Vedanta Dividend: वेदांता की डिविडेंड देने की तैयारी, 8 अक्टूबर को होगा फैसला; रिकॉर्ड डेट का ऐलान

Vedanta Dividend: वेदांता लिमिटेड के शेयर में मंगलवार को हलचल बढ़ सकती है। कंपनी ने सोमवार को बाजार बंद होने के बाद अंतरिम डिविडेंड को लेकर अहम जानकारी दी है। कंपनी के बोर्ड की बैठक 8 अक्टूबर 2026 को होगी। इसमें वित्त वर्ष 2026-27 के पहले अंतरिम डिविडेंड पर फैसला लिया जा सकता है।

14 अक्टूबर है रिकॉर्ड डेट

वेदांता ने बताया कि अगर अंतरिम डिविडेंड घोषित होता है, तो इसके लिए 14 अक्टूबर 2026 को रिकॉर्ड डेट तय की गई है। इसी तारीख के आधार पर यह तय होगा कि डिविडेंड पाने के लिए कौन से शेयरधारक पात्र होंगे।

सोमवार को वेदांता का शेयर 0.89% की तेजी के साथ ₹254.30 पर बंद हुआ। पिछले 1 महीने में स्टॉक 5.11% गिरा है।

डिविडेंड देने का तगड़ा रिकॉर्ड

वेदांता इस साल पहले भी निवेशकों को अंतरिम डिविडेंड दे चुकी है। कंपनी ने 27 मार्च 2026 की एक्स डेट के साथ ₹11 और 26 अगस्त 2025 की एक्स डेट के साथ ₹16 का अंतरिम डिविडेंड दिया था।

चांदी का प्रोडक्शन 20% बढ़ा

वेदांता ने हाल ही में 30 सितंबर 2026 को समाप्त दूसरी तिमाही और पहली छमाही के उत्पादन आंकड़े भी जारी किए हैं। कंपनी के जिंक इंडिया कारोबार का प्रदर्शन मजबूत रहा।

दूसरी तिमाही में चांदी का उत्पादन भी 20% बढ़कर 173 टन रहा। वहीं, विंड पावर प्रोडक्शन 17% बढ़कर 155 मिलियन यूनिट हो गया। जिंक इंटरनेशनल का कुल उत्पादन दूसरी तिमाही में 53 हजार टन रहा। भारत के कॉपर कारोबार में बिक्री 16% बढ़कर 52 हजार टन रही। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय कॉपर बिक्री 74% घटकर 6 हजार टन रह गई।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

यूक्रेन में भारतीय कारोबारी की फार्मा फैक्ट्री पर हमला:रूस ने ड्रोन से निशाना बनाया, 1 की मौत; 400 करोड़ का नुकसान

रूस ने यूक्रेन के सूमी शहर में भारतीय कारोबारी राजीव गुप्ता की दवा बनाने वाली फैक्ट्री पर ड्रोन से हमला किया। हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। फैक्ट्री की मुख्य इमारत को भारी नुकसान पहुंचा और इसका ज्यादातर हिस्सा तबाह हो गया। शुरुआती अनुमान के मुताबिक, कंपनी को कम से कम 400 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। हमले के बाद फैक्ट्री वाले इलाके से धुएं का बड़ा गुबार उठता दिखाई दिया। अधिकारियों ने बताया कि मृतकों और घायलों की संख्या आगे बदल सकती है। यह फैक्ट्री रूस की सीमा से करीब 23 किलोमीटर दूर है। 1990 के दशक में यूक्रेन गए थे राजीव गुप्ता यह फैक्ट्री कुसुम ग्रुप की है। कंपनी को भारतीय नागरिक राजीव गुप्ता चलाते हैं। वे 1990 के दशक में यूक्रेन गए थे और वहीं उन्होंने कुसुम ग्रुप का कारोबार खड़ा किया। कंपनी ने 1994 में भारत की दवाओं को यूक्रेन भेजने वाली डिस्ट्रीब्यूटर कंपनी के तौर पर काम शुरू किया था। 1996 में इसे यूक्रेन में औपचारिक तौर पर कंपनी के रूप में स्थापित किया गया। कुसुम ग्रुप का मुख्यालय यूक्रेन की राजधानी कीव में है। इसे यूक्रेन में काम करने वाली प्रमुख भारतीय फार्मा कंपनियों में माना जाता है। पहले दूसरी कंपनियों की दवाएं बेचती थी कंपनी 2002 में कुसुम ग्रुप ने दूसरी कंपनियों की दवाएं बेचने का काम बंद कर दिया और अपने ब्रांड की दवाओं की मार्केटिंग शुरू की। इसके बाद कंपनी ने खुद दवाएं बनाना शुरू किया। 2007 में भारत में प्लांट शुरू किया गया। 2009 में यूक्रेन के सूमी में दवा बनाने की फैक्ट्री शुरू की गई। इसके बाद भारत में दो और उत्पादन सुविधाएं शुरू की गईं। कुसुम ग्रुप 50 से ज्यादा जेनेरिक दवाओं के ब्रांड बनाता है। इनमें टैबलेट, कैप्सूल और लिक्विड दवाएं शामिल हैं। कंपनी के उत्पाद यूक्रेन के अलावा उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, फिलीपींस और दूसरे देशों में भी बिकते हैं। कंपनी का कारोबार 9 से ज्यादा देशों में है। भारत में कंपनी की उत्पादन सुविधाएं राजस्थान के भिवाड़ी और मध्य प्रदेश के पीथमपुर इंदौर में भी हैं। कुसुम ग्रुप खुद को भारतीय जड़ों वाली यूक्रेनी कंपनी बताता है। कंपनी का कारोबार भारत की दवाओं के डिस्ट्रीब्यूशन से शुरू हुआ था और बाद में उसने यूक्रेन में खुद दवाओं का उत्पादन शुरू किया। युद्ध के दौरान भी चलता रहा सूमी का प्लांट रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू होने के बाद भी सूमी की यह फैक्ट्री काम करती रही थी। अब रूसी ड्रोन हमले में इसकी मुख्य इमारत को भारी नुकसान पहुंचा है और फैक्ट्री का मुख्य काम रुक गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, गर्मियों से रूस यूक्रेन में रोज बड़ी संख्या में शहीद ड्रोन भेज रहा है। ये ड्रोन जेट इंजन से चलते हैं और अपेक्षाकृत कम कीमत के हैं। यूक्रेन की एयर डिफेंस टीमों को इन्हें रोकने में मुश्किल हो रही है, क्योंकि इन्हें रोकने केलिए इस्तेमाल किए जाने वाले इंटरसेप्टर ड्रोन शहीद ड्रोन से धीमे हैं। इसी बीच यूक्रेन ने इस सप्ताह अपनी घरेलू बैलिस्टिक मिसाइल FP-7 का पहली बार युद्ध में इस्तेमाल करने का ऐलान किया है। इसकी मारक क्षमता करीब 250 किलोमीटर बताई गई है।

