30 की उम्र में 50 लाख की नेटवर्थ, फिर भी खुद को मानता है गरीब! Reddit पर शख्स ने बताई पूरी कहानी

30 साल की उम्र में अगर किसी कपल की संयुक्त नेटवर्थ 50 लाख रुपये हो जाए, तो इसे आमतौर पर बड़ी आर्थिक उपलब्धि माना जाएगा। लेकिन एक Reddit यूजर के लिए यह मुकाम खुशी के साथ-साथ उलझन भी लेकर आया है। करीब सात साल से नौकरी कर रहे इस शख्स ने बताया कि अच्छी कमाई और बचत के बावजूद उसे लगता है कि वह अपने दोस्तों से आर्थिक रूप से पीछे रह गया है।

पति-पत्नी की कमाई 32 लाख

इस शख्स के मुताबिक, उसकी सालाना कमाई करीब 20 लाख रुपये है, जबकि उसकी पत्नी लगभग 12 लाख रुपये कमाती हैं। दोनों की कुल मासिक इन-हैंड इनकम करीब 2.2 लाख रुपये है। इसके बावजूद उनकी लाइफस्टाइल काफी साधारण है। दोनों अभी किराये के घर में रहते हैं और उनके पास अपनी कार भी नहीं है। रोजमर्रा के काम के लिए वह अब भी करीब आठ साल पुरानी बाइक चलाते हैं। इतना ही नहीं, शादी को लगभग दो साल हो चुके हैं, लेकिन दोनों अभी तक ठीक से हनीमून पर भी नहीं जा पाए हैं।

दोस्तों को देखकर होने लगा खुद पर शक

Reddit पर अपनी कहानी शेयर करते हुए इस शख्स ने लिखा कि उसके कई कॉलेज फ्रेंड्स उससे काफी आगे नजर आते हैं। किसी ने दो फ्लैट खरीद लिए हैं, जिनमें से एक किराये पर दिया हुआ है। कई दोस्तों के पास कार है और वे बाली तथा मालदीव जैसी जगहों पर घूमने भी जा चुके हैं।

दूसरों की जिंदगी देखकर उसे अपनी आर्थिक स्थिति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। उसे समझ नहीं आ रहा कि 50 लाख रुपये की नेटवर्थ होने के बावजूद आखिर उसे खुद को ‘पीछे’ क्यों महसूस हो रहा है।

पत्नी के खर्च से भी होती है परेशानी

उसने यह भी स्वीकार किया कि कभी-कभी पत्नी के खर्च को लेकर उसे चिढ़ होती है। सोशल मीडिया से प्रभावित होकर पत्नी महंगे मेकअप और दूसरी फैंसी चीजों पर पैसे खर्च करती हैं। यही अंतर उसे और ज्यादा सोचने पर मजबूर करता है। वह खुद बचत और आर्थिक सुरक्षा को प्राथमिकता देता है, जबकि उसे लगता है कि पत्नी वर्तमान जिंदगी को थोड़ा ज्यादा खुलकर जीना चाहती हैं।

‘क्या मैं बहुत ज्यादा बचत कर रहा हूं?’

इस पूरे मामले में उसका सबसे बड़ा सवाल यही है कि कहीं वह पैसे बचाने के चक्कर में जिंदगी जीना तो नहीं भूल रहा। उसने लिखा कि वह गर्व महसूस करता है कि दोनों ने मिलकर 50 लाख रुपये की नेटवर्थ हासिल की है। लेकिन साथ ही वह एक बेहतर घर खरीदना, पत्नी के साथ घूमना और जिंदगी का आनंद लेना भी चाहता है। दूसरी तरफ उसे डर है कि ऐसा करने से कहीं उसकी आर्थिक स्थिरता खतरे में न पड़ जाए। वह यह भी सोचता है कि क्या वह दूसरों से अपनी तुलना बहुत ज्यादा कर रहा है या फिर वास्तव में उसकी वित्तीय योजना में कोई कमी है।

Reddit पर लोगों ने दी ‘रियलिटी चेक’ की सलाह

उसकी पोस्ट पर कई Reddit यूजर्स ने उसे दोस्तों की जिंदगी से अपनी तुलना बंद करने की सलाह दी। एक यूजर ने कहा कि तुलना खुशी छीन लेती है और उसे अपने लिए अगले 5-10 साल का लक्ष्य तय करना चाहिए, न कि दूसरों की जिंदगी देखकर अपनी सफलता मापनी चाहिए। एक अन्य यूजर ने उसकी स्थिति पर सहमति जताते हुए बताया कि वह भी किराये के घर में रहता है और उसके पास कार नहीं है। वह अब भी आठ साल पुरानी बाइक चलाता है, जिसका सेल्फ-स्टार्ट तक काम नहीं करता और एक इंडिकेटर भी खराब है। एक अन्य व्यक्ति ने इस सलाह को सही बताते हुए कहा कि जिंदगी में कभी-कभी किसी ऐसे व्यक्ति की जरूरत होती है, जो हमें रियलिटी चेक दे सके।

असली सवाल 50 लाख नहीं, संतुष्टि का है

इस कहानी ने एक दिलचस्प सवाल खड़ा किया है क्या आर्थिक रूप से सफल होने का मतलब सिर्फ घर, कार और विदेश यात्राएं हैं? या फिर अपनी जरूरतों के मुताबिक बचत करना और भविष्य को सुरक्षित रखना भी सफलता है? शायद इस कपल के लिए सबसे जरूरी यह तय करना है कि उन्हें वास्तव में कैसी जिंदगी चाहिए। क्योंकि दूसरों की उपलब्धियों से अपनी खुशी और आर्थिक सफलता की तुलना करने पर 50 लाख भी कम लग सकते हैं।

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Silver Price Today: चांदी खरीदने से पहले चेक करें आज का भाव, दिल्ली समेत इन शहरों में इतने रुपये किलो है रेट

Silver Price Today: चांदी खरीदने वालों के लिए आज की खबर अहम है। बाजार खुलने से पहले सामने आए आंकड़ों के मुताबिक चांदी की कीमतों में अलग-अलग बाजारों में तेजी देखने को मिल रही है। दिल्ली में अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार चांदी 2,41,100 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई है। वहीं, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी का वायदा भाव 2,39,425 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया।

दूसरी ओर, बुलियन्स के आंकड़ों में चांदी 2,39,130 रुपये प्रति किलो और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत 66.41 डॉलर प्रति औंस बताई गई है। गुडरिटर्न्स के मुताबिक चांदी का भाव 2,50,000 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है।

आपके शहर में कितने की मिल रही है चांदी?

