उत्तर भारत में एक्टिव हुआ लो-प्रेशर सिस्टम! अगले 6 दिनों तक दिल्ली-यूपी समेत इन राज्यों में होगी मूसलाधार बारिश, यहां-यहां बदलेगा मौसम

IMD Weather Alert: उत्तर भारत में मानसूनी गतिविधियों ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश और उससे सटे दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश के ऊपर एक नया लो प्रेशर सक्रिय हो गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा 5 सितंबर को जारी वेदर बुलेटिन के अनुसार, इस मौसमी तंत्र की वजह से अगले दो दिनों के दौरान यह प्रणाली पूर्व-उत्तर-पूर्व दिशा की ओर बढ़ेगी। इसके प्रभाव से दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और बिहार सहित कई राज्यों में अगले छह से सात दिनों तक व्यापक रूप से गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। इस दौरान दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में मानसूनी बारिश की गतिविधियां काफी सुस्त बनी रहेंगी।

पिछले 24 घंटों का हाल और राज्यों में दर्ज की गई रिकॉर्ड बारिश

मौसम विभाग के मुताबिक 24 घंटों के दौरान देश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की गई है। इस दौरान पूर्वी राजस्थान, पश्चिमी मध्य प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश में अलग-अलग जगहों 12 से 20 सेंटीमीटर तक बहुत भारी बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा दिल्ली, उत्तराखंड, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, असम, नागालैंड और तमिलनाडु में 7 से 11 सेंटीमीटर तक भारी बारिश दर्ज की गई है।

दिल्ली-एनसीआर, यूपी और उत्तर-पश्चिम भारत का वेदर अपडेट

उत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों में 5 सितंबर से मानसूनी हवाएं काफी मजबूत रहने वाली हैं। पश्चिमी मध्य प्रदेश और उससे सटे उत्तर प्रदेश पर बने लो-प्रेशर सिस्टम के चलते दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 5 और 6 सितंबर को अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम तथा कुछ इलाकों में भारी बारिश होने की संभावना है। इसके बाद 6 से 8 सितंबर के दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश में व्यापक स्तर पर बारिश और बिजली कड़कने की गतिविधियां बनी रहेंगी।

उत्तराखंड में 5 से 11 सितंबर तक लगातार बारिश, आंधी और बिजली चमकने का अलर्ट जारी किया गया है, जहां 5 से 7 सितंबर और 10 व 11 सितंबर को भारी बारिश हो सकती है। पूर्वी राजस्थान में 5 सितंबर को बहुत भारी बारिश की संभावना है, जबकि 6 सितंबर को भी भारी बारिश की स्थिति बनी रहेगी। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान और मुजफ्फराबाद में 5 सितंबर को तेज आंधी और बारिश का अनुमान है।

मध्य भारत: मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में झमाझम बारिश के आसार

मध्य भारत में लो-प्रेशर एरिया के सीधे असर के कारण पश्चिमी मध्य प्रदेश में 5 सितंबर को अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इसके बाद 6 और 7 सितंबर को भी इस इलाके में भारी बारिश जारी रहेगी। पूर्वी मध्य प्रदेश में 5 से 8 सितंबर के दौरान अधिकांश स्थानों पर बादल बरसेंगे और भारी बारिश दर्ज की जाएगी। छत्तीसगढ़ में 8 से 11 सितंबर के बीच मानसूनी बारिश में तेजी आएगी और भारी बारिश होने का अनुमान है, जबकि विदर्भ क्षेत्र में 11 सितंबर को भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

बिहार, झारखंड और पूर्वी भारत में कैसा रहेगा मौसम

पूर्वी भारत के राज्यों में मानसूनी हलचल बनी रहेगी। बिहार में 5 सितंबर को बहुत भारी बारिश का अलर्ट है, जिसके बाद 6 से 8 सितंबर और 11 सितंबर को भी अलग-अलग इलाकों में भारी बारिश दर्ज हो सकती है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 5 से 7 सितंबर और 11 सितंबर को मूसलाधार बारिश का अनुमान है। इसके अलावा गांगेय पश्चिम बंगाल में 8 और 9 सितंबर, झारखंड में 9 सितंबर तथा ओडिशा में 9 से 11 सितंबर के बीच भारी बारिश की संभावना है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 5 से 11 सितंबर के दौरान मध्यम से तेज बारिश का दौर लगातार जारी रहेगा।

पूर्वोत्तर भारत: अरुणाचल, असम समेत सभी 7 राज्यों में मूसलाधार बारिश

पूर्वोत्तर भारत में मानसून का असर अगले एक हफ्ते तक बेहद मजबूत रहने वाला है। अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 5 से 11 सितंबर के दौरान लगातार बारिश, आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया गया है। इन सभी राज्यों के अलग-अलग हिस्सों में 5 से 11 सितंबर के बीच भारी से बहुत भारी बारिश होने की पूरी संभावना जताई गई है।

पश्चिमी और दक्षिण भारत का हाल: तेज हवाओं का दौर, बारिश धीमी

पश्चिम भारत में कोंकण और गोवा के इलाकों में 5 से 9 सितंबर तक अधिकांश स्थानों पर बारिश जारी रहेगी जबकि गुजरात, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और सौराष्ट्र व कच्छ में 5 से 11 सितंबर के दौरान हल्की से मध्यम छिटपुट बारिश देखने को मिलेगी। दक्षिण भारत की बात करें तो प्रायद्वीपीय हिस्सों में बारिश काफी सुस्त रहेगी।

तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, केरल, माहे, कर्नाटक, रायलसीमा, तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल और तेलंगाना में 5 से 11 सितंबर तक हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में 5 सितंबर को भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा, तमिलनाडु और आंतरिक कर्नाटक में 5 और 6 सितंबर को 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज सतही हवाएं चलने और तूफानी झोंके आने की चेतावनी जारी की गई है।

