कल का मौसम: 8 अगस्त को यूपी, उत्तराखंड संग 18 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, इन इलाकों में दिखेगा बरसात का ताडंव

इस वक्त दिल्ली-यूपी समेत देश के एक बड़े हिस्से में भारी बारिश पड़ रही है। इस बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 8 अगस्त को देश के एक बड़े हिस्से में एक बार फिर मानसूनी बारिश का तांडव देखने की आशंका जताई है। मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन के मुताबिक उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर राज्यों तक बारिश, आंधी-तूफान और बिजली गिरने का दौर जारी रहेगा। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश समेत करीब 18 राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मानसून के पूरी तरह सक्रिय रहने के कारण कई इलाकों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हो सकता है और निचले इलाकों में जलभराव का खतरा बना हुआ है।

पूर्वी राजस्थान और ओडिशा में अति भारी बारिश की चेतावनी

मौसम विभाग ने 8 अगस्त को पूर्वी राजस्थान और ओडिशा के अलग-अलग स्थानों पर बेहद भारी बारिश की प्रबल संभावना जताई है। इन इलाकों में मानसूनी तंत्र के बेहद मजबूत होने के कारण अचानक तेज बारिश का दौर शुरू हो सकता है। बारिश के इस प्रचंड रूप को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमों को मुस्तैद रहने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही आम लोगों को भी खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की ताकीद की गई है।

यूपी, उत्तराखंड समेत 18 राज्यों में मूसलाधार बारिश का पूर्वानुमान

देश के बाकी हिस्सों की बात करें तो 8 अगस्त को उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में भारी बारिश का अनुमान है। इनके अलावा पूर्वोत्तर भारत के राज्यों जैसे अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी मूसलाधार बारिश होने की संभावना है। मध्य भारत के छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश में भी बादल जमकर बरसेंगे। वहीं पश्चिमी भारत में कोंकण व गोवा तथा पश्चिमी राजस्थान के इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। पूर्वी भारत के झारखंड, पश्चिम बंगाल और सिक्किम के साथ-साथ दक्षिण भारत में तटीय आंध्र प्रदेश, तटीय कर्नाटक, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और केरल व माहे में भी भारी बारिश से स्थिति संवेदनशील बनी रह सकती है।

तेज हवाओं और बिजली चमकने का खतरा

बारिश के साथ-साथ देश के कई राज्यों में भीषण आंधी-तूफान और वज्रपात की चेतावनी भी जारी की गई है। आंध्र प्रदेश, केरल व माहे, लक्षद्वीप, उत्तरी आंतरिक कर्नाटक और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली चमकने की आशंका है। इसके अलावा अंडमान व निकोबार द्वीप समूह, बिहार, छत्तीसगढ़, तटीय कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर-लद्दाख-गिलगित-बालटिस्तान-मुज़फ्फराबाद, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल व सिक्किम में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हवाएं चलेंगी। गुजरात क्षेत्र, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में भी बादलों की गरज के साथ बिजली गिरने का अलर्ट है।

तटीय क्षेत्रों में तेज सतही हवाएं और अरब सागर में मौसम खराब

मौसम विभाग ने आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल व माहे, लक्षद्वीप और तेलंगाना के तटीय इलाकों में तेज सतही हवाएं चलने का पूर्वानुमान व्यक्त किया है। इसके अतिरिक्त अरब सागर में मौसमी परिस्थितियां काफी प्रतिकूल रहेंगी। सोमालिया और ओमान के तटों के साथ-साथ पश्चिम-मध्य अरब सागर के अधिकांश भागों, दक्षिण-पश्चिम अरब सागर के कुछ हिस्सों और उत्तर-पश्चिम व पूर्व-मध्य अरब सागर में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चल सकती हैं, जो बढ़कर 65 किलोमीटर प्रति घंटे की गति पकड़ सकती हैं। समुद्र में उठने वाली ऊंची लहरों और खराब मौसम को देखते हुए मछुआरों को इन इलाकों में न जाने की स्पष्ट सलाह दी गई है

खुश नहीं हैं तो ऑफिस मत आइए! ये कंपनी देती है 10 दिन की Unhappy Leave, हर्ष गोयनका ने छेड़ी नई बहस

RPG एंटरप्राइजेज के चेयरमैन ने चीनी रिटेल चेन ‘पैंग डोंग लाई’ के फाउंडर और रिटेल टाइकून ‘यू डोंग लाई’ द्वारा शुरू की गई एक अनोखी पॉलिसी का जिक्र किया। यह पॉलिसी एक आसान सिद्धांत पर काम करती है- “अगर आप खुश नहीं हैं, तो काम पर न आएं।” इस सिस्टम के तहत, मैनेजमेंट छुट्टी देने से मना नहीं कर सकता, क्योंकि इसका मकसद कर्मचारियों को आराम का समय खुद तय करने की आजादी देना है।

हर्ष गोयनका ने एक्स पर पोस्ट शेयर किया है। उन्होंने लिखा- चीन की रिटेल कंपनी ‘पैंग डोंग लाई’ अपने कर्मचारियों को 10 दिन की पेड “अनहैपी लीव” देती है। कंपनी के फाउंडर यू डोंगलाई की सोच साफ है- “अगर आप खुश नहीं हैं, तो काम पर न आएं।” कहा जाता है कि मैनेजर इस तरह की छुट्टी की रिक्वेस्ट को मना नहीं कर सकते।

उन्होंने आगे लिखा-क्या यह कुछ ज़्यादा ही है? शायद। हमें इस बात पर और गहराई से सोचने की ज़रूरत है कि क्या भारतीय माहौल में ‘अनहैपी लीव’ की जरूरत है या फिर क्या बर्नआउट (काम के तनाव से होने वाली थकान) को रोकने और ऐसा वर्कप्लेस बनाने का कोई बेहतर तरीका हो सकता है, जहां लोग सच में काम पर आना चाहें।