Petrol Diesel Price Today: पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर आया ताजा अपडेट, जानें 04 अक्टूबर के नए रेट और अपने शहर का भाव

Petrol Diesel Price Today: हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती हैं। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ताजा दरें जारी करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर आधारित होती हैं। ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, चाहे वो ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो या फल-सब्जी बेचने वाला व्यापारी।

ऐसे में हर दिन की कीमतों की जानकारी रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि समझदारी भी है। सरकार की यह प्रणाली पारदर्शिता सुनिश्चित करती है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रमित जानकारी न मिले।

आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भाव

ये रहे 04 अक्टूबर 2026 के प्रमुख शहरों के पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट

नई दिल्ली: पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर।

मुंबई: पेट्रोल ₹111.18 और डीजल ₹97.83 प्रति लीटर।

कोलकाता: पेट्रोल ₹113.47 जबकि डीजल ₹99.82 प्रति लीटर।

चेन्नई: पेट्रोल ₹107.77 और डीजल ₹99.55 प्रति लीटर।

गुरुग्राम: पेट्रोल ₹102.77 तथा डीजल ₹95.44 प्रति लीटर।

नोएडा: पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.56 प्रति लीटर।

बेंगलुरु: पेट्रोल ₹110.93 जबकि डीजल ₹98.80 प्रति लीटर।

भुवनेश्वर: पेट्रोल ₹109.92 और डीजल ₹100.92 प्रति लीटर।

चंडीगढ़: पेट्रोल ₹98.10 तथा डीजल ₹86.09 प्रति लीटर।

हैदराबाद: पेट्रोल ₹115.69 और डीजल ₹103.82 प्रति लीटर।

जयपुर: पेट्रोल ₹112.66 जबकि डीजल ₹97.78 प्रति लीटर।

लखनऊ: पेट्रोल ₹102.05 और डीजल ₹95.55 प्रति लीटर।

पटना: पेट्रोल ₹113.35 तथा डीजल ₹99.36 प्रति लीटर।

तिरुवनंतपुरम: पेट्रोल ₹115.49 और डीजल ₹104.40 प्रति लीटर।

पिछले दो साल से स्थिर क्यों हैं कीमतें?

मई 2022 के बाद से केंद्र और कई राज्यों द्वारा टैक्स में कटौती की गई, जिसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, फिर भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई हैं।

किन कारणों से तय होती हैं ईंधन की कीमतें?

  1. कच्चे तेल की कीमतें:

पेट्रोल और डीजल का उत्पादन मुख्य रूप से कच्चे तेल से होता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है।

  1. डॉलर के मुकाबले रुपया:

भारत अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है, और यह डॉलर में खरीदा जाता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो ईंधन महंगा हो जाता है।

  1. सरकारी टैक्स और शुल्क:

केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं, जो खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होते हैं। यही कारण है कि राज्यों में कीमतों में अंतर होता है।

  1. रिफाइनिंग की लागत:

कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया (रिफाइनिंग) में भी खर्च होता है। ये लागत कच्चे तेल की गुणवत्ता और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है।

  1. मांग और आपूर्ति का संतुलन:

बाजार में ईंधन की मांग अगर बढ़ जाती है, तो कीमतें भी ऊपर जाने लगती हैं। खासकर त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में ईंधन की खपत ज्यादा होती है।

कैसे करें अपने शहर की कीमतें SMS से चेक?

