Airtel ने लॉन्च किए तीन सस्ते प्रीपेड प्लान, जानिए इनमें सब्सक्राइबर्स के लिए क्या है खास

भारती एयरटेल ने तीन नए वॉयस-ओनली प्रीपेड रीचार्ज प्लान लॉन्च किए हैं। टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) की 21 अक्तूबर की डेडलाइन से पहले कंपनी ने ये प्लान लॉन्च किए हैं। ये प्लान 185 रुपये, 203 रुपये और 206 रुपये के हैं। भारती एयरटेल देश की दूसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी है।

इन तीनों प्लान में से प्रत्येक में सब्सक्राइबर्स को अनलिमिटेड लोकल और नेशनल वॉयस कॉलिंग और 300 एसएमएस की सुविधा मिलेगी। 185 रुपये के प्लान की वैलिडिटी 28 दिन की है, 203 रुपये के प्लान की वैलिडिटी 30 दिन की है। 206 रुपये की वैलेडिटी कैलेंडर के महीने के हिसाब से होगी।

ये सभी प्लान एयरटेल के ऐप पर सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध हैं। वॉयल-ओनली पैक की नई रेंज लॉन्च करने वाली देश की पहली टेलीकॉम कंपनी है। बाकी दो टेलीकॉम कंपनियों रिलायंस जियो और वोडाफोन आइडिया को भी टेलीकॉम रेगुलेटर के निर्देश के तहत ऐसे प्लान लॉन्च करने होंगे।

ट्राई ने सितंबर में टेलीकॉम कंपनियों को एक खास निर्देश दिया था। इसमें कंपनियों को इंटरनेट डेटा के बगैर सिर्फ वॉयल कॉल और एसएमएस के लिए स्पेशल टैरिफ वाउचर्स लॉन्च करने को कहा गया था। इसके लिए टेलीकॉम रेगुलेटर ने 21 अक्टूबर की डेडलाइन तय की थी। टेलीकॉम कंपनियों को इस निर्देश के पालन के सिए 30 दिन का समय मिला था।

ट्राई के इस निर्देश से उन सब्सक्राइबर्स की शिकायत दूर हो गई है, जिन्हें इंटरनेट डेटा की जरूरत के बगैर बंडल्ड प्रीपेड खरीदने को मजबूर होना पड़ता है। ऐसे कई सब्सक्राइबर्स हैं, जो मोबाइल का इस्तेमाल सिर्फ वॉयल कॉल और एसएमएस के लिए करते हैं। अभी तक बाजार में जो प्रीपेड प्लान थे, उनके साथ इटरनेट डेटा भी होता था। इससे प्रीपेड प्लान महंगा हो जाता है।

हैंडसेट की बढ़ती कीमतों की वजह से सब्सक्राइबर्स अपने डिवाइस का इस्तेमाल लंबे समय तक करते हैं। वॉयस-ओनली प्लान से ऐसे सब्सक्राइबर्स को फायदा होगा, जो सिर्फ वॉयस-ओनली रिचार्ज प्लान का इस्तेमाल करने में दिलचस्पी रखते हैं। ऐसे सब्सक्राइबर्स को डेटा की जरूरत नहीं होती है। अब उन्हें 30 दिन तक की वैलिडिटी वाले वाउचर्स मिलेंगे।

IPO की तैयारी कर रही OYO के लिए मूडीज ने आउटलुक किया ‘पॉजिटिव’, B2 कॉर्पोरेट फैमिली रेटिंग बरकरार

मूडीज रेटिंग्स ने IPO लाने की तैयारी कर रही OYO की पेरेंट कंपनी प्रिज्म (Prism) के आउटलुक को ‘स्टेबल’ से बदलकर ‘पॉजिटिव’ कर दिया है। साथ ही कंपनी की ‘B2 कॉर्पोरेट फैमिली रेटिंग’ (CFR) को बरकरार रखा है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, मूडीज रेटिंग्स की असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट श्वेता पटोदिया का कहना है, “पॉजिटिव आउटलुक हमारी इस उम्मीद को दर्शाता है कि OYO अगले 12-18 महीनों में अपनी अच्छी कमाई और फ्री कैश फ्लो जनरेशन को बरकरार रखेगी। इससे कंपनी को अपना कर्ज कम करने में मदद मिलेगी और उसकी लिक्विडिटी (नकदी की उपलब्धता) भी अच्छी बनी रहेगी।”

मूडीज के अनुसार, OYO के लिए लीड एनालिस्ट पटोदिया का कहना है, “B2 कॉर्पोरेट फैमिली रेटिंग (CFR) को बरकरार रखने का मतलब है कि OYO अपने मुख्य बाजारों में बजट अकोमोडेशन (ठहरने की किफायती जगह) सेक्टर में लीडिंग पोजिशन रखती है। साथ ही कारोबार में भौगोलिक विविधता है क्योंकि इसका बिजनेस भारत, यूरोप और अमेरिका में फैला हुआ है।”

12-18 महीनों में ₹3000 करोड़ हो सकता है OYO का EBITDA

मूडीज को उम्मीद है कि अगले 12-18 महीनों में OYO का EBITDA (ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन से पहले की कमाई) बढ़कर लगभग 3,000 करोड़ रुपये (31.5 करोड़ डॉलर) हो जाएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि कंपनी लगातार अपना विस्तार कर रही है और अपने प्लेटफॉर्म पर नए स्टोरफ्रंट (होटल/प्रॉपर्टी) जोड़ रही है। वित्त वर्ष 2025—26 में OYO का EBITDA दोगुने से भी ज्यादा होकर 2,630 करोड़ रुपये हो गया। वित्त वर्ष 2025 में यह 1,080 करोड़ रुपये था।

