iQOO 16 जल्द ही नए Samsung डिस्प्ले के साथ होगा लॉन्च, जिसमें मिलेगी iPhone Ultra जैसी टेक्नोलॉजी

iQOO 16 को इस महीने के आखिर में कंपनी के नए फ्लैगशिप फोन के तौर पर लॉन्च किया जा सकता है। यह फोन iQOO 15 का अपग्रेड वर्जन होगा। हाल ही में iQOO 16 को एक बेंचमार्किंग प्लेटफॉर्म पर देखा गया था, जहां इसके कई अहम स्पेसिफिकेशंस और फीचर्स सामने आए। इसके अलावा, यह हैंडसेट पहले लीक हुई तस्वीरों में भी देखा गया है, जिससे संकेत मिलता है कि इसमें नए डिजाइन वाला रियर कैमरा मॉड्यूल हो सकता है। अब, iQOO 16 के बारे में एक नई लीक से पता चलता है कि टेक कंपनी इस हैंडसेट में इंडस्ट्री का पहला OLED पैनल लगाने की योजना बना रही है। खबर है कि कंपनी Samsung के साथ मिलकर iQOO 16 में वही डिस्प्ले टेक्नोलॉजी लाने पर काम कर रही है जो Apple के आने वाले बुक-स्टाइल फोल्डेबल फोन में होगी।

iQOO 16 के स्पेसिफिकेशन्स और फीचर्स (अनुमानित)

वीबो (Weibo) पर एक पोस्ट में, टिपस्टर ‘डिजिटल चैट स्टेशन’ (चीनी भाषा से अनुवादित) ने आने वाले iQOO 16 के बारे में अहम जानकारी शेयर की है। कहा जा रहा है कि यह पहला ऐसा Android स्मार्टफोन होगा जिसमें M16 ल्यूमिनसेंट मटीरियल वाला लेटेस्ट सैमसंग OLED डिस्प्ले और नेक्स्ट-जेनरेशन LEAD [लो पावर, इको-फ्रेंडली, ऑगमेंटेड ब्राइटनेस और स्लिम व लाइट डिज़ाइन] डिस्प्ले टेक्नोलॉजी होगी।

इसके अलावा, लीक करने वाले का दावा है कि iQOO 16 पहला ऐसा Android फोन होगा जिसमें Samsung की LEAD डिस्प्ले टेक्नोलॉजी होगी। उम्मीद है कि यह टेक्नोलॉजी Apple के पहले बुक-स्टाइल फोल्डेबल स्मार्टफोन, iPhone Ultra में भी देखने को मिलेगी। खबर है कि Vivo का सब-ब्रांड, फ्लैगशिप iQOO 16 में डिस्प्ले से जुड़े और भी फीचर्स लाने के लिए Samsung के साथ मिलकर काम कर रहा है। हालांकि, इनमें से किसी भी टेक कंपनी ने इन जानकारियों की पुष्टि नहीं की है।

हाल ही में, iQOO 16 के कथित रेंडर ऑनलाइन सामने आए हैं, जिनसे फोन के डिजाइन का पता चलता है। तस्वीर में आने वाले स्मार्टफोन का री-डिजाइन किया गया रियर कैमरा मॉड्यूल दिख रहा है, जिसमें ट्रिपल कैमरा सिस्टम है। फोन के फ्लैट रियर पैनल को भी मेटल जैसा नया पैटर्न देकर री-डिजाइन किया जा सकता है। पैनल के निचले हिस्से में बीच में iQOO की ब्रांडिंग दिख रही है। वहीं, iQOO 16 के दाईं ओर पावर बटन और वॉल्यूम कंट्रोल हो सकते हैं।

इसके अलावा, iQOO 16 को हाल ही में Geekbench बेंचमार्किंग प्लेटफॉर्म पर मॉडल नंबर V2606A के साथ देखा गया था। खबरों के मुताबिक, इस हैंडसेट को Qualcomm के अभी तक रिलीज नहीं हुए ऑक्टा-कोर Snapdragon 8 Elite Gen 6 Pro चिपसेट के साथ लिस्ट किया गया था, जो 5.01GHz की पीक क्लॉक स्पीड देता है। Geekbench पर iQOO 16 को Android 17 पर चलते हुए भी देखा गया है। फोन से जुड़ी और भी कई जानकारियां आने वाले हफ्तों में सामने आने की उम्मीद है।

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लेवरेज्ड ETF के लिए कोर्स करना जरूरी, दक्षिण कोरिया ने इस कारण बनाया नियम

दक्षिण कोरिया का $4.3 ट्रिलियन का स्टॉक मार्केट बहुत ही अधिक वोलेटाइल हो चुका है। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स (Samsung Electronics) और एसके हीनिक्स (SK Hynix) से जुड़े सिंगल-स्टॉक लेवरेज्ड ईटीएफ में निवेश तेजी से घटा है। अगस्त में इनसे करीब $100 करोड़ की निकासी हो चुकी है। ऐसे कठिन समय में मॉक ट्रेडिंग कोर्स निवेशकों के डर को दूर करने का प्रभावी तरीका बनता जा रहा है। बता दें कि दक्षिण कोरिया ने लेवरेज्ड ईटीएफ में रिस्क वाली ट्रेडिंग को कम करने के लिए नियम काफी सख्त कर दिए हैं। सबसे अहम बात ये है कि लेवरेज्ड ईटीएफ खरीदने के लिए यह कोर्स अनिवार्य है। न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक यह अनिवार्य नियम 19 अगस्त से लागू है।

क्या है मॉक ट्रेडिंग कोर्स में

अब निवेशकों को लेवरेज्ड ईटीएफ खरीदने से पहले पांच दिन का मॉक ट्रेडिंग कोर्स करना जरूरी होगा और हर दिन कम से कम 1 घंटे वर्चुअल मनी से ट्रेडिंग करनी होगी। इस कोर्स में विंडोज पीसी पर एक प्रोग्राम डाउनलोड करना जरूरी है, जिससे कई रिटेल इंवेस्टर्स इसे काफी झंझट वाला मान रहे हैं। यह ऐप सिर्फ पीसी पर ही डाउनलोड होगा और कोरियन एक्सचेंज का कहना है कि फिलहाल मोबाइल-बेस्ड प्लेटफॉर्म शुरू करने की कोई योजना नहीं है। सरकार का उद्देश्य खुदरा निवेशकों को हाई-रिस्क लेवरेज्ड प्रोडक्ट्स से दूर रखना है, और फिलहाल इन नियमों का असर साफ दिखाई दे रहा है।