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दिल्ली-एनसीआर में पिछले दो दिनों से तेज बारिश हो रही है। दिल्ली-NCR में हुई तेज बारिश के बाद कई इलाकों में पानी भर गया। वहीं दिल्ली में तेज बारिश के चलते हवाई यात्रा पर भी असर पड़ सकता है। इंडिगो ने शनिवार को दिल्ली से आने-जाने वाले यात्रियों को सावधान रहने की सलाह दी है। एयरलाइन के मुताबिक, खराब मौसम की वजह से उड़ानों के संचालन में परेशानी आ सकती है और फ्लाइट्स में देरी होने की संभावना है। वहीं फ्लाइट पकड़ने से पहले इंडिगो ने फ्लाइट का ताजा स्टेटस जरूर देख लेना चाहिए।

राजधनी में तेज बारिश की वजह से इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (IGI) एयरपोर्ट के आसपास के साथ-साथ आनंद विहार और कनॉट प्लेस जैसे इलाकों में भी जलभराव देखने को मिला। सड़कों पर पानी जमा होने के कारण कई जगह ट्रैफिक धीमा हो गया, जिससे एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।

सोशल मीडिया पर किया पोस्ट

इंडिगो ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए यात्रियों को दिल्ली के मौसम को लेकर सतर्क रहने को कहा है। एयरलाइन के मुताबिक, खराब मौसम के कारण उड़ानों पर असर पड़ सकता है। एयरलाइन ने कहा, “खराब मौसम अभी दिल्ली पर असर डाल रहा है, जिससे फ्लाइट ऑपरेशन में देरी हो सकती है। हमारी टीमें स्थिति पर करीब से नजर रख रही हैं। अगर आप आज यात्रा कर रहे हैं, तो हम सलाह देते हैं कि एयरपोर्ट के लिए निकलने से पहले हमारी वेबसाइट या ऐप पर अपनी फ्लाइट का स्टेटस चेक कर लें।”

यात्रियों को दी सलाह

इंडिगो ने यात्रियों को सलाह दी कि वे एयरपोर्ट जाने के लिए नॉर्मल से थोड़ा ज्यादा समय लेकर घर से निकलें। बारिश के कारण कई सड़कों पर पानी भर सकता है और ट्रैफिक भी धीमा हो सकता है। एयरलाइन ने कहा कि, यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा उसके लिए सबसे जरूरी है। इंडिगो की यह एडवाइजरी शुक्रवार को दिल्ली में हुई तेज बारिश के बाद जारी की गई है।

तुरंत निकाल दिया गया पानी

भारी बारिश के कारण शहर के कई इलाकों में जलभराव और ट्रैफिक की समस्या देखने को मिली। दिल्ली एयरपोर्ट के मुताबिक, एयरपोर्ट तक पहुंचने वाली सड़क और फोरकोर्ट एरिया में भी पानी जमा हो गया था, जिससे यात्रियों की आवाजाही प्रभावित हुई। एयरपोर्ट प्रशासन के मुताबिक, बारिश के बाद जमा हुआ पानी जल्द निकाल दिया गया और उड़ानों का काम सामान्य रखने की कोशिश की जा रही है। वहीं, मौसम विभाग ने रविवार तक दिल्ली-NCR में बारिश की संभावना जताई है। शनिवार को भारी बारिश को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जबकि रविवार को हल्की बारिश हो सकती है।

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Flood News: बिहार के 13 जिलों में खतरे के निशान को पार कर गईं गंगा! कोसी नदी भी उफान पर, अलर्ट मोड में NDRF-SDRF

Flood News: बिहार में शुक्रवार को भी हाई अलर्ट जारी रहा क्योंकि नेपाल और पड़ोसी राज्य झारखंड में हुई भारी बारिश के बाद गंगा समेत कई नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इसके कारण राज्य के कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। वहीं, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया और बचाव, राहत और तटबंधों की सुरक्षा के इंतजामों का जायजा लिया। अधिकारियों ने बताया कि अब तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा रहा है।

जल संसाधन विभाग के मुताबिक, गंगा, गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, बागमती, पुनपुन और घाघरा समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है। वहीं, पटना में दीघा घाट, गांधी घाट, हथिदह और मनेर के अलावा बक्सर, मुंगेर, भागलपुर और कहलगांव में गंगा का पानी खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है।

खतरे के निशान पर गंगा नदी

गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 1 सितंबर की सुबह 49.40 मीटर था, जो 2 सितंबर की शाम बढ़कर 49.98 मीटर और 3 सितंबर की सुबह 50.18 मीटर हो गया। गुरुवार दोपहर तक जलस्तर 50.25 मीटर पहुंच गया था, जो खतरे के निशान से करीब 1.65 मीटर ऊपर है। विभाग ने अनुमान जताया था कि गुरुवार रात गांधी घाट पर गंगा का पानी सबसे ऊंचे बाढ़ स्तर (HFL) को पार कर सकता है। वहीं, मोकामा के हथिदह में शुक्रवार दोपहर तक यह स्तर पार होने की आशंका जताई गई थी।

News 18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ जैसे हालात ने पटना, वैशाली, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, भोजपुर, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा, सहरसा और कटिहार के निचले इलाकों को प्रभावित किया है। इसके अलावा, आठ जिलों – भोजपुर, पटना, सारण, वैशाली, नालंदा, बेगूसराय, लखीसराय और जहानाबाद – को हाई अलर्ट पर रखा गया है और अधिकारियों को संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को चेतावनी देने का निर्देश दिया गया है।

