Renting vs Buying: घर खरीदें या किराये पर रहें? जानिए EMI, रेंट रेश्यो और रिटर्न का पूरा गणित

Buying vs Renting Real Estate Guide: बड़े शहरों जैसे मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु या पुणे में घर खरीदना लोगों का सपना होता है। कई लोग इसे ‘इमोशनल ओनरशिप’ से जोड़कर देखते हैं, तो कुछ लोग इसे केवल ‘फाइनेंशियल रिटर्न’ के नजरिए से देखते हैं।

लेकिन क्या मेट्रो शहरों में आज की तारीख में घर खरीदना फायदे का सौदा है, या फिर किराये पर रहकर पैसों को शेयर बाजार या अन्य ऑप्शन में निवेश करना ज्यादा समझदारी है? आइए इसे EMI-to-Rent Ratio, रेंटल यील्ड और रियल-लाइफ कैलकुलेशन से समझते हैं।

किराए पर रहना vs घर खरीदना: गणित क्या कहता है?

इसे समझने के लिए ₹1 करोड़ की कीमत वाले 2BHK फ्लैट का उदाहरण लेते हैं:

सिनेरियो A: अगर आप घर खरीदते हैं

प्रॉपर्टी की कीमत: ₹1 करोड़

डाउन पेमेंट (20%): ₹20 लाख (अपनी बचत से)

होम लोन (80%): ₹80 लाख (8.5% ब्याज दर पर 20 साल के लिए)

मासिक EMI: लगभग ₹69,400 प्रति महीना

अन्य खर्च: मेंटेनेंस, प्रॉपर्टी टैक्स, स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन कॉस्ट (₹6-8 लाख एक्स्ट्रा)।

20 साल में कुल भुगतान: ₹80 लाख के लोन पर आप 20 साल में लगभग ₹86.5 लाख केवल ब्याज देंगे। यानी कुल भुगतान ₹1.66 करोड़ होगा (प्रिंसिपल + इंटरेस्ट)।

सिनेरियो B: अगर आप किराये पर रहते हैं और बाकी पैसा इन्वेस्ट करते हैं

मासिक किराया: भारत के मेट्रो शहरों में औसतन रेंटल यील्ड 2.5% से 3% होती है। यानी ₹1 करोड़ के मकान का मासिक किराया लगभग ₹22,000 से ₹25,000 होगा।

बचत (EMI vs Rent Diff): EMI (₹69,400) और Rent (₹25,000) के बीच का अंतर = ₹44,400 प्रति महीना।

डाउन पेमेंट की बचत: डाउन पेमेंट के ₹20 लाख भी आपके पास निवेश के लिए बचते हैं।

कंपाउंडिंग का जादू: अगर आप ₹20 लाख जो डाउन पेमेंट की बचत से हुआ है उसे म्यूचुअल फंड में 12% सालाना रिटर्न पर 20 साल के लिए इन्वेस्ट करते हैं, तो यह रकम बढ़कर लगभग ₹1.93 करोड़ हो जाती है।

साथ ही अगर आप हर महीने बची हुई ₹44,400 की SIP (12% रिटर्न के साथ) 20 साल तक करते हैं, तो इससे लगभग ₹4.43 करोड़ का फंड तैयार होता है। 20 साल बाद आपकी कुल वेल्थ ₹6.36 करोड़ होगी जो टैक्स और सालाना रेंट हाइक एडजस्ट करने के बाद भी एक बड़ा कॉर्पस आपके पास होगा।

EMI-to-Rent Ratio: क्या कहता है यह फॉर्मूला?

EMI-to-Rent Ratio यह तय करने का एक आसान तरीका है कि आपको घर खरीदना चाहिए या किराये पर रहना चाहिए:

EMI-to-Rent Ratio= मंथली Rent/ मंथली EMI

अनुपात 1 से 1.5 के बीच: अगर आपकी EMI और रेंट लगभग बराबर हैं, तो घर खरीदना ज्यादा बेहतर विकल्प है।

अनुपात 2.5 से अधिक: बड़े शहरों में अक्सर EMI (₹70,000) किराए (₹25,000) से 2.8 गुना अधिक होती है। जब अनुपात इतना ज्यादा हो, तो वित्तीय दृष्टि से किराये पर रहना और सरप्लस पैसे को इन्वेस्ट करना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।

Renting vs Buying: घर खरीदें या किराये पर रहें?

Renting vs Buying: घर खरीदें या किराये पर रहें? जानिए EMI, रेंट रेश्यो और रिटर्न का पूरा गणित

इमोशनल ओनरशिप बनाम फाइनेंशियल प्रैक्टिकैलिटी

भारत में घर सिर्फ एक एसेट नहीं है, बल्कि एक सामाजिक प्रतिष्ठा और मानसिक सुरक्षा से जुड़ा विषय है। ये रहे खुद के घर के फायदे:

  • सुरक्षा का अहसास: आपको कोई मकान मालिक खाली करने को नहीं कह सकता।
  • अपने हिसाब से बदलाव: आप इंटीरियर, रेनोवेशन या बदलाव अपनी पसंद से कर सकते हैं।
  • रिटायरमेंट एसेट: बुढ़ापे में रहने के लिए सिर पर पक्की छत रहती है।

किराये के घर के फायदे

  • जॉब फ्लेक्सिबिलिटी: अगर आपकी नौकरी बेंगलुरु से गुड़गांव शिफ्ट होती है, तो आप बिना किसी परेशानी के मूव कर सकते हैं।
  • बेहतर लोकेशन: जितने किराए में आप किसी प्रीमियम लोकेशन पर रह सकते हैं, उतना महंगा घर खरीदना आपकी क्षमता से बाहर हो सकता है।

आपके लिए क्या सही है?

