पहली बार मार्केट में पैसा लगाने से पहले नोट कर लें ये 5 पॉइंट्स, नुकसान से बचाएगी समझदारी

First Time Investor Tips: शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में पहली बार निवेश करना काफी रोमांचक हो सकता है, लेकिन बिना तैयारी के बाजार में उतरा गया एक गलत कदम आपकी मेहनत की कमाई पर भारी पड़ सकता है। अगर आप भी एक नए निवेशक हैं और पहली बार मार्केट में पैसा लगाने का मन बना रहे हैं, तो शुरुआत करने से पहले वित्तीय विशेषज्ञों के ये 5 सबसे जरूरी नियम जरूर नोट कर लें।

1. सबसे पहले बनाएं अपना फाइनेंशियल गोल

निवेश केवल पैसा लगाने का नाम नहीं है, बल्कि यह आपके भविष्य की जरूरतों को पूरा करने का माध्यम है। पैसा लगाने से पहले यह स्पष्ट करें कि आप रिटायरमेंट, घर खरीदने, बच्चों की पढ़ाई या वेल्थ क्रिएशन में से किस उद्देश्य के लिए निवेश कर रहे हैं। आपका लक्ष्य अल्पकालिक या दीर्घकालिक ही यह तय करेगा कि आपको इक्विटी, डेट या हाइब्रिड फंड में से किसमें पैसा लगाना चाहिए।

2. इमरजेंसी फंड तैयार रखें और जल्दी शुरुआत करें

बाजार में बड़ा दांव लगाने से पहले अपने पास एक सुरक्षा कवच यानी इमरजेंसी फंड जरूर रखें। अपनी किसी भी बड़ी इन्वेस्टमेंट से पहले 3 से 6 महीने के लिविंग एक्सपेंस को किसी आसानी से निकलने वाले सेविंग्स या लिक्विड अकाउंट में रखें। इससे बाजार के उतार-चढ़ाव के दौरान आपको पैनिक में अपने शेयर बेचने नहीं पड़ेंगे। इसके साथ ही जितनी जल्दी संभव हो छोटे-छोटे अमाउंट से इन्वेस्ट करना शुरू कर दें। शुरुआती निवेश से आपको पावर ऑफ कंपाउंडिंग का ज्यादा समय तक फायदा मिलता है।

3. ‘डाइवर्सिफिकेशन’ अपनाएं, सारा पैसा एक जगह न लगाएं

शेयर बाजार का सबसे पहला नियम है कि, ‘कभी भी अपने सारे अंडे एक ही टोकरी में न रखें’। अपने पैसे को किसी एक कंपनी या सिर्फ एक सेक्टर में लगाने के बजाय अलग-अलग एसेट क्लासेज इक्विटी, गोल्ड, डेट और अलग-अलग सेक्टर्स में बांटें। अगर आपका एक इन्वेस्टमेंट खराब परफॉर्म करता है, तो दूसरे स्टॉक्स या फंड्स आपके पोर्टफोलियो को बैलेंस रखेंगे।

4. सोशल मीडिया की टिप्स से बचें, रीसर्च पर भरोसा करें

सोशल मीडिया फिनफ्लुएंसर्स, वॉट्सऐप टिप्स या मार्केट की अफवाहों के आधार पर कभी भी आंख बंद करके पैसा न लगाएं। किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले कंपनी के बिजनेस मॉडल, बैलेंस शीट, कर्ज की स्थिति और वैल्यूएशन को समझें।म्यूचुअल फंड चुनते वक्त फंड मैनेजर के ट्रैक रिकॉर्ड, एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) और एक्सपेंस रेशियो की जांच करें।