मुंगेर में, गंगा का जलस्तर 39.33 मीटर के चेतावनी स्तर को पार करते हुए 39.36 मीटर (खतरे का निशान) तक पहुंच गया, जिससे सात पंचायतें जलमग्न हो गईं और घरों में पानी घुस गया। News 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, समस्तीपुर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से लगभग 1.95 मीटर ऊपर पहुंचने के बाद 15 पंचायतों में बाढ़ का पानी घुस गया।

अरवल में पुनपुन नदी के बढ़ने से 30 गांव डूबे

अरवल में भी हालात गंभीर बताए गए, जहां पुनपुन नदी के पानी से कुर्था और बंसी ब्लॉक के लगभग 30 गांव डूब गए, जिससे सड़क संपर्क टूट गया और बंसी पुलिस स्टेशन में भी पानी भर गया। सारण में सोनपुर, छपरा सदर, दिघा और रेवेलगंज को संवेदनशील इलाकों के तौर पर चिह्नित किया गया।

अमर उजाला के अनुसार, बेगूसराय के मटिहानी ब्लॉक में बाढ़ का पानी 17 सरकारी स्कूलों तक पहुंच गया, जबकि गया के मानपुर ब्लॉक में पेमार नदी के पानी ने अमरी और बरसाना गांवों तक जाने वाली सड़क को डुबो दिया।

प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविर और मेडिकल की सुविधाएं की गई

वहीं, अधिकारियों ने प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविर, मेडिकल सुविधाएं, पीने का पानी, भोजन और दूसरी जरूरी चीजों की व्यवस्था की है। बचाव कार्य के लिए SDRF और NDRF की टीमें, गोताखोर और नावें तैनात की गई हैं। विस्थापित परिवारों के लिए सामुदायिक रसोई भी शुरू की जा रही हैं।

सोनपुर में 25 नावें चल रही हैं। इसके अलावा वहां 1,000 पॉलीथिन शीट भेजी गई हैं, जबकि 500 पॉलीथिन शीट दीघा भेजी गई हैं।

पटना में 108 जगहों को सील किया गया

पटना में, शहर की सुरक्षा दीवार के पास 108 जगहों को सील किया गया, 13 स्लुइस-गेट के लीकेज को ठीक किया गया और पंपिंग स्टेशनों को तैयार रखा गया। पुनपुन नदी पर बना एक रिंग तटबंध भी टूट गया, जिससे मुख्य बांध को खतरा पैदा हो गया।

आपदा प्रबंधन विभाग ने लोगों को सलाह दी कि वे नदियों, घाटों, तटबंधों और पानी से भरे इलाकों में बेवजह न जाएं। साथ ही, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगों को ऐसी जगहों से दूर रखने की अपील की। ​​विभाग ने नदियों के पास तैरने, बेवजह नाव की सवारी करने और सेल्फी लेने के खिलाफ भी चेतावनी दी।

तेजस्वी यादव ने  NDA सरकार पर साधा निशाना

विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने NDA सरकार पर बाढ़ से निपटने की अपर्याप्त तैयारी और राहत कार्यों में कमी का आरोप लगाया और कहा कि 15 से ज्यादा जिले प्रभावित हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कटाव और बाढ़ से मक्का और सब्जियों की फसलें बर्बाद हो गईं, जबकि बिजली कटौती, पीने के पानी की कमी और कनेक्टिविटी बाधित होने से ग्रामीणों को जरूरी चीजों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने दियारा इलाकों को बाढ़ प्रभावित घोषित करने की भी मांग की।

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेश यात्रा से लौटने के बाद चौधरी के साथ हालात का जायजा लिया और केंद्र व बिहार सरकार “युद्ध स्तर पर” काम कर रही हैं।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आने वाले दिनों में और बारिश व गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने का अनुमान जताया है। इससे नदियों का जलस्तर और बढ़ने की चिंता बढ़ गई है। बिहार के पटना, गया, मुजफ्फरपुर और भागलपुर समेत कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इन इलाकों में 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक की तेज हवाएं चलने की भी संभावना है। वहीं, गुरुवार को देश के करीब 20 राज्यों में बारिश और आंधी-तूफान को लेकर चेतावनी जारी की गई थी।

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कल का मौसम: 5 सितंबर को इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट! दिल्ली-यूपी से राजस्थान-एमपी तक जानिए कहां-कहां ऑरेंज कलर वॉर्निंग

IMD Weather Update: देश के कई हिस्सों में मानसूनी बारिश लगातार जारी है और मौसम विभाग ने अगले दिन यानी 5 सितंबर के लिए कई राज्यों में मूसलाधार बारिश की चेतावनी जारी की है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन के मुताबिक 5 सितंबर को राजस्थान और मध्य प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों में बारिश का दौर सबसे ज्यादा उग्र देखने को मिल सकता है। इसके चलते वहां ऑरेंज स्तर की चेतावनी जैसी स्थिति बनी हुई है। इसके साथ ही उत्तर भारत के मैदानी इलाकों, पहाड़ी राज्यों, बिहार और पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में भी मध्यम से भारी बारिश और आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया गया है।

राजस्थान और पश्चिमी मध्य प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी

5 सितंबर को देश में सबसे ज्यादा मौसमी हलचल पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी मध्य प्रदेश में देखने को मिलेगी। मौसम विभाग ने इन दोनों क्षेत्रों के अलग-अलग जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान जताया है। इसके अलावा पूर्वी मध्य प्रदेश के इलाकों में भी कई जगहों पर भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। पूरे मध्य प्रदेश और राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों में दिनभर बादलों की गर्जना और आकाशीय बिजली चमकने की आशंका बनी रहेगी। स्थानीय प्रशासन ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।