आपको घर तब खरीदना चाहिए जब आपके पास इनकम का परमानेंट सोर्स हो, आप अगले 10-15 साल उसी शहर में बसना चाहते हैं, आपके पास डाउन पेमेंट का पर्याप्त फंड है, और आपके लिए मानसिक शांति वित्तीय रिटर्न से ज्यादा मायने रखती है।

वहीं आपको किराये पर तब रहना चाहिए जब आपकी उम्र 20-35 साल के बीच है, करियर में ग्रोथ और सिटी चेंज की संभावना है, और आप बचे हुए पैसों (EMI और रेंट के अंतर) को अनुशासित तरीके से शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट कर सकते हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gift Nifty Indicator: क्रूड में उबाल से क्या लाल होगा बाजार या बुल्स भरेगा आज नई उड़ान, जानें गिफ्ट निफ्टी क्या दे रहा है संकेत

Gift Nifty Indicator: बुधवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के तेजी के साथ खुलने की उम्मीद है। GIFT निफ्टी गैप-अप शुरुआत का संकेत दे रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि एशियाई बाज़ार मंगलवार की भारी बिकवाली से उबर गए हैं। US फेडरल रिज़र्व के पॉलिसी फैसले और बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों की कमाई की रिपोर्ट से पहले आई उम्मीद ने ग्लोबल रिस्क सेंटीमेंट को बेहतर बनाया है।

सुबह 8:15 बजे GIFT निफ्टी 245 अंक या 1.02 फीसदी बढ़कर 24,230 पर ट्रेड कर रहा था, जिससे संकेत मिलता है कि निफ्टी 50 मंगलवार की क्लोजिंग 23,985.35 से काफी ऊपर खुल सकता है। यह सकारात्मक संकेत तब आया है जब मंगलवार को भारतीय शेयर बाज़ार में ज़्यादातर सपाट कारोबार हुआ था। सेंसेक्स 69.86 अंक या 0.09 प्रतिशत गिरकर 76,765.92 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 10.60 अंक या 0.04 प्रतिशत गिरकर 23,985.35 पर बंद हुआ। IT, ऑटो और रियल्टी शेयरों में बढ़त के बावजूद एनर्जी, FMCG, मेटल और बैंकिंग शेयरों में कमजोरी के कारण बाज़ार में गिरावट रही।

भारी बिकवाली के बाद एशियाई बाजारों में रिकवरी

पिछले सेशन में भारी नुकसान के बाद बुधवार को एशियाई शेयरों में रिकवरी हुई, क्योंकि निवेशक US फेडरल रिज़र्व के पॉलिसी फ़ैसले और बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों की कमाई का इंतज़ार कर रहे थे।

मंगलवार को 3.6 प्रतिशत गिरने के बाद MSCI का एशिया-पैसिफिक शेयरों (जापान को छोड़कर) का सबसे बड़ा इंडेक्स 0.8 प्रतिशत बढ़ा। दक्षिण कोरिया के कोस्पी में 1 प्रतिशत से ज़्यादा की बढ़त हुई, जबकि जापान के निक्केई में लगभग 1 प्रतिशत की तेज़ी आई। नैस्डैक फ्यूचर्स 0.5 प्रतिशत बढ़े और यूरोपीय फ्यूचर्स ने भी मज़बूत शुरुआत का संकेत दिया।

यह रिकवरी AI से जुड़े खर्च, चिप-सेक्टर के वैल्यूएशन और बढ़ती प्रतिस्पर्धा को लेकर बनी चिंताओं के बावजूद हुई, जिनकी वजह से इस हफ़्ते की शुरुआत में टेक्नोलॉजी शेयरों में भारी बिकवाली हुई थी।

मिडिल ईस्ट में नए तनाव के कारण क्रूड में उछाल

मिडिल ईस्ट में नए तनाव के कारण हाल के दिनों में देखी गई शांति खत्म हो गई और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 3 प्रतिशत बढ़कर $86.80 प्रति बैरल हो गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 3 प्रतिशत से ज़्यादा बढ़कर $81.95 पर पहुंच गया। यह बढ़त तब हुई जब US सेना ने कहा कि ईरान ने कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं जिन्हें सफलतापूर्वक रोक दिया गया। मंगलवार को अमेरिकी बाज़ार मिले-जुले रुख के साथ बंद हुए। एप्पल और दूसरी बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों के नतीजे आने से पहले, सेमीकंडक्टर शेयरों में आई गिरावट की भरपाई डिफेंसिव हैवीवेट शेयरों में हुई बढ़त से हो गई।

S&P 500 में 0.21 प्रतिशत की बढ़त हुई, जबकि डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 1.03 प्रतिशत चढ़ा। नैस्डैक कंपोजिट 0.22 प्रतिशत गिरा क्योंकि निवेशक टेक्नोलॉजी शेयरों को लेकर सतर्क रहे।

उम्मीद है कि फेडरल रिजर्व बुधवार को बाद में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा; बाज़ार में दरों में कोई बदलाव न होने की संभावना 71 प्रतिशत और 25-बेसिस-पॉइंट की बढ़ोतरी की संभावना 29 प्रतिशत मानी जा रही है।

निफ्टी- बैंक निफ्टी पर क्या बनाए रणनीति

HDFC सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट नागराज शेट्टी ने कहा कि सोमवार को आई ज़बरदस्त तेज़ी के बाद, कमज़ोर ग्लोबल मार्केट संकेतों के बीच मंगलवार को निफ्टी 50 कंसोलिडेशन के दौर में चला गया। उन्होंने बताया कि डेली चार्ट पर इंडेक्स ने एक छोटी बुलिश कैंडलस्टिक बनाई है, जिसमें ऊपर की तरफ़ एक छोटी शैडो (upper shadow) है। यह 24,000–24,100 के अहम रेजिस्टेंस ज़ोन के पास उतार-चढ़ाव वाली चाल (choppy price action) का संकेत देता है, जो ‘पोलैरिटी में बदलाव’ (change in polarity) के कॉन्सेप्ट के अनुरूप है।

शेट्टी के अनुसार, जारी कंसोलिडेशन के बावजूद निफ्टी का शॉर्ट-टर्म ट्रेंड पॉज़िटिव बना हुआ है। हालांकि, इंडेक्स के एक अहम ओवरहेड रेजिस्टेंस के पास होने की वजह से, उन्हें उम्मीद है कि 24,100 के लेवल के ऊपर निर्णायक ब्रेकआउट की कोशिश करने से पहले, मार्केट में निकट भविष्य में और कंसोलिडेशन या मामूली पुलबैक देखने को मिल सकता है।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, मजबूत हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Price Today: दो वजहों से और टूटा गोल्ड, 10 शहरों में अब इस भाव पर बिक रहा 24 से 18 कैरट सोना

