क्या शेयर बाजार में तूफानी तेजी आने वाली है? JPMorgan ने दिया Nifty को 27000 का टारगेट, बुल केस और बीयर केस में ये है अनुमान

ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेपी मॉर्गन की हालिया इंडिया स्ट्रैटेजी रिपोर्ट में निफ्टी के लिए 27,000 का बेस-केस टारगेट बरकरार रखा गया है। ब्रोकरेज का कहना है के बेहतर होते अर्निंग आउटलुक और घरेलू मांग में मजबूती को वजह से निफ्टी को सपोर्ट मिलेगा। जेपी मॉर्गन को उम्मीद है कि साल 2026 में MSCI इंडिया की अर्निंग्स 11 फीसदी और साल 2027 में 13 फीसदी बढ़त देखने को मिल सकती है। इसका निफ्टी के लिए’बुल-केस’टारगेट 30,000 के लेवल का है। जबकि ‘बेयर-केस’टारगेट 20,500 के लेवल का है।

ANI के मुताबिक जेपी मॉर्गन ने कहा है कि उसका झुकाव मुख्य रूप से तेज ग्रोथ वाले घरेलू साइक्लिकल शेयरों की ओर है। निफ्टी-50 के लिए जेपी मॉर्गन के बेस/बुल/बेयर केस टारगेट 27,000/30,000/20,500 के हैं।

इस ब्रोकरेज फर्म का कहना है वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही का अर्निंग्स सीजन उम्मीद से बेहतर रहा। पहली तिमाही में MSCI इंडिया कंपनियों का रेवेन्यू सालाना आधार पर 19 फीसदी बढ़ा,जबकि टैक्स के बाद मुनाफा 16 फीसदी बढ़ा। अर्निंग्स भी उम्मीद से बेहतर रही। लगभग 58 प्रतिशत MSCI इंडिया कंपनियों की अर्निंग्स उम्मीद से बेहतर रहीं,जबकि 24 प्रतिशत कंपनियां अनुमानों पर खरी नहीं उतर पाईं।

मिड-कैप और स्मॉल-कैप कंपनियों के मुनाफे में मजबूत बढ़त

मार्केट-कैप के हिसाब से छोटी कंपनियों का प्रदर्शन बेहतर रहा। जेपी मॉर्गन के अनुसार एनर्जी सेक्टर को छोड़कर देखें तो मिडकैप 100 कंपनियों का टैक्स के बाद का मुनाफा (PAT) सालाना आधार पर 42 फीसदी बढ़ा है। जबकि, निफ्टी स्मॉलकैप 100 कंपनियों का PAT 39 फीसदी बढ़ा है। इस तिमाही में मटीरियल्स,यूटिलिटीज,इंडस्ट्रियल्स और कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी सेक्टर में ज्यादा ग्रोथ देखने को मिली। ग्लोबल परेशानियों के बावजूद,मजबूत घरेलू मांग के चलते भारतीय कंपनियों को सहारा मिला।

पावर,ऑटो और डिफेंस सेक्टर में दिख रहा दम

जेपी मॉर्गन की राय है कि आगे बिजली की मांग,कैपिटल एक्सपेंडिचर और ग्रिड साइकल से जुड़े शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है। इसके अलावा डिफेंस, ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर स्टेपल्स जैसे सेक्टरों में तेजी आ सकती है।

पहली तिमाही में भारत में बिजली की पीक डिमांड लगभग 271 GW तक पहुंच गई। ऑटोमोबाइल सेक्टर में कंपनियों को वॉल्यूम में बढ़त और एक्सपोर्ट से फायदा हुआ जबकि कंज्यूमर स्टेपल्स में वॉल्यूम-आधारित रिकवरी के संकेत दिखे। आगे भी इनमें मजबूती काय रह सकती है।

ANI के मुताबिक जेपी मॉर्गन का भारत के इक्विटी को लेकर नजरिया मजबूत अर्निंग और घरेलू मांग की उम्मीदों पर टिका हुआ है। वहीं, जियोपॉलिटिकल घटनाएं और मौसम से जुड़ी अनिश्चितताएं जोखिम पैदा कर सकती हैं।

 

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अश्विनी वैष्णव का बड़ा बयान, कहा-भारत को उत्पादन का हब बना सकती हैं एपल और गूगल

सरकार को उम्मीद है कि एपल और गूगल जैसी दुनिया की दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनियां भारत को अपना बड़ा प्रोडक्शन हब बना सकती हैं। एपल आईफोन के अलावा दूसरे प्रोडक्ट्स भी भारत में बनाना शुरू कर सकती है। गूगल एक्सपोर्ट्स के लिए भारत में उन प्रोडक्ट्स का उत्पादन शुरू कर सकती है, जिनका भी वह चीन में उत्पादन कर रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईटी मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव ने यह उम्मीद जताई है। 21 अगस्त को मनीकंट्रोल के एक सवाल के जवाब में उन्होंने ये बातें कहीं।