दिल्ली, यूपी, पंजाब-हरियाणा और उत्तराखंड का मौसम

उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी और पहाड़ी इलाकों में भी 5 सितंबर को राहत मिलने के आसार नहीं हैं। दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ में 5 सितंबर को भारी बारिश की संभावना है। इसके साथ ही पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में मूसलाधार बौछारें पड़ने का अनुमान है। मैदानी इलाकों में बारिश के साथ-साथ बादलों की कड़क और बिजली गिरने का अंदेशा बना हुआ है।

पहाड़ी राज्यों में उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में 5 सितंबर को भारी बारिश होने के आसार हैं। उत्तराखंड में बारिश के साथ तेज गर्जना और बिजली चमकने की चेतावनी दी गई है। जम्मू-कश्मीर-लद्दाख के इलाकों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज तूफानी हवाओं के साथ बारिश और बिजली कड़कने का अलर्ट जारी किया गया है।

बिहार और पूर्वोत्तर भारत का वेदर रिपोर्ट

पूर्वी भारत के प्रमुख राज्यों में शामिल बिहार में 5 सितंबर को अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश की संभावना है। बिहार के साथ-साथ पश्चिम बंगाल और सिक्किम में बारिश के दौरान 30 से 40 किमी प्रति घंटे की गति से हवाएं चलने और आकाशीय बिजली चमकने की चेतावनी दी गई है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में कई जगहों पर भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी अलग-अलग स्थानों पर बिजली गिरने और गरज के साथ बारिश होने का पूर्वानुमान है।

पूर्वोत्तर भारत में मानसून का असर व्यापक रहेगा। अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय के साथ-साथ नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 5 सितंबर को अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश का अलर्ट है। इन सभी पूर्वोत्तर राज्यों में दिनभर बिजली चमकने और आंधी-पानी की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।

दक्षिण भारत में तेज हवाएं और समुद्र का मिजाज

दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत की बात करें तो आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में 5 सितंबर को 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज तूफानी हवाएं चलने और बिजली कड़कने का अलर्ट जारी किया गया है। आंध्र प्रदेश और आंतरिक कर्नाटक के इलाकों में दिनभर तेज सतही हवाएं चलती रहेंगी। आंतरिक कर्नाटक और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की गति से हवाएं चलने और बिजली चमकने की संभावना है।

उधर समुद्री सीमाओं और तटीय क्षेत्रों में मौसम खराब रहने की आशंका है। सोमालिया तट से लगे पश्चिम-मध्य और दक्षिण-पश्चिम अरब सागर के कुछ हिस्सों में 45 से 55 किमी प्रति घंटे की गति से तेज हवाएं चल सकती हैं, जिनकी रफ्तार बढ़कर 65 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।

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Delhi NCR Weather: दिल्ली-NCR में शुक्रवार को अचानक से तेज आंधी तुफान के साथ गरज-चमक और झमाझम बारिश से तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। ने लोगों को गर्मी से काफी राहत दी। मौसम विभाग ने राजधानी और आसपास के इलाकों में भारी बारिश की आशंका को देखते हुए रेड अलर्ट जारी कर दिया है। जिसके बाद दिल्ली और एनसीआर में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

मौसम विभाग के मुताबिक, दिल्ली के कई इलाकों के साथ-साथ ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में भी बारिश हुई है। मौसम विभाग ने कुछ इलाकों में मध्यम से तेज बारिश के साथ भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं, अगर बारिश की स्थिति लगातार बनती है तो निचले इलाकों में पानी भरने और सड़कों पर यातायात की रफ्तार धीमी पड़ने की संभावना है। हालांकि, राहत की बात यह है कि जन्माष्टमी के चलते स्कूल-कॉलेज और तमाम दफ्तरों में छुट्टी होने के चलते सड़कों पर ट्रैफिक का कम दबाव रहेगा।

IMD के ताजा अपडेट के अनुसार, राजधानी के ज्यादातर हिस्सों में मध्यम बारिश हो सकती है, जबकि कुछ इलाकों में भारी बारिश (50 से 100 मिमी) होने की आशंका है। बारिश के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की भी संभावना जताई गई है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, जिनके झोंकों की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है।

मौसम विभाग ने लोगों को मौसम संबंधी अपडेट पर नजर रखने और बेहद जरूरी होने पर ही बारिश के दौरान बाहर निकलने की सलाह दी है।

राजस्थान से उत्तर प्रदेश तक भी मौसम विभाग का अलर्ट

मौसम विभाग ने बताया कि उत्तर मध्य प्रदेश और दक्षिणी उत्तर प्रदेश के ऊपर निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इसके साथ ही मानसून की अक्षीय रेखा भी सक्रिय है, जो श्रीगंगानगर से होते हुए इस निम्न दबाव वाले क्षेत्र तक पहुंच रही है। इन मौसमी सिस्टम का असर उत्तर भारत के कई हिस्सों में देखने को मिल रहा है।

राजस्थान के पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी इलाकों में भी भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है। पिछले 24 घंटों के दौरान पूर्वी राजस्थान के कई हिस्सों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। सवाई माधोपुर के खंडार में सबसे ज्यादा 130 मिमी बारिश हुई।

इसके अलावा अलवर, भरतपुर, डीग, दौसा, धौलपुर, जयपुर, सीकर, भीलवाड़ा, अजमेर, करौली, टोंक, बारां, कोटा और झालावाड़ में भी हल्की से मध्यम बारिश देखने को मिली।

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पाकिस्तान का 100 साल पुराना हिंदू मंदिर गिराने से इंकार:कहा- बारिश की वजह से टूटा; आरोप- मदरसा बनाने के लिए मंदिर तोड़ा