Gold Rate Today in India: अमेरिका फेड की 29 जुलाई को आने वाली मॉनीटरी पॉलिसी को लेकर निवेशकों की सतर्कता और डॉलर की मजबूती से गोल्ड पर दबाव पड़ा तो इंडस्ट्रियल डिमांड में नरमी ने चांदी पर और दबाव बना दिया। गोल्ड की बात करें तो एक दिन के उछाल के बाद आज लगातार दूसरे दिन इसकी चमक फीकी पड़ी है। इन दो दिनों में राजधानी दिल्ली में 24 कैरट वाला 10 ग्राम गोल्ड ₹1700 और 22 कैरट वाला ₹1560 सस्ता हुआ है। आज की बात करें तो राजधानी दिल्ली में 10 ग्राम का 24 कैरट और 22 कैरट वाला गोल्ड फिलहाल ₹10 नीचे आया है। अब चांदी की बात करें तो आज इसकी भी चमक फीकी हुई है। लगातार दो दिनों की स्थिरता के बाद लगातार दूसरे दिन आज इसके भाव नीचे आए हैं। इन दो दिनो में एक किलो चांदी ₹5100 सस्ती हुई है।

सिटीवाइज गोल्ड के भाव

देश के 10 बड़े शहरों में 18 कैरट, 22 कैरट और 24 कैरट शुद्धता वाले 10 ग्राम सोने की कीमत क्या है, आइए जानते हैं…

शहर24 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव 22 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव 18 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव
दिल्ली ₹1,44,310 ₹1,32,290 ₹1,08,270
मुंबई ₹1,44,160  ₹1,32,140 ₹1,08,120
कोलकाता ₹1,44,160  ₹1,32,140 ₹1,08,120
चेन्नई ं ₹1,44,160  ₹1,32,140 ₹1,08,120
बेंगलुरू ₹1,44,160  ₹1,32,140 ₹1,08,120
हैदराबाद ₹1,44,160  ₹1,32,140 ₹1,08,120
लखनऊ ₹1,44,310 ₹1,32,290 ₹1,08,270
पटना ₹1,44,210 ₹1,32,190 ₹1,08,170
जयपुर ₹1,44,310 ₹1,32,290 ₹1,08,270
अहमदाबाद  ₹1,44,210 ₹1,32,190 ₹1,08,170

दो दिनों की स्थिरता के बाद दूसरे दिन फिसली चांदी

चांदी की बात करें तो दो दिनों की स्थिरता के बाद आज लगातार दूसरे दिन इसके भाव कम हुए हैं। इन दो दिनों में एक किलो चांदी ₹5100 नीचे आई है। इससे पहले दो दिनों की स्थिरता से पहले एक किलो चांदी 25 जून को ₹5 हजार महंगी हुई थी और 24 जुलाई को ₹5 हजार सस्ती हुई । अब आज की बात करें तो दिल्ली में एक किलो चांदी ₹100 सस्ती होकर ₹2,34,900 के भाव में बिक रही है। बाकी अहम महानगरों की बात करें तो मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में भी यह इसी भाव पर बिक रही है।

अब किस पर रहेगी नजर?

जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रणव मेर के मुताबिक अब मार्केट की नजर पश्चिम एशिया के हालात पर रहेगी। इसके अलावा यूरोजोन, जापान और अमेरिका के महंगाई के आंकड़े भी अहम रहेंगे। उन्होंने बताया कि अमेरिका के जीडीपी के आंकड़े आएंगे। कंज्यूमर कॉन्फिडेंस का डेटा भी जारी होगा। साप्ताहिक जॉबलेस क्लेम्स के आंकड़े भी अहम रहेंगे। इसके अलावा, फेडरल रिजर्व, बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ जापान की ब्याज दरों पर होने वाले फैसले भी सोने-चांदी की दिशा तय कर सकते हैं।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Global Market Today: चिप शेयरों में बिकवाली जारी, एशिया बाजारों में गिरावट, कोस्पी 5% से ज्यादा टूटा

Global Market Today: चिप शेयरों में बिकवाली जारी है। Sandisk 14 परसेंट लुढ़का है। Micron, SK Hynix ADR, Seagate, Intel जैसे दिग्गज भी 10 परसेंट तक नीचे फिसले। कल की बड़ी गिरावट के बाद कोरिया का बाजार आज भी दबाव में नजर आ रहा है। US में नैस्डैक में भी प्रेशर दिखा। हालांकि OLD ECONOMY को Reflect करने वाला डाओ जोंस 500 प्वाइंट ऊपर बंद हुआ।

निक्केई करीब 1.30 फीसदी की गिरावट के साथ 61,555.00 के आसपास दिख रहा है। वहीं, स्ट्रेट टाइम्स में 0.27 फीसदी की बढ़त दिखा रहा है। ताइवान का बाजार 1.81 फीसदी गिरकर 40,865.50 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। जबकि हैंगसेंग 1.49 फीसदी की बढ़त के साथ 25,688.00 के स्तर पर नजर आ रहा है। वहीं, कोस्पी में 5.11 फीसदी की गिरावट के साथ कारोबार हो रहा है। वहीं शंघाई कम्पोजिट 0.75 फीसदी की गिरावट के साथ 3,784.70 के स्तर पर दिख रहा है।

वॉल स्ट्रीट

मंगलवार रात अमेरिकी स्टॉक इंडेक्स फ्यूचर्स में सुस्ती रही, जबकि ईरान के हमले को अमेरिकी सेना द्वारा रोके जाने के बाद तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई।S&P 500 फ्यूचर्स में कोई खास बदलाव नहीं हुआ, नैस्डैक 100 फ्यूचर्स सपाट स्तर के आसपास रहे और डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज फ्यूचर्स 38 अंक या लगभग 0.1% नीचे आए।

मंगलवार के रेगुलर सेशन के दौरान, डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 500 अंकों से ज़्यादा की रैली देखी गई, क्योंकि निवेशकों ने आने वाले फैसले से पहले अपनी स्थिति मज़बूत की। तेल की कीमतों में हालिया गिरावट के कारण इस ब्लू-चिप इंडेक्स में लगातार तीसरे दिन बढ़त दर्ज की गई। वहीं, सेमीकंडक्टर शेयरों में कमजोरी के कारण नैस्डैक कम्पोजिट लगातार पांचवें सेशन में गिरावट के साथ बंद हुआ।

क्रूड में तेजी

बुधवार, 29 जुलाई को तेल की कीमतों में 3% से ज़्यादा की रिकवरी हुई। पिछले सेशन में हुई भारी गिरावट के बाद यह सुधार हुआ, जब अमेरिका और ईरान ने तनावपूर्ण गतिविधियों को रोक दिया था। अमेरिकी कच्चे तेल के भंडार में उम्मीद से ज़्यादा कमी आने से भी इस रिकवरी को बल मिला।

पिछले तीन सेशन में 14% से ज़्यादा गिरने के बाद ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स $2.71 या 3.2% बढ़कर $86.80 प्रति बैरल हो गया। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड $2.26 या 3.4% बढ़कर $81.95 प्रति बैरल पर पहुंच गया। US-Iran युद्ध

