मॉस्को पर भीषण ड्रोन अटैक! जेलेंस्की ने इस खास मौके पर कर दिया बड़ा धमाका

Ukraine Drone Attack On Moscow: रूस में संसदीय चुनावों के आखिरी दिन राजधानी मॉस्को और उसके आसपास का इलाका भीषण ड्रोन हमलों से थर्रा उठा। रविवार को हुए इस बड़े ड्रोन हमले में कम से कम 2 लोगों की मौत हो गई, जबकि मॉस्को की एक प्रमुख तेल रिफाइनरी को भारी नुकसान पहुंचा है।

रूस का दावा है कि उसने 1,600 से अधिक यूक्रेनी ड्रोन को हवा में ही मार गिराया, जिनमें से 450 ड्रोन सीधे राजधानी मॉस्को को निशाना बनाने के लिए भेजे गए थे। मॉस्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन ने यूक्रेन पर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सत्ता को मजबूती देने वाले इस तीन दिवसीय चुनाव को बाधित करने का आरोप लगाया है।

हमले में 2 लोगों की मौत

मॉस्को के क्षेत्रीय गवर्नर आंद्रेई वोरोब्योव के मुताबिक, अलग-अलग जगहों पर हुए हमलों में दो नागरिकों की जान चली गई। मृतकों में एक 44 वर्षीय महिला और एक बुजुर्ग पुरुष शामिल हैं। इसके अलावा एक ड्रोन के 21 मंजिला रिहायशी इमारत से टकराने के बाद भीषण आग लग गई, जिसके चलते एहतियातन 400 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना पड़ा।

मॉस्को ऑयल रिफाइनरी को भारी नुकसान

यूक्रेन ने पिछले कुछ महीनों में रूस के ऊर्जा ढांचों को निशाना बनाकर अपने लंबे समय के ड्रोन अभियान को तेज कर दिया है। मॉस्को के मेयर ने पुष्टि की है कि हमले में ‘मॉस्को ऑयल रिफाइनरी’ के एक परिसर को नुकसान पहुंचा है।

ये रिफाइनरियां और तेल डिपो क्रेमलिन के लिए युद्ध का खर्च निकालने का मुख्य वित्तीय जरिया हैं। यह हमला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के ठीक बाद हुआ है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि रूस और यूक्रेन आपस में एक-दूसरे के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला न करने के लिए सहमत हुए हैं।

‘क्रेमलिन की वॉर मशीन पर बड़ा प्रहार’

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने इस सफल ड्रोन हमले की तारीफ की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा, ‘बीती रात मॉस्को क्षेत्र में हमारी लंबी दूरी की जवाबी कार्रवाई का बहुत बड़ा असर हुआ है। रूस के एक प्रमुख तेल उद्योग और लॉजिस्टिक्स ठिकाने को निशाना बनाया गया है। ये वही अरबों डॉलर हैं जो रूस की युद्ध मशीन को हवा देते हैं।’

चुनाव के बीच पुतिन की साख पर हमला

रूस में फरवरी 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण के बाद यह पहला संसदीय चुनाव है। शुक्रवार से रविवार तक चले इस 3-दिवसीय मतदान में जीत पूरी तरह से पुतिन की ‘युनाइटेड रसिया’ पार्टी के पक्ष में तय मानी जा रही है, क्योंकि चुनाव में केवल उन्हीं पार्टियों को उतरने की इजाजत दी गई है जो पुतिन और उनके युद्ध का समर्थन करती हैं।

पुतिन जहां इस चुनाव के जरिए जनता के समर्थन का संदेश देना चाहते थे, वहीं यूक्रेन ने ठीक वोटिंग के आखिरी दिन मॉस्को पर हमला करके उनकी सुरक्षा व्यवस्था और दावों की हवा निकाल दी है। हालांकि, मेयर सोबयानिन का कहना है कि दुश्मन अपने मकसद नाकाम रहा।

यूक्रेन द्वारा मॉस्को की सीमा के भीतर घुसकर इतने बड़े पैमाने पर ड्रोन दागना और तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाना यह दर्शाता है कि अब युद्ध केवल फ्रंटलाइन तक सीमित नहीं रह गया है। रूस के आर्थिक स्तंभों पर चोट पहुंचाकर यूक्रेन, मॉस्को पर रणनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। आने वाले दिनों में रूस की ओर से इसका कड़ा और आक्रामक पलटवार देखने को मिल सकता है।

Russia-Ukraine War : मॉस्को की ओर यूक्रेन के बड़े ड्रोन हमले, रूस का दावा- 1,600 से ज्यादा ड्रोन मार गिराए

Russia-Ukraine War : मॉस्को की ओर यूक्रेन के बड़े ड्रोन हमले, रूस का दावा- 1,600 से ज्यादा ड्रोन मार गिराए

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यूक्रेन ने मॉस्को की ओर अब तक के सबसे बड़े ड्रोन हमलों में से एक को अंजाम दिया है। रूस ने दावा किया है कि शनिवार से अब तक उसने 1,600 से ज्यादा यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए हैं, जिनमें करीब 450 ड्रोन मॉस्को की दिशा में बढ़ रहे थे। रूस में संसदीय चुनाव के आखिरी दिन मॉस्को में ड्रोन हमला हुआ है। मॉस्को की एक ऑइल रिफाइनरी को ड्रोन हमले में नुकसान पहुंचा है। हमले के बाद यहां आग लग गई। इस हमले के दौरान मॉस्को क्षेत्र में दो लोगों की मौत की भी जानकारी सामने आई है।

