अमेरिका ने मदद रोकी तो यूक्रेन का क्या होगा:जेलेंस्की का साथ छोड़ पुतिन के साथ दिख रहे ट्रम्प; 1 सप्ताह में 4 झटके दिए

रूस से करीब 5 साल से युद्ध लड़ रहे यूक्रेन के सामने अब एक नई मुसीबत खड़ी हो गई है। जिस अमेरिका के हथियारों और खुफिया जानकारी के दम पर यूक्रेनी सेना रूसी हमलों का मुकाबला कर रही है, उसी के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। ट्रम्प ने महज एक सप्ताह में 4 ऐसे कदम उठाए, जिनसे यूक्रेन की मुश्किलें बढ़ गईं। अब सवाल है कि अगर ट्रम्प ने यूक्रेन को सैन्य मदद और खुफिया जानकारी देना बंद कर दिया, तो जेलेंस्की की सेना का क्या होगा? क्या यूक्रेन अमेरिकी मदद के बिना रूस का मुकाबला कर पाएगा? और ट्रम्प के बदले रुख से पुतिन को कितना फायदा मिल सकता है? 9 अक्टूबर: डीजल की बढ़ी कीमतों के लिए यूक्रेन युद्ध को जिम्मेदार ठहराया ट्रम्प ने रूस-यूक्रेन युद्ध को अमेरिका में डीजल की बढ़ती कीमतों की वजह बताया। इसके बाद उन्होंने रूसी डीजल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी राहत दी। उनका कहना था कि इससे ईंधन की कीमतें कम करने में मदद मिलेगी। यह फैसला इसलिए अहम है, क्योंकि रूस तेल और गैस की बिक्री से बड़ी कमाई करता है। इस कमाई से उसे युद्ध का खर्च उठाने में भी मदद मिलती है। रूसी ईंधन की बिक्री पर राहत मिलने से मॉस्को को आर्थिक फायदा हो सकता है। 10 अक्टूबर: जेलेंस्की से कहा- नया राष्ट्रपति चुनो अगले दिन ट्रम्प ने सीधे जेलेंस्की के नेतृत्व पर सवाल उठा दिए। उन्होंने कहा कि यूक्रेन को नया राष्ट्रपति चुनना चाहिए, जो रूस के साथ समझौता करके युद्ध खत्म कर सके। ट्रम्प का आरोप था कि जेलेंस्की के पास युद्ध खत्म करने के कई मौके थे, लेकिन उन्होंने उनका फायदा नहीं उठाया। उनका कहना था कि यूक्रेन के राष्ट्रपति को रूस के साथ समझौते की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। 11 अक्टूबर: जेलेंस्की से बात किए बिना युद्धविराम का ऐलान तीसरे दिन ट्रम्प ने रूस-यूक्रेन युद्ध में ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए युद्धविराम का ऐलान किया। ऊर्जा ठिकानों में बिजली संयंत्र, तेल रिफाइनरी और ईंधन से जुड़े दूसरे महत्वपूर्ण ढांचे शामिल होते हैं। रूस और यूक्रेन दोनों एक-दूसरे के ऊर्जा ठिकानों पर हमले करते रहे हैं। इन हमलों से बिजली आपूर्ति, ईंधन की उपलब्धता और सैन्य अभियानों पर असर पड़ता है। लेकिन ट्रम्प के ऐलान के बाद विवाद खड़ा हो गया। जेलेंस्की ने कहा कि उन्हें इस समझौते की पहले से जानकारी नहीं थी। उन्होंने साफ किया कि यूक्रेन रूस के ऊर्जा ठिकानों पर हमले तभी रोकेगा, जब रूस भी यूक्रेन पर ऐसे हमले बंद करेगा। 13 अक्टूबर: स्टारलिंक सर्विस की स्पीड कम की यूक्रेन जिस इंटरनेट से अपने तेज रफ्तार ड्रोन उड़ा रहा था और रूस में हमले कर रहा था, उस पर अचानक स्पीड लॉक लगा दिया गया। पहले ये 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हमला करते थे। लॉक लगने के बाद इसकी रफ्तार 160 किमी प्रति घंटा रह गई। जैसे ही कोई ड्रोन इस रफ्तार से तेज हुआ, उस पर लगा इंटरनेट सिग्नल कट गया और ड्रोन गिरने लगा। जेलेंस्की ने इसका जिम्मेदार मस्क को बताया। बाद में मस्क ने इस पल्ला झाड़ते हुए कहा कि यह अमेरिकी सरकार कर रही है। अमेरिका ने मदद रोक दी तो यूक्रेन का क्या होगा? 1. मिसाइल हमलों की चेतावनी मिलने में दिक्कत: अमेरिका की खुफिया जानकारी यूक्रेन को रूसी मिसाइलों के हमलों के बारे में पहले से आगाह करने में मदद करती है। इससे सैनिकों और आम नागरिकों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचने का समय मिलता है। अमेरिकी जानकारी बंद होने पर यह व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है। 2. पैट्रियट मिसाइलों की कमी: यूक्रेन पैट्रियट मिसाइलों की मदद से रूसी बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने की कोशिश करता है। अगर अमेरिका इनकी आपूर्ति रोक देता है, तो यूक्रेन के शहरों और सैन्य ठिकानों की सुरक्षा करना और मुश्किल हो सकता है। 3. सैन्य अभियानों पर असर: अमेरिकी संचार तकनीक में रुकावट आने से ड्रोन के जरिए निगरानी और हमले करने, युद्ध के मैदान में सैनिकों की गतिविधियों पर नजर रखने और हमलों की योजना बनाने में मुश्किल होगी। 4. रूस पर दबाव बनाने की रणनीति कमजोर: यूक्रेन रूसी तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा ठिकानों पर हमले करके रूस की कमाई और युद्ध क्षमता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है। अगर अमेरिका इन हमलों का विरोध करता है और रूसी ईंधन की बिक्री पर राहत देता है, तो यूक्रेन की रणनीति पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिकी मदद बंद होते ही यूक्रेन युद्ध हार जाएगा। यूक्रेन ने अपने देश में हथियारों का उत्पादन बढ़ाया है और यूरोपीय देश भी उसे सैन्य सहायता देते हैं। लेकिन अमेरिकी खुफिया जानकारी और कुछ खास हथियारों का पूरा विकल्प तैयार करना आसान नहीं होगा। ट्रम्प के फैसलों से रूस को क्या फायदा? रूस के लिए सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि यूक्रेन और अमेरिका के बीच मतभेद बढ़ने से कीव पर दबाव बढ़ेगा। अगर यूक्रेन को खुफिया जानकारी और हथियार कम मिलते हैं, तो उसे रूसी हमलों का मुकाबला करने में ज्यादा मुश्किल हो सकती है। रूसी ईंधन की बिक्री पर राहत मिलने से रूस को आर्थिक फायदा भी हो सकता है। वहीं, ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने का दबाव यूक्रेन की उस रणनीति को कमजोर कर सकता है, जिसके जरिए वह रूस की युद्ध क्षमता पर चोट करना चाहता है। ट्रम्प का जेलेंस्की का साथ छोड़ने की वजह क्या है? 1. युद्ध खत्म करने के लिए यूक्रेन पर दबाव: ट्रम्प चाहते हैं कि रूस और यूक्रेन के बीच जल्द समझौता हो। इसके लिए वे जेलेंस्की से रियायतें देने को कह रहे हैं। 2. रूस से रिश्ते सुधारने की कोशिश: ट्रम्प रूस के साथ बातचीत और आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाना चाहते हैं। इससे यूक्रेन को मिलने वाली अमेरिकी मदद पर असर पड़ने की आशंका है। 3. अमेरिका में तेल की कीमतें घटाना: यूक्रेन के रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमलों से नाराज ट्रम्प ने कहा कि इन हमलों से डीजल की कीमतें बढ़ रही हैं। वे रूस से डीजल की आपूर्ति बढ़ाकर कीमतें कम करना चाहते हैं। 4. पुतिन से समझौते की कोशिश: ट्रम्प ने रूस से डीजल कारोबार की अनुमति देने और जेलेंस्की पर हमले रोकने का दबाव बनाने जैसे कदम उठाए हैं। इससे रूस को आर्थिक फायदा मिल सकता है, जबकि यूक्रेन की स्थिति कमजोर पड़ने की आशंका है। —————————
यह खबर भी पढ़ें… मस्क ने यूक्रेन में स्टारलिंक इंटरनेट की स्पीड घटाई:रूस के खिलाफ सेना के ऑपरेशन पर असर
अमेरिकी अरबपति इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने यूक्रेन में स्टारलिंक इंटरनेट की स्पीड पर लिमिट लगा दी है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के सलाहकार सेरही बेस्क्रेस्टनोव ने बुधवार को बताया कि इस फैसले से रूस के खिलाफ लड़ रही यूक्रेनी सेना के कई ऑपरेशन पर असर पड़ा है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

