2 बार JEE में फेल हुआ लड़का, आज ₹2 लाख महीना कमाता है, Ankur Warikoo ने बताई कहानी

बिजनेसमैन अंकुर वारिकू की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने भारत में टैलेंट और सफलता को लेकर लोगों का ध्यान खींचा है। उन्होंने इंदौर के एक डिजाइनर नमन की कहानी साझा की, जो दो बार JEE में सफल नहीं हो सके। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और बिना किसी प्रतिष्ठित कॉलेज की डिग्री के अपने दम पर प्रोडक्ट डिजाइन सीखना शुरू किया। YouTube से सीखते हुए नमन ने धीरे-धीरे अपने कौशल को निखारा और फ्रीलांसिंग की दुनिया में अपनी पहचान बनाई। आज उनकी कमाई करीब 2 लाख रुपये प्रति माह बताई गई है।

नमन की कहानी साझा करते हुए वारिकू ने कहा कि भारत में टैलेंट की कमी नहीं है, बल्कि लोगों को पहचानने का नजरिया सीमित है। उनका मानना है कि किसी व्यक्ति की काबिलियत केवल कॉलेज, डिग्री या नौकरी के नाम से तय नहीं होनी चाहिए। उनकी पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर लोगों के बीच इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गई कि सफलता के लिए डिग्री जरूरी है या असली हुनर।

‘भारत में टैलेंट की नहीं, लेबल की समस्या है’

अंकुर वारिकू ने इंस्टाग्राम पर लिखा, “India does not have a talent problem. It has a label problem.” उनका कहना है कि भारत में लोगों की काबिलियत को अक्सर उनके कॉलेज, डिग्री और नौकरी के नाम से आंका जाता है। उन्होंने कहा कि कई बार बेहतरीन टैलेंट सिर्फ इसलिए सामने नहीं आ पाता, क्योंकि उसके पास किसी बड़े कॉलेज की डिग्री या मशहूर कंपनी का अनुभव नहीं होता।

JEE में दो बार फेल, फिर YouTube से सीखा डिजाइन

वारिकू ने इंदौर के डिजाइनर नमन का उदाहरण दिया। उनके मुताबिक, नमन दो बार JEE में सफल नहीं हो पाए। इसके बाद उन्होंने रात में YouTube की मदद से खुद प्रोडक्ट डिजाइन सीखना शुरू किया। धीरे-धीरे उन्होंने अपना पोर्टफोलियो तैयार किया और फ्रीलांस काम शुरू किया। वारिकू के अनुसार, आज नमन हर महीने करीब 2 लाख रुपये कमाते हैं।

‘डिग्री यह नहीं बता सकती कि आप कितनी दूर जाएंगे’

वारिकू ने अपनी पोस्ट में कहा कि किसी व्यक्ति की डिग्री या पुराने अनुभव से यह तय नहीं किया जा सकता कि वह भविष्य में कितना सफल होगा। उनके मुताबिक, क्रेडेंशियल्स बताते हैं कि कोई व्यक्ति अब तक कहां पहुंचा है, लेकिन यह नहीं बताते कि वह आगे कितनी दूर जा सकता है।

सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग राय

वारिकू की पोस्ट पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी मिली-जुली रहीं। कुछ यूजर्स ने नमन की सफलता को प्रेरणादायक बताया, लेकिन कुछ लोगों का कहना था कि ऐसी कहानियां अपवाद हो सकती हैं। एक यूजर ने कहा कि कई IIT ग्रेजुएट भी कम उम्र में 2 लाख रुपये महीने नहीं कमा पाते। वहीं, दूसरे यूजर ने IIT से तुलना पर सवाल उठाते हुए कहा कि JEE जैसी कठिन परीक्षा पास करना भी किसी व्यक्ति की समस्या सुलझाने की क्षमता दिखाता है।

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Diamond State Summit: ‘हमारे युवा प्रतिभाशाली हैं…’ , CM योगी ने की Gen-Z युवाओं की जमकर तारीफ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने न्यूज18 इंडिया के खास कार्यक्रम डायमंड स्टेट समिट में देश युवाओं की काफी तारीफ की। डायमंड स्टेट्स समिट कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि, युवा देश का भविष्य हैं। साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों की मदद के लिए उनकी सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की भी जानकारी दी।

बता दें कि, सीएम योगी आदित्यनाथ का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब हाल ही में दिल्ली में नीट-यूजी 2026 के पेपर लीक विवाद को लेकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व में Gen-Z युवाओं का बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ था। न्यूज18 इंडिया के ‘डायमंड स्टेट्स समिट’ कार्यक्रम में बोलते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग योजना के तहत प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को अनुभवी लोगों से मार्गदर्शन दिया जाता है। उन्होंने बताया कि यूपीएससी परीक्षा पास कर चुके लोग इस योजना के तहत कम से कम एक घंटे का समय उन छात्रों को देते हैं, जो यूपीएससी, नीट, आईआईटी और जेईई जैसी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।

युवाओं पर सीएम योगी आदित्यनाथ का फोकस

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपी सबसे युवा आबादी का नेतृत्व करता है। हमारा युवा प्रतिभाशाली है। स्किल डेवलपमेंट सेंटर बनाए हैं, जहां मॉडर्न टेक्नोलॉजी सिखाई जा रही है। AI, स्पेस टेक्नोलॉजी से लेकर तमाम आधुनिक शिक्षा दी जा रही है। प्रोजेक्ट अलंकार के तहत यूपी के सरकारी इंटर कॉलेजों का कायाकल्प किया गया। मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर मिला। UPSC, UPPSC, NEET और IIT-JEE की तैयारी के लिए वर्चुअल और फिजिकल कोचिंग की व्यवस्था की गई। जिलों में तैनात UPSC पास अधिकारी युवाओं को मार्गदर्शन दे रहे।