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मॉस्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन ने इसे क्षेत्र पर हुए सबसे बड़े यूक्रेनी ड्रोन हमलों में से एक बताया। रूसी अधिकारियों के मुताबिक, हमलों के बाद मॉस्को के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई और कई इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।

 

मॉस्को की तेल रिफाइनरी तक पहुंचे ड्रोन

 

रिपोर्ट के मुताबिक, कई ड्रोन मॉस्को ऑयल रिफाइनरी तक पहुंचने में सफल रहे। रॉयटर्स के प्रत्यक्षदर्शियों ने रिफाइनरी परिसर से धमाकों और धुएं के गुबार की जानकारी दी। हालांकि, संयंत्र को हुए नुकसान की वास्तविक स्थिति तत्काल स्पष्ट नहीं हो सकी है। यूक्रेन की ओर से इस हमले पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई।

 

मॉस्को की इस रिफाइनरी ने वर्ष 2024 में करीब 11.6 मिलियन मीट्रिक टन कच्चे तेल का प्रसंस्करण किया था। इससे लगभग 2.9 मिलियन टन पेट्रोल और 3.2 मिलियन टन डीजल का उत्पादन हुआ था।

 

यूक्रेन के हमलों से पहले भी रूस की रिफाइनिंग क्षमता प्रभावित होने की खबरें सामने आती रही हैं। इन हमलों को रूस के कुछ हिस्सों में ईंधन की कमी और कीमतों में बढ़ोतरी से भी जोड़ा गया है।

 

रूस के संसदीय चुनाव के बीच हुआ हमला

 

यह ड्रोन हमला रूस में संसदीय चुनाव के अंतिम दिन हुआ। मॉस्को के मेयर सोबयानिन ने दावा किया कि ड्रोन अभियान का उद्देश्य मतदान प्रक्रिया को बाधित करना था। हालांकि, इस दावे पर यूक्रेन की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। मॉस्को क्षेत्र के रामेंस्कोये में हमलों के बाद 21 मंजिला एक अपार्टमेंट बिल्डिंग से करीब 400 लोगों को बाहर निकाला गया, जिनमें लगभग 70 बच्चे शामिल थे।

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यूक्रेन में रूसी ड्रोन हमले में चार की मौत

 

इसी बीच यूक्रेन में भी रूसी ड्रोन हमले में चार लोगों की मौत हुई है। कीव क्षेत्र में हुए रातभर के हमले में तीन बच्चों समेत चार लोगों की जान चली गई। आपातकालीन सेवाओं के अनुसार, एक ड्रोन के निजी मकान से टकराने के बाद एक महिला और उसके तीन साल के दो बच्चों की मौत हो गई। एक अन्य हमले में घायल हुई लड़की ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस तरह रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष के बीच दोनों देशों में ड्रोन हमलों का सिलसिला लगातार जारी है।

रूस पर ट्रंप का शिकंजा, 100% टैरिफ वाले बिल पर किया साइन, जानें भारत और चीन पर कैसे पड़ेगा असर

Russia Sanctions Bill: भारत और चीन जैसे देशों के लिए एक बड़ी और चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाले नए कानून पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस बिल से उन्हें उन देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल गया है जो रूस से तेल और गैस खरीदते हैं।

Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 के तहत रूस के एनर्जी सेक्टर, सीनियर अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों और उन टैंकरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, जिन्हें पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इन टैंकरों को आमतौर पर ‘शैडो फ्लीट’ कहा जाता है।

भारत-चीन पर कैसे पड़ेगा असर?

बुधवार को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने यह कानून 262-159 के अंतर से पास कर दिया। इससे पहले इस बिल को सीनेट से मंजूरी मिल चुकी थी। नए कानून के तहत रूस से तेल या गैस खरीदने वाले पांच सबसे बड़े खरीदार देशों पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत या चीन पर तुरंत 100% टैरिफ लगा दिया जाएगा। टैरिफ लगाना है या नहीं और अगर लगाना है तो किस दर पर, इसका फैसला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप करेंगे।

जानकारी के मुताबिक, इस कानून का मकसद एनर्जी एक्सपोर्ट से मॉस्को की कमाई कम करना और यूक्रेन युद्ध को लेकर उस पर दबाव बढ़ाना है।

कब लागू हो सकता है टैरिफ?

यह कानून राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के 30 दिनों के भीतर लागू हो जाएगा। इसके तहत, उन देशों से आयातित सामान पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाना जरूरी है, जो कानून बनने से पहले के 12 महीनों में कुल मात्रा के हिसाब से रूसी कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस के शीर्ष पांच खरीदार रहे हों। अगर किसी देश का रूसी गैस आयात, लागू अवधि के दौरान रूस के कुल निर्यात का 15 प्रतिशत से कम रहा हो और उसने उस आयात को कम करने के लिए “महत्वपूर्ण कदम” उठाए हों, तो उसे गैस से जुड़े शुल्कों से छूट मिलती है।

भारत ने रिश्तों पर असर पड़ने की चेतावनी दी

भारत ने वॉशिंगटन को पहले ही चेतावनी दे दी है कि नए कदमों से दोनों देशों के रिश्तों पर असर पड़ सकता है। नई दिल्ली ने कहा है कि वह एनर्जी सिक्योरिटी के लिए प्रतिबद्ध है और मार्केट की स्थितियों के आधार पर अलग-अलग सप्लायर्स से तेल खरीदना जारी रखेगी।