अगर आप मोबाइल से ईंधन की कीमत जानना चाहते हैं, तो ये प्रक्रिया आसान है:

Indian Oil ग्राहक: अपने शहर का कोड टाइप करें और उसे “RSP” के साथ 9224992249 पर भेजें।

BPCL ग्राहक: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें।

HPCL ग्राहक: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें।

Best Stocks to Buy: अक्तूबर में निवेश के लिए ये हैं पांच दिग्गज स्टॉक्स, गिरते बाजार में भी करा सकते हैं कमाई

Best Stocks to Buy:  शेयर बाजार में अभी सेंटीमेंट कमजोर है। इसके बावजूद कुछ शेयरों में अच्छी संभावना दिख रही है। अभी निवेश करने पर ये शेयर अच्छी कमाई करा सकते हैं। ब्रोकरेज फर्म नुवामा वेल्थ और जेफरीज ने कुछ शेयरों को अपनी पसंद बताई है। इनमें कई सेक्टर की कंपनियां हैं।

डीएफएल में निवेश का मौका

नुवामा वेल्थ की लिस्ट का पहला स्टॉक डीएलएफ है। यह मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से देश की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनी है। यह शेयर 1 अक्तूबर को 1.34 फीसदी गिरकर बंद हुआ। इस साल यह करीब 4 फीसदी गिरा है। डीएलएफ लग्जरी हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए जानी जाती है।

गिरते बाजार में भी दिखाई ताकत

नुवामा वेल्थ की लिस्ट का दूसरा स्ट़क अदाणी एनर्जी है। यह शेयर अट्रैक्टिव दिख रहा है। इस कंपनी को ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज 3 का फायदा मिलेगा। यह शेयर 1 अक्तूबर को 1.17 फीसदी चढ़कर 1,330 रुपये पर बंद हुआ। इस साल जहां कई दिग्गज कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई है, यह शेयर 27 फीसदी से ज्यादा चढ़ा है। इसे पावर सेक्टर पर सरकार के बढ़ते फोकस का फायदा मिलेगा।

52 हफ्ते के हाई से काफी नीचे है स्टॉक

जेफरीज ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स (HAL) के शेयरों को अपनी टॉप पिक बताया है। इस कंपनी को डिफेंस पर सरकार के बढ़ते फोकस का फायदा मिलेगा। एचएएल का शेयर 1 अक्तूबर को 1.36 फीसदी गिरकर 4,604.70 रुपये पर बंद हुआ। यह शेयर अपने 52 हफ्ते के हाई से काफी नीचे आ गया है। हालांकि, इस साल यह 4.7 फीसदी चढ़ा है।

अट्रैक्टिव लेवल पर है यह शेयर 

जेफरीज का दूसरा पंसदीदा स्टॉक आईसीआईसीआई लोंबार्ड जनरल इंश्योरेंस है। यह शेयर 1 अक्तूबर को 1.01 फीसदी गिरकर 1,574 रुपये पर बंद हुआ। यह शेयर इस साल 19 फीसदी से ज्यादा गिरा है। ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि इंश्योरेंस रेगुलेटर आईआरडीईए ने इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स पर कमीशन को लेकर जो कंसल्टेशन पेपर पेश किया है, उसका फायदा आईसीआईसीआई लोंबार्ड जनरल इंश्योरेंस को मिल सकता है।

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इस ऑयल उत्पादक कंपनी में दिखेगी तेजी

ओएनजीसी जेफरीज का तीसरा पसंदीदा स्टॉक है। यह सरकारी कंपनी है जो तेल और गैस का उत्पादन करती है। क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ने पर कंपनी को फायदा होता है। यह शेयर 1 अक्तूबर को 1.43 फीसदी गिरकर 222.58 रुपये पर बंद हुआ। हालांकि, क्रूड की कीमतों में उछाल के बावजूद यह शेयर इस साल 6 फीसदी से ज्यादा गिरा है।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

IIT कानपुर बनाएगा देश का पहला ‘सन सिम्युलेटर’, ऐसे परखे जाएंगे सोलर पैनल

सौर ऊर्जा के क्षेत्र में नई तकनीक को बढ़ावा देने के लिए आईआईटी कानपुर देश की पहली ऐसी सुविधा विकसित करने जा रहा है, जहां कृत्रिम रूप से सूर्य की रोशनी तैयार कर फोटोवोल्टिक सिस्टम की जांच की जा सकेगी। संस्थान ने बेंगलुरु की नेक्स पीवी एनर्जी सिस्टम के साथ समझौता किया है। इस परियोजना में आईआईटी कानपुर के रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी पार्क फाउंडेशन (टेक्नोपार्क) की सदस्य कंपनी इनवेरिएंस ऑटोमेशन भी सहयोग करेगी। इसके तहत कंसंट्रेटेड फोटोवोल्टिक (सीपीवी) सिस्टम के लिए देश का पहला सन सिम्युलेटर विकसित किया जाएगा। इससे सीपीवी मॉड्यूल को बाजार में उतारने से पहले उनकी क्षमता और गुणवत्ता की जांच देश में ही हो सकेगी।

सूरज की रोशनी जैसी होगी कृत्रिम रोशनी

इस परियोजना का नेतृत्व आईआईटी कानपुर के सस्टेनेबल एनर्जी इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर आशीष गर्ग और उनकी टीम कर रही है। सन सिम्युलेटर ऐसी तकनीक है, जिसमें प्रयोगशाला के अंदर सूर्य की रोशनी जैसी परिस्थितियां तैयार की जाती हैं। इससे मौसम या दिन के समय पर निर्भर हुए बिना सोलर सिस्टम का परीक्षण किया जा सकता है। अभी सीपीवी सिस्टम के परीक्षण के लिए देश में इस स्तर की सुविधा उपलब्ध नहीं है। नई सुविधा तैयार होने के बाद उत्पादन के अंतिम चरण में ही मॉड्यूल की क्षमता और गुणवत्ता को परखा जा सकेगा।

आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रोफेसर मनिंद्र अग्रवाल ने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ऐसी तकनीक और परीक्षण सुविधाओं की जरूरत है। उन्होंने कहा कि संस्थान का प्रयास है कि शोध को प्रयोगशाला तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उसे उद्योग के साथ जोड़कर वास्तविक उपयोग तक पहुंचाया जाए। यह परियोजना सौर ऊर्जा के क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक और देश में ही परीक्षण की क्षमता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

छोटे सेल, ज्यादा क्षमता वाला सीपीवी सिस्टम

प्रोफेसर आशीष गर्ग ने बताया कि सीपीवी सिस्टम सामान्य सोलर पैनल से अलग तरीके से काम करता है। इसमें लेंस की मदद से सूर्य की रोशनी को छोटे और ज्यादा क्षमता वाले सोलर सेल पर केंद्रित किया जाता है। इन सेल में अर्धचालक की कई परतें होती हैं और हर परत सूर्य के प्रकाश के अलग-अलग हिस्से को इस्तेमाल करती है।

उन्होंने बताया कि सीपीवी में सोलर सेल पैनल के करीब 0.1 प्रतिशत हिस्से में ही होते हैं। यानी सेल के लिए जरूरी जगह सामान्य सोलर तकनीक की तुलना में काफी कम हो जाती है। हालांकि ऐसी तकनीक के लिए तेज और सीधी धूप वाले इलाके ज्यादा उपयुक्त होते हैं।

2070 के नेट जीरो लक्ष्य में मददगार

प्रोफेसर आशीष गर्ग ने कहा कि भारत ने वर्ष 2070 तक नेट जीरो का लक्ष्य रखा है और इसे हासिल करने के लिए बड़े स्तर पर सौर ऊर्जा को अपनाना होगा। इसके लिए केवल सोलर पैनल बनाना ही नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता और क्षमता जांचने की देश में मजबूत व्यवस्था भी जरूरी है। सीपीवी सिम्युलेटर इसी दिशा में काम करेगा।

नेक्स पीवी एनर्जी सिस्टम के निदेशक चिदानंद मूर्ति आर ने कहा कि देश में सौर ऊर्जा की स्थापित क्षमता तेजी से बढ़ रही है, लेकिन सोलर सेल के उत्पादन और परीक्षण की क्षमता को भी बढ़ाना जरूरी है। देश में सीपीवी सिम्युलेटर उपलब्ध होने से बड़े स्तर पर उत्पादन के दौरान गुणवत्ता जांच आसान होगी और सीपीवी तकनीक को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

कानपुर से अखंड प्रताप सिंह की रिपोर्ट

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Petrol Diesel Price Today: 2 अक्टूबर को जारी हुए पेट्रोल-डीजल के नए रेट, जानें आपके शहर में आज का भाव

Petrol Diesel Price Today: हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती हैं। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ताजा दरें जारी करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर आधारित होती हैं। ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, चाहे वो ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो या फल-सब्जी बेचने वाला व्यापारी।

ऐसे में हर दिन की कीमतों की जानकारी रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि समझदारी भी है। सरकार की यह प्रणाली पारदर्शिता सुनिश्चित करती है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रमित जानकारी न मिले।

आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भाव

ये रहे 02 अक्टूबर 2026 के प्रमुख शहरों के पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट

नई दिल्ली: पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर।

मुंबई: पेट्रोल ₹111.18 और डीजल ₹97.83 प्रति लीटर।

कोलकाता: पेट्रोल ₹113.47 जबकि डीजल ₹99.82 प्रति लीटर।

चेन्नई: पेट्रोल ₹107.77 और डीजल ₹99.55 प्रति लीटर।

गुरुग्राम: पेट्रोल ₹102.77 तथा डीजल ₹95.44 प्रति लीटर।

नोएडा: पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.56 प्रति लीटर।

बेंगलुरु: पेट्रोल ₹110.93 जबकि डीजल ₹98.80 प्रति लीटर।

भुवनेश्वर: पेट्रोल ₹109.92 और डीजल ₹100.92 प्रति लीटर।

चंडीगढ़: पेट्रोल ₹98.10 तथा डीजल ₹86.09 प्रति लीटर।

हैदराबाद: पेट्रोल ₹115.69 और डीजल ₹103.82 प्रति लीटर।

जयपुर: पेट्रोल ₹112.66 जबकि डीजल ₹97.78 प्रति लीटर।

लखनऊ: पेट्रोल ₹102.05 और डीजल ₹95.55 प्रति लीटर।

पटना: पेट्रोल ₹113.35 तथा डीजल ₹99.36 प्रति लीटर।

तिरुवनंतपुरम: पेट्रोल ₹115.49 और डीजल ₹104.40 प्रति लीटर।

पिछले दो साल से स्थिर क्यों हैं कीमतें?

मई 2022 के बाद से केंद्र और कई राज्यों द्वारा टैक्स में कटौती की गई, जिसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, फिर भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई हैं।

किन कारणों से तय होती हैं ईंधन की कीमतें?