वाराणसी में बनेंगे बड़े ब्रांड्स के कपड़े, मिर्जामुराद में ₹100 करोड़ की लागत से तैयार हुई अरविंद मिल्स की यूनिट, यूं मिल रहा रोजगार

यूपी के वाराणसी में जाकी, यूएस पोलो, एरो पैंट-शर्ट, टी शर्ट के रेडीमेड ब्रांडेड कपड़े तैयार होंगे। इसके लिए मिर्जामुराद के खुचवां गांव में अरविंद मिल्स की नई इकाई स्थापित हुई है। इस पर करीब 100 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। करीब 8 एकड़ जमीन पर इस यूनिट को लगाया गया है। इस यूनिट से सीधे तौर पर यहां की सैकड़ों महिलाओं को रोजगार मिलेगा। पूरे पूर्वांचल में अरविंद मिल्स की यह पहली मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट है।

फिलहाल इस विनिर्माण इकाई में जिन महिलाओं को रोजगार मिलेगा उन्हें ट्रेनिंग भी दी जा रही है। शुरुआती दौर में इस इकाई में आस पास के गांव की 300 महिलाओं को सीधे रोजगार का अवसर मिलेगा। बताया जा रहा है इस यूनिट की शुरुआत के बाद इसका विस्तार भी किया जाएगा। जिससे रोजगार के साधन भी बढ़ेंगे। अरविंद मिल्स गुजरात आधारित लोकप्रिय टेक्सटाइल कंपनी है।

पीएम मोदी करेंगे लोकार्पण

बीते दिनों यूपी इन्वेस्टर मीट के दौरान कंपनी ने वाराणसी में विनिर्माण इकाई शुरू करने का प्रस्ताव रखा था। साल 2024 में मिर्जामुराद में इसकी आधारशिला रखी गई थी। करीब 2 साल में यह यूनिट अब बनकर तैयार हो गई है। वाराणसी के डीएम सतेन्द्र कुमार ने बताया की 25 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब वाराणसी आएंगे तो वह इस यूनिट का लोकार्पण भी करेंगे। इस लिहाज से भी तैयारियां की जा रही हैं।

इन चींजो का होगा उत्पादन

जानकारी के मुताबिक, वाराणसी में स्थापित अरविंद मिल्स के इस मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट में स्पोर्ट्स वियर, अंडर गारमेंट्स, शर्ट, टीशर्ट का उत्पादन होगा। दूसरे फेज में इसके विस्तार के बाद यहां जींस, पैंट और ब्रांडेड शर्ट भी तैयार होंगे। जिससे हजारों लोगों को सीधे रोजगार का मौका मिलेगा।

कपड़ों के अलावा धागे भी तैयार करती है कंपनी

अरविंद मिल्स सिर्फ ब्रांडेड रेडीमेड कपड़े ही नहीं, धागों और कपड़ों को भी तैयार करती है। डेनिम के जींस के धागों को भी तैयार करने का काम यह कंपनी सालों से करती चली आ रही है। इसके अलावा लिनेन के कपड़े, सादे कपड़ों और सूट के फैब्रिक्स को भी अरविंद मिल्स की यूनिट में तैयार किया जाता है।

वाराणसी से अभिषेक जायसवाल की रिपोर्ट

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Petrol Diesel Price Today: पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आज क्या हुआ बदलाव? चेक करें ताजा रेट

Petrol Diesel Price Today: हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती हैं। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ताजा दरें जारी करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर आधारित होती हैं। ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, चाहे वो ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो या फल-सब्जी बेचने वाला व्यापारी।

ऐसे में हर दिन की कीमतों की जानकारी रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि समझदारी भी है। सरकार की यह प्रणाली पारदर्शिता सुनिश्चित करती है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रमित जानकारी न मिले।

आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भाव

ये रहे 17 अक्टूबर 2026 के प्रमुख शहरों के पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट

नई दिल्ली: पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर।

मुंबई: पेट्रोल ₹111.18 और डीजल ₹97.83 प्रति लीटर।

कोलकाता: पेट्रोल ₹113.47 जबकि डीजल ₹99.82 प्रति लीटर।

चेन्नई: पेट्रोल ₹107.77 और डीजल ₹99.55 प्रति लीटर।

गुरुग्राम: पेट्रोल ₹102.77 तथा डीजल ₹95.44 प्रति लीटर।

नोएडा: पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.56 प्रति लीटर।

बेंगलुरु: पेट्रोल ₹110.93 जबकि डीजल ₹98.80 प्रति लीटर।

भुवनेश्वर: पेट्रोल ₹109.92 और डीजल ₹100.92 प्रति लीटर।

चंडीगढ़: पेट्रोल ₹98.10 तथा डीजल ₹86.09 प्रति लीटर।

हैदराबाद: पेट्रोल ₹115.69 और डीजल ₹103.82 प्रति लीटर।

जयपुर: पेट्रोल ₹112.66 जबकि डीजल ₹97.78 प्रति लीटर।

लखनऊ: पेट्रोल ₹102.05 और डीजल ₹95.55 प्रति लीटर।

पटना: पेट्रोल ₹113.35 तथा डीजल ₹99.36 प्रति लीटर।

तिरुवनंतपुरम: पेट्रोल ₹115.49 और डीजल ₹104.40 प्रति लीटर।

पिछले दो साल से स्थिर क्यों हैं कीमतें?

