Agra : बीच सड़क इतना बड़ा गड्ढा, सीढ़ी डालकर गहराई नापने उतरे सपा नेता, वीडियो वायरल

आगरा में हुई तेज बारिश के बाद सड़क धंसने से एक बड़ा गड्ढा बन गया। इस गड्ढे में समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता नितिन कोहली लकड़ी की सीढ़ी के सहारे नीचे उतर गए। इस दौरान वहां मौजूद लोगों की भीड़ जुट गई और पूरा घटनाक्रम चर्चा का विषय बन गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। नितिन कोहली ने इस मौके का इस्तेमाल करते हुए खुद को ‘स्मार्ट सिटी’ कहे जाने वाले आगरा में विकास को लेकर सरकार के दावों पर सवाल उठाए।

यह घटना आगरा के कमला नगर क्षेत्र की कर्मयोगी कॉलोनी की है। लगातार हुई भारी बारिश के बाद सड़क अचानक धंस गई, जिससे गहरा गड्ढा बन गया। इस घटना के बाद सड़क निर्माण की गुणवत्ता और प्रशासन की तैयारियों पर भी सवाल उठने लगे हैं।

बीच सड़क इतना बड़ा गड्ढा

सपा नेता नितिन कोहली का यह अनोखा विरोध प्रदर्शन सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वायरल वीडियो में वह लकड़ी की सीढ़ी के सहारे गड्ढे में उतरते नजर आ रहे हैं, जबकि उनके समर्थक सीढ़ी को पकड़े हुए हैं। गड्ढे के अंदर खड़े होकर कोहली ने बीजेपी सरकार के विकास के दावों पर सवाल उठाए और आगरा की सड़कों की हालत पर तंज कसा। वीडियो में नितिन कोहली कहते सुनाई दे रहे हैं, “हम एक बार फिर विकास की तलाश में निकले हैं। पूरे आगरा की यही हालत हो गई है। मैं विधायक से पूछना चाहता हूं कि क्या यही विकास है? जहां भी सड़क बनती है, वहां कुछ ही समय बाद इतने गहरे गड्ढे हो जाते हैं कि लगता है जैसे पाताल लोक में नया शहर बसाया जा रहा हो। आगरा को स्मार्ट सिटी कहने के बजाय अब ऐसा लग रहा है कि पाताल लोक में नया स्मार्ट सिटी बन रहा है।”

सीढ़ी डालकर गहराई नापने उतरे सपा नेता

गनीमत रही कि इस हादसे में कोई घायल नहीं हुआ, क्योंकि जिस समय सड़क धंसी उस वक्त वहां से कोई वाहन नहीं गुजर रहा था। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही अधिकारी मौके पर पहुंचे, हालात का जायजा लिया और सुरक्षा के लिए धंसी हुई जगह के आसपास बैरिकेडिंग कर दी। इसके बाद सड़क की मरम्मत का काम भी शुरू कर दिया गया। यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब उत्तर प्रदेश में सड़कों और अन्य सार्वजनिक निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे को लेकर भी विवाद हुआ था। उद्घाटन के कुछ ही हफ्तों बाद सड़क पर दरारें पड़ने और कुछ जगहों पर धंसने की खबरें सामने आई थीं, जिसके बाद निर्माण की गुणवत्ता को लेकर कई सवाल खड़े हुए थे।

कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे करीब 4,200 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है। लेकिन ट्रैफिक के लिए खोले जाने के एक महीने के भीतर ही एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों में दरारें, सड़क धंसने और सतह खराब होने की शिकायतें सामने आने लगीं। इन शिकायतों के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने सख्त कदम उठाए। प्राधिकरण ने परियोजना से जुड़े तीन इंजीनियरों को हटा दिया और निर्माण कंपनी पीएनसी इंफ्राटेक के खिलाफ भी कार्रवाई की। साथ ही मरम्मत का काम पूरा होने तक पूरे एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली भी रोक दी गई।

दिल्ली मेट्रो से सफर करने वाले ध्यान दें! 9 अगस्त से स्टेशनों पर बढ़ेगी सख्ती…DMRC ने जारी की एडवाइजरी

दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने शुक्रवार को यात्रियों के लिए अहम सलाह जारी की है। डीएमआरसी के अनुसार, रविवार से अगले आठ दिनों तक कई मेट्रो स्टेशनों पर यात्रियों को लंबी कतारों का सामना करना पड़ सकता है। डीएमआरसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि पूरे मेट्रो नेटवर्क पर सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी की जा रही है। इसी वजह से यात्रियों की सुरक्षा जांच में अधिक समय लग सकता है, जिससे कई स्टेशनों पर लंबी लाइनें लगने की संभावना है।

डीएमआरसी ने यात्रियों से अपील की है कि वे अपनी यात्रा की योजना बनाते समय अतिरिक्त समय लेकर घर से निकलें, ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

स्वतंत्रता दिवस से पहले दिल्ली मेट्रो में बढ़ाई जाएगी सुरक्षा

दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) के अनुसार, स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर मेट्रो स्टेशनों पर सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी की जा रही है। इसके तहत केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) 9 अगस्त से 16 अगस्त तक सभी मेट्रो स्टेशनों पर यात्रियों की सख्त सुरक्षा जांच करेगा। डीएमआरसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि 15 अगस्त 2026 के स्वतंत्रता दिवस समारोह को देखते हुए सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। इसी कारण 9 अगस्त (रविवार) से सभी मेट्रो स्टेशनों पर यात्रियों की जांच पहले से ज्यादा सख्ती से की जाएगी।

डीएमआरसी ने अपनी पोस्ट में कहा कि सख्त सुरक्षा जांच के कारण 16 अगस्त तक, खासकर सुबह और शाम के व्यस्त समय (पीक आवर्स) में कई मेट्रो स्टेशनों पर लंबी कतारें लग सकती हैं। इसलिए यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपनी यात्रा की योजना पहले से बनाएं और घर से थोड़ा अतिरिक्त समय लेकर निकलें। साथ ही सुरक्षा जांच के दौरान सीआईएसएफ और अन्य सुरक्षा कर्मियों का पूरा सहयोग करें।

यह सलाह ऐसे समय में जारी की गई है, जब 15 अगस्त के स्वतंत्रता दिवस समारोह से पहले राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। लाल किले पर होने वाले मुख्य कार्यक्रम को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं। इसी वजह से मेट्रो स्टेशनों पर यात्रियों की जांच पहले से ज्यादा सख्ती से होगी। ऐसे में यात्रियों से अपील की गई है कि वे विशेष रूप से सुबह और शाम के व्यस्त समय में समय से पहले स्टेशन पहुंचें, ताकि किसी तरह की देरी से बचा जा सके।

जेल में बंद अतीक के बेटे उमर और अली को मिली पैरोल, छोटे भाई अबान के जनाजे में होंगे शामिल

झांसी हाईवे पर हुए सड़क हादसे में जान गंवाने वाले अबान अहमद का प्रयागराज में अंतिम संस्कार किया जाएगा। वहीं इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शुक्रवार को जेल में बंद अली अहमद और उमर अहमद को पैरोल देने की अनुमति दी। दोनों अतीक अहमद के बेटे हैं। अदालत ने उन्हें अपने छोटे भाई अबान अहमद के अंतिम संस्कार में शामिल होने की इजाजत दी है। अबान की हाल ही में एक सड़क हादसे में मौत हो गई थी। यह फैसला जस्टिस अजय भनोट और जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत की खंडपीठ ने सुनाया। यह आदेश अतीक अहमद की बहन परवीन कुरैशी की ओर से दायर याचिका पर दिया गया, जिसमें दोनों भाइयों को अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति देने की मांग की गई थी।

कोर्ट से मिली राहत

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि अबान अहमद का अंतिम संस्कार शनिवार सुबह किया जाएगा। इसके बाद हाई कोर्ट ने अली अहमद और उमर अहमद को अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पैरोल पर रिहा करने की अनुमति दे दी। अली अहमद इस समय झांसी जेल में बंद है, जबकि उसका भाई उमर अहमद लखनऊ जेल में सजा काट रहा है।

21 वर्षीय अबान अहमद की गुरुवार को एक सड़क हादसे में मौत हो गई। वह जिस एसयूवी में सफर कर रहा था, वह उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में सड़क के डिवाइडर से टकरा गई। इस हादसे में उसके 25 वर्षीय दोस्त सोनू की भी जान चली गई। पुलिस के अनुसार, अबान अपने दोस्तों के साथ झांसी जेल में बंद अपने बड़े भाई अली से मिलने जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में यह दर्दनाक हादसा हो गया। कार में सवार तीन अन्य लोग—आजम, मोहम्मद जावेद और उमर—भी घायल हो गए। उन्हें इलाज के लिए झांसी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। बाद में उनके परिवार के लोग उन्हें प्रयागराज ले गए।