X पर एक पोस्ट के अनुसार, अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने मध्य पूर्व में अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने के लिए ईरान द्वारा किए गए “अचानक हमले की कोशिश” को सफलतापूर्वक रोक दिया।

इस बीच, इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया ने लगातार दूसरे दिन सऊदी अरब के पूर्वी क्षेत्र में तेल सुविधाओं पर ड्रोन से हमला किया, जिससे देश पर दबाव बढ़ गया। सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसने मंगलवार को हमले को रोक दिया, लेकिन यह नहीं बताया कि क्या किसी सुविधा को नुकसान पहुंचा है। सरकारी IRIB न्यूज़ के अनुसार, ईरान ने इस घटना में किसी भी तरह की भागीदारी से इनकार किया।

US Fed की बैठक

निवेशकों की नजर US फेडरल रिज़र्व के ब्याज दरों पर आने वाले फ़ैसले और बुधवार, 29 जुलाई को होने वाली चेयरमैन केविन वॉर्श की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर भी है।CME के ​​FedWatch टूल के अनुसार, Fed फंड्स फ़्यूचर्स से संकेत मिलता है कि लगभग 70% संभावना है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को मौजूदा 3.5% से 3.75% की टारगेट रेंज में ही बनाए रखेगा।

आज सोने की कीमत

दिन में बाद में आने वाले फ़ेडरल रिज़र्व के ब्याज दर के फ़ैसले से पहले बुधवार को सोने की कीमतों में गिरावट आई।

पिछले सेशन में 1.1% की गिरावट के बाद शुरुआती कारोबार में सोना $4,020 प्रति औंस के आसपास ट्रेड कर रहा था। इंटरेस्ट-रेट स्वैप से संकेत मिलता है कि Fed द्वारा 25-बेसिस-पॉइंट की दर बढ़ोतरी की संभावना लगभग तीन में से एक है, जो पॉलिसी की घोषणा से पहले अनिश्चितता के असामान्य रूप से उच्च स्तर को उजागर करता है। आम तौर पर ऊंची ब्याज दरें सोने पर दबाव डालती हैं, क्योंकि इस कीमती धातु से कोई ब्याज आय नहीं होती।

पांच महीने पहले US-Iran संघर्ष शुरू होने के बाद से सोने में लगभग 25% की गिरावट आई है, क्योंकि ऊर्जा की ऊंची कीमतों ने महंगाई की चिंताओं को बढ़ा दिया है। भारी गिरावट के बावजूद, निवेशकों की ओर से मज़बूत ‘डिप-बाइंग’ (कीमत गिरने पर खरीदारी) के कारण यह धातु जून के आखिर से $4,000 प्रति औंस के अहम सपोर्ट लेवल से ऊपर बनी हुई है।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, मजबूत हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

NPS Pension Calculation: NPS से रिटायरमेंट पर कितनी पेंशन मिलेगी? उम्र और निवेश के हिसाब से समझिए पूरा कैलकुलेशन

NPS Pension Calculation: रिटायरमेंट के बाद हर महीने नियमित आमदनी हो, ये हर नौकरीपेशा और निवेशक की सबसे बड़ी चिंता होती है। इसी जरूरत को पूरा करने के लिए नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) बनाया गया है। इसमें आप नौकरी के दौरान थोड़ा-थोड़ा निवेश करते हैं। रिटायरमेंट के समय एक हिस्सा एकमुश्त मिलता है। बाकी रकम से एन्युटी (Annuity) खरीदी जाती है, जिससे हर महीने पेंशन मिलती है।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि अगर हर महीने 2,000, 5,000 या 10,000 रुपये जमा करें, तो रिटायरमेंट के बाद कितनी पेंशन मिल सकती है? आइए आसान कैलकुलेशन से समझते हैं।

NPS में रिटायरमेंट पर पैसा कैसे मिलता है?

NPS में 60 साल की उम्र पर रिटायरमेंट के समय निकासी के अलग-अलग विकल्प उपलब्ध हैं। हमने यह कैलकुलेशन 60% रकम एकमुश्त निकालने और 40% रकम से एन्युटी खरीदने के मॉडल के आधार पर किया गया है। इसी एन्युटी से हर महीने पेंशन मिलती है।

हमने कैलकुलेशन के लिए NPS पर 10% सालाना औसत रिटर्न और एन्युटी पर 7% सालाना रिटर्न का अनुमान लिया है। हालांकि, NPS एक मार्केट-लिंक्ड स्कीम है। इसमें कोई तय ब्याज दर या गारंटीड रिटर्न नहीं मिलता। यानी असव रिटर्न शेयर बाजार के प्रदर्शन के हिसाब से कम या ज्यादा हो सकता है।

अगर 25 साल की उम्र से निवेश शुरू करें

25 साल की उम्र में निवेश शुरू करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि निवेश के लिए लंबा समय मिलता है। इससे कंपाउंडिंग को अपना असर दिखाने का पूरा मौका मिलता है। यही वजह है कि कम मासिक निवेश से भी बड़ा रिटायरमेंट फंड और बेहतर मासिक पेंशन बनाई जा सकती है।

मासिक निवेश60 साल पर अनुमानित कॉर्पस60% एकमुश्त40% एन्युटी
अनुमानित मासिक पेंशन

₹2,000₹76 लाख₹45.6 लाख₹30.4 लाख₹17,700
₹5,000₹1.90 करोड़₹1.14 करोड़₹76 लाख₹44,300
₹10,000₹3.80 करोड़₹2.28 करोड़₹1.52 करोड़₹88,700

अगर 30 साल की उम्र से निवेश शुरू करें

30 साल की उम्र में भी NPS की शुरुआत करने पर अच्छा रिटायरमेंट फंड बनाया जा सकता है। हालांकि, 25 साल की तुलना में निवेश के लिए पांच साल कम मिलते हैं। इसका असर अंतिम कॉर्पस और रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन पर साफ दिखाई देता है।

मासिक निवेश60 साल पर अनुमानित कॉर्पस60% एकमुश्त40% एन्युटी
अनुमानित मासिक पेंशन

₹2,000₹45 लाख₹27 लाख₹18 लाख₹10,500
₹5,000₹1.13 करोड़₹67.8 लाख₹45.2 लाख₹26,300
₹10,000₹2.26 करोड़₹1.36 करोड़₹90.4 लाख₹52,700

