Stock Market Rise: इन 3 वजहों से शेयर बाजार में रौनक! सेंसेक्स 850 अंक उछला, निफ्टी 22500 के पार

Stock Market Rise: गुरुवार के चौतरफा बिकवाली के बाद शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार ने जोरदार बाउंस-बैक किया है। पिछले सत्र में निचले स्तरों पर जाने के बाद ओवरसोल्ड जोन से आई ‘वैल्यू बाइंग’ और आईटी शेयरों में मची तूफानी खरीदारी के दम पर दोनों मुख्य सूचकांक हरे निशान में ट्रेड कर रहे हैं।

सुबह 10:22 बजे, सेंसेक्स 737.26 अंक (1.02%) की मजबूत बढ़त के साथ 72,330.50 और निफ्टी 50 भी 243.20 अंक (1.09%) चढ़कर 22,475.00 के स्तर पर पहुंच गया है। इसके अलावा, निफ्टी बैंक 610 अंक (1.11%) सुधरकर 55,125.50 पर और मिडकैप 100 इंडेक्स 732 अंक (1.26%) चढ़कर 58,615.30 पर आ गया है। अमेरिकी वायदा बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों ने निवेशकों के भरोसे को और मजबूत किया है।

Stock Market Live Update: सेंसेक्स 700 अंक चढ़ा, निफ्टी 22,450 पर, TCS, Apollo Hospitals शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी

बाजार का सेंटिमेंट पूरी तरह बदलने की सबसे बड़ी वजह दिग्गज आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के दूसरी तिमाही (Q2 FY27) के शानदार नतीजे रहे, जिससे निफ्टी आईटी इंडेक्स में 3.45% (958 अंक) का उछाल आया। टीसीएस के शेयर में करीब 4% की तेजी ने पूरे बाजार को सहारा दिया।

शेयर बाजार में रौनक लौटने की 3 मुख्य वजहें

1. आईटी शेयरों में जोरदार खरीदारी: दिग्गज आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के दूसरी तिमाही (Q2 FY27) में 15% मुनाफा बढ़कर ₹13,884 करोड़ रहने और ₹12 प्रति शेयर डिविडेंड के ऐलान से आईटी शेयरों में शानदार तेजी आई है। टीसीएस का शेयर करीब 4% उछला, जिसने पूरे निफ्टी आईटी इंडेक्स को 3.45% मजबूत कर दिया।

2. टेक्निकल बाउंस-बैक: बीते सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी में 1,000 से ज्यादा अंकों की गिरावट के बाद बाजार ओवरसोल्ड जोन में चला गया था। निचले स्तरों पर निवेशकों और संस्थागत खरीदारों की ओर से आई ‘वैल्यू बाइंग’ ने बाजार को सहारा दिया है।

3. वैश्विक बाजारों से मजबूत संकेत: अमेरिकी वायदा बाजारों में 0.5% तक की बढ़त देखी गई, जिसने घरेलू बाजार के सेंटिमेंट को बूस्ट करने का काम किया है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Market cues : 22000 के मनोवैज्ञानिक लेवल पर भी मंडरा रहा खतरा, 21700 तक फिसल सकता है निफ्टी

Trade setup for today : 8 अक्टूबर को निफ्टी पर मदड़ियों का दबदबा बना रहा। यह 1.64 प्रतिशत गिरा और लगातार एक और सेशन में इसमें गिरावट जारी रही। मोमेंटम इंडिकेटर ‘बेयरिश’ जोन में बने रहे। जबकि इंडेक्स सभी अहम मूविंग एवरेज से काफी नीचे ट्रेड करता रहा। तेल की ऊंची कीमतें, रुपये में कमजोरी, FII की लगातार बिकवाली और इंडिया VIX का 15 के स्तर से ऊपर जाना भी मार्केट सेंटीमेंट पर भारी पड़ा। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर निफ्टी गुरुवार के 22,180 के निचले स्तर को साफ तौर पर तोड़ता है तो मंदड़िए 22,000 के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर को टारगेट कर सकते हैं और उसके बाद निफ्टी अप्रैल 2025 के निचले स्तर 21,700 तक जा सकता है। ऊपर की तरफ,22,400 एक शुरुआती रेजिस्टेंस बन सकता है और उसके बाद 22,600-22,700 का जोन बड़े रेजिस्टेंस का काम कर सकता है।

यहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी।

निफ्टी 50 (22,232) के लिए अहम लेवल

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस : 22,497, 22,596 और 22,756

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 22,177, 22,078 और 21,918

निफ्टी स्पेशल फॉर्मेशन

निफ्टी 50 पिछले 18 महीनों के सबसे निचले क्लोजिंग स्तर पर पहुंच गया और डेली टाइमफ्रेम पर एक लंबी लाल कैंडल बनाई,जो बाजार में भारी गिरावट के दबाव का संकेत है। 10, 20, 50, 100 और 200-दिन के EMA सभी नीचे की ओर झुके हुए थे। RSI सुपर-बेयरिश जोन में बना रहा और 30 से गिरकर 27.55 पर आ गया, जबकि MACD सिग्नल लाइन के नीचे रहा और हिस्टोग्राम में एक बढ़ती हुई लाल पट्टी दिखाई दी। कुल मिलाकर ये संकेत लगातार मंदी के रुझान की ओर इशारा करते हैं और बताते हैं कि इंडेक्स पर निकट भविष्य में दबाव बना रह सकता है।

बैंक निफ्टी (54,515) के लिए अहम लेवल

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 54,899, 55,055 और 55,307

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 54,395, 54,239 और 53,987

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर रेजिस्टेंस: 55,897, 57,285

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर सपोर्ट: 54,053, 52,784

बैंक निफ्टी स्पेशल फॉर्मेशन

गुरुवार को 1 प्रतिशत की गिरावट के बाद बैंक निफ्टी पिछले हफ़्ते के क्लोजिंग लेवल के करीब आ गया। बैंकिंग इंडेक्स ने डेली चार्ट पर एक लंबी बेयरिश कैंडल बनाई और सभी अहम मूविंग एवरेज से नीचे बना रहा,जो लगातार बनी कमजोरी को दिखाता है। RSI गिरकर 40 के ज़ोन से नीचे 36.45 पर आ गया,जबकि MACD जो अपनी सिग्नल लाइन की ओर ऊपर की तरफ बढ़ रहा था,सिग्नल लाइन से नीचे ही बना रहा। हालांकि,MACD हिस्टोग्राम लगातार छठे सेशन में भी मंदी के रुझान (बेयरिश मोमेंटम) में कमी दिखाता रहा। कुल मिलाकर ये इंडिकेटर बताते हैं कि मंदी का दबाव बना हुआ है,भले ही यह दबाव धीरे-धीरे कम हो रहा हो।

