भारत के 1 पैसे के चार्ज पर आपत्ति, चीन से 127% महंगी बिजली क्यों खरीद रहा बांग्लादेश?

Bangladesh Story: बांग्लादेश की तारिक रहमान की सरकार एक तरफ जहां भारत के मामूली पावर चार्ज पर आपत्ति जता रही है। वहीं, दूसरी तरफ वह चीनी कंपनी से बेहद महंगी दरों पर बिजली खरीदने की तैयारी कर रही है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब कुछ ही दिनों पहले ढाका ने सीमा पार बिजली लेनदेन के निपटान के लिए भारत द्वारा प्रस्तावित 0.01 रुपये प्रति यूनिट (1 पैसा) के चार्ज पर आपत्ति जताई थी। बांग्लादेश की आपत्ति के बाद भारत ने इस प्रस्तावित चार्ज को घटाकर आधा यानी 0.005 रुपये प्रति यूनिट कर दिया था।

अमीनबाजार में चीन का प्रोजेक्ट: वेस्ट मैनेजमेंट है उद्देश्य

‘इंडिया टुडे’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ढाका के अमीनबाजार लैंडफिल में बनने वाले चीनी प्रोजेक्ट की प्लांड कैपिसिटी 42 मेगावाट होगी। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य बांग्लादेश की राजधानी में बढ़ते वेस्ट मैनेजमेंट क्राइसिल का हल निकालना है। यह प्रोजेक्ट बिजली निर्माण का काम एक्स्ट्रा फायदे के लिए करेगा। आपको बता दें कि इस 42 मेगावाट के प्रोजेक्ट को भारत द्वारा बांग्लादेश को बड़े पैमाने पर की की जाने वाली इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई का रिप्लेसमेंट नहीं माना जा सकता।

बांग्लादेश इस समय गंभीर बिजली संकट, गैस सप्लाई में रुकावट और लंबे समय तक होने वाले ब्लैकआउट से जूझ रहा है। देश के कई हिस्सों में बिजली कटौती को लेकर विरोध प्रदर्शन भी शुरू हो चुके हैं। ऐसे संवेदनशील समय में चीनी कंपनी को 25 टका प्रति यूनिट देने का फैसला लिया गया है। यहां जानना जरूरी है कि अभी बांग्लादेश का एक टका भारत के 0.77 रुपये के करीब है।

इंपोर्टे़ बिजली के औसत खर्च से दोगुने से भी अधिक रेट

बांग्लादेश के न्यूज पेपर द डेली स्टार के मुताबित वित्तीय वर्ष 2020-21 और 2024-25 के बीच बांग्लादेश में इंपोर्टेट बिजली की औसत लागत दोगुने से अधिक हो गई है। ये 5.82 टका प्रति यूनिट से बढ़कर 11.72 टका प्रति यूनिट हो गई थी। इस बैकग्राउंड में देखें तो अमीनबाजार वेस्ट-टू-पावर प्रोजेक्ट के लिए प्रस्तावित 25 टका प्रति यूनिट का टैरिफ बांग्लादेश द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 में इंपोर्ट की गई बिजली के लिए चुकाई गई औसत कीमत से दोगुने से भी अधिक है।

ढाका शहर से निकलने वाले कचरे के पहाड़ों से बिजली और दूसरे जरूरी प्रोडक्ट्स बनाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि 25 टका की इस दर ने बांग्लादेश की बिजली रणनीति की कॉस्ट को लेकर नया विवाद खड़ा कर दिया है। वह भी खासकर तब जब बिजली की हर एक अतिरिक्त यूनिट और लागत की जांच की जा रही है।

भारत से बिजली आपूर्ति और 1 पैसे के चार्ज का विवाद समझिए

‘द डेली स्टार’ के आंकड़ों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2024-25 में बांग्लादेश के कुल बिजली खरीद खर्च में भारत से इंपोर्ट बिजली की हिस्सेदारी लगभग 15.8% थी। उस वर्ष बांग्लादेश ने कुल 121420 करोड़ टका के बिजली खरीद बजट में से भारत से इंपोर्ट की गई बिजली के लिए करीब 19225 करोड़ टका का पेमेंट किया था।

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अगर इसकी तुलना करें तो चीन का 42 मेगावाट वाला प्रोजेक्ट बेहद मामूली क्षमता का है। भारत और चीन के बीच यह अंतर तब और अधिक सामने आया है जब बांग्लादेश ने भारत के सेटलमेंट नोडल एजेंसी चार्ज पर आपत्ति उठाई। भारत की केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) द्वारा सीमा पार बिजली व्यापार के लिए एसएनए चार्ज लागू करने के फैसले के बाद 24 अगस्त को भारत ने बांग्लादेश को सप्लाई की जाने वाली बिजली पर 0.005 रुपये (आधा पैसा) प्रति यूनिट का SNA चार्ज प्रस्तावित किया था।

Salary vs EMI: सैलरी आते ही EMI से खाली हो जाता है अकाउंट? कर्ज के जाल से निकलने के लिए अपनाएं ये 3 आसान स्टेप्स

Debt Management Tips: महीने की पहली तारीख को सैलरी क्रेडिट होने का मैसेज आता है और कुछ ही घंटों में EMIs कटने के बाद अकाउंट खाली लगने लगता है। अगर आपकी सैलरी का भी एक बड़ा हिस्सा पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड बिल और होम लोन की किश्तों में जा रहा है, तो बचत करना तो दूर, रोजमर्रा के खर्चे संभालना भी चुनौती बन जाता है।

ऐसी स्थिति में अक्सर लोग किसी इमरजेंसी खर्च से निपटने के लिए एक और नया लोन या क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल कर लेते हैं, जो उन्हें एक गंभीर ‘डेट ट्रैप’ यानी कर्ज के जाल में फंसा देता है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी अपने वित्तीय साक्षरता अभियानों में बार-बार आगाह करता है कि पुराना कर्ज चुकाने के लिए नया लोन लेना बहुत खतरनाक साबित हो सकता है। अगर आप भी EMI के दबाव से परेशान हैं, तो इन 3 आसान स्टेप्स के जरिए अपनी वित्तीय स्थिति पर दोबारा नियंत्रण पा सकते हैं।