बेहतर कमाई और वर्किंग कैपिटल के आउटफ्लो के स्थिर होने की वजह से OYO पहली बार वित्त वर्ष 2026 में पॉजिटिव फ्री कैश फ्लो हासिल करने में सफल रही। मूडीज को उम्मीद है कि OYO अगले एक से दो वर्षों तक पॉजिटिव फ्री कैश फ्लो बरकरार रखेगी। इसका ऑपरेटिंग कैश फ्लो निकट भविष्य के खर्चों को कवर करने के लिए पर्याप्त होगा।

प्रियागोल्ड बिस्किट में जानवरों के चारे वाला चोकर! FSSAI ने शुरू की कानूनी कार्यवाही, लाइसेंस सस्पेंड

6,650 करोड़ का IPO लाने की तैयारी

OYO अपने IPO के जरिए लगभग 6,650 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। इसमें से करीब 5,000 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए किया जाएगा। मूडीज का कहना है, “अगर IPO योजना के मुताबिक कंप्लीट होता है, तो इससे कर्ज कम करने की प्रक्रिया तेज होगी और कंपनी की क्रेडिट प्रोफाइल मजबूत होगी। हालांकि, IPO की टाइमिंग और इसके एग्जीक्यूशन को लेकर अनिश्चितता को देखते हुए, हमारे बेस-केस वित्तीय अनुमानों में इस रकम या इससे जुड़े कर्ज के भुगतान को शामिल नहीं किया गया है।”

अदाणी ग्रुप की 4 कंपनियों के नतीजे इस हफ्ते: Adani Green से लेकर Adani Power तक, जानें रिजल्ट्स की तारीखें और शेयरों का हालिया रिटर्न

Adani Group Q2 Results: कारपोरेट अर्निंग्स का सीजन चल रहा है। अगले हफ्ते शेयर बाजार की नजर अदाणी ग्रुप की चार बड़ी कंपनियों पर रहेगी। सितंबर 2026 तिमाही (Q2) के नतीजों के लिए इन कंपनियों की अहम बैठकें होने वाली हैं। इनमें Adani Green, Adani Energy Solutions, Adani Total Gas और Adani Power शामिल हैं। आइए जानते हैं इन नतीजों की तारीखें, इन्वेस्टर्स कॉल की टाइमिंग और इनके शेयरों का हालिया प्रदर्शन।

1. Adani Energy Solutions Q2 Results

अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड के AGM की बैठक गुरुवार, 22 अक्टूबर को आयोजित की जाएगी। इसमें वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही (Q2FY27) और छमाही (H1FY27) के अनऑडिटेड वित्तीय नतीजों की घोषणा और उस पर चर्चा की जाएगी। कंपनी की इन्वेस्टर्स/एनालिस्ट कॉन्फ्रेंस कॉल शुक्रवार, 23 अक्टूबर को होगी।

शुक्रवार, 16 अक्टूबर को अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस का शेयर BSE पर 0.54% की गिरावट के साथ ₹1,360 पर बंद हुआ। कंपनी का मार्केट कैप ₹1,66,321.81 करोड़ है।इस शेयर ने निवेशकों को 1 साल में 43.60%, 2 साल में 31.64% और 3 साल में लगभग 75.55% का शानदार रिटर्न दिया है।

2. Adani Green Energy Q2 Results

अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड का बोर्ड बुधवार, 21 अक्टूबर को बैठक करेगा, जिसमें Q2FY27 और H1FY27 के नतीजों को मंजूरी दी जाएगी। कंपनी की पोस्ट-रिजल्ट इन्वेस्टर्स कॉल गुरुवार, 22 अक्टूबर को तय की गई है।

बीएसई पर अदाणी ग्रीन का शेयर 0.46% गिरकर ₹1,300 पर बंद हुआ, जबकि कंपनी का बाजार पूंजीकरण ₹2,14,132.90 करोड़ दर्ज किया गया। इस ग्रीन एनर्जी स्टॉक ने 1 साल में 22.64% का पॉजिटिव रिटर्न दिया है, हालांकि पिछले 2 सालों में इसमें 25.78% की गिरावट आई है।

3. Adani Total Gas Q2 Results

अदाणी टोटल गैस का निदेशक मंडल गुरुवार, 22 अक्टूबर को अपनी बैठक में दूसरी तिमाही और छमाही नतीजों की समीक्षा व अनुमोदन करेगा। इसके बाद कंपनी की इन्वेस्टर्स कॉल शुक्रवार, 23 अक्टूबर को आयोजित होगी।

बीएसई पर अदाणी टोटल गैस का शेयर 0.40% की हल्की बढ़त के साथ ₹579.55 पर बंद हुआ। कंपनी का मार्केट कैप ₹63,739.49 करोड़ है। शेयर के प्रदर्शन पर दबाव देखा गया है। इसमें 1 साल में 6.79%, 2 साल में 22.36% और 3 साल में करीब 2.63% की गिरावट दर्ज की गई है।

4. Adani Power Q2 Results

अदाणी पावर के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक शुक्रवार, 23 अक्टूबर को होगी, जिसमें वित्तीय नतीजे जारी किए जाएंगे। इसके बाद कंपनी की एनालिस्ट/इन्वेस्टर्स कॉल अगले कारोबारी दिन सोमवार, 26 अक्टूबर को आयोजित की जाएगी।