बता दें कि भारत, रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले दुनिया के सबसे बड़े देशों में से एक है। जबकि चीन भी एक बड़ा खरीदार है, इसलिए नए कानून के तहत दोनों देशों पर असर पड़ सकता है।

वहीं, इस कानून से ट्रंप को टैरिफ के बारे में बड़े फैसले लेने की छूट मिलती है और कुछ खास स्थितियों में छूट देने का भी प्रावधान है।

भारत के लिए यह कानून ऐसे समय में आया है, जब नई दिल्ली, रूस से तेल खरीदने को लेकर वॉशिंगटन के बढ़ते दबाव और अपनी एनर्जी की जरूरतों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।

शी जिनपिंग के दौरे से बढ़ सकती है टेंशन

सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप के इस कदम से ठीक पहले, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 24 सितंबर को अमेरिकी राष्ट्रपति से बातचीत के लिए वॉशिंगटन आने वाले हैं।

यह बैठक एक दशक में शी की पहली व्हाइट हाउस यात्रा होगी और इस साल दोनों नेताओं के बीच आमने-सामने की दूसरी मुलाकात होगी। इससे पहले उनकी मुलाकात मई में बीजिंग में हुई थी।

इस बैठक में व्यापार एक अहम मुद्दा हो सकता है। इसके अलावा ताइवान को लेकर तनाव, ईरान युद्ध, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अमेरिका-चीन के बीच टैरिफ (आयात शुल्क) को लेकर बनी अस्थायी शांति को आगे बढ़ाने की कोशिशों पर भी चर्चा हो सकती है।

गौरतलब है कि रूस पर लगाए गए नए प्रतिबंधों वाला कानून दोनों देशों के बीच दबाव का एक और मुद्दा बन सकता है, क्योंकि चीन रूस से ऊर्जा खरीदने वाले दुनिया के सबसे बड़े देशों में शामिल है।

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रूस पर नए प्रतिबंधों वाले बिल पर ट्रंप जल्द लगाएंगे मुहर, जानें भारत पर क्या होगा इसका असर?

Russia Sanctions Bill: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस पर नए और कड़े प्रतिबंध लगाने वाले बिल पर जल्द हस्ताक्षर करने वाले हैं। इस बिल के तहत ट्रंप को भारत समेत उन देशों पर 100% तक टैरिफ (शुल्क) लगाने का अधिकार मिल सकता है, जो रूस से तेल और गैस खरीदते हैं।

अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स द्वारा इस कानून को मंजूरी दिए जाने के बाद, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने गुरुवार को ANI को बताया, “राष्ट्रपति इस बिल पर दस्तखत करने की योजना बना रहे हैं।”

बता दें कि Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 नाम के इस बिल को अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने 262-159 वोटों से पास कर दिया है। यह बिल पहले ही अमेरिकी सीनेट से मंजूर हो चुका है और अब इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर का इंतजार है।

भारत ने द्विपक्षीय संबंधों पर असर पड़ने की चेतावनी दी

यह घटनाक्रम तब हुआ जब विदेश मंत्रालय ने कहा कि वॉशिंगटन को बता दिया गया है कि रूसी तेल की खरीद से जुड़े टैरिफ का असर द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ सकता है।

नई दिल्ली ने कहा कि वह ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए “पूरी तरह प्रतिबद्ध” है और बाजार की स्थितियों के आधार पर अलग-अलग विक्रेताओं से सप्लाई लेना जारी रखेगी।

मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “भारत ने भी अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाने का अपना इरादा साफ कर दिया है।”

भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है और सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए रूसी कच्चा तेल खरीदता रहा है।

बता दें कि प्रस्तावित बिल के तहत ट्रंप को रूस से ऊर्जा खरीदने वाले बड़े देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने की बड़ी शक्ति मिल सकती है। भारत और चीन ऐसे देशों में शामिल हैं, जिन पर यह टैरिफ लगाया जा सकता है। हालांकि, इस बिल में भारत पर 100% टैरिफ अपने आप लगाने का प्रावधान नहीं है।

ट्रेड बातचीत पर नया दबाव

इस कदम से भारत और अमेरिका के बीच चल रही ट्रेड बातचीत भी मुश्किल में पड़ सकती है। अमेरिका, भारतीय सामान के एक्सपोर्ट के लिए सबसे बड़ी जगह है। अप्रैल-अगस्त के दौरान अमेरिका को होने वाला भारतीय सामान का एक्सपोर्ट बढ़कर 42.79 अरब डॉलर हो गया, जो एक साल पहले 40.39 अरब डॉलर था।

रॉयटर्स के सूत्रों के मुताबिक, भारतीय रिफाइनरियों ने सितंबर और अक्टूबर के लिए रूसी क्रूड का इंतजाम पहले ही कर लिया है।

भारतीय रिफाइनरियां वॉशिंगटन के साथ बातचीत करना चाहते हैं, जिसमें संभावित छूट या कोटा शामिल हो सकता है। उनका कहना है कि रूसी सप्लाई में कटौती से लागत बढ़ सकती है, खासकर ऐसे समय में जब ग्लोबल ऑयल मार्केट पहले से ही दबाव में है।

