगस्त से शुरु हो रहे कोलंबो टेस्ट से ड्रॉप होना लगभग तय है।

गॉल स्टेडियम में पांचवें दिन की पिच स्पिन गेंदबाजी के लिए अच्छी थी और कुलदीप यादव इसका फायदा उठा सकते थे। लेकिन उन्होंने 11 ओवर में 38 रन देकर एक भी विकेट नहीं लिया।इससे साफ दिखा कि भारतीय कप्तान शुभमन गिल की नजर में कुलदीप तीसरे स्पिन गेंदबाज थे। उनसे पहले रविंद्र जडेजा और मानव सुथार ने गेंदबाजी की। दोनों ने मिलकर 46.4 ओवर किए और 14 विकेट लिए।

कुलदीप के खराब प्रदर्शन के लिए कप्तान या टीम प्रबंधन को दोष देना आसान है कि उन्होंने इस गेंदबाज पर पर्याप्त भरोसा नहीं दिखाया। कुलदीप को मिले 11 ओवरों में भी वह ऐसा प्रदर्शन नहीं कर पाए जिससे उन्हें ज्यादा गेंदबाजी दी जाती।पहली पारी में भी कुलदीप को अपना एकमात्र विकेट कमिंदु मेंडिस का मिला जिसमें शुभमन गिल के शानदार कैच का बड़ा योगदान था।

श्रीलंका के खिलाफ खेले गए अभ्यास मैच में भी वह बेअसर ही थे। उन्होंने पहली पारी में श्रीलंका एकादश के खिलाफ 18 ओवर में 76 रन देकर सिर्फ 2 विकेट ही लिए थे। उनके इस प्रदर्शन से कप्तान केएल राहुल ने उनको दूसरी पारी के लिए गेंद ही नहीं थमाई। हालांकि इसकी आलोचना हुई लेकिन राहुल अपनी जगह पर सही भी थे।

क्यों नहीं मिल रहे कुलदीप को विकेट

एक विचार यह भी है कि कुलदीप को हवा में गेंद की गति थोड़ी तेज रखनी चाहिए, ताकि पिच से उन्हें अधिक मदद मिल सके। वह आम तौर पर 82-85 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी करते हैं और कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश के इस गेंदबाज को ‘स्पीडोमीटर’ पर कुछ पायदान ऊपर जाते हुए 90 किमी प्रति घंटे के आसपास पहुंचना चाहिए।

9 साल में कुलदीप ने खेले हैं सिर्फ 19 टेस्ट मैच

कुलदीप के लिए यह चिंता की बात इस कारण भी है क्योंकि बीते 9 सालों में वह सिर्फ 19 टेस्ट खेल पाए हैं। कुलदीप ने 2017 में धर्मशाला पर पदार्पण किया था। उन्होंने यही पर 2024 में इंग्लैंड के खिलाफ पांचवें और अंतिम टेस्ट के पहले दिन कुलदीप ने शीर्ष क्रम के पांच खिलाड़ियों को आउट किया और मैन ऑफ द मैच का पुरुस्कार पाया। कुलदीप ने इस श्रृंखला में 19 विकेट झटके।यह ही एकमात्र ऐसी सीरीज रही जिसमें उन्होंने 4 मैच लगातार खेले। बीते कुछ वर्षों में टेस्ट में मौके कम मिले थे, फिर उनकी फॉर्म में गिरावट आयी और घुटने की सर्जरी भी हुई। इसके बाद कुलदीप ने फॉर्म में आने के लिए कुछ तकनीकी बदलाव भी किया।

Top Stock Picks : निफ्टी कंपनियों के साथ ग्रोथ की दिक्कत, दीपन मेहता से जाने अब कहां नजर आ रहे कमाई के मौके