क्या है Leveraged ETF की स्थिति

दक्षिण कोरियाई बाजार में लेवरेज्ड ईटीएफ का कुल AUM (एसेट अंडर मैनेजमेंट) जून के पीक $1140 करोड़ से घटकर 27 अगस्त तक करीब $500 करोड़ तक आ गया। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और हीनिक्स जैसे टेक स्टॉक्स में गिरावट ने मार्केट में कोहराम मचा दिया। अब सवाल उठता है कि इनमें इतनी तेज गिरावट क्यों आई तो इसका जवाब ये है कि सरकार के सख्त नियमों के साथ-साथ एआई सेक्टर में अधिक खर्च और उससे कमाई की संभावनाओं को लेकर चिंता ने भी टेक स्टॉक्स पर भी दबाव बनाया।

लेवरेज्ड ईटीएफ की स्थिति तो अब ऐसी है कि उनकी ट्रेडिंग वैल्यू जून के रिकॉर्ड हाई लेवल से सिर्फ 4% रह गई है तो इनमें पहली बार किसी महीने में निवेश से अधिक निकासी के आसार दिखने लगे हैं। इन ईटीएफ में ट्रेडिंग कम होने से वोलैटिलिटी कम हुई है। कोस्पी वोलैटिलिटी गॉज जून के 97 से गिरकर चार महीने के निचले स्तर लगभग 50 पर आ गया। दक्षिण कोरिया का इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स इस साल अभी भी 61% ऊपर है, लेकिन अपने दो महीने पुराने रिकॉर्ड हाई से 25% नीचे है।

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Nvidia के धमाकेदार रिजल्ट, बदला निवेशकों का सवाल, भारतीय आईटी कंपनियों के लिए ये है मतलब

Nvidia Q2 Result and IT Stocks: दुनिया की सबसे बड़ी चिप कंपनियों में शुमार एनविडिया के धमाकेदार तिमाही नतीजों ने ग्लोबल एआई ट्रेड को एक और मजबूती दी है। यह ऐसे समय में आया है जब निवेशक सवाल उठाने लगे थे कि एआई शेयरों की तेज रफ्तार आगे भी जारी रह पाएगी या नहीं। चिप कंपनी एनवीडिया ने रेवेन्यू, कमाई और गाइडेंस को लेकर बाजार के अनुमान को पछाड़ दिया। वहीं कंपनी का डेटा-सेंटर बिजनेस भी शानदार स्पीड से बढ़ता रहा। इससे एशियाई बाजारों में सेंटीमेंट मजबूत हुआ और शुरुआती कारोबार में MSCI का एशिया पैसेफिक इंडेक्स और दक्षिण कोरिया का टेक-हैवी इंडेक्स कोस्पी उछल पड़ा। हालांकि निवेशकों के लिए बड़ा सवाल ये है कि एआई पर खर्च और कमाई में बढ़ोतरी की रफ्तार इतनी मजबूत है या नहीं कि पूरे एआई इकोसिस्टम में मौजूदा ऊंचे वैल्यूएशन को सही ठहरा सके।

Nvidia ने दूर की AI की मांग से जुड़ी चिंता

एनविडिया के लिए इस वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही यानी 26 जुलाई को समाप्त होने वाली तिमाही में इसका रेवेन्यू सालाना आधार पर दोगुने से अधिक बढ़कर $9622 करोड़ पर पहुंच गया जोकि एनालिस्ट्स के $9217 करोड़ के अनुमान से अधिक रहा। कंपनी का EPS भी $2.10 के अनुमान की तुलना में $2.22 पर रहा। सबसे मजबूत परफॉरमेंस तो कंपनी के डेटा-सेंटर बिजनेस का रहा, जिसका रेवेन्यू सालाना आधार पर 117% बढ़कर $8900 करोड़ हो गया, जबकि अनुमान $8633 करोड़ का था।

अब आगे की बात करें तो करीब 2% के कम या ज्यादा के साथ इस तिमाही में कंपनी को करीब $10.8 करोड़ के रेवेन्यू की उम्मीद है। साथ ही कंपनी ने अगले वित्त वर्ष 2028 में लगभग 70% रेवेन्यू ग्रोथ की उम्मीद जताई है। इससे AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार मजबूत खर्च की उम्मीद बनी हुई है।

रेमंड जेम्स इंवेस्टमेंट के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट मैट ओर्टोन (Matt Orton) के मुताबिक इन आंकड़ों से AI ट्रेड के बने रहने के संकेत मिल रहे हैं। उनका कहना है कि इससे चिप की मजबूत कंज्यूमर डिमांड, एआई को तेजी से अपनाने और पूरी सप्लाई चेन में लगातार बढ़ते ऑर्डर बैकलॉग का संकेत मिल रहा है। यह उन चिप कंपनियों के लिए पॉजिटिव है, जिनके शेयरों में हाल में तेज गिरावट आई थी।

लेकिन बनी हुई है वैल्यूएशन की चिंता

धमाकेदार कारोबार नतीजे से एआई की मांग को लेकर कुछ चिंता जरूर कम हुई है लेकिन हाई वैल्यूएशन को लेकर चिंता अभी खत्म नहीं हुई है। मार्केट एक्सपर्ट अजय बग्गा का कहना है कि एनविडिया के ऐसे नतीजे एक-दो साल पहले आते शेयर रॉकेट बन जाते लेकिन इस बार मार्केट का रिस्पांस सीमित रहा। नतीजे के बाद इसके शेयरों में हल्की तेजी आई। हालांकि बाद में कंपनी के सीईओ जेनसेन हुआंग (Jensen Huang) के आउटलुक और एक नए AWS सौदे के बाद शेयर तेजी से ऊपर चढ़े।

अजय का कहना है कि अब निवेशकों का सवाल बदला है और अब वे एआई के डिमांड की बजाय यह पूछ रहे हैं कि AI शेयरों की कीमतों में पहले से कितनी ग्रोथ शामिल हो चुकी है। ट्रे़डिंगडॉटकॉम के सीईओ Peter McGuire का भी कहना है कि कंपनी पिछले दो वर्षों से लगातार कमाई के अनुमान को पीछे छोड़ रही है, लेकिन साल 2024 के आखिरी से शेयर पर इसका असर पहले जैसा मजबूत नहीं दिख रहा। हालांकि पीटर के मुताबिक 2023-24 के AI तेजी की तुलना में वैल्यूएशन अब थोड़े नीचे आए हैं।