सीएम योगी ने कहा कि देश के युवा प्रतिभाशाली हैं। उन्होंने खास तौर पर पूर्वी उत्तर प्रदेश के युवाओं का जिक्र करते हुए कहा कि यह क्षेत्र देश की बड़ी युवा आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों के दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश में हुए बदलावों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों में काफी लंबी दूरी तय की है और क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वह सिर्फ आंकड़ों के आधार पर बदलाव की बात नहीं कर रहे हैं। उनके मुताबिक, जब आम लोग खुद अपनी आंखों से बदलाव देख रहे हैं, तो यह साफ है कि वास्तव में काफी बदलाव हुआ है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद उत्तर प्रदेश में काशी और प्रयागराज को छोड़कर किसी दूसरे इलाके में विश्वविद्यालय नहीं था। लेकिन पिछले 9 वर्षों में गोरखपुर, आजमगढ़, बलरामपुर और मिर्जापुर में नए विश्वविद्यालय स्थापित किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि हाल ही में भदोही में भी काशी नरेश विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों के बनने से प्रदेश के युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए बेहतर अवसर मिल रहे हैं।

Jharkhand Bandh Today: छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में BJP का राज्यव्यापी बंद, छात्रों ने की CBI जांच की मांग

Jharkhand Bandh Today: रांची में JPSC और JSSC के उम्मीदवारों के मार्च के दौरान छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई के विरोध में झारखंड BJP ने मंगलवार को राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने आरोप लगाया है कि लाठीचार्ज, आंसू गैस और वॉटर कैनन के इस्तेमाल से सैकड़ों प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं। उन्होंने बताया कि यह बंद सुबह 8 बजे से आधी रात तक रहेगा।

आदित्य साहू ने हेमंत सोरेन सरकार पर भी तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह बंद छात्रों के साथ हुए “अन्याय और अत्याचार” के विरोध में किया जा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों को नौकरी से जुड़ी कथित धांधली और परीक्षा के पेपर पहले ही लीक होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा है। इसके अलावा, उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर पुलिस द्वारा जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने का भी आरोप लगाया।

साहू ने कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान आंसू गैस के गोले और दूसरी चीजें चलाई गईं, जिससे सैंकड़ों छात्र घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी कार्यकर्ता छात्रों के समर्थन में सड़कों पर उतरेंगे और राज्य में कामकाज ठप कर देंगे।

वहीं, झारखंड में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने भी आंदोलन से निपटने के सरकार के तरीके की आलोचना की।

उन्होंने कहा कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों का समर्थन करने के दौरान उन्हें और अन्य लोगों को हिरासत में लिया गया और सवाल उठाया कि सरकार ने कथित अनियमितताओं की CBI जांच के आदेश क्यों नहीं दिए।

मरांडी ने कहा कि छात्र 15 दिनों से धरना और भूख हड़ताल कर रहे थे और तर्क दिया कि यह आंदोलन सोमवार की झड़प से कहीं ज्यादा समय से चल रहा था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने के बजाय सरकार ने उन पर लाठीचार्ज किया।

छात्रों का विधानसभा की ओर मार्च

यह टकराव तब हुआ जब JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के विरोध में उम्मीदवार ‘विधानसभा घेराव’ मार्च निकाल रहे थे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों को झारखंड विधानसभा तक पहुंचने से रोकने के लिए पुलिस ने वॉटर कैनन, आंसू गैस और लाठियों का इस्तेमाल किया।

PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, नौकरी के हजारों उम्मीदवार विधानसभा की ओर मार्च करते हुए कई बैरिकेड्स तोड़कर आगे बढ़ गए, जहां मानसून सत्र चल रहा था। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि महिलाओं समेत कई छात्र घायल हुए हैं।

हालांकि, रांची के SSP राकेश रंजन ने कहा कि पत्थरबाजी में 14 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।

पुलिस ने कहा है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में बाधा डालने वालों की पहचान के लिए CCTV फुटेज की जांच की जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की।

बता दें कि जब प्रदर्शनकारी विधानसभा से करीब 200 मीटर दूर पहुंचे, तो जगन्नाथपुर मंदिर के पास पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया और कई राउंड आंसू गैस के गोले छोड़े।

इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने आखिरी बैरिकेड भी पार कर लिया और विधानसभा के गेट नंबर 1 तक पहुंच गए, जहां उन्होंने धरना शुरू कर दिया। इसके बाद पुलिस ने एक बार फिर लाठीचार्ज किया।

छात्रों की मांग: CBI जांच हो और परीक्षा रद्द की जाए

गौरतलब है कि भर्ती परीक्षाओं, खासकर JSSC-CGL परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्र 25 जुलाई से विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मांगों में CBI जांच, JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करना और झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) व झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) के कामकाज में व्यापक सुधार शामिल हैं।

वे 14वीं झारखंड PSC सिविल सेवा परीक्षा सहित कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने की भी मांग कर रहे हैं। साथ ही, वे CBI या राज्य के बाहर के रिटायर्ड हाई कोर्ट जजों के पैनल से स्वतंत्र जांच की मांग भी कर रहे हैं।

इस बीच, JLKM नेता देवेंद्र नाथ महतो, जो इस मुद्दे पर नौ दिनों से भूख हड़ताल पर थे, खराब सेहत के बावजूद सोमवार को एम्बुलेंस में बैठकर मार्च में शामिल हुए।

