Drishyam 3 Cast Fees: ‘दृश्यम 3’ के लिए अजय देवगन ने वसूले 18 करोड़, जानें तब्बू से लेकर जयदीप अहलावत को कितने मिले पैसे!

Drishyam 3 Cast Fees: अजय देवगन अपनी मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘दृश्यम 3 द कन्क्लूजन’ की रिलीज की तैयारी कर रहे हैं। फैंस उन्हें बड़े पर्दे पर विजय सलगांवकर के रूप में देखने के लिए बेकरार हैं। क्या आप जानते हैं कि इस फिल्म में अपने रोल के लिए वे कितनी फीस ले रहे हैं? आइए जानते हैं।

‘दृश्यम 3’ के लिए अजय देवगन की फीस

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ‘दृश्यम 3 द कन्क्लूजन’ में विजय सलगांवकर का रोल निभाने के लिए अजय देवगन को 18 करोड़ रुपये से 22 करोड़ रुपये के बीच फीस दी जा रही है। खबरों के मुताबिक नवंबर 2022 में रिलीज हुई ‘दृश्यम 2’ के लिए एक्टर ने 30 करोड़ रुपये लिए थे। हालांकि पहली ‘दृश्यम’ (2015) फिल्म के लिए उनकी फीस के बारे में कोई खास आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।

तब्बू ने कितने रुपए किए चार्ज?

जहां अजय देवगन को ‘दृश्यम 3’ में अपने रोल के लिए 18-22 करोड़ रुपये मिल रहे हैं। वहीं News24 की एक रिपोर्ट का दावा है कि तब्बू को इस फिल्म के लिए लगभग 2.5 करोड़ रुपये से 3.5 करोड़ रुपये दिए जा रहे हैं। वे फिल्म में मीरा देशमुख का रोल निभा रही हैं। जबकि श्रिया सरन अपने नंदिनी सलगांवकर के किरदार के लिए 1 करोड़ रुपये की फीस ले रही है। हालांकि ‘दृश्यम 3’ के मेकर्स ने इनमें से किसी भी आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

इशिता दत्ता की फीस

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इशिता दत्ता 50 लाख रुपये मिल रहे हैं। जबकि रजत कपूर फिल्म में अपने किरदार के लिए 40 लाख से 70 लाख रुपये के बीच मिल रहे हैं। ‘दृश्यम 3 द कन्क्लूजन’ में जयदीप अहलावत भी एक अहम भूमिका में नजर आएंगे। हालांकि अभी उनकी फीस के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

अभिषेक पाठक के निर्देशन में बनी ‘दृश्यम द कन्क्लूजन’ 2 अक्टूबर, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म में यह पता चलेगा कि क्या विजय एक बार फिर जांच में आगे रह पाते हैं, जबकि उनका अतीत लगातार उनका पीछा कर रहा है।

Gold silver Prices Today: गोल्ड ने बदली चाल, दिल्ली में 700 रुपये चढ़ा

Gold silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में 30 सितंबर को गोल्ड में तेजी लौट आई। यह 700 रुपये चढ़कर 1,49,300 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड में मजबूती का असर इसकी घरेलू कीमतों पर पड़ा। साथ ही कम प्राइस पर खरीदारी में इनवेस्टर्स ने दिलचस्पी दिखाई। 29 सितंबर को गोल्ड गिरकर 2 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया था।

चांदी की कीमतें लगातार दूसरे स्थिर रहीं

दिल्ली सर्राफा बाजार में चांदी की कीमतों में बदलाव नहीं हुआ। चांदी 2.32 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर रही। यह लगातार दूसरा दिन है, जब चांदी की कीमतों में किसी तरह का बदलाव नहीं हुआ। ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म लेमन के रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने कहा कि हाल में सोने में आई गिरावट के बाद इसकी कीमतें 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे चली गई थी। इस कीमत पर इनवेस्टर्स की खरीदारी देखने को मिली।

सितंबर में सोना करीब 5 फीसदी गिरा है

अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड में हल्की तेजी देखने को मिली। हालांकि, यह अभी भी 4,200 डॉलर प्रति औंस के नीचे है। सिल्वर 1.28 फीसदी गिरकर 60.68 डॉलर प्रति औंस था। सितंबर गोल्ड के लिए अच्छा नहीं रहा। इस महीने सोना करीब 5 फीसदी गिरा है। हालांकि, 30 सितंबर को क्रूड ऑयल की कीमतों में बड़ी गिरावट दिखी। इसकी वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ऑयल टैंकर्स की आवाजाही की शुरुआत है।

क्रूड में नरमी के बावजूद सोने पर दबाव

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुल जाने से क्रूड ऑयल की सप्लाई बढ़ेगी। इससे क्रूड ऑयल की कीमतों पर दबाव घटेगा। 30 सितंबर को ब्रेंट क्रूड गिरकर 98 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। यह बीते कई हफ्तों से लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ था। महंगे क्रूड की वजह से महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ा था। इससे अमेरिकी में अक्तूबर में एक बार फिर इंटरेस्ट रेट बढ़ने की उम्मीद बढ़ गई थी। हालांकि, क्रूड में नरमी के बाद फेडरल रिजर्व इंटरेस्ट रेट बढ़ाएगा या नहीं, यह बताना अभी मुश्किल है।

