PM Kisan Yojana: 24वीं किस्त के ₹2000 कब आएंगे, किन किसानों का रुक सकता है पैसा? जानिए पूरी डिटेल

PM Kisan Yojana: देशभर के करोड़ों किसान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 24वीं किस्त का इंतजार कर रहे हैं। इसके तहत हर पात्र किसान के खाते में ₹2,000 भेजे जाते हैं। पिछली यानी 23वीं किस्त जून 2026 में जारी हुई थी।

अब सवाल है कि अगली किस्त सितंबर में आएगी या अक्टूबर में। कृषि विभाग से जुड़े अधिकारियों के बयानों के आधार पर अक्टूबर में किस्त आने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, सरकार ने अभी इसकी आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है।

अक्टूबर में आने की संभावना क्यों?

पीएम किसान योजना के तहत साल में ₹6,000 की मदद मिलती है। यह पैसा ₹2,000 की तीन किस्तों में सीधे बैंक खाते में भेजा जाता है। आमतौर पर दो किस्तों के बीच करीब चार महीने का अंतर रहता है।

23वीं किस्त जून में आई थी। इसलिए अक्टूबर में 24वीं किस्त आने की उम्मीद है। कृषि विभाग के उप कृषि निदेशक नीलेश चौरसिया ने भी संकेत दिया है कि अगली किस्त अक्टूबर में आ सकती है। हालांकि, पक्की तारीख के लिए सरकार के ऐलान का इंतजार करना होगा।

इन किसानों का रुक सकता है पैसा

24वीं किस्त के लिए कुछ जरूरी काम पूरे होने चाहिए। अगर इनमें कोई कमी है, तो पैसा अटक सकता है।

  • ई-केवाईसी पूरी नहीं है तो किस्त रुक सकती है।
  • लैंड रिकॉर्ड का वेरिफिकेशन भी जरूरी है।
  • बैंक खाते से जुड़ी जानकारी सही होनी चाहिए।
  • आधार और दूसरी जरूरी डिटेल्स सही रहे।

घर बैठे कैसे चेक करें स्टेटस?

  • पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
  • वहां Farmers Corner में जाकर Know Your Status विकल्प चुनें।
  • इसके बाद अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और कैप्चा डालें।
  • मोबाइल पर आए OTP को दर्ज करने के बाद किस्त से जुड़ा स्टेटस देख सकते हैं।
  • अगर कोई जानकारी अधूरी या पेंडिंग है, तो उसे समय रहते पूरा कर लें।

फिलहाल 24वीं किस्त की तारीख को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसलिए किसानों को सोशल मीडिया के दावों पर भरोसा करने के बजाय सरकारी अपडेट का इंतजार करना चाहिए।

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iPhone 18 Pro और 18 Pro Max की प्री-ऑर्डर डेट लीक! 12 सितंबर से शुरू हो सकती है बुकिंग, 48MP ट्रिपल कैमरा समेत मिलेंगे ये फीचर्स

Apple का सितंबर इवेंट, जिसका नाम “Surprise and Shine” है, 9 सितंबर 2026 को होने वाला है। यह इवेंट भारत में इंडियन स्टैंडर्ड टाइम (IST) के अनुसार रात 10:30 बजे शुरू होगा। इस दिन तीन नए फोन देखने को मिल सकते हैं: iPhone 18, iPhone 18 Pro और iPhone Ultra (Apple का पहला फोल्ड होने वाला फोन)। हाल ही में लीक हुई जानकारी से iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max के प्री-ऑर्डर की तारीख का पता चला है। यहां इनके बारे में, साथ ही इनके स्पेसिफिकेशन और कैमरा के बारे में पूरी जानकारी दी गई है।

Apple iPhone 18 Pro के प्री-ऑर्डर की डेट

Macwelt की एक रिपोर्ट के अनुसार, Apple प्री-ऑर्डर में एक दिन की देरी करेगा और शनिवार, 12 सितंबर 2026 से ऑर्डर लेना शुरू करेगा। ऐसा इसलिए होगा, क्योंकि 11 सितंबर का दिन अमेरिका में याद और शोक का दिन होता है। Apple शुरू होने का समय भी बदल सकता है। आम तौर पर शाम 5:30 बजे (IST) प्री-ऑर्डर शुरू होते हैं, लेकिन इस बार इनके 12 सितंबर को आधी रात (PT के अनुसार) और भारत में दोपहर लगभग 12:30 बजे शुरू होने की उम्मीद है।

Apple प्री-ऑर्डर शुरू करने का समय भी बदल सकता है। आमतौर पर प्री-ऑर्डर शाम 5:30 बजे (IST) शुरू होते हैं, लेकिन इस बार 12 सितंबर को PT के हिसाब से आधी रात से प्री-ऑर्डर शुरू होने की उम्मीद है। भारत में यह समय करीब दोपहर 12:30 बजे (IST) हो सकता है।

Apple iPhone 18 Pro के स्पेसिफिकेशन्स (अनुमानित)

Apple iPhone 18 Pro में 120Hz रिफ्रेश रेट वाला 6.3-इंच का OLED डिस्प्ले हो सकता है। इसमें 2nm प्रोसेस पर बना Apple A20 Pro चिपसेट इस्तेमाल किया जा सकता है। लीक से पता चलता है कि यह चिपसेट परफॉर्मेंस में 15% तेज होगा और लगभग 30% बेहतर एनर्जी एफिशिएंसी देगा। इस हैंडसेट में MagSafe वायरलेस चार्जिंग सपोर्ट के साथ 5100mAh की बैटरी भी मिल सकती है।

कैमरा की बात करें तो, Apple iPhone 18 Pro में ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप हो सकता है, जिसमें 48MP का प्राइमरी शूटर, 48MP का अल्ट्रा-वाइड-एंगल सेंसर और 48MP का टेलीफोटो सेंसर शामिल होगा। इसके फ्रंट में सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए 18MP का कैमरा हो सकता है।

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देवरिया के रहने वाले पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा बने राम मंदिर के पहले CEO, ऑपरेशन सिंदूर के समय की इनकी कहानी जानिए

Ram Mandir CEO: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में अपनी भूमिका के लिए ‘सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल’ पाने वाले रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को श्री राम जन्मभूमि मंदिर का चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) चुना गया है। यह फैसला तब लिया गया जब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बुधवार को अयोध्या में हुई एक बैठक में CEO की नियुक्ति पर विचार विमर्श किया।