देश के अलग-अलग शहरों में चांदी के रेट में अंतर देखने को मिल रहा है। कई प्रमुख शहरों में एक किलो चांदी का भाव 2.50 लाख रुपये है, जबकि कुछ शहरों में यह 2.55 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है।

शहर1 किलो चांदी का भाव
दिल्ली₹2,50,000
मुंबई₹2,50,000
कोलकाता₹2,50,000
चेन्नई₹2,55,000
पटना₹2,50,000
लखनऊ₹2,50,000
कानपुर₹2,50,000
वाराणसी₹2,50,000
नोएडा₹2,50,000
गुरुग्राम₹2,50,000
जयपुर₹2,50,000
अहमदाबाद₹2,50,000
पुणे₹2,50,000
बेंगलुरु₹2,50,000
हैदराबाद₹2,55,000
भुवनेश्वर₹2,55,000
कोच्चि₹2,55,000
तिरुवनंतपुरम₹2,55,000
विजयवाड़ा₹2,55,000
विशाखापत्तनम₹2,55,000
गुवाहाटी₹2,50,000
भोपाल₹2,50,000
इंदौर₹2,50,000
चंडीगढ़₹2,50,000
अमृतसर₹2,50,000
लुधियाना₹2,50,000
रायपुर₹2,50,000
सूरत₹2,50,000
नागपुर₹2,50,000

नोट: अलग-अलग स्रोतों और शहरों में चांदी के भाव में अंतर हो सकता है। स्थानीय ज्वेलर से खरीदारी से पहले ताजा कीमत की पुष्टि जरूर करें।

एक दिन पहले क्या था चांदी का भाव?

पिछले कारोबारी सत्र में दिल्ली के सर्राफा बाजार में चांदी की कीमत में 600 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के मुताबिक चांदी 2,41,100 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई थी। इससे पहले 3 सितंबर को भी चांदी के भाव में 5,000 रुपये की तेजी आई थी, जबकि 4 और 7 सितंबर को कीमत स्थिर रही थी।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी में हल्की मजबूती देखी गई। हाजिर चांदी 0.11 प्रतिशत बढ़कर 66.25 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

MCX पर भी चांदी ने पकड़ी रफ्तार

वायदा बाजार में भी चांदी की कीमत में तेजी देखने को मिली। मंगलवार को MCX पर चांदी का दिसंबर डिलीवरी वाला अनुबंध 1,003 रुपये यानी 0.42 प्रतिशत बढ़कर 2,40,019 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ।

बाजार जानकारों के अनुसार घरेलू बाजार में मजबूत रुख के बीच कारोबारियों की ओर से नए सौदों की खरीदारी बढ़ने से चांदी के वायदा भाव को सहारा मिला। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर न्यूयॉर्क में चांदी 0.05 प्रतिशत गिरकर 66.13 डॉलर प्रति औंस पर रही।

चांदी खरीदने वालों के लिए क्या समझना जरूरी है?

चांदी का रेट एक ही जगह पर पूरे दिन बिल्कुल समान नहीं रहता। अंतरराष्ट्रीय बाजार, वायदा कारोबार, मांग और स्थानीय बाजार की स्थिति के कारण कीमतों में उतार-चढ़ाव हो सकता है। इसलिए अगर आप चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो खरीदारी से ठीक पहले अपने शहर का ताजा भाव जरूर जांच लें।

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Silver Price Today: 8 सितंबर को चांदी हुई सस्ती या महंगी? जानें दिल्ली से चेन्नई तक 1 किलो की कीमत

Silver Price Today: चांदी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है और आज भी बाजार में इसके भाव में मामूली नरमी दर्ज की गई। 8 सितंबर 2026 को बाजार खुलने से पहले मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी का वायदा भाव 0.01 फीसदी की गिरावट के साथ 2,38,996 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। पिछले कारोबारी सत्र में यह 2,39,016 रुपये प्रति किलो पर बंद हुआ था। यानी शुरुआती कारोबार से पहले चांदी के भाव में 20 रुपये प्रति किलो की कमी आई है। वहीं, हाजिर बाजार और अलग-अलग शहरों में चांदी की कीमतों में अंतर देखने को मिल रहा है।

निवेशकों और चांदी खरीदने वालों के लिए बाजार की यह हलचल अहम है। ऐसे में अगर आप आज चांदी खरीदने, बेचने या निवेश करने की योजना बना रहे हैं, तो ताजा बाजार भाव जानना जरूरी है। आगे जानिए आज चांदी का रेट कितना है और प्रमुख शहरों में क्या कीमत चल रही है।

अलग-अलग बाजारों में चांदी के दाम

चांदी की कीमत अलग-अलग बाजारों और स्रोतों के आधार पर थोड़ी अलग दिखाई दे रही है। बुलियन्स के मुताबिक चांदी का भाव 2,38,680 रुपये प्रति किलो है। वहीं, दिल्ली के सर्राफा बाजार में सभी टैक्स समेत चांदी 2,40,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर दर्ज की गई है।

इसके अलावा GoodReturns के अनुसार चांदी का भाव 2,50,000 रुपये प्रति किलो है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमत 67.08 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई है।

प्रमुख शहरों में आज चांदी का भाव

देश के प्रमुख शहरों में चांदी की कीमतें करीब 2.50 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बनी हुई हैं। कुछ शहरों में स्थानीय बाजार और टैक्स के कारण मामूली अंतर देखने को मिल सकता है।

शहर1 किलो चांदी का भाव
दिल्ली₹2,50,000
मुंबई₹2,50,000
कोलकाता₹2,50,000
चेन्नई₹2,55,000
पटना₹2,50,000
लखनऊ₹2,50,000
मेरठ₹2,50,000
अयोध्या₹2,50,000
कानपुर₹2,50,000
अलीगढ़₹2,50,000

पिछले कारोबारी सत्र में कैसा रहा भाव?

पिछले कारोबारी दिन दिल्ली के सर्राफा बाजार में चांदी लगातार दूसरे सत्र में 2,40,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर रही। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी करीब एक फीसदी कमजोर होकर 65.64 डॉलर प्रति औंस पर आ गई।

वायदा बाजार में चांदी क्यों फिसली?