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इस साल सोने और चांदी की कीमतों पर दिखा है दबाव 

बुलियन की कीमतें इस साल की शुरुआत में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थी। उसके बाद उनमें तेज गिरावट आई। फरवरी के आखिर में अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद बुलियन पर दबाव बढ़ गया। पिछले करीब 6 महीनों से सोने और चांदी की कीमतें सीमित दायरे में चढ़ती-उतरती रही हैं।

DDA Housing Scheme: दिल्ली में सिर्फ ₹35 लाख में घर खरीदने का मौका! DDA ने निकाली 209 EWS फ्लैटों की स्कीम, जानिए कौन कर सकता है आवेदन

DDA Housing Scheme in Delhi: दिल्ली विकास प्राधिकरण यानी DDA ने राष्ट्रीय राजधानी में घर खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए एक नई स्कीम शुरू की है। ‘जनता आवास योजना फेज-2’ के तहत 209 EWS फ़्लैट्स के लिए आवेदन शुरू हो गए हैं। इन फ़्लैट्स की कीमत लगभग ₹34.86 लाख से 35.50 लाख रुपये के बीच है। हालांकि, बेस प्राइस के अलावा GST और दूसरे लागू होने वाले चार्ज भी लग सकते हैं। इसलिए, आवेदन करने से पहले कुल लागत और स्कीम की शर्तों को समझना जरूरी है। आइए जानते हैं कि यह योजना क्या है और इसकी शर्तें क्या हैं।

कहां मिलेंगे ये फ्लैट

DDA की यह योजना दिल्ली के रोहतक रोड इलाके में झाखिरा फ्लाईओवर के पास स्थित प्रगति-1 ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट से जुड़ी है। इस योजना के तहत EWS कैटेगरी के कुल 209 फ्लैट्स उपलब्ध कराए जा रहे हैं। फ्लैट लेने के इच्छुक लोगों को आवेदन करने से पहले लोकेशन और प्रोजेक्ट से जुड़ी जानकारी भी देख लेनी चाहिए।

फ्लैट की कीमत क्या है?

इन फ्लैट्स की कीमत लगभग ₹34.86 लाख से 35.50 लाख रुपये के बीच बताई जा रही है। यह कीमत फ्लैट के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है। इसके अलावा, GST और दूसरे लागू होने वाले चार्ज भी देने पड़ सकते हैं। इसलिए, खरीदारों को सिर्फ बेस प्राइस के आधार पर अपना बजट तय नहीं करना चाहिए कुल लागत का हिसाब लगाना जरूरी है।

कौन कर सकता है आवेदन

इस योजना में आवेदन के लिए आवेदक की उम्र कम से कम 18 साल होनी चाहिए। आवेदक का भारतीय नागरिक होना जरूरी है। योजना EWS कैटेगरी के लिए है, इसलिए परिवार की सालाना आय 10 लाख रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।आवेदन के लिए PAN कार्ड और अपने नाम का बैंक अकाउंट होना भी जरूरी है। इसके अलावा पात्रता से जुड़े जरूरी दस्तावेज और आय प्रमाण से संबंधित शर्तों को पूरा करना होगा।

आवेदन शुल्क कितना है?

इस DDA स्कीम के लिए आवेदन करने हेतु ₹2,500 का रजिस्ट्रेशन शुल्क आवश्यक है। यह शुल्क वापस नहीं किया जाएगा। इसलिए, आवेदन करने से पहले अपनी पात्रता और दस्तावेजों की जांच करना आवश्यक है।

कैसे होगा फ्लैट का आवंटन?

इन फ्लैट्स का आवंटन ‘पहले आओ-पहले पाओ’ के आधार पर नहीं होगा। योग्य आवेदकों के बीच कंप्यूटराइज्ड ड्रॉ के जरिए फ्लैट का आवंटन किया जाएगा। इसका मतलब है कि आवेदन करने मात्र से फ्लैट मिलना तय नहीं है। पात्र आवेदकों में से ड्रॉ के जरिए चयन किया जाएगा।

आय प्रमाणपत्र की तारीख भी जरूरी

आवेदकों को आय और EWS स्टेटस से जुड़े दस्तावेजों की तारीखों पर भी ध्यान देना चाहिए। इस स्कीम के तहत, आय या EWS सर्टिफिकेट 7 दिसंबर, 2026 को या उससे पहले जारी किया गया होना चाहिए। इसलिए, पुराने या गलत तारीख वाले दस्तावेज़ों के साथ आवेदन करने से पहले स्कीम की शर्तों और नियमों को ध्यान से पढ़ना जरूरी है।

आवेदन से पहले इन बातों का रखें ध्यान

अगर आप इस स्कीम के तहत अप्लाई करने के बारे में सोच रहे हैं, तो सिर्फ फ्लैट की कीमत के आधार पर ही फैसला न करें। सबसे पहले GST और दूसरे लागू होने वाले चार्ज समेत कुल लागत को समझें। इसके अलावा, सालाना पारिवारिक आय, उम्र, PAN, बैंक अकाउंट की जानकारी और EWS कैटेगरी से जुड़े डॉक्युमेंट्स के मामले में अपनी पात्रता (eligibility) की जांच कर लें।