कर्ज के दबाव को कम करने का 3-स्टेप फॉर्मूला

स्टेप 1: जानिए पैसा कहां जा रहा है और महंगे कर्ज पहले खत्म कीजिए

कोई भी रणनीति बनाने से पहले आपको अपनी मौजूदा वित्तीय स्थिति की पूरी तस्वीर साफ देखनी होगी। अपनी हर EMI, क्रेडिट कार्ड का कुल बकाया, यूटिलिटी बिल्स और राशन/किराए जैसे फिक्स्ड खर्चों को एक कागज पर लिखें। क्रेडिट कार्ड बकाया और पर्सनल लोन पर ब्याज दरें बहुत ज्यादा होती हैं, जबकि होम लोन या कार लोन तुलनात्मक रूप से सस्ते होते हैं।

सभी कर्जों को एक साथ भरने के बजाय सबसे महंगे कर्ज (हाई-इंटरेस्ट लोन) को पहले चुकाने का लक्ष्य बनाएं। बाकी कर्जों की सिर्फ मिनिमम EMI देते रहें और जितनी भी एक्स्ट्रा बचत हो, उसे सबसे महंगे लोन को बंद करने में लगाएं।

स्टेप 2: एक छोटा कैश बफर जरूर तैयार करें

जब बजट पहले से टाइट हो, तो महीने के ₹1,000 या ₹2,000 बचाना भी मुश्किल लगता है। लेकिन यही छोटी बचत आपकी ढाल बनती है। अगर अचानक कोई मेडिकल इमरजेंसी या गाड़ी की खराबी आ जाए, तो इमरजेंसी फंड न होने पर आपको दोबारा क्रेडिट कार्ड का सहारा लेना पड़ता है।

रिजर्व बैंक का मानना है कि हर परिवार के पास एक छोटा कैश बफर होना चाहिए ताकि आपात स्थिति में नया कर्ज न लेना पड़े। शुरुआत में ₹5,000 से ₹10,000 का छोटा बफर बनाएं, फिर धीरे-धीरे इसे 3-6 महीने के आवश्यक खर्चों के बराबर ले जाएं।

स्टेप 3: सैलरी इंक्रीमेंट या बोनस का बुद्धिमानी से इस्तेमाल करें

साल में जब भी सैलरी बढ़े, बोनस मिले या कोई टैक्स रिफंड आए, तो उस पूरे पैसे को नए शौक या लाइफस्टाइल पर खर्च करने की गलती न करें। मिली हुई एक्स्ट्रा राशि का कम से कम 50% से 70% हिस्सा अपने सबसे महंगे लोन के प्रिंसिपल को चुकाने में लगाएं। इससे आपका आने वाला ब्याज काफी घट जाता है।

लोन की प्री-पेमेंट करने से पहले अपने बैंक के नियमों और प्री-पेमेंट चार्जेस की जांच जरूर कर लें। RBI के नियमों के अनुसार बैंकों को लोन की शर्तों में प्री-पेमेंट चार्जेस का पारदर्शी खुलासा करना अनिवार्य है।

पुराने लोन को चुकाने के लिए कभी न लें नया लोन!

कई बार लोग EMI कम करने के लिए लोन कंसोलिडेशन या री-फाइनेंसिंग का सहारा लेते हैं। जब बैंक किसी नए लोन में कम EMI दिखाता है, तो लोग आकर्षित हो जाते हैं। लेकिन ध्यान रखें कि EMI इसलिए कम दिखती है क्योंकि लोन की अवधि बढ़ा दी जाती है।

लोन की अवधि बढ़ाने से आपकी महीने की किस्त तो छोटी हो सकती है, लेकिन बैंक को जाने वाला कुल ब्याज बहुत बढ़ जाता है। इसके अलावा, देर से भुगतान करने पर आपको न केवल लेट फीस और अतिरिक्त ब्याज देना पड़ेगा, बल्कि आपका CIBIL स्कोर भी खराब होगा, जिससे भविष्य में इमरजेंसी लोन मिलना मुश्किल हो जाएगा।

क्या हो लोन रीपेमेंट की बेस्ट स्ट्रेटजी

कर्ज के जाल से बाहर निकलने का रास्ता किसी जादुई फॉर्मले से नहीं, बल्कि सही वित्तीय अनुशासन से निकलता है। जब धीरे-धीरे आपकी एक-एक EMI खत्म होगी, तो उससे बचने वाला पैसा ही आपकी भविष्य की बचत और निवेश की नींव बनेगा। पहला लक्ष्य स्थिति को बिगड़ने से रोकना है, और दूसरा लक्ष्य हर एक्स्ट्रा रुपये को किसी नए कर्ज में फंसाने के बजाय उससे निकलने का जरिया बनाना है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

BSE मैनेजमेंट के इस बयान से शेयर धड़ाम, जानिए क्या है यह पूरा मामला

बीएसई के शेयरों में 2 सितंबर को बड़ी गिरावट आई। दिन के उच्च स्तर से शेयर 4 फीसदी से ज्यादा गिर गए। इसकी वजह बीएसई का एक बयान है। इस बयान के बाद ही शेयर में तेज गिरावट आई। स्टॉक एक्सचेंज ने कहा है कि क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (कैश) की शुरुआत के बाद वॉल्यूम में गिरावट आई है।

CAS की वजह से घटा है पार्टिसिपेशन 

BSE के मैनेजमेंट ने जी बिजनेस से बातचीत में कहा, “CAS की वजह से एचएफटी, प्रॉपरायटरी अकाउंट्स, रिटेल ट्रेडर्स का पार्टिसिपेशन घटा है। सीएएस के बाद पार्टिसिपेशन बढ़ना जरूरी है।” बीएसई का शेयर 2 सितंबर को एक समय 3,252 रुपये के लेवल पर पहुंच गया था। 12 बजे शेयर का प्राइस 3 फीसदी गिरकर 3,144.80 रुपये पर चल रहा था।

NSE के शेयरों की लिस्टिंग का भी असर

बीएसई मैनेजमेंट के यह बताने का असर भी उसके शेयरों पर पड़ा कि NSE के शेयरों को खुद के प्लेटफॉर्म पर ट्रेड करने की इजाजत मिल सकती है। खबरों के मुताबिक, BSE पर लिस्ट होने के बाद NSE के शेयरों में अपने ही एक्सचेंज पर ‘permitted to trade’ कैटेगरी के जरिए ट्रेडिंग हो सकती है।

