पाक टेस्ट टीम ने नहीं प्रसारित होने दिया इमरान खान के बेटों का दुख, टेस्ट मैच बॉयकॉट करने की दी धमकी

imran khan

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने इंग्लैंड के शीर्ष स्पोर्ट्स चैनल और डजीटल स्पोर्ट्स प्रसारणकर्ता के ख़िलाफ़ औपचारिक शिकायत की है। यह शिकायत तब की गई, जब प्रसारणकर्ता ने लॉर्ड्स में पहले दिन लंच के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री और कप्तान इमरान ख़ान के बेटों का इंटरव्यू प्रसारित किया। एक अग्रणी क्रिकेट वेबसाइट को मिली जानकारी के मुताबिक़ PCB ने विरोध के तौर पर ब्रेक के बाद पाकिस्तान की टीम के मैदान पर वापस नहीं उतरने के विकल्प पर भी विचार किया था।

इंग्लैंड के पूर्व कप्तान और मौजूदा स्पोर्ट्स प्रेसेंटर माइक एथर्टन ने यह इंटरव्यू किया था। इसमें इमरान के बेटों सुलेमान और क़ासिम ख़ान ने अपने पिता की सेहत को लेकर चिंता जताई थी। इमरान पिछले तीन साल से जेल में हैं। उनके बेटों ने कहा कि उन्हें अपने पिता की ज़िंदगी को लेकर भी डर है। माना जा रहा है कि PCB ने लंच ब्रेक से पहले ही स्काई स्पोर्ट्स से संपर्क करके इस सेगमेंट को लेकर विरोध दर्ज कराया था। PCB ने कथित तौर पर यह भी चेतावनी दी थी कि अगर इंटरव्यू प्रसारित किया गया, तो पाकिस्तान के खिलाड़ी लंच के बाद मैदान पर वापस नहीं लौटेंगे।

इन बातचीत के दौरान स्काई ने इंटरव्यू को कुछ देर के लिए रोक दिया। लेकिन बाद में उसने 18 मिनट का यह इंटरव्यू प्रसारित कर दिया। जब तक इंटरव्यू ख़त्म हुआ, पाकिस्तान के खिलाड़ी दूसरे सेशन के लिए मैदान पर लौटने की तैयारी कर रहे थे। दूसरा सेशन दोपहर 2:40 बजे शुरू होना था।

एथर्टन ने बुधवार सुबह लॉर्ड्स के राइटर्स रूम में इमरान के बेटों का यह इंटरव्यू किया था। स्काई ने टेस्ट मैच से पहले इस इंटरव्यू की एक छोटी झलक भी दिखाई थी। हालांकि पाकिस्तान में इस सीरीज़ का प्रसारण करने वाले PTV ने इस इंटरव्यू को प्रसारित नहीं किया। पिछले कुछ हफ़्तों से इमरान की सेहत को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। उनके बेटे भी उन्हें सही इलाज और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं दिलाने की कोशिशें तेज़ कर रहे हैं।

पिछले हफ़्ते पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि इमरान को राजधानी इस्लामाबाद के शिफ़ा अस्पताल में भर्ती कराया जाए। लेकिन इसके बजाय उन्हें सरकारी PIMS अस्पताल ले जाया गया और जांच के कुछ ही समय बाद वापस जेल भेज दिया गया था।

इमरान की बहनों और बेटों ने आरोप लगाया है कि यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन था। उन्होंने यह भी मांग की है कि इमरान को अपने निजी डॉक्टर से मिलने की इजाज़त दी जाए। पिछले हफ़्ते एथर्टन समेत 21 पूर्व कप्तानों ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ को एक ख़त लिखा था। इसमें उन्होंने उनसे अपील की थी कि यह सुनिश्चित किया जाए कि इमरान को जेल में सही इलाज और ज़रूरी स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जाए।

इस ख़त पर भारत, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, वेस्टइंडीज़ और न्यूज़ीलैंड के पूर्व कप्तानों ने दस्तख़त किए थे। यह फ़रवरी में 14 पूर्व कप्तानों द्वारा लिखे गए एक पिछले ख़त के बाद भेजा गया था। उस पहले ख़त का पाकिस्तान सरकार की तरफ़ से कोई जवाब नहीं आया था।

एक अग्रणी क्रिकेट वेबसाइट ने इस मामले पर PCB की आधिकारिक प्रतिक्रिया के लिए उससे संपर्क भी किया है। वहीं, पाकिस्तान सरकार ने पिछले हफ़्ते एसोसिएटेड प्रेस को दिए एक बयान में उन आरोपों को ख़ारिज किया था कि इमरान के साथ जेल में बदसलूक़ी की गई या उन्हें अपने परिवार और वकीलों से मिलने नहीं दिया गया। सरकार ने कहा था कि अगस्त 2023 में जेल जाने के बाद से इमरान से उनके परिवार, वकीलों और डॉक्टरों ने 900 से ज़्यादा बार मुलाक़ात की है।

संतों के आशीर्वाद से मिलती है सद्कार्य की प्रेरणा : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

संतों के आशीर्वाद से मिलती है सद्कार्य की प्रेरणा : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर खाचरौद के ग्राम चिरोला फंटा में स्थित संत श्री निजानंद धाम आश्रम पहुंचे। आश्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूजा-अर्चना कर श्री श्री 1008 सचिदानंद महाराज की पुण्यतिथि पर पुष्पांजलि अर्पित की।