Top Stock Picks :मार्केट में इस समय इंडेक्स में पैसा बनना बंद हो गया है। स्टॉक स्पेसिफिक अच्छे मौके बन रहे हैं। लेकिन इंडेक्स तकलीफ में हैं। ऐसे में मार्केट आउटलुक पर चर्चा करते हुए एलिक्सिर इक्विटीज (Elixir Equities) के डायरेक्टर दीपन मेहता ने कहा कि अगर आपको स्टॉक प्राइस में रिटर्न्स चाहिए तो तीन चीजें खोजनी चाहिए और वो तीनों की चीजें हैं सिर्फ ग्रोथ। अब निफ्टी स्टक्स में ग्रोथ नहीं है। आप सॉफ्टवेयर सर्विज देख लीजिए, बैंक्स देख लीजिए या फिर आप सीमेंट कंपनीज देख लीजिए, कहीं पर भी ग्रोथ नहीं है। जहां ग्रोथ नहीं हैं वहां पर पैसा नहीं आएगा। इस समय लोकल इन्वेस्टर्स और एफआईआई का जितना भी पैसा है वह सिर्फ स्मॉल और मिड कैप स्टॉक, आईपीओ और प्राइवेट इक्विटी में जा रहा है। प्रॉब्लम निफ्टी के साथ है और यह स्ट्रक्चरल प्रॉब्लम है, निफ्टी में ग्रोथ नहीं है।

ऐसे में जब तक छोटी-छोटी कंपनियां बड़ी होकर निफ्टी में नहीं आएगी तब तक हमें बाजार में हिस्टोरिकल रिटर्न की तुलना में साइडवेज मूवमेंट या लो रिटर्न्स ही देखने को मिलेंगे। इन बातों को ध्यान में रखते हुए अगर आपको अगले कई सालों तक अपना पोर्टफोलियो बनाना है तो आपको मिड और स्मॉल कैप की अच्छी कंपनियों पर ही फोकस करना होगा। वहीं पर आपको अच्छे रिटर्न मिल सकते हैं। निफ्टी की कंपनियां काफी बड़ी और मैच्योर हो चुकी हैं, अब इनमें बहुत बड़ी ग्रोथ की उम्मीद नहीं है। हमें अब ग्रोथ के लिए क्वालिटी छोटी-मझोली कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि जहां ग्रोथ होगी वहीं पैसा बनेगा और इस समय डिफेंस, इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट, रेलवे स्टक्स, प्लेटफार्म कंपनियों, प्रिसीजन मैन्युफैक्चरिंग, डेटा सेंटर और एआई रिलेटेड कंपनियों में ग्रोथ नजर आ रही है। हमें इन पर फोकस करिए। इस समय बाजार में बहुत सारी माइक्रो इन्वेस्टमेंट थीम्स हैं। एक ही इन्वेस्टमेंट थीम या एक इंडस्ट्री या एक ही ग्रुप में पैसा लगानें से बचें। आपके लिए बहुत सारी माइक्रो इन्वेस्टमेंट थीम में इन्वेस्ट करना जरूरी है। इससे थोड़ी कॉम्प्लेक्सिटी तो आ जाती है लेकिन पोर्टफोलियो में डाइवर्सिफिकेशन भी हो जाता है।

न्यू एज कंपनियों पर बात करते हुए दीपन मेहता ने कहा कि इन पर बहुत गहराई से रिसर्च करने की जरूरत है। इनको ट्रैक करना चाहिए क्योंकि ग्रोथ यहीं पर आ रही है। इनमें से कुछ कंपनियां घाटे में हैं। लेकिन जब ये मुनाफे में आएंगी तो उसके अगले 2-3 साल में इनके मुनाफे में सॉलिड ग्रोथ देखने को मिलेगा,क्योंकि उनकी ऑपरेटिंग लेवेज बहुत ही बढ़िया है। दीपन मेहता ने बताया कि पेटीएम और इटरनल में उनका निवेश है। इसके अलावा उनको इस सेगमेंट में फिजिक्स वाला,लेंस स्टार्ट और मीशो भी अच्छे लग रहे हैं। उनकी इन शेयरों को ट्रैक करने और इनमें बॉस्केट बना कर निवेश करने की सलाह है। उनका कहना है कि अगर इनमें दो-तीन मल्टीबैगर बन गए और बाकी 2-3 अगर अच्छा रिटर्न नहीं देते हैं तो भी बास्केट के रिटर्न काफी बढ़िया आ सकते हैं। इन कंपनियों में आपको कापी लॉन्ग टर्म नजरिए से निवेश करना चाहिए अगले कुछ दशक में इनमें से कुछ कंपनियां कमाल कर सकती हैं।

