अगले 5 साल में अंतरिक्ष में जंग छिड़ सकती है। विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि अमेरिका, ब्रिटेन, रूस और चीन जैसे देश एक-दूसरे की सैटेलाइट को निशाना बना सकते हैं। इंटरनेट, टीवी, मौसम की जानकारी और बैंकिंग जैसी कई सेवाएं सैटेलाइट पर निर्भर हैं। अगर युद्ध के दौरान सैटेलाइट को नुकसान पहुंचा, तो इन सेवाओं पर असर पड़ सकता है। विमानों और जहाजों को रास्ता पता करने में भी परेशानी हो सकती है। अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ क्यों बढ़ रही है? चीन के 5 सैटेलाइट ने एक साथ अभ्यास किया अमेरिकी स्पेस फोर्स के मुताबिक, चीन के 5 सैटेलाइट अंतरिक्ष में एक-दूसरे के करीब आए और ऐसी गतिविधियां कीं, जिनका इस्तेमाल जंग में हो सकता है। चीन ऐसी मशीनें बना रहा है, जो अंतरिक्ष में दूसरे सैटेलाइट को पकड़ सकती हैं या उन्हें उनकी जगह से हटा सकती हैं। कुछ रिपोर्टस के मुताबिक रूस के सैन्य सैटेलाइट भी दूसरे देशों के सैटेलाइट के करीब पहुंचकर उनकी निगरानी कर रहे हैं। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को यह आशंका भी है कि रूस के कॉसमॉस-2553 सैटेलाइट में परमाणु हथियार से जुड़े उपकरणों के कुछ हिस्से भेजे गए थे। ब्रिटेन ने अंतरिक्ष की सुरक्षा के लिए यूनिट बनाई ब्रिटेन की वायुसेना ने सितंबर में अपने सैटेलाइट की सुरक्षा के लिए एक यूनिट बनाई है। अमेरिका ने 2019 में अपनी अंतरिक्ष सेना बनाई थी। इसका काम अमेरिकी सैटेलाइट की सुरक्षा करना और अंतरिक्ष में दूसरे देशों की सैन्य गतिविधियों पर नजर रखना है। 4 देश सैटेलाइट को मिसाइल से नष्ट करने की क्षमता का परीक्षण कर चुके दुनिया के कुछ ताकतवर देश सैटेलाइट को नष्ट करने वाली मिसाइलों का परीक्षण भी कर चुके हैं। इनमें शामिल हैं: अंतरिक्ष में हमला किस तरीके से हो सकता है जीपीएस के सिग्नल रोककर सैटेलाइट से मिलने वाले सिग्नल की मदद से मोबाइल, विमान और जहाज अपनी लोकेशन पता करते हैं। अगर कोई देश इन सिग्नल को रोक दे, तो मोबाइल में सही लोकेशन नहीं दिखेगी। विमानों और जहाजों को भी अपनी सही जगह और रास्ता पता करने में परेशानी हो सकती है। युद्ध के दौरान ऐसा करके दूसरे देश की सेना के लिए रास्ता तय करना और अपनी लोकेशन पता करना मुश्किल बनाया जा सकता है। गलत लोकेशन बताकर इस तरीके में नकली सिग्नल भेजकर मोबाइल, विमान या जहाज को उसकी गलत लोकेशन बताई जाती है। इसे स्पूफिंग कहते हैं। उदाहरण के लिए, कोई जहाज समुद्र में एक जगह मौजूद है, लेकिन नकली सिग्नल की वजह से उसके सिस्टम में दूसरी जगह दिखाई देने लगती है। इससे जहाज का रास्ता तय करना मुश्किल हो सकता है। सैटेलाइट को चलाने वाले कंप्यूटर पर हमला करके सैटेलाइट को जमीन पर मौजूद केंद्रों से नियंत्रित किया जाता है। हैकर इन केंद्रों के कंप्यूटर सिस्टम पर हमला कर सकते हैं। इससे सैटेलाइट से संपर्क टूट सकता है, जरूरी जानकारी चोरी हो सकती है या उसका कामकाज प्रभावित हो सकता है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प ने इजराइलियों से कहा- नेतन्याहू को दोबारा प्रधानमंत्री बनाएं:किसी और को चुना तो ईरान के खिलाफ अमेरिका को अकेले लड़ना पड़ेगा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इजराइल के लोगों से प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को दोबारा प्रधानमंत्री चुनने की अपील की है। उन्होंने कहा कि बीबी नेतन्याहू आपको कभी निराश नहीं करेंगे। पूरी खबर यहां पढ़ें…
जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड का 30,213 करोड़ रुपये का IPO 21 अक्टूबर को खुलने वाला है। इससे पहले एंकर बुक में कंपनी ने 212 एंकर निवेशकों से 8,109.85 करोड़ रुपये जुटाए। इस ऑफर के लिए संस्थागत निवेशकों की मांग 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक रही, जो एंकर बुक में उपलब्ध शेयरों की कुल कीमत से 30 गुना से भी ज्यादा है। कंपनी ने एंकर निवेशकों को प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर पर 7.24 करोड़ इक्विटी शेयर अलॉट किए। कैपिटल ग्रुप को 725 करोड़ रुपये के शेयर अलॉट हुए। दूसरे नंबर पर लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) रही, जिसे 499.98 करोड़ रुपये के शेयर अलॉट हुए।