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DDA ने अप्लाई करने की प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया है। इच्छुक आवेदक DDA की ऑफिशियल वेबसाइट और संबंधित ई-सर्विसेज के जरिए स्कीम के बारे में पूरी जानकारी पा सकते हैं और अपना एप्लीकेशन जमा कर सकते हैं। अप्लाई करने से पहले नियम और शर्तें पढ़ना जरूरी है, क्योंकि पात्रता की शर्तों को पूरा न करने या जरूरी डॉक्युमेंट्स न होने पर आपके एप्लीकेशन पर बुरा असर पड़ सकता है।

(दिल्ली से शुभांगी तिवारी की रिपोर्ट)

Gold Silver Prices Today: दिल्ली में सोना 1.50 लाख रुपये से नीचे आया, चांदी में बदलाव नहीं

Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में 29 सितंबर को सोने की कीमतें गिरकर 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे आ गई। बीते दो महीने में पहली बार ऐसा हुआ। इसकी वजह लोकल बाजार में कमजोर मांग और डॉलर में मजबूती है। चांदी की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

31 जुलाई के बाद पहली बार सोना 1.5 लाख से नीचे

दिल्ली में सोना 1,400 रुपये गिरकर 1,48,600 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। इससे पहले 31 जुलाई को सोने का भाव 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे था। तब सोने का भाव 1,48,300 रुपये प्रति 10 ग्राम था। चांदी का भाव बगैर किसी बदलाव के 2.32 लाख रुपये प्रति किलोग्राम रहा। हालांकि, 28 सितंबर को चांदी में 5,000 रुपये की गिरावट आई थी।

सितंबर में ग्लोबल प्रेशर की वजह से सोने में तेज गिरावट

चॉइस ब्रोकिंग की एनालिस्ट पिंकी यादव ने कहा, “सितंबर में सोने में तेज गिरावट आई है। ग्लोबल प्रेशर की वजह से यह गिरकर 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है।” हालांकि, 29 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में हल्की मजबूती दिखी। लेकिन, इससे पहले के सत्र में सोना 4 फीसदी गिरा था।

क्रूड की कीमतें लगातार ऊंची बने रहने से महंगाई बढ़ने का डर

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच टकराव कम होने के संकेत नहीं दिख रहे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मिड-टर्म इलेक्शंस के बाद ईरान पर बड़े हमले की धमकी दी है। इस वजह से क्रूड ऑयल की कीमतें हाई लेवल पर बनी हुई है। क्रूड के हाई लेवल पर बने रहने से महंगाई बढ़ने का डर है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक के चेयरमैन केविन वॉर्श कह चुके हैं कि उनका फोकस फिलहाल महंगाई को काबू में करने पर होगा।

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अमेरिका में एक बार फिर बढ़ सकता है इंटरेस्ट रेट 

माना जा रहा है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व अगले महीने के आखिर में इंटरेस्ट रेट एक बार फिर बढ़ा सकता है। इंटरेस्ट रेट बढ़ने पर सोने की चमक घटती है। इधर, डॉलर में मजबूती जारी है। इन दोनों वजहों से सोने पर दबाव बना रह सकता है। डॉलर के मजबूत होने से दूसरी करेंसी में सोना खरीदना महंगा हो जाता है। इसका असर सोने की कीमतों पर पड़ता है।

EPF Investment: रिटायरमेंट के बाद रेगुलर इनकम के लिए EPF का पैसा कहां लगाएं? समझिए पूरा हिसाब

EPF Investment: रिटायरमेंट के समय EPF में 50 लाख रुपये जमा हैं तो सवाल सिर्फ यह नहीं है कि पैसा कहां रखा जाए। असली सवाल यह है कि इस रकम से हर महीने खर्च कैसे चले और पैसा जल्दी खत्म भी न हो।

रिटायरमेंट के बाद सैलरी बंद हो जाती है। इसलिए EPF की रकम को अलग-अलग निवेश में बांटकर नियमित इनकम और लंबी अवधि की ग्रोथ का संतुलन बनाया जा सकता है।

50 लाख रुपये को कैसे बांटें?

Master Capital Services की वेल्थ मैनेजमेंट AVP आकांक्षा शुक्ला के मुताबिक, रिटायरमेंट पोर्टफोलियो में फिक्स्ड इनकम, डेट, इक्विटी और इमरजेंसी फंड का संतुलन रखा जा सकता है।

50 लाख रुपये के कॉर्पस का एक उदाहरण लें तो करीब 45% रकम यानी 22.50 लाख रुपये फिक्स्ड इनकम वाले विकल्पों में रखी जा सकती है। 32.5% यानी 16.25 लाख रुपये डेट में और 17.5% यानी 8.75 लाख रुपये इक्विटी में रखे जा सकते हैं। बाकी 2.50 लाख रुपये इमरजेंसी फंड के तौर पर रखे जा सकते हैं।

निवेशहिस्सारकम
फिक्स्ड इनकम45%₹22.50 लाख
डेट निवेश32.50%₹16.25 लाख
इक्विटी17.50%₹8.75 लाख
इमरजेंसी फंड5%₹2.50 लाख
कुल100%₹50 लाख

यह सिर्फ उदाहरण है। आप अपनी उम्र, मासिक खर्च, पेंशन और जोखिम क्षमता के हिसाब से इसमें बदलाव कर सकते हैं।

फिक्स्ड इनकम से कितनी कमाई?

