नेपाल से बाढ़ में बहकर बिहार आईं रहस्यमयी मछलियां! प्रशासन ने इन्हें खाने से किया मना, जानिए इनसे क्या है खतरा

नेपाल में आई बाढ़ का असर भारत के कुछ राज्यों में भी दिखाई दे रहा है। बिहार के बगहा में बाढ़ के बाद प्रशासन ने लोगों को अनजान मछलियों से दूर रहने की सलाह दी है। ये मछलियों नेपाल से बाढ़ के पानी के साथ बहकर आई है। बाढ़ के पानी के साथ कुछ अनजान मछलियां स्थानीय तालाबों और दूसरे जलस्रोतों में पहुंच गई हैं। प्रशासन ने इन मछलियों को खाने से मना किया है। बिहार के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग ने लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ये सलाह जारी की है। ऐसी मछलियों को खाने के बाद कुछ लोगों के बीमार होने की शिकायत सामने आई है।

नेपाल से आने वाली नदियों में पानी बढ़ने के कारण बगहा के कुछ इलाकों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में विभाग ने लोगों से सावधानी बरतने और बाढ़ के पानी के साथ आई अनजान मछलियों को खाने से बचने की अपील की है।

SDM ने जारी की एडवाइजरी

बगहा की SDM चांदनी कुमारी ने ऐसी मछलियों को लेकर लोगों को सावधान किया है। यह चेतावनी उन खबरों के बाद जारी की गई, जिनमें इन मछलियों को खाने के बाद कुछ लोगों के बीमार होने की जानकारी सामने आई थी। प्रभात खबर की एक रिपोर्ट के मुताबिक SDM ने कहा, बाढ़ के पानी के साथ कुछ ऐसी मछलियां भी स्थानीय तालाबों और जलस्रोतों में पहुंच गई हैं, जो वहां आमतौर पर नहीं मिलतीं। अधिकारियों के अनुसार, इन मछलियों को खाने के बाद कुछ लोगों की तबीयत खराब होने की शिकायत सामने आई है। इसके बाद प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और बिना पहचान वाली मछलियों का सेवन न करने की सलाह दी है।

क्यों नहीं खाना चाहिए

अधिकारियों के मुताबिक, बाढ़ के तेज पानी में मछलियां तालाब, नदी और झील जैसे अपने सामान्य स्थानों से दूर चली जाती हैं। इस दौरान उनका संपर्क गंदे नालों, मरे हुए जानवरों और अन्य दूषित चीजों से हो सकता है, जिससे उनमें हानिकारक बैक्टीरिया और दूसरे संक्रमण फैलाने वाले जीव मौजूद हो सकते हैं। इसलिए प्रशासन ने लोगों से बाढ़ के पानी से पकड़ी गई मछलियों को खाने मना किया है। विभाग के मुताबिक, जब तक बाढ़ का पानी पूरी तरह उतर नहीं जाता और इलाके के हालात सामान्य नहीं हो जाते, तब तक ऐसी मछलियों से दूरी बनाना ही सुरक्षित है।

इन समस्याओं को नजरअंदाज ना करें

प्रशासन ने लोगों से अनजान मछलियां दिखने पर खुद कार्रवाई करने के बजाय इसकी सूचना मत्स्य अधिकारी या स्थानीय प्रशासन को देने की अपील की है। साथ ही, अफवाहों से बचने और बाढ़ के पानी से मिली चीजें खाने में सावधानी बरतने को कहा है। प्रशासन ने लोगों से कहा कि अगर अनजान मछली खाने के बाद उल्टी, दस्त, पेट में दर्द, चक्कर या सांस लेने में परेशानी जैसी शिकायत हो, तो इसे नजरअंदाज न करें। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर घर पर ठीक होने का इंतजार करने के बजाय तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल जाकर डॉक्टर से सलाह लें।

DA Hike: त्योहारी सीजन से पहले कर्मचारियों को मिलेगा बड़ा तोहफा! DA पर आ गया ये बड़ा अपडेट

8th CPC Latest Updates September 2026: 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन के बाद देश के लगभग 55 लाख मौजूदा केंद्रीय कर्मचारियों और करीब 69 लाख पेंशनर्स के लिए बड़ी खबरें निकलकर सामने आ रही हैं। आयोग के नियम एवं शर्तों (ToR) को मंजूरी मिले लगभग 10 महीने बीत चुके हैं और अब इसकी सिफारिशें लागू होने की दिशा में गतिविधियां तेज हो गई हैं।

इसी बीच सितंबर महीने में महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी से लेकर राज्यों के दौरों और पेंशन संशोधन की मांगों तक, कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए कई बड़े अपडेट्स आए हैं। आइए जानते हैं कि इस बार कम फिटमेंट फैक्टर के बावजूद कर्मचारियों की सैलरी में 7वें वेतन आयोग से भी बड़ा उछाल क्यों आ सकता है।

सितंबर में मिल सकती है खुशखबरी, 63% तक बढ़ सकता है DA

केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनरों को सितंबर 2026 में जुलाई महीने के महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) का तोहफा मिलने की पूरी उम्मीद है। जनवरी 2026 में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद वर्तमान में कुल DA दर 60% है। ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स (AICPI-IW) के 12 महीनों के आंकड़ों के आधार पर इस बार 3% की बढ़ोतरी का अनुमान है। 3% की इस बढ़ोतरी के बाद कर्मचारियों का कुल महंगाई भत्ता बढ़कर 63% हो जाएगा।