एंकर बुक में ब्लैकरॉक, कैपिटल ग्रुप, फिडेलिटी इनवेस्टमेंट्स, टी. रो प्राइस, श्रोडर्स, जेपी मॉर्गन एसेट मैनेजमेंट, फ्रैंकलिन टेंपलटन, इनवेस्को और प्रूडेंशियल जैसी कई बड़ी वैश्विक कंपनियों ने भी हिस्सा लिया। दुनिया के कुछ प्रमुख सॉवरेन वेल्थ फंडों ने भी इस इश्यू में दिलचस्पी दिखाई। इनमें सिंगापुर का GIC, नॉर्वे का नॉर्जेस बैंक इनवेस्टमेंट मैनेजमेंट, अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (ADIA), कतर इनवेस्टमेंट अथॉरिटी (QIA), PSP इनवेस्टमेंट्स, कैलिफोर्निया स्टेट टीचर्स रिटायरमेंट और फ्लोरिडा रिटायरमेंट सिस्टम शामिल हैं। एंकर बुक में ड्रैगनियर इनवेस्टमेंट ग्रुप, जानूस हेंडरसन और नाइंटी वन जैसे ग्लोबल टेक स्पेशलिस्ट्स ने भी हिस्सा लिया।
भारत से म्यूचुअल फंड कंपनियां, जीवन बीमा कंपनियां और पेंशन फंड बने हिस्सा
भारत की टॉप 10 म्यूचुअल फंड कंपनियों ने भी इस ऑफरिंग में दिलचस्पी दिखाई है। इनमें SBI म्यूचुअल फंड, ICICI प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड, HDFC म्यूचुअल फंड, आदित्य बिड़ला सन लाइफ म्यूचुअल फंड, निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड, कोटक महिंद्रा म्यूचुअल फंड शामिल हैं। घरेलू म्यूचुअल फंडों को 25 फंड हाउसेज की 95 स्कीमों के जरिए 2,784.96 करोड़ रुपये के 2.489 करोड़ शेयर मिले। देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनियां और पेंशन फंड भी निवेशकों के इस समूह का हिस्सा हैं। इनमें LIC, HDFC लाइफ, SBI लाइफ, SBI पेंशन (NPS ट्रस्ट), HDFC पेंशन, ICICI प्रूडेंशियल और UTI पेंशन जैसी संस्थाएं शामिल हैं।
जीवन बीमा कंपनियों और पेंशन फंडों को 1,089.95 करोड़ रुपये के 97.4 लाख शेयर अलॉट हुए। इसके अलावा, भारत के प्रमुख फैमिली ऑफिसेज- जैसे कि इनाम फैमिली ऑफिस, प्रेमजी इनवेस्ट, जेरोधा फैमिली ऑफिस और HCL फैमिली ऑफिस ने भी जियो प्लेटफॉर्म्स में दिलचस्पी दिखाई है।
Jio Platforms IPO के लिए कितना है प्राइस बैंड
जियो IPO 23 अक्टूबर को बंद होगा। लगभग दो दशकों यानि कि 20 साल बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज ग्रुप की किसी कंपनी का IPO आ रहा है। यह साइज के मामले में देश का अब तक का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू है। प्राइस बैंड ₹1065-₹1119 प्रति शेयर है। लॉट साइज 12 शेयर है। IPO में 27 करोड़ नए शेयर जारी होंगे। अलॉटमेंट 26 अक्टूबर को फाइनल हो सकता है। कंपनी की लिस्टिंग NSE और BSE पर 28 अक्टूबर को हो सकती है। एंकर निवेशक IPO में 19 अक्टूबर को बोली लगा सकते हैं।
इस पब्लिक इश्यू में Jio Platforms के कर्मचारियों के लिए 500 करोड़ रुपये के शेयर और इसकी पेरेंट कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ रुपये के शेयर रिजर्व रखे गए हैं। कंपनी पात्र कर्मचारियों को फाइनल ऑफर प्राइस पर 54 रुपये प्रति शेयर की छूट (डिस्काउंट) के साथ शेयर ऑफर कर रही है। बचे हुए नेट इश्यू में 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) के लिए, 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NIIs) के लिए और 35 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व रहेगा।
Jio Platforms IPO: ब्रोकरेज पॉजिटव, ₹30213 करोड़ का इश्यू ‘सब्सक्राइब’ करने की सलाह
IPO के पैसे कैसे होंगे इस्तेमाल
जियो प्लेटफॉर्म्स के मुताबिक, IPO में नए शेयरों को जारी कर हासिल होने वाले पैसों का इस्तेमाल मुख्य रूप से कंपनी की टेलिकॉम यूनिट रिलायंस जियो इंफोकॉम के कर्ज को कुछ हद तक या पूरी तरह चुकाने के लिए और सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। जियो प्लेटफॉर्म्स के कारोबार में टेलिकॉम, डिजिटल सर्विसेज, उद्यम समाधान और उभरते टेक्नोलॉजी इनीशिएटिव शामिल हैं। इसकी टेलिकॉम यूनिट रिलायंस जियो इंफोकॉम लिमिटेड देश में सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनियों में से एक है।
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सोने की कीमतों में स्थिरता रही। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से महंगाई को लेकर चिंताएं कम हुई, जबकि अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट ने सोने को और सहारा दिया। शाम के सत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हाजिर सोना (स्पॉट गोल्ड) लगभग 4,165 डॉलर प्रति औंस पर स्थिर रहा, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स पिछले बंद भाव से 0.09 प्रतिशत बढ़कर 4,185 डॉलर प्रति औंस (12:40 GMT) के करीब पहुंच गया।