22.50 लाख रुपये का हिस्सा SCSS, बैंक FD जैसे फिक्स्ड इनकम विकल्पों में रखा जा सकता है। अगर इस हिस्से पर करीब 7% सालाना ब्याज मिलता है, तो साल भर में लगभग 1.57 लाख रुपये की ब्याज आय बनती है।

यानी इस हिस्से से करीब 13,000 रुपये महीने की इनकम मिल सकती है।

डेट निवेश क्यों जरूरी है?

16.25 लाख रुपये डेट निवेश में रखने का मकसद पोर्टफोलियो को स्थिर रखना और जरूरत के समय पैसा उपलब्ध कराना है। डेट म्यूचुअल फंड जैसे विकल्प इसमें मदद कर सकते हैं।

अगर इस हिस्से से लंबे समय में करीब 6.5% सालाना रिटर्न मिलता है, तो सालाना लगभग 1.06 लाख रुपये की ग्रोथ बन सकती है।

इक्विटी में भी रखें कुछ पैसा

रिटायरमेंट के बाद पूरा पैसा सुरक्षित निवेश में रखने से महंगाई का असर बढ़ सकता है। इसलिए 50 लाख रुपये के इस उदाहरण में 8.75 लाख रुपये इक्विटी के लिए रखे गए हैं।

इस रकम को लार्ज-कैप, इंडेक्स या हाइब्रिड फंड जैसे विकल्पों में लगाया जा सकता है। यहां मकसद हर साल ज्यादा रिटर्न कमाना नहीं है। मकसद यह है कि लंबे समय में कॉर्पस पर महंगाई का असर कम हो। मान लीजिए इस हिस्से से लंबे समय में औसतन 10% रिटर्न मिलता है। तब साल भर में करीब 87,500 रुपये की ग्रोथ हो सकती है।

हर महीने कितनी रकम निकाल सकते हैं?

रिटायरमेंट में एक अहम सवाल यह है कि 50 लाख रुपये में से हर साल कितनी रकम निकाली जाए। स्वाति जैन के मुताबिक, 4 से 5% सालाना निकासी की रणनीति अपनाई जा सकती है।

50 लाख रुपये पर 4% की दर से सालाना करीब 2 लाख रुपये निकाले जा सकते हैं। यानी हर महीने लगभग 16,700 रुपये। अगर निकासी की दर 5% रखी जाए तो सालाना करीब 2.50 लाख रुपये निकलेंगे। इस हिसाब से मासिक रकम लगभग 20,800 रुपये होगी। इस तरह 50 लाख रुपये के कॉर्पस से करीब 16,700 से 20,800 रुपये महीने का शुरुआती कैश फ्लो बनाया जा सकता है।

1-2 साल का खर्च अलग रखें

रिटायरमेंट के बाद बाजार गिरने पर इक्विटी बेचकर खर्च निकालना नुकसानदायक हो सकता है। इससे बचने के लिए कुछ रकम अलग रखना जरूरी है। मान लीजिए आपका मासिक खर्च 20,000 रुपये है। ऐसे में एक साल का खर्च 2.40 लाख रुपये होगा। दो साल के खर्च के लिए करीब 4.80 लाख रुपये अलग रखे जा सकते हैं।

इस रकम को ऐसे विकल्प में रखा जा सकता है जहां पैसा आसानी से उपलब्ध हो। बाजार में बड़ी गिरावट आने पर रोजमर्रा के खर्च के लिए इक्विटी बेचने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

EPF पर ही निर्भर क्यों न रहें?

EPF रिटायरमेंट के लिए बड़ा कॉर्पस बनाने में मदद करता है। लेकिन रिटायरमेंट के बाद जरूरत बदल जाती है। हर महीने सैलरी की जगह अब निवेश से कैश फ्लो चाहिए।

Kustodian Life के फाउंडर कुणाल काबरा के मुताबिक, 58 साल की उम्र के बाद EPF में नया योगदान बंद हो जाता है और बैलेंस पर ब्याज मिलने की भी तय सीमा है। इसलिए रिटायरमेंट के बाद सिर्फ EPF पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग निवेशों से इनकम का इंतजाम करना जरूरी है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Hanuman Ansh: ‘हनुमान अंश’ ने कमाया 18,200% मुनाफा, 4 लोगों के बीच बंटेगी कमाई, निर्देशक को मिलेंगे इतने करोड़

Hanuman Ansh: ‘हनुमान अंश’ 2026 की सबसे बड़ी सरप्राइज हिट फिल्म बन गई है। ‘धुरंधर 2’ और ‘बॉर्डर 2’ के बाद यह इस साल की तीसरी सबसे बड़ी हिट फिल्म है जो पिछले सात हफ्तों से सिनेमाघरों में डटी है। बॉक्स ऑफिस कलेक्शन इसके कुछ वीक और लगे रहने की तरफ इशारा कर रहा है। हाल में ही अपने लेटेस्ट इंटरव्यू में फिल्म की प्रोड्यूसर में से एक अनुप्रिया नागर ने बताया था कि फिल्म 1.5 करोड़ रुपये से कुछ ज्यादा के बजट में बनी थी। उन्होंने फिल्म में 50 लाख रुपये लगाए हैं। साथ ही डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी ने फिल्म बनाने के दौरान फीस के तौर पर एक पैसा नहीं लिया था। लेकिन अब फिल्म से होने वाला मुनाफा चारों पार्टनर्स के बीच बांटा जाएगा।