गोयनका ने बदलते ग्लोबल वर्क कल्चर को देखते हुए यह पोस्ट शेयर किया है। लेकिन उनके प्रोफेशनल नेटवर्क में इसे लेकर बहुत अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कमेंट बॉक्स में लोग-लोग अपने विचार शेयर कर रहे हैं।

कुछ लोगों को उनका ये सजेशन पसंद नहीं आया। लोगों का कहना है कि अगर पूरी टीमें परफॉर्मेंस टारगेट पूरे न होने के बाद महीने के आखिरी दिनों जैसी अहम तारीखों पर “अनहैप्पी लीव” (unhappy leave) के लिए अप्लाई करती हैं, तो यह खतरनाक हो सकता है। कंपनी पर गहरा असर पड़ेगा।

वहीं कई प्रोफेशनल्स का तर्क है कि छुट्टी देने से सिस्टम की कई समस्याओं को ठीक नहीं किया जा सकता है। वहीं कुछ ने कहा कि लीडर्स को अटेंडेंस मैनेज करने के बजाय “उत्साह बढ़ाने” पर ध्यान देना चाहिए, जिससे मेंटल हेल्थ की वजह से छुट्टी लेने की जरूरत अपने आप कम हो जाएगी।

Thalapathy Vijay: सीएम विजय की वाइफ संगीता ने मार यू टर्न, तालक की अर्जी को लिया वापस

Thalapathy Vijay: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की पत्नी संगीता ने शुक्रवार को चेंगलपट्टू (जो यहां के पास है) की फैमिली कोर्ट में दायर अपनी तलाक की अर्जी वापस ले ली। खबरों के मुताबिक, विजय की पत्नी संगीता ने एक्टर से राजनेता बने विजय के साथ अपनी शादी खत्म करने के लिए दायर तलाक की अर्जी वापस ले ली है। यह तब हुआ जब चेंगलपट्टू फैमिली वेलफेयर कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई शुरू की, जहां कपल के वैवाहिक विवाद को लेकर कार्यवाही चल रही थी।

इससे पहले, दोनों के बीच मतभेदों की खबरों के बाद संगीता ने विजय से तलाक के लिए फैमिली कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इसके बाद मामले में कई बार सुनवाई हुई और कोर्ट ने दोनों पक्षों को पेश होकर अपना-अपना पक्ष रखने को कहा। पिछली सुनवाई के दौरान, विजय और संगीता में से कोई भी कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं था। खबरों के मुताबिक, दोनों के वकीलों ने उनकी परिस्थितियों को देखते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल होने की अनुमति मांगी थी।

लंदन से पेश हुईं संगीता

7 अगस्त को हुई हालिया सुनवाई में, संगीता लंदन से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए कोर्ट के सामने पेश हुईं। जब उनकी अर्जी पर सुनवाई हुई तो संगीता वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट के सामने पेश हुईं और उन्होंने अपना केस आगे न बढ़ाने के कारण बताए।

जब संगीता की अर्ज़ी पर सुनवाई हुई तो वह वीडियो-कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए कोर्ट के सामने पेश हुईं और उन्होंने अपना केस आगे न बढ़ाने की वजहें बताईं। कोर्ट के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, इसके बाद कोर्ट ने उनकी याचिका को ‘वापस ली गई’ मानकर निपटा दिया।

यह कार्यवाही निजी तौर पर हुई, जिसमें संगीता ने जज के सामने अपना पक्ष रखा। खबरों के मुताबिक, उन्होंने करीब 20 मिनट तक बात की और तलाक की याचिका से जुड़े सवालों के जवाब दिए। कार्यवाही फिर से शुरू होने से पहले सुनवाई में थोड़ी रुकावट भी आई थी।

हालांकि, इस मामले में एक अहम मोड़ आया है। खबरों के मुताबिक, संगीता ने अब उस तलाक की याचिका को वापस लेने का फ़ैसला किया है, जो उन्होंने स्थानीय फ़ैमिली कोर्ट में दायर की थी। याचिका वापस लेने के उनके फ़ैसले की सटीक वजह का खुलासा नहीं किया गया है। यह भी तुरंत साफ नहीं है कि याचिका वापस लेने का मतलब कपल के निजी रिश्तों में कोई बदलाव है या यह फ़ैसला कानूनी या प्रक्रियात्मक वजहों से लिया गया है।

विजय-संगीता की शादी

सिनेमा में विजय के दशकों लंबे करियर और उसके बाद राजनीति में आने के बावजूद, विजय और संगीता ने अपनी पारिवारिक ज़िंदगी को ज़्यादातर लोगों की नज़रों से दूर ही रखा है। जब ऐसी खबरें आईं कि संगीता ने तलाक के लिए फ़ैमिली कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है, तो उनके वैवाहिक रिश्ते पर लोगों का ध्यान ज़्यादा गया।

Sugar Price : इस साल फेस्टिवल सीजन में फीका हो सकता है चीनी का स्वाद, 15% तक बढ़े शुगर के दाम

Sugar Price : फेस्टिवल सीजन में चीनी का स्वाद फीका पड़ सकता है। पिछले एक महीने में कुछ राज्यों में चीनी के दाम 15% तक बढ़े हैं। इसका उत्पादन बढ़ाने के लिए चीनी मिलों ने शुगर क्रशिंग पहले शुरू करने का फैसला लिया है। सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद चीनी के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। पिछले एक महीने के अंदर चीनी के दाम औसतन 8 फीसदी तक बढ़ गए हैं। ऐसे में चीनी का उत्पादन बढ़ा कर इसके बढ़ते दाम को थामने के लिए चीनी मिलों ने इस साल शुगर क्रशिंग पहले शुरू करने का फैसला किया है।