पिता और भाई की कब्र के पास होगा अबान का अंतिम संस्कार

अबान अहमद को प्रयागराज के कसारी-मसारी कब्रिस्तान में दफनाया जाएगा। उसकी कब्र उसके पिता अतीक अहमद के पास बनाई गई है। इसी कब्रिस्तान में अतीक के भाई अशरफ और बेटे असद की कब्र भी मौजूद है। अबान, अतीक अहमद के पांच बेटों में सबसे छोटा था। पिछले कुछ वर्षों में अहमद परिवार ने कई बड़ी घटनाओं का सामना किया है। अप्रैल 2023 में अतीक अहमद के बेटे असद को झांसी के पास पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया गया था। वह उमेश पाल हत्याकांड में वांछित था। उमेश पाल, वर्ष 2005 में बसपा विधायक राजू पाल की हत्या के मामले में मुख्य गवाह थे। इसके कुछ दिन बाद, 15 अप्रैल 2023 को पुलिस अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को मेडिकल जांच के लिए प्रयागराज के एक अस्पताल ले जा रही थी। इसी दौरान पत्रकार बनकर आए तीन हमलावरों ने दोनों की गोली मारकर हत्या कर दी थी।

Sawan Amavasya 2026 Date: हरियाली अमावस्या पर पुष्य नक्षत्र में होगा स्नान-दान, जानें तारीख और पितरों को तर्पण देने का समय

Sawan Amavasya 2026 Date: सावन के महीने का हिंदू धर्म में विशेष स्थान है। यह भगवान विष्णु के चार माह की योगनिद्रा में जानें के बाद पहला हिंदू माह होता है। इस अवधि में भगवान शिव सृष्टि का कार्यभार संभालते हैं। सावन भगवान शिव का प्रिय माह है। इस माह में आने वाली अमावस्या को हरियाली अमावस्या कहते हैं, क्योंकि इस समय चारों तरफ हरियाली छायी रहती है और मानसून की फुहारों से वातावरण सराबोर रहता है।

हरियाली अमावस्या के दिन गंगा आदि पवित्र नदियों में स्नान और उसके बाद दान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है और पुण्य की प्राप्ति होती है। अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित होती है। इसलिए हरियाली अमावस्या पर तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करने से पितृ प्रसन्न होते हैं। इस दिन पितृ दोष से मुक्ति के लिए विशेष उपाय भी किए जाते हैं। शाम के समय में पितरों के लिए दीपक जलाते हैं, ताकि पितृ लोक लौटते समय उनका मार्ग अंधकार में न रहे। इस साल की सावन अमावस्या पर पुष्य नक्षत्र रहेगा। आइए जानते हैं कि हरियाली अमावस्या कब है और पितृ तर्पण कब कर सकते हैं?

सावन अमावस्या 2026 तारीख

वैदिक पंचांग के आधार पर देखा जाए तो इस बार श्रावण कृष्ण अमावस्या तिथि 12 अगस्त को 01:52 बजे से शुरू हो रही है और यह 12 अगस्त को रात 11:06 बजे तक रहेगी। उदयातिथि को देखते हुए सावन अमावस्या 12 अगस्त बुधवार का है।

सावन अमावस्या 2026 स्नान-दान मुहूर्त

सावन अमावस्या पर स्नान और दान के लिए ब्रह्म मुहूर्त प्रात: 04 बजकर 23 ए एम से लेकर प्रात: 05 बजकर 06 मिनट तक है। जो लोग ब्रह्म मुहूर्त में स्नान न कर पाएं, वे लोग सूर्योदय के बाद स्नान, दान कर सकते हैं। उस दिन लाभ-उन्नति मुहूर्त 05:49 ए एम से 07:28 ए एम तक और अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त 07:28 ए एम से 09:07 ए एम तक रहेगा। इन दोनों समयों में भी स्नान और दान किया जा सकता है। सावन अमावस्या पर साल का अंतिम सूर्य ग्रहण लगने वाला है।

सावन अमावस्या पर तर्पण कब करें?