ऑल इंडिया एनपीएस एंप्लाइज फेडरेशन के अध्यक्ष मंजीत सिंह पटेल के अनुसार, आमतौर पर इसकी घोषणा सितंबर में होती है, हालांकि कई बार यह अक्टूबर तक भी जा सकती है।

8वें वेतन आयोग का राज्यों का दौरा जारी

8वां वेतन आयोग विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का दौरा कर कर्मचारी संगठनों और हितधारकों के साथ परामर्श कर रहा है। आयोग 1 सितंबर 2026 को जयपुर का अपना दो दिवसीय दौरा पूरा कर रहा है। आयोग 8 सितंबर को पुडुचेरी, 16 और 18 सितंबर को चंडीगढ़, और 7-8 अक्टूबर को बेंगलुरु का दौरा करेगा। इससे पहले दिल्ली, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, तेलंगाना, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में बैठकें पूरी की जा चुकी हैं।

पूर्व पेंशनरों की पेंशन समीक्षा का मामला व्यय विभाग को ट्रांसफर

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने 18 अगस्त 2026 के एक ऑफिस मेमोरेंडम के जरिए ऑल इंडिया डिफेंस एंप्लाइज फेडरेशन और ऑल इंडिया आरएमएस, एमएमएस एंड पोस्टल पेंशनर्स एसोसिएशन की याचिकाओं को वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग को भेजा है।

संगठन चाहते हैं कि 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए पेंशनभोगियों की पेंशन समीक्षा को भी 8वें वेतन आयोग के ToR में स्पष्ट रूप से शामिल किया जाए। इसके लिए 1985 (चौथे वेतन आयोग) की उस ऐतिहासिक मिसाल का हवाला दिया जा रहा है, जब पूर्व कर्मचारियों के लिए भी नियमों में बदलाव कर आयोग के दायरे में लाया गया था।

कम फिटमेंट फैक्टर में भी 7वें वेतन आयोग से ज्यादा बढ़ेगी सैलरी!

कर्मचारी संगठनों का दावा है कि 8वें वेतन आयोग में अगर 7वें वेतन आयोग (2.57) की तुलना में कम फिटमेंट फैक्टर (जैसे 2.1) भी रखा जाता है, तब भी कर्मचारियों को हाथ में ज्यादा सीधा आर्थिक फायदा मिलेगा।

कर्मचारी यूनियनों के अनुसार, 7वें वेतन आयोग के समय DA 125% तक पहुंच चुका था, जिससे बेसिक पे तो बढ़ा लेकिन प्रभाव कम हो गया। 8वें वेतन आयोग के समय कम DA होने के कारण 2.1 के फिटमेंट फैक्टर पर भी कर्मचारियों को सीधा 53% का शुद्ध फायदा होगा, जो 7th CPC के 32% से काफी अधिक है।

कब तक लागू होंगी सिफारिशें?

नवंबर 2025 में गठित 8वें वेतन आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। आयोग की सिफारिशें लागू होने की तय तारीख 1 जनवरी 2026 मानी जा रही है, हालांकि इस पर अंतिम फैसला कैबिनेट की हरी झंडी के बाद ही होगा।

7.8% की शानदार विकास दर के बीच पीएम मोदी ने क्यों की सोना नहीं खरीदने की अपील?

7.8% की शानदार विकास दर के बीच पीएम मोदी ने क्यों की सोना नहीं खरीदने की अपील?

PM Modi appeal on Gold

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की मजबूत आर्थिक विकास दर पर प्रसन्नता जताते हुए एक अनूठी अपील की है। भारत की 7.8 फीसदी की शानदार जीडीपी ग्रोथ पर देशवासियों को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि यदि बहुत जरूरी न हो, तो सोने की खरीदारी से बचना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने देश में बने सामानों को प्राथमिकता देने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का आह्वान किया। ALSO READ: 7.8% विकास दर पर गदगद हुए पीएम मोदी: बोले- दुनिया संकटों में फंसी है, फिर भी तेजी से आगे बढ़ रहा भारत

 

वर्तमान वैश्विक परिदृश्य पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज पूरी दुनिया कई तरह के संकटों और युद्ध की स्थितियों से जूझ रही है। कोविड महामारी के बाद से वैश्विक सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है और दुनिया में आर्थिक स्थिरता का अभाव है। इन तमाम अंतरराष्ट्रीय बाधाओं के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।

 

'मेड इन इंडिया' और 'वेडिंग इन इंडिया' पर जोर

प्रधानमंत्री ने देशवासियों से विदेशी मोह छोड़ने और 'मेड इन इंडिया' के मंत्र को अपने जीवन में उतारने की अपील की। उन्होंने खास तौर पर विदेश यात्राओं और विदेश में शादियों के आयोजन पर रोक लगाने या उनसे बचने की सलाह दी। पीएम मोदी ने कहा कि यदि लोग देश के भीतर ही शादियों का आयोजन करेंगे, तो इससे पर्यटन, होटल, कैटरिंग, और हैंडीक्राफ्ट जैसे स्थानीय उद्योगों को बड़ा बढ़ावा मिलेगा और देश का पैसा देश के भीतर ही रोजगार सृजन में काम आएगा। ALSO READ: पश्चिम एशिया के संकट के बीच भारत की बड़ी आर्थिक छलांग: जीडीपी ग्रोथ 7.8% रही, RBI का अनुमान पीछे छूटा
 