अगर 35 साल की उम्र से निवेश शुरू करें

35 साल की उम्र में निवेश शुरू करने पर भी अच्छा रिटायरमेंट फंड बनाया जा सकता है। लेकिन रिटायरमेंट तक निवेश के लिए सिर्फ 25 साल बचते हैं। इसलिए समान मासिक निवेश के बावजूद कॉर्पस और पेंशन, कम उम्र में निवेश शुरू करने वालों की तुलना में काफी कम हो जाते हैं।

मासिक निवेश60 साल पर अनुमानित कॉर्पस60% एकमुश्त40% एन्युटी
अनुमानित मासिक पेंशन

₹2,000₹26 लाख₹15.6 लाख₹10.4 लाख₹6,100
₹5,000₹65 लाख₹39 लाख₹26 लाख₹15,200
₹10,000₹1.30 करोड़₹78 लाख₹52 लाख₹30,300

उदाहरण से समझिए

मान लीजिए आपकी उम्र 30 साल है और आप हर महीने 5,000 रुपये NPS में जमा करते हैं। अगर अगले 30 साल तक औसतन 10% सालाना रिटर्न मिलता है, तो रिटायरमेंट तक आपका फंड करीब 1.13 करोड़ रुपये हो सकता है।

इसमें से करीब 67.8 लाख रुपये आप एकमुश्त निकाल सकते हैं। बाकी 45.2 लाख रुपये से एन्युटी खरीदनी होगी। अगर एन्युटी पर 7% सालाना रिटर्न मिलता है, तो आपको करीब 26,300 रुपये महीने पेंशन मिल सकती है।

उम्र का कितना असर पड़ता है?

NPS में सबसे बड़ा फायदा कंपाउंडिंग का है। जितनी जल्दी निवेश शुरू करेंगे, उतना बड़ा रिटायरमेंट फंड तैयार होगा।

उदाहरण के लिए, अगर कोई व्यक्ति 25 साल की उम्र से हर महीने 5,000 रुपये निवेश करता है, तो उसकी अनुमानित मासिक पेंशन करीब 44,300 रुपये हो सकती है। वहीं, अगर यही निवेश 35 साल की उम्र से शुरू किया जाए, तो पेंशन घटकर करीब 15,200 रुपये रह सकती है। यानी सिर्फ 10 साल की देरी से रिटायरमेंट फंड और पेंशन, दोनों में बड़ा अंतर आ सकता है।

NPS में कौन निवेश कर सकता है?

नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में 18 से 70 साल तक का कोई भी भारतीय नागरिक निवेश कर सकता है। इसमें सरकारी और प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारी, स्वरोजगार करने वाले, कारोबारी और फ्रीलांसर भी शामिल हैं। अगर आप केंद्रीय कर्मचारी हैं, तो सरकार भी आपके NPS खाते में योगदान करती है।

वहीं, प्राइवेट सेक्टर में सरकार कोई योगदान नहीं देती। हालांकि, अगर कंपनी चाहे तो वह भी अपने कर्मचारियों के NPS खाते में योगदान कर सकती है। निवेशक अपनी सुविधा के हिसाब से हर महीने, तिमाही या सालाना निवेश कर सकते हैं।

EPF: इंटरेस्ट का पैसा आपके ईपीएफ अकाउंट में नहीं आया है? जानिए क्या है वजह

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

EPF: इंटरेस्ट का पैसा आपके ईपीएफ अकाउंट में नहीं आया है? जानिए क्या है वजह

ईपीएफओ ने सब्सक्राइबर्स के अकाउंट में इंटरेस्ट का पैसा भेजना शुरू कर दिया है। यह पैसा वित्त वर्ष 2025-26 का है। सरकार ने इससे पहले ईपीएफओ के सब्सक्राइबर्स के ईपीएफ अकाउंट में जमा पैसे पर 8.25 फीसदी इंटरेस्ट देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसका फायदा ईपीएफओ के करोड़ों सब्सक्राइबर्स को मिलेगा।

कई सब्सक्राइबर्स को अभी मैसेज नहीं आया है

एंप्लॉयीज प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (EPFO) ने एक हफ्ते से ज्यादा पहले इंटरेस्ट का पैसा ट्रांसफर करना शुरू किया था। सब्सक्राइबर्स को इसकी जानकारी एसएमएस के जरिए मिल रही है। कई सब्सक्राइबर्स को इंटरेस्ट ट्रांसफर के मैसेज आ चुके हैं। कई सब्सक्राइबर्स को अभी इंटरेस्ट ट्रांसफर के एसएमएस नहीं आए हैं।

ईपीएफओ सब्सक्राइबर्स को बैचेज में ट्रांसफर कर रहा

जिन सब्सक्राइबर्स को इंटरेस्ट ट्रांसफर के एसएमएस नहीं आए हैं, वे चिंतित हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसे सब्सक्राइबर्स को परेशान होने की जरूरत नहीं है। इसकी वजह यह है कि ईपीएफओ एक बार सभी सब्सक्राइबर्स के अकाउंट के पैसे ट्रांसफर करने की जगह चरणों में इंटरेस्ट का पैसा ट्रांसफर कर रहा है।

जल्द बाकी सब्सक्राइबर्स को भी पैसे ट्रांसफर हो जाएंगे

अलग-अलग बैच में पैसे ट्रांसफर होने से कई सब्सक्राइबर्स के अकाउंट में पैसे आने में समय लग सकता है। जिन सब्सक्राइबर्स के अकाउंट में इंटरेस्ट का पैसा नहीं आया है, उन्हें इंतजार करना होगा। जल्द उन्हें इसका एसएमएस मिल जाएगा। कई सब्सक्राइबर्स ने अब तक एसएमएस नहीं मिलने की जानकारी दी है।

ईपीएफओ के पोर्टल से शिकायत की जा सकती है

गुरुग्राम के सीए अभिषेक अनेजा ने कहा, “यदि किसी सदस्य के ईपीएफ खाते में ब्याज अभी तक दिखाई नहीं दे रहा है, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। अपना ईपीएफ पासबुक, यूएएन, केवाईसी और नियोक्ता द्वारा किए गए अंशदान की स्थिति की जांच करें। यदि इसके बाद भी ब्याज अपडेट नहीं होता है, तो ईपीएफओ के ऑनलाइन शिकायत निवारण पोर्टल या क्षेत्रीय कार्यालय के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।”

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पूरे वित्त वर्ष के इंटरेस्ट का पैसा एक बार में होता है ट्रांसफर 