AI Stocks और Indian IT Stocks के लिए क्या है मतलब

एनविडिया के नतीजे ऐसे समय आए हैं जब कई वैश्विक चिप कंपनियों के शेयर हाल ही में धड़ाम हो गए थे। अमेरिका में माइक्रोन टेक (Micron Tech) और सैनडिस्क (SanDisk) जैसी चिप कंपनियों के शेयर दो महीनों में करीब 28% तक टूट चुके हैं तो दक्षिण कोरिया की सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स (Samsung Electronics) और एसके हीनिक्स में भी लगभग 25-30% की गिरावट आई। एलारा की एक रिपोर्ट के मुताबिक ताइवान-फोकस्ड फंड से इस साल पहली बार लगातार दो हफ्तों तक पैसा निकला। वहीं दक्षिण कोरिया से $75.8 करोड़ की निकासी हुई, जो तीन महीनों में सबसे अधिक रही। ऐसे में एनविडिया के धमाकेदार नतीजे काफी अहम हैं और संकेत मिल रहा कि चिप स्टॉक्स की कमजोरी एआई की मांग कम होने का संकेत नहीं है।

भारतीय आईटी कंपनियों पर असर की बात करें तो इसका रुझान मिला-जुला है। चिप स्टॉक्स की गिरावट से भारतीय आईटी स्टॉक्स को फायदा मिला क्योंकि वैश्विक निवेशक महंगे हार्डवेयर शेयरों का विकल्प खोज रहे थे। एक तरफ चिप स्टॉक्स में तेज गिरावट आई तो दो महीने में निफ्टी आईटी करीब 20% चढ़ गया। इसे बेहतर वैल्यूएशन और मजबूत घरेलू लिक्विडिटी से भी सपोर्ट मिला। अब आगे की बात करें तो मार्केट एक्सपर्ट सुनील सुब्रमणियन के मुताबिक एनविडिया के धमाकेदार नतीजे से भारतीय आईटी स्टॉक्स को झटका लग सकता है क्योंकि एक बार फिर चिप कंपनियो में निवेश बढ़ सकता है।

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Mobile Manufacturing Scheme 2.0 : सरकार ने लॉन्च की 62,500 करोड़ करोड़ रुपए की मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग स्कीम, जानिए पूरी डिटेल

Mobile Manufacturing Scheme : आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम 2.0 के लॉन्च की घोषणा की है। 62 हजार 500 करोड़ रुपए की इस स्कीम का लक्ष्य भारत में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है। इसके तहत सरकार कंपनियों को उत्पादन के लिए 5% तक इंसेंटिव देगी। इस स्कीम के जरिए 40 लाख करोड़ के मोबाइल का उत्पादन हो सकेगा। ये स्कीम 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी।

मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग स्कीम 2.0 के तहत कंपनियों से आवेदन मांगने की शुरुआत कर दी गई है। 15 जुलाई को कैबिनेट ने स्कीम को मंजूरी दी थी। स्कीम का कुल बजट 62,500 करोड़ रुपए और अवधि 5 साल यानी वित्त वर्ष 2027 से वित्त वर्ष 2031 तक है। इसमें मोबाइल उत्पादन,घरेलू वैल्यू एडिशन और कंपोनेंट सोर्सिंग को कवर किया गया है।

1 अप्रैल 2026 से लागू होगी स्कीम

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस कृष्णन ने कहा कि यह योजना मौजूदा फाइनेंशियल ईयर से यानी 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी और फाइनेंशियल ईयर 2031 तक चलेगी। इस स्कीम के तहत,भारत में बने मोबाइल फोन की बिक्री पर मैन्युफ़ैक्चरर्स को 2.25% से 5% तक का इंसेंटिव मिलेगा। कंपनियां खास कंपोनेंट्स और सब-असेंबली को घरेलू स्तर पर सोर्स करके 1.5% तक का अतिरिक्त इंसेंटिव भी पा सकती हैं। कैबिनेट से मंज़ूर इस फ़्रेमवर्क में भारतीय ब्रांड बनाने के मकसद से प्रोडक्ट डिजाइन और रिसर्च एंड डेवलपमेंट के लिए 3% का अतिरिक्त इंसेंटिव भी दिया जाएगा।

बड़ी मात्रा में मिलेगा रोजगार

एस कृष्णन ने कहा कि भारतीय हैंडसेट ब्रांड पर 5 प्रतिशत के ज्यादा इंसेंटिव दिया जाएगा। इसके जरिए सरकार उन घरेलू कंपनियों को सपोर्ट करना चाहती है जो विदेशी बाजारों में अपना विस्तार करना चाहती हैं। सरकार का अनुमान है कि इस स्कीम के जरिए 5 साल में कुल लगभग 40 लाख करोड़ रुपये के मोबाइल फोन का उत्पादन हो सकता है और करीब 60,000 प्रत्यक्ष नौकरियां मिल सकती हैं।

PLI 1.0 ने प्रोडक्शन और इन्वेस्टमेंट के लक्ष्यों को भी किया पार

यह स्कीम इसके पहले आई प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम (PLI-LSEM) के बाद आई है,जिसकी अवधि 31 मार्च, 2026 को खत्म हुई थी। पहले वाले प्रोग्राम का मुख्य मकसद बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग करना और मोबाइल फोन प्रोडक्शन को बढ़ाना था। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक PLI 1.0 के तहत मोबाइल फोन का प्रोडक्शन 11.61 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया,जबकि इसका लक्ष्य 8.12 लाख करोड़ रुपये था। PLI 1.0 का निवेश लक्ष्य 7,000 करोड़ रुपये था लेकिन इसके तहत हुआ निवेश 20,500 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है।

पहले की PLI स्कीम ने ग्लोबल हैंडसेट बनाने वाली कंपनियों और कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स को आकर्षित किया,जिनमें सैमसंग और भारत में Apple डिवाइस बनाने वाली कंपनियां शामिल हैं।

लोकलाइजेंशन पर फोकस

मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम 2.0 में देश में बनने वाले कंपोनेंट्स और सब-असेंबली की हिस्सेदारी बढ़ाने पर ज्यादा जोर दिया जाएगा। एस कृष्णन कृष्णन ने कहा कि मोबाइल फोन बनाने में घरेलू स्तर पर वैल्यू एडिशन लगभग 15 प्रतिशत से बढ़कर 23 प्रतिशत हो गया है। MPMS के तहत अतिरिक्त सोर्सिंग इंसेंटिव का मकसद मैन्युफैक्चरर्स को अपनी घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

 

 

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Asian Market Today: एशिया बाजारों में दबाव, वॉल स्ट्रीट में बिकवाली का दिखा असर, निक्केई और कोस्पी में गिरावट

