8th Pay Commission: नया वेतन आयोग कब लागू होगा, कितना एरियर मिलेगा? समझिए पूरा हिसाब

8th Pay Commission: केंद्र सरकार 8वें वेतन आयोग का ऐलान कर चुकी है। आयोग का गठन भी हो चुका है। जस्टिस रंजन देसाई इसकी अध्यक्ष हैं। 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का असर करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनर्स पर पड़ेगा। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि नई सैलरी कब से मिलेगी और कितनी बढ़ेगी।

फिलहाल सरकार ने लागू होने की तारीख नहीं बताई है। लेकिन कई रिपोर्ट्स का अनुमान है कि आयोग की सिफारिशें जनवरी 2026 की बजाय 2027 के आखिर या 2028 की शुरुआत में लागू हो सकती हैं। अगर ऐसा होता है, तो कर्मचारियों के लिए एक अच्छी खबर भी हो सकती है।

देरी हुई, तो एरियर भी बढ़ेगा

सरकार ने आयोग को रिपोर्ट देने के लिए 18 महीने का समय दिया है। इसके बाद रिपोर्ट की समीक्षा और मंजूरी में भी कुछ महीने लग सकते हैं। अगर सरकार 8वें वेतन आयोग को 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानती है, लेकिन लागू 2028 में करती है, तो कर्मचारियों को दो साल का एरियर एक साथ मिल सकता है। यानी इंतजार लंबा होगा, लेकिन रकम भी बड़ी मिल सकती है।

आयोग फिलहाल कर्मचारी संगठनों, पेंशनर्स और दूसरे हितधारकों से सुझाव ले रहा है। रिपोर्ट तैयार करने से पहले देश के अलग-अलग शहरों में बैठकें भी हो रही हैं।

सैलरी कितनी बढ़ सकती है?

Ambit Capital समेत कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन में 30% से 34% तक बढ़ोतरी हो सकती है। फिलहाल यह सिर्फ अनुमान है। अंतिम फैसला आयोग की सिफारिशों के बाद ही होगा।

इस बढ़ोतरी का सबसे बड़ा आधार फिटमेंट फैक्टर होगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह 1.83 से 2.46 के बीच रह सकता है। सबसे ज्यादा चर्चा 2.28 फिटमेंट फैक्टर की है। नई सैलरी तय करने से पहले मौजूदा महंगाई भत्ता (DA) बेसिक पे में मर्ज किया जाएगा। हर वेतन आयोग में यही प्रक्रिया अपनाई जाती है।

एक उदाहरण से समझिए

अब मान लीजिए किसी कर्मचारी की मौजूदा बेसिक सैलरी ₹18,000 है। DA और दूसरे भत्ते जोड़ने के बाद उसकी ग्रॉस सैलरी करीब ₹35,000 बनती है।

अगर नई सैलरी में 34% की बढ़ोतरी होती है, तो उसकी ग्रॉस सैलरी करीब ₹46,900 हो सकती है। यानी हर महीने करीब ₹11,900 ज्यादा मिल सकते हैं।

अलग-अलग बेसिक पे पर संभावित बढ़ोतरी

मौजूदा बेसिक पेअनुमानित मासिक बढ़ोतरी (34%)
24 महीने का संभावित एरियर

₹18,000₹11,900₹2.85 लाख
₹25,500₹16,800₹4.03 लाख
₹35,400₹23,300₹5.59 लाख
₹44,900₹29,600₹7.10 लाख
₹56,100₹37,000₹8.88 लाख

नोट: यह सिर्फ अनुमानित कैलकुलेशन है। वास्तविक रकम फिटमेंट फैक्टर, DA मर्जर और सरकार के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगी।

फिर एरियर कितना बनेगा?

मान लीजिए नई सैलरी जनवरी 2028 में लागू होती है, लेकिन प्रभावी तारीख 1 जनवरी 2026 रहती है। ऐसे में एरियर का हिसाब कुछ इस तरह होगा।

  • हर महीने संभावित बढ़ोतरी: ₹11,900
  • एरियर की अवधि: 24 महीने
  • कुल संभावित एरियर: करीब ₹2.85 लाख

यानी सबसे निचले पे लेवल वाले कर्मचारी को भी करीब ₹2.8 से 3 लाख तक एरियर मिल सकता है। जिनकी बेसिक सैलरी ज्यादा है, उनका एरियर इससे काफी अधिक हो सकता है। हालांकि, अगर सरकार 8वां वेतन आयोग 2026 से ही लागू कर देती है, तो एरियर इसका आधा ही मिलेगा।

अब कर्मचारी किन बातों पर नजर रखें?