BSE पर अदाणी पावर का शेयर 0.28% टूटकर ₹195.75 पर बंद हुआ। इसका कुल मार्केट कैप ₹3,77,497.90 करोड़ है। रिटर्न के मामले में यह शेयर सबसे आगे रहा है। अदाणी पावर ने 1 साल में 24.44%, 2 साल में 56.46% और पिछले 3 सालों में लगभग 196% का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

ZEN Tech खरीद रही Cogknit Semantics में 52% हिस्सा, ₹135 करोड़ की डील; सोमवार को चढ़ सकता है शेयर

एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर की कंपनी जेन टेक्नोलोजिज, डिफेंस टेक्नोलॉजी कंपनी कॉगनिट सिमेंटिक्स प्राइवेट लिमिटेड (CSPL) में 51.98 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीद रही है। कंपनी के बोर्ड ने 17 अक्टूबर की मीटिंग में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। उसी दिन कंपनी ने शेयर परचेज एग्रीमेंट, शेयर सब्सक्रिप्शन एग्रीमेंट और शेयरहोल्डर्स एग्रीमेंट कर लिया। डील पूरी होने के बाद कॉगनिट सिमेंटिक्स, जेन टेक की सब्सिडियरी बन जाएगी। यह खरीद फुली डाइल्यूटेड बेसिस पर 135.15 करोड़ रुपये में होगी।

इसके तहत CSPL में एक मौजूदा शेयरहोल्डर से शेयर खरीदे जाएंगे, साथ ही सीरीज ए कंपलसरिली कनवर्टिबल क्यूमुलेटिव प्रेफरेंस शेयरों (CCCPS) को सब्सक्राइब किया जाएगा। CSPL 10 रुपये फेस वैल्यू वाले सीरीज ए CCCPS जेन टेक और दूसरे इनवेस्टर को 27,015.71 रुपये प्रति CCCPS के भाव पर जारी करेगी। CSPL का वित्त वर्ष 2025-26 में टर्नओवर 48 लाख रुपये रहा। यह रिलेटेड पार्टी ट्रांजेक्शन नहीं है। निवेशक आशीष कचोलिया और उनके सहयोगी भी प्राइमरी राउंड में निवेश करेंगे।

क्या बनाती है CSPL

जेन टेक ने शेयर बाजारों को बताया है कि CSPL सशस्त्र बलों के लिए आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस पर बेस्ड बैटलफील्ड मैनेजमेंट सिस्टम्स और सिचुएशनल अवेयरनेस सिस्टम्स विकसित करती है। कॉगनिट का बैटलफील्ड मैनेजमेंट सिस्टम्स टैंकों, वाहनों और सैनिकों को डिजिटल रूप से जोड़ता है, जिससे हर कमांडर युद्धक्षेत्र की एक ही रियल-टाइम तस्वीर के आधार पर काम कर सके। इसने इंडियन आर्मी के साथ फील्ड ट्रायल पूरे कर लिए हैं। इसे भारत में ही डिजाइन और विकसित किया गया है।

Tech Mahindra देगी ₹15 का अंतरिम डिविडेंड, रिकॉर्ड डेट 23 अक्टूबर; 11 साल बाद बांटने जा रही बोनस शेयर

ZEN Tech का शेयर 3 साल में 130 प्रतिशत चढ़ा

ZEN Tech के शेयर की कीमत वर्तमान में BSE पर 1655.70 रुपये है। कंपनी का मार्केट कैप 14900 करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर की फेस वैल्यू 1 रुपये है। शेयर BSE 500 इंडेक्स का हिस्सा है। यह एक साल में 20 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ा है। 3 साल में कीमत लगभग 130 प्रतिशत, 5 साल में 630 प्रतिशत और 10 साल में 2000 प्रतिशत से ज्यादा मजबूत हुई है। कंपनी में सितंबर 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 48.51 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stocks Markets: बीएसई और एनएसई 20 अक्तूबर को बंद रहेंगे, जानिए कैसा रहेगा 4 दिन का यह कारोबारी हफ्ता

यह हफ्ता शेयर बाजारों के लिए अच्छा रहा। लंबे समय बाद शेयर बाजार में रौनक लौटी। निफ्टी इस दौरान 2.49 फीसदी चढ़ा, जबकि सेंसेक्स में 3.30 फीसदी का उछाल आया। अब बाजार की नजरें 19 अक्तूबर यानी सोमवार पर टिकी हैं। मंगलवार को शेयर बाजारों में दशहरा की छुट्टी है। इसलिए सोमवार के बाद बीएसई और एनएसई में फिर से बुधवार यानी 21 अक्तूबर को कारोबार शुरू होगा। सवाल है कि क्या बाजार में तेजी का सिलसिला क्या अगले हफ्ते जारी रहेगा?

