FMCG Price Hikes: महंगा होगा तेल, साबुन, चॉकलेट? Britannia, Dabur, और HUL समेत छह कंपनियों की ये है तैयारी

FMCG Price Hikes: एफएमसीजी सेक्टर की दिग्गज कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स के भाव बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। यह बढ़ोतरी इसी तिमाही में हो सकती है। इसकी वजह ये है कि कमोडिटी की बढ़ती लागत यानी कच्चे माल के महंगे होने और जियो-पॉलिटिकल लेवल पर अनिश्चितताओं के चलते कंपनियों के मुनाफे के मार्जिन पर दबाव बढ़ रहा है। हालांकि न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनियां मांग को लेकर अभी भी पॉजिटिव बनी हुई हैं। उनका कहना है कि खपत मजबूत बनी हुई है, प्रीमियम प्रोडक्ट्स की मांग बढ़ रही है और रेवेन्यू ग्रोथ में सुधार हो रहा है। इससे पहले जून तिमाही में एफएमसीजी सेक्टर ने औसतन 2-5% तक भाव बढ़ाए थे।

कंपनियां मार्जिन बचाने के लिए कुछ चीजों के दाम बढ़ाने के अलावा श्रिंकफ्लेशन का भी सहारा ले रही है। श्रिंकफ्लेशन का मतलब है कि किसी चीज के दाम को स्थिर रखने या हल्के बदलाव के साथ उसके पैकेट का वजन कम कर दिया जाता है। कंपनियों की नजर महंगाई, कच्चे तेल के भाव और मौसम से जुड़े रिस्क जैसे मानसून और अल नीनो (El Nino) पर भी है।

क्या है कंपनियों की तैयारी

दिग्गज बेकरी फूड कंपनी ब्रिटानिया (Britannia) को इस तिमाही भाव में 1.5-2% बढ़ोतरी की उम्मीद है। न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से ₹5और ₹10 की बिस्किट वाले पैक में श्रिंकफ्लेशन के जरिए किया जा सकता है क्योंकि चीनी और पाम तेल की कीमतें अभी भी ऊंची हैं। कंपनी के एमडी और सीईओ रक्षित हरगवे के मुताबिक जून तिमाही में प्राइसिंग से जुड़ी ग्रोथ मुख्य रूप से श्रिंकफ्लेशन के जरिए आई थी और इसका ओवरऑल असर 1% था लेकिन सितंबर तिमाही में 1.5-2.0% तक अतिरिक्त प्राइसिंग एक्शन देखने को मिल सकता है।

गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स (Godrej Consumer Products) ने जून तिमाही में औसतन लगभग 5% भाव बढ़ाए थे। साथ ही कंपनी ने सितंबर तिमाही में भाव में और बढ़ोतरी की भी बात कही। हालांकि कंपनी कच्चे माल के भाव के रुझान को लेकर ज्यादा स्पष्टता का इंतजार कर रही है। कंपनी के सीईओ सुधीर सीतापति का कहना है कि कंपनी के कई कच्चे माल की कीमतें कच्चे तेल से जुड़ी हुई हैं और इसके भाव में बदलाव का असर आमतौर पर 3-4 हफ्ते में दिखाई देता है। फिलहाल कच्चा तेल प्रति बैरल $80-85 के आसपास है और कंपनी का मानना है कि फिलहाल बहुत अधिक प्राइस हाइक की जरूरत नहीं है।

डाबर इंडिया (Dabur India) का मानना है कि इनपुट कॉस्ट यानी कच्चे माल और अन्य खर्च के ऊंचे बने रहने के आसार हैं। ऐसे में कंपनी का कहना है कि मार्जिन को बनाए रखने के लिए वह सोच-समझकर भाव बढ़ाएगी और साथ ही प्रोडक्टिविटी और कॉस्ट एफिशिएंसी पर अधिक ध्यान देगी। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक डाबर इंडिया के ग्लोबल सीईओ मोहित मल्होत्रा ​​का कहना है कि ग्रोथ मुख्य रूप से रेवेन्यू और प्राइस से आएगी। अर्निंग्स कॉल में उन्होंने कहा कि महंगाई की वजह से इसका बोझ कंज्यूमर पर डालना पड़ा, वॉल्यूम ग्रोथ के मुकाबले प्राइस ग्रोथ और वैल्यू ग्रोथ ज़्यादा हो रही है और महंगाई बहुत अधिक होने के कारण वॉल्यूम पर दबाव रहेगा।

हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) सितंबर तिमाही में कई प्रोडक्ट कैटेगरी में कीमतें बढ़ा सकती है, क्योंकि इसे तिमाही आधार पर 2-5% की इनफ्लेशन ग्रोथ की आशंका दिख रही है। कंपनी की सीईओ और एमडी प्रिया नायर का कहना है कि जून तिमाही में कीमतें 2-5% बढ़ाई गई थी और अब बढ़ती लागत को एडजस्ट करने और वॉल्यूम ग्रोथ को बनाए रखने के लिए सितंबर तिमाही में भी कीमतें बढ़ाई जाएगी।

टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स (Tata Consumer Products) के एमडी सुनील डिसूजा ने जरूरत पड़ने पर कीमतों में बढ़ोतरी के संकेत दिए हैं।

नेस्ले इंडिया (Nestle India) का कहना है कि जियो-पॉलिटिकल टेंशन और मानसून पर अलनीनो के असर पर नजर बनी हुई है।

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FPI की खरीद जारी, अगस्त के पहले हफ्ते में भारतीय शेयरों में लगाए ₹12921 करोड़

भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की खरीदारी का सिलसिला अगस्त में भी जारी है। विदेशी निवेशकों ने अगस्त के पहले सप्ताह में भारतीय शेयरों में ₹12,921 करोड़ का निवेश किया। बेहतर होती मैक्रो इकोनॉमिक स्थिति, अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और रुपये की स्थिरता की वजह से FPI के लिए भारतीय बाजार आकर्षक बना हुआ है।

इससे पहले जुलाई में FPI ने भारतीय शेयरों में ₹20,200 करोड़ का निवेश किया था। इसके पहले लगातार 4 महीने सेलिंग की थी। सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड (CDSL) के आंकड़ों के मुताबिक, FPI ने जून में ₹49,340 करोड़, मई में ₹32,963 करोड़, अप्रैल में ₹60,847 करोड़ और मार्च में रिकॉर्ड ₹1.17 लाख करोड़ की बिकवाली की थी।

इससे पहले फरवरी में उन्होंने भारतीय शेयरों में ₹22,615 करोड़ का निवेश किया था। हालांकि, हालिया खरीदारी के बावजूद साल 2026 में विदेशी निवेशक अब तक भारतीय शेयर बाजार में ₹2.41 लाख करोड़ की बिक्री कर चुके हैं। साल 2025 में उन्होंने ₹1.66 लाख करोड़ की सेलिंग की थी।

एक्सपर्ट्स का क्या है कहना

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के महीनों में FPI का रुख बदलने के पीछे अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की बढ़ती उम्मीद, कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी और रुपये की स्थिरता जैसे कारक प्रमुख हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के बेहतर ग्रोथ और महंगाई संबंधी अनुमान से भी निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, इनवेस्टमेंट प्लेटफॉर्म ट्रैक के को-फाउंडर और CEO वेदांत गुप्ते का कहना है कि भारतीय शेयरों में विदेशी हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम होने के कारण आगे विदेशी निवेश के लिए पर्याप्त गुंजाइश बनी हुई है। हाल की खरीदारी का एक बड़ा हिस्सा सेकेंडरी मार्केट के जरिए आया है। यह संकेत देता है कि विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी केवल IPO तक सीमित नहीं है, बल्कि लिस्टेड भारतीय कंपनियों में भी बढ़ रही है।

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जियोजीत इनवेस्टमेंट्स के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी.के. विजयकुमार का मानना है कि FPI की खरीदारी में एक महत्वपूर्ण रुझान यह है कि वे ऑटोमोबाइल, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दे रहे हैं। विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी भारतीय डेट या बॉन्ड बाजार में भी बनी हुई है। अगस्त में अब तक उन्होंने बॉन्ड बाजार में जनरल रूट के तहत ₹622 करोड़ का निवेश किया है।

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Chemical Stocks: धमाकेदार रिजल्ट लेकिन मोतीलाल ओसवाल की सेल रेटिंग, 16% टूटेगा यह शेयर, आपके पास है?

