आजीविका मिशन की सहायता से सालाना ढाई लाख कमा रहीं मजदूर रहीं सोनभद्र की निर्मला

आजीविका मिशन की सहायता से सालाना ढाई लाख कमा रहीं मजदूर रहीं सोनभद्र की निर्मला

Sonbhadra Nirmala Success Story

Sonbhadra Nirmala Success Story: प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए योगी सरकार राज्यव्यापी स्तर पर आजीविका मिशन को मजबूती से लागू कर रही है। इन प्रयासों का ही नतीजा है कि अब आदिवासी और पिछड़े अंचल की महिलाएं उद्यमी बन रही हैं। सोनभद्र जिले के राबर्ट्सगंज ब्लॉक के बिचपई गांव की अनुसूचित जाति की निर्मला इसकी एक जीवंत मिसाल हैं। कभी परिवार का खर्च चलाने के लिए मजदूरी करने वाली निर्मला अब सफल उद्यमी बन चुकी हैं।

 

स्वयं सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने हुनर सीखा और योगी सरकार से मिली आर्थिक मदद ने उन्हें अपने पैरों पर खड़ा कर दिया। रंग-बिरंगी डिजाइनर मोमबत्तियों से शुरू हुआ उनका सफर अब जूस, पॉपकॉर्न, गुलाब का गुलकंद, शर्बत और गाजर के मुरब्बे तक पहुंच चुका है। उनकी सालाना कमाई करीब ढाई लाख रुपये हो गई है। उनकी सफलता से प्रेरित होकर गांव की 12 से 15 महिलाएं भी आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ी हैं।

स्वयं सहायता समूह ने खोला नया रास्ता

राबर्ट्सगंज ब्लॉक के बिचपई गांव की निर्मला बीए तक पढ़ी हैं। पति-पत्नी, तीन बेटियों और एक बेटे वाले छह सदस्यीय परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। घर की जिम्मेदारियों के साथ उन्हें मजदूरी करनी पड़ती थी। बच्चों की बेहतर परवरिश और परिवार की आय बढ़ाने की कोशिश में वह स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। यहीं से उनकी जिंदगी बदलने का रास्ता खुला। मोमबत्ती बनाने का प्रशिक्षण लिया और अपने हुनर को कारोबार में बदलने का निर्णय लिया।

60 हजार की सीड मनी से शुरू हुआ उद्यम

उद्यमिता विकास परियोजना की टीम ने निर्मला के प्रयास को देखते हुए 60 हजार रुपए की सीड मनी (प्रारंभिक सहायता राशि) उपलब्ध कराई। इससे उन्होंने अलग-अलग डिजाइन की मोमबत्तियों के सांचे खरीदे। दीपावली और अन्य त्योहारों पर मोमबत्तियां बनाकर उनकी बिक्री शुरू की। मांग बढ़ने पर इसे नियमित कारोबार बना लिया। खादी ग्रामोद्योग विभाग के सहयोग से पॉपकॉर्न मशीन मिली तो आमदनी का एक और जरिया जुड़ गया। इसके बाद खाद्य सुरक्षा एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग से दो माह का प्रशिक्षण लेकर उन्होंने गुलाब से गुलकंद, शर्बत और गाजर का मुरब्बा बनाना भी सीख लिया। अब मौसम के अनुसार इनका उत्पादन करती हैं। फूल, पेड़ और दूसरी सजावटी आकृतियों वाली उनकी रंगीन मोमबत्तियां बाजार में अपनी जगह बना रही हैं। उनका अगला लक्ष्य उत्पादों को ऑनलाइन बाजार तक पहुंचाना है।

Sonbhadra Nirmala Success Story

गांव की महिलाओं में भी जाग रहा आत्मविश्वास

निर्मला की सफलता का असर गांव की दूसरी महिलाओं पर भी पड़ा है। उनके उद्यम से प्रेरित होकर गांव की 15 महिलाएं काम से जुड़ने और अपना रोजगार शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ी हैं। पिछड़े और आदिवासी बहुल बिचपई में यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जिन महिलाओं की आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी सीमित थी, वे अब स्वयं सहायता समूहों के जरिए कारोबार की ओर कदम बढ़ा रही हैं। निर्मला बताती हैं कि पहले महिलाएं घर और घूंघट तक सीमित रहती थीं। अब वे बाहर निकलकर काम कर रही हैं। आमदनी बढ़ने से बच्चों को अच्छे स्कूलों में पढ़ाने का रास्ता खुला है। कभी लोगों से बात करने में झिझकने वाली निर्मला अब आत्मविश्वास से अपने कारोबार की बात करती हैं। उनके पति भी उद्यम को आगे बढ़ाने में साथ दे रहे हैं।

पूरे प्रदेश में महिलाओं को सशक्त बना रहा आजीविका मिशन

उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से पूरे प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। स्वयं सहायता समूहों और विभिन्न परियोजनाओं से जुड़कर महिलाएं प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग के सहारे अपने उद्यम खड़े कर रही हैं। निर्मला की कहानी इसी व्यापक बदलाव की एक तस्वीर है, जहां कभी मजदूरी परिवार की मजबूरी थी और आज अपना कारोबार उसकी आर्थिक ताकत बन गया है।

बालाघाट में बीमारी से जान गंवाने वाले बच्चों के परिजनों को सरकार देगी 2-2 लाख की सहायता, बोले CM, प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं पर फोकस