इस साल फेस्टिवल सीजन में चीनी का स्वाद फीका हो सकता है। दरअसल,इस साल अनुमान के मुताबिक चीनी का उत्पादन नहीं हुआ है। इस साल चीनी का उत्पादन 293 लाख टन रहने का अनुमान था लेकिन ये 280 लाख टन ही रहा,जो अनुमान के मुकाबले करीब 5% कम है। पिछले साल का करीब 50 लाख टन स्टॉक उपलब्ध है लेकिन देश में कुल चीनी की खपत 280 लाख टन होती है। इस साल करीब 8 लाख टन चीनी निर्यात हुई है। पिछले महीने चीनी के होलसेल दाम में 400 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है। इसे देखते हुए कंपनियों ने इस साल चीनी का उत्पादन 10-15 दिन पहले शुरू करने का फैसला किया है।

अगर सरकार के आंकड़ों पर नजर डालें तो दिल्ली में 1 महीने पहले चीनी का दाम 45 रुपए प्रति किलो था जो अब बढ़कर 49 रुपए प्रति किलो हो गया है। वहीं,पश्चिम बंगाल में 1 महीने पहले इसका दाम 49 रुपए प्रति किलो था जो अब 55 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गया है। चेन्नई में 1 महीने पहले चीनी का दाम 46 रुपए प्रति किलो था जो अब बढ़कर 53 रुपए प्रति किलो हो गया है। मुंबई में 1 महीने पहले चीनी का दाम 46 रुपए प्रति किलो था जो अब बढ़कर 52 रुपए प्रति किलो हो गया है। इसी तरह रांची में 1 महीने पहले चीनी का दाम 47 रुपए प्रति किलो था जो अब बढ़कर 51 रुपए प्रति किलो हो गया है। पिछले एक महीने में चीनी के दाम औसतन 8 फीसदी तक बढ़े हैं। कुछ राज्यों में तो चीनी के दाम में 15 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है।

चीनी की कीमतों को काबू में रखने के लिए सरकार ने स्टॉक लिमिट लगाई है। साथ ही चीनी मिलों के स्टॉक की भी जांच की है। लेकिन एल नीनो और अगले साल चीनी का उत्पादन कम होने की आशंका से दाम लगातार बढ़ रहे हैं।

चीनी कंपनियों मार्जिन में आएगा सुधार

चीनी की कीमतों में बढ़त से उपभोक्ता भले ही परेशान हों लेकिन इससे चीनी मिल कंपनियों को फायदा होगा। चीनी के दाम बढ़ने से बलरामपुर चीनी,द्वारिकेश शुगर,श्री रेणुका शुगर और डालमिया भारत शुगर जैसी कंपनियों के मुनाफे में बढ़ोतरी की उम्मीद है। ऊंचे दाम से उनके मार्जिन सुधर सकते हैं। साथ ही यह सरकार के महत्वाकांक्षी इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के लिए भी झटका साबित हो सकता है। ऊंची कीमतों की वजह से मिलें इथेनॉल बनाने के बजाय चीनी बेचना ज्यादा फायदेमंद समझ सकती हैं, जिससे देश में इथेनॉल का उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

 

 

Market Outlook : निफ्टी-सेंसेक्स गिरावट के साथ हुए बंद, जानिए 10 अगस्त को कैसी रह सकती है इनकी चाल

Flying Car: उत्तराखंड के इस व्यक्ति ने खुदकी बनाई फ्लाइंग कार की ली टेस्ट-ड्राइव, इंटरनेट ने’देसी जुगाड़’ की खूब हो रही तारीफ

Flying Car: उत्तराखंड के पहाड़ी इलाके के एक व्यक्ति ने उस चीज को असलियत में बदल दिया है, जिसे ज़्यादातर लोग सिर्फ़ साइंस-फ़िक्शन (काल्पनिक विज्ञान) समझते थे। अल्मोड़ा के काफ़लीखान गांव के रहने वाले इनोवेटर रवि टम्टा ने ‘HAPIDA SKYNeX’ का सफल टेस्ट-फ़्लाइट किया है। यह एक-सीट वाला इलेक्ट्रिक फ़्लाइंग व्हीकल प्रोटोटाइप है, और उन्हें उम्मीद है कि एक दिन यह भारत में पर्सनल ट्रांसपोर्टेशन (निजी परिवहन) को पूरी तरह बदल देगा।

अल्मोड़ा में एक खुले मैदान में की गई इस टेस्ट-फ़्लाइट के वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। टम्टा के स्टार्टअप ‘Hapida Sky Private Limited’ के तहत बना यह एयरक्राफ़्ट, ड्रोन टेक्नोलॉजी का ही एक मॉडिफ़ाइड और अपग्रेडेड वर्शन है, जिसे किसी व्यक्ति को हवा में सुरक्षित रूप से ले जाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

तमटा का कहना है कि यह आइडिया एक आम समस्या से आया। उनके गांव से घर तक का 40 किलोमीटर का सफ़र, जिसमें सड़क मार्ग से आमतौर पर लगभग 90 मिनट लगते हैं, हवाई मार्ग से सिर्फ़ 10 मिनट में पूरा किया जा सकता है। उनका लंबे समय का विज़न एक सुरक्षित, इलेक्ट्रिक पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल बनाना है, जिससे हवाई सफ़र आसान और व्यावहारिक हो सके, खासकर पहाड़ी इलाकों में।

