स्पेन में मोरक्को से घुसपैठ, यूरोपीय संघ में मचा हड़कंप

Spain Migrant Invasion

Spain Migrant Invasion: 29-30 जुलाई वाले दिन, अफ़्रीकी महाद्वीप के उत्तरी छोर पर बसे अरबी राजशाही के देश मोरक्को से भाग रहे 'जेन-जी' किस्म के हज़ारों युवाओं ने एक ऐसा दृश्य रच दिया, जिससे यूरोपीय संघ के देशों में तहलका मच गया। वे गिरते-पड़ते-दौड़ते हुए मोरक्को से ही सटे—पर स्पेनी स्वामित्व वाले एक छोटे से अलग भूखंड पर बसे— 'सेउता' (Ceuta) नाम के शहर में ऐसे पहुँचे, मानो आनन-फानन में उस पर धावा बोल दिया गया है।

 

मात्र 18.5 वर्ग किलोमीटर बड़ा और 83,600 की जनसंख्या वाला यह छोटा सा शहर तीन तरफ़ से मोरक्को से और एक तरफ जिब्राल्टर जलडमरूमघ्य के पानी से घिरा है। वहाँ से स्पेन की भूमि तक पहुँचने के लिए 21 किलोमीटर चौड़े जिब्राल्टर जलडमरूमघ्य को पार करना पड़ता है। सेउता सन 1415 से पहले पुर्तगाल के अधीन था और बाद में स्पेन के अधीन हो गया।

50 से 60 हज़ार लोगों का धावा

सरकारी अनुमानों के अनुसार, 29-30 जुलाई वाले दिन, मोरक्को और स्पेन के बीच स्थित जिब्राल्टर जलडमरूमध्य की तरफ से 50,000 से 60,000 मोरक्कन लोग ग़ैर-कानूनी तरीक़े से सेउता पहुँचे थे। स्पेनी गृह मंत्रालय के अनुमान बताते हैं कि वहाँ अभी भी लगभग 2,500 मोरक्कन मौजूद हैं। समुद्री रास्ते से सेउता पहुँचने की कोशिश में डूब जाने से कम से कम 72 लोगों की जानें गईं। राहत कार्य की टीमें अभी भी जलडमरूमघ्य के पानी में शवों की खोजबीन कर रही हैं।

 

सब कुछ बहुत ही आकस्मिक और अनपेक्षित ढंग से हुआ। एक अनुमान यह है कि मोरक्को की आर्थिक और राजनीतिक स्थिति—उत्तरी अफ्रीका के अन्य अरबी देशों की तुलना में कहीं बेहतर होने के बावजूद—वहां के युवाओं को व्यापक ग़रीबी और बेरोज़गारी का सामना करना पड़ रहा है। वे अपने देश से पलायन में ही अपना भला देखते हैं।

स्पेनी सर्वोच्च न्यायालय का अनोखा फ़ैसला

स्पेन के सर्वोच्च न्यायालय का कुछ समय पहले का एक फ़ैसला भी मोरक्कनों की भीड़ के सेउता की ओर अकस्मात भागने का एक संभावित कारण माना जा रहा है—जिसमें कहा गया है कि समुद्र में पकड़े गए प्रवासियों को तुरंत मोरक्को वापस नहीं भेजा जा सकता। बताया जाता है कि इस फैसले का युवाओं ने यह अर्थ लगाया कि वे समुद्र के रास्ते से यदि सेउता पहुँच गए, तो देर-सवेर वहाँ से समुद्रपार की स्पेनी मुख्य भूमि तक भी पहुँच ही जाएंगे, और तब कोई-न-कोई काम-धंधा भी मिल ही जाएगा। 

 

दूसरी ओर, स्पेन के अधिकतर स्वतंत्र विश्लेषकों का मानना है कि मोरक्को के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी संख्या में लोगों का आना संभव नहीं था। आम तौर पर, कड़ी सुरक्षा वाली इस सीमा को इतना संवेदनशील और सुनियंत्रित माना जाता है कि मोरक्को की राजधानी रबात में बैठे अधिकारियों की “स्वीकृति या सहयोग” के बिना हज़ारों लोग वहां जाने का साहस नहीं कर सकते थे।

भीड़ को मोरक्को ने अपनी सीमा पर रोका नहीं

मोरक्को की सीमा से लगे इस इलाके में संकट के बीच, ऐसी अटकलें भी लगाई गईं कि मोरक्को की शाही सरकार ने स्पेन पर दबाव बनाने के लिए जानबूझ कर सेउता में अपने नागरिकों की इस भारी भीड़ को बढ़ावा दिया— या कम से कम इसे होने दिया। स्पेनी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, कई प्रवासियों ने अलग-अलग बयानों में बताया कि उन्हें मोरक्को की सीमा पर रोका नहीं गया, बल्कि सीमा पार करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। कई अन्य लोगों ने बताया कि उन्हें तो सेउता जाने की खुली सीमा के बारे में टिकटॉक जैसे प्लेटफॉर्मों पर के वीडियो और संदेशों से पता चला।