इसके अलावा, ट्रस्ट ने तीन नए ट्रस्टी भी नियुक्त किए: दिल्ली के महेश भागचंदका (जो VHP के दिवंगत नेता अशोक सिंघल के रिश्तेदार हैं), अयोध्या के मदन मोहन पांडे और शिकोहाबाद की निर्मला यादव।

भारतीय वायु सेना के सम्मानित पूर्व कमांडर अप्रैल 2026 में रिटायर हुए थे और अब वे मंदिर ट्रस्ट के कामकाज के विस्तार के साथ एक अहम प्रशासनिक भूमिका संभालेंगे।

बता दें कि मिश्रा उन सीनियर मिलिट्री कमांडरों में शामिल थे जिन्हें ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान उनकी लीडरशिप के लिए सम्मानित किया गया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी शानदार सेवाओं और महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें ‘सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल’ से सम्मानित किया था।

यह मेडल युद्ध, संघर्ष या सैन्य कार्रवाई के दौरान सबसे बेहतरीन सेवा के लिए दिया जाता है और यह भारत के सबसे बड़े युद्ध-कालीन मिलिट्री सम्मानों में से एक है।

जितेंद्र मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर के हवाई हमलों के बारे में बताया

हाल ही में एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में, मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चलाए गए हवाई अभियान के बारे में बात की और बताया कि कैसे भारतीय सेना ने पाकिस्तान के अंदर काफी दूर मौजूद ठिकानों की पहचान की और उन पर हमला किया।

उन्होंने एक ऑपरेशन का जिक्र करते हुए बताया कि करीब 314 किलोमीटर दूर स्थित एक टारगेट को नष्ट किया गया था। मिश्रा के मुताबिक, इस कार्रवाई के दौरान सिर्फ एक छोटा सा ऑपरेशनल निर्देश दिया गया और इसके बाद टारगेट को सफलतापूर्वक तबाह कर दिया गया।

ऑपरेशन के बारे में बात करते हुए, मिश्रा ने प्लानिंग, सटीकता, टेक्नोलॉजी और सशस्त्र बलों की अलग-अलग शाखाओं के बीच तालमेल के महत्व पर जोर दिया। हालांकि, ऑपरेशन से जुड़ी कई बातें अभी भी गोपनीय रखी गई हैं।

उनकी बातों से एयर कैंपेन की प्लानिंग और उसे अंजाम देने के बारे में कुछ खास जानकारी मिली, हालांकि, उन्होंने ऐसी कोई संवेदनशील जानकारी साझा नहीं की, जिसका सार्वजनिक किया जाना सुरक्षा के लिहाज से ठीक न हो।

जितेंद्र मिश्रा का उत्तर प्रदेश से है खास कनेक्शन

मिश्रा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के भोपतपुरा के रहने वाले हैं, जो अयोध्या से सड़क मार्ग से लगभग तीन घंटे की दूरी पर है। वे एक मध्यम-वर्गीय परिवार से आते हैं और उनके पिता बतौर लेक्चरर काम करते थे।

अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर में एक अहम प्रशासनिक पद संभालने के बाद अब उनका उत्तर प्रदेश से और खास जुड़ाव हो गया है।

राम मंदिर ट्रस्ट के CEO के तौर पर जितेंद्र मिश्रा क्या करेंगे?

CEO के तौर पर, मिश्रा से उम्मीद है कि वे मंदिर ट्रस्ट के रोजमर्रा के कामकाज को संभालेंगे और इसके बढ़ते हुए ऑपरेशन्स में तालमेल बिठाएंगे।

उनकी जिम्मेदारियों में तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाएं, वित्तीय इंतजाम, स्टाफ के बीच तालमेल, सुरक्षा से जुड़ा तालमेल और बड़े धार्मिक आयोजनों का प्रबंधन शामिल हो सकता है।

अपने मिलिट्री करियर के दौरान बड़े संगठनों को संभालने, ऑपरेशनल प्लानिंग और तालमेल बिठाने का उनका अनुभव इस भूमिका के लिए काम का साबित हो सकता है।

रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा कौन हैं?

रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा (SYSM, AVSM, VSM) भारतीय वायु सेना के पूर्व अधिकारी हैं, जिन्होंने वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के तौर पर काम किया है।

रिटायरमेंट से पहले, मिश्रा ने इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (ऑपरेशन्स) के डिप्टी चीफ के तौर पर काम किया। इससे पहले, उन्होंने इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में डिप्टी चीफ (डॉक्ट्रिन, ऑर्गनाइज़ेशन और ट्रेनिंग) के तौर पर भी काम किया था।

मिश्रा को 6 दिसंबर, 1986 को एयर फोर्स एकेडमी से ट्रेनिंग पूरी करने के बाद भारतीय वायु सेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन किया गया था।

जितेंद्र मिश्रा का 38 साल का IAF करियर

मिश्रा का मिलिट्री करियर 38 साल से ज्यादा का रहा, जिसमें उन्होंने 3,000 घंटे से ज्यादा की फ्लाइंग का अनुभव हासिल किया।

उन्होंने 18 से ज्यादा तरह के फाइटर और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलिकॉप्टर उड़ाए और फाइटर पायलट, फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट के तौर पर काम किया। उन्होंने कई इंस्ट्रक्शनल और स्टाफ पद भी संभाले।

स्क्वाड्रन लीडर के तौर पर, मिश्रा उस टीम का हिस्सा थे जिसने कारगिल युद्ध की शुरुआत में मिराज 2000 एयरक्राफ्ट पर लेजर-गाइडेड बमों को ऑपरेशनल किया था। इन हथियारों का इस्तेमाल बाद में ऑपरेशन सफेद सागर के दौरान टाइगर हिल और मुंथो ढालो पर हमलों में किया गया था।

कारगिल युद्ध में जितेंद्र मिश्रा की भूमिका

IAF में अपने करियर के दौरान मिश्रा ने कई अहम ऑपरेशनल जिम्मेदारियां निभाईं। उन्होंने ईस्टर्न सेक्टर में एक फाइटर स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर के तौर पर काम किया और बाद में विंग कमांडर के पद पर रहते हुए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के नासिक डिवीन में चीफ टेस्ट पायलट बने।

ग्रुप कैप्टन के तौर पर, उन्होंने एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट में चीफ टेस्ट पायलट और नई दिल्ली में एयर हेडक्वार्टर में ऑपरेशनल प्लानिंग एंड असेसमेंट ग्रुप के डायरेक्टर के तौर पर काम किया।