अंतरराष्ट्रीय रुझानों के अनुरूप, घरेलू बाजार में MCX पर हाजिर सोना शाम के सत्र में 1,45,353 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था, जबकि 4 दिसंबर की डिलीवरी के लिए MCX गोल्ड फ्यूचर्स 0.08 प्रतिशत गिरकर 1,47,793 रुपये प्रति 10 ग्राम (18:16 IST) पर आ गया।
LKP सिक्योरिटीज के रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटी और करेंसी) वाइस प्रेसिडेंट जतिन त्रिवेदी ने कहा, “सोने में काफी हद तक स्थिरता रही। 4,190 डॉलर के ऊपरी स्तरों से प्रॉफिट बुकिंग के बाद, यह कॉमेक्स (Comex) सोने के रुझान का अनुसरण कर रहा है। 4,200 डॉलर का स्तर एक अहम रेजिस्टेंस (बाधा) बना हुआ है, जबकि डॉलर इंडेक्स के मजबूत होने से सोने में तेजी सीमित हो रही है।”
डॉलर इंडेक्स 0.09 फीसदी बढ़कर 101.93 पर कारोबार कर रहा था, जबकि फ्यूचर्स ट्रेड में ब्रेंट क्रूड 1.17 प्रतिशत गिरकर 108.58 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
PL कैपिटल के कमोडिटी प्रमुख आशीष राजोदिया ने कहा, “अगर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी बनी रहती है और यील्ड कम रहती है, तो सोने और चांदी में रिकवरी जारी रह सकती है। हालांकि, अगर तेल की कीमतों में फिर से उछाल आता है या फेड (अमेरिकी केंद्रीय बैंक) की ओर से कोई सख्त रुख (hawkish signal) देखने को मिलता है, तो सोने की ये बढ़त खतरे में पड़ सकती है।”
उन्होंने आगे कहा कि बाजार अब यह मानकर चल रहा है कि 27-28 अक्टूबर की बैठक में फेड ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। “अब सबकी नजरें फेड के बयान के लहजे और महंगाई के आंकड़ों के अगले दौर पर टिकी हैं।” ओम्निसिएंस कैपिटल के CEO विकास गुप्ता का अनुमान है कि केंद्रीय बैंक सोने के बड़े खरीदार हैं, लेकिन साथ ही कुछ बड़े विक्रेता भी हो सकते हैं जो सोना बेच रहे हैं, जिससे सोने की कीमतें नियंत्रित बनी हुई हैं।
गुप्ता ने कहा, “भारत में त्योहारों और शादियों का सीजन आने वाला है। आमतौर पर इससे सोने की कीमतें बढ़ती हैं। हालांकि, फेड (Fed) द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना को देखते हुए, वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतें दबाव में रह सकती हैं। भारत में त्योहारों के दौरान सोने की कीमतों में थोड़ी तेजी आ सकती है, लेकिन उसके बाद कीमतें स्थिर रहने की संभावना है।”
(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
Silver Gold Price Today : मंगलवार को एशियाई बाजारों के शुरुआती कारोबार में सोने की कीमतों में गिरावट आई है। निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी नीति और रिटेल महंगाई के आंकड़ों पर नजर रखे हुए हैं। इससे ब्याज दरों की आगे की दिशा के बारे में संकेत मिल सकते हैं। फिलहाल हाजिर सोना (स्पॉट गोल्ड) 0.3% गिरकर 4,126.84 डॉलर प्रति औंस पर दिख रहा है। वहीं, दिसंबर की डिलीवरी वाला अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 0.3% गिरकर 4,146.00 डॉलर पर दिख रहा है।
निवेशकों का फोकस अब यूएस फेड की 27-28 अक्टूबर की नीति बैठक और अगले हफ्ते आने वाले अमेरिकी ‘पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर्स’ (PCE) डेटा पर है। यूएस फेड 2% महंगाई दर का लक्ष्य लेकर चल रहा है, इसलिए वह इस डेटा पर बहुत बारीकी से नजर रखे हुए है।
यूएस फेड ने सितंबर में अपनी बेंचमार्क ब्याज दरों को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 3.75%-4.00% की रेंज में कर दिया था। CME के ’फेडवॉच टूल’ के मुताबिक ट्रेडर्स का मानना है कि इस बात की 83% संभावना है कि केंद्रीय बैंक अगले हफ्ते दरों में कोई खास बदलाव नहीं करेगा,जबकि दिसंबर में दरों के बढ़ने की उम्मीद 94% बनी हुई है।
इस बीच बैंक ऑफ जापान के गवर्नर काज़ुओ उएदा ने कहा है कि रिटेल महंगाई दर केंद्रीय बैंक के 2% के लक्ष्य के काफी करीब है। ग्लोबल स्तर पर AI की भारी मांग और टाइट जॉब मार्केट के कारण महंगाई का दबाव बढ़ रहा है, जिससे ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की संभावना के संकेत मिलते हैं।