 

स्पेन के गृह मंत्री फर्नांदो ग्रांदे-मार्लास्का ने, इस घटना के होने की बहुत तेज़ गति के लिए मानव तस्करी करने वाले नेटवर्क को ज़िम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि इन नेटवर्क ने अवैध प्रवासियों की सीमित सोच-समझ का फ़ायदा उठाया और स्पेन के सर्वोच्च न्यायालय के फ़ैसले के बारे में गुमराह करने वाली अफ़वाहें फैलाईं।

सोशल मीडिया पर फैलाई गई गलत जानकारी

मोरक्को की सरकार ने, 26 जुलाई की शाम को पहली बार, इस स्थिति पर टिप्पणी की और कहा कि हज़ारों लोगों का अचानक पलायन सोशल मीडिया पर फैली गलत जानकारी की वजह से हुआ। वहां के गृह मंत्रालय ने कहा कि स्पेन के सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले का—जिसमें कहा गया है कि समुद्र में पकड़े गए प्रवासियों को तुरंत वापस भेजने पर रोक है— गलत अर्थ निकाला गया।

 

इस बयान में अवैध प्रवास से निपटने के लिए मोरक्को की प्रतिबद्धता को दोहराया गया है और समस्या के भावी प्रबंधन के बोझ को साझा करने की अपील की गई है। इससे पहले, स्पेन में मोरक्को के राजदूत ने कहा था कि मोरक्को को इन घटनाओं पर खेद है और वह कानून सम्मत, व्यवस्थित और सुरक्षित प्रवास के लिए प्रतिबद्ध है।

 

स्पेन की सरकार 2021 के बाद अब पहली बार, सेउता में सीमा सुरक्षा में सहायता के लिए सेना तैनात कर रही है। वहाँ 60 सैनिक और विशेष पुलिस बल के 200 जवान भेजे गए हैं। 24 जुलाई को वहाँ के एक दौरे के दौरान, स्पेन के प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज़ ने कुछ और कदमों के उठाए जाने की घोषणा की। मोरक्को के उन प्रवासियों को वापस भेजने की प्रक्रिया को तेज़ किया जाएगा जो गैर-कानूनी तरीके से सेउता पहुँचे थे।

Spain Migrant Invasion

यूरोपीय संघ (EU) के देशों की प्रतिक्रिया

मोरक्को से सटे हुए स्पेन के समुद्र-पारीय शहर सेउता में जो कुछ हुआ है, उससे विचलित हो कर इटली सहित यूरोपीय संघ (EU) के कई देशों ने, “शेंगन समझौते” वाले क्षेत्र के भीतर वीज़ा-मुक्त यात्रा की अब तक की सुविधा को सभी ग़ैर यूरोपीय विदेशियों के लिए और अधिक सीमित करने तथा “आंतरिक सीमा नियंत्रण” को और अधिक कसने की संभावना की ओर भी इशारा किया—ऐसे उपाय जो जर्मनी में पहले से ही लागू हैं। फ्रांस ने भी घोषणा की है कि वह स्पेन के साथ उन सीमा नियंत्रणों को और कड़ा करेगा जो कई सालों से लागू हैं।

 

स्पेन के प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज़ ने यूरोपीय संघ के कुछ देशों की प्रतिक्रिया की आलोचना करते हुए कहा कि यह सब “पूर्वाग्रह, गलत जानकारी, अज्ञानता या राजनीतिक हितों” से प्रेरित है। यूरोपीय संघ के नेतृत्व को लिखे एक पत्र में उनका कहना है कि सेउता, वीज़ा- मुक्त शेंगन क्षेत्र का हिस्सा नहीं है और वहाँ मौजूद प्रवासी, यूरोपीय संघ के दूसरे देशों में आसानी से नहीं जा सकते।

स्पेन की आप्रवासन नीति बहुत ज़्यादा उदार

दूसरी ओर, आलोचकों का आरोप है कि स्पेन की आप्रवासन नीति बहुत ज़्यादा उदार है। उनका तर्क है कि स्पेनी सरकार यूरोपीय संघ की बाहरी सीमाओं की सुरक्षा करने में नाकाम रही है। फ़िनलैंड की गृह मंत्री मारी रान्तेनन ने X पर लिखा कि जो देश अपनी सीमाओं को सुरक्षित नहीं रख सकते, वे शेंगेन एरिया के सदस्य नहीं हो सकते। इसके अलावा, कुछ ही महीने पहले, स्पेन ने अपने यहां श्रमिको की कमी को दूर करने के लिए लगभग 5 लाख अनियमित विदेशी प्रवासियों को कानूनी दर्जा देने की प्रक्रिया शुरू की है। इस कदम का उद्देश्य उन शरणार्थियों को लाभ पहुँचाना है, जिन्होंने 2025 के अंत से पहले शरणदान के लिए आवेदन किया था—न कि नए आने वालों को।