एपल भारत में आईफोन के अलावा दूसरे प्रोडक्ट्स भी बनाएगी

गूगल के अपनी मैन्युफैक्चरिंग चीन से हटाने की खबरों पर वैष्णव ने कहा कि सरकार को उम्मीद है कि गूगल उन प्रोडक्ट्स के एक बड़े हिस्से का उत्पादन भारत में कर सकती है, जिनका वह एक्सपोर्ट करती है। उन्होंने कहा कि सरकार भारत में उत्पादन बढ़ाने के लिए एपल से भी बात कर रही है। उम्मीद है कि वह भारत में आईफोन के अलावा दूसरे प्रोडक्ट्स का भी उत्पादन करेगी।

गूगल ने भारत में पिक्सल स्मार्टफोन के उत्पादन के प्लान के बारे में बताया था

एपल और गूगल भारत में अपने हार्डवेयर के उत्पादन का विस्तार करना चाहती हैं। गूगल ने अक्तूबर 2023 में कहा था कि वह इंडिया में पिक्सल स्मार्टफोन की मैन्युफैक्चरिंग करेगी। उसका प्लान पिक्सल 8 से इसकी शुरुआत करने का था। इसके लिए वह पार्टनरशिप के लिए भारतीय और विदेशी मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों से बातचीत कर रही थी।

डिक्सन टेक्नोलॉजीज गूगल पिक्सल की एसेंबलिंग करती है

Dixon Technologies उन कंपनियों में शामिल है, जो भारत में Google Pixel स्मार्टफोन की एसेंबलिंग करती हैं। गूगल ने 2025 में भारत में पिक्सल रेंज के स्मार्टफोन का उत्पादन बढ़ाने की कोशिश शुरू कर दी थी। उसका प्लान एक्सपोर्ट्स के लिए इंडिया में अपने स्मार्टफोन का उत्पादन करने का था।

गूगल चीन की जगह भारत में बनाएगी फोन, वॉचेज और इयरबड्स

इस हफ्ते आईं खबरों में बताया गया कि गूगल 2027 से चीन में पिक्सल फोन, वॉचेज और वायरलेस इयरबड्स का उत्पादन बंद करना चाहती है। उसका प्लान चीन की जगह इंडिया और वियतनाम में इन उत्पादों की मैन्युफैक्चरिंग करने का है। गूगल ने सार्वजनिक रूप से इस रिपोर्ट की पुष्टि नहीं की है।

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एपल भारत में 2017 से ही आईफोन की एसेंबलिंग कर रही है

एपल पहले से इंडिया में काफी ज्यादा उत्पादन कर रही है। उसने 2017 में भारत में अपने आईफोन की एसेंबलिंग शुरू कर दी थी। तब से उन्हें Foxconn और टाटा ग्रुप सहित कई सप्लायर्स के जरिए इंडिया में अपना प्रोडक्शन बेस बढ़ाया है। काउंटरप्वाइंट रिसर्च के अनुमान के मुताबिक, 2026 में एपल के आईफोन के कुल उत्पादन में इंडिया की हिस्सेदारी करीब 26 फीसदी रह सकती है। एपल ने अपने आईफोन के लिए इंडिया को एक एक्सपोर्ट बेस बनाया है।

भारत बनाम अफगानिस्तान सीरीज के कार्यक्रम में हो सकता है यह फेरबदल

अगले महीने अफ़गानिस्तान और भारत के बीच होने वाली तीन मैचों की T 20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज़ की तारीखों में बदलाव की कोशिश हो रही है। मैचों को रीशेड्यूल करने का कोई औपचारिक फ़ैसला अभी तक नहीं लिया गया है, लेकिन अफ़गानिस्तान क्रिकेट बोर्ड (ACB) और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के बीच बातचीत चल रही है। एसीबी शेड्यूल को कुछ दिन पहले करने की कोशिश कर रहा है, जिसमें 14 सितंबर (गणेश चतुर्थी के दिन) को एक मैच कराने की संभावना भी शामिल है।

ये तीन मैच मूल रूप से 13, 15 और 17 सितंबर को होने थे, लेकिन पता चला है कि बीसीसीआई को इन्हें 11, 13 और 14 सितंबर को कराने का अनुरोध मिला है, ताकि उन तारीखों के आस-पास भारत में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों का ध्यान रखा जा सके। माना जा रहा है कि एसीबी ने बीसीसीआई को यह प्रस्ताव देते समय अपने स्टेकहोल्डर्स के अनुरोध का भी हवाला दिया है।

माना जा रहा है कि उन्होंने तर्क दिया है कि बदले हुए शेड्यूल पर मैच कराने से – जिसमें त्योहार के दिन का मैच भी शामिल है – व्यूअरशिप और स्टेडियम में दर्शकों की संख्या पर सकारात्मक असर पड़ेगा। नई दिल्ली का अरुण जेटली स्टेडियम तीनों मैचों की मेज़बानी करेगा। यह एक अभूतपूर्व सीरीज़ है – पहली बार अफ़गानिस्तान भारत में ही भारत की मेज़बानी करेगा (हालांकि मैच भारत में ही हो रहे हैं)।