बालाघाट में बीमारी से जान गंवाने वाले बच्चों के परिजनों को सरकार देगी 2-2 लाख की सहायता, बोले CM, प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य  सेवाओं पर फोकस

भोपाल। बालाघाट में गंभीर बामीरियों से मृत बच्चों के परिजनों को सरकार 2-2 लाख की सहायता राशि देगी। शनिवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बालाघाट में पीड़ित परिवार से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम को विस्तार से जाना। जन-विश्वास अभियान के तहत बालाघाट पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार बालाघाट की तस्वीर को बदलने के लिए बड़े बजट पर काम कर रही है। यहां पूर्व नक्सल-युक्त 100 गांवों का विकास किया जाएगा। इसके लिए 225 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव  ने गंभीर बीमारी में जान गंवाने वाले परिजनों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया से कहा कि हम समस्या के मूल कारणों तक पहुंचकर उसके स्थायी समाधान की दिशा में काम कर रहे हैं। ताकि, भविष्य में ऐसी बीमारियों की रोकथाम सुनिश्चित की जा सके। जिन परिवारों ने अपनों को खोया है, उनके दर्द और कष्ट को मैंने महसूस किया है और अपनी ओर से 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि बालाघाट जिले के 100 ऐसे ग्राम, जो कभी नक्सल प्रभावित थे, उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए 225 करोड़ की राशि से आधारभूत संरचनाओं का विकास किया जाएगा। इन ग्रामों में सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य सहित अन्य आवश्यक मूलभूत सुविधाओं का विस्तार और सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। इस पहल से इन क्षेत्रों में विकास को गति मिलेगी, ग्रामीणों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी और नक्सल प्रभावित रहे ग्रामों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी।

 

सृजित काया जाएगा रोजगार

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा पशुपालन आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाएगा। बकरी पालन, मुर्गी पालन और दुग्ध उत्पादन के साथ होम स्टे और ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देकर स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित किए जाएंगे। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और ग्रामीण स्वावलंबन के संकल्प को साकार किया जाएगा। बालाघाट और लांजी क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता चेरापूंजी को भी मात देने की क्षमता रखती है। यहां की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराएं और सरल जनजीवन क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विशिष्ट बनाते हैं। प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत को पर्यटन से जोड़ते हुए यहां इको टूरिज्म और ट्राइबल टूरिज्म के विकास की असीम संभावनाएं हैं।

 

बैगा आश्रमों को दिया जाएगा बढ़ावा

सीएम डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने लंबी लड़ाई के बाद बालाघाट समेत मध्यप्रदेश को नक्सलमुक्त किया है। अब हम स्थानीय लोगों को विश्वास में लेकर क्षेत्र के विकास की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। आइए, हम सब मिलकर बालाघाट को विकास की दृष्टि से नम्बर वन जिला बनाने के लिए अग्रसर हो। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी के नेतृत्व में नक्सलमुक्त बालाघाट बनाने के बाद अब हम सुरक्षित बालाघाट एवं समृद्ध बालाघाट बनने के लिए संकल्पित हैं। उन्होंने कहा कि बैगा समाज के सर्वांगीण विकास के लिए राज्य सरकार योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। बैगा परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के साथ बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए बैगा आश्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा। समाज के समग्र विकास के लिए बैगा विकास प्राधिकरण का गठन किया जाएगा, जिसके माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल सहित मूलभूत सुविधाओं और अधोसंरचना के विकास पर विशेष जोर दिया जाएगा।

Mumbai Milk Prices: 1 सितंबर से महंगा होकर 110 रुपए लीटर तक पहुंच सकता है दूध! ऐसा क्या हुआ कि त्योहारों से पहले लगेगा मुंबई वालों को झटका?

मुंबई में दूध खरीदने वालों की जेब पर अब महंगाई का असर पड़ने वाला है। जन्माष्टमी और गणेश चतुर्थी जैसे बड़े त्योहारों से पहले शहर में दूध के दाम बढ़ने जा रहे हैं। इससे आम लोगों के घरेलू बजट पर भी असर पड़ेगा। 1 सितंबर से शहर में दूध के दाम बढ़ सकते हैं। दाम बढ़ने का सीधा असर डेयरी या पशुओं के बाड़े से दूध खरीदने वाले लोगों पर पड़ेगा। दूध से साथ ही लस्सी, छाछ, घी और मिठाई जैसे दूध से बने सामान के दाम भी बढ़ सकते हैं। इस बढ़ोतरी का असर ग्राहकों की खरीद कीमत पर भी दिखाई देगा।

NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने दूध की थोक कीमत 93 रुपये से बढ़ाकर 102 रुपये प्रति लीटर कर दी है। इसके बाद अब ग्राहकों को भी ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है। रिटेल में दूध का दाम करीब 100 रुपये से बढ़कर 110 रुपये प्रति लीटर होने की संभावना है। जानें त्योहारों से पहले क्यों बढ़ रहे दाम