2047 के विकसित भारत का संकल्प

प्रधानमंत्री ने देश को आत्मनिर्भर बनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि भारत को अपनी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक एक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ना है। उन्होंने कहा कि आज की यह मेहनत और अनुशासन ही आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को उज्ज्वल बनाएगा। सरकार की नीतियां सही दिशा में आगे बढ़ रही हैं, और देश के 140 करोड़ नागरिकों की सामूहिक शक्ति ही भारत को वैश्विक पटल पर नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।

 

पीएम मोदी ने क्यों की सोना नहीं खरीदने की अपील?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सोना न खरीदने की अपील करने के पीछे मुख्य रूप से देश को आत्मनिर्भर बनाने और घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का उद्देश्य है। इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:

 

विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करना: भारत अपनी सोने की जरूरत का अधिकांश हिस्सा इंपोर्ट करता है। भारी मात्रा में सोना खरीदने से देश का धन बाहर जाता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है।

'मेड इन इंडिया' और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा: प्रधानमंत्री चाहते हैं कि देशवासी विदेशी वस्तुओं या अनावश्यक महंगी खरीदारी के बजाय स्थानीय स्तर पर बने उत्पादों और सेवाओं पर खर्च करें, जिससे देश के भीतर ही रोजगार और व्यापार को बढ़ावा मिले।

वैश्विक अनिश्चितताओं से बचाव: वर्तमान में दुनिया भर में युद्ध, सप्लाई चेन में बाधाएं और आर्थिक अस्थिरता जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। ऐसे समय में देश की आर्थिक स्थिति को सुरक्षित और सुदृढ़ रखने के लिए अनावश्यक और गैर-जरूरी चीजों की खरीदारी से बचना जरूरी है।

2047 के विकसित भारत का लक्ष्य: देश को स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए नागरिकों को आर्थिक अनुशासन अपनाने और अपनी गाढ़ी कमाई को देश के समग्र विकास व उत्पादक क्षेत्रों में लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

El Nino: मजबूत अल नीनो का असर, जुलाई में राहत के बाद फिर गहराया सूखा संकट! 14% की गिरावट के साथ सितंबर में भी कम बारिश का अलर्ट

भारत में इस साल का मॉनसून अब कमजोर पड़ता नजर आ रहा है। मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, मॉनसून सीजन के आखिरी महीने सितंबर में देश के ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। मॉनसून के दौरान बारिश की कमी पहले ही चिंता का कारण बनी हुई है। 1 जून से 31 अगस्त तक देश में सामान्य के मुकाबले 14 फीसदी कम बारिश हुई है। अब सितंबर में भी कम बारिश का अनुमान है, ऐसे में पूरे मॉनसून सीजन में बारिश की कमी और बढ़ सकती है। मौसम विभाग ने इस दौरान अल नीनो के असर की संभावना भी जताई थी, जिसे मॉनसून की बारिश को प्रभावित करने वाली अहम वजहों में से एक माना जाता है।

जून से सितंबर तक चलने वाले चार महीने के मॉनसून में सितंबर का महीना काफी अहम माना जाता है, लेकिन इस बार कम बारिश का अनुमान किसानों और जल संसाधनों को लेकर चिंता बढ़ा सकता है। हालांकि, बारिश का असर अलग-अलग राज्यों और इलाकों में अलग रह सकता है।

1901 के बाद दूसरा सबसे गर्म रहा अगस्त

अगस्त के दौरान देश के कई क्षेत्रों में गर्मी का असर काफी ज्यादा देखने को मिला। अगस्त में देश के कई हिस्सों में तापमान ने पुराने रिकॉर्ड के करीब पहुंचकर चिंता बढ़ाई। दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में यह महीना 1901 के बाद दूसरा सबसे गर्म अगस्त रहा। वहीं, पूर्वी और पूर्वोत्तर इलाकों में अगस्त तीसरा सबसे गर्म रहा। उत्तर-पश्चिम भारत में भी तापमान काफी ज्यादा रहा और यहां 126 साल के रिकॉर्ड में पांचवां सबसे गर्म अगस्त दर्ज किया गया। इससे साफ है कि इस साल अगस्त में देश के अलग-अलग हिस्सों में गर्मी का असर काफी ज्यादा रहा।

सितंबर में कब होगी बारिश

IMD चीफ मृत्युंजय महापात्रा ने कहा, “देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। हालांकि, उत्तर-पश्चिम, उत्तर-पूर्व, पूर्व, पूर्व-मध्य और दक्षिण-पूर्वी प्रायद्वीपीय भारत के कुछ इलाकों में सामान्य से ज्यादा बारिश हो सकती है।” उन्होंने कहा कि फिलहाल भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में “मजबूत अल नीनो की स्थिति” बनी हुई है, जिसके चलते मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक है। महापात्रा ने कहा, “आने वाले महीनों में इन स्थितियों के और मजबूत होने की संभावना है।” उन्होंने संकेत दिया कि इसका सितंबर की बारिश पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

IOD की स्थिति नॉर्मल

अल नीनो की स्थिति को आमतौर पर भारत में कमजोर मॉनसून और ज्यादा गर्मी से जोड़कर देखा जाता है। वहीं, हिंद महासागर में फिलहाल इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) की स्थिति सामान्य है और इसके सितंबर तक ऐसी ही रहने की संभावना है। सकारात्मक IOD मॉनसून को मजबूत करने और बारिश बढ़ाने में मदद कर सकता है, लेकिन मौजूदा समय में ऐसी स्थिति नहीं है। ऐसे में मॉनसून को हिंद महासागर से बारिश बढ़ाने के लिए कोई खास मदद मिलने की उम्मीद नहीं है।