5. मार्केट टाइम करने के बजाय SIP का रास्ता चुनें

मार्केट में ‘बॉटम’ पर खरीदना और ‘टॉप’ पर बेचना लगभग असंभव है। इसलिए मार्केट टाइमिंग के चक्कर में न पड़ें। बाजार की चाल का अंदाजा लगाने के बजाय SIP या नियमित पीरियोडिक इन्वेस्टमेंट का जरिया अपनाएं। इससे बाजार के उतार-चढ़ाव में आपकी खरीदारी की लागत औसतन कम हो जाती है और लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न पाने की संभावना बढ़ती है।

अन्य महत्वपूर्ण बातें जिन पर ध्यान देना जरूरी है

ब्रोकरेज चार्ज, एक्सपेंस रेशियो, एसटीटी (STT) और कैपिटल गेन टैक्स जैसे खर्चों को नजरअंदाज न करें, क्योंकि ये आपके कुल रिटर्न को प्रभावित करते हैं। बाजार में गिरावट देखकर पैनिक में आकर अपने एसेट्स न बेचें और न ही ट्रेंडिंग शेयर्स के पीछे भागें। साथ ही साथ हर 6 महीने या एक साल में अपने पोर्टफोलियो को रीबैलेंस करें ताकि वह आपके फाइनेंशियल गोल्स के हिसाब से अलाइन रहे।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Rajeev Thakkar: ‘AUM को कोसना बंद कीजिए…’, कमजोर रिटर्न पर बोले राजीव ठक्कर, याद दिलाया ₹100 करोड़ वाले फंड का किस्सा

PPFAS Flexi Cap Fund Underperformance: जब भी कोई बड़ा म्यूचुअल फंड प्लान हाल के दिनों में कमजोर प्रदर्शन करती है, तो अक्सर उसके विशालकाय फंड साइज या AUM को जिम्मेदार ठहराया जाता है। लेकिन देश के सबसे लोकप्रिय फंड्स में से एक PPFAS Mutual Fund के मुख्य निवेश अधिकारी राजीव ठक्कर इस दलील से इत्तेफाक नहीं रखते।

निवेशकों को लिखे अपने मैसेज में राजीव ठक्कर ने कहा, ‘जो लोग शॉर्ट टर्म में हमारी स्कीम के कमजोर प्रदर्शन का कारण हमारे बड़े AUM को मानते हैं, वे हम पर ‘कुछ ज्यादा ही मेहरबान’ हो रहे हैं।’

आइए आपको बताते हैं कि ₹1.43 लाख करोड़ के बड़े फंड को संभालने वाले फंड मैनेजर ने स्कीम के अंडरपरफॉर्मेंस, बाजार के रुख और 2007 के उस दौर के बारे में क्या-क्या बातें कही हैं।

जब ₹100 करोड़ के PMS में भी झेलना पड़ा था बड़ा अंडरपरफॉर्मेंस

राजीव ठक्कर ने अपने पुराने दिनों का जिक्र करते हुए स्पष्ट किया कि किसी फंड का साइज छोटा या बड़ा होना उसके प्रदर्शन की इकलौती वजह नहीं होता। उन्होंने बताया, ‘मैंने साल 2007 में PMS में महज ₹100 करोड़ से थोड़े अधिक के AUM बेस पर आज से भी बड़े अंडरपरफॉर्मेंस का दौर देखा और संभाला है।’

उनका मानना है कि शॉर्ट टर्म में फंड का रिटर्न कैसा रहेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने किन शेयरों में निवेश किया है और वे उस समय बाजार के ट्रेंड में हैं या नहीं।

कैसा रहा है हालिया प्रदर्शन?

राजीव ठक्कर देश की सबसे बड़ी फ्लेक्सी कैप स्कीम PPFAS Flexi Cap Fund का प्रबंधन करते हैं, जिसका कुल AUM करीब ₹1.43 लाख करोड़ पहुंच चुका है। पिछले एक साल में इस फंड ने लगभग 0.4% का रिटर्न दिया है। इसकी तुलना में इसी कैटेगिरी का औसत रिटर्न लगभग 7% रहा है। बाजार में चल रहे कंसोलिडेशन और कुछ सेक्टर्स में आई तेज गिरावट का असर इस फंड पर भी देखने को मिला है।

आउट ऑफ फेवर सेक्टर्स में खरीदारी: क्यों बिगड़ता है शॉर्ट टर्म रिटर्न?