वहीं, भारत-अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता अभी भी बिना किसी नतीजे के चल रही है और दोनों पक्ष समझौते तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।

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Trump Tariff: ट्रंप भारत पर लगा सकते हैं 100% टैरिफ! अगर ये बिल पास हुआ तो हो जाएगी बड़ी मुश्किल

US Russia Sanctions Bill 2026: अमेरिका से एक बड़ा अपडेट सामने आया है। वहां के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में एक ऐसा विधेयक प्रक्रियात्मक वोट पास हो गया है जो भारत के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। इस बिल का नाम है ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सेंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’।

अगर यह विधेयक पूरी तरह पास होकर कानून बन जाता है, तो अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों (जैसे- भारत और चीन) से आने वाले सामान पर 100% तक का एक्स्ट्रा टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाएगा।

आइए आपको बताते हैं कि इस बिल में भारत के लिए क्या खतरे हैं, अमेरिकी संसद में इस पर क्या खींचतान चल रही है और भारत सरकार का इस पर क्या रुख है।

क्या है 100% टैरिफ वाला नियम? (Section 113)

इस बिल की सबसे अहम और विवादास्पद पहलू सेक्शन 113 है। इसके कानून बनने से पिछले 12 महीनों के दौरान रूस से सबसे ज्यादा कच्चा तेल या नेचुरल गैस खरीदने वाले शीर्ष 5 देशों पर यह नियम लागू होगा। सीनेट के मुताबिक, इन 5 बड़े खरीदारों में चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं।

यह टैरिफ केवल तेल के सौदों पर नहीं, बल्कि उस देश (जैसे भारत) से अमरीका में इंपोर्ट होने वाले सभी सामानों पर 0% से लेकर 100% तक लगाया जा सकता है। वैसे बिल में राष्ट्रपति को यह अधिकार भी दिया गया है कि अगर अमेरिका के राष्ट्रीय हित में जरूरी हो, तो वे किसी देश को इस टैरिफ से छूट दे सकते हैं।

अमेरिकी संसद में क्या हुआ?

US प्रतिनिधि सभा में H. Res. 1530 नाम के एक रूल को 214-211 के बेहद मामूली अंतर से मंजूरी मिली। 211 रिपब्लिकन और 2 डेमोक्रेट्स ने बिल के पक्ष में वोट दिया, जबकि 209 डेमोक्रेट्स और 2 रिपब्लिकन इसके खिलाफ रहे।

वैसे यह प्रक्रियात्मक वोट था। बिल पर अंतिम वोट के बाद इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास दस्तखत के लिए भेजा जाएगा। ट्रम्प पहले ही कह चुके हैं कि वे इस बिल का समर्थन करते हैं।

बिल को लेकर अमेरिका के भीतर ही विरोध क्यों?

अमरीकी डेमोक्रेटिक पार्टी के कई बड़े नेताओं ने इस बिल का कड़ा विरोध किया है। हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के रैंकिंग सदस्य ग्रेगोरी मीक्स ने कहा कि यह बिल राष्ट्रपति ट्रम्प को बिना किसी रोक-टोक के टैरिफ लगाने का एकतरफा अधिकार दे देगा। उन्होंने सेक्शन 113 को हटाने की मांग की थी।

कई सांसदों का मानना है कि भारत और चीन जैसे व्यापारिक साझेदारों पर 100% टैरिफ लगाने से अमरीका में ही महंगाई और चीजों के दाम बढ़ जाएंगे।

भारत का क्या रुख है?

भारत सरकार ने इस पूरे मामले पर अपना रुख बिल्कुल साफ रखा है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है कि भारत के ऊर्जा खरीद के फैसले पूरी तरह से देश के राष्ट्रीय हित और 140 करोड़ नागरिकों की जरूरतों से तय होते हैं। विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि भारत और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग द्विपक्षीय साझेदारी का एक मजबूत और पुराना स्तंभ है।

पुतिन की भारत यात्रा से पहले जेवर पहुंचा रूस का Ilyushin Il-76, जानें क्यों खास है ये ‘भारी-भरकम’ विमान

Ilyushin Il-76: 2026 ब्रिक्स समिट के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे से एक दिन पहले, रूसी वायु सेना का Ilyushin Il-76 भारी मालवाहक विमान जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरा। इस विमान में रूसी राष्ट्रपति के दौरे की तैयारियों के तहत सुरक्षा के लिए एक एडवांस टीम और जरूरी सामान लाया गया था।

राष्ट्रपति पुतिन आमतौर पर Ilyushin Il-96-300PU विमान से यात्रा करते हैं। यह रूस का राष्ट्रपति विमान है। वहीं, Il-76 का इस्तेमाल भारी सामान, जरूरी सामान, सैनिकों और अन्य लॉजिस्टिक सामान को ले जाने के लिए किया जाता है। यही वजह है कि पुतिन जैसे बड़े नेता की यात्रा से पहले तैयारियों के लिए इस विमान का इस्तेमाल किया गया।

Ilyushin Il-76 क्या है?