बाद में, ब्लड शुगर लेवल में “भारी गिरावट” आने के बाद उन्हें रांची सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी हालत गंभीर बताई है।

बता दें कि प्रोटेस्ट के दौरान महतो ने स्ट्रेचर पर खड़े होकर प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया और छात्रों के खिलाफ कथित तौर पर बल प्रयोग की आलोचना की।

हेमंत सोरेन ने बातचीत की अपील की

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विरोध कर रहे छात्रों से अपील की कि वे बातचीत और भरोसे के जरिए अपनी शिकायतों का समाधान करें। उन्होंने कहा कि छात्रों को अपनी चिंताएं जाहिर करने का लोकतांत्रिक अधिकार है और उन्हें भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी मांगों पर “पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता” के साथ विचार करेगी।

सोरेन ने विपक्षी नेताओं पर राजनीतिक फायदे के लिए छात्रों को गुमराह करने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया और प्रदर्शनकारियों से आग्रह किया कि वे किसी भी राजनीतिक जाल में न फंसें।

उन्होंने कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली को ज्यादा पारदर्शी, टेक्नोलॉजी-आधारित, सुरक्षित और जवाबदेह बनाने की इच्छुक है।

बता दें कि राज्य सरकार 14वीं JPSC परीक्षा और 2023 व 2025 की बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमत हो गई है। उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि वित्तीय अनियमितताओं के सबूत मिलने के बाद सरकार ED जांच के लिए भी सहमत हो गई है।

JSSC-CGL परीक्षा को लेकर कुमार ने कहा कि सरकार इसे रद्द करने का आदेश नहीं दे सकती, क्योंकि यह परीक्षा अदालत की निगरानी में आयोजित की गई थी।

सरकार ने CID जांच की निगरानी के लिए हाई कोर्ट के एक रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक कमिटी बनाने का प्रस्ताव भी दिया है, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया।

इसके अलावा JPSC और JSSC की स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) में भी बदलाव का प्रस्ताव रखा गया है। इन सुधारों के लिए IIT-ISM धनबाद, IIM रांची और XLRI जमशेदपुर से सुझाव लिए जाएंगे।

ED की जांच और CID की गिरफ्तारी से विवाद और बढ़ा

सोमवार को विरोध-प्रदर्शन और तेज हो गया, क्योंकि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कई भर्ती परीक्षाओं, खासकर JSSC-CGL परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू कर दी।

वहीं, झारखंड CID ने कथित अनियमितताओं के मामले में JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते को गिरफ्तार किया है। उनकी गिरफ्तारी के बाद इस मामले में CID की ओर से गिरफ्तार किए गए लोगों की संख्या बढ़कर 20 हो गई है।

इससे पहले जांच एजेंसी ने रांची, पलामू, हजारीबाग, बोकारो और धनबाद में कुल 18 ठिकानों पर छापेमारी की थी।

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महिला आरक्षण पर राहुल गांधी का रिजिजू को जवाब, बोले- 2023 का कानून बिना शर्त लागू करें

kiren rijiju and rahul gandhi on women reservation

राहुल गांधी ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि महिला आरक्षण विधेयक 2023 में सर्वसम्मति से पारित हो चुका है। उन्होंने सवाल उठाया कि तीन साल बाद भी कानून लागू क्यों नहीं हुआ और इसे परिसीमन से क्यों जोड़ा जा रहा है। ALSO READ: IIT दिल्ली में PM मोदी का छात्रों को मंत्र, ‘जिंदगी की परीक्षा में सब आउट ऑफ सिलेबस’, चुनौतियों से मत घबराना
 

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि रिजिजू जी, संसदीय कार्य मंत्री होने के नाते आपसे बेहतर यह कौन जानता होगा – महिला आरक्षण विधेयक 2023 में ही सर्वसम्मति से पारित हो चुका है, कांग्रेस के पूर्ण समर्थन के साथ। सवाल यह है कि तीन साल बाद भी वह लागू क्यों नहीं हुआ और अब आप उसे परिसीमन से बेवजह क्यों जोड़ना चाहते हैं? 2023 का क़ानून लागू कीजिए। बिना किसी शर्त के। ALSO READ: 'क्या हम Gen Z की नब्ज नहीं पकड़ पाए?' राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' पर शशि थरूर का बड़ा बयान

 

राहुल के किस बयान ने रिजिजू को दी उम्मीद?

इससे पहले शनिवार को राहुल गांधी द्वारा महिलाओं की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात किए जाने के बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस को महिला आरक्षण विधेयक का बिना शर्त समर्थन करने की चुनौती दी थी। राहुल गांधी ने अपने वीडियो में कहा था कि देश की राजनीति का मकसद 'लोगों को यह समझाना होना चाहिए कि महिलाओं की अभिव्यक्ति के बिना हमारा देश अधूरा और पिछड़ा हुआ है। रिजिजू ने राहुल गांधी के इस बयान को कांग्रेस की ओर से एक सकारात्मक संदेश बताया।

 

राहुल गांधी के बयान पर रिजिजू ने क्या प्रतिक्रिया दी?

