Q1 Results: NBFC कंपनी का मुनाफा 189% उछला, शेयरों पर रहेगी नजर

IIFL Finance Q1 Results: NBFC कंपनी IIFL Finance ने जून तिमाही में शानदार नतीजे पेश किए हैं। अप्रैल-जून तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 189.3% बढ़कर ₹675.1 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी ने ₹233.4 करोड़ का मुनाफा कमाया था। बेहतर लोन ग्रोथ, बढ़ी ब्याज आय और कम प्रावधान (Provision) की वजह से कंपनी का प्रदर्शन मजबूत रहा।

NII में तगड़ा उछाल दिखा

तिमाही के दौरान IIFL Finance की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 54.8% बढ़कर ₹2,003.9 करोड़ पहुंच गई, जो पिछले साल ₹1,294.7 करोड़ थी। वहीं, प्रावधान घटकर ₹294.2 करोड़ रह गया, जो एक साल पहले ₹512.5 करोड़ था।

कंपनी की कुल आय 34% बढ़कर ₹2,202.4 करोड़ रही। वहीं, Pre-Provision Operating Profit 50% बढ़कर ₹1,252.4 करोड़ और Profit Before Tax 161% बढ़कर ₹928.6 करोड़ हो गया।

गोल्ड लोन बिजनेस में तेजी

IIFL Finance की कुल Assets Under Management (AUM) 38% बढ़कर ₹1.15 लाख करोड़ हो गई। इसमें सबसे बड़ा योगदान गोल्ड लोन कारोबार का रहा। गोल्ड लोन AUM सालाना आधार पर 114% बढ़कर ₹58,406 करोड़ पहुंच गया। इस पोर्टफोलियो का GNPA सिर्फ 0.61% रहा।

होम फाइनेंस AUM बढ़कर ₹41,540 करोड़ और MSME लोन पोर्टफोलियो ₹10,808 करोड़ हो गया। माइक्रोफाइनेंस पोर्टफोलियो भी बढ़कर ₹9,473 करोड़ पहुंच गया।

एसेट क्वालिटी भी मजबूत

IIFL Finance का GNPA 1.6% और NNPA 0.8% रहा। दोनों में पिछली तिमाही के मुकाबले 9-9 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, Provision Coverage Ratio बढ़कर 94% पहुंच गया।

कंपनी का RoA 3.1%, RoE 19.5%, बुक वैल्यू ₹333.9 और CRAR 24.3% रहा। कंपनी के पास ₹7,148 करोड़ की लिक्विडिटी भी मौजूद है।

FY27 के लिए क्या है लक्ष्य?

IIFL Finance ने FY27 में करीब 25% AUM ग्रोथ का लक्ष्य रखा है। कंपनी की योजना सिक्योर्ड लेंडिंग बढ़ाने, बैंकों के साथ को-लेंडिंग साझेदारी मजबूत करने, इक्विटी जुटाने और एसेट क्वालिटी बनाए रखने की है।

IIFL Finance का शेयर बुधवार को 0.97% गिरकर ₹566.55 पर बंद हुआ। इसने एक साल में 7.12% का रिटर्न दिया है।

IndusInd Bank Q1 Results: प्रॉफिट 47% बढ़कर 1003 करोड़ रुपये रहा, एसेट क्वालिटी बेहतर हुई

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Trump Tariff: ट्रंप का जेनेरिक दवाओं पर 200% टैरिफ लगाने का प्लान, क्या भारतीय फार्मा कंपनियों पर पड़ेगा असर? समझिए पूरा मामला

Trump Tariff: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय दवा कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है। उन्होंने जेनेरिक दवाओं पर चरणबद्ध तरीके से भारी टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। अगर यह योजना लागू होती है तो 2029 से अमेरिका में आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं पर 200% तक टैरिफ लग सकता है। हालांकि, फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है। इसकी वजह यह है कि अभी सरकार का आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है।

ट्रंप का पूरा प्लान क्या है?

21 जुलाई को ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर कहा कि 1 अगस्त 2026 से अगले दो साल तक जेनेरिक दवाओं पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा।

इसके बाद अगस्त 2028 से 100% टैरिफ लागू होगा। फिर अगस्त 2029 से इसे बढ़ाकर 200% कर दिया जाएगा। ट्रंप चाहते हैं कि दवा कंपनियां अपनी फैक्टरी अमेरिका में लगाएं। इसी मकसद से यह कदम उठाया जा रहा है।

ट्रंप ऐसा क्यों करना चाहते हैं?