कमजोर हाजिर मांग के बीच कारोबारियों ने अपने सौदों का आकार घटाया, जिसका असर वायदा कारोबार पर पड़ा। MCX पर दिसंबर डिलीवरी वाले चांदी के कॉन्ट्रैक्ट में 975 रुपये की गिरावट दर्ज हुई और कीमत 2,36,683 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई। वैश्विक बाजार में न्यूयॉर्क में भी चांदी कमजोर रही। वहां इसकी कीमत 0.63 फीसदी गिरकर 65.79 डॉलर प्रति औंस हो गई। बाजार विश्लेषकों के मुताबिक कारोबारियों की बिकवाली और कमजोर मांग के चलते चांदी के वायदा भाव पर दबाव देखने को मिला।

खरीदारी से पहले इन बातों का रखें ध्यान

चांदी का रिटेल रेट बाजार, टैक्स और विक्रेता के मार्जिन के आधार पर अलग हो सकता है। वहीं, चांदी के आभूषण खरीदते समय मेकिंग चार्ज और अन्य शुल्क जुड़ने के कारण अंतिम कीमत बाजार भाव से अधिक हो सकती है। इसलिए खरीदारी से पहले स्थानीय ज्वेलर से ताजा रेट जरूर कन्फर्म करें।

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स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में UP के 16 शहर, लखनऊ देश में पहले स्थान पर

स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में UP के 16 शहर, लखनऊ देश में पहले स्थान पर

Yogi adityanath

Swachh Vayu Sarvekshan 2026 Lucknow First: उत्तर प्रदेश में स्वच्छ हवा को लेकर किए जा रहे लगातार प्रयासों ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश ने स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए देश में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से कराए गए सर्वेक्षण में 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में लखनऊ ने पहली बार इंदौर को पीछे छोड़ते हुए देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। 

 

लखनऊ ने 198 अंक के साथ प्रथम स्थान जबकि इंदौर 197 और जबलपुर 195 अंकों के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे हैं। यह उपलब्धि केवल राजधानी लखनऊ तक सीमित नहीं है। प्रदेश के 16 शहरों ने अलग-अलग आबादी वर्गों में राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन किया है। इससे स्पष्ट है कि प्रदेश में स्वच्छ वायु को लेकर शहर स्तर से लेकर वार्ड स्तर तक योजनाबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है।

यूपी के दूसरे शहरों ने भी दिखाया दम

10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में उत्तर प्रदेश के कई शहरों ने भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। आगरा 192 अंकों के साथ चौथे, गाजियाबाद 184 अंकों के साथ नौवें, कानपुर 183.2 अंकों के साथ 11वें और प्रयागराज 180 अंकों के साथ 13वें स्थान पर रहा। मेरठ 22वें और वाराणसी 34वें स्थान पर रहे। इस रैंकिंग से यह संकेत मिलता है कि स्वच्छ हवा को लेकर प्रदेश के बड़े शहरों में किए जा रहे प्रयासों का असर व्यापक स्तर पर दिखाई दे रहा है।

3 से 10 लाख आबादी वाले शहरों में भी यूपी का दबदबा

मध्यम आबादी वाले शहरों की श्रेणी में भी उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। फिरोजाबाद ने 195 अंक हासिल कर देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया। शहर में कांच उद्योगों को स्वच्छ प्राकृतिक गैस ईंधन की ओर तेजी से स्थानांतरित करने को अहम उपलब्धि माना गया। झांसी 192.5 अंकों के साथ पांचवें, जबकि मुरादाबाद और नोएडा 187.5-187.5 अंकों के साथ संयुक्त रूप से आठवें स्थान पर रहे। गोरखपुर 22वें और बरेली 26वें स्थान पर रहा।

छोटे शहरों में भी बेहतर प्रदर्शन

तीन लाख से कम आबादी वाले शहरों की श्रेणी में भी यूपी के शहरों ने प्रभावी प्रदर्शन किया। रायबरेली 180.5 अंकों के साथ 17वें स्थान पर रहा। अनपरा 29वें, खुर्जा 30वें और गजरौला 31वें स्थान पर रहे। इन शहरों में धूल नियंत्रण और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए किए गए प्रयासों को प्रमुखता मिली।

वार्ड स्तर पर भी यूपी की बड़ी उपलब्धि

स्वच्छ वायु प्रबंधन को शहरों तक सीमित रखने के बजाय स्थानीय स्तर पर भी प्रभावी कदम उठाए गए। 30 हजार से अधिक आबादी वाले शहरी वार्डों की राष्ट्रीय श्रेणी में लखनऊ के जोन-4 स्थित वार्ड-70 ने पहला स्थान हासिल किया। वहीं 10 हजार से 30 हजार आबादी वाले वार्डों की श्रेणी में प्रयागराज के वार्ड-31 ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। राज्य स्तरीय वार्ड पुरस्कारों में कानपुर के वार्ड केएनपी078, प्रयागराज के वार्ड-33 और बरेली के गांधी उद्यान वार्ड-32 को उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया। खुले में कूड़ा जलाने पर प्रभावी रोक और स्थानीय स्तर पर धूल नियंत्रण जैसे उपायों को इसमें महत्वपूर्ण माना गया।

समन्वित रणनीति का परिणाम

प्रदेश में स्वच्छ हवा के लिए नगर विकास विभाग, स्थानीय नगरीय निकायों और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के समन्वय से विभिन्न स्तरों पर कार्रवाई की गई। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत तैयार और लागू की गई समन्वित रणनीति का असर लखनऊ के देश में पहले स्थान समेत यूपी के कई शहरों और वार्डों की राष्ट्रीय रैंकिंग में दिखाई दिया है। 

पुरस्कार के साथ बढ़ा स्थानीय निकायों का उत्साह

स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में उत्तर प्रदेश ने शानदार प्रदर्शन किया है। श्रेणी-1 में लखनऊ नगर निगम को प्रथम पुरस्कार हासिल करने के साथ ही 1.5 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि मिली है। वहीं श्रेणी-2 में फिरोजाबाद नगर निगम को प्रथम पुरस्कार के साथ 25 लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई है। वार्ड स्तर पर भी प्रदेश को महत्वपूर्ण सफलता मिली। लखनऊ नगर निगम के वार्ड-70 को प्रथम पुरस्कार के साथ 50 लाख रुपये, प्रयागराज नगर निगम के वार्ड-31 ने तृतीय पुरस्कार के साथ 20 लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी गई है।

स्वच्छ वायु के क्षेत्र में लखनऊ की उपलब्धि प्रदेश के लिए नई प्रेरणा- नगर विकास मंत्री

नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के शहरों की तस्वीर तेजी से बदल रही है। लखनऊ ने स्वच्छ वायु संरक्षण के क्षेत्र में पहली बार इंदौर को पीछे छोड़कर देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि प्रदेश के लिए एक नई प्रेरणा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जिस प्रकार स्वच्छ वायु के क्षेत्र में लखनऊ ने देश में पहला स्थान हासिल किया है, उसी प्रकार स्वच्छता सर्वेक्षण में भी लखनऊ को देश का नंबर-वन शहर बनाने के लिए सरकार, नगर निगम और नागरिक मिलकर पूरी प्रतिबद्धता से कार्य करेंगे।