बारिश का रिकॉर्ड

इस साल मॉनसून की बारिश का असर देशभर में एक जैसा नहीं रहा। मौसम विभाग के मुताबिक, जून में बारिश की कमी 35% तक पहुंच गई थी। मॉनसून बारिश के वितरण का आकलन किए गए कुल 741 जिलों में से 312 जिलों (42%) में 31 अगस्त तक सामान्य से कम बारिश हुई, जबकि 38 जिलों (5%) में बहुत कम बारिश दर्ज की गई।

फसलों पर पड़ेगा असर

सितंबर में अगर बारिश उम्मीद के मुताबिक नहीं हुई तो इसका सीधा असर किसानों और खरीफ फसलों पर पड़ सकता है। भले ही ज्यादातर खरीफ फसलों की बुवाई लगभग पूरी हो चुकी है, लेकिन इस साल फसल का कुल रकबा पिछले साल के मुकाबले करीब 2 फीसदी कम है। ऐसे में बारिश की कमी किसानों की मुश्किलें और बढ़ा सकती है। खेतों में नमी बनाए रखने के लिए उन्हें सिंचाई का सहारा लेना पड़ सकता है, जिससे डीजल, बिजली और पानी पर खर्च बढ़ेगा और खेती की लागत पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

8th Pay Commission: पेंशनर्स के लिए बड़ी खबर! इस डेट से पहले रिटायर हुए कर्मचारियों की पेंशन रिवीजन पर आयोग ने उठाया ये कदम

8th CPC Pension Revision Update: 8वां वेतन आयोग की बैठकों के बीच देश के लाखों पेंशनर्स के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक हलचल देखने को मिल रही है। 1 जनवरी 2026 से पहले सेवानिवृत्त हो चुके कर्मचारियों की पेंशन संशोधन की मांग को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है।

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने 8वें वेतन आयोग के नियम और शर्तों (ToR) में संशोधन की मांग करने वाले आवेदनों को अंतिम विचार और उचित कार्रवाई के लिए वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के पास भेज दिया है। आइए आपको बताते हैं कि पेंशन संगठनों ने क्या मांग रखी है और इस कदम का पूर्व कर्मचारियों पर क्या असर पड़ेगा।

किन पेंशनभोगी संगठनों ने भेजी है अर्जी?

DoPT ने जिन दो मुख्य कर्मचारी/पेंशनभोगी संगठनों के ज्ञापनों को व्यय विभाग को फॉरवर्ड किया है, उनके नाम ये हैं:

1- ऑल इंडिया आरएमएस, एमएमएस एंड पोस्टल पेंशनर्स एसोसिएशन: संगठन के महासचिव गिरिराज सिंह द्वारा 30 जुलाई 2026 को भेजा गया आवेदन।

2- ऑल इंडिया डिफेंस एंप्लाइज फेडरेशन: संगठन के महासचिव सी. श्रीकुमार द्वारा 4 अगस्त 2026 को प्रस्तुत किया गया आवेदन।

DoPT ने 18 अगस्त 2026 के अपने ऑफिस मेमोरेडम में स्पष्ट किया है कि इन ज्ञापनों पर ‘उचित कार्रवाई’ के लिए इन्हें व्यय विभाग को सौंपा जा रहा है।

पेंशनभोगियों की मुख्य मांग क्या है?

पेंशनभोगी संगठनों की प्राथमिक मांग यह है कि 8वें वेतन आयोग के Terms of Reference में संशोधन किया जाए। वर्तमान में पेंशनभोगी चाहते हैं कि आयोग के अधिकार क्षेत्र में 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए कर्मचारियों की पेंशन संशोधन के मुद्दे को स्पष्ट रूप से शामिल किया जाए, ताकि जब आयोग वेतन और पेंशन ढांचे की समीक्षा करे, तो पुराने पेंशनभोगियों के हितों की भी अनदेखी न हो।

क्या पेंशन संशोधन को मंजूरी मिल गई है?

नहीं, बिल्कुल नहीं। DoPT के मेमोरेंडम को लेकर किसी भी प्रकार का भ्रम नहीं होना चाहिए। DoPT ने अभी केवल पेंशनभोगियों की मांग को वित्त मंत्रालय को स्थानांतरित किया है। इस आदेश में पेंशन संशोधन को मंजूरी नहीं दी गई है और न ही ToR में कोई संशोधन हुआ है। इस मेमोरेंडम में किसी भी फिटमेंट फैक्टर, संशोधित पेंशन फॉर्मूले या अतिरिक्त लाभ का ऐलान नहीं किया गया है। आयोग के ToR में बदलाव का निर्णय केवल केंद्र सरकार के औपचारिक आदेश द्वारा ही संभव है।

चौथे वेतन आयोग (1985) का दिया गया ऐतिहासिक संदर्भ

पेंशनभोगी संगठनों ने अपनी मांग के समर्थन में ऐतिहासिक मिसाल का हवाला दिया है।8 नवंबर 1985 को वित्त मंत्रालय ने एक प्रस्ताव पारित कर चौथे वेतन आयोग के नियम और शर्तों (ToR) में संशोधन किया था। इसके जरिए आयोग को यह विशेष जिम्मेदारी दी गई थी कि वह पुराने और नए दोनों पेंशनभोगियों के लिए एक न्यायसंगत पेंशन ढांचे की समीक्षा करे।

इसी तर्ज पर संगठन चाहते हैं कि 8वें वेतन आयोग में भी पुरानी और नई पेंशन दरों के बीच तालमेल बिठाने के लिए ToR में संशोधन किया जाए।

आगे क्या होगा?