Ilyushin Il-76, जिसे NATO रिपोर्टिंग नाम “कैंडिड” (Candid) से भी जाना जाता है, चार इंजन वाला टर्बोफैन स्ट्रैटेजिक एयरलिफ्टर है। इसे मूल रूप से सोवियत संघ के इल्यूशिन डिजाइन ब्यूरो ने डिजाइन किया था। अब इस विमान के प्रोडक्शन और आधुनिकीकरण का काम रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन देखती है।

इस विमान को मुश्किल हालात में काम करने के लिए डिजाइन किया गया था और यह छोटे, बिना पक्के या बिना तैयारी वाले एयरफील्ड पर भी उतर सकता है। इसे दूर-दराज या कम सुविधा वाले इलाकों तक भारी मशीनरी, मिलिट्री गाड़ियां और भारी मात्रा में सामान पहुंचाने के लिए बनाया गया था।

Il-76 में टाइटेनियम का कार्गो फ्लोर और एक इंटीग्रेटेड रैंप सिस्टम है, जिससे सामान को आसानी से अंदर-बाहर (रोल-ऑन/रोल-ऑफ) किया जा सकता है। इसमें दो इंटरनल इलेक्ट्रिक विंच हैं, जिनमें से हर एक तीन टन तक का वजन खींच सकता है, और चार ओवरहेड इलेक्ट्रिक होइस्ट हैं जिनकी कुल उठाने की क्षमता 10 टन तक है।

इसका मजबूत, मल्टी-व्हील लैंडिंग गियर खास फ्यूजलेज फेयरिंग में लगा होता है, जिससे यह विमान जमी हुई बर्फ, मिट्टी और घास जैसी सतहों से भी ऑपरेट कर सकता है।

भारत Il-76 का भी इस्तेमाल करता है

भारत 1985 से Il-76 का इस्तेमाल कर रहा है और भारतीय वायु सेना इसे अपनी रणनीतिक भारी-भरकम सामान ढोने की क्षमता के एक अहम हिस्से के तौर पर इस्तेमाल करती है। भारत में इस विमान को “गजराज” या “हाथियों का राजा” के नाम से भी जाना जाता है।

IAF के पास 17 Il-76MD रणनीतिक भारी ट्रांसपोर्ट विमान हैं, जिनमें 44 स्क्वाड्रन, यानी “माइटी जेट्स” के विमान भी शामिल हैं। इनका इस्तेमाल सैनिकों, बख्तरबंद गाड़ियों और भारी सामान को लाने-ले जाने के लिए किया जाता है।

भारत छह Il-78MKI विमानों का भी इस्तेमाल करता है, जो Il-78MKI के खास वर्जन हैं और हवा में ही ईंधन भरने के लिए तैयार किए गए हैं। Il-78MKI का इस्तेमाल हवा में ही IAF के फाइटर जेट्स में ईंधन भरने के लिए किया जाता है।

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Brics Summit: भारत की मेजबानी में 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित हो रहे 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के दौरान जबर्दस्त कूटनीतिक हलचल दिखने वाली है। इस ऐतिहासिक सम्मेलन में भाग लेने के लिए दुनियाभर से 11 सदस्य देशों, 10 पार्टनर देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के शीर्ष नई दिल्ली पहुंच चुके हैं या पहुंच रहे हैं।

इस सम्मेलन के ग्लोबल एजेंडे के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 11 से 13 सितंबर के दौरान वैश्विक नेताओं के साथ बड़े पैमाने पर द्विपक्षीय मुलाकातें करेंगे। इस बीच पीएम मोदी ने X पर पोस्ट करते हुए इस सम्मेलन में दुनिया भर की भलाई को ध्यान में रखते हुए सार्थक चर्चा होने की उम्मीद भी जताई है।

आइए जानते हैं ब्रिक्स सम्मेलन के संदर्भ में 11 से 13 सितंबर के बीच पीएम मोदी और राष्ट्रपति मुर्मू की द्विपक्षीय बैठकों का पूरा शेड्यूल क्या है और किन दिग्गज नेताओं से मुलाकात होने वाली है-

11 सितंबर: बैठकों के पहले दिन का शेड्यूल

सम्मेलन के औपचारिक आगाज से एक दिन पहले ही 11 सितंबर से उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठकों का दौर शुरू हो रहा है

पुतिन के साथ बैठक: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच द्विपक्षीय वार्ता।

पेजशिकियान के साथ बैठक: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के बीच मुलाकात।

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख से मुलाकात: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरस की बैठक।

12 सितंबर: शी जिनपिंग समेत दिग्गज नेताओं से मुलाकात

12 सितंबर को ब्रिक्स सम्मेलन के मेन सेशन के साथ-साथ पीएम मोदी और राष्ट्रपति मुर्मू कई राष्ट्रप्रमुखों से महत्वपूर्ण द्विपक्षीय चर्चा करेंगे-

इथियोपिया: पीएम नरेंद्र मोदी की इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली के साथ बैठक।

मलेशिया: पीएम मोदी की मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ बातचीत।

यूएई (अबू धाबी): पीएम मोदी और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नहयान की मुलाकात।

वियतनाम: पीएम मोदी की वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग के साथ बैठक।

ईरान: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की औपचारिक मुलाकात।

चीन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय बैठक।

13 सितंबर: आखिरी दिन की कूटनीतिक मैराथन

सम्मेलन के अंतिम दिन यानी 13 सितंबर को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वैश्विक नेताओं के साथ बैक-टू-बैक बैठकों का दौर जारी रहेगा-

कजाकिस्तान: पीएम मोदी की कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट तोकायेव के साथ बैठक।

फिलिपिंस: पीएम मोदी और फिलिपिंस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड आर. मार्कोस जूनियर की मुलाकात।