एसीबी अधिकारियों और सीरीज़ से जुड़े स्टेकहोल्डर्स का मानना है कि बीसीसीआई इस अनुरोध को मान सकता है। बांग्लादेश के ख़िलाफ़ सीरीज़ के रद्द होने की संभावना के कारण, श्रीलंका में टेस्ट सीरीज़ (27 अगस्त) के समापन और एशियाई खेलों (24 सितंबर) की शुरुआत के बीच भारतीय टीम के पास खाली समय है। दिल्ली एंड डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन (डीडीसीए), जो इन मैचों की मेज़बानी करेगा, ने कहा कि उसे किसी भी बदले हुए प्लान के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

जून में, भारत ने अफ़गानिस्तान के साथ एक टेस्ट और तीन मैचों की वनडे सीरीज़ खेली थी। आने वाली टी 20 सीरीज़ से दोनों टीमों के बीच तीनों फ़ॉर्मेट में मुकाबले पूरे हो जाएंगे। बीसीसीआई सेक्रेटरी देवजीत सैकिया ने पिछली तारीखों की घोषणा करते हुए कहा था, “हमने हाल ही में जून में अफ़गानिस्तान के साथ टेस्ट और वनडे सीरीज़ खेली थी, और इस टी 20 सीरीज़ के साथ ही दोनों टीमें तीनों फ़ॉर्मेट में एक-दूसरे के ख़िलाफ़ खेल चुकी होंगी।”

कल का मौसम: 22 अगस्त को मूसलाधार बारिश की चेतावनी! IMD ने बताया दिल्ली-यूपी से लेकर MP-बिहार के मौसम का हाल

India Weather Update: देश भर में मानसून की हलचल ने अलग अलग इलाकों में भारी बारिश और आंधी-तूफान का मौसम बना रखा है। इस बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शनिवार 22 अगस्त के लिए मौसम का ताजा पूर्वानुमान जारी कर दिया है। मौसम विभाग के मुताबिक देश के अधिकांश राज्यों में मानसूनी बादल जमकर बरसेंगे। मध्य प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, बिहार समेत देश के 15 से अधिक राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश, तेज आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया गया है।

मध्य प्रदेश में बहुत भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग के मुताबिक शनिवार को मध्य प्रदेश के अधिकांश इलाकों में मौसम का कड़ा मिजाज देखने को मिलेगा। पूर्वी मध्य प्रदेश में अलग-अलग जगहों पर मूसलाधार से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। इसके साथ ही पश्चिमी मध्य प्रदेश के इलाकों में भी भारी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। पूरे मध्य प्रदेश में बारिश के साथ-साथ गरज-चमक और बिजली गिरने का भी खतरा बना रहेगा। मौसम के रौद्र रूप को देखते हुए लोगों को सावधान रहने की हिदायत दी गई है।

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दिल्ली, यूपी, बिहार और पंजाब-हरियाणा में झमाझम बारिश

उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में 22 अगस्त को झमाझम बारिश होने वाली है। मौसम विभाग ने दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसके अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में भी बादलों का जमावड़ा रहेगा और कई जगहों पर भारी बारिश देखने को मिल सकती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर-लद्दाख के पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में भी तेज बारिश की संभावना है।

पूर्वोत्तर भारत और तटीय राज्यों का हाल

पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत के राज्यों में भी मानसूनी गतिविधियां पूरी तरह सक्रिय रहेंगी। असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, ओडिशा और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम में अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश होने का अनुमान है। छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड में भारी बारिश के साथ आकाशीय बिजली चमकने और गिरने की भी प्रबल संभावना जताई गई है।

तेज आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली का खतरा

बारिश के साथ-साथ देश के कई हिस्सों में तेज आंधी और बवंडर जैसी हवाएं चल सकती हैं। आंध्र प्रदेश, उत्तरी आंतरिक कर्नाटक, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराइकल में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलने और बिजली कड़कने की आशंका है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान, तटीय कर्नाटक, दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक और जम्मू-कश्मीर के इलाकों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हवाएं चलेंगी। इसके अलावा आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के कई जगहों पर बहुत तेज हवाएं सतही चलने का अलर्ट जारी किया गया है।

समुद्र में उठेंगी ऊंची लहरें, तूफानी हवाओं की चेतावनी

समुद्री क्षेत्रों में भी मौसम का मिजाज काफी बिगड़ा रहेगा। अरब सागर के अधिकांश पश्चिमी-मध्य हिस्से, सोमालिया और ओमान के तटीय इलाकों के पास 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी, जो बढ़कर 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं। इसी तरह बंगाल की खाड़ी, मन्नार की खाड़ी और श्रीलंका के दक्षिणी तट से सटे इलाकों में भी 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली तूफानी हवाएं चलने की संभावना है। मौसम विभाग ने मछुआरों को इन तटीय और समुद्री क्षेत्रों में न जाने की कड़ी चेतावनी दी है।

डोपिंग के कारण भारत के इस भाला फेंक खिलाड़ी पर लगा 10 साल का प्रतिबंध

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ओलंपियन शिवपाल सिंह को दूसरे डोपिंग अपराध के लिए गुरुवार को 10 साल का निलंबन सौंपा गया। 31 वर्षीय भाला फेंकने वाले, जिन्होंने टोक्यो 2020 ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया था, को प्रतिबंधित एनाबॉलिक स्टेरॉयड मेथेनडिएनोन के लिए सकारात्मक परीक्षण के बाद राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) अनुशासन पैनल द्वारा मंजूरी दे दी गई थी।