अब यह पूरा मामला वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के पाले में है। व्यय विभाग इन ज्ञापनों की समीक्षा करेगा और यह तय करेगा कि क्या 8वें वेतन आयोग के ToR में संशोधन का प्रस्ताव कैबिनेट को भेजा जाना चाहिए या नहीं। जब तक वित्त मंत्रालय या कैबिनेट की ओर से कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं होती, तब तक 1 जनवरी 2026 से पहले के सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन समीक्षा पर अंतिम निर्णय का इंतजार करना होगा।

चीन ने युद्ध की तैयारी के लिए बदला रक्षा कानून:आम लोगों के संसाधन इस्तेमाल कर सकेगी सरकार; 1 अक्टूबर से लागू होंगे नए नियम

चीन ने अपने रक्षा कानून में बड़ा बदलाव किया है। अब युद्ध या बड़े संकट के समय सरकार सिर्फ सेना पर निर्भर नहीं रहेगी। जरूरत पड़ने पर आम लोगों, निजी कंपनियों और देश के दूसरे संसाधनों का भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। चीन की संसद (नेशनल पीपुल्स कांग्रेस) ने 28 अगस्त को राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी कानून में बदलाव को मंजूरी दी। नया कानून 1 अक्टूबर से लागू होगा। नए कानून में सिर्फ संसाधन लेने की ही नहीं, उन्हें सरकार के कब्जे में लेने की व्यवस्था भी है। आदेश मानने से इनकार या जानबूझकर देरी करने पर कार्रवाई और जुर्माने का प्रावधान है। 2010 के बाद पहली बार कानून में बड़ा बदलाव राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी कानून 2010 में बनाया गया था। अब पहली बार इसमें बड़ा बदलाव किया गया है। नए कानून में 14 अध्याय और 82 अनुच्छेद हैं। चीन के मुताबिक, इसका मकसद यह है कि किसी खतरे के समय देश शांति से युद्ध की स्थिति में तेजी से जा सके। इसके लिए आर्थिक और सामाजिक ताकत को भी रक्षा के काम में लगाया जा सकेगा। नए कानून में देश की संप्रभुता, एकता, क्षेत्रीय अखंडता और सुरक्षा के साथ ‘विकास हितों’ की रक्षा को भी शामिल किया गया है। कम्युनिस्ट पार्टी तय करेगी, कब और कैसे जुटेंगे संसाधन अमेरिका के जेम्सटाउन फाउंडेशन की विशेषज्ञ सामंथा हॉफमैन के मुताबिक, नए कानून में पार्टी के नेतृत्व, संगठन, रिजर्व फोर्स, भर्ती, जरूरी सामान के भंडार और रक्षा से जुड़ी शिक्षा जैसे क्षेत्रों में बदलाव किए गए हैं। कानून के अनुच्छेद 3 और 16 में राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी की व्यवस्था को कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के अधीन किया गया है। पहले इसमें स्टेट काउंसिल और सेंट्रल मिलिट्री कमीशन की प्रमुख भूमिका थी। हॉफमैन के मुताबिक, जरूरत पड़ने पर पार्टी सैन्य, नागरिक, आर्थिक और सामाजिक संसाधनों को एक साथ जुटाकर अपने रणनीतिक लक्ष्यों के लिए इस्तेमाल कर सकती है। अस्पताल, इंटरनेट और ट्रांसपोर्ट को भी तैयार रहना होगा नए कानून के मुताबिक परिवहन, डाक, दूरसंचार, साइबर सुरक्षा, चिकित्सा और दवा आपूर्ति, खाद्य और अनाज आपूर्ति और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों को राष्ट्रीय रक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियों के लिए तैयार रहना होगा। इन क्षेत्रों की इकाइयों को विशेष टीमें बनानी होंगी। उन्हें ट्रेनिंग भी दी जाएगी, ताकि जरूरत पड़ने पर वे तुरंत काम कर सकें। साइबर सुरक्षा को खास तौर पर शामिल किया गया है। कानून में नई और उन्नत तकनीकों के इस्तेमाल से रक्षा क्षमता बढ़ाने की बात भी कही गई है। रिजर्व फोर्स तैयार करने, भर्ती व्यवस्था मजबूत करने और रणनीतिक रूप से जरूरी सामान का भंडार बढ़ाने के भी प्रावधान हैं। अब चीन में विकास भी राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा 2010 के कानून में चीन की संप्रभुता, एकता, क्षेत्रीय अखंडता और सुरक्षा को खतरा होने पर रक्षा व्यवस्था सक्रिय करने की बात थी। अब इसमें ‘विकास हितों’ को भी शामिल कर दिया गया है। यानी चीन के लिए खतरा सिर्फ सीमा या देश की सुरक्षा से जुड़ा नहीं होगा। अर्थव्यवस्था, जरूरी संसाधनों तक पहुंच, विदेशों में मौजूद चीनी संपत्तियां और तकनीकी विकास से जुड़े हित भी राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा माने जा सकते हैं। जेम्सटाउन फाउंडेशन की विशेषज्ञ सामंथा हॉफमैन के मुताबिक, यह बदलाव 2020 में संशोधित चीन के राष्ट्रीय रक्षा कानून से भी जुड़ा है। उस कानून में भी देश के विकास हितों को खतरा होने पर रक्षा लामबंदी शुरू करने की व्यवस्था की गई थी। खबर अपडेट हो रही है…

किर्गिस्तान में SCO समिट का दूसरा दिन:आज मोदी का संबोधन, कल पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति समेत कई नेताओं से हुई थी मुलाकात