Asian Market Today: शुक्रवार, 21 अगस्त को एशियाई शेयरों में गिरावट आई। वॉल स्ट्रीट के बेंचमार्क इंडेक्स गुरुवार को बॉन्ड यील्ड के निचले स्तर से वापस ऊपर आने के कारण काफी नीचे बंद हुए थे। MSCI का एशिया-पैसिफिक इक्विटी गेज 0.2% गिर गया। कोस्पी (Kospi) ने इस ट्रेंड के उलट 0.87% की बढ़त दर्ज की, जबकि जापान का निक्केई 225 (Nikkei 225) 0.90% और टोपिक्स (Topix) 0.31% नीचे आ गया। हैंग सेंग (Hang Seng) फ्यूचर्स में कोई खास बदलाव नहीं हुआ।

S&P 500 इंडेक्स में रात भर में 0.9% की गिरावट आई, जिसका मुख्य कारण वॉलमार्ट (Walmart) था। कमजोर बिक्री के आंकड़ों के बाद इसमें 2022 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट देखी गई। नैस्डैक 100 (Nasdaq 100) में 0.7% की गिरावट आई, जो लगातार पांचवें दिन की गिरावट थी।

US ट्रेजरी में शुरुआती तेजी के बाद एशियाई बॉन्ड गिरे और अमेरिकी डॉलर कमजोर बना रहा। निवेशकों के मन में यह सवाल था कि क्या लंबे समय के कर्ज की अमेरिकी बायबैक (buyback) प्रक्रिया से उधार लेने की लागत में केवल कुछ समय के लिए ही राहत मिलेगी।

ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में बॉन्ड की शुरुआत गिरावट के साथ हुई, क्योंकि गुरुवार को US 30-वर्षीय यील्ड में बढ़ोतरी हुई थी, भले ही US ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने भविष्य में बड़े बायबैक और एक नए फिस्कल प्लान का संकेत दिया था।

30-वर्षीय यील्ड छह बेसिस पॉइंट बढ़कर 5.25% हो गई, जिससे ट्रेजरी के बायबैक बढ़ाने के अचानक फैसले से आई गिरावट का असर काफी हद तक खत्म हो गया।

जापानी येन स्थिर रहा क्योंकि देश का मुख्य महंगाई सूचकांक लगातार दूसरे महीने बढ़ा, जिससे बैंक ऑफ जापान द्वारा जल्द ही ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना बनी रही। बाजार अब सितंबर में संभावित कदम पर नजर रखे हुए हैं। येन 158.96 प्रति डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा था, जबकि पिछले सत्र में यह 159 के स्तर को पार कर गया था।

ऑफशोर युआन 6.7238 प्रति डॉलर पर लगभग स्थिर रहा।

टेक्नोलॉजी शेयरों में सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स (Samsung Electronics) पर ध्यान केंद्रित रहा। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी शुक्रवार को 110 ट्रिलियन वॉन ($79 बिलियन) तक का शेयरधारक रिटर्न पैकेज पेश करने वाली थी। इस बीच, ईरान के खिलाफ़ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की “आर्थिक युद्ध” की धमकी के कारण पांच दिनों तक कीमतों में आई तेज़ी के बाद तेल की कीमतें कुछ कम हुईं। ट्रंप ने कहा था कि तेहरान ने एक डील को ठुकरा दिया है।

ब्रेंट क्रूड 0.7% गिरकर $93.10 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि गुरुवार को कारोबार के दौरान यह $94 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया था। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 0.7% गिरकर $86.19 प्रति बैरल पर आ गया।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Samsung Galaxy इवेंट की डेट कन्फर्म, इस दिन Galaxy S26 FE होगा लॉन्च, जानें फीचर्स

दक्षिण कोरिया की दिग्गज कंपनी Samsung ने Galaxy S26 FE को लॉन्च करने के लिए ‘Galaxy Event’ की घोषणा की है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह इवेंट 27 अगस्त, 2026 को आयोजित किया जाएगा। इसके लिए वर्चुअल इवेंट भारतीय मानक समय (IST) के अनुसार शाम 5:30 बजे शुरू होगा और इसे YouTube पर लाइव स्ट्रीम किया जाएगा।

Samsung की आधिकारिक घोषणा में कहा गया है, ’27 अगस्त को सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स ‘Galaxy Event August 2026′ आयोजित करेगा, जिसमें Galaxy S26 परिवार में सबसे नया स्मार्टफोन पेश किया जाएगा। इसे खास तौर पर उन लोगों के लिए डिजाइन किया गया है जो अपने लिए सबसे जरूरी चीजों को महत्व देते हैं। इसमें कैमरा से लेकर AI तक के मुख्य Galaxy S26 अनुभव और लेटेस्ट One UI शामिल हैं।’

इस इवेंट की एक बड़ी खासियत Samsung Galaxy S26 FE का लॉन्च हो सकता है। ऐसी भी चर्चा है कि कंपनी Galaxy Tab S12 को भी बाजार में उतार सकती है। इसी सिलसिले में, आइए जानते हैं Samsung के आने वाले इस फोन के स्पेसिफिकेशन्स, कैमरा और दूसरे खास फीचर्स के बारे में।

Samsung Galaxy S26 FE: कैमरा और स्पेसिफिकेशन्स

कैमरे की बात करें तो Samsung Galaxy S26 FE में ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप मिलने की उम्मीद है। इसमें OIS (ऑप्टिकल इमेज स्टेबिलाइजेशन) के साथ 50MP का प्राइमरी कैमरा, 12MP का अल्ट्रा-वाइड एंगल कैमरा और 8MP का टेलीफोटो कैमरा दिया जा सकता है।

सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए फोन में 12MP का Sony IMX825 सेंसर मिलने की बात कही जा रही है। हालांकि, ये जानकारी फिलहाल सामने आई रिपोर्ट्स और लीक्स पर आधारित है।

Samsung Galaxy S26 FE में 120Hz रिफ्रेश रेट वाला 6.7-इंच का FHD+ डिस्प्ले हो सकता है। वहीं, इस डिवाइस में Samsung Exynos 2500 प्रोसेसर के साथ 12GB RAM और बेस वेरिएंट में 256GB इंटरनल स्टोरेज मिल सकता है। सॉफ्टवेयर की बात करें तो यह फोन Android 17 ऑपरेटिंग सिस्टम पर आधारित होगा, जिसमें ऊपर One UI 9 स्किन होगी। अफवाहों के अनुसार, इस फोन में 4,900mAh की बैटरी होगी, जो 45W फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करेगी।