ईपीएफओ सब्सक्राइबर्स के ईपीएफ अकाउंट में जमा पैसे पर पूरे वित्त वर्ष का इंटरेस्ट ट्रांसफर करता है। इस साल ईपीएफओ ने पिछले साल के मुकाबले जल्द इंटरेस्ट का पैसा ट्रांसफर करना शुरू किया है। जिन सब्सक्राइबर्स के अकाउंट में अभी इंटरेस्ट क्रेडिट नहीं हुआ है, उन्हें इंतजार करना चाहिए। इंतजार के बाद भी पैसा नहीं आने पर इसकी शिकायत ईपीएफओ की वेबसाइट के जरिए की जा सकती है।

IT Stocks: दो दिन में आईटी इंडेक्स 6% चढ़ा, क्या TCS, इंफोसिस जैसी कंपनियों का बुरा दौर खत्म? जानिए एक्सपर्ट्स से

IT Stocks: मंगलवार, 28 जुलाई को एशियाई टेक शेयरों में भारी बिकवाली के बीच निफ्टी IT इंडेक्स करीब 3% चढ़ गया। ग्लोबल मार्केट में AI पर होने वाले भारी निवेश और उससे मिलने वाले रिटर्न को लेकर चिंता बढ़ी है। इसका असर दक्षिण कोरिया, ताइवान और जापान की टेक कंपनियों पर दिखा। हालांकि, भारतीय IT कंपनियां इस दबाव से काफी हद तक बची रहीं, क्योंकि यहां AI पर फोकस करने वाली कंपनियां बहुत कम हैं।

पिछले दो कारोबारी सत्रों में निफ्टी IT इंडेक्स करीब 6% चढ़ चुका है। इसकी एक बड़ी वजह Jefferies की रिपोर्ट रही, जिसमें ब्रोकरेज ने सेक्टर की रेटिंग ‘Underweight’ से बढ़ाकर ‘Neutral’ कर दी। यह तेजी अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले आई है। बाजार को उम्मीद है कि फेड इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा।

भारतीय IT सेक्टर कैसे बचा?

Nexedge Capital के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर गौरव कुलश्रेष्ठ का कहना है कि दुनियाभर में AI को लेकर जो उत्साह ठंडा पड़ा है, उससे भारतीय IT सेक्टर को संभलने का मौका मिला है। हालांकि, उनका मानना है कि बड़ी IT कंपनियों के लिए चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। जब तक वैश्विक स्तर पर टेक्नोलॉजी पर खर्च नहीं बढ़ता, तब तक सेक्टर में लंबी तेजी आना मुश्किल है।

Share.Market by PhonePe के मार्केट एनालिस्ट मयंक जैन के मुताबिक, भारतीय IT कंपनियों का बिजनेस मॉडल एसेट-लाइट है। इन्हें AI डेटा सेंटर या चिप बनाने वाली कंपनियों की तरह अरबों डॉलर का पूंजीगत निवेश नहीं करना पड़ता। यही वजह है कि AI निवेश को लेकर बढ़ी चिंताओं का असर भारतीय IT कंपनियों पर कम पड़ा।

उनका कहना है कि पिछले कई महीनों की गिरावट के बाद IT शेयर आकर्षक वैल्यूएशन पर पहुंच गए थे। ऐसे में घरेलू और विदेशी संस्थागत निवेशकों ने एशियाई हार्डवेयर कंपनियों से पैसा निकालकर भारतीय IT शेयरों में लगाया।

निफ्टी IT इंडेक्स का टेक्निकल आउटलुक

मयंक जैन के मुताबिक, निफ्टी IT इंडेक्स हालिया कारोबारी सत्र में 3.5% से ज्यादा चढ़कर 30,500 के करीब बंद हुआ। कई महीनों की गिरावट के बाद इसमें मजबूत रिकवरी देखने को मिली। इस तेजी के दौरान ट्रेडिंग वॉल्यूम भी बढ़ा। इससे पता चलता है कि निचले स्तरों पर अच्छी खरीदारी और शॉर्ट कवरिंग हुई।

टेक्निकल चार्ट पर इंडेक्स ने अपने 20-डे और 50-डे EMA के ऊपर वापसी कर ली है। 28,600-28,700 का स्तर अब मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है। हालांकि, इंडेक्स अभी भी 200-डे EMA यानी करीब 31,800 के नीचे कारोबार कर रहा है। मयंक जैन का कहना है कि 31,800-32,000 का दायरा सबसे बड़ा रेजिस्टेंस है। इस स्तर के ऊपर टिकने पर ही लंबी अवधि की तेजी की पुष्टि होगी। फिलहाल रिकवरी के संकेत मजबूत हैं, लेकिन उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

TCS

जैन के मुताबिक, TCS का शेयर फिलहाल अपने 20 DMA और 50 DMA के ऊपर कारोबार कर रहा है। इससे शॉर्ट टर्म में मजबूती के संकेत मिलते हैं। हालांकि, शेयर अभी भी 200 DMA से नीचे है। उनका कहना है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मजबूत डिविडेंड और बेहतर वैल्यूएशन इसे आकर्षक बनाते हैं। वहीं, ट्रेडर्स को 200 DMA के ऊपर मजबूत ब्रेकआउट का इंतजार करना चाहिए।

Infosys

मयंक जैन का कहना है कि Infosys का शेयर 20 DMA के ऊपर लौट आया है, लेकिन अभी भी 50 DMA और 200 DMA से नीचे है। कंपनी की मजबूत कैश फ्लो, 4.3% डिविडेंड यील्ड और आकर्षक वैल्यूएशन इसे डिफेंसिव स्टॉक बनाते हैं। हालांकि, शेयर में बड़ी तेजी तभी आ सकती है, जब कंपनी की ग्रोथ गाइडेंस और बिजनेस आउटलुक बेहतर हो।

HCL Technologies

जैन के हिसाब से बड़े IT शेयरों में HCL Technologies का टेक्निकल सेटअप सबसे मजबूत दिख रहा है। शेयर 20 DMA और 50 DMA के ऊपर बना हुआ है और अब 200 DMA के पास अहम रेजिस्टेंस का सामना कर रहा है। अगर शेयर अच्छे वॉल्यूम के साथ इस स्तर को पार कर लेता है, तो इसमें और तेजी देखने को मिल सकती है।

Tech Mahindra

मयंक जैन के मुताबिक, Tech Mahindra भी 20 DMA और 50 DMA के ऊपर कारोबार कर रहा है। इससे शेयर में रिकवरी के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि, 1,700 रुपये के आसपास मौजूद 200 DMA अभी बड़ा रेजिस्टेंस बना हुआ है। उनका मानना है कि इस स्तर तक आने वाली छोटी गिरावटें, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अच्छा खरीदारी का मौका हो सकती हैं।

आगे किन बातों पर रहेगी नजर?