किर्गिस्तान बिश्केक में हो रहे SCO शिखर सम्मेलन का आज दूसरा दिन है। पीएम मोदी आज समिट को संबोधित कर सकते हैं। कल मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन समेत कई देशों के नेताओं से द्विपक्षीय मुलाकात की। बिश्केक में हो रहे SCO शिखर सम्मेलन में भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान और ईरान समेत 10 सदस्य देशों के नेता शामिल हो रहे हैं। SCO समिट के पहले दिन की तस्वीरें… मोदी ने पुतिन को ब्रिक्स समिट में शामिल होने का न्योता दिया पीएम मोदी ने भारत में अगले महीने होने वाली ब्रिक्स समिट के लिए रूस के राष्ट्रपति पुतिन को न्योता दिया था। मोदी ने कहा था- “भारत कुछ दिनों बाद ब्रिक्स समिट का आयोजन कर रहा है। सभी सभी भारतीय आपका और आपके प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करने के लिए बहुत उत्सुक हैं।” पुतिन बोले- रूस में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 7 गुना बढ़ी राष्ट्रपति पुतिन ने पीएम मोदी से मुलाकात के बाद कहा- रूस में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या के मामले में भारत टॉप लिस्ट में शामिल है। पिछले कुछ सालों में यह संख्या 7 गुना बढ़कर 40,000 हो गई है। हम नियमित रूप से भारत और रूस के सांस्कृतिक उत्सव आयोजित करते हैं। हमारे बीच पर्यटकों का आना-जाना भी काफी होता है, जिसमें 16% की वृद्धि देखी गई है। पीएम ने प्रवासी भारतीयों से मुलाकात की पीएम मोदी ने किर्गिस्तान में भारत से जुड़े लोगों से मुलाकात की, जिनमें प्रवासी सदस्य, शिक्षाविद, शोधकर्ता, ITEC पूर्व छात्र और योग अभ्यासकर्ता शामिल थे। अगले साल पाकिस्तान को मिल सकती है मेजबानी यह SCO के 25 साल पूरे होने पर आयोजित ऐतिहासिक सम्मेलन है। यूरेशिया की सुरक्षा, व्यापार और रणनीतिक संतुलन के लिहाज से यह साल का सबसे महत्वपूर्ण बहुपक्षीय सम्मेलन माना जा रहा है। समिट के बाद किर्गिस्तान की अध्यक्षता समाप्त होगी और 2026–27 की अध्यक्षता पाकिस्तान को सौंपे जाने की उम्मीद है। 2027 का SCO शिखर सम्मेलन पाकिस्तान में प्रस्तावित है। ——————————————- ये खबर भी पढ़ें… किर्गिस्तान में पुतिन-मोदी की मुलाकात, दोनों लीडर गले मिले:PM ने BRICS के लिए न्योता दिया; एक ही कार में बैठकर नोमैड गेम्स सेरेमनी में पहुंचे
पीएम मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन की किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में SCO शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात हुई। यह बैठक करीब 10 मिनट चली। पूरी खबर पढ़ें…

वाराणसी में गंगा का रौद्र रूप! 84 घाट डूबे, नमस्ते’ प्रतिमा भी पानी में समाई, NDRF अलर्ट पर

Varanasi Flood: सोमवार को वाराणसी में गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ता रहा, जिससे सभी 84 घाट डूब गए और कई निचले इलाकों में पानी भर गया। वहीं, नदी का जलस्तर करीब 69.40 मीटर दर्ज किया गया, जबकि चेतावनी स्तर 70.262 मीटर और खतरे का निशान 71.26 मीटर है।

गंगा का पानी लगातार बढ़ने से घाटों के किनारे मौजूद कई प्रसिद्ध जगहें भी डूब गई है। नमो घाट पर लगी मशहूर ‘नमस्ते’ प्रतिमा भी लगभग पूरी तरह पानी में समा गई है। कई घाटों पर पानी भरने से वहां आवाजाही प्रभावित हुई है। वहीं, लगातार हो रही भारी बारिश के बीच रिवर पुलिस कमिश्नरेट कार्यालय में भी पानी घुस गया है।

गंगा का जलस्तर करीब 4 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। इसे देखते हुए प्रशासन ने एहतियात के तौर पर नावों के संचालन पर रोक लगा दी है।

रविवार को भी गंगा का पानी लगातार बढ़ा था। इसके चलते वरुणा नदी में पानी का बहाव उल्टा हो गया, जिससे नदी के किनारे बसे निचले इलाकों में पानी घुसने लगा। हालात को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोग अब सुरक्षित और ऊंचे स्थानों की ओर जाने लगे हैं।

बाढ़ के खतरे के बीच प्रशासन ने तैयारियां तेज कीं

बाढ़ के खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। वाराणसी में कुल 61 बाढ़ राहत कैंपों की पहचान की गई है, जहां रहने, खाने, पीने के पानी, साफ-सफाई, रोशनी और मेडिकल मदद का इंतजाम किया गया है।

बाढ़ की आशंका वाले इलाकों में पानी के स्तर और हालात पर नज़र रखने के लिए 21 बाढ़ चौकियां भी बनाई गई हैं। राहत और बचाव कार्यों के लिए 198 नावें तैनात की गई हैं।

आपातकालीन कार्यों के लिए नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF), वॉटर पुलिस और प्रोविंशियल आर्म्ड कांस्टेबुलरी (PAC) की टीमों को स्टैंडबाय पर रखा गया है।