आमतौर पर, ऊंची ब्याज दरों का असर सोने की कीमतों पर पड़ता है क्योंकि इससे सोना (बुलियन) अपने पास रखने की ‘अपॉर्चुनिटी कॉस्ट’ बढ़ जाती है, जबकि सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता।
जियोपोलिटिकल फ्रंट की बात करें तो यमन के ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों ने सोमवार को कहा कि उन्होंने सऊदी अरब के एनर्जी इंफ्रा, हवाई अड्डों और सैन्य ठिकानों पर कई हमले किए हैं।
दूसरी कीमती धातुओं की बात करें तो, स्पॉट सिल्वर 0.7% गिरकर 56.69 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है। वहीं, प्लैटिनम 1,639.65 डॉलर पर सपाट दिख रहा है। जबकि, पैलेडियम 0.7% गिरकर 1,112.08 डॉलर पर आ गया है।
एक्सपर्ट्स की राय
स्मॉलकेस मैनेजर और ओमनीसाइंस कैपिटल के सीईओ विकास गुप्ता का कहना है कि अगले 2-3 के नजरिए से सोने को लेकर आम राय यही है कि इसकी कीमतें बढ़ेंगी। इस अवधि के दौरान महंगाई और ब्याज दरों में भी बढ़ोतरी होगी। हालांकि,ये दोनों चीजें एक साथ नहीं हो सकतीं।
विकास गुप्ता का मानना है कि केंद्रीय बैंक सोने के बड़े खरीदार हो सकते हैं,लेकिन साथ ही ऐसे बड़े विक्रेता भी हो सकते हैं जो उसी समय सोना बेचें,जिससे सोने की कीमतें नियंत्रण में बनी रह सकती है।
भारत में त्योहारों और शादियों का सीजन आने वाला है। आमतौर पर इससे सोने की कीमतें बढ़ती हैं। हालांकि,फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना को देखते हुए,ग्लोबल मार्केट में सोने की कीमतें दबाव में रह सकती हैं। भारत में त्योहारों के दौरान सोने की कीमतों में थोड़ी तेजी आ सकती है,लेकिन उसके बाद कीमतें स्थिर रहने की संभावना है।
ब्रिकवर्क रेटिंग्स में हेड ऑफ रिसर्च,राजीव शरण का कहना है कि भारत में दशहरा मनाया जा रहा है और इस समय 24-कैरेट सोना लगभग 1.48 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा है। पिछले महीने यह अपने रिकॉर्ड हाई से 6% से ज्यादा नीचे आया है। इस त्योहारी सीजन में जो बदलाव आया है वह सोने के प्रति भारतीय परिवारों के लगाव में नहीं,बल्कि इसे खरीदने के तरीके में है। भारतीय अपने त्योहारी बजट को तो स्टेबल रख रहे हैं,भले ही इसके लिए उन्हें कम वजन वाले आभूषण खरीदने पड़ें।
साथ ही लोग सोने के सिक्कों,बार और एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) में अधिक निवेश कर रहे हैं। यह बदलाव महत्वपूर्ण है क्योंकि त्योहारी खरीदारी अब केवल गहने खरीदने तक सीमित न रहकर, संपत्ति को सुरक्षित रखने के एक व्यवस्थित तरीके में बदल रही है। आगे चलकर, अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें सोने की कीमतों में बहुत तेज उछाल नहीं आने देंगी,जिससे निकट भविष्य में सोने की कीमत में 5% तक की उतार-चढ़ाव वाली रेंज बनी रहने की संभावना है। इस दशहरे पर,खरीदार कीमतों में आई हालिया गिरावट को किसी चेतावनी के रूप में नहीं, बल्कि खरीदारी शुरू करने के एक अच्छे मौके के तौर पर देख रहे हैं।
Gold Price Today: सोने में गिरावट पर लगा ब्रेक, दशहरा पर 24 और 22 कैरेट दोनों का भाव चढ़ा
डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
आज, 20 अक्टूबर को देश विजयादशमी (दशहरा) का त्योहार मना रहा है। अधर्म पर धर्म की जीत के इस पर्व पर देश में बैंक, स्कूल, सरकारी ऑफिस समेत कई अन्य संस्थान बंद हैं। शेयर बाजारों में भी छुट्टी है, यानि कि BSE और NSE पर ट्रेडिंग नहीं होगी। शेयर बाजार और MCX हर शनिवार और रविवार को बंद रहते हैं। लेकिन कुछ दूसरे खास मौकों और सार्वजनिक अवकाशों पर भी इनमें छुट्टी रहती है। 20 अक्टूबर को कमोडिटीज में ट्रेडिंग के प्लेटफॉर्म MCX (Multi Commodity Exchange) में दशहरा पर सुबह के सेशन में छुट्टी है। लेकिन शाम को 5 बजे से 11:30/11:55 बजे तक का सेशन ओपन है।
BSE में इक्विटी सेगमेंट, इक्विटी डेरिवेटिव सेगमेंट, करेंसी डेरिवेटिव्स सेगमेंट्स, ट्राई पार्टी रेपो सेगमेंट्स, NDS-RST में ट्रेडिंग हॉलिडे है। लेकिन कमोडिटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट और इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीप्ट्स (EGR) सेगमेंट में शाम का सेशन (शाम 5 बजे से 11:30/11:55 बजे तक) ओपन है।
