बिहार डूबेगा कि बचेगा…नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के 8 दिन बाद अब हर कोई जानना चाहता है। राज्य की 8 नदियां- गंगा, सोन, पुनपुन, कोसी, गंडक, बुढ़ी गंडक, बागमती और घाघरा खतरे के निशान से ऊपर हैं। दूसरी तरफ नेपाल में दूसरे ग्लेशियर के फटने का अलर्ट जारी कर दिया गया है। ऐसा क्यों कहा जा रहा कि अबकी ग्लेशियर फटा तो पटना सहित 10 शहर डूब जाएंगे, हिमालय की चोटी पर क्या चल रहा है, समझेंगे; बूझे की नाही में…। बिहार की चिंता बढ़ाने वाले 3 बड़े फैक्टर 1. नेपाल में फटने वाला है दूसरा ग्लेशियर चीन के जल संसाधन मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल में एक नया ग्लेशियल लेक फटने वाला है। कब फटेगा, इसका सटीक अंदाजा लगाना कठिन है। नया ग्लेशियल लेक लांगटांग लिरुंग हिमालय के पश्चिमी ढलान पर, रसुवा में तेनजिंग के ठीक सामने है। दरअसल… नेपाल से निकलने वाली 7 से 9 बड़ी नदियां बहकर बिहार-UP के मैदानी इलाकों में आती हैं। जब नेपाल के पहाड़ों में भारी बारिश होती है, तो इन्हीं नदियों के जरिए बिहार में बाढ़ का पानी आता है। इसे ऐसे समझिए… केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, कोसी, गंडक, बागमती और घाघरा ही वे नदियां हैं, जो बिहार में बाढ़ लाती हैं। इसलिए अगर अबकी बार ग्लेशियर फटा तो फिर भारी मात्रा में पानी बिहार पहुंचेगा। 2. 8 नदियां उफान पर, दबाव बढ़ा तो टूट जाएंगे बाढ़ ताजा हालात है कि बिहार की आठ नदियां गंगा, सोन, पुनपुन, कोसी, गंडक, बुढ़ी गंडक, बागमती और घघरा खतरे के निशान से ऊपर हैं। 3 सितंबर तक बिहार जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक… वहीं, नेपाल में आई तबाही के दिन 26 अगस्त से 3 सितंबर की सुबह 8 बजे तक बिहार में 3 बैराज से 1.98 करोड़ क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। एक क्यूसेक पानी यानी 28.3 लीटर/प्रति सेकंड। मतलब 56,119.4 करोड़ लीटर/प्रति सेकंड पानी बिहार में 9 दिन के अंदर आ चुका है। मतलब अगर नेपाल में दूसरा ग्लेशियर टूटा तो बिहार में हालात खराब हो जाएंगे। क्योंकि अभी ही नदियों में पानी काफी बढ़ गया है। आगे पानी आने पर तबाही ही मचेगी। 3. नेपाल में बारिश का अलर्ट, नदियों में बढ़ेगा पानी बिहार की सबसे बड़ी चिंता नेपाल में भारी बारिश का अलर्ट है। नेपाल के बाढ़ पूर्वानुमान विभाग के मुताबिक, भोटेकोशी और त्रिशूली नदी फिलहाल चेतावनी स्तर से नीचे बह रही हैं, फिर भी रसुवा और नुवाकोट में अचानक बाढ़ आने की ज्यादा संभावना है। दोनों जिलों में भोटेकोशी, त्रिशूली और छोटी नदियों का जलस्तर काफी बढ़ सकता है, जिससे अचानक बाढ़ आने का भारी खतरा है। वहीं, नेपाल के मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों यानी 6 सितंबर तक भारी बारिश की चेतावनी दी है। नेपाल के जल संसाधन विभाग ने कहा कि कोशी बेसिन की सप्तकोशी, तमोर, अरुण, दूधकोशी, तामाकोशी और सुनकोशी तथा नारायणी बेसिन की नारायणी, त्रिशूली, बूढ़ी गंडकी, मर्स्यांगदी, सेती और काली गंडकी जैसी प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। विभाग ने नेपाल की छोटी नदियों में पानी बढ़ने की भी बातें कही है। इधर… पटना मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, 5 सितंबर तक पूरे बिहार में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, गोपालगंज और सीवान जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। जबकि, पटना, नालंदा, जहानाबाद, नवादा, गया, लखीसराय, शेखपुरा और बेगूसराय में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। …तो क्या बड़े शहर भी डूब सकते हैं? बिल्कुल। राज्य की नदियों में बढ़ते पानी से 13 जिले दरभंगा, मधुबनी, पश्चिम चंपारण, कटिहार, मधेपुरा, पूर्णिया, सहरसा, खगड़िया, वैशाली, बेगूसराय, भागलपुर, समस्तीपुर, मुंगेर प्रभावित हैं। बिहार के आपदा प्रबंधन विभाग ने 3 सितंबर की शाम अलर्ट जारी करते हुए कहा कि पटना में गंगा नदी हाई फ्लड लेबल को क्रास करने वाली है। इसलिए सभी पदाधिकारी और लोग अलर्ट रहें। निचले इलाकों को बचाने के लिए तुरंत तैयारी में जुट जाएं। विभाग ने कहा है कि दक्षिण बिहार की सोन, पुनपुन, दरधा में बढ़ते पानी को देखते हुए नालंदा, भोजपुर, वैशाली, सारण, बेगूसराय, लखीसराय और जहानाबाद में लोगों की परेशानी बढ़ सकती है। मतलब साफ है कि अगर नेपाल से और पानी आया तो बिहार के कम से कम 10 से ज्यादा शहर डूब सकते हैं। जिसमें राजधानी पटना भी शामिल हो सकता है। ऐसा पहले भी हो चुका है…
Aaj Ka Rashifal: अंक ज्योतिष के अनुसार 4 सितंबर का दिन आर्थिक मामलों में योजना बनाने और पैसों को सही तरीके से संभालने का संकेत दे रहा है। आज ज्यादातर मूलांक वाले लोगों को बेवजह खर्च करने से बचने और भविष्य को ध्यान में रखकर आर्थिक फैसले लेने की सलाह दी जाती है। कुछ लोगों के लिए निवेश और बचत की नई योजना बनाने का समय अच्छा है। आइए जानते हैं मूलांक 1 से 9 तक के लिए आज का दिन कैसा रहेगा।
मूलांक 1