जून 2010 में, फ्रांस में होने वाली मल्टीनेशनल एयर एक्सरसाइज ‘गरुड़ IV’ में भारतीय वायु सेना की टुकड़ी का नेतृत्व करने के लिए मिश्रा को चुना गया।

जितेंद्र मिश्रा की सीनियर IAF पोस्टिंग

एयर कमोडोर के तौर पर, मिश्रा ने एयर फोर्स स्टेशन बरेली में 15 विंग और एयर फोर्स स्टेशन पठानकोट में 18 विंग की कमान संभाली।

बाद में उन्होंने एयर हेडक्वार्टर में एयर कमोडोर (एयर स्टाफ रिक्वायरमेंट्स) के तौर पर काम किया।

एयर वाइस मार्शल के पद पर प्रमोट होने के बाद, मिश्रा ने एयर हेडक्वार्टर में असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ (प्रोजेक्ट्स) और एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट के कमांडेंट के तौर पर काम किया।

ऑपरेशन सिंदूर में जितेंद्र मिश्रा की भूमिका

मिश्रा को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी भूमिका के लिए 2025 में स्वतंत्रता दिवस पर ‘सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल’ से सम्मानित किया गया था।

उन्हें मिले अन्य सम्मानों में 2024 में मिला ‘अति विशिष्ट सेवा मेडल’ (AVSM) और 2013 में मिला ‘विशिष्ट सेवा मेडल’ (VSM) शामिल हैं।

‘सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल’ ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी बेहतरीन सेवा को मान्यता दी और उनके करियर में मिले सैन्य सम्मानों की लंबी सूची में एक और सम्मान जोड़ा।

जितेंद्र मिश्रा वेस्टर्न एयर कमांड के प्रमुख कब बने?

मिश्रा को एयर मार्शल के पद पर प्रमोट किया गया और उन्होंने 9 जनवरी, 2023 को इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (डॉक्ट्रिन, ऑर्गनाइज़ेशन और ट्रेनिंग) के डिप्टी चीफ के तौर पर कार्यभार संभाला।

इसके बाद, 5 दिसंबर, 2023 को वे इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (ऑपरेशन्स) के डिप्टी चीफ बने।

1 जनवरी, 2025 को मिश्रा ने वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ का पद संभाला। उन्होंने एयर मार्शल पंकज मोहन सिन्हा की जगह ली, जो 31 दिसंबर, 2024 को रिटायर हुए थे।

बता दें कि 38 साल से ज्यादा के करियर के बाद, मिश्रा अप्रैल 2026 में इंडियन एयर फोर्स से रिटायर हुए।

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Pharma Mutual Funds: 1 साल में 30% तक रिटर्न, 10 फंड ने दिया 20% से ज्यादा फायदा; क्या अभी भी है निवेश का मौका?

Pharma Mutual Funds: पिछले एक साल में फार्मा सेक्टर ने निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया है। Nifty Pharma Index करीब 25% चढ़ा है। वहीं, फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टोरल म्यूचुअल फंड्स ने 11% से 30% तक रिटर्न दिया है।

Value Research के आंकड़ों के मुताबिक, 19 एक्टिव फार्मा सेक्टोरल फंड्स में से सिर्फ 10 फंड्स ने एक साल में 20% से ज्यादा रिटर्न दिया। इन फंड्स का औसत रिटर्न 20.7% रहा। BSE Healthcare TRI ने इस दौरान 18.68% रिटर्न दिया।

1 साल में सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाले 10 फार्मा फंड

फंड1 साल का रिटर्न
Kotak Healthcare Direct29.80%
HDFC Pharma and Healthcare Direct28.85%
PGIM India Healthcare Direct28.04%
Quant Healthcare Direct27.02%
Bajaj Finserv Healthcare Direct26.30%
WhiteOak Capital Pharma and Healthcare Direct

25.87%
ICICI Pru Nifty Pharma Index Direct

23.89%
SBI Healthcare Opportunities Direct23.59%
Mirae Asset Healthcare Direct22.91%
Tata Nifty MidSmall Healthcare Index Direct20.93%

डेटा: Value Research, 28 अगस्त 2026 तक

फार्मा सेक्टर क्यों चढ़ा?

फार्मा कंपनियों के शेयरों में तेजी के पीछे कई वजहें रहीं। अमेरिका में भारतीय जेनेरिक दवा कंपनियों के लिए माहौल बेहतर हुआ है। कुछ फार्मा इंपोर्ट पर 100% अमेरिकी टैरिफ से जेनेरिक दवाओं और उनसे जुड़े इंग्रीडिएंट्स को बाहर रखा गया।

घरेलू मांग भी मजबूत बनी हुई है। भारत का फार्मा एक्सपोर्ट FY27 की पहली तिमाही में 6.8% बढ़कर 8.1 अरब डॉलर पहुंच गया। सरकार भी Biopharma SHAKTI जैसी योजनाओं के जरिए सेक्टर में निवेश बढ़ा रही है।

Warren Buffett: वॉरेन बफे ने 1977 में बताए थे निवेश के 5 नियम, आज भी हर निवेशक के लिए हैं काम के

आगे निवेश करना सही है?

Anand Rathi Wealth के मुताबिक, फार्मा सेक्टर की वैल्यूएशन हाल की तेजी के बाद बढ़ गई है। फार्मा इंडेक्स करीब 43 गुना P/E पर कारोबार कर रहा है, जबकि इसका ऐतिहासिक औसत 37-38 गुना रहा है।

उनका मानना है कि अब आगे की तेजी कमाई की वास्तविक ग्रोथ पर निर्भर करेगी। सेक्टोरल फंड में निवेश से कॉन्सेंट्रेशन रिस्क भी बढ़ता है। ऐसे में सिर्फ हाल की तेजी देखकर फार्मा फंड में पैसा लगाने से पहले जोखिम और वैल्यूएशन पर जरूर विचार करना चाहिए।

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

आज का एक्सप्लेनर:आसिम मुनीर ने गुपचुप ‘तख्तापलट’ कर दिया; कैसे पाकिस्तान में सबसे ताकतवर बने, आखिर हासिल क्या करना चाहते हैं