मई 2022 के बाद से केंद्र और कई राज्यों द्वारा टैक्स में कटौती की गई, जिसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, फिर भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई हैं।

किन कारणों से तय होती हैं ईंधन की कीमतें?

  1. कच्चे तेल की कीमतें:

पेट्रोल और डीजल का उत्पादन मुख्य रूप से कच्चे तेल से होता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है।

  1. डॉलर के मुकाबले रुपया:

भारत अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है, और यह डॉलर में खरीदा जाता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो ईंधन महंगा हो जाता है।

  1. सरकारी टैक्स और शुल्क:

केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं, जो खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होते हैं। यही कारण है कि राज्यों में कीमतों में अंतर होता है।

  1. रिफाइनिंग की लागत:

कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया (रिफाइनिंग) में भी खर्च होता है। ये लागत कच्चे तेल की गुणवत्ता और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है।

  1. मांग और आपूर्ति का संतुलन:

बाजार में ईंधन की मांग अगर बढ़ जाती है, तो कीमतें भी ऊपर जाने लगती हैं। खासकर त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में ईंधन की खपत ज्यादा होती है।

कैसे करें अपने शहर की कीमतें SMS से चेक?

अगर आप मोबाइल से ईंधन की कीमत जानना चाहते हैं, तो ये प्रक्रिया आसान है:

Indian Oil ग्राहक: अपने शहर का कोड टाइप करें और उसे “RSP” के साथ 9224992249 पर भेजें।

BPCL ग्राहक: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें।

HPCL ग्राहक: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें।

भारत को सोने का नया सप्लायर मिल सकता है:ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज पर 13 हजार करोड़ खर्च, यहां दुनिया का सबसे बड़ा सोना भंडार

ऑस्ट्रेलिया में सोने की नई खदानें तलाशने के लिए एक साल में रिकॉर्ड 13 हजार करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। यहां दुनिया का सबसे बड़ा सोना भंडार है। ऐसे में आने वाले समय में ऑस्ट्रेलिया भारत के लिए सोने का नया सप्लायर बन सकता है। फिलहाल भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर सोना आयात करता है, जबकि कुल आयात में ऑस्ट्रेलिया की हिस्सेदारी सिर्फ 2.27% है। ऑस्ट्रेलिया में गोल्ड रश, ड्रिलिंग मशीनों की मांग तेज पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में अकेले 10,625 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। यहां सोने की तलाश के लिए ड्रिलिंग मशीनों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। सोने की नई खदानें खोजने की इस होड़ को ‘गोल्ड रश’ कहा जा रहा है। अनुमान है कि यहां करीब 13 हजार टन सोना मौजूद है। यह दुनिया में मौजूद सोने के कुल संसाधनों का करीब 20% है। सोने की खोज में तेजी भारत के लिए भी अहम है। दुनिया में सोने के आभूषणों की कुल मांग में भारत की हिस्सेदारी करीब 30% बताई जाती है। भारत में सोने का उत्पादन बहुत कम होता है। इसलिए अपनी जरूरत पूरी करने के लिए उसे दूसरे देशों से सोना खरीदना पड़ता है। 2026 की पहली तिमाही में भारत ने करीब 1.61 लाख करोड़ रुपए का सोना आयात किया। भास्कर एनालिसिस: सोने की खोज पर पैसा क्यों लगा रही हैं कंपनियां? 1. जंग और अनिश्चितता से बढ़ी सोने की मांग दुनिया में जंग और आर्थिक अनिश्चितता के कारण सोने की कीमतों में तेजी आई है। ऐसे समय में सोने की खदानों में निवेश करना कंपनियों के लिए फायदेमंद हो सकता है। यही वजह है कि वे सोने के नए भंडार खोजने पर ज्यादा पैसा खर्च कर रही हैं। जून 2026 की तिमाही में ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज पर खर्च 23.6% बढ़ गया। 2. सोने की खोज पर सबसे ज्यादा खर्च ऑस्ट्रेलिया में जून 2026 की तिमाही के दौरान अलग-अलग धातुओं की खोज पर सबसे ज्यादा पैसा सोने के लिए खर्च किया गया। सोना: 3,883 करोड़ रुपए लौह अयस्क: 1,606 करोड़ रुपए तांबा, निकल, जस्ता और सीसा: 1,217 करोड़ रुपए कोयला: 401 करोड़ रुपए इन आंकड़ों से पता चलता है कि ऑस्ट्रेलिया में कंपनियों का ध्यान सोने के नए भंडार खोजने पर ज्यादा है। 3. दुनिया में सोने के उत्पादन में ऑस्ट्रेलिया की बड़ी हिस्सेदारी 2025 में ऑस्ट्रेलिया ने 314 टन सोने का उत्पादन किया। दुनिया में इस दौरान कुल 3,300 टन सोना निकाला गया था। यानी दुनिया के कुल उत्पादन में ऑस्ट्रेलिया की हिस्सेदारी करीब 9.5% रही। रिपोर्ट के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया में सोने का उत्पादन एक साल में 10% से ज्यादा बढ़ा। 4. भारत को ऑस्ट्रेलिया से क्या फायदा हो सकता है? भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर सोना दूसरे देशों से खरीदता है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया से आयात बढ़ने पर भारत के पास सोना खरीदने के लिए एक और विकल्प होगा। ऑस्ट्रेलिया में खनन और कारोबार से जुड़े नियम सख्त हैं। वहां सोने के स्रोत और पर्यावरण से जुड़े नियमों का भी ध्यान रखा जाता है। इससे भारतीय कंपनियों को यह जांचने में मदद मिल सकती है कि वे सोना कहां से खरीद रही हैं। पश्चिम एशिया में जंग के कारण दुबई के रास्ते भारत आने वाली सोने की खेप भी प्रभावित हुई थी। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया से कारोबार बढ़ने पर भारत को सोना मंगाने के लिए एक दूसरा रास्ता मिल सकता है। 5. क्या इससे भारत में सोना सस्ता होगा? अगर ऑस्ट्रेलिया में नई खदानें मिलती हैं और वहां सोने का उत्पादन बढ़ता है, तो दुनिया के बाजार में सोने की सप्लाई बढ़ सकती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सोना सस्ता हो ही जाएगा। सोने की कीमत इस बात पर भी निर्भर करती है कि दुनिया में उसकी मांग कितनी है, उत्पादन पर कितना खर्च आता है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें किस दिशा में जाती हैं। भारत और ऑस्ट्रेलिया की खदानों में कितना अंतर? सोना सीधे जमीन से शुद्ध रूप में नहीं निकलता। इसे उस पत्थर और मिट्टी से निकाला जाता है, जिसमें सोना मिला होता है। इसे सोने का अयस्क कहते हैं। भारत और ऑस्ट्रेलिया की खदानों में एक टन अयस्क से मिलने वाले सोने की मात्रा में बड़ा अंतर है। ऑस्ट्रेलिया के अयस्क में भारत के मुकाबले प्रति टन करीब 8.5 गुना ज्यादा सोना मिलता है। भारत में सोने की सप्लाई कहां से आती है? भारत में सोने की जरूरत तीन मुख्य तरीकों से पूरी होती है: 82% – आयात से: दूसरे देशों से सोना खरीदा जाता है। 16% – रिसाइक्लिंग से: पुराने गहनों और सोने को दोबारा इस्तेमाल किया जाता है। 2% – देश में खनन से: भारत की अपनी खदानों से सोना निकाला जाता है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका में 30 हजार भारतीय मजदूरों ने काम छोड़ा:इनके पास पूरे कागजात नहीं, पकड़े जाने का डर अमेरिका के कैलिफोनिया में करीब 30 हजार भारतीय मजदूरों को खेती का काम छोड़ना पड़ा है। इनमें से कई मजदूरों के पास अमेरिका में रहने और काम करने के पूरे कागजात नहीं हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : भारतीय बाजार के लिए अच्छे संकेत दिख रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी में 80 प्वाइंट से ज्यादा की तेजी है। FIIs की कैश में बिकवाली हुई है, लेकिन वायदा में बड़ी कवरिंग नजर आई है। अमेरिकी बाजार में भी कल जोरदार रिकवरी दिखी। डाओ में 550 प्वाइंट से ज्यादा का उछाल दिखा। नैस्डैक और S&P में भी बढ़त रही। एशियाई बाजारों में भी रौनक दिख रही है। क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के करीब दिख रहा है। US बॉन्ड यील्ड में भी नरमी आई है।

यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

गुरुवार को भारतीय इक्विटी बेंचमार्क में तेजी आई। जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO की घोषणा के बाद ऑटो, IT, प्राइवेट बैंकों और रिलायंस इंडस्ट्रीज में जोरदार खरीदारी के चलते निफ्टी और सेंसेक्स, दोनों में 1.5 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। कारोबार के अंत में, सेंसेक्स 1,533.72 अंक यानी 2.11 प्रतिशत की तेजी के साथ 74,315.61 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 374.65 अंक यानी 1.66 प्रतिशत की बढ़त के साथ 22,997.35 पर बंद हुआ।

SEBI ने CAS में किए बड़े बदलाव, एक्सपायरी पर VWAP से होगा सेटलमेंट

मार्केट रेगुलेटर सेबी ने क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) में बड़े बदलाव किए है। एक्सपायरी के दिन CAS के बजाए पुराने VWAP सिस्टम से सेटलमेंट होगा। CAS की टाइमिंग बदली गई है। अब CAS 3.30 बजे से 10 मिनट का होगा। यह फैसला 7 दिसंबर से लागू होगा।

टेक महिंद्रा के नतीजे अनुमान के मुताबिक, Q2 में 0.9% रही विप्रो की IT सर्विसेज रेवेन्यू ग्रोथ

टेक महिंद्रा के दूसरी तिमाही के नतीजे अनुमान के मुताबिक रहे है। इसके मुनाफे में 7 परसेंट तो रेवेन्यू में 3 परसेंट की बढ़ोतरी हुई है। विप्रो के Q2 रिजल्ट भी उम्मीद के करीब रहे हैं। इसकी CC रेवेन्यू ग्रोथ फ्लैट रही है। IT सर्विसेज रेवेन्यू ग्रोथ 0.9% रही है। हालांकि Q3 में इसके माइनस 1.5% से 0.5% की रेंज में रहने का अनुमान किया गया है। वहीं, परसिस्टेंट सिस्टम का मुनाफा 27 परसेंट गिरा है। लेकिन CC रेवेन्यू ग्रोथ 7.8% रही है।

एंजेव वन का Q2 मुनाफा 44.7% बढ़ा, रेवेन्यू फ्लैट

दूसरी तिमाही में एंजेव वन के मुनाफे में तिमाही आधार पर 45 परसेंट का उछाल आया है। लेकिन रेवेन्यू ग्रोथ फ्लैट रही है। मार्जिन में 1060 Bps का तगड़ा उछाल देखने को मिला है। वहीं L&T FINANCE का Q2 मुनाफा 33 परसेंट बढ़ा है। इसे मजबूत रिटले ग्रोथ और NII में उछाल से बूस्ट मिला है।

JIO के IPO पर बोले आकाश अंबानी

JIO के IPO पर आकाश अंबानी ने कहा कि देश को डिजिटल सर्विस से कनेक्ट करना Jio का मिशन है। भारत में विकसित टेक्नोलॉजी का दूसरे देशों में इस्तेमाल होगा। IPO पर ईशा अंबानी ने कहा कि लॉन्ग टर्म प्लानिंग, स्केल और एग्जीक्यूशन पर फोकस है। यह आईपीओ 21 अक्टूबर से खुलेगा। इसकी प्राइस बैंड 1065 से 1119 रुपए प्रति शेयर है।

चीनी 21 सेंट के पार

सप्लाई की चिंता से इंटरनेशनल मार्केट में चीनी की कीमतों में जोरदार उछाल आया है। इसका भाव 21 सेंट प्रति पाउंड के साथ करीब 2 सालों की ऊंचाई पर पहुंच गया है। ब्राजील में क्रशिंग में देरी और भारत में कमजोर मॉनसून से उत्पादन गिरने की आशंका से इसके भाव में तेजी आई है।