 

स्पेन की इस नीति ने, अवांछित अनियमित आप्रवासन को रोकने के लिए प्रयत्नशील 27 देशों के यूरोपीय संघ में भारी चिंता पैदा कर दी है। संघ के 22 देशों के एक साझे पत्र में, नए लोगों के आने में हुई बढ़ोतरी और स्पेन के सर्वोच्च न्यायालय के उस फ़ैसले के बीच सीधा संबंध बताया गया, जिसमें न्यायालय का कहना है कि विदेशी प्रवासियों को तुरंत लौटाना तभी न्याय संगत है, जब उन्होंने अनियमित तरीके से घुसते समय सीमा पर की कोई बाड़ या दूसरी रुकावट पार की हो। जो लोग बिना बाड़ वाले रास्ते से—जैसे समुद्र के रास्ते से—स्पेन पहुँचते हैं, उनके मामले की अलग से जाँच होनी चाहिए। यह फ़ैसला अब स्पेन से अधिक पूरे यूरोपीय संघ का सिरदर्द बन गया है।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : होर्मुज खुलने की उम्मीद से कच्चे तेल में बड़ी गिरावट आई है। ब्रेंट क्रूड 5% से ज्यादा गिरकर 79 डॉलर के पास आ गया है। अमेरिका के वित्त मंत्री ने कहा है कि ईरान के साथ बहुत जल्द डील फाइनल हो सकती है। हालांकि ईरान ने किसी भी सीधी बातचीत से इनकार किया है। करेंसी और इक्विटी बाजारों में आज क्या हो रहा है यह जानने के लिए मनीकंट्रोल के साथ बने रहें। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

4 अगस्त को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए, जिससे चार सेशन की बढ़त का सिलसिला टूट गया। वीकली डेरिवेटिव्स एक्सपायरी, NSE के नए क्लोजिंग ऑक्शन पॉलिसी सेशन (CAS) के रोलआउट के बाद बढ़ी वोलैटिलिटी और आरबीआई पॉलिसी से पहले निवेशकों ने प्रॉफिट बुक किया। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 210.08 अंक या 0.27 फीसदी गिरकर 78,428.95 पर और निफ्टी 159.40 अंक या 0.64 फीसदी गिरकर 24,614.90 पर बंद हुआ।

गिफ्ट निफ्टी

सुबह 08:40 बजे के आसपास गिफ्ट निफ्टी 154.50 अंक यानी 0.62 फीसदी की बढ़त के साथ 24,734 के स्तर पर दिख रहा है। यह सेंसेक्स-निफ्टी के लिए अच्छा संकेत है।

एशियाई बाजार

एशियाई शेयर बाजारों में तेजी देखने को मिल रही है। जापान के निक्केई में 3 फीसदी की तेजी देखने को मिल रही है। हालांकि, स्ट्रेट टाइम्स में 0.55 फीसदी की कमजोरी दिख रही है। हैंग सेंग में 0.13 फीसदी और ताइवानी बाजार में 3.61 फीसदी की तेजी दिख रही है। कोस्पी में करीब 4 फीसदी की बढ़त है। शांघाई कंपोजिट में भी 1.17 फीसदी की बढ़त नजर आ रही है।

अमेरिकी बाजार

मंगलवार को S&P 500 और Dow रिकॉर्ड ऊंचाई पर बंद हुए। डाओ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 907.47 अंक या 1.71% बढ़कर 54,085.88 पर, S&P 500 इंडेक्स 136.02 अंक या 1.79% बढ़कर 7,736.52 पर और नैस्डैक 671.10 यानी 2.59% बढ़कर 26,584.99 पर बंद हुआ।

डॉलर इंडेक्स

मिडिल ईस्ट को लेकर नई उम्मीदों के चलते डॉलर छह हफ़्ते के निचले स्तर के पास बना रहा। छह बड़ी करेंसी के मुकाबले अमेरिकी करेंसी को ट्रैक करने वाला US डॉलर इंडेक्स सोमवार को छह हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंचने के बाद पर 99.85 पर दिख रहा है।

US बॉन्ड यील्ड

US ट्रेजरी यील्ड थोड़ी बढ़ी है। 10-साल की ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 4.62% हो गई है और 2-साल की ट्रेजरी यील्ड थोड़ी बढ़कर 4.20% हो गई है।

एशियाई करेंसी

US डॉलर के मुकाबले ज्यादातर एशियाई करेंसीज ऊपर ट्रेड कर रही थीं। साउथ कोरियन वॉन सबसे अच्छा परफॉर्मर है जिसमें 0.34% की बढ़त हुई है। उसके बाद फिलीपीन पेसो (+0.31%),ताइवान डॉलर (+0.21%),मलेशियन रिंगिट (+0.17%) और जापानी येन (+0.13%) ऊपर दिख रहे हैं। चीनी रेनमिनबी भी 0.09% बढ़ा है। जबकि सिंगापुर डॉलर में 0.02% की हल्की बढ़त दिख रही है। उधर इंडोनेशियाई रुपिया 0.17% गिरा है। जबकि थाई बहत पिछले बंद भाव से 0.003% नीचे दिख रहा है।