पाकिस्तान में 5वीं बार सेना के जनरल ने ‘तख्तापलट’ कर दिया है। फर्क बस इतना है कि इस बार ये टैकों के जरिए नहीं, संसद के रास्ते हुआ है। नए कानून से फील्ड मार्शल आसिम मुनीर पाकिस्तान के सबसे ताकतवर शख्स बन गए हैं। इससे जुड़े 5 जरूरी सवालों के जवाब, आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: आसिम मुनीर को कौन-सी नई ताकतें मिल गई हैं?
जवाब: नवंबर 2022 में आसिम मुनीर पाकिस्तान के 17वें आर्मी चीफ बने थे। उनका कार्यकाल खत्म होने से 6 महीने पहले, यानी मई 2025 में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ लॉन्च कर दिया। पाकिस्तान ने जीत का झूठा दावा किया और आसिम मुनीर को ‘हीरो’ बताया। इसके बाद आसिम मुनीर की ताकत बढ़ती चली गई… 20 मई 2025 को मुनीर फील्ड मार्शल बने। ये पाकिस्तानी सेना की सबसे ऊंची रैंक होती है। आम बोलचाल में इसे ‘फाइव स्टार जनरल’ कहते हैं। इससे पहले पाकिस्तान में सिर्फ जनरल अयूब खान इस रैंक तक पहुंचे थे। नवंबर 2025 को पाकिस्तानी संविधान के आर्टिकल 243 में 27वां संशोधन करके सेना में नया चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज, CDF का पद बनाया गया। मुनीर देश के पहले CDF बने। वो 2030 तक इस पद पर रहेंगे। संशोधन के जरिए इसे बढ़ाया भी जा सकता है। 20 अगस्त 2026 को पाकिस्तानी संसद में 2 नए कानून पारित हुए, जिससे CDF को 5 बड़ी शक्तियां मिल गई हैं। डिफेंस फोर्सेज ऑफ पाकिस्तान एक्ट, 2026 के तहत 3 ताकतें… नेशनल कमांड अथॉरिटी एक्ट, 2026 के तहत 2 ताकतें… यानी आसिम मुनीर तीनों सेनाओं के प्रमुख हैं, न्यूक्लियर हथियारों से जुड़े फैसले लेने की भी ताकत है। सैन्य अफसरों से जुड़ा हर फैसला भी निर्णायक रूप से वही लेंगे और सबसे बड़ी बात- मुनीर पर कोई मुकदमा नहीं चल सकता। सवाल-2: मदरसे में पढ़े मुनीर पाकिस्तान के सबसे ताकतवर शख्स कैसे बन गए?
जवाब: मुनीर के पिता सैयद सरवर मुनीर 1947 में पंजाब के जालंधर से पलायन कर पाकिस्तान पहुंचे थे। वो रावलपिंडी के मशहूर एफजी टेक्निकल स्कूल के हेडमास्टर बने। साथ ही मस्जिद में इमामत करते और इस्लामिक उपदेश देते। गहरे धार्मिक झुकाव वाले इस घर में 1968 में आसिम मुनीर का जन्म हुआ। पाकिस्तानी जर्नलिस्ट एजाज सैयद के मुताबिक, घर वाले चाहते थे कि आसिम कुरआन हिफ्ज करे। मुनीर सातवीं तक मदरसे में पढ़े और कुरआन रटी। फिर कुछ दिन एफजी टेक्निकल स्कूल पढ़ने गए। इसके बाद रावलपिंडी के सर सैयद कॉलेज गए, जहां से पूर्व आर्मी चीफ कमर जावेद बाजवा ने पढ़ाई की थी। क्रिकेट के शौकीन मुनीर कॉलेज के दिनों में तेज गेंदबाज थे। स्कूल के बाद मुनीर ने जापान के फूजी स्कूल, क्वेटा के कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और मलेशिया के आर्म्ड फोर्सेज कॉलेज से पढ़ाई की। उसके बाद इस्लामाबाद की नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी से पब्लिक पॉलिसी और स्ट्रेटेजिक सिक्योरिटी मैनेजमेंट में मास्टर्स किया। 1986 में मिलिट्री करियर शुरू हुआ, सऊदी में दोबारा कुरआन रटी 25 अप्रैल 1986 को मुनीर को पाकिस्तान आर्मी में के फ्रंटियर फोर्स रेजिमेंट की 23वीं बटालियन में पहली तैनाती मिली। जब मुनीर लेफ्टिनेंट कर्नल बने, तो उन्हें सऊदी अरब में पाकिस्तानी दूतावास में तैनाती मिली। वहां मुनीर को महसूस हुआ कि वे कुरआन भूल रहे हैं। ऐसे में लगातार 3 साल वह छुट्टियों में घर नहीं गए और इस दौरान दोबारा कुरआन रटी। इसके बाद आसिम सियाचिन ग्लेशियर में भी रहे। आसिम का काफी वक्त पाकिस्तान के कब्जाए कश्मीर यानी PoK में भी गुजरा। फिर 2014 में मेजर जनरल, 2016 में पाकिस्तान के मिलिट्री इंटेलिजेंस के डायरेक्टर जनरल और सितंबर 2018 में लेफ्टिनेंट जनरल की पोस्ट तक पहुंचे। सिर्फ 8 महीने ISI चीफ रहे मुनीर, पीएम इमरान से झगड़ा भारी पड़ा 25 अक्टूबर 2018 को मुनीर ISI के डीजी बने। 8 ही महीने बाद जून 2019 में उन्हें हटाकर लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद को नया ISI डीजी बनाया गया। इसकी वजह थी- मुनीर का इमरान खान से झगड़ा। मुनीर ने इमरान खान की पत्नी बुशरा बीबी के करप्शन के एक मामले को उजागर कर दिया था। इसलिए इमरान खान के कहने पर तब के आर्मी चीफ बाजवा ने मुनीर को ISI से बाहर का रास्ता दिखाया था। इमरान पीएम पद से हटाए गए, तो मुनीर नए आर्मी चीफ बने मुनीर नवंबर 2022 तक करीब एक साल क्वार्टरमास्टर जनरल रहे। ये भी ISI चीफ के मुकाबले काफी छोटा पद होता है। हालांकि 2022 की शुरुआत में इस्लामाबाद का सियासी माहौल बदलने लगा। 10 अप्रैल को इमरान अविश्वास प्रस्ताव लाकर पीएम पद से हटाए गए। अगले ही दिन नवाज शरीफ के गुट वाली मुस्लिम लीग के नेता और नवाज के छोटे भाई शहबाज शरीफ पीएम बन गए। मुनीर शहबाज के करीबी थे। माना जाता है कि इमरान को सत्ता से हटाने के हथकंडों में मुनीर ने अंदरखाने साथ दिया। मुनीर को भी इसका ‘रिटर्न गिफ्ट’ मिला। 29 नवंबर को बाजवा को हटाकर मुनीर को नया आर्मी चीफ बना दिया गया। मुनीर पहले आर्मी चीफ बने, जो पाकिस्तान की दोनों खुफिया एजेंसियों- ISI और मिलिट्री इंटेलिजेंस के चीफ रहे थे। अब मुनीर पहले ऐसे आर्मी चीफ हैं, जिनके पास एक साथ 3 पद हैं- आर्मी चीफ के अलावा फील्ड मार्शल का मिलिट्री ओहदा और नया नवेला सबसे ताकतवर पद- CDF। सवाल-3: आसिम मुनीर आखिर हासिल क्या करना चाहते हैं?
जवाब: आसिम मुनीर खुद को ऐसे शासक के तौर पर स्थापित करना चाहते हैं, जिसके लिए कोई खतरा या चुनौती न पैदा हो सके। मुनीर ने अपने लिए ये शील्ड 3 तरह से बनाई है…. 1. मुनीर के आगे बेबस मौजूदा सरकार 2. चुनाव के जरिए आसिम को हटाना मुश्किल 3. सरकार के जरिए कोर्ट पर भी सेना कंट्रोल सवाल-4: पाकिस्तान के पुराने सैन्य तानाशाहों के साथ क्या हुआ था?
जवाब: पिछले सैन्य तानाशाहों ने इस्तीफा दिया, गिरफ्तार हुए या सबकुछ छोड़कर भागना पड़ा…. 1. जनरल अयूब खान: 27 अक्टूबर 1958 को राष्ट्रपति इस्कंदर मिर्जा का तख्तापलट किया। मिर्जा को इंग्लैंड भागना पड़ा और अयूब खुद राष्ट्रपति बने। 1965 की जंग में भारत से हार के बाद अयूब खान के बुरे दिन शुरू हो गए। मार्च 1969 में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। 2. जनरल याह्या खान: जनरल याह्या खान मार्शल लॉ लगाकर राष्ट्रपति बने। 1971 में भारत-पाकिस्तान जंग में पाकिस्तान की हार हुई और बांग्लादेश का जन्म हुआ। भारी बेइज्जती के बाद दिसंबर 1971 में याह्या को इस्तीफा देना पड़ा। नई सरकार ने उन्हें हाउस अरेस्ट कर दिया। 1980 में उनकी गुमनाम मौत हुई। 3. जनरल जिया-उल-हक: सेना प्रमुख जिया ने साल 1977 में पीएम जुल्फिकार अली भुट्टो का तख्तापलट किया। बाद में भुट्टो पर एक मर्डर केस चलाकर 1979 में उन्हें फांसी दे दी।
जिया ने पाकिस्तान में सबसे लंबे समय तक राज किया। 17 अगस्त 1988 को एक प्लेन क्रैश में उनकी मौत हो गई। 4. जनरल परवेज मुशर्रफ: 12 अक्टूबर 1999 को मुशर्रफ, पीएम नवाज शरीफ का तख्तापलट कर राष्ट्रपति बन बैठे। नवाज को जेल में डाल दिया। बाद में वे सऊदी अरब भाग गए। मुशर्रफ के खिलाफ विरोध हुए, उन्होंने इमरजेंसी भी लगाई, आखिरकार अगस्त 2008 में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। वे दुबई और फिर लंदन भाग गए। 2019 में उन्हें देशद्रोह के मामले में फांसी की सजा मिली। फरवरी 2023 में दुबई में उनकी मौत हो गई। सवाल-5: क्या मुनीर की सत्ता कायम होने से भारत को कोई खतरा है?
जवाब: मुनीर का रुख पूरी तरह एंटी इंडिया है… 7 अगस्त 2026 को पाकिस्तान, सऊदी और तुर्किये में एक डिफेंस डील हुई। इसके तहत किसी एक देश पर हमला, तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। पाकिस्तान को इस पैक्ट का पहला जनरल सेक्रेटरी जनरल बनाया गया है। ताकतें बढ़ने से आसिम मुनीर को अपने एंटी इंडिया एजेंडे पर काम करना आसान हो जाएगा। ये भारत के लिए चिंता का सबब हो सकता है। ———————— ये खबर भी पढ़ें… आज का एक्सप्लेनर:पाकिस्तान पर हमला हुआ तो लड़ने आएंगे सऊदी-तुर्किये, आखिर क्या है मक्का एग्रीमेंट; भारत कैसे काउंटर करेगा पाकिस्तान पर हमला हुआ, तो सऊदी और तुर्किये भी साथ लड़ने आएंगे। 7 अगस्त 2026 को मक्का में तीनों देशों में बीच एक खास रक्षा समझौता हुआ है। अब किसी एक पर हमला, तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…

