HDFC Bank में CEO पद को लेकर हलचल बढ़ी, RBI गवर्नर से मिले चेयरमैन राजीव कुमार

HDFC Bank CEO Appointment: देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक HDFC Bank के एमडी और सीईओ शशिधर जगदीशन का मौजूदा कार्यकाल 26 अक्टूबर 2026 को खत्म हो रहा है। अब इसमें दो महीने से थोड़ा ज्यादा समय बचा है। इसी बीच बैंक के चेयरमैन राजीव कुमार ने पिछले हफ्ते RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा से मुलाकात की है।

सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में सबसे अहम बात जगदीशन के अगले कार्यकाल को लेकर हुई। RBI यह समझना चाहता है कि बैंक बोर्ड जगदीशन को दोबारा एमडी और सीईओ बनाने के पक्ष में है या नहीं।

बोर्ड में जगदीशन के नाम पर कितनी सहमति?

RBI यह भी जानना चाहता था कि राजीव कुमार के चेयरमैन बनने के बाद बोर्ड में किसी दूसरे नाम पर भी चर्चा हुई है या नहीं। एक वरिष्ठ सूत्र ने कहा कि अभी तक HDFC Bank बोर्ड ने एमडी और सीईओ की नियुक्ति को लेकर RBI को कोई सिफारिश नहीं भेजी है।

RBI अब जल्द फैसला चाहता है

राजीव कुमार 30 जून 2026 को HDFC Bank के बोर्ड में शामिल हुए थे। इसके बाद से RBI अधिकारियों के साथ उनकी यह चौथी औपचारिक बातचीत बताई जा रही है।

शुरुआत में RBI ने बोर्ड को कुछ समय दिया। इसकी वजह यह थी कि राजीव कुमार ने 15 जुलाई को औपचारिक रूप से चेयरमैन का पद संभाला था। अब उन्हें पद संभाले करीब एक महीना हो चुका है। ऐसे में RBI चाहता है कि बैंक के नेतृत्व को लेकर तस्वीर जल्द साफ हो।

आमतौर पर छह महीने पहले शुरू हो जाती है प्रक्रिया

बैंकों में आम तौर पर एमडी और सीईओ का कार्यकाल खत्म होने से करीब छह महीने पहले दोबारा नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। बोर्ड अपनी सिफारिश RBI को भेजता है।

अगर नया सीईओ चुनना हो, तो पसंदीदा उम्मीदवारों के नाम आम तौर पर कार्यकाल खत्म होने से कम से कम चार महीने पहले RBI को भेजे जाते हैं।

HDFC Bank का मामला इसलिए अलग दिख रहा है। जगदीशन का कार्यकाल खत्म होने में अब करीब दो महीने बचे हैं। लेकिन बोर्ड ने अभी तक RBI को कोई नाम नहीं भेजा है।

जगदीशन के सामने क्या संभावनाएं?

पहले की रिपोर्टों के मुताबिक, इस पद को लेकर चार संभावनाएं हैं। जगदीशन को फिर से तीन साल का कार्यकाल मिल सकता है। उन्हें इससे छोटा कार्यकाल भी दिया जा सकता है। बैंक बोर्ड किसी दूसरे आंतरिक उम्मीदवार का नाम भी भेज सकता है।

इसके अलावा किसी बाहरी उम्मीदवार के नाम पर भी विचार हो सकता है। यानी फिलहाल यह तय नहीं है कि अक्टूबर के बाद HDFC Bank की कमान किसके हाथ में होगी।

AT-1 बॉन्ड मामले पर भी बात

RBI गवर्नर और राजीव कुमार की बातचीत सिर्फ सीईओ की नियुक्ति तक सीमित नहीं रही। सूत्रों के मुताबिक, AT-1 बॉन्ड की मिस-सेलिंग से जुड़े मामले पर भी चर्चा हुई।

कुछ नाराज बॉन्डधारक इस मामले को लेकर बहरीन में कानूनी कार्रवाई कर रहे हैं। RBI इस मामले को लेकर भी बैंक की स्थिति समझना चाहता है।

कुछ महीनों में बदला बैंक का नेतृत्व

HDFC Bank में पिछले कुछ महीनों में नेतृत्व स्तर पर काफी बदलाव हुए हैं। पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने मार्च में अचानक बोर्ड छोड़ दिया था।

इसके बाद नॉन-एग्जीक्यूटिव बोर्ड सदस्य केकी मिस्त्री को अंतरिम चेयरमैन बनाया गया। करीब तीन महीने की तलाश के बाद राजीव कुमार को नया नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन चुना गया। उन्हें पहले अतिरिक्त निदेशक बनाया गया था। RBI की मंजूरी के बाद 15 जुलाई को उन्होंने चेयरमैन का पद संभाला।