लखनऊ की नंबर-1 उपलब्धि ने बढ़ाया यूपी का गौरव

लखनऊ को 198 अंकों के साथ देश में पहला स्थान मिलना प्रदेश के लिए विशेष उपलब्धि है। राजधानी में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए इलेक्ट्रिक परिवहन, सड़क की धूल नियंत्रण, वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, हरियाली बढ़ाने और यातायात व्यवस्था को बेहतर करने जैसे क्षेत्रों में लगातार काम किया गया। नगर निगम की ओर से डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण के लिए करीब 1,100 इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए शहर में 12 चार्जिंग स्टेशन और 916 चार्जिंग प्वाइंट बनाए गए हैं। स्वच्छ परिवहन की दिशा में 140 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन भी किया जा रहा है। सड़क की धूल को नियंत्रित करने के लिए 97 इलेक्ट्रिक मैकेनाइज्ड स्वीपिंग मशीनें संचालित हैं। इसके साथ ही 559.85 किलोमीटर सड़कों को एंड-टू-एंड पक्का किया गया है, जिससे धूल के कारण होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद मिली है।

कचरा प्रबंधन और हरियाली पर भी विशेष जोर

स्वच्छ वायु की रणनीति में वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया। लखनऊ में 2,550 टीपीडी क्षमता से 100 प्रतिशत वैज्ञानिक कचरा प्रसंस्करण की व्यवस्था की गई है। खुले में कूड़ा जलाने की समस्या को नियंत्रित करने के साथ ही शहर में कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण पर जोर दिया गया। शहर में हरियाली बढ़ाने के लिए वर्टिकल गार्डन और मियावाकी पौधरोपण जैसे प्रयास किए गए।

इस तरह स्वच्छ वायु के लिए परिवहन, सड़क, कचरा प्रबंधन और हरित क्षेत्र सभी प्रमुख क्षेत्रों को एक साथ जोड़कर काम किया गया। लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल ने इस उपलब्धि का श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व, जनता, पार्षदों और नगर निगम कर्मियों के सामूहिक प्रयासों को दिया है। राजधानी की यह सफलता अब प्रदेश के दूसरे शहरों के लिए भी स्वच्छ वायु प्रबंधन के क्षेत्र में एक प्रभावी मॉडल के रूप में सामने आई है।

Silver Price Today: चांदी के दाम में मामूली गिरावट, जानें दिल्ली समेत बड़े शहरों का रेट

Silver Price Today: चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। दो दिन के ब्रेक के बाद बाजार खुलने से पहले MCX पर चांदी का वायदा भाव 0.07 फीसदी यानी 158 रुपये की गिरावट के साथ 2,37,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। इससे पिछले कारोबारी सत्र में चांदी 2,37,658 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी।

वहीं, बुलियन्स के अनुसार चांदी का भाव 2,37,170 रुपये प्रति किलोग्राम रहा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत 66.46 डॉलर प्रति औंस दर्ज की गई। दूसरी ओर, GoodReturns के मुताबिक चांदी 2.50 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर पर है।

प्रमुख शहरों में आज चांदी का भाव

शहरों के स्थानीय बाजारों में चांदी की कीमतों में मामूली अंतर देखने को मिल रहा है। प्रमुख शहरों में 1 किलो चांदी का भाव इस प्रकार है:

शहर1 किलो चांदी का भाव
दिल्ली₹2,50,000
मुंबई₹2,50,000
कोलकाता₹2,50,000
चेन्नई₹2,55,000
पटना₹2,50,000
लखनऊ₹2,50,000
जयपुर₹2,50,000
अहमदाबाद₹2,50,000
पुणे₹2,50,000
बेंगलुरु₹2,50,000
हैदराबाद₹2,55,000
भोपाल₹2,50,000
चंडीगढ़₹2,50,000
वाराणसी₹2,50,000
नोएडा₹2,50,000
गुरुग्राम₹2,50,000
अमृतसर₹2,50,000
कोच्चि₹2,55,000
तिरुवनंतपुरम₹2,55,000
भुवनेश्वर₹2,55,000

पिछले कारोबारी सत्र में कैसा रहा चांदी का भाव?

पिछले कारोबारी दिन दिल्ली के सर्राफा बाजार में चांदी की कीमत 2,40,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर रही थी। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी 0.38 फीसदी गिरकर 66.72 डॉलर प्रति औंस पर आ गई।

MCX पर दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी 749 रुपये यानी 0.31 फीसदी टूटकर 2,41,600 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई। इससे पहले चांदी में लगातार दो कारोबारी सत्रों से तेजी देखने को मिल रही थी।

चांदी की कीमतों पर क्यों बना हुआ है दबाव?

हालिया तेजी के बाद निवेशकों की ओर से मुनाफावसूली ने चांदी की कीमतों को प्रभावित किया है। इसके अलावा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को लेकर बनी अनिश्चितता भी कीमती धातुओं के बाजार पर असर डाल रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक फिलहाल महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं। इन आंकड़ों से ब्याज दरों की आगे की दिशा को लेकर संकेत मिल सकते हैं, जिसका सीधा असर सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं पर पड़ता है।

कमजोर निवेश मांग बनी चिंता

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के वेल्थ मैनेजमेंट रिसर्च प्रमुख सिद्धार्थ खेमका के अनुसार, घरेलू बाजार में चांदी जनवरी में 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक के रिकॉर्ड स्तर से 40 फीसदी से ज्यादा नीचे आ चुकी है और फिलहाल करीब 2.3 लाख से 2.4 लाख रुपये प्रति किलो के दायरे में है।

उन्होंने बताया कि निवेश मांग कमजोर रहने से डीलरों के पास मौजूद स्टॉक को लेकर चिंता बढ़ रही है। मांग में जल्द सुधार नहीं हुआ तो भारतीय डीलरों की करीब 2,000 टन चांदी की खरीद से स्टॉक का दबाव और बढ़ सकता है।

ग्लोबल तनाव से सप्लाई की चिंता

मुड्रेक्स के विश्लेषक अक्षत सिद्धांत के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर असर और पश्चिम एशिया तथा रूस में रिफाइनरियों को हुए नुकसान ने सप्लाई से जुड़ी चिंताएं बढ़ाई हैं।

ऊंची ईंधन कीमतों के कारण महंगाई और ब्याज दरों के भविष्य को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। इसका असर निवेशकों के कीमती धातुओं के प्रति रुख पर पड़ सकता है।

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Silver Price Today: खरीदारी से पहले जान लें चांदी का भाव, दिल्ली-NCR से मुंबई तक ये हैं ताजा रेट

Silver Price Today: चांदी की कीमतों में इन दिनों लगातार हलचल देखने को मिल रही है। शनिवार और रविवार को बाजार बंद होने की वजह से अब अगले कारोबारी सत्र में ही तस्वीर साफ होगी। इससे पहले MCX पर चांदी का वायदा भाव 158 रुपये यानी 0.07% की गिरावट के साथ 2,37,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। पिछले कारोबारी सत्र में यह 2,37,658 रुपये प्रति किलो पर बंद हुआ था।

वहीं, बुलियन्स के अनुसार चांदी का भाव 2,37,130 रुपये प्रति किलो रहा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी 66.82 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करती नजर आई। दूसरी ओर, Goodreturns के आंकड़ों में चांदी की कीमत 2,50,000 रुपये प्रति किलो बताई गई है।

आज एक किलो चांदी का क्या है भाव?

