India-Russia Defence Deal : भारत को S-500 और Su-57 की पेशकश, रूस ने बढ़ाया रक्षा सहयोग का हाथ

India-Russia Defence Deal : भारत को S-500 और Su-57 की पेशकश, रूस ने बढ़ाया रक्षा सहयोग का हाथ

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भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग को लेकर एक बार फिर हलचल बढ़ गई है। रूस ने भारत के सामने अपने अत्याधुनिक S-500 Prometheus एयर डिफेंस सिस्टम और Su-57 पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट का प्रस्ताव रखा है। खबरों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की 31 अगस्त को बिश्केक में हुई मुलाकात के बाद रक्षा सहयोग पर चर्चा एक बार फिर केंद्र में है। दोनों नेताओं की नई दिल्ली में भी मुलाकात होने की संभावना है।

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रूस की नई पेशकश ऐसे समय में आई है जब भारत की रक्षा नीति तेजी से बदल रही है। एक तरफ भारत स्वदेशी रक्षा तकनीक और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दे रहा है, वहीं दूसरी ओर वायुसेना की तत्काल जरूरतें भी हैं। भारत को तय करना होगा कि S-500 जैसी विदेशी एयर डिफेंस प्रणाली की कितनी जरूरत है, जबकि Project Kusha जैसी स्वदेशी प्रणालियां आगे बढ़ रही हैं। 

IAF को यह भी तय करना होगा कि AMCA के आने तक इंतजार करना बेहतर है या Su-57 जैसे विदेशी पांचवीं पीढ़ी के फाइटर को अंतरिम विकल्प के तौर पर शामिल किया जाए। अंतिम फैसला केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात से नहीं होगा, लेकिन दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व से मिलने वाला राजनीतिक समर्थन बड़े रक्षा समझौतों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

S-400 के बाद S-500 पर रूस का फोकस

रूस भारत के साथ एयर और मिसाइल डिफेंस सहयोग को अगले स्तर पर ले जाने के लिए S-500 Prometheus का प्रस्ताव आगे बढ़ा रहा है। इससे पहले भारत द्वारा तैनात किए गए रूसी S-400 सिस्टम ने भी काफी ध्यान आकर्षित किया है। खबरों के मुताबिक ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तानी हवाई खतरों से निपटने के लिए S-400 सिस्टम का इस्तेमाल किया था। इसी अनुभव के बाद रूस अब भारत को अतिरिक्त S-400 सिस्टम देने के साथ S-500 पर भी चर्चा आगे बढ़ा रहा है।

 

मोदी-पुतिन मुलाकात से एक दिन पहले रूस की ओर से भारत को S-400 की पांच अतिरिक्त स्क्वाड्रन देने का प्रस्ताव रखे जाने की भी रिपोर्ट सामने आई। अगर यह प्रस्ताव स्वीकार होता है तो भारत के पास पहले से तय स्क्वाड्रन की संख्या में बड़ा इजाफा हो सकता है।

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S-500 खरीदना भारत के लिए कितना जरूरी?

 

भारत के सामने S-500 को लेकर फैसला आसान नहीं होगा। इसकी वजह यह है कि भारत खुद लंबी दूरी की एयर डिफेंस क्षमता विकसित कर रहा है। Project Kusha को S-400 श्रेणी की स्वदेशी एयर डिफेंस प्रणाली के तौर पर विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा भारत का बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस कार्यक्रम भी महत्वपूर्ण चरण में है। ऐसे में भारत को यह आकलन करना होगा कि S-500 वास्तव में किसी मौजूदा क्षमता की कमी को पूरा करेगा या फिर यह स्वदेशी प्रणालियों के साथ काफी हद तक समान भूमिका निभाएगा।

 

Su-57 पर भी भारत के सामने बड़ा फैसला

रूस की दूसरी बड़ी पेशकश Su-57 Felon पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर विमान है। रूस का यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब भारतीय वायुसेना लड़ाकू स्क्वाड्रनों की कमी से जूझ रही है और भारत का स्वदेशी Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) अभी ऑपरेशनल होने से कई साल दूर है।

 

रूस ने संकेत दिए हैं कि Su-57 के संभावित सौदे में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, स्थानीय स्तर पर उत्पादन और भारत में मैन्युफैक्चरिंग जैसे विकल्प शामिल हो सकते हैं। Su-57 को AMCA के उपलब्ध होने तक एक संभावित स्टॉपगैप विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, भारत के लिए इसे खरीदने में कीमत, लॉजिस्टिक्स, मेंटेनेंस और रणनीतिक जरूरतों जैसे कई पहलुओं पर विचार करना होगा।

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चीन और पाकिस्तान की पांचवीं पीढ़ी के फाइटर से बढ़ी चुनौती

भारत के सामने चुनौती इसलिए भी बढ़ रही है क्योंकि पड़ोसी देश भी स्टील्थ फाइटर क्षमता तेजी से बढ़ा रहे हैं।