इसी तरह NSE में भी इक्विटीज, इक्विटी डेरिवेटिव्स, करेंसी डेरिवेटिव्स, इंट्रेस्ट रेट डेरिवेटिव्स, निगोशिएटेड ट्रेड रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म, म्यूचुअल फंड्स, सिक्योरिटी लेंडिंग एंड बॉरोइंग स्कीम्स, कॉरपोरेट बॉन्ड्स, न्यू डेट सेगमेंट्स, इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीप्ट्स, सेगमेंट्स में मंगलवार को छुट्टी है। कमोडिटी डेरिवेटिव्स में सुबह के सेशन में छुट्टी है लेकिन शाम का सेशन (शाम 5 बजे से 11:30/11:55 बजे तक) ओपन है।
बाकी बचे साल में शनिवार-रविवार के अलावा और कब बाजार बंद
10 नवंबर: दिवाली-बलिप्रतिपदा
24 नवंबर: प्रकाश पर्व श्री गुरु नानक देव
25 दिसंबर: क्रिसमस
Muhurat Trading: दिवाली पर मुहूर्त ट्रेडिंग की टाइमिंग का हुआ ऐलान, दोपहर 2:20 बजे से खुलेगा बाजार
शनिवार/रविवार को पड़ रहे त्योहार
8 नवंबर: दिवाली लक्ष्मी पूजन
दिवाली के मौके पर मुहूर्त ट्रेडिंग रविवार, 8 नवंबर 2026 को होगी। मुहूर्त ट्रेडिंग का समय बाद में घोषित किया जाएगा।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका की विजयादशमी तिहाड़ जेल में ही मनेगी। दोनों को सोमवार को जमानत नहीं मिली। सौरव और रांका को सोमवार को मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन में स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट, एसईएम के सामने पेश किया गया। वहां पुलिस ने दोनों की न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की। पुलिस की मांग पर मजिस्ट्रेट ने दोनों को दो दिन और जेल में रखने का आदेश दिया। अब उन्हें बुधवार को फिर पेश किया जाएगा।
गौरतलब है कि दोनों को 13 अक्टूबर को जंतर मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। एसईएम कोर्ट ने उन्हें 14 अक्टूबर को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेजा था। दोनों को रविवार, 18 अक्टूबर को अदालत में पेश किया जाना था। लेकिन उससे पहले मजिस्ट्रेट ने कहा कि इन दोनों की रिहाई के लिए उनको धमकी भरे मैसेज मिल रहे हैं। सोमवार को भी सुनवाई में ज्यादा समय धमकी भरे मैसेज पर ही चर्चा हुई।
कॉकरोच जनता पार्टी ने आरोप लगाया कि सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई में जान बूझकर देरी की जा रही है। सीजेपी की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने कहा, ‘रविवार को जमानत पर सुनवाई के लिए मजिस्ट्रेट और सरकारी वकील दोपहर 12 बजे से इंतजार के बाद शाम करीब साढ़े पांच बजे पहुंचे’। उनका आरोप है कि दोनों नेताओं की रिहाई पर सुनवाई करने की बजाय मजिस्ट्रेट को मिले धमकी भरे संदेश पर चर्चा की गई।
रत्ना सिंह ने सवाल उठाया कि इस तरह के मैसेज का दोनों नेताओं की जमानत से क्या संबंध है? उन्होंने कहा कि सीजेपी ने मैसेज भेजने वाले की पहचान कर उसके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। सीजेपी का यह भी आरोप है कि दोनों नेताओं के जमानतदारों के दस्तावेजों की जांच में देरी की गई। उनके मुताबिक, चार जमानतदारों को साफ वजह बताए बिना खारिज कर दिया गया। जमानत के लिए बैंक की मुहर वाली फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद को दोबारा मंजूरी के लिए पेश करने पर भी पार्टी ने सवाल उठाए। उधर सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि दोनों नेताओं को जेल में रखने के लिए जमानत की प्रक्रिया में देरी की जा रही है। पार्टी ने कहा कि वह दोनों की रिहाई के लिए आगे भी कानूनी लड़ाई लड़ेगी।
IREDA Q2 Results: सरकारी कंपनी इंडियन रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (IREDA) ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट लगभग स्थिर रहा। हालांकि, ऑपरेटिंग प्रॉफिट में अच्छी बढ़त हुई। वहीं, पिछली तिमाही के मुकाबले खराब कर्ज के आंकड़ों में भी सुधार आया।
सितंबर तिमाही में IREDA का नेट प्रॉफिट 0.5% बढ़कर ₹552 करोड़ रहा। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी ने ₹549 करोड़ का मुनाफा कमाया था। दूसरी ओर, ऑपरेटिंग प्रॉफिट 16.5% बढ़कर ₹904 करोड़ पहुंच गया। एक साल पहले यह ₹776 करोड़ था।
IREDA के खराब कर्ज में कितनी कमी आई?