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Kospi Outlook: हाहाकार के बाद अब क्या है दक्षिण कोरियाई बाजार का हाल, कब तक बनेगा विदेशी निवेशकों की पसंद

Kospi Outlook: दक्षिण कोरिया के शेयर मार्केट की भारी उथल-पुथल खत्म होने की संभावना जताई जाने लगी है। रिकॉर्ड बिकवाली के बाद लेवरेज्ड पोजीशन खत्म हो गईं और नियामकीय प्रतिबंधों के चलते तगड़े रिस्क वाले कुछ प्रोडक्ट्स की ट्रेडिंग में भारी गिरावट आई है। बता दें कि पिछले कारोबारी हफ्ते कोस्पी में ऐसी गिरावट आई कि यह टूटकर जून के रिकॉर्ड हाई से गिरकर दो महीने के निचले स्तर पर आ गया। यह जून के हाई से करीब 40% नीचे आ चुका है।

कोस्पी की यह स्थिरता मार्केट में हाहाकार के चलते कुछ पोजिशन को जबरन बंद करने के चलते आई, जिसके बंद होने से बकाया मार्जिन डेट को कम करने में मदद मिली। इसके अलावा कोस्पी को लेवरेज्ड ईटीएफ पर सख्त नियमों के चलते दिग्गज कंपनियों सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी और एसके हाइनिक्स से जुड़े प्रोडक्ट्स की ट्रेडिंग और एसेट्स में गिरावट से भी सपोर्ट मिला। इससे संकेत मिल रहा है कि कोरियाई स्टॉक मार्केट में उठा-पटक का दौर अब काफी हद तक गुजर चुका है। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टैनले का अनुमान है कि डीलेवरेजिंग प्रोसेस अब आधे से अधिक पूरा हो चुका है।

लेकिन विदेशी निवेशक अभी भी नहीं कर रहे ताबड़तोड़ निवेश

कोस्पी में भारी उठा-पटक के चलते इसे मापने वाला इंडेक्स जून में 96.9 के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया था जबकि साल 2025 के आखिरी में यह सिर्फ 28.9 पर था। मार्केट में ऐसी हाहाकार मची थी कि मार्केट के 8% गिरने पर एक्सचेंज का 20 मिनट तक ट्रेडिंग रोकने वाला फीचर पिछले महीने रिकॉर्ड चार बार एक्टिव हुआ था। इसके अलावा लगभग आधे ट्रेडिंग दिनों में कोस्पी में कम से कम 5% की तेजी या गिरावट आई। 31 जुलाई को तो कोस्पी में एक ही दिन में रिकॉर्ड 18% की तेजी आई।

अब कोस्पी में स्थिरता आती दिख रही है लेकिन विदेशी निवेशक अभी भी ताबड़तोड़ निवेश नहीं कर रहे हैं। सिंगापुर में एबेरडीन एशियन इनकम फंड के सीनियर इंवेस्टमेंट डायरेक्टर Isaac Thong का कहना कि विदेशी निवेशकों का रुझान अब पॉजिटिव तो हो रहा है, लेकिन वे अभी पूरी तरह सहज नहीं हैं क्योंकि वोलैटिलिटी अभी भी काफी अधिक है। उनका कहना है अगर रिटर्न की गुंजाइश इतनी अधिक हो जाए कि रिस्क लेने को वाजिब बना लसके तो मार्केट को लेकर नजरिया और पॉजिटिव हो सकता है।

शेयर मार्केट की हाहाकार और सख्त नियमों के चलते कई रिटेल इंवेस्टर्स को अपनी पोजिशंस बंद करनी पड़ी। कोरिया फाइनेंशियल इंवेस्टमेंट एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार खुदरा निवेशकों के खातों से जून में करीब 1 लाख करोड़ वान (करीब ₹6760 करोड़) और जुलाई में 99.3 हजार करोड़ वान (करीब $6710 करोड़) की पोजिशन जबरन बंद कर दी हई। ये इस साल के दो सबसे बड़े मंथली आंकड़े थे। अब स्थिति में थोड़ा सुधार है और शेयरों की खरीदारी के लिए इस्तेमाल होने वाले मार्जिन लोन का आउटस्टैंडिंग बैलेंस भी 4 अगस्त तक घटकर इस साल के रिकॉर्ड निचले स्तर 27.4 लाख करोड़ वान (करीब ₹1.85 लाख करोड़) रह गया।

अब सवाल उठता है कि क्या खुदरा निवेशकों की जगह विदेशी निवेशक लेंगे। इसे लेकर दुबई की अर्केवियम कैपिटल (Arkevium Capital) के सीआईओ Maxence Visseau का मानना है कि ऐसा हो सकता है लेकिन इसके लिए उन्हें भरोसा होना चाहिए मार्केट में प्राइस डिस्कवरी मैकेनिज्म यानी सही कीमत तय होने की प्रक्रिया फिर से सामान्य तरीके से काम कर रही है।

किस लेवल तक चढ़ सकता है Kospi?

ताबड़तोड़ बिकवाली के बाद अब कोरियाई मार्केट कुछ मायने में सस्ता दिख रहा है। कोस्पी फिलहाल अपने 12 महीने के फारवर्ड अर्निंग्स के मुकाबले 5.1 गुना के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है लेकिन विदेशी निवेशकों को यह आकर्षित नहीं कर पा रहा है।

सिंगापुर में टेम्पलटन ग्लोबल इन्वेस्टमेंट्स की फंड मैनेजर यिपिंग लियाओ का कहना है कि गिरावट के बाद सैमसंग और हाइनिक्स काफी सस्ते हो चुके हैं और इनके मुनाफे का आउटलुक भी मजबूत है लेकिन भारी उतार-चढ़ाव के बाद निवेशक काफी सतर्क हो चुके हैं। उनका कहना है कि भारी उठा-पटक की वजह से मार्केट में दोबारा ताबड़तोड़ खरीदारी का माहौल नहीं बन रहा है बल्कि धीरे-धीरे खरीदारी हो रही है।

ग्लोबल फंड्स ने कोरियाई शेयरों से अपनी निकासी धीमी कर दी है, लेकिन वे अभी भी बेच रहे हैं। स्टॉक एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार जून में रिकॉर्ड $30 अरब निकालने के बाद विदेशी निवेशकों ने जुलाई में $6.2 अरब और अगस्त में अब तक $4.3 अरब के शेयर बेचे हैं।

