46 पैसे का बिल चुकाना भूला शख्स, बैंक ने ठोक दिया ₹1200 का जुर्माना! भड़के यूजर ने X पर सुनाई खरी-खोटी

Credit Card Bill Viral News: क्रेडिट कार्ड बिल का पेमेंट करते समय अगर आप एक रुपये से भी कम की चूक करते हैं, तो यह आपको कितना भारी पड़ सकता है? इसका एक ताजा और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। एक शख्स ने अपने क्रेडिट कार्ड बिल में से महज 46 पैसे कम चुकाए, जिसके बदले बैंक ने उस पर ₹1200 से अधिक का जुर्माना और अन्य फीस लगा दी।

पीड़ित ग्राहक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपना गुस्सा जाहिर करते हुए एचडीएफसी बैंक के कस्टमर केयर अधिकारियों को ‘अज्ञानी और घमंडी’ तक कह दिया। यह पोस्ट देखते ही देखते इंटरनेट पर वायरल हो गई और लोग बैंक के इस रवैये पर अपनी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देने लगे।

क्या है पूरा मामला?

पीड़ित ग्राहक को बैंक की तरफ से ₹10,649.46 का क्रेडिट कार्ड बिल मिला था। भुगतान करते समय गलती से ग्राहक ने दशमलव के बाद के पैसे छोड़ दिए और सिर्फ ₹10,649 का ही पेमेंट किया। यानी कुल बिल में से महज 46 पैसे बकाया रह गए। इस 46 पैसे के मामूली शॉर्टफॉल की वजह से बैंक ने ग्राहक पर ₹1200 से ज्यादा का लेट पेमेंट चार्ज और पेनल्टी ठोक दी।

इस पर ग्राहक ने X पर HDFC Bank को टैग करते हुए लिखा, ‘प्रिय HDFC बैंक, आपने मुझे ₹10,649.46 का क्रेडिट कार्ड बिल भेजा था। गलती से मैंने ₹10,649.00 का भुगतान किया, 46 पैसे छूट गए और आपने 46 पैसे की इस चूक के लिए मुझ पर ₹1200 से ज्यादा का लेट पेमेंट चार्ज लगा दिया? क्या आप इसे जल्द से जल्द रिवर्स करेंगे?

यूजर बैंक के कस्टमर सपोर्ट पर भी भड़ास निकाली और लिखा कि वहां के प्रतिनिधि जितने अज्ञानी हैं, उतने ही घमंडी भी हैं।

सोशल मीडिया पर भड़के लोग, मिली तरह-तरह की सलाह

यह पोस्ट सामने आते ही यूजर्स बैंक के इस एक्शन की आलोचना करने लगे और अपने पुराने अनुभव शेयर करने लगे। एक यूजर ने लिखा, ‘क्रेडिट कार्ड कैंसल करो, उसके 4 टुकड़े करके कचरे के डिब्बे में फेंक दो। उन्हें कोर्ट में साबित करने दो कि 0.46 रुपये का ब्याज ₹1200 कैसे बन गया।’

एक अन्य यूजर ने सुझाव दिया कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के दिशानिर्देशों के अनुसार, ₹10,649.46 जैसे आंकड़े को राउंड ऑफ करके ₹10,649 किया जाना चाहिए, क्योंकि 50 पैसे से कम की किसी भी भिन्न को नजरअंदाज कर दिया जाता है।

कुछ यूजर्स ने HDFC बैंक के साथ अपने बुरे अनुभवों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने भी बैंक के खराब व्यवहार के कारण अपने अकाउंट्स और एफडी बंद करवा दिए थे।

हालांकि, एक वर्ग ऐसा भी था जिसने ग्राहक को ही जिम्मेदार ठहराया। एक यूजर ने लिखा, ‘यह आपकी गलती है, भाई। इसे बैंक पर मत डालो। यह उन लोगों के लिए एक बहुत अच्छा सबक है जो हर चीज को हल्के में लेते हैं।’

क्रेडिट कार्ड पेनल्टी और भारी-भरकम चार्ज से कैसे बचें?

क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते समय थोड़ी सी लापरवाही बड़ा नुकसान करा सकती है। ऐसी स्थितियों से बचने के लिए इन बातों का खास ध्यान रखें:

Auto-Debit ऑन रखें: अपने बैंक अकाउंट से क्रेडिट कार्ड बिल का ‘Total Amount Due’ ऑटो-डेबिट मोड पर सेट करें, ताकि दशमलव के पैसे भी अपने आप सही समय पर कट जाएं।

राउंड ऑफ न करें: जब भी खुद से मैनुअल पेमेंट करें, बिल में लिखी दशमलव वाली सटीक रकम ही ट्रांसफर करें, खुद से कोई आंकड़ा न घटाएं।

गलती होने पर तुरंत नोडल अधिकारी से संपर्क करें: अगर गलती से ऐसा लेट चार्ज लग भी जाए, तो कस्टमर केयर के अलावा बैंक के Grievance Redressal Officer / Nodal Officer को ईमेल करें और चार्जेस रिवर्स करने की रिक्वेस्ट करें।

RBI Ombudsman में शिकायत करें: अगर बैंक आपकी जायज बात नहीं सुनता है और पैसे वापस नहीं करता है, तो आप आरबीआई के बैंकिंग लोकपाल के पास ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

डिजिटल दौर में ऑटोमेटेड बैंकिंग सिस्टम बिल का पूरा भुगतान न होने पर अपने आप लेट फीस और पेनल्टी जनरेट कर देते हैं, फिर चाहे बकाया राशि 1 रुपये से भी कम क्यों न हो। ऐसे में समझदारी इसी में है कि बिल की पाई-पाई का भुगतान करें ताकि बैंकों के इन कड़े पेनल्टी रूल्स से बचा जा सके।

Disclaimer: यह खबर सोशल मीडिया (X) पर वायरल यूजर पोस्ट पर आधारित है। यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। मनीकंट्रोल इसकी पुष्टि नहीं करता है।

दिल्ली लक्ष्मी योजना के तहत 26 अगस्त से बांटे जाएंगे सैंक्शंस लेटर, महिलाओं के खाते में इस दिन से आएंगे ₹2,500!

Delhi Lakshmi Yojana 2026: दिल्ली सरकार की ‘लक्ष्मी योजना’ के तहत पात्र महिलाओं को 26 अगस्त से आर्थिक सहायता के सैंक्शन लेटर मिलना शुरू हो जाएंगे। योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार (18 अगस्त) को दिल्ली सचिवालय में हुई बैठक के बाद यह अहम जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने बताया कि सैंक्शन लेटर जारी होने के बाद योजना की राशि सीधे लाभार्थी महिलाओं के बैंक अकाउंट में भेजी जाएगी। सरकार के अनुसार, 1 सितंबर से महिलाओं के खातों में 2,500 रुपये की राशि जमा होना शुरू हो जाएगी।

सरकार ने 1 अगस्त से इस योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू की थी। आवेदन मिलने के बाद सरकार ने आवेदनकर्ताओं की जांच और लाभार्थियों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि योजना का लाभ पात्र महिलाओं तक समय पर पहुंचे और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जाए।

कौन महिलाएं होंगी पात्र?