एशियन करेंसी

शुक्रवार, 16 अक्टूबर को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अधिकांश एशियाई मुद्राओं में कमजोरी आई है, जिसमें दक्षिण कोरियाई वॉन और फिलीपीन पेसो सबसे ज्यादा गिरे हैं। इंडोनेशियाई रुपिया में 0.20 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि दक्षिण कोरियाई वॉन 0.36 प्रतिशत और फिलीपीन पेसो 0.23 प्रतिशत कमजोर हुए हैं। जापानी येन में 0.08 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, वहीं थाई बाह्ट और सिंगापुर डॉलर में 0.05-0.05 प्रतिशत की कमी आई है। मलेशियाई रिंगित और चीनी रेनमिनबी में भी मामूली गिरावट देखी गई है। ये 0.02 प्रतिशत और 0.018 प्रतिशत नीचे आए हैं। इसके विपरीत, ताइवान डॉलर में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.05 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है। यह 9 लिस्टेड एशियाई मुद्राओं में एकमात्र ऐसी मुद्रा है जिसमें तेजी आई है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने बिकवाली का सिलसिला जारी रखा और 15 अक्टूबर को लगभग 5,285 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाजार को कुछ सहारा दिया और इस दौरान 3,319 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

 

Market cues : 22850 के ऊपर टिकने पर ही निफ्टी के लिए खुलेगा 23000 की ओर बढ़ने का रास्ता

रेवंत ने कृषि के लिए 20 दिनों तक बिना रुकावट बिजली आपूर्ति के दिये निर्देश

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने कम बारिश के मद्देनजर खड़ी फसलों को बचाने के लिए अगले 20 दिनों तक कृषि क्षेत्र को चौबीसों घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने का आदेश दिया है।

इसके साथ ही श्री रेड्डी ने इस मामले में लापरवाही बरतने पर ऊर्जा विभाग के विशेष मुख्य सचिव और टीजी-जेनको के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) सहित वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित करने की चेतावनी भी दी है।

उन्होंने बुधवार रात यहां कम बारिश, अल नीनो के प्रभाव तथा बिजली और पेयजल आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा के लिए आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में बार-बार बिजली कटौती को लेकर कड़ी नाराजगी जतायी। उन्होंने अधिकारियों से सवाल किया कि बार-बार निर्देश दिये जाने के बावजूद स्थिति में सुधार क्यों नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि बिजली की कमी के कारण किसानों की फसलों को नुकसान नहीं होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को कृषि क्षेत्र में बिजली की अधिक मांग वाले क्षेत्रों की पहचान करने और फसल कटाई पूरी होने तक पर्याप्त बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

मुख्यमंत्री ने सवाल किया कि बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए बिजली उत्पादन क्यों नहीं बढ़ाया गया। उन्होंने पूछा कि नैनी और महानदी से कोयले की आपूर्ति की व्यवस्था होने के बावजूद यादाद्रि बिजली संयंत्र अपनी स्थापित क्षमता के अनुसार पूरा उत्पादन क्यों नहीं कर रहा है।

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उन्होंने कहा, “मैं जनता के प्रति जवाबदेह हूं। खड़ी फसलों को बचाने के लिए बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के बार-बार निर्देश देने के बावजूद स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है।” उन्होंने कहा, ” मैं ऐसे किसी भी कदम को बर्दाश्त नहीं करूंगा, जिससे जनता को परेशानी हो। लापरवाही बरतने वाले किसी भी व्यक्ति को नहीं बख्शूंगा।”

मुख्यमंत्री ने अल नीनो के संभावित प्रभाव को कोविड-19 महामारी के समान एक आपदा बताते हुए कहा कि यदि विभागों ने समय रहते बचाव के उपाय नहीं किए, तो मौजूदा परिस्थितियां बड़े संकट का रूप ले सकती हैं। उन्होंने सभी विभागों को जून तक के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार करने, अल नीनो के संभावित प्रभावों का आकलन करने और सामान्य बारिश बहाल होने तक जनता की परेशानियां कम करने के लिए आपसी समन्वय से काम करने का निर्देश दिये।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राज्यभर में पेयजल की कमी को रोकने के लिए पहले से व्यवस्था करने और पशुओं के लिए पर्याप्त चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया। उन्होंने ग्रेटर हैदराबाद क्षेत्र में निर्माण कार्यों और अन्य उपयुक्त जरूरतों के लिए मलजल शोधन संयंत्रों से शोधित पानी का इस्तेमाल करने को कहा। उन्होंने बताया कि स्थिति से निपटने की तैयारियों के तहत प्रत्येक मंडल में समूह-एक और समूह-दो के अधिकारियों की नियुक्ति की जायेगी। ये अधिकारी बारिश की कमी, बिजली और पेयजल आपूर्ति, फसलों की स्थिति तथा चारे की उपलब्धता पर नजर रखेंगे। उन्होंने कहा कि जमीनी स्थिति की नियमित रिपोर्ट मुख्य सचिव को सौंपी जायेगी।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दशहरा और दिवाली के बीच ग्राम सभाएं आयोजित करने तथा सांस्कृतिक दलों के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाने का भी निर्देश दिया। इन अभियानों के जरिए अल नीनो के संभावित प्रभावों की जानकारी देने के साथ-साथ पानी और बिजली की बचत को बढ़ावा दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि सामान्य बारिश बहाल होने तक सभी विभाग सतर्क रहें और लोगों की परेशानियां कम से कम रखने के लिए पहले से ही आवश्यक कदम उठायें।

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Stock Market Outlook: ‘शेयर बाजार में निवेश का सही मौका’, राजेश कोठारी ने कहा- 3 साल में मिल सकता है तगड़ा रिटर्न

Stock Market Outlook: AlfAccurate Advisors के मैनेजिंग डायरेक्टर राजेश कोठारी का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार अगले 3 से 5 साल में अच्छा रिटर्न दे सकता है। इसके पीछे कंपनियों की कमाई में सुधार, अर्थव्यवस्था की मजबूती और शेयरों की वाजिब वैल्यूएशन जैसे कारण हैं।

CNBC-TV18 को दिए इंटरव्यू में कोठारी ने कहा कि अब इक्विटी में निवेश बढ़ाने का समय है। निवेशकों को लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप, तीनों तरह के शेयरों में मौके तलाशने चाहिए। पिछले दो साल में बाजार से खास रिटर्न नहीं मिला है। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का प्रदर्शन भी कमजोर रहा है।

अर्थव्यवस्था की मजबूती पर भरोसा

कोठारी के मुताबिक, महंगे कच्चे तेल और ऊंची ब्याज दरों की चिंताओं के बावजूद भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत है। नॉन-फूड क्रेडिट ग्रोथ 17-18%, इंडस्ट्रियल क्रेडिट ग्रोथ 20% और पर्सनल लोन में 16% की बढ़ोतरी इसका संकेत है। उनके मुताबिक, इंडस्ट्रियल क्रेडिट ग्रोथ 2011 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंची है।

खपत, सरकार का कैपिटल एक्सपेंडिचर और निर्यात में सुधार भी अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहे हैं। कंपनियों की कमाई में भी सुधार दिख रहा है। साथ ही, बाजार की वैल्यूएशन अपने 10 साल के औसत P/E रेशियो से नीचे है।