HDFC Bank का शेयर बुधवार को 0.02% की मामूली गिरावट के साथ 727.35 रुपये पर बंद हुआ। हालांकि, पिछले 1 साल में यह 25.28% टूट चुका है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

चक दे गर्ल्स ने उठाई महिला हॉकी लीग को बचाने के लिए आवाज

हॉकी विश्वकप में अपना सबसे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के करीब खड़ी भारतीय महिला हॉकी टीम ने गुहार लगाई है कि महिला हॉकी लीग को बंद ना किया जाए और उसे चलते रहने दिया जाए। गौरतलब है कि ऐसी खबरें आ रही थी कि यह लीग व्यवसायिक कारणों के चलते बंद की जा सकती है।

गौरतलब है कि भारतीय महिला हॉकी टीम 1974 के बाद विश्वकप के दूसरे दौर में प्रवेश कर चुकी है। हालांकि खिताब जीतने की आशा धूमिल हो चुकी हैं लेकिन टीम ने बड़ी टीमों को बराबरी पर रोका है। पहले मैच में चीन के खिलाफ 2-2 की बराबरी और फिर ऑस्ट्रेलिया से 0-0 की बराबरी। टीम नीदरलैंड्स से भी सिर्फ 2 गोल से हारी।

वहीं टीम ने पहली बार दक्षिण अफ्रीका को ना केवल हराया बल्कि विश्वकप की सबसे बड़ी जीत अर्जित की। यह सब भारत ने तब किया जब दल में 11 युवा खिलाड़ी थे और अपना पहला विश्वकप खेल रहे थे।

मिडफील्डर नेहा ने कहा  “मुझे लगता है कि हमने भारत में लड़कियों को हॉकी स्टिक पकड़ने के लिए प्रेरित करने की पूरी कोशिश की है। लोग अपने बच्चों को अलग-अलग खेल खेलना पसंद करते हैं, लेकिन इससे उन्हें उम्मीद मिलनी चाहिए।”

“पिछले दो सालों में, महिलाओं के लिए HIL से हमें बहुत फायदा हुआ है। जूनियर और सीनियर नेशनल्स में इस लेवल का कॉम्पिटिशन नहीं होता है। महिलाओं के HIL ने हमें बलजीत, साक्षी और रुतुजा जैसे खिलाड़ी दिए हैं, जो इस वर्ल्ड कप टीम का हिस्सा हैं। आने वाले खिलाड़ियों के लिए भी, हमें इस लीग की ज़रूरत है। इसे बंद नहीं किया जाना चाहिए।”

नवनीत कौर ने कहा “हम पिछले दो साल से HIL खेल रहे हैं और उससे हमें कॉन्फिडेंस मिला है। हमने इंटरनेशनल हॉकी के कुछ सबसे बड़े नामों के साथ खेला है और उनके साथ ड्रेसिंग रूम शेयर करने के बाद, डर और झिझक खत्म हो गई। इससे हमें सेल्फ-बिलीफ मिला। हम अक्सर बात करते हैं कि वे हमारी तरह हैं और हम उन्हें हरा सकते हैं क्योंकि हम उनके साथ खेले हैं।” नवनीत ने टीमों और कॉर्पोरेट हाउस से भी लीग को सपोर्ट करने की अपील की, ऐसे समय में जब इसका भविष्य खतरे में है। हमने सुना है कि कुछ टीमें विमेंस HIL से हट रही हैं, लेकिन ऐसे समय में जब हमारा परफॉर्मेंस ग्राफ ऊपर जा रहा है, हम उनसे रिक्वेस्ट करना चाहते हैं कि वे हमें सपोर्ट करें। यह विमेंस हॉकी और आने वाले प्लेयर्स के लिए एक बड़ा झटका होगा।”

Ceigall India Share Price: गुजरात-महाराष्ट्र में ₹609 करोड़ का मिला REC पावर प्रोजेक्ट, शेयर 4% चढ़ा

Ceigall India Share Price: इंफ्रास्ट्रक्चर इंडस्ट्रीज कंपनी Ceigall India के शेयर 26 अगस्त को एनएसई पर 4% से ज्यादा की छलांग लगाते नजर आए। दरअसल, REC पावर डेवलपमेंट एंड कंसल्टेंसी (RECPDCL) की ओर से दिए गए एक बड़े इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी (L-1) बनी है ।

सिविल इंजीनियरिंग कंपनी ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के लिए 35 साल की अवधि तक सालाना ट्रांसमिशन चार्ज ₹6,086.70 मिलियन (यानी ₹608.67 करोड़) होगा।Ceigall India के शेयरों में लगातार चार दिनों से बढ़त देखी जा रही है और इस दौरान इनमें लगभग 9% की बढ़ोतरी हुई है।