इस योजना का लाभ लेने के लिए महिला की उम्र 21 से 60 साल के बीच होनी चाहिए। साथ ही वह दिल्ली की निवासी हो और उसकी पारिवारिक आय निर्धारित सीमा के भीतर हो। आवेदन करने वाली महिला की आयु 18 साल से अधिक होने के साथ-साथ वह दिल्ली में कम से कम 10 वर्षों से रह रही होनी चाहिए। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि महिला या उसके परिवार में कोई सरकारी कर्मचारी अथवा पेंशनभोगी होने पर वह योजना के लिए पात्र नहीं होगी। आयकर दाता परिवारों को भी योजना के दायरे से बाहर रखा गया है।

इसके अलावा, जो महिलाएं पहले से किसी अन्य सरकारी योजना के तहत नियमित आर्थिक सहायता प्राप्त कर रही हैं, वे भी इस योजना का लाभ नहीं ले सकेंगी। सरकारी नियमों के अनुसार, जिन महिलाओं या उनके परिवार के सदस्यों के पास चार पहिया वाहन है, उन्हें भी योजना का लाभ नहीं मिलेगा। इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहन को इस नियम से अलग रखा गया है।

बैंक खाते में सीधे पहुंचेगी स्कीम की राशि

सरकार ने योजना में भुगतान की प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी रखने पर जोर दिया है। पात्र महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये सीधे उनके बैंक अकाउंट में डायरेक्ट भेजे जाएंगे। इसके लिए लाभार्थी के बैंक खाते का सत्यापन किया जाएगा। सरकार के मुताबिक, यदि किसी महिला के परिवार में सरकारी कर्मचारी, आयकरदाता या निर्धारित सीमा से अधिक आय वाला सदस्य है, तो वह इस योजना के लिए पात्र नहीं होगी। वहीं, परिवार के किसी सदस्य के पास चार पहिया वाहन होने की स्थिति में भी आवेदन अस्वीकार किया जा सकता है।

आवेदन प्रक्रिया पर रखी जा रही नजर

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अधिकारियों के साथ बैठक में योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आवेदन प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता न हो और पात्र महिलाओं को समय पर योजना का लाभ मिले। सरकार ने बताया कि आवेदन की जांच पूरी होने के बाद लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र दिए जाएंगे।

26 अगस्त से स्वीकृति पत्र मिलने शुरू होंगे और 1 सितंबर से बैंक खातों में आर्थिक सहायता पहुंचने की प्रक्रिया शुरू होगी। सरकार का कहना है कि लक्ष्मी योजना का उद्देश्य दिल्ली की जरूरतमंद और पात्र महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। योजना के लागू होने के बाद बड़ी संख्या में महिलाओं को हर महीने सीधे बैंक खाते में वित्तीय सहायता मिलने की उम्मीद है।

पैसा प्राप्त करने का विकल्प

लाभार्थियों को राशि प्राप्त करने के लिए विकल्प दिए गए हैं:-

पहला विकल्प: दैनिक खर्चों के लिए ₹1,000 प्रति माह सेंट्र्ल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) वॉलेट में प्राप्त कर सकते हैं और बाकी ₹1,500 को आवर्ती जमा (RD) या फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) खाते में जमा करा सकते हैं।

दूसरा विकल्प: लंबी अवधि की बचत के लिए पूरी ₹2,500 की राशि को RD या FD में जमा करा सकते हैं।

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कम होंगे बैंकर्स के लिए अदालतों के चक्कर! बदला 135 पुराना बैंकिंग कानून, ये है 5 बड़ी बातें

संसद ने इस महीने की शुरुआत में बैंकर्स बुक एविडेंस बिल 2026 (Bankers’ Books Evidence Bill 2026) पारित किया। इसका लक्ष्य बैंक रिकॉर्ड से जुड़े 135 साल पुराने कानून को बदलना और पारंपरिक बैंकिंग रिकॉर्ड को डिजिटल दौर के अनुरूप बनाना है। इससे जुड़ा कानून पहली बार वर्ष 1891 में उस समय पास किया गया था, जब बैंकिंग रिकॉर्ड्स मुख्य रूप से कागजी रूप में रखे जाते थे। अब नए कानून में बैंक के डिजिटल रूप को अधिक महत्ता दी गई है और इससे कोर्ट-कचहरी के मामले में बैंकिंग रिकॉर्ड को हासिल करने तथा इस्तेमाल करने के तरीके में बदलाव होगा। यहां इस कानून से जुड़े पांच अहम पहलू दिए गए हैं। हालांकि इससे ग्राहकों के डेटा की प्राइवेसी को लेकर चर्चा शुरू हो सकती है।

डिजिटल बैंक रिकॉर्ड्स को सबूत के तौर पर मान्यता

सबसे बड़े बदलावों में से एक इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल रिकॉर्ड्स को बैंकर्स बुक्स के तौर पर मान्यता देना है। साल 1891 का कानून फिजिकल बुक्स, लेजर्स और दूसरे ट्रेडिशनल रिकॉर्ड्स को ध्यान में रखकर बनाया गया था। नए बिल के मुताबिक बैंकों को अधिकतर ट्रांजैक्शन और अकाउंट्स की जानकारी इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखनी ही होगी। इसका मतलब है कि बैंकों के डिजिटल रिकॉर्ड किसी कानूनी मामले में साक्ष्य के तौर पर इस्तेमाल किए जा सकेंगे।

असली रिकॉर्ड की जगह सर्टिफाइड कॉपी का इस्तेमाल

नए बैंकिंग कानून में मौजूदा नियम को बनाए रखा गया है, जिसके तहत बैंक रिकॉर्ड की सर्टिफाइड कॉपी या उनके किसी हिस्से को सबूत के तौर पर पेश किया जा सकता है। यह इसलिए अहम है क्योंकि बैंकों के पास भारी-भरकम ट्रांजैक्शन डेटा होता है। हर कानूनी मामले के लिए मूल रिकॉर्ड पेश करने बहुत समय लग सकता है। हालांकि अब नई व्यवस्था के तहत असली बैंकर बुक के बजाय सर्टिफाइड कॉपी से काम चल जाएगा, जिससे अदालतों के लिए बैंक ट्रांजैक्शन की जांच करना आसान हो जाएगा। हालांकि इसमें ऐसे प्रावधान भी किया गया है जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि रिकॉर्ड भरोसेमंद हैं।

कानूनी एजेंसियों की ग्राहकों के खातों की जानकारी मांगना

इस बिल में एक प्रावधान है जिसे लेकर बहस छिड़ सकती है। इसके तहत लॉ एंफोर्समेंट एजेंसियां किसी ग्राहक के बैंक अकाउंट की जानकारी मांग सकते हैं। इस बिल में कुछ खास रैंक के पुलिस अधिकारियों को बिना किसी अदालती आदेश के सीधे बैंक से ही बैंकिंग अकाउंट की जानकारी हासिल करने का अधिकार मिला है। कुछ मामलों में बैंकों को इसके बारे में ग्राहकों को भी बताना होगा लेकिन किसी जांच, वित्तीय अपराध या नेशनल सिक्योरिटीज से जुड़े मामले में ऐसी कोई बाध्यता नहीं है।