सावन अमावस्या के दिन स्नान के बाद पितरों के लिए तर्पण कर सकते हैं। हाथ में जल, सफेद फूल और काले तिल लेकर कुशा की मदद से पितरों को तर्पण दे सकते हैं। तर्पण देने से पितर प्रसन्न होते हैं।

व्यतीपात योग और पुष्य नक्षत्र में सावन अमावस्या

इस साल की सावन अमावस्या पर व्यतीपात योग और पुष्य नक्षत्र का योग है। व्यतीपात योग प्रात:काल से लेकर दोपहर 3 बजकर 26 मिनट तक रहेगा, उसके बाद वरीयान् योग बनेगा। व्यतीपात योग में किसी नए या शुभ कार्य की शुरूआत नहीं करते हैं।

पुष्य नक्षत्र प्रात:काल से लेकर सुबह 7 बजकर 59 मिनट तक रहेगा, उसके बाद अश्लेषा नक्षत्र है। पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रों का राजा कहा जाता है। यह एक शुभ नक्षत्र है, इसमें आप शुभ कार्य कर सकते हैं, जिसमें सफलता प्राप्त होती है। स्थिर कार्य भी इस नक्षत्र में कर सकते हैं।

Sawan Bel Patra Ke Upay: सावन के महीने में बेल पत्र के ये उपाय करने से मिल जाएगा सभी तीर्थों का पुण्य फल, जानें इनके बारे में

Sawan Bel Patra Ke Upay: सावन के महीने में बेल पत्र के ये उपाय करने से मिल जाएगा सभी तीर्थों का पुण्य फल, जानें इनके बारे में

Sawan Bel Patra Ke Upay: जिस तरह सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है, उसी तरह उन्हें बिल्प पत्र यानी बेलपत्र भी प्रिय हैं। भगवान शिव की पूजा में बेल पत्र का विशेष स्थान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव की पूजा बेलपत्र के बिना अधूरी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बेल पत्र की जड़ में दुनिया में जितने सभी प्रसिद्ध तीर्थ निवास करते हैं। इसलिए इसकी जड़ के पास दीपक जलाने, दीपमाला दान करने से कई गुना फल मिलता है।

कहा जाता है कि जो व्यक्ति धूप-दीप, फूलों से बिल्ववृक्ष के मूल का पूजन करता है, वह शिवलोक को प्राप्त करता है और उसके सन्तान और सुख दोनों में वृद्धि होती है। ऐसे व्यक्ति को संतान से सुख मिलता है। शिवपुराण सावन के अनुसार, सावन के पवित्र महीने में बिल्व पत्र के पेड़ के नीचे दीपक जलाने का विशेष महत्व और अनेक लाभ बताए गए हैं। इसे प्रदोष काल या रात में जलाना अत्यंत फलदायी माना जाता है। सावन में बेलपत्र के पेड़ के नीचे दीया जलाने के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:

भगवान शिव का आशीर्वाद : शिवपुराण के अनुसार, बेलपत्र के वृक्ष की जड़ में स्वयं महादेव का वास होता है। सावन में इसके नीचे दीपक जलाने से भगवान भोलेनाथ अत्यंत प्रसन्न होते हैं और साधक को सुख-शांति तथा आरोग्य का वरदान देते हैं।

मां लक्ष्मी का वास और धन-धान्य की प्राप्ति : धार्मिक कथाओं के अनुसार, बेलपत्र के वृक्ष में माता लक्ष्मी का भी निवास माना गया है। मान्यता है कि शाम या रात के समय बेलपत्र के नीचे घी का दीपक जलाने से घर से दरिद्रता दूर होती है और आर्थिक संकटों से मुक्ति मिलती है।

पापों का नाश : माना जाता है कि बेलपत्र की जड़ में समस्त तीर्थों का वास होता है। इसके नीचे दीपदान करने से व्यक्ति के ज्ञात-अज्ञात पाप मिट जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

सकारात्मक ऊर्जा और वास्तु दोष से मुक्ति : घर में या आसपास लगे बेलपत्र के नीचे दीया जलाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और वातावरण शुद्ध एवं सकारात्मक बनता है।

पितृ दोष और कष्टों से राहत : बेलपत्र के पेड़ के पास शाम को दिया जलाने से ग्रह-दोष दूर होते हैं और पितरों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।