अगर आपका जन्म 1, 10, 19 या 28 तारीख को हुआ है, तो आज का दिन आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण रहेगा। भविष्य को सुरक्षित करने के लिए लंबी अवधि की योजना बना सकते हैं। अपने आर्थिक लक्ष्य तय करें और बजट के अनुसार खर्च करें। अचानक या बिना सोचे खरीदारी करने से बचना आपके लिए बेहतर रहेगा। कोई बड़ा फैसला लेने से पहले उसके सभी पहलुओं पर विचार करें।
मूलांक 2
अगर आपका जन्म 2, 11, 20 या 29 तारीख को हुआ है, तो आज पैसों के मामले में व्यावहारिक सोच रखनी होगी। गैरजरूरी चीजों पर खर्च करने से बचें और अपनी बचत को मजबूत करने पर ध्यान दें। भविष्य की आर्थिक सुरक्षा के लिए लंबी अवधि की योजना बनाना फायदेमंद रहेगा। सही दिशा में उठाया गया कदम आगे चलकर आर्थिक स्थिरता देने में मदद कर सकता है।
मूलांक 3
अगर आपका जन्म 3, 12, 21 या 30 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक योजना बनाने का अच्छा समय है। अपने लक्ष्यों को स्पष्ट करें और उन्हें पूरा करने के लिए ठोस योजना तैयार करें। बाजार और निवेश से जुड़ी नई जानकारी हासिल करना फायदेमंद रहेगा। हालांकि, बजट को जरूरत के हिसाब से बदलने के लिए तैयार रहें, क्योंकि अचानक कोई खर्च सामने आ सकता है।
मूलांक 4
अगर आपका जन्म 4, 13, 22 या 31 तारीख को हुआ है, तो आज घर और परिवार से जुड़े खर्चों पर विशेष ध्यान देना होगा। भावनाओं में आकर पैसा खर्च करने से बचें। अपनी आमदनी और खर्च का सही हिसाब रखें और बिना योजना वाले खर्चों पर रोक लगाएं। भविष्य में अचानक आने वाली जरूरतों के लिए कुछ रकम बचाकर रखना आपके लिए बेहतर रहेगा।
मूलांक 5
अगर आपका जन्म 5, 15 या 23 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक मामलों में दिन सकारात्मक रह सकता है। बजट बनाने और खर्चों को व्यवस्थित करने की आपकी क्षमता बेहतर रहेगी। गैरजरूरी खरीदारी से बचकर आप अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकते हैं। नए निवेश या कमाई के अवसरों पर विचार किया जा सकता है, लेकिन फैसला पूरी जानकारी लेने के बाद ही करें।
मूलांक 6
अगर आपका जन्म 6, 15 या 25 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक मामलों में अनुशासन जरूरी रहेगा। अपनी आमदनी और खर्च का पूरा हिसाब रखें। जरूरी चीजों पर ही पैसा खर्च करें और गैरजरूरी खर्च को टालने की कोशिश करें। हर छोटे-बड़े भुगतान पर नजर रखने से आपको अपनी आर्थिक स्थिति समझने में मदद मिलेगी। लापरवाही से बचना आपके लिए फायदेमंद होगा।
मूलांक 7
अगर आपका जन्म 7, 16 या 25 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक स्थिरता और भविष्य की योजनाओं पर ध्यान देना चाहिए। लग्जरी और गैरजरूरी सामान पर खर्च करने से बचें। अपनी बचत बढ़ाने के नए तरीके खोजें और मौजूदा आर्थिक योजनाओं की समीक्षा करें। आज लिए गए समझदारी भरे फैसले भविष्य में आपकी आर्थिक स्थिति को बेहतर बना सकते हैं।
मूलांक 8
अगर आपका जन्म 8, 17 या 26 तारीख को हुआ है, तो आज का दिन आर्थिक रूप से अनुकूल रह सकता है। लंबी अवधि की योजनाओं पर काम करने का सही समय है। अपने निवेश और बजट की समीक्षा करें और देखें कि आपकी योजनाएं भविष्य के लक्ष्यों के अनुसार चल रही हैं या नहीं। बिना योजना के खर्च करने से बचें और आर्थिक सुरक्षा को प्राथमिकता दें।
मूलांक 9
अगर आपका जन्म 9, 18 या 27 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक मामलों में संतुलन बनाए रखना जरूरी है। नए अवसर सामने आ सकते हैं, लेकिन तुरंत फैसला लेने के बजाय पूरी जानकारी जुटाएं। अपने पुराने आर्थिक लक्ष्यों की समीक्षा करें और जरूरत पड़ने पर उनमें बदलाव करें। सोच-समझकर लिया गया फैसला आपकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद कर सकता है।
डिस्क्लेमर: इस लेख की सामग्री पूरी तरह से ज्योतिषीय भविष्यवाणियों पर आधारित है। हम इसकी सत्यता और सटीकता का पूरी तरह दावा नहीं करते। यहां दी गई किसी भी जानकारी के आधार पर कोई वित्तीय, स्वास्थ्य या व्यावसायिक निर्णय लेने से पहले योग्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।
Tata company out in Kenyan: केन्या के राष्ट्रपति विलियम रूटो ने कहा है कि ‘टाटा केमिकल्स (Tata Chemicals)’ को काजियाडो काउंटी के लेक मगाडी में अपने खनन कामकाज तत्काल बंद करने का आदेश दिया है। Reuters की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रूटो ने गुरुवार (3 सितंबर) को कहा, “उन्होंने भारत की टाटा केमिकल्स (TTCH.NS) को केन्या में अपना कामकाज रोकने का आदेश दिया है, क्योंकि कंपनी की मौजूदगी से देश को कोई फायदा नहीं हुआ।” रूटो ने कहा कि सरकार टाटा केमिकल्स का कामकाज संभालने के लिए दो नई कंपनियां लाएगी।
इस फैसले के साथ इलाके में टाटा केमिकल्स और उससे पहले की कंपनियों की करीब 100 साल से चली आ रही खनिज गतिविधियों (मिनरल निकालने के काम) पर विराम लग गया है। दक्षिणी केन्या में विकास कार्यों के दौरे के दौरान रुटो ने कंपनी पर आरोप लगाया कि कंपनी ने दशकों तक इलाके में मौजूद सोडा ऐश के विशाल प्राकृतिक भंडार का इस्तेमाल करने के बावजूद कोई ठोस आर्थिक विकास, रोजगार या स्थानीय औद्योगिक ढांचा नहीं बनाया।
क्या है पूरा विवाद?