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो (करोड़ रुपए में)

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इंडिया VIX

मार्केट में संभावित उतार-चढ़ाव को मापने वाला इंडिया VIX कल 10.01% बढ़कर 15.275 पर पहुंच गया। यह 11 जून, 2026 के बाद इसका सबसे ऊंचा क्लोजिंग लेवल है। यह सभी अहम मूविंग एवरेज से ऊपर बना हुआ है, जो बुल्स के बीच बढ़ती बेचैनी का संकेत है। 15 के लेवल से ऊपर बने रहने पर बुल्स पर दबाव बना रह सकता है।

Market Trend : बाजार में और बढ़ सकती है गिरावट, इस डिफेंस स्टॉक में बिकवाली करके बनाए जा सकते हैं पैसे

पुट कॉल रेशियो

बाजार के मूड को दर्शाने वाला निफ्टी पुट-कॉल रेशियो 8 अक्टूबर को गिरकर 0.73 पर आ गया, जबकि पिछले सेशन में यह 0.89 था। गौरतलब है कि 0.7 से ऊपर या 1 को पार पीसीआर का जाना आम तौर पर तेजी की भावना का संकेत माना जाता है। जबकि 0.7 से नीचे या 0.5 की ओर गिरने वाला अनुपात मंदी की भावना का संकेत होता है।

F&O बैन के अंतर्गत आने वाले स्टॉक

F&O सेगमेंट के अंतर्गत प्रतिबंधित प्रतिभूतियों में वे कंपनियां शामिल होती हैं, जिनके डेरिवेटिव अनुबंध मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाती हैं।

एफएंडओ प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक: कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक: अंबुजा सीमेंट्स, बंधन बैंक, LIC हाउसिंग फाइनेंस

एफएंडओ प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक: SAIL

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stock Market Fall: 7 वजह, Sensex लाल, Nifty आया 22500 के नीचे, IT Sector की कोशिश फेल

Stock Market Fall: ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता जैसी चुनौतियों से जूझ रहे शेयर मार्केट को रेपो रेट में बढ़ोतरी ने और झटका दिया। इसके आसार पहले से ही थे लेकिन आरबीआई ने महंगाई के अपने आउटलुक को भी बढ़ाया तो इससे मार्केट पर दबाव बढ़ाया। इंट्रा-डे में आज सेंसेक्स 384 प्वाइंट्स टूट गया तो निफ्टी भी फिसलकर 22500 के नीचे आ गया। ब्रोडर लेवल पर भी बिकवाली का खासा दबाव है और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में आधे-आधे फीसदी से अधिक की गिरावट है।

अभी की बात करें तो फिलहाल 09:40 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 339.85 प्वाइंट्स यानी 0.47% की गिरावट के साथ 72298.85 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 113.05 प्वाइंट्स यानी 0.50% की गिरावट के साथ 22,490.00 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 384.47 प्वाइंट्स गिरकर 72,254.23 और निफ्टी भी 127.30 प्वाइंट्स टूटकर 22,475.75 तक आ गया था।

Stock Market Fall: ये है वजह

बॉन्ड यील्ड में उछाल

लंबी अवधि की ट्रेजरी यील्ड में फिर से बढ़ोतरी शुरू होने से महंगाई और बढ़ते कर्ज को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गईं हैं। इसने पूरे एशियाई मार्केट में दबाव बना दिया, जिसकी आंच घरेलू स्टॉक मार्केट में भी महसूस हुई।

कच्चे तेल में उबाल

खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर बढ़ते हमलों ने पश्चिमी एशिया से सप्लाई को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ा दी हैं। इस चिंता के बीच ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड उछलकर प्रति बैरल $102 के पार पहुंचा तो इसकी आंच में मार्केट झुलस गया।

विदेशी निवेशकों की लगातार नवें दिन बिकवाली

FIIs ने लगातार नवें कारोबारी दिन बुधवार 8 अक्टूबर को ₹6,121.37 करोड़ के नेट शेयर बेचे। इससे बाजार में दबाव बना हुआ है।

Sensex की एक्सपायरी

आज सेंसेक्स के डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स यानी F&O (फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस) की वीकली एक्सपायरी है, जिसका असर मार्केट पर दिख रहा है।

Repo Rate में बढ़ोतरी पर मेटल-रियल्टी सेक्टर में दबाव

आरबीआई ने रेपो रेट में लंबे समय बाद फिर से बढ़ोतरी की और इसे 5.25% से बढ़ाकर 5.50% किया तो लगातार दूसरे दिन इसकी आंच ऑटो, मेटल और रियल्टी सेक्टर में महसूस हुई। मेटल और रियल्टी सेक्टर के निफ्टी इंडेक्स तो 1-1% से अधिक टूट गए तो निफ्टी ऑटो आधे फीसदी से अधिक कमजोर हुआ है। बैंकिंग और फार्मा सेक्टर में भी बिकवाली का दबाव है। वहीं निफ्टी आईटी में 1% से अधिक बढ़त है।

महंगाई बढ़ने की आशंका

आरबीआई ने ग्रोथ के अनुमान को बढ़ाया है तो महंगाई के भी अनुमान को बढ़ा दिया, जिससे मार्केट पर दबाव बढ़ा। महंगाई को लेकर आरबीआई ने कमजोर मॉनसून, अल-नीनो की स्थिति और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से पैदा होने वाले सप्लाई-साइड रिस्क की तरफ इशारा किया। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए खुदरा महंगाई यानी CPI के अनुमान को 5% से बढ़ाकर 5.2% कर दिया। दूसरी तिमाही के अनुमान को 4.7% से बढ़ाकर 4.9%, तीसरी तिमाही के लिए 5.9% से 6% और चौथी तिमाही के लिए 5.5% से 5.7% कर दिया। वित्त वर्ष 2028 की पहली तिमाही के लिए भी अनुमान 5.3% से बढ़ाकर 5.6% कर दिया गया है।