हालांकि कुछ एनालिस्ट्स बुलिश हैं। गोल्डमैन सैक्स ग्रुप ने इस हफ्ते कोस्पी के लिए फिर से 12 महीने का टारगेट 12,000 फिक्स किया है, जो शुक्रवार की क्लोजिंग से लगभग 90% अधिक है। पिछले हफ्ते ब्लूमबर्ग टेलीविजन पर एक इंटरव्यू में इन्वेस्टमेंट बैंक के चीफ एशिया पैसिफिक इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट टिमोथी मो ने कहा था कि अगर उतार-चढ़ाव कम हो जाता है, तो फंडामेंटल्स फिर से असरदार हो जाएंगी।

मैथ्यूज इंटरनेशनल कैपिटल मैनेजमेंट के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर और पोर्टफोलियो मैनेजर शॉन टेलर का कहना है कि फंडामेंटल्स बहुत मजबूत हैं और हाल के नतीजे से ये साबित भी होता है। हालांकि शॉन का कहना है कि उनका मार्केट में लेवरेज और पोजिशनिंग बहुत अधिक बढ़ गई थी, तो अभी एक और महीने तक इंतजार करना पड़ सकता है।

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पहली एंट्री सफलता की गारंटी नहीं; Google, Netflix और Facebook आए लेट लेकिन बदल दी कहानी

मार्केट में पहली एंट्री का शुरुआती फायदा मिल सकता है लेकिन बिजनेस हिस्ट्री के हिसाब से यह इस बात की गारंटी नहीं देता है कि सबसे पुराना ही मार्केट में लंबे समय तक राज करेगा। स्मार्टफोन और इंटरनेट सर्च से लेकर सोशल मीडिया और एंटरटेनमेंट तक कई कंपनियों ने बाद में इंडस्ट्री में एंट्री की और लीडर बन गए। उन्होंने तेजी से अपने को बढ़ाया और ग्राहकों की जरूरतों को अधिक प्रभावी तरीके से अपनाया। इंडस्ट्री में पहली बार जिस कंपनी की एंट्री हुई, वे नए बाजार बनाते है या मौजूदा मार्केट को बदलते हैं लेकिन कई मामलों में ऐसा हुआ कि बाद में आने वाली कंपनियों ने शानदार प्रोडक्ट, मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन और बेहतर इकोसिस्टम बनाकर मार्केट लीडर बन जाते हैं। यहां ऐसे ही पांच उदाहरण दिए जा रहे हैं, जहां बाद में आने वाली कंपनियों ने शुरुआती मार्केट लीडर को पछाड़ दिया

Android vs Apple’s iOS

जून 2007 में जब एपल (Apple) ने आईफोन (iPhone) लॉन्च किया, तो उसने स्मार्टफोन इंडस्ट्री की तस्वीर ही बदल दी। इसने मॉडर्न टचस्क्रीन डिवाइस और ऐप-बेस्ड मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए एक नया स्टैंडर्ड सेट किया। इसके 18 महीने से भी कम समय बाद अक्टूबर 2008 में गूगल ने एंड्रॉयड को एक ओपन-सोर्स ऑपरेटिंग सिस्टम के तौर पर लॉन्च किया। एपल के इंटीग्रेटेड हार्डवेयर अप्रोच के विपरीत इसने सैमसंग (Samsung), एचटीसी (HTC) और मोटोरोला (Motorola) जैसी कई हैंडसेट बनाने वाली कंपनियों के साथ साझेदारी की। इससे एंड्रायड को अलग-अलग प्राइस रेंज और इलाकों में तेजी से फैलने में मदद मिली। साल 2010 के आखिर तक यह दुनिया का सबसे बड़ा स्मार्टफोन ऑपरेटिंग सिस्टम बन चुका था और आगे भी बना रहा। आज भी लगभग 70% मार्केट शेयर के साथ यह दुनिया भर में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाला स्मार्टफोन ऑपरेटिंग सिस्टम बना हुआ है।

Facebook vs Yahoo

मायस्पेस (MySpace) अगस्त 2003 में आया और जल्द ही सबसे बड़ा सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म बन गया। इसके लाखों यूजर्स बने और इसने अरबों डॉलर की वैल्यूएशन हासिल की। फिर फरवरी 2024 में फेसबुक ने मार्केट में एंट्री की। शुरुआत में तो यह सिर्फ हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स के लिए था और सितंबर 2006 में इसे आम लोगों के लिए खोल दिया गया। साफ-सुथरे इंटरफेस, मजबूत आइडेंटिटी वेरिफिकेशन, अधिक दिलचस्प न्यूज फीड और कम स्पैम के जरिए इसने खुद को दूसरों से अलग बनाया। आम लोगों के लिए खुलने के लगभग 20 महीने बाद अप्रैल 2008 में फेसबुक ने ग्लोबल मंथली विजिटर्स के मामले में मायस्पेस को पीछे छोड़ दिया और 2009 तक इसने यूएस ट्रैफिक में भी पछाड़ दिया। यह सोशल मीडिया की दुनिया में एक बड़ा बदलाव था।

Google vs Yahoo

गूगल से पहले इंटरनेट सर्च और वेब डायरेक्टरी पर 1994 में लॉन्च हुई याहू (Yahoo), 1994 में लॉन्च हुई लाइकोस (Lycos) और 1995 में लॉन्च हुई अल्टाविस्टा (AltaVista) जैसी कंपनियों का दबदबा था। फिर गूगल ने साल 1998 में पेज-रैंक (PageRank) के साथ मार्केट में एंट्री की। यह एक ऐसा सर्च एल्गोरिदम था जो सिर्फ वेबसाइटों की लिस्ट बनाने की बजाय, उनकी महत्ता यानी रेलेवेंस के आधार पर पेजों को रैंक करता था। इसने एक तेज़ और साफ-सुथरा होमपेज भी पेश किया, जो पोर्टल-स्टाइल वाले कॉम्पिटिटर्स से बिल्कुल अलग था। यही सादगी लोगों को भा गया। साल 2000 तक गूगल याहू का सर्च प्रोवाइडर बन गया और तेजी से एक प्रमुख सर्च इंजन के तौर पर उभरा। आगे चलकर ऑनलाइन सर्च का पर्यायवाची बन गया।