डायरेक्टर को मिलेंगे 50 करोड़

‘हनुमान अंश’ की प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर ने बताया कि इस फिल्म को डायरेक्ट करने के लिए विशाल चतुर्वेदी ने फीस नहीं ली थी। उन्होंने एक पैसा नहीं लिया था। अब प्रोफिट में से उन्हें हिस्सा दिया जाएगा। खबरों के मुताबिक विशाल को 50 करोड़ रुपए मिल सकते हैं। हालांकि ये पुष्ट आंकड़ा नहीं है।

4 लोगों में बांटे जाएंगे इतने करोड़!

ट्रेड ट्रैकर सैकनिल्क के मुताबिक फिल्म ने 47 दिनों में कुल 366.45 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया है। जब उनसे रिटर्न को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, ‘मुझे मुनाफे का एक-चौथाई हिस्सा दिया जाएगा। सबसे पहले डिस्ट्रीब्यूटर को हिस्सा दिया जाएगा। फिर हम बाकी खर्चों और टैक्स को पे करेंगे। इसके बाद जितना भी पैसा बचेगा वह 4 लोगों में बांट दिया जाएगा।

अनुप्रिया को दिए जाएंगे 50 करोड़

अनुप्रिया से जब सवाल किया गया कि उन्हें कितने पैसे मिलने वाले हैं तो उन्होंने कहा कि अभी तक उन्हें कम से कम 50 करोड़ रुपये की उम्मीद है। इतना अमाउंट तब है, जब फिल्म ओटीटी पर नहीं आई है। मेकर्स ने अभी तक OTT, सैटेलाइट या म्यूजिक में से कोई डील नहीं की है। उन्होंने बताया कि ‘अभी तक तो मेरा अनुमान है कि 50 करोड़ रुपये कमा लूंगी। लेकिन पक्का नहीं कह सकती हूं। हमें अभी OTT, म्यूजिक और सैटेलाइट डील भी करनी है, तो ये संख्या बढ़ भी सकती है।

अनुप्रिया ने बताया आगे का प्लान

जब उनसे 50 करोड़ रुपये का वह अब वह क्या करने वाली हैं। इस सवाल पर वह मुस्कुराईं और उन्होंने कहा, ‘मुझे तो यह भी नहीं पता कि इतने सारे पैसे कैसे संभालूं। मुझे लगता है कि इसे सोसाइटी को वापस कर दिया जाना चाहिए।’ अनुप्रिया ने बताया कि वह अपना प्रोडक्शन हाउस बनाना चाहती हैं। इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि वह ऐसी और कहानियां पर्दे पर लाएंगी। रीजनल फिल्में और वेब सीरीज बनाना चाहेंगी, लेकिन उनका बजट कम होगा।

जब हाउसवाइफ हो सकती है तो हाउस-हसबैंड क्यों नहीं? मद्रास हाईकोर्ट के फैसले पर इंटरनेट पर छिड़ी जंग

मद्रास: हाई कोर्ट में वैवाहिक विवाद की सुनवाई के दौरान मदुरै बेंच के सामने घर और परिवार की जिम्मेदारियों से जुड़ा एक अहम मामला सामने आया। इस मामले में पति-पत्नी की भूमिका और परिवार को संभालने से जुड़े कई पहलुओं पर चर्चा हुई।

यह मामला तिरुवन्नामलाई के एक डॉक्टर दंपति का था। दोनों की शादी 2011 में हुई थी और उस समय वे पुडुचेरी के एक मेडिकल कॉलेज अस्पताल में काम करते थे। 2012 में उनके पहले बच्चे का जन्म हुआ। इसके बाद पत्नी बच्चों की देखभाल के लिए अपने माता-पिता के साथ रहने लगी, जबकि पति ने कार्डियोलॉजी की आगे की पढ़ाई जारी रखी। फिर 2016 में दोनों का दूसरा बच्चा हुआ।

COVID-19 महामारी के बाद दोनों साथ रहने लगे, लेकिन कुछ समय बाद उनके बीच विवाद हो गया। पत्नी ने साथ रहने के लिए फैमिली कोर्ट का रुख किया, जबकि पति ने तलाक की मांग की। फैमिली कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद दोनों ने हाई कोर्ट में अपील की।

कोर्ट ने हाउस-हसबैंड के रोल का जिक्र कुछ इस तरह किया

सुनवाई के दौरान बेंच ने परिवार में अलग-अलग जिम्मेदारियों को लेकर बात की। कोर्ट ने कहा कि परिवार बहुत जरूरी है और घर संभालने के काम को भी कमाई जितनी अहमियत मिलनी चाहिए। साथ ही कहा कि यदि हाउसवाइफ का रोल हो सकता है तो हाउस-हसबैंड का रोल भी हो सकता है। बेंच ने यह भी कहा कि ‘होममेकर’ (Homemaker) शब्द किसी एक जेंडर को नहीं बताता है। कोर्ट ने घर के काम की कीमत को लेकर सुप्रीम कोर्ट की कही बात का भी जिक्र किया।