शिवपाल सिंह का नवीनतम निलंबन 2021 में उनके पहले डोपिंग अपराध के बाद आया है, जब प्रतियोगिता से बाहर परीक्षण के दौरान उनके नमूने का स्टेरॉयड के लिए सकारात्मक परीक्षण किया गया था। बाद में नाडा एंटी-डोपिंग अनुशासनात्मक पैनल ने अगस्त 2022 में उन पर 2021 तक का चार साल का प्रतिबंध लगा दिया।

हालाँकि, शिवपाल सिंह ने नाडा के अपील पैनल के समक्ष सफलतापूर्वक तर्क दिया कि उनका सकारात्मक परीक्षण दूषित खुराक के परिणामस्वरूप हुआ था। जनवरी 2023 में, पैनल ने उनके तर्क को स्वीकार कर लिया और निलंबन को चार साल से घटाकर एक साल कर दिया।

इसके बाद शिवपाल सिंह ने अप्रैल 2023 में प्रतियोगिता में वापसी की और गोवा में राष्ट्रीय खेलों में स्वर्ण पदक जीतने से पहले जून में भुवनेश्वर में राष्ट्रीय अंतर-राज्य चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता। उनकी नवीनतम मंजूरी प्रभावी रूप से उनके करियर पर पर्दा डाल सकती है, 10 साल का प्रतिबंध उन्हें उनके प्रतिस्पर्धी वर्षों से काफी आगे ले जाएगा।

शिवपाल सिंह के करियर का मुख्य आकर्षण दोहा में 2019 एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में आया, जहां उन्होंने 86.23 मीटर के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ रजत पदक जीता। भारतीय एथलीट की आखिरी प्रतिस्पर्धी उपस्थिति मार्च 2025 में इंडियन ओपन थ्रो प्रतियोगिता में हुई, जहां वह उपविजेता रहे।

iPhone 18 Pro की लॉन्च डेट से कीमत तक लीक हुए बड़े डिटेल, जानें क्या-क्या मिलेगा नया

Apple अगले महीने iPhone 18 Pro से पर्दा उठा सकती है। माना जा रहा है कि कंपनी के हर साल होने वाले सितंबर इवेंट में नई प्रीमियम iPhone सीरीज पेश की जाएगी। हालांकि, Apple ने अभी तक इस इवेंट या नए iPhone को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

कई रिपोर्ट्स और लीक्स की मानें तो इस बार नई सीरीज में iPhone 18 Pro, iPhone 18 Pro Max और एक नया iPhone Ultra देखने को मिल सकता है। वहीं, सामान्य iPhone 18 को बाद में लॉन्च किए जाने की उम्मीद है।

ऐसे में अगर आप भी सोच रहे हैं कि iPhone 18 Pro में क्या खास मिल सकता है, तो मौजूदा लीक्स और इंडस्ट्री रिपोर्ट्स के आधार पर फोन से जुड़ी अब तक सामने आई सभी संभावित जानकारियां यहां दी गई हैं।

संभावित लॉन्च डेट

Apple आम तौर पर सितंबर में नए iPhone लॉन्च करता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस साल का इवेंट 9 सितंबर को कैलिफ़ोर्निया के क्यूपर्टिनो में स्टीव जॉब्स थिएटर में हो सकता है। अब अगर Apple अपने तय शेड्यूल के हिसाब से चलता है, तो घोषणा के कुछ दिन बाद ही प्री-ऑर्डर शुरू हो सकते हैं और महीने के आखिर में ये फोन रिटेल में उपलब्ध हो सकते हैं।

यह इवेंट इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि Tim Cook के कार्यकाल के बाद Apple के नए CEO John Ternus के नेतृत्व में यह कंपनी का पहला बड़ा iPhone लॉन्च हो सकता है।

डिजाइन और डिस्प्ले

iPhone 18 Pro के डिजाइन में इस बार कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलने की उम्मीद नहीं है। लीक्स के मुताबिक, Apple iPhone 17 Pro के डिजाइन को ही आगे बढ़ा सकती है, हालांकि फोन के लुक में कुछ छोटे-मोटे बदलाव जरूर किए जा सकते हैं।

अटकलें हैं कि इस स्मार्टफोन में ProMotion टेक्नोलॉजी वाला 6.3-इंच का LTPO OLED डिस्प्ले होगा, जो 120Hz तक का अडैप्टिव रिफ्रेश रेट देगा। रिपोर्ट्स यह भी बताती हैं कि Apple आउटडोर में बेहतर विजिबिलिटी के लिए पीक ब्राइटनेस लेवल को बेहतर बना सकता है।

कुछ अफवाहों का दावा है कि Dynamic Island छोटा हो सकता है, हालांकि इंडस्ट्री के कई जानकारों का मानना ​​है कि ऐसा बदलाव शायद iPhone की किसी आने वाली जेनरेशन में ही देखने को मिले।

परफॉर्मेंस और सॉफ्टवेयर

उम्मीद है कि iPhone 18 Pro में Apple का अगली पीढ़ी का A20 Pro प्रोसेसर होगा, जिसे खबरों के अनुसार 2nm मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस से बनाया जाएगा।