FII और DII फंड फ्लो

विदेशी इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) ने 4 अगस्त को लगातार छठे सेशन में अपनी खरीदारी का सिलसिला जारी रखा और ₹2,446 करोड़ के इक्विटी खरीदे। इस बीच,घरेलू इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) नेट सेलर बन गए और लगभग ₹1,000 करोड़ के इक्विटी बेचे।

Yamaha R15 V4 and MT-15 MotoGP Edition launched, prices start at Rs 1.76 lakh

Yamaha MotoGP Editions

Yamaha has reintroduced the Monster Energy Yamaha MotoGP Edition colour schemes on the R15 V4 and MT-15, responding to what the brand says is strong customer demand. The livery replicates the graphics on the Yamaha YZR-M1 factory MotoGP machine and has previously appeared on the R15 and MT-15.

  1. MT-15 MotoGP Edition costs up to Rs 13,000 more than standard colours
  2. No mechanical changes on either MotoGP Edition
  3. FZ-S Fi Hybrid and FZ-S Fi get new colours at unchanged prices

Yamaha MotoGP Editions and new colours

Alongside the MotoGP Editions, Yamaha has also added new colour options to the FZ-S Fi Hybrid and FZ-S Fi.

The R15 V4 MotoGP Edition is priced at Rs 1.76 lakh, making it up to Rs 3,000 more expensive than the standard colour options. Meanwhile, the MT-15 MotoGP Edition is priced at Rs 1.77 lakh, making it up to Rs 13,000 more expensive than some colourways of the standard MT-15. Both are purely cosmetic updates, with no changes to the mechanical package. Both bikes are powered by the same 155cc liquid-cooled, single-cylinder engine producing 18.4hp and 14.2Nm. It’s worth noting that the MotoGP Edition R15 V4 remains considerably more affordable than the top-spec R15M, which is priced closer to Rs 2 lakh.

On the FZ-S front, the FZ-S Fi Hybrid gets a new Ice Storm colour scheme, while the existing Matte Black variant receives updated graphics. The FZ-S Fi gets a new Metallic Black option. Both models are priced unchanged at Rs 1.39 lakh and Rs 1.29 lakh respectively

Autocar India August 2026 Issue

Our August 2026 issue has all the exclusive details of Audi India’s most ambitious product offensive in over a decade, with six all-new locally assembled models planned over the next 18 months. We also get behind the wheel of Jaguar’s camouflaged Type 01 prototype and drive the Range Rover Sport EV at Goodwood. Closer to home, we find out if the Tata Sierra EV lives up to its billing as the best Tata on sale, while the Nissan Tekton is put through a 700km-plus real-world test from Chandigarh to Leh. We also break down India’s new most popular fuel in our CNG special, with five models tested back-to-back. On two wheels, the new Norton Atlas is ridden in Iceland, while a special Ducati takes on some of Maharashtra’s tricky trails . All this while a Skoda Kylaq sets off on an epic 19,351km drive from Pune to Prague.

Audi’s Big Comeback: Cover Story

Audi was once India’s bestselling luxury brand. Today, it is a shadow of that. Now, with six all-new locally assembled models planned by end-2027, the four rings are back on the offensive. We have all the details, and speak to Audi India head Balbir Singh Dhillon and Audi AG chairman Gernot Döllner about the upcoming cars.

Jaguar Type 01: Drive

Jaguar has walked away from 90 years of combustion heritage, cancelled every existing model and started again with a blank sheet of paper. The Type 01 is the result – a five-metre all-electric grand tourer with a 1,000hp three-motor setup, 600km of range and a starting price north of Rs 3 crore. We drive a camouflaged prototype at JLR’s Gaydon test track to find out if the boldest bet in the car industry’s history has legs.

Range Rover Sport EV: Drive

Under its familiar skin sits an 800V architecture, two Land Rover-developed 326hp motors and a 118.5kWh battery validated over 60,000 hours of testing. The electric Range Rover Sport arrives in India around March 2027 and could set a new luxury benchmark for the brand. We drive a prototype at Goodwood to find out if it lives up to that promise.

Tata Sierra EV: First Drive

The best Tata in years gets the brand’s smoothest powertrain yet. The Sierra EV comes in rear-wheel and all-wheel-drive forms, with the AWD variant making a class-leading 306hp and bringing the first AWD option in this segment. We drive all variants, including a proper off-road test, to see if it lives up to the hype.