सितंबर तिमाही में IREDA का ग्रॉस NPA घटकर 3.57% रह गया। जून तिमाही में यह 3.76% था। यानी बैंक और फाइनेंस कंपनियों के लिए परेशानी माने जाने वाले खराब कर्ज के इस आंकड़े में सुधार हुआ।
नेट NPA भी 1.23% से घटकर 1.08% पर आ गया। रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में कंपनी का कर्ज कारोबार बढ़ रहा है। ऐसे में खराब कर्ज पर लगाम लगाए रखना उसके लिए अहम होगा।
FY26 में कंपनी ने बनाया था रिकॉर्ड
IREDA के लिए वित्त वर्ष 2025-26 अच्छा रहा था। कंपनी ने ₹1,873 करोड़ का रिकॉर्ड नेट प्रॉफिट दर्ज किया था। वहीं, कुल ऑपरेटिंग इनकम 23% बढ़कर ₹8,337 करोड़ हो गई थी। इस दौरान ऑपरेटिंग प्रॉफिट में 33% की बढ़ोतरी हुई थी।
कंपनी का बकाया लोन भी 22% बढ़कर ₹93,000 करोड़ के पार पहुंच गया था। इस दौरान IREDA ने ₹51,883 करोड़ के लोन मंजूर किए और ₹34,946 करोड़ का कर्ज बांटा। कंपनी की नेटवर्थ भी 34% बढ़कर ₹13,781 करोड़ हो गई थी।
पिछले साल बढ़ा था ग्रॉस NPA
मुनाफे और कारोबार में बढ़ोतरी के बावजूद खराब कर्ज कंपनी के लिए चिंता बना हुआ था। मार्च 2026 के अंत में ग्रॉस NPA 3.49% था। एक साल पहले यह 2.45% था। हालांकि, दिसंबर तिमाही के 3.75% के मुकाबले इसमें सुधार हुआ था। वहीं, नेट NPA घटकर 1.29% रह गया था। एक साल पहले यह 1.35% और पिछली तिमाही में 1.68% था।
नतीजों से पहले सोमवार को BSE पर IREDA का शेयर 1.48% गिरकर ₹106.50 पर बंद हुआ था। पिछले 1 साल में स्टॉक 30.48% क्रैश हुआ है।
OYO IPO: ओयो की पैरेंट कंपनी Prism नवंबर में ला सकती है IPO, ₹6650 करोड़ जुटाने की तैयारी
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Bajaj Finance Q2 Results: दिग्गज नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (NBFC) बजाज फाइनेंस ने 19 अक्टूबर को सितंबर तिमाही के नतीजे जारी किए। नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 28.8% बढ़कर ₹6,367 करोड़ हो गया। ब्याज से होने वाली कमाई और लोन के कारोबार में बढ़ोतरी से नतीजों को मजबूती मिली।
ब्याज से होने वाली कमाई बढ़ी
बजाज फाइनेंस की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) दूसरी तिमाही में 23.6% बढ़कर ₹13,335 करोड़ हो गई। एक साल पहले यह ₹10,785 करोड़ थी। वहीं, कंपनी की कुल नेट इनकम भी 23% बढ़कर ₹15,974 करोड़ हो गई।
AUM बढ़कर ₹5.85 लाख करोड़ हुआ
30 सितंबर 2026 तक कंपनी का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) 26% बढ़कर ₹5.85 लाख करोड़ हो गया। AUM का मतलब है कि कंपनी ने कुल कितने पैसे का लोन दे रखा है या मैनेज कर रही है। सितंबर तिमाही में इसमें ₹37,680 करोड़ जुड़े।
इस दौरान कंपनी ने 1.345 करोड़ नए लोन बांटे। यह एक साल पहले के मुकाबले 11% ज्यादा है। तिमाही में 44.2 लाख नए ग्राहक भी जुड़े। इसके साथ ही कंपनी के कुल ग्राहकों की संख्या बढ़कर 12.885 करोड़ हो गई। इसमें सालाना आधार पर 16% की बढ़ोतरी हुई।
लोन की वसूली कैसी रही?
सितंबर के अंत में बजाज फाइनेंस का ग्रॉस NPA 1.06% रहा। जून तिमाही में यह 0.96% था। वहीं, नेट NPA 0.39% से बढ़कर 0.42% हो गया। यानी पिछली तिमाही के मुकाबले खराब लोन का अनुपात थोड़ा बढ़ा। हालांकि, पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले स्थिति बेहतर रही। तब ग्रॉस NPA 1.24% और नेट NPA 0.60% था।
लोन के नुकसान की भरपाई के लिए कंपनी ने ₹2,166 करोड़ का प्रोविजन किया। यह पिछले साल से 4% ज्यादा है। इसमें आर्थिक जोखिमों को देखते हुए ₹337 करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान भी शामिल है। इसे हटा दें तो लोन लॉस और प्रोविजन 12% घटकर ₹1,829 करोड़ रह जाते हैं।
आगे कंपनी की क्या योजना है?
Bajaj Finance को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026-27 में वह 6 करोड़ से 6.2 करोड़ नए लोन बांटेगी। कंपनी 1.8 करोड़ से 2 करोड़ नए ग्राहक जोड़ने की भी योजना बना रही है। इसके अलावा, वित्त वर्ष के दौरान 150 से 175 नई लोकेशन खोलने का लक्ष्य है।
दूसरी तिमाही में कंपनी के लिए फंड जुटाना भी सस्ता हुआ। फंड की लागत 9 बेसिस पॉइंट घटकर 7.31% रह गई। कंपनी को उम्मीद है कि वित्त वर्ष के दौरान कुल नेट इनकम के मुकाबले ऑपरेटिंग खर्च का अनुपात 25 से 40 बेसिस पॉइंट तक सुधर सकता है।
नतीजों से पहले शेयर गिरा
सोमवार को नतीजे आने से पहले Bajaj Finance का शेयर 2.5% गिरकर ₹957.35 पर बंद हुआ। इस साल अब तक शेयर 1.6% नीचे है। वहीं, पिछले 12 महीनों में इसमें 11% से ज्यादा की गिरावट आई है।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) के प्रीपेड मोबाइल यूजर्स अपने रिचार्ज प्लान की वैलिडिटी, मेन बैलेंस और बचे हुए इंटरनेट डेटा की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए कंपनी कई विकल्प उपलब्ध कराती है। यूजर्स USSD कोड, WhatsApp, BSNL Selfcare ऐप और कस्टमर केयर की मदद ले सकते हैं।
अगर आप भी BSNL सिम इस्तेमाल करते हैं, तो इन तरीकों की मदद से पता लगा सकते हैं कि आपका रिचार्ज कब तक वैलिड है और कितना डेटा बचा हुआ है। इससे रिचार्ज खत्म होने से पहले नया प्लान चुनने और मोबाइल सेवाएं बिना रुकावट जारी रखने में मदद मिल सकती है।
1. USSD कोड से ऐसे चेक करें BSNL रिचार्ज की वैलिडिटी
अगर आपके फोन में इंटरनेट नहीं चल रहा है, तब भी आप USSD कोड के जरिए बैलेंस और प्लान की जानकारी चेक करने की कोशिश कर सकते हैं। इसके लिए स्मार्टफोन में इंटरनेट कनेक्शन की जरूरत नहीं होती।
इन स्टेप्स को फॉलो करें:
1. अपने मोबाइल फोन का डायलर खोलें।
2. BSNL नंबर से *123# डायल करें।
3. कॉल बटन दबाएं।
4. स्क्रीन पर मेन्यू आने का इंतजार करें।
5. उपलब्ध विकल्पों में मेन बैलेंस और प्लान वैलिडिटी से जुड़ी जानकारी देखें।
BSNL डेटा बैलेंस कैसे चेक करें?