पाकिस्तान ने पंजाब प्रांत में करीब 100 साल पुराने हिंदू मंदिर गिराए जाने की खबरों को गलत बताया है। उसका कहना है कि 21 जुलाई को भारी बारिश के कारण मंदिर क्षतिग्रस्त होकर गिर गया था। वहीं, स्थानीय लोगों और हिंदू समुदाय के प्रतिनिधियों का आरोप है कि मंदिर को जानबूझकर गिराया गया और उसकी जमीन पास के मदरसे के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश की गई। दूसरी ओर, रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि मंदिर की इमारत को 21 अगस्त को गिराया गया। दोनों तारीखों के बीच करीब एक महीने का अंतर है। इसी वजह से मंदिर गिराए जाने की घटना को लेकर सवाल उठ रहे हैं। TLP पर मंदिर गिराने के आरोप पाकिस्तान मसिहा मिल्लत पार्टी (PMMP), स्थानीय लोगों और हिंदू समुदाय ने आरोप लगाया था कि मंदिर को स्थानीय मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने गिराया। इन लोगों ने इस मामले में तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) से जुड़े लोगों की भूमिका होने का भी आरोप लगाया है। TLP पाकिस्तान का एक कट्टरपंथी इस्लामी संगठन है, जिस पर वहां प्रतिबंध लगा हुआ है। भारत ने मंदिर गिराए जाने की निंदा की मामला सामने आने के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने 2 सितंबर को इसकी निंदा की थी। भारत ने कहा था कि मंदिर की सुरक्षा के लिए स्थानीय अधिकारियों ने समय पर कार्रवाई नहीं की, जो चिंता की बात है। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि यह घटना पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की स्थिति पर सवाल खड़े करती है। भारत ने पाकिस्तान से मंदिर गिराने के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने और मंदिर को फिर से ठीक कराने की मांग की थी। पाकिस्तान बोला- तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया भारत के बयान के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया दी। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान ने भारत के आरोपों को झूठा और राजनीतिक मकसद से लगाया गया बताया। उन्होंने कहा कि भारत इस मामले में तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहा है। खान ने पाकिस्तान के स्थानीय एवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड के अधिकारियों के हवाले से कहा कि मंदिर की इमारत भारी बारिश के कारण क्षतिग्रस्त हुई थी। मंदिर की मरम्मत करवाएगा पाकिस्तान पाकिस्तान का यह भी दावा है कि स्थानीय अधिकारियों ने मंदिर को हुए नुकसान का सर्वे किया है और मंदिर को दोबारा ठीक करने के लिए कदम शुरू कर दिए गए हैं। ————————- यह भी पढ़ें… PAK ग्रूमिंग गैंग ने लंदन में सिख युवती को फंसाया: ब्रेनवॉश किया, नितनेम-गुरुद्वारा जाना छोड़ा इंग्लैंड (UK) में पंजाबी युवती पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग के चंगुल में फंस गई। पूरी खबर पढ़ें…

मौसम से सावधान! MP और राजस्थान में लो-प्रेशर एरिया का सिस्टम एक्टिव, 10 सितंबर तक यूपी-बिहार समेत इन राज्यों में बारिश का अलर्ट

India Weather Update: देश भर में इस वक्त अलग-अलग इलाकों में भारी बारिश का दौर जारी है और मानसून अपना विकट रूप दिखा रहा है। इस बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपने ताजा बुलेटिन में बताया है कि उत्तरी मध्य प्रदेश के मध्य भागों और उससे सटे दक्षिणी उत्तर प्रदेश के ऊपर एक वेल मार्क्ड लो-प्रेशर एरिया का मौसमी सिस्टम बना हुआ है। इसके अगले दो दिनों तक लगभग स्थिर रहने की संभावना है। इसके साथ ही एक नया पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय है। इन मौसमी प्रणालियों के असर से मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार और पहाड़ी राज्यों समेत देश के बड़े हिस्से में 10 सितंबर तक मूसलाधार बारिश, अंधड़ और आकाशीय बिजली का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने ये भी बताया है कि अगले 6 से 7 दिनों के दौरान दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में बारिश की गतिविधियां धीमी बनी रहेंगी।

पिछले 24 घंटों की बात करें तो पूर्वी मध्य प्रदेश में कई जगहों पर 12 से 20 सेंटीमीटर तक बहुत भारी बारिश दर्ज की गई है। वहीं हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी मध्य प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, नागालैंड और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल में 7 से 11 सेमी तक भारी बारिश दर्ज की गई है।

मध्य प्रदेश और राजस्थान में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी

मौसमी सिस्टम के सीधे प्रभाव की वजह से मध्य प्रदेश और राजस्थान में बारिश का जोर सबसे अधिक रहने वाला है। पश्चिमी मध्य प्रदेश और पूर्वी राजस्थान में 4 और 5 सितंबर को अलग-अलग जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा पूर्वी मध्य प्रदेश में 4 सितंबर को बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मध्य प्रदेश के पश्चिमी भागों में 4 से 6 सितंबर तक व्यापक बारिश होगी और 6 सितंबर को भी भारी बारिश की संभावना है। इसके बाद 7 से 10 सितंबर के दौरान बारिश कुछ हद तक हल्की पड़ सकती है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 4 से 8 सितंबर के दौरान मध्यम से भारी बारिश का सिलसिला बना रहेगा। वहीं छत्तीसगढ़ में 4 सितंबर और फिर 8 से 10 सितंबर के बीच भारी बारिश देखने को मिल सकती है।

उत्तर भारत का मौसम: दिल्ली, यूपी, पंजाब-हरियाणा और पहाड़ी राज्यों में अलर्ट

उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी और पहाड़ी राज्यों में अगले कुछ दिनों तक रुक-रुक कर भारी बारिश जारी रहने के आसार हैं। दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब में 4 और 5 सितंबर को भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है जबकि 6 सितंबर तक भारी बारिश के आसार बने रहेंगे। उत्तर प्रदेश में मानसून की चाल काफी मजबूत रहेगी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 4 से 6 सितंबर के दौरान भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश में 6 से 8 सितंबर के दौरान बारिश का दौर तेजी पकड़ेगा।

पहाड़ी राज्यों में उत्तराखंड में 4 से 10 सितंबर तक पूरे हफ्ते गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। हिमाचल प्रदेश में 4 और 5 सितंबर को भारी बारिश होगी। जम्मू-कश्मीर-लद्दाख में 4 सितंबर को भारी बारिश और आंधी-तूफान का अनुमान है।

 

पूर्वी भारत और बिहार में 10 सितंबर तक कैसा रहेगा वेदर?