टेक्निकल आउटलुक

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का कहना है कि रेपो रेट में बढ़ोतरी और महंगाई बढ़ने की आशंकाओं ने मार्केट पर दबाव बनाया है। उनका कहना है कि जब FII का निवेश स्थिर नहीं हो जाता या US ट्रेजरी यील्ड कम नहीं हो जाती,तब तक घरेलू इक्विटी में और बिकवाली का जोखिम बना रह सकता है। पोनमुडी के मुताबिक निफ्टी के लिए 22,750-22,800 का लेवल तत्काल रेजिस्टेंस जोन है। अगर निफ्टी लगातार 22,800 के ऊपर बना रहता है तो ही यह 23,000 की तरफ रिकवरी में मदद कर सकता है। नीचे की तरफ 22,500 तत्काल सपोर्ट लेवल है। अगर यह लेवल टूटता है तो इंडेक्स 22,400-22,200 तक जा सकता है। जब तक निफ्टी 22,800 के नीचे ट्रेड कर रहा है, तब तक शॉर्ट-टर्म टेक्निकल आउटलुक में सावधानी बरतने की जरूरत है।

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RBI MPC: तेजी से बढ़ रही ग्रोथ, आरबीआई की सख्ती, शेयर दबाव में, अब आगे क्या?

केंद्रीय बैंक आरबीआई (RBI) ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट्स की कटौती की और इसे 5.5% कर दिया। मार्केट को इसने हैरान नहीं किया, क्योंकि इसकी उम्मीद पहले से ही थी। हालांकि कुछ और बातें ऐसी रही, जिसने मार्केट का ध्यान अपनी तरफ खींचा। आरबीआई ने ग्रोथ का अनुमान तेजी से बढ़ाया तो दूसरी तरफ महंगाई का भी अनुमान बढ़ाया है और साथ ही अपना रुख न्यूट्रल से कैलिब्रेटेड टाइटनिंग कर दिया है। आरबीआई ने इस वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया तो महंगाई का अनुमान भी 5% से बढ़ाकर 5.2% किया।

मार्केट में मिला-जुला रुझान

आरबीआई के रुझान से मार्केट को मिला-जुला संकेत मिला। जीडीपी अपग्रेड निश्चित रूप से कंपनियों की कमाई के लिए अच्छी बात है लेकिन महंगाई के अनुमान में बढ़ोतरी और मौद्रिक नीतियों की सख्ती से यह संकेत मिला कि दरों में आगे भी बढ़ोतरी की संभावना है। आरबीआई गवर्नर ने भी ऐसे संकेत दिए हैं।

वैसे मार्केट पहले से ही कमजोर है। पिछले महीने सितंबर में निफ्टी 6.1% गिरकर 22,620 तक आ गया था, जोकि मार्च के बाद इसकी सबसे बड़ी मासिक गिरावट थी तो सेंसेक्स 5.8% गिरकर 72,480 पर आ गया। साथ ही अक्टूबर में एंट्री करते ही इसने लगातार आठ हफ्तों की लगातार गिरावट दिखाई, जो 25 वर्षों में इसकी सबसे लंबी गिरावट रही। आरबीआई के 5 अगस्त के पॉलिसी पॉज के बाद इंडेक्स लगभग 7.5% गिर चुका है।

अब आगे क्या

आरबीआई ने अपने आउटलुक से यह संकेत दिया है कि इसका फोकस फिलहाल इनफ्लेशन पर है। वैसे भी जून 2026 तिमाही में भारतीय इकॉनमी 7.8% की रफ्तार से बढ़ी थी जोकि आरबीआई के पहले के अनुमान 7% से अधिक रही। अब आरबीआई ने पूरे वित्त वर्ष 2027 के लिए ग्रोथ के अनुमान को बढ़ाकर 7.1% कर दिया। इसका मतलब है कि कंपनियों की मांग और रेवेन्यू की ग्रोथ मजबूत रह सकती है।

अब सबसे बड़ी परीक्षा सितंबर तिमाही के नतीजे को लेकर है। निफ्टी 50 की कंपनियों से रेवेन्यू और मुनाफे में सालाना करीब 20% के ग्रोथ की उम्मीद है। हालांकि तेल और कच्चे माल की लागत में उछाल से रेवेन्यू में बढ़ोतरी का पूरा फायदा प्रॉफिट में नहीं बदल सकता है और कुछ एनालिस्ट्स का मानना है कि ऑपरेटिंग मार्जिन में सालाना आधार पर सितंबर तिमाही में 100-150 बीपीएस की गिरावट आ सकती है।

ऐसे में असली सवाल ये रहेगा कि कंपनियां बढ़ती लागत को कितना सोख सकती है और ईबीआईटीडीए मार्जिन कितना बचा सकती हैं। सितंबर तिमाही के कारोबारी नतीजे पर तो मार्केट की नजर रहेगी ही लेकिन इसके अलावा आगे यह भी देखना होगा कि मैनेजमेंट की कमेंट्री क्या रहती है, क्या कंपनियों के पास प्राइसिंग पावर है, और वित्त वर्ष 2027 में डिमांड कैसी रहती है।

फिलहाल तो इस समय सबसे बड़ा रिस्क कच्चा तेल भी है। ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड उछलकर प्रति बैरल $101 के पार चला गया क्योंकि इससे इनफ्लेशन, करंट अकाउंट, रुपये और कॉरपोरेट मार्जिन- चारों पर दबाव पड़ता है। दूसरी तरफ अमेरिका और भारत में बॉल्ड यील्ड ऊंची है, जिससे विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय मार्केट में निवेश का क्रेज फीका पड़ सकता है। अमेरिका में 10-साल का ट्रेजरी यील्ड उछलकर करीब 5.3% और भारत में 10-साल का गवर्नमेंट बॉन्ड यील्ड 7.2% पर पहुंच गया। इससे रुपये पर दबाव बढ़ रहा है। DIIs की खरीदारी और एसआईपी फ्लो ने एक जरूरी सहारा दिया है, लेकिन यूएस यील्ड में बढ़ोतरी, कमजोर रुपए और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों की वजह से विदेशी पैसे की तेजी से वापसी मुश्किल हो गई है।