Deepak Nitrite Share Price: दिग्गज केमिकल कंपनी दीपक नाइट्राइट के लिए इस वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत धमाकेदार रही। इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही अप्रैल-जून 2026 में में कंपनी ने ऑपरेटिंग लेवल पर धमाकेदार परफॉरमेंस दिखाया और इसका ईबीआईटीडीए ढाई गुना से अधिक बढ़ गया। शेयरों की बात करें तो अपनी 6 अगस्त की रिपोर्ट में घरेलू ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज ने इसकी सेल रेटिंग को बरकरार रखा है। अभी की बात करें तो एक कारोबारी दिन पहले शुक्रवार 7 अगस्त को बीएसई पर यह 2.62% की बढ़त के साथ ₹1,795.50 पर बंद हुआ है।

किस भाव तक टूट सकता है Deepak Nitrite का शेयर

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज का कहना है कि दीपक नाइट्राइट का ऑपरेटिंग परफॉरमेंस कम बेस के चलते जून तिमाही में सालाना आधार पर उम्मीद से बेहतर रहा। जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर कंपनी का ईबीआईटीडीए कंसालिडेटेड लेवल पर 2.8 गुना बढ़कर ₹189.6 करोड़ से ₹540.2 करोड़ और मार्जिन 10.0% से 21.0% पर पहुंच गया। इसके ईबीआईटीडीए को फोनॉलिक सेगमेंट में सालाना आधार पर 3.5 गुना और एडवांस्ड इंटरमीडिएट्स सेगमेंट में 89% की ईबीआईटी ग्रोथ से सपोर्ट मिला। इसे बेहतर प्रोडक्ट मिक्स और ऑपरेटिंग लेवरेज के साथ-साथ बेहतर फिनॉल और बेंजीन स्प्रेड्स से सपोर्ट मिला।

आगे को लेकर ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि इंडस्ट्री के सामने आने वाली शॉर्ट-टर्म चुनौतियों और बदलते जियोपॉलिटिकल हालात कंपनी की परफॉर्मेंस पर असर डाल सकते हैं, लेकिन इसका कुल असर सीमित रहेगा। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक लगातार प्रोसेस में सुधार, बैकवर्ड इंटीग्रेशन से मिलने वाले फायदे, मैन्युफैक्चरिंग की बेहतर क्षमता, लागत को सही ढंग से कंट्रोल करना, घरेलू और एक्सपोर्ट मार्केट में ग्राहकों की बढ़ती इंक्वायरी और नए प्रोडक्ट्स का कमर्शियलाइजेशन से इसे सपोर्ट मिलेगा।

जून तिमाही के बेहतर मार्जिन को ध्यान में रखते हुए ब्रोकरेज फर्म ने वित्त वर्ष 2026-28 में इसके रेवेन्यू के 13%, शुद्ध मुनाफे के 24% और ईबीआईटीडीए के 22% के सीएजीआर से बढ़ने का अनुमान लगाया है। हालांकि वित्त वर्ष 2028 की अनुमानित कमाई के मुकाबले कंपनी ने इसका भाव 24 गुना पर फिक्स किया है, जिससे इसका टारगेट प्राइस ₹1500 बन रहा है। ब्रोकरेज फर्म ने इसे फिर से सेल रेटिंग दी है।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल

दीपक नाइट्राइट के शेयरों ने निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया है। पिछले साल 24 सितंबर 2025 को बीएसई पर यह ₹1,904.50 के भाव पर था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से 6 महीने में यह 32.77% टूटकर 30 मार्च 2026 को ₹1,280.40 पर आ गया जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है।