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह कांग्रेस पार्टी की ओर से एक सकारात्मक संदेश लगता है। राहुल गांधी जी की महिलाओं के प्रति सोच में बदलाव साफ दिख रहा है। अब, मुझे उम्मीद है कि कांग्रेस पार्टी महिला आरक्षण विधेयक का बिना शर्त समर्थन करेगी।

 

गौरतलब है कि कांग्रेस और विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन किया है, लेकिन वे परिसीमन की प्रक्रिया का विरोध करते रहे हैं।

‘देश को आपकी जरूरत है…’, CJP प्रोटेस्ट के बाद PM मोदी का Gen Z को बड़ा संदेश

PM Modi: नई दिल्ली में हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध-प्रदर्शन के बाद अपने पहले सार्वजनिक संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को देश के युवाओं की क्षमता और ताकत पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को युवा पीढ़ी की जरूरत है। बता दें कि पीएम मोदी ने यह बात दिल्ली स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) के वार्षिक दीक्षांत समारोह में कही।

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में छात्रों से कहा, “हमें आप पर भरोसा है, और देश को आपकी जरूरत है।”

उन्होंने कहा कि हर पीढ़ी की देश के प्रति जिम्मेदारी होती है और युवाओं के लक्ष्यों में देश का सर्वांगीण विकास शामिल होना चाहिए। उन्होंने कहा, “आप सभी जानते हैं कि हर पीढ़ी को अपने समय की खास चुनौतियों का सामना करना पड़ता है और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी निभानी पड़ती है… अगले 30 से 35 सालों में आप जो कुछ भी करेंगे, उसका असर ‘विकसित भारत’ की ओर हमारे सफर पर पड़ेगा। इसलिए, आपके हर फैसले का आधार यह भी होना चाहिए कि इससे देश को क्या फायदा होगा? इससे देश की कौन-सी जरूरतें पूरी होंगी?”

पीएम मोदी ने आगे कहा कि आज की तेजी से बदलती दुनिया में टेक्नोलॉजी अहम भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि जो लोग इन बदलावों के हिसाब से खुद को ढाल लेंगे, वे “आखिरकार जीतेंगे”।

उन्होंने कहा, “…ग्लोबल स्ट्रैटेजिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। ग्लोबल पावर बैलेंस हर पल बदल रहा है, और इसकी मुख्य वजह टेक्नोलॉजी में हो रही तेजी से तरक्की है। कोई भी पक्के तौर पर नहीं कह सकता कि अगले 20 या 30 सालों में दुनिया कैसी दिखेगी… दुनिया, टेक्नोलॉजी, इंडस्ट्री और प्रोफेशन, सभी में बदलाव आएंगे। लेकिन इन सबके बीच एक बात याद रखें: जो लोग सीखते रहेंगे, वे ही सफल होंगे।”

प्रधानमंत्री के संबोधन में Gen Z की झलक

स्काईरूट के विक्रम-1 रॉकेट के सफल लॉन्च का जिक्र करते हुए, प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार ने युवाओं को अपना योगदान देने के लिए कई रास्ते खोले हैं।

उन्होंने कहा, “हमने ऐसे कई रास्ते खोले हैं जिनसे हमारे युवा योगदान दे सकते हैं। नए सेक्टर खुले हैं। मैंने पहले भी स्पेस सेक्टर के बारे में बात की थी। आज वही स्पेस सेक्टर हमारे युवाओं के लिए आसमान की ऊंचाइयों को छूने का जरिया बन गया है।”

अपने संबोधन में Gen Z वाली बात जोड़ते हुए पीएम मोदी ने कहा: “आज हमारे युवा कह रहे हैं, ‘अपने परिवार में रॉकेट बनाने वाला मैं पहला व्यक्ति हूं’। आज हमारे युवा रॉकेट लॉन्च कर रहे हैं।”

पीएम मोदी ने आगे कहा कि देश का ड्रोन सेक्टर भी तेजी से बढ़ रहा है। आज ड्रोन का इस्तेमाल सिर्फ तकनीक के तौर पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से लेकर दवाइयां पहुंचाने जैसे जरूरी कामों में भी किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल से युवाओं के लिए नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं और यह सेक्टर आने वाले समय में देश की तरक्की में अहम भूमिका निभा सकता है।

बता दें कि पीएम मोदी का यह संबोधन ऐसे समय में आया है, जब हाल ही में NEET-UG 2026 से जुड़े पेपर लीक विवाद को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP ने विरोध-प्रदर्शन किया था। इस विवाद के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

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Gen Z की अनोखी नौकरी वाली मांग ने छेड़ी बहस, IITian फाउंडर ने बताया क्यों कैंडिडेट को किया सिलेक्ट

नौकरी के इंटरव्यू में कैंडिडेट आमतौर पर सैलरी, छुट्टियों, वर्क फ्रॉम होम और जॉब रोल से जुड़ी बातें पूछते हैं। लेकिन नोएडा के एक फाउंडर के सामने एक उम्मीदवार ने ऐसी मांग रख दी, जिसने इंटरव्यू का माहौल ही बदल दिया। कैंडिडेट ने बेहद आत्मविश्वास के साथ कहा कि उसे हर दोपहर 30 मिनट की नींद लेने की जरूरत होगी, क्योंकि इससे उसकी productivity बेहतर होती है। हैरानी की बात यह थी कि उसने यह बात न तो मजाक में कही और न ही किसी झिझक के साथ।

फाउंडर नितिन वर्मा के मुताबिक, उम्मीदवार ने अपनी इस जरूरत को ऐसे रखा जैसे वह सैलरी पर बातचीत कर रहा हो। पहली प्रतिक्रिया में उन्हें इंटरव्यू खत्म करने का ख्याल आया, लेकिन बाद में उन्होंने इस मांग को एक अलग नजरिए से देखने का फैसला किया। सवाल यह था कि क्या कर्मचारी के काम के नतीजे अच्छे हों तो 30 मिनट की nap वास्तव में बड़ी समस्या है?