 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आश्रम स्थित शिव मंदिर में रुद्राभिषेक कर षोडशोपचार पूजन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संत श्री निजानंद जी महाराज के गादी पर पूजा-अर्चना कर आरती की। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने आश्रम में उपस्थित संतों का वन्दन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्‍होंने आश्रम में प्रसादी ग्रहण की। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन  यादव का श्री निजानंद धाम सेवा समिति द्वारा स्वागत सम्मान भी किया गया। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने आश्रम में सचिदानंद जी महाराज जी के शिष्य श्री विवेक महाराज जी से भी मुलाकात की।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों को रक्षाबंधन पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि संत श्री निजानंद आश्रम पर आकर दर्शन पूजा की है। यह स्थान देश, प्रदेश और मालवा में सनातन संस्कृति की ऐसी विभूतियों के अलौकिक आभा से परिचित कराता है। हम सब भी ऐसे संतों के आशीर्वाद से सद्कार्य की प्रेरणा पाते हैं। श्री निजानंद जी महाराज के पश्चातवर्ती स्वामी सचिदानंद जी महाराज ने इस स्थान को चेतना देते हुए पूरे क्षेत्र को चैतन्य किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम सभी अपने कामों के साथ अपने संतों की मूल भावना सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः सभी को लेकर चलने का जो कल्याण का भाव है, ये वेद वाक्य को अमरता के साथ धारण करते हुए हम सभी के कल्याण की कामना करें।

 

आश्रम में नागदा-खाचरौद क्षेत्र के विधायक डॉ. तेज बहादुर सिंह चौहान, श्री राजेश धाकड़, उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री रवि सोलंकी, श्री नरेश शर्मा सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि और अधिकारी भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को धार्मिक कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए खाचरौद हेलीपेड पर पहुंचे। हेलीपेड पर नागदा निवासी श्रीमती माया तितलिया एवं मनीषा अखिलेश शर्मा ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर राखी बांधकर शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आत्मीयता से बहनों का मुंह मीठा कराया और शुभकामनाएं दी।

 

 

 

 

सीआईए और रूसी एजेंसी के दो देशों में तख्तापलट के ‘सीक्रेट मिशन’ से खलबली..!

सीआईए और रूसी एजेंसी के दो देशों में तख्तापलट के ‘सीक्रेट मिशन’ से खलबली..!

putin and trump

ख़ुफ़िया एजेंसियां अपने राष्ट्र के दूरगामी हितों के लिए दोस्तों का भी बलिदान कर सकती है। ट्रम्प और पुतिन के दोस्ताना रिश्तों के बारे में दुनिया जानती है। ट्रम्प ईरान युद्द को जीतकर चुनाव जितना चाहते है वहीं पुतिन भी यूक्रेन को लेकर कुछ ऐसे ही मंसूबे पाले हुए है। यदि ईरान में तख्तापलट हो जाये तो ट्रम्प जीत जायेंगे और यदि यूक्रेन से जेलेंसकी की बिदाई हो जाये तो पुतिन जीत जायेंगे। लगता है ट्रम्प और पुतिन मिलकर एक दूसरे की मदद करने का मंसूबा बना चूके है। हाल ही में अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के निदेशक जॉन रैटक्लिफ का मॉस्को पहुंचना और रूसी खुफिया अधिकारियों से बातचीत करना इस बात का संकेत है कि दोनों महाशक्तियों के बीच कुछ खास पक रहा है।  

 

दरअसल अंतरराष्ट्रीय राजनीति में दोस्ती और दुश्मनी स्थायी नहीं होती, स्थायी होते हैं राष्ट्रीय हित। यही वजह है कि जो देश सार्वजनिक मंचों पर एक-दूसरे के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी दिखाई देते है, उनकी खुफिया एजेंसियां पर्दे के पीछे संवाद के रास्ते खुले रखती है। रैटक्लिफ ने मॉस्को में रूसी खुफिया अधिकारियों के साथ बातचीत की, इसकी रूस की विदेशी खुफिया सेवा एसवीआर के प्रमुख सर्गेई नारीश्किन ने पुष्टि की है। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में सीआईए प्रमुख की मॉस्को यात्रा का महत्व  बहुत अधिक है। दोनों देशो की खुफियां एजेंसियों के बीच संवाद का इतिहास भी पुराना है।

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका और सोवियत संघ वैचारिक रूप से एक-दूसरे से बिल्कुल अलग थे, लेकिन नाजी जर्मनी के खिलाफ दोनों एक ही मोर्चे पर खड़े थे। उस दौर में अमेरिकी ओएसएस और सोवियत खुफिया तंत्र के बीच संपर्क स्थापित हुआ। अमेरिकी खुफिया इतिहास से पता चलता है कि ओएसएस प्रमुख विलियम जे.डोनोवन ने 1943 में सोवियत अधिकारियों के साथ खुफिया सहयोग और सूचनाओं के आदान-प्रदान की संभावनाओं पर बातचीत की थी। कुछ ही वर्षों बाद यही दोनों देश शीत युद्ध में एक-दूसरे के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी बन गए। इतिहास का यह अध्याय बताता है कि खुफिया सहयोग विचारधारा या मित्रता पर नहीं, बल्कि तत्कालीन रणनीतिक जरूरतों पर आधारित होता है।

 

अमेरिका और रूस के बीच बाद के वर्षों में भी सीमित खुफिया सहयोग के उदाहरण मिलते है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोनों देशों ने कई बार एक-दूसरे को महत्वपूर्ण सूचनाएं दी है। दिसंबर 2017 में अमेरिका ने रूस को सेंट पीटर्सबर्ग में संभावित आतंकी हमले की जानकारी दी थी। रूसी सुरक्षा एजेंसियों ने इस सूचना के आधार पर कार्रवाई की और हमले की साजिश को विफल किया। इसके बाद राष्ट्रपति पुतिन ने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन कर अमेरिकी सहायता के लिए धन्यवाद दिया था। यह घटना बताती है कि गंभीर साझा खतरे के सामने कट्टर प्रतिद्वंद्वी भी खुफिया जानकारी साझा कर सकते हैं।