डिफेंस शेयरों पर बात करते हुए दीपन मेहता ने कहा कि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स और भारत इलेक्टॉनिक्स तो उनकी कोर होल्डिंग में शामिल हैं, इसके अलावा ड्रोन बनाने वाली कंपनी आइडिया फोर्ज भी उनके पोर्टफोलियो में है। इस सेक्टर की एक और कंपनी पारस डिफेंस पर भी उनकी करीबी से नजर बनी हुई है। इस कंपनी की खास बात ये है कि जितने भी ड्रोन बनते हैं वहां पर इस कंपनी के कैमरे लगते हैं। इस समय यही तीन-चार कंपनियां अच्छी दिख रही हैं। लेकिन कुल मिला कर देखें तो इस समय डिफेंस स्पेस थोड़ महंगा दिख रहा है। हमें इस स्पेस में सही समय के लिए थोड़ा रुकना चाहिए।

शुगर शेयरों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह सेक्टर बहुत साइक्लिकल है। लेकिन अब लग रहा है कि अगले दो तीन क्वार्टर इसके लिए बहुत ही बढ़िया रहेंगे क्योंकि क्लाइमेटिक फैक्टर्स के कारण ब्राजील में आउटपुट कम हो गया है और यहां पर भी ज्यादातर डिप्लॉयमेंट एथेनॉल की ओर जा रही। ऐसे में अगले कुछ क्वार्टर्स इन कंपनियों के लिए बहुत ही अच्छे रहेंगे और अच्छे रिटर्न मिल सकते है। इन कंपनियों में इस समय एक बहुत ही शानदार ट्रेडिंग ओपोरर्चुनिटी दिख रही है।

दीपन मेहता को फार्मा,हेल्थकेयर और डायग्नोस्टिक में भी निवेश के मौके नजर आ रहे है। उनका मानना है कि अपोलो हॉस्पिटल में एक बहुत ही बढ़िया स्प्लिट होने वाला है जिसकी वजह से वैल्यू अनलॉक हो सकती है। इसके नतीजे भी काफी अच्छे आए हैं। यह स्टॉक लॉन्ग टर्म ग्रोथ के नजरिए से काफी बढ़िया दिख रहा है। कैंसर के इलाज के जानी जाने वाली हेल्थ केयर ग्लोबल भी अच्छी कंपनी है। इस पर नजर रहनी चाहिए। डॉक्टर अग्रवाल जिसका मर्जर हो रहा है, थोड़ा महंगा है अभी लेकिन इसके भी पोटेंशियल बहुत ही बढ़िया लगते हैं।

 

Market Insight : शुगर शेयरों में अभी भी गिरावट पर खरीदारी के मौके, दिवाली के आसपास करें मुनाफावसूली

 

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17 पेनल्टी कॉर्नर और एक भी गोल नहीं, रोमांचक रहा भारत-इंग्लैंड का ड्रॉ मैच

Savita Punia

नीदरलैंड के एमस्टेलवीन में खेले गए FIH महिला हॉकी विश्व कप 2026 के पूल डी के अपने आखिरी मैच में, भारतीय टीम ने इंग्लैंड के हमलों को रोकने के लिए ज़बरदस्त बचाव किया और मैच 0-0 से ड्रॉ कराया।हॉकी विश्व कप के दूसरे दौर में जगह पक्की करने के लिए भारत को हार से बचना था। उन्होंने काफ़ी संघर्ष के बाद यह काम कर दिखाया। शुअर्ड मरिने की टीम ने दुनिया की नंबर 4 और ओलंपिक सिल्वर मेडलिस्ट चीन के साथ मैच 2-2 से ड्रॉ कराया था और उसके बाद दक्षिण अफ़्रीका को 6-1 से बुरी तरह हराया था।

दिलचस्प बात यह रही कि पूरे मैच में 17 पेनल्टी कॉरनर हुए जिसमें इंग्लैंड को 11 बार और भारत को 6 बार गोल करने का मौका मिला लेकिन दोनों टीमों में से एक भी टीम इसे भुना नहीं पाई।भारत ने पहले हाफ में दबदबा बनाते हुए कई मौके बनाए और पेनल्टी कॉर्नर हासिल किए लेकिन ब्रेक के बाद टीम अपनी लय बरकरार नहीं रख सकी। इंग्लैंड ने दबाव बढ़ाते हुए 11 पेनल्टी कॉर्नर हासिल किए लेकिन सविता पूनिया और बिछू देवी ने मजबूती से डटकर गोल नहीं होने दिया।