110 रुपये लीटर मिलेगा दूध

रिपोर्ट के मुताबिक, 1 सितंबर से दूध के दाम बढ़ने के बाद मुंबई में ग्राहकों को अब पहले से ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी। नई दर पर रिटेल दूध 100 से बढ़कर 110 रुपये प्रति लीटर हो सकता है। दूध उत्पादकों का कहना है कि पशुओं की देखभाल, चारा और अन्य जरूरी सामान पर खर्च लगातार बढ़ रहा है। बढ़ती लागत की वजह से डेयरी संचालकों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है, इसलिए दूध की कीमत में यह बढ़ोतरी की गई है। इसका असर अब दूध की कीमतों पर पड़ रहा है। वहीं, दूध के दाम बढ़ने का असर दूसरे डेयरी सामान पर भी दिखाई दे सकता है। लस्सी, छाछ, घी, मिठाई और अन्य दूध से बने उत्पादों की कीमतें बढ़ने की संभावना है, क्योंकि बढ़ी हुई लागत का असर कंपनियां अपने उत्पादों के दाम में शामिल कर सकती हैं।

पशुओं के खाने की कीमतों में हुई बढ़ोतरी

डेयरी संचालकों के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में पशुओं के खाने के लिए इस्तेमाल होने वाले अनाज, अरहर और चने जैसी चीजों के दाम काफी बढ़ गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन खाद्य पदार्थों की कीमतों में करीब 25 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। इसका सीधा असर पशुओं की देखभाल और उन्हें पालने के खर्च पर पड़ा है। बढ़ती लागत की वजह से दूध उत्पादन से जुड़े खर्च भी बढ़ गए हैं।

भारत में बनाओ, दुनिया भर में बेचो! वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विदेशी कंपनियों को दिया बड़ा ऑफर, GIFT City का भी जिक्र, समझिए पूरी तैयारी

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ग्लोबल निवेशकों और कंपनियों को भारत में मैन्युफैक्चरिंग बेस के साथ-साथ टेक्नोलॉजी और इनोवेशन सेंटर स्टैबलिश करने का ओपन ऑफर दिया है। अमेरिका की छह दिन की यात्रा पर गईं वित्त मंत्री ने शिकागो में टॉप इन्वेस्टर्स और बिजनेस लीडर के साथ एक हाई लेवल बिजनेस राउंडटेबल में यह बात कही। उन्होंने ग्लोबल पार्टनर्स से अपील की कि वे भारत की विशाल प्रतिभा और अवसरों का फायदा उठाते हुए देश में कोडेवलपमेंट और कोप्रोडक्शन करें। इससे सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए प्रोडक्ट्स और कैपेसिटी को डेवलप करें।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक शिकागो में भारत के महावाणिज्य दूतावास द्वारा यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम के सहयोग से आयोजित इस बैठक में वित्त मंत्री ने भारत की व्यापक आर्थिक वृद्धि, देश में चल रहे रिफॉर्म्स की स्पीड और लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट को लेकर डिटेल में बात की है।

भारत को सिर्फ एक बाजार नहीं, ग्लोबल प्लेटफॉर्म समझें

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत में निवेश का अवसर किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। यह अपने विशाल पैमाने, विकास दर, इंजीनियरिंग प्रतिभा, आधुनिक बुनियादी ढांचे और पिछले एक दशक में हुए सुधारों से काफी व्यापक इंपैक्ट रखता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों से आग्रह किया कि वे भारत को सिर्फ एक कंज्यूमर मार्केट के रूप में न देखें बल्कि इसे दुनिया के लिए मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने एक मजबूत प्लेटफॉर्म के रूप में देखें।

इस बैठक का मैं एजेंडा भारत में निर्माण करें — भारत के लिए और दुनिया के लिए (Manufacture in India — for India and for the world) था। इसमें एआई, डिजिटल, फाइनेंशियल सर्विसेज, इंफ्रास्ट्रक्चर, फूड प्रोसेसिंग, डिफेंस और हाई एंड टेक्नोलॉजी में अवसरों पर चर्चा हुई।

डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और AI में नए मौके

वित्त मंत्री ने बताया कि भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) जैसे यूपीआई, डिजिलॉकर, ओएनडीसी और इंडिया स्टैक ने आबादी के स्तर पर कई बड़े और सफल प्लेटफॉर्म तैयार किए हैं। उन्होंने कहा कि अब अगला बड़ा अवसर एआई, इंजीनियरिंग, एनालिटिक्स, प्रोडक्ट डेवलपमेंट, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे हाई वैल्लूर बिजनेस तैयार करने में है। भारत में बनाए गए ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स तेजी से ग्लोबल इनोवेशन के सेंटर बनते जा रहे हैं।

गिफ्ट सिटी तेजी से बन रहा इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर

पीटीआई के मुताबिक वित्त मंत्री ने गुजरात की गिफ्ट सिटी (GIFT City) का खास जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर के रूप में तेजी से उभर रहा है। जून 2026 तक गिफ्ट सिटी में 1250 से अधिक रजिस्टर्ड संस्थाएं काम कर रही हैं। सीतारमण ने बताया कि गिफ्ट सिटी बैंकिंग, फंड मैनेजमेंट, रीइंश्योरेंस, एयरक्राफ्ट एंड शिप लीजिंग, सस्टेनेबल फाइनेंस और दूसरी क्रॉस बॉर्डर फाइनेंशियल सर्विसेज में काफी संभावनाएं देता है। उन्होंने ग्लोबल इंस्टीट्यूशन से आग्रह किया वो भी इसे भारत के फाइनेंशियल इकोसिस्टम में एंट्री के गेटवे के रूप में इस्तेमाल करें।

ग्लोबल सप्लाई चेन में बदलाव और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा

वित्त मंत्री ने कहा कि भारत न सिर्फ एक बड़े बाजार के रूप में स्केल देता है, बल्कि एक लॉन्गटर्म इनवेस्टमेंट और ऑपरेशनल प्लेटफ़ॉर्म भी ऑफर करता है। उत्पादन-जुड़े प्रोत्साहन (PLI) जैसी टारगेटेड नीतिगत पॉलिसी स्कीम के जरिए अब भारत का ध्यान सिर्फ पार्ट्स को असेंबल करने तक सीमित नहीं है बल्कि कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग और हाई एंड टेक्नोलॉजी तैयार करने पर भी है। क

इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार, एग्रीकल्चर और डिफेंस सेक्टर पर जोर

वित्त मंत्री ने कहा कि देश में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर्स, रेलवे का मॉडर्नाइजेशन, इलेक्ट्रिफिकेशन और हाई-स्पीड रेल सहित इंफ्रास्ट्रक्चर का काफी तेजी विस्तार हो रहा है। ये सब मिलकर लॉन्गटर्म इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टमेंट के मौके बना रहे हैं। नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (NIIF) इनमें हिस्सेदारी लेने के लिए ग्लोबल इन्वेस्टर्स को एक कमर्शियल प्लेटफॉर्म दे रहा है।

भारत का एग्रीकल्चर बेस, बढ़ती इनकम और बदलता कंजंशन पैटर्न फूड प्रोसेसिंग, ऑटोमेशन, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और कोल्ड चेन क्षेत्रों में नए अवसर पैदा कर रही हैं। रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘iDEX’ जैसी पहलों के माध्यम से भारत ड्रोन, ऑटोनोमस सिस्टम और हाई एंड टेक्नोलॉजी में तेजी से कैपेसिटी बिल्डिंग कर रहा है।

आपको बता दें कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान नॉर्थ कैरोलिना के एशविले में जी-20 वित्त मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेंगी। इसके बाद न्यूयॉर्क का दौरा भी करेंगी।

अमेरिका का वेनेजुएला के 65 अरब बैरल तेल पर कब्जा:प्राइवेट कंपनी के साथ करार, ट्रम्प बोले- यह इतिहास की सबसे बड़ी ऑयल डील

अमेरिका ने वेनेजुएला के 65 अरब बैरल से ज्यादा तेल भंडार पर कंट्रोल हासिल करने के लिए एक समझौता किया है। यह आंकड़ा इसलिए भी बड़ा है, क्योंकि अमेरिका के पास खुद करीब 46 अरब बैरल तेल है। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, यह काम वेनेजुएला में काम करने वाली एक निजी कंपनी के साथ मिलकर किया जाएगा। इस साझेदारी से निकलने वाले तेल में अमेरिका को 55% हिस्सा मिलेगा। हालांकि, इस निजी कंपनी का नाम अभी नहीं बताया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इसे दुनिया की सबसे बड़ी डील बताया है। वेनेजुएला की राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने भी इसे ऐतिहासिक समझौता बताया है। इतना तेल भारत की 40 साल की जरूरत के बराबर वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है। वहां 300 अरब बैरल से ज्यादा तेल मौजूद है। ट्रम्प जिस 65 अरब बैरल तेल पर अमेरिकी कंट्रोल की बात कर रहे हैं, वह वेनेजुएला के कुल तेल भंडार का करीब पांचवां हिस्सा है। वेनेजुएला के पास इतना बड़ा तेल भंडार होने के बावजूद वहां उत्पादन काफी कम है। आर्थिक संकट, निवेश की कमी और अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण उसका तेल उद्योग लंबे समय से मुश्किल में है। भारत से तुलना करें तो देश हर साल करीब 1.6 से 1.7 अरब बैरल कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। इस हिसाब से 65 अरब बैरल तेल भारत के मौजूदा सालाना आयात के करीब 40 साल के बराबर है। यानी मात्रा के लिहाज से देखें तो ट्रम्प जिस 65 अरब बैरल तेल की बात कर रहे हैं, वह भारत की करीब चार दशक की मौजूदा सालाना तेल जरूरत के बराबर है। अमेरिका के हिस्से में कितना तेल आएगा इस डील में सबसे अहम बात अभी भी साफ नहीं है। अमेरिका को वेनेजुएला के 65 अरब बैरल तेल का मालिकाना हक मिलेगा या सिर्फ उसके उत्पादन में बड़ा हिस्सा मिलेगा, यह समझना जरूरी है। अभी उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अमेरिका को साझेदारी से होने वाले तेल उत्पादन का 55% हिस्सा मिलेगा। लेकिन इस काम में शामिल निजी कंपनी का नाम और समझौते की पूरी शर्तें अभी सामने नहीं आई हैं। इसलिए 65 अरब बैरल तेल पर अमेरिका का कंट्रोल होने का मतलब यह नहीं है कि पूरा तेल अमेरिका का हो गया है। असल में अमेरिका को कितना अधिकार मिलेगा, यह डील की पूरी शर्तें सामने आने के बाद ही साफ होगा। 100 अरब डॉलर से ज्यादा निवेश राष्ट्रपति रोड्रिगेज के मुताबिक, समझौते के तहत वेनेजुएला के 17 तेल क्षेत्रों को दोबारा विकसित किया जाएगा। इसमें 100 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश होने की बात कही गई है। उनका कहना है कि इस पूरे काम से वेनेजुएला की सरकार को आने वाले समय में करीब 209 अरब डॉलर टैक्स मिल सकता है। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला अपने बड़े तेल भंडार का इस्तेमाल देश के विकास के लिए करना चाहता है। मादुरो की गिरफ्तारी के बाद बदले रिश्ते अमेरिका और वेनेजुएला के रिश्ते जनवरी में निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद बदल गए। डेल्सी रोड्रिगेज के राष्ट्रपति बनने के बाद दोनों देशों में बातचीत बढ़ी और वेनेजुएला का तेल इसका सबसे अहम मुद्दा बन गया। इसके बाद वेनेजुएला ने तेल उद्योग के नियम बदले। नए नियमों से विदेशी कंपनियों को ज्यादा अधिकार मिले और अमेरिकी कंपनियों के लिए वहां निवेश और तेल उत्पादन बढ़ाने का रास्ता खुल गया।