राष्ट्रपति रूटो ने कंपनी पर आरोप लगाया कि इतने लंबे समय तक प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल करने के बावजूद काजियाडो एरिया में स्थानीय लोगों के लिए पर्याप्त रोजगार, उद्योग और आर्थिक विकास का आधार तैयार नहीं किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कच्चा माल विदेश क्यों भेजा जाता रहे और स्थानीय समुदाय को उसका पर्याप्त लाभ क्यों न मिले।
‘उन्होंने यहां कुछ नहीं बनाया’
Reuters के मुताबिक, दक्षिणी केन्या के विकास दौरे के दौरान काजियाडो में लोगों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति रूटो ने टाटा के पुराने कारोबार पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कंपनी को करीब 100 साल तक कॉन्ट्रेक्ट मिला। लेकिन उसने काजियाडो में कोई बड़ी फैक्ट्री नहीं लगाई। रुटो ने जोर देकर कहा कि भविष्य में माइनिंग लाइसेंस के लिए निवेशकों को कच्चे सोडा ऐश को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात करने के बजाय स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग यूनिट बनाने की शर्त माननी होगी।
रूटो ने कथित तौर पर कहा, “उस टाटा कंपनी के पास 100 साल का कॉन्ट्रैक्ट था। उन्होंने काजियाडो में कुछ नहीं बनाया। उन्होंने काजियाडो में कोई फैक्ट्री नहीं बनाई। हमने कहा है कि हम एक नई कंपनी लाएंगे और उन्हें यहां काजियाडो में कांच की एक बड़ी कंपनी और केमिकल बनाने वाली एक और कंपनी लगानी चाहिए। क्या हम दूसरे लोगों के गुलाम हैं?”
टाटा के खिलाफ कार्रवाई की वजह क्या बताई गई?
राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है जब केन्या के खनन मंत्रालय ने पहले ही टाटा के खनन संचालन पर रोक लगा दी थी। 28 जुलाई को खनन मामलों के कैबिनेट सचिव हसन जोहो ने कंपनी के संचालन को निलंबित किया था। अधिकारियों की ओर से इसके पीछे कई कथित नियामकीय उल्लंघनों का हवाला दिया गया, जिनमें स्थानीय खरीद संबंधी कानूनों का पालन न करना, निर्यात से जुड़े रिकॉर्ड में कथित गड़बड़िया और काउंटी के भूमि करों का कथित रूप से भुगतान न करना शामिल हैं।
टाटा का बयान
हालांकि, टाटा केमिकल्स का कहना है कि उसने केन्या के नियमों का पालन किया है। कंपनी का यह भी दावा है कि वह लेक मगाडी के आसपास रहने वाली करीब 30,000 स्थानीय आबादी को स्वास्थ्य और पानी जैसी आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराती है। जुलाई के आखिर में टाटा ने कहा था कि केन्या सरकार ने उसकी यूनिट टाटा केमिकल लिमिटेड को मगाडी सोडा फैक्ट्री में कामकाज रोकने और सोडा ऐश का एक्सपोर्ट बंद करने का आदेश दिया है।
टाटा ने 2005 में संभाला था कारोबार
लेक मगाडी में सोडा ऐश का खनन कोई नया कारोबार नहीं है। टाटा केमिकल्स ने 2005 में ऐतिहासिक Magadi Soda Company का अधिग्रहण किया था। इसके बाद से टाटा ग्रुप इस क्षेत्र में सोडा ऐश और उससे जुड़े खनिज कारोबार से जुड़ा रहा है। सोडा ऐश का इस्तेमाल मुख्य रूप से कांच, रसायन और अन्य औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में किया जाता है। अब रूटो सरकार चाहती है कि केन्या अपने प्राकृतिक संसाधनों का सिर्फ निर्यात न करे। बल्कि केन्या के भीतर ही उनका वैल्यू एडिशन और औद्योगिक उत्पादन हो।
विपक्ष ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
राष्ट्रपति रूटो के इस फैसले के बाद केन्या में राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है। विपक्षी डेमोक्रेसी फॉर सिटिजन्स पार्टी (DCP) के नेताओं ने सरकार पर राज्य प्रायोजित आर्थिक तोड़फोड़ का आरोप लगाया है। विपक्ष का दावा है कि टाटा के संचालन पर रोक लगाने से 1 लाख से ज्यादा लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। इससे सैकड़ों प्रत्यक्ष नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं।
विपक्षी नेताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि इस कार्रवाई के पीछे कोई दूसरा राजनीतिक मकसद हो सकता है। उनका दावा है कि लेक मगाडी एरिया में मौजूद संभावित लिथियम भंडार और तेल संसाधनों पर नए कारोबारी और राजनीतिक सहयोगियों को मौका देने के लिए मौजूदा कंपनी पर दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि केन्याई सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में गो-संरक्षण को केवल गोवंश के आश्रय और देखभाल तक सीमित न रखते हुए उसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भरता से जोड़ने की दिशा में लगातार महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इस क्रम में गोशालाओं में उपलब्ध गोबर को स्वच्छ ऊर्जा, जैविक खाद, प्राकृतिक खेती और आय के संसाधन में बदलने के लिए उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग और ‘पार्टनर्स इन प्रॉसपेरिटी’ (पीएनपी) के बीच तकनीकी सहयोग का एमओयू हुआ है। इसके तहत प्रदेश में स्थापित दीनबंधु मॉडल बायोगैस संयंत्रों को तकनीकी सहयोग देने के साथ भविष्य में स्थापित होने वाले संयंत्रों के लिए भी मजबूत तकनीकी व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसके तहत 1,000 तकनीकी विशेषज्ञ कर्मियों का नेटवर्क खड़ा किया जाएगा। इसका लक्ष्य गोबर के वैज्ञानिक व आर्थिक उपयोग के जरिए गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाते हुए उन्हें ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्त केंद्र के रूप में विकसित करना है।