बैंक अधिकारियों को बार-बार कोर्ट में पेश होने से राहत

नए बिल में बैंक अधिकारियों को ऐसी स्थितियों में राहत दी गई है, जब उनके इंस्टीट्यूशंस किसी कानूनी कार्यवाही में सीधे तौर पर शामिल न हों। किसी अधिकारी को बैंक के रिकॉर्ड पेश करने या उनमें शामिल लेन-देन को साबित करने के लिए कोर्ट में पेश होने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है। हालांकि रिकॉर्ड की सत्यता पर संदेह या जांच के आदेश का पालन नही होने की स्थिति में कोर्ट रिकॉर्ड पेश करने का आदेश दे सकता है। इसका लक्ष्य बैंक अधिकारियों पर रूटीन बैंकिंग रिकॉर्ड से जुड़े कोर्ट केस में बार-बार पेश होने का बोझ कम करना है।

फाइनेंस सेक्टर की दूसरी एंटिटीज तक बढ़ा दायरा

नए बिल से केंद्र सरकार को इसके प्रावधान फाइनेंशियल सेक्टर दूसरी एंटिटीज या क्लास ऑफ एंटिटीज जैसे कि NBFC (नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनीज), पेंशन फंड्स, बीमा कंपनियां इत्यादि पर लागू करने का अधिकार मिलता है। इन एंटिटीज पर कानून लागू करते समय शर्तें, छूट या बदलाव भी तय कर सकती है।

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मुसीबत में कौन सा फंड देगा आपका साथ? जानिए EPF, NPS, PPF और म्यूचुअल फंड्स से निकासी की पूरी टाइमलाइन

Retirement Options Withdrawal Timelines: रिटायरमेंट फंड या लंबी अवधि का पोर्टफोलियो बनाते समय हम अक्सर सिर्फ ब्याज दर या मिलने वाले रिटर्न पर ध्यान देते हैं। लेकिन इमरजेंसी के समय सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह होता है कि रिडेम्पशन या विदड्रॉल रिक्वेस्ट डालने के बाद पैसा आपके बैंक खाते में कितनी जल्दी आता है?

कुछ ऑप्शन जहां 24 से 48 घंटे में पैसे ट्रांसफर कर देते हैं, वहीं कुछ में हफ्तों का समय लग जाता है। आनंद राठी वेल्थ लिमिटेड के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर जसमीत सिंह के मुताबिक, ‘लिक्विड और इलिक्विड इंस्ट्रूमेंट्स के अंतर को समझना जरूरी है। क्योंकि हर निवेश तुरंत पैसे देने के लिए नहीं बना होता।’

आइए जानते हैं भारत के 4 सबसे लोकप्रिय निवेश विकल्पों EPF, NPS, PPF और Mutual Funds की निकासी टाइमलाइन और उनके नियमों का पूरा गणित।

1. Mutual Funds: सबसे तेज और आसान निकासी (1 से 3 दिन)

अगर आपको तुरंत और बिना किसी शर्त के पैसे की जरूरत है, तो ओपन-एंडेड म्यूचुअल फंड सबसे बेहतर विकल्प साबित होते हैं। लिक्विड और ओवरनाइट फंड्स का पैसा कट-ऑफ टाइम के आधार पर T+1 (अगले वर्किंग डे) या उसी दिन क्रेडिट हो जाता है। इक्विटी और अन्य डेट फंड्स का पैसा 1 से 3 कार्य दिवसों (T+1 to T+3) में बैंक अकाउंट में आ जाता है।

इसमें पैसा निकालने के लिए किसी विशेष कारण (जैसे- बीमारी, शादी या पढ़ाई) की आवश्यकता नहीं होती। वैसे ये मार्केट-लिंक्ड होते हैं, इसलिए NAV में उतार-चढ़ाव का जोखिम बना रहता है।

2. NPS (नेशनल पेंशन सिस्टम): T+2 सेटलमेंट टाइमलाइन

राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली में क्लेम प्रोसेसिंग की समयसीमा को काफी सुधारा गया है। सितंबर 2022 से PFRDA ने NPS एग्जिट विदड्रॉल की समयसीमा T+4 से घटाकर T+2 (2 सेटलमेंट डेज) कर दी है। हालांकि, पूरा फंड ट्रांसफर होने की प्रक्रिया में एन्युटी खरीदने के नियम भी लागू होते हैं।

एनपीएस टियर-1 खाते से आप केवल अपने योगदान का अधिकतम 25% ही निकाल सकते हैं। इसके लिए विशिष्ट कारणों (जैसे- बीमारी, घर, बच्चों की पढ़ाई) का होना अनिवार्य है।

3. कर्मचारी भविष्य निधि(EPF): 3 दिन से 20 दिन की समयसीमा

जून 2026 में लागू नए कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 2026 के तहत ईपीएफओ ने क्लेम सेटलमेंट के नियमों को सख्त और तेज किया है। पूरी तरह से सही पाए गए क्लेम को निपटाने के लिए 20 दिनों की वैधानिक समयसीमा तय की गई है। अगर बिना किसी कारण 20 दिनों से अधिक देरी होती है, तो कमिश्नर के वेतन से 12% वार्षिक ब्याज की दर से हर्जाना वसूला जा सकता है। ऑनलाइन और ऑटोमेटेड सिस्टम के जरिए योग्य क्लेम 3 से 5 दिनों में सेटल हो जाते हैं।

ईपीएफ से केवल तय कारणों जैसे- मेडिकल, शादी, घर आदि के लिए ही आंशिक निकासी संभव है। अगर आधार-UAN लिंकिंग या एंप्लॉयर वेरिफिकेशन में कोई गड़बड़ी हो, तो पैसे आने में 2 से 3 हफ्ते का समय लग सकता है।

4. पब्लिक प्रॉविडेंट फंड(PPF): कोई निश्चित T+2 वादा नहीं

पब्लिक प्रॉविडेंट फंड में पैसा निकालने की कोई केंद्रीय ऑनलाइन T+1 या T+2 व्यवस्था नहीं है। आवेदन करने के बाद बैंक या पोस्ट ऑफिस की आंतरिक प्रक्रिया के आधार पर 2 से 5 कार्य दिवसों में पैसा अकाउंट में आता है। पीपीएफ में 5 वित्तीय वर्ष पूरे होने के बाद ही साल में केवल एक बार आंशिक निकासी की अनुमति होती है, जो कि पात्र बैलेंस के एक तय हिस्से तक ही सीमित रहती है।

EPF vs NPS vs PPF vs Mutual Funds किसमें कितना समय और कितनी छूट?

EPF vs NPS vs PPF vs Mutual Funds किसमें कितना समय और कितनी छूट?

एक्सपर्ट्स की ये है सबसे जरूरी सलाह

रिटायरमेंट पोर्टफोलियो बनाते समय केवल एक ही इंस्ट्रूमेंट पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। आनंद राठी वेल्थ के जसमीत सिंह सलाह देते हैं कि, ‘निवेशकों को अपने कम से कम 6 महीने के खर्च का इमरजेंसी फंड आसानी से सुलभ विकल्पों जैसे लिक्विड म्यूचुअल फंड या बैंक एफडी में रखना चाहिए, ताकि अनिश्चितता के समय लंबे समय के लिए किए गए EPF, PPF या NPS निवेश को समय से पहले न तोड़ना पड़े।’

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

UAE में छिपा था 13 हजार करोड़ की ड्रग्स का आरोपी, NCB वीरेंद्र सिंह बसोया को भारत लाई, क्या बोले अमित शाह?

UAE में छिपा था 13 हजार करोड़ की ड्रग्स का आरोपी, NCB वीरेंद्र सिंह बसोया को भारत लाई, क्या बोले अमित शाह?