चीन के पास बड़ी संख्या में J-20 स्टील्थ फाइटर होने का अनुमान है, जबकि पाकिस्तान को चीन से J-35 पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट मिलने की उम्मीद है। ऐसे में भारत के सामने अहम सवाल है कि क्या AMCA के आने तक इंतजार किया जाए या फिर अंतरिम अवधि के लिए किसी विदेशी पांचवीं पीढ़ी के फाइटर को शामिल किया जाए।

 

Su-57 से IAF के लिए बढ़ सकती है लॉजिस्टिक चुनौती

 

Su-57 को भारतीय वायुसेना में शामिल करने से एक और चुनौती सामने आ सकती है। IAF के बेड़े में पहले से ही कई अलग-अलग प्रकार के लड़ाकू विमान शामिल हैं। भारतीय वायुसेना के प्रमुख फाइटर बेड़े में Su-30MKI, MiG-29, Rafale, Mirage 2000, Jaguar और स्वदेशी Tejas शामिल हैं। हर नए फाइटर के लिए अलग पायलट ट्रेनिंग, स्पेयर पार्ट्स, हथियार, मेंटेनेंस, इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स की जरूरत होती है। ऐसे में Su-57 को शामिल करने से बेड़े का संचालन और जटिल हो सकता है।

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 S-500 और Su-57 के अलावा भी रूस की कई पेशकश

 

रूस की पेशकश केवल S-500 और Su-57 तक सीमित नहीं है। मॉस्को भारत के लिए Voronezh Strategic Early-Warning Radar पर भी सहयोग की संभावना तलाश रहा है। यह रडार लंबी दूरी से बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च और अन्य खतरों का पता लगाने के लिए बनाया गया है। इसके अलावा रूस, Hindustan Aeronautics Limited (HAL) के साथ भारत के Su-30MKI बेड़े के अपग्रेड और रूसी मूल की Kilo-class submarines के आधुनिकीकरण में भी सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

रूसी ड्रोन हमले से कीव के पास एक गोदाम में जोरदार ब्लास्ट, 27 की मौत, दर्जनों घायल

Russia-Ukraine War: यूक्रेन की राजधानी कीव के पास एक गोदाम में रूसी ड्रोन हमलों के कारण हुए धमाके में कम से कम 27 लोगों की मौत हो गई और दर्जनों लोग घायल हो गए। CNN की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस धमाके से आसपास के इलाके में काफी नुकसान हुआ है। वहीं, यूक्रेन के अधिकारियों ने बताया कि इस घटना के बाद रिहायशी इलाकों के पास गोला-बारूद रखने को लेकर भी काफी सवाल उठ रहे हैं।

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि धमाके से जुड़ी परिस्थितियों की जांच की जाएगी। वहीं, रूस ने कहा कि उसकी सेना ने हथियारों के एक ऐसे गोदाम को निशाना बनाया था, जहां ड्रोन बनाने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण रखे गए थे।

27 लोगों की मौत, बढ़ सकता है आंकड़ा

कीव क्षेत्र के सैन्य प्रशासन के प्रमुख, तिमुर तकाचेंको ने बताया कि इस घटना में कम से कम 27 लोगों की मौत हुई है। तकाचेंको ने कहा, “दुर्भाग्य से, अभी तक 27 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। और यह संख्या अंतिम नहीं हो सकती है।” उन्होंने मारे गए लोगों के परिवारों और प्रियजनों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की।

रिपोर्ट के मुताबिक, धमाके के बाद दर्जनों लोग घायल भी हुए। बता दें कि यह घटना तब हुई जब रूसी ड्रोन ने कीव के पास एक गोदाम पर हमला किया, जिससे हुए धमाके से उस जगह के आसपास भारी नुकसान हुआ।

जेलेंस्की ने दिए जांच के आदेश

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि रूसी ड्रोन ने गोदाम पर हमला किया, जिससे धमाका हुआ। हालांकि, उन्होंने गोदाम की जगह के बारे में कोई खास जानकारी नहीं दी, लेकिन कहा कि इस घटना की जांच की जाएगी।

उन्होंने रिहायशी इलाकों के पास गोला-बारूद रखने पर भी सवाल उठाए। रिपोर्ट के मुताबिक, जेलेंस्की ने कहा, “गोला-बारूद को घरों या दूसरे रिहायशी इलाकों के पास नहीं रखा जा सकता।”

उम्मीद है कि जांच में धमाके से जुड़ी परिस्थितियों और उस जगह पर सामान रखने के तरीके की पड़ताल की जाएगी।

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Russia-Ukraine War: यूक्रेन में लक्ष्मी मित्तल के स्टील प्लांट पर रूस का मिसाइल अटैक! 2 की मौत, ब्लास्ट-फर्नेस तबाह

Russian Attack on ArcelorMittal Ukraine: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। भारतीय मूल के अरबपति लक्ष्मी मित्तल के स्वामित्व वाले ‘आर्सेलरमित्तल’ (ArcelorMittal) के यूक्रेन स्थित विशाल स्टील प्लांट पर रूस ने भीषण मिसाइल हमला किया है। यह हमला यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के गृहनगर क्रिवी रिह (Kryvyi Rih) में स्थित प्लांट पर हुआ, जिसमें 2 लोगों की मौत हो गई और 14 कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गए।