अमेरिका ने वेनेजुएला का 65 अरब बैरल तेल कब्जाया:यह भारत की 40 साल की जरूरत के बराबर; ट्रम्प बोले- इतिहास की सबसे बड़ी डील

अमेरिका ने वेनेजुएला के 65 अरब बैरल से ज्यादा तेल भंडार पर कंट्रोल हासिल करने के लिए एक समझौता किया है। यह आंकड़ा इसलिए भी बड़ा है, क्योंकि अमेरिका के पास खुद करीब 46 अरब बैरल तेल है। भारत से तुलना करें तो देश हर साल करीब 1.6 से 1.7 अरब बैरल कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। इस हिसाब से 65 अरब बैरल तेल भारत के 40 साल के ऑयल इम्पोर्ट के बराबर है। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, यह काम वेनेजुएला में काम करने वाली एक निजी कंपनी के साथ मिलकर किया जाएगा। इस साझेदारी से निकलने वाले तेल में अमेरिका को 55% हिस्सा मिलेगा। हालांकि, इस निजी कंपनी का नाम अभी नहीं बताया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इसे दुनिया की सबसे बड़ी डील बताया है। वेनेजुएला की राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने भी इसे ऐतिहासिक समझौता बताया है। वेनेजुएला में 300 अरब बैरल तेल मौजूद वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है। वहां 300 अरब बैरल से ज्यादा तेल मौजूद है। ट्रम्प जिस 65 अरब बैरल तेल पर अमेरिकी कंट्रोल की बात कर रहे हैं, वह वेनेजुएला के कुल तेल भंडार का करीब पांचवां हिस्सा है। वेनेजुएला के पास इतना बड़ा तेल भंडार होने के बावजूद वहां उत्पादन काफी कम है। आर्थिक संकट, निवेश की कमी और अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण उसका तेल उद्योग लंबे समय से मुश्किल में है। अमेरिका के हिस्से में कितना तेल आएगा इस डील में सबसे अहम बात अभी भी साफ नहीं है। अमेरिका को वेनेजुएला के 65 अरब बैरल तेल का मालिकाना हक मिलेगा या सिर्फ उसके उत्पादन में बड़ा हिस्सा मिलेगा, यह समझना जरूरी है। अभी उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अमेरिका को साझेदारी से होने वाले तेल उत्पादन का 55% हिस्सा मिलेगा। लेकिन इस काम में शामिल निजी कंपनी का नाम और समझौते की पूरी शर्तें अभी सामने नहीं आई हैं। इसलिए 65 अरब बैरल तेल पर अमेरिका का कंट्रोल होने का मतलब यह नहीं है कि पूरा तेल अमेरिका का हो गया है। असल में अमेरिका को कितना अधिकार मिलेगा, यह डील की पूरी शर्तें सामने आने के बाद ही साफ होगा। 100 अरब डॉलर से ज्यादा निवेश राष्ट्रपति रोड्रिग्ज के मुताबिक, समझौते के तहत वेनेजुएला के 17 तेल क्षेत्रों को दोबारा विकसित किया जाएगा। इसमें 100 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश होने की बात कही गई है। उनका कहना है कि इस पूरे काम से वेनेजुएला की सरकार को आने वाले समय में करीब 209 अरब डॉलर टैक्स मिल सकता है। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला अपने बड़े तेल भंडार का इस्तेमाल देश के विकास के लिए करना चाहता है। मादुरो की गिरफ्तारी के बाद बदले रिश्ते अमेरिका और वेनेजुएला के रिश्ते जनवरी में निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद बदल गए। डेल्सी रोड्रिग्ज के राष्ट्रपति बनने के बाद दोनों देशों में बातचीत बढ़ी और वेनेजुएला का तेल इसका सबसे अहम मुद्दा बन गया। इसके बाद वेनेजुएला ने तेल उद्योग के नियम बदले। नए नियमों से विदेशी कंपनियों को ज्यादा अधिकार मिले और अमेरिकी कंपनियों के लिए वहां निवेश और तेल उत्पादन बढ़ाने का रास्ता खुल गया। वेनेजुएला के पास सबसे ज्यादा तेल, फिर भी गरीब वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था लंबे समय से संकट में है। देश की सरकारी तेल कंपनी कमजोर हुई, तेल उद्योग में निवेश कम हुआ और उत्पादन लगातार गिरा। इसके अलावा अमेरिकी प्रतिबंधों ने भी तेल कारोबार को नुकसान पहुंचाया। यानी जमीन के नीचे तेल बहुत है, लेकिन उसे निकालने, बेचने और उससे कमाई करने की क्षमता कमजोर हो गई। इसके साथ ही देश में कई साल तक महंगाई, आर्थिक कुप्रबंधन और राजनीतिक अस्थिरता रही। इसका सीधा असर आम लोगों की कमाई और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ा। इस डील से OPEC को चुनौती OPEC तेल उत्पादक देशों का समूह है। इसके सदस्य तेल का उत्पादन घटाकर या बढ़ाकर बाजार में सप्लाई को प्रभावित करते हैं। सप्लाई कम हो तो कीमत बढ़ सकती है और ज्यादा तेल आने पर कीमत घट सकती है। वेनेजुएला भी OPEC का सदस्य है। अगर वेनेजुएला का उत्पादन बढ़ा और बाजार में ज्यादा तेल आया, तो तेल की कीमतों पर गिरावट का दबाव बन सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि डील के तुरंत बाद पेट्रोल-डीजल सस्ता हो जाएगा। वेनेजुएला में तेल उत्पादन बढ़ाने में समय लगेगा। इसके अलावा ईरान युद्ध, OPEC के फैसले, दुनिया में तेल की मांग और दूसरे देशों का उत्पादन भी कीमत तय करने में बड़ी भूमिका निभाएंगे। —————————– रिपोर्ट- वेनेजुएला का तेल भारत को देगा अमेरिका:ट्रम्प दुनिया की बड़ी ऑयल कंपनियों के अफसरों से मिले; रिलायंस भी तेल खरीद सकती है
अमेरिका, भारत को वेनेजुएला से तेल खरीदने की इजाजत दे सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रम्प प्रशासन के एक सीनियर अधिकारी ने इसकी जानकारी दी है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Petrol Diesel Price Today: आज सस्ता हुआ या महंगा? जानें पेट्रोल-डीजल का ताजा रेट