समझौते की सबसे महत्वपूर्ण बात जमीनी स्तर पर तकनीकी तंत्र तैयार करना है। चरणबद्ध तरीके से करीब 1,000 तकनीकी कर्मियों का नेटवर्क विकसित किया जाएगा। यह नेटवर्क दीनबंधु बायोगैस संयंत्रों की स्थापना के साथ उनके संचालन, रखरखाव, तकनीकी प्रशिक्षण और फील्ड मॉनिटरिंग में सहयोग करेगा। इससे बायोगैस संयंत्र स्थापित करने के बाद उनके नियमित और प्रभावी संचालन के लिए स्थानीय स्तर पर तकनीकी सहायता उपलब्ध हो सकेगी। संस्था उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में 3,900 से अधिक दीनबंधु बायोगैस इकाइयों का निर्माण कर चुकी है। संस्था बायोगैस परियोजना विकास से लेकर तकनीकी डिजाइन, फीडस्टॉक एवं गोबर आकलन, संयंत्र निर्माण, संचालन एवं रखरखाव, लाभार्थियों के प्रशिक्षण और फील्ड मॉनिटरिंग तक पूरा तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराएगी।
गोबर के एक चक्र से ऊर्जा, खाद, खेती और कार्बन लाभ
नई पहल की अहमियत केवल गोबर से बायोगैस तैयार करने तक सीमित नहीं है। इसके जरिए बायोगैस, जैव-स्लरी, जैविक खाद/बायो-इनपुट, प्राकृतिक एवं पुनर्योजी कृषि, कार्बन लाभ की पूरी श्रृंखला विकसित करने की योजना है। यानी गोशाला का गोबर पहले ऊर्जा का स्रोत बनेगा और बायोगैस संयंत्र से निकलने वाली जैव-स्लरी को जैविक खाद और बायो-इनपुट के रूप में खेती से जोड़ा जा सकेगा। इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और प्राकृतिक व पुनर्योजी कृषि को बढ़ावा देने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। इस मॉडल को भविष्य में पर्यावरणीय लाभ और कार्बन परियोजनाओं से जोड़ने की संभावनाओं पर भी काम होगा।
‘गोबर अपशिष्ट नहीं, ग्रामीण समृद्धि का संसाधन’
उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने कहा कि गोबर को केवल अपशिष्ट मानने के बजाय ऊर्जा, जैविक कृषि और ग्रामीण आय के महत्वपूर्ण संसाधन के रूप में देखने की आवश्यकता है। दीनबंधु बायोगैस मॉडल को तकनीकी रूप से सुदृढ़ कर बड़े स्तर पर लागू किया जाना गोशालाओं, किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए बहुआयामी लाभ का आधार बन सकता है। इस पहल का उद्देश्य प्रदेश में उपलब्ध गोबर संसाधन को स्वच्छ ऊर्जा, जैविक उर्वरक और सतत कृषि से जोड़ते हुए ऐसी सर्कुलर इकोनॉमी विकसित करना है, जिसमें गोवंश संरक्षण के साथ रोजगार, ऊर्जा की बचत, कृषि उत्पादकता और पर्यावरणीय लाभ भी हासिल हों। प्रदेश के किसान और ग्रामीण समुदायों के साथ मिलकर इस कार्यक्रम का जमीनी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा। तकनीकी नेटवर्क और स्थानीय अनुभव का मेल गोशालाओं में बायोगैस मॉडल को टिकाऊ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए आर्थिक अवसर
योगी सरकार के गो-संरक्षण मॉडल में यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि इसमें गोवंश संरक्षण को आर्थिक चक्र से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। गोबर यदि ऊर्जा और जैविक खाद में परिवर्तित होकर खेती में वापस पहुंचता है तो गोशालाओं के संसाधनों के उपयोग के साथ किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए भी आर्थिक अवसर तैयार हो सकते हैं। इस तरह प्रदेश में ‘गोबर से ऊर्जा, ऊर्जा से जैविक कृषि और जैविक कृषि से समृद्ध ग्रामीण अर्थव्यवस्था’ की अवधारणा को जमीन पर उतारने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम साबित होने वाला है।
सोशल मीडिया पर एक मुस्लिम व्यक्ति का वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें वह सिनेमा हॉल में ‘हनुमान अंश’ फिल्म देख रहा है। कई लोगों का ध्यान इस बात पर गया कि फिल्म देखते समय वह बिना जूते-चप्पल के बैठा है। नीम करोली बाबा के जीवन पर आधारित यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर भी खूब पसंद की जा रही है।
वीडियो में वह व्यक्ति सफेद कुर्ता-पायजामा और सफेद टोपी पहने हुए बिना जूते-चप्पल के थिएटर में बैठा दिखाई दे रहा है। वह फिल्म देखने में पूरी तरह मग्न है और उसे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ रहा कि कोई उसका वीडियो बना रहा है।
वीडियो ऑनलाइन पोस्ट होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पर प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी। एक यूज़र ने लिखा, “बिना राजनीति वाला भारत।” दूसरे ने लिखा, “वे दशकों से चल रहे राजनीतिक ध्रुवीकरण से उसके मन को दूषित करने में नाकाम रहे।”
नीम करोली बाबा के जीवन पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ को लेकर हो रही चर्चाओं के बीच यह वायरल क्लिप लोगों का ध्यान खींच रही है। हाल ही में मिराज सिनेमा ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि उन्होंने नीम करोली बाबा के लिए सीट नंबर 9 आरक्षित करने का फैसला किया है, क्योंकि उनका मानना है कि बाबा अपने भक्तों के साथ फिल्म देखेंगे।
You watched or not ? pic.twitter.com/m99ePJffK2
— Bhagavad Gita (@Geetashloks) September 2, 2026
नंगे पैर फिल्म देखने आए एक व्यक्ति का वीडियो और उस पर ऑनलाइन मिली प्रतिक्रियाओं ने ‘हनुमान अंश’ फिल्म के बारे में चर्चा को और बढ़ा दिया है, क्योंकि यह फिल्म सिनेमाघरों में लगातार लोगों का ध्यान खींच रही है।
नीम करौली बाबा, जिनका जन्म 1900 के आसपास उत्तर प्रदेश के अकबरपुर में लक्ष्मण नारायण शर्मा के रूप में हुआ था। वे हनुमान के परम भक्त थे। 1960 और 1970 के दशक में कैंची धाम और वृंदावन में अपने आश्रमों के माध्यम से उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। उनकी शिक्षाओं ने पश्चिमी देशों के कई साधकों को आकर्षित किया, जिनमें हार्वर्ड के मनोवैज्ञानिक रिचर्ड अल्परट (राम दास) और आध्यात्मिक साधक भगवान दास प्रमुख थे।