सुनवाई के दौरान पति ने बच्चों की भलाई को ध्यान में रखते हुए पत्नी को 2.5 करोड़ रुपये देने पर सहमति जताई। पत्नी ने भी इस समझौते को स्वीकार कर लिया। इसके बाद हाई कोर्ट ने आपसी सहमति से दोनों को तलाक दे दिया। कोर्ट के आदेशानुसार पति को तीन महीने के भीतर पत्नी को 1.5 करोड़ रुपये देने हैं। इसके अलावा दोनों बच्चों के नाम पर एक साल के भीतर 50-50 लाख रुपये जमा करने हैं।

कोर्ट की बात सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों के अलग-अलग रिएक्शन आए। इसके साथ ही इस मामले ने एक बार फिर यह चर्चा सामने ला दी है कि परिवार में घर और बाहर की जिम्मेदारियां पति-पत्नी दोनों की हो सकती हैं। घर संभालने के काम को भी परिवार की जिम्मेदारी का अहम हिस्सा माना जाना चाहिए।

Gold Silver Prices Today: दिल्ली में सोना 1600 रुपये फिसला, चांदी 5000 रुपये लुढ़की

Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में 24 सितंबर को लगातार चौथे दिन गिरावट आई। यह 1,600 रुपये गिरकर 1,52,400 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई। चांदी में भी बड़ी गिरावट आई। यह 5,000 रुपये गिरकर 2.37 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया। सोने और चांदी की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार के संकेतों का असर पड़ा।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल का असर

एक्सपर्ट्स का कहना है कि क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने का असर सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ा। ब्रेंट क्रूड का प्राइस एक बार फिर 105 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया है। इसका मतलब है कि महंगाई बढ़ने का डर अब पहले से ज्यादा है।

डॉलर के मुकाबले रुपये में भी गिरावट 

ट्रेडर्स का कहना है कि चांदी में बड़ी गिरावट देखने को मिली, जिसकी वजह मुनाफावसूली हो सकती है। डॉलर के मुकाबले रुपये में भी गिरावट देखने को मिली। यह गिरकर 95.96 के लेवल पर आ गया। डॉलर में मजबूती से दूसरी करेंसी में सोना खरीदना महंगा हो जाता है। इसका असर सोने की कीमतों पर पड़ता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी में गिरावट 

गोल्ड फ्यूचर्स और सिल्वर फ्यूचर्स में भी गिरावट देखने को मिली। कमोडिटी एमसीएक्स में गोल्ड फ्यूचर्स 0.55 फीसदी गिरकर 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर चल रहा था। सिल्वर फ्यूचर्स 1.16 फीसदी गिरकर 2.33 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर चल रहा था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी पर दबाव देखने को मिला।

शेयर बाजारों में भी बड़ी गिरावट 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 0.41 फीसदी गिरकर 4,269 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। चांदी 1.46 फीसदी गिरकर 63.48 डॉलर प्रति औंस थी। शेयर बाजारों में भी 8 जुलाई के बाद सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली। छोटे-बड़े शेयरों के सूचकांक बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए। अमेरिकी शेयर बाजारों में भी कारोबार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई।

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क्रूड में उछाल से महंगाई बढ़ने का डर

अगर क्रूड की कीमतें हाई लेवल पर बनी रहती है तो अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व अक्तूबर की पॉलिसी में एक बार फिर इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है। अगले महीने के आखिर में फेड की बैठक होने वाली है। अगर वह इंटरेस्ट रेट बढ़ाता है तो इसका सोने की कीमतों पर निगेटिव असर पड़ेगा।

National Herald Case: सोनिया और राहुल गांधी ने दिल्ली HC में ED की याचिका को दी चुनौती, बताया ‘कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग’

National Herald Case: नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। दोनों नेताओं ने कोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दाखिल कर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की उस चुनौती का विरोध किया है, जिसमें एजेंसी ने ट्रायल कोर्ट के एक आदेश को चुनौती दी है।

18 सितंबर को दाखिल अलग-अलग लेकिन काफी हद तक एक जैसे जवाबों में, कांग्रेस नेताओं ने ED की कार्रवाई के कानूनी आधार पर सवाल उठाए। उन्होंने तर्क दिया कि एजेंसी, बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की निजी शिकायत के आधार पर प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) का केस नहीं बना सकती।

यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट में 12 अक्टूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।

गांधी परिवार ने ED की कार्रवाई के कानूनी आधार पर उठाए सवाल

दाखिल किए गए जवाबों के मुताबिक, गांधी परिवार का कहना है कि ED की कार्रवाई को सही नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि यह मामला पुलिस में दर्ज FIR के बजाय सुब्रमण्यम स्वामी की 2013 की निजी शिकायत के आधार पर शुरू हुई थी।

गांधी परिवार का तर्क है कि PMLA में ED की कार्रवाई का आधार “निजी शिकायत” बनाने का कोई प्रावधान नहीं है। उनका कहना है कि स्वामी की शिकायत उन कानूनी शर्तों को पूरा नहीं करती जो एजेंसी के लिए मनी लॉन्ड्रिंग की कार्रवाई शुरू करने के लिए जरूरी हैं।