FII की बिकवाली हर कंपनी के लिए खतरे का संकेत नहीं

कोठारी ने कहा कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली को सिर्फ भारत से उनकी नाराजगी के तौर पर नहीं देखना चाहिए। निवेशकों को नेट खरीद-बिक्री के बजाय कुल खरीद और बिक्री पर भी नजर डालनी चाहिए।

उनके मुताबिक, विदेशी निवेशक उन कंपनियों से पैसा निकाल रहे हैं, जो उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाईं। इसलिए बिकवाली का कारण कई बार देश के बजाय किसी खास कंपनी का कमजोर प्रदर्शन होता है।

इन सेक्टरों में दिख रहे हैं मौके

कोठारी को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS), एयरोस्पेस, कॉन्ट्रैक्ट डेवलपमेंट एंड मैन्युफैक्चरिंग (CDMO) और ऑटो एंसिलरी कंपनियों में संभावनाएं दिख रही हैं। EMS सेक्टर को सरकार की PLI स्कीम और भारतीय कंपनियों की बढ़ती उत्पादन क्षमता से मदद मिल रही है।

बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज भी उनकी पसंद में शामिल हैं। मजबूत क्रेडिट ग्रोथ, बेहतर एसेट क्वालिटी और नियंत्रित क्रेडिट लागत से इस सेक्टर को फायदा मिल सकता है। उन्हें स्पेशियलिटी केमिकल्स, कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी और ट्रैवल, मीडिया व डिजिटल एडवर्टाइजिंग प्लेटफॉर्म कारोबार में भी अवसर दिखते हैं।

हर शेयर में तेजी की उम्मीद न करें

कोठारी ने स्टॉक चुनते समय सावधानी बरतने की सलाह दी। उनके मुताबिक, पिछले पांच साल में कोई भी लार्जकैप कंपनी हर साल 20% की ग्रोथ दर्ज नहीं कर पाई। मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में भी करीब 8% ही लगातार इतनी ग्रोथ हासिल कर पाईं।

उन्होंने कहा कि कई प्लेटफॉर्म कंपनियां अब कर्ज-मुक्त हो चुकी हैं। इससे कारोबार को लंबे समय तक आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

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Petrol Diesel Price Today: 15 अक्टूबर को पेट्रोल-डीजल के नए रेट जारी, जानें आपके शहर में क्या है कीमत

Petrol Diesel Price Today: हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती हैं। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ताजा दरें जारी करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर आधारित होती हैं। ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, चाहे वो ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो या फल-सब्जी बेचने वाला व्यापारी।

ऐसे में हर दिन की कीमतों की जानकारी रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि समझदारी भी है। सरकार की यह प्रणाली पारदर्शिता सुनिश्चित करती है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रमित जानकारी न मिले।

आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भाव

ये रहे 15 अक्टूबर 2026 के प्रमुख शहरों के पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट

नई दिल्ली: पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर।

मुंबई: पेट्रोल ₹111.18 और डीजल ₹97.83 प्रति लीटर।

कोलकाता: पेट्रोल ₹113.47 जबकि डीजल ₹99.82 प्रति लीटर।

चेन्नई: पेट्रोल ₹107.77 और डीजल ₹99.55 प्रति लीटर।

गुरुग्राम: पेट्रोल ₹102.77 तथा डीजल ₹95.44 प्रति लीटर।

नोएडा: पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.56 प्रति लीटर।

बेंगलुरु: पेट्रोल ₹110.93 जबकि डीजल ₹98.80 प्रति लीटर।

भुवनेश्वर: पेट्रोल ₹109.92 और डीजल ₹100.92 प्रति लीटर।

चंडीगढ़: पेट्रोल ₹98.10 तथा डीजल ₹86.09 प्रति लीटर।

हैदराबाद: पेट्रोल ₹115.69 और डीजल ₹103.82 प्रति लीटर।

जयपुर: पेट्रोल ₹112.66 जबकि डीजल ₹97.78 प्रति लीटर।

लखनऊ: पेट्रोल ₹102.05 और डीजल ₹95.55 प्रति लीटर।

पटना: पेट्रोल ₹113.35 तथा डीजल ₹99.36 प्रति लीटर।

तिरुवनंतपुरम: पेट्रोल ₹115.49 और डीजल ₹104.40 प्रति लीटर।

पिछले दो साल से स्थिर क्यों हैं कीमतें?

मई 2022 के बाद से केंद्र और कई राज्यों द्वारा टैक्स में कटौती की गई, जिसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, फिर भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई हैं।

किन कारणों से तय होती हैं ईंधन की कीमतें?

  1. कच्चे तेल की कीमतें:

पेट्रोल और डीजल का उत्पादन मुख्य रूप से कच्चे तेल से होता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है।

  1. डॉलर के मुकाबले रुपया:

भारत अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है, और यह डॉलर में खरीदा जाता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो ईंधन महंगा हो जाता है।

  1. सरकारी टैक्स और शुल्क:

केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं, जो खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होते हैं। यही कारण है कि राज्यों में कीमतों में अंतर होता है।

  1. रिफाइनिंग की लागत:

कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया (रिफाइनिंग) में भी खर्च होता है। ये लागत कच्चे तेल की गुणवत्ता और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है।

  1. मांग और आपूर्ति का संतुलन:

बाजार में ईंधन की मांग अगर बढ़ जाती है, तो कीमतें भी ऊपर जाने लगती हैं। खासकर त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में ईंधन की खपत ज्यादा होती है।

कैसे करें अपने शहर की कीमतें SMS से चेक?

अगर आप मोबाइल से ईंधन की कीमत जानना चाहते हैं, तो ये प्रक्रिया आसान है:

Indian Oil ग्राहक: अपने शहर का कोड टाइप करें और उसे “RSP” के साथ 9224992249 पर भेजें।

BPCL ग्राहक: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें।

HPCL ग्राहक: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें।

Stocks to Watch: 14 अक्टूबर को इन 11 शेयरों पर रहेगी नजर, मिल सकता है तगड़ी कमाई का मौका

Stocks to Watch: बुधवार 14 अक्टूबर को शेयर बाजार में कई कंपनियों के शेयर खबरों के दम पर एक्शन दिखा सकते हैं। इन कंपनियों ने तिमाही नतीजे और नए ऑर्डर जैसे अहम अपडेट दिए हैं। ऐसे में ट्रेडिंग से पहले इन 11 शेयरों पर निवेशकों की खास नजर रहेगी।

Tata Elxsi

टाटा ग्रुप की कंपनी टाटा एलेक्सी का सितंबर तिमाही में नेट प्रॉफिट ₹170.3 करोड़ रहा। पिछली तिमाही में यह ₹170.6 करोड़ था। रेवेन्यू 3.4% बढ़कर ₹1,055.7 करोड़ हो गया। EBIT 7.2% बढ़कर ₹207.7 करोड़ पहुंच गया। EBIT मार्जिन भी 18.97% से बढ़कर 19.68% हो गया।