अंडरपरफॉर्मेंस के कारणों पर बात करते हुए ठक्कर ने अपनी निवेश शैली पर प्रकाश डाला:

बाजार के रुझान से अलग सोच: पराग पारिख फ्लेक्सी कैप फंड अक्सर उन सेक्टर्स या शेयरों में खरीदारी करता है जो उस समय बाजार की पसंद नहीं होते या डिस्काउंट पर मिल रहे होते हैं।

शॉर्ट टर्म में अस्थिरता: जब फंड ऐसे सेक्टर्स में पैसा लगाता है जो फिलहाल बाजार की रेस में पीछे हैं, तो 3 महीने, 1 साल या उससे अधिक समय के लिए पोर्टफोलियो के रिटर्न कमजोर दिख सकते हैं।

‘ट्रेंड’ के पीछे न भागना: उन्होंने साफ किया कि फंड सिर्फ इसलिए किसी लोकप्रिय शेयर या सेक्टर में पैसा नहीं लगाएगा क्योंकि वह उस समय काफी चल रहा है। फंड का पूरा फोकस केवल रिस्क-रिवॉर्ड के आधार पर सही वैल्यू तलाशने पर रहता है।

निवेशकों के लिए राजीव ठक्कर का संदेश

राजीव ठक्कर के मुताबिक, अगर आपने किसी फंड को उसकी लंबी अवधि की रणनीति को देखकर चुना है, तो शॉर्ट टर्म में कमजोर रिटर्न मिलने पर किसी आसान बहाने की तलाश करने के बजाय धैर्य बनाए रखना सबसे ज्यादा जरूरी है।

उनका मानना है कि मौजूदा अंडरपरफॉर्मेंस का दौर न तो समय के लिहाज से बहुत लंबा है और न ही नुकसान के आंकड़े के हिसाब से कोई अभूतपूर्व घटना है। लंबी अवधि में प्रक्रिया और रिस्क मैनेजमेंट ही निवेशकों के लिए सही वैल्यू जनरेट करता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

देश में सुस्त पड़ी गोल्ड की डिमांड लेकिन, खर्च ₹1.98 लाख करोड़ के रिकॉर्ड हाई पर

Gold Report: गोल्ड की बढ़ती चमक ने इसकी मांग सुस्त की लेकिन बिक्री वैल्यू रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गई। इसका खुलासा वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों से हुआ है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council- WGC) की भारत पर बनी ताजा रिपोर्ट के अनुसार इस साल 2026 की दूसरी तिमाही अप्रैल-जून 2026 में भारतीयों ने वॉल्यूम के हिसाब से कम सोना खरीदा लेकिन रिकॉर्ड ऊंची कीमतों के कारण सोने पर अब तक का सबसे अधिक खर्च किया। जून 2026 तिमाही में देश में गोल्ड की मांग सालाना आधार पर 6% घटकर 131 टन रह गई, जो हालिया वर्षों में साल की सबसे कमजोर जून तिमाही में से एक रही।। हालांकि जितनी भी डिमांड रही, उसकी वैल्यू 50% बढ़कर रिकॉर्ड ₹1.98 लाख करोड़ पर पहुंच गई, क्योंकि घरेलू बाजार में गोल्ड के भाव इस दौरान करीब 59% मजबूत हुए।