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Siemens Energy Stock Outlook: आगे 15% तक उछल सकता है शेयर, ब्रोकरेज ने दोहराई ‘बाय’ रेटिंग

सीमेंस एनर्जी इंडिया के शेयर में आगे 15 प्रतिशत तक की तेजी आने की गुंजाइश है। ऐसी उम्मीद मोतीलाल ओसवाल और नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के टारगेट प्राइस से मिली है। मोतीलाल ओसवाल ने शेयर के लिए ‘बाय’ रेटिंग दोहराई है। वहीं टारगेट प्राइस 3,950 रुपये से बढ़ाकर 4,100 रुपये प्रति शेयर कर दिया है। नुवामा ने ‘बाय’ रेटिंग और 4,200 रुपये प्रति शेयर का टारगेट बरकरार रखा है। यह टारगेट शेयर के BSE पर मौजूदा भाव 3648.75 रुपये से 15 प्रतिशत ज्यादा है। कंपनी के तिमाही नतीजे जारी होने के बाद ब्रोकरेज का व्यू सामने आया है।

सीमेंस एनर्जी इंडिया का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में मुनाफा सालाना आधार पर 67.8 प्रतिशत बढ़कर 440.9 करोड़ रुपये हो गया। ऑपरेशंस से रेवेन्यू 39.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 2485.6 करोड़ रुपये रहा। कुल खर्च 1949.5 करोड़ रुपये के रहे। कंपनी अक्टूबर-दिसंबर को वित्त वर्ष के तौर पर फॉलो करती है। जून 2026 तिमाही में कंपनी का EBITDA एक साल पहले से 72.1 प्रतिशत बढ़कर 585.7 करोड़ रुपये हो गया। ऑपरेटिंग मार्जिन बेहतर होकर 23.6 प्रतिशत हो गया।

30 जून 2026 तक सीमेंस एनर्जी इंडिया का ऑर्डर बैकलॉग 19,331 करोड़ रुपये का था। कंपनी का पावर ट्रांसमिशन बिजनेस से रेवेन्यू सालाना आधार पर 41.98 प्रतिशत बढ़कर 1,386.3 करोड़ रुपये हो गया। पावर जेनरेशन सेगमेंट का रेवेन्यू सालाना आधार पर 36.02 प्रतिशत बढ़कर 1,099.3 करोड़ रुपये हो गया।

Siemens Energy पर ब्रोकरेज के तर्क

मोतीलाल ओसवाल ने अपने रिसर्च नोट में कहा कि सीमेंस एनर्जी इंडिया के जून तिमाही के नतीजे हर मामले में अनुमानों से बेहतर रहे। रेवेन्यू में बढ़ोतरी पावर ट्रांसमिशन और पावर जेनरेशन, दोनों सेगमेंट में मजबूत ग्रोथ की वजह से हुई। पावर ट्रांसमिशन सेगमेंट के लिए EBIT मार्जिन में भी सुधार हुआ और पावर जेनरेशन के लिए यह अच्छा बना रहा। कुल ऑर्डर इनफ्लो सालाना आधार पर 3 प्रतिशत बढ़कर 34 अरब रुपये हो गया, जिससे कुल ऑर्डर बुक 193 अरब रुपये पर पहुंच गई।

पावर ट्रांसमिशन के लिए इनफ्लो में सालाना आधार पर 37 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और आंकड़ा 24 अरब रुपये पर पहुंच गया। पावर जेनरेशन इनफ्लो सालाना आधार पर 10 प्रतिशत घटकर 10 अरब रुपये रह गया। ब्रोकरेज ने उम्मीद जताई है कि सीमेंस एनर्जी को रिन्यूएबल्स, डेटा सेंटर और स्टीम टर्बाइन जैसे क्षेत्रों में घरेलू और एक्सपोर्ट-बेस्ड मौकों से फायदा मिलता रहेगा।

नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज का कहना है कि सीमेंस एनर्जी के मामले में अगले 12-24 महीनों में मौजूदा पुराने ऑर्डरों (बैकलॉग) को समय पर पूरा किया जाना और कलवा/ग्रीनफील्ड ट्रांसफॉर्मर व स्विचगियर क्षमता शुरू किया जाना वे महत्वपूर्ण चीजें होंगी, जिन पर नजर रखनी चाहिए। बेहतर काम-काज और मार्जिन के कारण नुवामान ने FY26E और FY27E के EPS अनुमानों को क्रमशः 12 प्रतिशत और 3 प्रतिशत बढ़ाया है।

Dividend Stock: हर शेयर पर मिलेगा ₹60 का डिविडेंड, 24 अगस्त से पहले बनना होगा शेयरहोल्डर

शेयर 6 महीनों में 33 प्रतिशत चढ़ा

Siemens Energy का मार्केट कैप बढ़कर लगभग 1.30 लाख करोड़ रुपये हो गया है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 75 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। शेयर 6 महीनों में 33 प्रतिशत और साल 2026 में अब तक 43 प्रतिशत मजबूत हुआ है।

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Bonus Issue: हर एक शेयर पर एक नया शेयर फ्री देगी कंपनी, एक महीने में शेयर 60% उछला

अहमदाबाद की इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन कंपनी चावड़ा इंफ्रा बोनस शेयर देने जा रही है। कंपनी के हर शेयरहोल्डर को प्रत्येक एक शेयर पर एक नया शेयर मिलेगा। कंपनी के बोर्ड ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। बोर्ड ने अथॉराइज्ड शेयर कैपिटल 35 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 70 करोड़ रुपये करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है।

कंपनी के बोर्ड ने डिविडेंड पर भी किया विचार

चावड़ा इंफ्रा ने इस बारे में स्टॉक एक्सचेंजों को बतया है। कंपनी ने कहा है कि बोर्ड ने शेयरधारकों को डिविडेंड के प्रस्ताव पर भी विचार किया। लेकिन, कंपनी की वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाने और कैश रिजर्व के लिए प्रॉफिट को बनाए रखने का फैसला लिया गया। आम तौर पर कंपनियां प्रॉफिट के बाद डिविडेंड का ऐलान करती है। इसमें कंपनी प्रॉफिट का एक हिस्सा अपने शेयरहोल्डर्स को देती है।

बोनस शेयर के लिए अभी रिकॉर्ड डेट का ऐलान नहीं

कंपनी ने कहा है कि कंपनी का फोकस बिजनसे ग्रोथ बढ़ाने और वित्तीय स्थिति मजबूत करने पर है। इससे लंबी अवधि में शेयरहोल्डर्स के लिए वैल्यू क्रिएट करने में मदद मिलेगी। हाल में कंपनी ने 89.45 करोड़ रुपये का रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट मिलने का ऐलान किया था। कंपनी ने बोनस शेयर के लिए अभी रिकॉर्ड डेट के बारे में नहीं बताया है। माना जा रहा है कि कंपनी बाद में इस बारे में ऐलान करेगी।

कंपनी को अहमदाबाद में मिला एक बड़ा रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट

कंपनी हाल में मिले रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स के तहत अहमदाबाद के अदाणी शांतिग्राम टाउनशिप में बहुमंजिला रेजिडेंशियल टावर बनाएगी। यह प्रोजेक्ट 24 महीनों में पूरा हो जाएगा। यह प्रोजेक्ट कंपनी को ऐसे वक्त मिला है, जब वह अपनी एग्जिक्यूशन कपैसिटी बढ़ाने पर फोकस कर रही है। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर महेश कुमार चावड़ा ने ने कहा कि नए प्रोजेक्ट से यह संकेत मिलता है कि कंपनी की एग्जिक्यूशन कपैसिटी में कस्टमर्स का भरोसा बढ़ रहा है।

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बीते एक महीने में 60 फीसदी चढ़ा है कंपनी का शेयर 

चावड़ा इंफ्रा का शेयर 7 अगस्त को 5.47 फीसदी चढ़कर 140 रुपये पर बंद हुआ। बीते एक महीने में यह शेयर 60 फीसदी से ज्यादा उछला है। हालांकि, 7 अगस्त को शेयर बाजारों में गिरावट दिखी। निफ्टी 0.27 फीसदी गिरकर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स में 0.58 फीसदी यानी 455 अंक की गिरावट आई। बैंक निफ्टी भी 0.55 फीसदी गिरकर बंद हुआ।

99.9% निवेशक यहां करते हैं गलती! 2 करोड़ से 10 करोड़ का सफर कैसे होगा आसान, जानें एक्सपर्ट की रणनीति

हर निवेशक चाहता है कि उसका पैसा समय के साथ तेजी से बढ़े। आम धारणा है कि नियमित निवेश करते रहें, बाजार में टिके रहें और कंपाउंडिंग को अपना काम करने दें। लेकिन जैसे-जैसे पोर्टफोलियो बड़ा होता है, कहानी बदलने लगती है। फाइनेंशियल एडवाइजर कपिल जैन ने 45 साल के एक ऐसे निवेशक का उदाहरण दिया, जिसके पास 2 करोड़ रुपये हैं और वह 10 साल में इसे 10 करोड़ करना चाहता है। उनके मुताबिक, लक्ष्य हासिल करना संभव है, लेकिन रास्ते में निवेश की रणनीति बदलना बेहद जरूरी है।

शुरुआत में SIP बनाती है रफ्तार

जैन के अनुसार, शुरुआती दौर में नियमित निवेश और बाजार की ग्रोथ से पोर्टफोलियो तेजी से बढ़ सकता है। लेकिन जब रकम करोड़ों में पहुंचने लगती है, तब बाजार की छोटी गिरावट भी बड़ा नुकसान दिखाने लगती है। यही वजह है कि शुरुआत में काम करने वाली रणनीति को पूरी यात्रा में जारी रखना समझदारी नहीं हो सकती।

5 करोड़ पर 25% गिरावट का मतलब?

मान लीजिए पोर्टफोलियो 5 करोड़ रुपये का है और बाजार 25 फीसदी गिर जाता है। रकम के हिसाब से करीब 1.25 करोड़ रुपये की गिरावट आ सकती है। यानी अब नुकसान की भरपाई सिर्फ कुछ महीनों की SIP से नहीं होगी। बड़े कॉर्पस के साथ बाजार का हर उतार-चढ़ाव ज्यादा बड़ा असर डालता है।

10 करोड़ के करीब पहुंचते ही असली चुनौती

अगर पोर्टफोलियो 10 करोड़ रुपये तक पहुंच गया और बाजार 25 फीसदी गिरा, तो करीब 2.5 करोड़ रुपये की वैल्यू कम हो सकती है। इसीलिए जैन का कहना है कि बड़े पोर्टफोलियो के साथ सिर्फ रिटर्न के पीछे भागना सही रणनीति नहीं है। इस चरण में कमाए हुए पैसे को बचाना भी उतना ही जरूरी है।

‘एक ही रणनीति हमेशा काम नहीं करती’

कपिल जैन के मुताबिक निवेशक अक्सर सबसे बड़ी गलती यही करते हैं कि पोर्टफोलियो छोटा हो या बड़ा, रणनीति वही रखते हैं। उनका सुझाव है कि समय-समय पर पोर्टफोलियो की समीक्षा, रीबैलेंसिंग और सही एसेट एलोकेशन पर ध्यान देना चाहिए। आखिरकार, 2 करोड़ से 10 करोड़ तक पहुंचना सिर्फ कंपाउंडिंग का खेल नहीं है; जैसे-जैसे पैसा बढ़ता है, उसे संभालने का तरीका भी बदलना पड़ता है।

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Titan Q1 Profit: नेट प्रॉफिट 65% बढ़कर 1699 करोड़ रुपये, रेवेन्यू में 24 फीसदी इजाफा

Titan Q1 Profit: टाइटन कंपनी का प्रदर्शन जून तिमाही में शानदार रहा। इस दौरान कंपनी का कंसॉलिडेटेड प्रॉफिट 65 फीसदी बढ़कर 1,699 करोड़ रुपये रहा। यह एनालिस्ट्स के अनुमान से काफी ज्यादा है। सीएनबीसी-टीवी18 के पोल में एनालिस्ट्स ने जून तिमाही में प्रॉफिट 1,267 करोड़ रुपये रहने का अनुमान जताया था। कंपनी ने नतीजों का ऐलान शेयर बाजार बंद होने के बाद किया। इसके शेयरों पर नतीजों का असर 10 अगस्त को बाजार खुलने पर दिखेगा।

ऑपरेशंस से रेवेन्यू 18101 करोड़ रुपये

Titan Company का ऑपरेशंस से रेवेन्यू जून तिमाही में साल दर साल आधार पर 24.3 फीसदी बढ़कर 18,101 करोड़ रुपये रहा। कंपनी का रेवेन्यू एक साल पहले की समान अवधि में 14,564 करोड़ रुपये था। एनालिस्ट्स ने जून तिमाही में रेवेन्यू 19,700 करोड़ रुपये रहने का अनुमान जताया था।

ज्वेलरी पोर्टफोलियो की ग्रोथ 43 फीसदी 

टाइटन के ज्वेलरी पोर्टफोलियो की ग्रोथ जून तिमाही में शानदार रही। इस पोर्टफोलियो की इनकम 43 फीसदी बढ़कर 18,253 (बुलियन और डिजी-गोल्ड सेल्स छोड़कर) करोड़ रुपये रही। इसमें फेस्टिवल डिमांड और अक्षय तृतीया पर अच्छी खरीदारी का हाथ रहा। कंपनी का वॉचेज पोर्टफोलियो 21 फीसदी बढ़ा। इसकी इनकम 1,543 करोड़ रुपये रही। इसमें एनालॉग घड़ियों में ग्राहकों की बढ़ती दिलचस्पी का हाथ रहा।

कंज्यूमर बिजनेस की ग्रोथ 40 फीसदी 

टाइटन के मैनेजिंग डायरेक्टर अजय चावला ने कहा, “इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही कंपनी के लिए स्ट्रॉन्ग रही। कंज्यूमर बिजनेस की ग्रोथ साल दर साल आधार पर 40 फीसदी रही। प्रीमियम ऑफरिंग्स में दिलचस्पी रखने वाले ग्राहकों को ज्वेलरी, वॉचेज, आईकेयर और इमर्जिंग बिजनेसेज के ब्रांड्स ने अच्छी वैल्यू डिलीवर की। “

इंटरनेशनल ज्वेलरी बिजनेस की ग्रोथ 136 फीसदी

टाइटन के इंडिया बिजनेस की ग्रोथ साल दर साल आधार पर 38 फीसदी बढ़कर 16,943 करोड़ रुपये रही। तनिष्क, Mia और Zoya बिजनेसेज की ग्रोथ 38 फीसदी बढ़कर 15,502 करोड़ रुपये रही। कैरेटलेन की ग्रोथ 40 फीसदी बढ़कर 1,441 करोड़ रुपये रही। इंटरनेशनल ज्वेलरी बिजनेस की ग्रोथ 136 फीसदी बढ़कर 1,309 करोड़ रुपये रही।

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बीते एक साल में 45 फीसदी ढ़ा शेयर 

टाइटन टाटा समूह की कंपनी है। इसका शेयर 7 अगस्त को 1.08 फीसदी गिरकर 4,944 रुपये पर बंद हुआ। बीते एक साल में यह शेयर करीब 45 फीसदी चढ़ा है। 7 अगस्त को शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में गिरावट आई। निफ्टी 0.27 फीसदी गिरकर 24,570 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 455 अंक यानी 0.58 फीसदी गिरकर 78,499 पर क्लोज हुआ।