सबसे पहले फिटमेंट फैक्टर पर। क्योंकि इसी से नई बेसिक सैलरी तय होगी। दूसरी सबसे अहम चीज है लागू होने की तारीख। अगर सरकार बैकडेट से लागू करती है, तो एरियर की रकम काफी बढ़ जाएगी।

इसके अलावा बजट में वेतन और एरियर के लिए कितना पैसा रखा जाता है और DA को नए वेतन ढांचे में किस तरह मर्ज किया जाता है, इस पर भी नजर रखना जरूरी होगा। तब तक कर्मचारियों को मौजूदा नियमों के मुताबिक DA और DR मिलता रहेगा। 8वें वेतन आयोग से जुड़ी अंतिम तस्वीर आयोग की रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगी।

8th Pay Commission Big Update: डेटा जमा करने की डेडलाइन खत्म! जानिए कब तक आएगी फाइनल रिपोर्ट और बढ़ेगी सैलरी

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

विटल इलेक्टॉनिक्स को खरीदेगी RRP Electronics, ऑर्डर में जुड़ेंगे ₹90 करोड़

RRP Electronics Ltd ने इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) कंपनी Vital Electronics Pvt Ltd के रणनीतिक अधिग्रहण के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) और टर्म शीट पर हस्ताक्षर किए हैं। कंपनी का कहना है कि यह कदम भारत में एक इंटीग्रेटेड सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

सेमीकंडक्टर से इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम तक बढ़ेगा कारोबार

RRP Electronics का दावा है कि इस अधिग्रहण के बाद उसकी OSAT (Outsourced Semiconductor Assembly and Test) और ATMP (Assembly, Testing, Marking and Packaging) क्षमताएं और मजबूत होंगी। कंपनी अब सिर्फ सेमीकंडक्टर पैकेजिंग तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के निर्माण में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाएगी।

Vital Electronics क्या करती है?

Vital Electronics एक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) कंपनी है। कंपनी Printed Circuit Board Assembly (PCBA), Surface Mount Technology (SMT), इलेक्ट्रोमैकेनिकल असेंबली, सिस्टम इंटीग्रेशन, टेस्टिंग, स्ट्रैटेजिक सोर्सिंग और बॉक्स-बिल्ड सॉल्यूशंस जैसी एंड-टू-एंड मैन्युफैक्चरिंग सेवाएं देती है।

ग्राहकों को मिलेगा वन-स्टॉप सॉल्यूशन

कंपनी के मुताबिक, अधिग्रहण के बाद RRP सेमीकंडक्टर पैकेजिंग से लेकर पूरी तरह तैयार इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट तक की सेवाएं दे सकेगी। उसका कहना है कि Vital Electronics उसके बनाए चिप्स को PCB पर लगाएगी और डिफेंस, ऑटोमोबाइल, इंडस्ट्रियल, टेलीकॉम, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स समेत कई सेक्टर के लिए तैयार इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम बनाएगी।

ऑर्डर बुक और ग्रोथ पर रहेगा फोकस

कंपनी के मुताबिक, इस अधिग्रहण के बाद उसकी ऑर्डर बुक में करीब 90 करोड़ रुपये का रेवेन्यू दिखाई दे रहा है। साथ ही अगले तीन वर्षों में कारोबार की ग्रोथ को लेकर भी कंपनी ने सकारात्मक संकेत दिए हैं।

चार चरणों में होगा अधिग्रहण

RRP Electronics ने बताया कि वह चार चरणों में Vital Electronics की 100% हिस्सेदारी खरीदेगी। कंपनी का लक्ष्य मार्च 2027 तक 50% हिस्सेदारी और मार्च 2028 तक पूरा अधिग्रहण करने का है। हालांकि, यह तय माइलस्टोन पूरे होने और जरूरी नियामकीय मंजूरियों पर निर्भर करेगा। अधिग्रहण पूरा होने के बाद कंपनी, जरूरी मंजूरियां मिलने पर, Vital Electronics का विलय RRP Group की किसी लिस्टेड कंपनी में भी कर सकती है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Britannia Q1 Results: बिस्किट कंपनी का प्रॉफिट 13% बढ़ा, रेवेन्यू ₹5000 करोड़ के पार