इस चिपसेट के साथ 12GB RAM होने की उम्मीद है, जिससे ऑन-डिवाइस AI फीचर्स और मल्टीटास्किंग के लिए ज्यादा क्षमता मिलेगी। नए प्रोसेसर से पिछली पीढ़ी की तुलना में पावर एफिशिएंसी, ग्राफिक्स परफॉर्मेंस और कनेक्टिविटी में भी सुधार होने की उम्मीद है।

Apple iOS में AI क्षमताओं का विस्तार जारी रख सकता है। इसके अलावा, अपग्रेडेड हार्डवेयर से ज्यादा एडवांस्ड ऑन-डिवाइस प्रोसेसिंग को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है।

कैमरा अपग्रेड

उम्मीद है कि कैमरे में होने वाले सुधार पूरी तरह से हार्डवेयर को फिर से डिजाइन करने के बजाय इमेज क्वालिटी पर फोकस्ड होंगे।

iPhone 18 Pro में ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप बरकरार रहने की संभावना है, और रिपोर्ट्स में बेहतर सेंसर, खासकर टेलीफोटो कैमरे के लिए, होने का संकेत दिया गया है। कुछ लीक से पता चलता है कि Apple बड़े Pro Max मॉडल के लिए वेरिएबल अपर्चर कैमरा सिस्टम रख सकता है, जबकि स्टैंडर्ड Pro मॉडल में यह फीचर नहीं होगा।

Apple से ऐसे सॉफ्टवेयर सुधार लाने की भी उम्मीद है जो फोटोग्राफी और वीडियो रिकॉर्डिंग को बेहतर बनाएंगे। इसमें A20 Pro चिप की नई इमेज प्रोसेसिंग क्षमताएं मदद करेंगी।

बैटरी और चार्जिंग

हालांकि, बैटरी की क्षमता के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक iPhone 18 Pro में 5,000mAh की बैटरी होने की संभावना कम है। इसके बजाय, उम्मीद है कि Apple A20 Pro प्रोसेसर और iOS ऑप्टिमाइजेशन के कॉम्बिनेशन से परफॉर्मेंस को बेहतर बनाने पर ध्यान देगा।

इन बदलावों से बैटरी का साइज ज्यादा बढ़ाए बिना ही बैटरी लाइफ को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

अनुमानित कीमत

इस साल कीमतें बढ़ने की उम्मीद है। कई रिपोर्ट्स से पता चलता है कि Apple, iPhone 18 Pro की शुरुआती कीमत को पिछले मॉडल के मुकाबले लगभग $100 तक बढ़ा सकता है।

अगर ऐसा होता है, तो भारत में भी इसकी कीमत बढ़ सकती है और शुरुआती कीमत 1.5 लाख रुपये के करीब पहुंच सकती है। हालांकि, Apple ने कीमत के बारे में अभी कोई जानकारी कन्फर्म नहीं की है।

ध्यान रखें कि लॉन्च से पहले सामने आई ये सभी जानकारियां लीक्स और रिपोर्ट्स पर आधारित हैं। इसलिए फोन के फीचर्स, स्पेसिफिकेशन्स और कीमत को लेकर अंतिम जानकारी Apple की आधिकारिक घोषणा के बाद ही साफ होगी।

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LIC का जीवन उमंग प्लान, सिर्फ कुछ साल चुकाएं प्रीमियम और जीवनभर का बीमा कवर पाएं

अगर आप लंबी अवधि तक इंश्योरेंस प्रोटेक्शन वाली पॉलिसी चाहते हैं तो आप एलआईसी की एक खास पॉलिसी के बारे में सोच सकते हैं। इस पॉलिसी का नाम एलआईसी जीवन उमंग है। इस पॉलिसी में निवेश से 100 साल की उम्र तक बीमा कवर पक्का हो जात है। खास बात यह है कि एलआईसी यानी भारतीय जीवन बीमा निगम सरकार की इंश्योरेंस कंपनी है, जिससे इसकी पॉलिसी में निवेश करने में किसी तरह का रिस्क नहीं है।

100 साल के होने तक मिलता है बीमा कवर

जो लोग रिटायरमेंट के बाद गारंटीड सालाना इनकम चाहते हैं, वे LIC Jeevan Umang Plan में निवेश शुरू कर सकते है। यह दरअसल एक होल- लाइफ इंश्योरेंस प्लान है, जिसमें पॉलिसीहोल्डर को तब तक बीमा कवर मिलता है, जब तक वह 100 साल का नहीं हो जाता। इस प्लान में आपको प्रोटेक्शन के साथ इनकम का भी विकल्प मिलता है।

प्रीमियम पेमेंट पीरियड के विकल्प

इस पॉलिसी में प्रीमियम चुकाने की अवधि ग्राहक अपनी सुविधा के हिसाब से चुन सकता है। ग्राहक को 15 साल, 20 साल, 25 साल और 30 साल तक प्रीमियम चुकाने का विकल्प मिलता है। इनमें से वह किसी एक चुनाव कर सकता है। यह एक पार्टिसिपेटरी प्लान है, जिसमें पॉलिसीहोल्डर को पॉलिसी के परफॉर्मेंस के हिसाब से बोनस मिलता है।