रॉयटर्स के अनुसार, इस हमले से देश के सबसे बड़े स्टील प्लांट की पावर-जनरेशन और ब्लास्ट-फर्नेस इकाइयों को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे प्लांट का उत्पादन आंशिक रूप से रोकना पड़ा है।

ब्लास्ट-फर्नेस और पावर यूनिट तबाह, उत्पादन ठप

कंपनी ने मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम पर जारी एक बयान में पुष्टि की कि रात के समय हुए इस मिसाइल हमले ने प्लांट के मुख्य इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया। आर्सेलरमित्तल क्रिवी रिह ने कहा कि पावर जनरेशन और ब्लास्ट-फर्नेस सेक्टर की प्रमुख सुविधाएं बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिसके कारण विनिर्माण प्रक्रियाओं को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा है।

यह प्लांट यूक्रेन के सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक परिसरों में से एक है। ऊर्जा आपूर्ति और ब्लास्ट-फर्नेस को नुकसान पहुंचने से देश के स्टील उद्योग को बड़ा झटका लगा है।

राष्ट्रपति जेलेंस्की का गृहनगर बना निशाना, दागे 62 मिसाइलें

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि रूसी सेना नागरिक और औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर को लगातार निशाना बना रही है। जेलेंस्की के मुताबिक, पिछले केवल एक हफ्ते में ही रूस ने यूक्रेन के शहरों पर 1,550 से अधिक अटैक ड्रोन, करीब 1,560 गाइडेड एरियल बम और 62 मिसाइलें दागी हैं। क्रिवी रिह के अलावा कीव और अन्य शहरों में हुए हमलों में भी कई नागरिक घायल हुए हैं और इमारतों में आग लग गई।

रूस ने कीव और क्रिवी रिह के सैन्य-औद्योगिक ठिकानों को बनाया निशाना

रूसी रक्षा मंत्रालय ने हमले की पुष्टि करते हुए अपनी दलील दी कि उसने क्रिवी रिह के मेटलर्जिकल प्लांट और कीव में स्थित सैन्य-औद्योगिक सुविधाओं को ही निशाना बनाया था। इसके साथ ही मॉस्को ने दावा किया कि उसने अपनी सीमा की ओर आ रहे 822 यूक्रेनी ड्रोनों को हवा में ही मार गिराया है।

जवाब में यूक्रेन का रूस पर भीषण ड्रोन हमला

यूक्रेन ने भी रूस के अंदर गहराई तक जाकर लंबी दूरी के ड्रोनों से करारा पलटवार किया है। मॉस्को क्षेत्र के गवर्नर आंद्रेई वोरोब्योव के अनुसार, युद्ध की शुरुआत के बाद से यूक्रेन द्वारा किया गया यह अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला था, जिसमें 83 वर्षीय एक बुजुर्ग की मौत हो गई। पोडॉल्स्क में रूस की सबसे बड़ी ऑनलाइन रिटेलर ‘वाइल्डबेरीज’ (Wildberries) के एक बड़े गोदाम पर ड्रोन गिरा, जिससे वहां धुएं का विशाल गुबार उठता देखा गया।

बेलगोरोड शहर के पास एक बस पर हुए ड्रोन हमले में 1 व्यक्ति की मौत हुई, जबकि रोस्तोव (Rostov) क्षेत्र में यूक्रेन ने रूस की मिसाइल ईंधन उत्पादन इकाई को निशाना बनाने का दावा किया।

नाटो क्षेत्र में घुसा संदिग्ध रूसी ड्रोन, स्पेनिश लड़ाकू विमान ने मार गिराया

युद्ध का यह तनाव अब नाटो (NATO) देशों की सीमा तक पहुंच गया है। रोमानिया के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, मोलदोवा की दिशा से एक ड्रोन रोमानियाई हवाई क्षेत्र में घुस आया।

नाटो के एयर-पुलिसिंग मिशन पर तैनात स्पेनिश वायुसेना के F-18 फाइटर जेट ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उस ड्रोन को मार गिराया। नाटो प्रवक्ता के अनुसार यह एक संदिग्ध रूसी ड्रोन था। चालू वर्ष में रोमानियाई सीमा पर इस तरह की यह चौथी घटना है।

फ्रंटलाइन पर युद्ध की गति धीमी पड़ने और शांति वार्ताओं के अधर में लटके होने के कारण, अब रूस और यूक्रेन दोनों ही एक-दूसरे के ऊर्जा, औद्योगिक और आर्थिक ठिकानों को मिसाइल व ड्रोनों से नष्ट करने की रणनीति अपना रहे हैं। लक्ष्मी मित्तल के प्लांट पर हुआ यह हमला इस बात का प्रमाण है कि यह युद्ध अब वैश्विक और क्षेत्रीय व्यापार परिसंपत्तियों को भी भारी नुकसान पहुंचा रहा है।

अब होर्मुज की टेंशन खत्म! रूस ने चली ऐसी चाल कि भारत तक बिना समुद्र पार किए पहुंचेगा माल, मॉस्को से नई दिल्ली तक बनेगी रेल लाइन?