Britannia Q1 Results: बिस्किट बनाने वाली कंपनी Britannia Industries ने गुरुवार, 6 अगस्त को जून तिमाही (Q1 FY27) के नतीजे जारी किए। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 13.6% बढ़कर 591.4 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल की समान तिमाही में यह 520.1 करोड़ रुपये था।

कंपनी की ऑपरेशंस से रेवेन्यू 8.2% बढ़कर 5,000 करोड़ रुपये रहा। वहीं, EBITDA 11% बढ़कर 840 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA मार्जिन 16.4% से बढ़कर 16.8% पर पहुंच गया।

अनुमान से कैसा रहा प्रदर्शन?

ब्रिटानिया का शुद्ध मुनाफा बाजार के अनुमान से थोड़ा कम रहा। CNBC-TV18 के पोल में 606 करोड़ रुपये के मुनाफे का अनुमान था। रेवेन्यू अनुमान से थोड़ा बेहतर रही, लेकिन EBITDA और EBITDA मार्जिन बाजार की उम्मीद से नीचे रहे।

ब्रिटानिया ने बताया कि जून तिमाही में उसकी कंसोलिडेटेड बिक्री 9.5% बढ़कर 4,964 करोड़ रुपये रही। वहीं, स्टैंडअलोन बिक्री में 10% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

मैनेजमेंट ने क्या कहा?

ब्रिटानिया के CEO और MD रक्षित हरगावे ने कहा कि तिमाही की शुरुआत में पश्चिम एशिया के तनाव की वजह से ईंधन और शिपिंग लागत बढ़ गई थी। इसके बावजूद कंपनी ने बेहतर वॉल्यूम और वैल्यू ग्रोथ हासिल की। साथ ही मुनाफे की ग्रोथ रेवेन्यू से भी तेज रही।

उन्होंने कहा कि ई-कॉमर्स और जनरल ट्रेड में मजबूत प्रदर्शन रहा। विज्ञापन, प्रमोशन और इन्फ्लुएंसर कैंपेन पर भी कंपनी ने निवेश बढ़ाया। Marie Gold, NutriChoice और Little Hearts जैसे ब्रांड्स के लिए बड़े मार्केटिंग अभियान चलाए गए। वहीं, Dubai Kunafa Croissant जैसे नए प्रोडक्ट्स और इंटरनेशनल बिजनेस में सुधार से भी ग्रोथ को सहारा मिला।

आगे क्या रहेगा फोकस?

ब्रिटानिया ने कहा कि वह पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति और कच्चे तेल की कीमतों पर नजर बनाए हुए है। हालांकि, मजबूत ब्रांड, नए प्रोडक्ट्स, लागत नियंत्रण और घरेलू मांग में सुधार के दम पर कंपनी आगे भी टिकाऊ ग्रोथ का भरोसा जता रही है।

Britannia के शेयरों का हाल

Britannia Industries का शेयर गुरुवार को 0.26% की गिरावट के साथ 5,430 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक 8.32% टूटा है। वहीं, बीते 1 साल में इसका रिटर्न तकरीबन फ्लैट रहा। कंपनी का मार्केट कैप 1.31 लाख करोड़ रुपये है।

Britannia Industries भारत की सबसे बड़ी FMCG कंपनियों में से एक है। कंपनी का मुख्य कारोबार बिस्किट है। लेकिन इसके अलावा यह ब्रेड, केक, रस्क, डेयरी प्रोडक्ट्स, चीज, बटर, दूध, स्नैक्स और क्रोइसां (Croissant) जैसे कई खाद्य उत्पाद भी बनाती और बेचती है।

LIC Q1 Results: प्रॉफिट 23% बढ़कर 13492 करोड़ रुपये, कुल इनकम 237848 करोड़

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Premier Energies Q1 Results: सोलर कंपनी का मुनाफा 50% बढ़ा, ₹5000 करोड़ जुटाने की तैयारी

Premier Energies Q1 Results: सोलर इक्विपमेंट बनाने वाली Premier Energies ने गुरुवार, 6 अगस्त को जून तिमाही (Q1 FY27) के नतीजे जारी किए। कंपनी का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 50.4% बढ़कर 463.1 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल की समान तिमाही में यह 307.8 करोड़ रुपये था।