कंक्लूजन

बाजार का समीकरण बदल चुका है। 7.1% GDP ग्रोथ से कमाई का निचला स्तर तय होता है तो महंगाई की 5.2% की रफ्तार और 5.5% रेपो रेट से वैल्यूएशन रीरेटिंग की ऊपरी सीमा तय होती है। सितंबर में निफ्टी पहले ही लगभग 6% और अगस्त की पॉलिसी के बाद से लगभग 8% गिर चुका है, इसलिए अगला दौर इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या कंपनी की कमाई उम्मीदों से बेहतर हो सकती है। फिलहाल आरबीआई ने सस्ते कर्ज की संभावना खत्म कर दी है तो इक्विटी को बड़े बदलाव की जरूरत है। खास बात ये है कि भारत का ग्रोथ इंजन बना हुआ है लेकिन कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, कई वर्षों के हाई लेवल के करीब ग्लोबल बॉन्ड यील्ड और मार्जिन पर दबाव से कंपनियों की मजबूत कमाई के बावजूद शेयरों का जोश फीका हो सकता है।

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RBI ने 25 बीपीएस बढ़ाया रेपो रेट

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RBI पॉलिसी के दिन क्या बाजार बनाएगा बॉटम या फिर होगा ट्रैप, जानें गिफ्ट निफ्टी से कैसे मिल रहे है संकेत

Gity Nifty Indicator: बुधवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के निचले स्तर पर खुलने की संभावना है। GIFT निफ्टी में लगभग 100 अंकों की गिरावट आई है, जो लगातार 2 सत्रों की बढ़त के बाद कमजोर शुरुआत का संकेत है। एशियाई बाजारों में गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल बाजार की धारणा पर असर डाल सकते हैं, भले ही वॉल स्ट्रीट के S&P 500 और नैस्डैक ने रात भर रिकॉर्ड ऊंचाई पर कारोबार बंद किया हो। निवेशक आज बाद में आने वाले भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति के फैसले से पहले भी सतर्क रहेंगे।

GIFT निफ्टी सुबह 8 बजे के आसपास 22,677 पर कारोबार कर रहा था, जो 97 अंक या 0.43 फीसदी नीचे था। मंगलवार को भारतीय इक्विटी ने लगातार दूसरे सत्र में अपनी बढ़त जारी रखी, जिसमें व्यापक खरीदारी और सकारात्मक वैश्विक संकेतों ने मदद की। सेंसेक्स 685.34 अंक या 0.95 प्रतिशत बढ़कर 73,067.81 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 220.35 अंक या 0.98 प्रतिशत बढ़कर 22,776.10 पर पहुंच गया।

वैश्विक स्थिति मिली-जुली है। अमेरिकी शेयरों में रिकॉर्ड तेजी आई क्योंकि ट्रेजरी यील्ड में कमी आई और निवेशकों ने अपना ध्यान आगामी अर्निंग सीजन की ओर लगाया, लेकिन एशियाई इक्विटी वॉल स्ट्रीट की तरह ऊपर नहीं जा सकीं। इस बीच, आपूर्ति संबंधी चिंताओं के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत फिर से $101 प्रति बैरल से ऊपर चली गई।

हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार आठवें सत्र में बिकवाली करते रहे, हालांकि बिकवाली की गति धीमी रही। FII ने 2,961 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 5,000 करोड़ रुपये से अधिक के शेयर खरीदे।

वॉल स्ट्रीट के रिकॉर्ड के बावजूद एशियाई बाजारों में गिरावट

प्रमुख अमेरिकी सूचकांकों के रिकॉर्ड स्तर पर बंद होने के बावजूद बुधवार को एशियाई इक्विटी में गिरावट के साथ कारोबार हुआ, जिसमें MSCI एशिया पैसिफिक इंडेक्स 0.4 फीसदी गिर गया। जापानी और दक्षिण कोरियाई इक्विटी में गिरावट आई, जबकि ताइवान में बढ़त के साथ कारोबार हुआ। जापान का Topix 0.3 फीसदी गिरा, हांगकांग का Hang Seng 0.6 फीसदी नीचे आया, और ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 लगभग स्थिर रहा। Nikkei 225 फ्यूचर्स में 0.5 फीसदी की गिरावट आई। US इक्विटी फ्यूचर्स काफी हद तक स्थिर रहे, एशियाई कारोबार में S&P 500 फ्यूचर्स में कोई खास बदलाव नहीं हुआ।

S&P 500 और Nasdaq रिकॉर्ड ऊंचाई पर बंद हुए

मंगलवार को US शेयरों में तेजी आई क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें स्थिर हो गईं और ट्रेजरी यील्ड में कमी आई, जिससे निवेशकों का ध्यान तीसरी तिमाही के आने वाले अर्निंग्स सीज़न की ओर गया। हाल के हफ्तों में कर्ज लेने की ऊंची लागत ने जोखिम लेने की इच्छा पर असर डाला था, ऐसे में US ट्रेजरी यील्ड में कमी से कुछ राहत मिली।

इस व्यापक तेजी ने S&P 500 और Nasdaq को रिकॉर्ड क्लोजिंग ऊंचाई पर पहुंचा दिया। S&P 500 में 0.58 प्रतिशत की बढ़त के साथ यह 7,818.95 पर पहुंच गया, जबकि Nasdaq Composite 0.45 फीसदी बढ़कर 27,599.79 पर बंद हुआ। Dow Jones Industrial Average में 0.49 फीसदी की बढ़त हुई और यह 51,521.04 पर पहुंच गया।

RBI की पॉलिसी पर नजर

आज बाद में आने वाला भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी का फैसला घरेलू बाजार के लिए मुख्य कारक होगा। Enrich Money के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि भारतीय इक्विटी में रिकवरी वैश्विक मैक्रो-इकोनॉमिक और जियो-पॉलिटिकल माहौल में बदलाव के प्रति संवेदनशील बनी हुई है। उन्होंने कहा कि जियो-पॉलिटिकल जोखिम ऊंचे बने हुए हैं, जबकि कच्चे तेल की कीमतें हाल के निचले स्तरों से थोड़ी सुधरी हैं।