अर्निंग्स में 1-2 फीसदी कमी आ सकती है

पीएल कैपिटल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एनएसई के इस कदम से FY27 में बीएसई के अर्निंग्स पर करीब 1-2 फीसदी का असर पड़ सकता है। यह अनुमान एक एनालिसिस पर आधारित है, जिसमें यह माना गया है कि कैश मार्केट की हिस्सेदारी और नहीं बढ़ेगी।

दो ब्रोकरेज फर्मों ने आउटलुक घटाया

विदेशी ब्रोकरेज फर्मों नुवामा और जेफरीज ने बीएसई के शेयरों पर अपने आउटलुक को घटाया है। PL Capital ने बीसई के शेयरों के लिए 12 महीने के टारगेट प्राइस को 4,850 रुपये से घटाकर 4,025 रुपये कर दिया है। हालांकि, इस शेयर पर उसने ‘buy’ की अपनी रेटिंग बनाए रखी है।

3 अगस्त को हुई थी CAS की शुरुआत

CAS यानी क्लोजिंग ऑक्शन सेशन की शुरुआत 3 अगस्त को हुई थी। यह कारोबार के आखिर में होने वाला एक संक्षिप्त ऑक्शन है, जिसमें शेयर के क्लोजिंग प्राइस को तय करने के लिए बाय (Buy) और सेल (Sell) ऑर्डर्स को मैच कराया जाता है। शेयर के क्लोजिंग प्राइस को तय करने के लिए दूसरे एशियाई बाजारों में भी इस सिस्टम का इस्तेमाल होता है। इसमें चीन, ताइवान, हांगकांग और दक्षिण कोरिया के बाजार शामिल हैं।

CAS का मतलब क्या है

CAS की व्यवस्था शुरू होने से पहले शेयर के क्लोजिंग प्राइस का निर्धारण अंतिम 30 मिनट में लगातार होने वाली ट्रेडिंग में ट्रेड्स के औसत प्राइस के आधार पर होता था। रेगुलेटर्स का कहना है कि दुनिया के कई बाजारों में लागू सिस्टम को ध्यान में रख CAS को लागू किया। कैस लागू होने के बाद बाजार और प्रमुख सूचकांकों में काफी ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।

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CAS से पहले क्या था सिस्टम

करीब 20 मिनट के ऑक्शन प्रोसेस में लिक्विडिटी काफी कम रही है और इसमें ज्यादातर संस्थानों की हिस्सेदारी रही है। एक्सचेंज के डेटा के मुताबिक, डेली कैश मार्केट टर्नओवर में CAS ट्रेड्स की हिस्सेदारी 1 फीसदी से भी कम है। कम पार्टिसिपेशन का मतलब अपेक्षाकृत छोटे बाय और सेल ऑर्डर्स से है।

Nissan begins Tekton exports from India

Nissan begins Tekton exports from India
Nissan Tekton exports

Nissan Motor India announced the commencement of exports for the Tekton on September 1, 2026. The automaker stated that the Tekton will be sold in South Africa, Bhutan, and Nepal. For this first batch, the company said it has dispatched a total of 1,300 units to the three countries.

Nissan India’s domestic wholesales grow by 147 percent YoY

Tekton’s launch has helped drive momentum for the brand

Nissan India’s domestic wholesales increased by 147 percent year-on-year to 3,246 units in August 2026, up from 1,384 units registered in the corresponding period last year. The growth was driven by the domestic market rollout of the Tekton alongside sustained volumes for its existing SUV portfolio, according to Nissan.

However, international export dispatches across all models totaled 5,924 units during the month, down 23.7 percent year-on-year from 7,769 in August 2025. This reduction in exports offset the large gain in domestic wholesales, with total wholesales increasing marginally by 2.2 percent from 9,153 units to 9,350 units year-on-year.

Saurabh Vatsa, Managing Director, Nissan Motor India, said, “The response to the Nissan Tekton has been encouraging and has contributed to a strong domestic wholesale performance in August.” Nissan said that the initial shipments to South Africa, Nepal, and Bhutan represent the first phase of the model’s overseas rollout, with plans to expand dispatches to additional export destinations as production scales up.

With inputs from Dev Vadchhedia

5000 अमेरिकी थाईलैंड पहुंचे, 5 दिन पटाया में छुट्टियां मनाएंगे:9 महीने से USS अब्राहम लिंक पर तैनाती; पुलिस का देह व्यापार के खिलाफ एक्शन

अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन बुधवार सुबह थाईलैंड पहुंच गया है। इस एयरक्राफ्ट पर पिछले 9 महीनों से 5 हजार सैनिक तैनात हैं। लंबे सैन्य अभियान के बाद अब उन्हें पटाया में करीब 5 दिन की छुट्टी मिलेगी।