टैरिफ-आधारित ग्लोबल कॉम्पिटिटिव बिडिंग और ई-रिवर्स ऑक्शन के ज़रिए मिले इस प्रोजेक्ट में लकाडिया फेज़-II (7.5 GW), जाम खंभालिया फेज़-II (5.5 GW) और जामनगर फेज़-I (1 GW) से बिजली पहुंचाने (इवैक्यूएशन) के लिए एक कॉमन ट्रांसमिशन सिस्टम बनाना शामिल है।

फाइलिंग के अनुसार, इसके दायरे में 765/400 kV का एयर-इंसुलेटेड सबस्टेशन (AIS) और गुजरात व महाराष्ट्र में लगभग 300 km लंबी ट्रांसमिशन लाइनें बनाना शामिल है।

प्रोजेक्ट को पूरा करने की अवधि 36 महीने है, जबकि ऑपरेशनल अवधि तय कमीशनिंग तारीख से 35 साल होगी। यह प्रोजेक्ट RECPDCL (एक घरेलू कंपनी) ने टैरिफ-आधारित कॉम्पिटिटिव बिडिंग फ्रेमवर्क के तहत ट्रांसमिशन सर्विस प्रोवाइडर चुनने की प्रक्रिया के हिस्से के तौर पर दिया था।

कंपनी ने कहा कि यह कॉन्ट्रैक्ट ‘रिलेटेड-पार्टी ट्रांज़ैक्शन’ (आपसी हितों से जुड़े लेन-देन) के दायरे में नहीं आता है और न तो प्रमोटर, न ही प्रमोटर ग्रुप और न ही ग्रुप की कंपनियों का प्रोजेक्ट देने वाली कंपनी में कोई हित है।

इस ट्रांसमिशन सिस्टम का मकसद पहचाने गए बिजली उत्पादन क्षेत्रों से बिजली पहुंचाने में मदद करना और इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करना है।

बुधवार को Ceigall India के शेयर इंट्राडे में 6.5% तक बढ़कर ₹345.35 पर पहुंच गए। दोपहर 2.14 बजे तक स्टॉक लगभग 5% की बढ़त के साथ ₹340.75 पर ट्रेड कर रहा था। पिछले महीने इसमें 0.74% की बढ़त हुई है और इस साल अब तक यह लगभग 25% ऊपर है।

सीगल इंडिया को फ्रंटियर हाईवे का ऑर्डर मिला

25 अगस्त, 2026 की कंपनी एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, सीगल इंडिया को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) से अरुणाचल प्रदेश में फ्रंटियर हाईवे के एक हिस्से के लिए ₹704.70 करोड़ का सड़क निर्माण ऑर्डर मिला है। इस कॉन्ट्रैक्ट की कीमत में GST शामिल नहीं है।

यह प्रोजेक्ट सुशी इंफ्रा एंड माइनिंग के साथ एक जॉइंट वेंचर के ज़रिए पूरा किया जाएगा, जिसमें सीगल इंडिया की 74% हिस्सेदारी होगी, जबकि सुशी इंफ्रा के पास बाकी 26% हिस्सेदारी होगी। इस कॉन्ट्रैक्ट में NH-913 के लाडा-सारली सेक्शन के 82.4 किलोमीटर लंबे हिस्से (km 85.60 से km 168.00 तक) का निर्माण इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) आधार पर किया जाएगा।

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जेपी मॉर्गन ने Nifty 50 के लिए 27000 का टारेगट दिया, भारतीय शेयर बाजार के बुरे दिन खत्म

शेयर बाजार में आने वाली तेजी को लेकर क्या आपके मन में संदेह है? अगर हां तो आपको जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट पर गौर करने की जरूरत है। जेपी मॉर्गन ने निफ्टी 50 के लिए 27,000 का टारगेट बताया है। उसका मानना है कि वैल्यूएशन में इम्प्रूवमेंट है। साध ही घरेलू इकोनॉमी से जु़ड़े बेहतर डेटा की वजह से भारतीय शेयर बाजार फिर से अट्रैक्टिव हो गया है।

भारतीय बाजार के लिए ग्लोबल रिस्क बरकरार

जेपी मॉर्गन में इंडिया इक्विटी रिसर्च के हेड संजय मोकिम ने ग्लोबल स्थितियों खासकर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को भारतीय शेयर बाजार के लिए बड़ा रिस्क बताया है। उनका मानना है कि इससे भारतीय शेयर बाजार में तेजी पर असर पड़ सकता है। इसका असर भारत में विदेशी निवेशकों के निवेश पर भी पड़ सकता है।

घरेलू स्थितियां बाजार में तेजी के लिए अनुकूल

मोकिम ने कहा कि इंडिया की इकोनॉमी की स्थितियां शेयर बाजार के लिए अनुकूल हैं। अप्रैल-जून तिमाही के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे हैं। वैल्यूएशंस खासकर लार्जकैप शेयरों की वैल्यूएशन कम हुई है। उन्होंने कहा, “भारतीय शेयरों में वैल्यू ट्रेड पिछले तीन सालों के मुकाबले अब बेहतर हैं।” उन्होंने कहा कि विदेशी निवेशकों के रुख में बदलाव से भी स्थिति अनुकूल हुई है।