कंपनी की ऑपरेशंस से रेवेन्यू 35.3% बढ़कर 2,462.6 करोड़ रुपये रही, जो एक साल पहले 1,820.7 करोड़ रुपये थी। वहीं, EBITDA 30.3% बढ़कर 714.4 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि, EBITDA मार्जिन 30.1% से घटकर 29% रह गया।

₹5,000 करोड़ जुटाने की तैयारी

Premier Energies ने कहा कि वह 5,000 करोड़ रुपये तक जुटाने के लिए शेयरधारकों की मंजूरी मांगेगी। कंपनी यह रकम क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP), इक्विटी शेयर, नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD), वारंट या अन्य इक्विटी में बदलने योग्य सिक्योरिटीज जारी करके जुटा सकती है।

मैनेजमेंट में फिर भरोसा

कंपनी सुरेंद्रपाल सिंह सलूजा को 19 दिसंबर 2026 से 18 दिसंबर 2031 तक फिर से चेयरमैन और होल-टाइम डायरेक्टर नियुक्त करने के लिए भी शेयरधारकों की मंजूरी मांगेगी।

इसके अलावा, चिरंजीव सिंह सलूजा को भी अगले पांच साल के लिए मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर दोबारा नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा जाएगा। यह फैसला कंपनी की नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी की सिफारिश पर लिया गया है।

Premier Energies के शेयर

Premier Energies का शेयर गुरुवार को 1.01% की बढ़त के साथ 1,045 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक 30.85% चढ़ा है। कंपनी का मार्केट कैप 47.08 हजार करोड़ रुपये है।

Premier Energies का बिजनेस

यह देश की प्रमुख सोलर कंपनियों में से एक है। कंपनी सोलर सेल और सोलर मॉड्यूल बनाती है, जिनका इस्तेमाल घरों, उद्योगों और बड़े सोलर पावर प्रोजेक्ट्स में होता है।

इसके अलावा, कंपनी EPC सेवाएं भी देती है, यानी सोलर प्लांट लगाने से लेकर उसे चालू करने तक का काम करती है। भारत में बढ़ती रिन्यूएबल एनर्जी की मांग और सरकारी सोलर योजनाओं से कंपनी के कारोबार को लगातार फायदा मिल रहा है।

LIC Q1 Results: प्रॉफिट 23% बढ़कर 13492 करोड़ रुपये, कुल इनकम 237848 करोड़

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Tata Sons IPO: टाटा संस को IPO लाना ही होगा? RBI से राहत नहीं मिली, अपर लेयर NBFC लिस्ट में बरकरार

Tata Sons IPO: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 6 अगस्त को अपर लेयर NBFC (NBFC-UL) की नई लिस्ट जारी की। इसमें टाटा संस का नाम बरकरार रखा गया है। इसका मतलब है कि RBI ने अभी तक टाटा संस को NBFC-UL फ्रेमवर्क से बाहर निकलने की मंजूरी नहीं दी है।

RBI ने कहा कि कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) के तौर पर अपना रजिस्ट्रेशन रद्द कराने के लिए टाटा संस ने जो आवेदन दिया है, वह अभी जांच के दौर में है। केंद्रीय बैंक ने साफ किया कि अपर लेयर लिस्ट में टाटा संस को शामिल करने का मतलब यह नहीं है कि उसकी डीरजिस्ट्रेशन अर्जी खारिज हो गई है। उस पर अलग से फैसला लिया जाएगा।

अपर लेयर NBFC क्या है?

RBI ने कहा कि अपर लेयर में उन NBFC को रखा जाता है, जिन पर ज्यादा नियामकीय निगरानी की जरूरत होती है। फिलहाल इसके लिए 1 लाख करोड़ रुपये की एसेट सीमा तय है। हालांकि, RBI समय-समय पर इस सीमा की समीक्षा करता है और हर तीन साल में इसे दोबारा देखा जाएगा।

केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा कि अगर कोई NBFC एक बार अपर लेयर में आ जाती है, तो उसे कम से कम 5 साल तक इसी श्रेणी के कड़े नियमों का पालन करना होगा। भले ही बाद के वर्षों में वह तय मानदंडों पर खरी न उतरे।

किन कंपनियों के नाम हैं लिस्ट में?