अगर बाढ़ की स्थिति और बिगड़ती है, तो प्रशासन ने पशुओं के लिए भी जरूरी इंतजाम किए हैं। इनमें चारा, पीने का पानी और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की व्यवस्था शामिल है।

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भाई ने बताई बहन की तकलीफ तो CM योगी ने तुरंत लोहिया अस्पताल में कराया भर्ती

भाई ने बताई बहन की तकलीफ तो CM योगी ने तुरंत लोहिया अस्पताल में कराया भर्ती

Yogi Janta Darshan Program: ‘जनता दर्शन’ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अति मानवीय रूप देख अन्य आगंतुक अपनी पीड़ा भूल गए। सीएम योगी का यह रूप देख किसी की भावनाएं आंसुओं के जरिए निकल पड़ीं तो किसी ने अपनी कुर्सी से ही हाथ जोड़कर मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता के प्रति आभार जताया। दरअसल अयोध्या से आए एक भाई-बहन जनता दर्शन में पहुंचे। भाई ने मुख्यमंत्री से बताया कि उनकी बहन गंभीर रूप से बीमार हैं। वह बहन को लेकर लखनऊ आए हैं, उन्हें जल्द से जल्द इलाज की आवश्यकता है। इस पर मुख्यमंत्री ने पीड़िता को तत्काल लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनका इलाज भी शुरू हो गया है। 

मुख्यमंत्री आवास से तत्काल अस्पताल भेजी गईं पीड़िता

अयोध्या से आए श्याम सोनकर ने मुख्यमंत्री को बताया कि उनकी बहन बबिता कुछ दिनों से अयोध्या में भर्ती थीं, डॉक्टरों ने उन्हें लखनऊ रेफर कर दिया है। परिवार अत्यंत गरीब है, इसलिए इलाज में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस पर मुख्यमंत्री ने अपने आवास से तत्काल पीड़िता को एंबुलेंस से डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान गोमती नगर भिजवाया। मुख्यमंत्री का निर्देश मिलने के बाद डॉक्टरों की देख-रेख में मरीज का इलाज प्रारंभ हो गया। मुख्यमंत्री ने पीड़िता के परिजनों को जल्द से जल्द आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का भी आश्वासन दिया। 

भाई की आंखों में आए आंसू, फोन करके दिया धन्यवाद

बहन बबिता के एडमिट होते ही उनके भाई श्याम ने चैन की सांस ली। डॉक्टरों को उन्होंने पूरी बीमारी आदि के बारे में विस्तृत रूप से बताया। इलाज की प्रक्रिया प्रारंभ होते ही श्याम की आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने फोन करके मुख्यमंत्री आवास को इसकी जानकारी भी दी और धन्यवाद भी ज्ञापित किया। 

धन की कमी के कारण नहीं रुकेगा किसी का इलाज

‘जनता दर्शन’ में कई लोग इलाज के लिए आर्थिक सहायता की गुहार लेकर पहुंचे। सीएम योगी ने उन्हें आश्वस्त किया कि सरकार इलाज के लिए भरपूर मदद करेगी। उनके प्रार्थना पत्रों को अधिकारियों को हस्तगत करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि इलाज से जुड़ी एस्टीमेट की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूर्ण कराकर शासन में उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने आश्वस्त किया कि धन की कमी के कारण किसी का इलाज नहीं रुकेगा। 

चॉकलेट पाकर खिलखिला उठी मासूम

‘जनता दर्शन’ में एक मासूम अपनी मां के साथ आई थी। सीएम ने उनकी मां की समस्या सुनी, फिर बच्ची से मुखातिब हुए और दुलारा-पुचकारा। इसके बाद मुख्यमंत्री ने चॉकलेट मंगाई और उसके सामने रैपर खोलना शुरू कर दिया। सीएम के हाथ में चॉकलेट देखकर बच्ची खिलखिला उठी। बाबा और बच्ची के संवाद को देख अपना दर्द भूल सभी पीड़ित व अनय लोग मुस्कुरा उठे। सभी ने बच्चों के प्रति मुख्यमंत्री योगी के वात्सल्य की खूब प्रशंसा की।

‘8 अरब लोगों के लिए लैपटॉप खरीदने लायक काला धन मौजूद’, ग्लोबल मनी लॉन्ड्रिंग पर बोले CJI सूर्यकांत

CJI Surya Kant: भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने दुनिया भर में हो रही मनी लॉन्ड्रिंग के बड़े पैमाने पर प्रकाश डाला है। उन्होंने कहा कि एक साल में दुनिया भर में अवैध तरीके से घुमाया जाने वाला पैसा इतना हो सकता है कि उससे दुनिया के 8 अरब लोगों में से हर एक के लिए एक साधारण लैपटॉप खरीदा जा सके। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि उस पैसे का एक प्रतिशत से भी कम हिस्सा कभी वापस मिल पाता है।

शनिवार को कैम्ब्रिज में ‘इकोनॉमिक क्राइम’ पर 43वें इंटरनेशनल सिम्पोजियम के समापन सत्र में बोलते हुए, जस्टिस कांत ने आपराधिक गतिविधियों से कमाए गए पैसे का पता लगाने, उसे जब्त करने और उसे वापस पाने पर वैश्विक स्तर पर ज्यादा ध्यान देने का आह्वान किया।

न्यूज एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, CJI ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे धोखाधड़ी वाले मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय न्यायपालिका ने संसद के कदम उठाने का इंतजार करने के बजाय, ऐसे नए तरह के अपराधों पर तेजी से प्रतिक्रिया दी है।