गोलकीपर सविता और बिच्छू की बदौलत मजबूत हुई रक्षण पंक्ति

सविता ने इस मुकाबले को ‘नॉकआउट मैच’ बताते हुए कहा कि भारत का रक्षात्मक प्रदर्शन अपने सर्वश्रेष्ठ स्तर पर था।इस विश्व कप में 300 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाली सबसे अनुभवी महिला खिलाड़ी सविता ने कहा, ‘‘हमें पहले से पता था कि यह कठिन मुकाबला होगा। हमने पहले हाफ में दबदबा बनाया और कई पेनल्टी कॉर्नर हासिल किए। हमें आक्रामक हॉकी जारी रखनी होगी और इन मौकों को गोल में बदलना होगा। हमारे लिए यह नॉकआउट मैच जैसा था और दबाव था, लेकिन एक टीम के रूप में हमने अच्छा खेला।’’उन्होंने कहा, ‘‘आज हमारा डिफेंस अपने सर्वश्रेष्ठ स्तर पर था।’’

सविता ने बिछू की विशेष रूप से तारीफ की जिन्होंने इंग्लैंड द्वारा विजयी गोल की तलाश में अपना गोलकीपर हटाने के बाद अंतिम 30 सेकेंड में महत्वपूर्ण बचाव किया।उन्होंने कहा, ‘‘आखिरी 30 सेकेंड में बिछू का बचाव मेरे देखे सर्वश्रेष्ठ बचावों में से एक था। मैंने उसे कई बार गले लगाया है। हम एक-दूसरे की ताकत हैं।’’

बिछू ने कहा कि इंग्लैंड के गोलकीपर को हटाने के बाद वह उसके आखिरी हमले के लिए तैयार थीं।उन्होंने कहा, ‘‘जब उन्होंने आखिरी मिनटों में गोलकीपर को हटा दिया तो मुझे लगा कि वे पूरी तरह से दबाव बनाएंगे। मैं इसके लिए तैयार थी और सिर्फ गेंद पर नजर रख रही थी। मैं डिफेंस के प्रदर्शन से बहुत खुश हूं।’’

सविता ने कहा कि एक सीनियर खिलाड़ी के तौर पर उनकी भूमिका युवा खिलाड़ियों को विश्व कप के दबाव से निपटने में मदद करना भी है।उन्होंने कहा, ‘‘मैं उनसे कहती रहती हूं कि आपसे गलतियां होंगी, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है कि आप अच्छी तरह वापसी करें। एक मेंटर और वरिष्ठ खिलाड़ी के तौर पर मैं हमेशा उन्हें सहज महसूस कराने की कोशिश करती हूं। मैं उनके प्रदर्शन से बहुत खुश हूं।’’


वंदे मातरम पर राष्ट्रवाद की सियासत!, किसका फायदा, किसका नुकसान?

वंदे मातरम पर राष्ट्रवाद की सियासत!, किसका फायदा, किसका नुकसान?

भारतीय जनता पार्टी के वंदे मातरम पर देश में सियासी घमासान मचा हुआ है। कांग्रेस के वंदे मातरम के केवल एक अंतरे (दो पद) को पार्टी के कार्यक्रमों के गाने के फैसले को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के तीखे हमले के बाद इस पर सियासी बयानबाजी थमने का नाम नहीं ले  रही है। कांग्रेस ने वंदे मातरम को लेकर यह फ़ैसला ऐसे समय किया जब स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में भाजपा ने सोनिया गांधी पर वंदे मातरम का अपमान करने का आरोप लगाया था। 
 
कांग्रेस वर्किंग कमेटी में वंदे मातरम के गाने के फैसले पर गृहमंत्री अमित शाह की आपत्ति पर  कांग्रेस ने भाजपा पर पलटवार करते हुए दिखावटी राष्ट्रवाद का आरोप लगाया। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह जनता से जुड़े मुद्दों पर अपनी नाकामियों से ध्यान भटकाने के लिए वंदे मातरम के मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहे है।
 
वंदे मातरम पर विवाद की शुरुआत कैसे?- वंदे मातरम पर नए विवाद पर स्वतंत्रता दिवस पर नई दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में हुए कार्यक्रम मे वंदे मातरम के गायन के दौरान सोनिया गांधी के व्यवहार को लेकर हुई। भाजपा ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी ने वंदे मातरम को बीच में रोकने की कोशिश की। इसके बाद बुधवार को हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में पार्टी के नेताओं ने वंदे मातरम के गायन का मुद्दा उठाया था।
 
बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए पार्टी के कार्यक्रमों में वंदे मातरम के दो पद गाने की बात कही। इसके लिए खरगे ने  28 अक्टूबर 1937 को कांग्रेस कार्यसमिति की ओर से पारित प्रस्ताव का हवाला दिया।
 
दरअसल 1937 में कोलकाता मे हुई कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में वंदेमातम को लेकर चर्चा हुई और एक प्रस्ताव तैयार किया गया। इस प्रस्ताव को तैयार करने में जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, मौलाना अबुल कलाम आजाद, गोविंद बल्लभ पंत और आचार्य नरेंद्र देव जैसे नेताओं की भूमिका थी। यह प्रस्ताव गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर तैयार किया गया था।
 
25 जनवरी 1950 को संविधान सभा की आखिरी बैठक में संविधान सभा के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद ने घोषणा की थी कि ‘जन गण मन’ देश का राष्ट्रगान और ‘वंदे मातरम’ राष्ट्रीय गीत होगा। उन्होंने कहा कि ‘जन गण मन’ में भी पांच में से केवल एक अंतरे को राष्ट्रगान के तौर पर अपनाया गया है।
 
अमित शाह ने कांग्रेस की तुष्टिकरण की सियासत से जोड़ा- कांग्रेस कार्यसमिति में वंदेमातरम पर हुए इस फैसले को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कांग्रेस की तुष्टिकरण की सियासत से जोड़ दिया। मीडिया एजेंसी से चर्चा करते हुए अमित शाह ने कहा कि “कांग्रेस पार्टी की कार्यसमिति ने एक आश्चर्यजनक और देशविरोधी फैसला लिया है। उन्होंने अपनी पार्टी के 1937 के रिजोल्यूशन को फॉलो करते हुए महान वंदे मातरम् गीत के दो ही छंद गाने का फैसला लिया है”।
 
अमित शाह ने आगे कहा कि “मैं पूरे देश को याद दिलाना चाहता हूं, 1937 में कांग्रेस पार्टी ने मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए वंदे मातरम् के दो टुकड़े कर देश के विभाजन की नींव डाली थी और वहीं से द्वि-राष्ट्र सिद्धांत को ताकत मिली थी। अंततोगत्वा देश का विभाजन हुआ और पाकिस्तान का जन्म हुआ। आज जब उस ऐतिहासिक गलती को वंदे मातरम् गीत के प्राकट्य के 150वें साल में सुधार कर बंकिम बाबू की इस अमर कृति को पूरा गीत गाकर राष्ट्रीय एकात्मता को सुदृढ़ करने का प्रयास किया गया है, और सभी सरकारी कार्यक्रमों में इसे पूर्ण रूप से गाने का निर्णय किया गया है और इस निर्णय को कानूनी जामा भी पहनाया गया है। इसी की अवहेलना करने का निर्णय कांग्रेस ने कल किया है”।

अमित शाह ने आगे कहा कि “कांग्रेस का यह निर्णय केवल और केवल इनकी घोर तुष्टिकरण की नीति की पुष्टि करता है। वोट बैंक के लिए इन्होंने न सिर्फ बंकिम बाबू की इस अमर कृति का अपमान किया, बल्कि उन लाखों शहीदों का भी अपमान किया, जो वंदे मातरम् का नारा लगाते हुए देश की आजादी के लिए फांसी पर चढ़ गए।  आज कांग्रेस पार्टी 1937 के अपनी पार्टी के रिजोल्यूशन को मान रही है और पार्लियामेंट के एक्ट को नकार रही है। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी फिर एक बार तुष्टिकरण की राजनीति को पुरजोर तरीके से आगे बढ़ा रही है”।
 
वहीं केंद्रीय शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस के खिलाफ तीखा राजनीतिक प्रहार करते हुए कहा कि वंदे मातरम को अधूरा गाने का फैसला देश की भावना और राष्ट्रगीत का अपमान है। उन्होंने कहा  कि यह किसी पार्टी का नहीं बल्कि भारत माता के सम्मान का प्रश्न है। शिवराज सिंह ने कहा कि जो गीत स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणा रहा, उसे पूरा गाना हर भारतीय का कर्तव्य है। उन्होंने कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि कुछ दल देश की एकता और संस्कृति से जुड़े प्रतीकों को भी राजनीतिक लाभ के लिए तोड़-मरोड़ देते हैं।
 