रैटक्लिफ की वर्तमान मॉस्को यात्रा को इसी व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखने की जरूरत है। यूक्रेन युद्ध ने अमेरिका और रूस को आमने-सामने खड़ा कर रखा है, लेकिन युद्ध को समाप्त करने की कोशिशों ने दोनों के बीच संवाद की आवश्यकता भी पैदा की है। राष्ट्रपति ट्रंप के लिए यूक्रेन युद्ध का अंत उनकी विदेश नीति की एक बड़ी उपलब्धि हो सकता है, जबकि पुतिन ऐसी समाप्ति चाहते हैं जिसमें रूस की रणनीतिक और क्षेत्रीय स्थिति कमजोर न हो। दोनों के हित पूरी तरह समान नहीं हैं, लेकिन युद्ध समाप्त करने की आवश्यकता दोनों पक्षों को बातचीत की मेज तक ला सकती है। ऐसे संवेदनशील दौर में खुफिया चैनल औपचारिक कूटनीति से अधिक उपयोगी साबित होते हैं, क्योंकि उनके माध्यम से बिना सार्वजनिक दबाव के संभावित विकल्पों पर बातचीत की जा सकती है।

 

इस पूरे घटनाक्रम में ईरान भी एक महत्वपूर्ण कड़ी है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव, रूस और ईरान के रणनीतिक संबंध तथा पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते समीकरणों ने मॉस्को और वॉशिंगटन दोनों की चिंताएं बढ़ाई है। यदि अमेरिका ईरान में निर्णायक रणनीतिक सफलता चाहता है, तो उसे रूस की भूमिका और उसके प्रभाव को भी ध्यान में रखना होगा। इसी तरह रूस के लिए भी यूक्रेन के अलावा पश्चिम एशिया में बदलते शक्ति-संतुलन को समझना आवश्यक है। इस मुलाकात में ईरान में तख्तापलट या यूक्रेन में राष्ट्रपति जेलेंस्की की सत्ता से विदाई पर बातचीत की संभावना से इसलिए इंकार नहीं किया जा सकता है क्योंकि इस पर ट्रम्प और पुतिन का राजनीतिक भविष्य टिका हुआ है। अंतरराष्ट्रीय राजनीति की वास्तविकता है कि बड़ी शक्तियां दूसरे देशों की राजनीतिक परिस्थितियों को अपने हितों के अनुरूप प्रभावित करने के विकल्पों पर विचार करती रहती है। सत्ता परिवर्तन, नेतृत्व परिवर्तन या राजनीतिक दबाव जैसी परिस्थितियां कई बार बड़े भू-राजनीतिक समीकरणों का हिस्सा बनती है। इसलिए रैटक्लिफ की यात्रा को सामान्य तो नहीं लिया जा सकता। 

 

इस घटनाक्रम का सबसे बड़ा संदेश यही है कि ट्रंप और पुतिन के बीच सार्वजनिक राजनीति से अलग एक रणनीतिक संवाद की संभावना बनी हुई है। दोनों नेता अपने-अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं और खुफिया एजेंसियां इसी रणनीतिक सोच का सबसे संवेदनशील हिस्सा होती है। वे मित्रता की रक्षा से अधिक अपने राष्ट्र के हितों की रक्षा करती है। आवश्यकता पड़ने पर प्रतिद्वंद्वी से बातचीत करना और अवसर मिलने पर सहयोगी से दूरी बनाना उनके लिए असामान्य नहीं है। इतिहास बताता है कि खुफिया एजेंसियों के बीच होने वाली बातचीत का वास्तविक महत्व अक्सर उसके तत्काल सार्वजनिक परिणामों से नहीं, बल्कि आने वाले महीनों में दिखाई देने वाले घटनाक्रमों से समझ में आता है। अमेरिका और रूस भले ही आज भी प्रतिद्वंद्वी हों, लेकिन राष्ट्रीय हित उन्हें एक-दूसरे से बात करने के लिए मजबूर कर रहे हैं। खुफिया एजेंसियों की यह खामोश कूटनीति आने वाले समय में यूक्रेन और ईरान ही नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक शक्ति-व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।

 

ईरान रूस का रणनीतिक साझेदार है, जबकि यूक्रेन अमेरिका और यूरोप की सुरक्षा-व्यवस्था का अहम मोर्चा। ऐसे में यदि दोनों देशों में सत्ता परिवर्तन होता है और नई सत्ताएं मॉस्को और वॉशिंगटन के अनुकूल बैठती है, तो यह पुतिन और ट्रंप दोनों के लिए असाधारण राजनीतिक जीत होगी। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में महाशक्तियां अपने हितों के लिए दूसरे देशों की राजनीतिक अस्थिरता और सत्ता परिवर्तन को प्रभावित करने से पीछे नहीं रही है। सत्ता परिवर्तन कई बार विचारधारा से नहीं, भू-राजनीतिक जरूरतों से संचालित होते हैं। ट्रंप और पुतिन भी शक्ति की इसी कठोर राजनीति के माहिर खिलाड़ी माने जाते है।

Tecno ने लॉन्च किया दमदार Spark Go 3 Pro, पानी, धूल और गिरने से नहीं होगा आसानी से खराब