Petrol Diesel Price Today: हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती हैं। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ताजा दरें जारी करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर आधारित होती हैं। ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, चाहे वो ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो या फल-सब्जी बेचने वाला व्यापारी।

ऐसे में हर दिन की कीमतों की जानकारी रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि समझदारी भी है। सरकार की यह प्रणाली पारदर्शिता सुनिश्चित करती है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रमित जानकारी न मिले।

आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भाव

ये रहे 29 आगस्त 2026 के प्रमुख शहरों के पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट

नई दिल्ली: पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर।

मुंबई: पेट्रोल ₹111.18 और डीजल ₹97.83 प्रति लीटर।

कोलकाता: पेट्रोल ₹113.47 जबकि डीजल ₹99.82 प्रति लीटर।

चेन्नई: पेट्रोल ₹107.77 और डीजल ₹99.55 प्रति लीटर।

गुरुग्राम: पेट्रोल ₹102.77 तथा डीजल ₹95.44 प्रति लीटर।

नोएडा: पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.56 प्रति लीटर।

बेंगलुरु: पेट्रोल ₹110.93 जबकि डीजल ₹98.80 प्रति लीटर।

भुवनेश्वर: पेट्रोल ₹109.92 और डीजल ₹100.92 प्रति लीटर।

चंडीगढ़: पेट्रोल ₹98.10 तथा डीजल ₹86.09 प्रति लीटर।

हैदराबाद: पेट्रोल ₹115.69 और डीजल ₹103.82 प्रति लीटर।

जयपुर: पेट्रोल ₹112.66 जबकि डीजल ₹97.78 प्रति लीटर।

लखनऊ: पेट्रोल ₹102.05 और डीजल ₹95.55 प्रति लीटर।

पटना: पेट्रोल ₹113.35 तथा डीजल ₹99.36 प्रति लीटर।

तिरुवनंतपुरम: पेट्रोल ₹115.49 और डीजल ₹104.40 प्रति लीटर।

पिछले दो साल से स्थिर क्यों हैं कीमतें?

मई 2022 के बाद से केंद्र और कई राज्यों द्वारा टैक्स में कटौती की गई, जिसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, फिर भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई हैं।

किन कारणों से तय होती हैं ईंधन की कीमतें?

  1. कच्चे तेल की कीमतें:

पेट्रोल और डीजल का उत्पादन मुख्य रूप से कच्चे तेल से होता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है।

  1. डॉलर के मुकाबले रुपया:

भारत अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है, और यह डॉलर में खरीदा जाता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो ईंधन महंगा हो जाता है।

  1. सरकारी टैक्स और शुल्क:

केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं, जो खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होते हैं। यही कारण है कि राज्यों में कीमतों में अंतर होता है।

  1. रिफाइनिंग की लागत:

कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया (रिफाइनिंग) में भी खर्च होता है। ये लागत कच्चे तेल की गुणवत्ता और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है।

  1. मांग और आपूर्ति का संतुलन:

बाजार में ईंधन की मांग अगर बढ़ जाती है, तो कीमतें भी ऊपर जाने लगती हैं। खासकर त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में ईंधन की खपत ज्यादा होती है।

कैसे करें अपने शहर की कीमतें SMS से चेक?