Drug Smuggler Virendra Singh Basoya

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने UAE से भगोड़े ड्रग किंगपिन वीरेंद्र सिंह बसोया को भारत वापस लाने में कामयाबी हासिल की है। शाह ने इसे नशीले पदार्थों के खिलाफ मोदी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति में एक नया मील का पत्थर बताया। ALSO READ: सत्ता की भूख में सनातन राष्ट्र के टुकड़े किए, हिंदू बाहुल्य सिंध भी पाकिस्तान को दे दिया, विभाजन विभीषिका दिवस पर योगी की हुंकार

 

अमित शाह ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि मोदी सरकार विदेशों में छिपे ड्रग तस्करों का लगातार पता लगा रही है और एक कठोर दृष्टिकोण के साथ उनके पूरे पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) को नष्ट कर रही है।

 

उन्होंने कहा कि नशीली दवाओं के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति में एक नया मील का पत्थर स्थापित करते हुए, एनसीबी ने यूएई से भगोड़े ड्रग सरगना वीरेंद्र सिंह बसोया की वापसी सुनिश्चित की है। 'ऊपर से नीचे' और 'नीचे से ऊपर' के दृष्टिकोण से अपराधी का पता लगाकर, हमारी एजेंसियों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि ड्रग तस्कर चाहे कहीं भी छिप जाएं, वे भारतीय कानून के लंबे हाथों से बच नहीं सकते। ALSO READ: Census 2027: पहली बार जाति भी पूछेगी सरकार, बैंक अकाउंट से कोविड वैक्सीन तक होंगे ये 40 सवाल

कौन है ड्रग किंगपिन वीरेंद्र सिंह बसोया?

ड्रग किंगपिन वीरेंद्र सिंह बसोया को यूएई से दिल्ली लाया जा चुका है। वह दिल्ली, गुजरात और पंजाब से बरामद की गई 13 हजार करोड़ की ड्रग्स बरामदगी मामले में आरोपी है। उसे इस सिंडिकेट का मास्टरमाइंड भी माना जा रहा है। गिरफ्तारी से पहले ही बसोया दुबई भाग गया। इसके बाद, एनसीबी में भी उसके खिलाफ केस दर्ज किया था।

 

वीरेंद्र के भाई रविंदर बसोया को भी पुलिस ने अक्टूबर 2024 में ड्रग तस्करी मामले में गिरफ्तार किया था। उसकी कार से करीब 1.096 किलो ड्रग्स बरामद हुई थी। वीरेंद्र के बेटे ऋषभ बसोया का नाम भी इस नेटवर्क में सामने आया है। वीरेंद्र को जून 2026 में इंटरपोल के नोटिस के आधार पर यूएई में गिरफ्तार किया गया था।

फुकेट-दिल्ली फ्लाइट हादसे पर एयर इंडिया का बड़ा एक्शन! सभी पायलटों की डोप टेस्टिंग शुरू, एयरबस रिपोर्ट में बड़ा खुलासा!

Air India Pilot Dope Test: 4 अगस्त को एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली फ्लाइट के पायलट-इन-कमांड का डोप टेस्ट पॉजिटिव आने के बाद, एयरलाइन ने गुरुवार से अपने ग्रुप – एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस – के सभी पायलटों का ड्रग टेस्ट करने का फैसला किया है। यह एक बार की जाने वाली प्रक्रिया है और साइकोएक्टिव पदार्थों की टेस्टिंग के लिए DGCA (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन) के नियमों में बताई गई जरूरतों से कहीं ज्यादा है।

एयरलाइन ने ग्रुप के पायलटों को भेजे एक इंटरनल मैसेज में कहा, “जैसा कि आप जानते हैं, एयर इंडिया पहले से ही भारत के DGCA की सभी जरूरी शर्तों का पूरी तरह पालन करती है। ये शर्तें यूरोप और अमेरिका जैसे बड़े एविएशन क्षेत्रों में लागू नियमों जैसी ही हैं। फिर भी, हमें लगता है कि अब इससे आगे बढ़कर कदम उठाने की जरूरत है। इसलिए, हमने ग्रुप के सभी पायलटों की पूरी स्क्रीनिंग करने का फैसला किया है ताकि यह पता चल सके कि वे ऐसे किसी पदार्थ या दवा का इस्तेमाल तो नहीं कर रहे हैं जिनकी मौजूदा नियमों के तहत इजाजत नहीं है। यह टेस्टिंग जरूरी है और आज, 13 अगस्त 2026 से शुरू होगी।”

दोनों ग्रुप एयरलाइंस के पास कुल मिलाकर लगभग 5,000 पायलट और करीब 300 विमानों का बेड़ा है। हालांकि, एयर इंडिया ने पायलटों को भेजे गए इस मैसेज पर कोई टिप्पणी नहीं की। सूत्रों के मुताबिक, यह टेस्टिंग सुरक्षा के उच्चतम मानकों को सुनिश्चित करने और यात्रियों व इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को भरोसा दिलाने के लिए की जा रही है।

साइकोएक्टिव पदार्थों की टेस्टिंग पर DGCA की सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट्स (CAR) के अनुसार, हर साल 10% फ्लाइट क्रू, अन्य पायलटों और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स का रैंडम डोप टेस्ट करना अनिवार्य है। रूटीन रैंडम टेस्टिंग के अलावा, ये टेस्ट आमतौर पर सुरक्षा से जुड़ी किसी घटना के बाद भी किए जाते हैं, जैसा कि 4 अगस्त की एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली फ्लाइट के मामले में हुआ।

वहीं, पायलटों को भेजे गए संदेश में कहा गया है, “यह टेस्ट गुरुग्राम एकेडमी में ट्रेनिंग के साथ-साथ, उड़ान के बाद हमारे फ्लाइट ब्रीफिंग सेंटर्स/एयर इंडिया ऑफिस में या आपके संबंधित बेस द्वारा बताई गई जगहों पर किया जाएगा। यह पहल नियमों की जरूरतों से कहीं आगे की है और सुरक्षा व प्रोफेशनलिज्म के उच्चतम मानकों को बनाए रखने तथा हमारे यात्रियों, स्टेकहोल्डर्स और आम जनता को भरोसा दिलाने के हमारे संकल्प को दर्शाती है।” सूत्रों के मुताबिक, जो पायलट फिलहाल छुट्टी पर हैं, उन्हें ड्यूटी पर लौटने के बाद यह टेस्ट देना होगा। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया में कुछ दिन लगने की भी संभावना है।

सूत्रों के अनुसार, संदेश में कहा गया है, “कई दशकों से एयर इंडिया भारतीय एविएशन की पहचान रही है। इस दौरान हमारे पायलटों और दूसरे स्टाफ की प्रोफेशनलिज्म, स्किल और सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता ने लाखों यात्रियों और आम लोगों का भरोसा जीता है। यह भरोसा हमारी सबसे बड़ी पूंजी है, और इसे बनाए रखना और इसकी रक्षा करना हमारे लिए बहुत जरूरी है। आप में से कई लोगों ने हाल ही में इसी तरह की भावना ज़ाहिर की है।”