  1. कच्चे तेल की कीमतें:

पेट्रोल और डीजल का उत्पादन मुख्य रूप से कच्चे तेल से होता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है।

  1. डॉलर के मुकाबले रुपया:

भारत अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है, और यह डॉलर में खरीदा जाता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो ईंधन महंगा हो जाता है।

  1. सरकारी टैक्स और शुल्क:

केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं, जो खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होते हैं। यही कारण है कि राज्यों में कीमतों में अंतर होता है।

  1. रिफाइनिंग की लागत:

कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया (रिफाइनिंग) में भी खर्च होता है। ये लागत कच्चे तेल की गुणवत्ता और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है।

  1. मांग और आपूर्ति का संतुलन:

बाजार में ईंधन की मांग अगर बढ़ जाती है, तो कीमतें भी ऊपर जाने लगती हैं। खासकर त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में ईंधन की खपत ज्यादा होती है।

कैसे करें अपने शहर की कीमतें SMS से चेक?

अगर आप मोबाइल से ईंधन की कीमत जानना चाहते हैं, तो ये प्रक्रिया आसान है:

Indian Oil ग्राहक: अपने शहर का कोड टाइप करें और उसे “RSP” के साथ 9224992249 पर भेजें।

BPCL ग्राहक: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें।

HPCL ग्राहक: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें।

El Nino effect: अल नीनो बढ़ा सकता है भारत का फूड बिल! चावल, अरहर दाल और खाद्य तेलों ने दिए महंगाई के संकेत

El Nino effect: भारत में खाद्य कीमतों को लेकर आने वाले महीनों में दबाव बढ़ने की आशंका है। देश की रोजमर्रा की खपत वाली प्रमुख खाद्य वस्तुओं में चावल, अरहर दाल और खाद्य तेलों की कीमतों में अलग-अलग रफ्तार से बदलाव देखने को मिल रहा है। ऐसे समय में भारत El Nino की बढ़ती निगरानी के दौर में प्रवेश कर रहा है, जिससे अगर मौसम प्रतिकूल रहता है तो फसल उत्पादन और कमोडिटी सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, अभी ऐसा कोई सबूत नहीं है कि हाल में खाद्य कीमतों में आई तेजी सीधे El Nino की वजह से है। फिलहाल कीमतों की दिशा घरेलू उत्पादन, सरकारी नीतियों, भंडार और वैश्विक कमोडिटी बाजार जैसे कई कारकों पर निर्भर है।

सरकार ने El Nino को बताया जोखिम का कारण

केंद्र सरकार ने अपनी अगस्त 2026 की मासिक आर्थिक रिपोर्ट में El Nino को निगरानी योग्य कारक बताया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि लंबे समय तक El Nino की स्थिति रहने पर मानसून कमजोर या असमान हो सकता है। इसका असर फसल उत्पादन और खाद्य कीमतों पर पड़ सकता है। हालांकि, वित्त मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि El Nino और कृषि उत्पादन के बीच सीधा और एक-से-एक संबंध नहीं माना जा सकता।

सिंचाई, सरकारी खरीद, खाद्यान्न भंडार और जरूरत पड़ने पर आयात जैसे उपाय मौसम के झटकों का असर कम कर सकते हैं। भारत में किसी मौसम संबंधी घटना का असर केवल बारिश पर निर्भर नहीं करता। फसल की स्थिति, जलाशयों में पानी, सरकारी स्टॉक, खरीद व्यवस्था और आयात की क्षमता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

चावल और दालों की कीमतों में भारी तेजी

सरकार के मूल्य निगरानी आंकड़ों के मुताबिक, चावल की कीमत पिछले साल की तुलना में बढ़ी है। 29 सितंबर को थोक चावल की कीमत करीब ₹4,185 प्रति क्विंटल थी, जो एक साल पहले के मुकाबले लगभग 8.5 फीसदी अधिक है। खुदरा बाजार में भी चावल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दालों में भी अलग-अलग किस्मों की कीमतों में अंतर देखने को मिल रहा है।

अरहर या तूर दाल सितंबर के अंत में ₹125 प्रति किलो से अधिक पर बिक रही थी। अब इसकी कीमत करीब 8 फीसदी सालाना बढ़ी थी। उड़द की कीमत भी ऊपर रही। जबकि मूंग, मसूर और चना में साल-दर-साल अपेक्षाकृत कम बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, इन मौजूदा कीमतों को सीधे El Nino का असर मानना सही नहीं होगा। असली जोखिम आने वाले महीनों में सामने आ सकता है, खासकर अगर बारिश का पैटर्न या फसल उत्पादन प्रभावित होता है।

खाद्य तेलों की कीमतें बनीं चुनौती

खाद्य तेल भारत के लिए अलग तरह की चुनौती हैं, क्योंकि देश कच्चे पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल के आयात पर काफी निर्भर है। वैश्विक कीमतों के असर को कम करने के लिए सरकार ने हाल में आयात शुल्क में कटौती की है। 24 सितंबर से कच्चे सोयाबीन और कच्चे पाम ऑयल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी 10% से घटाकर 5% की गई।

  • कच्चे सूरजमुखी तेल पर ड्यूटी शून्य कर दी गई।
  • रिफाइंड सोयाबीन और पाम ऑयल पर ड्यूटी 32.5% से घटाकर 27.5% की गई।
  • रिफाइंड सूरजमुखी तेल पर ड्यूटी 22.5% कर दी गई।
  • सरकार के मुताबिक, कम आयात शुल्क से खाद्य तेलों की लैंडेड कॉस्ट घट सकती है, जिससे खुदरा कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। साथ ही घरेलू रिफाइनिंग को भी समर्थन मिल सकता है।
  • वित्त मंत्रालय की अगस्त रिपोर्ट में वैश्विक वेजिटेबल ऑयल कीमतों को महंगाई के संभावित जोखिमों में शामिल किया गया था। इसका एक कारण यह भी है कि पाम, सोयाबीन और रेपसीड जैसे तेलों का इस्तेमाल तेजी से बायोफ्यूल उत्पादन में हो रहा है।

El Nino से क्या बदलेगा?