इस कारण कमजोर हुई गोल्ड की मांग

गोल्ड के सेल्स वॉल्यूम में गिरावट की मुख्य वजह इसके भाव में दो साल में ताबड़तोड़ तेजी रही। इसके अलावा मई के मध्य में आयात शुल्क में बढ़ोतरी, रुपये की कमजोरी और खरीदारी के लिए शुभ नहीं समझे जाने वाले महीने ने भी दबाव बनाया। इंटरनेशनल मार्केट में इसकी कीमतें कुछ नरम हुईं लेकिन आयात शुल्क और रुपये की कमजोरी के कारण भारत में इसके भाव ऊंचे बने रहे। हालांकि मार्च तिमाही की तुलना में जून तिमाही में अक्षय तृतीया और शादी-ब्याह के मौसम की खरीदारी के चलते ज्वेलरी की मांग 14% बढ़कर 75 टन हो गई लेकिन फिर भी सालाना आधार पर यह 15% कम रही और साल 2000 के बाद दूसरी सबसे कमजोर जून तिमाही रही।

बदला खरीदारी का तरीका

ऊंची कीमतों के बावजूद लोगों ने सोना खरीदना बंद नहीं किया, बल्कि अपनी खरीदारी का तरीका बदल दिया। ज्वेलर्स के मुताबिक हल्के वजन, कम कैरेट और स्टडेड (रत्न जड़ी) ज्वेलरी की मांग बढ़ी। पुराने गहने बदलकर नए खरीदने का चलन भी तेज हुआ और कुछ ज्वेलर्स के मुताबिक उनकी कुल बिक्री का 70% तक हिस्सा इसी के जरिए आया और जून तिमाही में इसमें 10–20% की तेजी आई। जून तिमाही में ज्वेलरी की खरीदारी वॉल्यूम के हिसाब से भले ही कम हुई लेकिन वैल्यू 34% बढ़कर ₹1.13 लाख करोड़ हो गई। इस दौरान भारत दुनिया का सबसे बड़ा ज्वेलरी मार्केट बना रहा और ग्लोबल ज्वेलरी डिमांड में उसकी हिस्सेदारी 27% रही।

बार, कॉइन्स और गोल्ड ईटीएफ मिलाकर इंवेस्टमेंट डिमांड तीन धमाकेदार तिमाही के बाद जून तिमाही में कमजोर हुई। निवेश की मांग घटकर 54 टन रह गई जबकि इससे पहले की तीन तिमाहियों में औसतन मांग 100 टन की थी। हालांकि जून तिमाही में मांग घटने के बावजूद यह लॉन्ग टर्म एवरेज से ऊपर बनी रही।

बार और सिक्कों की खरीदारी मार्च तिमाही की तुलना में 19% घटकर जून तिमाही में 50 टन रह गई, क्योंकि कीमतों में तेज उछाल के बाद निवेशकों ने कुछ समय के लिए इंतजार करना उचित समझा। फिर भी सालाना आधार पर यह 9% अधिक रहा और इस साल की पहली छमाही में बार और सिक्कों की खरीद 13 साल के रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गई।

गोल्ड ईटीएफ की बात करें तो मार्च तिमाही में रिकॉर्ड निवेश के बाद जून तिमाही में इसकी मांग घटकर लगभग 4 टन रह गई। इसके बावजूद भारत उन देशों में शुमार रहा, जहां गोल्ड ईटीएफ में निवेश आया, जबकि अमेरिका और चीन जैसे देशों में निवेशकों ने पैसे निकाले। जून के अंत तक भारत में गोल्ड ईटीएफ की कुल होल्डिंग 119 टन और AUM (एसेट अंडर मैनेजमेंट) ₹1.7 लाख करोड़ तक पहुंच गईं।

सप्लाई की बात करें तो देश में गोल्ड की उपलब्धता घटकर 120 टन रह गई, जो पिछले छह साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है। इसकी मुख्य वजह आयात शुल्क बढ़ने के बाद सोने के आयात में भारी गिरावट रही। तिमाही आधार पर इसमें 53% और सालाना आधार पर 22% की गिरावट आई। हालांकि वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है कि घरेलू बाजार में गोल्ड की कोई कमी नहीं थी। पहले से मौजूद स्टॉक और रिसाइकल्ड गोल्ड मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त रहा।