इंटरनेट डेटा बैलेंस की जानकारी के लिए *124# डायल करके देखें। इसके बाद स्क्रीन पर आने वाले निर्देशों का पालन करें।
ध्यान रखें कि USSD कोड और मेन्यू की उपलब्धता सर्किल या टेलीकॉम सेवा के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। यदि कोड काम नहीं करता है, तो दूसरे तरीकों का इस्तेमाल करें।
2. WhatsApp से चेक करें BSNL प्लान की डिटेल्स
BSNL यूजर्स WhatsApp के जरिए भी अपने प्लान की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए आधिकारिक BSNL WhatsApp सेवा का इस्तेमाल करना जरूरी है।
कैसे करें चेक?
1. अपने फोन में BSNL की आधिकारिक WhatsApp सेवा का नंबर सेव करें।
2. WhatsApp खोलकर उस नंबर पर मैसेज भेजें।
3. बातचीत शुरू करने के लिए ‘Hi’ लिखकर भेजें।
4. ऑटोमैटिक रिप्लाई में दिए गए विकल्पों को देखें।
5. प्लान, वैलिडिटी या बैलेंस से संबंधित विकल्प चुनें।
इससे जुड़ी जानकारी में 1800-4444 नंबर दिया गया है। हालांकि, इस्तेमाल करने से पहले BSNL की आधिकारिक वेबसाइट या आधिकारिक संचार माध्यम से इस नंबर और उपलब्ध सेवाओं की पुष्टि कर लें। किसी भी अनजान नंबर पर OTP, बैंकिंग जानकारी या अन्य निजी विवरण साझा न करें।
3. BSNL Selfcare ऐप से मिलेगी पूरी जानकारी
अगर आप मोबाइल ऐप के जरिए अपना अकाउंट मैनेज करना पसंद करते हैं, तो BSNL Selfcare ऐप उपयोगी विकल्प हो सकता है। इसमें लॉगिन करने के बाद उपलब्ध सुविधाओं के अनुसार आप अपने मौजूदा प्लान और डेटा बैलेंस की जानकारी देख सकते हैं।
ऐप से जानकारी चेक करने का तरीका:
1. Google Play Store या Apple App Store से आधिकारिक BSNL Selfcare ऐप डाउनलोड करें।
2. ऐप खोलकर अपने BSNL मोबाइल नंबर से लॉगिन करें।
3. जरूरत पड़ने पर OTP वेरिफिकेशन पूरा करें।
4. ऐप के डैशबोर्ड पर अपने मौजूदा प्लान, वैलिडिटी और डेटा बैलेंस से संबंधित जानकारी देखें।
अगर ऐप में जानकारी अपडेट नहीं दिखाई दे रही है, तो उसे रिफ्रेश करें या दोबारा लॉगिन करके देखें। समस्या बनी रहने पर BSNL कस्टमर केयर से संपर्क किया जा सकता है।
4. कस्टमर केयर पर कॉल करके जानें रिचार्ज की वैलिडिटी
अगर USSD कोड, WhatsApp या ऐप से जानकारी नहीं मिल रही है, तो आप BSNL कस्टमर केयर की मदद ले सकते हैं।
– BSNL नंबर से: 1503 पर कॉल करें।
– दूसरे नेटवर्क से: 1800-180-1503 पर संपर्क करने की कोशिश करें।
कॉल करने के बाद वॉयस मेन्यू में बैलेंस, रिचार्ज या प्लान की जानकारी से संबंधित विकल्प चुनें। जरूरत पड़ने पर कस्टमर केयर प्रतिनिधि से बात करने का विकल्प चुन सकते हैं।
कॉल करने से पहले BSNL की आधिकारिक वेबसाइट पर संबंधित हेल्पलाइन नंबर की पुष्टि कर लेना बेहतर है।
BSNL रिचार्ज की वैलिडिटी चेक करना क्यों जरूरी है?