नई लिस्ट में REC, PFC, IRFC, PNB Housing Finance, Sammaan Capital समेत कुल 17 NBFC शामिल हैं। RBI ने पहले नियमों में बदलाव करते हुए सरकारी मालिकाना हक वाली योग्य NBFC को भी अपर लेयर में शामिल करने की अनुमति दी थी।

हालांकि, सरकारी NBFC के लिए एक राहत है। उन्हें शेयर बाजार में लिस्ट होना जरूरी नहीं होगा। लेकिन निजी कंपनियों को अपर लेयर NBFC बनने के तीन साल के भीतर शेयर बाजार में लिस्ट होना पड़ता है।

टाटा संस के लिए यह मामला क्यों अहम?

टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस एक Core Investment Company (CIC) के रूप में रजिस्टर्ड है। 31 मार्च 2026 तक कंपनी के पास करीब 1.75 लाख करोड़ रुपये की एसेट थीं। यानी यह RBI की तय सीमा से काफी ऊपर है।

टाटा संस ने अपना CIC लाइसेंस रद्द कराने के लिए आवेदन किया था। ऐसा इसलिए, क्योंकि अगर कंपनी NBFC नहीं रहती, तो उसे शेयर बाजार में लिस्ट होने की अनिवार्यता से राहत मिल सकती है।

टाटा संस लिस्टिंग से क्यों बचना चाहती है?

टाटा संस को 2022 में पहली बार अपर लेयर NBFC में शामिल किया गया था। नियमों के मुताबिक, उसे 2025 तक शेयर बाजार में लिस्ट होना था। इसी वजह से कंपनी ने CIC लाइसेंस रद्द करने का आवेदन दिया था।

जून में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने RBI को पत्र लिखकर संभावित लिस्टिंग का विरोध किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने कहा कि अगर टाटा संस की लिस्टिंग होती है, तो इससे टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी का लंबी अवधि स्वरूप बदल सकता है। साथ ही टाटा ट्रस्ट्स के परोपकारी उद्देश्यों पर भी असर पड़ सकता है।

HCC Q1 Results: इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को ₹51 करोड़ का मुनाफा, ऑर्डर बुक मजबूत हुई

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

KKR समर्थित लॉजिस्टिक्स कंपनी ला रही है ₹2480 करोड़ का IPO! कल से करें अप्लाई, जानिए कितना चल रहा है GMP

LEAP India IPO Details: वैश्विक निवेश फर्म केकेआर के स्वामित्व वाली लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चैन कंपनी लीप इंडिया का ₹2,480 करोड़ का आईपीओ कल यानी 7 अगस्त 2026 से आम निवेशकों के सबस्क्रिप्शन के लिए खुलने जा रहा है।

इश्यू खुलने से ठीक पहले अनलिस्टेड मार्केट में कंपनी के शेयर प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे है। अगर आप भी इस आईपीओ में पैसा लगाने की सोच रहे हैं, तो दांव लगाने से पहले प्राइस बैंड, जीएमपी और इश्यू से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण डिटेल्स जान लें।

LEAP India IPO की प्रमुख डिटेल्स

  • प्राइस बैंड: ₹151 से ₹159 प्रति शेयर
  • फ्रेश इश्यू : ₹480 करोड़ मूल्य के 3.02 करोड़ नए शेयर जारी किए जाएंगे।
  • ऑफर फॉर सेल (OFS): मौजूदा निवेशक ₹2,000 करोड़ के 12.58 करोड़ शेयर बेचेंगे।
  • एंकर निवेशकों के लिए ओपनिंग: 6 अगस्त 2026
  • आईपीओ ओपनिंग-क्लोजिंग डेट: 7- 11 अगस्त 2026
  • शेयर अलॉटमेंट की तारीख: 12 अगस्त 2026
  • शेयर लिस्टिंग की तारीख (BSE/NSE): 14 अगस्त 2026

इस इश्यू का बुक-रनिंग लीड मैनेजर जेएम फाइनेंशियल लिमिटेड है, जबकि एमयूएफजी इनटाइम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को इसका रजिस्ट्रार नियुक्त किया गया है।