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 के अंत तक El Nino के बहुत मजबूत स्थिति में पहुंचने का अनुमान जताया गया है। El Nino प्रशांत क्षेत्र से काफी दूर तक बारिश और तापमान के पैटर्न को प्रभावित कर सकता है। हालांकि इसका असर अलग-अलग क्षेत्रों में अलग होता है।

भारत के लिए सबसे अहम सवाल यह नहीं है कि El Nino कितना मजबूत होगा। बल्कि यह है कि यह भारतीय मानसून, फसल चक्र और मौजूदा खाद्य-सप्लाई व्यवस्था के साथ किस तरह इंटरेक्ट करता है। WMO ने जलवायु जोखिमों से निपटने के लिए पहले से मिलने वाले मौसम पूर्वानुमानों के महत्व पर भी जोर दिया है। संगठन की ताजा चेतावनी में गर्मी, बाढ़ और सूखे के साथ खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले व्यापक असर का उल्लेख किया गया है।

सरकार के पास कई विकल्प मौजूद

भारत के पास खाद्य आपूर्ति को संभालने के लिए कई नीतिगत विकल्प मौजूद हैं। सरकारी खरीद और खाद्यान्न भंडार प्रमुख वस्तुओं की कमी के दौरान कीमतों को कंट्रोल करने में मदद कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर आयात के जरिए घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाई जा सकती है। खाद्य तेलों पर हालिया आयात शुल्क कटौती इसका एक उदाहरण है कि सरकार व्यापार नीति के जरिए घरेलू कीमतों को प्रभावित कर सकती है।

RBI की भी रहेगी नजर

खाद्य कीमतों का असर देश की व्यापक महंगाई पर भी पड़ सकता है। Reuters की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत की खपत वाली वस्तुओं की टोकरी में महंगाई का दबाव व्यापक हुआ है और करीब आधी वस्तुओं की कीमतें सालाना आधार पर 4% या उससे अधिक बढ़ रही हैं, जबकि मार्च में यह हिस्सा करीब एक-तिहाई था। इसी अवधि में अप्रैल-जून तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था में करीब 8% की वृद्धि दर्ज की गई। ऐसे में RBI के लिए अहम सवाल यह होगा कि क्या मौसम से जुड़े बदलाव केवल कुछ खाद्य वस्तुओं तक सीमित रहते हैं या वे लगातार खाद्य महंगाई में बदलकर व्यापक कीमतों तक पहुंचते हैं।

अभी की तस्वीर क्या है?

फिलहाल भारत में खाद्य कीमतों की तस्वीर एकसमान तेजी वाली नहीं है। चावल और कुछ दालों की कीमतें पिछले साल की तुलना में ज्यादा हैं। जबकि खाद्य तेल वैश्विक सप्लाई और कीमतों से प्रभावित हो सकते हैं। दूसरी ओर, सरकार ने खाद्य तेलों के आयात शुल्क में कटौती जैसे कदम उठाए हैं। अब आने वाले कुछ महीने यह तय करने में अहम होंगे कि El Nino सिर्फ मौसम से जुड़ा जोखिम बना रहता है या भारत के खाद्य बिल और महंगाई पर इसका स्पष्ट असर दिखाई देने लगता है।

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विश्व शाकाहारी दिवस आज : क्यों मनाया जाता है यह खास दिन? जानें इसका इतिहास और महत्व

विश्व शाकाहारी दिवस आज : क्यों मनाया जाता है यह खास दिन? जानें इसका इतिहास और महत्व

Why is World Vegetarian Day celebrated, Learn about its history and significance

World Vegetarian Day 2026 : हर साल 1 अक्टूबर को विश्व शाकाहारी दिवस (World Vegetarian Day) मनाया जाता है। यह दिन पूरी दुनिया में शाकाहार (Vegetarianism) के प्रति लोगों को जागरूक करने, स्वास्थ्य और पर्यावरण पर इसके सकारात्मक प्रभावों को रेखांकित करने और अहिंसात्मक जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है। इस दिवस के साथ ही अंतरराष्ट्रीय शाकाहारी माह (1 अक्टूबर से 1 नवंबर) ‘विश्व वीगन दिवस’ की शुरुआत भी होती है। आइए जानते हैं विश्व शाकाहारी दिवस के इतिहास और महत्‍व के बारे में विस्‍तार से… 

विश्व शाकाहारी दिवस का इतिहास

विश्व शाकाहारी दिवस की शुरुआत वर्ष 1977 में नॉर्थ अमेरिकन वेजीटेरियन सोसाइटी (NAVS) द्वारा की गई थी। वर्ष 1978 में इंटरनेशनल वेजीटेरियन यूनियन (IVU) ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी और हर साल 1 अक्टूबर को इसे मनाने की घोषणा की।