Honda ZR-V: Drive

Honda’s first hybrid SUV in India arrives as a full import from Japan, packing a 184hp strong-hybrid powertrain and a claimed 22.8kpl. We get a brief first taste at the Buddh International Circuit to find out if it delivers on its promise.

Mercedes-AMG E 53 Hybrid 4Matic+: First Drive

The new E 53 pairs a 3.0-litre straight-six with a 28.6kWh battery for 585hp and up to 100km of electric range. It is a PHEV AMG that also does daily commutes without a drop of fuel. But has electrification enhanced the AMG experience, or diluted it?

CNG Special: Features

CNG now accounts for nearly 20 percent of India’s passenger car market. We explain everything you need to know about the fuel – what it is, how it works and whether an aftermarket conversion makes sense. We also road test five CNG models: the Tata Tiago iCNG, Maruti Wagon R S-CNG, Hyundai Aura CNG, Maruti Brezza Turbo (petrol) and Maruti Victoris S-CNG.

Tata Nexon: Petrol vs Diesel vs Electric vs CNG

The Nexon is one of the few cars in India offered with four distinct powertrain options. We test every variant – turbo-petrol, diesel, CNG and electric – with real-world performance and efficiency figures to find the sweet spot of the range. The result might just surprise you.

Skoda Kylaq: Pune to Prague, Part 1

A made-in-India Skoda Kylaq sets off on a near-20,000km adventure from its birthplace at Skoda’s Chakan plant to Skoda Auto’s headquarters in Prague. Part 1 covers India, Nepal, Tibet and China – including a detour to Mount Everest Base Camp.

Norton Atlas: Ride

TVS’s second Norton – and the brand’s most important – debuts in Iceland. The Atlas is a 585cc parallel-twin adventure tourer with 70hp, a full electronics suite and 19-inch front wheel. We ride 200km of sweeping mountain roads and gravel trails to find out if it can justify the hype and, crucially, a competitive price tag.

Ducati Multistrada V4 Pikes Peak: First Ride

The most focused Multistrada money can buy blurs the line between a practical ADV and an out-and-out sport bike. With Öhlins semi-active suspension, a single-sided swingarm and a race-mode, it promises to be two bikes in one. We find out if the price premium is worth it.

Suzuki E-Access: Road Test

Suzuki’s first electric scooter carries a big name and an even bigger price tag. It gets some things right, but in a segment that rewards value, performance and range, does the Access badge alone justify the Rs 1.92 lakh asking price?

यौन शोषण मामले में आजीवन सजा काट रहे आसाराम को मिली 20 दिन की पैरोल, कोर्ट ने दिया आदेश

राजस्थान हाई कोर्ट ने उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम को 20 दिनों की पैरोल देने का आदेश दिया है। 85 वर्षीय आसाराम को वर्ष 2013 में एक नाबालिग से यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी ठहराया गया था, जिसके बाद उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। अब अदालत के आदेश के अनुसार उन्हें तय अवधि के लिए पैरोल पर रिहा किया जाएगा।

कोर्ट ने दिया ये आदेश

अदालत ने पैरोल देने का फैसला करते समय इस बात पर भी ध्यान दिया कि आसाराम लंबे समय से जेल में हैं और पहले मिली अंतरिम रिहाई के दौरान उनका आचरण संतोषजनक रहा। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो कि उन्होंने जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया, कानूनी कार्रवाई से बचने की कोशिश की, किसी गवाह को प्रभावित किया या उनकी वजह से कानून-व्यवस्था की कोई समस्या पैदा हुई। राजस्थान हाई कोर्ट की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायमूर्ति संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने आसाराम को राहत देते हुए नियमित पैरोल देने का आदेश दिया। फिलहाल वह जोधपुर सेंट्रल जेल में सजा काट रहे हैं। अदालत ने अपने फैसले में यह भी माना कि वह करीब 13 साल से जेल में हैं और पहले मिली अस्थायी रिहाई के दौरान उनके खिलाफ किसी नियम के उल्लंघन की शिकायत सामने नहीं आई।

13 साल से जेल में बंद हैं आसाराम

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आसाराम 13 साल, एक महीना और 24 दिन जेल में बिता चुके हैं। 3 अगस्त को दिए गए फैसले के अनुसार, उन्हें 50,000 रुपये के निजी मुचलके और 25-25 हजार रुपये की दो जमानतें जमा करने के बाद 20 दिनों की नियमित पैरोल पर रिहा किया जाएगा। कोर्ट ने यह भी माना कि पिछली अंतरिम रिहाई के दौरान उन्होंने सभी तय शर्तों का पालन किया था और उनके खिलाफ किसी भी नियम के उल्लंघन का रिकॉर्ड नहीं मिला।