मिस्र: पीएम मोदी की मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सिसी के साथ चर्चा।

दक्षिण अफ्रीका: पीएम मोदी और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति मातामेला सिरिल रामाफोसा की बैठक।

बुरुंडी: पीएम मोदी की बुरुंडी के राष्ट्रपति एवरिस्ट नदाहिशिमिये के साथ बातचीत।

नाइजीरिया: पीएम मोदी और नाइजीरिया के उपराष्ट्रपति सेनेटर कासिम शेट्टिमा की मुलाकात।

युगांडा: पीएम मोदी की युगांडा की उपराष्ट्रपति जेसिका अलुपो के साथ द्विपक्षीय बैठक।

11 से 13 सितंबर तक चलने वाली इन मैराथन मुलाकातों के जरिए भारत फूड और एनर्जी सिक्योरिटी, सप्लाई चेन को मजबूत बनाने, व्यापार, प्रौद्योगिकी और ग्लोबल गवर्नेंस में सुधार जैसे मुद्दों पर दुनिया के प्रमुख देशों के साथ आपसी सहयोग को नई दिशा देने की तैयारी में है।

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India-Russia Defence Deal : भारत को S-500 और Su-57 की पेशकश, रूस ने बढ़ाया रक्षा सहयोग का हाथ

India-Russia Defence Deal : भारत को S-500 और Su-57 की पेशकश, रूस ने बढ़ाया रक्षा सहयोग का हाथ

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भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग को लेकर एक बार फिर हलचल बढ़ गई है। रूस ने भारत के सामने अपने अत्याधुनिक S-500 Prometheus एयर डिफेंस सिस्टम और Su-57 पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट का प्रस्ताव रखा है। खबरों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की 31 अगस्त को बिश्केक में हुई मुलाकात के बाद रक्षा सहयोग पर चर्चा एक बार फिर केंद्र में है। दोनों नेताओं की नई दिल्ली में भी मुलाकात होने की संभावना है।

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रूस की नई पेशकश ऐसे समय में आई है जब भारत की रक्षा नीति तेजी से बदल रही है। एक तरफ भारत स्वदेशी रक्षा तकनीक और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दे रहा है, वहीं दूसरी ओर वायुसेना की तत्काल जरूरतें भी हैं। भारत को तय करना होगा कि S-500 जैसी विदेशी एयर डिफेंस प्रणाली की कितनी जरूरत है, जबकि Project Kusha जैसी स्वदेशी प्रणालियां आगे बढ़ रही हैं। 

IAF को यह भी तय करना होगा कि AMCA के आने तक इंतजार करना बेहतर है या Su-57 जैसे विदेशी पांचवीं पीढ़ी के फाइटर को अंतरिम विकल्प के तौर पर शामिल किया जाए। अंतिम फैसला केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात से नहीं होगा, लेकिन दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व से मिलने वाला राजनीतिक समर्थन बड़े रक्षा समझौतों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

S-400 के बाद S-500 पर रूस का फोकस

रूस भारत के साथ एयर और मिसाइल डिफेंस सहयोग को अगले स्तर पर ले जाने के लिए S-500 Prometheus का प्रस्ताव आगे बढ़ा रहा है। इससे पहले भारत द्वारा तैनात किए गए रूसी S-400 सिस्टम ने भी काफी ध्यान आकर्षित किया है। खबरों के मुताबिक ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तानी हवाई खतरों से निपटने के लिए S-400 सिस्टम का इस्तेमाल किया था। इसी अनुभव के बाद रूस अब भारत को अतिरिक्त S-400 सिस्टम देने के साथ S-500 पर भी चर्चा आगे बढ़ा रहा है।

 

मोदी-पुतिन मुलाकात से एक दिन पहले रूस की ओर से भारत को S-400 की पांच अतिरिक्त स्क्वाड्रन देने का प्रस्ताव रखे जाने की भी रिपोर्ट सामने आई। अगर यह प्रस्ताव स्वीकार होता है तो भारत के पास पहले से तय स्क्वाड्रन की संख्या में बड़ा इजाफा हो सकता है।

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S-500 खरीदना भारत के लिए कितना जरूरी?

 

भारत के सामने S-500 को लेकर फैसला आसान नहीं होगा। इसकी वजह यह है कि भारत खुद लंबी दूरी की एयर डिफेंस क्षमता विकसित कर रहा है। Project Kusha को S-400 श्रेणी की स्वदेशी एयर डिफेंस प्रणाली के तौर पर विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा भारत का बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस कार्यक्रम भी महत्वपूर्ण चरण में है। ऐसे में भारत को यह आकलन करना होगा कि S-500 वास्तव में किसी मौजूदा क्षमता की कमी को पूरा करेगा या फिर यह स्वदेशी प्रणालियों के साथ काफी हद तक समान भूमिका निभाएगा।

 

Su-57 पर भी भारत के सामने बड़ा फैसला

रूस की दूसरी बड़ी पेशकश Su-57 Felon पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर विमान है। रूस का यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब भारतीय वायुसेना लड़ाकू स्क्वाड्रनों की कमी से जूझ रही है और भारत का स्वदेशी Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) अभी ऑपरेशनल होने से कई साल दूर है।

 