19 अक्टूबर को खुलेगा जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ

अगले हफ्ते शेयर बाजार पर सितंबर तिमाही के नतीजों, क्रूड ऑयल की कीमतों और Jio Platforms के आईपीओ का असर दिखेगा। लेकिन, सबसे ज्यादा नजरें विदेशी निवेशकों पर होंगी। विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार पर दबाव बढ़ाया है। जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ एंकर इनवेस्टर्स के लिए 19 अक्तूबर को खुल जाएगा। बाकी इनवेस्टर्स के लिए यह 21 अक्तूबर को खुलेगा। यह देश का सबसे बड़ा आईपीओ है। अब तक किसी कंपनी ने आईपीओ से 30,000 करोड़ रुपये नहीं जुटाए हैं।

30000 करोड़ के इश्यू का असर लिक्विडिटी पर दिख सकता है

जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में निवेश के लिए इनवेस्टर्स को पैसे के इंतजाम करने होंगे। कई इनवेस्टर्स इस आईपीओ में निवेश करने के लिए दूसरे शेयरों से पैसे निकाल सकते हैं। चूंकि यह 30,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का इश्यू है, जिससे पैसे की काफी जरूरत पड़ेगी। इसका असर लिक्विडिटी पर पर पड़ सकता है। सूत्रों ने बताया है कि कई बड़े विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों ने इस इश्यू में निवेश में दिलचस्पी दिखाई है। वे इस इश्यू में निवेश के लिए दूसरे शेयरों में बिकवाली कर सकते हैं।

क्रूड ऑयल की कीमतों पर भी होंगी बाजार की नजरें 

क्रूड ऑयल की कीमतों का असर भी बाजार पर पड़ेगा। इस हफ्ते के अंत में क्रूड की कीमतों में बड़ा उछाल दिखा। ब्रेंट क्रूड करीब 110 डॉलर प्रति बैरल तक चला गया। अगर अगले हफ्ते क्रूड की कीमतों में नरमी नहीं आती है तो बाजार पर दबाव दिख सकता है। महंगे क्रूड की वजह से पेंट्स, टायर सहित कई कंपनियों की प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ी है। इसका निगेटिव असर उनके शेयरों पर दिखा है। क्रूड का 110 डॉलर प्रति बैरल पर बने रहना भारत की इकोनॉमी के लिए भी अच्छा नहीं है। इससे महंगाई तेजी से बढ़ सकती है।

आईटी शेयरों में तेजी जारी रही तो बाजार को मिल सकता है सपोर्ट

एनरिच मनी के सीईओ पोममुदी आर ने कहा कि निवेशकों की नजरें इस बात पर होगी कि बाजार में आईटी शेयरों की बदौलत आई तेजी जारी रहती है या नहीं। वे देखना चाहते हैं कि बाजार के प्रमुख सूचकांक अपने रेसिस्टेंस लेवल को तोड़ पाते हैं या नहीं। इस हफ्ते तेजी की वजह से बाजार का मोमेंटम पॉजिटिव बना हुआ है। आईटी शेयरों में अच्छी रिकवरी दिखी है।

इन दिग्गज बैंकिंग शेयरों पर दिखेगा सितंबर तिमाही के नतीजों का असर

इस हफ्ते के अंत में एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक, पीएनबी जैसे बड़े बैंकों ने अपने नतीजों के एलान किए। मिलाजुलाकर ये नतीजे अच्छे हैं। इन बैंकों के शेयरों पर 19 अक्तूबर यानी सोमवार को इन नतीजों का असर दिखेगा। पिछले एक-डेढ़ साल में प्राइवेट बैंकों के शेयरों का प्रदर्शन सरकारी बैंकों के शेयरों के मुकाबले कमजोर रहा है। सितंबर तिमाही के नतीजों से प्राइवेट बैंकों के शेयरों में तेजी शुरू हो सकती है।

अमेरिका में एआई और चिप शेयरों पर भी होगी नजरें 

मार्केट पार्टिसिपेंट्स को ग्लोबल फैक्टर्स पर भी नजर रखने की जरूरत है। खासकर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का असर फिलहाल मार्केट्स पर बना रहेगा। जियोपॉलिटिकल डेवलपेमेंट पर भी बाजार की नजरें होंगी। इस हफ्ते में अमेरिका में एआई और चिप शेयरों की पिटाई हुई है। अगर अगले हफ्ते भी इन शेयरों पर दबाव जारी रहता है तो भारतीय आईटी शेयरों में तेजी दिख सकती है।

Stocks to Watch on Monday: इन 5 दिग्गज बैंकिंग शेयरों में 19 अक्तूबर को दिखेगी बड़ी हलचल

Stocks to Watch on Monday:  शेयर बाजारों में 19 अक्तूबर यानी सोमवार को कई स्टॉक्स में बड़ी हलचल दिख सकती है। कई बड़े बैंकों ने हफ्ते के अंत में सितंबर तिमाही के नतीजों का एलान किया है। उनके शेयरों पर सोमवार को नतीजों का असर दिखेगा। कई बैंकों का प्रदर्शन सितंबर तिमाही में अच्छा रहा है। कुछ कंपनियों को बड़े ऑर्डर्स मिले हैं। इस वजह से उनके शेयरों में तेजी दिख सकती है। आइए इन शेयरों के बारे में जानते हैं।

एचडीएफसी बैंक की NII में 10% उछाल

HDFC Bank ने सितंबर तिमाही के नतीजों का ऐलान किया है। इस दौरान बैंक का नेट प्रॉफिट 4.7 फीसदी बढ़कर 19,510 करोड़ रुपये पहुंच गया। नेट इंटरेस्ट इनकम में 9.7 का इजाफा दिखा। हालांकि, नेट इंटरेस्ट मार्जिन 3.16 फीसदी से अब तक के सबसे निचले स्तर पर आ गया। साल दर साल आधार पर बैंक की ट्रेजरी ट्रेडिंग इनकम भी 67.4 फीसदी गिर गई। बैंक के शेयरों पर दूसरी तिमाही के नतीजों का असर 19 अक्तूबर को दिखेगा।