क्या काम करती है LEAP India

2013 में स्थापित लीप इंडिया एंटरप्राइजेज को एसेट-पूलिंग और सप्लाई चैन सॉल्यूशन मुहैया कराती है। कंपनी ई-कॉमर्स, एफएमसीजी, ऑटोमोटिव और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर की कंपनियों को इक्विपमेंट पूलिंग, रिटर्नेबल पैकेजिंग, इन्वेंट्री मैनेजमेंट, ट्रांसपोर्टेशन और रिपेयर एंड मेंटेनेंस जैसी सेवाएं देती है। साल 2023 में वैश्विक निवेश फर्म KKR ने अपनी एशिया इंफ्रास्ट्रक्चर रणनीति के तहत कंपनी में बहुमत हिस्सेदारी हासिल की थी।

ग्रे मार्केट में कैसा है माहौल?

इश्यू खुलने से पहले अनलिस्टेड मार्केट ट्रैकर्स Investorgain और IPO Watch के मुताबिक, 6 अगस्त की सुबह लीप इंडिया का शेयर अपने अपर प्राइस बैंड से लगभग 3.5% के ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) पर ट्रेड कर रहा था। हालांकि जीएमपी अनऑफिशियल मार्केट का सेंटिमेंट दिखाता है और लिस्टिंग गेन की कोई गारंटी नहीं देता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Market Outlook : हरे निशान में बंद हुआ बाजार, जानिए 7 अगस्त को कैसी रह सकती है सेंसेक्स-निफ्टी की चाल

Market Outlook : गुरुवार 6 अगस्त को उतार-चढ़ाव भरे कारोबारी सेशन में भारतीय इक्विटी इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए हैं। निफ्टी 24600 के ऊपर टिके रहने में कामयाब रहा। आज के ट्रेंडिंग सेशन के अंत में सेंसेक्स 373.76 अंक यानी 0.48 फीसदी बढ़कर 78,954.76 पर और निफ्टी 11.35 अंक या 0.05 फीसदी बढ़कर 24,636 पर बंद हुआ। आज लगभग 2023 शेयर हरे निशान में बंद हुए। वहीं,2058 शेयरों में गिरावट देखने को मिल। जबकि 200 शेयर सपाट बंद हुए।

निफ्टी में बढ़त वाले शेयरों में रिलायंस इंडस्ट्रीज,SBI,भारत इलेक्ट्रॉनिक्स,एटरनल और टाइटन कंपनी शामिल रहे। जबकि गिरावट वाले शेयरों में पावर ग्रिड कॉर्प,टाटा स्टील,TCS,JSW स्टील और बजाज ऑटो शामिल रहे।

सेक्टोरल इंडेक्सों की बात करें तो निफ्टी PSU बैंक सबसे ज्यादा बढ़त वाला सेक्टर रहा। इसमें 2.2% की बढ़ोतरी हुई। इसके बाद निफ्टी ऑयल एंड गैस रहा,जिसमें 0.8% की बढ़त हुई। दूसरी ओर निफ्टी मीडिया का प्रदर्शन सबसे खराब रहा। इसमें 1.3% की गिरावट आई,जबकि निफ्टी रियल्टी में भी 1.3% की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी ऑटो और निफ्टी मेटल भी गिरावट के साथ बंद हुए। इनमें 1% की कमी आई। जबकि निफ्टी IT में 0.9% की गिरावट देखने को मिली।

निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.4% की गिरावट आई,जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.5% की बढ़त हुई। यह ब्रॉडर मार्केट में मिले-जुले रुझानों को दिखाता है।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर का कहना है कि कच्चे तेल की नरमी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने के लिए शुरू हुए कूटनीतिक प्रयासों से बाजार के सेंटीमेंट में सुधार हुआ। आरबीआई के स्थिर पॉलिसी रुख और ग्रोथ को लेकर पॉजिटिव नजरिए से भी बाजार को सपोर्ट मिला। इसके चलते हैवीवेट,बैंकिंग और एनर्जी शेयरों में सेलेक्टिव बाइंग देखने को मिली। क्रूड की कीमतों में नरमी से महंगाई का दबाव कम हो सकता है और मार्जिन बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इसको ध्यान में रखते हुए निवेशकों को लग रहा है कि आगे आने वाली तिमाहियों में इंडिया इंक का प्रदर्शन अच्छा रह सकता है। मूड में इस बदलाव के कारण रिलायंस इंडस्ट्रीज में निवेशकों की दिलचस्पी फिर से बढ़ी है। O2C-आधारित कारोबार के लंबे समय तक खराब प्रदर्शन के बाद अब इसमें ‘बार्गेन बाइंग'(कम कीमत पर खरीदारी)देखने को मिल रही है। बाजार एनर्जी,टेलीकॉम,रिटेल और दूसरे सेक्टरो में इसकी लॉन्ग-टर्म वैल्यू पर फिर से फोकस कर रहे हैं। आज ऑटो,मेटल,IT,रियल्टी और सीमेंट जैसे कई सेक्टर में प्रॉफिट बुकिंग हुई, लेकिन स्मॉल-कैप शेयरों में तेजी के कारण ब्रॉडर मार्केट मज़बूत बना रहा।