इसे अपने करियर का सबसे बड़ा मील का पत्थर बताते हुए, टम्टा ने कहा कि सफल लिफ्ट-ऑफ कई सालों की रिसर्च, संघर्ष, प्रयोगों और लगातार कोशिशों का नतीजा था। टेस्ट के बाद उन्होंने कहा, “आज मेरी ज़िंदगी का बहुत बड़ा दिन है। मुझे यह बताते हुए बहुत खुशी और गर्व हो रहा है कि HAPIDA SKYNeX की पहली सफल उड़ान कई सालों की रिसर्च, संघर्ष, प्रयोगों और लगातार कोशिशों का नतीजा है।”

इस कामयाबी ने ऑनलाइन लोगों का दिल जीत लिया है। एक यूज़र ने लिखा, “अद्भुत! यह पहाड़ी इलाकों में ट्रांसपोर्टेशन के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।” एक और यूज़र ने कमेंट किया, “हमें सिर्फ़ डिग्री-होल्डर्स की नहीं, बल्कि ऐसे इनोवेटर्स की ज़रूरत है।” कुछ लोगों ने इसे “उत्तराखंड का पहला बड़ा इनोवेशन” बताया और अधिकारियों से टम्टा के काम को मान्यता देने और उसे सपोर्ट करने की अपील की। ​​एक और यूज़र ने कहा, “हमारे पहाड़ी इलाकों से बहुत अच्छी खबर है।”

हालांकि HAPIDA SKYNeX अभी सिर्फ़ एक प्रोटोटाइप है और कमर्शियल इस्तेमाल के लिए तैयार होने में अभी काफी समय है, लेकिन इसकी सफल टेस्ट फ़्लाइट एक अहम शुरुआती कदम है। रवि टम्टा के लिए, यह सिर्फ़ एक उड़ने वाली मशीन बनाने की बात नहीं है—यह साबित करने की बात है कि भारत के छोटे कस्बों और गांवों से भी वर्ल्ड-क्लास इनोवेशन निकल सकते हैं।

क्या देशभर में चलेगी हाइड्रोजन ट्रेन? जिंद-सोनीपत रूट के बाद अब रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में दी ये जानकारी

देश में पहली हाइड्रोजन पावर्ड ट्रेन के सफल परिचालन के बाद अब इसे दूसरे रेल रूट्स पर भी चलाने को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। जिंद-सोनीपत रूट पर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत के बाद अब इसके विस्तार को लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में महत्वपूर्ण जानकारी दी है। समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक रेल मंत्री ने शुक्रवार को राज्यसभा में एक लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि दूसरे रेल रूट्स पर हाइड्रोजन ट्रेन चलाने का फैसला संसाधनों की उपलब्धता, ऑपरेशनल फिजिबिलिटी और दूसरी जरूरी चीजों पर निर्भर करेगा।

संसद में सांसदों ने पूछे थे हाइड्रोजन तकनीक से जुड़े कई सवाल

आपको बता दें कि राज्यसभा में अलग अलग राजनीतिक दलों के सांसदों ने रेलवे की इस नई तकनीक को लेकर कई सवाल उठाए थे। सांसदों ने इसके विकास पर हुए कुल खर्च, देश भर में स्वीकृत और प्रस्तावित हाइड्रोजन ट्रेन परियोजनाओं का ब्योरा, इन परियोजनाओं के लिए ग्रीन हाइड्रोजन की उपलब्धता, लागत और ग्रीन हाइड्रोजन ईंधन के लिए विकसित की जा रही घरेलू मैन्युफैक्चरिंग कैपिसिटी को लेकर रेल मंत्री से जवाब मांगा था।

जिंद-सोनीपत रूट पर दर्ज हुई कॉमर्शियल सर्विस की सक्सेस

सांसदों के सवालों का लिखित जवाब देते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उच्च सदन को बताया कि 17 जुलाई 2026 को जिंद-सोनीपत रूट पर हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत की गई थी। 17 जुलाई से लेकर 3 अगस्त तक 89 किलोमीटर लंबे जिंद-सोनीपत सेक्शन पर इस ट्रेन ने कुल 2492 किलोमीटर की दूरी तय की है। रेल मंत्री ने अपने बयान में कहा कि भारतीय रेलवे में हाइड्रोजन संचालित ट्रेन तकनीक के इस्तेमाल को प्रदर्शित करने के लिए इस हाइड्रोजन ट्रेन को पायलट आधार पर विकसित किया गया है।

जींद में बना डेडिकेटेड प्लांट और सेफ्टी प्रोटोकॉल

रेल मंत्री ने बताया कि इस ट्रेनसेट को हाइड्रोजन उपलब्ध कराने के लिए हरियाणा के जींद में एक डेडिकेटेड हाइड्रोजन प्लांट स्थापित किया गया है। सुरक्षा मानकों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही हाइड्रोजन स्टोरेज फैसिलिटी तैयार की गई है, जिससे निर्धारित सुरक्षा मानकों और प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन सुनिश्चित हो सके।

पर्यावरण को फायदा: जीरो कार्बन उत्सर्जन

इस तकनीक के फायदों के बारे में बताते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि हाइड्रोजन ट्रेनसेट शून्य कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन सुनिश्चित करता है, जिसमें बाई-प्रोडक्ट के रूप में सिर्फ जलवाष्प (Water Vapour) ही निकलती है। उन्होंने आगे कहा कि यह ट्रेनसेट फ्यूल सेल तकनीक पर काम करता है। इसमें ट्रैक्शन पावर जेनरेशन के लिए कोई मूविंग पार्ट या पारंपरिक इंजन नहीं होता है। इस वजह से इसके मूवमेंट में शोर भी नहीं होता और ध्वनि प्रदूषण कम होता है। यह प्रोजेक्ट भारतीय रेलवे को हाइड्रोजन तकनीक के क्षेत्र में मजबूती से स्थापित करता है।