USS अब्राहम लिंकन के साथ अमेरिकी नौसेना के दो और जहाज भी पहुंचे हैं। लाम चाबांग पोर्ट पर उतरने के बाद सैनिकों को बसों से करीब 96 किमी दूर पटाया ले जाया जाएगा। हालांकि पटाया पहुंचने से पहले ही थाई पुलिस ने शहर में देह व्यापार के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। रॉयटर्स के मुताबिक, पुलिस ने पिछले वीकेंड में छापेमारी कर 40 से 50 लोगों को हिरासत में लिया। शहर के समुद्र तट और नाइटलाइफ वाले इलाकों में गश्त भी बढ़ा दी गई है। कानून व्यवस्था बनाए रखने में जुटी पुलिस पटाया में अमेरिकी नौसेना के बड़ी संख्या में जवानों और मरीन के आने से पहले पुलिस ने शहर में छापेमारी और जांच बढ़ा दी है। बार, समुद्र तट और दूसरी भीड़भाड़ वाली जगहों पर पुलिस खास नजर रख रही है। इसी दौरान पब्लिक प्लेस पर ग्राहकों की तलाश करने के आरोप में कम से कम 25 महिलाओं को हिरासत में लिया गया। इनमें थाईलैंड के साथ लाओस और युगांडा की महिलाएं भी शामिल थीं। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, अलग-अलग कार्रवाइयों में 40 से 50 लोगों को पकड़ा गया है। पुलिस का कहना है कि अमेरिकी जवानों के आने से पहले शहर में गैरकानूनी गतिविधियों पर रोक लगाना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है। अमेरिकी नौसैनिकों को भी ड्रग्स और गांजा बेचने वाली दुकानों से दूर रहने की सलाह दी गई है। हालांकि उन्हें नाइटलाइफ वाली जगहों पर जाने से नहीं रोका गया है, लेकिन देर रात तक बार और मनोरंजन की जगहों पर रुकने से बचने को कहा गया है। कारोबारियों को बड़ी कमाई की उम्मीद अमेरिकी नौसैनिकों के पटाया पहुंचने से शहर के कारोबारियों को अच्छी कमाई की उम्मीद है। करीब 5 हजार अमेरिकी जवानों के आने से होटल, रेस्तरां, बार, शॉपिंग और दूसरे पर्यटन कारोबारों में ग्राहकों की संख्या बढ़ सकती है। खासकर नाइटलाइफ़ और मनोरंजन से जुड़े कारोबारियों को इसका सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। स्थानीय कारोबारियों के लिए यह ऐसे समय में बड़ा मौका है, जब पर्यटन कारोबार में पहले जैसी तेजी नहीं है। हजारों अमेरिकी जवान कुछ दिनों के लिए शहर में रहेंगे और इस दौरान खाने-पीने, होटल में ठहरने, घूमने-फिरने और मनोरंजन पर पैसा खर्च करेंगे। इससे छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े होटल और रेस्तरां तक कई तरह के कारोबारों को फायदा मिल सकता है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक एक अमेरिकी नौसैनिक रोजाना करीब 1,000 (₹2800) से 3,000 (₹8500) थाई बाहत तक खर्च कर सकता है। इस हिसाब से अगर करीब 5 हजार नौसैनिक शहर में आते हैं तो उनके खर्च से स्थानीय कारोबार में करोड़ों थाई बाहत का पैसा आ सकता है। पटाया और अमेरिकी सेना का पुराना कनेक्शन पटाया शहर का अमेरिकी सेना से रिश्ता 1960 और 1970 के दशक के वियतनाम युद्ध के समय से है। वियतनाम युद्ध के दौरान अमेरिकी सैनिक छुट्टियां मनाने और आराम करने के लिए यहां आते थे। इससे स्थानीय होटल, बार, रेस्तरां और दूसरे कारोबार तेजी से बढ़े। धीरे-धीरे यह छोटा मछुआरा गांव दुनिया भर के पर्यटकों के बीच मशहूर शहर बन गया। यूएसएस अब्राहम लिंकन थाईलैंड क्यों आया? यूएसएस अब्राहम लिंकन हाल ही में वेस्ट एशिया में लंबी तैनाती पूरी करके लौटा है। यह अमेरिकी नौसेना का परमाणु ऊर्जा से चलने वाला विमानवाहक पोत है, जिसने नौ महीने से ज्यादा समय समुद्र में बिताया। इस दौरान यह ईरान से जुड़े तनाव के बीच वेस्ट एशिया में अमेरिकी सैन्य अभियानों का हिस्सा रहा। लंबी तैनाती के दौरान जहाज पर तैनात नौसैनिकों की मानसिक सेहत और रहने की परिस्थितियों को लेकर भी चिंताएं सामने आई थीं। अब थाईलैंड में पांच दिन के इस पड़ाव के दौरान जहाज को जरूरी सप्लाई दी जाएगी, रखरखाव का काम होगा और हजारों नौसैनिकों को लंबे समय बाद आराम का मौका मिलेगा।

सिर्फ फिटनेस ही नहीं, गार्डनिंग में भी नंबर 1 हैं मिलिंद सोमन! घर पर खुद उगाते हैं ये सब्जियां

फिटनेस आइकन और मैराथन रनर मिलिंद सोमन अपनी फिटनेस और एक्टिव लाइफस्टाइल के लिए जाने जाते हैं। लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि उन्हें गार्डनिंग का भी काफी शौक है। मिलिंद और उनकी पत्नी अंकिता ने 2020 के लॉकडाउन के दौरान घर पर सब्जियां उगाना शुरू किया था। धीरे-धीरे उनका घर का बगीचा एक छोटे से होम फार्म में बदल गया, जहां वे कई तरह की ताजी सब्जियां उगाते हैं। दोनों अक्सर सोशल मीडिया पर अपने गार्डन और उसमें उगी सब्जियों की तस्वीरें भी शेयर करते रहते हैं।

मिलिंद के घर के गार्डन में कद्दू, लौकी, टमाटर, बैंगन, मिर्च, बीन्स, पत्तागोभी, फूलगोभी, मूली, मेथी और पालक जैसी सब्जियां उगती हैं। अंकिता भी कई बार भिंडी और मूली जैसी सब्जियों की झलक दिखा चुकी हैं। एक बार मिलिंद ने अपने गार्डन से बड़ा-सा कद्दू तोड़ते हुए वीडियो शेयर किया था। साथ ही उन्होंने लोगों से कद्दू की पसंदीदा रेसिपी भी पूछी थी।

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मिलिंद की फिटनेस का राज और गार्डनिंग 

मिलिंद सोमन अपनी फिटनेस, मैराथन और एक्टिव लाइफस्टाइल के साथ-साथ उन्हें नेचर और गार्डनिंग में भी काफी दिलचस्पी है। मिलिंद और उनकी पत्नी अंकिता कोंवर ने 2020 के लॉकडाउन में घर पर सब्जियां उगाने की शुरुआत की थी। धीरे-धीरे उनका यह शौक एक छोटे से किचन गार्डन में बदल गया, जहां वे अपनी जरूरत के हिसाब से कई तरह की ताजी सब्जियां उगाने लगे। दोनों अक्सर अपने गार्डन और वहां उगने वाली फसलों की झलकियां सोशल मीडिया पर शेयर करते रहे हैं।

मिलिंद के गार्डन में सिर्फ कद्दू ही नहीं, बल्कि लौकी, टमाटर, बैंगन, मिर्च, बीन्स, पत्तागोभी, फूलगोभी, मेथी, पालक और मूली जैसी कई सब्जियां उगाई जाती हैं। उनकी गार्डनिंग से पता चलता है कि यह केवल लॉकडाउन के समय शुरू हुआ शौक नहीं था, बल्कि दोनों ने इसे लगातार जारी रखा। मिलिंद ने अपने इस अंदाज को मजाकिया तरीके से “दाढ़ी वाला किसान” भी कहा है।