शहरों के हिसाब से चांदी की कीमतों में अंतर देखने को मिल रहा है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता समेत कई बड़े शहरों में एक किलो चांदी का भाव 2.50 लाख रुपये है। वहीं चेन्नई, भुवनेश्वर, कटक और कई दक्षिण भारतीय शहरों में कीमत 2.55 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।

शहरवार चांदी के ताजा रेट

शहर1 किलो चांदी का भाव
दिल्ली₹2,50,000
मुंबई₹2,50,000
कोलकाता₹2,50,000
चेन्नई₹2,55,000
पटना₹2,50,000
लखनऊ₹2,50,000
जयपुर₹2,50,000
अहमदाबाद₹2,50,000
सूरत₹2,50,000
पुणे₹2,50,000
नागपुर₹2,50,000
बेंगलुरु₹2,50,000
हैदराबाद₹2,55,000
भुवनेश्वर₹2,55,000
वाराणसी₹2,50,000
नोएडा₹2,50,000
गुरुग्राम₹2,50,000
चंडीगढ़₹2,50,000
अमृतसर₹2,50,000
लुधियाना₹2,50,000
भोपाल₹2,50,000
इंदौर₹2,50,000
राजकोट₹2,50,000
गोवा₹2,50,000
कोच्चि₹2,55,000
तिरुवनंतपुरम₹2,55,000
कोयंबटूर₹2,55,000
मदुरै₹2,55,000
विजयवाड़ा₹2,55,000
विशाखापत्तनम₹2,55,000
तिरुपति₹2,55,000
रायपुर₹2,50,000
रांची₹2,50,000

पिछले कारोबारी दिन चांदी का भाव कैसा रहा?

शुक्रवार को दिल्ली के सर्राफा बाजार में चांदी 2,40,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर रही। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी 0.38% फिसलकर 66.72 डॉलर प्रति औंस पर आ गई।

MCX पर भी चांदी में कमजोरी दिखी। दिसंबर डिलीवरी वाले कॉन्ट्रैक्ट का भाव 749 रुपये यानी 0.31% गिरकर 2,41,600 रुपये प्रति किलो रह गया। लगातार दो कारोबारी दिनों की तेजी के बाद शुक्रवार को चांदी की रफ्तार थम गई।

चांदी के भाव पर क्यों बढ़ रहा दबाव?

विशेषज्ञों के मुताबिक, हालिया तेजी के बाद निवेशकों की ओर से मुनाफावसूली किए जाने से चांदी की कीमतों पर दबाव बना है। इसके अलावा वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर अनिश्चितता भी कीमती धातुओं के बाजार को प्रभावित कर रही है।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के सिद्धार्थ खेमका के अनुसार, घरेलू चांदी की कीमत जनवरी में 4 लाख रुपये प्रति किलो से अधिक के रिकॉर्ड स्तर से 40% से ज्यादा नीचे आ चुकी है और अब करीब 2.3 से 2.4 लाख रुपये प्रति किलो के आसपास है।

निवेश मांग कमजोर, स्टॉक बढ़ने की चिंता

विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी में निवेश की मांग फिलहाल कमजोर बनी हुई है। इससे डीलरों के पास जमा स्टॉक को लेकर चिंता बढ़ रही है। अगर मांग में जल्द सुधार नहीं आया, तो भारतीय डीलरों की करीब 2,000 टन चांदी के ऑर्डर से बाजार में स्टॉक का दबाव और बढ़ सकता है।

पश्चिम एशिया तनाव का भी असर

मुड्रेक्स के विश्लेषक अक्षत सिद्धांत के मुताबिक, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और आपूर्ति से जुड़ी चिंताओं ने भी बाजार की दिशा प्रभावित की है। ईंधन की कीमतों में मजबूती से महंगाई और ब्याज दरों को लेकर चिंता बढ़ रही है।

ऐसे माहौल में निवेशक सोने-चांदी जैसी कीमती धातुओं में निवेश को लेकर भी सतर्क हो रहे हैं। आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक आंकड़े, ब्याज दरों की दिशा और भू-राजनीतिक घटनाक्रम चांदी की कीमतों के लिए अहम संकेत साबित हो सकते हैं।

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लखनऊ में घर खरीदने का सुनहरा मौका! LDA दे रहा फ्लैट्स पर ₹2 लाख तक की सीधी छूट, जानें कब तक है मौका

लखनऊ में अपना घर खरीदने का प्लान कर रहे लोगों के लिए अच्छी खबर है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने जन्माष्टमी और गणेश चतुर्थी 2026 के मौके पर चुनिंदा फ्लैट्स की कीमतों में खास छूट देने का ऐलान किया है। इससे खरीदारों को कम कीमत में अपना घर खरीदने का मौका मिल सकता है। ये ऑफर 4 सितंबर से 14 सितंबर 2026 तक लागू रहेगा। यानी इस योजना के तहत घर खरीदने के लिए 11 दिनों का समय होगा। त्योहारों के मौके पर LDA ने अपने मौजूदा फ्लैट खरीदारों के लिए 2 लाख रुपये तक की छूट का विशेष ऑफर भी शुरू किया है। वहीं फ्लैट की बुकिंग से पहले इस ऑफर की पूरी जानकारी एक बार जरूर चेक कर लें।

इस ऑफर के तहत LDA की ‘पहले आओ, पहले पाओ’ योजना के कुछ चुनिंदा फ्लैट्स पर खरीदारों को विशेष छूट मिलेगी। LDA के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने गुरुवार को इस बारे में आदेश जारी किया।