रूस ने संकेत दिए हैं कि Su-57 के संभावित सौदे में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, स्थानीय स्तर पर उत्पादन और भारत में मैन्युफैक्चरिंग जैसे विकल्प शामिल हो सकते हैं। Su-57 को AMCA के उपलब्ध होने तक एक संभावित स्टॉपगैप विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, भारत के लिए इसे खरीदने में कीमत, लॉजिस्टिक्स, मेंटेनेंस और रणनीतिक जरूरतों जैसे कई पहलुओं पर विचार करना होगा।

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चीन और पाकिस्तान की पांचवीं पीढ़ी के फाइटर से बढ़ी चुनौती

भारत के सामने चुनौती इसलिए भी बढ़ रही है क्योंकि पड़ोसी देश भी स्टील्थ फाइटर क्षमता तेजी से बढ़ा रहे हैं।

चीन के पास बड़ी संख्या में J-20 स्टील्थ फाइटर होने का अनुमान है, जबकि पाकिस्तान को चीन से J-35 पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट मिलने की उम्मीद है। ऐसे में भारत के सामने अहम सवाल है कि क्या AMCA के आने तक इंतजार किया जाए या फिर अंतरिम अवधि के लिए किसी विदेशी पांचवीं पीढ़ी के फाइटर को शामिल किया जाए।

 

Su-57 से IAF के लिए बढ़ सकती है लॉजिस्टिक चुनौती

 

Su-57 को भारतीय वायुसेना में शामिल करने से एक और चुनौती सामने आ सकती है। IAF के बेड़े में पहले से ही कई अलग-अलग प्रकार के लड़ाकू विमान शामिल हैं। भारतीय वायुसेना के प्रमुख फाइटर बेड़े में Su-30MKI, MiG-29, Rafale, Mirage 2000, Jaguar और स्वदेशी Tejas शामिल हैं। हर नए फाइटर के लिए अलग पायलट ट्रेनिंग, स्पेयर पार्ट्स, हथियार, मेंटेनेंस, इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स की जरूरत होती है। ऐसे में Su-57 को शामिल करने से बेड़े का संचालन और जटिल हो सकता है।

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 S-500 और Su-57 के अलावा भी रूस की कई पेशकश

 

रूस की पेशकश केवल S-500 और Su-57 तक सीमित नहीं है। मॉस्को भारत के लिए Voronezh Strategic Early-Warning Radar पर भी सहयोग की संभावना तलाश रहा है। यह रडार लंबी दूरी से बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च और अन्य खतरों का पता लगाने के लिए बनाया गया है। इसके अलावा रूस, Hindustan Aeronautics Limited (HAL) के साथ भारत के Su-30MKI बेड़े के अपग्रेड और रूसी मूल की Kilo-class submarines के आधुनिकीकरण में भी सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

रूसी ड्रोन हमले से कीव के पास एक गोदाम में जोरदार ब्लास्ट, 27 की मौत, दर्जनों घायल

Russia-Ukraine War: यूक्रेन की राजधानी कीव के पास एक गोदाम में रूसी ड्रोन हमलों के कारण हुए धमाके में कम से कम 27 लोगों की मौत हो गई और दर्जनों लोग घायल हो गए। CNN की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस धमाके से आसपास के इलाके में काफी नुकसान हुआ है। वहीं, यूक्रेन के अधिकारियों ने बताया कि इस घटना के बाद रिहायशी इलाकों के पास गोला-बारूद रखने को लेकर भी काफी सवाल उठ रहे हैं।

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि धमाके से जुड़ी परिस्थितियों की जांच की जाएगी। वहीं, रूस ने कहा कि उसकी सेना ने हथियारों के एक ऐसे गोदाम को निशाना बनाया था, जहां ड्रोन बनाने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण रखे गए थे।

27 लोगों की मौत, बढ़ सकता है आंकड़ा

कीव क्षेत्र के सैन्य प्रशासन के प्रमुख, तिमुर तकाचेंको ने बताया कि इस घटना में कम से कम 27 लोगों की मौत हुई है। तकाचेंको ने कहा, “दुर्भाग्य से, अभी तक 27 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। और यह संख्या अंतिम नहीं हो सकती है।” उन्होंने मारे गए लोगों के परिवारों और प्रियजनों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की।

रिपोर्ट के मुताबिक, धमाके के बाद दर्जनों लोग घायल भी हुए। बता दें कि यह घटना तब हुई जब रूसी ड्रोन ने कीव के पास एक गोदाम पर हमला किया, जिससे हुए धमाके से उस जगह के आसपास भारी नुकसान हुआ।

जेलेंस्की ने दिए जांच के आदेश

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि रूसी ड्रोन ने गोदाम पर हमला किया, जिससे धमाका हुआ। हालांकि, उन्होंने गोदाम की जगह के बारे में कोई खास जानकारी नहीं दी, लेकिन कहा कि इस घटना की जांच की जाएगी।

उन्होंने रिहायशी इलाकों के पास गोला-बारूद रखने पर भी सवाल उठाए। रिपोर्ट के मुताबिक, जेलेंस्की ने कहा, “गोला-बारूद को घरों या दूसरे रिहायशी इलाकों के पास नहीं रखा जा सकता।”

उम्मीद है कि जांच में धमाके से जुड़ी परिस्थितियों और उस जगह पर सामान रखने के तरीके की पड़ताल की जाएगी।

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Russia-Ukraine War: यूक्रेन में लक्ष्मी मित्तल के स्टील प्लांट पर रूस का मिसाइल अटैक! 2 की मौत, ब्लास्ट-फर्नेस तबाह