Russia-India Rail Link: रूस अब भारत के साथ तेल कारोबार समेत अन्य व्यापार बढ़ाने के लिए समुद्री रास्तों पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक बेहद महत्वाकांक्षी विकल्प तलाश रहा है। रूस ने मॉस्को से भारत तक मध्य एशिया और दक्षिण एशिया के रास्ते एक ओवरलैंड रेलवे कनेक्शन की संभावनाओं पर विचार शुरू करने का संकेत दिया है। अगर यह विचार जमीन पर उतरता है, तो रूस से भारत तक सामान पहुंचाने के लिए एक ऐसा वैकल्पिक रूट तैयार हो सकता है, जो कई महत्वपूर्ण समुद्री चोकपॉइंट्स (संकरे समुद्री रास्तों) को दरकिनार करते हुए सीधे जमीन के रास्ते हिंद महासागर क्षेत्र तक पहुंच बनाएगा।

‘The Chenab Times’ के पास मौजूद जानकारी के अनुसार, रूस के उप प्रधानमंत्री मरात खुसनुलिन ने कथित तौर पर इस तरह के रेलवे कनेक्शन की संभावना की विस्तृत जांच की वकालत की है। रूसी न्यूज एजेंसी TASS के अनुसार, Marat Khusnullin ने हिंद महासागर तक पहुंच बनाने वाले रेल रूट की संभावनाओं का गंभीरता से अध्ययन करने की बात कही है। इस कदम का मकसद भारत और रूस के बीच व्यापार के रास्तों में विविधता लाना। साथ ही समुद्री चोकपॉइंट्स (संकरे समुद्री रास्तों) से जुड़े जोखिमों को कम करना है।

समुद्री रास्तों के जोखिम से परेशान रूस?

इस प्रस्ताव के पीछे सबसे बड़ा कारण दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री रूट में बढ़ती अस्थिरता और वहां पैदा होने वाले जोखिमों को माना जा रहा है। खुसनुलिन ने कथित तौर पर बोस्फोरस और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे रणनीतिक समुद्री रास्तों से जुड़े जोखिमों का उल्लेख किया। उनका संकेत था कि अगर भारत तक पहुंचने वाला कोई वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध हो सकता है, तो उसकी जांच की जानी चाहिए।

हाल के वर्षों में समुद्री मार्गों में युद्ध, राजनीतिक तनाव और सुरक्षा संकट के कारण वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ा है। ऐसे में रूस के लिए जमीन के रास्ते भारत और हिंद महासागर तक पहुंच बनाना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है।

कहां-कहां से गुजरेगी प्रस्तावित रेल लाइन?

सबसे चौंकाने वाली बात इस संभावित रूट को लेकर है। प्रस्तावित अवधारणा के तहत रेल कॉरिडोर को मध्य एशिया और दक्षिण एशिया के कई संवेदनशील देशों से होकर भारत तक लाने की संभावना पर विचार किया जा रहा है।

संभावित रूट में ये देश शामिल हो सकते हैं:-

रूस-तुर्कमेनिस्तान-ईरान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान-भारत…

हालांकि, अभी यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह कोई अंतिम रूप से मंजूर रेलवे प्रोजेक्ट नहीं है। रूस की तरफ से फिलहाल इसकी व्यवहार्यता और संभावित रूट की जांच की बात सामने आई है। अभी तक परियोजना की लागत, फंडिंग मॉडल, सटीक रेल रूट, निर्माण एजेंसियों या पूरा होने की समयसीमा को लेकर कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है।

भारत के लिए क्यों अहम है ये प्रोजेक्ट?

भारत के लिए इस प्रोजेक्ट का महत्व काफी ज्यादा है। भारत और रूस के बीच लंबे समय से ऊर्जा, रक्षा और व्यापारिक संबंध हैं। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संपर्क को मजबूत करने के लिए वैकल्पिक परिवहन मार्गों की जरूरत लगातार महसूस की जाती रही है। अगर रूस से भारत तक एक मजबूत ओवरलैंड रेल नेटवर्क तैयार होता है, तो दोनों देशों के बीच माल की आवाजाही के लिए समुद्री मार्गों पर निर्भरता कम हो सकती है। इससे रूस से भारत आने वाले ऊर्जा उत्पाद, कच्चा माल, मशीनरी, औद्योगिक सामान और अन्य वस्तुओं की आपूर्ति के लिए नए विकल्प पैदा हो सकते हैं।

INSTC के साथ जुड़ सकता है यह विचार

रूस लंबे समय से भारत तक पहुंच के लिए वैकल्पिक उत्तर-दक्षिण व्यापार रूट्स को बढ़ावा देने में रुचि रखता है। इसी व्यापक रणनीति में इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) जैसी परियोजनाओं को महत्वपूर्ण माना जाता है। प्रस्तावित रेल कनेक्शन इस तरह के उत्तर-दक्षिण संपर्क को एक नई दिशा दे सकता है। खासकर अगर मध्य एशिया, ईरान और दक्षिण एशिया के बीच रेल नेटवर्क को आपस में प्रभावी ढंग से जोड़ा जा सके। इससे रूस को भारत ही नहीं, बल्कि एशिया के अन्य तेजी से बढ़ते बाजारों तक भी पहुंच मजबूत करने का अवसर मिल सकता है।