दीपक जलाने का सही तरीका

दीपक के लिए गाय के शुद्ध घी या तिल के तेल का उपयोग करें।

दीपक मुख्य रूप से प्रदोष काल (सूर्यास्त के आसपास का समय) में बेलपत्र की जड़ के पास जलाएं।

दीपक जलाते समय भगवान शिव के मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का मन में जाप करें।

Pradosh Vrat 2026: सावन के पहले प्रदोष व्रत पर बन रहा दुर्लभ संयोग, जानें सही तारीख और सोम प्रदोष व्रत का मुहूर्त

PoK में पाकिस्तान के साथ हो गया खेल! वहां चुनाव के मामले को लेकर आया बड़ा ट्विस्ट और बढ़ गईं मुश्किलें

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में सुरक्षा कारणों से दो विधानसभा क्षेत्रों में मतदान फिलहाल टाल दिया गया है। चुनाव आयोग ने शुक्रवार को पुंछ और पलंदरी सीटों पर चुनाव स्थगित करने का फैसला लिया। इन सीटों पर 10 अगस्त को आम चुनाव के तीसरे चरण में मतदान होना था। बताया गया है कि इलाके में लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शन और बिगड़ती कानून-व्यवस्था को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। अधिकारियों ने अगले आदेश तक इन दोनों सीटों पर मतदान नहीं कराने का निर्णय किया है।

टल गया चुनाव 

चुनाव आयोग ने अपने बयान में कहा कि यह फैसला लेने से पहले गृह विभाग की सुरक्षा रिपोर्ट का अध्ययन किया गया। साथ ही राजनीतिक दलों और चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों की राय भी ली गई। आयोग ने कहा कि सुरक्षा स्थिति सामान्य होने के बाद नए मतदान कार्यक्रम की घोषणा की जाएगी। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब अवामी एक्शन कमेटी (एएसी) के नेतृत्व में पिछले कई हफ्तों से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। संगठन राजनीतिक और प्रशासन से जुड़े मुद्दों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहा है।

खासकर पुंछ डिवीजन के कई इलाकों में प्रदर्शन ज्यादा तेज रहे हैं। स्थानीय नेताओं का कहना है कि मौजूदा सुरक्षा हालात का असर मतदाताओं और चुनाव प्रक्रिया पर पड़ सकता है। अधिकारियों के अनुसार, चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से कराना जरूरी है। इसी वजह से पुंछ और पलंदरी सीटों पर मतदान फिलहाल टाल दिया गया है। हालांकि, चुनाव आयोग ने साफ किया है कि 10 अगस्त को तीसरे चरण का मतदान बाकी सभी निर्वाचन क्षेत्रों में तय कार्यक्रम के अनुसार होगा।

लोगों के अंदर है गुस्सा 

10 अगस्त को बाग जिले की तीन सीटों और हवेली जिले की एक सीट पर भी मतदान होना है। इसके साथ ही पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में चुनाव का अंतिम चरण पूरा होगा। ये चुनाव ऐसे समय में हो रहे हैं, जब इलाके में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं और कई जगह विरोध प्रदर्शन जारी हैं। विपक्षी दल प्रशासन पर शासन व्यवस्था और चुनाव कराने के तरीके को लेकर सवाल उठा रहे हैं। पुंछ और पलंदरी सीटों से चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों ने भी चुनाव आयोग से मतदान टालने की मांग की थी। उनका कहना था कि मौजूदा सुरक्षा हालात मतदाताओं, मतदान कर्मियों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। चुनाव आयोग ने कहा है कि पुंछ और पलंदरी में मतदान की नई तारीख का ऐलान तभी किया जाएगा, जब अधिकारियों को भरोसा हो जाएगा कि वहां शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से चुनाव कराए जा सकते हैं।

Gold Silver Rates Today: दिल्ली में सोना लगातार चौथे दिन चढ़ा, विदेश में चांदी में जोरदार तेजी

Gold Silver Rates Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में 7 अगस्त को लगातार चौथे दिन सोने में तेजी आई। यह 200 रुपये चढ़कर 1,54,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। विदेशी बाजार में सोने में तेजी का असर इसकी घरेलू कीमतों पर पड़ा। हालांकि चांदी में स्थिरता रही। एमसीएक्स में शाम के कारोबार में गोल्ड फ्यूचर्स और सिल्वर फ्यूचर्स में अच्छी तेजी दिखी।