बता दें कि पिछले मंगलवार (4 अगस्त) को फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की एयरबस A320 फ्लाइट (VT-EXO) उड़ान के दौरान अचानक लगभग 300 फीट नीचे आ गई, जिससे 20 यात्री और चार केबिन क्रू सदस्य घायल हो गए। इनमें से 17 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। विमान में उस समय 137 यात्री, 6 केबिन क्रू सदस्य और 2 पायलट सवार थे। इस घटना को ‘सीरियस इंसिडेंट’ की श्रेणी में रखा गया है और इसकी जांच एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) कर रहा है।

गौरतलब है कि शुरुआत में सरकार और एयरलाइन ने इस घटना की वजह जबरदस्त टर्बुलेंस (हवा के तेज झोंके) को बताया था। सूत्रों के मुताबिक, पायलटों के बर्ताव की भी जांच हो रही है, खासकर PIC (पायलट-इन-कमांड) के ड्रग टेस्ट का नतीजा पॉजिटिव आने के बाद। मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों के अनुसार, घटना के बाद PIC के शुरुआती ड्रग टेस्ट का नतीजा ‘नॉन-नेगेटिव’ आया था और कन्फर्मेटरी टेस्ट का नतीजा पॉजिटिव आया, जिसमें मारिजुआना (गांजा) की पुष्टि हुई। हालांकि, यह साफ नहीं है कि यह नशीला पदार्थ कब लिया गया था या क्या वह ड्रग्स के असर में फ्लाइट उड़ा रहे थे।

इसके अलावा, ऐसा माना जा रहा है कि घटना के समय एयरबस A320 जेट के हाइड्रोलिक और कंट्रोल सिस्टम में भी एक के बाद एक कई दिक्कतें आईं। AAIB इस बात की भी जांच करेगा कि क्या ये दिक्कतें घटना का कारण हो सकती हैं। जांच में विमान बनाने वाली कंपनी एयरबस और फ्रांस की विमान दुर्घटना जांच एजेंसी BEA मदद कर रही हैं।

सूत्रों के मुताबिक, घटना के बाद PIC ने अधिकारियों को बताया कि वह नींद न आने की समस्या के लिए दवा ले रहे थे, जो उनके फैमिली डॉक्टर ने बताई थी। यह भी पता चला है कि उन्होंने अधिकारियों को बताया कि घटना के समय वह को-पायलट की सीट के पीछे खड़े थे और विमान के कंट्रोल पर नहीं थे।

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UP Scholarship 2026-27: यूपी में कक्षा 9 से 12 के छात्रों के लिए स्कॉलरशिप आवेदन शुरू, नए और रिन्यूवल के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर करें अप्लाई

UP Scholarship 2026-27: उत्तर प्रदेश में शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए स्कॉलरशिप प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके तहत कक्षा 9 से 12 में पढ़ने वाले छात्र उत्तर प्रदेश सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट के आधिकारिक स्कॉलरशिप पोर्टल scholarship.up.gov.in के जरिए ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं। इसके एक मैंडेट में कक्षा 9 से 12 के छात्र के लिए मैट्रिक पूर्व और मैट्रिक (इंटरमीडिएट) के बाद की स्कॉलरशिप शामिल हैं। वहीं, दूसरे मैंडेट में कक्षा 12 के बाद उच्च शिक्षा वाले छात्रों के लिए पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप शामिल हैं।

यह स्कॉलरशिप जनरल, शेड्यूल्ड कास्ट (SC), शेड्यूल्ड ट्राइब (ST), अदर बैकवर्ड क्लास (OBC), और अल्पसंख्य समुदाय के योग्य छात्रों के लिए बहुत अहम मानी जाती है। इस स्कॉलरशिप प्रक्रिया के तहत पहले से चल रही छात्रवृत्ति को रिन्यू कराने या नई छात्रवृत्ति के लिए आवेदन कर सकते हैं।

कक्षा 10 और 12 के रिन्यूअल छात्र : ऑनलाइन आवेदन 11 अगस्त से 25 अगस्त, 2026 तक जमा किए जा सकते हैं। जरूरी हार्ड कॉपी भी तय समय के अंदर जमा करनी होगी।

कक्षा 9 और 11 में नए आवेदक : ऑनलाइन एप्लीकेशन 11 अगस्त से 21 सितंबर, 2026 तक खुले रहेंगे।

जिन स्टूडेंट्स ने 12वीं कक्षा पूरी कर ली है और ग्रेजुएशन, पोस्ट-ग्रेजुएशन, डिप्लोमा, ITI, या दूसरे मैट्रिक के बाद वाले पाठ्यक्रम कर रहे हैं, उनके लिए अलग एप्लीकेशन शेड्यूल होगा।

ऑनलाइन करें आवेदन

ऑनलाइन आवेदन जमा करना सिर्फ पहला स्टेप है। स्कॉलरशिप आवेदन कई चरण की स्क्रूटनी और सत्यापन प्रक्रिया है। सबसे पहले, स्कूल या शैक्षिक संस्थान योग्य छात्रों के आवेदन को सत्यापित करता है और उन्हें आगे की प्रक्रिया के लिए फॉरवर्ड करता है। फिर जिला स्कूल इंस्पेक्टर छात्रों से जुड़ी जानकारी सत्यापित करता है, जिसमें योग्य छात्रों की संख्या भी शामिल है।

इसके बाद, नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) की टेक्निकल टीम आवेदन के आंकड़ों की जांच करती है और संभावित गलतियों या अंतरों की पहचान करती है। जरूरी वेरिफिकेशन स्टेज पूरे होने के बाद, जिला समिति सत्यापित सूची को फाइनल करती है। इसके बाद स्कॉलरशिप की रकम सीधे योग्य छात्रों के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर दी जाती है।

रिन्यूअल छात्रों को अक्टूबर में स्कॉलरशिप मिलने की उम्मीद

कक्षा 9 से 12 के रिन्यूअल छात्रों के लिए सत्यापन प्रक्रिया नए आवेदकों के मुकाबले पहले पूरा होने की उम्मीद है। बताए गए शेड्यूल के मुताबिक, योग्य रिन्यूअल छात्रों के लिए स्कॉलरशिप फंड 25 अक्टूबर से 31 अक्टूबर, 2026 के बीच ट्रांसफर होने की उम्मीद है।

नए आवेदकों के लिए, वेरिफिकेशन प्रोसेस में ज्यादा समय लगने की उम्मीद है। एलिजिबल नए स्टूडेंट्स के लिए स्कॉलरशिप पेमेंट 25 जनवरी से 31 जनवरी, 2027 के बीच ट्रांसफर होने की उम्मीद है।

आधार से लिंक्ड बैंक अकाउंट जरूरी

आवेदकों को यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि उनका बैंक अकाउंट उनके अपने नाम पर हो और स्कीम के तहत जहां भी जरूरी हो, आधार से लिंक हो। दरअसल, स्कॉलरशिप की रकम सीधे स्टूडेंट के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर की जाती है। छात्रों को आवेदन जमा करने से पहले अपने बैंक अकाउंट की डिटेल्स ध्यान से डालनी चाहिए और उन्हें वेरिफाई करना चाहिए। बैंक डिटेल्स में कोई भी गलती पेमेंट प्रोसेस के दौरान दिक्कतें पैदा कर सकती है।