पाकिस्तान बना सबसे बड़ी चुनौती

योजना सुनने में जितनी बड़ी है, इसे जमीन पर उतारना उतना ही मुश्किल हो सकता है। प्रस्तावित रूट्स जिन देशों से होकर गुजरता है, उनमें से प्रत्येक के सामने अलग-अलग राजनीतिक, सुरक्षा और बुनियादी ढांचे से जुड़ी चुनौतियां हैं। अफगानिस्तान में सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता एक बड़ी चुनौती है। वहीं, पाकिस्तान के साथ भारत के संबंधों को देखते हुए भारत तक रेल लाइन पहुंचाने के लिए जटिल राजनयिक और सुरक्षा समझौतों की आवश्यकता होगी। इसके अलावा पहाड़ी और कठिन भौगोलिक इलाकों में रेल लाइन का निर्माण अपने आप में बहुत महंगा और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

ईरान क्यों बन सकता है सबसे अहम कड़ी?

इस प्रस्ताव में ईरान की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। ईरान पहले से ही रूस और भारत के बीच वैकल्पिक व्यापार रूट्स की रणनीति में अहम स्थान रखता है। रूस के लिए ईरान के जरिए हिंद महासागर तक पहुंच बनाना समुद्री चोकपॉइंट्स पर निर्भरता कम करने का रास्ता हो सकता है। यही कारण है कि भारत, रूस और ईरान के बीच परिवहन संपर्क को मजबूत करने वाली परियोजनाओं को आने वाले वर्षों में रणनीतिक महत्व मिल सकता है।

रूस के निर्माण क्षेत्र में भी बड़ी क्षमता

इसी संदर्भ में खुसनुलिन ने रूस के निर्माण क्षेत्र को लेकर भी एक महत्वपूर्ण बात कही। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने संकेत दिया कि अगर कम से कम पांच साल के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जाएं तो रूस का निर्माण क्षेत्र हर साल अतिरिक्त 1 ट्रिलियन रूबल तक के निवेश को absorb करने में सक्षम है। इससे संकेत मिलता है कि रूस अपने परिवहन और बुनियादी ढांचे के विस्तार को केवल विदेश नीति के नजरिए से नहीं बल्कि घरेलू आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने के साधन के तौर पर भी देख रहा है।

क्या बदल सकता है पूरा क्षेत्रीय व्यापार समीकरण?

अगर कभी यह रेल कॉरिडोर वास्तविकता बनता है, तो इसका असर सिर्फ रूस और भारत तक सीमित नहीं रहेगा। यह मध्य एशिया को दक्षिण एशिया से जोड़ सकता है, ईरान को एक बड़े ट्रांजिट हब के रूप में मजबूत कर सकता है और भारत को यूरोप तथा रूस से आने वाले माल के लिए एक अतिरिक्त जमीनी संपर्क दे सकता है। साथ ही, रूस के लिए यह अपने व्यापार को ऐसे समुद्री मार्गों से दूर diversify करने का साधन बन सकता है, जहां युद्ध, राजनीतिक तनाव या भू-राजनीतिक संकट के कारण कभी भी व्यवधान पैदा हो सकता है।

अभी सपना, लेकिन रणनीतिक संकेत बेहद बड़ा

फिलहाल, मॉस्को से भारत तक इस प्रस्तावित रेल लाइन को घोषित और मंजूर प्रोजेक्ट नहीं माना जा सकता। क्योंकि इसकी आधिकारिक घोषणा से पहले सुरक्षा, लागत, फंडिंग और संबंधित देशों की राजनीतिक सहमति जैसे कई सवाल अभी बाकी हैं। लेकिन रूस द्वारा इस विकल्प पर सार्वजनिक रूप से विचार किए जाने का संकेत अपने आप में महत्वपूर्ण है।

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मॉस्को साफ तौर पर अपने व्यापारिक रास्तों को ज्यादा सुरक्षित और एशिया केंद्रित बनाने की कोशिश कर रहा है। इस रणनीति में भारत को एक बेहद महत्वपूर्ण बाजार और रणनीतिक साझेदार के तौर पर देखा जा रहा है। अगर रूस-भारत के बीच मध्य एशिया और दक्षिण एशिया के रास्ते ऐसा ओवरलैंड कॉरिडोर वास्तव में बन पाया, तो यह सिर्फ एक रेलवे लाइन नहीं होगी। बल्कि यूरेशिया के व्यापार समीकरण को बदलने वाला नया संपर्क रूट्स साबित हो सकता है।

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Lucky Rawat North Pole expedition: उत्तराखंड के लकी रावत जाएंगे नॉर्थ पोल, ‘आइसब्रेकर ऑफ नॉलेज’ में करेंगे भारत का प्रतिनिधित्व