निवेशक फिर से भारतीय बाजार को लेकर उत्साहित

उन्होंने कहा कि नॉर्थ एशियन टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में उतार-चढ़ाव और भारत में लार्जकैप शेयरों की सही वैल्यूएशंस से इनवेस्टर्स एक बार फिर भारत में निवेश को लेकर उत्साहित हैं। हालांकि, उनका मानना है कि भारतीय बाजारों में विदेशी निवेश तुरंत बढ़ने नहीं जा रहा है। उनका मानना है कि वैश्विक स्थितियों को लेकर ज्यादा चिंता है।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल से डॉलर का विकल्प मिला

मोकिम ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के बारे में कहा कि इसके बढ़ने से निवेशकों के पास अपेक्षाकृत सुरक्षित डॉलर एसेट्स का एक विकल्प मिल गया है। उन्होंने कहा, “जब 10 साल के बॉन्ड्स की यील्ड इस लेवल पर हैं तो आपको इमर्जिंग मार्केट्स एसेट्स में निवेश करने की क्या जरूरत है।” उन्होंने भारत में आईपीओ, क्वालिफायड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट्स (QIP) और ब्लॉक डील्स का भी जिक्र किया।

आआईपीओ, क्यूआईपी और ब्लॉक डील में काफी पैसा जा रहा

उन्होंने कहा कि आईपीओ, क्यूआईपी और ब्लॉक डील में काफी पैसा जा रहा है। अभी बाजार में नए शेयरों की सप्लाई म्यूचुअल फंड्स में हर महीने होने वाले निवेश के मुकाबले ज्यादा है। उन्होंने कहा कि इसका असर छोटी अवधि में लिक्विडिटी पर पड़ेगा। लेकिन, मीडियम टर्म में यह अच्छा है, क्योंकि इससे बाजार का दायरा बढ़ेगा और निवेश के नए मौके बनेंगे।

अंडे अच्छी तरह पकाने को कहा था, टेबल पर मिला ऐसा नोट कि परिवार ने खाना ही छोड़ दिया!

इटली के एक रेस्टोरेंट में नाश्ता करने पहुंचे परिवार के साथ कुछ ऐसा हुआ, जिसकी उन्होंने शायद कल्पना भी नहीं की होगी। एक महिला ने बस इतना कहा था कि उसके स्क्रैम्बल्ड एग्स अच्छी तरह पकाए जाएं। लेकिन खाने के ऑर्डर से जुड़ा एक कथित निजी नोट गलती से ग्राहकों की नजर में आ गया। नोट में लिखी आपत्तिजनक बात पढ़कर परिवार ने अंडे खाने से ही इनकार कर दिया। मामला बढ़ा तो रेस्टोरेंट मैनेजमेंट को सामने आकर माफी मांगनी पड़ी और संबंधित कर्मचारी पर भी कार्रवाई की गई। इसके बाद घटना सोशल मीडिया तक पहुंच गई, जहां लोगों ने इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं।

दिलचस्प बात यह है कि रेस्टोरेंट ने बाद में इसी विवाद पर एक मजाकिया वीडियो भी पोस्ट कर दिया, जिससे मामला और चर्चा में आ गया। अब सवाल यह है कि आखिर उस नोट में ऐसा क्या लिखा था और रेस्टोरेंट ने इस पूरे विवाद पर क्या सफाई दी?

रसोई के लिए लिखा संदेश पहुंच गया ग्राहक की टेबल तक

यह मामला 19 अगस्त को इटली के लोकप्रिय रिसॉर्ट शहर रिक्चोने के Victor Lab रेस्टोरेंट का बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऑर्डर में अंडों को अच्छी तरह पकाने और सलाद न देने की बात लिखी गई थी।लेकिन ऑर्डर के नीचे कथित तौर पर वेटर ने रसोई के लिए एक बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी लिख दी थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, नोट में लिखा था कि “इस महिला ने मुझे परेशान कर दिया है… अंडे जला दो और उनमें थूक दो।” Toxic (3)

नोट पढ़ते ही परिवार ने खाने से किया इनकार

परिवार ने जब कथित संदेश देखा तो उन्होंने अंडे खाने से मना कर दिया। उन्होंने रेस्टोरेंट स्टाफ से इस बारे में सवाल किया। इसके बाद रेस्टोरेंट के डायरेक्टर ने मामले में दखल दिया और परिवार से माफी मांगी। बताया गया कि संबंधित आइटम बिल से हटा दिए गए और अतिरिक्त खाना देने की पेशकश भी की गई, लेकिन परिवार वहां से चला गया।