पूर्वी भारत में बारिश की गतिविधियां कई राज्यों को भिगोएंगी। बिहार में 5, 6 और 10 सितंबर को भारी बारिश के साथ व्यापक स्तर पर गरज-चमक का अलर्ट दिया गया है जबकि 7 से 9 सितंबर के बीच छिटपुट बारिश देखने को मिल सकती है। झारखंड में 9 सितंबर को भारी बारिश हो सकती है और 8 से 10 सितंबर तक बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 4 से 8 सितंबर तक लगातार भारी बारिश की संभावना है। गांगेय पश्चिम बंगाल में 4 सितंबर और 8-9 सितंबर को भारी बारिश के आसार हैं। ओडिशा में 9 और 10 सितंबर को बारिश का नया दौर शुरू होने का पूर्वानुमान है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भी 4 से 10 सितंबर के दौरान अच्छी बारिश और बिजली चमकने की चेतावनी दी गई है।

पूर्वोत्तर और पश्चिमी भारत का हाल

पूर्वोत्तर भारत के लगभग सभी राज्यों में अगले एक सप्ताह तक तेज मानसूनी बारिश बनी रहेगी। अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 4 से 10 सितंबर के दौरान भारी बारिश और बिजली गिरने का अंदेशा जताया गया है। पश्चिम भारत की बात करें तो कोंकण और गोवा में 4 से 10 सितंबर के दौरान अधिकांश जगहों पर मध्यम से भारी बारिश जारी रहने का अनुमान है। गुजरात क्षेत्र, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, सौराष्ट्र और कच्छ में हल्की से मध्यम छिटपुट बारिश होने की संभावना है। मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में 4 सितंबर को गरज-चमक और बिजली कड़कने की घटनाएं हो सकती हैं।

दक्षिण भारत में तेज हवाएं और बिजली कड़कने की चेतावनी

दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में कुल मिलाकर बारिश कुछ हद तक शांत रहेगी लेकिन तटीय इलाकों और अंदरूनी हिस्सों में तेज हवाओं का असर देखने को मिलेगा। तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, रायलसीमा, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में 4 और 5 सितंबर को 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज तूफानी हवाएं चलने और बिजली चमकने की संभावना है। हवाओं की स्पीड बढ़कर 60 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं। उत्तरी और दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक में 4 से 6 सितंबर तक 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी। तटीय कर्नाटक में 4 से 10 सितंबर तक अच्छी बारिश होगी जबकि लक्षद्वीप में 9 और 10 सितंबर को व्यापक बारिश दर्ज की जा सकती है।

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Mausam 4 Sep: आज इन राज्यों में मूसलाधार बारिश! MP में ऑरेंज कलर अलर्ट जारी, जानें दिल्ली-यूपी से लेकर दक्षिण भारत तक के मौसम का हाल

India Weather Update: देश भर में मानसूनी गतिविधियों ने एक बार फिर गति पकड़ ली है और कई राज्यों में बादल जमकर बरस रहे हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 4 सितंबर के लिए मौसम का ताजा पूर्वानुमान जारी करते हुए मध्य भारत से लेकर उत्तर, पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के कई राज्यों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। पूर्वोत्तर मध्य प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में बने वेल मार्क्ड लो-प्रेशर एरिया यानी कम दबाव का क्षेत्र के असर के चलते मध्य प्रदेश में बारिश का जोर सबसे अधिक देखने को मिल रहा है। यहां मौसम विभाग ने भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी के साथ ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा उत्तर भारत के पहाड़ी और मैदानी इलाकों समेत देश के 15 से अधिक राज्यों में तेज आंधी, बादलों की गर्जना और भारी बारिश का अंदेशा जताया गया है।

मध्य प्रदेश में ऑरेंज अलर्ट और मध्य भारत की स्थिति

मौसम विभाग के मुताबिक मध्य प्रदेश आज बारिश का मुख्य केंद्र बना हुआ है। राज्य के कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश होने के आसार हैं, जिसके चलते यहां ऑरेंज अलर्ट की स्थिति बनी हुई है। मध्य प्रदेश के अलावा पड़ोसी राज्यों छत्तीसगढ़ और विदर्भ में भी अलग-अलग स्थानों पर तेज बादलों की गर्जना और आकाशीय बिजली चमकने के साथ झमाझम बारिश होने की संभावना व्यक्त की गई है। बारिश और बिजली गिरने के इस खतरे को देखते हुए लोगों को खुले क्षेत्रों और जलभराव वाले इलाकों से दूर रहने की हिदायत दी गई है।

दिल्ली-यूपी और उत्तर भारत में मौसम का मिजाज

उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकतर हिस्सों में आज बादल छाए रहने और मध्यम से भारी बारिश होने का अनुमान है। दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब में अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। उत्तर प्रदेश में भी मानसून काफी सक्रिय नजर आ रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भारी बारिश के साथ कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश हो सकती है जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश के इलाकों में मूसलाधार बौछारें पड़ने के संकेत हैं। पहाड़ी राज्यों की बात करें तो उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर-लद्दाख के क्षेत्रों में भारी बारिश के साथ-साथ बिजली कड़कने और पहाड़ी ढलानों पर सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। राजस्थान में भी पूर्वी हिस्सों में भारी बारिश और तेज हवाएं चलने का अनुमान है।