Air Marshal Jeetendra Mishra : अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट को मिला पहला CEO, रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा की हुई सर्वसम्मति से नियुक्ति

Air Marshal Jeetendra Mishra : अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट को मिला पहला CEO, रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा की हुई सर्वसम्मति से नियुक्ति

ayodhya ram mandir trust meeting

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है। रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट का पहला Chief Executive Officer (CEO) नियुक्त किया गया है। ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने इसकी घोषणा की। कृष्ण मोहन के मुताबिक, CEO पद के लिए कुल 5,538 आवेदन प्राप्त हुए थे। आवेदनों की स्क्रीनिंग के बाद अंतिम तीन नामों पर चर्चा की गई और इसके बाद रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के नाम पर सर्वसम्मति बनी।

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ram mandir trust

ऑपरेशन सिंदूर में निभाई थी अहम भूमिका

 

ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने बताया कि जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति पर चर्चा के दौरान उनके सैन्य अनुभव को भी ध्यान में रखा गया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और उस ऑपरेशन के दौरान जितेंद्र मिश्रा कमांडर-इन-चीफ थे। जितेंद्र मिश्रा के अनुभव को देखते हुए उन्हें ट्रस्ट के CEO की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह पहली बार है जब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में CEO का पद बनाया गया है।

ट्रस्ट में तीन नए ट्रस्टी भी नियुक्त

 