कांग्रेस का भाजपा पर पलटवार-भाजपा के वंदे मातरम के मुद्दें को राजनीतिक तूल देने पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा ने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय और रवींद्रनाथ टैगोर को लेकर एक अलग राजनीतिक नैरेटिव बनाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि यह मुद्दे का राजनीतिकरण है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके जरिए जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दों और सरकार की कथित नाकामियों से ध्यान भटकाने की कोशिश हो रही है, जिसमें छात्रों से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं।
 
कांग्रेस के कानूनी प्रकोष्ठ के प्रमुख और राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने इस पूरे विवाद में कानूनी पहलू सामने रखा है। कानून को उसकी मौजूदा स्थिति के हिसाब से देखा जाना चाहिए। उन्होंने सार्वजनिक और निजी कार्यक्रमों के बीच अंतर बताया। सिंघवी के मुताबिक मौजूदा कानून सरकारी आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के गायन से जुड़ी बात करता है। पार्टी के आंतरिक कार्यक्रमों के बारे में उसमें वैसी स्पष्ट व्यवस्था नहीं है। यही तर्क कांग्रेस के उस फैसले को समझने की कोशिश में अहम हो जाता है, जिस पर अब पार्टी के भीतर ही अलग-अलग राय सामने आ रही है।

Elon Musk Starlink Update: क्या भारत के गांवों में पहुंचेगा एलन मस्क का सुपरफास्ट इंटरनेट? अरबपति कारोबारी ने नए लाइसेंस आवेदन के साथ किया बड़ा ऐलान

Elon Musk Starlink Update: स्पेस एक्सप्लोरेशन और सैटेलाइट कनेक्टिविटी क्षेत्र की ग्लोबल कंपनी स्पेसएक्स के संस्थापक अरबपति कारोबारी एलन मस्क ने भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक को लेकर एक बार फिर बड़ा बयान दिया है। एलन मस्क ने कहा है कि स्टारलिंक की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा भारत के उन क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को बूस्ट कर सकती है जहां इंटरनेट की पहुंच लिमिटेड है। मस्क यहां पर खासकर भारत के गांवों तक सुपरफास्ट इंटरनेट पहुंचाने की बात करते नजर आ रहे हैं।

मस्क का ये कमेंट ऐसे समय में आया है जब तमाम रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि स्टारलिंक ने भारत में सैटेलाइट कम्यूनिकेशन सर्विस देने के लिए एक रीअप्लाई किया है।

एलन मस्क ने सोशल मीडिया पर क्या कहा?

एलन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट का जवाब देते हुए लिखा कि स्टारलिंक भारत में सबसे कम सेवा पाने वाले लोगों, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की मदद करेगा। असल में मस्क एक्स हैंडल DogeDesigner की एक पोस्ट पर अपना रिएक्शन दे रहे थे। इस पोस्ट में भारत के दूरदराज के गांवों को जोड़ने के लिए स्टारलिंक की सर्विस की मदद लेने की वकालत की गई थी।

इस सोशल मीडिया पोस्ट में कथित तौर पर भारत के टेलीकॉम और इंटरनेट कनेक्टिविटी के आंकड़ों का हवाला देते हुए ग्रामीण और शहरी इलाकों के बीच भारी अंतर को दिखाया गया है। पोस्ट के आंकड़ों के मुताबिक मई 2026 तक भारत के 11256 गांवों में अब भी 4G नेटवर्क की कवरेज नहीं थी। इसी तरह मार्च 2026 तक भारत में कुल 1.093 अरब इंटरनेट सब्सक्रिप्शन थे लेकिन इनमें से सिर्फ 44.087 करोड़ सब्सक्रिप्शन ही ग्रामीण इलाकों के थे। ग्रामीण भारत में इंटरनेट सब्सक्रिप्शन डेंसिटी प्रति 100 लोगों पर सिर्फ 48.31 थी, जबकि शहरी भारत में यह आंकड़ा प्रति 100 लोगों पर 126.80 था।