रिपोर्ट के मुताबिक ऊंची कीमतों के बावजूद लोगों ने पुराने गहने बेचने की बजाय उन्हें गिरवी रखकर कर्ज लेना अधिक पसंद किया। बैंकों में बकाया गोल्ड लोन सालाना आधार पर दोगुना होकर ₹5.1 लाख करोड़ पहुंच गया, जबकि एनबीएफसी कंपनियों का गोल्ड लोन पोर्टफोलियो 70% बढ़कर यह ₹3.3 लाख करोड़ तक पहुंच गया।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SBI Funds Q1 Results: आईपीओ के बाद पहला रिजल्ट, ₹873 करोड़ का मुनाफा; शेयरों पर रहेगी नजर

SBI Funds Q1 Results: देश की सबसे बड़ी म्यूचुअल फंड कंपनी SBI Funds Management ने जून तिमाही के नतीजे जारी किए हैं। यह आईपीओ लिस्टिंग के बाद कंपनी का पहला रिजल्ट है। इसका शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 3.3% बढ़कर ₹873 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹845 करोड़ था।

ऑपरेटिंग प्रॉफिट में 17% की बढ़ोतरी

जून तिमाही में SBI Funds का ऑपरेटिंग प्रॉफिट 17% बढ़कर ₹907 करोड़ हो गया। वहीं, पिछली तिमाही के मुकाबले शुद्ध मुनाफे में 37% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

कंपनी की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 15.2% बढ़कर ₹1,146 करोड़ रही, जो एक साल पहले ₹995 करोड़ थी।

AUM बढ़कर ₹12.6 लाख करोड़

SBI Funds का क्वार्टली एवरेज एसेट अंडर मैनेजमेंट (QAAUM) बढ़कर ₹12.6 लाख करोड़ पहुंच गया। यह सालाना आधार पर 11% की बढ़ोतरी है। इसके साथ ही 15.1% मार्केट शेयर के साथ SBI Funds देश की सबसे बड़ी म्यूचुअल फंड कंपनी बनी हुई है।

इक्विटी और पैसिव फंड में भी बढ़त

SBI Funds का एक्टिव इक्विटी QAAUM 10% बढ़कर ₹8.6 लाख करोड़ हो गया। वहीं, पैसिव फंड QAAUM 12% बढ़कर ₹4 लाख करोड़ पहुंच गया। इस सेगमेंट में कंपनी की 27.4% मार्केट हिस्सेदारी है और वह पहले स्थान पर बनी हुई है।

SIP और निवेशकों की संख्या बढ़ी

30 जून 2026 तक कंपनी का SIP AUM 15% बढ़कर ₹2 लाख करोड़ हो गया। SBI Funds के यूनिक ग्राहकों की संख्या 12% बढ़कर 1.82 करोड़ पहुंच गई। वहीं, लाइव फोलियो 14% बढ़कर 2.2 करोड़ हो गए।

कंपनी के पास 1.6 करोड़ एक्टिव SIP हैं। इसके अलावा 2.23 करोड़ म्यूचुअल फंड फोलियो और 1.27 करोड़ निवेशक B-30 शहरों (शीर्ष 30 शहरों के बाहर) से हैं।

नए फंड भी लॉन्च किए

जून तिमाही के दौरान SBI Funds के पास 122 म्यूचुअल फंड स्कीम थीं। इनमें 35 इक्विटी स्कीम, 36 डेट स्कीम और 43 ETF व इंडेक्स फंड शामिल हैं। कंपनी ने इस दौरान 6 नई स्कीम भी लॉन्च कीं।

SBI Funds Management भारत की सबसे बड़ी म्यूचुअल फंड कंपनी है। यह SBI और यूरोप की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी Amundi का जॉइंट वेंचर है।