Netflix vs Blockbuster

ब्लॉकबस्टर ने 80 के दशक के आखिरी से हजारों फिजिकल स्टोर के जरिए दुनिया के सबसे बड़े वीडियो रेंटल बिजनेस में से एक खड़ा किया। साल 1997 में नेटफ्लिक्स ने ‘मेल के जरिए डीवीडी’ सब्सक्रिप्शन मॉडल के साथ डीवीडी रेंटल मार्केट में एंट्री की। इसमें लेट फीस हटा दी गई और फिर साल 2007 में इसने सब्सक्रिप्शन-बेस्ड वीडियो स्ट्रीमिंग में कदम रखा। एक तरफ ब्लॉकबस्टर कर्ज और स्टोर पर ग्राहकों की घटती संख्या से जूझ रहा था, वहीं नेटफ्लिक्स नए डिलीवरी मॉडल और डिजिटल डिस्ट्रीब्यूशन में निवेश करती रही। ब्लॉकबस्टर ने साल 2010 में दिवालिया होने के लिए अर्जी दी, तो नेटफ्लिक्स दुनिया के सबसे बड़े स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म में से एक बन गया।

Nintendo vs Atari

मैग्नावॉक्स (Magnavox) ने 1972 में पहला होम वीडियो गेम कंसोल पेश किया था, लेकिन अटारी ने 1970 के दशक के आखिरी में अटारी 2600 के साथ इस कैटेगरी को मशहूर कर दिया। हालांकि सॉफ्टवेयर की गिरती क्वालिटी और मार्केट में जरूरत से अधिक सप्लाई की वजह से साल 1983 में वीडियो गेम इंडस्ट्री क्रैश हो गई। इसके बाद निनटेंडो ने अक्टूबर 1985 में निनटेंडो एंटरटेनमेंट सिस्टम के साथ नॉर्थ अमेरिकन मार्केट में एंट्री की। इसने गेम डेवलपर्स के लिए सख्त क्वालिटी स्टैंडर्ड्स पर ध्यान दिया और एक्सक्लूसिव फ्रेंचाइजी में भारी निवेश किया, जिससे इसका इकोसिस्टम मजबूत हुआ। साल 1988 तक नॉर्थ अमेरिकन कंसोल मार्केट के अधिकतर हिस्से पर निनटेंडो का कब्जा हो गया, जिससे इंडस्ट्री को फिर से खड़ा करने में मदद मिली और साथ ही अटारी का हार्डवेयर बिजनेस कमजोर पड़ गया।

Gift Nifty Indicator: ग्लोबल बाजारों में गिरावट के बीच क्या हरे निशान में खुलेंगे भारतीय बाजार, जानें गिफ्ट निफ्टी से क्या मिल रहा है संकेत

Gift Nifty Indicator:  कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, US-ईरान शांति समझौते की दिशा में प्रगति की उम्मीदें और घरेलू कंपनियों की अच्छी कमाई का माहौल भारतीय इक्विटी को सहारा दे सकता है। हालांकि एशियाई टेक्नोलॉजी शेयरों में कमजोरी का असर क्षेत्रीय बाजारों पर पड़ रहा है। यहीं कारण है कि 6 अगस्त को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के बढ़त के साथ खुलने की उम्मीद है। ग्लोबल संकेतों के मिले-जुले होने के बावजूद GIFT निफ्टी पॉजिटिव शुरुआत का संकेत दे रहा है।

सुबह लगभग 7:45 बजे GIFT निफ्टी 58.5 अंक या 0.24 फीसदी बढ़कर 24,693 पर ट्रेड कर रहा था, जो संकेत देता है कि निफ्टी 50 बुधवार के 24,624.65 के क्लोजिंग लेवल से ऊपर खुल सकता है। यह पॉजिटिव संकेत भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स के बुधवार के सेशन में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की मॉनेटरी पॉलिसी की घोषणा के बाद मजबूती के साथ बंद होने के बाद आया है। सेंसेक्स 152.05 अंक या 0.19 फीसदी बढ़कर 78,581.00 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 9.75 अंक या 0.04 फीसदी बढ़कर 24,624.65 पर पहुंचा और क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के बाद 24,600 के स्तर से ऊपर बंद होने में कामयाब रहा।

एशियाई बाजारों में गिरावट

बुधवार की जोरदार तेजी के बाद एशियाई इक्विटी में सुस्ती देखी गई, जिसमें वॉल स्ट्रीट में रात भर की कमजोरी के बाद टेक्नोलॉजी शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट आई। जापान को छोड़कर एशिया-पैसिफिक शेयरों के MSCI के सबसे बड़े इंडेक्स में 0.69 प्रतिशत की गिरावट आई। जापान का निक्केई 225 1.57 प्रतिशत गिरा, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3.64 फीसदी नीचे आया क्योंकि बड़ी चिप बनाने वाली कंपनियों पर दबाव था। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स में 2.44 फीसदी की गिरावट आई, जबकि SK हाइनिक्स लगभग 7 फीसदी लुढ़क गया।

US बाजार रात भर मिले-जुले रुख के साथ बंद हुए, जिसमें डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज एक और रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया। ईरान के साथ संभावित शांति समझौते की दिशा में प्रगति को लेकर उम्मीद टेक्नोलॉजी शेयरों में कमजोरी पर भारी पड़ी। डाउ में 0.49 फीसदी की बढ़त हुई, जबकि S&P 500 में 0.17 फीसदी और नैस्डैक कंपोजिट में 0.83 प्रतिशत की गिरावट आई, क्योंकि तिमाही नतीजों के बाद स्पेसएक्स और एडवांस्ड माइक्रो डिवाइसेस के शेयरों में कमजोरी देखी गई।

तेल की कीमतों में नरमी

कच्चे तेल की कीमतों में थोड़ी गिरावट आई क्योंकि निवेशक यह आकलन कर रहे थे कि क्या ईरान-ओमान बातचीत में हुई प्रगति से अंततः अमेरिका-ईरान के बीच व्यापक शांति समझौते और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के फिर से खुलने का रास्ता साफ हो सकता है। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0.18 प्रतिशत गिरकर 79.31 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 0.35 प्रतिशत गिरकर 74.96 डॉलर पर आ गया।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पॉलिसी फैसले के बाद, अब निवेशकों का ध्यान अप्रैल-जून तिमाही के जारी अर्निंग्स सीजन (कंपनियों के नतीजों के दौर) पर लौटने की उम्मीद है। कंपनियों के नतीजे और मैनेजमेंट की कमेंट्री स्टॉक-स्पेसिफिक हलचल के मुख्य कारण बने रहेंगे, जबकि मध्य पूर्व से जुड़ी वैश्विक घटनाएं और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव व्यापक बाजार धारणा को प्रभावित करते रहेंगे।