 

मिलिंद के साथ पत्नी अंकिता की भागीदारी

अंकिता भी गार्डनिंग में मिलिंद का साथ देती हैं और उनकी पोस्ट से साफ पता चलता है कि यह सिर्फ लॉकडाउन के समय शुरू हुआ कोई छोटा-मोटा शौक नहीं था। दोनों ने इसे लगातार आगे बढ़ाया और अपने घर में ही हरियाली से भरा एक खूबसूरत गार्डन तैयार किया। एक बार मिलिंद ने अपने गार्डन से निकला बड़ा सा कद्दू दिखाते हुए मजाक में कहा था कि अब अगले कुछ दिनों तक कद्दू ही खाना पड़ेगा। अंकिता ने भी कद्दू के साथ मूली, भिंडी और दूसरी सब्जियों की तस्वीरें शेयर की हैं।

 

घर में ऐसे बनाएं अपना DIY ग्रीन हाउस

गार्डनिंग सेटअप की सबसे खास चीजों में से एक उनका घर पर बनाया गया छोटा सा ग्रीनहाउस है। उन्होंने इसे सब्जियां उगाने के लिए एक अलग जगह के तौर पर तैयार किया था। उनके घर के केयरटेकर ने इसे प्यार से “सब्जी का घर” नाम दिया था। ग्रीनहाउस में पौधों और बेलों के बढ़ने के बाद यह जगह काफी हरी-भरी नजर आने लगी थी।

आप भी घर पर ताजी सब्जियां उगाना चाहते हैं, तो छोटा DIY ग्रीनहाउस बना सकते हैं। इसके लिए छत, बालकनी या आंगन में ऐसी जगह चुनें जहां अच्छी धूप आती हो। बांस या लकड़ी से मजबूत फ्रेम बनाकर उसे साफ ऐक्रेलिक या UV-स्टेबलाइज्ड पॉलीइथिलीन शीट से कवर करें। गमलों या ग्रो बैग में अच्छी मिट्टी और कम्पोस्ट भरकर सब्जियां लगाएं। पौधों को रेगुलर पानी दें, लेकिन ध्यान रखें कि मिट्टी में जरूरत से ज्यादा पानी जमा न हो। बहुत ज्यादा गीली मिट्टी से पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है और उनकी ग्रोथ भी प्रभावित हो सकती है। इसलिए पानी देने से पहले मिट्टी की नमी जरूर देख लें। इसके साथ ही ग्रीनहाउस को रोजाना चेक करते रहें। पौधों की पत्तियों पर कीड़े या किसी तरह की परेशानी तो नहीं है, पत्तियां मुरझा तो नहीं रही हैं और अंदर का टेम्परेचर बहुत ज्यादा तो नहीं हो रहा, इन सभी बातों का ध्यान रखें। थोड़ी-सी देखभाल से पौधे स्वस्थ रहेंगे और अच्छी तरह बढ़ेंगे।

 

Trading Picks : इंडेक्स में उछाल पर बिकवाली की रणनीति करेगी काम, इन दो शेयरों में हो सकती है अच्छी कमाई

Trading Picks : बाजार पर बात करते हुए चॉइस ब्रोकिंग में VP टेक्निकल रिसर्च, सचिन गुप्ता का कहना है कि निफ्टी कल क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के दौरान 24,000 के स्तर से ऊपर आ गया, लेकिन 1 सितंबर को थोड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ,जिससे निकट भविष्य के लिए बाजार का रुख सतर्क और कंसोलिडेशन वाला बना हुआ है।

टेक्निकल सेटअप नियर टर्म में निगेटिव रुझान के साथ सतर्क और रेंज-बाउंड बाजार का संकेत दे रहा है। निफ्टी में 23,800–24,200 की रेंज में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है। इसके लिए 23,950–24,000 मेन सपोर्ट जोन और 24,200 तत्काल रेजिस्टेंस के रूप में काम करेगा।

अगर निफ्टी 24,200 के स्तर से ऊपर बना रहता है तो 24,400 तक जाने का रास्ता खुल सकता है,जबकि 23,950 से नीचे की गिरावट आने पर यह 23,800 और 23,600 तक गिर सकता है।

थिंक्रेडब्लू (Thincredblu) को फाउंडर गौरव उदानी का कहना है कि निफ्टी अभी एक अहम टेक्निकल लेवल पर है,जहां 23,900–24,000 का दायरा तत्काल सपोर्ट जोनन का काम कर रहा है। निफ्टी के लिए इस रेंज को बनाए रखना ज़रूरी होगा। अगर यह लगातार 23,900 के नीचे बना रहता है तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और गिरावट और गहरी हो सकती है।

ऊपर की तरफ,24,200–24,300 का दायरा अहम रेजिस्टेंस रेंज बना हुआ है। जब तक कि जबरदस्त खरीदारी न हो इन लेवल्स की ओर किसी भी रिकवरी में बिकवाली का दबाव दिख सकता है। हाल की अस्थिरता को देखते हुए,ट्रेडर्स को सावधान रहना चाहिए और आक्रामक पोजीशन लेने से बचना चाहिए। फ़लहाल,कोई भी दिशा तय करने से पहले इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि निफ्टी 23,900–24,000 के सपोर्ट जोन के आसपास कैसा व्यवहार करता है।

निफ्टी पर रणनीति

सीएनबीसी-आवाज़ के वीरेंद्र कुमार का कहना है कि निफ्टी के लिए पहला रजिस्टेंस 24160-24222 पर और बड़ा रजिस्टेंस 24266-24289/24331 पर है। इसके लिए पहला बेस 23977-23909 पर और बड़ा बेस 23869-23834/23809 पर है। टेक्निकली 24000 टूटा है। क्लोजिंग में सिर्फ CAS क्लोजिंग ने बचाया। ब्रेंट,बॉन्ड यील्ड और US मार्केट तीनों के संकेत निगेटिव हैं। FIIs की इंडेक्स और स्टॉक फ्यूचर्स में भारी बिकवाली हुई है। FIIs के नेट शॉर्ट बढ़कर 2.22 लाख पर पहुंचे हैं। अब कॉल राइटर्स की पकड़ मजबूत है, 23500 पुट में भारी OI है। 23977 के नीचे बेस-1 और बेस-2 में से कोई भी टेस्ट कर सकता है। रजिस्टेंस-1 के नीचे कमजोर रहेगी, SELL ON RISE बेहतर रणनीति होगी। 24160-24222 के ऊपर मजबूती आई तो शॉर्ट कवरिंग दिख सकती है।