SBI Funds के शेयर

सोमवार को SBI Funds Management का शेयर 0.21% की गिरावट के साथ ₹587.95 पर बंद हुआ। यह फिलहाल अपनी लिस्टिंग प्राइस से 3.54% नीचे है। कंपनी का मार्केट कैप 1.20 लाख करोड़ रुपये है।

GE Shipping Q1 Results: शिपिंग कंपनी का मुनाफा 159% उछला, हर शेयर पर ₹14.40 डिविडेंड का ऐलान

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Muthoot Finance Q1 Results: प्रॉफिट 43 फीसदी बढ़ा, गोल्ड लोन एयूएम 2 लाख करोड़ रुपये के करीब

Muthoot Finance Q1 Results: मुथूट फाइनेंस ने जून तिमाही के नतीजों का ऐलान कर दिया। इस दौरान कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट साल दर साल आधार पर 43 फीसदी बढ़ा है। इसमें गोल्ड लोन पोर्टफोलियो में अच्छी ग्रोथ का हाथ रहा। कंपनी का कंसॉलिडेटेड टैक्स बाद प्रॉफिट (पीएटी) जून तिमाही में 2,825 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 1,974 करोड़ रुपये था।

कंसॉलिडेटेड लोन एसेट अंडर मैनेजमेंट 2 लाख करोड़ के करीब

Muthoot Finance का कंसॉलिडेटेड लोन एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) जून तिमाही में साल दर साल आधार पर 43 फीसदी बढ़कर 1,91,531 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले की समान अवधि में यह 1,33,938 करोड़ रुपये था। कंपनी का कंसॉलिडेटेड PAT तिमाही दर तिमाही आधार पर 17 फीसदी गिरा। मार्च तिमाही में 3,397 करोड़ रुपये था। तिमाही दर तिमाही आधार पर एयूएम फीसदी बढ़ा।

कोर गोल्ड लोन  बना बिजनेस का ग्रोथ इंजन

कंपनी को कोर गोल्ड लोन बिजनेस से ग्रोथ को सबसे ज्यादा सपोर्ट मिला। कंसॉलिडेटेजड गोल्ड लोन एयूएम साल दर साल आधार पर 48 फीसदी बढ़कर 1,75,527 करोड़ रुपये हो गया। एक साल में यह 56,767 करोड़ रुपये का इजाफा है। कंपनी ने 1 अगस्त को जून तिमाही के नतीजों का ऐलान किया। कंपनी के शेयरों पर नतीजों का असर 3 अगस्त को शेयर बाजार खुलने पर दिखेगा।

स्टैंडएलोन टैक्स बाद मुनाफा 2550 करोड़ रुपये

जून तिमाही में स्टैंडएलोन आधार पर कंपनी का टैक्स बाद मुनाफा (PAT) साल दर साल आधार पर 25 फीसदी बढ़कर 2,550 करोड़ रुपये रहा। स्टैंडएलोन लोन एयूएम 43 फीसदी बढ़कर 1,72,053 करोड़ रुपये रहा। स्टैंडएलोन गोल्ड लोन एयूएम साल तर साल आधार पर 44 फीसदी बढ़कर 1,63स298 करोड़ रुपये रहा। कंपनी ने बताया कि जून के अंत में ब्रांच नेटवर्क बढ़कर 7,654 हो गया। एक साल पहले यह 7,413 था।

FY27 की शुरुआत कंपनी के लिए अच्छी रही

मुथूट फाइनेंस के चेयरमैन जॉर्ज जेकब मुथूट ने कहा कि कंपनी के लिए FY27 की शुरुआत स्ट्रॉन्ग रही। कंसॉलिडेटेड एयूएम अब तक के सबसे हाई लेवल पर पहुंच गया। इसमें कोर गोल्ड लोन बिजनेस के लगातार बेहतर प्रदर्शन का हाथ रहा। उन्होंने कहा कि जून तिमाही के प्रदर्शन से स्ट्रॉन्ग कस्टमर डिमांड का संकेत मिलता है।