Axis Bank का प्रॉफिट 37 फीसदी उछला

Axis Bank का प्रदर्शन सितंबर तिमाही में शानदार रहा है। इस दौरान बैंक का प्रॉफिट साल दर साल आधार पर 37.6 फीसदी बढ़कर 7,003 करोड़ रुपये रहा। नेट इंटरेस्ट इनकम 11.8 फीसदी बढ़कर 15,372 करोड़ रुपये हो गई। यह बाजार के अनुमान से ज्यादा है। एसेट क्वालिटी में भी इम्प्रूवमेंट दिखा। इससे 19 अक्तूबर को बैंक के शेयर में तेजी दिख सकती है।

ICICI Bank का प्रॉफिट 20 फीसदी बढ़ा

ICICI Bank देश का दूसरा सबसे बड़ा प्राइवेट बैंक है। सितंबर तिमाही में बैंक का प्रदर्शन अच्छा रहा है। साल दर साल आधार पर इस दौरान नेट प्रॉफिट 20.1 फीसदी बढ़कर 14,843 करोड़ रुपये रहा। नेट इंटरेस्ट इनकम 17.7 फीसदी बढ़कर 25,339 करोड़ रुपये रही। सोमवार को बैंक के शेयरों में उछाल दिख सकता है।

पीएनबी का मुनाफा 11 फीसदी बढ़ा

पंजाब नेशनल बैंक का प्रदर्शन भी सितंबर तिमाही में अच्छा रहा। इस दौरान बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम 10.8 फीसदी बढ़कर 11,601 करोड़ रुपये रही। नेट प्रॉफिट 12.8 फीसदी बढ़कर 5,532.2 करोड़ रुपये रहा। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स गिरकर 2.55 फीसदी पर आ गया। पीएनबी सरकारी बैंक है। इसके शेयरों पर नतीजों का असर 19 अक्तूबर को दिखेगा।

यह भी पढ़ें: AI में निवेश घटा तो एशियाई शेयर बाजारों में मच सकता है कोहराम, जानिए भारतीय शेयर बाजार पर पड़ेगा कितना असर

यस बैंक का प्रदर्शन भी सितंबर तिमाही में अच्छा

प्राइवेट सेक्टर के यस बैंक का प्रदर्शन भी सितंबर तिमाही में अच्छा रहा है। बैंक का नेट प्रॉफिट इस दौरान 65.14 फीसदी बढ़कर 1,080 करोड़ रुपये रहा। नेट इंटरेस्ट इनकम 22.7 फीसदी बढ़कर 2,822 करोड़ रुपये रही। एनपीए भी 1.3 फीसदी से घटकर 1.2 फीसदी पर आ गया। बैंक ने सितंबर तिमाही में 317.3 करोड़ रुपये का प्रोविजन किया, जबकि पहली तिमाही में उसे 394.4 करोड़ रुपये का प्रोविजनिंग करना पड़ा था।

AI में निवेश घटा तो एशियाई शेयर बाजारों में मच सकता है कोहराम, जानिए भारतीय शेयर बाजार पर पड़ेगा कितना असर

अमेरिका में टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में आई बड़ी गिरावट ने कई एशियाई शेयर बाजारों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। अमेरिका में सेमीकंडक्टर्स शेयरों में लगातार 8 सत्रों में बिकवाली देखने को मिली। यह 2008 के बाद बिकवाली का सबसे लंबा सिलसिला था। इसका असर नैस्डेक 100 पर भी पड़ा। अप्रैल 2005 के बाद इसमें सबसे बड़ी गिरावट आई।

आईआई शेयरों की बदौलत अमेरिकी शेयर बाजारों में तेजी

पिछले 1.5-2 सालों में अमेरिका में एआई और सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में जबर्दस्त तेजी आई है। इस सेक्टर को चिप और दूसरे हार्डवेयर सप्लाई करने वाली एशियाई कंपनियों के शेयरों में भी खूब तेजी आई है। इनमें दक्षिण कोरिया और ताइवान की कई कंपनियां शामिल हैं। अमेरिका में एआई बूम जारी रखने के लिए नए निवेश की जरूरत है। पहले ही इस सेक्टर में काफी ज्यादा निवेश हो चुका है।

एआई में निवेश घटा तो एशियाई शेयर बाजारों में मच सकता है कोहराम

अगर अमेरिका में एआई में निवेश की रफ्तार सुस्त पड़ती है तो इसका असर इस सेक्टर से जुड़ी एशियाई कंपनियों पर भी पड़ेगा। इसका संकेत दिखने लगा है। नियोक्लाउड ऑफर करने वाली कंपनी CoreWeave के बॉन्ड्स की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। इससे इस सेक्टर पर बढ़ते दबाव का संकेत मिलता है। इनवेस्टर्स सवाल पूछ रहे है कि एआई और सेमीकंडक्टर्स कंपनियों ने जो निवेश किया है, क्या उसका रिटर्न मिलने जा रहा है? क्या AI की डिमांड इतनी है, जिससे इन कंपनियों के रेवेन्यू को सपोर्ट मिलेगा?