बैंक निफ्टी पर रणनीति

सीएनबीसी-आवाज़ के वीरेंद्र कुमार का कहना है कि बैंक निफ्टी के लिए पहला रजिस्टेंस 57531-57678 पर और बड़ा रजिस्टेंस 57841-58040 पर है। इसके लिए पहला बेस 57189-56931 पर और बड़ा बेस 56745-56561/56414 पर है। टेक्निकली 50 DEMA पर क्लोजिंग हुई है,लेकिन कच्चे तेल में तेजी से चिंता है। 57189-56931 बेस को बहुत सम्मान दें। 57500-57800-58000 पर कॉल राइटर्स की मजबूत पकड़ है। बेस-1 के नीचे टिकने पर 56561 के जोन तक दबाव संभव है। लेकिन सावधानी जरूरी है,बैंक निफ्टी अचानक सरप्राइज दे सकता है।

चकाचक चार्ट वाले शेयर

चकाचक चार्ट वाले शेयर बताने के लिए हमारे साथ जुड़े हैं Prakashgaba.com के प्रकाश गाबा। इनकी इंफोसिस में 1140 रुपए के स्टॉपलॉस के साथ, 1170 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है। ONGC में भी इनकी 235 रुपए के स्टॉपलॉस के साथ, 241 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है

 

निफ्टी 23,900 के नीचे, सेंसेक्स 460 अंक टूटा, कोल इंडिया, TBZ, HDFC बैंक सबसे ज्यादा एक्टिव शेयर

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

घुटनों को दें रोजाना थोड़ी केयर, दर्द और जकड़न में काम आएंगी ये 7 आदतें

घुटनों में दर्द आजकल काफी आम समस्या हो गई है। घुटना हमारे शरीर का एक बहुत जरूरी जोड़ है, जो खड़े होने, चलने, सीढ़ियां चढ़ने और बैठने जैसे रोज के कामों में हमारा साथ देता है। ऐसे में जब घुटने में दर्द, जकड़न या सूजन होने लगे तो छोटे-छोटे काम भी मुश्किल लग सकते हैं। घुटने का दर्द सिर्फ बढ़ती उम्र की वजह से ही नहीं होता, बल्कि चोट, ज्यादा वजन, लंबे समय तक बैठे रहने या घुटने पर ज्यादा प्रेशर पड़ने की वजह से भी परेशानी हो सकती है।

यदि घुटनों में हल्का दर्द है या मामूली खिंचाव की वजह से परेशानी हो रही है, तो रोज की कुछ आसान आदतों से राहत पाने में मदद मिल सकती है। लेकिन दर्द लगातार बना रहे, बढ़ता जाए या घुटने में ज्यादा सूजन और चलने में परेशानी हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। वहीं सामान्य और हल्के दर्द में कुछ आसान घरेलू उपाय आपकी परेशानी को कम करने और घुटनों को आराम देने में मदद कर सकते हैं।

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1. अदरक वाली चाय का सेवन 

अदरक में जिंजरोल जैसे नेचुरल कंपोनेंट्स पाए जाते हैं, जो शरीर में सूजन से जुड़े प्रोसेस पर असर डाल सकते हैं। इसलिए कुछ लोगों को अदरक की चाय से हल्की परेशानी में आराम महसूस हो सकता है, लेकिन इसे घुटने के दर्द का इलाज नहीं माना जाना चाहिए। एक इंच अदरक के टुकड़ों को एक कप पानी में करीब 5 मिनट उबालकर छान लें। स्वाद के लिए नींबू या थोड़ा शहद मिला सकते हैं।

2. अचानक दर्द हो तो RICE तरीका अपनाएं

दर्द अचानक पैर मुड़ने, गिरने या चोट लगने के बाद शुरू हुआ है, तो शुरुआती समय में RICE तरीका अपनाया जा सकता है। इसमें Rest यानी आराम, Ice यानी बर्फ, Compression यानी हल्का दबाव और Elevation यानी पैर को ऊंचा रखना शामिल है। दर्द बढ़ाने वाली एक्टिविटी रोकें और बर्फ को कपड़े में लपेटकर 15 से 20 मिनट तक लगाएं। जरूरत पड़ने पर हल्का क्रेप बैंडेज लगाएं और आराम करते समय पैर को तकिए पर थोड़ा ऊंचा रखें।

3. नी-कैप के साथ सही जूते-चप्पल पहनें

कुछ लोगों को घुटने का सपोर्ट यानी नी-कैप पहनने से चलने-फिरने में सहारा मिल सकता है, लेकिन यह हर किसी के लिए जरूरी नहीं है। यदि इस्तेमाल करें तो सही साइज का नी-कैप ही पहनें। साथ ही ऐसे जूते-चप्पल चुनें जिनमें पैर को अच्छा सपोर्ट मिले और चलने में आराम रहे।

4. एप्सम सॉल्ट वाले गर्म पानी में पैर रखें

एप्सम सॉल्ट को गर्म पानी में डालकर पैर रखने से कुछ लोगों को जकड़न और थकान में आराम महसूस हो सकता है, हालांकि इसके असर के पक्के सबूत नहीं हैं। एक बाल्टी गर्म पानी में करीब दो कप एप्सम सॉल्ट डालकर पैरों को 15 से 20 मिनट तक रखा जा सकता है। पानी बहुत ज्यादा गर्म न हो और बाद में पैरों को अच्छी तरह सुखा लें।

5. स्ट्रेचिंग करें और हल्की एक्सरसाइज रूटीन में शामिल करें

घुटनों में दर्द होने पर पूरी तरह आराम करने के बजाय हल्की एक्सरसाइज और स्ट्रेचिंग करना मददगार हो सकता है। इससे घुटने के आसपास की मसल्स एक्टिव रहती हैं और जोड़ को हिलाने में आसानी होती है। हैमस्ट्रिंग स्ट्रेच के लिए कुर्सी पर बैठकर एक पैर सामने सीधा करें और थोड़ा आगे झुकें। काफ स्ट्रेच में दीवार पर हाथ रखकर एक पैर पीछे करें और एड़ी जमीन पर रखें। इसके अलावा कुर्सी पर बैठकर पैर को सीधा करके 5 सेकंड रोकें और फिर नीचे करें।