Lucky Rawat North Pole expedition: महज 17 साल की उम्र में चकराता, उत्तराखंड के लकी रावत उत्तरी ध्रुव की 10 दिनों की यात्रा पर पा जा रहे हैं। इस यात्रा के लिए लकी का चुनाव तीन चरणों की प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के बाद किया गया है। यहां वह साइंस और कल्चरल गतिविधियों में 22 देशों के 14 से 16 की उम्र के बच्चों के साथ शामिल होंगे। लकी रावत ‘आइसब्रेकर ऑफ नॉलेज’ में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया है। नॉर्थ पोल के लिए यह 10 दिन का अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक और शैक्षिक खोज यात्रा है।

रूस के मरमांस्क से शुरू हुए इस एक्सपीडिशन में इंडिया, बांग्लादेश, चीन और रूस के छात्र एक साथ आए हैं। पार्टिसिपेंट्स न्यूक्लियर आइसब्रेकर 50 लेट पोबेडी पर सवार होकर ज्योग्राफिक नॉर्थ पोल (90° नॉर्थ लैटीट्यूड) जा रहे हैं। यहां वे विज्ञान आधारित सीखने की गतिविधियों और सांस्कृति आदान-प्रदान कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। लकी के लिए, यह सफर सिर्फ एक ट्रिप नहीं है। यह वैश्विक मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के छात्रों के साथ सीखने का मौका है।

लकी ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा कि उन्हें इस एक्सपीडिशन के लिए चुने जाने पर गर्व महसूस हो रहा है। उन्होंने कहा, “मैं उत्तराखंड के चकराता से हूं और इस एक्सपीडिशन के लिए भारत के दूत के तौर पर यहां आया हूं। यह 10 दिन का एक्सपीडिशन है, जिसमें हम नॉर्थ पोल जाएंगे। हम उन बहुत कम लोगों में से होंगे जो असल में नॉर्थ पोल पहुंचे हैं।”

इस एक्सपीडीशन की चयन प्रक्रिया काफी मुश्किल थी। लकी ने कहा कि छात्रों को तीन चरणों प्रतियोगिता को पार करना था, जिसके बाद हर हिस्सा लेने वाले देश से एक छात्र को अपने देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया। उन्होंने कहा, “तीन स्टेज का कॉम्पिटिशन क्लियर करने के बाद हर देश से एक छात्र को अपने देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया।”

उनके पिता, राम सिंह ने इस सिलेक्शन को परिवार के लिए गर्व का पल बताया। उन्होंने एएनआई को बताया, “मुझे अपने बेटे पर गर्व है कि उसने ऑनलाइन एग्जाम क्लियर किया और इंडिया को रिप्रेजेंट करने के लिए चुना गया। वह नॉर्थ पोल के लिए 10 दिन के एक्सपीडिशन पर जा रहा है।”

क्या है आइसब्रेकर ऑफ नॉलेज

‘आइसब्रेकर ऑफ नॉलेज’ एक अंतरराष्ट्रीय पहल है जिसका मकसद छात्रों में विज्ञान में दिलचस्पी जगाना है। साथ ही, कल्चरल एक्सचेंज और आर्कटिक के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देना है। यह प्रोग्राम युवा भागीदारों को दुनिया के सबसे दूर-दराज के इलाकों में से एक में जिंदगी का अनुभव करने और दुनिया भर के साथियों से बातचीत करने का मौका देता है। लकी की यह कामयाबी न सिर्फ उनके परिवार और उत्तराखंड के लिए गर्व की बात है, बल्कि यह इस बात का भी उदाहरण है कि कैसे भारतीय छात्र अपने टैलेंट, कड़ी मेहनत और पक्के इरादे से इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर पहचान बना रहे हैं।

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NEET protest case: NEET प्रोटेस्ट मामले में नया मोड़! रूस में होने के बावजूद बिहार के युवक पर FIR दर्ज, यूजर्स ने उठाए सवाल

NEET protest case: बिहार के किशनगंज जिले के एक युवक ने दावा किया है कि नीट पेपर लीक मामले को लेकर पिछले सप्ताह हुए विरोध प्रदर्शनों के संबंध में राज्य पुलिस ने उसके खिलाफ FIR दर्ज की है। जबकि वह पिछले चार महीने से रूस में रह रहा है। किशनगंज निवासी मोहम्मद सदाकत ने रूस से बनाया गया एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है, जो वायरल हो गया है। हालांकि, पीटीआई द्वारा संपर्क किए जाने पर किशनगंज के पुलिस अधीक्षक (SP) हरि मोहन शुक्ला ने न तो इस दावे की पुष्टि की और न ही खंडन किया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को कोई शिकायत है, वे पुलिस से संपर्क कर सकते हैं।

कथित वीडियो में मोहम्मद सदाकत ने अपने खिलाफ दर्ज मामले पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह बहादुरगंज में पिछले सप्ताह नीट पेपर लीक के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान मौजूद नहीं था, क्योंकि वह पिछले चार महीने से रूस में रह रहा है। उसने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और FIR से नाम हटाने की मांग की।

क्या बोली बिहार पुलिस?