निफ्टी व्यू

Hedged.in में एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट-HNI एंड डेरिवेटिव्स,रियांक अरोड़ा का कहना है कि भारतीय शेयर बाजार में आज तेजी रही। हैवीवेट शेयरों में आई खरीदारी के कारण बेंचमार्क इंडेक्स में बढ़त जारी रही। अहम सेक्टरों में सेलेक्टिव वाइंग से बाजार में जोश देखने को मिला। निफ्टी अहम सपोर्ट लेवल के ऊपर बना हुआ है। इससे पता चलता है कि तेजी का ट्रेंड (bullish trend) अभी भी बरकरार है। निफ्टी के लिए 24,500–24,450 के आसपास तत्काल सपोर्ट है। इसके बाद 24,300 के पास एक बड़ा सपोर्ट है। ऊपर की तरफ,निफ्टी के लिए 24,750–24,850 के आसपास रेजिस्टेंस दिख रहा है। अगर इंडेक्स इस दीवार के ऊपर जा कर टिकने में कामयाब रहता है तो नई खरीदारी आ सकती है और ऊंचे लेवल के लिए रास्ता खुल सकता है।

उन्होंने आगे कहा कि सेंसेक्स में पूरे सेशन खरीदारी देखने को मिली और यह दिन के ऊपरी स्तर के करीब बंद हुआ। इससे मार्केट का पॉजिटिव स्ट्रक्चर और मजबूत हुआ। इसके लिए तत्काल सपोर्ट 78,600–78,400 के आसपास है,जबकि रेजिस्टेंस 79,200–79,500 के पास दिख रहा है। रेजिस्टेंस जोन के ऊपर का ब्रेकआउट नई तेजी के लिए रास्ता साफ कर सकता है।

रियांक अरोड़ा का कहना है कि बाजार में मजबूती बनी हुई है। दोनों बेंचमार्क इंडेक्स अहम सपोर्ट लेवल से ऊपर बने हुए हैं और उनका टेक्निकल सेटअप भी पॉज़िटिव है। मौजूदा ट्रेंड पॉज़िटिव है और किसी भी छोटी-मोटी गिरावट पर खरीदारी की रणनीति काम करेगी। ट्रेडर्स और इन्वेस्टर्स मजबूत फंडामेंटल वाले स्टॉक्स में गिरावट पर खरीदारी की स्ट्रैटेजी अपनी चाहिए। साथ ही उन्हें रिस्क मैनेजमेंट का भी ध्यान रखना चाहिए।

LKP सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे ने कहा कि आज निफ्टी पूरे दिन एक सीमित दायरे में ही घूमता रहा। मार्केट की दिशा को लेकर ट्रेडर्स कंफ्यूज रहे। ऊपरी स्तरों पर निफ्टी को बार-बार पिछले दिन के क्लोजिंग लेवल के पास रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ा। ऊपरी लेवल पर खरीदारी का जोश कम होता नजर आया।

पूरे सेशन के दौरान नीचे की तरफ 24,600 का लेवल एक अहम सपोर्ट बना रहा। जब तक निफ्टी 24,600 के ऊपर बना रहेगा तब तक इसमें 24,800 की ओर बढ़ने की संभावना बरकरार रहेगी। अगर यह मजबूती से 24,800 के ऊपर निकलता है तो एक नई रैली शुरू हो सकती है।