31 जुलाई को शेयरों में अच्छी तेजी

मुथूट फाइनेंस का शेयर 31 जुलाई को 3.98 फीसदी चढ़कर 3,128 रुपये पर बंद हुआ। बीते एक साल में कंपनी का शेयर 20 फीसदी से ज्यादा चढ़ा है। 31 जुलाई को शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक निफ्टी और सेंसेक्स भी हरे निशान में बंद हुए। इस हफ्ते बीते चार महीनों में शेयर बाजार में सबसे ज्यादा तेजी आई।

Bajaj Finserv Share Price: बजाज ग्रुप की कंपनी का मुनाफा 18% बढ़ा, NII रही 20% ज्यादा; शेयर में 6% तक तेजी

बजाज ग्रुप की कंपनी बजाज फिनसर्व के शेयरों में 31 जुलाई को अच्छी तेजी है। कंपनी ने अप्रैल-जून 2026 तिमाही के नतीजे जारी किए हैं। इसके बाद शेयर में पिछली क्लोजिंग से 6 प्रतिशत तक की बढ़त दिखी। BSE पर भाव 2025.45 रुपये के हाई तक गया। कंपनी का मार्केट कैप 3.22 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। कंपनी ने शेयर बाजारों को बताया है कि जून 2026 तिमाही में उसका शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 18 प्रतिशत बढ़कर 6,296.67 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले मुनाफा 5329.17 करोड़ रुपये था।

कंपनी के मालिकों के लिए शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा 3,132.35 करोड़ रुपये रहा, जो एक साल पहले 2,789.05 करोड़ रुपये था। कुल इनकम एक साल पहले से 19 प्रतिशत बढ़कर 42,036.90 करोड़ रुपये हो गई। जून 2025 तिमाही में यह 35300.02 करोड़ रुपये थी। खर्च 33,109.82 करोड़ रुपये के रहे, जो जून 2025 तिमाही में 28,097 करोड़ रुपये के थे।

जून 2026 तिमाही में बजाज फिनसर्व की शुद्ध ब्याज आय सालाना आधार पर 20 प्रतिशत बढ़कर 14,528 करोड़ रुपये हो गई। एक साल पहले यह 12,083 करोड़ रुपये थी। एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) 33,027 करोड़ रुपये पर पहुंच गए। बजाज फिनसर्व एक नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी है। यह बजाज ग्रुप के फाइनेंशियल सर्विसेज बिजनेस के लिए होल्डिंग कंपनी है। यह बजाज फाइनेंस की पेरेंट कंपनी भी है।

कंपनी री-इंश्योरेंस बिजनेस में करेगी एंट्री

बजाज फिनसर्व के बोर्ड ने एक नई बनी सब्सिडियरी के जरिए री-इंश्योरेंस बिजनेस में उतरने की योजना को भी मंजूरी दी है। कामकाज शुरू करने से पहले इस प्रस्ताव के लिए इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) और अन्य संबंधित अथॉरिटीज से मंजूरी लेनी होगी। री-इंश्योरेंस को आसान शब्दों में “बीमा कंपनियों का बीमा” कहा जाता है। यह आम जनता के लिए नहीं होता। इसमें एक मुख्य बीमा कंपनी अपने द्वारा उठाए गए जोखिम का कुछ हिस्सा दूसरी री-इंश्योरेंस कंपनी को ट्रांसफर कर देती है। यह कदम बड़े नुकसान से बचने या आपदाओं के समय आर्थिक रूप से सुरक्षित रहने के लिए उठाया जाता है।

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Bajaj Finserv का शेयर एक महीने में 13 प्रतिशत मजबूत

बजाज फिनसर्व के शेयर की फेस वैल्यू 1 रुपये है। शेयर की कीमत एक महीने में 13 प्रतिशत चढ़ी है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 58.71 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। शेयर का BSE पर 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 2,194.65 रुपये और एडजस्टेड लो 1,598.15 रुपये है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।