इंडेक्स पर कहां रखें नजर

पोनमुडी Nifty के लिए 22,800 को तत्काल रेजिस्टेंस (बाधा) मानते हैं; अगर लगातार ब्रेकआउट होता है, तो रिकवरी 23,000 तक बढ़ सकती है। नीचे की ओर, 22,600 तत्काल सपोर्ट है, जिसके बाद 22,400 का स्तर आता है। हालिया उछाल के बाद निकट-अवधि का टेक्निकल आउटलुक ‘सावधानी के साथ सकारात्मक’ (cautiously positive) हो गया है, हालांकि रिकवरी को मजबूत करने के लिए 22,800 और उसके बाद 23,000 के स्तर से ऊपर लगातार बने रहने की जरूरत होगी।

निफ्टी 50 के आउटलुक पर, LKP सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे ने कहा कि मंगलवार को इंडेक्स ने 22,600 के रेजिस्टेंस लेवल को पार करते हुए अच्छी रिकवरी दिखाई। इसके अलावा, CAS क्लोजिंग की वजह से इंडेक्स 22,800 के करीब बंद हुआ। डेली RSI ओवरसोल्ड ज़ोन से बाहर आ गया है और डेली RSI पर एक मज़बूत पॉजिटिव डाइवर्जेंस भी बना है। डे ने आगे कहा, “शॉर्ट टर्म में, जब तक इंडेक्स 22,600 के ऊपर बना रहता है, तब तक सेंटीमेंट पॉजिटिव रह सकता है, जिसमें 22,850 पर रेजिस्टेंस है। अगर यह 22,850 के ऊपर लगातार बना रहता है, तो और रिकवरी हो सकती है। हालांकि, अगर यह 22,850 के पार नहीं जा पाता है, तो मार्केट में करेक्शन आ सकता है।”

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, कमजोर हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Chartist Talk : जब तक निफ्टी 22000-22200 के ऊपर है बिकवाली करने से बचें, इस हफ्ते इन दो शेयरों में हो सकती है बंपर कमाई

Chartist Talk : निफ्टी 50 में जल्द ही टेक्निकल रिबाउंड की काफी संभावना है, भले ही बड़ा ट्रेंड न बदले। निफ्टी डेली टाइमफ्रेम पर ओवरसोल्ड है और वीकली टाइमफ्रेम पर भी ओवरसोल्ड होने की कगार पर है। ऑप्शन डेटा से पता चलता है कि 22,000-22,200 के ज़ोन में एक मज़बूत बेस है। ये बातें जेमस्टोन इक्विटी रिसर्च एंड एडवाइजरी सर्विसेज के फाउंडर मिलन वैष्णव ने मनीकंट्रोल के साथ हुए एक बातचीत में कही हैं।

उन्हों इस हफ्ते Aequs और BSE पर दांव लगाने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि जब तक Aequs अपने ब्रेकआउट पॉइंट से ऊपर बना रहता है,तब तक इसके ब्रेकआउट के आगे बढ़ाने और मौजूदा लेवल से काफी ऊपर जाने की संभावना ज़्यादा है। वहीं, BSE भी एक अच्छे टेक्निकल रिबाउंड के लिए तैयार हो रहा है, बशर्ते यह बताए गए सपोर्ट जोन से ऊपर बना रहे।

क्या आपको लगता है कि निफ़्टी 22,200–22,000 के जोन के आस-पास अपने निचले स्तर पर पहुच सकता है और फिर ऊपर की ओर अपनी नई चाल शुरू करने से पहले कुछ समय के लिए दायरे में बना रह सकता है?

हां, इस बात की काफ़ी संभावना है कि निफ्टी अपने निचले स्तर पर पहुंच जाए। शुक्रवार को ट्रेडिंग हालीडे था. इसलिए बाज़ार एक दिन के गैप के बाद सोमवार को खुला है। अब यह ग्लोबल ट्रेड सेटअप के हिसाब से खुद को एडजस्ट करेगा।

हालांकि,अगर हम मौजूदा स्थिति को टेक्निकल नज़रिए से देखें तो निफ़्टी में टेक्निकल रिबाउंड की ज़्यादा संभावना है। भले ही बड़ा ट्रेंड न बदले,फिर भी यह रिबाउंड जल्द ही हो सकता है। डेली टाइमफ़्रेम पर निफ़्टी ‘ओवरसोल्ड’ है और वीकली टाइमफ़्रेम पर भी यह ‘ओवरसोल्ड’ होने की कगार पर है।

ऑप्शंस डेटा से पता चलता है कि 22,000-22,200 के जोन में एक मज़बूत बेस है। इसलिए, अगर हम और नीचे भी जाते हैं,तो ऐसा कम से कम एक बार टेक्निकल रिबाउंड के बिना नहीं होना चाहिए।

इस हफ्ते के लिए आपकी ट्रेडिंग स्ट्रैटेजी क्या है?

ट्रेडिंग स्ट्रैटेजी आसान होगी। मैं बेसिक बातों पर ही ध्यान देने की जरूरत है। जब तक निफ्टी 22,000-22,200 जोन के ऊपर है, शॉर्टिंग करने से बचना चाहिए। शॉर्ट पोजीशन पर जो भी फायदा दिख रहा है मैं उसे सुरक्षित रखना चाहिए।

दूसरी ओर लॉन्ग पोजीशन लेने पर विचार किया जा सकता है, लेकिन केवल बहुत ही चुनिंदा बेसिस पर। वर्तमान तकनीकी स्थिति में केवल उन्हीं शेयरों में लॉन्ग पोजीशन ली जा सकती है जो स्पष्ट रूप से निचले स्तर पर पहुंच चुके हों और जिनकी रिलेटिव स्ट्रेंथ में सुधार हुआ हो।

क्या चार्ट और आपकी गट फीलिंग यह संकेत देती है कि बैंक निफ्टी पिछले हफ्ते के निचले स्तर से नीचे जा सकता है?