Tecno ने भारत में Spark Go 3 Pro लॉन्च किया है। कंपनी का दावा है कि यह इस सेगमेंट का पहला स्मार्टफोन है जिसे IP69 ड्यूरेबिलिटी रेटिंग मिली है। बता दें कि यह नया बजट स्मार्टफोन उन यूजर्स के लिए बनाया गया है जिन्हें ऐसे डिवाइस की जरूरत है जो मुश्किल हालात झेल सके और तेज प्रेशर वाले पानी के जेट, धूल और गलती से गिरने जैसी स्थितियों से सुरक्षित रह सके।

कंपनी के मुताबिक, Spark Go 3 Pro को डिलीवरी एग्जीक्यूटिव, किसानों, छात्रों और प्रोफेशनल्स जैसे यूजर्स को ध्यान में रखकर बनाया गया है, जिन्हें रोजाना इस्तेमाल के लिए एक मजबूत स्मार्टफोन चाहिए, जिसमें जरूरी फीचर्स से कोई समझौता न करना पड़े।

कीमत और उपलब्धता

Tecno Spark Go 3 Pro भारत में 4 सितंबर, 2026 से रिटेल स्टोर, Amazon और Flipkart पर बिक्री के लिए उपलब्ध होगा। इसके 4GB RAM + 64GB स्टोरेज वाले वेरिएंट की कीमत ₹15,999 है, जबकि 4GB RAM + 128GB स्टोरेज वाले मॉडल की कीमत ₹16,999 है।

स्पेसिफिकेशन्स

Tecno Spark Go 3 Pro की सबसे बड़ी खासियत इसकी IP69-रेटेड बनावट है। कंपनी का कहना है कि यह तेज दबाव वाले पानी के जेट, धूल और गलती से गिरने पर सुरक्षा देती है, जिससे यह मुश्किल आउटडोर स्थितियों में काम करने वाले यूजर्स के लिए सही है।

इस स्मार्टफोन में 120Hz का डिस्प्ले है, जो आम 60Hz पैनल के मुकाबले ज्यादा स्मूद स्क्रॉलिंग, गेमिंग और एनिमेशन का अनुभव देता है। डिवाइस को पावर देने के लिए इसमें 5,200mAh की बैटरी है। Tecno का कहना है कि इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि एक बार चार्ज करने पर यह पूरे दिन चल सके।

इसके अलावा, क्लियर वॉइस कॉल के लिए फोन में AI वॉइसप्रिंट नॉइज कैंसिलेशन फीचर दिया गया है, जो बातचीत के दौरान बैकग्राउंड के शोर को कम करता है। इस डिवाइस में IR ब्लास्टर भी है, जिससे यूजर्स टेलीविजन और एयर कंडीशनर जैसे कम्पैटिबल घरेलू उपकरणों को सीधे स्मार्टफोन से कंट्रोल कर सकते हैं।

Tecno का कहना है कि Spark Go 3 Pro को मजबूती और भरोसे को ध्यान में रखकर बनाया गया है। यह उन ग्राहकों के लिए है जो किफायती कीमत पर मजबूत स्मार्टफोन का अनुभव चाहते हैं, साथ ही रोजाना के कामों और मनोरंजन के लिए मॉडर्न फीचर्स भी चाहते हैं।

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UP News: रक्षाबंधन पर सीएम योगी का बेटियों को तोहफा! बताया कब मिलेगी 50,000 छात्राओं को फ्री स्कूटी

UP News: रक्षाबंधन पर उत्तर प्रदेश की बेटियों के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा तोहफा देने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की है कि अक्टूबर-नवंबर में यूपी की 50,000 महिला अंडरग्रेजुएट छात्राओं को स्कूटी दिए जाएंगे। सीएम योगी शुक्रवार (28 अगस्त) को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित ‘लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा’ योजना के शुभारंभ कार्यक्रम में यह ऐलान किया। सीएम योगी ने कहा कि बेटी के जन्म से लेकर पढ़ाई तक और आगे भी सरकार हमेशा उसके साथ खड़ी है।

उन्होंने कहा, “हमने एक और व्यवस्था की है। हमारे लिए पहले ये काम बड़ा था कि रक्षाबंधन पर इस कार्यक्रम को करेंगे, अभी हम अक्टूबर या नवंबर में प्रदेश की 50,000 बेटियों को जो स्नातक की पढ़ाई कर रही हैं, एक स्कूटी उपलब्ध करवाने जा रहे हैं। 50,000 बेटियों को हम स्कूटी भी प्रदान करने जा रहे हैं…।”

सीएम योगी ने आगे कहा, “यूपी में पहले पहचान का संकट था आधी आबादी को न सुरक्षा थी, न सम्मान था, न स्वावलंबन था, तो हमारी आर्थिक स्थिति बदहाल होनी ही होनी थी। यूपी उस दौर को जब याद करता है, तो रोंगटे खड़े होते हैं। कहीं दंगे, कहीं कर्फ्यू, कहीं असुरक्षा, कहीं उपद्रव, हर योजना में बेईमानी और भ्रष्टाचार, लेकिन धर्म चक्र बदलता है। अगर उस समय उपद्रव था, तो पीएम मोदी के नेतृत्व में जब डबल इंजन की सरकार यूपी में आई, तो उपद्रव को उत्सव में बदल दिया गया है, कर्फ्यू और दंगा से मुक्त करके यूपी को चंगा बना दिया गया है।”

‘योजना का केंद्र बिंदु बेटी’