Hyundai Motor India

ऑटोमोबाइल कंपनी Hyundai Motor Group ने 2032 तक भारत में 15.5 अरब डॉलर निवेश करने की योजना बनाई है। यह निवेश मैन्युफैक्चरिंग, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) और स्थानीय सप्लाई चेन को मजबूत करने पर खर्च होगा। कंपनी भारत में R&D सेंटर के लिए 70 करोड़ डॉलर लगाने की भी योजना बना रही है। Hyundai Motor India और Kia India की उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर भी निवेश किया जाएगा।

Bharat Electronics

सरकारी डिफेंस भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) को ₹533 करोड़ के नए ऑर्डर मिले हैं। ये ऑर्डर 17 सितंबर 2026 के बाद मिले हैं। इनमें कम्युनिकेशन इक्विपमेंट, एवियोनिक्स, साइबर सिक्योरिटी, ड्रोन, जैमर और सॉफ्टवेयर से जुड़े काम शामिल हैं। कंपनी को अपग्रेड, स्पेयर पार्ट्स और सर्विस के ऑर्डर भी मिले हैं।

Transformers and Rectifiers

ट्रांसफॉर्मर बनाने वाली कंपनी Transformers and Rectifiers का सितंबर तिमाही में नेट प्रॉफिट बढ़कर ₹79.8 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹33.9 करोड़ था। रेवेन्यू 60.7% बढ़कर ₹739.4 करोड़ पहुंच गया। EBITDA ₹128.8 करोड़ रहा और मार्जिन 11.2% से बढ़कर 17.4% हो गया। तिमाही में कंपनी को ₹131.4 करोड़ का एक्सेप्शनल गेन भी हुआ।

GRT Jewellers

ज्वेलरी कारोबार करने वाली GRT Jewellers को लिस्टेड ज्वेलरी कंपनी Tribhovandas Bhimji Zaveri (TBZ) में 74.12% हिस्सेदारी खरीदने के लिए CCI की मंजूरी मिल गई है। GRT Jewellers ने 4.95 करोड़ शेयर खरीदने के लिए TBZ के प्रमोटर्स के साथ ₹1,033.71 करोड़ तक का सौदा किया है। हालांकि, डील पूरी होने के लिए अभी बाकी शर्तें पूरी करनी होंगी।

Adani Enterprises

अदाणी ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी अदाणी एंटरप्राइजेज ने अमेरिकी कंपनी Jabil Inc. के साथ 50:50 जॉइंट वेंचर बनाने के लिए MoU किया है। इसका मकसद भारत में AI और डेटा सेंटर के उपकरण बनाना है। प्रस्तावित JV में AI रैक, सर्वर, स्टोरेज, नेटवर्किंग उपकरण, पावर डिस्ट्रीब्यूशन यूनिट और लिक्विड कूलिंग सिस्टम बनाए जाएंगे।

Anand Rathi Shares

शेयर ब्रोकिंग कंपनी आनंद राठी शेयर्स एंड स्टॉक ब्रोकर्स का नेट प्रॉफिट सितंबर तिमाही में 48.4% बढ़कर ₹42.3 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹28.5 करोड़ था। कंपनी का रेवेन्यू भी 20.1% बढ़कर ₹273 करोड़ पहुंच गया। पिछले साल यह ₹227 करोड़ था।

Hindustan Oil Exploration

तेल और गैस की खोज करने वाली कंपनी हिंदुस्तान ऑयल एक्सप्लोरेशन ने देबब्रत दास को नया चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति 16 अक्टूबर से लागू होगी। कंपनी के मुताबिक, एलन एंड्रेड 15 अक्टूबर से CFO का पद छोड़ देंगे।

Polycab India

वायर और केबल बनाने वाली कंपनी पॉलीकैब इंडिया को कॉरपोरेट इन्सॉल्वेंसी मामले में राहत मिली है। नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने कंपनी के खिलाफ इन्सॉल्वेंसी प्रोसेस शुरू करने के NCLT के आदेश पर रोक लगा दी है।

RailTel Corporation of India

सरकारी टेलीकॉम और ICT सेवा देने वाली कंपनी रेलटेल को ओडिशा सरकार के उच्च शिक्षा विभाग से ₹48.98 करोड़ का वर्क ऑर्डर मिला है। इसमें टैक्स भी शामिल हैं। कंपनी 83 डिजिटल एप्लिकेशन मॉड्यूल तैयार करेगी और उन्हें मौजूदा ERP सिस्टम से जोड़ेगी। इस प्रोजेक्ट को 10 मई 2027 तक पूरा करना है।

GTPL Hathway

केबल टीवी और ब्रॉडबैंड सर्विस देने वाली GTPL Hathway दूसरी तिमाही में मुनाफे से घाटे में आ गई। कंपनी को ₹9.2 करोड़ के मुनाफे के मुकाबले ₹93 लाख का कंसोलिडेटेड घाटा हुआ। हालांकि, कंपनी की इनकम बढ़कर ₹1,143 करोड़ हो गई, जो पिछले साल इसी तिमाही में ₹959 करोड़ थी।

Q2 Results

बुधवार को कई कंपनियां सितंबर तिमाही के नतीजे घोषित करेंगी। इनमें केनरा बैंक, CEAT, भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स (BHEL), ICICI लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस, टाटा टेक्नोलॉजीज और HDB फाइनेंशियल सर्विसेज शामिल हैं। इनके अलावा बजाज कंज्यूमर केयर, एलेकॉन इंजीनियरिंग, लॉयड्स मेटल्स एंड एनर्जी, मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स और लीला पैलेसेज होटल्स एंड रिसॉर्ट्स के नतीजे भी आने हैं।

Tata Elxsi Q2 Results: टाटा की कंपनी को ₹170 करोड़ का मुनाफा, ऑटो बिजनेस में मिला बड़ा कॉन्ट्रैक्ट

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

5 बकरियों से खड़ा किया ₹18 लाख का स्टार्टअप! बकरी के दूध से साबुन-घी भी बनाते हैं युवा किसान संदीप

Goat Milk Startup: अक्सर लोग पढ़-लिखकर नौकरी करना या अपनी पढ़ाई की स्किल से अपने लिए काम की तलाश करते हैं लेकिन जब जीवन में संकट का दौर आता है तो पढ़ाई लिखाई और स्किल भी धुंधली पड़ जाती हैं लेकिन संकट के बीच से निकलकर लोग अपने लिए नए रास्ता निकालते हैं।