यह फैसला अमेरिका की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत दवा उत्पादन को दोबारा अपने देश में लाया जा रहा है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि दवाओं और उनके कच्चे माल के लिए दूसरे देशों पर ज्यादा निर्भर रहना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ठीक नहीं है।

इसी वजह से अमेरिका अब दवा कंपनियों को स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहता है।

भारत की कंपनियों पर कितना असर पड़ेगा?

भारत हर साल अमेरिका को 9.7 अरब डॉलर से ज्यादा की दवाएं भेजता है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा जेनेरिक दवाओं का होता है। अमेरिका में बिकने वाली करीब 40% से 50% जेनेरिक दवाएं भारतीय कंपनियां सप्लाई करती हैं।

फिलहाल भारतीय कंपनियों की कमाई पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। उनके पास करीब दो साल का समय है। इस दौरान वे अमेरिका में निवेश बढ़ा सकती हैं, सप्लाई चेन बदल सकती हैं या किसी राहत के लिए बातचीत कर सकती हैं। वैसे भी भारत की कई बड़ी दवा कंपनियों के अमेरिका में पहले से प्लांट हैं।

सबसे बड़ा सवाल क्या है?

अभी यह साफ नहीं है कि टैरिफ सिर्फ तैयार दवाओं पर लगेगा या फिर API (एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट) पर भी लागू होगा। अगर API भी दायरे में आया तो कंपनियों की लागत और मुनाफे पर ज्यादा असर पड़ सकता है। इसलिए इंडस्ट्री अंतिम नियमों का इंतजार कर रही है।

एक्सपर्ट क्या मानते हैं?

Mirae Asset Sharekhan के रिसर्च एनालिस्ट थॉमस वी. अब्राहम का कहना है कि बाजार अभी अंतिम नियमों का इंतजार कर रहा है। उनके मुताबिक, भारत की ज्यादातर बड़ी दवा कंपनियों के अमेरिका में पहले से मैन्युफैक्चरिंग प्लांट हैं। ऐसे में दो साल का समय नई शर्तों के हिसाब से खुद को तैयार करने के लिए काफी हो सकता है।

वहीं, Indian Pharmaceutical Alliance के महासचिव सुदर्शन जैन ने कहा कि भारतीय कंपनियां अमेरिका में 40 से ज्यादा मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी चला रही हैं। इससे वहां रोजगार भी मिलता है और दवाओं की सप्लाई चेन मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री दोनों देशों की सरकारों के साथ बातचीत जारी रखेगी।

दूसरी ओर, Entod Pharmaceuticals के CEO निखिल मसूरकर का मानना है कि भारतीय दवा कंपनियों को अब सिर्फ अमेरिका पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्हें मध्य पूर्व, एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे नए बाजारों में भी तेजी से विस्तार करना चाहिए।

दबाव बनाने की रणनीति?

कुछ एनालिस्टों का यह भी मानना है कि ट्रंप का यह ऐलान भारत के साथ बेहतर ट्रेड डील कराने के लिए दबाव बनाने की रणनीति हो सकता है। उनका कहना है कि अमेरिका में 90% से ज्यादा प्रिस्क्रिप्शन जेनेरिक दवाओं के होते हैं। अगर इन पर 200% टैरिफ लगा तो दवाएं महंगी हो जाएंगी। इसका बोझ अमेरिकी मरीजों पर पड़ेगा। चुनावी माहौल में यह फैसला ट्रंप के लिए भी आसान नहीं होगा।

IndusInd Bank Q1 Results: प्रॉफिट 47% बढ़कर 1003 करोड़ रुपये रहा, एसेट क्वालिटी बेहतर हुई

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

IndusInd Bank Q1 Results: प्रॉफिट 47% बढ़कर 1003 करोड़ रुपये रहा, एसेट क्वालिटी बेहतर हुई