एसपी शुक्ला ने सदाकत के कथित वीडियो के बारे में विशेष रूप से पूछे जाने पर न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, “प्रदर्शनों से संबंधित जिन लोगों को कोई शिकायत है, वे उसके निवारण के लिए पुलिस से संपर्क कर सकते हैं।” बता दें कि बिहार सरकार ने सोमवार को घोषणा की थी कि वह नीट पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शनों के सिलसिले में दर्ज सभी मामलों को वापस लेगी और विभिन्न आरोपों में जेल भेजे गए लोगों को रिहा करेगी।

राज्य के गृह विभाग की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया था कि 26 जुलाई को सुबह छह बजे से पहले हुई घटनाओं के संबंध में दर्ज सभी FIR, शिकायतें और कारण बताओ नोटिस वापस लिए जा रहे हैं। विभाग ने यह भी कहा था कि इस संबंध में गिरफ्तार किए गए सभी लोगों को तत्काल रिहा किया जाएगा। पिछले सप्ताह नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध में आयोजित बिहार बंद के दौरान कुल 694 लोगों को हिरासत में लिया गया था। इनमें लगभग आधे नाबालिग थे।

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युवक ने की जांच की मांग

वायरल वीडियो में मोहम्मद सदाकत ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि चूंकि वह चार महीने से रूस में रह रहे हैं, इसलिए उन्हें नीट प्रदर्शन में शामिल बताना गलत है। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि जांच के बाद यदि उनका दावा सही पाया जाए तो उनका नाम FIR से हटाया जाए। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद इस मामले को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं।

यूक्रेन के युद्धग्रस्त पोर्ट पर फंसे 13 भारतीय नाविक, ड्रोन और मिसाइल हमलों के बीच जान पर मंडरा रहा खतरा

Russia-Ukraine War: यूक्रेन के चोर्नोमोर्स्क (Chornomorsk) बंदरगाह पर खड़े मालवाहक जहाज MV AMIR1 पर सवार 13 भारतीय नाविकों समेत कुल 15 क्रू मेंबर युद्ध के बीच फंस गए हैं। यूक्रेन में लगातार हो रहे ड्रोन और मिसाइल हमलों के कारण इनकी जान पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया (FSUI) ने इस स्थिति को ‘बेहद भयावह और जानलेवा’ बताते हुए भारत सरकार समेत संबंधित अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप और सुरक्षित निकासी की मांग की है।

यूनियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी अपने बयान में कहा कि MV AMIR1 अभी भी चोर्नोमोर्स्क बंदरगाह पर खड़ा है। जबकि उसके आसपास लगातार ड्रोन और मिसाइल हमले हो रहे हैं। ऐसे में जहाज पर मौजूद भारतीय नाविक हर पल अपनी जान को लेकर भय के साये में जी रहे हैं।

हर पल सीधे हमले का खतरा

FSUI के मुताबिक, जहाज के आसपास लगातार ड्रोन और मिसाइलों की गतिविधियां देखी जा रही हैं। यूनियन ने कहा कि क्रू के सदस्य इस डर में रह रहे हैं कि किसी भी समय जहाज पर सीधा हमला हो सकता है। यूनियन ने जहाज के मालिकों, जहाज के फ्लैग स्टेट, संबंधित इंटरनेशनल समुद्री अधिकारियों और भारत सरकार से अपील की है कि नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उन्हें जल्द से जल्द वहां से सुरक्षित निकाला जाए। FSUI ने कहा कि भारतीय नाविकों को युद्ध क्षेत्र में आसान निशाना बनाकर नहीं छोड़ा जा सकता। अब तुरंत कार्रवाई की जानी चाहिए।

MEA पहले ही जता चुका है चिंता

FSUI की यह अपील ऐसे समय आई है जब एक दिन पहले ही विदेश मंत्रालय (MEA) ने ब्लैक सी क्षेत्र में भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर यूक्रेन के सामने गंभीर चिंता जताई थी। सोमवार को भारत ने यूक्रेन के राजदूत डॉ. ओलेक्सांद्र पोलिशचुक को तलब किया था। यह कदम यूक्रेन के ओडेसा (Odesa) बंदरगाह के पास कमर्शियल जहाज MV OMORFI पर हुए हमले के बाद उठाया गया, जिसमें चार भारतीय नाविक भी सवार थे।

कमर्शियल जहाजों पर हमलों की भारत ने की निंदा

विदेश मंत्रालय ने बताया कि MV OMORFI पर हुए हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई थी। भारत ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि व्यापारिक जहाजों पर हमले समुद्री सुरक्षा, नौवहन की स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए गंभीर खतरा हैं। भारत ने यूक्रेन से यह भी आग्रह किया कि नागरिक नाविकों को लेकर चलने वाले व्यापारिक जहाजों को किसी भी तरह के सैन्य हमलों का निशाना न बनाया जाए।