राज्य सरकार ने पैरोल का किया विरोध

राज्य सरकार ने अदालत में आसाराम की पैरोल का विरोध किया। सरकार की ओर से बताया गया कि जोधपुर के जिला कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता वाली समिति पहले ही उनकी पैरोल की अर्जी खारिज कर चुकी है। पुलिस ने भी आशंका जताई कि रिहाई मिलने पर उनके फरार होने की संभावना हो सकती है। इसके अलावा, सरकार ने कहा कि उनकी रिहाई से पीड़ित पक्ष और उसके परिवार की सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है।

राज्य सरकार ने अदालत में यह भी कहा कि आसाराम का इलाज चल रहा है और मेडिकल अधिकारियों ने उन्हें पैरोल के लिए पूरी तरह फिट नहीं माना है। इसके अलावा सरकार ने राजस्थान प्रिजनर्स रिलीज ऑन पैरोल नियम, 1958 के नियम 14(ए) का हवाला देते हुए बताया कि उनके खिलाफ राजस्थान के बाहर भी आपराधिक मामले लंबित हैं और गुजरात के गांधीनगर की एक अदालत उन्हें एक अन्य मामले में दोषी भी ठहरा चुकी है। इसलिए सरकार ने उनकी पैरोल का विरोध किया।

कोर्ट में फेल हुई ये दलील

अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि राज्य सरकार और पुलिस की ओर से जताई गई आशंकाओं के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण पेश नहीं किए गए। कोर्ट का मानना था कि ये केवल संभावनाओं पर आधारित दलीलें हैं। साथ ही, अदालत ने स्पष्ट किया कि राजस्थान की अदालत से मिली सजा के मामले में आसाराम की पैरोल पर फैसला राजस्थान प्रिजनर्स रिलीज़ ऑन पैरोल नियमों के अनुसार ही किया जाएगा।

अदालत ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ दूसरे राज्यों में मामले चल रहे हैं या वहां किसी मामले में सजा मिली है, तो उनका फैसला संबंधित राज्यों के कानूनों के अनुसार होगा। केवल इसी आधार पर राजस्थान के मामले में पैरोल देने से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं, हाई कोर्ट ने यह भी याद दिलाया कि 27 मई को उसने इसी मामले में आसाराम की दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था।

आसाराम ने ओपन एयर कैंप में स्थानांतरण के लिए भी अलग से याचिका दायर की है। हालांकि, राजस्थान सरकार ने इसका विरोध करते हुए अदालत को बताया कि राजस्थान प्रिजनर्स ओपन एयर कैंप नियम, 1972 के तहत कुछ श्रेणी के कैदियों को ऐसी सुविधा नहीं दी जा सकती। सरकार का कहना है कि इन नियमों के अनुसार कुछ गंभीर यौन अपराधों में दोषी ठहराए गए और 60 वर्ष से अधिक उम्र के कैदी ओपन एयर कैंप के लिए पात्र नहीं माने जाते।

IndiGo की 20वीं सालगिरह पर बड़ा ऑफर, 20 हजार लोगों को मिलेगा फ्लाइट का फ्री टिकट! जानें कैसे उठाएं स्कीम का फायदा

अगर आप इंडिगो से घरेलू फ्लाइट बुक करने की सोच रहे हैं, तो ये खबर आपके काम की है। इंडिगो अपनी एनिवर्सरी के मौके पर एक खास ऑफर लेकर आया है। इस कैंपेन के तहत कुछ चुनिंदा यात्रियों को 10,000 रुपये तक का फ्लाइट किराया वापस मिलने का मौका मिलेगा। ये सुविधा केवल तय अवधि के दौरान की गई एलिजिबल डोमेस्टिक बुकिंग पर ही लागू होगी। पहले कुछ लोगों का रैंडम तरीके से सेलेक्ट किया जाएगा और इसके बाद उन्हें इंडिगो से जुड़े एक सवाल का सही जवाब देना होगा। सभी शर्तें पूरी करने वाले यात्रियों को ही इस ऑफर का फायदा मिल सकेगा। आइए जानते हैं कैसे कर सकते हैं इसके लिए आवेदन

कैसे उठाए योजना का लाभ

स्टेप 1: ऑफर के दौरान करें फ्लाइट बुक

इस ऑफर का लाभ उठाने के लिए यात्रियों को 4 अगस्त से 6 अगस्त 2026 के बीच अपनी फ्लाइट बुक करनी होगी। केवल इसी अवधि में की गई बुकिंग को इस कैंपेन के लिए वैलिड माना जाएगा। ये ऑफर घरेलू उड़ानों की इकॉनमी और स्ट्रेच श्रेणी ( प्रीमियम बिजनेस क्लास) पर लागू है। इसमें एक तरफ की यात्रा, आने-जाने की टिकट, कनेक्टिंग फ्लाइट और मल्टी-सिटी यात्रा जैसी सभी आइटिनररी बुकिंग शामिल हैं।