6. घुटने की हल्के गर्म तेल से मालिश करें

घुटने के आसपास हल्के हाथों से मालिश करने से कुछ लोगों को दर्द और जकड़न में आराम महसूस हो सकता है। इसके लिए तिल, नारियल या सरसों के तेल को हल्का गुनगुना करके इस्तेमाल कर सकते हैं। घुटने और आसपास की मसल्स पर करीब 10 मिनट तक हल्के हाथों से गोल-गोल मालिश करें।

7. डाइट में ओमेगा-3 वाली चीजें शामिल करें

ओमेगा-3 शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व है और सूजन से जुड़े प्रोसेस में भूमिका निभाता है। इसलिए इसे बैलेंस डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है। मछली खाने वाले लोग मैकेरल यानी बांगड़ा, सार्डिन और हिलसा जैसी मछली खा सकते हैं, जबकि शाकाहारी लोग अलसी, अखरोट और चिया सीड्स को डाइट में शामिल कर सकते हैं। साथ ही बहुत ज्यादा तला-भुना खाना कम करना बेहतर है।

घुटने के दर्द के लिए डॉक्टर को दिखाएं

घुटने के दर्द में घरेलू उपायों से राहत न मिले या दर्द बार-बार परेशान करे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। यदि दर्द दो हफ्ते से ज्यादा समय तक बना रहे, घुटने में ज्यादा सूजन, लालिमा या गर्माहट महसूस हो, पैर पर वजन रखने या खड़े होने में परेशानी हो, घुटना अचानक जवाब देने लगे, जोड़ टेढ़ा या असामान्य दिखाई दे या आप घुटने को पूरी तरह मोड़ या सीधा न कर पा रहे हों, तो इसे नजरअंदाज न करें।

Mahanadi Coalfields IPO: एक और सरकारी कंपनी ने जमा किया ड्राफ्ट, कोल इंडिया बेचेगी 10% हिस्सा

सरकारी कंपनी कोल इंडिया के 100 प्रतिशत मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी, महानदी कोलफील्ड्स ने IPO के लिए कैपिटल मार्केट रेगुलेटर SEBI के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) जमा किया है। इस इश्यू में केवल ऑफर फॉर सेल (OFS) रहेगा, जिसमें कोल इंडिया अपनी 10 प्रतिशत हिस्सेदारी या 66.18 करोड़ शेयरों को बिक्री के लिए रखेगी। IPO में नए शेयर जारी नहीं होंगे, लिहाजा महानदी कोलफील्ड्स को इस ऑफरिंग से कोई पैसा नहीं मिलेगा। शेयरों को बेचने से होने वाली पूरी कमाई कोल इंडिया के पास जाएगी।

महानदी कोलफील्ड्स मुख्य रूप से ओडिशा में काम करती है और इसने वित्त वर्ष 2026 में भारत के कुल घरेलू कोयला उत्पादन में 21 प्रतिशत का योगदान दिया। कोल इंडिया के उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी 28.4 प्रतिशत रही। वित्त वर्ष 2026 के दौरान भारत के कुल कोयला उत्पादन में कोल इंडिया का योगदान लगभग 74 प्रतिशत था।

महानदी कोलफील्ड्स के शेयरों को BSE और NSE दोनों पर लिस्ट करने का प्रस्ताव है। SBI कैपिटल मार्केट्स, एक्सिस कैपिटल, BOB कैपिटल मार्केट्स, IDBI कैपिटल मार्केट्स एंड सिक्योरिटीज और IIFL कैपिटल सर्विसेज को इस इश्यू के लिए बुक-रनिंग लीड मैनेजर नियुक्त किया गया है। महानदी कोलफील्ड्स का वित्त वर्ष 2025-26 में शुद्ध मुनाफा 1.3 प्रतिशत की गिरावट के साथ 10,678 करोड़ रुपये रहा। रेवेन्यू 2.6 प्रतिशत की गिरावट के साथ 30,550 करोड़ रुपये हो गया।

मार्च और अप्रैल में ये 2 सब्सिडियरी हुई थीं लिस्ट

कोल इंडिया की वर्तमान में 8 सहायक कंपनियां- ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड, भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL), सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड, वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड, साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL), नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड, MCL, और सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड (CMPDIL) हैं।

इससे पहले भारत कोकिंग कोल लिमिटेड जनवरी 2026 में स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्ट हुई थी। इसका पब्लिक इश्यू 1,068.78 करोड़ रुपये का था। सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड मार्च, 2026 में NSE और BSE पर लिस्ट हुई थी। इसका IPO 1,841.45 करोड़ रुपये का था।

2030 तक CIL की सभी सहायक कंपनियां लिस्ट कराने का है प्लान

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने कोयला मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह यह सुनिश्चित करे कि 2030 तक कोल इंडिया लिमिटेड की सभी सहायक कंपनियां स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्ट हो जाएं। इस कदम का उद्देश्य निगरानी को सुव्यवस्थित करना, पारदर्शिता बढ़ाना और संपत्तियों के मोनेटाइजेशन के जरिए वैल्यू अनलॉक करना है।

Priority Jewels IPO: 100.45 गुना के बंपर सब्सक्रिप्शन के बाद आज, 2 सितंबर को अलॉटमेंट; कैसी रहेगी लिस्टिंग?

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Nepal Flood News: नेपाल की उस लड़की की कहानी जिसके घर के 17 लोग विनाशकारी बाढ़ में मारे गए

Nepal Flood News: नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने हजारों परिवारों की जिंदगी पूरी तरह बदल दी है। हिमालयी क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में से एक रासुवा में तबाही का मंजर अभी भी साफ दिखाई दे रहा है। घर, सड़कें और पुल बह चुके हैं। बड़ी संख्या में परिवार अपने घरों से विस्थापित होकर अस्थायी राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। इस त्रासदी के बीच एक युवती की कहानी ने इस आपदा की भयावहता को सामने ला दिया है।

CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, रासुवा के सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में रहने वाली एक युवती ने अपने परिवार के 17 सदस्यों को खो दिया। उसका घर भी बाढ़ में बह गया। उसके पास अब अपने परिवार की यादों के तौर पर सिर्फ मोबाइल फोन में मौजूद तस्वीरें बची हैं। नेपाल में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,100 के पार हो गई है।

एक झटके में पूरा परिवार उजड़ गया

कॉपिला तमांग नाम की इस युवती के परिवार ने इससे पहले 2015 के विनाशकारी भूकंप की त्रासदी भी झेली थी। उस आपदा में उनका घर तबाह हुआ था। लेकिन परिवार ने दोबारा जिंदगी शुरू की और नया घर बनाया। इस बार बाढ़ ने उस नए घर को भी नहीं छोड़ा। अमेरिकी चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ में उनकी मां, बहन, दादी समेत परिवार के कुल 17 सदस्य मारे गए। इनमें महज एक महीने का एक बच्चा भी शामिल था।

वापस लौटने पर सबकुछ बर्बाद!