इंटरेस्ट रेट बढ़ने से एआई कंपनियों के लिए बढ़ रही इनवेस्टमेंट कॉस्ट

CoreWeave के शेयरों में 16 अक्तूबर को 12 फीसदी गिरावट आई। क्रूड की बढ़ती कीमतों ने एआई और सेमीकंडक्टर्स कंपनियों के लिए चिंता और बढ़ा दी है। क्रूड में उछाल से महंगाई बढ़ रही है, जिससे काबू में करने के लिए केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट्स बढ़ा रहे हैं। इससे इससे एआई कंपनियों के लिए नए निवेश की लागत भी बढ़ रही है। पिछले महीने अमेरिकी केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट 25 बेसिस प्वाइंट बढ़ा चुका है। अब नजरें इस महीने की फेड की पॉलिसी पर लगी हैं।

ताइवान और दक्षिण कोरिया की चिप कंपनियों को हो सकती है दिक्कत

ताइवान की TSMC, दक्षिण कोरिया की SK Hynix और Samsung Electronics जैसी कंपनियां AI कंप्यूटिंग के लिए जरूरी चिप और मेमोरी की सप्लाई करती हैं। इन कंपनियों की कमाई एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में होने वाले इनवेस्टमेंटम पर निर्भर है। अगर एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश घटता है तो इन कंपनियों की कमाई पर सीधा असर पड़ेगा। Gartner ने चेतावनी दी है कि एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में 3.5 ट्रिलियन डॉलर के इनवेस्टमेंट को 2030 तक बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। इसकी वजह यह है कि इनवेस्टमेंट के अनुपात में रेवेन्यू नहीं दिख रहा।

कंपोनेंट्स बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में 236% तक उछाल

Union Bancaire Privee में मैनेजिंग डायरेक्टर वी-सेर्न लिंग ने कहा, “अगर हायरपरस्केलर्स और नियोक्लाउड्स को निवेश जारी रखने के लिए फंड नहीं मिलता है तो इसका असर टीएसएमसी, सैमसंग और SK Hynix जैसी एशियाई कंपनियों पर पड़ेगा। उन्हें मिलने वाले ऑर्डर्स घट जाएंगे।” इस साल MSCI Asia-Pacific Index की सबसे ज्यादा चढ़ने वाली 10 कंपनियों से 8 कंपोनेंट्स बनाने वाली कंपनियां हैं। इनमें से हर कंपनी का शेयर कम से कम 236 फीसदी चढ़ा है।

यह भी पढ़ें: FPI ने अक्टूबर में अब तक बेचे ₹52100 करोड़ के भारतीय शेयर, किन वजहों से बने हुए हैं सेलर

भारतीय बाजार पर इस वजह से नहीं पड़ेगा असर 

जहां तक भारत की बात है तो इसका असर भारतीय शेयर बाजारों पर नहीं पड़ेगा। इसकी वजह यह है कि भारत में एआई और सेमीकंडक्टर्स बनाने वाली कंपनियां नहीं हैं। यहीं वजह है कि पिछले 1-2 सालों में जब अमेरिका, दक्षिण कोरिया और ताइवान के शेयर बाजारों में तेजी आई तब भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट देखने को मिली है। यहां तक की एआई बूम का निगेटिव असर भारतीय आईटी कंपनियों पर पड़ा है। अब जब एआई और चिप शेयर गिर रहे हैं तो भारतीय आईटी शेयरों में तेजी दिख रही है।

 

आपके PF के पैसे का क्या होता है? जानिए EPFO कहां इन्वेस्ट करता है और कैसे तय होता है ब्याज

Where EPFO invests PF money: नौकरीपेशा लोगों की सैलरी से हर महीने प्रोविडेंट फंड (PF) के नाम पर जो कटौती होती है, उसे हम भविष्य की सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार मानते हैं। जितनी रकम आपकी सैलरी से कटती है, उतना ही योगदान आपकी कंपनी भी आपके खाते में जमा करती है।

लेकिन क्या कभी आपने यह जानने की कोशिश की है कि आपकी तिजोरी में जमा होने वाले करोड़ों-अरबों रुपये आखिर कहां जाते हैं? क्या यह पैसा किसी बैंक में रखा रहता है या कहीं और निवेश होता है? कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) आपके इस पैसे को सुरक्षित रखने और उस पर शानदार रिटर्न (जैसे हालिया 8.25% ब्याज) देने के लिए क्या रणनीति अपनाता है, आइए इसे विस्तार से समझते हैं।

EPFO आपके पैसे का क्या करता है?

EPFO कोई साधारण बैंक नहीं है, बल्कि भारत के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अधीन काम करने वाला एक बड़ा वैधानिक निकाय है। कर्मचारियों के इस विशाल फंड के प्रबंधन की जिम्मेदारी सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) के पास होती है। बोर्ड के तय नियमों और सुरक्षा मानकों के तहत इस पैसे को देश के अलग-अलग वित्तीय और सरकारी साधनों में निवेश किया जाता है। इस निवेश से होने वाली कमाई से ही आपके पीएफ खाते में हर साल ब्याज का पैसा भेजा जाता है।

कहां-कहां होता है पीएफ का निवेश?