विश्व शाकाहारी दिवस का मुख्य उद्देश्य

पौधे-आधारित (Plant-based) भोजन से मिलने वाले पोषक तत्वों, ऊर्जा और गंभीर बीमारियों से बचाव के फायदों के बारे में लोगों को बताना। शाकाहार को बढ़ावा देकर पशुपालन उद्योग के कारण होने वाले कार्बन उत्सर्जन, वनों की कटाई और जल संकट को कम करने में मदद करना। पशु-पक्षियों के प्रति क्रूरता को रोकना और एक संवेदनशील समाज का निर्माण करना।

शाकाहार अपनाने के प्रमुख लाभ

शाकाहारी भोजन में फाइबर, विटामिन्स और एंटी-ऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं, जो हृदय रोग, उच्च रक्तचाप (BP), टाइप-2 मधुमेह और मोटापे जैसी समस्याओं के जोखिम को कम करते हैं। फाइबर से भरपूर होने के कारण शाकाहारी भोजन पाचन क्रिया को दुरुस्त रखता है और शरीर को ऊर्जावान बनाए रखता है।

मांस या पशु-आधारित आहार के उत्पादन की तुलना में शाकाहारी भोजन के उत्पादन में प्राकृतिक संसाधनों (जैसे जल और भूमि) की खपत काफी कम होती है। गौरतलब है कि पूरे अक्टूबर महीने को ‘शाकाहारी जागरूकता माह’ (Vegetarian Awareness Month) के रूप में भी जाना जाता है।

Blood Donation Day : देश में आज मनाया जा रहा है रक्तदान दिवस? क्‍या है इसका उद्देश्‍य? रक्‍तदाता को होते हैं ये फायदे

Blood Donation Day : देश में आज मनाया जा रहा है रक्तदान दिवस? क्‍या है इसका उद्देश्‍य? रक्‍तदाता को होते हैं ये फायदे

When is Blood Donation Day observed, What is its objective

National Voluntary Blood Donation Day : भारत में हर साल 1 अक्टूबर को राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस मनाया जाता है ताकि व्यक्ति के जीवन में रक्त की आवश्यकता और महत्व को साझा किया जा सके। इसकी शुरुआत सबसे पहले 1 अक्टूबर, 1975 को इंडियन सोसाइटी ऑफ ब्लड ट्रांसफ्यूजन एंड इम्यूनोहेमेटोलॉजी द्वारा की गई थी, जिसकी स्थापना 22 अक्टूबर, 1971 को के. स्वरूप कृष्ण और डॉ. जे.जी. जॉली के नेतृत्व में हुई थी। बिना किसी अपेक्षा के रक्तदान करना मानवता का महान कार्य है और जीवन रक्षक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। 

 

रक्तदान दिवस का उद्देश्य

स्वेच्छा से रक्त देने वाले दाताओं का आभार जताना और जीवन बचाने के लिए सुरक्षित रक्त की निरंतर जरूरत को समझाना है। जो लोग बिना किसी पैसे या स्वार्थ के, स्वैच्छिक रूप से (voluntarily) अपना खून दान करते हैं, उन्हें धन्यवाद कहना और उनके इस जीवनदायी योगदान की सराहना करना।

 

रक्तदाताओं के लिए महत्‍वपूर्ण बात

बहुत से लोग सोचते हैं कि रक्तदान करने से शरीर में कमजोरी आती है, जबकि सच यह है कि एक स्वस्थ व्यक्ति द्वारा दान किया गया खून शरीर में महज 24 से 48 घंटों के भीतर फिर से बन जाता है। आपका किया हुआ एक (1) यूनिट रक्तदान, तीन (3) अलग-अलग लोगों की जान बचा सकता है। 

 

रक्तदान के प्रमुख फायदे

यह सबसे महत्वपूर्ण और प्रत्यक्ष लाभ है। आपका दिया हुआ रक्त किसी दुर्घटना के शिकार, कैंसर के रोगी, सर्जरी वाले व्यक्ति या प्रसव के दौरान रक्त की कमी से जूझ रही महिला की जान बचा सकता है। नियमित रक्तदान शरीर में आयरन के स्तर को संतुलित रखने में मदद करता है। शरीर में अत्यधिक आयरन हृदय रोगों, जैसे हार्ट अटैक और स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ा सकता है। रक्तदान इस अतिरिक्त आयरन को कम करके हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करता है।

 

शरीर में आयरन का उच्च स्तर कैंसर के कुछ प्रकारों, जैसे लिवर, फेफड़े, बड़ी आंत और गले के कैंसर, के बढ़ते जोखिम से जुड़ा हो सकता है। रक्तदान से आयरन का स्तर कम होकर कैंसर के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है। रक्तदान के बाद शरीर रक्त की कमी को पूरा करने के लिए तेजी से नए रक्त कोशिकाओं (विशेषकर लाल रक्त कोशिकाओं) का उत्पादन शुरू कर देता है।

 

रक्तदान एक बार में लगभग 650 कैलोरी तक बर्न करने में मदद कर सकता है। यह वजन प्रबंधन में प्रत्यक्ष रूप से सहायक नहीं है, लेकिन यह शरीर को सक्रिय रखने में एक छोटी भूमिका निभा सकता है। रक्तदान करने से पहले, रक्तदाता का शारीरिक परीक्षण, जैसे- ब्लड प्रेशर, हीमोग्लोबिन स्तर, नब्ज और शरीर का तापमान आदि किया जाता है। साथ ही, रक्त की एचआईवी, हेपेटाइटिस बी और सी, सिफलिस और मलेरिया जैसे गंभीर संक्रमणों के लिए जांच की जाती है।