स्नातक छात्रों के लिए अलग शेड्यूल

कक्षा 12 पास कर चुके छात्र और ग्रेजुएशन, पोस्ट-ग्रेजुएशन, डिप्लोमा, ITI, या दूसरे पाठ्यक्रम कर रहे हैं, वे पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप स्कीम के तहत अप्लाई करेंगे। इन छात्रों के लिए आवेदन कार्यक्रम कक्षा 9 से 12 के शेड्यूल से अलग है।

पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप रिन्यूअल आवेदकों के लिए, ऑनलाइन पंजीकरण और हार्ड-कॉपी सबमिशन 15 सितंबर से 15 अक्टूबर, 2026 तक होगा।

नए आवेदकों के लिए, ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन 15 सितंबर से 31 अक्टूबर, 2026 तक खुला रहेगा।

इंस्टीट्यूशनल मास्टर डेटा तैयार करने का काम 22 जुलाई से 15 अगस्त, 2026 तक तय है। इसके बाद कोर्स-फीस सत्यापन होगा, जो 23 जुलाई से 30 अगस्त, 2026 तक संबंधित यूनिवर्सिटी या उससे जुड़ी एजेंसी के जरिए होगा।

शेड्यूल के मुताबिक, पोस्ट-मैट्रिक रिन्यूअल वाले स्टूडेंट्स को स्कॉलरशिप पेमेंट 16 जनवरी से 25 जनवरी, 2027 के बीच मिलने की उम्मीद है। नए पोस्ट-मैट्रिक आवेदकों को स्कॉलरशिप पेमेंट 27 जनवरी से 31 जनवरी, 2027 के बीच मिलने की उम्मीद है।

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Income Tax Refund: अभी तक इनकम टैक्स रिफंड नहीं आया? ये 5 कारण हो सकते हैं जिम्मेदार

Income Tax Refund: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने के बाद ज्यादातर टैक्सपेयर्स को रिफंड का इंतजार रहता है। कई लोगों के खाते में रिफंड जल्दी आ जाता है। हालांकि, कुछ लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। अगर आपने भी रिटर्न भर दिया है, लेकिन अभी तक रिफंड नहीं मिला, तो इसकी कई वजहें हो सकती हैं। आइए जानते हैं कि रिफंड किन कारणों से अटक सकता है।

1. ITR अभी प्रोसेस नहीं हुआ

रिटर्न फाइल करने के बाद इनकम टैक्स विभाग उसकी जांच करता है। जब तक ITR प्रोसेस नहीं होगा, तब तक रिफंड जारी नहीं किया जाएगा। अगर पोर्टल पर ‘Return Under Processing’ दिख रहा है, तो इसका मतलब है कि विभाग अभी आपके रिटर्न की जांच कर रहा है।

2. बैंक अकाउंट में दिक्कत

रिफंड सीधे बैंक खाते में भेजा जाता है। अगर आपका बैंक अकाउंट प्री-वैलिडेट नहीं है, PAN से लिंक नहीं है या बैंक की जानकारी गलत है, तो रिफंड अटक सकता है। इसलिए ई-फाइलिंग पोर्टल पर बैंक अकाउंट का स्टेटस एक बार जरूर जांच लें।

3. ITR में कोई गलती

अगर रिटर्न में बैंक अकाउंट नंबर, IFSC, आय, TDS या दूसरी जानकारी गलत भर दी गई है, तो रिफंड में देरी हो सकती है। ऐसी स्थिति में जरूरत पड़ने पर संशोधित रिटर्न (Revised Return) दाखिल करना पड़ सकता है।

4. TDS और AIS में अंतर

अगर आपके ITR में दी गई TDS की जानकारी, Form 26AS या AIS से मेल नहीं खाती, तो इनकम टैक्स विभाग अतिरिक्त जांच कर सकता है। इससे रिफंड आने में ज्यादा समय लग सकता है।

5. रिटर्न जांच के लिए चुना गया

कुछ ITR को विभाग स्क्रूटनी या अतिरिक्त वेरिफिकेशन के लिए चुनता है। ऐसे मामलों में जांच पूरी होने के बाद ही रिफंड जारी किया जाता है। अगर विभाग की तरफ से कोई नोटिस आया है, तो उसका जवाब समय पर देना जरूरी है।

रिफंड का स्टेटस कैसे चेक करें?

  • इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉग इन करें।
  • e-File मेन्यू में जाकर Income Tax Returns पर क्लिक करें।
  • View Filed Returns विकल्प चुनें।
  • संबंधित असेसमेंट ईयर (Assessment Year) का ITR चुनें।
  • यहां आपको रिटर्न और रिफंड का मौजूदा स्टेटस दिख जाएगा।
  • अगर रिफंड जारी हो चुका है, तो उसका ट्रांजैक्शन रेफरेंस और भुगतान की जानकारी भी यहीं मिल जाएगी।

RBI का बड़ा फैसला: लोन की EMI चूकने पर नियम बदले, जानिए बैंक क्या कर सकते हैं और क्या नहीं

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

क्या मौजूदा EMIs से आपको पर्सनल लोन मिलने की संभावना कम हो जाती है?

पर्सनल लोन के लिए आवेदन करते समय आपकी मौजूदा EMIs काफी मायने रखती है, जो आपके फाइनैंशियल प्रोफाइल का सबसे अहम हिस्सा है। इनसे पता चलता है कि आपकी हर महीने की कमाई का कितना हिस्सा पहले से ही लोन चुकाने में जा रहा है, जिससे लोन देने वाले संस्थान यह तय करते हैं कि आप एक नई EMI आसानी से चुका पाएँगे या नहीं। पुरानी EMI का बोझ ज़्यादा होने से आपकी पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी कम हो सकती है, मिलने वाले लोन की रकम घट सकती है, या लोन चुकाने की शर्तों पर असर पड़ सकता है।

हालाँकि, पहले से लोन होने का मतलब यह नहीं है कि आपको लोन मिल ही नहीं सकता। लोन लेने वाले संस्थान फैसला लेने से पहले कई बातों पर गौर करते हैं, जिनमें आपकी इनकम, क्रेडिट स्कोर, नौकरी की स्थिरता, लोन चुकाने का पिछला रिकॉर्ड और आपकी बाकी की देनदारियां शामिल हैं।

अगर आप पर्सनल लोन लेने के बारे में सोच रहे हैं, तो यह समझना जरूरी है कि मौजूदा EMI आपकी एलिजिबिलिटी पर कैसे असर डालती हैं, जिससे आपको ज़िम्मेदारी से लोन लेने और आपके लिए सही लोन मिलने की संभावनाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।

मौजूदा EMI आपकी पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी पर कैसे असर डालती हैं?

आपकी हर महीने की EMI से आपकी मौजूदा आर्थिक देनदारियों का पता चलता है। जब आप पर्सनल लोन के लिए आवेदन करते हैं, तो लोन देने वाले संस्थान आपकी इनकम के साथ-साथ इन देनदारियों को भी देखते हैं, उसके आधार पर तय करते हैं कि आप एक और लोन आसानी से चुका पाएंगे या नहीं।

वे आमतौर पर नीचे दी गई बातों पर गौर करते हैं:

  • महीने की इनकम
  • महीने का खर्च
  • शहर
  • जन्म तिथि

अगर आपके महीने की इनकम का एक बड़ा हिस्सा मौजूदा EMI चुकाने में खर्च हो जाता है, तो इसकी वजह से लोन चुकाने की आपकी क्षमता कम हो जाती है। ऐसे में, लोन देने वाले संस्थान आपकी फाइनैंशियल प्रोफाइल के आधार पर आपको कम लोन दे सकते हैं या लोन चुकाने की समय-सीमा बदल सकते हैं।

लोन देने वाले संस्थान मौजूदा EMI पर क्यों गौर करते हैं?