मयंक जैन का कहना है कि आने वाले समय में भारतीय IT सेक्टर की चाल काफी हद तक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर निर्भर करेगी। अगर अमेरिका में ब्याज दरें कम होती हैं, तो बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर की कंपनियां टेक्नोलॉजी पर खर्च बढ़ा सकती हैं। इससे भारतीय IT कंपनियों को नए ऑर्डर मिलने की संभावना बढ़ेगी।

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1 अगस्त को आ रहा पोर्टल, महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये देने वाली दिल्ली लक्ष्मी योजना की पूरी टाइमलाइन

Lakshmi Yojana scheme: दिल्ली सरकार ने मंगलवार को महिलाओं को वित्तीय सहायता देने वाली अपनी महत्वाकांक्षी दिल्ली लक्ष्मी योजना को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस योजना को हरी झंडी दिखाई गई। इसके तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। सरकार इस योजना का पोर्टल 1 अगस्त को लॉन्च करने जा रही है और रक्षाबंधन तक पहली किस्त जारी करने की तैयारी में है।

दिल्ली लक्ष्मी योजना की पूरी टाइमलाइन

28 जुलाई 2026: दिल्ली कैबिनेट और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा योजना को मंजूरी।

1 अगस्त 2026: योजना के लिए समर्पित आधिकारिक पोर्टल लॉन्च किया जाएगा, जहां आवेदन स्वीकार किए जाएंगे।

आवेदन व सत्यापन: पोर्टल लॉन्च होने के बाद प्राप्त आवेदनों का वेरिफिकेशन किया जाएगा।

रक्षाबंधन: सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सरकार को उम्मीद है कि रक्षाबंधन तक लाभार्थियों के खातों में योजना की पहली किस्त जारी कर दी जाएगी।

2500 रुपये का गणित: कैसे मिलेंगे पैसे?

प्रस्तावित नियमों के मुताबिक इस योजना के तहत मिलने वाले 2500 रुपये को दो हिस्सों में बांटा गया है। हर महीने 1000 रुपये महिलाओं को खाते में सीधे ट्रांसफर किए जाएंगे। बाकी बचे 1500 रुपये हर महीने एक रिकरिंग डिपॉजिट (RD) खाते में जमा किए जाएंगे।

3 साल का लॉक-इन पीरियड

आरडी खाते में जमा होने वाले 1500 रुपये 3 सालों के लिए लॉक रहेंगे। 3 साल का समय पूरा होने के बाद, जमा हुआ पूरा पैसा और उस पर मिला ब्याज सीधे महिला के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिया जाएगा। महिलाओं में बचत को बढ़ावा देने और उनके लिए फाइनेंशियल सिक्यॉरिटी तैयार करने के उद्देश्य से इस सेविंग्स कंपोनेंट को जोड़ा गया है।

इस योजना के लिए क्या हैं पात्रता के नियम?

योजना का लाभ सिर्फ उन्हीं महिलाओं को मिलेगा जो यहां नीचे दी गई पात्रताओं को पूरा करती हैं-

  • दिल्ली की 10 साल की निवासी: आवेदक को कम से कम 10 वर्षों से दिल्ली का निवासी होना अनिवार्य है।
  • उम्र सीमा: परिवार की 21 से 60 वर्ष की आयु के बीच की महिलाएं ही पात्र होंगी।
  • परिवार से सिर्फ एक महिला: हर परिवार से सिर्फ एक महिला को लाभ मिलेगा। अगर किसी परिवार में एक से अधिक पात्र महिलाएं हैं, तो परिवार की सबसे बड़ी महिला को प्राथमिकता दी जाएगी।
  • आय सीमा: परिवार की कुल वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम होनी चाहिए।
  • कोई पेंशन न मिलती हो: आवेदक को पहले से कोई अन्य सरकारी पेंशन न मिल रही हो।
  • कोई आपराधिक रिकॉर्ड न हो: आवेदक का स्वयं का कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए।

कौन-कौन सी महिलाएं होंगी योजना से बाहर?

  1. सरकारी कर्मचारी।
  2. इनकम टैक्स पेयर्स (करदाता)।
  3. पेंशनर्स (पेंशन पाने वाली महिलाएं)।
  4. जिन महिलाओं या उनके परिवार के पास चार पहिया वाहन है।
  5. जिन महिलाओं के परिवार में किसी भी सदस्य का आपराधिक रिकॉर्ड है।

योजना के लिए जरूरी डॉक्युमेंट्स

आवेदकों को अपनी पात्रता साबित करने के लिए नीचे दिए गए दस्तावेज जमा करने होंगे:

  • आधार कार्ड
  • वोटर आईडी कार्ड
  • परिवार के सदस्यों के दस्तावेज
  • सेल्फ-डिक्लेरेशन (Self-Declaration): इसमें आवेदक को यह शपथ पत्र देना होगा कि वे कम से कम 10 सालों से दिल्ली में रह रही हैं और उनके या उनके परिवार पर कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं है।

5110 करोड़ रुपये का बजट आवंटन

दिल्ली सरकार ने ‘दिल्ली लक्ष्मी योजना’ के सुचारू क्रियान्वयन और संचालन के लिए लगभग 5110 करोड़ रुपये का बड़ा बजट निर्धारित किया है।

Sell-off in chip stocks : चिप शेयरों में उधार लेकर की गई खरीदारी दक्षिण कोरिया पर पड़ रही भारी, जानिए भारत के लिए है कितना बड़ा खतरा

Sell-off in chip stocks : अमेरिका में चिप शेयरों में बिकवाली दक्षिण कोरिया पर भारी पड़ रही है। कॉस्पी में आज करीब 11% की भारी गिरावट दिख रही है। इस बिकवाली का एक बड़ा कारण कोस्पी में बढ़ती मार्जिन पोजिशन भी है। जब बाजार में बिकवाली बढ़ती है तो मार्जिन ट्रिगर होते हैं और ब्रोकर्स सौदे काट देते हैं। मार्जिन ट्रेडिंग की समस्या सिर्फ कोस्पी की नहीं,पूरी दुनिया में है। अमेरिका,चीन के साथ साथ भारत में भी मार्जिन पोजिशन रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई है। ये भारत और दुनिया भर के बाजारों के लिए कितनी बड़ी चुनौती है,इस पर खास चर्चा के लिए हमारे साथ हैं स्टॉकएज (Stockedge) के को-फाउंडर विवेक बजाज। लेकिन इसके पहले जान लेते हैं कि दुनिया के बड़े बाजारों में क्या है मार्जिन पोजिशन (लेवरेज पोजिशन) की स्थिति।