141 करोड़ रुपये थी इस प्रोजेक्ट की लागत

इस प्रोजेक्ट पर आए खर्च का ब्योरा देते हुए रेल मंत्री ने बताया कि इस पायलट प्रोजेक्ट को कुल 141 करोड़ रुपये के खर्च से तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि यह ट्रेनसेट और इसका इंफ्रास्ट्रक्चर प्रायोगिक तौर पर तैयार किया गया है, इसलिए इस चरण में स्थापित ट्रैक्शन सिस्टम के साथ हाइड्रोजन चालित ट्रेनों की लागत की सीधी तुलना करना उचित नहीं है। रेल मंत्री ने इस ट्रेन की प्रमुख विशेषताओं के बारे में भी बताया है। यह ट्रेन पूरी तरह से स्वदेशी डिजाइन और विकास पर आधारित है। ब्रॉड-गेज प्लेटफॉर्म पर 10 डिब्बों के साथ यह दुनिया की सबसे लंबी और 2400 किलोवाट क्षमता वाली सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनसेट है। इसमें 1200 किलोवाट के दो ड्राइविंग पावर कार लगे हैं, जो मिलकर 2400 किलोवाट बिजली पैदा करते हैं, और इसके साथ आठ पैसेंजर कोच जोड़े गए हैं।

क्या अन्य रूटों पर भी चलेगी हाइड्रोजन ट्रेन?

फिलहाल भारतीय रेलवे सिर्फ जिंद-सोनीपत सर्किट पर ही पायलट आधार पर इस हाइड्रोजन पावर्ड ट्रेन तकनीक का संचालन कर रहा है। देश के दूसरे हिस्सों में इसके विस्तार को लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दोहराया कि अन्य रूटों पर हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने का निर्णय भविष्य में संसाधनों की उपलब्धता, परिचालन संबंधी व्यावहारिकताओं और अन्य आवश्यकताओं का आकलन करने के बाद ही लिया जाएगा।

Titan Q1 Profit: नेट प्रॉफिट 65% बढ़कर 1699 करोड़ रुपये, रेवेन्यू में 24 फीसदी इजाफा

Titan Q1 Profit: टाइटन कंपनी का प्रदर्शन जून तिमाही में शानदार रहा। इस दौरान कंपनी का कंसॉलिडेटेड प्रॉफिट 65 फीसदी बढ़कर 1,699 करोड़ रुपये रहा। यह एनालिस्ट्स के अनुमान से काफी ज्यादा है। सीएनबीसी-टीवी18 के पोल में एनालिस्ट्स ने जून तिमाही में प्रॉफिट 1,267 करोड़ रुपये रहने का अनुमान जताया था। कंपनी ने नतीजों का ऐलान शेयर बाजार बंद होने के बाद किया। इसके शेयरों पर नतीजों का असर 10 अगस्त को बाजार खुलने पर दिखेगा।

ऑपरेशंस से रेवेन्यू 18101 करोड़ रुपये

Titan Company का ऑपरेशंस से रेवेन्यू जून तिमाही में साल दर साल आधार पर 24.3 फीसदी बढ़कर 18,101 करोड़ रुपये रहा। कंपनी का रेवेन्यू एक साल पहले की समान अवधि में 14,564 करोड़ रुपये था। एनालिस्ट्स ने जून तिमाही में रेवेन्यू 19,700 करोड़ रुपये रहने का अनुमान जताया था।

ज्वेलरी पोर्टफोलियो की ग्रोथ 43 फीसदी 

टाइटन के ज्वेलरी पोर्टफोलियो की ग्रोथ जून तिमाही में शानदार रही। इस पोर्टफोलियो की इनकम 43 फीसदी बढ़कर 18,253 (बुलियन और डिजी-गोल्ड सेल्स छोड़कर) करोड़ रुपये रही। इसमें फेस्टिवल डिमांड और अक्षय तृतीया पर अच्छी खरीदारी का हाथ रहा। कंपनी का वॉचेज पोर्टफोलियो 21 फीसदी बढ़ा। इसकी इनकम 1,543 करोड़ रुपये रही। इसमें एनालॉग घड़ियों में ग्राहकों की बढ़ती दिलचस्पी का हाथ रहा।

कंज्यूमर बिजनेस की ग्रोथ 40 फीसदी 

टाइटन के मैनेजिंग डायरेक्टर अजय चावला ने कहा, “इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही कंपनी के लिए स्ट्रॉन्ग रही। कंज्यूमर बिजनेस की ग्रोथ साल दर साल आधार पर 40 फीसदी रही। प्रीमियम ऑफरिंग्स में दिलचस्पी रखने वाले ग्राहकों को ज्वेलरी, वॉचेज, आईकेयर और इमर्जिंग बिजनेसेज के ब्रांड्स ने अच्छी वैल्यू डिलीवर की। “

इंटरनेशनल ज्वेलरी बिजनेस की ग्रोथ 136 फीसदी

टाइटन के इंडिया बिजनेस की ग्रोथ साल दर साल आधार पर 38 फीसदी बढ़कर 16,943 करोड़ रुपये रही। तनिष्क, Mia और Zoya बिजनेसेज की ग्रोथ 38 फीसदी बढ़कर 15,502 करोड़ रुपये रही। कैरेटलेन की ग्रोथ 40 फीसदी बढ़कर 1,441 करोड़ रुपये रही। इंटरनेशनल ज्वेलरी बिजनेस की ग्रोथ 136 फीसदी बढ़कर 1,309 करोड़ रुपये रही।