लोन देने वाले संस्थान यह पक्का करना चाहते हैं कि ग्राहक किसी आर्थिक दबाव के बिना आसानी से लोन चुका सकें। मौजूदा EMI से उन्हें आपके मौजूदा लोन की जानकारी मिलती है और वे यह तय कर पाते हैं कि आपके लिए एक और लोन लेना सही रहेगा या नहीं।

लोन चुकाने से जुड़ी अपनी देनदारियों पर अच्छी तरह गौर करने से ज़िम्मेदारी से लोन लेने को बढ़ावा मिलता है और समय पर भुगतान न हो पाने का जोखिम भी कम होता है।

पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी कैलकुलेटर कैसे मदद कर सकता है?

पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी कैलकुलेटर में दी गई आर्थिक जानकारी के आधार पर आप मिलने वाले लोन की रकम का अंदाजा लगा सकते हैं।

आमतौर पर, इसमें आपको कुछ जानकारी भरनी होती है जैसे कि:

• महीने की इनकम

• मौजूदा EMIs

• रोज़गार का प्रकार

• लोन की पसंदीदा समय-सीमा

यह कैलकुलेटर कुछ ही सेकंड में बता देता है कि आपको कितना लोन मिल सकता है। हालाँकि यह नतीजा सिर्फ़ एक अंदाज़ा होता है, लेकिन लोन के लिए आवेदन करने से पहले पैसों का हिसाब-किताब लगाने में इससे काफी मदद मिलती है।

कौन-सी बातें आपकी पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी पर असर डालती हैं?

मौजूदा EMI तो बस मूल्यांकन का एक हिस्सा हैं। लोन देने वाले संस्थान पर्सनल लोन को मंजूरी देने से पहले दूसरी कई बातों पर भी गौर करते हैं।

महीने की इनकम

आम तौर पर, ज़्यादा और स्थिर इनकम से आपकी लोन चुकाने की क्षमता बेहतर होती है, जिससे आपकी एलिजिबिलिटी भी बढ़ सकती है।

क्रेडिट स्कोर

अच्छा क्रेडिट स्कोर लोन के संबंध में आपके ज़िम्मेदारी भरे रवैये को दिखाता है। अगर आप अपने EMI और बिल का समय पर भुगतान करते हैं तो आपको अपने क्रेडिट प्रोफाइल को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

नौकरी में स्थिरता

नौकरीपेशा या अपना रोजगार करने वाले जिन लोगों की इनकम में स्थिरता है और लगातार नौकरी का रिकॉर्ड भी बेहतर है तो ऐसे लोगों को लोन मिलने की संभावना थोड़ी ज्यादा होती है।

लोन की समय-सीमा

लोन चुकाने के लिए लंबी समय-सीमा चुनने से आपकी महीने की EMI कम हो सकती है, हालाँकि इससे पूरे लोन के दौरान कुल मिलाकर ज्यादा ब्याज़ चुकाना पड़ सकता है।

मौजूदा आर्थिक देनदारियाँ

लोन की EMI के अलावा, लोन देने वाले संस्थान आपके लोन चुकाने की क्षमता का अंदाजा लगाते समय आपकी कुल आर्थिक देनदारियों पर भी गौर कर सकते हैं।

क्या आप अपनी पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी को बेहतर बना सकते हैं?

भले ही एलिजिबिलिटी कई बातों पर निर्भर करती है, पर लोन के लिए आवेदन करने से पहले आप अपने फाइनैंशियल प्रोफाइल को और बेहतर बना सकते हैं।

आप इन बातों को ध्यान में रख सकते हैं:

•अपने मौजूदा EMIs का समय पर भुगतान करना

• जहां तक हो सके, बकाया लोन कम करना

• थोड़े समय के भीतर बार-बार लोन के लिए आवेदन करने से बचना

• अच्छा क्रेडिट स्कोर बनाए रखना।

• लोन चुकाने के लिए सही समय-सीमा चुनना

• सिर्फ़ उतनी ही रक़म के लिए आवेदन करना जिसकी आपको असल में ज़रूरत हो

ज़िम्मेदारी से लोन लेने से न सिर्फ़ आपकी एलिजिबिलिटी बेहतर होती है, बल्कि आपको लोन चुकाने में भी आसानी होती है।

पर्सनल लोन फाइनेंसिंग का सुविधाजनक विकल्प क्यों है?

पर्सनल लोन बेहद सुविधाजनक होता है, क्योंकि इसके लिए कोलेटरल की जरूरत नहीं होती और इसका उपयोग पहले से तय या अचानक सामने आने वाले कई तरह के खर्चों के लिए किया जा सकता है।

आप निम्नलिखित कामों के लिए इसका उपयोग कर सकते हैं:

• मेडिकल इमरजेंसी

• आगे की पढ़ाई

• शादी का खर्च

• घर की मरम्मत

• ट्रैवल का खर्च

बजाज फाइनैंस पर्सनल लोन में 40,000 रुपये से लेकर 55 लाख रुपये तक का लोन मिल सकता है, जिसे चुकाने के लिए 12 महीने से 108 महीने तक की समय-सीमा मिलती है। आपकी एलिजिबिलिटी और क्रेडिट प्रोफ़ाइल के आधार पर ब्याज़ दरें सालाना 10% से 30.5% के बीच हो सकती हैं। इस लोन के लिए किसी कोलेटरल की जरूरत नहीं पड़ती है, तुरंत मंजूरी मिल जाती है, कागजी कार्रवाई कम होती है और लोन की शर्तों को पूरा करने वाले लोगों को 24 घंटे के भीतर पैसे मिल जाते हैं।

बजाज फाइनैंस पर्सनल लोन के लिए कौन-कौन आवेदन कर सकते हैं?

आपकी एलिजिबिलिटी लोन देने वाले संस्थान के नियमों और आपकी आर्थिक स्थिति पर निर्भर करता है। आम तौर पर, लोगों की एलिजिबिलिटी जांचने के लिए इन बातों को देखा जाता है:

 

राष्ट्रीयताभारतीय
उम्र21 साल से 80 साल तक
नौकरीपब्लिक, प्राइवेट या MNC
CIBIL स्कोर650 या उससे ज्यादा
ग्राहक का प्रोफाइलखुद का रोजगार या नौकरीपेशा

लोन की समय-सीमा पूरी होने पर आपकी उम्र 80 साल या उससे कम होनी चाहिए

लोन पाने की शर्तें पूरी करने से लोन मंजूरी मिलने की गारंटी नहीं मिलती, क्योंकि हर आवेदन का अलग-अलग मूल्यांकन किया जाता है।

आमतौर पर किन दस्तावेज़ों की ज़रूरत होती है?