मुख्यमंत्री ने कहा, “अब हर योजना का केंद्र बिंदु बेटी है, आधी आबादी है। हमारा पहला संकल्प था उत्तर प्रदेश की बेटी को भयमुक्त वातावरण देंगे। उसे अपने विश्वास के दम पर खड़ा होने का पूरा अवसर देंगे और मुझे खुशी है कि हमने जो कहा था, बेटी को सुरक्षा की गारंटी देंगे, यह केवल एक फिजिकल सिक्योरिटी नहीं थी, यह मेंटल सिक्योरिटी भी थी, हेल्थ सिक्योरिटी भी थी। प्रदेश में लगभग साढ़े 12 करोड़ महिलाएं हैं। सरकार महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान, स्वावलंबन और नेतृत्व की यात्रा में भागीदार है। हमारी नीति है कि हर बेटी, बहन और मां को आत्मनिर्भर महसूस होना चाहिए।”

उन्होंने कहा, “डबल इंजन सरकार ने बेटी की यात्रा को जन्म से शिक्षा, सुरक्षा, रोजगार, आय और उसके सपनों की उड़ान तक एक इकोसिस्टम से जोड़ा है। महिलाएं चूल्हे से चेक, चेक से कारोबार और कारोबार से टेक्नोलॉजी तक पहुंच रही हैं। 2017 में प्रदेश में महिला पुलिसकर्मी करीब 10 हजार थीं, अब 45 हजार हो गई हैं। पुलिस भर्ती में 20 प्रतिशत महिलाओं की भर्ती अनिवार्य की गई है। 32 हजार पदों पर भर्ती चल रही है, जिसके बाद यह संख्या 50 हजार हो जाएगी।”

बुजुर्गों के लिए बस फ्री

सीएम योगीने कहा कि इसके बाद 60 साल से अधिक उम्र की सभी महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा की सुविधा मिलेगी। योगी ने कहा कि महिला स्वावलंबन और सम्मान की बात होने पर लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर का नाम श्रद्धा से लिया जाता है। उन्होंने कहा कि अहिल्याबाई साहस और स्वाभिमान की प्रतीक थीं, इसलिए योजना का नाम उनके नाम पर रखा गया है। एक बयान के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में लगभग साढ़े 12 करोड़ आधी आबादी है। सरकार महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान, स्वावलंबन एवं नेतृत्व की यात्रा में सहभागी है।

उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। सीएम ने कहा कि लखनऊ, कानपुर, आगरा, गाजियाबाद, मुरादाबाद, बरेली, प्रयागराज, अयोध्या, गोरखपुर, वाराणसी, झांसी सभी जनपदों में अहिल्याबाई होल्कर के नाम पर कामकाजी महिलाओं के लिए छात्रावास का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक हॉस्टल में 500 कामकाजी महिलाओं के मुफ्त रहने की व्यवस्था रहेगी।

महिला बीट पुलिस की तैनाती

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में पहली बार उत्तर प्रदेश में महिला बीट पुलिस की तैनाती हुई। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में 2017 में 10,000 महिला पुलिसकर्मी थीं, अब यह संख्या 45,000 हो गई है। योगी ने कहा कि सम्मान तब आता है, जब महिला के घर में शौचालय, बिजली, रसोई में धुआंमुक्त ईंधन, नल में जल और खाते में सीधे पैसा पहुंचे और विपत्ति में सरकार साथ खड़ी हो।

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उन्होंने आगे कहा, “हर घर शौचालय माताओं, बहनों की गरिमा का आधार था। ‘उज्ज्वला’ ने केवल धुएं से राहत नहीं दी। बल्कि फेफड़े खराब होने वाली बीमारियों से भी मुक्ति दी। पक्के घरों ने परिवारों को सुरक्षा दी तो जल जीवन मिशन ने समय व श्रम की दिशा में बड़ा बदलाव किया है। डीबीटी ने बिचौलियों को हटाकर सीधे लाभार्थियों के खाते में पैसा देना शुरू किया।”

कंधे पर रखकर दागो और दुश्मन खत्म! भारत आ रही है दुनिया की सबसे खतरनाक एंटी-टैंक मिसाइल Javelin, जानिए इसमें क्या है खास

भारत अपनी मिलिट्री ताकत और डिफेंस कैपिसिटी को और अधिक मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। भारत जल्द ही अमेरिका में बनी हुई दुनिया की सबसे खतरनाक और मॉडर्न एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम जैवेलिन (Javelin) को खरीदने की योजना बना रहा है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोरे ने शुक्रवार को इस बहुप्रतीक्षित सौदे की पुष्टि करते हुए कहा कि यह योजना भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रक्षा संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगी। यह सौदा न सिर्फ भारतीय सेना की इंफेंट्री की मारक क्षमता को बढ़ाएगा बल्कि दोनों देशों के बीच डिफेंस इंडस्ट्रियल को-प्रोडक्शन के नए दरवाजे भी खोलेगा।

$4.57 करोड़ का सौदा: पैकेज में 100 मिसाइल राउंड और 25 लॉन्च यूनिट्स शामिल

हमारी सहयोगी वेबसाइट सीएनबीसी टीवी 18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका और भारत के बीच इस महत्वाकांक्षी रक्षा सौदे की प्रक्रिया पहले ही आगे बढ़ चुकी है। अमेरिकी विदेश विभाग ने नवंबर 2025 में विदेशी सैन्य बिक्री कार्यक्रम के तहत भारत को जैवेलिन मिसाइल प्रणाली और उससे जुड़े उपकरणों की संभावित बिक्री को मंजूरी दे दी थी। इस प्रस्तावित रक्षा सौदे का कुल अनुमानित मूल्य लगभग 4.57 करोड़ डॉलर है।