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने बुधवार को लगातार छह सत्रों से जारी खरीदारी का सिलसिला तोड़ दिया और वे नेट सेलर (शुद्ध विक्रेता) बन गए, तथा 943 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 2,883 करोड़ रुपये के शेयर खरीदकर बाजार को सहारा दिया, जिससे विदेशी बिकवाली के असर को कम करने में मदद मिली।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, फ्लैट हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Flipkart Freedom Sale: iPhone 17 Pro पर 13,000 तक की छूट, जानिए किस मॉडल पर कितना ऑफर

फ्लिपकार्ट ने अपनी फ्रीडम सेल 2026 शुरू होने से पहले कई बड़े ऑफर्स की जानकारी दे दी है। इस बार कंपनी ने सिर्फ बड़े-बड़े दावे करने के बजाय कई प्रोडक्ट्स की असली सेल कीमत भी बता दी है। खासकर एप्पल के प्रोडक्ट्स पर मिलने वाली छूट अब साफ हो गई है। फ्रीडम सेल सभी ग्राहकों के लिए 8 अगस्त से शुरू होगी। वहीं, फ्लिपकार्ट प्लस, फ्लिपकार्ट ब्लैक मेंबर और फ्लिपकार्ट एक्सिस बैंक क्रेडिट कार्ड रखने वाले ग्राहक 7 अगस्त से ही सेल का फायदा उठा सकेंगे।

iPhone 17 Pro पर मिलेगा शानदार ऑफर

इस सेल में iPhone 17 Pro पर भी अच्छी छूट मिलेगी। इसकी लॉन्च कीमत 1,34,900 रुपये थी, लेकिन सेल के दौरान यह 1,26,900 रुपये में मिलेगा। यह सीधी छूट है और इसके लिए किसी बैंक कार्ड की जरूरत नहीं होगी। यानी ग्राहकों को सीधे 8,000 रुपये की बचत होगी। अगर ग्राहक एसबीआई बैंक या फ्लिपकार्ट एक्सिस बैंक के क्रेडिट कार्ड से भुगतान करते हैं, तो उन्हें 5,000 रुपये की अतिरिक्त छूट भी मिलेगी। इस तरह सभी ऑफर्स के बाद iPhone 17 Pro की प्रभावी कीमत 1,21,900 रुपये रह जाएगी, जो इसकी लॉन्च कीमत से 13,000 रुपये कम है।

iPhone 17 Pro Max पर भी फ्लिपकार्ट फ्रीडम सेल में अच्छी छूट मिलेगी। इस फोन की कीमत सेल के दौरान 1,41,900 रुपये होगी। वहीं, एसबीआई बैंक और फ्लिपकार्ट एक्सिस बैंक के पात्र क्रेडिट कार्ड धारक इसे 1,32,900 रुपये की प्रभावी कीमत पर खरीद सकेंगे। सीधी छूट के अलावा, फ्लिपकार्ट कुछ चुनिंदा बैंक कार्ड पर अतिरिक्त कैशबैक और नो-कॉस्ट ईएमआई का भी फायदा देगा। हालांकि, इन ऑफर्स के साथ कुछ नियम और शर्तें लागू होंगी। इसलिए खरीदारी करने से पहले ऑफर की सभी शर्तों को ध्यान से पढ़ लेना बेहतर रहेगा।

सिर्फ iPhone ही नहीं, एंड्रॉयड फोन पर भी मिलेंगे शानदार ऑफर्स

फ्लिपकार्ट ने सिर्फ आईफोन ही नहीं, बल्कि कई एंड्रॉयड स्मार्टफोन की सेल कीमतों का भी खुलासा कर दिया है। इससे ग्राहकों को अलग-अलग कंपनियों के फोन की कीमत और ऑफर्स की तुलना करने में आसानी होगी। गूगल पिक्सल 10 सीरीज की कीमतें भी सामने आ गई हैं। पिक्सल 10 की कीमत 62,999 रुपये, पिक्सल 10ए की 50,999 रुपये, पिक्सल 10 प्रो की 99,999 रुपये और पिक्सल 10 प्रो एक्सएल की कीमत 1,14,999 रुपये होगी।

वहीं, सैमसंग गैलेक्सी S26 अल्ट्रा और गैलेक्सी S26 प्लस पर भी छूट मिलेगी। हालांकि, इन दोनों फोन की अंतिम सेल कीमत का अभी ऐलान नहीं किया गया है। अगर आप नया स्मार्टफोन खरीदने की सोच रहे हैं, तो यह अच्छा मौका हो सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस साल मेमोरी चिप समेत कई मोबाइल पार्ट्स की कीमतें बढ़ी हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में स्मार्टफोन की कीमतें भी बढ़ सकती हैं। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि एप्पल जल्द ही आईफोन 17 सीरीज की कीमत बढ़ा सकता है। अगर ऐसा होता है, तो फ्लिपकार्ट फ्रीडम सेल में मिल रही मौजूदा कीमतें ग्राहकों के लिए बेहतर सौदा साबित हो सकती हैं। इसलिए जो लोग आईफोन 17 सीरीज खरीदने का इंतजार कर रहे हैं, उनके लिए यह सेल अच्छा अवसर हो सकती है।

अगर आप पहले से ही नया आईफोन खरीदने या अपना पुराना फोन बदलने की योजना बना रहे हैं, तो फ्लिपकार्ट फ्रीडम सेल आपके लिए अच्छा मौका हो सकती है। इस बार कंपनी ने सिर्फ ऑफर्स का प्रचार नहीं किया है, बल्कि कई आईफोन की वास्तविक सेल कीमत भी पहले ही बता दी है। iPhone 17 Pro की प्रभावी कीमत 1,21,900 रुपये तक पहुंच सकती है, जबकि इसकी लॉन्च कीमत 1,34,900 रुपये थी। यानी ग्राहकों को अच्छी-खासी बचत का मौका मिलेगा।

इसके अलावा, आईफोन 15 जैसे पुराने मॉडल, जिसकी शुरुआती कीमत 55,900 रुपये से शुरू होगी, से लेकर iPhone 17 Pro मैक्स तक कई मॉडलों पर आकर्षक छूट दी जा रही है। ऐसे में लगभग हर बजट के ग्राहकों के लिए इस सेल में खरीदारी का अच्छा मौका होगा। फ्लिपकार्ट फ्रीडम सेल सभी ग्राहकों के लिए 8 अगस्त से शुरू होगी। वहीं, फ्लिपकार्ट प्लस और फ्लिपकार्ट ब्लैक मेंबर एक दिन पहले यानी 7 अगस्त से ही इन ऑफर्स का लाभ उठा सकेंगे।