उनकी शिक्षाओं में निस्वार्थ सेवा और भक्ति पर जोर दिया गया था, जिसे संक्षेप में “सब से प्रेम करो, सबकी सेवा करो, सबको भोजन कराओ” कहा जाता है। हालांकि उनके अनुयायियों द्वारा बताई गई बातों में उनके जीवन से जुड़ी कई चमत्कारी घटनाओं का जिक्र मिलता है, लेकिन ये कहानियाँ उनके आध्यात्मिक जीवन-वृत्तांत का हिस्सा हैं, न कि प्रमाणित इतिहास का।
11 सितंबर 1973 को वृंदावन में उनके निधन के बाद, उनकी विरासत दुनिया भर में फैली और स्टीव जॉब्स, मार्क जुकरबर्ग और जूलिया रॉबर्ट्स जैसी प्रमुख पश्चिमी हस्तियों को प्रभावित किया; इन सभी ने उनके कैंची धाम आश्रम का दौरा किया था।
खबरों के अनुसार, 1.8 करोड़ रुपये के कम बजट में बनी ‘हनुमान अंश’ ने भारत में लगभग 10 लाख रुपये की शुरुआती कमाई की और 28वें दिन तक 62 करोड़ रुपये से अधिक की नेट कमाई कर ली। फिल्म निर्माताओं का मानना है कि लोगों के बीच फिल्म की अच्छी चर्चा (वर्ड ऑफ माउथ) के कारण ही यह फिल्म इतने लंबे समय तक सिनेमाघरों में चल पाई।
Janmashtami Laddu Gopal Puja Vidhi: भगवान विष्णु के सभी अवतारों में कृष्णावतार सबसे लोकप्रिय और मोहक माना जाता है। यही वजह है कि भगवान के इस अवतार के जन्मोत्सव का पर्व भी अत्यंत उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को श्रीकृष्ण ने देवकी और वासुदेव के आठवें पुत्र के रूप में जन्म लिया था। माना जाता है कि श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इसलिए भगवान के भक्त हर साल भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाते हैं। इस साल जन्माष्टमी का पर्व कल यानी 4 सितंबर को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान कृष्ण के बाल रूप लड्डू गोपाल का श्रृंगार किया जाता है और निशिता काल में विशेष पूजा की जाती है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर निशिता काल में लड्डू गोपाल के जन्म, अभिषेक और श्रृंगार की प्रामाणिक पूजा विधि निम्न प्रकार है:
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारी
पूजा स्थान : चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर फूलों व मोर पंख से झूला या आसन सजाएं।
सामग्री : पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल), खीरा (डंठल व पत्ती वाला), नए वस्त्र, आभूषण, चंदन, अक्षत, तुलसी दल, माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी और आरती की थाली तैयार रखें।
जन्मोत्सव और खीरा चीरने की विधि
- मध्यरात्रि में खीरे के ऊपरी हिस्से को सिक्के या चाकू से काटकर बाल गोपाल का ‘नाल छेदन’ (जन्म का प्रतीक) करें।
- ‘नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों के साथ शंख और घंटी बजाकर कान्हा के प्राकट्य का स्वागत करें।
पंचामृत और शुद्ध जल से अभिषेक
- लड्डू गोपाल को एक बड़े पात्र (परात) में विराजमान करें।
- सबसे पहले गंगाजल अर्पित करें, फिर क्रम से दूध, दही, शुद्ध देसी घी, शहद और शक्कर (या पंचामृत मिश्रण) से “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करते हुए स्नान कराएं।
- अंत में हल्के गुनगुने या साफ जल से इत्र मिलाकर अच्छी तरह स्नान कराएं और साफ तौलिए से पोंछें।
इस तरह करें लड्डू गोपाल का श्रृंगार
- कान्हा को नए सुंदर पीले या रंगीन वस्त्र (पीतांबर) पहनाएं।
- माथे पर चंदन और रोली का तिलक लगाएं तथा अक्षत (चावल) चढ़ाएं।
- मुकुट, वैजयंती माला, बाजूबंद, कड़े, कुंडल और कमरधनी पहनाएं।
- उनके हाथ में बांसुरी सजाएं और मुकुट में मोर पंख अवश्य लगाएं।
भोग और आरती
- कान्हा को प्रिय माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी, ऋतु फल और मिठाइयों का भोग लगाएं।
- प्रत्येक भोग सामग्री में तुलसी दल (तुलसी का पत्ता) जरूर रखें, क्योंकि इसके बिना भगवान भोग स्वीकार नहीं करते।
- कपूर और घी का दीपक जलाकर बाल गोपाल की आरती गाएं।
- पूजा और आरती के बाद लड्डू गोपाल को प्रेमपूर्वक सजाए गए झूले पर विराजमान करें।
- भक्ति भाव से उन्हें झूला झुलाएं, क्षमा प्रार्थना करें और परिवार के सुख-समृद्धि की कामना करते हुए सभी में प्रसाद बांटें।
Bike Taxi Update: केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने प्राइवेट टू-व्हीलर का इस्तेमाल सवारी ढोने यानी बाइक टैक्सी के रूप में करने की वकालत की है। उन्होंने राज्यों से अपील की है कि वे निजी मोटरसाइकिल और स्कूटर मालिकों को यात्रियों को ले जाने की अनुमति दें। गडकरी का तर्क है कि अगर ऐसा हुआ तो ग्रामीण इलाकों में करीब 8 करोड़ लोगों के लिए कमाई के नए मौके पैदा हो सकते हैं। वैसे आपको बता दें कि केंद्र सरकार भले ऐसा चाह ले लेकिन इसक बावजूद यह पूरी तरह से राज्यों पर निर्भर करता है कि वे अपने अधिकार क्षेत्र में बाइक टैक्सी चलाने की इजाजत देते हैं या नहीं।
राज्यों के पास क्यों है अंतिम फैसला?
महाराष्ट्र में सरकार के ‘सुरक्षा’ पायलट प्रोग्राम के शुभारंभ के दौरान नितिन गडकरी ने कहा कि, ‘हमने इसकी अनुमति दे दी है, लेकिन कुछ राज्य ऐसा नहीं कर रहे हैं। ट्रांसपोर्ट स्टेट सब्जेक्ट है। मैं उनसे ऐसा करने का आग्रह करूंगा क्योंकि इससे कई लोगों को आजीविका का साधन मिलेगा।’ Motor Vehicle Aggregator Guidelines, 2025 एक ऐसा फ्रेमवर्क देती है जिससे एग्रीगेटरों को पैसेंजर जर्नी के लिए नॉन-ट्रांसपोर्ट मोटरसाइकिलों का इस्तेमाल करने की अनुमति दे सकते हैं।
क्या आपकी अपनी बाइक बन सकती है टैक्सी?