IMD Weather (3)

पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में मूसलाधार बारिश की चेतावनी

पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भी मौसम का कड़ा रुख देखने को मिल रहा है। बिहार, झारखंड, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के इलाकों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज तूफानी हवाएं चलने, बिजली चमकने और भारी बारिश होने का अलर्ट है। गांगेय पश्चिम बंगाल में भी बारिश और वज्रपात की आशंका बनी हुई है। इसके साथ ही अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में भी तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है। पूर्वोत्तर राज्यों में अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में आज अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश और बिजली चमकने का अंदेशा है।

दक्षिण और पश्चिमी भारत का वेदर अपडेट

दक्षिण भारत और तटीय इलाकों में मौसमी प्रभाव की बात करें तो तटीय आंध्र प्रदेश, तमिलनाडू, पुडुचेरी और कराईकल में आज अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। आंध्र प्रदेश, उत्तरी आंतरिक कर्नाटक और तमिलनाडु में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तूफानी हवाएं चलने और बिजली कड़कने का अलर्ट जारी किया गया है। तेलंगाना और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में भी 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। आंध्र प्रदेश, आंतरिक कर्नाटक और तेलंगाना में दिनभर मजबूत सतही हवाएं चलने की उम्मीद है।

पश्चिमी भारत में मध्य महाराष्ट्र के इलाकों में बिजली चमकने और बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं समुद्र में मौसम के मिजाज को देखते हुए सोमालिया तट से सटे पश्चिम-मध्य और दक्षिण-पश्चिम अरब सागर में 45 से 55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और इसके बढ़कर 65 किमी प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है। इसके चलते मछुआरों को गहरे समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।

बिहार डूबेगा या बचेगा?:नेपाल में दूसरा ग्लेशियर फटने वाला है; 8 दिनों में ऐसा क्या हुआ कि सरकार बोली- हालात गंभीर हैं

बिहार डूबेगा कि बचेगा…नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के 8 दिन बाद अब हर कोई जानना चाहता है। राज्य की 8 नदियां- गंगा, सोन, पुनपुन, कोसी, गंडक, बुढ़ी गंडक, बागमती और घाघरा खतरे के निशान से ऊपर हैं। दूसरी तरफ नेपाल में दूसरे ग्लेशियर के फटने का अलर्ट जारी कर दिया गया है। ऐसा क्यों कहा जा रहा कि अबकी ग्लेशियर फटा तो पटना सहित 10 शहर डूब जाएंगे, हिमालय की चोटी पर क्या चल रहा है, समझेंगे; बूझे की नाही में…। बिहार की चिंता बढ़ाने वाले 3 बड़े फैक्टर 1. नेपाल में फटने वाला है दूसरा ग्लेशियर चीन के जल संसाधन मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल में एक नया ग्लेशियल लेक फटने वाला है। कब फटेगा, इसका सटीक अंदाजा लगाना कठिन है। नया ग्लेशियल लेक लांगटांग लिरुंग हिमालय के पश्चिमी ढलान पर, रसुवा में तेनजिंग के ठीक सामने है। दरअसल… नेपाल से निकलने वाली 7 से 9 बड़ी नदियां बहकर बिहार-UP के मैदानी इलाकों में आती हैं। जब नेपाल के पहाड़ों में भारी बारिश होती है, तो इन्हीं नदियों के जरिए बिहार में बाढ़ का पानी आता है। इसे ऐसे समझिए… केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, कोसी, गंडक, बागमती और घाघरा ही वे नदियां हैं, जो बिहार में बाढ़ लाती हैं। इसलिए अगर अबकी बार ग्लेशियर फटा तो फिर भारी मात्रा में पानी बिहार पहुंचेगा। 2. 8 नदियां उफान पर, दबाव बढ़ा तो टूट जाएंगे बाढ़ ताजा हालात है कि बिहार की आठ नदियां गंगा, सोन, पुनपुन, कोसी, गंडक, बुढ़ी गंडक, बागमती और घघरा खतरे के निशान से ऊपर हैं। 3 सितंबर तक बिहार जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक… वहीं, नेपाल में आई तबाही के दिन 26 अगस्त से 3 सितंबर की सुबह 8 बजे तक बिहार में 3 बैराज से 1.98 करोड़ क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। एक क्यूसेक पानी यानी 28.3 लीटर/प्रति सेकंड। मतलब 56,119.4 करोड़ लीटर/प्रति सेकंड पानी बिहार में 9 दिन के अंदर आ चुका है। मतलब अगर नेपाल में दूसरा ग्लेशियर टूटा तो बिहार में हालात खराब हो जाएंगे। क्योंकि अभी ही नदियों में पानी काफी बढ़ गया है। आगे पानी आने पर तबाही ही मचेगी। 3. नेपाल में बारिश का अलर्ट, नदियों में बढ़ेगा पानी बिहार की सबसे बड़ी चिंता नेपाल में भारी बारिश का अलर्ट है। नेपाल के बाढ़ पूर्वानुमान विभाग के मुताबिक, भोटेकोशी और त्रिशूली नदी फिलहाल चेतावनी स्तर से नीचे बह रही हैं, फिर भी रसुवा और नुवाकोट में अचानक बाढ़ आने की ज्यादा संभावना है। दोनों जिलों में भोटेकोशी, त्रिशूली और छोटी नदियों का जलस्तर काफी बढ़ सकता है, जिससे अचानक बाढ़ आने का भारी खतरा है। वहीं, नेपाल के मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों यानी 6 सितंबर तक भारी बारिश की चेतावनी दी है। नेपाल के जल संसाधन विभाग ने कहा कि कोशी बेसिन की सप्तकोशी, तमोर, अरुण, दूधकोशी, तामाकोशी और सुनकोशी तथा नारायणी बेसिन की नारायणी, त्रिशूली, बूढ़ी गंडकी, मर्स्यांगदी, सेती और काली गंडकी जैसी प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। विभाग ने नेपाल की छोटी नदियों में पानी बढ़ने की भी बातें कही है। इधर… पटना मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, 5 सितंबर तक पूरे बिहार में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, गोपालगंज और सीवान जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। जबकि, पटना, नालंदा, जहानाबाद, नवादा, गया, लखीसराय, शेखपुरा और बेगूसराय में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। …तो क्या बड़े शहर भी डूब सकते हैं? बिल्कुल। राज्य की नदियों में बढ़ते पानी से 13 जिले दरभंगा, मधुबनी, पश्चिम चंपारण, कटिहार, मधेपुरा, पूर्णिया, सहरसा, खगड़िया, वैशाली, बेगूसराय, भागलपुर, समस्तीपुर, मुंगेर प्रभावित हैं। बिहार के आपदा प्रबंधन विभाग ने 3 सितंबर की शाम अलर्ट जारी करते हुए कहा कि पटना में गंगा नदी हाई फ्लड लेबल को क्रास करने वाली है। इसलिए सभी पदाधिकारी और लोग अलर्ट रहें। निचले इलाकों को बचाने के लिए तुरंत तैयारी में जुट जाएं। विभाग ने कहा है कि दक्षिण बिहार की सोन, पुनपुन, दरधा में बढ़ते पानी को देखते हुए नालंदा, भोजपुर, वैशाली, सारण, बेगूसराय, लखीसराय और जहानाबाद में लोगों की परेशानी बढ़ सकती है। मतलब साफ है कि अगर नेपाल से और पानी आया तो बिहार के कम से कम 10 से ज्यादा शहर डूब सकते हैं। जिसमें राजधानी पटना भी शामिल हो सकता है। ऐसा पहले भी हो चुका है…