किस फ्लैट पर मिल रही कितनी छूट

त्योहारी सीजन को देखते हुए LDA ने अपनी कुछ आवासीय योजनाओं में खास छूट देने का फैसला किया है। यह ऑफर FCFS योजना के तहत उपलब्ध चुनिंदा 1 BHK, 2 BHK और 3 BHK फ्लैट्स पर मिलेगा। LDA के फ्लैट्स पर मिलने वाली छूट उनकी कीमत के हिसाब से तय होगी। 20 से 50 लाख रुपये तक के फ्लैट पर 1 लाख रुपये, 50 से 75 लाख रुपये तक के फ्लैट पर 1.5 लाख रुपये और 75 लाख रुपये से ज्यादा कीमत वाले फ्लैट पर 2 लाख रुपये तक की छूट मिलेगी। यानी महंगे फ्लैट खरीदने वालों को इस ऑफर में ज्यादा छूट का फायदा मिलेगा। जो लोग ऑफर की अवधि में LDA की वेबसाइट के जरिए इन फ्लैट्स की बुकिंग करेंगे, वे तय नियमों के अनुसार इस छूट का लाभ उठा सकेंगे।

नियमों को एक बार जरूर करें चेक

इस ऑफर में शामिल फ्लैट ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर दिए जाएंगे। यानी खरीदार को लॉटरी का इंतजार नहीं करना होगा। फ्लैट की उपलब्धता और जरूरी बुकिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र ग्राहक इसे खरीद सकेंगे। यह छूट सीमित समय के लिए दी जा रही है। घर खरीदने वालों को बुकिंग से पहले फ्लैट की उपलब्धता, पात्रता, कीमत और बाकी नियमों की जानकारी जरूर जांच लेनी चाहिए। फ्लैट की कीमत के हिसाब से खरीदारों को 1 लाख, 1.5 लाख और 2 लाख रुपये तक की छूट मिलेगी। ऐसे में LDA की आवासीय योजनाओं में घर खरीदने वालों के लिए यह ऑफर अच्छी बचत का मौका दे सकता है।

Shivani Mehrotra: ‘उम्र के साथ सपने धुंधले नहीं पड़ते’; 43 साल की शिवानी ने हौसलों से फतह की यूरोप की सबसे ऊंची चोटी, माउंट एल्ब्रुस पर फहराया तिरंगा

Who is Shivani Mehrotra: कुछ सपने उम्र के साथ धुंधले नहीं पड़ते, बल्कि जिम्मेदारियों के बीच और मजबूत होते जाते हैं। इसका जीवंत उदाहरण 43 साल की शिवानी मेहरोत्रा हैं, जिन्होंने 18 वर्षीय बेटी की परवरिश, परिवार की जिम्मेदारियां एवं रोजमर्रा की जिंदगी के बीच अपने पर्वतारोहण के जुनून को कभी पीछे नहीं छोड़ा। उन्होंने दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों पर लगातार अपने हौसले तथा हदों को परखती रहीं।

मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले की निवासी शिवानी मेहरोत्रा की शादी 24 साल की उम्र में लखनऊ में हुई और अब वह अपने परिवार के साथ मुंबई में रहती हैं। इस साल स्वतंत्रता दिवस पर उन्होंने यूरोप की सबसे ऊंची चोटी रूस स्थित ‘माउंट एल्ब्रुस’ पर तिरंगा फहराकर इस दिन को अपने लिए यादगार बना दिया।

‘हौसले की परीक्षा थी’

शिवानी ने रूस से भारत लौटने के दौरान न्यूज एजेंसी पीटीआई से फोन पर कहा कि 15 अगस्त को चोटी तक पहुंचना जितना शरीर की ताकत का इम्तिहान था। उतना ही मन के हौसले की भी परीक्षा थी।उन्होंने कहा, उम्र सिर्फ एक नंबर भर है। असली ताकत लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्प और उसे पाने के लिए जरूरी अनुशासन में होती है।”

शिवानी के लिए पर्वतारोहण अपने सपनों और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन की कहानी भी है। वह अपने माता-पिता, पति, बेटी और दोस्तों को अपनी ताकत मानती हैं। शिवानी बताती हैं कि खासकर 40 वर्ष की उम्र पार कर चुकी महिला पर्वतारोहियों और ट्रेकर की संख्या बहुत कम है।

शिवानी ने कहा, “मुझे पहाड़ों पर 40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाएं बहुत कम ही दिखाई देती हैं।” उन्होंने कहा, “मेरे परिवार ने हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया और मुझे यह करने का साहस दिया।” वह अपने पर्वतारोहण अभियानों का खर्च भी काफी हद तक अपनी बचत से उठाने की कोशिश करती हैं।

कैसे हुआ पहाड़ों से लगाव?

शिवानी ने बताया कि पहाड़ों से उनका लगाव 2019 में गहरा हुआ, जब उन्होंने अपनी सबसे करीबी दोस्त के साथ ‘माउंट एवरेस्ट’ आधार शिविर तक ट्रेकिंग की योजना बनाई थी। एक यात्रा की वह छोटी-सी योजना कब जुनून में बदल गई, उन्हें खुद पता नहीं चला। इसके बाद कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और हिमालय के कई हिस्से उनकी मंजिल बनते चले गए।

इसके बाद शिवानी ने ‘फ्रेंडशिप पीक’ और ‘माउंट किलिमंजारो’ जैसी कठिन चोटियों पर भी चढ़ाई की। कैलाश से जुड़े पांच प्रमुख पर्वत अभियानों में से चार वह अब तक पूरा कर चुकी हैं। हालांकि, उनका सबसे बड़ा सपना अभी बाकी है ‘माउंट एवरेस्ट’ फतह करना। साथ ही दुनिया की सातों सबसे ऊंची चोटियों पर भारतीय तिरंगा फहराना।

दुबई होते हुए पहुंचीं रूस

‘माउंट एल्ब्रुस’ अभियान के लिए शिवानी ने आठ अगस्त को मुंबई से अपनी यात्रा शुरू की। दुबई होते हुए वह रूस के मिनरल्नी वोडी पहुंचीं। 10 दिन के इस अभियान का आयोजन रूस की ‘चतुर टूर्स’ नामक कंपनी ने किया था। शिखर पर मौसम के अचानक बदलने की आशंका को देखते हुए अभियान में एक अतिरिक्त दिन भी रखा गया था।

खराब मौसम ने चढ़ाई को और कठिन बना दिया। तेज बर्फबारी, बारिश, कड़ाके की ठंड और ऊंचाई की चुनौती के बीच दल ने अंतिम चढ़ाई से पहले खुद को मौसम और ऊंचाई के अनुकूल बनाने के लिए कई अभ्यास चढ़ाइयां कीं। इनमें करीब 3,000, 4,000 और 4,700 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचना शामिल था।

“रुकना नहीं है, चलते रहना है…”