अगर आप एक टेक्नीशियन हैं, तो यहां भावनाओं के लिए कोई जगह नहीं है। हमारा काम भावनाओं को एक तरफ रखकर चार्ट को निष्पक्ष रूप से देखना है। तकनीकी नज़रिए से ऐसा नहीं लगता कि ऐसा होने की संभावना ज्यादा है। बैंक निफ्टी ने 53,850-54,100 के स्तरों के बीच एक मजबूत सपोर्ट बेस बनाया है। जब तक यह जोन सुरक्षित रहता है, एक तकनीकी उछाल (rebound) की उम्मीद कर सकते हैं, भले ही इससे बड़े ट्रेंड में कोई बदलाव न आए।

इस हफ़्ते के लिए आपके टॉप दो टॉप पिक क्या हैं?

Aequs

इस स्टॉक ने ₹265 के लेवल के ऊपर जाकर ब्रेकआउट करने की कोशिश की है। हालांकि,अभी यह स्टॉक अपने ब्रेकआउट लेवल के ठीक ऊपर कंसोलिडेट कर रहा है। जब तक यह स्टॉक अपने ब्रेकआउट पॉइंट के ऊपर बना रहता है, तब तक इसके ब्रेकआउट को आगे बढ़ाने और मौजूदा लेवल से काफ़ी ऊपर जाने की संभावना ज़्यादा है।

BSE

यह एक ऐसा स्टॉक है जिसने हाल के समय में ब्रॉडर मार्केट के मुकाबले कमजोर प्रदर्शन किया है। यह ₹2,850-3,000 के स्तर पर एक मज़बूत सपोर्ट जोन के करीब पहुंच रहा है। मेन इंडिकेटर्स में सकारात्मक बदलाव दिखने लगे हैं और गिरावट की रफ़्तार में भी कुछ कमी आई है। जब तक यह स्टॉक बताए गए सपोर्ट जोन के ऊपर बना रहता है,तब तक इसमें एक अच्छा टेक्निकल रिबाउंड देखने को मिल सकता है।

क्या आपको Mankind Pharma में और तेज़ी की उम्मीद है ?

Mankind Pharma में अभी भी और ऊपर जाने की गुंजाइश है। असल में सबसे नज़दीकी रेजिस्टेंस ₹2,640 पर है। अगर स्टॉक ₹2,640 के लेवल से ऊपर निकल जाता है तो इसमें फिर से तेज़ी आ सकती है। ₹2,300 और ₹2,398 के जोन में मज़बूत सपोर्ट है।

क्या आपको लॉरस लैब्स में और बढ़त की गुंजाइश दिखती है?

लॉरस लैब्स में तेजी का ट्रेंड बना हुआ है। हालांकि,यहां थोड़ी सावधानी बरतने की सलाह होगी। हाल ही में आई तेजी के दौरान लीड इंडिकेटर्स में नेगेटिव डाइवर्जेंस (negative divergence) देखा गया है। इसलिए,भले ही इससे तुरंत शेयर बेचने का संकेत नहीं मिलता,लेकिन जैसे-जैसे स्टॉक ऊपर जा रहा है,सावधानी बरतना जरूरी है। फिलहाल,इस स्टॉक में निवेश बनाए रखना ही बेहतर है। हालांकि,स्टॉप-लॉस को बढ़ाकर ₹1,870 पर ले आएं। अगर स्टॉक ₹1,870 के नीचे जाता है,तो इससे बाहर निकलने का समय होगा।

क्या टेक्निकल इंडिकेटर्स हिंडाल्को इंडस्ट्रीज में और गिरावट का संकेत दे रहे हैं?

पिछले कुछ हफ्तों से हिंडाल्को में गिरावट का दौर चल रहा है। टेक्निकल इंडिकेटर्स बताते हैं कि भले ही ट्रेंड में कोई बदलाव नहीं दिख रहा है और स्टॉक पर गिरावट का दबाव बना हुआ है,लेकिन ₹900-920 के जोन में मजबूत सपोर्ट मौजूद है। इसलिए,अगर गिरावट जारी रहती है तो यह सीमित ही होनी चाहिए।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

AI का जोश, एशियाई कंपनियो ने जुटाया 6 साल का रिकॉर्ड फंड, लिस्टिंग के बाद मार्केट में फिर जल्द एंट्री की होड़

AI Boom in Stock Market: हॉन्ग कॉन्ग में एआई से जुड़ी कंपनियों ने इस बार रिकॉर्डतोड़ पैसे जुटाए। यह तेजी ऐसे समय में आई, जब हॉन्ग कॉन्ग के शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। कंपनियों ने आईपीओ, प्लेसमेंट्स और ब्लॉक ट्रेड्स के जरिए जुलाई-सितंबर में $47.5 अरब जुटाए, जोकि ब्लूमबर्ग के मुताबिक किसी साल की तीसरी तिमाही में अब तक की सबसे बड़ी रकम है।

इसके साथ ही इस साल अब तक हॉन्ग कॉन्ग में कुल $92 अरब से अधिक फंड जुटाए गए जोकि साल 2021 में $112.5 अरब के रिकॉर्ड के काफी करीब है। यह ऐसे समय में हुआ, जब बॉन्ड यील्ड में तेजी और कई नए शेयरों के खराब परफॉरमेंस के कारण निवेशक और कंपनियां अब पहले की तुलना में अधिक सतर्कता बरत रही हैं।

AI ने भरा जोश

हॉन्ग कॉन्ग में रौनक के पीछे एआई रही है लेकिन इस गर्मी तो इसने तगड़ा जोश दिखा दिया। चीन की कंपनियों ने तेजी से बढ़ रही एआई इंडस्ट्री में विस्तार के लिए ताबड़तोड़ पैसे जुटाए और पहले की तुलना में मार्केट में बहुत जल्द दोबारा एंट्री की। सबसे तगड़ा सौदा तो अलीबाबा ग्रुप की $10.2 अरब का फॉलो-ऑन ऑफर रहा तो Zhongji Innolight ने करीब $8 अरब जुटाए जोकि लगभग सात वर्षों में हॉन्ग कॉन्ग की सबसे बड़ी लिस्टिंग रही। अन्य कंपनियों ने भी बार-बार निवेशकों से पैसे जुटाए। एआई मॉडल बनाने वाली Z.AI ने इस साल IPO, प्लेसमेंट और कन्वर्टिबल बॉन्ड के जरिए कुल $9.6 अरब जुटाए।