उनकी दलीलें PMLA की धारा 5(1) पर केंद्रित हैं। जवाबों में कहा गया है कि यह प्रावधान उन स्थितियों में कार्रवाई की इजाजत देता है जिनमें CrPC की धारा 173 के तहत पुलिस की अंतिम रिपोर्ट शामिल हो, या फिर किसी अधिकृत अधिकारी की शिकायत हो जो ‘शेड्यूल्ड ऑफेंस’ (सूचीबद्ध अपराध) की जांच कर रहा हो।

बचाव पक्ष का कहना है कि कोई निजी व्यक्ति ऐसी जांच नहीं कर सकता और जांच करने के लिए मजिस्ट्रेट को मिली शक्तियां इस कानूनी जरूरत को दरकिनार नहीं कर सकतीं।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र

गांधी परिवार ने ‘विजय मदनलाल चौधरी बनाम भारत संघ’ मामले में सुप्रीम कोर्ट के 2023 के फैसले का भी हवाला दिया है।

उनका तर्क है कि इस फैसले के अनुसार, PMLA के तहत कार्रवाई शुरू करने के लिए ‘शेड्यूल्ड ऑफेंस’ (अनुसूचित अपराध) का रजिस्ट्रेशन जरूरी है। जवाब में यह भी आरोप लगाया गया है कि ED ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले में ‘निजी शिकायत’ के जिक्र का इस्तेमाल तो किया है, लेकिन उसके व्यापक संदर्भ पर ध्यान नहीं दिया है।

बचाव पक्ष ने उस लंबी अवधि की ओर भी इशारा किया है, जिसके दौरान स्वामी ने कथित तौर पर अदालत के सामने सबूत पेश नहीं किए। जवाबों के अनुसार, इसे इस बात के संकेत के तौर पर बताया गया कि निजी शिकायत को कार्यवाही का आधार मानने में क्या मुश्किलें आती हैं।

ED के अपने पुराने रिकॉर्ड का दिया हवाला

गांधी परिवार ने ED के पुराने रिकॉर्ड और बातचीत का हवाला देकर अपनी बात को सही ठहराने की कोशिश की है।

उनके जवाबों में जनवरी और अगस्त 2015 में जारी एजेंसी के टेक्निकल सर्कुलर, 2013 में सेंट्रल इन्फॉर्मेशन कमीशन के सामने दी गई जानकारी और 2024 में राइट टू इन्फॉर्मेशन (RTI) के तहत मिले जवाब का जिक्र है।

बचाव पक्ष का कहना है कि इन रिकॉर्ड्स से पता चलता है कि ED ने पहले यह रुख अपनाया था कि PMLA के तहत कार्रवाई शुरू करने से पहले FIR जरूरी है।

जवाबों में ED द्वारा जून 2021 में दर्ज ECIR का भी जिक्र है, जो स्वामी की शिकायत के सात साल बाद दर्ज की गई थी। बचाव पक्ष ने कहा कि ECIR को ट्रायल कोर्ट के सामने सितंबर 2025 में ही पेश किया गया, जब कोर्ट ने एजेंसी को इसे रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया था।

नई FIR और ट्रायल कोर्ट का आदेश

जवाबों में 3 अक्टूबर, 2025 को दिल्ली पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग द्वारा दर्ज की गई FIR का भी जिक्र है। हालांकि, गांधी परिवार की दलीलों के अनुसार, ED ने ट्रायल कोर्ट को बताया था कि वह इस FIR पर निर्भर नहीं है।

हाई कोर्ट के सामने यह विवाद ट्रायल कोर्ट के उस फैसले से पैदा हुआ है जिसमें उसने ED की प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (अभियोजन शिकायत) पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था। दलीलों के मुताबिक, दिसंबर के आदेश में कहा गया था कि इस शिकायत पर कानूनी तौर पर आगे नहीं बढ़ा जा सकता।

गांधी परिवार ने इस बात पर जोर दिया है कि ट्रायल कोर्ट का फैसला कानूनी और अधिकार-क्षेत्र से जुड़े उन मुद्दों पर आधारित था, जो ‘प्रेडिकेट-ऑफेंस’ (मूल अपराध) के लिए FIR न होने से संबंधित थे। उनका कहना है कि निचली अदालत ने मुख्य आरोपों पर उनके गुण-दोष के आधार पर कोई फैसला नहीं सुनाया।

ED 24 घंटे के अंदर हाई कोर्ट पहुंची

बचाव पक्ष ने उस तेजी पर भी सवाल उठाए हैं जिसके साथ ED हाई कोर्ट पहुंची।

जवाबों के मुताबिक, एजेंसी ने ट्रायल कोर्ट के आदेश के 24 घंटे के अंदर अपनी रिविजन याचिका दायर की। गांधी परिवार ने इस रफ्तार को “बिजली की गति” बताया और तर्क दिया कि ऐसा लगता है कि इस कार्रवाई में एजेंसी पर आम तौर पर लागू होने वाली आंतरिक मंज़ूरी की प्रक्रियाओं को नजरअंदाज किया गया है।

उन्होंने हाई कोर्ट से ED की रिविजन याचिका को खारिज करने का भी आग्रह किया है और इसे “कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग” बताया है।

क्या है नेशनल हेराल्ड केस?