CEO की नियुक्ति के साथ ट्रस्ट में तीन नए ट्रस्टियों के नामों का भी ऐलान किया गया है। इनमें दिल्ली के महेश भागचंदका, अयोध्या के मदन मोहन पांडेय और शिकोहाबाद की डॉ. निर्मला यादव शामिल हैं।

 

कृष्ण मोहन ने छोड़ा अंतरिम महासचिव का पद

 

ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने अपने पद से हटने की भी घोषणा की। उनके स्थान पर महाराज गोविंददेव गिरि को नया महासचिव बनाया गया है। वहीं, महेश भागचंदका को ट्रस्ट का नया कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

 

इस तरह राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में अब महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेगा। CEO के रूप में रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति को ट्रस्ट के कामकाज को अधिक व्यवस्थित और पेशेवर बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। 

Janmashtami 2026: 4 सितंबर को जन्म लेंगे लड्डू गोपाल, जानें देश के अलग-अलग हिस्सों में क्या है जन्माष्टमी का पर्व मनाने का तरीका

Janmashtami 2026: हजारों साल पहले द्वापर युग में भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान विष्णु ने देवकी और वासुदेव के आठवें पुत्र श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया था। इसलिए हर साल इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के भक्त श्रद्ध और उल्लास से उनका जन्मोत्सव मनाते हैं। इस दिन देश ही नहीं पूरी दुनिया के कृष्ण मंदिरों में विशेष सजावट, पूजा और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है। बहुत से श्रद्धालु इस दिन उपवास करते हैं और अपने घरों में कृष्ण लीला की झांकियां सजाते हैं और मध्य रात्रि श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाते हैं। इस साल जन्माष्टमी का पर्व 4 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा। वैसे इस पर्व को देश के अलग-अलग हिस्सों में मनाने की अलग-अलग परंपरा है। आइए जानें इसके बारे में

मध्यरात्रि पूजा कृष्ण के जन्म का प्रतीक

जन्माष्टमी के त्योहार का सबसे अहम हिस्सा है मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण जन्म। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, कृष्ण का जन्म मथुरा में आधी रात को हुआ था, जब उनके माता-पिता, देवकी और वासुदेव, राजा कंस द्वारा कैद किए गए थे। इसलिए भक्त दिन में व्रत रखते हैं और उनकेा जन्मोत्सव मनाते हैं। यह उत्सव मथुरा और वृंदावन में खास तौर पर बड़े पैमाने पर मनाया जाता है।

कृष्ण के चरण चिह्न से सजाते हैं घर

श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर लोग अपने घरों को साफ करते हैं और सजाते हैं। पूजा के कमरे की ओर जाने वाले दरवाजे से अक्सर चावल के आटे से छोटे पैरों के निशान बनाते हैं। छोटे पैर बाल कृष्ण के घर में आने को दिखाते हैं। यह एक ऐसी परंपरा है, जिससे भक्त प्रभु के बाल स्वरूप की लीला का आनंद लेते हैं।

महाराष्ट्र में होती दही हांडी प्रतियोगिता

कृष्ण का मक्खन और दही के लिए प्रेम सभी जानते हैं। भारत के महाराष्ट्र राज्य में जन्माष्टमी के मौके पर दही-हांडी प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है। दही हांडी में गोविंदा नाम के नौजवानों के ग्रुप ह्यूमन पिरामिड बनाते हैं और जमीन से बहुत ऊपर लटके एक मटके तक पहुंचकर उसे तोड़ते हैं। मटके में पारंपरिक रूप से दही, मक्खन, दूध और दूसरी चीजें होती हैं।

केरल में मटकी फोड़ने की है परंपरा

केरल में जन्माष्टमी पर्व पर मटकी फोड़ने की परंपरा है। कृष्ण जन्मोत्सव के दौरान, स्थानीय लोग उरियाडी मनाते हैं। इसमें हिस्सा लेने वाले लोग प्रसाद से भरे मिट्टी के मटके को जमीन से ऊपर लटकाकर फोड़ने की कोशिश करते हैं। केरल में जन्माष्टमी पर्व को अष्टमी रोहिणी के नाम से जाना जाता है।

तमिलनाडु में कृष्ण का स्वागत छोटे पैरों और त्योहार के खाने से होता है

तमिलनाडु में, कृष्ण जन्माष्टमी को गोकुलाष्टमी या कृष्ण जयंती के नाम से जाना जाता है। इसमें घरों को कोलम से सजाया जाता है। यहां भी लोग अपने घरों में बाहर से अंदर आते हुए बाल कृष्ण के छोटे पैरों के निशान बना सकते हैं। साथ ही, इस दिन घरों में श्री कृष्ण के लिए पारंपरिक प्रसाद और भोग तैयार किया जता है।

जन्माष्टमी में छप्पन भोग का प्रसाद

भगवान श्री कृष्ण के जन्मदिन का पर्व 56 भोग के बिना अधूरा है। छप्पन भोग, जिसका मतलब है 56 खाने की चीज़ें, कई परंपराओं में कृष्ण को चढ़ाई जाती हैं। इसमें मिठाई, नमकीन, फल और डेयरी से बनी चीजें शामिल हो सकती हैं। मक्खन स्वाभाविक रूप से एक खास जगह रखता है क्योंकि कृष्ण को माखन से बहुत प्यार है।

कृष्ण भक्ति के केंद्र मथुरा और वृंदावन

कुछ ही जगहें कृष्ण जन्माष्टमी से इतनी करीब से जुड़ी हैं जितनी मथुरा और वृंदावन। पारंपरिक रूप से मथुरा को कृष्ण का जन्मस्थान माना जाता है, जबकि वृंदावन में कृष्ण की बाल लीलाओं और युवावस्था की ढेरों कहानियां मौजूद हैं। जन्माष्टमी के दौरान, ब्रज क्षेत्र के मंदिरों और सड़कों को फूलों और रोशनी से सजाया जाता है।

कृष्ण की कहानियों को मंच पर लाती है रास लीला

जन्माष्टमी सिर्फ मंदिर के रीति-रिवाजों के बारे में नहीं है। यह कहानी सुनाने का भी त्योहार है। रास लीला और कृष्ण लीला के प्रदर्शन में कृष्ण के जीवन के किस्से फिर से दिखाने के लिए संगीत, नृत्य, संवाद और शानदार वेशभूषा का इस्तेमाल किया जाता है। यह परंपरा विशेष रूप से मथुरा और वृंदावन क्षेत्र से जुड़ी है, जबकि कृष्ण-केंद्रित प्रदर्शन परंपराएं मणिपुर और असम जैसी जगहों पर भी महत्वपूर्ण हैं।