कॉपिला उस समय काठमांडू में थीं। जैसे ही उन्हें पहाड़ी इलाके में बाढ़ आने और परिवार के फंसने की खबर मिली, वह वापस लौट गईं। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उन्होंने CNN से कहा कि उन्हें बेहद अकेलापन महसूस हो रहा है। परिवार के छोटे बच्चे के लिए यह त्रासदी और भी मुश्किल है। उनका सात साल का छोटा भाई अभी यह समझ नहीं पा रहा कि उसकी मां अब वापस नहीं आएगी। कॉपिला ने कहा कि अब उसे अपने छोटे भाई के लिए खुद मजबूत बनना होगा।

राहत शिविर में रात होते ही सताने लगता है डर

बाढ़ से बचाए गए और विस्थापित परिवारों को फिलहाल अस्थायी शिविरों, स्कूलों और अधूरी इमारतों में शरण दी गई है। लेकिन यहां पहुंचने के बाद भी लोगों को सुरक्षा का भरोसा नहीं मिल पा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, कई परिवारों को अब भी डर है कि कहीं दोबारा बाढ़ न आ जाए। रात में जब भी पानी बढ़ने या नई बाढ़ की चेतावनी मिलती है, कुछ लोग सुरक्षित ऊंचाई की तलाश में जंगल और पहाड़ी इलाकों की ओर चले जाते हैं।

कई विस्थापित लोग खुले या अधूरे भवनों की छतों पर रात गुजार रहे हैं। एक 17 वर्षीय युवक ने सीएनएस से बातचीत में बताया कि उसके दो छोटे भाई-बहन भी बाढ़ में मारे गए। राहत शिविरों में रात के समय लोग अपने परिवार के सदस्यों को याद कर रोते हैं। कई लोगों के लिए नींद तक मुश्किल हो गई है।

13 साल की बच्ची भी बाढ़ के बीच फंसी

नेपाल की इस आपदा में बच्चों की मुश्किलें भी बेहद गंभीर हैं। एक 13 वर्षीय बच्ची ने बताया कि बाढ़ आने के समय वह अपने परिवार से अलग हो गई थी। उसे कुछ समय तक यह तक पता नहीं था कि उसके माता-पिता कहां हैं। UNICEF के अनुसार, 26 अगस्त को आई बाढ़ से नेपाल के रासुवा, नुवाकोट और धादिंग इलाकों में कम से कम 17,000 बच्चे प्रभावित हुए हैं।

इस विनाशकारी तबाही में कई स्कूल पूरी तरह नष्ट हो गए हैं। हजारों बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई है। एक अन्य मामले में स्कूल से लौटते समय बाढ़ की चपेट में आए बच्चों को अपनी जान बचाने के लिए ऊंचे स्थानों की ओर भागना पड़ा। कुछ बच्चों ने पेड़ों पर चढ़कर अपनी जान बचाई।

लोगों के सामने सिर्फ घर नहीं, पूरी जिंदगी दोबारा बसाने की चुनौती

इस बाढ़ ने नेपाल के प्रभावित इलाकों में लोगों से सिर्फ उनके घर और सामान ही नहीं छीने। बल्कि कई परिवारों के पूरे के पूरे सदस्य खत्म हो गए। कई लोगों को अभी तक अपने लापता परिजनों के शव नहीं मिले हैं, जिससे उनके लिए इस त्रासदी को स्वीकार करना और भी मुश्किल हो गया है।

CNN के अनुसार, कुछ परिवारों के लापता सदस्य अभी तक आधिकारिक लापता लोगों की लिस्ट में भी दर्ज नहीं हो पाए थे। अब राहत शिविरों में रहने वाले लोगों की सबसे बड़ी चिंता यही है कि अगली रात सुरक्षित होगी या फिर एक और बाढ़ उन्हें अपना सब कुछ छोड़कर भागने पर मजबूर कर देगी। उनके पास घर लौटने के लिए कई जगह घर ही नहीं बचे हैं।

मृतकों की संख्या 1,100 के पार

नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ से मरने वालों की संख्या बुधवार को बढ़कर 1,127 हो गई। हिमालयी क्षेत्र में आई इस आपदा के एक सप्ताह बाद भी बचावकर्मी हजारों लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं। नेपाल पुलिस के अनुसार, चितवन से 348, नवलपरासी पूर्व से 217, नवलपरासी पश्चिम से 190 और नुवाकोट से 155 शव बरामद किए गए हैं। इसी तरह गोरखा से 66, धादिंग से 59, रसुवा से 45 और तनाहूं से 38 शव बरामद हुए हैं।

पुलिस ने बताया कि 1,113 शवों का पोस्टमार्टम और कानूनी पहचान की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। जबकि 95 शव परिजनों को सौंपे जा चुके हैं। लापता परिजनों की पहचान में परिवारों की मदद के लिए 911 अज्ञात शवों का विवरण नेपाल पुलिस की वेबसाइट पर अपलोड किया गया है। पुलिस के मुताबिक, अब तक सुरक्षा बलों ने प्रभावित इलाकों से 6,541 लोगों को सुरक्षित निकाला है। जबकि 4,858 लापता लोगों की तलाश अभी जारी है।

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अधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में 7,912 पुलिसकर्मियों को तैनात किया है।  नेपाल-तिब्बत सीमा के निकट 26 अगस्त को बर्फ और चट्टानों के ढहने या हिमस्खलन के कारण अचानक बाढ़ आ गई थी। इस बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों में भारी तबाही मचाई थी।