नेशनल हेराल्ड केस की शुरुआत बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की ओर से 2013 में की गई एक शिकायत से हुई थी। इस शिकायत में Associated Journals Ltd (AJL) के अधिग्रहण को लेकर कथित साजिश के आरोप लगाए गए थे। बता दें कि AJL ही नेशनल हेराल्ड अखबार का प्रकाशन करती है।

यह शिकायत ‘यंग इंडियन’ से भी जुड़ा है, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी के पास सबसे ज्यादा शेयर हैं। आरोप AJL की उन संपत्तियों से जुड़े हैं जिनकी कीमत 2,000 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई गई है, और साथ ही ‘यंग इंडियन’ के जरिए किए गए 50 लाख रुपये के लेन-देन से भी जुड़े हैं।

वहीं, इस मामले में ED ने अप्रैल 2025 में मनी लॉन्ड्रिंग की शिकायत दर्ज की। ट्रायल कोर्ट ने दिसंबर 2025 में इसे खारिज कर दिया, जिसके बाद एजेंसी दिल्ली हाई कोर्ट गई।

इस मामले में शामिल अन्य लोगों और संस्थाओं में सैम पित्रोदा, सुमन दुबे, सुनील भंडारी, यंग इंडियन और डोटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।

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Silver Price Today: सस्ती हुई चांदी, जानें 17 सितंबर को मुंबई से चेन्नई तक 1 किलो की कीमत चांदी ने अब तक कितना रिटर्न दिया

Silver Price Today:  यूएस फेड द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी का असर आज चांदी की कीमतों पर भी पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। भारत में चांदी के भाव में गिरावट आई हैं और यह ₹2.32 लाख प्रति किलोग्राम के आसपास बनी हुई है। जबकि पिछले कारोबारी सत्र में चांदी 2,34,786 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी। बुलियन्स के मुताबिक चांदी की कीमत 235,140 रुपये किलो हो गई। जबकि गुडरिटर्न्स के मुताबिक चांदी की कीमत लुढ़कर 2,45,000 रुपये प्रति किलो हो गई। आगे जानिए देश के अलग-अलग शहरों में चांदी के ताजा रेट क्या हैं।

इंटरनेशनल मार्केट कितने गिरे दाम

इंटरनेशनल मार्केट यानी Comex पर सोने और चांदी दोनों के दाम में भारी गिरावट आई है। Comex पर आंकड़ों की मानें तो खबर लिखे जाने तक सोना 1.47% तक गिरा और कीमत 4322.80 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई हैं। वहीं चांदी के दाम 1.69% तक गिर गए और ऐसे में कीमत 63.820 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड करती दिखी।

दिल्ली-मुंबई समेत प्रमुख शहरों में आज चांदी का रेट

देश के प्रमुख शहरों में गुडरिटर्न्स के मुताबिक चांदी की कीमतें करीब 2.45- 2.50 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बनी हुई हैं। कुछ शहरों में स्थानीय बाजार और टैक्स के कारण मामूली अंतर देखने को मिल सकता है।

शहर1 किलो चांदी का भाव
दिल्ली₹2,45,000
मुंबई₹2,45,000
कोलकाता₹2,45,000
चेन्नई₹2,50,000
लखनऊ₹2,45,000
पटना₹2,45,000
जयपुर₹2,45,000
अहमदाबाद₹2,45,000
पुणे₹2,45,000
बेंगलुरु₹2,45,000
हैदराबाद₹2,45,000
भोपाल₹2,45,000
चंडीगढ़₹2,45,000
नोएडा₹2,45,000
गुरुग्राम₹2,45,000

पिछले दिन क्या रहा चांदी का भाव

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद कारोबारी धारणा में सुधार होने से कारोबारियों की सटोरिया लिवाली से राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में बुधवार को चांदी के दाम में दो लगातार सत्र तक स्थिर रहने के बाद उछाल आया। यह पिछले बंद स्तर 2,34,600 रुपये प्रति किलोग्राम के मुकाबले 7,000 रुपये बढ़कर 2.42 लाख रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स समेत) पर पहुंच गई। वैश्विक बाजार में, हाजिर चांदी 1.5 प्रतिशत बढ़कर 64.61 डॉलर प्रति औंस हो गई।

चांदी ने अब तक कितना रिटर्न दिया

सोने की तुलना में चांदी की कीमतों में ज्यादा तेजी आई है। बुलियन डेटा के अनुसार, पिछले एक साल में चांदी की कीमत में 85.49% की बढ़त हुई है। 1 साल पहले चांदी की कीमत लगभग ₹1,26,850 प्रति किलोग्राम थी, जो अभी ₹2,35,140 है।

इस बढ़त का मतलब है कि अगर एक साल पहले सोने में ₹1 लाख का निवेश किया गया होता, तो बुलियन रेट के हिसाब से उसकी कीमत लगभग ₹1.39 लाख होती, जबकि चांदी में निवेश की गई उतनी ही रकम की कीमत लगभग ₹1.85 लाख होती (इसमें ट्रांज़ैक्शन कॉस्ट और टैक्स शामिल नहीं हैं)।

ग्राहकों को बुलियन रेट को ही गहनों की आखिरी कीमत नहीं मानना ​​चाहिए। मेकिंग चार्ज, GST और अन्य लागू खर्चों को जोड़ने के बाद ज्वेलर को दी जाने वाली रकम ज़्यादा हो सकती है।

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