इस सौदे में शामिल पैकेज के तहत भारत को 100 एफजीएम-148 जैवेलिन मिसाइल राउंड, एक फ्लाई-टू-बाय मिसाइल और 25 जैवेलिन लाइटवेट कमांड लॉन्च यूनिट्स या ब्लॉक 1 कमांड लॉन्च यूनिट्स मिलेंगी। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोरे के मुताबिक इस शुरुआती खरीद के बाद भविष्य में भारत और अमेरिका दोनों देशों में इस घातक मिसाइल प्रणाली के को-प्रोडक्शन की संभावनाओं पर भी काम कर सकते हैं। इससे भारत के स्वदेशी रक्षा निर्माण को भी बल मिलेगा।

क्या है दागो और भूल जाओ तकनीक? जानिए जैवेलिन मिसाइल की खासियतें

जैवेलिन दुनिया की सबसे भरोसेमंद और घातक मध्यम दूरी की, कंधे से रखकर दागी जाने वाली एंटी-टैंक मिसाइल प्रणाली है। इसे मुख्य रूप से पैदल सेना, स्काउट्स और कॉम्बैट इंजीनियर्स के इस्तेमाल के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह फायर एंड फॉरगेट यानी दागो और भूल जाओ तकनीक पर काम करती है। इसका मतलब है कि एक बार जब सैनिक मिसाइल को अपने लक्ष्य पर लॉक करके दाग देता है तो मिसाइल खुद-ब-खुद अपने टारगेट को ढूंढकर उसे तबाह कर देती है और सैनिक को तुरंत अपनी लोकेशन बदलने का समय मिल जाता है।

यह मिसाइल दुश्मन के भारी बख्तरबंद टैंकों और बंकरों को आसानी से नेस्तनाबूद करने में सक्षम है। कंधे से दागे जाने के अलावा इस आधुनिक सिस्टम को जरूरत के मुताबिक सैन्य वाहनों, विमानों और पानी के जहाजों और नौकाओं पर भी तैनात और माउंट किया जा सकता है।

किन कंपनियों ने बनाया है यह सिस्टम और भारत के लिए क्यों है अहम

जैवेलिन मिसाइल सिस्टम को जैवेलिन जॉइंट वेंचर ने बनाया है। ये अमेरिका की दो प्रमुख रक्षा क्षेत्र की दिग्गजों आरटीएक्स और लॉकहीड मार्टिन के बीच एक साझेदारी है। अमेरिका सेना और दुनिया के कई और दूसरे देश लंबे समय से इस मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हैं।

भारत और अमेरिका जिस तरह से अपने रक्षा-औद्योगिक सहयोग का विस्तार कर रहे हैं, उस दिशा में यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है। सीमावर्ती इलाकों और दुर्गम पहाड़ियों पर पैदल सेना को बख्तरबंद खतरों से निपटने के लिए एक त्वरित और अचूक हथियार की जरूरत रहती है। ऐसे में जैवेलिन का भारतीय सेना में शामिल होना न सिर्फ सेना की जमीनी मारक क्षमता में काफी इजाफा करेगा बल्कि भारत-अमेरिका रक्षा रणनीतिक संबंधों को भी एक नया आयाम देगा।

All you need to know about the MG Hector Tomahawk EV and PHEV

All you need to know about the MG Hector Tomahawk EV and PHEV
All you need to know about the MG Hector Tomahawk EV and PHEV

MG launched the Hector Tomahawk in India in both all-electric (EV) and plug-in hybrid (PHEV) versions, with prices starting from Rs 19.50 lakh and Rs 25.70 lakh, respectively. Both models are offered with a lot of new-age technology and have piqued the interest of enthusiasts. Here’s everything you need to know about the MG Hector Tomahawk EV and Hector Tomahawk PHEV. 

1. What are the exterior differences between the EV and PHEV?

Both versions get different grilles, front bumpers, and alloy wheels

EV
PHEV
 

Both the Hector Tomahawk’s EV and PHEV versions have some design differences. While the EV gets a blanked-off gloss-black grille, the PHEV gets a functional grille with chrome inserts and black trims underneath the headlights. The front bumper design is also different, with the PHEV getting a silver bullbar-like element in the centre that the EV misses. The headlights and illuminated MG logo are, however, shared. 

Not much is different in the side profile, except for the 18-inch alloy designs and red callipers on the top-spec Hector Tomahawk PHEV. If you opt for a dual-tone shade, the EV will have a black roof, while the PHEV will have a white roof. The rear design, however, is identical for both versions of the SUV.

2. What are the interior differences between the EV and PHEV?

Save for a luggage cover and different cabin themes, everything else is the same

MG Hector Tomahawk EV gets a beige and black cabin theme.

Save for a rolling luggage shade on the 5-seater variants of the EV, and a different cabin theme – brown and black on the EV and a darker brown and black on the PHEV – there is no visible difference. Everything else is the same, including the feature suite: a 15.6-inch touchscreen infotainment system, an 8.8-inch digital driver’s display, a 10-speaker Infinity sound system, a panoramic sunroof, powered and ventilated front seats with memory function for the driver’s seat, and a 50W fast wireless charger. 

MG Hector Tomahawk PHEV gets a brown and black cabin theme.

The safety suite is also identical in both Hector Tomahawk versions, which includes 6 airbags, a 360-degree camera with an under-bonnet view, Level 2 advanced driver assistance systems (ADAS) and a tyre pressure monitoring system (TPMS). 

3. What is the boot space on the MG Hector Tomahawk EV and PHEV?

EV and PHEV versions offer up to 610 litres and 192 litres of boot space, respectively

5-seater MG Hector Tomahawk EV’s boot space. 