 ‘हर दोपहर मुझे Nap चाहिए’

IIT-backed कंपनी के फाउंडर और CEO नितिन वर्मा ने LinkedIn पर इस इंटरव्यू का अनुभव शेयर किया। उनके मुताबिक, उम्मीदवार ने पूरी गंभीरता और आत्मविश्वास के साथ कहा कि दोपहर की 30 मिनट की झपकी उसके काम को बेहतर बनाती है। वर्मा ने बताया कि उम्मीदवार ने यह बात ऐसे रखी, जैसे वह सैलरी पर बातचीत कर रहा हो। उनका पहला विचार इंटरव्यू खत्म करने का था, लेकिन फिर उन्होंने सोचा कि क्या यह मांग वाकई इतनी गलत है।

फाउंडर को पसंद आई कैंडिडेट की बेबाकी

नितिन वर्मा ने माना कि छोटी दोपहर की नींद से फोकस, एनर्जी और याददाश्त बेहतर हो सकती है। उन्होंने मजाक में कहा कि कॉरपोरेट ऑफिस में दोपहर की मीटिंग्स के दौरान कई लोग वैसे भी ऊंघते नजर आते हैं, फर्क सिर्फ इतना है कि यह उम्मीदवार अपनी जरूरत खुलकर बता रहा था। फाउंडर के मुताबिक, ज्यादातर लोग इंटरव्यू में खुद को कंपनी की पसंद के हिसाब से पेश करते हैं, जबकि इस कैंडिडेट ने साफ बताया कि वह किस तरह काम करने पर सबसे ज्यादा productive रहता है।

‘मुझे फर्क नहीं पड़ता तुम कब सोते हो’

वर्मा ने कैंडिडेट को फिक्स 30 मिनट की Nap Break देने के बजाय साफ कहा कि उन्हें इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि कर्मचारी कब आराम करता है। उनके लिए जरूरी यह है कि सौंपा गया काम समय पर पूरा हो। यानी शर्त सीधी थी, काम पूरा करो, तो घंटे गिनने की जरूरत नहीं; काम नहीं हुआ तो कोई Nap मदद नहीं करेगी।

आखिरकार मिल गई नौकरी

सबसे दिलचस्प बात यह रही कि कैंडिडेट को नौकरी मिल गई। फाउंडर ने कहा कि उसकी Nap की मांग असली मुद्दा नहीं थी। उन्हें उसकी ईमानदारी और आत्मविश्वास ने प्रभावित किया। इस घटना ने उन्हें यह सोचने पर भी मजबूर किया कि क्या आधुनिक वर्कप्लेस में कर्मचारियों की productivity को ऑफिस में बिताए घंटों से मापा जाना चाहिए या उनके actual results से।

LinkedIn पर लोगों ने क्या कहा?

पोस्ट वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने इसे बदलते workplace culture का संकेत बताया। कुछ ने कहा कि अगर कर्मचारी अपना काम पूरा कर रहा है तो उसे अपनी working style में थोड़ी आजादी मिलनी चाहिए। वहीं, कुछ यूजर्स ने Gen Z के इस अंदाज पर मजाक भी किया। एक यूजर ने कहा कि Gen Z को पता है कि जरूरी benefits के लिए negotiation कैसे करनी है।

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माता–पिता को वेक्सीन के रखरखाव से जूझते देखकर आया आइडिया, 3 किशोरों ने नमक से चलने वाला फ्रिज बनाकर जीता 12500 डॉलर का इनाम

भारत प्रतिभा की खान है। ये बाद मध्य प्रदेश के तीन किशोरों ने अपनी नई खोज से फिर साबित कर दी है। इंदौर के ध्रुव चौधरी, मिथ्रन लधानिया और मृदुल जैन ने फार्मेसी के क्षेत्र में काम करने वाले अपने माता-पिता को वैक्सीन के रखरखाव से जूझते देखा। बिजली की कमी और मौसम की मार के बीच वैक्सीन को ठंडा रखना किसी चुनौती से कम नहीं था। लेकिन इन किशोरों ने हार नहीं मानी और इस समस्या का ऐसा हल खोजा जिसने न सिर्फ उन्हें अंतररष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाया, बल्कि 12,500 डॉलर की पुरस्कार राशि भी जीतने का मौका दिया।

ध्रुव, मिथ्रन और मृदुल ने एक ऐसा फ्रिज बनाया जो बिजली से नहीं नमक से चलता है। उन्होंने इसे ‘थर्मावॉल्ट’ नाम दिया, यह एक इंसुलेटेड कूलिंग बॉक्स है जिसे किसी आउटलेट, बैटरी और बर्फ की जरूरत नहीं होती। यह नमक से चलता है। इस खोज के लिए तीनों ने 2025 का अर्थ प्राइज जीता, यह पर्यावरण प्रोजेक्ट पर काम करने वाले किशोरों को दिया जाता है। चौधरी, लधानिया और जैन ने एशिया क्षेत्र से यह पुरस्कार जीता। इस उपलब्धि के साथ $12,500 मिले, जिसका इस्तेमाल इन्होंने थर्मावॉल्ट की 200 यूनिट बनाने और उन्हें टेस्टिंग के लिए 120 हॉस्पिटल में भेजने का प्लान बनाया।

ध्रुव, मिथ्रन और मृदुल ने कोविउ-19 के समय इस आइडिया पर काम करना शुरू किया। तीनों लड़के अपने माता-पिता से एक ही दिक्कत सुकर परेशान थे। उनका कहना था, वैक्सीन तैयार थीं, लेकिन जिन ग्रामीण इलाकों में बिजली नहीं थी, उनके पास उन्हें सही तापमान पर लंबे समय तक रखने का कोई तरीका नहीं था। इलाज होने और उसे पहुंचा पाने के बीच के इस अंतर को ही टीनएजर्स ने पाटने का फैसला किया।