मामला सोशल मीडिया तक पहुंचा

परिवार ने कथित ऑर्डर की तस्वीर के साथ रेस्टोरेंट को लेकर नकारात्मक समीक्षा भी पोस्ट की। इसके बाद यह अजीबोगरीब घटना सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई। लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही रहा कि आखिर ग्राहक के लिए रसोई में लिखा गया निजी संदेश टेबल तक पहुंचा कैसे।

रेस्टोरेंट ने कर्मचारी को हटाया

रेस्टोरेंट मैनेजमेंट ने संदेश को अनुचित बताते हुए माफी मांगी। स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, संबंधित कर्मचारी एक युवा कर्मचारी था, जो वहां कुछ ही हफ्तों से काम कर रहा था। रेस्टोरेंट के मालिक ने बताया कि उसे तुरंत सर्विस से हटा दिया गया।

मैनेजमेंट ने यह भी स्पष्ट किया कि खाने में वास्तव में किसी तरह की गंदगी मिलाने का कोई सबूत नहीं था। रेस्टोरेंट ने अपने ओपन किचन का हवाला देते हुए भी कहा कि ऐसी हरकत वहां आसानी से छिप नहीं सकती थी।

माफी मांगने के लिए बनाई वीडियो, फिर बढ़ा विवाद

मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। रेस्टोरेंट ने बाद में सोशल मीडिया पर एक मजाकिया वीडियो शेयर किया, जिसमें अच्छी तरह पके अंडों की मांग को लेकर उसी घटना का मजाकिया अंदाज में जिक्र किया गया। वीडियो में मालिक ग्राहक से मजाक में पूछता नजर आया कि अंडे “उस चीज के साथ या बिना” चाहिए।रेस्टोरेंट ने लोगों से यह सवाल भी पूछा कि युवा कर्मचारी को नौकरी से निकालना चाहिए या उसे दूसरा मौका मिलना चाहिए।

ग्राहक ने कहा- मजाक उड़ाया जा रहा है

इस वीडियो से संबंधित महिला नाराज हो गई। एक स्थानीय रिपोर्ट में उसने कहा कि वह घटना से वास्तव में परेशान हुई थी और रेस्टोरेंट की सोशल मीडिया पोस्ट उसे मामले को हल्का बनाती हुई लगी। उसने यह भी बताया कि विवाद वायरल होने के बाद उसे ऑनलाइन आपत्तिजनक और नस्लभेदी टिप्पणियों का सामना करना पड़ा। वहीं, रेस्टोरेंट का कहना था कि वीडियो का मकसद ग्राहक का मजाक उड़ाना नहीं, बल्कि माफी मांगते हुए माहौल को शांत करना था।

एक प्लेट अंडे से शुरू हुआ बड़ा विवाद

जो मामला एक साधारण नाश्ते और अच्छी तरह पके अंडों की मांग से शुरू हुआ था, वह देखते ही देखते वेटर के नोट, ग्राहक की नाराजगी, कर्मचारी पर कार्रवाई और सोशल मीडिया विवाद में बदल गया। अब इंटरनेट पर यह बहस भी चल रही है कि युवा कर्मचारी को सख्त सजा मिलनी चाहिए या गलती मानकर उसे दूसरा मौका दिया जाना चाहिए।

Tempsens में लिस्टिंग पर हो जाएगा पैसा डबल! ग्रे मार्केट से मिल रहे ये संकेत

Tempsens Listing: आईपीओ को 184 गुना से अधिक बोली मिलने के बाद अब टेंपसेंस इंस्ट्रूमेंट्स के शेयरों की लिस्टिंग का इंतजार है। ग्रे मार्केट से बात करें तो इसके शेयरों की लिस्टिंग को लेकर ऐसे शानदार संकेत मिल रहे हैं कि आईपीओ निवेशकों का पैला लिस्टिंग पर ही डबल हो जाएगा। ग्रे मार्केट में इसकी GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) इश्यू प्राइस से ₹300 यानी 100% है यानी कि आईपीओ निवेशकों को पैसा डबल हो सकता है। हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय कंपनी की कारोबारी सेहत और लिस्टिंग के दिन मार्केट की परिस्थिति पर निर्भर रहेगा। इसके शेयर आईपीओ निवेशकों को ₹300 के भाव पर जारी हुए हैं। इसका अलॉटमेंट फाइनल हो चुका है जिसका स्टेटस बीएसई या रजिस्ट्रार केफिनटेक की साइट पर देख सकते हैं, जिसका स्टेपवाइज प्रोसेस नीचे दिया जा रहा है।