टैक्स के लिहाज से भी फायदेमंद

पॉलिसी की अवधि में हर साल चुकाए जाने वाले प्रीमियम पर इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी के तहत डिडक्शन का बेनेफिट मिलता है। साथ ही पॉलिसीहोल्डर की मौत या पॉलिसी की मैच्योरिटी पर मिलने वाला पूरा पैसा टैक्स-फ्री होता है। टैक्स से यह छूट इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 10डी(डी) के तहत मिलती है।

डेथ बेनेफिट का फ्लेक्सिबल पेमेंट

इस पालिसी की एक खास बात यह है कि पॉलिसीहोल्डर किस्तों में डेथ बेनेफिट के विकल्प का भी चुनाव कर सकता है। इसमें पॉलिसीहोल्डर की मौत की स्थिति में बीमा के पैसे का पेमेंट एकमुश्त की जगह 5 साल, 10 साल या 15 साल के दौरान नॉमिनी को मिलेगा। इससे पॉलिसीहोल्डर की मौत की स्थिति में कुछ सालों तक परिवार को रेगुलर इनकम होती रहती है।

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प्रीमियम हर महीने भी चुका सकते हैं

इस पॉलिसी के प्रीमियम का पेमेंट हर महीने, हर तिमाही, हर छमाही या सालाना किया जा सकता है। अगर आप हर महीने प्रीमियम का पेंमेंट करना चाहते हैं तो आपको कम से कम 5000 रुपये का पेमेंट करना होगा। आप हर तिमाही पेमेंट करना चाहते हैं तो मिनिमम 15,000 रुपये का पेमेंट करना होगा। अगर हर छमाही पेमेंट करना चाहते हैं तो 25,000 का पेमेंट करना होगा। सालाना पेमेंट के लिए कम से कम 50,000 रुपये चुकाने होंगे।

Mobile Manufacturing Scheme 2.0 : सरकार ने लॉन्च की 62,500 करोड़ करोड़ रुपए की मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग स्कीम, जानिए पूरी डिटेल

Mobile Manufacturing Scheme : आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम 2.0 के लॉन्च की घोषणा की है। 62 हजार 500 करोड़ रुपए की इस स्कीम का लक्ष्य भारत में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है। इसके तहत सरकार कंपनियों को उत्पादन के लिए 5% तक इंसेंटिव देगी। इस स्कीम के जरिए 40 लाख करोड़ के मोबाइल का उत्पादन हो सकेगा। ये स्कीम 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी।

मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग स्कीम 2.0 के तहत कंपनियों से आवेदन मांगने की शुरुआत कर दी गई है। 15 जुलाई को कैबिनेट ने स्कीम को मंजूरी दी थी। स्कीम का कुल बजट 62,500 करोड़ रुपए और अवधि 5 साल यानी वित्त वर्ष 2027 से वित्त वर्ष 2031 तक है। इसमें मोबाइल उत्पादन,घरेलू वैल्यू एडिशन और कंपोनेंट सोर्सिंग को कवर किया गया है।

1 अप्रैल 2026 से लागू होगी स्कीम

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस कृष्णन ने कहा कि यह योजना मौजूदा फाइनेंशियल ईयर से यानी 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी और फाइनेंशियल ईयर 2031 तक चलेगी। इस स्कीम के तहत,भारत में बने मोबाइल फोन की बिक्री पर मैन्युफ़ैक्चरर्स को 2.25% से 5% तक का इंसेंटिव मिलेगा। कंपनियां खास कंपोनेंट्स और सब-असेंबली को घरेलू स्तर पर सोर्स करके 1.5% तक का अतिरिक्त इंसेंटिव भी पा सकती हैं। कैबिनेट से मंज़ूर इस फ़्रेमवर्क में भारतीय ब्रांड बनाने के मकसद से प्रोडक्ट डिजाइन और रिसर्च एंड डेवलपमेंट के लिए 3% का अतिरिक्त इंसेंटिव भी दिया जाएगा।

बड़ी मात्रा में मिलेगा रोजगार

एस कृष्णन ने कहा कि भारतीय हैंडसेट ब्रांड पर 5 प्रतिशत के ज्यादा इंसेंटिव दिया जाएगा। इसके जरिए सरकार उन घरेलू कंपनियों को सपोर्ट करना चाहती है जो विदेशी बाजारों में अपना विस्तार करना चाहती हैं। सरकार का अनुमान है कि इस स्कीम के जरिए 5 साल में कुल लगभग 40 लाख करोड़ रुपये के मोबाइल फोन का उत्पादन हो सकता है और करीब 60,000 प्रत्यक्ष नौकरियां मिल सकती हैं।

PLI 1.0 ने प्रोडक्शन और इन्वेस्टमेंट के लक्ष्यों को भी किया पार

यह स्कीम इसके पहले आई प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम (PLI-LSEM) के बाद आई है,जिसकी अवधि 31 मार्च, 2026 को खत्म हुई थी। पहले वाले प्रोग्राम का मुख्य मकसद बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग करना और मोबाइल फोन प्रोडक्शन को बढ़ाना था। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक PLI 1.0 के तहत मोबाइल फोन का प्रोडक्शन 11.61 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया,जबकि इसका लक्ष्य 8.12 लाख करोड़ रुपये था। PLI 1.0 का निवेश लक्ष्य 7,000 करोड़ रुपये था लेकिन इसके तहत हुआ निवेश 20,500 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है।