स्टेप 2: ऑफिशियल बुकिंग चैनल का इस्तेमाल करें

इस ऑफर में शामिल होने के लिए टिकट की बुकिंग केवल इंडिगो की आधिकारिक वेबसाइट, मोबाइल ऐप या एयरलाइन के स्काई प्लेटफॉर्म से करनी होगी। अगर टिकट किसी ट्रैवल एजेंट, ऑनलाइन ट्रैवल वेबसाइट या किसी अन्य थर्ड-पार्टी प्लेटफॉर्म से खरीदा गया है, तो वह इस ऑफर के लिए वैलिड नहीं होगा। इसके अलावा इंटरनेशनल उड़ानों और कोडशेयर फ्लाइट की बुकिंग पर भी ये ऑफर लागू नहीं होगा।

स्टेप 3: सही कॉन्टैक्ट डिटेल्स डालें

टिकट बुक करते समय अपना मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी सही दर्ज करना बहुत जरूरी है। अगर आपका शॉर्टलिस्ट होते हैं, तो इंडिगो इन्हीं रजिस्टर्ड कॉन्टैक्ट डिटेल्स पर ईमेल और WhatsApp के जरिए एक सवाल भेजेगा। इसलिए बुकिंग के बाद इन जानकारियों में बदलाव नहीं किया जा सकेगा।

स्टेप 4: रैंडम सिलेक्शन का इंतजार करें

सिर्फ एलिजिबल टिकट बुक कर लेने से किसी कस्टमर को इनाम नहीं मिलेगा। सबसे पहले इंडिगो तय प्रक्रिया के तहत रैंडम तरीके से कुछ यात्रियों का चयन करेगा। एयरलाइन का लक्ष्य इस कैंपेन के दौरान करीब 20,000 लोगों को शॉर्टलिस्ट करने का है। इसके बाद चुने गए यात्रियों को आगे की प्रक्रिया पूरी करनी होगी, तभी वे ऑफर का लाभ पाने के लिए योग्य माने जाएंगे।

4 अगस्त: 10,000 पार्टिसिपेंट्स

5 अगस्त: 5,000 पार्टिसिपेंट्स

6 अगस्त: 5,000 पार्टिसिपेंट्स

स्टेप 5: सवाल का सही जवाब दें

जिन ग्राहकों का सेलेक्शन होगा, उन्हें इंडिगो की ओर से एक सवाल भेजा जाएगा। नोटिफिकेशन मिलने के बाद उसका जवाब देने के लिए 48 घंटे का समय दिया जाएगा। सही उत्तर देने के लिए तीन अवसर मिलेंगे। तय समय के भीतर सही जवाब देने वाले ग्राहक ही रिफंड पाने के लिए पात्र माने जाएंगे।

स्टेप 6: रिफंड पाएं

जो यात्री सभी शर्तें पूरी करेंगे और अंतिम रूप से चयनित होंगे, उन्हें लागू टैक्स सहित अधिकतम 10,000 रुपये तक का टिकट किराया वापस किया जाएगा। इंडिगो की ओर से पात्रता की पुष्टि होने के बाद 3 से 5 वर्किंग डेज के भीतर रिफंड की राशि उसी माध्यम से भेज दी जाएगी, जिससे टिकट का भुगतान किया गया था।

UP News : योगी सरकार का स्वास्थ्य क्षेत्र को बड़ा तोहफा, 2,023 रुपए करोड़ का प्रावधान, 5 मंडलों में खुलेंगे आयुष मेडिकल कॉलेज

CM Yogi Adityanath

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के प्रथम अनुपूरक बजट में आयुष और स्वास्थ्य क्षेत्र को प्राथमिकता देते हुए महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त बजट का प्रावधान किया है। सरकार ने आयुष विभाग के लिए 23.25 करोड़ रुपये और चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के लिए 2,000.25 करोड़ रुपये की व्यवस्था कर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। 

 

पांच मंडलों में खुलेंगे नए आयुष मेडिकल कॉलेज

 

अनुपूरक बजट में आयुष क्षेत्र के आधुनिकीकरण और वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार और आईआईटी कानपुर के सहयोग से गंगवाल स्कूल ऑफ साइंसेज़ एंड टेक्नोलॉजी, आईआईटी कानपुर में आयुर्वेद अनुसंधान क्लीनिकल प्रमाणीकरण केंद्र स्थापित किया जाएगा। इसके लिए 3.25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार ने प्रदेश के उन पांच मंडलों आगरा, बस्ती, गोंडा, मेरठ और मिर्जापुर में नए राजकीय एकीकृत आयुष चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय स्थापित करने का निर्णय लिया है, जहां अभी कोई आयुष चिकित्सा महाविद्यालय संचालित नहीं है। इसके लिए 23.25 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।

 

स्वास्थ्य क्षेत्र को 2000.25 करोड़ रुपये का प्रावधान

 

योगी सरकार ने चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के लिए 2000.25 करोड़ रुपये के अतिरिक्त प्रावधान में कई महत्वपूर्ण योजनाओं को शामिल किया है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए 1500 करोड़ रुपये का है। सरकार ने आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए भी बड़ा प्रावधान किया है। 