सरकार के तय दिशा-निर्देशों के मुताबिक, ईपीएफओ निवेशकों के पैसे की सुरक्षा और बेहतर रिटर्न के बीच संतुलन बनाने के लिए फंड को दो मुख्य हिस्सों में बांटता है:

  1. सुरक्षित डेट इंस्ट्रूमेंट्स: लगभग 85% तक
  2. इक्विटी यानी शेयर बाजार (Equity – ETFs): 15% तक

पोर्टफोलियो श्रेणी संभावित आवंटन % मुख्य साधन
सरकारी प्रतिभूतियां (G-Secs)45% – 65% केंद्र सरकार के बॉन्ड्स, स्टेट डेवलपमेंट लोन (SDLs)
कॉरपोरेट बॉन्ड्स व डेट20% – 45%PSUs, सरकारी वित्तीय संस्थानों व सुरक्षित कॉरपोरेट बॉन्ड्स
इक्विटी (शेयर बाजार) 5% – 15%केवल इंडेक्स आधारित एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETFs – Nifty 50, Sensex)
शॉर्ट-टर्म डेट/मनी मार्केट0% – 5% लिक्विडिटी और तात्कालिक नकदी प्रबंधन के लिए ट्राइ-पार्टी रेपो (TREPS)

85% पैसा जाता है पूरी तरह सुरक्षित सरकारी डेट में

ईपीएफओ अपने पास आने वाले कुल फंड का करीब 85 हिस्सा ऐसी जगहों पर लगाता है जहां डूबने का जोखिम न के बराबर होता है:

सरकारी बॉन्ड्स और स्टेट डेवलपमेंट लोन: ईपीएफओ का एक बहुत बड़ा हिस्सा केंद्र और राज्य सरकारों की विकास योजनाओं के बॉन्ड्स में लगा होता है। इससे देश का बुनियादी ढांचा (सड़कें, बिजली, रेलवे) मजबूत होता है और पीएफ के लिए तयशुदा रिटर्न सुनिश्चित होता है।

PSU के कॉरपोरेट बॉन्ड्स: भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और अन्य महारत्न कंपनियों के सुरक्षित डेट सिक्योरिटीज में भी यह पैसा निवेश किया जाता है।

15% हिस्सा शेयर बाजार में: क्या आपका पैसा जोखिम में है?

साल 2015 से पहले ईपीएफओ शेयर बाजार में निवेश नहीं करता था। लेकिन कम ब्याज दरों की चुनौती से निपटने और रिटर्न बढ़ाने के लिए सरकार ने अगस्त 2015 से इक्विटी में 5% से 15% तक निवेश करने की अनुमति दी।

सीधे शेयरों की खरीद नहीं: ईपीएफओ कभी भी किसी कंपनी विशेष के शेयर सीधे बाजार से नहीं खरीदता।

केवल इंडेक्स ETFs का सहारा: यह निवेश केवल BSE Sensex और NSE Nifty-50 जैसे शीर्ष सूचकांकों को ट्रैक करने वाले ETFs के जरिए किया जाता है, जिससे जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है।

ईपीएफओ कैसे तय करता है आपका सालाना ब्याज?

वित्तीय वर्ष के दौरान डेट बॉन्ड्स से मिलने वाला तय ब्याज और इक्विटी (ETFs) की बिक्री से हुआ मुनाफा जोड़ा जाता है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) सभी आंकड़ों का विश्लेषण कर ब्याज दर का प्रस्ताव तैयार करता है। वित्त मंत्रालय की मुहर लगने के बाद तय ब्याज दर कर्मचारियों के पीएफ खातों में क्रेडिट कर दी जाती है।

FPI ने अक्टूबर में अब तक बेचे ₹52100 करोड़ के भारतीय शेयर, किन वजहों से बने हुए हैं सेलर

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने अक्टूबर में अब तक भारतीय शेयर बाजार से 52,100 करोड़ रुपये निकाले हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, अमेरिका में बॉन्ड पर बढ़ती यील्ड और डॉलर की मजबूती के कारण निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है। इससे भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ा है। सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (CDSL) के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने सितंबर में भारतीय शेयरों से 35,861 करोड़ रुपये निकाले थे।

इससे पहले जुलाई में उन्होंने 20,200 करोड़ रुपये और अगस्त में 29,631 करोड़ रुपये का निवेश किया था। अक्टूबर की ताजा सेलिंग के साथ विदेशी निवेशक साल 2026 में अब तक भारतीय शेयर बाजार से 3.12 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। साल 2025 में उन्होंने 1.66 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, चॉइस वेल्थ के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजी ऑफिसर धीरज गौड़ का कहना है कि अमेरिका में सरकारी बॉन्ड पर हाई यील्ड, डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों में लगातार बिकवाली कर रहे हैं। अमेरिका में महंगाई का ऊंचे स्तर पर बने रहना भी ब्याज दर में बढ़ोतरी की आशंकाओं को बढ़ा रहा है। इससे विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिकी एसेट्स अधिक आकर्षक हो गए हैं।

यह भी कहा कि महंगा कच्चा तेल भारतीय अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल रहा है। इसके अलावा, उत्तर एशियाई बाजारों में आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में तेजी के कारण विदेशी पूंजी भारत के बजाय उन बाजारों की ओर जा रही है।

Stock in Focus: इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को रेलवे से ₹134 करोड़ का ऑर्डर मिला, फोकस में रहेगा स्टॉक

16 अक्टूबर को की थी खरीद

16 अक्टूबर को विदेशी निवेशकों ने कुछ बाइंग की थी। अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर यील्ड के कुछ नीचे आने और रुपये में मजबूती के कारण ऐसा हुआ था। बजाज ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट-रिसर्व पबित्रो मुखर्जी का कहना है कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली में कमी और शुक्रवार को बाइंग इस बात का संकेत है कि बाजार में निवेशकों की धारणा स्थिर हो सकती है। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें बाजार में रिकवरी की राह में अब भी जोखिम बनी हुई हैं।