The MG Hector Tomahawk EV is offered in either a 5-seater or a 7-seater version. The 5-seater offers 610-litre boot space, with all rows up, which can be expanded to 1,053 litres by folding down the rear row. The 7-seater version offers a 192-litre boot space with all rows up,  and 528 litres when the third row is folded. 

The PHEV, offered only as a 7-seater, offers 192-litre boot space like the EV’s 7-seater version, expandable to 528 litres by folding the third row. Neither the EV nor the PHEV version of the Hector Tomahawk are offered with a frunk (storage space under the bonnet). 

4. What are the powertrain specifications of the MG Hector Tomahawk PHEV and EV?

PHEV gets a 1.5L engine and 20.5kWh battery; EV offers a 69.2kWh battery pack

The MG Hector Tomahawk PHEV gets a 1.5-litre naturally aspirated petrol engine and a 20.5kWh battery pack, offering a combined output of 198hp and 230Nm. The front-wheel-drive (FWD) SUV has an all-electric range of around 115km and a total range including the petrol engine of around 1,100km. 

The MG Hector Tomahawk EV, on the other hand, gets a 69.2kWh battery pack, mated to a front-axle-mounted electric motor producing 204hp and 310Nm. It has a claimed range of 517km.  

5. Can the Hector Tomahawk PHEV be charged at a public EV charging station?

It supports 25kW DC fast charging

Yes, being a plug-in hybrid (PHEV), the MG Hector Tomahawk PHEV supports 25kW DC fast charging. This can replenish the battery from 30 to 80 percent in 35 minutes, like a typical EV. MG is also offering it with a 3.3kW home charger, which can recharge the battery pack from 10 to 100 percent in 7.5 hours.

6. Are the MG Tomahawk EV and PHEV more affordable with BaaS?

BaaS reduces the EV’s and PHEV’s initial prices by up to Rs 6.01 lakh and 3.91 lakh, respectively 

MG Hector Tomahawk EV, PHEV BaaS vs non-BaaS prices (in Rs, lakh)

 

Without BaaS

With BaaS

Initial cost difference

EV

19.50 to 23.50

13.99 to 17.49*

Up to 6.01

PHEV

25.70 to 27.80

21.79 to 23.89^

3.91

*Battery subscription fee is Rs 4.9 per km per month

^Asks for a battery subscription fee of Rs 3.2 per km per month

The BaaS (Battery-as-a-Service) option reduces the upfront price of the MG Hector Tomahawk EV by Rs 6.01 lakh and the PHEV by Rs 3.91 lakh. However, you then pay a battery rental fee for every kilometre you drive: Rs 4.90 per km for the EV and Rs 3.20 per km for the PHEV. At these rates, the upfront savings from BaaS are effectively used up after around 1.22 lakh km. The break-even point is 1,22,653 km for the EV and 1,22,187 km for the PHEV.

In simple terms, if you expect to drive less than 1.22 lakh km over the entire ownership period, BaaS could be the more affordable option because of its lower initial cost. However, if you plan to drive more than 1.22 lakh km, buying the Hector Tomahawk with the battery included is likely to save you more money in the long run.

There is also another factor to consider. Under the BaaS plan, you do not own the battery, so your long-term costs depend on the rental agreement. If MG increases the per-kilometre fee or changes the contract in the future, your running costs could also increase. So, while BaaS would be more affordable for most buyers, purchasing the vehicle with the battery included may offer greater certainty in running cost calculations.

Prices are ex-showroom, India.

Stock in Focus: इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को ₹258 करोड़ के नए ऑर्डर, सोलर और रेलवे सेक्टर से मिला बड़ा कारोबार

Stock in Focus: इंजीनियरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की KP Green Engineering को कुल ₹258.02 करोड़ के नए ऑर्डर मिले हैं। ये ऑर्डर सोलर, रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर, प्री इंजीनियर्ड बिल्डिंग और पावर ट्रांसमिशन कारोबार से जुड़े हैं। कंपनी ने शुक्रवार, 28 अगस्त को एक्सचेंज फाइलिंग में इसकी जानकारी दी।

सोलर से मिले ₹114.53 करोड़ के ऑर्डर

नए ऑर्डर्स में सबसे बड़ा हिस्सा सोलर का है। कंपनी को ₹114.53 करोड़ के ऑर्डर मिले हैं। इनमें फिक्स्ड टिल्ट मॉड्यूल माउंटिंग स्ट्रक्चर शामिल हैं। ट्रैकर टाइप मॉड्यूल माउंटिंग स्ट्रक्चर भी हैं। इसके अलावा दूसरे स्ट्रक्चरल कंपोनेंट्स की सप्लाई भी होगी।

रेलवे के लिए ₹92.38 करोड़ का काम

कंपनी को ₹92.38 करोड़ के क्रैश बैरियर के ऑर्डर मिले हैं। इनमें रेलवे ट्रैक फेंसिंग से जुड़े काम भी शामिल हैं।

सोलर और क्रैश बैरियर के ऑर्डर मिलाकर करीब ₹207 करोड़ के हैं। यानी नए ऑर्डर्स का करीब 80% कारोबार इन्हीं दो सेगमेंट से आया है।

बिल्डिंग और पावर ट्रांसमिशन से भी ऑर्डर

KP Green Engineering को ₹33.76 करोड़ के प्री इंजीनियर्ड बिल्डिंग स्ट्रक्चर के ऑर्डर मिले हैं। पावर ट्रांसमिशन कारोबार से कंपनी को ₹15.42 करोड़ के ऑर्डर मिले।