‘100 में से एक से भी कम’ पैसा हो पाता है बरामद

जस्टिस कांत ने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग का दायरा इतना बड़ा है कि वैश्विक अनुमानों के आधार पर भी उसे समझना मुश्किल है। उन्होंने कहा, “अगर मनी लॉन्ड्रिंग के वैश्विक अनुमान मोटे तौर पर भी सही हैं, तो दुनिया एक साल में इतना पैसा लॉन्डर करती है कि उससे आज धरती पर मौजूद सभी 8 अरब लोगों के लिए एक साधारण लैपटॉप खरीदा जा सकता है, और फिर भी खजाने में कुछ पैसे बच जाएंगे।”

इसके बाद उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अवैध तरीके से कमाए गए धन का बहुत छोटा हिस्सा ही आखिरकार वापस मिल पाता है।

जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “अवैध धन की इस विशाल रकम में से सबसे उदार अनुमान के मुताबिक भी 100 में से एक फीसदी से कम ही कभी वापस हासिल किया जाता है।”

उन्होंने कहा, “हर 100 हिस्सों में से 99 हिस्सों का जिक्र सिर्फ भाषणों और रिपोर्टों में होता है, जबकि वास्तव में सिर्फ एक हिस्से को ही वापस हासिल किया जा पाता है।”

उन्होंने कहा कि आर्थिक अपराध के खिलाफ लड़ाई को सिर्फ समस्या पहचानने तक सीमित नहीं रखना चाहिए। अब ध्यान अपराध से कमाए गए पैसे का पता लगाने और उसे वापस हासिल करने पर होना चाहिए।

पुराने जमाने की धोखाधड़ी से लेकर डिजिटल अरेस्ट तक

CJI ने कहा कि आर्थिक अपराध कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह एक पुरानी बुराई है जो टेक्नोलॉजी और फाइनेंशियल सिस्टम में बदलाव के साथ बदलती रही है।

उन्होंने चौथी सदी ईसा पूर्व के एक यूनानी व्यापारी हेगेस्ट्रेटोस का उदाहरण दिया, जिसने कथित तौर पर इंश्योरेंस का क्लेम पाने के लिए अपना माल बेचने के बाद अपना जहाज डुबोने की योजना बनाई थी। जस्टिस कांत ने इस मामले को आर्थिक धोखाधड़ी का शुरुआती उदाहरण बताया।

उन्होंने कौटिल्य के अर्थशास्त्र का भी जिक्र किया, जिसमें उन 40 तरीकों की पहचान की गई थी जिनसे अधिकारी सरकारी राजस्व का गबन कर सकते थे। इस ग्रंथ में ऑडिट, मुखबिर, क्रॉस-वेरिफिकेशन और जब्ती जैसे उपाय भी बताए गए थे।

CJI ने कहा, “अर्थशास्त्र में बताए गए चोरी के 40 तरीकों के साथ-साथ अब पता लगाने, फ्रीज करने और वापस पाने के चालीस बेहतर तरीकों को भी शामिल किया जाए।”

भारत का कानूनी ढांचा

जस्टिस कांत ने आर्थिक अपराधों से निपटने के लिए भारत के कानूनी ढांचे का जिक्र किया, जिसमें ‘प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002’ और ‘फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट, 2018’ शामिल हैं।

उन्होंने अपराध से मिली कमाई का पता लगाने, उसे जब्त करने और अपने कब्जे में लेने के लिए इस्तेमाल होने वाले संस्थागत सिस्टम के तहत खास एजेंसियों और स्पेशल कोर्ट का भी जिक्र किया।

CJI ने इस बात पर जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग तेजी से जरूरी होता जा रहा है क्योंकि गैर-कानूनी पैसा आसानी से सीमाओं के पार जा सकता है।

उन्होंने कहा, “दूसरे देशों के साथ ‘म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी’ (आपसी कानूनी सहायता समझौते) – भले ही उनका सिस्टम और तौर-तरीके कितने भी अधूरे क्यों न हों – प्रत्यर्पण (extradition) की तुलना में बरामद संपत्ति को कहीं ज्यादा भरोसेमंद तरीके से वापस लाते हैं। आखिरकार, गैर-कानूनी दौलत शायद ही कभी उस जगह रहती है जहां से उसे चुराया गया था।”

उन्होंने गैर-कानूनी फंड का पता लगाने के लिए फाइनेंशियल इंटेलिजेंस शेयरिंग और ‘बेनिफिशियल ओनरशिप रजिस्ट्री’ जैसे टूल्स पर भी जोर दिया, जिन्हें एक साथ मिलकर काम करने की जरूरत है।

चोरी हुई संपत्ति वापस पाने पर ध्यान दें

जस्टिस कांत ने कहा कि कानून को सख्ती से लागू करने का काम कानून के दायरे में ही होना चाहिए। उन्होंने ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम का भी जिक्र किया, जिसमें धोखेबाज सरकारी या कानून लागू करने वाले अधिकारियों का रूप धारण कर लोगों से पैसे ऐंठते हैं।

उन्होंने कहा कि आर्थिक अपराधों के खिलाफ कोशिशों की कामयाबी को इस आधार पर नहीं मापा जाना चाहिए कि समस्या का वर्णन कितनी अच्छी तरह किया गया है, बल्कि इस आधार पर मापा जाना चाहिए कि चोरी हुई संपत्ति का पता लगाने, उसे फ्रीज करने और वापस लाने में कितनी कामयाबी मिली है।

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