हर जगह खुद ब खुद किसी प्राइवेट बाइक का इस्तेमाल टैक्सी के रूप में नहीं किया जा सकता है। अलग-अलग राज्यों में इसे लेकर अलग-अलग रूल हैं। इसे कर्नाटक और महाराष्ट्र के हिसाब से समझा जा सकता है। इस साल जनवरी में कर्नाटक हाई कोर्ट ने कहा था कि मोटरसाइकिलों का इस्तेमाल ट्रांसपोर्ट गाड़ियों के रूप में किया जा सकता है और अधिकारियों को पीले रंग की प्लेट रजिस्ट्रेशन और कॉन्ट्रैक्ट पैसेंजर्स कैरियर्स के रूप में काम करने के लिए परमिट मांगने वाले मालिकों के आवेदनों पर विचार करने का निर्देश दिया था। हालांकि राज्य सरकार ने यात्रियों की सुरक्षा, इंश्योरेंस, महिलाओं की सेफ्टी और बाइक टैक्सियों के लिए एक व्यापक फ्रेमवर्क की कमी से जुड़ी चिंताओं का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी।
दूसरी ओर महाराष्ट्र ने 2025 में अपने बाइक-टैक्सी नियमों को नोटिफाइड कर दिया था। इसमें एग्रीगेटर्स, परमिट और ऑपरेटिंग कंडिशन को कवर करने वाले प्रावधान शामिल हैं। इस फ्रेमवर्क में ई-बाइक और स्कूटर भी शामिल हैं।
ट्रैफिक नियमों के लिए ‘नेगेटिव पॉइंट सिस्टम’ और ‘सुरक्षा’ कार्यक्रम
बाइक टैक्सी पर बात करने के साथ ही गडकरी ने भारत के सड़क सुरक्षा नियमों में एक और प्रस्तावित बदलाव की जानकारी दी है। मंत्रालय ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के लिए एक नेगेटिव पॉइंट सिस्टम पेश करने की तैयारी कर रहा है। इस प्रस्तावित सिस्टम के तहत बार-बार नियम तोड़ने वाले ड्राइवरों के नेगेटिव पॉइंट जमा होंगे और दोबारा उल्लंघन करने वालों का ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित या रद्द किया जा सकता है। इस कदम का उद्देश्य जिम्मेदार ड्राइविंग व्यवहार को बढ़ावा देना है।
आपको बता दें कि सुरक्षा नाम के पायलट कार्यक्रम का उद्देश्य राजमार्गों और खनन कार्यों में शामिल ड्राइवरों और श्रमिकों को मुफ्त चिकित्सा जांच, परामर्श देना है। यह पायलट प्रोजेक्ट एनएच 44 पर नागपुर से काम्टी तक 150 किलोमीटर के हिस्से और चंद्रपुर के खनन क्षेत्र को कवर करेगा। इसमें शुरुआती चरण में 10000 लोगों को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है।
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Janmashtami Krishna photo Vastu: हिंदू धर्म में जन्माष्टमी का पर्व विशेष उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान विष्णु ने देवकी और वासुदेव के आठवें पुत्र श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया था। भगवान विष्णु के सभी अवतारों में श्रीकृष्ण अवतार सर्वाधिक प्रिय माना जाता है। भगवान कृष्ण के भक्त भारत ही नहीं दुनिया के कोने-कोने में हैं। इतना ही नहीं, कान्हा के मंदिर भी दुनिया के कई देशों में हैं।
हमारे देश में श्री कृष्ण के जन्म का उत्सव बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। मंदिरों से लेकर घरों में तक श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की रौनक रहती है। लोग उपवास करते हैं, घरों में कृष्ण जन्म और बाल कृष्ण की लीलाओं की झांकियां सजाते हैं। घरों को रोशनी और भगवान कृष्ण की तस्वीरों से सुशोभित करते हैं। माना जाता है कि जन्माष्टमी के मौर पर भगवान कृष्ण की तस्वीर घर में लगाने से सकारात्मकता बढ़ती है, समृद्धि आती है और दरिद्रता दूर होती है। लेकिन भगवान कृष्ण की तस्वीर को सही दिशा में लगाना भी बहुत जरूरी है, अन्यथा यह कंगाली का कारण भी बन सकती है। इसलिए तस्वीर घर में लाने पहले, वास्तु अनुसार उसे लगाने के नियम जानना जरूरी होता है।
कैसी तस्वीर लगानी चाहिए?
वैवाहिक जीवन में खुशहाली के लिए- धार्मिक मान्यता के अनुसार, घर में राधा-कृष्ण की तस्वीर लगाने से वैवाहिक जीवन में खुशियों का आगमन होता है और पति-पत्नी का रिश्ता मजबूत होता है।
संतान प्राप्ति के लिए- अगर आप संतान की प्राप्ति चाहते हैं, तो जन्माष्टमी के दिन घर में बाल गोपाल की तस्वीर लगाएं।
धन-धान्य में वृद्धि के लिए- समृद्धि के लिए भगवान श्रीकृष्ण की गायों के साथ वाली तस्वीर लगाएं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, ऐसी तस्वीर लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिसका शुभ प्रभाव परिवार के सदस्यों पर पड़ता है।
सुख-शांति के लिए- जो लोग घर में सुख, शांति और सकारात्मक संचार चाहते हैं, तो वे लोग घर में श्रीकृष्ण की मुस्कुराती हुई तस्वीर लगाएं। मान्यता है कि प्रभु के इस स्वरूप की तस्वीर लगाने से व्यक्ति को शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं।
तस्वीर लगाने की सही और शुभ दिशा
वास्तु शास्त्र के नियमों के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण की तस्वीर लगाने के लिए उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा को सबसे सर्वोत्तम माना गया है, क्योंकि इस दिशा में ईश्वर और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। इसके अलावा पूर्व या उत्तर दिशा की दीवार भी तस्वीर लगाने के लिए उपयुक्त रहती है। तस्वीर को दीवार पर इतनी ऊंचाई पर लगाएं कि वह देखने वाले की आंखों की सीध में रहे, इसे बहुत ज्यादा ऊपर या बिल्कुल नीचे फर्श के पास न टांगें।
बेडरूम में राधा-कृष्ण की तस्वीर का नियम
बेडरूम में राधा-कृष्ण की तस्वीर लगाने के लिए उत्तर-पश्चिम दिशा की दीवार सबसे बेहतर होती है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि तस्वीर बिल्कुल बिस्तर के सिरहाने या पैरों की तरफ न लगी हो। साथ ही, दर्पण के ठीक सामने तस्वीर लगाने से बचना चाहिए।
इस दिशा में भूलकर भी न लगाएं तस्वीर
वास्तु शास्त्र में दक्षिण दिशा को पितरों की दिशा माना गया है। इसलिए इस दिशा में भगवान श्रीकृष्ण की तस्वीर लगाने से नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न हो सकती है।
यहां भी श्रीकृष्ण की तस्वीर लागने से बचें
इसके अलावा, शौचालय, रसोई के ठीक ऊपर या बहुत निचले स्थानों पर भी ईश्वर का चित्र न लगाएं।

प्रभाकर मणि तिवारी
संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट ने पर्यावरणविदों और मौसम वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण एशिया के मुंबई, कोलकाता और ढाका समेत निचले इलाको में बसे कई शहरों में 1.40 करोड़ लोगों पर निकट भविष्य में विस्थापन का खतरा है। विशेषज्ञों का कहना है कि वर्ष 2024 में समुद्री जलस्तर में रिकार्ड छह मिलीमीटर की वृद्धि ने इस खतरे को कई गुना बढ़ा दिया है। ALSO READ: हिमालय क्षेत्र में भविष्य में भी ग्लेशियर फ्लड आने का गंभीर खतरा
क्या-क्या कहा गया है यूएन की रिपोर्ट में?