शिखर पर पहुंचने वाले दिन दल ने रात करीब दो बजे चढ़ाई शुरू की। इस दौरान अंधेरा से लेकर जमा देने वाली ठंड, तेज हवाएं, भारी सामान और कम ऑक्सीजन लेवल तक… हर कदम मुश्किल था। लेकिन शिवानी के भीतर एक ही बात गूंजती रही- “रुकना नहीं है, चलते रहना है।” करीब साढ़े चार घंटे की कठिन चढ़ाई के बाद उन्होंने शिखर पर कदम रखा।

उन्होंने कहा कि इतनी ऊंचाई पर पहुंचकर छोटे से छोटा काम भी मुश्किल हो जाता है। 5,000 मीटर के बाद ऑक्सीजन का स्तर तेजी से कम होने लगता है। बर्फीले मौसम से बचाव के लिए भारी भरकम कपड़ों और जूतों में लगे कांटेदार उपकरणों के साथ एक-एक कदम बढ़ाना भी शरीर के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है।

‘सेल्फ-अरेस्ट’ तकनीकों की ट्रेनिंग भी ली

इस अभियान में शिवानी ने खुद को बचाने की तकनीक का ट्रेनिंग भी लिया। बर्फ पर फिसलने की स्थिति में खुद को रोकना और आपात स्थिति में सही तरीके से प्रतिक्रिया देना इसका हिस्सा था। शिवानी ने कहा कि चढ़ाई का आखिरी पड़ाव अक्सर शरीर से ज्यादा मन के हौसले की परीक्षा लेता है।

उन्होंने कहा, “पहले की यात्राओं में जहां मुझे लगता था कि अब मैं इससे आगे नहीं जा सकती, वहीं मैंने सीखा कि असल शुरुआत तो वहीं से होती है।” शिखर पर पहुंचते ही वह घुटनों के बल बैठ गईं। उन्होंने पहाड़, अपने दोस्तों और उन पर विश्वास जताने वालों के प्रति आभार जताया।

उस पल को याद करते हुए उन्होंने कहा, “मैंने माउंट एल्ब्रुस के सामने सिर झुकाया और कहा-धन्यवाद।” उनके लिए यह चोटी उस बड़े सपने की एक सीढ़ी थी, जिसे वह अभी पूरा करना चाहती हैं।

फिटनेस पर काफी ध्यान देती हैं शिवानी

शिवानी फिटनेस पर भी बहुत ध्यान देती हैं। वह फुल मैराथन, हाफ मैराथन के अलावा 50 किलोमीटर की दौड़ भी पूरी कर चुकी हैं। कोरोना वायरस महामारी के दौरान उन्होंने योग को अपनाया। बाद में उन्होंने एडवांस्ड योग इंस्ट्रक्टर और थेरेपिस्ट के तौर पर ट्रेनिंग लिया। करीब छह वर्षों से वह योग सिखा रही हैं। इनमें गर्भावस्था से पहले और बाद की महिलाओं तथा कैंसर रोगियों के लिए विशेष योग कार्यक्रम भी शामिल हैं।

कैसी है दिनचर्या?

उनकी दिनचर्या भी उनके संकल्प जैसी ही सख्त है। वह तड़के करीब साढ़े तीन बजे उठती हैं और योग, जिम में कसरत, दौड़ तथा पर्वतारोहण की तैयारी करती हैं। खान-पान को लेकर भी वह बेहद अनुशासित रहती हैं। शिवानी के लिए पर्वतारोहण सिर्फ किसी निश्चित ऊंचाई तक पहुंचने का नाम नहीं है।

Shivani Mehrotra

वह कहती हैं, “मैं नहीं मानती कि ऊंचाई के आधार पर कोई चोटी कम या ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। हर पहाड़ अपने साथ एक अलग अनुभव लाता है और हर पहाड़ सम्मान मांगता है।” अब उनकी नजर नेपाल की ऊंचाई वाली चोटियों पर है। यह तैयारी उन्हें अपने सबसे बड़े लक्ष्य माउंट एवरेस्ट तक ले जाएगी।

पैसे की चुनौती आई सामने

उन्होंने विश्वास के साथ कहा, “एवरेस्ट मेरा मुख्य लक्ष्य है। मुझे इसे करना ही है।” हालांकि, इस सपने की राह में पैसे भी बड़ी चुनौती है। एवरेस्ट अभियान पर करीब 40 से 50 लाख रुपये खर्च हो सकते हैं। दूसरे अंतरराष्ट्रीय पर्वत अभियानों का खर्च भी कई लाख रुपये तक पहुंच जाता है।

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शिवानी ने अब तक अपने योग पेशे से हुई बचत से ही अधिकांश अभियानों का खर्च उठाया है। उन्होंने कहा, “मैं यह अपने दम पर करना चाहती हूं।” इस उम्र में भी शिवानी के कदम रुके नहीं हैं। उनका कहना है, “अगर आपने मन में ठान लिया है कि आपको कुछ हासिल करना है, तो आप उसे कर सकते हैं। बस अपने लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखना होता है।”

न नौकरी छोड़ने की जरूरत, न ऑफिस का झंझट! इस साइड बिजनेस से 5 लाख महीने कमाने का दावा

आज के दौर में नौकरी के साथ एक्सट्रा कमाई का रास्ता तलाशने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कोई ऑनलाइन काम शुरू करता है तो कोई कंटेंट क्रिएशन या छोटे कारोबार में हाथ आजमाता है। इसी बीच एक्स पर एक यूजर की पोस्ट ने लोगों का ध्यान खींचा है, जिसमें एक ऐसे साइड बिजनेस का जिक्र किया गया है, जिसे शुरू करने के लिए बड़े निवेश की जरूरत नहीं बताई गई है। पोस्ट के मुताबिक, कुछ लोग इसी काम को पार्ट-टाइम करते हुए हर महीने करीब 5 लाख रुपये तक कमा रहे हैं।

खास बात यह है कि इसके लिए न अपना ऑफिस खोलने की जरूरत बताई गई है और न ही कर्मचारियों या सामान के स्टॉक का झंझट है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर इस कमाई के मॉडल को लेकर दिलचस्पी बढ़ गई है। हालांकि, असल कमाई कितनी होगी, यह कई बातों पर निर्भर कर सकता है।

न दुकान, न स्टाफ… फिर कमाई कैसे?