सही नमक की खोज कैसे हुई

थर्मावॉल्ट के पीछे विज्ञान का बहुत साधारण सिद्धांत है। कुछ नमक, पानी में घुलने पर, आयन नाम के चार्ज्ड पार्टिकल्स में अलग हो जाते हैं। इस अलगाव में एनर्जी लगती है, और नमक अपने आस-पास से वह एनर्जी खींचता है, इस प्रोसेस में अपने आस-पास का पानी ठंडा करता है। चौधरी, लधानिया और जैन ने इंटरनेट की दुनिया को खंगाला। उन्होंने लगभग 150 नमक की एक लिस्ट, फिर इसे लगभग 20 तक सीमित किया और टेस्ट करने लायक बनाया। उन्होंने प्रयोग करने के लिए इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) में लैब स्पेस लिया।

किसी भी नमक ने पानी को काफी ठंडा नहीं किया। नौवीं क्लास की साइंस की टेक्स्टबुक में चुपचाप पड़े दो कंपाउंड थे बेरियम हाइड्रॉक्साइड ऑक्टाहाइड्रेट और अमोनियम क्लोराइड उनके काम आए। बिजनेस इनसाइडर के मुताबिक, चौधरी ने कहा, “हमने सबसे अच्छा नमक ढूंढने के लिए पूरा इंटरनेट खंगाला, लेकिन हम बस अपनी नौवीं क्लास की साइंस की टेक्स्टबुक पर वापस आ गए।”

अमोनियम क्लोराइड अकेले 2 से 6 डिग्री सेल्सियस (लगभग 35 से 43 डिग्री फ़ारेनहाइट) के बीच टेम्परेचर बनाए रखता था, यह रेंज कई वैक्सीन के लिए सही है। बेरियम हाइड्रॉक्साइड ऑक्टाहाइड्रेट मिलाने से मिक्सचर सबजीरो टेम्परेचर पर पहुंच गया, जो वैक्सीन के लिए और ऑर्गन ट्रांसपोर्ट के लिए भी काम का था। फ़ॉर्मूला मिलने के तीन महीने बाद, उनके पास एक वर्किंग प्रोटोटाइप था और वे इंदौर के आस-पास के हॉस्पिटल में इसकी टेस्टिंग कर रहे थे।

थर्मावॉल्ट के अंदर असल में क्या है

डिवाइस खुद डिजाइन में सिंपल था। इंसुलेटेड प्लास्टिक के बाहरी शेल के अंदर कॉपर की लाइनिंग थी, जहां वैक्सीन या ऑर्गन रखे जाएंगे। प्लास्टिक और कॉपर के बीच, किशोरों ने पानी में नमक घोलकर बनाया गया एक कूलिंग सॉल्यूशन डाला।

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Deepfake पर सरकार का बड़ा एक्शन, AI कंटेंट पर लेबल जरूरी, गैरकानूनी सामग्री अब 3 घंटे में हटानी होगी, नए नियम जान लें वरना पछताएंगे

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कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से तैयार होने वाले डीपफेक और अन्य हानिकारक कंटेंट से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने नियामक व्यवस्था को और सख्त किया है। सरकार ने AI से तैयार कंटेंट पर स्पष्ट लेबल और पहचान योग्य मेटाडेटा उपलब्ध कराना अनिवार्य किया है। साथ ही, सरकारी या न्यायालय के आदेश के आधार पर गैरकानूनी जानकारी हटाने की समयसीमा 36 घंटे से घटाकर 3 घंटे कर दी गई है। यह जानकारी केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने 5 अगस्त 2026 को लोकसभा में दी।

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AI से बने कंटेंट की पहचान होगी आसान

 

सरकार के अनुसार, 10 फरवरी 2026 को आईटी नियम, 2021 में संशोधन कर कृत्रिम रूप से उत्पन्न सूचना (SGI), जिसमें डीपफेक और AI-जनित कंटेंट शामिल हैं, से होने वाले नुकसान से निपटने के लिए नियामक ढांचे को मजबूत किया गया। नए प्रावधानों के तहत मध्यस्थों को AI-जनित सामग्री के लिए स्पष्ट लेबलिंग और ट्रेस किए जा सकने वाले मेटाडेटा की व्यवस्था करनी होगी। इसका उद्देश्य यूजर्स को यह समझने में मदद करना है कि कोई सामग्री वास्तविक है या कृत्रिम रूप से तैयार की गई है और इसके जरिए धोखाधड़ी तथा दुरुपयोग को रोकना है।

 

36 घंटे की जगह अब 3 घंटे में हटानी होगी गैरकानूनी सामग्री

 

नए नियमों में कंटेंट हटाने की समयसीमा को भी कम किया गया है। सरकार के अनुसार, गैरकानूनी जानकारी हटाने की समयसीमा 36 घंटे से घटाकर 3 घंटे कर दी गई है। वहीं कुछ संवेदनशील शिकायतों के निपटारे की समयसीमा भी कम की गई है।

 

डीपफेक बनाने और फैलाने पर भी नियम सख्त

 

आईटी नियमों के तहत मध्यस्थों को ऐसी जानकारी को होस्ट, प्रदर्शित, अपलोड, प्रकाशित या साझा करने से रोकने के लिए उचित सावधानी बरतनी होगी, जिसमें AI के जरिए किसी अन्य व्यक्ति का रूप धारण करना, जानबूझकर गलत या भ्रामक जानकारी देना, निजता का उल्लंघन करना या राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा पैदा करना शामिल है।

 

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि AI से तैयार बाल यौन शोषण सामग्री, बिना सहमति की अंतरंग तस्वीरें, प्रतिरूपण और अन्य हानिकारक सामग्री के खिलाफ प्लेटफॉर्म को रोकथाम और तत्काल कार्रवाई करनी होगी।

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किन कानूनों के तहत हो सकती है कार्रवाई?