दिल्ली सर्राफा बाजार में चांदी में स्थिरता

दिल्ली सर्राफा बाजार में चांदी की कीमत 2,34,800 रुपये प्रति किलोग्राम रही। लेमन मार्केट डेस्ट के हेड (रिसर्च) गौरव गर्ग ने कहा कि जनवरी के बाद यह सोने में सबसे ज्यादा तेजी वाला हफ्ता है। सोने में तेजी की कई वजहें हैं। उन्होंने कहा कि डॉलर में नरमी है और इनफ्लेशन में होने वाली वृद्धि उम्मीद से कम रह सकती है।

विदेश में चांदी में 4 फीसदी का उछाल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में 2 फीसदी तेजी दिखी। इससे इसका भाव 4,325.43 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। सिल्वर में 4 फीसदी की तेजी दिखी। जिससे इसका भाव 64.17 डॉलर प्रति औंस हो गया। सोने और चांदी की कीमतों में क्रूड ऑयल में नरमी का भी हाथ है।

अमेरिका में बेरोजगारी दर में कमी 

अमेरिका में जॉब के डेटा आ गए हैं। अमेरिका में जुलाई में नौकरियों में कमी आई, जबकि बेरोजगारी दर थोड़ी कम हुई। इससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिका में नौकरियों के मौके बनने की रफ्तार सुस्त पड़ रही है। बेरोजगारी दर घटकर 4.1 फीसदी पर आ गई। यह बीते पांच सालों में सबसे कम है। इससे यह संकेत मिलता है कि जॉब की तलाश करने वाले अमेरिकी लोगों की संख्या घटी है। इससे यह माना जा रहा है कि आगे अमेरिकी केंद्रीय बैंक का रुख नरम रह सकता है।

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फेड के इंटरेस्ट नहीं बढ़ाने से सोने को सपोर्ट

अगर फेडरल रिजर्व सितंबर में इंटरेस्ट रेट नहीं बढ़ाता है तो इसका सोने की कीमतों पर पॉजिटिव असर पड़ेगा। इंटरेस्ट रेट बढ़ने के माहौल में सोने की चमक फीकी पड़ जाती है। मध्यपूर्व में अगर टेंशन कम होता है तो इसका भी गोल्ड की कीमतों पर पॉजिटिव असर पड़ेगा। हालांकि, अभी अमेरिका और ईरान में सीधी बातचीत की कोई संभावना बनती नहीं दिख रही है।

‘एक और पाकिस्तान…’, आतंकवाद पर को शेख हसीना के बेटे ने दिखाया आईना, भारत ने कही ये बात

भारत ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बेटे साजीब वाजेद जॉय के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया दी। बता दें कि, जॉय ने दावा किया था कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और बढ़ते आतंकवाद के कारण बांग्लादेश, भारत के पूर्वी हिस्से के लिए “एक और पाकिस्तान” बन गया है। शुक्रवार 8 अगस्त को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस मुद्दे पर कहा कि भारत पूरी तरह सतर्क है और पड़ोसी देशों में हो रही हर गतिविधि पर लगातार नजर रखे हुए है। उन्होंने कहा, “हम अपने क्षेत्र और पड़ोसी देशों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखते हैं। सुरक्षा के लिहाज से हर स्थिति की निगरानी की जाती है और जरूरत पड़ने पर उचित कदम भी उठाए जाते हैं।”

हसीना के बेटे ने क्या दावा किया?

साजीब वाजेद जॉय ने यह बयान बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया। यह कार्यक्रम साउथ एशिया फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब (एफसीसी) की ओर से आयोजित किया गया था। उन्होंने यह बात बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के वर्चुअल संबोधन से पहले कही। भारत की सुरक्षा का जिक्र करते हुए जॉय ने दावा किया कि “भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता यह होनी चाहिए कि बांग्लादेश उसके पूर्वी मोर्चे पर एक और पाकिस्तान बनता जा रहा है।” उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस) को बांग्लादेश में खुलकर काम करने की छूट मिली हुई है।

शेख हसीना के वर्चुअल संबोधन पर क्या बोला विदेश मंत्रालय?