अरनमुला में बड़े शाकाहारी भोज के साथ जन्माष्टमी मनाई जाती है

केरल के अरनमुला में, जन्माष्टमी अरनमुला पार्थसारथी मंदिर में अष्टमी रोहिणी वल्ला सद्या से जुड़ी है। सांपों वाली नावें, जिन्हें पल्लियोडम कहा जाता है, मंदिर पहुंचती हैं, जहां नाविक केले के पत्तों पर परोसे गए बड़े शाकाहारी भोजन में शामिल होने से पहले रस्मों में हिस्सा लेते हैं। नाविक वांची पाट्टू गाते हैं, और सामूहिक भोजन दिन के बड़े उत्सव का हिस्सा बन जाता है।

एक त्योहार, मनाने के कई तरीके

जन्माष्टमी का पर्व मनाने का पूरे भारत में एक कारण है। लेकिन यह देश के अलग-अलग कोनों में अलग-अलग तरह से मनाई जाती है। कृष्ण का जन्मदिन लोगों को अलग-अलग तरीकों से एक साथ लाता रहता है। परंपराएं राज्य दर राज्य बदल सकती हैं, लेकिन कृष्ण का स्वागत करने की खुशी उन सभी के केंद्र में रहती है।

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Ather plans to expand to 2000 stores by 2028

Ather plans to expand to 2000 stores by 2028
An outside image of an Ather showroom

Ather is targeting to more than double its retail footprint to between 1,800 and 2,000 stores over the next two years as the EV maker rolls out its new family scooter Konarc and expands production capacity, according to a senior company official. The company currently sells the 450X and Rizta electric scooters, which are positioned in the premium and mass premium segments of the market across some 750 stores. The company plans to use its new EL platform to broaden its product range into the more affordable segment.

  1. More scooters of different battery sizes expected from the EL platform
  2. Ather EV motorcycle at least two years away
  3. Production capacity to increase with the Aurangabad plant becoming operational

Number of retail stores and production to increase

More products expected from the Konarc’s EL platform

The newly unveiled Konarc will be available in two variants and six battery options at a starting ex-showroom price of Rs 99,999. The delivery of the first two battery options (S 125 and S 161) is set to commence in September 2026. “We are targeting 1,800 to 2,000 stores in the next 24 months,” Ather Energy’s Chief Business Officer Ravneet Phokela said. Phokela said the company expects the domestic market to remain its main focus for now, with exports only becoming important after a few years.

The EL platform, on which the Konarc is based, can produce different types of scooters, and it can also accommodate different battery sizes, wheel dimensions and dashboard designs. The company boasts that the platform helps launch more products while also reducing costs through changes like lower use of aluminium and simpler engineering. Ather has said it plans to launch multiple scooter products based on the platform first; and added that an Ather electric motorcycle is more than two years away.

Ather’s push into a wider range of scooters comes as the company looks to increase production capacity. Ather currently manufactures electric scooters at its Hosur plant, which has an annual production capacity of 4.20 lakh units. Its upcoming Aurangabad facility is expected to add another 5 lakh units of annual capacity when its first phase becomes operational later this year. The company said that it’s also considering whether to accelerate the second phase of the Aurangabad facility if demand continues to grow at its current pace.

With inputs from Stephen Raj Antony.
 

Rhetan TMT की कर्ज लेने की क्षमता ₹300 करोड़ तक बढ़ाने का प्लान, शेयरों में दिखी तेजी

TMT स्टील बार बनाने वाली कंपनी Rhetan TMT ने अपनी उधार लेने की सीमा बढ़ाने की तैयारी की है। कंपनी ने 16 सितंबर 2026 को होने वाली AGM में उधार लेने की सीमा ₹200 करोड़ से बढ़ाकर ₹300 करोड़ करने का प्रस्ताव रखा है।

कारोबार बढ़ाने के लिए बढ़ेगी उधारी की सीमा

कंपनी के मुताबिक, यह प्रस्तावित बढ़ोतरी कारोबार के विस्तार और भविष्य की फंडिंग जरूरतों के लिए की जा रही है। इससे कंपनी को ज्यादा फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी मिलेगी। सामान्य कामकाज के लिए लिए जाने वाले अस्थायी बैंक लोन इस सीमा में शामिल नहीं होंगे।

Rhetan TMT का कहना है कि पिछले पांच साल में उसका प्रॉफिट 140% CAGR से बढ़ा है। उधारी की सीमा बढ़ने से कंपनी को अपनी ग्रोथ योजनाओं के लिए फंड जुटाने में मदद मिल सकती है।

1 MW का कैप्टिव सोलर प्रोजेक्ट शुरू

Rhetan TMT ने गुजरात के काडी स्थित अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में 1 MW का कैप्टिव ग्राउंड-माउंटेड सोलर पावर प्रोजेक्ट भी शुरू कर दिया है। इससे कंपनी अपनी बिजली जरूरतों का एक हिस्सा रिन्यूएबल एनर्जी से पूरा करेगी।

कंपनी की कुल लागत में एनर्जी की हिस्सेदारी करीब 20% है। ऐसे में कैप्टिव सोलर पावर से लंबे समय में बिजली खर्च पर बेहतर नियंत्रण और ऑपरेशनल क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।

हाई-ग्रेड TMT प्रोडक्ट्स पर भी फोकस

कंपनी को Fe500D, Fe550 और Fe550D ग्रेड के लिए BIS सर्टिफिकेशन भी मिल चुका है। इससे कंपनी को इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन सेक्टर की ज्यादा वैल्यू वाले प्रोजेक्ट्स की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है।

मैनेजिंग डायरेक्टर शालिन शाह ने कहा कि सोलर पावर प्रोजेक्ट कंपनी की एनर्जी इकोनॉमिक्स को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है। कंपनी अब मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने, लागत पर नियंत्रण और प्रोडक्ट रेंज मजबूत करने पर फोकस कर रही है।

Rhetan TMT का शेयर बुधवार को 9.94% की तेजी के साथ 21.02 रुपये पर बंद हुआ। कंपनी का मार्केट कैप 1.67 हजार करोड़ रुपये है।