BSE की साइट पर ऐसे करें चेक

https://www.bseindia.com/investors/appli_check.aspx, इस लिंक पर जाएं।

इश्यू टाइप ‘Equity’ चुनें। इश्यू नाम Tempsens चुनें।

एप्लीकेशन नंबर या पैन भरें।

फिर I’m not a robot पर क्लिक करें।

सर्च पर क्लिक करें।

शेयरों का अलॉटमेंट स्टेटस स्कीन पर दिखने लगा कि कितने शेयर अलॉट हुए।

रजिस्ट्रार की साइट पर ऐसे करें स्टेटस चेक

https://ipostatus.kfintech.com/, लिंक पर क्लिक करें।

सेलेक्ट आईपीओ पर क्लिक करके Tempsens चुनें।

एप्लीकेशन नंबर, डीमैट अकाउंट या पैन में से कोई भी चुनें। फिर जो विकल्प चुना है, उसके मुताबिक डिटेल्स दें। जैसे कि पैन चुना है तो पैन भरें।

सबमिट करें।

शेयरों का अलॉटमेंट स्टेटस स्कीन पर दिखने लगा कि कितने शेयर अलॉट हुए।

Tempsens IPO को मिला था तगड़ा रिस्पांस

टेंपसेंस का ₹650 करोड़ का आईपीओ 20-24 अगस्त तक खुला था। इसे हर कैटेगरी के निवेशकों का जबरदस्त रिस्पांस मिला और ओवरऑल यह 184.22 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 302.88 गुना, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 314.44 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 61.00 गुना और एंप्लॉयीज का हिस्सा 124.95 गुना भरा था।

इस आईपीओ के तहत ₹95 करोड़ के नए शेयर जारी हुए हैं। इसके अलावा ₹4 की फेस वैल्यू वाले 1.85 करोड़ शेयरों की ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिक्री हुई है। ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर्स को मिला है। वहीं नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹18.13 करोड़ कर्ज हल्का करने कैपिटल एक्सपेंडिचर, ₹55.00 करोड़ कर्ज हल्का करने, ₹14.18 करोड़ आम कॉरपोरेट उद्देश्यों और ₹50.65 करोड़ आईपीओ से जुड़े एक्सपेंसेज पर खर्च होंगे।

Tempsens के बारे में

टेंपसेंस इंस्ट्रूमेंट्स फैक्ट्रियों और बड़ी इंडस्ट्रीज के लिए तापमान से जुड़े प्रोडक्ट्स बनाती है। यह तापमान नापने वाले सेंसर, मशीनों/प्रोसेस को गर्म करने वाले हीटर और खास तरह के इंडस्ट्रियल केबल बनाती है। मार्च 2026 में टेंपरेचर सेंसर सेगमेंट में इसकी करीब 10.5% हिस्सेदारी है। रेवेन्यू के हिसाब से यह देश में कॉन्टैक्ट और नॉन-कॉन्टैक्ट टेंपरेचर सेंसर बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी है तो इलेक्ट्रिकल हीटर्स के मामले में सबसे बड़ी कंपनियों में शुमार है। यह MRO (मेटेंनेंस, रिपेयर एंड ऑपरेशंस) का भी काम देखती है। इसका कारोबार भारत के अलावा 80 से अधिक देशों में फैला हुआ है।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना करीब 32% की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹71.07 करोड़ और टोटल इनकम करीब 28% के सीएजीआर से ₹455.86 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹77.95 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹465.16 करोड़ पड़े थे।

Shankesh Jewellers में 7% का उछाल, लिस्टिंग पर एक क्लाइंट ने खरीदी 1.57% होल्डिंग तो नोमुरा सिंगापुर ने बेचे पूरे शेयर

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

इस शेयर ने सिर्फ साढ़े पांच साल में पैसा 22 गुना किया, जानिए किस शेयर ने किया यह कमाल

अगर किसी कंपनी के शेयर की कीमत 5-6 साल में 22 गुनी हो जाए तो इनवेस्टर को कैसा लगेगा? हम सीजी पावर के शेयरों की बात कर रहे हैं। अगर आपने इस शेयर में जनवरी 2021 में एक लाख रुपये का निवेश किया होता तो आज आपका पैसा बढ़कर 22 लाख रुपये हो गया होता। सिर्फ सीजी पावर ही नहीं, चोलामंडलम इनवेस्टमेंट ग्रुप की दूसरी कंपनियों के शेयरों ने भी इस दौरान निवेशकों का पैसा कई गुना कर दिया है।

नए चेयरमैन के कमान संभालने के बाद शेयरों ने किया कमाल

वेलियन सुब्बैया (Vellayan Subbiah) ने इस ग्रुप की कमान 20 नवंबर 2020 को संभाली थी। वह चोलामंडल इनवेस्टमेंट के एग्जिक्यूटिव चेयरमैन बने थे। उसके बाद से ग्रुप की कंपनियों के शेयरों ने कमाल किया है। वह चोलामंडलम इनवेस्टमेंट के एग्जिक्यूटिव चेयरमैन हैं, सीजी पावर के चेयरमैन हैं और Tube Investments के वाइस-चेयरमैन हैं। उनके समूह का नेतृत्व संभालने के बाद से इन कंपनियों के शेयरों को पंख लग गए हैं।