इसके अलावा पोल और हाईमास्ट प्रोडक्ट्स के लिए ₹0.97 करोड़ के ऑर्डर मिले हैं। 220 kV, 66 kV और 33 kV नेटवर्क में इस्तेमाल होने वाले आइसोलेटर्स के लिए ₹0.96 करोड़ का ऑर्डर मिला है।

FY27 में अब तक ₹497.64 करोड़ के ऑर्डर

नए ऑर्डर के बाद चालू वित्त वर्ष में कंपनी का कुल कन्फर्म्ड ऑर्डर इनटेक ₹497.64 करोड़ हो गया है।

कंपनी के मुताबिक, इन ऑर्डर्स से कैपेसिटी का इस्तेमाल बढ़ेगा। इससे आने वाले समय के रेवेन्यू की विजिबिलिटी भी बेहतर होगी। हालांकि, कंपनी ने अलग-अलग ऑर्डर के ग्राहकों और उन्हें पूरा करने की समयसीमा नहीं बताई है।

KP Green के शेयरों का हाल

KP Green Engineering का शेयर शुक्रवार को 0.33% गिरकर ₹260.05 पर बंद हुआ। पिछले 1 महीने में स्टॉक 20.67% गिरा है। वहीं, 1 साल में यह 53% क्रैश हो चुका है। कंपनी का मार्केट कैप

1.31 हजार करोड़ रुपये है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Reforms in Public Examinations: सरकार ने शुरू की सार्वजनिक परीक्षा व्यवस्था में बदलाव की तैयारी, जनता से मांगा सुझाव

Reforms in Public Examinations: हाल के महीनों में आयोजित बड़ी और प्रमुख परीक्षाओं में सामने आई गड़बड़ियों के बीच सरकार देश की सार्वजनिक परीक्षा व्यवस्था में व्यापक पैमाने पर बदलाव की तैयारी कर रही है। इसके तहत सरकार ने छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और अन्य हितधारकों से सुझाव मांगे हैं। देश की परीक्षा व्यवस्था में बदलाव पर आम जनता 13 सितंबर 2026 तक सुझाव दे सकती है। इसके लिए पहले ही नंदन नीलकेणी की अगुवाई में एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स (HPTF) बनाई गई है। यह फोर्स नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित सार्वजनिक परीक्षा समेत उसके आयोजन, सुरक्षा, डिजाइन और गवर्नेंस में बड़े सुधारों की जांच करेगी और सुझाव देगी।

टास्क फोर्स संस्थागत व्यवस्था और प्रक्रिया को मजबूत करने, परीक्षा की शुचिता और सुरक्षा में सुधार करने, सही तकनीक का इस्तेमाल करने और एग्जामिनेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने के तरीकों की जांच कर रही है। यह परीक्षा प्रक्रिया के दौरान सुगमता और समावेश को बढ़ावा देने और छात्रों की सुरक्षा के तरीकों पर भी गौर कर रही है। इसका मकसद एक ऐसी सार्वजनिक परीक्षा व्यवस्था बनाना है जो मजबूत, सुरक्षित, पारदर्शी, बराबर और भविष्य के लिए तैयार हो।

कौन सुझाव दे सकता है?

एचपीटीएफ ने छात्रों और उम्मीदवारों, अभिभावकों, शिक्षकों और शैक्षिक संस्थानों, परीक्षा आयोजित करने वाली और टेस्ट इंडेंट करने वाली संस्थाओं, विषय विशेषज्ञों, तकनीकी पेशेवरों, औद्योगिक संस्थानों और सिविल सोसाइटी संस्थानों सहित कई स्टेकहोल्डर्स से सुझाव मांगे हैं। दूसरे इच्छुक स्टेकहोल्डर भी अपने इनपुट दे सकते हैं।

इन मुख्य बिंदुओं पर विचार किया जा रहा है

सुझावों में सार्वजनिक परीक्षा का आयोजन और सुरक्षा, परीक्षा तंत्र का प्रारूप और मूल्यांकन का तरीका, गवर्नेंस और जवाबदेही, और संस्थागत व्यवस्था शामिल हो सकते हैं।स्टेकहोल्डर परीक्षा में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने, उनका पता लगाने और उन्हें ठीक करने के साथ-साथ सुरक्षित कंप्यूटर-बेस्ड टेस्टिंग सहित टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर भी इनपुट दे सकते हैं।

टास्क फोर्स परीक्षा व्यवस्था का ढांचा बनाने और उसे बढ़ाने और सोशल, इकोनॉमिक, रीजनल और भाषाई ग्रुप्स तक पहुंच को बेहतर बनाने के लिए एक समावेशी परीक्षा फ्रेमवर्क विकसित करने पर भी सुझाव मांग रही है। दूसरे बिंदुओं में पारदर्शिता, शिकायत का समाधान, स्टेकहोल्डर कम्युनिकेशन और परीक्षा प्रक्रिया के दौरान छात्रों की भलाई को बढ़ावा देने के उपाय शामिल हैं। स्टेकहोल्डर कोई और उपाय भी सुझा सकते हैं जो परीक्षा व्यवस्था में वैल्यू ऐड कर सके।

सुझाव देने की आखिरी तारीख

एचपीटीएफ ने स्टेकहोल्डर्स से 13 सितंबर, 2026 तक अपने सुझाव देने को कहा है। सुझाव आधिकारिक वेबसाइट, फोन, WhatsApp या ईमेल से इंग्लिश, हिंदी और दूसरी रीजनल भाषाओं में दिए जा सकते हैं।

वेबसाइट: examreforms-taskforce.dopt.gov.in

फोन: 1800-180-4747

WhatsApp: “hptf” लिखकर +91 78270 42830 पर भेजें।

ईमेल: ExamReformsTaskforce@dopt.gov.in

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