संयुक्त राष्ट्र की उप-महासचिव अमीना मोहम्मद ने 55वीं पैसिफिक आइलैंड्स फोरम लीडर्स मीटिंग में सोमवार को यह रिपोर्ट जारी की। संयुक्त राष्ट्र के सहायक महासचिव नवीद हनीफ ने भी न्यूयार्क में पत्रकारों को विस्तार से इसकी जानकारी दी।
रिपोर्ट में विस्थापन के खतरे की समयसीमा के बारे में तो कुछ नहीं कहा गया है। हालांकि इसके मुताबिक, दुनिया भर के करीब 77 करोड़ लोग इस खतरे की चपेट में आ सकते हैं। इसमें कहा गया है कि समुद्र का बढ़ता जलस्तर आगे चल कर खाद्य सुरक्षा, पूर्वजों की जमीन और हमारी पहचान के लिए भी खतरा बन सकता है। ऐसे में सरकारों को इस मुद्दे को अपनी योजना प्रक्रिया का हिस्सा बनाने के लिए एक बहुत ही व्यापक दृष्टिकोण अपनाना होगा।
रिपोर्ट में हिमालय के ग्लेशियरों के पिघलने से बाढ़ और सूखे के बढ़ने की चेतावनी भी दी गई है। इसमें कहा गया है कि ग्लेशियरों की तादाद ज्यादा होने के कारण दक्षिण एशिया दुनिया का 'तीसरा ध्रुव' बन गया है।
अब तक मिले संकेतों से अनुमान लगाए जा रहे हैं कि अगले 15-20 वर्षों में दक्षिण एशिया में ग्लेशियरों के पिघलने के कारण बाढ़ की समस्या गंभीर हो सकती है। उसके बाद पैदा होने वाली सूखे की स्थिति के कारण खेती और खाद्य सुरक्षा पर बेहद प्रतिकूल असर पड़ सकता है। ऐसे बदलाव हिमालयी नदी प्रणाली और खेती पर निर्भर समुदायों को के लिए बड़ा खतरा बनेंगे।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्लेशियरों के पिघलने की प्रक्रिया तेज होती है और पानी गर्म होता है। इसका असर कई स्तरों पर नजर आता है। समुद्र का जलस्तर बढ़ने से शहरी बुनियादी ढांचे, जल प्रणालियों, परिवहन, ऊर्जा ग्रिड, इमारतों और भूजल संसाधनों को पहले ही नुकसान पहुंच रहा है। इसके दूरगामी नतीजे सामने आ रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि समुद्र का जलस्तर बढ़ने का सबसे ज्यादा असर कम ऊंचाई वाले द्वीपीय देशों पर होगा। हालांकि यह उन तक ही सीमित नहीं रहेगा।समुद्र का बढ़ता जलस्तर विकसित और विकासशील, दोनों वर्ग के देशों को प्रभावित कर सकता है। अमेरिका के न्यूयार्क और मियामी के अलावा ग्वांझू जैसे ज्यादा आय वाले शहरों में तटवर्ती इलाके के बुनियादी ढांचे पर भी खतरे की आशंका है। ALSO READ: भारत के विमानन क्षेत्र पर संकट के बादल
एशिया के किन शहरों पर खतरा ज्यादा?
रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया में खासकर भारतीय शहरों कोलकाता और मुंबई के अलावा बांग्लादेश की राजधानी ढाका पर समुद्री जलस्तर में वृद्धि से पैदा होने वाले खतरे गंभीर हैं। दूसरे इलाकों की तुलना में यहां खतरा ज्यादा होने की क्या वजह है?