सीजी पावर के शेयर की कीमत साढ़े पांच साल में 22 गुनी 

CG Power के शेयर की औसत कीमत जनवरी 2021 में 39.32 रुपये थी। 26 अगस्त को इस शेयर की कीमत 1 बजे 872 रुपये चल रही थी। इसका मतलब है कि साढ़े पांच साल में इस शेयर का भाव 22 गुना हो गया है। अगर आपने इस शेयर में जनवरी 2021 में 5 लाख रुपये निवेश किया होता तो आज आपके पास एक करोड़ रुपये से ज्यादा होते।

इस शेयर ने जनवरी 2021 में निवेश करने वालों को किया मालामाल

Cholamandalam Investment के शेयर का एवरेज प्राइस जनवरी 201 में 394.77 रुपये था। आज इस शेयर का प्राइस 1878.70 रुपये है। इसका मतलब है कि इस दौरान इस शेयर का प्राइस 4.76 गुना हो गया है। इस शेयर ने भी सिर्फ साढ़ें पांच साल में निवेशकों का पैसा करीब पांच गुना कर दिया है। यह रिटर्न तब है जब बीते 1.5-2 साल से शेयर बाजार का प्रदर्शन काफी कमजोर है।

ट्यूब इनवेस्टमेंट्स ने भी साढ़े पांच साल में निवेशकों का पैसा 3.7 गुना किया

Tube Investments के शेयर की औसत कीमत जनवरी 2021 में 771 रुपये थी। आज इस शेयर की कीमत 2,876 रुपये है। इसका मतलब है कि इस शेयर ने इस दौरान निवेशकों का पैसा 3.7 गुना कर दिया है। जनवरी 2021 में इन तीनों कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन 54,800 करोड़ रुपये था। आज यह बढ़कर 3.5 लाख करोड़ रुपये हो गया है। ऐसा जोरदार रिटर्न देने वाले शेयरों की संख्या बहुत कम है।

26 अगस्त को शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर दिखा दबाव 

26 अगस्त को शेयर बाजारों पर दबाव देखने को मिला। निफ्टी 1 बजे 0.27 फीसदी यानी 65 अंक गिरकर 24,270 रुपये पर चल रहा था। सेंसेक्स 0.04 फीसदी यानी 29 अंक गिरकर 77,632 पर चल रहा था। बैंक निफ्टी में तेजी देखने को मिली। यह सूचकांक 0.71 फीसदी मजबूत था।

पहले डॉल्फिन को साइकिल से बांधा, फिर बनाने लगा रील! वायरल वीडियो ने सोशल मीडिया पर मचा दिया बवाल

सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। वीडियो में एक शख्स कथित तौर पर गंगा नदी की डॉल्फिन को साइकिल से बांधकर उसके साथ रील बनाता नजर आ रहा है। फुटेज सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। कई यूजर्स ने इस घटना को बेहद शर्मनाक बताते हुए वन्यजीवों के साथ इस तरह के व्यवहार पर सवाल उठाए हैं। दावा किया जा रहा है कि मामला बिहार का है और वीडियो में दिख रहा व्यक्ति डॉल्फिन के साथ रील बना रहा था। घटना से जुड़े एक अन्य वीडियो को लेकर डॉल्फिन के मृत होने की बात भी कही जा रही है।

हालांकि, वायरल वीडियो और उससे जुड़े सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। लोगों ने संबंधित अधिकारियों से मामले की जांच करने और आरोप सही पाए जाने पर जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

पहले जिंदा नजर आई डॉल्फिन

वायरल पोस्ट में दो वीडियो का जिक्र है। पहले फुटेज में डॉल्फिन जिंदा दिखाई देती है और कथित तौर पर उसे साइकिल से बांधा गया है। इसके बाद सामने आए दूसरे वीडियो में वही जानवर मृत नजर आने का दावा किया गया है। इस दौरान शख्स के उसके साथ रील बनाने की बात कही जा रही है।

तेल निकालने के लिए पकड़ने का भी दावा

सोशल मीडिया पोस्ट्स में दावा किया गया है कि यह घटना बिहार की है और इसमें नेटालाल कुमार नाम के एक व्यक्ति का कथित तौर पर शामिल होना बताया जा रहा है। पोस्ट में यह भी दावा किया गया कि डॉल्फिन को कथित रूप से उसका तेल निकालने के लिए पकड़ा गया था और बाद में घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाला गया।

‘रील के लिए लुप्तप्राय जीव को क्यों बनाया कंटेंट?’

वीडियो सामने आने के बाद यूजर्स ने सवाल उठाया कि सोशल मीडिया पर कुछ सेकेंड की लोकप्रियता के लिए किसी दुर्लभ वन्यजीव के साथ इस तरह का व्यवहार कैसे किया जा सकता है। कई लोगों ने बिहार पुलिस और वन विभाग से मामले की जांच कर दोष साबित होने पर सख्त कार्रवाई की मांग की।

गंगा डॉल्फिन को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?