Zerodha संभालेगी IPO का काम! SEBI ने मर्चेंट बैंकर बनने का रास्ता किया साफ

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

रिपोर्ट-रूस की मदद से ईरान ने खतरनाक सुपरसोनिक मिसाइल बनाया:3 साल लगे; अमेरिकी जहाजों पर हमले में इस्तेमाल होगा

रूस गुपचुप तरीके से ईरान को सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकसित करने की तकनीक दे रहा था। फाइनेंशियल टाइम्स (FT) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस सीक्रेट प्रोजेक्ट की शुरुआत 2023 में हुई थी। अमेरिका-इजराइल के ईरान के खिलाफ युद्ध के दौरान भी इस पर काम जारी रहा। इस कार्यक्रम का कोडनेम C430L है। इसमें कुछ रूसी मिसाइल एक्सपर्ट ईरान के साथ काम कर रहे थे। कार्यक्रम का मकसद ईरान को ऐसी मिसाइल तकनीक विकसित करने में मदद करना है, जिसका इस्तेमाल अमेरिकी वॉरशिप के खिलाफ किया जा सकता है। FT के मुताबिक, लीक हुए दस्तावेजों से पता चलता है कि C430L कार्यक्रम को लेकर रूस और ईरान के बीच बातचीत 2026 की गर्मियों तक जारी थी। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि इस कार्यक्रम के तहत ईरान ने पूरी तरह तैयार सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकसित कर ली है या उसे सैन्य इस्तेमाल के लिए कब तक तैनात किया जा सकता है। ईरान के पास सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल क्षमता नहीं सुपरसोनिक का मतलब है ऐसी रफ्तार जो आवाज की गति (मैक 1) से ज्यादा हो। यह करीब 1,200 किमी/घंटा से ज्यादा की रफ्तार से उड़ती है। ईरान के पास तेज रफ्तार बैलिस्टिक और हाइपरसोनिक मिसाइलें हैं। ईरान अपनी फत्तह मिसाइल की रफ्तार करीब मैक 13 से 15 बताता है, यानी लगभग 16,000 से 18,500 किमी/घंटा। इन बैलिस्टिक मिसाइलों का उड़ने का तरीका अलग होता है। वह ऊपर जाती है और फिर तेज रफ्तार से नीचे अपने टारगेट की तरफ आती है। ऊंचाई पर आने वाली बैलिस्टिक मिसाइल रडार को ज्यादा आसानी से दिखाई दे सकती है। डिफेंस सिस्टम को उसे ट्रैक करने और उस पर हमला करने के लिए ज्यादा समय मिलता है। कम ऊंचाई पर आने वाली क्रूज मिसाइल जमीन या समुद्र की सतह के करीब उड़ती है। धरती की गोलाई और पहाड़ों जैसी चीजों की वजह से रडार उसे तब पकड़ सकता है, जब वह काफी करीब आ चुकी हो। यही वजह है कि ईरान सुपरसोनिक रफ्तार वाली क्रूज मिसाइल बना रहा है। C430L प्रोग्राम का मकसद- रैमजेट इंजन बनाना FT की जांच के मुताबिक, कार्यक्रम का मुख्य फोकस रैमजेट इंजन पर था। यह ऐसा इंजन है, जो तेज रफ्तार से उड़ रही मिसाइल को आगे बढ़ाने के लिए हवा और ईंधन का इस्तेमाल करता है। मिसाइल जब तेजी से आगे बढ़ती है तो सामने से आने वाली हवा इंजन के अंदर जाती है। वहां इस हवा में ईंधन मिलाकर जलाया जाता है। इससे पैदा होने वाली ताकत मिसाइल को आगे बढ़ाने और उसकी तेज रफ्तार बनाए रखने में मदद करती है। रैमजेट इंजन का तेज रफ्तार वाली मिसाइलों में इस्तेमाल होता है। हालांकि, इसे काम करने के लिए मिसाइल को पहले से पर्याप्त गति चाहिए। इसलिए शुरुआत में मिसाइल को गति देने के लिए अलग इंजन या लॉन्च सिस्टम की जरूरत हो सकती है। ईरान ने रैमजेट इंजन का टेस्ट भी किया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान रैमजेट इंजन विकसित कर चुका है और उसका उड़ान परीक्षण भी कर चुका है। पूर्व CIA विश्लेषक जिम लैमसन के मुताबिक, इस तरह की तकनीक ईरान को भविष्य में ऐसा हथियार सिस्टम विकसित करने में मदद कर सकती है, जो अमेरिकी नौसेना के जहाजों के लिए खतरा बने। ड्रोन से मिसाइल तकनीक तक पहुंचा रूस-ईरान का सहयोग ईरान पहले ही रूस को शाहेद ड्रोन दे चुका है। इन ड्रोन का इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में बड़े पैमाने पर हुआ है। ईरान ने रूस में इन ड्रोनों का उत्पादन शुरू करने में भी मदद की थी। वहीं रूस ने भी ईरान को सैन्य उपकरण और हथियार मुहैया कराए हैं। यह पहली बार हो रहा है जब रूस सिर्फ हथियार देने के बजाय ईरान की अपनी मिसाइल बनाने की क्षमता बढ़ाने में मदद कर रहा है। यही वजह है कि C430L प्रोग्राम को रूस और ईरान के सैन्य सहयोग में एक अहम कदम मान जा रहा है। रूस की सरकारी हथियार कंपनी भी शामिल एफटी के मुताबिक, सी430एल कार्यक्रम को रूस की सरकारी हथियार निर्यात कंपनी रोसबोरोनेक्सपोर्ट ने तैयार किया था। इस प्रोजेक्ट में उसने रूस की मिसाइल कंपनी एनपीओ मशिनोस्त्रोयेनिया के साथ काम किया। अमेरिका ने 2014 में NPO मशिनोस्त्रोयेनिया पर प्रतिबंध लगाए थे। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यह कंपनी जहाज, पनडुब्बी और जमीन से दागी जाने वाली क्रूज मिसाइलों पर काम करती है। यह कंपनी रूस के परमाणु हथियार कार्यक्रम से जुड़े काम में भी शामिल रही है। FT को मिले लीक दस्तावेजों और यात्रा रिकॉर्ड से पता चलता है कि C430L समझौते पर हस्ताक्षर होने से पहले रूस के हथियार निर्यात अधिकारियों और NPO मशिनोस्त्रोयेनिया के कई वरिष्ठ इंजीनियरों ने ईरान के कई दौरे किए थे।