रिकॉर्ड स्तर पर लेवरेज पोजिशन

अमेरिका में लेवरेज पोजिशन 1.53 लाख करोड़ डॉलर पर है। वहीं, चीन में यह 3 लाख करोड़ यूआन, दक्षिण कोरिया में 39 अरब डॉलर और भारत में 1.38 लाख करोड़ रुपए पर है। भारत में MTF पोजिशन की बात करें तो यह FY23 में 0.25 लाख करोड़ रुपए,FY24 में 0.47 लाख करोड़ रुपए, FY 25 में 0.72 लाख करोड़ रुपए। सितंबर 2025 में 1 लाख करोड़ रुपए, दिसंबर 2025 में 1.16 लाख करोड़ रुपए और जुलाई 2026 में 1.38 लाख करोड़ रुपए थी।

मार्केट कैप में MTF पोजिशन का हिस्सा

मार्केट कैप में MTF पोजिशन के हिस्से की बात करें तो चीन में यह कुल मार्केट कैप का 2.4%, अमेरिका में कुल मार्केट कैप का 2%, दक्षिण कोरिया में कुल मार्केट कैप का 0.8% और भारत में कुल मार्केट कैप का 0.34% है।

कोस्पी की गिरावट का लेवरेज कनेक्शन

27 मई को कोरिया में सिंगल स्टॉक लेवरेज ETF लॉन्च किया गया। इस ETF में सिर्फ सैमसंग और SK Hynix शामिल हैं। AI चिप रैली में रिटेल ने अंधाधुंध पैसा लगाया। इसमें कुछ ही हफ्तों में 9.48 अरब डॉलर की खरीदारी हुई। इस ETF के 92 फीसदी होल्डर रिटेल निवेशक हैं। मई के अंत तक रिटेल मार्जिन लोन 39 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

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कोस्पी: मार्जिन कॉल और फोर्स सेलिंग

कोस्पी में सैमसंग और SK Hynix की हिस्सेदारी 50% से ज्यादा है। सैमसंग और SK Hynix में सबसे ज्यादा लेवरेज पोजिशन है। चिप शेयरों में बिकवाली से सैमसंग और SK Hynix में तेज बिकवाली आई। एक महीने में सैमसंग 38% और SK Hynix 42% टूट गया। तेज बिकवाली से ब्रोकर्स ने मार्जिन पोजिशन काटी।

मार्जिन ट्रेडिंग भारत के लिए चुनौती?

भारत में भी मार्जिन ट्रेडिंग या MTF तेजी से बढ़ रही है। 27 जुलाई को MTF 1.38 लाख करोड़ रुपए के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए। हालांकि कुल मार्केट कैप में MTF का हिस्सा 0.34% ही है।

एक्सपर्ट की राय

स्टॉकएज (Stockedge) के को-फाउंडर विवेक बजाज ने कहा कि सालों से मार्जिन ट्रेडिंग चलती आ रही है। यह अमेरिका की उपज है। अमेरिकी लीवरेज पसंद करते है। वे हर तरह के इंस्ट्रूमेंट में लीवरेज क्रिएट करते हैं। वहां पर भी यह काफी बड़ा होता जा रहा है। टिपिकली जब भी किसी एसेट में बबल बनता है तो वह पूरे बाजार में बबल बनाने में अहम भूमिका निभाता है। उदाहरण के लिए जैसे 2008 में रियल एस्टेट बबल बना उसमें रियल एस्टेट लीवरेज बाजार में बबल बनने का कारण बना। जब बबल फटता है तो जहां भी लीवरेज होता है वहां असर पड़ता है।

हम सभी जानते हैं कि इस समय दुनिया में एआई ड्रिवेन बबल बन चुका है। लेकिन ये कब फटेगा हमें नहीं पता है। इस नजरिए से कोस्पी इस समय बहुत बड़ा केस स्टडी बन गया है। कोरियन मार्केट अपने हाई से 33 फीसदी टूट चुका है। लेकिन लीवरेज बबल फटने पर इसमें और बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।

विवेक बजाज ने आगे कहा कि भारत में मार्जिन ट्रेडिंग या MTF 2000 शेयरों में हैं। वहीं, कोरिया में सिर्फ 20 शेयरों में भारत से कई गुना बड़ा लीवरेज्ड पोजीशन है। भारत में फ्री फ्लोट बेसिस पर MTF पोजीशन मार्केट कैप का 0.74 फीसदी है। ऐसे में भारत में मार्जिन ट्रेंडिंग का बड़ा रिस्क नहीं है।

उन्होंने आगे कहा कि कोरिया का बाजार एक ट्रिगर का काम करेगा। अगर वहां,लीवरेज्ड शेयरों में गिरावट आती है तो इसका असर भारत सहित पूरे ग्लोबल मार्केट पर देखने को मिलेगा। ऐसे में जहां भी लीवरेज ज्यादा होगा वहां दबाव दिखेगा।

MTF क्या है?

मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी ‘आज खरीदें,बाद में भुगतान करें’के मॉडल की तरह काम करता है। इसमें निवेशकों को ट्रेडिंग के लिए जरूरी पैसों का कुछ हिस्सा ही चुकाना पड़ता है और बाकी पैसा ब्रोकर लोन की तरह देता है। जैसे कि मान लें कि 100 रुपये के भाव वाले 1 हजार शेयरों की ट्रेडिंग करनी है तो 1 लाख रुपये की जरूरत पड़ेगी। अब या तो आप पूरे एक लाख रुपये अपने पास से लगाएं या 30 फीसदी यानी 30 हजार रुपये खुद का लगाएं और बाकी 70 फीसदी यानी 70 हजार रुपये ब्रोकर से लोन के रूप में मिल जाएगा।

मार्जिन ट्रेडिंग का फायदा ट्रेडर्स और ब्रोकर्स दोनों को मिलता है। ट्रेडर्स ज्यादा पैसा लगाने के लिए लोन ले सकते हैं और बड़ा मुनाफा कमाने की कोशिश कर सकते हैं, वहीं ब्रोकर्स दिए गए लोन पर ब्याज कमाते हैं।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।