IndusInd Bank Q1 Results: इंडसइंड बैंक ने 22 जुलाई को जून तिमाही के नतीजों का ऐलान किया। इस दौरान बैंक का स्टैंडएलोन प्रॉफिट 47 फीसदी बढ़कर 1,003 करोड़ रुपये रहा। इसमें संभावित बैड लोन के लिए बैंक की कम प्रोविजनिंग का बड़ा हाथ रहा। एक साल पहले की समान अवधि में बैंक का स्टैंडएलोन प्रॉफिट 684 करोड़ रुपये था। जून तिमाही में बैंक की एसेट क्वालिटी भी बेहतर हुई।

स्ट्रॉन्ग मैनेजमेंट के साथ ग्रोथ के एजेंडा पर फोकस

IndusInd Bank के एमडी और सीईओ राजीव आनंद ने कहा, “इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में हमने स्ट्रेटेजिक प्रायरिटीज पर फोकस बनाए रखा। हमारा जोर ग्रोथ, बैलेंसशीट की मजबूती और फ्रैंचाइज क्वालिटी पर रहा। हमें अनुभवी लीडरशिप टीम का सपोर्ट मिला। हम अच्छे रिस्क मैनेजजमेंट के साथ ग्रोथ के अपने एजेंडा पर अमल कर रहे हैं।”

रिटेल, एसएमई सहित डायवर्सिफायड पोर्टफोलियो पर जोर

उन्होंने कहा कि हम रिटेल, एसएमई और रूरल बिजनेसेज सहित डायवर्सिफायड पोर्टफोलियो बना रहे हैं। इसमें ग्रामीण इलाकों में विस्तार से शामिल है। हम माइक्रोफाइनेंस से आगे जाना चाहते है। साथ ही टेक्नोलॉजी और एआई-आधारित केपैबिलिटीज के जरिए कस्टमर एक्सपीरियंस बढ़ाने के लिए हम इनवेस्ट कर रहे हैं।

टैक्स बाद 1,037 करोड़ रुपये का प्रॉफिट

आनंद ने कहा कि जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट का असर वैश्विक स्थिति पर पड़ रहा है। इस बीच, हमारा जोर सस्टेनेबल ग्रोथ पर है। इंडिया में ग्रोथ को बढ़ाने वाले फैक्टर्स स्ट्रॉन्ग है। बैंक ने प्रोविजन से पहले 2,773 करोड़ रुपये प्रॉफिट कमाया, जबकि टैक्स के बाद प्रॉफिट 1,037 करोड़ रुपये रहा। बैंक का कैपिटल एडक्वेसी 17.15 फीसदी रहा। लिक्विडिटी कवरेज रेशियो 27 फीसदी रहा।

नेट इंटरेस्ट इनकम 4,685 करोड़ रुपये 

जून तिमाही में ग्रॉस एनपीए 3.25 फीसदी और नेट एनपीए 0.95 फीसदी रहा। नेट इंटरेस्ट इनकम इस दौरान 4,685 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 4,640 करोड़ रुपये रहा। नेट इंटरेस्ट मार्जिन 3.57 फीसदी रहा, जबकि एक साल पहले की समान अवधि में यह 3.46 फीसदी था। यील्ड ऑन एसेट्स 8.62 फीसदी रही। एक साल पहले की समान अवधि में यह 9.15 फीसदी थी।

कॉस्ट ऑफ फंड्स घटकर 5.05 फीसदी 

जून तिमाही में इंडसइंड बैंक की कॉस्ट ऑफ फंड 5.05 फीसदी रही, जबकि एक साल पहले की समान अवधि में यह 5.69 फीसदी थी। बैंक का लोन तिमाही दर तिमाही आधार पर 3.3 फीसदी बढ़ा। यह बीत छह तिमाहियों में तिमाही दर तिमाही आधार पर लोन में पहली ग्रोथ है। हालांकि, एक साल पहले के मुकाबले यह अब भी 2.3 फीसदी कम है।

22 जुलाई को बैंक के शेयर चढ़कर बंद हुए

इंडसइंड बैंक का शेयर 22 जुलाई को करीब 1 फीसदी चढ़कर 1,072 रुपये पर बंद हुआ। हालांकि, शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में बड़ी गिरावट दिखी। निफ्टी 0.79 फीसदी यानी 191 अंक गिरकर 23,996 पर रहा। सेंसेक्स 0.92 फीसदी यानी 715 अंक गिरकर 76,755 पर क्लोज हुआ। बैंक निफ्टी में 1.23 फीसदी गिरावट आई। मिडकैप शेयरों पर भी दबाव दिखा।