पहले की PLI स्कीम ने ग्लोबल हैंडसेट बनाने वाली कंपनियों और कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स को आकर्षित किया,जिनमें सैमसंग और भारत में Apple डिवाइस बनाने वाली कंपनियां शामिल हैं।

लोकलाइजेंशन पर फोकस

मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम 2.0 में देश में बनने वाले कंपोनेंट्स और सब-असेंबली की हिस्सेदारी बढ़ाने पर ज्यादा जोर दिया जाएगा। एस कृष्णन कृष्णन ने कहा कि मोबाइल फोन बनाने में घरेलू स्तर पर वैल्यू एडिशन लगभग 15 प्रतिशत से बढ़कर 23 प्रतिशत हो गया है। MPMS के तहत अतिरिक्त सोर्सिंग इंसेंटिव का मकसद मैन्युफैक्चरर्स को अपनी घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

 

 

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दिल्ली विश्वविद्यालय में 1 साल के PG कोर्स के लिए 5857 सीटें जुड़ीं, जानें 4-साल की डिग्री के बाद सीधे PhD का नियम

यह खबर उन छात्रों के लिए बेहद अहम है, जो दिल्ली विश्वविद्यालय से परास्नातक यानी पोसट ग्रेजुएशन करना चाहते हैं। यूनिवर्सिटी ने शैक्षिक सत्र 2026-27 के शैक्षिक सत्र के लिए एक साल की अवधि वाले 46 पीजी प्रोग्राम में सीटें बढ़ाने का फैसला किया है। इसके तहत यूनिवर्सिटी हर प्रोग्राम में 120 बढ़ाएगा, जिससे कुल 5857 सीटें एक साल के पीजी पाठ्यक्रम में बढ़ेंगीं।

यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब यूनिवर्सिटी से चार साल के अंडरग्रेजुएट कार्यक्रम से पहला बैच स्नातक पूरा कर निकलने वाला है। यूनिवर्सिटी ने अपने दो साल के पीजी प्रोग्राम में सीटों की मौजूदा संख्या बनाए रखी है, जिससे चार साल के अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम (FYUP) के तहत स्नातक होने वाले छात्रों को शामिल करने के लिए कुल पीजी इनटेक को असरदार तरीके से बढ़ाया गया है। न्यूज एजेंसी एएनाई की खबर के मुताबिक, डीयू 46 विषयों में एक साल का पीजी प्रोग्राम ऑफर कर रहा है, जिसमें कुल 5,857 सीटें हैं। इसमें रेगुलर मोड में 2,807 सीटें शामिल हैं। 46 प्रोग्राम में 5,857 सीटें हर प्रोग्राम में औसतन लगभग 127 सीटें बनती हैं।

डीयू के रजिस्ट्रार विकास गुप्ता ने बताया कि यूनिवर्सिटी ने क्लासरूम और टीचिंग स्टाफ की बढ़ी हुई जरूरत को पूरा करने का इंतजाम किया है। गुप्ता ने कहा, “हम अतिरिक्त टीचर हायर करेंगे। हमने कॉलेजों में पढ़ाने वाले टीचरों के लिए भी इंतजाम किया है कि वे यूनिवर्सिटी में आकर पढ़ाएं। हम उन्हें मानदेय देंगे।” बता दें, एफवाईयूपी को छात्रों को उनकी स्नातक पढ़ाई के दौरान रिसर्च और एंटरप्रेन्योरशिप का ज्यादा अनुभव देने और भारतीय डिग्री को वैश्विक मानक के साथ जोड़ने के मकसद से शुरू किया गया था।

डीयू ने नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 के आधार पर अंडरग्रेजुएट करिकुलम फ्रेमवर्क (UGCF) 2022 के तहत 2022-23 शैक्षिक सत्र से एफवाईयूपी शुरू किया था। 2022-23 शैक्षिक सत्र में डीयू में कुल 75,948 छात्रों को प्रवेश मिला। इनमें से, 40,005 स्टूडेंट्स 2025 में तीन साल की स्नातक पढ़ाई पूरी करने के बाद बाहर हो गए, जबकि लगभग 35,943 चौथे साल में आगे बढ़े।

यूनिवर्सिटी के डेटा के मुताबिक, चौथे साल में आगे बढ़ने वाले 35,943 स्टूडेंट्स में से 12,111 ने 2026-27 एकेडमिक सेशन के लिए एक साल के पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम में एडमिशन के लिए अप्लाई किया। इसका मतलब है कि चौथे साल में आगे बढ़ने वाले लगभग 33.7% छात्रों ने एक साल के पीजी प्रोग्राम के लिए आवेदन किया। एक साल के पीजी प्रोग्राम में उपलब्ध 5,857 सीटों में से, आवेदकों की संख्या 12,111 थी। इसलिए उपलब्ध सीटें एप्लिकेंट्स की संख्या का लगभग 48.36% हैं।