यह भी पढ़ें: Hindalco Q1 Results: प्रॉफिट 75% बढ़कर 7013 करोड़ रुपये, रेवेन्यू 32 फीसदी बढ़ा

बीते एक साल में 45 फीसदी ढ़ा शेयर 

टाइटन टाटा समूह की कंपनी है। इसका शेयर 7 अगस्त को 1.08 फीसदी गिरकर 4,944 रुपये पर बंद हुआ। बीते एक साल में यह शेयर करीब 45 फीसदी चढ़ा है। 7 अगस्त को शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में गिरावट आई। निफ्टी 0.27 फीसदी गिरकर 24,570 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 455 अंक यानी 0.58 फीसदी गिरकर 78,499 पर क्लोज हुआ।

अंधेरा होते ही चमक उठते हैं ये 7 जंगल और बीच, कहलाते है इंडिया का सीक्रेट नाइट शो!

भारत के वेस्टर्न घाट के कुछ जंगल और कुछ समुद्र तट रात के समय बायोल्यूमिनेसेंस की वजह से चमक उठते हैं। जंगलों में यह रोशनी फंगस से और समुद्र में छोटे प्लैंकटन से होती है। मानसून और उसके बाद का समय इस दुर्लभ प्राकृतिक नजारे को देखने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। इन जगहों की खूबसूरती के साथ-साथ इनके कंर्वेशन का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है।

मट्टू बीच, कर्नाटक (Mattu Beach, Karnataka)

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कर्नाटक के उडुपी के पास मट्टू बीच अपनी खूबसूरती के साथ-साथ रात में दिखने वाली नीली चमक के लिए भी जाना जाता है। मानसून के बाद सही मौसम में समुद्र की लहरों में मौजूद छोटे-छोटे प्लैंकटन नीली रोशनी छोड़ते हैं, जिससे पूरा बीच चमकता हुआ दिखाई देता है। यह नजारा टूरिस्ट और फोटोग्राफरों को खूब पसंद आता है। सितंबर से दिसंबर के बीच यहां आने का सबसे अच्छा समय माना जाता है।

अगुम्बे, कर्नाटक (Agumbe, Karnataka)

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अगुम्बे को “दक्षिण भारत का चेरापूंजी” कहा जाता है। यह जगह घने जंगलों, तेज बारिश और प्राकृतिक सुंदरता के लिए मशहूर है। मानसून के दौरान यहां पेड़ों की गिरी हुई लकड़ियों पर उगने वाले खास फंगस रात में हल्की हरी रोशनी छोड़ते हैं। प्रकृति का अनोखा नजारा देखने के लिए जून से सितंबर के बीच यहां घूमने जा सकते हैं।

बंगाराम आइलैंड, लक्षद्वीप (Bangaram Island, Lakshadweep)

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लक्षद्वीप का बंगाराम आइलैंड भारत के सबसे मशहूर ग्लोइंग बीच में से एक है। यहां समुद्र में मौजूद छूटे प्लैंकटन लहरों के हिलने पर चमकीली नीली रोशनी छोड़ते हैं। रात के समय ऐसा लगता है जैसे पूरा समुद्र चमक रहा हो। इस खूबसूरत नजारे को देखने के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे अच्छा माना जाता है।

गोवा के बायोल्यूमिनेसेंट बीच, गोवा (Goa Bioluminescent Beaches, Goa)

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गोवा के बेतालबातिम, कोलवा और कुछ अन्य शांत बीचों पर मानसून के बाद कई बार रात में समुद्र की लहरें नीली रोशनी से चमकती दिखाई देती हैं। यह रोशनी समुद्र में मौजूद सूक्ष्म प्लैंकटन की वजह से होती है। हालांकि यह नजारा हर रात नहीं दिखता, लेकिन सही मौसम में इसे देखना यादगार एक्सपीरियंस बन जाता है। सितंबर से दिसंबर के बीच का टाइम यहां घूमने के लिए परफेक्ट है।

भीमाशंकर वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी, महाराष्ट्र (Bhimashankar Wildlife Sanctuary, Maharashtra)

महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट में स्थित भीमाशंकर वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी रात में चमकने वाले जंगलों के लिए जानी जाती है। मानसून के दौरान यहां गिरी हुई लकड़ियों पर उगने वाले फंगस हल्की हरी रोशनी छोड़ते हैं, जिससे जंगल का नजारा बेहद खास लगता है। जुलाई से सितंबर के बीच और बिना चांद वाली रातों में यह दृश्य सबसे ज्यादा खूबसूरत दिखाई देता है।

चोरला घाट, गोवा–कर्नाटक–महाराष्ट्र (Chorla Ghat, Goa–Karnataka–Maharashtra)

गोवा, कर्नाटक और महाराष्ट्र की बॉर्डर पर चोरला घाट अपने घने जंगलों और हरियाली के लिए पॉपुलर है। मानसून के दौरान यहां नमी ज्यादा होने की वजह से चमकने वाले फंगस आसानी से उग जाते हैं। रात के समय गिरी हुई लकड़ियों पर हल्की हरी चमक दिखाई देती है, जो इस जगह को और भी खास बना देती है। जुलाई से सितंबर यहां घूमने का सबसे अच्छा समय है।

साइलेंट वैली नेशनल पार्क, केरल (Silent Valley National Park, Kerala)

केरल का साइलेंट वैली नेशनल पार्क भारत के सबसे खूबसूरत और सुरक्षित वर्षावनों में से एक है। यहां का ठंडा और नम वातावरण चमकने वाले फंगस के लिए परफेक्ट होता है। मानसून के दौरान जंगल के कुछ हिस्सों में यह दुर्लभ प्राकृतिक नजारा देखने को मिल सकता है। प्रकृति और जंगलों को पास से देखना पसंद करते हैं, तो यह जगह आपके लिए बढ़िया ऑप्शन हो सकती है।