कुछ ऐसी ही कहानी जयपुर के युवा किसान और एंटरप्रेन्योर संदीप मीणा की है जिन्होंने अपने घर के बाड़े से 5 बकरियों से दूध और दूध से बने प्रोडक्ट्स के स्टार्टअप GoatVeda की शुरुआत की और आज इनकी कंपनी का टर्नओवर 18 लाख रुपए है। जयपुर के नजदीक जोबनेर कस्बे के डूंगरीकलां गांव के रहने वाले संदीप कुमार मीणा ने खेती और बकरी पालन के साथ अपने स्टार्टअप की ऐसी जर्नी शुरू की जो अब अन्य युवाओं को प्रेरित कर रही है।

संदीप एक सामान्य परिवार से आते हैं उनके जीवन में सबकुछ ठीक चल रहा होता लेकिन कोरोनाकाल में पिता का निधन और प्राइवेट नौकरी पर गहराए संकट ने संदीप कुमार मीणा के जीवन को अलग दिशा में मोड़ दिया जो आज युवाओं के लिए मिसाल है। संदीप मीणा के पिता राम मीणा पत्थर का काम करते थे और सिलिकोसिस बीमारी से पीड़ित थे। कोरोना काल में 2021 में उनका निधन हो गया।

पिता की असामयिक मृत्यु के बाद घर की जिम्मेदारी संदीप के कंधे पर आ गई। परिवार की आर्थिक स्थिति और प्राइवेट नौकरी को छोड़कर संदीप ने अपनी मां कमला देवी के साथ 2022 में वर्क फ्रॉम होम के साथ अपने स्टार्टअप की शुरुआत की।

संदीप ने 5 बकरियों से शुरू किया था ‘गोटवेदा’ स्टार्टअप

वेटरनरी में दो साल का डिप्लोमा और कुछ महीनों की नौकरी के बाद संदीप कुमार मीणा एक समय एग्रीकल्चर में बीएससी करना चाहते थे। लेकिन 4 साल का लंबा समय और परिवार की स्थिति को देखते हुए उन्होंने अपने घर के बाड़े से ही ‘गोटवेदा’ स्टार्टअप की शुरुआत की, कोरोनाकाल में लगातार दूध की डिमांड को देखते हुए संदीप को इस स्टार्टअप का आइडिया आया। जिसके बाद उन्होंने कुछ समय तक इस स्टार्टअप के वर्क और मार्केट को समझा और फिर बिल्कुल छोटे रूप में शुरुआत की।

आज संदीप के पास जयपुर की रजिस्टर्ड ब्रीड गुर्जर और सिरोही नस्ल की कई बकरियां हैं। बकरी पालन में अक्सर किसान और पशुपालक बकरियों को दो तरीकों से पालते हैं, एक बकरियों को फार्म में बांधकर ब्रीडिंग और मांस के लिए जिसके पालन में खर्च ज्यादा आता है, जबकि ग्रेजिंग में कम खर्च आता है।

संदीप ने ग्रेजिंग के अनुसार बकरियों के पालन की शुरुआत की जिसमें बकरियों के भोजन/चारे के लिए संदीप ने 100 अरडू के पौधे लगाए, जिनकी पत्तियों को बकरियां बड़े चाव से खाती हैं। इससे बकरियों में दूध भी बढ़ता है। इस प्रकार संदीप ने बकरी पालन के साथ पेड़ों से भी अतिरिक्त इनकम बनाना शुरू किया।

संदीप के इस स्टार्टअप का मुख्य आकर्षण यह है कि बकरी का दूध खास तौर पर उन बच्चों के लिए लिया जाता है, जिन्हें गाय, भैंस के दूध से एलर्जी होती है। इसलिए बकरी का दूध पचने में हल्का होता है और यह शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होता है इसलिए डेंगू जैसी बीमारियों में डॉक्टर भी बकरी का दूध पीने की सलाह देते हैं। इसी के चलते संदीप ने दूध के साथ दूध से ही कई प्रोडक्ट्स बनाए जिनकी अब मार्केट में खूब डिमांड रहती है।

ऑनलाइन मार्केट से ग्राहकों को जोड़ खड़ा किया लाखों का स्टार्टअप

संदीप कुमार मीणा ने अपने स्टार्टअप की शुरुआत भले ही छोटे रूप में की हो लेकिन दूध और दूध से बने प्रोडक्ट्स को मार्केट तक पहुंचाने के लिए संदीप ने अपनी शुरुआत जयपुर में चित्रकूट स्टेडियम के पास लगने वाले ऑर्गेनिक मार्केट में दूध की स्टॉल लगाकर की और यहां संदीप ने 250 रुपए लीटर के हिसाब से अपना दूध बेचा।

ऐसे धीरे-धीरे संदीप को शुरुआती दौर में ग्राहक मिले और उन्हें बाजार का अनुभव मिला। वैसे दूध महंगा होने के चलते शुरुआत में उनके दूध की डिमांड कम रही लेकिन संदीप ने अपने स्टार्टअप पर लगातार फोकस किया और धीरे-धीरे किसानों को अपने साथ जोड़ा और ऑनलाइन मार्केट तक पहुंचे।

आज संदीप एक बकरी से रोजाना करीब एक से डेढ़ लीटर दूध प्राप्त करते हैं तो हर दिन उनके पास लगभग 70 से 80 किलो दूध का उत्पादन होता है। साथ ही संदीप के इस स्टार्टअप से अब कई किसान और जुड़ गए हैं। संदीप अब अपने स्टार्टअप में दूध उत्पादन और प्रोडक्ट्स बनाने के अलावा गांवों में पशुपालन करने वाले किसानों को पशु चिकित्सा सेवाएं और बकरियों-भेड़ों के लिए खरीद/बिक्री, किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम और सहायता, ऋण, बीमा और एआई सेवाओं तक गोटवेदा सिर्फ एक ब्रांड नहीं है बल्कि एक सफल स्टार्टअप बन चुका है।

5 बकरियों से खड़ा किया ₹18 लाख का स्टार्टअप!

बकरियों के दूध से संदीप तैयार करते हैं ये खास प्रोडक्ट्स

संदीप अपने प्रोसेसिंग यूनिट में दूध से कई बेहतरीन प्रोडक्ट्स तैयार करते हैं, जिनकी ई-कॉमर्स मार्केट में भारी डिमांड रहती है:

पाउडर: 500 लीटर दूध से बल्क में पाउडर बनवाया जाता है, जिसकी रोजाना 25 से 30 लीटर बिक्री होती है।

साबुन: हर महीने करीब 300 साबुन बनाए जाते हैं, जिसकी कीमत 30 रुपए है।

पनीर: 2 लीटर दूध से 300 ग्राम पनीर तैयार किया जाता है, जिसकी डिलीवरी ऑर्डर्स के हिसाब से की जाती है।

अन्य प्रोडक्ट्स: दूध और घी की भी ग्राहकों के बीच खूब मांग रहती है।

रिपोर्ट: अंकित राजपूत