बांग्लादेश में 5 अगस्त 2024 को छात्रों के नेतृत्व में हुए बड़े आंदोलन के बाद शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी थी। इसके बाद से वह भारत में रह रही हैं। हसीना के पद छोड़ने के बाद मुहम्मद यूनुस ने अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार के रूप में जिम्मेदारी संभाली। उनकी देखरेख में देश में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी हुई और इस साल फरवरी में चुनाव कराए गए।

इस बीच, भारत के विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि शेख हसीना के वर्चुअल संबोधन के आयोजन में भारत सरकार की कोई भूमिका नहीं थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नियमित प्रेस वार्ता में कहा, “जिस कार्यक्रम की बात की जा रही है, उसका आयोजन एक निजी मीडिया संस्था कर रही है। इसमें भारत सरकार की कोई भूमिका नहीं है और न ही सरकार उस मंच पर रखे जाने वाले विचारों का समर्थन करती है।”

इन 10 म्यूचुअल फंडों ने SIP के निवेशकों को बीते 5 साल में दिए सबसे ज्यादा रिटर्न, देखें पूरी लिस्ट

शेयरों की तरह जोरदार रिटर्न के लिए म्यूचु्अल फंड की सही स्कीम का चुनाव जरूरी है। कुछ फंडों का रिटर्न हमेशा कैटेगरी के औसत रिटर्न से काफी ज्यादा होता है। एनालिसिस के नतीजे बताते हैं कि कुछ फंडों ने सिप के निवेशकों को सालाना 20 फीसदी से ज्यादा रिटर्न दिए हैं। खास बात यह है कि स्मॉलकैप और मिडकैप फंड्स रिटर्न देने में सबसे आगे हैं।

बीते पांच सालों में स्मॉलकैप और मिडकैप फंड्स का जलवा

सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाले 10 फंडों में 9 फंड स्मॉलकैप और मिडकैप कैटेगरी के हैं। इनमें 4 स्मॉलकैप स्कीम हैं। पांच मिडकैप स्कीम हैं। SBI Children Fund सिर्फ एक अपवाद है, जो फ्लेक्सीकैप स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल करता है।

इससे यह संकेत मिलता है कि बीते 5 सालों में जिन निवेशकों ने ज्यादा रिस्क लिया, उन्हें ज्यादा रिटर्न मिला। इस दौरान स्मॉलकैप कंपनियों का प्रदर्शन अच्छा रहा। स्मॉलकैप और मिडकैप फंडों ने सिप के निवेशकों को लार्जकैप फंडों के मुकाबले ज्यादा रिटर्न दिए।

एक्टिव लार्जकैप फंड्स की चमक पड़ी फीकी

सिप इनवेस्टर्स को सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाले फंडों में एक भी एक्टिवली मैनेज्ड लार्जकैप फंड शामिल नहीं है। पिछले पांच सालों में लार्जकैप स्कीम में सबसे अच्छा प्रदर्शन Invesco India Largecap Fund का रहा है। इसका सालाना सिप रिटर्न 14.27 फीसदी रहा है। यह 64 लार्जकैप फंड्स में 10वें नंबर पर है। लार्जकैप कैटेगरी में टॉप 9 पोजीशन पर इंडेक्स फंड और ईटीएफ रहे हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि लार्जकैप कैटेगरी में पैसिव फंड्स एक्टिव फंड मैनेजर्स को चुनौती दे रहे हैं।

जोरदार रिटर्न देने वाले फंड्स में उतार-चढ़ाव भी ज्यादा

बीते पांच सालों में स्मॉलकैप और मिडकैप रिटर्न देने में सबसे आगे रहे हैं। लेकिन, म्यूचुअल फंड्स की इन दोनों कैटेगरी में सबसे ज्यादा उतार-चढ़ाव दिखा है। उनका शानदार प्रदर्शन फेवरेबल मार्केट साइकिल में दिखा है। इस ट्रेंड के अगले पांच सालों में रिपीट होने की गारंटी नहीं है।

top 10 fund

रिस्क लेने की कपैसिटी के आधार पर फंड का सेलेक्शन्

एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी फंड के पिछले रिटर्न को देखकर निवेश का फैसला ठीक नहीं है। इनवेस्टर को यह देखने की जरूरत है कि वह कितना रिस्क ले सकता है। किसी फंड का लंबी अवधि में लगातार अच्छा प्रदर्शन कुछ सालों में बेहतर प्रदर्शन के मुकाबले ज्यादा मायने रखता है।