 

अनुपूरक बजट में 108 ई.एम.टी.एस 'स्वास्थ्य सेवा' के संचालन हेतु 200 करोड़ रुपये एवं 102 एम्बुलेंस के संचालन मद में भारत सरकार से प्राप्त अनुमोदन से अधिक की धनराशि का व्यवभार राज्य बजट से वहन किए जाने के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही प्रदेश के शहरी चिकित्सालयों में अग्निशमन व्यवस्था के लिए 96 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।

 

चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अत्याधुनिक और सुलभ बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। इसी क्रम में प्रदेश में राज्य कैंसर मिशन की स्थापना, एसजीपीजीआई में क्वार्टनरी हेल्थ केयर सेंटर की स्थापना, ऑपरेशन थिएटर सुदृढ़ीकरण कार्यक्रम और स्मार्ट आईसीयू नेटवर्क विकसित करने की पहल की गई है। इसके साथ ही एकीकृत ट्रामा एवं इमरजेंसी नेटवर्क की स्थापना की जा रही है।

MoRTH proposes mandatory V2V communication systems from October 2028

Vehicle-to-Vehicle communication

The Ministry of Road Transport and Highways (MoRTH) has proposed making Vehicle-to-Vehicle (V2V) communication systems mandatory on all newly manufactured vehicles from October 1, 2028. According to the draft notification, the mandate will apply to L-, M- and N-category vehicles, which include two-wheelers, passenger vehicles and commercial vehicles. The proposal seeks to amend the Central Motor Vehicles Rules (CMVR), 1989.

  • AIS-230 standard introduced for V2V systems
  • Will use On-Board Units operating between 5.875GHz-5.925GHz
  • Public consultation open for 30 days

MoRTH proposes phased rollout of Vehicle-to-Vehicle communication systems

MoRTH’s draft notification proposes a phased rollout of V2V communication systems. Manufacturers voluntarily offering the technology from October 1, 2027, will have to ensure they comply with AIS-230, the new Automotive Industry Standard for V2V communication systems. If approved in its current form, the fitment of V2V communication systems will become mandatory for all newly manufactured L-, M- and N-category vehicles from October 1, 2028.

The Automotive Industry Standard lays down the minimum technical, functional, performance, environmental and cybersecurity requirements for V2V communication systems. These include radio performance, receiver sensitivity and selectivity, Global Navigation Satellite System (GNSS) and positioning requirements, electrical and power-supply requirements, electromagnetic interference and compatibility, cybersecurity and communication security, and performance requirements for road safety applications.

Furthermore, the standard specifies the use of factory-fitted On-Board Units (OBUs) based on Cellular Vehicle-to-Everything (C-V2X) technology operating in the 5.875GHz to 5.925GHz frequency band. The Department of Telecommunications exempted the use of this spectrum from licensing requirements through a notification issued on June 10, 2026.

The standard also defines safety applications such as Emergency Brake Alert, Forward Collision Warning, Wrong-way Driving Alert and Emergency Vehicle Alert, enabling vehicles to exchange real-time information and warn drivers of potential hazards. The draft notification has been opened for public consultation for 30 days, following which the ministry will review the comments received before issuing the final notification.

What is Vehicle-to-Vehicle (V2V) communication?

The technology enables vehicles equipped with V2V communication systems to wirelessly exchange real-time information such as speed, position, direction and acceleration. While conventional Advanced Driver Assistance Systems (ADAS) rely on cameras, radars, other onboard sensors and driver inputs, V2V allows vehicles to communicate directly with one another using Cellular Vehicle-to-Everything (C-V2X) technology.

This enables quicker detection of potential hazards that may not yet be visible to the driver and, according to the ministry, “is therefore expected to complement ADAS and support proactive accident prevention, connected mobility and future intelligent transport applications.” The ministry also says the technology can provide warnings for situations involving sudden braking, forward-collision risks, unsafe lane changes and approaching emergency vehicles.

Challenges on the implementation of V2V communication systems

While the proposal marks a major step towards introducing V2V communication systems in India, it’s not without challenges. Automakers not only need to integrate and validate these systems across various models in their line-up but also ensure they work as intended between vehicles made by different manufacturers.

In terms of costs, earlier estimates had suggested the On-Board Units (OBUs) could add around Rs 5,000 to Rs 7,000 to the cost of each vehicle, although the latest draft notification doesn’t explore the cost angle of integrating V2V technology. With connected-vehicle technologies, there will also be a need for robust cybersecurity measures, while importance must also be given to other factors such as data protection and user privacy.

When first announcing plans to introduce V2V technology earlier this year, Union Road Transport and Highways Minister Nitin Gadkari said that it would allow drivers to “talk to each other like pilots.” However, despite being under development globally for more than two decades, widespread adoption of the technology remains limited.

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