‘मैं आपके साथ हूं’, TMC और उद्धव सेना के बागी सांसदों से बोले PM मोदी

संसद के मानसून सत्र के बीच दिल्ली में शुक्रवार की सुबह विपक्ष से अलग होकर NDA के साथ आए सांसदों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नाश्ते पर मुलाकात की। इस मुलाकात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन सांसदों को भरोसा दिलाया कि उन्हें किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है। जानकारी के अनुसार, संसद के मानसून सत्र के दौरान बदले राजनीतिक समीकरणों के बीच विपक्ष छोड़कर एनडीए में आए नेताओं के स्वागत के लिए यह बैठक बुलाई गई थी। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने उनसे कहा, “आपके बारे में कौन क्या कह रहा है, इसकी चिंता मत कीजिए। घबराने की कोई जरूरत नहीं है, मैं आपके साथ हूं।”

पीएम मोदी की बैठक में क्या हुआ?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस नाश्ता बैठक में करीब 45 सांसद शामिल हुए। इनमें तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) छोड़कर हाल ही में एनसीपीआई में शामिल हुए 20 सांसद, उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना के सात पूर्व सांसद (जिनमें से छह अब एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो चुके हैं), नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के 20 सांसद और अजित पवार गुट की एनसीपी के दो सांसद मौजूद थे। बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम बंगाल के सांसदों से कहा कि वे लोगों के बीच अपनी मौजूदगी और संपर्क को और मजबूत करें। उन्होंने कहा कि देश की तरक्की के लिए पश्चिम बंगाल का विकास भी बहुत जरूरी है। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में हर सांसद को उनके सोशल मीडिया पर लोगों से जुड़ाव से जुड़ी जानकारी का एक प्रिंटआउट दिया गया। प्रधानमंत्री ने सभी सांसदों से कहा कि वे सोशल मीडिया के जरिए लोगों से ज्यादा से ज्यादा जुड़ें और अपनी पहुंच बढ़ाएं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि “जब पश्चिम बंगाल आगे बढ़ता है, तो पूरा भारत आगे बढ़ता है।” उन्होंने सांसदों से कहा कि राज्य में विकास के लिए अभी बहुत काम किया जाना बाकी है। उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ पश्चिम बंगाल ही नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर राज्यों के विकास पर भी बराबर ध्यान देना जरूरी है। इसके लिए बेहतर सड़क, रेल और अन्य सुविधाओं के साथ तेज़ विकास पर काम करना होगा। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने सभी सांसदों को हर साल अपनी मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य जांच कराने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बड़े काम करने हैं, इसलिए सभी का स्वस्थ और फिट रहना बहुत जरूरी है।

बैठक के दौरान चाय पर कुछ हल्के-फुल्के और मजेदार पल भी देखने को मिले। जब मेहमानों को माचा चाय परोसी गई, तो बीजेपी सांसद शताब्दी रॉय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसके बारे में बताया और कहा कि यह चाय पश्चिम बंगाल में भी मिलती है। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने फिर कहा कि पश्चिम बंगाल को एक बार फिर देश के विकास की ताकत बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब पहले बंगाल तरक्की करता था, तब पूरे देश को उसका फायदा मिलता था।

बातचीत के बीच माहौल उस समय और हल्का हो गया, जब वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने मजाक करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के आसपास कई ऐसे नेता हैं, जो पहले फिल्म और टीवी की दुनिया में काम करते थे और अब राजनीति में हैं। इनमें शताब्दी रॉय, सयोनी घोष, जून मालिया और रचना बनर्जी के नाम शामिल हैं। उन्होंने हंसते हुए कहा कि इन सभी के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए प्रधानमंत्री को भी पूरी तरह फिट रहना होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक के दौरान उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना के पूर्व सांसदों से मराठी में बातचीत की। वहीं, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) छोड़कर आए नेताओं से भी उन्होंने गर्मजोशी से मुलाकात की। इससे इन नेताओं की अयोग्यता की आशंका और अपने चुनाव क्षेत्र के लोगों की नाराज़गी जैसी चिंताएं काफी हद तक कम होती दिखीं। बैठक में इन नेताओं को खास महत्व भी दिया गया। एनसीपीआई की अध्यक्ष और मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) काकोली घोष दस्तीदार, जो कभी ममता बनर्जी की करीबी सहयोगी रही हैं, उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ सबसे आगे की पंक्ति में बैठने की जगह दी गई।

संसद में संख्या बढ़ाने पर बीजेपी का जोर

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) संसद में अपने गठबंधन की ताकत बढ़ाने में जुटी है, ताकि उसे दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत मिल सके। यह बहुमत बड़े संवैधानिक संशोधन पास करने के लिए जरूरी माना जाता है। इनमें परिसीमन और महिला आरक्षण लागू करने जैसे अहम विधेयक भी शामिल हैं। हालांकि, विपक्ष छोड़कर आए ज्यादातर सांसद इस बैठक में शामिल हुए, लेकिन मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद क्षेत्र से एनसीपीआई के तीन सांसद—अबू ताहिर खान, खलीलुर रहमान और यूसुफ पठान—एनडीए की बड़ी बैठक में नहीं पहुंचे। बताया जा रहा है कि उन्होंने अपने क्षेत्र के मतदाताओं की नाराज़गी और राजनीतिक माहौल को देखते हुए दूरी बनाए रखी। हालांकि, इन सांसदों ने पार्टी नेतृत्व के साथ विकास कार्यों और अन्य मुद्दों पर अलग से चर्चा की।