गोल्डमैन में एशिया (एक्स-जापान) इक्विटी कैपिटल मार्केट्स के प्रमुख जेम्स वांग का कहना है कि पहले कंपनियां एक बार पैसे जुटाने के बाद फिर एक-दो साल बाद ही दोबारा ऐसी कोशिश करती थी लेकिन अब लॉकअप पीरियड समाप्त होते ही पूंजी जुटाने लगी हैं। उनका कहना है कि AI की वजह से यह सिलसिला अगले कुछ वर्षों तक जारी रहेगा और इसकी रफ्तार जल्द धीमे होने के कोई संकेत नहीं हैं।

Z.AI के अलावा एक और एआई मॉडल कंपनी मिनीमैक्स ग्रुप, चिप बनाने वाली कंपनी शंघाई एलुवेटर कोरएक्स सेमीकंडक्टर और शंघाई बिरेन टेक्नोलॉजी भी अपने IPO लॉकअप की अवधि खत्म होने के तुरंत बाद जुलाई में दोबारा बाजार में लौट आईं।

यह तेजी सिर्फ चीन या हॉन्ग कॉन्ग तक ही नहीं रही, पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में देखने को मिली। तीसरी तिमाही में इस क्षेत्र में शेयर बिक्री के जरिए रिकॉर्ड $120 अरब से अधिक जुटाए गए, जो छह वर्षों में इस अवधि के लिए सबसे अधिक है। चीन में भी इस दौरान मेमोरी चिप बनाने वाली Corp का 66.6 अरब युआन (लगभग $9.9 अरब) का IPO आया, जो चीन में अब तक का दूसरा सबसे बड़ा IPO रहा।

भारत में भी दिखी रौनक

साल की शुरुआत में अमेरिका-ईरान युद्ध, शेयर बाजार में हाहाकार और विदेशी निवेशकों की ताबड़तोड़ बिकवाली के दबाव में रहने के बाद भारतीय बाजार ने भी जोरदार वापसी की। जुलाई से अब तक यहां शेयरों की बिक्री के जरिए कंपनियों ने रिकॉर्ड $26 अरब जुटाए, जिसके साथ भारतीय मार्केट के लिए यह अब तक की सबसे अच्छी तिमाही साबित हुई।

इस दौरान सबसे बड़े डील्स की बात करें तो एलआईसी में $3.2 अरब की सरकारी हिस्सेदारी की बिक्री शामिल थी तो एनएसई ने $2.4 अरब का दूसरा सबसे बड़ा आईपीओ पेश किया। यह ऐसे समय में हुआ जब निफ्टी 50 अगस्त की शुरुआत के अपने हाई लेवल से लगभग 9.5% नीचे आ गया था। घरेलू बाजार में पर्याप्त लिक्विडिटी ने नए शेयर ऑफरिंग की मांग को मजबूत बनाए रखा।

आगे भी आईपीओ का पाइपलाइन काफी मजबूत है। मुकेश अंबानी की जियो प्लेटफॉर्म्स नवंबर में संभावित लिस्टिंग से पहले निवेशकों से मुलाकात कर रही है। ब्लूमबर्ग न्यूज के अनुसार यह भारत के सबसे बड़े IPO में से एक हो सकता है। सिटीग्रुप में इक्विटी कैपिटल मार्केट्स के प्रमुख हरीश रमन का कहना है कि इस साल अभी और आईपीओ आ सकते हैं और वैश्विक निवेशकों की दिलचस्पी भी बनी हुई है।

आगे कैसा है रुझान

एआई पर होने वाले भारी खर्च भविष्य में पर्याप्त रिटर्न दे पाएगा या नहीं, इसे लेकर सवाल उठने लगे हैं लेकिन इसके बावजूद एआई से जुड़ी कंपनियां ताबड़तोड़ पैसा जुटा रही हैं और निवेशकों की दिलचस्पी भी बनी हुई है। हालांकि HSBC के ग्लोबल हेड ऑफ इक्विटी कैपिटल मार्केट्स मार्टिन जोल (Martin Zoll) का कहना है कि कई कंपनियों के शेयर आईपीओ प्राइस से नीचे आ गए हैं, जिसके चलते निवेशक सावधानी भी बरतने लगे हैं। बता दें कि जुलाई की शुरुआत से हांगकांग में हुए 10 सबसे बड़े सौदों में से केवल दो ही अपने ऑफर प्राइस से ऊपर हैं। फास्ट-फैशन रिटेलर शेन ग्लोबल होल्डिंग्स (Shein Global Holdings) और चिपमेकर लॉन्गसिस इलेक्ट्रॉनिक्स (chipmaker Longsys Electronics) के शेयर तो पहले ही दिन इश्यू प्राइस के नीचे आ गए।

आगे की बात करें तो आईपीओ और अन्य सौदों की पाइपलाइन काफी बड़ी है। फिलीपींस के सबसे लोकप्रिय मोबाइल पेमेंट ऐप GCash की पैरेंट कंपनी Mynt Inc ने आईपीओ का भाव फिक्स कर दिया है और यह फिलीपींस का सबसे बड़ा आईपीओ बनने वाला है। ऑस्ट्रेलिया भी एआई से जुड़ी इस तेजी का एक हिस्सा बनने वाला है। वहां डेटा सेंटर ऑपरेटर Firmus Grid $5 अरब का IPO देश में अब तक के सबसे बड़े लिस्टिंग में से एक होगा।

Corona वाले साल भी Nifty ग्रीन, लेकिन अब 10 साल बाद लाल की कगार पर, इस साल टूटा 14%, अब चार्ट पर ये लेवल करें मार्क

Vijay Kedia’s SMILE Theroy: विजय केडिया की स्माइल थ्योरी, खिलखिला उठेगी पोर्टफोलियो

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market Crash: इन 3 वजहों से शेयर बाजार में हाहाकार! निवेशकों के डूबे ₹4 लाख करोड़

Stock Market Crash Today: भारतीय शेयर बाजार में आज आई तूफानी बिकवाली ने निवेशकों को भारी चपत लगाई है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की ओर से हो रही ताबड़तोड़ बिकवाली और ऑटो शेयरों में आई बड़ी गिरावट के चलते बाजार क्रैश हो गया। सेंसेक्स करीब 850 अंक टूटकर 71,650 के स्तर पर आ गया, वहीं एनएसई का निफ्टी 50 263 अंक (1.16%) फिसलकर 22,356.60 के पास कारोबार कर रहा है।

1 ही दिन में डूबे ₹4 लाख करोड़!