डीयू का एक साल का पीजी कार्यक्रम भी दूसरे विश्वविद्यालयों की तुलना में काफी बड़ा है। यूनिवर्सिटी ने 2026-27 एकेडमिक सेशन के लिए अपने दो साल के पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम में भी उतनी ही सीटें ऑफर करना जारी रखा है, खासकर उन छात्रों के लिए जिन्होंने तीन साल पूरे करने के बाद एफवाईयूपी छोड़ दिया था।

यूनिवर्सिटी ने चार साल के अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम से पीएचडी प्रवेश के लिए एक सीधा शैक्षिक रास्ता भी बनाया है। यूनिवर्सिटी के ऑर्डिनेंस VI में एक बदलाव के तहत, एफवाईयूपी को 7.5 या उससे ज्यादा सीजीपीए और एससी/एसटी छात्रों के लिए 7.0 या उससे ज्यादा सीजीपीए के साथ पूरा करने वाले छात्र सीधे पीएचडी प्रोग्राम के लिए अप्लाई करने के लायक होंगे।

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Sharmila Tagore-Kangana Ranaut: ‘वंदे मातरम’ पर शर्मिला टैगोर की बात सुन भड़की कंगना रनौत, बोलीं- आपको एक बार पढ़ना चाहिए

Sharmila Tagore-Kangana Ranaut: अभी ‘वंदे मातरम’ के दो पद गाने के मौजूदा चलन के बजाय इसके छह पद गाने को लेकर राजनीतिक हंगामा चल रहा है। इसी मुद्दे पर दो अभिनेत्रियों के बीच बहस छिड़ गई है। अभिनेत्री शर्मिला टैगोर—जिनका रिश्ता राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ लिखने वाले नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर से है—ने सुझाव दिया कि ‘वंदे मातरम’ के केवल शुरुआती दो पद ही गाए जाएं, क्योंकि बाद के पदों में दुर्गा और काली जैसे हिंदू देवी-देवताओं का ज़िक्र है, जिन्हें एक ईश्वर को मानने वाले लोग शायद स्वीकार न कर पाएं।

कंगना रनौत ने इस विचार को पूरी तरह खारिज कर दिया और उनसे “हिंदू-मुस्लिम सोच” से आगे बढ़ने को कहा। उन्होंने समझाया कि देवी-देवताओं का जिक्र रचनात्मक रूपक (metaphors) के तौर पर किया गया है, जिसका मकसद राष्ट्रीय शक्ति को जगाना है, न कि ये कोई धार्मिक आदेश हैं।

छह पदों में क्या कहा गया है? विवाद क्या था?

IANS के साथ एक इंटरव्यू में, अनुभवी एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर ने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की लिखी कविता के सिर्फ दो छंदों (stanzas) को गाने का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भारत में कई धार्मिक लोग एक ही ईश्वर में विश्वास करते हैं और उन्हें कई देवी-देवताओं का नाम लेने में असहजता महसूस हो सकती है। उन्होंने बताया कि जो लोग कड़ाई से एकेश्वरवाद (एक ही ईश्वर में विश्वास) को मानते हैं, उनके लिए “वंदे काली, वंदे दुर्गा” जैसे वाक्यांशों का उच्चारण करना मुश्किल हो सकता है।

उन्होंने कहा कि भारत के सभी धार्मिक समुदायों को एकजुट करने के लिए, कविता के शुरुआती दो छंदों तक ही सीमित रहना सबसे समावेशी तरीका है।

कंगना रनौत ने क्या कहा

एक्टर और BJP की लोकसभा सांसद कंगना रनौत ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज़ पर तीखी आलोचना की, साथ ही यह भी कहा कि वह अब भी उन दिग्गज स्टार को व्यक्तिगत रूप से पसंद करती हैं और उनका सम्मान करती हैं। उन्होंने हैरानी जताई कि कोई कलाकार कविता को इतने शाब्दिक अर्थ में कैसे ले सकता है।

उन्होंने कहा कि गानों में शब्दों, कल्पनाओं और उपमाओं का मकसद भावनात्मक असर पैदा करना होता है, न कि धार्मिक क्रियाओं को ठीक-ठीक परिभाषित करना। उन्होंने तर्क दिया कि आज़ादी की लड़ाई के दौरान बंकिम चंद्र का दुर्गा या शक्ति का ज़िक्र करना नागरिकों के भीतर आंतरिक उग्रता और शक्ति को जगाने के लिए एक काव्यात्मक आह्वान था। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के उस कथन का उदाहरण दिय, जिसमें उन्होंने ऐसे युवाओं की ज़रूरत बताई थी जिनकी “नसों में बिजली दौड़ती हो”; उन्होंने कहा कि विवेकानंद मौसम का पूर्वानुमान नहीं दे रहे थे, बल्कि शक्ति की मांग कर रहे थे।

उन्होंने लिखा, “कृपया हिंदू-मुस्लिम वाली सोच से बाहर आएं। भले ही हम एक ईश्वर में विश्वास करते हों, डॉक्टर भी ऊर्जा को ‘शक्ति’ कहते हैं। आइए, एक-दूसरे को अपना समझकर अपनाएं।”