Market Outlook : निफ्टी-सेंसेक्स गिरावट के साथ हुए बंद, जानिए 10 अगस्त को कैसी रह सकती है इनकी चाल

Market Outlook : कारोबारी हफ्ते के आखिरी दिन बाजार में गिरावट देखने को मिली है। निफ्टी,सेंसेक्स गिरावट के साथ बंद हुए हैं। निफ्टी,सेंसेक्स गिरावट के साथ बंद हुआ है। वहीं, ऑटो और IT शेयरों में खरीदारी रही। डिफेंस और इंफ्रा इंडेक्स भी बढ़त पर बंद हुए। हालांकि, बैंकिंग और PSE शेयरों में दबाव देखने को मिला। कारोबारी सत्र के अंत में निफ्टी 65 प्वाइंट गिरकर 24,571 पर बंद हुआ। वहीं,सेंसेक्स 456 प्वाइंट गिरकर 78,499 पर बंद हुआ। बैंक निफ्टी भी बैंक निफ्टी 317 प्वाइंट गिरकर 57,746 पर बंद हुआ। जबकि, मिडकैप 137 प्वाइंट चढ़कर 63,464 पर बंद हुआ।

आज निफ्टी के 50 में से 27 शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। वहीं, सेंसेक्स के 30 में से 16 शेयरों में बिकवाली रही। जबकि, बैंक निफ्टी के 14 में से 7 शेयरों में बिकवाली रही। डॉलर के मुकाबले रुपया 1 पैसा मजबूत होकर 95.21 रुपए प्रति डॉलर पर बंद हुआ।

आज ऑटो और IT शेयरों में अच्छी बढ़त के बावजूद फाइनेंशियल शेयरों में गिरावट का असर ज्यादा रहा। बजाज फाइनेंस के शेयरों में लगभग 6 प्रतिशत की गिरावट आई,जबकि बजाज फिनसर्व,ट्रेंट और ICICI बैंक भी गिरने वाले प्रमुख शेयरों में शामिल थे। इसके विपरीत TCS, ग्रासिम और हिंडाल्को के शेयरों में 3 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त हुई। निफ्टी ऑटो और IT इंडेक्स में 1.84 प्रतिशत और 1.42 प्रतिशत की बढ़त हुई,जबकि प्राइवेट बैंकों के शेयरों में 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई। मार्केट ब्रेथ निगेटिव रहा 1,964 शेयरों में बढ़त हुई, जबकि 2,119 शेयरों में गिरावट देखने को मिली।

आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल?

Hedged.in के HNI और डेरिवेटिव्स के एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट रियांक अरोड़ा का कहना है कि भारतीय इक्विटी मार्केट में आज का कारोबार कमजोरी के साथ बंद हुआ। हालिया बढ़त के बाद बेंचमार्क इंडेक्स में प्रॉफिट बुकिंग देखने को मिली। कुछ हैवीवेट शेयरों में बिकवाली के दबाव का असर मार्केट के सेंटीमेंट पर पड़ा,जिससे बाजार लाल निशान में बंद हुआ। आज की गिरावट के बावजूद,मार्केट का ओवरऑल ढांचा काफी हद तक मजबूत बना हुआ। निवेशक ग्लोबल संकेतों और घरेलू घटनाओ पर नज़र बनाए हुए हैं।

उन्होंने आगे कहा कि निफ्टी 65 अंक गिरकर 24,570.00 पर बंद हुआ। इंडेक्स 24,600 के तत्काल सपोर्ट से नीचे आ गया है, लेकिन अपने अहम सपोर्ट लेवल से ऊपर ट्रेड कर रहा है,जो दिखाता है कि बड़ा ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है। अब निफ्टी के लिए 24,500–24,450 के आसपास तत्काल सपोर्ट है और उसके बाद 24,300 के पास एक मजबूत सपोर्ट जोन है। ऊपर की तरफ,इसके लिए 24,650–24,750 के आसपास रेजिस्टेंस दिख रहा है। अगर निफ्टी लगातार इस जोन से ऊपर बना रहता है,तो फिर से तेजी आ सकती और ऊंचे स्तरों के लिए रास्ता खुल सकता है।

रियांक अरोड़ा ने आगे कहा कि सेंसेक्स 317 अंक गिरकर 77,746.00 पर बंद हुआ। सेशन के दौरान इंडेक्स में बड़े पैमाने पर प्रॉफिट बुकिंग देखी गई,लेकिन यह अपने अहम सपोर्ट लेवल से ऊपर बना रहा। इसके लिए तत्काल सपोर्ट 77,500–77,300 के आसपास है,जबकि रेजिस्टेंस 78,000–78,300 के पास दिख रहा है। उन्होंने कहा कि रेजिस्टेंस जोन के ऊपर कोई भी निर्णायक चाल शॉर्ट-टर्म आउटलुक को मज़बूत करेगी।

बाजार के ओवरऑल ट्रेंड पर बात करते हुए उन्होंनें कहा कि हालिया बढ़त के बाद बाजार में हेल्दी करेक्शन का एक दौर देखने को मिला है। आज ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली हुई। जब तक अहम सपोर्ट लेवल बचे हुए हैं, तब तक कुल मिलाकर बाजार का रुख तेजी के पक्ष में रहेगा। ट्रेडर्स और निवेशक मज़बूत फ़ंडामेंटल वाले शेयरों में गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपना सकते हैं। साथ ही उन्हें रिस्क मैनेजमेंट के मामले में अनुशासन बनाए रखना चाहिए।

 

 

Q1 नतीजों के बाद मोतीलाल ओसवाल के सिद्धार्थ खेमका का इन शेयरों पर आया दिल, क्या हैं आपके पास?

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