एक्स यूजर अंकित पांडे ने बताया कि उनके कुछ दोस्त रियल एस्टेट में फ्रीलांसिंग के जरिए अच्छी कमाई कर रहे हैं। उन्होंने इसे ‘रियल एस्टेट फ्रीलांसिंग’ नाम दिया और दावा किया कि इसे बेहद कम शुरुआती खर्च के साथ शुरू किया जा सकता है।

उनके मुताबिक, सबसे पहले अपने शहर के कई बिल्डरों से संपर्क करना होगा और उनके चैनल पार्टनर प्रोग्राम से जुड़ना होगा। इसके बाद उनके प्रोजेक्ट, कीमत, भुगतान योजना और कब्जे की तारीख जैसी जानकारी समझनी होगी।

असली काम है खरीदार ढूंढना

बिल्डरों से जुड़ने के बाद अगला कदम संभावित ग्राहकों तक पहुंचना है। पांडे के अनुसार, खरीदार सोशल मीडिया, दोस्तों, रिश्तेदारों, सहकर्मियों और अपने निजी नेटवर्क के जरिए खोजे जा सकते हैं। यानी इस काम में दुकान खोलने या कोई सामान खरीदकर रखने की जरूरत नहीं है। मुख्य भूमिका खरीदार और बिल्डर के बीच संपर्क बनाने, भरोसा कायम करने और सौदा पूरा कराने की होती है।

50 लाख के फ्लैट पर कितना बन सकता है कमीशन?

पांडे ने अपनी पोस्ट में एक उदाहरण के जरिए कमाई का गणित समझाया। उनके मुताबिक, अगर 50 लाख रुपये के फ्लैट पर 3 प्रतिशत कमीशन मिले, तो एक सौदे से 1.5 लाख रुपये बन सकते हैं। इसी हिसाब से तीन फ्लैट बिकने पर करीब 4.5 लाख रुपये और चार सौदों पर 6 लाख रुपये तक कमीशन बन सकता है। हालांकि, रियल एस्टेट में कमीशन की दर हर जगह एक जैसी नहीं होती। यह बिल्डर, प्रोजेक्ट और समझौते के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।

सुनने में आसान, लेकिन सौदा पक्का करना मुश्किल

सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इस मॉडल को आकर्षक जरूर माना, लेकिन कई यूजर्स ने इसकी असली चुनौती भी बताई। उनका कहना था कि खरीदार ढूंढना और आखिर में डील बंद करना उतना आसान नहीं है, जितना पोस्ट में दिखाई देता है।

एक यूजर ने कहा कि इस काम में ग्राहकों की तलाश के साथ जोखिम भी जुड़ा होता है। वहीं, दूसरे ने बताया कि कमीशन आकर्षक लग सकता है, लेकिन ग्राहक को मनाकर सौदा पूरा करना काफी मुश्किल होता है।

30 साल से यही काम कर रहे अंकल

एक यूजर ने अपने परिवार का अनुभव साझा करते हुए बताया कि उसके अंकल करीब तीन दशक से रियल एस्टेट का काम कर रहे हैं। कभी उनके महीने में 5-7 घर तक बिक जाते हैं, तो कभी लगातार 4-6 महीने तक एक भी सौदा नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति इसलिए संभल जाती है क्योंकि उनकी पत्नी सरकारी नौकरी में हैं। उनके मुताबिक, रियल एस्टेट का यह काम ऐसे व्यक्ति के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है जो अपने परिवार का अकेला कमाने वाला सदस्य हो।

‘साइड इनकम’ का मौका या पूरी तरह बिक्री पर निर्भर काम?

इस पूरी चर्चा ने रियल एस्टेट फ्रीलांसिंग की एक दिलचस्प तस्वीर सामने रखी है। इसमें शुरुआती निवेश कम हो सकता है, लेकिन कमाई पूरी तरह ग्राहकों, बिक्री और सौदे पूरे होने पर निर्भर करती है। यानी कागज पर यह मॉडल जितना आसान दिखता है, असल जिंदगी में उतना ही नेटवर्क, भरोसे और बिक्री की क्षमता का खेल है। सोशल मीडिया पर 5 लाख रुपये महीने की कमाई का दावा भले आकर्षक हो, लेकिन हर व्यक्ति के लिए इतनी आय की गारंटी नहीं मानी जा सकती।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

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विश्वकप में 5वें स्थान रहने परे चक दे गर्ल्स को मिले 50 लाख रुपए

हॉकी इंडिया ने शुक्रवार को भारतीय महिला हॉकी टीम के लिए 50 लाख रुपये के नकद इनाम की घोषणा की। टीम ने पांच दशकों के बाद वर्ल्ड कप में ऐतिहासिक पांचवां स्थान हासिल किया है।

सलीमा टेटे की टीम ने गुरुवार को एमस्टेलवीन में 5वें/6वें स्थान के लिए हुए क्लासिफिकेशन मैच में दुनिया की नंबर 5 टीम जर्मनी को 3-1 से हराकर यह उपलब्धि हासिल की। यह टूर्नामेंट में भारत का अब तक का दूसरा सबसे अच्छा प्रदर्शन है; इससे पहले 1974 में हुए पहले टूर्नामेंट में टीम चौथे स्थान पर रही थी।

टीम ने पूरे टूर्नामेंट में सिर्फ़ एक हार का सामना किया। उन्होंने चीन, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी बेहतर रैंकिंग वाली टीमों के साथ मैच ड्रॉ कराए और दक्षिण अफ्रीका को 6-1 से हराया। आखिर में, मुख्य कोच शुअर्ड मरिने के मार्गदर्शन में जर्मनी के खिलाफ जीत के साथ उन्होंने अपना अभियान पूरा किया।

इस उपलब्धि पर टीम को बधाई देते हुए हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की ने कहा, “यह भारतीय महिला हॉकी के लिए एक ऐतिहासिक नतीजा है। 52 साल बाद वर्ल्ड कप में पांचवां स्थान हासिल करना इस टीम की कड़ी मेहनत, हिम्मत और लड़ने के जज्बे का सबूत है, जो उन्होंने पूरे टूर्नामेंट के दौरान दिखाया। हॉकी इंडिया की ओर से, मैं टीम के लिए 50 लाख रुपये के नकद इनाम की घोषणा करते हुए खुशी महसूस कर रहा हूं। यह हमारी तरफ से उनकी सराहना का एक छोटा सा तोहफा है, और मुझे उम्मीद है कि इससे खिलाड़ियों को और बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिलेगी।”

इसी भावना को दोहराते हुए हॉकी इंडिया के महासचिव भोला नाथ सिंह ने कहा, “सलीमा और उनकी टीम ने देश का मान बढ़ाया है। उन्होंने दुनिया की कुछ बेहतरीन टीमों का मुकाबला किया और उनके सामने डटकर खेलीं। यह घोषणा उनके समर्पण और कड़ी मेहनत को सम्मान देने का हमारा तरीका है। हमें उम्मीद है कि इससे टीम को और प्रेरणा मिलेगी क्योंकि अब वे एशियाई खेलों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।”