 

अत्यधिक आयरन लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है और हेमोक्रोमैटोसिस जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है। रक्तदान आयरन के स्तर को कम करके लिवर को स्वस्थ रखने में मदद करता है। नियमित रक्तदान उच्च रक्तचाप/ हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है, जिससे हृदय रोगों का जोखिम कम होता है।

 

देश में जागरूकता फैलाना

लोगों को यह समझाना कि सुरक्षित रक्त और रक्त उत्पादों- जैसे प्लाज्मा, प्लेटलेट्स की आवश्यकता हर समय बनी रहती है, चाहे वह सर्जरी हो, प्रसव/ चाइल्ड बर्थ हो के दौरान होने वाला रक्तस्राव हो या कोई बड़ा हादसा। जरूरतमंद व्यक्ति को रक्त या उसके घटकों का आधान या दान करना आधुनिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में मानवता का एक बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।

 

नियमित रक्तदान के लिए प्रेरित करना

समाज में खासकर युवाओं में नियमित रूप से रक्तदान करने की आदत को बढ़ावा देना ताकि अस्पतालों में खून की कमी से किसी की जान न जाए।

 

बिना किसी अपेक्षा के रक्तदान करना मानवता का महान कार्य है और जीवन रक्षक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। केवल अपने रिश्तेदारों या दोस्तों को ही रक्तदान न करें, बल्कि स्वेच्छा से किसी भी व्यक्ति को रक्तदान करें। इससे कई जानें बच सकती हैं। रक्त से फैलने वाली बीमारियों को रोकने के लिए भी यह आवश्यक है।

ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज III को मंजूरी, 1.86 लाख करोड़ की इस स्कीम से इन शेयरों को लग सकते हैं पंख

यूनियन कैबिनेट ने 30 सितंबर को ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज III को मंजूरी दे दी। इस स्कीम पर 1.86 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस स्कीम का मकसद देश में रिन्यूएबल एनर्जी की बढ़ती क्षमता को देखते हुए उसके लिए पर्याप्त पावर ग्रिड सिस्टम तैयार करना है। यह स्कीम वित्त वर्ष 2032-33 तक पूरी हो जाएगी। इस स्कीम से पावर सेक्टर की कंपनियों को फायदा होगा। उनके लिए कारोबारी मौके बढ़ेंगे। 1 अक्तूबर को पावर सेक्टर की कंपनियों के शेयरों पर इसका असर दिख सकता है।

1.36 लाख करोड़ इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम पर खर्च होंगे

स्कीम के तहत 1,36,378 करोड़ रुपये इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम्स को मजबूत बनाने पर खर्च होंगे। इसका सीधा फायदा ट्रांसमिशन कंपनियों को होगा। 50,000 करोड़ रुपये का निवेश 50 GWh के बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम्स (BEES) के लिए होगा। इस स्कीम के तहत सरकार 54,082 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देगी। इस स्कीम के पूरा होने पर एनर्जी के मामले में देश की स्थिति काफी मजबूत हो जाएगी।

देश में ट्रांसमिशन इंफ्रास्टक्चर स्ट्रॉन्ग होगा

एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत में रिन्यूएबल एनर्जी की उत्पादन क्षमता लगातार बढ़ रही है। लेकिन, इस अतिरिक्त बिजली क उस जगह पहुंचाना एक बड़ा चैलेंज है, जहां उसकी जरूरत है। ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज III इस समस्या का समाधान करेगी। इस स्कीम से देश में ट्रांसमिशन का स्ट्रॉन्ग इंफ्रास्टक्चर मौजूद होगा। इसके जरिए बिजली को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाना आसान हो जाएगा।

स्कीम का फायदा इन कंपनियों को मिलेगा

इस स्कीम का फायदा पावर ग्रिड, अदाणी एनर्जी, KEC International, Kalpataru Projects, GE Vervnova T&D, Hitachi Energy India, Siemens Energy और Techno Electric जैसी कंपनियों को मिलेगा। 1 अक्तूबर को इन कंपनियों के शेयरों में तेजी दिख सकती है। ये पावर सेक्टर की दिग्गज कंपनियां हैं। इस स्कीम से इन कंपनियों के लिए कारोबारी मौके काफी बढ़ जाएंगे।

1 अक्टूबर को इन शेयरों में दिख सकता है उछाल

Power Grid का शेयर 30 सितंबर को 0.78 फीसदी गिरकर 259.45 रुपये पर बंद हुआ। बीते एक साल में यह शेयर 7 फीसदी से ज्यादा गिरा है। Adani Energy का शेयर 30 सितंबर को 0.32 फीसदी चढ़कर 1,310 रुपये पर बंद हुआ। बीते एक साल में यह शेयर 50 फीसदी से ज्यादा चढ़ा है। केईसी इंटरनेशनल का शेयर 30 सितंबर को 0.62 फीसदी गिरकर बंद हुआ। बीते एक साल में यह शेयर करीब 57 फीसदी फिसला है।

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मुनाफावसूली से अंतिम घंटों में गिरा बाजार 

30 सितंबर को शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में गिरावट देखने को मिली। कारोबार खत्म होने से कुछ घंटे पहले मुनाफा वसूली ने निफ्टी और सेंसेक्स को लाल निशान में ला दिया। निफ्टी 0.42 फीसदी गिरकर 22,620 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 0.07 फीसदी गिरकर 72,480 पर क्लोज हुआ।

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