ब्लैक सी में बढ़ता खतरा

FSUI का कहना है कि ब्लैक सी क्षेत्र में काम कर रहे भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर लगातार चिंता बढ़ रही है। चोर्नोमोर्स्क बंदरगाह पर फंसे MV AMIR1 के चालक दल की सुरक्षित वापसी अब सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। यूनियन ने चेतावनी दी है कि जब तक इन नाविकों को सुरक्षित नहीं निकाला जाता, तब तक वे ड्रोन और मिसाइल हमलों के बीच लगातार जान जोखिम में डालकर रहने को मजबूर हैं।

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FSUI की नई अपील में संघर्ष से प्रभावित ब्लैक सी क्षेत्र में चल रहे मर्चेंट जहाजों पर काम करने वाले भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर लगातार चिंता जताई गई है। MV AMIR1 अभी भी चोर्नोमोर्स्क में खड़ा है। यूनियन ने क्रू की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उनकी तुरंत वापसी का इंतजाम करने के लिए तुरंत दखल देने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि नाविक बंदरगाह के आसपास बार-बार ड्रोन और मिसाइल हमलों के खतरे में रहते हैं।

JSW could acquire majority stake in Volkswagen’s India business

JSW and VW

JSW Group is in advanced talks to acquire a stake in Skoda Auto Volkswagen India, with the proposed deal potentially giving the Sajjan Jindal-led conglomerate a majority holding in Volkswagen AG’s India business, according to a Bloomberg report.

  1. Terms of the deal are yet to be finalised
  2. Skoda Auto Volkswagen India held 2.34 percent market share in FY2026
  3. JSW already owns 35 percent of JSW MG Motor India

The report says the proposed investment would bring fresh capital into Skoda Auto Volkswagen India, which oversees the group’s Skoda, Volkswagen, Audi, alongside luxury and super-luxury marques like Porsche, Lamborghini, and Bentley brands in the country. Both sides are aiming to reach an agreement in the coming weeks, although the terms are not settled and a transaction may not follow, the report said.

Volkswagen declines to comment

A Volkswagen spokesperson did not confirm the discussions, saying only that the company regularly evaluates opportunities to support its strategy in India’s passenger vehicle market. Bloomberg added that the terms of the proposed transaction are still being negotiated and may change before any agreement is reached.

What the deal could mean

If completed, the deal would mark JSW Group’s second major investment in India’s passenger vehicle industry after acquiring a 35 percent stake in MG Motor India from SAIC in 2023. The joint venture, JSW MG Motor India, began operations in 2024.

For Volkswagen, the investment could strengthen its position in India, where Skoda Auto Volkswagen India accounted for 2.34 percent of passenger vehicle sales in FY2026, according to FADA data. By comparison, Kia India held a 5.94 percent share, while JSW MG Motor India accounted for 1.40 percent. The additional investment could also support the group’s future product and business plans in the country.

India remains a focus market for Volkswagen 

India has become an increasingly important market for Volkswagen as it reshapes its global operations. According to the Bloomberg report, the company is looking to strengthen its presence outside Europe following its withdrawal from Russia and its planned exit from China.

With inputs from Dhruv Dhaka

JSW could acquire majority stake in Volkswagen’s India business

JSW and Skoda VW

JSW Group is in advanced talks to acquire a stake in Skoda Auto Volkswagen India, with the proposed deal potentially giving the Sajjan Jindal-led conglomerate a majority holding in Volkswagen AG’s India business, according to a Bloomberg report.

  1. Terms of the deal are yet to be finalised
  2. Skoda Auto Volkswagen India held 2.34 percent market share in FY2026
  3. JSW already owns 35 percent of JSW MG Motor India

The report says the proposed investment would bring fresh capital into Skoda Auto Volkswagen India, which oversees the group’s Skoda, Volkswagen, Audi, alongside luxury and super-luxury marques like Porsche, Lamborghini, and Bentley brands in the country. Both sides are aiming to reach an agreement in the coming weeks, although the terms are not settled and a transaction may not follow, the report said.

Volkswagen declines to comment

A Volkswagen spokesperson did not confirm the discussions, saying only that the company regularly evaluates opportunities to support its strategy in India’s passenger vehicle market. Bloomberg added that the terms of the proposed transaction are still being negotiated and may change before any agreement is reached.

What the deal could mean

If completed, the deal would mark JSW Group’s second major investment in India’s passenger vehicle industry after acquiring a 35 percent stake in MG Motor India from SAIC in 2023. The joint venture, JSW MG Motor India, began operations in 2024.

For Volkswagen, the investment could strengthen its position in India, where Skoda Auto Volkswagen India accounted for 2.34 percent of passenger vehicle sales in FY2026, according to FADA data. By comparison, Kia India held a 5.94 percent share, while JSW MG Motor India accounted for 1.40 percent. The additional investment could also support the group’s future product and business plans in the country.

India remains a focus market for Volkswagen 

India has become an increasingly important market for Volkswagen as it reshapes its global operations. According to the Bloomberg report, the company is looking to strengthen its presence outside Europe following its withdrawal from Russia and its planned exit from China.

With inputs from Dhruv Dhaka