Tibet Earthquake : भीषण बाढ़ की तबाही के बाद नेपाल पर एक और मुसीबत, हिमालयी क्षेत्र में क्यों मंडरा रहा है खतरा

Tibet Earthquake : भीषण बाढ़ की तबाही के बाद नेपाल पर एक और मुसीबत, हिमालयी क्षेत्र में क्यों मंडरा रहा है खतरा

Nepal flood

Tibet Earthquake : नेपाल और तिब्बत में ग्लेशियर आपदा के बाद आई विनाशकारी बाढ़ के बीच गुरुवार को तिब्बत में 5.0 तीव्रता का भूकंप आया। भारत के नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के मुताबिक, भूकंप का केंद्र उत्तराखंड के जोशीमठ से करीब 128 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में था। भूकंप के बाद फिलहाल किसी तरह के जान-माल के नुकसान की जानकारी सामने नहीं आई है। अधिकारियों की ओर से नुकसान का आकलन किया जा रहा है।

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नेपाल में बाढ़ के बीच आया भूकंप

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तिब्बत में भूकंप ऐसे समय आया है, जब हिमालयी क्षेत्र पहले से ही एक बड़ी ग्लेशियर आपदा के बाद आई भीषण बाढ़ से जूझ रहा है। इस आपदा का असर तिब्बत और नेपाल के कई इलाकों में देखने को मिला है। ताजा अपडेट के मुताबिक, इस आपदा में मृतकों की संख्या बढ़कर 1,252 हो गई है, जबकि कम से कम 4,216 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। बाढ़ और ग्लेशियर से जुड़ी इस आपदा ने हिमालयी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है।

 

5.0 तीव्रता के भूकंप का क्या मतलब है?

 

NCS के अनुसार, तिब्बत में आए भूकंप की तीव्रता 5.0 थी। इस तीव्रता के भूकंप को सामान्यतः मध्यम श्रेणी का भूकंप माना जाता है। इस तरह के भूकंप में इमारतों में स्पष्ट कंपन महसूस किया जा सकता है। कमजोर या खराब निर्माण वाली इमारतों को मामूली से मध्यम नुकसान पहुंच सकता है, जबकि अच्छी तरह से निर्मित संरचनाएं आम तौर पर गंभीर संरचनात्मक क्षति से बची रहती हैं।

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सिर्फ 10 किलोमीटर गहराई में आया भूकंप

 

नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक, भूकंप का केंद्र जमीन के अंदर करीब 10 किलोमीटर की गहराई में था। कम गहराई वाले भूकंपों को अपेक्षाकृत ज्यादा नुकसानदायक माना जाता है, क्योंकि भूकंपीय ऊर्जा को सतह तक पहुंचने के लिए कम दूरी तय करनी पड़ती है। इस वजह से ऊर्जा रास्ते में कम कमजोर होती है और सतह पर झटके ज्यादा महसूस किए जा सकते हैं।

 

हिमालयी क्षेत्र में लगातार बनी हुई चिंता

 

तिब्बत में आए इस भूकंप ने हिमालयी क्षेत्र में जारी प्राकृतिक आपदाओं के बीच चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में ग्लेशियर आपदा के बाद तिब्बत और नेपाल में आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। ऐसे में भूकंप और अन्य प्राकृतिक घटनाओं पर भारत, नेपाल और तिब्बत के अधिकारियों की नजर बनी हुई है। फिलहाल तिब्बत में आए 5.0 तीव्रता के भूकंप से किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।