SBI सिक्योरिटीज में हेड-टेक्निकल एंड डेरिवेटिव्स रिसर्च, सुदीप शाह का कहना है कि आगे निफ्टी के लिए 24750-24780 का जोन एक अहम रेजिस्टेंस का काम करेगा। अगर निफ्टी 24780 के ऊपर बना रहता है तो यह 24900 और उसके बाद 25050 के लेवल तक बढ़ सकता है। नीचे की तरफ,24500-24480 का जोन इसके लिए पहले सपोर्ट का काम करेगा।

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बैंक निफ्टी व्यू

सुदीप शाह का कहना है कि बैंक निफ्टी भी आज एक सीमित दायरे में घूमता रहा। 362 अंकों की छोटी रेंज में घूमते रहने के बाद यह 0.56% की बढ़त के साथ 58000 के ऊपर बंद हुआ। इंडेक्स अपने अहम शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म मूविंग एवरेज के ऊपर ट्रेड कर रहा है,जो यह बताता है कि बड़ा ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है। हालांकि,मोमेंटम इंडिकेटर काफी हद तक न्यूट्रल हैं और संकेत दे रहे हैं कि नियर टर्म में साइडवेज कंसोलिडेशन देखने को मिल सकता है।

टेक्निकल नजरिए से देखें तो 58500-58600 का जोन तत्काल रेजिस्टेंस का काम कर सकता है। 58600 के ऊपर एक मज़बूत चाल से नई तेजी आ सकती है,जिससे शॉर्ट टर्म में 59100 और उसके बाद 59600 तक की रैली का रास्ता खुल सकता है। वहीं, नीचे की तरफ 57600-57500 के आस-पास मौजूद 290 डे EMA जोन इंडेक्स के लिए मज़बूत सपोर्ट का काम कर सकता है।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stock in Fcous: इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को BMC से ₹1918 करोड़ का प्रोजेक्ट मिला, मुंबई में बनाएगी वाटर टनल

Stock in Fcous: शापूरजी पल्लोनजी ग्रुप की कंपनी अफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर को बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) से 1,918 करोड़ रुपये का बड़ा ऑर्डर मिला है। कंपनी मुंबई में डिसैलिनेटेड यानी समुद्री पानी को साफ कर तैयार पेयजल की सप्लाई के लिए टनल बनाएगी। इस प्रोजेक्ट में डिजाइन, निर्माण, GST और ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस (O&M) भी शामिल है। कंपनी ने अभी इसकी समयसीमा नहीं बताई है।

मुंबई की पानी सप्लाई होगी मजबूत

यह टनल मनोरी के पंपिंग स्टेशन से चारकोप होते हुए कांदिवली के महावीर नगर तक बनाई जाएगी। डिसैलिनेशन प्लांट में समुद्र के पानी को पीने लायक बनाया जाएगा। इसके बाद इसी टनल के जरिए पानी शहर के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाया जाएगा। बढ़ती आबादी और पानी की बढ़ती जरूरत को देखते हुए इस प्रोजेक्ट को काफी अहम माना जा रहा है।

पहले भी BMC के साथ कर रही है काम

अफकॉन्स पहले से ही BMC के लिए 7.13 किलोमीटर लंबी कशेली-मुलुंड अंडरग्राउंड वाटर टनल बना रही है। इसके अलावा कंपनी नवी मुंबई, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में भी कई जल आपूर्ति परियोजनाओं पर काम कर रही है। पानी से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स अब कंपनी के कारोबार का अहम हिस्सा बनते जा रहे हैं।

148.67 करोड़ रुपये का आर्बिट्रेशन अवॉर्ड

हाल ही में अफकॉन्स को जम्मू-कश्मीर के उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) परियोजना से जुड़े टनल T74-R मामले में 148.67 करोड़ रुपये का आर्बिट्रेशन अवॉर्ड भी मिला है। नए ऑर्डर और इस फैसले से कंपनी की ऑर्डर बुक मजबूत होगी। साथ ही आने वाले वर्षों में रेवेन्यू को भी सहारा मिलने की उम्मीद है।

अफकॉन्स के शेयरों का हाल

अफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर के शेयर गुरुवार को 0.55% की गिरावट के साथ 279.35 रुपये पर बंद हुए। पिछले 6 महीने में स्टॉक 15.86% गिरा है। वहीं, बीते 1 साल में यह 30.76% टूटा है। कंपनी का मार्केट कैप 10.27 हजार करोड़ रुपये है।

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