बजाज फाइनैंस पर्सनल लोन के लिए बहुत कम दस्तावेज़ों की ज़रूरत होती है। यहाँ उन दस्तावेज़ों की सूची दी गई है जिनकी आवेदन के समय ज़रूरत होती है:

दस्तावेज़ों की श्रेणीमान्य विकल्प
KYC संबंधी दस्तावेज आधार/पासपोर्ट/मतदाता पहचान पत्र/ड्राइविंग लाइसेंस/ राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर का पत्र/ NREGA जॉब कार्ड
पहचान संबंधी दस्तावेजPAN कार्ड, वास्तविक समय की तस्वीर/फोटो
रोज़गार संबंधी दस्तावेज कर्मचारी पहचान पत्र, नौकरी देने वाली कंपनी द्वारा जारी आवास आवंटन पत्र
इनकम प्रूफ  पिछले 3 महीनों की सैलरी स्लिप, पिछले 3 महीनों का बैंक अकाउंट स्टेटमेंट
अन्य पेंशन ऑर्डर, आवश्यक सेवाओं के बिल, फ़ोन बिल, पाइप्ड गैस बिल, प्रॉपर्टी या नगरपालिका की टैक्स रसीद

लोन चुकाने के विकल्प बेहतर फाइनैंशियल प्लानिंग में कैसे मदद करते हैं?

  • लोन चुकाने की सही समय-सीमा चुनना आपके महीने के बजट को अच्छी तरह संभालने में अहम भूमिका निभाता है।
  • लोन चुकाने की समय सीमा काम हो ने से कुल ब्याज़ तो कम हो सकता है, लेकिन आपकी मासिक EMI बढ़ सकती है। वहीं, लोन चुकाने की लंबी समय-सीमा से आपके महीने की EMI कम हो सकती है, क्योंकि इसमें लोन चुकाने का समय बढ़ जाता है।
  • पर्सनल लोन के लिए आवेदन करने से पहले, अपनी महीने की इनकम, मौजूदा EMI और अपने आर्थिक लक्ष्यों पर जरूर गौर करें ताकि आप अपने बजट के हिसाब से लोन चुकाने का सही विकल्प चुन सकें।
  • ज़िम्मेदारी से लोन लेने से आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है।
  • पर्सनल लोन लेने से आपको अपने आर्थिक लक्ष्यों को पूरा करने में मदद मिलनी चाहिए, न कि आप पर बेवजह का आर्थिक दबाव पड़ना चाहिए।

लोन लेने से पहले:

• अपनी हर महीने की लोन चुकाने की क्षमता का सही अंदाज़ा लगाएं

• सिर्फ़ उतनी ही रकम लोन लें जितनी आपको ज़रूरत हो

• सभी EMI का भुगतान समय पर करते रहें

• अपनी लोन लेने की क्षमता का अंदाज़ा लगाने के लिए पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी कैलकुलेटर का इस्तेमाल करें

• ऑफ़र मान लेने से पहले लोन की शर्तों को ध्यान से पढ़ें

ज़िम्मेदारी से लोन लेने से आपको अपनी आर्थिक ज़िम्मेदारियों को बेहतर ढंग से पूरा करने के साथ-साथ एक अच्छा क्रेडिट प्रोफ़ाइल बनाए रखने में भी मदद मिलती है।

मौजूदा EMIs आपके पर्सनल लोन की एलिजिबिलिटी तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं, क्योंकि ये आपकी हर महीने लोन चुकाने की क्षमता पर असर डालती हैं। आपकी इनकम, क्रेडिट प्रोफ़ाइल, नौकरी की स्थिरता और लोन चुकाने के पिछले रिकॉर्ड के साथ-साथ, ये लोन देने वाले संस्थानों को यह समझने में मदद करती हैं कि आप ज़िम्मेदारी से कितना लोन ले सकते हैं। आवेदन करने से पहले पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी कैलकुलेटर का इस्तेमाल करने से आपको एक अंदाज़ा मिलता है और आप भरोसे के साथ अपने फ़ाइनेंस की योजना बना पाते हैं।

नियम व शर्तें लागू

नई कार पर 4 और बाइक पर 6 साल का इंश्योरेंस जरूरी, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने गाड़ियों के इंश्योरेंस बड़ा फैसला सुनाया है। अब नई प्राइवेट कार खरीदने पर 4 साल का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस लेना होगा। नई बाइक खरीदने पर 6 साल का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य होगा। पहले यह अवधि एक साल कम थी। कोर्ट ने कहा कि इससे सड़क हादसों के पीड़ितों को जल्दी मुआवजा मिलेगा।

यह आदेश जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने दिया। कोर्ट ने कहा कि देश में अब भी बड़ी संख्या में गाड़ियां बिना इंश्योरेंस के चल रही हैं। इसे रोकना जरूरी है।

2018 के बाद भी नहीं बदले हालात

सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में नई कार के लिए 3 साल और नई बाइक के लिए 5 साल का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य किया था। लेकिन इसके बाद भी हालात नहीं सुधरे। कोर्ट ने कहा कि अब अवधि एक साल और बढ़ाई जा रही है।

IRDAI और जनरल इंश्योरेंस काउंसिल (GIC) ने इसका विरोध किया था। उनका कहना था कि इससे लोगों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। लेकिन कोर्ट ने सड़क सुरक्षा को ज्यादा अहम माना।

हर दूसरी गाड़ी के पास इंश्योरेंस नहीं

कोर्ट ने कहा कि देश में करीब 56% गाड़ियां बिना वैध इंश्योरेंस के चल रही हैं। संसदीय समिति की रिपोर्ट के मुताबिक, 30.48 करोड़ रजिस्टर्ड गाड़ियों में से 16.54 करोड़ के पास वैध इंश्योरेंस नहीं है।

कोर्ट ने कहा कि थर्ड पार्टी इंश्योरेंस का मकसद सिर्फ मुआवजा देना नहीं है। इसका मकसद पीड़ितों को लंबी कानूनी लड़ाई से बचाना भी है।

बिना इंश्योरेंस गाड़ी पर ई-चालान

कोर्ट ने कहा कि ANPR कैमरों को VAHAN पोर्टल और Insurance Information Bureau से जोड़ा जाए। इससे बिना इंश्योरेंस चल रही गाड़ियों की पहचान हो सकेगी। फिर उन्हें अपने आप ई-चालान जारी होगा।

राज्य पुलिस को भी ऐसे मोबाइल ऐप और डिवाइस दिए जाएंगे। इससे मौके पर ही इंश्योरेंस चेक किया जा सकेगा।

बिना इंश्योरेंस पेट्रोल भी नहीं

कोर्ट ने IRDAI और सड़क परिवहन मंत्रालय से पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने को कहा है। इसके तहत बिना वैध इंश्योरेंस वाली गाड़ियों को पेट्रोल देने पर रोक लगाने की योजना बनाई जाएगी।

कोर्ट ने यह भी कहा कि लोग किसी भी गाड़ी का इंश्योरेंस स्टेटस ऑनलाइन चेक कर सकें। इसके लिए भी व्यवस्था बनाई जाए।

इंश्योरेंस खरीदने से पहले पूरी जानकारी

कोर्ट ने IRDAI को चार-स्तरीय इंश्योरेंस व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया। इसमें थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के साथ पर्सनल एक्सीडेंट कवर, पिलियन या यात्रियों का कवर और ओन डैमेज कवर का विकल्प भी होगा। हर ग्राहक को बीमा खरीदने से पहले आसान भाषा में पूरी जानकारी भी देनी होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को 14 अगस्त 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

CIBIL Score: पुराना बैंक अकाउंट या क्रेडिट कार्ड बंद कर रहे? जानिए सिबिल स्कोर पर क्या असर पड़ेगा

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।