 

डीपफेक और AI से जुड़े अपराधों पर आईटी एक्ट, 2000 के अलावा भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के तहत भी कार्रवाई का प्रावधान है। BNS की धारा 319 प्रतिरूपण के जरिए धोखाधड़ी से संबंधित है, जबकि धारा 336 में धोखाधड़ी के लिए झूठे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड बनाने जैसे कृत्य शामिल हैं। धारा 353 गलत या भ्रामक बयान, अफवाह या रिपोर्ट के जरिए गलत सूचना और दुष्प्रचार फैलाने से जुड़े मामलों पर लागू हो सकती है। संगठित साइबर अपराधों पर धारा 111 के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है।

 

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की भी बढ़ी जिम्मेदारी

 

भारत में 50 लाख या उससे अधिक पंजीकृत यूजर्स वाले महत्वपूर्ण सोशल मीडिया मध्यस्थों (SSMI) पर अतिरिक्त जिम्मेदारियां हैं। इनमें गैरकानूनी कंटेंट का पता लगाने और उसके प्रसार को सीमित करने के लिए स्वचालित तकनीकी उपकरणों का इस्तेमाल, अनुपालन रिपोर्ट प्रकाशित करना और भारत में संबंधित अधिकारियों की नियुक्ति जैसी जिम्मेदारियां शामिल हैं।

 

डीपफेक की शिकायत कहां करें?

 

सरकार के अनुसार, नागरिक National Cyber Crime Reporting Portal के जरिए डीपफेक, वित्तीय धोखाधड़ी और कंटेंट के दुरुपयोग की शिकायत कर सकते हैं। इसके लिए cybercrime.gov.in पोर्टल उपलब्ध है और 1930 हेल्पलाइन भी संचालित है। अगर किसी मध्यस्थ के शिकायत अधिकारी से समस्या का समाधान नहीं होता है, तो उपयोगकर्ता Grievance Appellate Committee (GAC) के माध्यम से ऑनलाइन अपील कर सकते हैं।

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सरकार ने डीपफेक डिटेक्शन पर भी बढ़ाया फोकस

 

IndiaAI Mission के तहत सुरक्षित और भरोसेमंद AI को बढ़ावा देने के लिए 13 जिम्मेदार AI परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें डीपफेक का पता लगाने से जुड़ी परियोजनाएं भी शामिल हैं। IIT जोधपुर और IIT मद्रास द्वारा विकसित मल्टी-एजेंट फ्रेमवर्क तथा IIT खड़गपुर की रियल-टाइम वॉयस डीपफेक डिटेक्शन सिस्टम जैसी पहलें इसमें शामिल हैं।

टोल फ्री हुई कानपुर-लखनऊ एक्‍सप्रेसवे! NHAI ने सड़क बनाने वाली कंपनी पर लिया ये एक्शन

कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर सड़क में आई खराबी के बाद नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने बड़ा फैसला लिया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर फिलहाल टोल वसूली बंद कर दी है। ये फैसला एक्सप्रेसवे के करीब 300 मीटर लंबे हिस्से पर सड़क के फिसलन भरे होने की शिकायत सामने आने के बाद लिया गया। सड़क की स्थिति को देखते हुए मरम्मत का काम तेजी से कराया जा रहा है। टोल बंद रहने से होने वाले रेवेन्यू नुकसान की भरपाई निर्माण कंपनी PNC इंफ्राटेक लिमिटेड से कराई जाएगी।

शुरू किए जांच

NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने कहा है कि जब तक सड़क का खराब हिस्सा पूरी तरह ठीक नहीं हो जाता, तब तक इस एक्सप्रेसवे पर टोल नहीं वसूला जाएगा। साथ ही, टोल बंद रहने से होने वाले रेवेन्यू नुकसान की भरपाई निर्माण कंपनी PNC इंफ्राटेक लिमिटेड से कराई जाएगी। NHAI ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए निर्माण कंपनी PNC इंफ्राटेक, परियोजना के स्वतंत्र इंजीनियर और निर्माण कार्य की निगरानी से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। NHAI ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कदम उठाए जाएंगे।

NHAI ने कंपनी को जारी किया नोटिस 

प्रभावित हिस्से पर ट्रैफिक डायवर्ट कर दिया गया है और मरम्मत का पूरा खर्च PNC इंफ्राटेक उठाएगी। वहीं, NHAI ने कंपनी को नोटिस जारी कर उसे ‘नॉन-परफॉर्मर’ घोषित करने का प्रस्ताव रखा है। साथ ही कंपनी पर जुर्माना लगाने और परियोजना से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। प्रोजेक्ट मैनेजर, स्वतंत्र इंजीनियर की टीम के प्रमुख और रेजिडेंट इंजीनियर को उनके पद से हटा दिया गया। साथ ही उन्हें अगले दो साल तक सड़क परिवहन मंत्रालय, NHAI और NHIDCL की परियोजनाओं में काम करने से रोक दिया गया है। इसके अलावा, लापरवाही के आरोप में मौजूदा और पूर्व प्रोजेक्ट डायरेक्टर के खिलाफ भी चार्जशीट जारी करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

सड़क बनने के बाद लगेगा टैक्स

NHAI ने बताया कि, परियोजना के स्वतंत्र इंजीनियर थीम इंजीनियरिंग सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है और उसे भविष्य की परियोजनाओं से बाहर किया जा सकता है। वहीं, सड़क में आई खराबी की वजह पता लगाने के लिए IIT खड़गपुर के प्रोफेसर के. एस. रेड्डी की अगुवाई में विशेषज्ञों की टीम बनाई गई है। NDTV ने बताया कि इसके अलावा, एक्सप्रेसवे की सड़क की स्थिति की जांच के लिए लेजर प्रोफाइलोमीटर तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाएगा। NHAI ने स्पष्ट किया है कि सड़क के खराब हिस्से की पूरी तरह मरम्मत होने के बाद ही एक्सप्रेसवे पर दोबारा टोल वसूली शुरू की जाएगी।

300 मीटर हिस्सा होगा रिपेयर

NHAI के अनुसार, 26 जुलाई को एक्सप्रेसवे के दाहिने कैरिजवे पर किलोमीटर 64 के पास सड़क में फिसलन की समस्या सामने आई। ये मामला 13 जुलाई को एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सामने आया। उन्नाव जिले के कोरारी गांव के पास हुई भारी बारिश के बाद सड़क के इस हिस्से के खराब होने की तस्वीरें भी सामने आई थीं। शुरुआती रिपोर्ट में 5 से 7 मीटर तक सड़क प्रभावित होने की बात कही गई थी, लेकिन NHAI की जांच में करीब 300 मीटर लंबे हिस्से में फिसलन मिलने की पुष्टि हुई।

‘IIT सिर्फ एक टैग है…’, इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले सालाना 95 लाख की कमाई करने का किया दावा, सैलरी का स्क्रीनशॉट वायरल

भारत में IIT की डिग्री को लंबे समय से सबसे कीमती एकेडमिक क्वालिफिकेशन में से एक माना जाता रहा है। हालांकि, इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले एक व्यक्ति की वायरल पोस्ट ने नई बहस छेड़ दी है। इस पोस्ट में दावा किया गया है कि कॉलेज पूरा किए बिना ही वे सालाना 95 लाख रुपये से ज़्यादा कमाते हैं। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या अब बड़े एजुकेशनल टैग के बजाय स्किल्स और अनुभव ज़्यादा मायने रखते हैं।

यह बहस तब शुरू हुई जब ग्रोथ मार्केटर लावण्या जैन ने दावा किया कि वे सालाना 1,00,000 डॉलर (लगभग 95 लाख रुपये) से ज़्यादा कमाते हैं, जबकि उन्होंने अपनी इंजीनियरिंग की डिग्री कभी पूरी नहीं की। अपने दावे को साबित करने के लिए, जैन ने कुछ स्क्रीनशॉट शेयर किए। इनमें 3.74 लाख रुपये और 1.12 लाख रुपये की सैलरी क्रेडिट होती दिख रही थी, यानी उनके अकाउंट में कुल मिलाकर लगभग 4.86 लाख रुपये जमा हुए थे।

जैन के अनुसार, उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में अपना बैचलर ऑफ़ टेक्नोलॉजी (BTech) प्रोग्राम आखिरी सेमेस्टर के दौरान छोड़ दिया था। इस फ़ैसले को वे अब अपनी ज़िंदगी के सबसे अच्छे फ़ैसलों में से एक मानते हैं।

उन्होंने लिखा, “मैं IIT से भी नहीं हूं। असल में, मैंने इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन्स इंजीनियरिंग में अपनी B.Tech की पढ़ाई आखिरी सेमेस्टर में ही छोड़ दी थी। मुझे लगता है कि यह मेरी ज़िंदगी के सबसे अच्छे फैसलों में से एक था।” जैन ने आगे कहा कि वे अभी एक कॉन्ट्रैक्टर के तौर पर सिर्फ़ पार्ट-टाइम काम करके अपने पुराने कॉलेज के सबसे ज़्यादा प्लेसमेंट पैकेज से भी ज़्यादा कमा रहे हैं।

उन्होंने कहा, “मैं अपने कॉलेज के सबसे ज़्यादा प्लेसमेंट पैकेज (100k USD) से भी ज़्यादा कमा रहा हूं, और वह भी एक कॉन्ट्रैक्टर के तौर पर पार्ट-टाइम काम करके।” अपनी मुख्य कमाई के अलावा, जैन ने यह भी बताया कि उन्होंने कई पैसिव इनकम के ज़रीये बनाए हैं जो उनकी कुल कमाई को काफ़ी बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा, “मेरे पास पैसिव इनकम के 5 ज़रीये हैं, और मेरी मुख्य कमाई मेरे सभी खर्चों को पूरा करती है (और वैसे, मैं काफ़ी खर्च करता हूं)।”

उनके लिंक्डइन प्रोफ़ाइल पर मौजूद जानकारी के अनुसार, जैन ने Runable, Kairos Computer और Fold जैसे स्टार्टअप्स में ग्रोथ मार्केटिंग और गो-टू-मार्केट (GTM) भूमिकाओं में काम किया है। उनके करियर का सफ़र स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक बड़े ट्रेंड को दिखाता है, जहां कई एम्प्लॉयर अब सिर्फ़ एकेडमिक डिग्री के बजाय स्किल्स, काम करने के तरीके और मापने योग्य बिज़नेस इम्पैक्ट को ज़्यादा अहमियत दे रहे हैं।

अपनी कमाई के बारे में बताने के बावजूद, जैन ने ज़ोर देकर कहा कि उनकी पोस्ट का मकसद अपनी आर्थिक सफलता का दिखावा करना नहीं था। इसके बजाय, उन्होंने कहा कि इसका मकसद उस आम धारणा को चुनौती देना था कि सिर्फ़ IIT की डिग्री ही करियर में सफलता की गारंटी देती है।