गंगा नदी की डॉल्फिन एक लुप्तप्राय प्रजाति है और इसके संरक्षण को लेकर लंबे समय से प्रयास किए जा रहे हैं। वायरल पोस्ट में दावा किया गया है कि दुनिया में इनकी संख्या करीब 5,000 ही रह गई है। ऐसे में एक डॉल्फिन की कथित मौत ने संरक्षण को लेकर चिंता और बढ़ा दी है।

यूजर्स ने पुलिस और वन विभाग को किया टैग

मामले को लेकर कई सोशल मीडिया यूजर्स ने बिहार पुलिस, पर्यावरण मंत्रालय और वन्यजीव संरक्षण संगठनों को टैग किया। एक यूजर ने मांग की कि अगर किसी व्यक्ति ने जानबूझकर संरक्षित जीव को नुकसान पहुंचाया है, तो उसके खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

कानूनी कार्रवाई की उठी मांग

कुछ यूजर्स ने दावा किया कि भारत में गंगा डॉल्फिन को कानूनी संरक्षण प्राप्त है और इसे नुकसान पहुंचाने पर जेल व जुर्माने का प्रावधान है। हालांकि, वायरल वीडियो से जुड़े दावों की आधिकारिक पुष्टि स्वतंत्र रूप से नहीं हुई है। इसलिए घटना की वास्तविक परिस्थितियों और जिम्मेदार व्यक्ति की भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

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Shankesh Jewellers में 7% का उछाल, लिस्टिंग पर एक क्लाइंट ने खरीदी 1.57% होल्डिंग तो नोमुरा सिंगापुर ने बेचे पूरे शेयर

Shankesh Jewellers Share Price: आईपीओ को ढाई गुना से अधिक बोली मिलने के बाद शंकेश ज्वैलरी के शेयरों का लिस्टिंग के दिन बड़ा लेन-देन हुआ। करीब 11% के लिस्टिंग गेन के बाद इसके शेयरों की अधिकतर तेजी गायब होने लगी जिसका कई निवेशकों ने फायदा उठाया। एक तरफ नोमुरा सिंगापुर ने अपनी पूरी हिस्सेदारी बेच दी तो दूसरी तरफ पीएनजीएस रेवा डायमंड ज्वैलरी के प्रमोटर्स ने इसमें डेढ़ फीसदी से अधिक हिस्सेदारी हासिल की। इसके शेयरों के मौजूदा स्थिति की बात करें तो फिलहाल बीएसई पर यह 1.02% की बढ़त के साथ ₹96.00 पर है। इंट्रा-डे में यह 7.33% उछलकर ₹102.00 तक पहुंच गया था। इसके ₹93 के भाव पर जारी शेयर एक कारोबारी दिन पहले करीब 11% पर लिस्ट होने के बाद इंट्रा-डे में ₹110.99 तक पहुंच गए थे।

लिस्टिंग के दिन किसने खरीदे-बेचे Shankesh Jewellers के शेयर

एनएसई पर मौजूद बल्क डील्स की डिटेल्स के मुताबिक 25 अगस्त को यानी लिस्टिंग के दिन 5.64 करोड़ शेयरों का खरीदारी और बिक्री हुई। इसमें से 1.57% हिस्सेदारी के बराबर 23.2 लाख शेयर पीएनजीए रेवा डायमंड ज्लैवरी के प्रमोटर्स- गाडगिल रेणु गोविंद और पीएम गाडगिल एंड सन्स ने ₹23.44 करोड़ में ₹101.05 के भाव पर खरीदे। पीएन गाडगिल एंड सन्स शंकेश ज्वैलर्स की क्लाइंट है। वहीं नोमुरा सिंगापुर ने अपने पूरे 16.17 लाख शेयर ₹15.63 करोड़ में प्रति शेयर ₹96.66 के भाव पर बेच दिए।

कैसी है कारोबारी सेहत

पीएन गाडगिल (PN Gadgil) और कल्याण ज्वैलर्स (Kalyan Jewellers) जैसी दिग्गज ज्वैलरी कंपनियों के लिए गहने बनाने वाली शंकेश ज्वैलरी की सेहत लगातार मजबूत हो रही है। अपने क्लाइंट्स से गोल्ड और डिजाइन लेकर उससे गहने बनाने वाली शंकेश का वित्त वर्ष 2024-26 में शुद्ध मुनाफा सालाना 188% से अधिक की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹106.68 करोड़ और टोटल इनकम करीब 24% के सीएजीआर से ₹1,630.93 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹167.30 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹150.65 करोड़ पड़े थे। अब इसके शेयर लिस्ट हुए हैं और इसके ₹367 करोड़ के आईपीओ को ओवरऑल 2.80 गुना से अधिक बोली मिली थी।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।