Russian Attack on ArcelorMittal Ukraine: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। भारतीय मूल के अरबपति लक्ष्मी मित्तल के स्वामित्व वाले ‘आर्सेलरमित्तल’ (ArcelorMittal) के यूक्रेन स्थित विशाल स्टील प्लांट पर रूस ने भीषण मिसाइल हमला किया है। यह हमला यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के गृहनगर क्रिवी रिह (Kryvyi Rih) में स्थित प्लांट पर हुआ, जिसमें 2 लोगों की मौत हो गई और 14 कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गए।

रॉयटर्स के अनुसार, इस हमले से देश के सबसे बड़े स्टील प्लांट की पावर-जनरेशन और ब्लास्ट-फर्नेस इकाइयों को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे प्लांट का उत्पादन आंशिक रूप से रोकना पड़ा है।

ब्लास्ट-फर्नेस और पावर यूनिट तबाह, उत्पादन ठप

कंपनी ने मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम पर जारी एक बयान में पुष्टि की कि रात के समय हुए इस मिसाइल हमले ने प्लांट के मुख्य इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया। आर्सेलरमित्तल क्रिवी रिह ने कहा कि पावर जनरेशन और ब्लास्ट-फर्नेस सेक्टर की प्रमुख सुविधाएं बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिसके कारण विनिर्माण प्रक्रियाओं को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा है।

यह प्लांट यूक्रेन के सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक परिसरों में से एक है। ऊर्जा आपूर्ति और ब्लास्ट-फर्नेस को नुकसान पहुंचने से देश के स्टील उद्योग को बड़ा झटका लगा है।

राष्ट्रपति जेलेंस्की का गृहनगर बना निशाना, दागे 62 मिसाइलें

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि रूसी सेना नागरिक और औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर को लगातार निशाना बना रही है। जेलेंस्की के मुताबिक, पिछले केवल एक हफ्ते में ही रूस ने यूक्रेन के शहरों पर 1,550 से अधिक अटैक ड्रोन, करीब 1,560 गाइडेड एरियल बम और 62 मिसाइलें दागी हैं। क्रिवी रिह के अलावा कीव और अन्य शहरों में हुए हमलों में भी कई नागरिक घायल हुए हैं और इमारतों में आग लग गई।

रूस ने कीव और क्रिवी रिह के सैन्य-औद्योगिक ठिकानों को बनाया निशाना

रूसी रक्षा मंत्रालय ने हमले की पुष्टि करते हुए अपनी दलील दी कि उसने क्रिवी रिह के मेटलर्जिकल प्लांट और कीव में स्थित सैन्य-औद्योगिक सुविधाओं को ही निशाना बनाया था। इसके साथ ही मॉस्को ने दावा किया कि उसने अपनी सीमा की ओर आ रहे 822 यूक्रेनी ड्रोनों को हवा में ही मार गिराया है।

जवाब में यूक्रेन का रूस पर भीषण ड्रोन हमला

यूक्रेन ने भी रूस के अंदर गहराई तक जाकर लंबी दूरी के ड्रोनों से करारा पलटवार किया है। मॉस्को क्षेत्र के गवर्नर आंद्रेई वोरोब्योव के अनुसार, युद्ध की शुरुआत के बाद से यूक्रेन द्वारा किया गया यह अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला था, जिसमें 83 वर्षीय एक बुजुर्ग की मौत हो गई। पोडॉल्स्क में रूस की सबसे बड़ी ऑनलाइन रिटेलर ‘वाइल्डबेरीज’ (Wildberries) के एक बड़े गोदाम पर ड्रोन गिरा, जिससे वहां धुएं का विशाल गुबार उठता देखा गया।

बेलगोरोड शहर के पास एक बस पर हुए ड्रोन हमले में 1 व्यक्ति की मौत हुई, जबकि रोस्तोव (Rostov) क्षेत्र में यूक्रेन ने रूस की मिसाइल ईंधन उत्पादन इकाई को निशाना बनाने का दावा किया।

नाटो क्षेत्र में घुसा संदिग्ध रूसी ड्रोन, स्पेनिश लड़ाकू विमान ने मार गिराया

युद्ध का यह तनाव अब नाटो (NATO) देशों की सीमा तक पहुंच गया है। रोमानिया के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, मोलदोवा की दिशा से एक ड्रोन रोमानियाई हवाई क्षेत्र में घुस आया।

नाटो के एयर-पुलिसिंग मिशन पर तैनात स्पेनिश वायुसेना के F-18 फाइटर जेट ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उस ड्रोन को मार गिराया। नाटो प्रवक्ता के अनुसार यह एक संदिग्ध रूसी ड्रोन था। चालू वर्ष में रोमानियाई सीमा पर इस तरह की यह चौथी घटना है।

फ्रंटलाइन पर युद्ध की गति धीमी पड़ने और शांति वार्ताओं के अधर में लटके होने के कारण, अब रूस और यूक्रेन दोनों ही एक-दूसरे के ऊर्जा, औद्योगिक और आर्थिक ठिकानों को मिसाइल व ड्रोनों से नष्ट करने की रणनीति अपना रहे हैं। लक्ष्मी मित्तल के प्लांट पर हुआ यह हमला इस बात का प्रमाण है कि यह युद्ध अब वैश्विक और क्षेत्रीय व्यापार परिसंपत्तियों को भी भारी नुकसान पहुंचा रहा है।