अगर आप मोबाइल से ईंधन की कीमत जानना चाहते हैं, तो ये प्रक्रिया आसान है:

Indian Oil ग्राहक: अपने शहर का कोड टाइप करें और उसे “RSP” के साथ 9224992249 पर भेजें।

BPCL ग्राहक: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें।

HPCL ग्राहक: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें।

LPG Price Today August 25: गैस सिलेंडर के दाम में फिर आया बड़ा ट्विस्ट!दिल्ली से मुंबई तक जानिए 14.2 KG और कमर्शियल LPG के नए रेट

महंगाई ने फिर बढ़ाया घर का बजट, मुंबई में दूध के दाम में इस दिन से होगा ₹9 का इजाफा

Mumbai milk Price: देश में अभी चीनी की महंगाई से जहां लोग उबरे नहीं हैं, वहीं अब 1 सितंबर, 2026 से दूध की कीमतें भी बढ़ने वाली हैं। जी हां, दरअसल मुंबई के स्थानीय दूध उत्पादकों ने 9 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की घोषणा की है। इस बढ़ोतरी के बाद से आम आदमी की जेब पर भारी असर पड़ सकता है।

फिलहाल, तबेले के दूध की कीमत अभी 93 रुपये प्रति लीटर है, जो बढ़कर 102 रुपये प्रति लीटर हो जाएगी। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, यह बढ़ोतरी त्योहारों के मौसम से ठीक पहले हो रही है और इससे उन ग्राहकों के घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की संभावना है जो नियमित रूप से ताजा डेयरी दूध खरीदते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, दूध की नई कीमतें 1 सितंबर, 2026 से 28 फरवरी, 2027 तक लागू रहेंगी।

तबेले के दूध की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?

दूध उत्पादकों ने इस बढ़ोतरी की वजह डेयरी पशुओं के रखरखाव में आने वाले ज्यादा खर्च और पशुओं के चारे व दाने की कीमतों में भारी वृद्धि को बताया है।

उत्पादकों का कहना है कि बढ़ते ऑपरेशनल खर्चों के कारण डेयरी फार्मों के लिए 93 रुपये प्रति लीटर की मौजूदा दर बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है। अनाज समेत पशुओं के दाने की कई चीजों की कीमतें 25% तक बढ़ गई हैं, जबकि महंगे चारे और खली (oil cakes) ने दूध उत्पादन की लागत को और बढ़ा दिया है।

लागत लगातार बढ़ने के कारण, दूध उत्पादकों का कहना है कि डेयरी का कामकाज जारी रखने के लिए कीमतों में बदलाव जरूरी हो गया था।

मुंबई के परिवारों पर असर

दूध के दाम में प्रति लीटर 9 रुपये की बढ़ोतरी से उन परिवारों के बजट पर असर पड़ने की उम्मीद है जो नियमित रूप से तबेले का दूध खरीदते हैं। यह बढ़ोतरी त्योहारों के मौसम से ठीक पहले हुई है, जब आमतौर पर घरों में खर्च बढ़ जाता है।

यह भी पढ़ें: कर्नाटक के मंत्री बी. नागेंद्र का इस्तीफा, कथित वाल्मीकि घोटाले में भूमिका से किया इनकार

Gold-silver Price : कमोडिटी में मजबूत रैली कायम रहने की उम्मीद, सोने-चांदी में अभी भी 10% तेजी की गुंजाइश

Gold-silver Price : 360 ONE के प्रेसिडेंट और हेड-ब्रोकरेज,विरल शाह का कहना है कि अगर US बॉन्ड यील्ड में नरमी आती है तो अगले 6 से 8 महीनों में सोना और चांदी में मौजूदा स्तरों से 10% तक की तेजी आ सकती है। उनका मानना ​​है कि जियोपॉलिटिकल घटनाओं और हाई बॉन्ड यील्ड को लेकर US का रुख कीमती धातुओं को सपोर्ट करता रहेगा।

कमजोर डॉलर,US में कमजोर जॉब आंकड़ों और US ट्रेजरी विभाग की बॉन्ड-खरीद की घोषणा की वजह से सोने और चांदी की कीमतों में पहले ही जबरदस्त तेजी आ चुकी है। हालांकि,विरल शाह को लगता है कि सोने में 4,700–4,800 डॉलर और चांदी में 70–72 डॉलर के आस-पास कुछ टेक्निकल सेलिंग देखने को मिल सकती है। उन्हें उम्मीद है कि जैक्सन होल में फेडरल रिजर्व का बयान निकट भविष्य में के लिए एक अहम ट्रिगर साबित होगा।

डॉलर में कमजोरी से कमोडिटी को मिलेगा सपोर्ट

उन्होंने आगे कहा कि अगर डॉलर और कमजोर होता है तो कमोडिटीज को और फायदा मिल सकता है। डॉलर इंडेक्स के लिए 100-101 के आस-पास रेजिस्टेंस दिख रहा है। उनका मानना ​​है कि डॉलर इंडेक्स के 97 की तरफ जाने से सोने,चांदी और बेस मेटल्स को सपोर्ट मिल सकता है।

कॉपर के फंडामेंटल्स मजबूत

प्रेशियस मेटल के अलावा,विरल शाह कॉपर और जिंक को लेकर भी पॉज़िटिव हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा सेंटर्स और ग्लोबल इलेक्ट्रिफिकेशन की वजह से कॉपर में लगभग एक साल से स्ट्रक्चरल बुल ट्रेंड बना हुआ है। उन्हें कॉपर के फंडामेंटल्स मजबूत दिख रहे हैं। हालांकि उनका मानना ​​है कि कॉपर में अब तक की जोरदार बढ़त के बाद आगे और बढ़त का अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है।