अपने मोबाइल रिचार्ज की वैलिडिटी और डेटा बैलेंस नियमित रूप से चेक करने से कई तरह की परेशानियों से बचा जा सकता है।
– समय पर रिचार्ज: प्लान की वैलिडिटी खत्म होने से पहले नया रिचार्ज करा सकते हैं।
– डेटा की जानकारी: पता चलता है कि कितना इंटरनेट डेटा बचा है।
– कॉलिंग सेवाओं पर नजर: प्लान की शर्तों के अनुसार कॉलिंग सुविधाओं की उपलब्धता समझने में मदद मिलती है।
– सही प्लान का चुनाव: अपनी जरूरत और इस्तेमाल के हिसाब से अगला रिचार्ज चुन सकते हैं।
– सेवाओं में रुकावट से बचाव: वैलिडिटी खत्म होने से पहले रिचार्ज करके मोबाइल सेवाएं जारी रखने में मदद मिलती है।
कुल मिलाकर, BSNL यूजर्स के पास रिचार्ज की जानकारी प्राप्त करने के कई विकल्प हैं। बिना इंटरनेट के USSD कोड आजमा सकते हैं, जबकि ऐप और कस्टमर केयर के जरिए भी जानकारी ली जा सकती है। WhatsApp का इस्तेमाल करने से पहले संबंधित नंबर की आधिकारिक पुष्टि जरूर करें।
EPFO Wage Limit Hike: केंद्र सरकार ने बीतें दिनों कर्मचारियों की मिनिमम सैलरी को लेकर एक बड़ा ऐलान किया था। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के तहत अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा कवरेज के लिए मासिक वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह कर दिया गया। 17 सितंबर से लागू हुए इस फैसले के बाद लगभग 51 लाख से अधिक नए कर्मचारियों को अब प्रोविडेंट फंड, पेंशन और इंश्योरेंस (EDLI) के दायरे में लाया जाएगा।
वैसे सिर्फ ₹25,000 से कम वेतन होना ही पात्रता की एकमात्र गारंटी नहीं है। कर्मचारियों को संबंधित योजनाओं के नियमों और शर्तों को पूरा करना होगा। आइए विस्तार से समझते हैं कि इस नई लिमिट का आपको कैसे फायदा मिलेगा और आप अपनी पात्रता कैसे चेक कर सकते हैं।
नए नियम के तहत कौन-कौन हो सकता है शामिल?
यह बदलाव मुख्य रूप से उन कर्मचारियों के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद है, जो पहले सिर्फ इसलिए EPF कवरेज से बाहर थे क्योंकि उनका मूल वेतन (Basic Salary + DA) ₹15,000 प्रति माह से अधिक था।
श्रम मंत्रालय के अनुसार, जिन कर्मचारियों का वेतन ₹15,000 से ₹25,000 के बीच है और वे संबंधित शर्तों को पूरा करते हैं, उन्हें अब EPF के तहत नामांकित किया जा सकता है। जो कर्मचारी पहले से ही EPF के सदस्य हैं, उनका योगदान उनके लागू वेज बेस और सदस्यता की स्थिति पर निर्भर करेगा।
EPF, EPS और EDLI में कैसे कराएं अपना नामांकन?
कर्मचारी व्यक्तिगत रूप से किसी अलग सार्वजनिक फॉर्म के जरिए तीनों योजनाओं में सीधे रजिस्ट्रेशन नहीं कर सकते। इसके लिए नियोक्ता को ही प्रक्रिया पूरी करनी होती है:
एलिजिबिलिटी चेक करें: सबसे पहले यह पक्का करें कि आपका मासिक वेतन ₹25,000 से अधिक नहीं है और आप योजना की अन्य शर्तों को पूरा करते हैं।
HR या पेरोल टीम से संपर्क करें: अपने नियोक्ता की HR या अकाउंट्स टीम से संपर्क करें ताकि वे आपकी पात्रता सत्यापित कर आपका एनरोलमेंट शुरू कर सकें।
जरूरी दस्तावेज दें: अपनी पहचान, रोजगार विवरण, आधार विवरण और बैंक खाते की जानकारी नियोक्ता को सौंपें।
कंट्रिब्यूशन वेरिफाई करें: नामांकन पूरा होने के बाद अपनी सैलरी स्लिप और EPFO पासबुक चेक करें ताकि यह पक्का हो सके कि पीएफ कटौती और योगदान सही से दर्ज हो रहा है।
EPF, EPS और EDLI से आपको क्या-क्या फायदे मिलेंगे?
| योजना का नाम | मुख्य लाभ |
| कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) | कर्मचारी और नियोक्ता के योगदान और उस पर मिलने वाले ब्याज के जरिए रिटायरमेंट के लिए बड़ा फंड बनता है। |
| कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) | अर्हता सेवा और पेंशन नियमों के आधार पर पात्र सदस्यों को आजीवन पेंशन मिलती है। |
| कर्मचारी जमा सम्बद्ध बीमा (EDLI) | EPF सदस्यता से जुड़ा मुफ्त जीवन बीमा कवर, जिसके तहत अनहोनी की स्थिति में नॉमिनी को क्लेम की राशि मिलती है। |
क्या अब आपकी PF कटौती बढ़ जाएगी?
नई वेज सीलिंग लागू होने से पात्र कर्मचारियों के योगदान की गणना के लिए वेतन आधार बढ़ सकता है। नए ढांचे के तहत, अंशदान के लिए अधिकतम वेतन सीमा ₹25,000 या कर्मचारी का वास्तविक वेतन जो भी कम हो वो मानी जाएगी।
इस गणित को ऐसे समझिए, अगर आपके ₹25,000 के पूरे वेतन आधार पर 12% पीएफ कटता है, तो कर्मचारी का मासिक योगदान ₹3,000 होगा। नियोक्ता का 12% योगदान नियमानुसार EPF और EPS में बंटेगा, जबकि EDLI का प्रीमियम अलग से पूरी तरह नियोक्ता द्वारा दिया जाएगा।