बाजार में मचे इस हाहाकार के कारण बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन भारी गिरावट के साथ नीचे आ गया है। इस चौतरफा बिकवाली के चलते निवेशकों की संपत्ति में से करीब 4 लाख करोड़ रुपये एक ही झटके में स्वाहा हो गए।

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी चौतरफा बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1.36% और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 1.07% तक टूट गया।

ऑटो इंडेक्स 3% गिरा: बजाज ऑटो और M&M के शेयर धड़ाम

बिक्री आंकड़ों में सुस्ती के कारण ऑटो शेयरों की सबसे ज्यादा पिटाई हुई है। बिक्री घटने की खबरों के बीच बजाज ऑटो का शेयर करीब 6% तक फिसल गया। घरेलू बिक्री के निराशाजनक आंकड़ों से एमएंडएम का शेयर भी 2.4% नीचे आ गया।

बाजार में तबाही के 3 मुख्य कारण

 1. FIIs की आक्रामक बिकवाली: विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली बाजार को नीचे खींच रही है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी के बाद बीते दो कारोबारी सत्रों में FIIs ने कुल ₹20,128 करोड़ के भारतीय शेयर बेचे हैं।

2. रुपये में बड़ी गिरावट: डॉलर इंडेक्स के 3 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचने से रुपया 0.16% गिरकर 95.9850 प्रति डॉलर के स्तर पर आ गया।

3. India VIX में उछाल: बाजार में उतार-चढ़ाव और घबराहट को दर्शाने वाला ‘इंडिया विक्स’ 5% बढ़कर 14.13 के स्तर पर पहुंच गया, जो निवेशकों की बढ़ती अनिश्चितता को दिखाता है।

बाजार का मौजूदा हाल

दोपहर 1:30 बजे तक भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली का दबाव और बढ़ गया है, जहां सेंसेक्स 837.38 अंक (1.15%) की बड़ी गिरावट के साथ 71,642.91 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, वहीं निफ्टी 50 भी 287.90 अंक (1.27%) फिसलकर 22,332.55 पर आ गया है। इसके अलावा, ब्रॉडर मार्केट में निफ्टी मिडकैप 100 में 1.56% (930.45 अंक) की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जबकि निफ्टी बैंक 240.90 अंक (0.44%) गिरकर 54,392.15 पर और बैंकेक्स 361.82 अंक (0.58%) टूटकर 61,363.43 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Share Market Fall: 15 साल में सबसे लंबी गिरावट, Sensex लाल, 5 वजहों से Nifty आया 22500 के पास

Share Market Crash: बॉन्ड यील्ड में उछाल का दबाव ढीला नहीं हो पा रहा। आज सेंसेक्स की वीकली एक्सपायरी के दिन मार्केट में बिकवाली का दबाव दिखा। इस महीने के पहले और इस हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन आज सेंसेक्स 293 प्वाइंट्स टूट गया तो निफ्टी भी फिसलकर 22500 के करीब आ गया। ब्रोडर लेवल पर भी बिकवाली का दबाव है और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 लाल हैं।

अब घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें फिलहाल 10:23 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 72.33 प्वाइंट्स यानी 0.10% की गिरावट के साथ 72,407.96 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 57.45 प्वाइंट्स यानी 0.25% की फिसलन के साथ 22,563.00 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 292.67 प्वाइंट्स टूटकर 72,187.62 और निफ्टी 112.40 गिरकर 22,508.05 तक आ गया था।

Share Market Crash: ये है वजह

मजबूत बॉन्ड यील्ड

10-साल के अमेरिकी ट्रेजरी की यील्ड 5% के पार बनी हुई है, जिससे मार्केट पर दबाव भी बना हुआ है।

FIIs की तेज बिकवाली

बॉन्ड यील्ड की मजबूती और जियो-पॉलिटिकल अस्थिरता पर विदेशी निवेशकों ने बुधवार 30 सितंबर को भी भारतीय इक्विटी मार्केट में तेज बिकवाली की और ₹10,148.41 करोड़ के शेयरों की नेट बिक्री की जिससे मार्केट पर दबाव पड़ा है। इस बिकवाली के साथ लगातार पांच कारोबारी दिनों में विदेशी निवेशकों यानी एफआईआई ने ₹34,203.14 करोड़ भारतीय शेयर बाजार से निकाल लिए।

ऑटो सेक्टर का भारी दबाव

सितंबर महीने की बिक्री के आंकड़े आने से पहले ऑटो सेक्टर के शेयरों में बिकवाली का तेज दबाव दिखा और इसका निफ्टी इंडेक्स 2% से अधिक टूट गया। निफ्टी मेटल भी करीब 1% कमजोर है। वहीं दूसरी तरफ आईटी और बैंकिंग शेयर मार्केट को ऊपर खींचने की कोशिश कर रहे। निफ्टी आईटी डेढ़ फीसदी से अधिक तो निफ्टी प्राइवेट बैंक 1% मजबूत है। निफ्टी पीएसयू बैंक में भी करीब आधे फीसदी की बढ़त है।

India VIX में नरमी

मार्केट की घबराहट को मापने वाले वोलैटिलिटी इंडेक्स India VIX में उछाल से मार्केट पर दबाव बना है। फिलहाल यह 0.94% की तेजी के साथ 13.62 पर है। इसके अधिक होने का मतलब शॉर्ट टर्म में वोलैटिलिटी बढ़ने की आशंका और कम होने का मतलब शॉर्ट टर्म में उठा-पटक कम होने की संभावना है।

Sensex की एक्सपायरी

आज सेंसेक्स के डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की वीकली एक्सपायरी है, जिसका मार्केट पर असर दिख रहा है। एक्सपायरी का मतलब 1 अक्टूबर को एक्सपायर होने वाले F&O (फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस) को आज स्क्वॉयर ऑफ करना है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।