जिंक और कॉपर को सप्लाई में तंगी से मिल रहा फायदा

जिंक पर अपनी राय जाहिर करते हुए विरल शाह ने कहा कि सप्लाई से जुड़ी चिंताओं,खासकर चीन में बाढ़ के कारण कम उत्पादन होने से जिंक को सपोर्ट मिल रहा है। इसके चलते लंदन मेटल एक्सचेंज पर इन्वेंट्री कम हो रही है और सप्लाई तंग है,जबकि इसकी मांग मज़बूत बनी हुई है। शाह को उम्मीद है कि जब तक सप्लाई मांग के बराबर नहीं हो जाती,तब तक कॉपर और जिंक दोनों को सपोर्ट मिलता रहेगा।

क्रूड की कीमतों में 7-8% की और गिरावट मुमकिन

कच्चे तेल पर अपनी राय जाहिर करते हुए विरल शाह ने कहा कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली तेल की सप्लाई बेहतर होती है और भू-राजनीतिक तनाव कम होता है,तो क्रूड की कीमतों में 7-8% की और गिरावट आ सकती है। हालांकि,उन्हें नहीं लगता कि यह लंबे समय तक बनी रहने वाली गिरावट होगी,क्योंकि तमाम देशों को आखिरकार अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को फिर से भरना ही होगा।

 

 

Gold Price : जेफरीज ने कहा भारत की ताकत उसके सोने में ही छिपी, गोल्ड पर लगाया बड़ा दांव

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

भारत ने जैवलिन एंटी-टैंक सिस्टम के लिए किया करार,खुलेगा डिफेंस सेक्टर में को-प्रोडक्शन का रास्ता

अमेरिकी दूतावास ने शुक्रवार को बताया कि भारतीय सेना ने अमेरिका की फॉरेन मिलिट्री सेल्स (FMS) प्रक्रिया के जरिए अमेरिका में बनी जैवलिन एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम खरीदने के लिए लेटर ऑफ़ ऑफर एंड एक्सेप्टेंस (LOA) पर साइन किया है। इस बात की जानकारी अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने की। उन्होंने भारत के इस फैसले को दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को मजबूत करने वाला एक बड़ा कदम बताया है।

X पर लिखें अपने एक पोस्ट में गोर ने कहा “बड़ी खबर! भारत युद्ध में परखा हुआ जैवलिन एंटी-टैंक सिस्टम खरीदने की योजना बना रहा है।” उन्होंने इसे “अमेरिका-भारत रक्षा संबंधों में एक बड़ा कदम” बताया और कहा कि इस घटना से “संयुक्त उत्पादन (को-प्रोडक्शन)की संभावनाओं के रास्ते खुलते हैं।” गोर ने आगे कहा,”दोनों देशों के बीच सहयोग का स्तर रिकॉर्ड ऊंचाई पर है!”

अमेरिकी दूतावास ने LOA पर हस्ताक्षर किए जाने की पुष्टि करते हुए कहा कि यह अहम कदम “अमेरिका और भारतीय सशस्त्र बलों के बीच मजबूत साझेदारी को दिखाता है और अमेरिका तथा भारत के रक्षा उद्योगों के बीच भविष्य में सहयोग के रास्ते खोलता है।”

अमेरिकी दूतावास ने कहा कि LOA पर हस्ताक्षर होने से आपसी फायदे वाले को-प्रोडक्शन और भारत तथा अमेरिका के रक्षा औद्योगिक आधार को मजबूत करने के मकसद से अन्य मौकों पर बातचीत का रास्ता भी खुलेगा।

LOA पर यह हस्ताक्षर नवंबर 2025 में अमेरिका द्वारा भारत को जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम और एक्सकैलिबर गाइडेड आर्टिलरी म्यूनिशन की प्रस्तावित बिक्री को मंजूरी दिए जाने के बाद हुआ है।

क्या है जैवलिन सिस्टम ?

जैवलिन सिस्टम को ‘जैवलिन जॉइंट वेंचर’ने बनाया है,जो RTX और लॉकहीड मार्टिन के बीच एक पार्टनरशिप है। यह एक एडवांस्ड,मीडियम-रेंज फायर-एंड-फॉरगेट एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम है। इसे बख्तरबंद गाड़ियों और मज़बूत ठिकानों समेत कई तरह के टारगेट को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। फायर-एंड-फॉरगेट खूबी की वजह से मिसाइल लॉन्च होने के बाद खुद ही अपने टारगेट की ओर बढ़ सकती है। इससे ऑपरेटर को मिसाइल को लगातार गाइड करने के बजाय अपनी जगह बदलने या सुरक्षित कवर लेने का मौका मिल जाता है।

जैवलिन की एक बड़ी विशेषता इसकी टॉप-अटैक’क्षमता है,जिससे मिसाइल बख्तरबंद गाड़ी पर ऊपर से हमला कर सकती है। जहां आमतौर पर आर्मर प्रोटेक्शन कमजोर होता है। इस सिस्टम का इस्तेमाल कुछ खास लक्ष्यों के खिलाफ सीधे हमले में भी किया जा सकता है। इस हथियार का इस्तेमाल अमेरिकी सेना,अमेरिकी मरीन कॉर्प्स और कई दूसरे देशों की सेनाएं भी करती हैं।

 

Market Outlook : बढ़त के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 31 अगस्त को कैसी रह सकती है बाजार की चाल