पर्यावरणविदों का कहना है कि इन शहरों में समुद्री जमीन पर तेजी से बुनियादी ढांचे के साथ ही इंसानी बस्तियां बसाई जा रही हैं। लगातार बढ़ती आबादी के कारण जमीन की कमी हो रही है। ऐसे में टाउन प्लानरों के सामने समुद्री जमीन हासिल करने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं है।
उनके मुताबिक, सबसे ज्यादा खतरा इन शहरों के उन तटीय इलाकों में हैं जहां बीते 15-20 साल में समुद्री जमीन पर बड़े पैमाने पर बस्तियां बसाई गई हैं।
कोलकाता के जादवपुर विश्वविद्यालय में सामुद्रिक विज्ञान संस्थान के प्रमुख डा। सुगत हाजरा डीडब्ल्यू से कहते हैं, “समुद्री जमीन पर बुनियादी ढांचा और इंसानी बस्तियां बसाने की योजना बनाते समय पर्यावरणया भविष्य में पैदा होने खतरों की अनदेखी की जा रही है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण समुद्री जलस्तर में वृद्धि से पैदा होने वाले खतरे को ध्यान में रखते हुए इससे निपटने के लिए दीर्घकालीन रणनीति बनाने और उस पर अमल करने की जरूरत है।”
हाजरा कहते हैं, “बंगाल के सुंदरबन इलाके में बसे द्वीपों पर बीते कई सालों से ग्लोबल वार्मिंग के कारण होने वाले बदलाव का असर नजर आ रहा है। बंगाल की खाड़ी के बढ़ते जलस्तर के कारण इलाके के कई द्वीप पानी में डूब चुके हैं और कई डूबने की कगार पर हैं। उन इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों पर विस्थापन की तलवार लटक रही है।” ALSO READ: शहरों को ठंडा रखने वाले पेड़ों को भी अब चाहिए सहारा
जादवपुर विश्वविद्यालय में ही जलवायु परिवर्तनकार्यक्रम की प्रमुख जयश्री राय डीडब्ल्यू से कहती हैं, “संयुक्त राष्ट्र पहले से इस खतरे की चेतावनी देता रहा है। अफसोस की बात यह है कि सरकार ने इसे कभी गंभीरता से नहीं लिया है। शायद इस खतरे से बचने की दिशा में ठोस पहल करने से पहले हम सिक्किम, धराली और नेपाल जैसी किसी आपदा का इंतजार कर रहे हैं।”
कोलकाता में मौसम विज्ञानी डा. प्रणवेश कुंडू डीडब्ल्यू से कहते हैं, “संयुक्त राष्ट्र समेत तमाम एजेंसियां समय-समय पर इस खतरे से आगाह करती रही हैं। लेकिन अखबारों में सुर्खियां बनने के बाद लोग इसे भूल जाते हैं।” वो बताते हैं, “वर्ष 2019 में अमेरिका स्थित शोध समूह क्लाइमेट सेंट्रल की रिपोर्ट ने जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान की गंभीर तस्वीर पेश की थी। उसमें में कहा गया था कि वर्ष 2050 तक भारत में बाढ़ और समुद्र का जलस्तर बढ़ने की वजह से 3।60 करोड़ लोग प्रभावित होंगे।”
कुंडू ने यह भी कहा कि रिपोर्ट में सूरत, मुंबई, कोलकाता, केरल, ओडीशा और चेन्नई जैसी तटवर्ती इलाकों पर भी भारी खतरा मंडराने की चेतावनी दी गई थी। लेकिन उसका गंभीरता से संज्ञान तक नहीं लिया गया। अब ताजा रिपोर्ट में भी वही चेतावनी दोहराई गई है।
अमेरिका के मिनियापोलिस में बुधवार दोपहर एक अपार्टमेंट बिल्डिंग में गोलीबारी हुई। इसमें 2 लोगों की मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, गोली चलाने वाला संदिग्ध भी मारा गया है। घटना में 3 पुलिस अधिकारी घायल हुए हैं, जिनमें 2 को गोली लगी है। तीनों अधिकारियों की हालत स्थिर है। पुलिस को स्थानीय समयानुसार बुधवार शाम करीब 4:30 बजे बिल्डिंग में गोली चलने की सूचना मिली थी। इसके करीब 3 मिनट बाद पुलिसकर्मी बिल्डिंग में दाखिल हुए, जहां उन्हें पीड़ित मिले। पुलिस ने गोलियों की आवाज का पीछा करते हुए ऊपरी मंजिल तक पहुंचकर कार्रवाई की। एक की मौके पर मौत, दूसरे ने अस्पताल में दम तोड़ा मिनियापोलिस पुलिस के सार्जेंट गैरेट पार्टेन के मुताबिक, एक पीड़ित की गोली लगने से मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरे ने अस्पताल पहुंचने के बाद दम तोड़ दिया। संदिग्ध की मौत कैसे हुई, यह तुरंत साफ नहीं हो सका। हेनेपिन काउंटी मेडिकल सेंटर ने बताया कि अस्पताल में 7 मरीज लाए गए थे। हालांकि, अस्पताल ने घायलों की स्थिति के बारे में अतिरिक्त जानकारी नहीं दी। पार्टेन ने घटना को बेहद दुखद बताया और मृतकों, घायलों, पुलिस अधिकारियों और उनके परिवारों के प्रति संवेदना जताई। पुलिस को ऊपर की मंजिल से गोलियों की आवाज सुनाई दी पुलिस के मुताबिक, अधिकारी बिल्डिंग में दाखिल होने के बाद गोलियों की आवाज सुनकर ऊपरी मंजिल की ओर गए। वहां धुंध या धुएं जैसी स्थिति के कारण विजिबिलिटी काफी कम थी। घटना के बाद सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में मिनियापोलिस कन्वेंशन सेंटर के पास एक अपार्टमेंट टावर की ओर पुलिसकर्मी राइफल ताने नजर आए। अधिकारियों ने पास के घनी आबादी वाले लॉरिंग पार्क इलाके के लोगों को घटनास्थल से दूर रहने की चेतावनी दी। चश्मदीद ने 8 गोलियों की आवाज सुनी अपार्टमेंट बिल्डिंग में रहने वाले जूलियस बेली ने बताया कि वह बिल्डिंग के बाहर बैठे थे। तभी उन्होंने गोलियों की आवाज सुनी और एक ऐसे व्यक्ति को पिस्टल के साथ देखा, जिसे वह बिल्डिंग के निवासी के तौर पर पहचानते थे। बेली के मुताबिक, उन्होंने एक महिला को चिल्लाते सुना और तुरंत वहां से भाग गए। उन्होंने करीब 8 गोलियों की आवाज गिनी। बेली ने बताया कि वह व्यक्ति पहले भी हथियार दिखाता था। वह जून में इस बिल्डिंग में रहने आए थे और तब से उस व्यक्ति से बचने की कोशिश कर रहे थे। गवर्नर बोले- पुलिस की मदद के लिए राज्य के अधिकारी मौके पर मिनेसोटा के गवर्नर टिम वॉल्ज ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि राज्य के अधिकारी स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों की मदद के लिए मौके पर मौजूद हैं। उन्होंने डाउनटाउन मिनियापोलिस में लोगों की सुरक्षा के लिए काम कर रहे पुलिस और अन्य फर्स्ट रिस्पॉन्डर्स का आभार जताया। FBI डायरेक्टर काश पटेल ने भी कहा कि एजेंसी घटना पर प्रतिक्रिया दे रही है। उन्होंने स्थानीय अधिकारियों की मदद के लिए सभी जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने की बात कही।