DDA का मास्टरप्लान: दिल्ली में बनेंगे 12 लाख नए घर, 600 किमी नई सड़कों के साथ UER-2 पर लगेगा विकास का पंख

Delhi Master Plan: दिल्ली में घरों की बढ़ती मांग को पूरा करने और राजधानी के इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक स्वरूप देने के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने अपनी बहुप्रतीक्षित लैंड पूलिंग पॉलिसी पर काम तेज कर दिया है। उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू के मार्गदर्शन में डीडीए ने दिल्ली के देहाती इलाकों और गांवों में महीनेभर का विशेष जागरूकता और संवाद अभियान शुरू किया है।

इस अभियान के तहत किसानों, स्थानीय जमीन मालिकों और हितधारकों को लैंड पूलिंग के विकास मॉडल, वित्तीय फायदों और इसमें शामिल होने की आसान प्रक्रिया से अवगत कराया जा रहा है।

200 वर्ग किमी में फैलेगा नया शहर, बनेंगे 12 लाख घर

डीडीए के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, लैंड पूलिंग नीति के तहत राजधानी के बाहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 200 वर्ग किलोमीटर का बड़ा भूखंड विकसित किया जाएगा।

इस नीति के जरिए लगभग 12 लाख नए सुनियोजित घर तैयार करने की योजना है। इससे न केवल मध्यम और निम्न आय वर्ग को किफायती मकान मिलेंगे, बल्कि अवैध कॉलोनियों के बनने पर भी स्थायी रोक लगेगी।

मुख्य बिंदु विस्तृत जानकारी
कुल विकास क्षेत्रलगभग 200 वर्ग किलोमीटर
प्रस्तावित नए घरकरीब 12 लाख रेजिडेंशियल यूनिट्स
सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर600 किमी से अधिक का नया रोड नेटवर्क
प्रमुख कॉरिडोरअर्बन एक्सटेंशन रोड-2 (UER-II) के दोनों तरफ हाई डेंसिटी कॉरिडोर
विकास मॉडलटाउन प्लानिंग स्कीम्स (TPS) व पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप

इन्फ्रास्ट्रक्चर-फर्स्ट अप्रोच: 600 किमी से चौड़ी सड़कों का जाल

दिल्ली के मास्टर प्लान-2047 के तहत ‘इन्फ्रास्ट्रक्चर-फर्स्ट’ नीति अपनाई जा रही है। यानी पहले सड़कों, सीवर, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं का विकास होगा, उसके बाद ही आवासीय और व्यावसायिक सोसाइटियों का निर्माण शुरू किया जाएगा।

इस योजना में 600 किलोमीटर से अधिक अतिरिक्त सड़क नेटवर्क विकसित किया जाएगा। मुख्य फीडर और मुख्य सड़कों की राइट ऑफ वे (RoW) चौड़ाई 30 मीटर या उससे अधिक रखी जाएगी। कम से कम 20 हेक्टेयर जमीन एकत्र होने पर टाउन प्लानिंग स्कीम लागू कर निर्माण प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

UER-2 के किनारे बनेगा 250 मीटर चौड़ा हाई डेंसिटी कॉरिडोर

अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 (UER-II) दिल्ली की तीसरी रिंग रोड के रूप में जानी जाती है। मास्टर प्लान-2047 के तहत UER-2 के दोनों तरफ 250 मीटर चौड़ा हाई डेंसिटी कॉरिडोर विकसित करने का प्रावधान किया गया है।

Delhi Paster Plan: UER-2 के किनारे बनेगा 250 मीटर चौड़ा हाई डेंसिटी कॉरिडोर अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 (UER-II) का रूट मैप

400 तक FAR: इस कॉरिडोर के तहत उच्च फ्लोर एरिया रेशियो (FAR 400 तक) दिया जाएगा, जिससे गगनचुंबी इमारतें बनाई जा सकेंगी।

मल्टी-पर्पज यूज: यहां किफायती और प्रीमियम आवासों के साथ-साथ कमर्शियल सेंटर, लॉजिस्टिक्स हब, वेयरहाउसिंग और रोजगार सृजन वाले उद्योग स्थापित होंगे।

पहला नोटिफाइड सेक्टर: जोन P-II के अंतर्गत गढ़ी खसरो और इब्राहिमपुर गांव में स्थित सेक्टर 8B को इस मॉडल के कार्यान्वयन के लिए पहला तैयार सेक्टर अधिसूचित कर दिया गया है।

जमीन मालिकों को क्या होगा फायदा?

लैंड पूलिंग नीति में जमीन अधिग्रहण के बजाय साझेदारी मॉडल काम करता है। किसान या जमीन मालिक अपनी जमीन डीडीए को पूलिंग के लिए सौंपते हैं। डीडीए पूरी जमीन का टाउन प्लान तैयार कर सड़कों, पार्क और सार्वजनिक सुविधाओं का निर्माण करता है और कुल विकसित जमीन का एक बड़ा तय हिस्सा (लगभग 60%) विकसित प्लॉट के रूप में वापस मालिक को सौंप देता है।

इससे जमीन मालिकों की संपत्ति की बाजार कीमत कई गुना बढ़ जाती है और वे खुद बिल्डर या डेवलपर के साथ साझेदारी कर प्रोजेक्ट बना सकते हैं।