नए सिरे से लाइसेंस के लिए आवेदन

मस्क का यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब रिपोर्टों के अनुसार स्टारलिंक ने भारत में सैटेलाइट कम्यूनिकेशन सेवाएं प्रदान करने के लिए एक नया आवेदन जमा किया है। इससे पहले कंपनी को इस मामले में झटका भी लग चुका है। भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र ने इससे पहले स्टारलिंक के जेन 2 सैटेलाइट नेटवर्क के आवेदन को खारिज कर दिया था। रेग्युलेटरी अथॉरिटी ने पाया था कि इसके कुछ फीचर्स और जिन रेडियो फ्रीक्वेंसी का यह इस्तेमाल करना चाहते हैं, वे भारत की जरूरतों के हिसाब से नहीं हैं। आपको बता दें कि स्टारलिंक के इस जेन 2 सिस्टम में डायरेक्ट-टू-डिवाइस कनेक्टिविटी की क्षमता भी होती है।

भारत में मंजूरी की कोशिशें जारी

एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स द्वारा संचालित स्टारलिंक पृथ्वी की निचली कक्षा में मौजूद सैटेलाइट्स के ग्रुप्स की मदद से इंटरनेट सर्विस देती है। कंपनी भारत में अपना कमर्शियल ऑपरेशन शुरू करने के लिए लंबे समय से जरूरी रेग्युलेटरी क्लियरेंस लेने के लिए कोशिश कर रही है।

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लक्ष्य के बाद सिंधु और आयुष समेत 3 भारतीय दिग्गज World Championship में हारकर बाहर

पी वी सिंधु और आयुष शेट्टी वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप के चौथे दिन गुरूवार को राउंड ऑफ़ 16 से बाहर हो गए, जबकि ध्रुव कपिला और तनीषा क्रास्टो भी मिक्स्ड डबल्स से बाहर हो गए। गौरतलब है कि बुधवार को लक्ष्य सेन 92 रैंक के अमेरिकी खिलाड़ी  जी टैन से 21-19, 19-21, 17-21 से हारकर बाहर हो गए थे।

दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में चौथे दिन भारत को पुरुष और महिला सिंगल्स, दोनों में हार का सामना करना पड़ा। आयुष शेट्टी का वर्ल्ड चैंपियनशिप का सफ़र प्री-क्वार्टर फ़ाइनल में खत्म हो गया, जब इंडोनेशिया के अल्वी फरहान ने उन्हें 21-19, 21-11 से हराया। सिंधु भी राउंड ऑफ़ 16 से बाहर हो गईं; वे चीन की वांग झी यी से कड़े मुकाबले में 11-21, 21-15, 17-21 से हार गईं। वांग झी यी ने क्रैम्प्स (मांसपेशियों में ऐंठन) के बावजूद क्वार्टर फ़ाइनल में जगह बनाई।

दिल्ली में घरेलू दर्शकों के लिए यह दिन निराशाजनक रहा, क्योंकि पीवी सिंधु भी चीन की वांग झी यी से ‘राउंड ऑफ़ 16’ के 88 मिनट चले मुकाबले में हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गईं। पांच बार की वर्ल्ड चैंपियनशिप मेडलिस्ट सिंधु ने कड़ी टक्कर दी, लेकिन 11-21, 21-15, 17-21 से हार गईं; वहीं वांग ने क्रैम्प्स (मांसपेशियों में ऐंठन) के बावजूद जीत हासिल कर क्वार्टर-फ़ाइनल में अपनी जगह पक्की की। इस हार के साथ ही वर्ल्ड चैंपियनशिप में चीनी खिलाड़ियों के खिलाफ सिंधु का 8-0 का शानदार रिकॉर्ड भी टूट गया।

Treesa Jolly Gayatri Gopichand

सिर्फ महिला और पुरुष जोड़ी पहुंची क्वार्टरफाइनल में

महिला डबल्स में घरेलू टीम के लिए खुशी की बात रही, क्योंकि ट्रेसा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने जापान की सातवीं वरीयता प्राप्त जोड़ी रिन इवानागा और की नाकानिशी को 21-16, 21-12 से हराकर क्वार्टर फ़ाइनल में प्रवेश किया।इसके अलावा सात्विक सांइराज रंकी रेड्डी और चिराग शेट्टी ने मलेशियाई जोड़ी से पहला सेट 21-23 से हारने के बाद दूसरे सेट को 21-19 और तीसरे सेट को 21 -17 से जीतकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई।