अमेरिका के मिनियापोलिस में बुधवार दोपहर एक अपार्टमेंट में गोलीबारी हुई। इसमें 2 लोगों की मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, गोली चलाने वाला संदिग्ध भी मारा गया है। घटना में 3 पुलिस अधिकारी घायल हुए हैं, जिनमें 2 को गोली लगी है। तीनों अधिकारियों की हालत स्थिर है। पुलिस को स्थानीय समयानुसार बुधवार शाम करीब 4:30 बजे बिल्डिंग में गोली चलने की सूचना मिली थी। इसके करीब 3 मिनट बाद पुलिसकर्मी बिल्डिंग में दाखिल हुए, जहां उन्हें पीड़ित मिले। पुलिस ने गोलियों की आवाज का पीछा करते हुए ऊपरी मंजिल तक पहुंचकर कार्रवाई की। एक की मौके पर मौत, दूसरे ने अस्पताल में दम तोड़ा मिनियापोलिस पुलिस के सार्जेंट गैरेट पार्टेन के मुताबिक, एक पीड़ित की गोली लगने से मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरे ने अस्पताल पहुंचने के बाद दम तोड़ दिया। संदिग्ध की मौत कैसे हुई, यह तुरंत साफ नहीं हो सका। हेनेपिन काउंटी मेडिकल सेंटर ने बताया कि अस्पताल में 7 मरीज लाए गए थे। हालांकि, अस्पताल ने घायलों की स्थिति के बारे में अतिरिक्त जानकारी नहीं दी। पुलिस को ऊपर की मंजिल से गोलियों की आवाज सुनाई दी पुलिस के मुताबिक, अधिकारी बिल्डिंग में दाखिल होने के बाद गोलियों की आवाज सुनकर ऊपरी मंजिल की ओर गए। वहां धुंध या धुएं जैसी स्थिति के कारण विजिबिलिटी काफी कम थी। घटना के बाद सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में मिनियापोलिस कन्वेंशन सेंटर के पास एक अपार्टमेंट टावर की ओर पुलिसकर्मी राइफल ताने नजर आए। अधिकारियों ने पास के घनी आबादी वाले लॉरिंग पार्क इलाके के लोगों को घटनास्थल से दूर रहने की चेतावनी दी। चश्मदीद ने 8 गोलियों की आवाज सुनी अपार्टमेंट बिल्डिंग में रहने वाले जूलियस बेली ने बताया कि वह बिल्डिंग के बाहर बैठे थे। तभी उन्होंने गोलियों की आवाज सुनी और एक ऐसे व्यक्ति को पिस्टल के साथ देखा, जिसे वह बिल्डिंग के निवासी के तौर पर पहचानते थे। बेली के मुताबिक, उन्होंने एक महिला को चिल्लाते सुना और तुरंत वहां से भाग गए। उन्होंने करीब 8 गोलियों की आवाज गिनी। बेली ने बताया कि वह व्यक्ति पहले भी हथियार दिखाता था। वह जून में इस बिल्डिंग में रहने आए थे और तब से उस व्यक्ति से बचने की कोशिश कर रहे थे। गवर्नर बोले- पुलिस की मदद के लिए राज्य के अधिकारी मौके पर मिनेसोटा के गवर्नर टिम वॉल्ज ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि राज्य के अधिकारी स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों की मदद के लिए मौके पर मौजूद हैं। उन्होंने डाउनटाउन मिनियापोलिस में लोगों की सुरक्षा के लिए काम कर रहे पुलिस और अन्य फर्स्ट रिस्पॉन्डर्स का आभार जताया। FBI डायरेक्टर काश पटेल ने भी कहा कि एजेंसी घटना पर प्रतिक्रिया दे रही है। उन्होंने स्थानीय अधिकारियों की मदद के लिए सभी जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने की बात कही। ——————————- ये खबर भी पढ़ें… भारत ने पाकिस्तान में हिंदू मंदिर गिराने की निंदा की:100 साल पुराने मंदिर की जगह मदरसा बनाने का आरोप; इस्लामाबाद बोला- बारिश से गिरी इमारत भारत ने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में 100 साल से ज्यादा पुराने एक हिंदू मंदिर को गिराए जाने की कड़ी निंदा की है। यह मंदिर लाहौर से करीब 130 किलोमीटर दूर नारोवाल जिले के सिराज गांव में था। मंदिर को 21 अगस्त को गिराए जाने की खबर सामने आई थी। पूरी खबर यहां पढ़ें…
Atal Pension Yojana: हर कोई चाहता है कि बुढ़ापे में उसके पास नियमित आमदनी का कोई जरिया रहे। ताकि उसे हर छोटी-मोटी जरूरत के लिए किसी और पर निर्भर न रहना पड़े। हालांकि, कई लोगों की बचत नहीं रहती, तो उनके लिए पेंशन फंड बनाना मुश्किल होता है।
लेकिन, सरकार की अटल पेंशन योजना (APY) कम निवेश के साथ पेंशन की गारंटी देती है। इसमें 60 साल की उम्र के बाद ₹1,000 से ₹5,000 तक की न्यूनतम मासिक पेंशन की गारंटी मिलती है। इसके लिए उम्र के हिसाब से हर महीने तय योगदान करना होता है।
कम उम्र में योजना से जुड़ने पर कम योगदान देना पड़ता है। उदाहरण के लिए, 18 साल की उम्र में ₹5,000 की पेंशन के लिए ₹210 महीने का योगदान है। 40 साल की उम्र में यही रकम ₹1,454 महीने हो जाती है।
कौन ले सकता है योजना का लाभ?
अटल पेंशन योजना में 18 से 40 साल की उम्र के भारतीय नागरिक शामिल हो सकते हैं। बैंक या पोस्ट ऑफिस में सेविंग्स अकाउंट होना जरूरी है। 1 अक्टूबर 2022 के बाद मौजूदा या पूर्व इनकम टैक्सपेयर नया APY अकाउंट नहीं खोल सकते।
स्कीम में हर व्यक्ति सिर्फ एक अकाउंट खोल सकता है। योगदान 60 साल की उम्र तक करना होता है। इसे बैंक या पोस्ट ऑफिस के जरिए शुरू किया जा सकता है।
₹5,000 पेंशन के लिए कितना निवेश?
आपकी उम्र जितनी कम होगी, मासिक योगदान उतना ही कम होगा। पेंशन 60 साल की उम्र के बाद शुरू होती है।
| योजना में शामिल होने की उम्र | मासिक योगदान | 60 साल के बाद मासिक पेंशन |
| 18 साल | ₹210 | ₹5,000 |
| 20 साल | ₹248 | ₹5,000 |
| 25 साल | ₹376 | ₹5,000 |
| 30 साल | ₹577 | ₹5,000 |
| 35 साल | ₹902 | ₹5,000 |
| 40 साल | ₹1,454 | ₹5,000 |
APY में ₹1,000, ₹2,000, ₹3,000, ₹4,000 और ₹5,000 की मासिक पेंशन का विकल्प मिलता है। योगदान की रकम उम्र और चुने गए पेंशन स्लैब के हिसाब से तय होती है।
निवेश और कमाई को ऐसे समझें
अगर कोई व्यक्ति 18 साल की उम्र में ₹5,000 पेंशन का विकल्प चुनता है, तो उसे 60 साल तक 42 साल योगदान करना होगा। इसके लिए उसे हर महीने ₹210 जमा करने होंगे।
60 साल के बाद उसे ₹5,000 की न्यूनतम गारंटीड मासिक पेंशन मिलेगी। यानी APY में कम उम्र में शुरुआत करने का फायदा कम मासिक योगदान के रूप में मिलता है।
पेंशनधारक की मौत के बाद क्या होगा?
60 साल की उम्र के बाद पेंशनधारक की मौत होने पर पति या पत्नी को उतनी ही मासिक पेंशन मिलती है। पति-पत्नी दोनों के निधन के बाद जमा पेंशन वेल्थ नॉमिनी को दी जाती है।
अगर 60 साल से पहले सब्सक्राइबर की मौत हो जाती है, तो जीवनसाथी के पास योगदान जारी रखकर अकाउंट को 60 साल तक चलाने का विकल्प भी होता है।
इसे उदाहरण से समझिए
मान लीजिए कि पेंशनधारक ने ₹5,000 मासिक पेंशन का विकल्प चुना। 60 साल के बाद उनकी मौत हुई, तो पति या पत्नी को ₹5,000 महीने की पेंशन मिलती रहेगी। पति-पत्नी दोनों के निधन के बाद नॉमिनी को ₹8.5 लाख की तय पेंशन वेल्थ एकमुश्त मिलेगी। यह रकम पेंशनधारक के अपने योगदान की रकम भर नहीं है।
यह योजना के तहत ₹5,000 पेंशन विकल्प के लिए पहले से तय कॉर्पस है, जिसे पेंशन फंड के निवेश, सब्सक्राइबर के योगदान और जरूरत पड़ने पर सरकार की गारंटी के जरिए फंड किया जाता है। यानी ₹5,000 पेंशन के बदले 18 साल की उम्र से सिर्फ ₹1.06 लाख योगदान करने पर भी नॉमिनी को ₹8.5 लाख की तय पेंशन वेल्थ मिल सकती है। यही अटल पेंशन योजना की गारंटी का अहम हिस्सा है।
कैसे जमा होता है पैसा?
अटल पेंशन योजना में योगदान बैंक या पोस्ट ऑफिस अकाउंट से ऑटो-डेबिट के जरिए जमा होता है। सब्सक्राइबर अपनी सुविधा के हिसाब से हर महीने, तीन महीने या छह महीने में योगदान दे सकता है।
APY को रिटायरमेंट की पूरी जरूरत के बजाय एक गारंटीड बेस पेंशन के तौर पर देखना ज्यादा व्यावहारिक हो सकता है। ₹5,000 की पेंशन भविष्य में महंगाई के हिसाब से पर्याप्त होगी या नहीं, यह अलग सवाल है। इसलिए सिर्फ इस योजना पर निर्भर रहने के बजाय अपनी जरूरत के हिसाब से दूसरी बचत और निवेश की भी जरूरत पड़ सकती है।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
Aaj Ka Rashifal: अंक ज्योतिष के अनुसार 3 सितंबर का दिन पैसों के मामले में सभी मूलांक वालों के लिए अलग-अलग परिणाम लेकर आ सकता है। कुछ लोगों की आर्थिक स्थिति बेहतर होने के संकेत हैं, तो कुछ को खर्च और निवेश के मामले में सावधानी बरतनी होगी। आज किसी भी बड़े आर्थिक फैसले में जल्दबाजी करने के बजाय सोच-समझकर कदम उठाना बेहतर रहेगा। आइए जानते हैं मूलांक 1 से 9 तक के लिए आज का दिन कैसा रहेगा।
मूलांक 1
अगर आपका जन्म 1, 10, 19 या 28 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत हैं। कमाई के नए मौके मिल सकते हैं और मेहनत का अच्छा परिणाम भी मिलने की उम्मीद है। निवेश करते समय समझदारी दिखाएं और बेवजह के खर्च से बचें। साझेदारी या मिलकर निवेश करने की योजना बना रहे हैं तो सभी बातों को अच्छी तरह समझकर ही फैसला लें।
मूलांक 2
अगर आपका जन्म 2, 11, 20 या 29 तारीख को हुआ है, तो आज पैसों के मामले में ज्यादा सावधान रहना होगा। बिना योजना के खर्च करने से आर्थिक परेशानी बढ़ सकती है। किसी भी निवेश से पहले उसके फायदे और नुकसान को अच्छी तरह समझ लें। अगर कोई पुराना कर्ज है तो उसे चुकाने की दिशा में कदम उठाना फायदेमंद हो सकता है।
मूलांक 3
अगर आपका जन्म 3, 12, 21 या 30 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक स्थिति बेहतर होने की संभावना है। मेहनत से जुड़ी योजनाएं आगे बढ़ेंगी और पुराने अनुभव के आधार पर निवेश का अच्छा अवसर मिल सकता है। आपकी सलाह और सोच को महत्व मिलेगा। हालांकि, खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी है ताकि पैसों का संतुलन बना रहे।
मूलांक 4
अगर आपका जन्म 4, 13, 22 या 31 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक मामलों में थोड़ी परेशानी हो सकती है। अचानक खर्च या नुकसान की स्थिति बन सकती है। ऐसे में बचत पर ध्यान दें और गैरजरूरी चीजों पर पैसा खर्च न करें। निवेश से जुड़े बड़े फैसले फिलहाल सोच-समझकर लें। किसी पुराने आर्थिक मामले को लेकर तनाव हो सकता है, लेकिन धैर्य रखना बेहतर रहेगा।
मूलांक 5
अगर आपका जन्म 5, 15 या 23 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक रूप से थोड़ा चुनौतीपूर्ण रह सकता है। पैसों से जुड़े फैसलों में जल्दबाजी नुकसान पहुंचा सकती है। अपनी कमाई के साधनों की समीक्षा करें और किसी भी आर्थिक सौदे को पूरी जानकारी के बाद ही तय करें। फिलहाल बचत पर ध्यान देना और अनावश्यक खर्च से बचना आपके लिए बेहतर रहेगा।
मूलांक 6
अगर आपका जन्म 6, 15 या 25 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक रूप से दिन सकारात्मक रह सकता है। पहले किए गए निवेश या मेहनत का अच्छा परिणाम मिलने की संभावना है। कारोबार या किसी प्रोजेक्ट से जुड़े लोगों को आगे बढ़ने का मौका मिल सकता है। हालांकि, कमाई बढ़ने के साथ खर्च भी न बढ़ाएं और आर्थिक फैसले सोच-समझकर लें।
मूलांक 7
अगर आपका जन्म 7, 16 या 25 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत हैं। कमाई बढ़ाने के नए अवसर मिल सकते हैं। निवेश के लिए समय अच्छा हो सकता है, लेकिन किसी विशेषज्ञ की सलाह लेना फायदेमंद रहेगा। पैसों के लेन-देन में सावधानी रखें और बजट के हिसाब से ही खर्च करें।
मूलांक 8
अगर आपका जन्म 8, 17 या 26 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक मामलों में सतर्क रहना होगा। नुकसान होने की आशंका के चलते किसी नए निवेश या प्रोजेक्ट में पैसा लगाने से पहले दोबारा सोचें। भरोसेमंद लोगों से सलाह लेना मददगार हो सकता है। अनुशासन और बचत पर ध्यान देकर आप संभावित नुकसान से बच सकते हैं।
मूलांक 9
अगर आपका जन्म 9, 18 या 27 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक स्थिति थोड़ी मुश्किल रह सकती है। अचानक होने वाला खर्च या किसी फैसले से नुकसान हो सकता है। इसलिए बिना पूरी जानकारी के निवेश करने से बचें। कारोबार करने वालों को ग्राहकों और पैसों से जुड़े मामलों में साफ-सफाई बनाए रखनी चाहिए। आज बचत और आर्थिक योजना को बेहतर बनाने पर ध्यान देना सही रहेगा।
डिस्क्लेमर: इस लेख की सामग्री पूरी तरह से ज्योतिषीय भविष्यवाणियों पर आधारित है। हम इसकी सत्यता और सटीकता का पूरी तरह दावा नहीं करते। यहां दी गई किसी भी जानकारी के आधार पर कोई वित्तीय, स्वास्थ्य या व्यावसायिक निर्णय लेने से पहले योग्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

UP outsourcing employees outsourcing job security: नौकरी सिर्फ हर महीने मिलने वाली तनख्वाह का नाम नहीं होती। नौकरी के साथ कर्मचारी को अपने भविष्य की चिंता होती है, परिवार की जिम्मेदारी होती है और यह भरोसा भी चाहिए होता है कि उसकी मेहनत का रिकॉर्ड सुरक्षित है, उसका वेतन समय पर मिलेगा और जरूरत पड़ने पर उसके अधिकारों की सुनवाई करने वाली कोई व्यवस्था मौजूद है।
आउटसोर्सिंग व्यवस्था में काम करने वाले कर्मचारियों के सामने लंबे समय से यही सबसे बड़ी चिंता रही है। वेतन, EPF, ESIC और सेवा संबंधी दूसरी सुविधाओं को लेकर भी असमंजस की स्थिति रहती थी। अब योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस पूरी व्यवस्था को एक संस्थागत और डिजिटल ढांचे से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम यानी UPCOS का शुभारंभ किया। इसके साथ ही आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती, तैनाती, उपस्थिति, वेतन, सामाजिक सुरक्षा और शिकायत निस्तारण जैसी व्यवस्थाओं को एक व्यवस्थित ढांचे में लाने की शुरुआत हुई है।
एक कर्मचारी, एक डिजिटल व्यवस्था
UPCOS के जरिए सरकारी विभाग, आउटसोर्सिंग एजेंसियां और कर्मचारी एक आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक आधारित व्यवस्था से जुड़ेंगे। मैनपावर की जरूरत का आकलन, रिक्तियों का पूर्वानुमान और उसके अनुसार मानव संसाधन की योजना भी बनाई जाएगी।
भर्ती प्रक्रिया ऑनलाइन, पारदर्शी, योग्यता और मेरिट आधारित होगी तथा राज्य सरकार की आरक्षण नीति का पालन किया जाएगा। SC, ST, OBC, दिव्यांगजन, महिलाओं, EWS, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रितों और पूर्व सैनिकों के लिए नियमों के अनुसार आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा। कर्मचारी अपने सर्विस डिटेल, बैंक अकाउंट, उपस्थिति, भुगतान और अन्य जानकारी एक ही जगह देख सकेगा। वह अपनी शिकायत भी दर्ज कर सकेगा, उसकी स्थिति ट्रैक कर सकेगा और समयबद्ध समाधान की व्यवस्था होगी।
हर महीने 5 तारीख तक वेतन
नई व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण पहलू समय पर पारिश्रमिक से जुड़ा है। आउटसोर्स कर्मचारियों को हर महीने 1 से 5 तारीख के बीच पारिश्रमिक उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। भुगतान सीधे कर्मचारी के बैंक खाते में पहुंचाने का प्रावधान है। EPF और ESIC से जुड़े कर्मचारियों के खाते खुलवाना और नियमित रूप से अंशदान जमा कराना भी व्यवस्था का हिस्सा होगा। एजेंसियों को इसका प्रमाण भी निगम को निर्धारित समय में देना होगा। यानी कर्मचारी के वेतन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियों को अब अधिक स्पष्ट और जवाबदेह ढांचे में लाया जा रहा है।
मनमाने ढंग से नहीं हटाया जा सकेगा कर्मचारी
आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की सबसे बड़ी चिंताओं में से एक नौकरी की असुरक्षा भी रही है। नई व्यवस्था में कर्मचारी को मनमाने ढंग से हटाने पर रोक लगाई गई है। आउटसोर्सिंग एजेंसी किसी कर्मचारी को अपने स्तर से नहीं हटा सकेगी। अनुशासनहीनता या दंडनीय अपराध जैसी परिस्थितियों में भी संबंधित विभाग या संस्था और निगम की सहमति के बाद ही कार्रवाई की जा सकेगी।
प्रशिक्षण और मेरिट आधारित चयन
नई व्यवस्था केवल नौकरी देने तक सीमित नहीं है। कर्मचारियों की कार्यक्षमता और दक्षता बढ़ाने के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण देने की भी व्यवस्था की गई है। सेवायोजन विभाग के पोर्टल के माध्यम से उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा। योग्यता, दक्षता और तय मानकों के आधार पर पारदर्शी चयन प्रक्रिया अपनाई जाएगी। श्रेणी-3 और श्रेणी-4 के पदों के लिए साक्षात्कार नहीं होगा। विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं को चयन प्रक्रिया में वरीयता देने का भी प्रावधान है।
मातृत्व अवकाश और वैधानिक सेवा लाभ
नई व्यवस्था में आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए केवल वेतन और नौकरी की बात नहीं की गई है। मातृत्व अवकाश सहित अन्य वैधानिक सेवा लाभों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भी प्रभावी व्यवस्था की गई है। EPF, ESIC और बैंकिंग से जुड़ी अनुमन्य सुविधाओं को भी कर्मचारियों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी तय की गई है।

40 लाख तक का दुर्घटना बीमा
UPCOS के साथ सामाजिक सुरक्षा का दायरा भी बढ़ाया गया है। भारतीय स्टेट बैंक के साथ हुए एमओयू के माध्यम से आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए व्यापक सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। निर्धारित वेतन श्रेणियों के अनुसार कर्मचारी को लगभग 40 लाख तक का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा मिलेगा। स्थायी आंशिक दिव्यांगता की स्थिति में भी निर्धारित बीमा सुरक्षा उपलब्ध होगी। इसके अलावा जलने की स्थिति में प्लास्टिक सर्जरी के लिए 10 लाख तक, आकस्मिक दवाओं के लिए 5 लाख तक और आपात स्थिति में एयर एंबुलेंस के लिए 10 लाख रुपए तक की सुविधा शामिल है।
कर्मचारी के बाद परिवार की भी चिंता
इस व्यवस्था की सबसे अलग बात यह है कि सामाजिक सुरक्षा का दायरा कर्मचारी तक ही सीमित नहीं रखा गया है। किसी बड़ी अनहोनी की स्थिति में उसके परिवार के लिए भी आर्थिक सहायता की व्यवस्था की गई है। कर्मचारी के पुत्र की शिक्षा के लिए ₹8 लाख तक और पुत्री की शिक्षा के लिए ₹10 लाख तक सहायता का प्रावधान है। दो पुत्रियों के विवाह के लिए ₹8 से ₹10 लाख तक की सहायता और कर्मचारी के अंतिम संस्कार के लिए ₹50 हजार तक की व्यवस्था की गई है।
कर्मचारी और उसके परिवार के लिए जीरो बैलेंस बैंक खाते की सुविधा भी उपलब्ध होगी। वेतन खाते के माध्यम से परिवार के अधिकतम चार सदस्यों को विशेष योजनाओं का लाभ देने की व्यवस्था भी की गई है।
बिचौलियों की जगह जवाबदेह व्यवस्था
UPCOS का बड़ा उद्देश्य आउटसोर्सिंग व्यवस्था में कर्मचारी, एजेंसी और विभाग के बीच जिम्मेदारियों को स्पष्ट करना भी है। एजेंसियों का चयन और इंपैनलमेंट तय प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। विभाग, निगम और एजेंसी के बीच त्रिपक्षीय व्यवस्था के माध्यम से जवाबदेही तय होगी। भर्ती से लेकर पोस्टिंग, उपस्थिति, वेतन, ग्रेच्युटी, बीमा और दूसरी सेवा सुविधाओं का डिजिटल प्रबंधन और निगरानी की जाएगी। इसका सीधा अर्थ है कि कर्मचारी को अपनी सेवा से जुड़ी जानकारी के लिए अलग-अलग दफ्तरों और लोगों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
3.5 लाख कर्मचारियों को सीधा फायदा
योगी सरकार के इस फैसले के बाद प्रदेश के विभिन्न विभागों में कार्यरत करीब 3.50 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों को सीधा फायदा होगा। अब इन कर्मचारियों को समय पर वेतन के साथ ही सुरक्षा की गारंटी और भविष्य की सिक्योरिटी भी मिलेगी।
पाकिस्तान में 5वीं बार सेना के जनरल ने ‘तख्तापलट’ कर दिया है। फर्क बस इतना है कि इस बार ये टैकों के जरिए नहीं, संसद के रास्ते हुआ है। नए कानून से फील्ड मार्शल आसिम मुनीर पाकिस्तान के सबसे ताकतवर शख्स बन गए हैं। इससे जुड़े 5 जरूरी सवालों के जवाब, आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: आसिम मुनीर को कौन-सी नई ताकतें मिल गई हैं?
जवाब: नवंबर 2022 में आसिम मुनीर पाकिस्तान के 17वें आर्मी चीफ बने थे। उनका कार्यकाल खत्म होने से 6 महीने पहले, यानी मई 2025 में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ लॉन्च कर दिया। पाकिस्तान ने जीत का झूठा दावा किया और आसिम मुनीर को ‘हीरो’ बताया। इसके बाद आसिम मुनीर की ताकत बढ़ती चली गई… 20 मई 2025 को मुनीर फील्ड मार्शल बने। ये पाकिस्तानी सेना की सबसे ऊंची रैंक होती है। आम बोलचाल में इसे ‘फाइव स्टार जनरल’ कहते हैं। इससे पहले पाकिस्तान में सिर्फ जनरल अयूब खान इस रैंक तक पहुंचे थे। नवंबर 2025 को पाकिस्तानी संविधान के आर्टिकल 243 में 27वां संशोधन करके सेना में नया चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज, CDF का पद बनाया गया। मुनीर देश के पहले CDF बने। वो 2030 तक इस पद पर रहेंगे। संशोधन के जरिए इसे बढ़ाया भी जा सकता है। 20 अगस्त 2026 को पाकिस्तानी संसद में 2 नए कानून पारित हुए, जिससे CDF को 5 बड़ी शक्तियां मिल गई हैं। डिफेंस फोर्सेज ऑफ पाकिस्तान एक्ट, 2026 के तहत 3 ताकतें… नेशनल कमांड अथॉरिटी एक्ट, 2026 के तहत 2 ताकतें… यानी आसिम मुनीर तीनों सेनाओं के प्रमुख हैं, न्यूक्लियर हथियारों से जुड़े फैसले लेने की भी ताकत है। सैन्य अफसरों से जुड़ा हर फैसला भी निर्णायक रूप से वही लेंगे और सबसे बड़ी बात- मुनीर पर कोई मुकदमा नहीं चल सकता। सवाल-2: मदरसे में पढ़े मुनीर पाकिस्तान के सबसे ताकतवर शख्स कैसे बन गए?
जवाब: मुनीर के पिता सैयद सरवर मुनीर 1947 में पंजाब के जालंधर से पलायन कर पाकिस्तान पहुंचे थे। वो रावलपिंडी के मशहूर एफजी टेक्निकल स्कूल के हेडमास्टर बने। साथ ही मस्जिद में इमामत करते और इस्लामिक उपदेश देते। गहरे धार्मिक झुकाव वाले इस घर में 1968 में आसिम मुनीर का जन्म हुआ। पाकिस्तानी जर्नलिस्ट एजाज सैयद के मुताबिक, घर वाले चाहते थे कि आसिम कुरआन हिफ्ज करे। मुनीर सातवीं तक मदरसे में पढ़े और कुरआन रटी। फिर कुछ दिन एफजी टेक्निकल स्कूल पढ़ने गए। इसके बाद रावलपिंडी के सर सैयद कॉलेज गए, जहां से पूर्व आर्मी चीफ कमर जावेद बाजवा ने पढ़ाई की थी। क्रिकेट के शौकीन मुनीर कॉलेज के दिनों में तेज गेंदबाज थे। स्कूल के बाद मुनीर ने जापान के फूजी स्कूल, क्वेटा के कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और मलेशिया के आर्म्ड फोर्सेज कॉलेज से पढ़ाई की। उसके बाद इस्लामाबाद की नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी से पब्लिक पॉलिसी और स्ट्रेटेजिक सिक्योरिटी मैनेजमेंट में मास्टर्स किया। 1986 में मिलिट्री करियर शुरू हुआ, सऊदी में दोबारा कुरआन रटी 25 अप्रैल 1986 को मुनीर को पाकिस्तान आर्मी में के फ्रंटियर फोर्स रेजिमेंट की 23वीं बटालियन में पहली तैनाती मिली। जब मुनीर लेफ्टिनेंट कर्नल बने, तो उन्हें सऊदी अरब में पाकिस्तानी दूतावास में तैनाती मिली। वहां मुनीर को महसूस हुआ कि वे कुरआन भूल रहे हैं। ऐसे में लगातार 3 साल वह छुट्टियों में घर नहीं गए और इस दौरान दोबारा कुरआन रटी। इसके बाद आसिम सियाचिन ग्लेशियर में भी रहे। आसिम का काफी वक्त पाकिस्तान के कब्जाए कश्मीर यानी PoK में भी गुजरा। फिर 2014 में मेजर जनरल, 2016 में पाकिस्तान के मिलिट्री इंटेलिजेंस के डायरेक्टर जनरल और सितंबर 2018 में लेफ्टिनेंट जनरल की पोस्ट तक पहुंचे। सिर्फ 8 महीने ISI चीफ रहे मुनीर, पीएम इमरान से झगड़ा भारी पड़ा 25 अक्टूबर 2018 को मुनीर ISI के डीजी बने। 8 ही महीने बाद जून 2019 में उन्हें हटाकर लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद को नया ISI डीजी बनाया गया। इसकी वजह थी- मुनीर का इमरान खान से झगड़ा। मुनीर ने इमरान खान की पत्नी बुशरा बीबी के करप्शन के एक मामले को उजागर कर दिया था। इसलिए इमरान खान के कहने पर तब के आर्मी चीफ बाजवा ने मुनीर को ISI से बाहर का रास्ता दिखाया था। इमरान पीएम पद से हटाए गए, तो मुनीर नए आर्मी चीफ बने मुनीर नवंबर 2022 तक करीब एक साल क्वार्टरमास्टर जनरल रहे। ये भी ISI चीफ के मुकाबले काफी छोटा पद होता है। हालांकि 2022 की शुरुआत में इस्लामाबाद का सियासी माहौल बदलने लगा। 10 अप्रैल को इमरान अविश्वास प्रस्ताव लाकर पीएम पद से हटाए गए। अगले ही दिन नवाज शरीफ के गुट वाली मुस्लिम लीग के नेता और नवाज के छोटे भाई शहबाज शरीफ पीएम बन गए। मुनीर शहबाज के करीबी थे। माना जाता है कि इमरान को सत्ता से हटाने के हथकंडों में मुनीर ने अंदरखाने साथ दिया। मुनीर को भी इसका ‘रिटर्न गिफ्ट’ मिला। 29 नवंबर को बाजवा को हटाकर मुनीर को नया आर्मी चीफ बना दिया गया। मुनीर पहले आर्मी चीफ बने, जो पाकिस्तान की दोनों खुफिया एजेंसियों- ISI और मिलिट्री इंटेलिजेंस के चीफ रहे थे। अब मुनीर पहले ऐसे आर्मी चीफ हैं, जिनके पास एक साथ 3 पद हैं- आर्मी चीफ के अलावा फील्ड मार्शल का मिलिट्री ओहदा और नया नवेला सबसे ताकतवर पद- CDF। सवाल-3: आसिम मुनीर आखिर हासिल क्या करना चाहते हैं?
जवाब: आसिम मुनीर खुद को ऐसे शासक के तौर पर स्थापित करना चाहते हैं, जिसके लिए कोई खतरा या चुनौती न पैदा हो सके। मुनीर ने अपने लिए ये शील्ड 3 तरह से बनाई है…. 1. मुनीर के आगे बेबस मौजूदा सरकार 2. चुनाव के जरिए आसिम को हटाना मुश्किल 3. सरकार के जरिए कोर्ट पर भी सेना कंट्रोल सवाल-4: पाकिस्तान के पुराने सैन्य तानाशाहों के साथ क्या हुआ था?
जवाब: पिछले सैन्य तानाशाहों ने इस्तीफा दिया, गिरफ्तार हुए या सबकुछ छोड़कर भागना पड़ा…. 1. जनरल अयूब खान: 27 अक्टूबर 1958 को राष्ट्रपति इस्कंदर मिर्जा का तख्तापलट किया। मिर्जा को इंग्लैंड भागना पड़ा और अयूब खुद राष्ट्रपति बने। 1965 की जंग में भारत से हार के बाद अयूब खान के बुरे दिन शुरू हो गए। मार्च 1969 में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। 2. जनरल याह्या खान: जनरल याह्या खान मार्शल लॉ लगाकर राष्ट्रपति बने। 1971 में भारत-पाकिस्तान जंग में पाकिस्तान की हार हुई और बांग्लादेश का जन्म हुआ। भारी बेइज्जती के बाद दिसंबर 1971 में याह्या को इस्तीफा देना पड़ा। नई सरकार ने उन्हें हाउस अरेस्ट कर दिया। 1980 में उनकी गुमनाम मौत हुई। 3. जनरल जिया-उल-हक: सेना प्रमुख जिया ने साल 1977 में पीएम जुल्फिकार अली भुट्टो का तख्तापलट किया। बाद में भुट्टो पर एक मर्डर केस चलाकर 1979 में उन्हें फांसी दे दी।
जिया ने पाकिस्तान में सबसे लंबे समय तक राज किया। 17 अगस्त 1988 को एक प्लेन क्रैश में उनकी मौत हो गई। 4. जनरल परवेज मुशर्रफ: 12 अक्टूबर 1999 को मुशर्रफ, पीएम नवाज शरीफ का तख्तापलट कर राष्ट्रपति बन बैठे। नवाज को जेल में डाल दिया। बाद में वे सऊदी अरब भाग गए। मुशर्रफ के खिलाफ विरोध हुए, उन्होंने इमरजेंसी भी लगाई, आखिरकार अगस्त 2008 में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। वे दुबई और फिर लंदन भाग गए। 2019 में उन्हें देशद्रोह के मामले में फांसी की सजा मिली। फरवरी 2023 में दुबई में उनकी मौत हो गई। सवाल-5: क्या मुनीर की सत्ता कायम होने से भारत को कोई खतरा है?
जवाब: मुनीर का रुख पूरी तरह एंटी इंडिया है… 7 अगस्त 2026 को पाकिस्तान, सऊदी और तुर्किये में एक डिफेंस डील हुई। इसके तहत किसी एक देश पर हमला, तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। पाकिस्तान को इस पैक्ट का पहला जनरल सेक्रेटरी जनरल बनाया गया है। ताकतें बढ़ने से आसिम मुनीर को अपने एंटी इंडिया एजेंडे पर काम करना आसान हो जाएगा। ये भारत के लिए चिंता का सबब हो सकता है। ———————— ये खबर भी पढ़ें… आज का एक्सप्लेनर:पाकिस्तान पर हमला हुआ तो लड़ने आएंगे सऊदी-तुर्किये, आखिर क्या है मक्का एग्रीमेंट; भारत कैसे काउंटर करेगा पाकिस्तान पर हमला हुआ, तो सऊदी और तुर्किये भी साथ लड़ने आएंगे। 7 अगस्त 2026 को मक्का में तीनों देशों में बीच एक खास रक्षा समझौता हुआ है। अब किसी एक पर हमला, तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…
Bihar Mystery Fish: नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद बिहार की नदियों में सीमा पार से बहकर आ रही अज्ञात और अजीब किस्म की मछलियों ने हड़कंप मचा दिया है। बाढ़ के पानी के साथ आई इन मछलियों को खाने के बाद लोगों के बीमार पड़ने की खबरें सामने आ रही हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बिहार सरकार के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग ने अडवाइजरी जारी कर लोगों को ऐसी मछलियों को खाने से से बचने की सख्त हिदायत दी है।
मछलियां क्यों बन रही हैं खतरनाक और बीमारी की क्या है वजह?
मत्स्य विभाग के मुताबिक बाढ़ के दौरान मछलियां तालाबों, झीलों, नदियों और जलाशयों से निकलकर पानी के तेज बहाव के साथ लंबी दूरी तय करती हैं। इस दौरान ये मछलियां कीचड़, गंदे नाले, सड़े-गले शवों और दूसरे हानिकारक प्रदूषकों के लगातार संपर्क में रहती हैं। इस वजह से ये मछलियां हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस, फंगी और खतरनाक केमिकल से संक्रमित हो जाती हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जब तक पर्यावरण सामान्य न हो जाए और साफ मछलियां उपलब्ध न हों, तब तक बाढ़ के पानी से पकड़ी गई मछलियों का सेवन बिल्कुल नहीं किया जाना चाहिए।
सरकार की अपील और लक्षण दिखने पर क्या करें?
बिहार सरकार के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग ने नागरिकों से सुरक्षा के मद्देनजर कई दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। कहा गया है कि किसी भी अनजानी या अजीब दिखने वाली मछली को खाने के लिए इस्तेमाल न करें। बाढ़ के पानी से पकड़ी गई मछलियों को न खरीदें, न बेचें और न ही भोजन के रूप में इस्तेमाल करें। बिना विभागीय जांच और वेरिफिकेशन के किसी भी अनजान मछली को खाने लायक न समझें।
अगर ऐसी मछली खाने के बाद उल्टी, दस्त/डायरिया, पेट दर्, चक्कर आना या सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं हो रही हैं तो तुरंत अस्पताल जाएं या डॉक्टर की सलाह लें। साथ ही ये भी कहा गया है कि ऐसी असामान्य मछलियां दिखने पर तुरंत जिला मत्स्य अधिकारी या स्थानीय प्रशासन को इसकी सूचना दें और किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें।
पश्चिमी चंपारण में जागरूकता अभियान
अनजान मछलियों के खतरे को देखते हुए प्रशासन सक्रिय हो गया है। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिमी चंपारण की जिला मत्स्य अधिकारी नूतन ने बताया कि क्षेत्र में व्यापक स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि नेपाल की बाढ़ से आ रही मछलियां अत्यधिक संक्रामक हैं और इनमें कई बीमारियां फैली हुई हैं। इनको खाने से पेट में तेज दर्द, उल्टी और पेचिश जैसे गंभीर लक्षण उभर रहे हैं। प्रशासन की ओर से विक्रेताओं को ऐसी मछलियां न बेचने और आम जनता को इन्हें न खरीदने व न खाने की सलाह दी जा रही है।
उधर नेपाल पुलिस ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आधिकारिक निर्देश जारी कर अपने नागरिकों से बाढ़ के पानी में बहकर आई मछलियों और अन्य नदी आधारित खाद्य पदार्थों का सेवन न करने का अनुरोध किया है।
नेपाल में बाढ़ से 1127 लोगों की मौत, बिहार में अलर्ट
नेपाल पुलिस द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ की वजह से नेपाल में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1127 हो गई है। शवों के बरामद होने का सिलसिला अभी भी जारी है। नेपाल की नदियों में जलस्तर बढ़ने की वजह से निचले इलाकों में स्थित बिहार में हाई अलर्ट जारी है।
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Bihar Teacher Recruitment 4.0: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने जल्द ही स्कूल शिक्षक भर्ती परीक्षा के चौथे चरण (TRE-4.0) की शुरुआत कर सकता है। आयोग ने मंगलवार शाम को बताया कि चौथे चरण की स्कूल शिक्षक भर्ती परीक्षा के लिए आवेदन 21 सितंबर से शुरू हो सकता है। बिहार टीआरई 4.0 के लिए आवेदन की शुरुआत एक औपचारिक संशोधित विज्ञापन जारी होने और ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में जरूरी बदलावों के बाद हो सकता है।
यह अपडेट बीपीएससी के आधिकारिक एक्स हैंडल पर उपलब्ध था। ट्वीट में लिखा है, “एडवरटाइजमेंट नंबर-14/2026, चौथे फेज के स्कूल टीचर रिक्रूटमेंट एग्जामिनेशन (TRE-4.0) के तहत, स्कूल टीचर के पदों पर नियुक्ति के लिए आवेदन प्रक्रिया, संशोधित विज्ञापन और ऑनलाइन आवेदन में जरूरी बदलावों के बाद, तारीख-21.09.2026 से शुरू होने की संभावना है।”
बीपीएससी टीआरई भर्ती प्रक्रिया में अलग-अलग स्कूल स्तर पर 32388 टीचिंग पद शामिल होंगे। कुल वैकेंसी में से, क्लास 1 से 5 के लिए 3,847 पोस्ट, क्लास 6 से 8 के लिए 8,563, क्लास 9 और 10 के लिए 3,877, और क्लास 11 और 12 के लिए 16,101 पोस्ट तय की गई हैं।
विज्ञापन संख्या-14/2026, चतुर्थ चरण के विद्यालय अध्यापक भर्ती परीक्षा (TRE-4.0) के तहत विद्यालय अध्यापक के पदों पर नियुक्ति हेतु संशोधित विज्ञापन एवं ऑनलाइन आवेदन में आवश्यक संशोधनोपरान्त विद्यालय अध्यापक के पदों पर नियुक्ति हेतु आवेदन प्रक्रिया दिनांक-21.09.2026 से प्रारंभ होने… pic.twitter.com/5eEoBGjVBj
— Bihar Public Service Commission (@BPSCOffice) September 1, 2026
राज्य भर के सरकारी स्कूलों में 32,388 टीचर पदों को भरने के उद्देश्य से बीपीएससी टीआरई 4.0 आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। इससे पहले, 31 अगस्त को, बीपीएससी ने टीआरई 4.0 के लिए आवेदन प्रक्रिया को टालने का ऐलान किया था। जबकि आवेदन प्रक्रिया 1 सितंबर से शुरू होने वाला था।
आधिकारिक रिलीज में कहा गया था, “शिक्षा विभाग, बिहार के अंतर्गत 1 सितंबर से शुरू होने वाले चौथे चरण के स्कूल शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-4.0) के तहत स्कूल शिक्षकों के कुल 32,388 खाली पदों पर नियुक्ति के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रोसेस में बदलाव की वजह से टाल दिए गए हैं। इस विज्ञापन से जुड़ी तारीख की घोषणा जल्द ही की जाएगी।” शिक्षा के क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक राज्य के ढेरों उम्मीदवार कई मुख्य मांगों को लेकर विरोध कर रहे थे। इसमें एग्जाम पैटर्न में बदलाव और नेगेटिव मार्किंग लागू करना शामिल था। विरोध कर रहे उम्मीदवारों से बातचीत के बाद, राज्य सरकार ने हाल ही में घोषणा की कि टीआरई 4.0 एक ही चरण में आयोजित किया जाएगा।
टीआरई 4.0 की वैकेंसी बढ़ाई गई
राज्य सरकार ने उम्मीदवारों की म्यूजिक टीचर के पदों की संख्या बढ़ाने की मांग के बाद, पदों की संख्या 111 बढ़ा दी।
रिटायरमेंट के बाद आमतौर पर लोग आराम और परिवार के साथ समय बिताने की योजना बनाते हैं। लेकिन केरल की पूर्व हेडमिस्ट्रेस रेमाभाई एस की जिंदगी में रिटायरमेंट के बाद एक अलग ही अध्याय शुरू हुआ। अकेलेपन से निपटने के लिए घर में पौधे लगाने से शुरू हुआ उनका सफर धीरे-धीरे ऐसे बिजनेस में बदल गया, जिससे अब वह करीब ₹4 लाख महीने की कमाई कर रही हैं।
मां की मौत के बाद बढ़ गया था अकेलापन
रेमाभाई ने 31 मई 2022 को 30 साल से ज्यादा समय तक जूलॉजी पढ़ाने के बाद रिटायरमेंट लिया। उनके पति रिटायर्ड सीनियर बैंक मैनेजर हैं और उस समय भी एक इंजीनियरिंग कॉलेज में काम कर रहे थे। वहीं उनका बेटा और बहू दोनों डॉक्टर हैं और दिल्ली में रहते थे। उसी साल उनकी मां का निधन हो गया। रिटायरमेंट और मां की मौत के बाद घर में अकेलापन उन्हें ज्यादा महसूस होने लगा। इसी दौरान उन्होंने खुद को व्यस्त रखने के लिए घर में पौधे उगाने का फैसला किया।
52 विदेशी फलों पर की रिसर्च, फिर चुना ड्रैगन फ्रूट
रेमाभाई ने शुरुआत किसी जल्दबाजी में नहीं की। उन्होंने जर्नल, ऑनलाइन जानकारी और अलग-अलग फार्म की यात्राओं के जरिए करीब 52 विदेशी फलों के बारे में जानकारी जुटाई। काफी रिसर्च के बाद उन्होंने Malaysian King Red Dragon Fruit किस्म को चुना। सीमित जगह में ज्यादा पौधे लगाने के लिए उन्होंने हाई-डेंसिटी फार्मिंग का तरीका अपनाया।
1,750 वर्ग फुट में लगाए 360 पौधे
घर के करीब 1,750 वर्ग फुट के हिस्से में उन्होंने 360 ड्रैगन फ्रूट पौधे लगाए। इसके लिए 90 स्थानीय स्तर पर बने कंक्रीट पोल लगाए गए और हर पोल पर चार पौधों को सहारा दिया गया। उन्होंने खर्च कम रखने के लिए GI पाइप और पुराने टायरों का भी इस्तेमाल किया। शुरुआती दौर में एक पौधे की स्टेम करीब ₹100 में खरीदी गई थी। मेहनत का नतीजा जल्दी दिखा। करीब छह महीने में पौधों में फूल आने लगे और मार्च 2023 से उन्होंने फल की पहली फसल लेना शुरू कर दिया।
शुरुआत में ₹50 हजार, फिर बढ़कर ₹1.5 लाख महीना
पहले 360 पौधों से उन्हें हर महीने ₹50 हजार से ज्यादा की आमदनी हुई। पौधों के बड़े होने के साथ कमाई बढ़कर करीब ₹1.5 लाख महीने तक पहुंच गई। उत्पादन के चरम समय में वह लगभग 750 किलो ड्रैगन फ्रूट हर महीने तैयार करने लगीं। वह फल करीब ₹175 प्रति किलो की दर से बेचती थीं। खास बात यह रही कि थोक खरीदार और ऑर्गेनिक स्टोर उनके घर से ही फल उठा लेते थे।
नई जमीन नहीं खरीदी, छत को बनाया अगला फार्म
बिजनेस बढ़ाने के लिए रेमाभाई के सामने अगली चुनौती थी बिना जमीन खरीदे उत्पादन बढ़ाना। घर की छत पर बड़ी मात्रा में मिट्टी ले जाना उन्हें सही नहीं लगा। इसलिए उन्होंने सोइल-लेस यानी कम मिट्टी वाली खेती के विकल्प पर प्रयोग शुरू किया। उन्होंने सामान्य मिट्टी और घर में तैयार किए गए कंपोस्ट की तुलना की। कंपोस्ट में पौधों की ग्रोथ बेहतर दिखने के बाद उन्होंने इसी तरीके को आगे बढ़ाया।
बैरल में लगाए 100 और पौधे
रेमाबाई ने छत पर 50 बैरल लगाए। इनमें कंपोस्ट और गोबर की खाद का मिश्रण इस्तेमाल किया गया और हर बैरल में दो पौधे लगाए गए। इस तरह छत पर 100 और ड्रैगन फ्रूट पौधे तैयार हो गए। करीब पांच महीने में इन पौधों पर फल आने लगे। अक्टूबर 2023 तक छत की खेती भी उत्पादन देने लगी थी। एक पौधे पर एक समय में करीब 10 से 20 फल तक दिखाई देते थे।
घर के कचरे से तैयार करती हैं खाद और लिक्विड फर्टिलाइजर
रेमाबाई की खेती की खासियत सिर्फ ड्रैगन फ्रूट उगाना नहीं है। वह घर और बगीचे से निकलने वाले जैविक कचरे का इस्तेमाल भी खेती में करती हैं। किचन वेस्ट, पत्तियां, कटहल का बचा हिस्सा, प्याज और सब्जियों के अवशेष जैसी चीजों से वह कंपोस्ट तैयार करती हैं। उनके पास तीन कंपोस्टिंग यूनिट हैं और वह 15 से ज्यादा तरह के लिक्विड प्रिपरेशन भी तैयार करती हैं। मछली के कचरे से वह फिश अमीनो एसिड भी बनाती हैं। उनके मुताबिक, अब तक 5,000 लीटर से ज्यादा यह तैयारी तैयार की जा चुकी है।
साल में ज्यादा लंबे समय तक मिलता है फल
उनके खेती के तरीके का एक फायदा यह भी है कि ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन लंबे समय तक चलता है। जहां आमतौर पर इसकी मुख्य फसल करीब पांच से छह महीने तक रहती है, वहीं रेमाबाई लगभग 10 महीने तक फल प्राप्त कर लेती हैं। जनवरी और फरवरी में उत्पादन में मुख्य अंतराल रहता है। उनके बगीचे में महीने में करीब तीन बार फसल होती है और हर बार लगभग 250 किलो फल निकलता है।
अब पौधों की कटिंग भी बन गई कमाई का जरिया
समय के साथ रेमाभाई के ड्रैगन फ्रूट पौधों की स्टेम कटिंग की मांग भी बढ़ने लगी। उन्होंने इसे अलग आय के स्रोत के रूप में विकसित कर लिया। वह एक कटिंग करीब ₹70 में बेचती हैं और अब तक भारत, मालदीव और श्रीलंका में उनके 2,500 से ज्यादा ग्राहक बताए जाते हैं। बड़े ऑर्डर कुरियर के जरिए भेजे जाते हैं। एक दिन में तेलंगाना के लिए 5,500 स्टेम कटिंग का ऑर्डर भी भेजा गया।
सिर्फ पौधे नहीं बेचतीं, तरीका भी सिखाती हैं
रेमाबाई अपने ग्राहकों को सिर्फ कटिंग देकर नहीं छोड़तीं। वह उन्हें पौधे लगाने और उनकी देखभाल के बारे में जानकारी देती हैं और आगे की ग्रोथ पर भी नजर रखती हैं। उनके मुताबिक, सही परिस्थितियों में स्टेम से करीब छह महीने में फल मिलना शुरू हो सकता है।
रिटायरमेंट का शौक बना पूरा बिजनेस
रेमाबाई की कहानी की खास बात यह है कि उन्होंने बिजनेस शुरू करने के लिए न बड़ी जमीन खरीदी और न ही भारी निवेश किया। घर के आंगन और छत जैसी सीमित जगह का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने पहले पौधे लगाए, फिर रिसर्च की, प्रयोग किए और धीरे-धीरे खेती को कमाई के मॉडल में बदल दिया।
आज ड्रैगन फ्रूट, छत पर खेती और स्टेम कटिंगइन अलग-अलग स्रोतों से उनकी कुल मासिक कमाई करीब ₹4 लाख बताई जाती है। रिटायरमेंट के बाद अकेलेपन से बचने के लिए शुरू हुआ पौधों का शौक अब उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता की कहानी बन चुका है।

आज मनुष्य के पास पहले से अधिक साधन हैं, लेकिन शायद पहले से कम धैर्य है। उसके पास संवाद के लिए अनेक माध्यम हैं, फिर भी भीतर का अकेलापन बढ़ता जा रहा है। छोटी-सी असफलता उसे भीतर तक हिला देती है, संबंधों में आया मामूली तनाव निराश कर देता है और जीवन की कठिन परिस्थितियों के लिए 'डिप्रेशन' जैसे शब्द सहजता से बातचीत का हिस्सा बन गए हैं।
ऐसे समय में प्रश्न यह नहीं है कि कठिनाइयां क्यों आती हैं; प्रश्न यह है कि कठिनाइयों के बीच मनुष्य स्वयं को कैसे संभाले? इस प्रश्न का उत्तर हजारों वर्ष पूर्व श्रीकृष्ण के जीवन में छिपा है। यदि कृष्ण को केवल मंदिर में विराजमान भगवान के रूप में देखा जाए, तो हम उनके व्यक्तित्व का एक अत्यंत सीमित भाग ही देख पाएंगे। कृष्ण को समझने के लिए उनके जीवन को देखना होगा—एक ऐसा जीवन जिसमें जन्म से लेकर अंतिम समय तक परिस्थितियां कभी अनुकूल नहीं थीं, लेकिन उन्होंने कभी परिस्थितियों को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया।
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1. संघर्षों से घिरा जन्म और बाल्यकाल का आनंद
कारागार में जन्म: उनका जन्म किसी उत्सव के बीच नहीं, बल्कि कारागार में हुआ। माता-पिता के जीवित रहते हुए भी जन्म लेते ही उनसे दूर होना पड़ा। आधी रात को पिता वसुदेव उन्हें लेकर यमुना पार कर गोकुल पहुंचाते हैं। जिस उम्र में बालक को माता-पिता का आश्रय चाहिए, उस उम्र में कृष्ण का जीवन सुरक्षा और संघर्ष की कहानी बन चुका था।
संकटों के बीच मुस्कान: गोकुल में उन्हें यशोदा का वात्सल्य, नंदबाबा का स्नेह और मित्रों का साथ मिला। किंतु वहां भी पूतना से लेकर कालिया नाग तक अनेक संकट सामने आए। बाल-कान्हा हर संकट के बाद मुस्कुराते दिखाई देते हैं। यह मुस्कान सिखाती है कि जीवन में संकट का आना हमारे नियंत्रण में नहीं है, लेकिन संकट के समक्ष हमारी प्रतिक्रिया हमारे हाथ में है।
दायित्वों के बीच जीवन का रस: श्रीकृष्ण के बाल्यकाल को प्रायः माखन, बांसुरी, गोपियों और रास की कथाओं तक सीमित कर दिया जाता है। वास्तव में ये प्रसंग सिखाते हैं कि गंभीर जिम्मेदारियों के बीच भी जीवन से आनंद और सहजता समाप्त नहीं होनी चाहिए।
2. त्याग, विरक्ति और नए दायित्वों की ओर कदम
संसार को पीछे छोड़ना: एक दिन कृष्ण गोकुल छोड़ देते हैं। जिस भूमि ने बचपन दिया, जिन मित्रों के साथ खेले, जिससे उनका भावनात्मक संसार बसा था—सब पीछे छूट गया।
समय की मांग स्वीकारना: आज हम नौकरी या शिक्षा के लिए शहर छोड़ते हैं तो विचलित हो जाते हैं। कृष्ण ने तो अपने बचपन का संपूर्ण संसार ही छोड़ दिया, लेकिन वे पीछे मुड़कर रुके नहीं। वे आगे बढ़े क्योंकि समय उनसे नई भूमिका की मांग कर रहा था। मथुरा में कंस का अंत किया और आगे चलकर द्वारका की स्थापना की। राज्य, समाज, राजनीति और सुरक्षा के अनेक उत्तरदायित्व उनके सामने आए।
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3. कुरुक्षेत्र का संदेश: कर्म की गरिमा और आत्मनिर्भरता
अर्जुन का संशय और भगवद्गीता का सार: कुरुक्षेत्र में अर्जुन का संकट आज के मनुष्य के संकट जैसा ही था। उसके सामने निर्णय लेने की चुनौती थी, लेकिन भावनाएं और संबंध आड़े आ रहे थे। जब अर्जुन का गांडीव छूट गया, तब श्रीकृष्ण ने उसे जीवन को देखने की नई दृष्टि दी—मनुष्य का अधिकार केवल अपने कर्म पर है, उसके परिणाम पर नहीं। यदि परिणाम की चिंता में कर्म ही छूट जाए, तो जीवन का उद्देश्य कमजोर पड़ जाता है।
कर्म की गरिमा: स्वयं राजा होते हुए भी कृष्ण शस्त्र उठाने के बजाय अर्जुन के सारथी बने। आज के समाज में जहां पद के आधार पर काम को छोटा-बड़ा समझा जाता है, कृष्ण बताते हैं कि काम की गरिमा पद में नहीं, उसके उद्देश्य और निष्ठा में होती है।
सक्षम बनाने का दर्शन: कृष्ण चाहते तो अपनी शक्ति से युद्ध का परिणाम क्षण भर में बदल सकते थे, लेकिन उन्होंने मनुष्य को उसकी जिम्मेदारी स्वयं निभाने दी। वे मनुष्य को आश्रित नहीं, बल्कि सक्षम बनाते हैं।
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4. विपाद के बीच संतुलन और आधुनिक युग की प्रासंगिकता
जीवन के प्रति संतुलन: कृष्ण के जीवन में केवल विजय नहीं थी। उन्होंने वियोग, मृत्यु, युद्ध, प्रियजनों को खोना और अंततः अपने ही वंश का विनाश देखा। इसके बावजूद उन्होंने जीवन का संतुलन कभी नहीं खोया।
युवाओं के लिए प्रेरणा: आज का युवा असफलता, नौकरी न मिलने या संबंध टूटने पर बिखर जाता है। ऐसे समय में कृष्ण का जीवन कहता है:
- तुम्हारी एक असफलता तुम्हारा पूरा जीवन नहीं है।
- एक परिस्थिति तुम्हारी संपूर्ण पहचान नहीं है।
- दुःख आएगा, लेकिन दुःख ही अंतिम सत्य नहीं है।
- वियोग होगा, लेकिन जीवन वहीं समाप्त नहीं होता।
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5. जीवन को साधने की कला
श्रीकृष्ण जीवन से पलायन का दर्शन नहीं देते; वे जीवन के बीच खड़े होकर जीवन को साधने की कला सिखाते हैं। जब मन भ्रमित हो, विकल्प बहुत हों और निर्णय कठिन हो—तब श्रीकृष्ण के विचारों को पढ़िए। जब परिणाम की चिंता कर्म से बड़ी हो जाए या असफलता आत्मविश्वास कम करने लगे—तब कृष्ण के जीवन को देखिए।
वे केवल गोकुल के नटखट कान्हा, द्वारका के राजा या कुरुक्षेत्र के सारथी नहीं हैं; वे योगेश्वर श्रीकृष्ण हैं। वे आज भी संदेश देते हैं कि परिस्थिति चाहे कितनी भी विपरीत क्यों न हो, अपने कर्म, विवेक और धर्म का मार्ग कभी मत छोड़ो। जीवन की सबसे बड़ी विजय कठिनाइयों का समाप्त हो जाना नहीं, बल्कि कठिनाइयों के बीच स्वयं को संभाले रखना है।
जय श्री कृष्ण!

उद्योगपतियों को राहत देने, सरकारी प्रक्रियाओं को सरल बनाने और औद्योगिक विकास को गति देने के दृष्टिकोण के साथ राज्य सरकार उद्योग क्षेत्र के लिए पारदर्शी और विकासोन्मुख प्रशासन प्रदान करने के लिए लगातार कार्यरत है। GIDC के प्लॉट धारकों द्वारा औद्योगिक प्लॉट या शेड के हस्तांतरण (ट्रांसफर) के समय पंजीकृत लीज डीड करने के बजाय केवल अलॉटमेंट लेटर या सप्लीमेंट्री एग्रीमेंट दिए जाते थे। इसके कारण पूर्व प्लॉट धारकों द्वारा अधिकांश मामलों में स्टांप ड्यूटी का भुगतान नहीं किया गया था। ALSO READ: गुजरात विधानसभा का 3 दिवसीय मानसून सत्र 9 सितंबर से: पहले दिन दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि के बाद शुरू होगी कार्यवाही
गुजरात स्टांप अधिनियम में संशोधन और जुर्माना के प्रावधान
राज्य सरकार ने दिनांक 02/04/2025 से गुजरात स्टांप अधिनियम, 1958 में समेकित संशोधन किए हैं। इसके तहत धारा-39(1)(ख) के अनुसार, यदि कोई पक्षकार स्वेच्छा से मूल दस्तावेज प्रस्तुत करता है, तो हस्ताक्षर की तिथि से प्रति माह 2% साधारण ब्याज के साथ बकाया स्टांप ड्यूटी के 4 गुना से अधिक न हो उतना जुर्माना वसूला जाएगा। यदि सरकारी तंत्र द्वारा जांच के दौरान दस्तावेज जब्त किया जाता है, तो प्रति माह 3% साधारण ब्याज के साथ 6 गुना से अधिक न हो उतना जुर्माना वसूलने का प्रावधान 10/04/2025 से लागू हुआ है।
वर्तमान मालिकों पर वित्तीय बोझ
इन कानूनी प्रावधानों के परिणामस्वरूप जब वर्तमान मालिक को बैंक लोन या किसी अन्य सरकारी आवश्यकता के लिए पंजीकृत लीज डीड करानी होती है, तब पिछले सभी अनरजिस्टर्ड सौदों की बकाया स्टांप ड्यूटी, भारी जुर्माना और ब्याज के साथ भरने का अत्यधिक वित्तीय बोझ उन पर आ पड़ता है। ALSO READ: Gen Z के मुद्दों पर विपक्ष को जवाब देंगे पीएम मोदी: 11 साल बाद वडोदरा में युवाओं के बीच भरेंगे हुंकार
GIDC एम्नेस्टी स्कीम की घोषणा
इस संदर्भ में राज्य के उद्योगपतियों और GIDC एसोसिएशंस की ओर से मिले ज्ञापनों पर संवेदनशीलता से प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने GIDC प्लॉटों के पिछले हस्तांतरण सौदों में बकाया स्टांप ड्यूटी और पेनल्टी के बोझ से पात्र MSME उद्योगों को राहत देने के लिए 'GIDC एम्नेस्टी स्कीम' लागू करने का निर्णय लिया है।
GIDC एम्नेस्टी स्कीम क्या है?
अतीत में प्लॉट या शेड के आवंटन के समय पंजीकृत दस्तावेज के बजाय केवल अलॉटमेंट लेटर या सप्लीमेंट्री एग्रीमेंट किए जाने के कारण स्टांप ड्यूटी का भुगतान नहीं हो सका था। वर्तमान मालिकों को नए दस्तावेज के पंजीकरण के समय खड़े होने वाले भारी जुर्माने के प्रश्न का व्यावहारिक समाधान प्रदान करने के लिए यह एम्नेस्टी योजना शुरू की गई है।
MSME उद्योगपतियों को 80% तक स्टांप ड्यूटी में राहत
इस योजना के तहत पात्र मामलों में लागू स्टांप ड्यूटी में से 80% तक की राशि माफ करके केवल 20% स्टांप ड्यूटी और लागू पेनल्टी वसूल की जाएगी। हालांकि, जिन मामलों में 20% स्टांप ड्यूटी और पेनल्टी की कुल राशि मूल स्टांप ड्यूटी से कम होती है, वहां मूल स्टांप ड्यूटी के बराबर राशि वसूल कर राहत का लाभ दिया जाएगा।
योजना के लिए पात्रता मानदंड (किसे मिलेगा लाभ?)
इस स्कीम का लाभ मुख्य रूप से वैध उद्यम प्रमाणपत्र (Udyam Certificate) रखने वाली MSME इकाइयों को मिलेगा। इस योजना के तहत दिनांक 30 जून, 2025 तक हुए पात्र अलॉटमेंट लेटर, शेयर ट्रांसफर, लीज/सब-लीज और संपत्ति हस्तांतरण से संबंधित सौदों को शामिल किया जाएगा। ALSO READ: किसानों के लिए बड़ी राहत, गुजरात सरकार ने बढ़ाई कृषि उपकरण खरीद की समय सीमा, अब 15 दिन का और मौका
दस्तावेज का पंजीकरण और अपील/कोर्ट मामलों में राहत
राहत का लाभ उठाने वाले वर्तमान आवंटी को निर्धारित 20% ड्यूटी और पेनल्टी का भुगतान करके संबंधित संपत्ति का कानूनी पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) कराना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, जहां सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अपील की गई हो और 25% राशि जमा की गई हो या कोर्ट में याचिका लंबित हो, वहां याचिका वापस लेने की शर्त पर निर्धारित नियमों के अधीन योजना का लाभ मिलेगा।
01 जनवरी, 2018 से पहले और बाद के सौदों के लिए राहत
दिनांक 01/01/2018 से पहले हुए हस्तांतरणों के मामलों में अंतिम हस्तांतरण के दस्तावेज के बाजार मूल्य के आधार पर निर्धारित स्टांप ड्यूटी में 80% की राहत देकर 20% ड्यूटी और लागू पेनल्टी वसूल की जाएगी। इसके अलावा, दिनांक 01/01/2018 को या उसके बाद हुए उन सभी हस्तांतरणों में जहां स्टांप ड्यूटी देय बनती है, वहां भी 80% राहत देकर 20% ड्यूटी और लागू पेनल्टी वसूलने का प्रस्ताव है।




